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  • हार्ट ट्रीटमेंट में नई उपलब्धि बुजुर्ग मरीज को लगाया 25 साल तक चलने वाला आधुनिक हार्ट वाल्व जटिल प्रक्रिया रही सफल

    हार्ट ट्रीटमेंट में नई उपलब्धि बुजुर्ग मरीज को लगाया 25 साल तक चलने वाला आधुनिक हार्ट वाल्व जटिल प्रक्रिया रही सफल


    नई दिल्ली। हृदय रोगों के उपचार में आधुनिक चिकित्सा तकनीक ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। टेंडरपाम हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग ने 78 वर्षीय एक बुजुर्ग मरीज पर अत्यंत जटिल हृदय प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए उन्हें नई जिंदगी देने का दावा किया है। मरीज को गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं के साथ एक ऐसा अत्याधुनिक हार्ट वाल्व लगाया गया है जिसकी अनुमानित कार्यक्षमता लगभग 25 वर्षों तक बनी रह सकती है।

    अस्पताल के अनुसार मरीज मधुमेह कोरोनरी आर्टरी डिजीज सौम्य प्रोस्टेट वृद्धि पेसमेकर और गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस जैसी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे। इन बीमारियों के कारण पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी का जोखिम काफी अधिक था। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने कम जोखिम वाली आधुनिक तकनीक अपनाते हुए एक ही सत्र में ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन और जटिल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी करने का निर्णय लिया।

    प्रक्रिया के दौरान मरीज में एडवर्ड सैपियन अल्ट्रा रेसिलिया नाम का अत्याधुनिक ट्रांसकैथेटर हार्ट वाल्व प्रत्यारोपित किया गया। इस वाल्व की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशेष रेसिलिया टिश्यू है जो सामान्य बायोलॉजिकल वाल्व की तुलना में अधिक समय तक टिकाऊ माना जाता है। उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर इसकी अनुमानित आयु लगभग 25 वर्ष बताई जाती है। इसी कारण इसे सरल भाषा में पूरी जिंदगी के लिए एक वाल्व के रूप में भी प्रचारित किया जा रहा है।

    इलाज के दौरान की गई कोरोनरी एंजियोग्राफी में मरीज की हृदय धमनियों में गंभीर कैल्सीफाइड ब्लॉकेज का पता चला। यह स्थिति सामान्य एंजियोप्लास्टी से उपचार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। डॉक्टरों ने आधुनिक ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी तकनीक की मदद से धमनियों में जमा कैल्शियम को हटाया और इंट्रावास्कुलर लिथोट्रिप्सी तकनीक का उपयोग कर ब्लॉकेज को खोला। इसके बाद मुख्य धमनी एलएडी में दो स्टेंट सफलतापूर्वक लगाए गए।

    अस्पताल के अनुसार एक ही सत्र में दोनों जटिल प्रक्रियाएं पूरी करने से मरीज का कुल जोखिम कम हुआ और उपचार अधिक प्रभावी रहा। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर रही तथा उन्हें केवल तीन दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी तकनीकों के कारण अब ऐसे बुजुर्ग और उच्च जोखिम वाले मरीजों का भी सफल उपचार संभव हो रहा है जिनके लिए पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी सुरक्षित विकल्प नहीं मानी जाती। अस्पताल ने इस उपलब्धि को उत्तर प्रदेश में अपनी तरह की शुरुआती जटिल प्रक्रियाओं में से एक बताया है।

    हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी भी हार्ट वाल्व की वास्तविक आयु मरीज की स्वास्थ्य स्थिति जीवनशैली संक्रमण के जोखिम और नियमित चिकित्सकीय देखभाल जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है। इसलिए हर मरीज के लिए उपचार और परिणाम अलग हो सकते हैं।

  • 1971 के नायक के साथ हुआ था बड़ा अन्याय वर्षों तक मिली आधी पेंशन फिर राष्ट्रपति कलाम ने दिलाया पूरा सम्मान

    1971 के नायक के साथ हुआ था बड़ा अन्याय वर्षों तक मिली आधी पेंशन फिर राष्ट्रपति कलाम ने दिलाया पूरा सम्मान


