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  • शम्मी कपूर की 95वीं जयंती आज, कभी एक दिन में पी जाते थे 100 सिगरेट, जानिए प्यार से लेकर ‘याहू’ कनेक्शन तक के दिलचस्प किस्से

    शम्मी कपूर की 95वीं जयंती आज, कभी एक दिन में पी जाते थे 100 सिगरेट, जानिए प्यार से लेकर ‘याहू’ कनेक्शन तक के दिलचस्प किस्से


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ सितारे ऐसे रहे हैं जिन्होंने अपनी अदाकारी से दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ फिल्मों में नायक की छवि को भी नया रूप दिया। शम्मी कपूर उन्हीं कलाकारों में से एक थे। अपने खास हेयरस्टाइल बेफिक्र अंदाज जोशीले डांस और शरारती अदाकारी के दम पर उन्होंने ऐसी पहचान बनाई जो आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है। 21 अक्टूबर को उनकी 95वीं जयंती के मौके पर उनके फिल्मी सफर और निजी जिंदगी से जुड़े कई दिलचस्प किस्से याद किए जा रहे हैं। फिल्म जंगली में उनका मशहूर अंदाज और जोरदार आवाज में बोला गया याहू आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार पलों में गिना जाता है।

    शम्मी कपूर का जन्म 21 अक्टूबर 1931 को मुंबई में हुआ था। उनका असली नाम शमशेर राज कपूर था। वह हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के बेटे और राज कपूर तथा शशि कपूर के भाई थे। कपूर परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद शम्मी के लिए अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं था। उन्होंने फिल्मों में आने से पहले पृथ्वी थिएटर में काम किया और जूनियर कलाकार के तौर पर हर महीने 50 रुपये वेतन पाया। इसी अनुभव ने उन्हें अभिनय की दुनिया को करीब से समझने का अवसर दिया।

    शम्मी कपूर ने 1953 में फिल्म जीवन ज्योति से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। उनकी शुरुआती फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा सकीं। रेल का डिब्बा लैला मजनू ठोकर और शमा परवाना जैसी फिल्मों में काम करने के बाद भी वह बड़ी सफलता से दूर रहे। लगातार मिल रही असफलताओं के बीच उन्होंने अपनी अभिनय शैली बदलने का फैसला किया। उस दौर में जहां अधिकतर नायक गंभीर और पारंपरिक अंदाज में दिखाई देते थे वहीं शम्मी कपूर ने अपने किरदारों में मस्ती ऊर्जा और बेफिक्री को शामिल किया।

    साल 1957 में आई फिल्म तुमसा नहीं देखा उनके करियर का अहम मोड़ साबित हुई। इसके बाद उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ने लगी। जंगली प्रोफेसर चाइना टाउन कश्मीर की कली तीसरी मंजिल जानवर और ब्रह्मचारी जैसी फिल्मों ने उन्हें दर्शकों का चहेता बना दिया। उन्होंने करीब 100 फिल्मों में काम किया और अपनी अलग पहचान स्थापित की। उनकी नृत्य शैली और पर्दे पर दिखाई देने वाली जबरदस्त ऊर्जा के कारण उन्हें भारत का एल्विस प्रेस्ली भी कहा गया। अमेरिकी गायक और अभिनेता एल्विस प्रेस्ली की रॉक एंड रोल शैली से प्रभावित उनका अंदाज उस समय हिंदी सिनेमा के लिए नया था।

    शम्मी कपूर की सफलता में संगीत का भी बड़ा योगदान रहा। मोहम्मद रफी की आवाज में गाए गए बदन पे सितारे आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा आसमान से आया फरिश्ता और चाहे कोई मुझे जंगली कहे जैसे गीत उनकी पहचान बन गए। शम्मी केवल गानों पर होंठ हिलाने तक सीमित नहीं रहते थे बल्कि चेहरे के भावों और पूरे शरीर की हरकतों से गीतों को जीवंत कर देते थे। संगीत की उनकी समझ ने उनके अभिनय को और प्रभावशाली बनाया।

