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  • जेपी अस्पताल में डॉक्टरों का फूटा गुस्सा, वेतन और स्टाइपेंड के लिए भूख हड़ताल जारी, तीन महीने की सैलरी और पांच महीने का भुगतान अटका

    जेपी अस्पताल में डॉक्टरों का फूटा गुस्सा, वेतन और स्टाइपेंड के लिए भूख हड़ताल जारी, तीन महीने की सैलरी और पांच महीने का भुगतान अटका


    भोपाल। भोपाल के जयप्रकाश जिला अस्पताल यानी जेपी अस्पताल में वेतन और स्टाइपेंड के भुगतान को लेकर डॉक्टरों का विरोध तेज हो गया है। बकाया राशि नहीं मिलने और वेतन में कथित कटौती से नाराज तीन डॉक्टर 21 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। गुरुवार को भी उनका आंदोलन जारी रहा और वे रातभर अस्पताल परिसर में डटे रहे। डॉक्टरों का कहना है कि भुगतान का भरोसा मिलने के बावजूद उनके खाते में पूरी राशि नहीं आई है। ऐसे में उन्होंने बकाया भुगतान और वेतन में कटौती के कारणों को स्पष्ट करने की मांग उठाई है।

    अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष बरथरे के मुताबिक वे बुधवार से भूख हड़ताल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार सुबह सिविल सर्जन की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल ने एक महीने का वेतन जारी करने की बात कही थी। डॉक्टरों को उम्मीद थी कि इससे उनकी आर्थिक परेशानी कुछ कम होगी लेकिन जब उन्होंने खाते में आई राशि की जांच की तो भुगतान पूरा नहीं मिला। उनका आरोप है कि एक महीने का वेतन जारी करने की बात कहे जाने के बावजूद खाते में कम राशि आई है। इसी वजह से उनकी नाराजगी और बढ़ गई।

    इस आंदोलन में शामिल पीजी छात्र डॉ. शुभम कश्यप की परेशानी भी गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार उनका पांच महीने का स्टाइपेंड अब तक बकाया है। उनका कहना है कि उन्हें एक महीने का स्टाइपेंड भी नहीं मिला है। इसके अलावा पिछले तीन साल में स्टाइपेंड बढ़ने के बाद मिलने वाला एरियर भी लंबित है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों ने मांग की है कि उनके बकाया भुगतान की स्थिति स्पष्ट की जाए और लंबित राशि जल्द जारी की जाए।

    डॉक्टरों के मुताबिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष बरथरे और पीजीएमओ ऑर्थोपेडिक्स डॉ. रविंद्र पाल का करीब तीन महीने का वेतन बकाया होने की शिकायत है। वहीं डॉ. शुभम कश्यप पांच महीने के स्टाइपेंड और एरियर का इंतजार कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वेतन और स्टाइपेंड समय पर मिलना जरूरी है क्योंकि इससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें और आर्थिक जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं। भुगतान में लगातार देरी होने से उनके सामने मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।

    डॉक्टरों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब एक महीने का वेतन देने की बात कही गई थी तो खाते में पूरी राशि क्यों नहीं पहुंची। वे चाहते हैं कि भुगतान में देरी और कथित कटौती के पीछे के कारणों की जानकारी दी जाए। उनका कहना है कि जब तक बकाया राशि और भुगतान संबंधी शिकायतों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलता तब तक उनका विरोध जारी रह सकता है।

    फिलहाल जेपी अस्पताल में तीन डॉक्टरों की भूख हड़ताल ने वेतन और स्टाइपेंड भुगतान की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से भुगतान में देरी और कथित कटौती को लेकर आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी डॉक्टरों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और लंबित भुगतान का समाधान कब तक हो पाता है।

  • सीएम के सामने बदले मंच के समीकरण, रावण के 9 सिर पर सवाल और अफसर को मकान नहीं, एमपी के ये किस्से चर्चा में

    सीएम के सामने बदले मंच के समीकरण, रावण के 9 सिर पर सवाल और अफसर को मकान नहीं, एमपी के ये किस्से चर्चा में


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में दशहरे के आयोजनों के दौरान कुछ ऐसे दिलचस्प नजारे सामने आए जिन्होंने राजनीति से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक को चर्चा में ला दिया। कहीं मुख्यमंत्री के सामने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ हुई एक घटना ने सियासी गलियारों में तंज का मौका दिया तो कहीं रावण के पुतले में दस की जगह नौ सिर लगाए जाने पर सवाल उठे। वहीं हरदा में पूर्व मंत्री कमल पटेल का भाषण उस समय चर्चा में आ गया जब बीच कार्यक्रम में उनके पास फोन पहुंच गया। इन घटनाओं के बीच नए जिले में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी को सरकारी आवास नहीं मिलने का मामला भी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता नजर आया।

    भोपाल में दशहरे के एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच की ओर जा रहे थे। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा मुख्यमंत्री की अगवानी कर रहे थे और उन्हें आगे लेकर बढ़ रहे थे। इसी दौरान मध्य प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा ने मुख्यमंत्री से हाथ मिलाया। लेकिन मुलाकात ज्यादा देर नहीं चल सकी। रामेश्वर शर्मा मुख्यमंत्री को आगे बढ़ने का इशारा करते दिखाई दिए और इसी दौरान वीडी शर्मा को धक्का लगने के बाद वह एक तरफ हो गए। इस घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इस पर राजनीतिक अंदाज में टिप्पणियां कीं। हालांकि इस दृश्य से किसी की राजनीतिक हैसियत या इरादे के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा लेकिन घटना चर्चा का विषय जरूर बन गई।