    नई दिल्ली। भारतीय सेना के इतिहास में फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का नाम अदम्य साहस दूरदर्शी नेतृत्व और ऐतिहासिक सैन्य रणनीति के लिए हमेशा याद किया जाएगा। वर्ष 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने केवल 13 दिनों में ऐसी निर्णायक जीत हासिल की जिसने दक्षिण एशिया का भूगोल ही बदल दिया और बांग्लादेश के रूप में एक नए राष्ट्र का जन्म हुआ। लेकिन देश को इतनी बड़ी जीत दिलाने वाले इस महान सैन्य अधिकारी को अपने जीवन के अंतिम वर्षों में लंबे समय तक पूरा वित्तीय अधिकार नहीं मिल पाया।

    3 अप्रैल 1914 को अमृतसर में एक पारसी परिवार में जन्मे सैम होर्मूसजी फ्रैमजी जमशेदजी मानेकशॉ के पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर बनें लेकिन उन्होंने सैन्य जीवन को चुना और 1932 में भारतीय सैन्य अकादमी के पहले बैच में शामिल हो गए। आगे चलकर उन्होंने अपने नेतृत्व और साहस के दम पर भारतीय सेना में सर्वोच्च सम्मान हासिल किया। गोरखा सैनिकों ने उन्हें सम्मानपूर्वक सैम बहादुर नाम दिया जो आज भी उनकी पहचान बना हुआ है।

    1971 के युद्ध से पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पूर्वी पाकिस्तान की स्थिति को देखते हुए तत्काल सैन्य कार्रवाई का सुझाव दिया था लेकिन सैम मानेकशॉ ने मौसम और सैन्य तैयारियों का हवाला देते हुए कुछ महीनों का समय मांगा। उन्होंने भरोसा दिया कि पूरी तैयारी के बाद सफलता निश्चित होगी। उनकी रणनीति पूरी तरह सफल साबित हुई और 3 दिसंबर 1971 को युद्ध शुरू होने के बाद भारतीय सेना ने तेजी से अभियान चलाकर ढाका को चारों ओर से घेर लिया। आखिरकार पाकिस्तान के लगभग 90 हजार सैनिकों ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया और बांग्लादेश का गठन हुआ।

    सैन्य सेवा से 15 जनवरी 1973 को सेवानिवृत्त होने के बाद भी फील्ड मार्शल का पद आजीवन माना जाता है। इस पद पर आसीन अधिकारी को पूर्ण वेतन और सभी सुविधाएं मिलने का अधिकार होता है। हालांकि प्रशासनिक और नौकरशाही कारणों से सैम मानेकशॉ को लंबे समय तक केवल आधी पेंशन ही मिलती रही। यह स्थिति कई वर्षों तक बनी रही और उनका बकाया भुगतान लंबित रहा।

    बाद में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। उनके प्रयासों के बाद अप्रैल 2007 में तत्कालीन रक्षा सचिव शेखर दत्त अस्पताल पहुंचे और सैम मानेकशॉ को 1.16 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान सौंपा। यह केवल एक आर्थिक भुगतान नहीं बल्कि देश की ओर से अपने महान सैनिक को दिया गया सम्मान भी था।

    27 जून 2008 को तमिलनाडु के वेलिंगटन स्थित सैन्य अस्पताल में फेफड़ों के संक्रमण के कारण 94 वर्ष की आयु में सैम मानेकशॉ का निधन हो गया। उन्होंने अपने जीवन से यह साबित किया कि नेतृत्व केवल युद्ध जीतने का नाम नहीं बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने का साहस भी होता है। आज भी भारतीय सेना में उनकी रणनीति नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण प्रेरणा का स्रोत माने जाते हैं।

  • NOTTO का बड़ा फैसला किडनी ट्रांसप्लांट अस्पतालों को वेबसाइट पर बताने होंगे सफलता दर और ग्राफ्ट फेलियर के आंकड़े

    NOTTO का बड़ा फैसला किडनी ट्रांसप्लांट अस्पतालों को वेबसाइट पर बताने होंगे सफलता दर और ग्राफ्ट फेलियर के आंकड़े


    नई दिल्ली। देश में किडनी ट्रांसप्लांट प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले सभी अस्पतालों को अपने ट्रांसप्लांट के नतीजों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इसके तहत मरीजों के जीवित रहने की दर मौत के मामले ग्राफ्ट फेलियर और अन्य दीर्घकालिक परिणामों का डेटा अस्पतालों की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा ताकि मरीज और उनके परिजन सही जानकारी के आधार पर अस्पताल का चयन कर सकें।

    नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन यानी NOTTO ने देशभर के ट्रांसप्लांट सेंटरों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। यह फैसला ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और मरीजों को बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे पहले मरीजों को किसी अस्पताल की सफलता दर या लंबे समय के परिणामों की जानकारी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती थी।

    NOTTO के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि प्रत्येक ट्रांसप्लांट अस्पताल अपनी वेबसाइट पर ट्रांसप्लांट के बाद के परिणाम प्रमुखता से प्रदर्शित करे। साथ ही सभी अस्पतालों को राष्ट्रीय ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट रजिस्ट्री में समय पर और पूर्ण फॉलोअप डेटा भी जमा करना होगा।

    इस पहल के पीछे संसद में उठाई गई चिंता भी अहम वजह रही। भाजपा सांसद कैप्टन बृजेश चौटा ने ट्रांसप्लांट के दीर्घकालिक परिणामों में पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि आमतौर पर केवल सफल ट्रांसप्लांट की चर्चा होती है जबकि ग्राफ्ट फेलियर जटिलताओं और ट्रांसप्लांट के बाद होने वाली मौतों के आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में मरीजों के लिए सही निर्णय लेना मुश्किल हो जाता है।

    नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों को मरीज और उनके परिजनों से सहमति लेने से पहले पूरी प्रक्रिया संभावित जोखिम और संभावित परिणामों की स्पष्ट जानकारी देना भी अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीज पूरी जानकारी के साथ उपचार का फैसला लें।

    दिल्ली के एक वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अनुपम रॉय का मानना है कि ट्रांसप्लांट परिणामों को सार्वजनिक करना पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन आंकड़ों को मरीजों की बीमारी की गंभीरता और जोखिम के स्तर को ध्यान में रखकर ही समझना चाहिए क्योंकि सभी मामलों की परिस्थितियां समान नहीं होतीं।

    फिलहाल देश के 824 ट्रांसप्लांट सेंटर राष्ट्रीय ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट रजिस्ट्री से जुड़े हुए हैं। इन सभी केंद्रों के लिए ट्रांसप्लांट और फॉलोअप से संबंधित जानकारी निर्धारित लॉगिन के माध्यम से दर्ज करना अनिवार्य है। NOTTO का मानना है कि इससे ट्रांसप्लांट परिणामों की निगरानी मजबूत होगी डेटा की विश्वसनीयता बढ़ेगी और भविष्य में स्वास्थ्य नीतियां तैयार करने में भी मदद मिलेगी।

    निर्धारित रिपोर्टिंग प्रणाली के तहत अस्पतालों को डिस्चार्ज के समय तथा छह महीने एक वर्ष तीन वर्ष और पांच वर्ष बाद मरीजों की स्थिति से संबंधित जानकारी देनी होगी। इसमें जीवित मरीजों की संख्या मौत के मामले ग्राफ्ट फेलियर और फॉलोअप से बाहर हुए मरीजों का पूरा विवरण शामिल रहेगा। इस नई व्यवस्था से किडनी ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने के साथ मरीजों का भरोसा भी मजबूत होने की उम्मीद है।

  • पहले ही दिन छाई वेलकम टू द जंगल अक्षय कुमार की नई फिल्म ने ओपनिंग में मारी बाजी फिर भी नहीं थमी कॉकटेल 2 और मैं वापस आऊंगा की रफ्तार

    पहले ही दिन छाई वेलकम टू द जंगल अक्षय कुमार की नई फिल्म ने ओपनिंग में मारी बाजी फिर भी नहीं थमी कॉकटेल 2 और मैं वापस आऊंगा की रफ्तार


    नई दिल्ली। बॉक्स ऑफिस पर इस सप्ताह तीन फिल्मों के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। अक्षय कुमार की मल्टीस्टारर फिल्म वेलकम टू द जंगल ने रिलीज के पहले ही दिन शानदार कमाई कर अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करा दी है। फिल्म की जोरदार ओपनिंग ने अक्षय कुमार की हालिया रिलीज फिल्मों के शुरुआती रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि नई रिलीज के बावजूद कॉकटेल 2 और मैं वापस आऊंगा जैसी फिल्मों की कमाई पर बड़ा असर दिखाई नहीं दिया है और दोनों फिल्में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।

    ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार वेलकम टू द जंगल ने रिलीज से पहले हुए पेड प्रीव्यू से 3.75 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इसके बाद पहले दिन फिल्म ने करीब 15 करोड़ रुपये की नेट कमाई दर्ज की। इस तरह फिल्म की कुल ओपनिंग 18.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन 22.50 करोड़ रुपये रहा जबकि दुनियाभर में पहले दिन इसका ग्रॉस कलेक्शन करीब 29 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