    उनकी फिल्म जंगली के गीत में इस्तेमाल हुआ याहू शब्द इतना लोकप्रिय हुआ कि बाद में इंटरनेट कंपनी याहू के नाम को लेकर भी मजेदार किस्सा सामने आया। कहा जाता है कि उनके भतीजे रणधीर कपूर ने मजाक में उनसे पूछा था कि चाचा आपने इतनी बड़ी इंटरनेट कंपनी शुरू कर दी और हमें बताया भी नहीं। हालांकि कंपनी का नाम और शम्मी कपूर का मशहूर फिल्मी उद्गार अलग-अलग संदर्भों से जुड़े हैं। शम्मी को कंप्यूटर और इंटरनेट में भी गहरी दिलचस्पी थी। भारत में इंटरनेट के आम होने से पहले ही वह इसका इस्तेमाल करने लगे थे और उन्होंने कपूर परिवार की वेबसाइट भी बनाई थी।

    शम्मी कपूर की निजी जिंदगी में अभिनेत्री गीता बाली का खास स्थान था। दोनों ने 1955 में शादी की और उनके दो बच्चे आदित्य राज कपूर तथा कंचन कपूर हुए। साल 1965 में गीता बाली के निधन ने शम्मी को गहरा दुख पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने 1969 में नीला देवी गोहिल से विवाह किया। उनके जीवन से जुड़ा एक चर्चित किस्सा यह भी है कि वह हर साल 1 जनवरी से 21 जनवरी तक शराब नहीं पीते थे। बताया जाता है कि गीता बाली इसी अवधि में बीमार हुई थीं और 21 जनवरी को उनका निधन हुआ था।

    शम्मी कपूर की जिंदगी में कई संघर्ष और स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलें भी आईं। उनकी पत्नी नीला देवी के एक इंटरव्यू के मुताबिक वह एक दिन में 100 सिगरेट तक पी लेते थे। बाद के वर्षों में उन्हें फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याएं हुईं और स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया। साल 2011 में आई फिल्म रॉकस्टार उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई जिसमें वह रणबीर कपूर के साथ नजर आए। शम्मी कपूर ने अपने अंदाज से हिंदी सिनेमा में नायक की परिभाषा बदल दी। उनकी जयंती पर उन्हें याद करना उस कलाकार को सलाम करना है जिसने पर्दे पर आजादी मस्ती और संगीत को एक नई पहचान दी।

  • वैभव सूर्यवंशी को अभी करना होगा इंतजार, मुरली कार्तिक ने समझाई टीम इंडिया की हकीकत, संजू-अभिषेक को हटाना आसान नहीं

    वैभव सूर्यवंशी को अभी करना होगा इंतजार, मुरली कार्तिक ने समझाई टीम इंडिया की हकीकत, संजू-अभिषेक को हटाना आसान नहीं


    नई दिल्ली। आईपीएल में अपने बल्ले से तहलका मचाकर दुनियाभर में चर्चा बटोरने वाले 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी है। कम उम्र में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन करने के बाद हर क्रिकेट प्रेमी उन्हें भारतीय टीम की जर्सी में खेलते देखना चाहता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाना केवल प्रतिभा और बड़े स्कोर बनाने तक सीमित नहीं है। टीम में पहले से मौजूद खिलाड़ियों का प्रदर्शन टीम की रणनीति और सही मौके का इंतजार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। वैभव के लिए अब सबसे बड़ा इम्तिहान अपनी प्रतिभा साबित करने के साथ धैर्य बनाए रखने का है।

    पूर्व भारतीय क्रिकेटर मुरली कार्तिक ने वैभव की मौजूदा स्थिति पर अपनी राय रखते हुए कहा है कि क्रिकेट में हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को तुरंत प्लेइंग इलेवन में जगह मिल जाए यह जरूरी नहीं है। कई बार खिलाड़ियों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है और इस सच्चाई को स्वीकार करना उनके करियर का अहम हिस्सा होता है। कार्तिक के मुताबिक किसी खिलाड़ी को केवल इसलिए टीम से बाहर नहीं किया जा सकता कि कोई दूसरा युवा खिलाड़ी अधिक रोमांचक प्रतिभा के रूप में सामने आया है। चयन के पीछे ठोस वजह और टीम की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    भारतीय टीम में ओपनिंग की जगह को लेकर इस समय मुकाबला काफी दिलचस्प है। अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन जैसे स्थापित खिलाड़ियों के रहते वैभव के लिए तुरंत नियमित जगह बनाना आसान नहीं होगा। दोनों खिलाड़ी 2026 टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में केवल एक युवा खिलाड़ी को मौका देने के लिए मौजूदा संयोजन में बदलाव करना टीम प्रबंधन के लिए आसान फैसला नहीं होगा।