    दूसरा दिलचस्प मामला ग्वालियर जिले के डबरा का है जहां दशहरे पर रावण के पुतले को लेकर चूक सामने आई। रावण को दशानन कहा जाता है और उसके दस सिरों की पहचान धार्मिक कथाओं में खास महत्व रखती है। लेकिन यहां पुतले में दस की जगह नौ सिर ही लगाए गए थे। जब इस गलती पर लोगों का ध्यान गया तो आयोजन से जुड़े लोगों ने दसवां सिर भी लगा दिया। इसके बावजूद मामला पूरी तरह नहीं संभला क्योंकि नए सिर का आकार भी चर्चा का कारण बन गया। इस छोटी सी चूक ने दशहरे के आयोजन को लोगों के बीच हास्य और सवालों का विषय बना दिया।

    हरदा में दशहरा उत्सव के दौरान पूर्व मंत्री कमल पटेल अपने भाषण को लेकर सुर्खियों में रहे। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच उन्होंने जोशीले अंदाज में अपनी बात रखी। भाषण के दौरान उन्होंने भारत माता का अपमान करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान राम का वंशज तथा अवतारी पुरुष बताया। इसी बीच एक युवक उनके पास फोन लेकर पहुंचा। कमल पटेल ने भाषण रोककर फोन पर बात करना शुरू कर दिया। इस घटनाक्रम पर भी लोगों ने चुटकी ली और सवाल उठाया कि आखिर भाषण के बीच फोन आने की वजह क्या थी। हालांकि फोन आने के कारण का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया।

    इसी बीच प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा एक और मामला सामने आया। बताया गया कि नए जिले में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी को रहने के लिए सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो सका। उन्हें बताया गया कि पहले पदस्थ अधिकारी ने भी करीब दो साल रेस्ट हाउस में रहकर समय बिताया था और परिवार को साथ नहीं रख पाए थे। यह स्थिति नए जिलों में सरकारी कार्यालयों और अधिकारियों की तैनाती के साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की चुनौती को सामने लाती है। कुल मिलाकर दशहरे के इन किस्सों ने प्रदेश में राजनीतिक घटनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर नई चर्चा छेड़ दी।

  • शिवपुरी में नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल का भव्य विसर्जन समारोह, आकर्षक झांकियों और बच्चों की प्रस्तुतियों ने जीता दिल

    शिवपुरी में नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल का भव्य विसर्जन समारोह, आकर्षक झांकियों और बच्चों की प्रस्तुतियों ने जीता दिल


    शिवपुरी: में श्री नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल की ओर से नवरात्रि के समापन पर देवी प्रतिमा विसर्जन समारोह भव्य रूप से आयोजित किया गया। माधव चौक चौराहे पर सजाए गए मंच से विभिन्न स्थानों से आईं देवी प्रतिमाओं की झांकियों और आकर्षक विमानों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में बच्चों की नृत्य प्रस्तुतियों, डांडिया, गरबा, योग प्रदर्शन और बाहर से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। चल झांकियों का भी भव्य प्रदर्शन किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में शहरवासियों ने भाग लेकर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन का आनंद लिया।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईटीबीपी शिवपुरी के डीआईजी राजीव लोचन शुक्ला उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता शिवपुरी के डीएफओ सुधांशु यादव ने की। समारोह की शुरुआत अतिथियों और समिति के सदस्यों द्वारा माता की आरती तथा भगवान श्रीगणेश की वंदना के साथ हुई। इसके बाद समिति अध्यक्ष तरुण अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया। आयोजन में पहुंचे अतिथियों का समिति के सदस्यों ने स्वागत किया।

    समारोह में महामंडलेश्वर पुरुषोत्तम दास जी महाराज, प्रहलाद भारती, मंशापूर्णी माता मंदिर की महंत मंजू दीक्षित, सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती प्रसाद शुक्ल, राजू बाथम, डीपीसी दफेदार सिंह और महेंद्र सिंह वशिष्ठ विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। समिति के संरक्षकों रामविलास गुप्ता, अमन गोयल, राजेश कोचेटा और हरज्ञान प्रजापति सहित अन्य सदस्यों का भी स्वागत किया गया।

    आयोजन में सहयोग देने वाले प्रायोजकों को सम्मानित किया गया। इनमें सुमत गुप्ता, पुरुषोत्तम दास गर्ग, विनायक सेठ, उमा देवी शर्मा और सुषमा पांडेय शामिल रहे। हम फाउंडेशन की ओर से साधना गुप्ता, साधना शर्मा और अर्चना माहेश्वरी का भी सम्मान किया गया। विशेष सहयोगी के रूप में पटेल एंड संस के भूपेंद्र रावत का योगदान रहा।

