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  • यामी गौतम की नई फिल्म 'नई नवेली' का मोशन पोस्टर जारी, दशहरा के मौके पर 16 अक्टूबर को होगी रिलीज

    यामी गौतम की नई फिल्म 'नई नवेली' का मोशन पोस्टर जारी, दशहरा के मौके पर 16 अक्टूबर को होगी रिलीज

    नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री यामी गौतम की अगली फिल्म ‘नई नवेली’ की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज और कलर येलो प्रोडक्शंस के बैनर तले बनने वाली इस फैंटसी ड्रामा फिल्म का एक आकर्षक मोशन पोस्टर जारी किया गया है। विगत कुछ वर्षों में लीक से हटकर भूमिकाएं निभाने के लिए सराही गई यामी गौतम इस फिल्म में एक अनूठे और कौतूहल पैदा करने वाले किरदार में नजर आएंगी।

    फिल्म निर्माताओं द्वारा जारी जानकारी के अनुसार यह फिल्म एक नवविवाहिता की कहानी पर आधारित है, जो विवाह के उपरांत अपने ससुराल मेरठ पहुंचती है। उसके आगमन से परिवार में खुशियों का माहौल बन जाता है और घर की खोई हुई रौनक वापस लौट आती है। हालांकि, कहानी में नया मोड़ तब आता है जब दुल्हन का देवर उसके अत्यधिक आदर्शवादी व्यवहार पर संदेह व्यक्त करता है और उसे एक रहस्यमयी शक्ति के रूप में देखने लगता है। इसके बाद परिवार के बीच छुपा हुआ रहस्य उजागर होता है।

    इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का निर्देशन बालाजी मोहन कर रहे हैं, जबकि इसकी पटकथा हिमांशु शर्मा और दिव्य निधि शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से लिखी गई है। फिल्म का निर्माण जाने-माने फिल्ममेकर आनंद एल राय कर रहे हैं और इसमें संगीत जीवी प्रकाश कुमार का होगा। निर्माताओं ने घोषणा की है कि यह फिल्म इस वर्ष विजयादशमी के अवसर पर 16 अक्टूबर को देश भर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी।

    फिल्म के निर्माता आनंद एल राय ने इस परियोजना के बारे में बात करते हुए कहा कि यह एक ऐसी कथावस्तु है जो दर्शकों को हर मोड़ पर चकित करेगी। उन्होंने यामी गौतम के चयन को भूमिका के लिए सर्वथा उपयुक्त बताया और कहा कि उनके अभिनय में गंभीरता और चंचलता का बेहतरीन संतुलन है, जो इस काल्पनिक और ड्रामा से भरपूर किरदार को जीवंत करने के लिए आवश्यक था।

    हालिया दौर में विभिन्न जॉनर की फिल्मों में अपनी छाप छोड़ने के बाद यामी गौतम के फैंस इस नए अवतार को लेकर काफी उत्साहित हैं। फिल्म का मोशन पोस्टर जारी होते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और इसके हॉरर तथा फैंटसी के संयोजन को लेकर दर्शकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

     प्रमुख मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में दशहरा पर्व के दौरान फिल्म की रिलीज को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि त्योहारों के मौसम में यह अनूठी पारिवारिक फैंटसी ड्रामा फिल्म बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को आकर्षित करने में सफल सिद्ध होगी।

  • अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने बाबा रामदेव के बयान पर किया तीखा पलटवार, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जताई आपत्ति

    अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने बाबा रामदेव के बयान पर किया तीखा पलटवार, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जताई आपत्ति


    नई दिल्ली ।
    भारतीय जनता पार्टी की सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री कंगना रनौत तथा योग गुरु बाबा रामदेव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। हाल ही में युवाओं और जेन जी श्रेणी के संदर्भ में दिए गए एक विवादित बयान को लेकर दोनों हस्तियों के बीच तीखी बयानबाजी सामने आई है। बाबा रामदेव द्वारा कंगना के अतीत और जीवनशैली को लेकर दिए गए वक्तव्य के बाद अभिनेत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन पर कड़ा पलटवार किया है।