    मुरली कार्तिक ने भी इस बात पर जोर दिया कि केवल बदलाव करने के लिए बदलाव नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि भारतीय ओपनिंग जोड़ी के प्रदर्शन में उतार चढ़ाव जरूर रहा है लेकिन इसी जोड़ी ने टीम को कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में जीत भी दिलाई है। ऐसे में कुछ मैचों के प्रदर्शन के आधार पर स्थापित खिलाड़ियों को बाहर करना सही रणनीति नहीं मानी जा सकती। टीम प्रबंधन को खिलाड़ियों के पिछले योगदान और भविष्य की योजनाओं दोनों को ध्यान में रखकर फैसला लेना होता है।

    वैभव सूर्यवंशी के लिए यशस्वी जायसवाल का उदाहरण भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रतिभाशाली बल्लेबाज होने के बावजूद सीमित ओवरों की टीम में नियमित जगह हासिल करना आसान नहीं होता। टीम में पहले से मौजूद खिलाड़ियों और टीम संयोजन के कारण कई बार अच्छे खिलाड़ी को भी अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। इससे यह साफ होता है कि प्रतिभा किसी खिलाड़ी को पहचान दिला सकती है लेकिन नियमित अवसर हासिल करने के लिए परिस्थितियों का साथ देना भी जरूरी है।

    कार्तिक के मुताबिक कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर वैभव से इस मुद्दे पर बातचीत कर रहे होंगे। इसका अर्थ यह नहीं है कि युवा बल्लेबाज टीम की योजनाओं से बाहर हैं। बल्कि उन्हें सही समय पर अवसर देने और भविष्य के लिए तैयार रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। वैभव को इस दौरान अपनी फिटनेस तकनीक और बल्लेबाजी की निरंतरता पर ध्यान देना होगा ताकि मौका मिलने पर वह प्रभावशाली प्रदर्शन कर सकें।

    दूसरी ओर संजू सैमसन का हालिया प्रदर्शन वैभव के लिए प्रतिस्पर्धा को और कठिन बना रहा है। टी20 विश्व कप 2026 में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे संजू ने अपने पिछले दस मैचों में चार अर्धशतक लगाए हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में भी उनके प्रदर्शन ने टीम में उनकी दावेदारी को मजबूत किया है। अभिषेक शर्मा और ईशान किशन जैसे विकल्पों की मौजूदगी से भारतीय टीम के पास शीर्ष क्रम में कई विकल्प उपलब्ध हैं।

    ऐसे में वैभव सूर्यवंशी को समझना होगा कि आईपीएल की सफलता उनके करियर की बड़ी उपलब्धि जरूर है लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबी पारी खेलने के लिए धैर्य और निरंतरता भी जरूरी है। कम उम्र में मिली लोकप्रियता उनके लिए अवसरों के दरवाजे खोल सकती है लेकिन दबाव को संभालना और अपने मौके का पूरा फायदा उठाना ही उन्हें आगे बढ़ाएगा। फिलहाल उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती इंतजार के इस दौर में खुद को तैयार रखना है क्योंकि टीम इंडिया में जगह बनाने की असली परीक्षा अभी बाकी है।

  • पहले बल्ले से बरसे अराफात मिन्हास, फिर गेंद से उड़ाई इंग्लैंड की धज्जियां, पाकिस्तान ने दर्ज की धमाकेदार जीत

    पहले बल्ले से बरसे अराफात मिन्हास, फिर गेंद से उड़ाई इंग्लैंड की धज्जियां, पाकिस्तान ने दर्ज की धमाकेदार जीत


    नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट टीम को युवा ऑलराउंडर अराफात मिन्हास के रूप में एक ऐसा खिलाड़ी मिला है जिसने अपने दमदार प्रदर्शन से इंग्लैंड की मजबूत टीम को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। रावलपिंडी में खेले गए वनडे ट्राई सीरीज के मुकाबले में 21 वर्षीय मिन्हास ने पहले बल्ले से 59 रन की अहम पारी खेली और फिर गेंदबाजी में छह विकेट चटकाकर इंग्लैंड की बल्लेबाजी को तहस नहस कर दिया। उनके शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन की बदौलत पाकिस्तान ने इंग्लैंड को 87 रन से हरा दिया। इस जीत के साथ पाकिस्तान ने टूर्नामेंट में अपनी दूसरी जीत दर्ज की और मिन्हास ने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    20 अक्टूबर को रावलपिंडी क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। पाकिस्तान की शुरुआत बेहद खराब रही और पारी की पहली ही गेंद पर गस एटकिंसन ने फखर जमां को आउट कर दिया। सैम अयूब भी केवल आठ रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद बाबर आजम ने 52 गेंदों पर 34 रन बनाए लेकिन वह बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। सलमान अली आगा भी 16 रन बनाकर आउट हो गए। पाकिस्तान ने महज 59 रन के स्कोर पर चार विकेट गंवा दिए थे और टीम मुश्किल में नजर आ रही थी।