    माधव चौक पर बनाए गए मंच से गुजरने वाले सभी विमान, झांकी मंडलों और समाजसेवी संस्थाओं का नवदुर्गा मंडल की ओर से शॉल, श्रीफल और माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। देवी के स्वागत के लिए विभिन्न समितियों ने शहर के अलग-अलग स्थानों पर निःशुल्क हलवा-चना, शरबत, खिचड़ी और सब्जी-पूड़ी का वितरण किया। इस दौरान शहरवासियों ने प्रसादी ग्रहण की और आयोजन में सहभागिता की।

    सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने मंच पर नृत्य और योग की प्रस्तुतियां दीं। डांडिया और गरबा कार्यक्रम में भी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। नृत्य प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रियंका व्यास, नेत्रा जोशी, टीना गुप्ता और दीपा बंसल शामिल रहीं। बाहर से आए कलाकारों ने भी विशेष प्रस्तुतियां दीं। मंच पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से धार्मिक उत्सव का माहौल बना रहा।

    कार्यक्रम के संचालन में मणिका शर्मा, वरुण राजौरिया, शिखा मंगल और भोपाल की एंकर नम्रता शुक्ला की भूमिका रही। आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष तरुण अग्रवाल, संयोजक संदीप वशिष्ठ, स्वागत अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र गुप्ता, सह स्वागत अध्यक्ष बृजेश शर्मा, उपाध्यक्ष रामलखन मुढ़ौतिया और वरुण राजौरिया सहित समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने योगदान दिया। सचिव अरुण शर्मा, सह सचिव हर्षित मंगल, कोषाध्यक्ष हृदेश गोयल, सह कोषाध्यक्ष रवि पाराशर, मंच प्रभारी संकेत शुक्ला और सह मंच प्रभारी देवेंद्र जैन खतौरा सहित अन्य सदस्य भी आयोजन की व्यवस्थाओं में शामिल रहे।

    कार्यक्रम संयोजक संदीप वशिष्ठ ने जिला पुलिस प्रशासन, नगरपालिका, विद्युत विभाग और शहर की धर्मप्रेमी जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने शहरवासियों को दशहरा पर्व की शुभकामनाएं भी दीं। आयोजन के अंत में माता की महाआरती की गई और भावपूर्ण विदाई के साथ विसर्जन समारोह संपन्न हुआ।

    मुख्य समारोह से पहले नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल ने क्षत्रिय समाज की बाइक रैली और दशहरा मिलन चल समारोह का स्वागत किया था। दोपहर में खटीक समाज की काली माता रैली तथा शाम को पंजाबी परिषद और श्री नरसिंह मंदिर उत्सव समिति की ओर से निकाली गई राम बारात का भी स्वागत किया गया।

  • मध्यप्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव का ऐलान, 26 अक्टूबर से नामांकन और 12 नवंबर को वोटिंग, जानिए कब होगी मतगणना

    मध्यप्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव का ऐलान, 26 अक्टूबर से नामांकन और 12 नवंबर को वोटिंग, जानिए कब होगी मतगणना


    भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की एक रिक्त सीट पर उपचुनाव की तारीख घोषित कर दी गई है। केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर 12 नवंबर 2026 को मतदान कराया जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार 22 अक्टूबर को चुनाव कार्यक्रम जारी किया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदान के दिन ही शाम 5 बजे मतगणना भी होगी। इस चुनाव को लेकर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ने की संभावना है। राज्यसभा की यह सीट मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है जबकि उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक निर्धारित था। ऐसे में अब उपचुनाव के जरिए इस सीट पर नए सदस्य का चयन किया जाएगा।

    निर्वाचन आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया 26 अक्टूबर से शुरू होगी। इसी दिन उपचुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी और उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन जमा करने की अंतिम तारीख 2 नवंबर निर्धारित की गई है। इसके बाद 3 नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी। उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए 5 नवंबर तक का समय दिया जाएगा। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 12 नवंबर को मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना की जाएगी। आयोग के कार्यक्रम के अनुसार चुनाव प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी की जानी है।

    एल मुरुगन मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य बनने से पहले तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वे सितंबर 2021 में पहली बार तमिलनाडु से राज्यसभा पहुंचे थे। इसके बाद 3 अप्रैल 2024 को वे मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था लेकिन 14 अक्टूबर 2026 से उनकी राज्यसभा सदस्यता समाप्त हो गई। उनके इस्तीफे के बाद मध्यप्रदेश से राज्यसभा की एक सीट रिक्त हो गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद से भी इस्तीफा दिया था जिसे स्वीकार कर लिया गया।

    मध्यप्रदेश में राज्यसभा की कुल 11 सीटें हैं। मुरुगन के इस्तीफे से पहले इनमें से 8 सीटें भाजपा और 3 सीटें कांग्रेस के पास थीं। अब एक सीट खाली होने के कारण प्रदेश से राज्यसभा में भाजपा के 7 सदस्य और कांग्रेस के 3 सदस्य रह गए हैं। उपचुनाव के जरिए रिक्त सीट भरी जाएगी। इस चुनाव में विधानसभा की संख्या और राजनीतिक दलों के विधायकों का समर्थन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्यसभा के लिए होने वाले इस चुनाव में आम जनता सीधे मतदान नहीं करती बल्कि निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं।

    मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं। यदि सभी विधायक मतदान करते हैं और कोई मत अवैध नहीं होता है तो एक राज्यसभा सीट के चुनाव में जीत के लिए आवश्यक मतों का कोटा 116 होगा। ऐसे में चुनाव के दौरान विधायकों का समर्थन निर्णायक माना जाएगा। राजनीतिक दलों को उम्मीदवार के चयन के साथ अपने विधायकों का समर्थन सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देना होगा। हालांकि उम्मीदवार कौन होगा और चुनाव में किस तरह की रणनीति अपनाई जाएगी इसे लेकर अंतिम तस्वीर आगे स्पष्ट होगी।

    फिलहाल चुनाव आयोग की घोषणा के बाद राज्यसभा उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। 26 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। 2 नवंबर तक उम्मीदवार अपना पर्चा दाखिल कर सकेंगे और 5 नवंबर तक नाम वापस लेने का मौका रहेगा। इसके बाद 12 नवंबर को मतदान और मतगणना के साथ चुनाव परिणाम सामने आएगा। इस उपचुनाव से मध्यप्रदेश की राज्यसभा में रिक्त प्रतिनिधित्व पूरा होगा।

  • मोहन यादव ने मुंबई में किया बड़ा ऐलान, बीना से आष्टा तक फैलेगा पेट्रोकेमिकल उद्योग, 2040 तक देश को ट्रिलियन डॉलर इंडस्ट्री बनाने का लक्ष्य

    मोहन यादव ने मुंबई में किया बड़ा ऐलान, बीना से आष्टा तक फैलेगा पेट्रोकेमिकल उद्योग, 2040 तक देश को ट्रिलियन डॉलर इंडस्ट्री बनाने का लक्ष्य


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में बड़े निवेश की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुंबई में आयोजित इंडिया केम 2026 के उद्घाटन सत्र में बताया कि बीना में 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल परियोजना विकसित की जाएगी। इस परियोजना से हर साल 22 लाख टन से अधिक पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार करने का लक्ष्य है। इससे प्लास्टिक पैकेजिंग फार्मा टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को जरूरी कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। साथ ही प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री के मुताबिक ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद मध्यप्रदेश में करीब 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को मुंबई के बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय इंडिया केम 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल भी मौजूद रहे। इस आयोजन में देश और विदेश के रसायन पेट्रोकेमिकल पॉलिमर तथा एग्रोकेमिकल उद्योगों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान रसायन उद्योग से संबंधित रिपोर्ट और शोध सामग्री का विमोचन भी किया गया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिए बिजली पानी जमीन और औद्योगिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। बीना की परियोजना के साथ विजयपुर में गेल के गैस प्रसंस्करण ढांचे और सीहोर जिले के आष्टा में गेल इंडिया की पेट्रोकेमिकल परियोजना का भी उल्लेख किया गया। इन परियोजनाओं से प्रदेश में पेट्रोकेमिकल और उससे जुड़े उद्योगों के विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। सरकार का प्रयास है कि बड़े उद्योगों के साथ छोटे और मध्यम उद्यमों को भी विकास के अवसर मिलें।

    प्रदेश में प्लास्टिक और पॉलिमर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए रायसेन जिले के तामोट में 121 एकड़ और ग्वालियर के बिलोवा में 93 एकड़ क्षेत्र में प्लास्टिक पार्क विकसित किए गए हैं। इन पार्कों के जरिए संबंधित क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित करने की योजना है। इसके अलावा पीएम मित्रा पार्क के माध्यम से टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार उद्योगों के लिए सरल और पारदर्शी व्यवस्था बनाने के साथ बिजली पानी और जमीन जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    डॉ. यादव ने देश के रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग की विकास संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में इस क्षेत्र का बाजार करीब 120 अरब डॉलर का था जो अब दोगुने से अधिक हो चुका है। उन्होंने वर्ष 2040 तक भारत के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को एक ट्रिलियन डॉलर का उद्योग बनाने के लक्ष्य में मध्यप्रदेश की भागीदारी की बात कही। वैश्विक तनाव कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के बीच घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने को महत्वपूर्ण बताया गया।

    कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने रसायन उद्योग में सुरक्षा गुणवत्ता और कारोबार सुगमता पर जोर दिया। उन्होंने खतरनाक रसायनों के सुरक्षित संचालन के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने और गुणवत्ता नियंत्रण मानकों को लागू करने से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी। साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों पर इन नियमों के प्रभाव को ध्यान में रखने की जरूरत बताई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। उन्होंने महाराष्ट्र में रसायन उद्योग की भूमिका और नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजनाओं का भी उल्लेख किया।

    बीना की प्रस्तावित परियोजना से मध्यप्रदेश में पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योगों के लिए नई संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि निवेश प्रस्तावों को वास्तविक उत्पादन और रोजगार में बदलने के लिए परियोजना का क्रियान्वयन जरूरी होगा। आने वाले समय में इसकी प्रगति प्रदेश के औद्योगिक विकास पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।

  • बड़ा तालाब संरक्षण के नाम पर जमीन छिनने का डर, भोपाल में किसानों की पदयात्रा, BIZ-1 और BIZ-2 जोन हटाने की मांग

    बड़ा तालाब संरक्षण के नाम पर जमीन छिनने का डर, भोपाल में किसानों की पदयात्रा, BIZ-1 और BIZ-2 जोन हटाने की मांग