    यह ओपनिंग अक्षय कुमार की पिछली फिल्मों भूत बंगला और जॉली एलएलबी 3 से बेहतर मानी जा रही है। फिल्म को दिनभर दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला और शाम के शो में ऑक्यूपेंसी में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली। अब फिल्म की असली परीक्षा वीक डेज में होगी जहां यह तय होगा कि दर्शकों का उत्साह कितने समय तक बना रहता है।

    वेलकम फ्रेंचाइजी की इस नई फिल्म में अक्षय कुमार के साथ सुनील शेट्टी दिशा पाटनी जैकलीन फर्नांडीस रवीना टंडन लारा दत्ता परेश रावल अरशद वारसी तुषार कपूर श्रेयस तलपड़े आफताब शिवदासानी और जैकी श्रॉफ जैसे कई बड़े कलाकार नजर आ रहे हैं। बड़े स्टारकास्ट और कॉमेडी एंटरटेनमेंट के कारण फिल्म को देशभर में बड़ी संख्या में स्क्रीन और प्राइम टाइम शो मिले हैं।

    दूसरी ओर शाहिद कपूर कृति सेनन और रश्मिका मंदाना अभिनीत कॉकटेल 2 भी मजबूत प्रदर्शन कर रही है। पहले सप्ताह में शानदार कमाई करने के बाद दूसरे शुक्रवार को भी फिल्म ने लगभग 4.25 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ घरेलू बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की कुल नेट कमाई करीब 74.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गई जबकि दुनियाभर में इसका ग्रॉस कलेक्शन 114.67 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। फिल्म को मल्टीप्लेक्स दर्शकों का लगातार अच्छा समर्थन मिल रहा है और रोमांटिक ड्रामा पसंद करने वाले दर्शकों के बीच इसकी लोकप्रियता बनी हुई है।

    इधर इम्तियाज अली की फिल्म मैं वापस आऊंगा भी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। तीसरे सप्ताह में प्रवेश करने के बाद भी फिल्म की कमाई स्थिर बनी हुई है। रिलीज के पंद्रहवें दिन फिल्म ने लगभग 2.85 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन 44.85 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है जबकि दुनियाभर में इसकी कमाई 58.65 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। खास बात यह है कि नई रिलीज के बावजूद फिल्म पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा और सकारात्मक वर्ड ऑफ माउथ के दम पर यह लगातार दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में सफल रही है।

    फिलहाल बॉक्स ऑफिस पर वेलकम टू द जंगल ने शानदार शुरुआत जरूर की है लेकिन कॉकटेल 2 और मैं वापस आऊंगा की मजबूत पकड़ ने यह साफ कर दिया है कि दर्शकों के पास इस समय अलग अलग शैली की फिल्मों के कई विकल्प मौजूद हैं। आने वाला वीकेंड तीनों फिल्मों के लिए बेहद अहम साबित होगा।

  • 1 जुलाई से बदलेंगे ये 5 बड़े नियम, आम जनता की जेब और रोजमर्रा पर पड़ेगा असर

    1 जुलाई से बदलेंगे ये 5 बड़े नियम, आम जनता की जेब और रोजमर्रा पर पड़ेगा असर


    नई दिल्‍ली । जून का महीना (June Month) खत्म होने में अब चंद दिन बाकी हैं। हर बार की तरह इस बार भी नए महीने यानी जुलाई की शुरुआत कई बड़े बदलावों (Rule Change) के साथ होगी। इन बदलावों का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और जेब दोनों पर पड़ सकता है। आइए जानते हैं पहली तारीख से होने वाले 5 बड़े बदलावों के बारे में।

    एलपीजी सिलेंडर 
    हर महीने की पहली तारीख को ऑयल मार्केटिंग कंपनियां एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। इसलिए 1 जुलाई को भी घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में बदलाव देखने को मिल सकता है। हाल के दिनों में अमेरिका-ईरान तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर एलपीजी कीमतों पर भी देखने को मिला है। 1 जून को 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 53.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 3,113.50 रुपये हो गई थी। वहीं 5 किलो वाले सिलेंडर के दाम भी बढ़े थे। हालांकि, 14.2 किलो वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया था।