    ऐसे समय में हसन नवाज और साद बेग ने पारी को संभालने की जिम्मेदारी उठाई। दोनों बल्लेबाजों ने उपयोगी साझेदारी कर टीम को संकट से बाहर निकालने का प्रयास किया। साद बेग ने 35 रन बनाए जबकि हसन नवाज ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 74 गेंदों पर 79 रन ठोक दिए। उनकी पारी में पांच चौके और चार छक्के शामिल रहे। हसन नवाज के आउट होने के बाद अराफात मिन्हास ने मोर्चा संभाला और 58 गेंदों पर 59 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में नौ चौके लगाए और फहीम अशरफ के साथ सातवें विकेट के लिए 72 रन की अहम साझेदारी की। फहीम ने 25 गेंदों पर 39 रन बनाकर पाकिस्तान की रन गति तेज की। कप्तान शाहीन आफरीदी के उपयोगी योगदान से पाकिस्तान ने 50 ओवर में नौ विकेट पर 302 रन बनाए।

    303 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने तेज शुरुआत की। टॉम बैंटन और बेन डकेट ने पहले विकेट के लिए 91 रन जोड़कर पाकिस्तान के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। डकेट ने 45 रन बनाए जबकि बैंटन ने 53 गेंदों पर 57 रन की पारी खेली। हारिस रऊफ ने डकेट को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा और इसके बाद अराफात मिन्हास ने बैंटन को पवेलियन भेज दिया। मिन्हास ने इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक को भी केवल पांच रन पर आउट कर दिया। इसके बाद इंग्लैंड की पारी लड़खड़ाने लगी। जो रूट ने 33 रन बनाए लेकिन नसीम शाह ने उन्हें बोल्ड कर दिया। हारिस रऊफ ने सैम करन को 27 रन पर आउट करके इंग्लैंड की मुश्किलें और बढ़ा दीं।

    इसके बाद अराफात मिन्हास पूरी तरह इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर हावी हो गए। उन्होंने जॉर्डन कॉक्स और जेमी ओवर्टन को आउट करने के बाद विल जैक्स और आदिल राशिद के विकेट भी झटक लिए। इस तरह उन्होंने छह विकेट लेकर इंग्लैंड की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। मिन्हास ने 8.4 ओवर में केवल 40 रन देकर छह विकेट हासिल किए। हारिस रऊफ को दो और नसीम शाह को एक विकेट मिला। इंग्लैंड की पूरी टीम 38.4 ओवर में 215 रन पर सिमट गई और पाकिस्तान ने मुकाबला 87 रन से जीत लिया। बल्ले और गेंद दोनों से शानदार प्रदर्शन करने वाले अराफात मिन्हास ने साबित कर दिया कि वह पाकिस्तान क्रिकेट के लिए भविष्य में एक अहम ऑलराउंडर बन सकते हैं।

  • अजीत डोभाल पर पाकिस्तान के परमाणु सलाहकार का आरोप, भारत पर अस्थिरता फैलाने का लगाया आरोप

    अजीत डोभाल पर पाकिस्तान के परमाणु सलाहकार का आरोप, भारत पर अस्थिरता फैलाने का लगाया आरोप


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से जुड़े एक वरिष्ठ सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) मजहर जमील ने भारत पर पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करने के लिए आतंकवादी संगठनों का कथित तौर पर समर्थन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इसके लिए भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल का जिक्र करते हुए इसे ‘डोभाल सिद्धांत’ करार दिया।

    पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी (एनसीए) के सलाहकार जमील ने दावा किया कि भारत अपनी रणनीति के तहत आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहा है और पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे संगठनों को भारत का कथित समर्थन मिलने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

    मुक्ति वाहिनी और एलटीटीई का भी किया जिक्र

    13 अक्टूबर को लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) में अपने संबोधन के दौरान जमील ने भारत पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला दिया। उन्होंने 1971 में मुक्ति वाहिनी और 1980 के दशक में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) को भारत से मिले कथित समर्थन का जिक्र किया।