    नई दिल्ली। भोपाल मास्टर प्लान के नए ड्राफ्ट को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध तेज होने लगा है। प्रस्तावित योजना में 66 गांवों की कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव किए जाने की आशंका से किसान चिंतित हैं। किसानों का आरोप है कि खेती की जमीन को रिवरफ्रंट फॉरेस्ट ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने का प्रस्ताव उनकी आजीविका पर असर डाल सकता है। इसी मुद्दे को लेकर किसानों ने अपनी जमीन बचाने और प्रस्तावित बदलावों पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए पदयात्रा शुरू की। किसान मुगालिया छाप से नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय तक पहुंचकर ज्ञापन देना चाहते थे लेकिन पुलिस ने नीलबड़ में बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक लिया। पुलिस की ओर से पहले से व्यवस्था किए जाने की वजह यह बताई गई कि पिछली बार किसान भोपाल शहर तक पहुंच गए थे।

    किसानों की मुख्य मांग है कि उनकी कृषि भूमि का उपयोग पहले की तरह खेती के लिए ही सुरक्षित रखा जाए। उनका कहना है कि जिस जमीन पर किसान वर्षों से खेती कर रहे हैं उसी से उनके परिवारों का भरण पोषण होता है। यदि इन जमीनों को दूसरी आरक्षित श्रेणियों में शामिल कर दिया गया तो खेती करने और भविष्य में जमीन का उपयोग करने को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। किसानों का कहना है कि जमीन केवल संपत्ति नहीं बल्कि उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। इसलिए मास्टर प्लान में कोई भी बदलाव करने से पहले प्रभावित ग्रामीणों की बात सुनी जानी चाहिए।

    किसान अनोखी सिंह पटेल ने आरोप लगाया कि बड़ा तालाब के संरक्षण के नाम पर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि का लैंडयूज बदलने का प्रस्ताव किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि वे बड़ा तालाब के संरक्षण के महत्व को समझते हैं लेकिन इसके नाम पर कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव करने से पहले स्थानीय लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि वर्षों से खेती कर रहे परिवारों के भविष्य को लेकर स्पष्टता होना जरूरी है। इसी वजह से किसान प्रस्तावित ड्राफ्ट में किए गए बदलावों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराना चाहते हैं।

    किसानों के मुताबिक वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में संबंधित जमीनों का भू-उपयोग कृषि निर्धारित था। इसके बाद वर्ष 2031 के मास्टर प्लान के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट में भी कृषि उपयोग का प्रावधान रखा गया था। हालांकि बाद में वह मास्टर प्लान निरस्त हो गया। अब मौजूदा ड्राफ्ट में बड़ा तालाब के आसपास की कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव की आशंका को लेकर किसान विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि नई योजना तैयार करते समय पुराने प्रावधानों और किसानों की आजीविका पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    किसानों ने भोजताल संरक्षण जोन-1 यानी BIZ-1 और जोन-2 यानी BIZ-2 को हटाने की मांग भी उठाई है। किसान अनोखी सिंह पटेल के मुताबिक खेती उनकी आय का प्रमुख स्रोत है और कृषि भूमि का उपयोग कृषि के लिए ही बनाए रखना जरूरी है। किसानों का कहना है कि यदि उनकी जमीनों को दूसरी श्रेणियों में शामिल किया जाता है तो उनके सामने भविष्य में कई तरह की व्यावहारिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि प्रस्तावित बदलावों पर पुनर्विचार किया जाए और उनकी आपत्तियों का उचित समाधान निकाला जाए।

    किसानों का एक बड़ा सवाल ग्रामसभाओं में सहमति लेने को लेकर भी है। उनका आरोप है कि वर्ष 2031 के मास्टर प्लान की प्रक्रिया के दौरान नए ड्राफ्ट को तैयार करने में पंचायतों से सहमति लेने का आश्वासन दिया गया था लेकिन मौजूदा प्रस्ताव में संबंधित गांवों की सहमति नहीं ली गई। किसान चाहते हैं कि पहले सभी 66 गांवों में ग्रामसभाएं आयोजित की जाएं और प्रस्तावित भू-उपयोग पर विस्तार से चर्चा हो। उनका कहना है कि किसानों की समस्याएं और आपत्तियां सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए। फिलहाल मास्टर प्लान को लेकर किसानों की चिंता बनी हुई है और वे अपनी मांगों को संबंधित विभाग तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

  • शिवपुरी के अकाझिरी गांव में बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर भाई को पीटा, बाइक से घसीटने का आरोप

    शिवपुरी के अकाझिरी गांव में बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर भाई को पीटा, बाइक से घसीटने का आरोप

    शिवपुरी जिले के कोलारस अनुविभाग के रन्नौद थाना क्षेत्र के अकाझिरी गांव में बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर एक युवक के साथ मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि चार युवकों ने पीड़ित के साथ गाली-गलौज की, लाठी-डंडों से हमला किया और उसे बाइक से घसीटते हुए बस स्टैंड तक ले गए। घटना में युवक घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    घटना 20 अक्टूबर 2026 की रात करीब आठ बजे की बताई गई है। अकाझिरी गांव का रहने वाला युवक अपनी बड़ी बहन के साथ रामलीला देखने जा रहा था। इसी दौरान पानी की टंकी के पास गांव के ही राम गुप्ता, मोनू ओझा, कृष्णा ओझा और ज्योतिष ओझा मिल गए। शिकायत के अनुसार, चारों ने युवक की बहन के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ शुरू कर दी।