    यह पूरा विवाद उस समय गहराया जब एक मीडिया साक्षात्कार के दौरान बाबा रामदेव से कंगना रनौत के उस बयान के बारे में पूछा गया, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारी युवाओं के आचरण को लेकर टिप्पणी की थी। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए योग गुरु ने कहा था कि किसी को भी युवाओं के लिए अनुचित शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने अभिनेत्री के पिछले जीवन और कारनामों का उल्लेख करते हुए इस प्रकार के बयानों से बचने की सलाह दी थी।

    बाबा रामदेव के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कंगना रनौत ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक विस्तृत संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि उनके व्यक्तिगत जीवन, जवानी या निजी कक्ष के बारे में अफवाहों और गॉसिप के आधार पर अनुमान नहीं लगाया जाना चाहिए। अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत आचरण और चरित्र के विषय में उन्हें सलाह देने की आवश्यकता नहीं है और उनका सार्वजनिक तथा व्यक्तिगत जीवन पूरी तरह से स्पष्ट है।

    अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में अतीत के कुछ कानूनी घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके खिलाफ झूठे दावों या भ्रामक प्रचार से संबंधित कोई अदालती आदेश मौजूद नहीं है। उन्होंने बल देकर कहा कि बिना पक्के तथ्यों और केवल अनुमानों के आधार पर किसी भी जनप्रतिनिधि या कलाकार के चरित्र पर टिप्पणी करना अनुचित है।

    उल्लेखनीय है कि यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र प्रदर्शनों के दौरान कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की थी। उस पोस्ट में उन्होंने सार्वजनिक आचरण की मर्यादा तोड़ने वाले कुछ प्रदर्शनकारियों के संदर्भ में कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था। हालांकि, चौतरफा आलोचना के बाद उन्होंने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी पूरी युवा पीढ़ी या सभी युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि केवल उन लोगों तक सीमित थी जिन्होंने मर्यादा का उल्लंघन किया था।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हलकों में दोनों प्रमुख हस्तियों के बीच चल रहे इस वैचारिक टकराव की व्यापक चर्चा हो रही है। इस घटनाक्रम के बाद से सोशल मीडिया पर भी विभिन्न वर्गों द्वारा अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जिससे यह विषय लगातार चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।

  • उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी डॉक्टर शाम को अस्पतालों में कर सकेंगे निजी प्रैक्टिस, माननी होंगी तीन शर्तें..

    उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी डॉक्टर शाम को अस्पतालों में कर सकेंगे निजी प्रैक्टिस, माननी होंगी तीन शर्तें..

    नई दिल्ली । उत्तराखंड सरकार राज्य की स्वास्थ सेवाओं को अधिक सुदृढ़ और आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों को शाम के समय अस्पताल परिसर के भीतर ही निजी प्रैक्टिस करने की सशर्त छूट प्रदान की जाएगी। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य मरीजों को किफायती दर पर शाम के वक्त भी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    वर्तमान में राज्य के सरकारी डॉक्टरों के लिए निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू है, जिसके एवज में सरकार उन्हें नियमित वेतन के साथ नॉन प्रैक्टिस अलाउंस का भुगतान करती है। हालांकि, कतिपय व्यावहारिक समस्याओं और मरीजों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शाम के समय अस्पतालों के बुनियादी ढांचे का उपयोग करते हुए यह सुविधा देने का मॉडल तैयार किया है।

    इस नई व्यवस्था को पूरी तरह से ऐच्छिक रखा जाएगा और इसके संचालन के लिए तीन प्रमुख शर्तें अनिवार्य की गई हैं। पहली शर्त के अनुसार डॉक्टरों को मरीजों से बेहद न्यूनतम परामर्श शुल्क लेने की अनुमति होगी। दूसरी शर्त यह है कि परामर्श के दौरान डॉक्टर बाहर की दवाइयां नहीं लिख सकेंगे, बल्कि अस्पताल में उपलब्ध या जेनेरिक दवाएं ही सुझानी होंगी। तीसरी शर्त के तहत यदि मरीज को किसी प्रकार के ऑपरेशन या गंभीर इलाज की आवश्यकता होती है, तो वह प्रक्रिया केवल सरकारी अस्पताल में ही पूरी की जाएगी।