    उन्होंने अफगानिस्तान में 2001 से 2014 के बीच अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल (आईएसएएफ) की मौजूदगी के दौरान अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा के आसपास भारत द्वारा छह वाणिज्य दूतावास संचालित किए जाने का भी उल्लेख किया। जमील ने इन घटनाओं को पाकिस्तान में भारत की कथित गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की।

    ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर भी जताई चिंता

    जमील ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य कार्रवाई का जिक्र करते हुए ब्रह्मोस मिसाइलों को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भारत ने ऐसी मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जो परमाणु और पारंपरिक, दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम हैं।

    हालांकि, ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पारंपरिक वारहेड के साथ इस्तेमाल किया जाता है। इसे भारत की सामरिक परमाणु हथियारों से जुड़ी स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड का हिस्सा बताना भी सही नहीं है।

    जमील ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने दक्षिण एशिया को परमाणु संघर्ष के कगार पर पहुंचा दिया था। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के रणनीतिक संयम के कारण स्थिति को संभाला जा सका। ये उनके आरोप और आकलन हैं, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य।

    परमाणु पनडुब्बियों और मिसाइलों पर भी उठाए सवाल

    जमील ने स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) के आकलन का हवाला देते हुए भारत की परमाणु क्षमता को लेकर चिंता जताई। उन्होंने संकेत दिया कि परमाणु पनडुब्बियों से दागी जाने वाली मिसाइलों की तैनाती के जरिए भारत अपनी सामरिक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

    उन्होंने दावा किया कि भारत ने अपने कुछ परमाणु वारहेड को पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ जोड़ दिया है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों की अलग से जांच जरूरी है।

    2022 की ब्रह्मोस दुर्घटना को जानबूझकर किया गया हमला बताया

    जमील ने मार्च 2022 में भारतीय वायु सेना की एक ब्रह्मोस मिसाइल के गलती से लॉन्च होने की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस घटना को पाकिस्तान पर जानबूझकर किए गए हमले के रूप में पेश किया।

    दरअसल, मार्च 2022 में एक मिसाइल तकनीकी प्रक्रिया के दौरान गलती से लॉन्च हो गई थी और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के खानेवाल जिले में जाकर गिरी थी। भारत ने इस घटना को आकस्मिक मिसाइल प्रक्षेपण बताया था और मामले की जांच के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की थी।

    जमील के बयान से स्पष्ट है कि पाकिस्तान के सुरक्षा प्रतिष्ठान में भारत की बढ़ती सैन्य और सामरिक क्षमताओं को लेकर चिंता जताई जा रही है। हालांकि, भारत पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने और जानबूझकर अस्थिरता फैलाने जैसे आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि पाकिस्तानी अधिकारी के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

  • सलमान के घर की रेकी, फिर टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलियां, लॉरेंस गैंग की कथित साजिश से बॉलीवुड में बढ़ी चिंता

    सलमान के घर की रेकी, फिर टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलियां, लॉरेंस गैंग की कथित साजिश से बॉलीवुड में बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में जांच के दौरान एक नया और अहम पहलू सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई पुलिस की जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि इस वारदात से पहले शूटरों ने अभिनेता सलमान खान के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट की रेकी की थी। बताया जा रहा है कि सलमान खान के घर के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था देखकर आरोपियों ने कथित तौर पर अपना प्लान बदल दिया और इसके बाद टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाया। हालांकि पुलिस ने इस दावे की सार्वजनिक रूप से पूरी पुष्टि नहीं की है और मामले की जांच अभी जारी है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार तीनों आरोपी मुंबई पहुंचने के बाद सलमान खान के घर के आसपास पहुंचे थे। वहां पुलिस की तैनाती और सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखकर उनके लिए अभिनेता तक पहुंचना मुश्किल था। इसके बाद उन्होंने दूसरे लक्ष्य की तलाश शुरू की। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक आरोपियों को सोशल मीडिया पोस्ट और फैन पेज के जरिए टाइगर श्रॉफ की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली थी। बताया जा रहा है कि अभिनेता हर रविवार मुंबई के जुहू इलाके में एक फुटबॉल ग्राउंड पर खेलने जाते थे। कथित तौर पर इसी जानकारी के आधार पर शूटरों ने उनकी गतिविधियों पर नजर रखी।

    18 अक्टूबर 2026 की शाम टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई के जुहू इलाके में फायरिंग हुई थी। बताया गया कि अभिनेता फुटबॉल खेलने के बाद ग्राउंड से बाहर निकल रहे थे तभी उनकी BMW कार पर कई राउंड गोलियां चलाई गईं। इस घटना में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित रहे जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की जानकारी सामने आई। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से जांच आगे बढ़ाई।