    बहन के साथ हो रही इस हरकत का युवक ने विरोध किया। आरोप है कि विरोध करने पर चारों युवक नाराज हो गए और उन्होंने पीड़ित के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। इसके बाद लाठी-डंडों से उसकी पिटाई की गई। घटना के दौरान युवक को गंभीर चोटें आईं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हमलावर उसे राम गुप्ता की बाइक से घसीटते हुए बस स्टैंड तक ले गए, जिससे उसकी चोटें और बढ़ गईं।

    पीड़ित के मुताबिक, मारपीट के बाद आरोपियों ने उसे पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के बाद घायल युवक को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार किया जा रहा है। मामले में बहन के साथ कथित छेड़छाड़ और भाई के साथ मारपीट, दोनों आरोपों को लेकर पुलिस कार्रवाई कर रही है।

    पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने राम गुप्ता, मोनू ओझा, कृष्णा ओझा और ज्योतिष ओझा के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और आरोपियों की तलाश जारी है। घटना में शामिल लोगों की भूमिका, मारपीट की परिस्थितियों और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    अकाझिरी गांव में हुई इस घटना के बाद मामला पुलिस के संज्ञान में है। फिलहाल पुलिस की जांच शिकायत में दर्ज आरोपों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज होना जांच की शुरुआती कार्रवाई है। मामले में आरोपों की पुष्टि और आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।

  • पाकिस्तान ने भारत में खेलने से किया इनकार, इंटरनेशनल मास्टर्स वर्ल्ड कप से हटे डिफेंडिंग चैंपियन

    पाकिस्तान ने भारत में खेलने से किया इनकार, इंटरनेशनल मास्टर्स वर्ल्ड कप से हटे डिफेंडिंग चैंपियन

    नई दिल्ली । पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने अपनी ओवर-50 क्रिकेट टीम को भारत में होने वाले इंटरनेशनल मास्टर्स क्रिकेट वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। यह टूर्नामेंट जनवरी 2027 में भारत में आयोजित होना है। पाकिस्तान के इस फैसले के बाद उसकी टीम प्रतियोगिता से हट गई है।

    खास बात यह है कि पाकिस्तानी टीम पिछले साल श्रीलंका में आयोजित इस टूर्नामेंट की विजेता रही थी और अब उसे अपने खिताब का बचाव करने का मौका नहीं मिलेगा। बुधवार, 21 अक्टूबर को पाकिस्तान की ओर से इस फैसले की जानकारी साझा की गई। टीम के हटने के बाद आयोजकों को प्रतियोगिता में उसकी जगह किसी दूसरी टीम को शामिल करने की व्यवस्था करनी होगी।

    पाकिस्तान की टीम की भागीदारी को लेकर पहले भारतीय आयोजकों और टूर्नामेंट प्रबंधन की ओर से आश्वासन दिए गए थे। पाकिस्तान वेटरंस क्रिकेट एसोसिएशन (पीवीसीए) को भरोसा दिलाया गया था कि टीम के खिलाड़ियों को समय पर वीजा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही भारत में खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए उच्च स्तर के इंतजाम करने की बात भी कही गई थी।

    इन आश्वासनों के बाद पीवीसीए ने अपनी सरकार और क्रिकेट बोर्ड से भारत जाकर टूर्नामेंट खेलने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, तमाम तैयारियों और आश्वासनों के बावजूद पाकिस्तान की टीम को भारत आने की मंजूरी नहीं मिल सकी। इस फैसले के कारण टूर्नामेंट में पाकिस्तान की भागीदारी समाप्त हो गई है।

    पाकिस्तान वेटरंस क्रिकेट एसोसिएशन के प्रमुख फवाद एजाज ने बुधवार को बताया कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उनकी टीम को भारत जाकर खेलने की अनुमति देने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि आयोजकों को पहले ही टीम के हटने की सूचना दे दी गई है, ताकि वे समय रहते किसी दूसरी टीम को शामिल करने की व्यवस्था कर सकें।

    फवाद एजाज के मुताबिक, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी इस संबंध में स्पष्ट कर दिया था कि टीम को भारत में खेलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मोहसिन नकवी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख भी हैं। बोर्ड और संबंधित मंत्रालयों से हरी झंडी नहीं मिलने के कारण पिछले संस्करण की विजेता टीम को टूर्नामेंट से पीछे हटना पड़ा। इस तरह खिलाड़ियों की भागीदारी का फैसला अंततः बोर्ड और सरकार की अनुमति पर निर्भर रहा।

    भारत में किसी प्रतियोगिता में भाग लेने से पाकिस्तान की किसी टीम के इनकार का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन ने भी एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में खेलने के लिए भारत आने से मना कर दिया था। उस समय पाकिस्तान की जगह बांग्लादेश की टीम को प्रतियोगिता में शामिल किया गया था।