    स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गई है और जल्द ही इसे औपचारिक स्वीकृति के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से डॉक्टरों को अस्पताल परिसर के बाहर अनधिकृत क्लिनिक चलाने की आवश्यकता नहीं होगी और अस्पताल के संसाधनों का भी अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    विशेष रूप से पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में दोपहर दो बजे के बाद सरकारी अस्पतालों में सेवाएं सीमित हो जाती थीं। नई नीति लागू होने से पर्वतीय जिलों के निवासियों को शाम के समय भी विशेषज्ञ डॉक्टरों का परामर्श अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में ही प्राप्त हो सकेगा। इससे निजी अस्पतालों और महंगे क्लीनिकों पर मरीजों की निर्भरता काफी हद तक कम होगी।

    मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के स्वास्थ्य विभागों द्वारा भी इस प्रकार के हाइब्रिड हेल्थकेयर मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों की दक्षता को बढ़ाया जा सके। उत्तराखंड में इस निर्णय के लागू होने से न केवल आम मरीजों को कम खर्च में बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि सरकारी डॉक्टरों की कार्यक्षमता का भी राज्य के स्वास्थ्य ढांचे के हित में सही उपयोग हो सकेगा।

  • कैबिनेट मंत्रियों का सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड जारी, डिजिटल एंगेजमेंट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने नंबर-1

    कैबिनेट मंत्रियों का सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड जारी, डिजिटल एंगेजमेंट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने नंबर-1

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश के युवाओं और नई पीढ़ी के साथ अपना संपर्क तथा संचार मजबूत करने के लिए डिजिटल माध्यमों पर जोर देना तेज कर दिया है। इसी रणनीति के तहत केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सभी मंत्रियों का सोशल मीडिया परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया गया। लगभग साढ़े तीन महीने के कामकाज और डिजिटल गतिविधियों के आधार पर तैयार की गई इस रैंकिंग सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले स्थान पर रहे हैं।

    मंत्रियों का यह विशेष रिपोर्ट कार्ड 1 मई से 15 अगस्त 2026 तक की अवधि के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किए गए कार्यों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें मुख्य रूप से इंस्टाग्राम, एक्स, लिंक्डइन और फेसबुक जैसी प्रमुख नेटवर्किंग साइट्स पर मंत्रियों की सक्रियता का गहन विश्लेषण किया गया। रैंकिंग तय करने के लिए दैनिक पोस्ट की संख्या, यूजर्स एंगेजमेंट, लाइक्स और फॉलोअर्स में बढ़ोतरी जैसे महत्वपूर्ण मानकों को आधार बनाया गया।

    रिपोर्ट में केवल सत्ता पक्ष के मंत्रियों का ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख राजनीतिक चेहरों का भी तुलनात्मक अध्ययन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नितिन गडकरी और कंगना रनौत जैसे नेताओं ने उच्च रैंकिंग हासिल की। वहीं विपक्षी नेताओं में राहुल गांधी, असदुद्दीन ओवैसी और अरविंद केजरीवाल भी शीर्ष डिजिटल प्रभाव वाले नेताओं में शामिल रहे।

    हाल के समय में राजधानी दिल्ली में हुए छात्र आंदोलनों के बाद सरकार ने अपनी डिजिटल संचार नीति में व्यापक बदलाव किया है। अब पारंपरिक और औपचारिक राजनीतिक बयानों के स्थान पर लघु रील्स, अनौपचारिक संवाद और क्रिएटर फॉर्मेट वाले वीडियो कंटेंट पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य युवाओं की पसंद के अनुसार सरल और प्रभावकारी भाषा में अपनी बात पहुंचाना है।