    इस मामले में पुलिस ने तीन संदिग्धों को राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। उनकी पहचान ऋतिक कुमार उर्फ रोशन रेहान अंसारी और फूल सिंह के रूप में बताई गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार आरोपी फायरिंग के बाद मुंबई से ट्रेन के जरिए बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें मुंबई लाया गया जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि फायरिंग की योजना किसने बनाई और आरोपियों को निर्देश कहां से मिले थे।

    इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सोशल मीडिया पर गैंग से जुड़े होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने फायरिंग की जिम्मेदारी लेने की बात कही थी। हालांकि ऐसे दावों और सामने आए ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस वारदात का मकसद बॉलीवुड में डर पैदा करना था और क्या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका है।

    सलमान खान और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के बीच विवाद पहले भी सुर्खियों में रहा है। अप्रैल 2024 में सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर गोलीबारी हुई थी जिसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई थी। टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में सलमान खान के घर की कथित रेकी की जानकारी सामने आने के बाद उनके आवास के आसपास सुरक्षा और कड़ी किए जाने की खबरें हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ कर रही हैं। यह स्पष्ट होना बाकी है कि सलमान खान वास्तव में इस मामले में पहला निशाना थे या नहीं और फायरिंग के पीछे की पूरी साजिश क्या थी।

  • इस्राइल में चुनाव से पहले युवाओं की सोच में दिख रहा बदलाव… बढ़ रहा दक्षिणपंथ का आकर्षण?

    इस्राइल में चुनाव से पहले युवाओं की सोच में दिख रहा बदलाव… बढ़ रहा दक्षिणपंथ का आकर्षण?


    तेलअबीव।
    इस्राइल (Israel) में नई पीढ़ी के बीच दक्षिणपंथी राजनीति का आकर्षण बढ़ता दिखाई दे रहा है। कभी अपने कट्टर विचारों के कारण राजनीतिक मुख्यधारा से दूर रहे नेता इतामार बेन-ग्विर (Leader Itamar Ben-Gvir) आज सरकार के शक्तिशाली मंत्रियों में शामिल हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उनके आसपास बड़ी संख्या में युवा समर्थक नजर आ रहे हैं। यह बदलाव केवल किसी एक नेता की लोकप्रियता की कहानी नहीं है, बल्कि उस पीढ़ी की सोच को भी सामने लाता है, जिसने युद्ध, हिंसा और सुरक्षा के सवालों के बीच आंखें खोली हैं। सवाल है कि इस्राइल के युवा मतदाता (Young Voters) दक्षिणपंथ की ओर क्यों आकर्षित हो रहे हैं और इसका देश की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?


    पहले सेना ने ठुकराया, अब युवाओं के बीच लोकप्रिय

    एक संवाददाता लूसी विलियमसन की रिपोर्ट के मुताबिक बेन-ग्विर को युवावस्था में उनके राजनीतिक विचारों के अत्यधिक कट्टर होने के कारण इस्राइली सेना में शामिल होने के लिए अनुपयुक्त माना गया था। करीब तीन दशक बाद वही नेता राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री के पद पर हैं और चुनावी राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं।रामले शहर के एक बाजार में चुनाव प्रचार के दौरान उनके समर्थकों में बड़ी संख्या में युवा शामिल थे। 20 वर्षीय मोर्दखाई का मानना है कि बेन-ग्विर उन्हें सुरक्षा का भरोसा देते हैं। वहीं, 18 वर्षीय नदाव का कहना है कि यह नेता दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि इस्राइल एक मजबूत देश है और उसे अपनी विचारधारा व्यक्त करने में संकोच नहीं करना चाहिए।इन बयानों से युवाओं की प्राथमिकताओं का संकेत मिलता है। उनके लिए केवल आर्थिक मुद्दे या रोजगार ही चुनावी पसंद तय नहीं कर रहे, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, देश की ताकत और भविष्य को लेकर भरोसा भी महत्वपूर्ण बन गया है।