    अब इंटरनेशनल मास्टर्स क्रिकेट वर्ल्ड कप से पाकिस्तान की ओवर-50 टीम के हटने के बाद आयोजकों को फिर से वैकल्पिक टीम की व्यवस्था करनी होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान की जगह किस टीम को शामिल किया जाएगा, इसका नाम सामने नहीं आया है। आयोजकों को टूर्नामेंट की तैयारियों के बीच इस खाली स्थान को भरने की व्यवस्था करनी होगी, ताकि प्रतियोगिता का कार्यक्रम प्रभावित न हो।

    भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से राजनीतिक तनाव और खराब संबंधों का असर खेल आयोजनों पर भी दिखाई देता रहा है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज लंबे समय से नहीं खेली जा रही हैं। ऐसे में भारतीय और पाकिस्तानी टीमें आम तौर पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) या एशियाई स्तर के बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में ही एक-दूसरे के खिलाफ खेलती हैं।

    इंटरनेशनल मास्टर्स क्रिकेट वर्ल्ड कप से पाकिस्तान की टीम के हटने का फैसला भी इसी व्यापक पृष्ठभूमि में चर्चा का विषय बना है। हालांकि, इस मामले में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की ओर से टीम को भारत आने की अनुमति नहीं दिए जाने की बात सामने आई है। टूर्नामेंट में पाकिस्तान की अनुपस्थिति के बाद अब आयोजकों के सामने उसकी जगह दूसरी टीम को शामिल करने की जिम्मेदारी है।

  • टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में नया खुलासा, रणबीर कपूर के बांद्रा स्थित घर की भी रेकी करने का दावा

    टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में नया खुलासा, रणबीर कपूर के बांद्रा स्थित घर की भी रेकी करने का दावा

    नई दिल्ली । अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर 18 अक्टूबर को हुई फायरिंग के मामले में एक और अहम जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, इस घटना के आरोपी शूटरों ने अभिनेता रणबीर कपूर के बांद्रा स्थित घर की भी रेकी की थी। इससे पहले सलमान खान के घर की रेकी किए जाने की जानकारी सामने आई थी। रणबीर कपूर के घर की रेकी से जुड़ा यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब टाइगर श्रॉफ पर हमले के बाद फिल्म जगत में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। हालांकि, रणबीर कपूर के घर की रेकी किए जाने की जानकारी फिलहाल सूत्रों के हवाले से सामने आई है।

    टाइगर श्रॉफ पर हमले के बाद सलमान खान की सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी किए जाने की जानकारी सामने आई थी। उनके घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई और हथियारों से लैस कमांडो तैनात किए गए। वहीं, अभिनेता अक्षय कुमार के घर के बाहर बुलेटप्रूफ शीशे लगाए जाने की भी खबर सामने आई।

    इन घटनाक्रमों के बीच रणबीर कपूर के घर की रेकी किए जाने के दावे ने फिल्म जगत में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में रणबीर कपूर के घर की रेकी कब की गई और इस संबंध में पुलिस को क्या-क्या साक्ष्य मिले हैं, इसका विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।

    सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने सलमान खान के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट की भी रेकी की थी। बताया गया है कि वहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था देखने के बाद शूटरों ने अपनी योजना बदल दी। इसके बाद टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है।

    जानकारी के मुताबिक, आरोपियों को सोशल मीडिया पेजों के जरिए पता चला था कि टाइगर श्रॉफ प्रत्येक रविवार को मैच खेलने जाते हैं। इसी जानकारी के आधार पर उन्हें निशाना बनाने की योजना बनाई गई। 18 अक्टूबर को शूटरों ने अभिनेता की गाड़ी पर पांच राउंड फायरिंग की। इस हमले में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित रहे, लेकिन उनके ड्राइवर को गोली लग गई। घटना के बाद से मामले की जांच जारी है।

    फायरिंग के बाद लॉरेंस बिश्नोई के करीबी बताए जाने वाले अनिल पंडित ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। पोस्ट में कहा गया कि टाइगर श्रॉफ को पहले ही सलमान खान के साथ काम नहीं करने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन उन्होंने इस चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया।

    इसके अलावा एक वॉयस नोट भी सामने आने की जानकारी दी गई, जिसमें कथित तौर पर कहा गया कि सलमान खान के साथ काम करने वाले व्यक्ति को अगली बार निशाना बनाया जाएगा। इन दावों और संदेशों की पृष्ठभूमि में पुलिस मामले की विभिन्न कड़ियों की जांच कर रही है। उपलब्ध जानकारी में इन संदेशों के संबंध में जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं।

    पुलिस के मुताबिक, टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के मामले में अब तक कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। कोटा से तीन शूटरों को पकड़ा गया, जो फिलहाल मुंबई पुलिस की एंटी एक्सटॉर्शन सेल की हिरासत में हैं। वहीं, दिल्ली पुलिस ने हथियारों की व्यवस्था करने में मदद करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

    जांच में आरोपियों की भूमिका, हथियारों की व्यवस्था और हमले की योजना से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। रणबीर कपूर के घर की कथित रेकी और सलमान खान के घर से जुड़ी पिछली जानकारी के बीच पुलिस जांच का दायरा महत्वपूर्ण बना हुआ है। फिलहाल मामले में सामने आई जानकारियां आरोपियों की गतिविधियों और संभावित योजनाओं से जुड़े दावों पर आधारित हैं, जबकि जांच के आगे बढ़ने के साथ अन्य तथ्य सामने आने की संभावना है।