    इसी कड़ी में विभिन्न मंत्रालयों को नए और लोकप्रिय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। डिजिटल आउटरीच कार्यक्रम के तहत विदेश मंत्रालय ने भी हाल ही में स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म पर अपना आधिकारिक अकाउंट शुरू किया है। इसके अलावा कैबिनेट में यह निर्णय भी लिया गया है कि केंद्रीय मंत्री सीधे संवाद के लिए देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों का दौरा करेंगे और शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली पर छात्रों से चर्चा करेंगे।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में मंत्रियों के इस प्रत्यक्ष और डिजिटल संवाद कार्यक्रम को लागू करने की योजना है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई रणनीति से सरकार और युवा वर्ग के बीच सीधे संवाद का एक पारदर्शी माध्यम स्थापित होगा, जिससे सरकारी योजनाओं और नीतियों की जानकारी युवाओं तक तेजी से पहुंचेगी।

  • विमान चालकों के लिए कड़े होंगे नियम, गांजा कांड के बाद सरकार और एयर इंडिया ने बढ़ाई सख्ती

    विमान चालकों के लिए कड़े होंगे नियम, गांजा कांड के बाद सरकार और एयर इंडिया ने बढ़ाई सख्ती

    नई दिल्ली । हजारों फीट की ऊंचाई पर यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नागर विमानन महानिदेशालय ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में घटित एक गंभीर विमान दुर्घटना के बाद सरकार ने सभी एयरलाइंस के फ्लाइट क्रू और विमान चालकों के मादक पदार्थ परीक्षण को और अधिक सख्त करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब आकस्मिक ड्रग टेस्ट के दायरे को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत से अधिक करने की योजना बनाई जा रही है।

    यह प्रशासनिक पहल फुकेत से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई 2379 में हुई एक गंभीर घटना के बाद सामने आई है। उड़ान के दौरान विमान में अचानक तेज हलचल हुई और वह हवा में लगभग 300 फीट नीचे आ गया। इस हादसे में तीन शिशुओं सहित 137 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में से कई लोग घायल हो गए थे। जांच के दौरान मुख्य विमान चालक के शरीर में भांग या गांजे जैसे वर्जित नशीले पदार्थ की पुष्टि हुई थी।

    विमानन सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले को देखते हुए विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों की अनिवार्य जांच शुरू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के उड़ान परिचालन विभाग ने सभी पायलटों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्जित दवाओं और मादक पदार्थों के सेवन की जांच अब शत-प्रतिशत चालकों के लिए लागू होगी। यह प्रक्रिया कंपनी की गुरुग्राम अकादमी, फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर और संबंधित एयरलाइंस कार्यालयों में संचालित की जा रही है।

    विमानन नियामक डीजीसीए द्वारा सितंबर 2021 में मादक पदार्थों की जांच से संबंधित नियम जारी किए गए थे, जिन्हें जनवरी 2022 से प्रभावी रूप से लागू किया गया था। वर्तमान नियमों में औचक जांच का प्रावधान है, लेकिन हालिया सुरक्षा चूक को देखते हुए केंद्र सरकार नियमों को अधिक कठोर बनाने पर विचार कर रही है। नए प्रस्ताव के तहत परीक्षणों की आवृत्ति और जांच का दायरा काफी हद तक बढ़ा दिया जाएगा।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों पर परिचालन करने वाले उड़ानों में भी यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि क्रू सदस्यों के नियमित और आकस्मिक परीक्षण से उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत होगी और इस प्रकार की लापरवाही पर पूर्ण विराम लग सकेगा।

    विमानन मंत्रालय और संबंधित एयरलाइंस का मानना है कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जांच की नई व्यवस्था से न केवल एयरलाइंस के अनुशासन में सुधार होगा, बल्कि उड़ानों के दौरान यात्रियों का विश्वास भी पुनः मजबूत होगा। सरकार आने वाले दिनों में इस संबंध में नई मानक संचालन प्रक्रिया जारी कर सकती है।

  • राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों के लिए एनसीईआरटी समिति का पुनर्गठन, नवंबर तक आएगी 11वीं कक्षा की नई किताब

    राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों के लिए एनसीईआरटी समिति का पुनर्गठन, नवंबर तक आएगी 11वीं कक्षा की नई किताब

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने स्कूली शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी और प्रासंगिक बनाने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया है। परिषद ने कक्षा 11वीं और 12वीं की राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकें तैयार करने के लिए 20 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम का पुनर्गठन किया है। इस नई समिति में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, स्कूल शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

    पुनर्गठित समिति में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, इग्नू, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली, जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल, पांडिचेरी यूनिवर्सिटी और उत्कल यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ शिक्षाविद शामिल हैं। इस 20 सदस्यीय टीम की संरचना में विविध शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले विशेषज्ञों का समावेश किया गया है, ताकि अध्ययन सामग्री को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप संतुलित और समृद्ध बनाया जा सके।

    पाठ्यपुस्तक विकास दल की कमान प्रसिद्ध राजनीतिक विश्लेषक और शिक्षाविद संदीप शास्त्री को सौंपी गई है। समिति को दोनों कक्षाओं की पुस्तकों के निर्माण के लिए स्पष्ट समयसीमा प्रदान की गई है। इसके तहत कक्षा 11वीं की राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक को 30 नवंबर 2026 तक अंतिम रूप दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि कक्षा 12वीं की नई पुस्तक 30 जुलाई 2027 तक तैयार की जाएगी।

    एनसीईआरटी की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 के तहत संचालित की जाएगी। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह सामाजिक विज्ञान, भारतीय ज्ञान प्रणाली, पर्यावरण शिक्षा और आधुनिक शिक्षाशास्त्र से जुड़े विभिन्न समूहों के मार्गदर्शन में कार्य करे। तैयार की जाने वाली सामग्री को अंतिम स्वीकृति देने, प्रकाशित करने और वितरित करने का दायित्व परिषद के पास ही रहेगा।

    शैक्षणिक सुधारों की इस श्रृंखला के तहत मध्य प्रदेश सहित देश भर के स्कूलों में नए सत्र के अनुसार पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। नई पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा के दौरान समावेशन, सांस्कृतिक जुड़ाव, आधुनिक मूल्यांकन पद्धतियों और भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है।

    अकादमिक जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि विषय विशेषज्ञों के व्यापक अनुभव से तैयार होने वाली ये नई किताबें विद्यार्थियों को राजनीतिक सिद्धांतों और भारतीय शासन व्यवस्था की गहरी समझ प्रदान करेंगी। एनसीईआरटी का प्राथमिक उद्देश्य विद्यार्थियों को अद्यतन जानकारी के साथ गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना है।

  • प्रभास और ओम राउत की नई फिल्म की खबर कितनी सच? जानिए क्यों फिर चर्चा में आई ‘आदिपुरुष’ वाली जोड़ी

    प्रभास और ओम राउत की नई फिल्म की खबर कितनी सच? जानिए क्यों फिर चर्चा में आई ‘आदिपुरुष’ वाली जोड़ी


    नई दिल्ली। साउथ सिनेमा के सुपरस्टार प्रभास और फिल्ममेकर ओम राउत की जोड़ी एक बार फिर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें तेजी से वायरल हुईं कि दोनों साल 2023 में रिलीज हुई फिल्म आदिपुरुष के बाद एक नए प्रोजेक्ट के लिए दोबारा साथ आ सकते हैं। इस खबर ने प्रभास के फैंस के बीच उत्सुकता बढ़ा दी क्योंकि आदिपुरुष को लेकर रिलीज से पहले काफी उम्मीदें थीं। हालांकि फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों की ओर से मिली प्रतिक्रिया बेहद मिश्रित रही थी। अब सामने आई ताजा जानकारी इन अटकलों को अलग दिशा देती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रभास और ओम राउत की किसी नई फिल्म को लेकर फिलहाल कोई प्रोजेक्ट तय नहीं है। Times Now Navbharat ने भी अपनी रिपोर्ट में इन दोनों के दोबारा साथ काम करने की खबरों को अफवाह बताया है।