    पहली बार वोट डालने वाले युवा बन सकते हैं निर्णायक

    रिपोर्ट के अनुसार आगामी चुनाव में पांच लाख से अधिक मतदाता पहली बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। ये युवा ऐसे समय में मतदान करने जा रहे हैं, जब इस्राइल की सुरक्षा, राष्ट्रीय पहचान और भविष्य की दिशा पर बहस तेज है।रिपोर्ट में उद्धृत एक सर्वेक्षण के मुताबिक, पहली बार मतदान करने वाले 16 प्रतिशत से अधिक युवा बेन-ग्विर की यहूदी शक्ति पार्टी या उनके सहयोगी बेजालेल स्मोट्रिच की धार्मिक जायनिज्म पार्टी का समर्थन करने की योजना बना रहे हैं। एक अन्य सर्वेक्षण में करीब तीन-चौथाई युवा मतदाताओं ने खुद को दक्षिणपंथी या मध्य-दक्षिणपंथी विचारधारा के करीब बताया।हालांकि, इन आंकड़ों का अर्थ यह नहीं है कि सभी युवा दक्षिणपंथी हो गए हैं। ये सर्वेक्षणों में सामने आए रुझान हैं। फिर भी, चुनावी मुकाबले में इन नए मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, खासकर तब, जब सरकार समर्थक और विपक्षी खेमों के बीच मुकाबला कड़ा हो।


    7 अक्तूबर के हमलों ने बदली सोच

    युवाओं की राजनीतिक पसंद को समझने के लिए 7 अक्तूबर 2023 के हमलों और उसके बाद शुरू हुए गाजा युद्ध को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हमास के नेतृत्व में हुए हमलों ने इस्राइल में सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा की। युद्ध और हिंसा के अनुभवों ने कई युवाओं के लिए राजनीति को व्यक्तिगत सवाल बना दिया है।23 वर्षीय अति-रूढ़िवादी यहूदी युवक मेइर श्राइबर, जो लंदन में पले-बढ़े हैं, कहते हैं कि 7 अक्तूबर की घटनाओं ने उन्हें इस नतीजे पर पहुंचाया कि शांति हासिल करना आसान नहीं है। उनके अनुसार कम उम्र में देखी गई घटनाएं व्यक्ति की सोच और व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित करती हैं।हालांकि, इस सोच से सभी इस्राइली युवा सहमत नहीं हैं। कुछ लोग मौजूदा सरकार की नीतियों और सुरक्षा संबंधी फैसलों पर सवाल भी उठाते हैं। इसलिए युवाओं में दक्षिणपंथ की ओर झुकाव को एक समान विचारधारा का परिणाम मानने के बजाय युद्ध के अनुभवों और भविष्य को लेकर अलग-अलग आशंकाओं के संदर्भ में देखना जरूरी है।


    कठोर नीतियां भी बन रहीं बहस का विषय

    बेन-ग्विर की राजनीति विवादों से घिरी रही है। वे कब्जे वाले पश्चिमी तट के विलय, गाजा में यहूदी बस्तियां बसाने और फलस्तीनियों के तथाकथित स्वैच्छिक पलायन जैसे विचारों का समर्थन करते रहे हैं। उदारवादी इस्राइली इन नीतियों और उनके बयानों की आलोचना करते हैं। कई पश्चिमी देशों ने बेन-ग्विर और स्मोट्रिच के खिलाफ फलस्तीनियों के प्रति भड़काऊ बयानों के मामले में प्रतिबंध या यात्रा संबंधी पाबंदियां भी लगाई हैं।राजनीतिक विश्लेषक डाहलिया शाइनडलिन के अनुसार, इस्राइल के युवा यहूदी मतदाता लगभग दो दशक से औसतन पुरानी पीढ़ी की तुलना में अधिक दक्षिणपंथी रुझान दिखाते रहे हैं। उनके मुताबिक इन युवाओं ने कई युद्धों के बीच जीवन बिताया है और शांति की कोशिशों का उन्हें व्यक्तिगत अनुभव कम मिला है। इससे राजनीतिक बहस में कठोर विचारों को स्वीकार्यता मिलने की पृष्ठभूमि बनी है।


    टिकटॉक और इंस्टाग्राम भी बन रहे चुनावी हथियार

    इस बदलाव में सोशल मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। युवा मतदाता पारंपरिक समाचार चैनलों और अखबारों के बजाय टिकटॉक और इंस्टाग्राम से अधिक जानकारी हासिल कर रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक नेताओं के छोटे वीडियो, सीधे संवाद और आकर्षक प्रचार सामग्री मतदाताओं तक पहुंचने का प्रभावी माध्यम बन गए हैं।