  • आयुष्मान खुराना की उड़ता तीर से हटाया गया भारतीय नक्शे पर खून वाला सीन, CBFC ने दिए कई बदलाव के निर्देश

    आयुष्मान खुराना की उड़ता तीर से हटाया गया भारतीय नक्शे पर खून वाला सीन, CBFC ने दिए कई बदलाव के निर्देश

    नई दिल्ली । आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की फिल्म उड़ता तीर 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। रिलीज से पहले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने फिल्म को UA 13+ सर्टिफिकेट दे दिया है। हालांकि, प्रमाणन की प्रक्रिया के दौरान फिल्म के अंतिम संपादन में कुछ बदलाव करने के निर्देश भी दिए गए। इनमें सबसे अहम बदलाव भारतीय नक्शे पर खून के छींटे दिखाने वाले दृश्य को हटाना है। फिल्म के निर्माताओं ने बोर्ड के निर्देश के अनुसार इस दृश्य को फिल्म से निकाल दिया है। इसके बाद दृश्य के बीच आने वाले अंतर को भरने के लिए उससे पहले वाले शॉट की अवधि बढ़ा दी गई है।

    फिल्म की रिलीज में कुछ ही दिन बाकी रहने के बीच किए गए इन बदलावों को लेकर चर्चा हो रही है। करण जौहर के प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म अपने ट्रेलर के सामने आने के बाद से ही चर्चा में रही है। इसकी कहानी एक पाकिस्तानी जासूस के इर्द-गिर्द घूमती है, जो भारत आने के बाद अपनी याददाश्त खो देता है और खुद को भारतीय देशभक्त समझने लगता है।

    फिल्म में भारतीय नक्शे पर खून के छींटे दिखाने वाला दृश्य हटाने के अलावा धूम्रपान और शराब के इस्तेमाल से संबंधित चेतावनियां जोड़ने के निर्देश भी दिए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फिल्म के पांच दृश्यों में धूम्रपान विरोधी अस्वीकरण शामिल करने की बात कही गई है। इसके अलावा एक अन्य दृश्य में एक किरदार को शराब पीते हुए दिखाया गया है। इस दृश्य के लिए निर्माताओं को शराब के सेवन से संबंधित चेतावनी जोड़ने को कहा गया है। इन बदलावों का उद्देश्य फिल्म में संबंधित दृश्यों के साथ जरूरी चेतावनियां प्रदर्शित करना है।

    भारतीय नक्शे वाले दृश्य को हटाने के लिए संपादन में बदलाव किया गया है, जबकि बाकी निर्देशों के तहत चेतावनी संदेश शामिल किए जाने हैं। फिल्म के अंतिम संस्करण में इन बदलावों के बाद ही इसे प्रमाणन दिया गया है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में चेतावनियों के अंतिम स्वरूप या स्क्रीन पर उनके प्रदर्शित होने की अवधि के बारे में जानकारी नहीं दी गई है।

    सीबीएफसी ने फिल्म के संवादों या एक्शन दृश्यों में किसी तरह का बदलाव करने का निर्देश नहीं दिया है। बताए गए संपादन और चेतावनियों से जुड़े बदलावों के बाद फिल्म की कुल अवधि 137.41 मिनट निर्धारित की गई है। यह अवधि लगभग दो घंटे, 17 मिनट और 31 सेकंड होती है। इस तरह दर्शकों को फिल्म देखने के लिए करीब सवा दो घंटे का समय देना होगा। फिल्म की लंबाई और प्रमाणन से जुड़ी जानकारी रिलीज से ठीक पहले सामने आई है।

    आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की मुख्य भूमिकाओं वाली इस फिल्म का निर्देशन आकाश कौशिक ने किया है। फिल्म में गुलशन ग्रोवर, राम कपूर, राहुल बोस और सुप्रिया पिलगांवकर भी नजर आएंगे। फिल्म की कहानी में जासूसी, पहचान और याददाश्त खोने की स्थिति प्रमुख भूमिका निभाती है। हालांकि, सेंसर बोर्ड ने कहानी के इन पहलुओं या फिल्म के संवादों में किसी बदलाव की मांग नहीं की है।

    उड़ता तीर एक और वजह से भी खास है। इसमें अभिनेता मुकुल देव आखिरी बार बड़े पर्दे पर नजर आएंगे। मुकुल देव का मई 2025 में निधन हो गया था। फिल्म में उनकी मौजूदगी दर्शकों के लिए उनके अभिनय को बड़े पर्दे पर देखने का एक और अवसर होगी। फिल्म में आयुष्मान खुराना और सारा अली खान के साथ कई अन्य कलाकार भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे।

    रिलीज से पहले सेंसर बोर्ड के निर्देशों के तहत किए गए बदलावों के बाद अब फिल्म 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में आने वाली है। आयुष्मान खुराना के प्रशंसकों के लिए यह उनकी आगामी फिल्मों में से एक है। इस फिल्म के बाद अभिनेता ये प्रेम मोल लिया और मुपापा में भी नजर आएंगे। फिलहाल उड़ता तीर के प्रमाणन से जुड़ी जानकारी में भारतीय नक्शे वाले दृश्य को हटाने, धूम्रपान और शराब संबंधी चेतावनियां जोड़ने तथा फिल्म की अंतिम अवधि स्पष्ट होने की पुष्टि की गई है।