    प्रभास और ओम राउत ने पहली बार आदिपुरुष के लिए साथ काम किया था। यह फिल्म रामायण से प्रेरित कहानी पर आधारित थी और इसमें प्रभास ने राघव की भूमिका निभाई थी। कृति सैनन जानकी और सैफ अली खान लंकेश के किरदार में नजर आए थे। फिल्म को बड़े बजट और भव्य विजुअल्स के साथ तैयार किया गया था। रिलीज से पहले इसके टीजर और प्रमोशनल सामग्री को लेकर जबरदस्त चर्चा थी लेकिन बाद में इसके विजुअल इफेक्ट्स किरदारों के लुक और संवादों को लेकर सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई। फिल्म के संवादों और कुछ दृश्यों को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ।

    आदिपुरुष के शुरुआती दौर में फिल्म को लेकर उम्मीदें इसलिए भी काफी ज्यादा थीं क्योंकि प्रभास बाहुबली के बाद देशभर में अपनी पहचान बना चुके थे। ओम राउत इससे पहले तान्हाजी जैसी सफल ऐतिहासिक फिल्म का निर्देशन कर चुके थे। ऐसे में दोनों के साथ आने को लेकर दर्शकों को एक बड़े सिनेमाई अनुभव की उम्मीद थी। लेकिन आदिपुरुष की रिलीज के बाद फिल्म को लेकर उम्मीदों और दर्शकों की प्रतिक्रिया के बीच बड़ा अंतर दिखाई दिया। इसके बाद प्रभास और ओम राउत के दोबारा साथ आने की संभावना को लेकर समय समय पर सोशल मीडिया पर अटकलें लगती रही हैं।

    अब वायरल हो रही नई खबर ने एक बार फिर इसी चर्चा को हवा दी है। हालांकि उपलब्ध ताजा रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से साफ किया गया है कि प्रभास और ओम राउत के बीच फिलहाल किसी नए प्रोजेक्ट की योजना नहीं है। इसलिए इस समय दोनों के री-यूनियन की खबर को आधिकारिक घोषणा के तौर पर देखना सही नहीं होगा। जब तक अभिनेता या निर्देशक की टीम की तरफ से कोई पुष्टि नहीं आती तब तक यह केवल सोशल मीडिया और मनोरंजन रिपोर्ट्स से जुड़ी अटकल ही रहेगी।

    वहीं प्रभास इस समय कई बड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर व्यस्त हैं। उनकी फिल्मों की लाइनअप लगातार चर्चा में बनी हुई है। इनमें स्पिरिट खास तौर पर सुर्खियों में है जिसे संदीप रेड्डी वांगा निर्देशित कर रहे हैं। फिल्म को लेकर रिलीज डेट से जुड़ी अटकलों के बीच निर्माताओं ने 5 मार्च 2027 की रिलीज डेट पर कायम रहने की पुष्टि की है। इससे यह भी साफ होता है कि प्रभास के पास फिलहाल बड़े प्रोजेक्ट्स की लंबी सूची है।

    ऐसे में प्रभास और ओम राउत की जोड़ी की वापसी की खबर भले ही फैंस के बीच चर्चा का विषय बन गई हो लेकिन अभी इसे सच मानने की कोई आधिकारिक वजह नहीं है। आदिपुरुष के बाद दोनों के करियर अलग दिशा में आगे बढ़ चुके हैं और फिलहाल किसी नए प्रोजेक्ट में साथ आने की पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले समय में अगर दोनों किसी फिल्म की घोषणा करते हैं तो निश्चित तौर पर यह खबर फिल्म इंडस्ट्री और प्रभास के फैंस के लिए बड़ी चर्चा बन सकती है।

  • मौसम विभाग ने उत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट किया जारी, पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ का बढ़ा खतरा

    मौसम विभाग ने उत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट किया जारी, पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ का बढ़ा खतरा