    हवाई यात्रा
    हर महीने ऑयल कंपनियां एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी संशोधन करती हैं। अगर ATF महंगा होता है तो एयरलाइंस की लागत बढ़ती है, जिसका असर यात्रियों के टिकट पर पड़ सकता है। वहीं यदि इसकी कीमत घटती है तो हवाई यात्रा का खर्च कम होने की संभावना रहती है। इसलिए 1 जुलाई को ATF की नई कीमतें भी यात्रियों के लिए अहम रहेंगी।

    रीगैलिया गोल्ड कार्ड 
    अगर आप HDFC Bank Regalia Gold Credit Card इस्तेमाल करते हैं तो 1 जुलाई से आपके लिए नया नियम लागू होगा। बैंक के नए नियम के मुताबिक, घरेलू एयरपोर्ट लाउंज की फ्री सुविधा जारी रखने के लिए कार्डधारकों को पिछली तिमाही में कम से कम 60,000 रुपये खर्च करना होगा। यदि यह खर्च पूरा नहीं किया गया, तो अगली तिमाही में मुफ्त एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस का लाभ नहीं मिलेगा।

    ईमेल अपडेट
    1 जुलाई से आधार कार्ड धारकों के लिए भी एक राहत की खबर है। UIDAI ने घोषणा की है कि आधार में ईमेल आईडी अपडेट कराने की सुविधा अब मुफ्त दी जाएगी। यह सुविधा अगले 6 महीने, यानी दिसंबर तक उपलब्ध रहेगी। इससे पहले आधार में ईमेल अपडेट कराने के लिए 75 रुपये का शुल्क देना पड़ता था।

    कार खरीदना 
    अगर आप नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं तो 1 जुलाई से पहले फैसला करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। Kia Motors ने अपनी कारों की कीमतों में 2 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। वहीं, Tata Motors भी अपने ICE (Internal Combustion Engine) और Electric Vehicle (EV) मॉडल्स की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है। इस बदलाव के बाद नई कार खरीदने वालों को पहले के मुकाबले अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

  • आज शनि प्रदोष व्रत, बन रहा दुर्लभ संयोग, जानिए पूजा का शुभ समय और मुहूर्त

    आज शनि प्रदोष व्रत, बन रहा दुर्लभ संयोग, जानिए पूजा का शुभ समय और मुहूर्त


    नई दिल्ली। आज, 27 जून 2026 को शनि प्रदोष व्रत का विशेष और दुर्लभ संयोग बना है। शनिवार को पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि पर रखा जाने वाला यह व्रत धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की आराधना के साथ शनिदेव की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से शिव एवं शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त होती है।

    शनि प्रदोष व्रत का महत्व
    हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब यह तिथि शनिवार को आती है, तब इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है और इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि, दीर्घायु और मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या अन्य अशुभ प्रभावों से राहत मिलने की भी मान्यता है।

    पूजा का शुभ मुहूर्त
    प्रदोष व्रत में प्रदोष काल को सबसे शुभ समय माना गया है। आज 27 जून 2026 को प्रदोष काल शाम 7:04 बजे से रात 9:06 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में भगवान शिव की पूजा करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है। इसके अलावा दिन का अभिजित मुहूर्त दोपहर 1:21 बजे से 2:26 बजे तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है।

    पूजा की विधि
    व्रत के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूरे दिन उपवास का संकल्प लें।

    प्रदोष काल में सबसे पहले शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।

    पूजा के दौरान भगवान शिव को सफेद चंदन, सफेद पुष्प, भांग, धतूरा, अक्षत और शमी पत्र अर्पित करें। चूंकि यह शनि प्रदोष है, इसलिए शमी पत्र का विशेष महत्व माना गया है।

    इसके बाद भगवान गणेश, माता पार्वती, कार्तिकेय और नंदी महाराज का स्मरण करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ मंत्र का जप करें। अंत में भगवान शिव की आरती कर घर में बनी शुद्ध खीर का भोग अर्पित करें।

    व्रत पारण का समय
    शनि प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन 28 जून 2026 को सूर्योदय के बाद किया जाएगा। श्रद्धालु सुबह 5:49 बजे के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं।

    विशेष उपाय
    धन-समृद्धि की कामना रखने वाले श्रद्धालु प्रदोष काल में दूध में केसर मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। वहीं परिवार की सुख-शांति और कष्टों से मुक्ति के लिए जौ के आटे की रोटियां बनाकर गाय के बछड़े को खिलाना शुभ और फलदायी माना गया है।

  • एमपी में मानसून की रफ्तार थमी, एंट्री के बाद ठहरा, 43 जिलों में आज बारिश की चेतावनी

    एमपी में मानसून की रफ्तार थमी, एंट्री के बाद ठहरा, 43 जिलों में आज बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में 24 जून को दक्षिण-पूर्वी हिस्से के 15 जिलों में दस्तक देने के बाद मानसून की रफ्तार फिलहाल थम गई है। पिछले तीन दिनों से मानसून आगे नहीं बढ़ा है और मौसम विभाग के अनुसार इसके अगले 2 से 3 दिन तक भी इसी स्थिति में रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि अनुकूल परिस्थितियां बनने पर मानसून सबसे पहले भोपाल और उज्जैन संभाग में आगे बढ़ेगा, जबकि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में इसकी एंट्री सबसे आखिर में होगी।

    24 जून को मानसून के प्रदेश में प्रवेश के साथ आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी और डिंडौरी जिलों में इसके पहुंचने की घोषणा की गई थी। इसके बाद से मानसून की प्रगति रुकी हुई है। हालांकि मौसम विभाग ने अगले दो से तीन दिनों में प्रदेश के अन्य हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने की संभावना जताई है।

    आज 43 जिलों में बारिश के आसार
    शनिवार को भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह और छतरपुर में बारिश का पूर्वानुमान है। वहीं ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, निवाड़ी और टीकमगढ़ जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    शुक्रवार को कई जिलों में झमाझम बारिश
    शुक्रवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी और बारिश का दौर देखने को मिला। सिवनी में करीब 2 इंच बारिश दर्ज की गई। शाजापुर जिले के शुजालपुर, अकोदिया और आसपास के क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई, जबकि उज्जैन में डेढ़ इंच से अधिक पानी बरसा। इसके अलावा दतिया, इंदौर, राजगढ़, शिवपुरी, मंडला, रीवा, सागर, बालाघाट, खंडवा, शाजापुर, आगर-मालवा और मंदसौर समेत कई जिलों में भी आंधी और बारिश का असर रहा।

    तापमान में आई गिरावट
    बारिश और तेज हवाओं के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन के तापमान में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। खरगोन का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके अलावा खंडवा में 30.1, सागर में 31.1, छिंदवाड़ा में 31.8, बैतूल में 32.7, सिवनी और उमरिया में 33.2, धार में 33.4 तथा नर्मदापुरम में 33.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों में भोपाल और इंदौर का अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री, उज्जैन में 33.5 डिग्री, जबलपुर में 36.7 डिग्री और ग्वालियर में 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    बारिश के आंकड़ों में सुधार
    पिछले 72 घंटे से प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार बारिश होने से वर्षा के आंकड़ों में सुधार दर्ज किया गया है। कई स्थानों पर 4 इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 99 मिमी (करीब 4 इंच) बारिश होनी चाहिए थी, जबकि अब तक 58.5 मिमी (करीब 2.1 इंच) वर्षा हुई है। यह सामान्य से 41 प्रतिशत कम है। 24 जून तक यह कमी 50 प्रतिशत थी, यानी हालिया बारिश से करीब 9 प्रतिशत का सुधार हुआ है। फिलहाल प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 68 प्रतिशत कम और पश्चिमी हिस्से में 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

  • जब लता मंगेशकर ने दिया नितिन मुकेश को पहला बड़ा मंच, पिता के निधन के बाद मिला ऐसा मौका जिसने बना दिया सफल पार्श्वगायक

    जब लता मंगेशकर ने दिया नितिन मुकेश को पहला बड़ा मंच, पिता के निधन के बाद मिला ऐसा मौका जिसने बना दिया सफल पार्श्वगायक

    नई दिल्ली । भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिनकी सफलता के पीछे संघर्ष, प्रतिभा और सही समय पर मिला एक अवसर अहम भूमिका निभाता है। प्रसिद्ध पार्श्वगायक नितिन मुकेश की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। महान गायक मुकेश के निधन के बाद जब पूरा परिवार गहरे शोक में था, उसी कठिन दौर में स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने उन्हें ऐसा अवसर दिया जिसने उनके संगीत करियर की दिशा ही बदल दी।