    नई दिल्ली ।देश के कई हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के तीव्र होने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में अगले तीन से चार दिनों तक मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश के चलते पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और मैदानी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी और दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों में 20 से 25 अगस्त के बीच भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। पहाड़ी राज्यों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है, जिसको देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने आम नागरिकों को सतर्क रहने और आवश्यक न होने पर यात्रा से बचने की सलाह दी है।

    उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में भारी बारिश के कारण बड़ा नुकसान हुआ है। धारचूला-तवाघाट मार्ग पर स्थित वैली ब्रिज टूटकर गिर जाने से चीन सीमा से सटे दारमा, व्यास और चौंदास घाटियों के दर्जनों गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क पूरी तरह कट गया है। भूस्खलन और मलबे के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है और राहत कार्य शुरू कर दिए गए हैं।

    हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। गांदरबल क्षेत्र में बादल फटने की घटना के बाद निचले इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो गई। वहीं कालका-शिमला रेलखंड पर मलबा आने से रेल यातायात प्रभावित हुआ है। मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में लगातार हो रही वर्षा से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।

    मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में भी मानसून की गतिविधियां बेहद सक्रिय बनी हुई हैं। राज्य के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में आगामी दिनों में तेज हवाओं के साथ भारी वर्षा का अनुमान जताया गया है, जिससे नदी-नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी हो सकती है। राज्य शासन ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है।

    पूर्वी भारत के राज्यों जैसे झारखंड, बिहार और ओडिशा में भी भारी बारिश और बाढ़ का प्रभाव देखा जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रहेगी। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

  • माता-पिता की संपत्ति पर नहीं चलेगा बच्चों का मनमाना हक, सुप्रीम कोर्ट ने बेदखली के ट्रिब्यूनल अधिकार को ठहराया सही

    माता-पिता की संपत्ति पर नहीं चलेगा बच्चों का मनमाना हक, सुप्रीम कोर्ट ने बेदखली के ट्रिब्यूनल अधिकार को ठहराया सही

    नई दिल्ली ।देश की सर्वोच्च अदालत ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007’ के तहत गठित ट्रिब्यूनल के पास यह पूरा अधिकार है कि वह बुजुर्गों की संपत्ति से उनके बच्चों को बेदखल करने का आदेश जारी कर सके।

    शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि ट्रिब्यूनल को लगता है कि माता-पिता के भरण-पोषण, सुरक्षा और सम्मानपूर्वक जीवन के लिए बच्चों को बेदखल करना आवश्यक है, तो वह ऐसा आदेश दे सकता है। अदालत ने अपने फैसले में रेखांकित किया कि बढ़ती उम्र किसी भी स्थिति में असुरक्षा का कारण नहीं बननी चाहिए। सभ्य समाज का असली पैमाना यही है कि वह अपने बुजुर्गों को कितना सम्मान, आदर और सुरक्षा प्रदान करता है।

    यह महत्वपूर्ण फैसला लखनऊ के विकासनगर निवासी रविकांत गुप्ता द्वारा दाखिल की गई याचिका का निपटारा करते हुए दिया गया। अपीलकर्ता अपने रिहायशी मकान के मालिक हैं और उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उच्च न्यायालय ने उनके बेटे और बहू के खिलाफ जारी बेदखली के आदेश को रद्द कर दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि उच्च न्यायालय ने ट्रिब्यूनल के बेदखली के आदेश में हस्तक्षेप करके गलती की थी। अदालत ने माना कि यह एक स्थापित कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और शांतिपूर्ण जीवन को सुनिश्चित करने के लिए ट्रिब्यूनल को बेदखली का निर्देश देने की पूरी शक्तियां प्राप्त हैं।

    पीठ ने अपने दूरगामी फैसले में सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों और सभ्यताओं में वरिष्ठ नागरिकों को ज्ञान, अनुभव और सामूहिक स्मृति के अमूल्य भंडार के रूप में देखा गया है। ऐसे में उनकी संपत्ति, भरण-पोषण और गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में बुजुर्गों के साथ होने वाले संपत्ति संबंधी विवादों और पारिवारिक प्रताड़ना के मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मील का पत्थर माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उन वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी जो अपने ही बच्चों द्वारा अपनी ही संपत्ति में उपेक्षित या प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं।