    नितिन मुकेश का जन्म 27 जून 1950 को हुआ था। संगीत उन्हें विरासत में मिला था और बचपन से ही उन्होंने अपने पिता मुकेश से गायन की बारीकियां सीखीं। वह शुरुआत से ही संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाना चाहते थे, लेकिन उन्हें सबसे बड़ा अवसर उस समय मिला जब उनके पिता का अचानक निधन हो गया।

    मुकेश के निधन से भारतीय संगीत जगत में गहरा शून्य पैदा हो गया था। उस समय लता मंगेशकर के साथ उनके कई अंतरराष्ट्रीय संगीत कार्यक्रम पहले से तय थे। शुरुआती दौर में इन कार्यक्रमों को रद्द करने पर विचार किया गया, लेकिन बाद में लता मंगेशकर ने एक अलग फैसला लिया। उन्होंने तय किया कि इन कार्यक्रमों को जारी रखा जाएगा और मंच पर मुकेश की जगह उनके बेटे नितिन मुकेश को अवसर दिया जाएगा।

    बताया जाता है कि कार्यक्रमों के दौरान लता मंगेशकर ने दर्शकों को संबोधित करते हुए कहा कि मुकेश अब उनके बीच नहीं रहे, इसलिए वह उनके बेटे के साथ इस संगीत यात्रा को आगे बढ़ा रही हैं। यह पल नितिन मुकेश के लिए बेहद भावुक होने के साथ-साथ उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ भी साबित हुआ। अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति देने का यह अवसर उन्हें व्यापक पहचान दिलाने में निर्णायक साबित हुआ।

    इसके बाद नितिन मुकेश ने देश और विदेश के अनेक संगीत कार्यक्रमों में अपनी गायकी से श्रोताओं का दिल जीता। धीरे-धीरे उन्होंने हिंदी फिल्म संगीत में भी अपनी अलग पहचान बनाई। विशेष रूप से 1980 और 1990 के दशक में उन्होंने कई लोकप्रिय गीत गाए, जिन्हें आज भी संगीत प्रेमी पसंद करते हैं। उनकी आवाज ने उन्हें फिल्म उद्योग के स्थापित पार्श्वगायकों की श्रेणी में पहुंचा दिया।

    अपने करियर के दौरान नितिन मुकेश ने कई प्रतिष्ठित संगीतकारों के साथ काम किया। उन्होंने आर.डी. बर्मन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, बप्पी लाहिड़ी, खय्याम और आनंद-मिलिंद जैसे दिग्गज संगीतकारों की धुनों को अपनी आवाज दी। इसके अलावा उन्होंने लता मंगेशकर, आशा भोसले और अलका याज्ञनिक जैसी शीर्ष गायिकाओं के साथ भी कई यादगार युगल गीत रिकॉर्ड किए।

    नितिन मुकेश का संगीत सफर इस बात का उदाहरण माना जाता है कि कठिन परिस्थितियों में मिला एक भरोसा और सही मार्गदर्शन किसी कलाकार के भविष्य को नई दिशा दे सकता है। पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपनी मेहनत, समर्पण और प्रतिभा के दम पर भारतीय संगीत जगत में एक सम्मानजनक और स्थायी पहचान स्थापित की।

  • देश का 16 फीसदी केला देता है महाराष्ट्र का यह जिला, आधुनिक खेती और GI टैग ने बनाया ‘बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया’

    देश का 16 फीसदी केला देता है महाराष्ट्र का यह जिला, आधुनिक खेती और GI टैग ने बनाया ‘बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया’

    नई दिल्ली । भारत दुनिया का सबसे बड़ा केला उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई मानी जाती है। देश में हर वर्ष करोड़ों टन केले का उत्पादन होता है, जिसमें महाराष्ट्र अग्रणी राज्य है। इसी राज्य का जलगांव जिला अपनी असाधारण उत्पादन क्षमता के कारण ‘बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है। यह जिला अकेले देश के कुल केला उत्पादन में लगभग 16 प्रतिशत योगदान देता है, जबकि महाराष्ट्र में केले की खेती के कुल क्षेत्रफल का करीब 69 प्रतिशत हिस्सा भी यहीं स्थित है।

    जलगांव की सफलता के पीछे उसकी अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियां सबसे बड़ा कारण मानी जाती हैं। उत्तर में सतपुड़ा और दक्षिण में अजंता पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित यह क्षेत्र उपजाऊ काली मिट्टी, पर्याप्त धूप और गर्म जलवायु के कारण केले की खेती के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। यहां की मिट्टी में नमी बनाए रखने की क्षमता अधिक है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर होते हैं।

    केले की खेती केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि जलगांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव भी है। जिले के हजारों किसान सीधे तौर पर इस फसल पर निर्भर हैं। इसके अलावा परिवहन, पैकेजिंग, भंडारण, प्रसंस्करण और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। इस कारण केला उत्पादन यहां की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार बन चुका है।

    जलगांव के किसानों ने समय के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को तेजी से अपनाया है। टिश्यू कल्चर पौधों का उपयोग, ड्रिप सिंचाई प्रणाली और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन ने उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। विशेष रूप से ड्रिप सिंचाई तकनीक ने पानी की बचत के साथ पौधों तक आवश्यक मात्रा में सिंचाई सुनिश्चित की है, जिससे लागत कम हुई और गुणवत्ता में सुधार आया।

    इस जिले में कई लोकप्रिय केले की किस्मों की खेती होती है। बसराई किस्म अपनी गुणवत्ता, स्वाद और लंबे समय तक ताजा रहने की क्षमता के कारण देशभर के बाजारों में पसंद की जाती है। वहीं जी-9 (G-9) किस्म अधिक उत्पादन, बड़े आकार, रोग प्रतिरोधक क्षमता और निर्यात की संभावनाओं के कारण किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई है। इन उन्नत किस्मों ने जलगांव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत पहचान दिलाई है।

    जलगांव की एक और बड़ी ताकत उसका बेहतर परिवहन नेटवर्क है। सड़क और रेल मार्ग से देश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से जुड़ा होने के कारण यहां से केले की आपूर्ति तेजी और आसानी से की जाती है। भुसावल जंक्शन देश के महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शनों में शामिल है, जिससे कृषि उत्पादों का परिवहन और भी सुगम हो जाता है।

    जलगांव के केले को वर्ष 2016 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग भी प्राप्त हो चुका है। यह मान्यता इस बात का प्रमाण है कि यहां उत्पादित केले की गुणवत्ता और विशेषताएं इस क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी हुई हैं। आधुनिक कृषि तकनीक, अनुकूल प्राकृतिक संसाधन, मजबूत परिवहन व्यवस्था और किसानों की नवाचार अपनाने की क्षमता ने जलगांव को देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी केले के प्रमुख उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित किया है।

  • पिता की मौत के छह महीने बाद बेटे ने उठाया आत्मघाती कदम, घर में फंदे पर मिला शव, कारणों की जांच जारी

    पिता की मौत के छह महीने बाद बेटे ने उठाया आत्मघाती कदम, घर में फंदे पर मिला शव, कारणों की जांच जारी


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक 19 वर्षीय युवक द्वारा कथित रूप से आत्महत्या किए जाने का’ मामला सामने आया है। अरेरा हिल्स थाना क्षेत्र के बल्लभ नगर स्थित घर में युवक का शव फंदे से लटका मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि करीब छह महीने पहले युवक के पिता ने भी आत्महत्या की थी।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान आकाश गौतम के रूप में हुई है। वह बेरोजगार था और अपनी मां तथा छोटे भाई के साथ रहता था। शुक्रवार सुबह उसकी मां रोज की तरह घरों में काम करने चली गई थीं, जबकि छोटा भाई खेलने के लिए बाहर निकल गया था। दोपहर के समय जब छोटा भाई घर लौटा तो उसने आकाश को कमरे में फंदे पर लटका देखा। इसके बाद परिजनों और आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी।

    घटना की जानकारी मिलते ही अरेरा हिल्स थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजा गया। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

    पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। ऐसे में आत्महत्या के पीछे की वजह का अभी स्पष्ट पता नहीं चल सका है। जांच अधिकारी का कहना है कि परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है तथा सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    प्रारंभिक पूछताछ में परिजनों ने बताया कि लगभग छह महीने पहले आकाश के पिता ने भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। परिवार का कहना है कि पिता की मृत्यु के बाद आकाश मानसिक तनाव में रहने लगा था। बताया गया कि इस दौरान उसे शराब की लत भी लग गई थी और समय के साथ उसकी स्थिति और बिगड़ती चली गई। हालांकि पुलिस इन दावों की भी जांच कर रही है और इन्हें अंतिम निष्कर्ष नहीं मान रही है।

    पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, परिजनों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आत्महत्या के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जारी है।