  • रामायण के बाद ब्रह्मास्त्र 2 की शूटिंग शुरू करेंगे रणबीर कपूर, अमृता के किरदार के लिए दीपिका पादुकोण से चर्चा

    रामायण के बाद ब्रह्मास्त्र 2 की शूटिंग शुरू करेंगे रणबीर कपूर, अमृता के किरदार के लिए दीपिका पादुकोण से चर्चा


    नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा जगत के प्रमुख अभिनेता रणबीर कपूर की बहुचर्चित फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ के दूसरे भाग को लेकर नया अपडेट सामने आया है। साल 2022 में प्रदर्शित हुई इस सीरीज के पहले भाग की सफलता के बाद अब निर्देशक अयान मुखर्जी ने इसके सीक्वल पर काम तेज कर दिया है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार अभिनेता अपनी आगामी फिल्म ‘रामायण’ की शूटिंग पूरी करने के बाद ‘ब्रह्मास्त्र 2’ के सेट पर लौटेंगे।

    फिल्म उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक रणबीर कपूर नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही ‘रामायण पार्ट 2’ की शूटिंग जनवरी 2027 तक पूरी कर लेंगे। इसके तुरंत बाद वे अयान मुखर्जी की इस काल्पनिक और फंतासी आधारित फिल्म पर काम शुरू करेंगे। इस सीक्वल में रणबीर कपूर दोहरी भूमिका में नजर आ सकते हैं, जिनमें वे ‘शिवा’ और ‘देव’ दोनों महत्वपूर्ण किरदारों को पर्दे पर जीवंत करेंगे।

    इस सीक्वल से जुड़ी सबसे बड़ी खबर स्टारकास्ट में नए चेहरे को शामिल करने को लेकर है। अयान मुखर्जी इस फिल्म के लिए प्रसिद्ध अभिनेत्री दीपिका पादुकोण से बातचीत कर रहे हैं। उन्हें फिल्म में ‘अमृता’ के नए और शक्तिशाली किरदार के लिए पेश करने की योजना है। फिल्म की रचनात्मक टीम का मानना है कि इस भूमिका के लिए दीपिका सबसे उपयुक्त विकल्प हैं, हालांकि अभी इस संबंध में आधिकारिक घोषणा होना बाकी है।

    फिल्म के मुख्य किरदारों में आलिया भट्ट एक बार फिर ‘ईशा’ की भूमिका में वापसी करेंगी। पहले भाग की तरह ही इसके दूसरे भाग को भी बहुत बड़े पैमाने पर निर्मित करने की योजना बनाई गई है। सीक्वल में कुछ नए पौराणिक और काल्पनिक तत्वों को जोड़ने के साथ-साथ दृश्य प्रभावों को पहले से अधिक भव्य और आधुनिक बनाया जाएगा, ताकि दर्शकों को एक नया सिनेमाई अनुभव मिल सके।

    वर्तमान में रणबीर कपूर अपनी भव्य फिल्म ‘रामायण’ के प्रचार और निर्माण कार्यों में व्यस्त हैं। इस विशाल बजट वाली फिल्म में वे भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि साई पल्लवी, रवि दुबे और यश अन्य प्रमुख भूमिकाओं में हैं। यह दो भागों में बनने वाली भारत की सबसे महंगी फिल्मों में से एक है, जिसका पहला भाग इसी वर्ष दिवाली के अवसर पर सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जाएगा।

    इसके अलावा रणबीर कपूर मशहूर निर्देशक संजय लीला भंसाली की आगामी फिल्म ‘लव एंड वॉर’ में भी नजर आएंगे, जिसमें उनके साथ आलिया भट्ट और विक्की कौशल मुख्य भूमिकाओं में हैं। मध्य प्रदेश सहित देश भर के फिल्म प्रेमियों के बीच रणबीर कपूर की इन सभी आगामी बड़ी फिल्मों को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही है।