    विपक्षी दल भी अब इस चुनौती को समझ रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट (Former Prime Minister Naftali Bennett) के नेतृत्व वाले विपक्षी दल के युवा उम्मीदवार योनातन शालेव का कहना है कि बेन-ग्विर ने दूसरे नेताओं की तुलना में सोशल मीडिया की ताकत को पहले पहचान लिया। अब विपक्ष भी युवा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए डिजिटल प्रचार का सहारा ले रहा है। इस्राइल की राजनीति में नई पीढ़ी का यह रुझान बताता है कि चुनाव केवल पुराने राजनीतिक समीकरणों से तय नहीं होंगे। सुरक्षा की चिंता, युद्ध की स्मृतियां और डिजिटल माध्यमों से बनने वाली राजनीतिक छवि युवा मतदाताओं के फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन इस्राइल के युवा पूरी तरह एक खेमे में बंटे नहीं हैं। असली सवाल यही है कि मतदान के दिन सुरक्षा और कठोर नेतृत्व का संदेश अधिक प्रभावी होगा या बदलाव और जवाबदेही की मांग।

  • अमेरिकी विदेश मंत्री बोले- परमाणु हथियार के चलते पाकिस्तान से संबंध रखना जरूरी

    अमेरिकी विदेश मंत्री बोले- परमाणु हथियार के चलते पाकिस्तान से संबंध रखना जरूरी


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंधों को लेकर अपनी नीति स्पष्ट करते हुए कहा है कि कई मतभेदों के बावजूद अमेरिका को पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखना पड़ता है। उन्होंने इसके पीछे पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और उसकी भौगोलिक स्थिति को प्रमुख कारण बताया। रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ है।

    सीएनएन-न्यूज18 को दिए एक साक्षात्कार में रुबियो ने कहा, “हम उन सभी के खिलाफ हैं, जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं।” पाकिस्तान के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी देश की विदेश नीति को संभालना है। इसके लिए अमेरिका को कई देशों के साथ संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, भले ही उनके साथ कुछ मुद्दों पर मतभेद हों।

    उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के मामले में भी यही स्थिति है। यह एक ऐसा देश है, जिसके पास परमाणु हथियार हैं। साथ ही, उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि अमेरिका को उसके साथ बातचीत करने की जरूरत पड़ती है। रुबियो ने इसकी तुलना भारत के ईरान के साथ संबंधों से करते हुए कहा कि भारत सरकार भी ईरान के नेताओं के साथ संपर्क और संवाद बनाए रखती है।

    पाकिस्तान से बातचीत क्यों जरूरी?

    पांच महीने में दूसरी बार भारत यात्रा पर आए रुबियो ने कहा कि विभिन्न हितों और मतभेदों के बीच संतुलन बनाना मुश्किल है, लेकिन विदेश नीति के तहत ऐसा करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखना सकारात्मक परिणाम भी दे सकता है।

    रुबियो के मुताबिक, यदि अमेरिका के पाकिस्तान के साथ संबंध बने रहते हैं और दोनों पक्षों के बीच बातचीत होती है, तो इससे उन गतिविधियों को रोकने में मदद मिल सकती है, जिनको लेकर भारत चिंतित है। उनके इस बयान को पाकिस्तान के साथ अमेरिकी कूटनीतिक संबंधों और भारत की सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की नीति के तौर पर देखा जा रहा है।

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द होने की उम्मीद

    मुंबई पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जल्द होने की उम्मीद जताई। बैठक में दोनों देशों के संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, रुबियो की यात्रा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता की गति को दर्शाती है। मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष 21वीं सदी के लिए भारत-अमेरिका सहयोग को आगे बढ़ाने को महत्व देते हैं।

    भारत को बताया तेल रिफाइनरी क्षेत्र की महाशक्ति

    जयशंकर के साथ बैठक के बाद रुबियो ने भारत की तेल रिफाइनिंग क्षमता की सराहना करते हुए उसे इस क्षेत्र की महाशक्ति बताया। रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद पर उन्होंने कहा कि भारत ने बार-बार अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की इच्छा जताई है और इस दिशा में प्रगति हो रही है।

    उन्होंने कहा कि अमेरिका भी भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक अच्छा स्रोत बन सकता है। बैठक में दोनों देशों के बीच ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। रुबियो ने भारत से ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी मजबूत करने और अमेरिकी तकनीक का उपयोग बढ़ाने की अपील भी की।

    वेनेजुएला में तेल उत्पादन पर रिलायंस से चर्चा करेगा अमेरिकी दल

    रुबियो ने बुधवार को गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की रिफाइनरी के प्रस्तावित दौरे को लेकर मीडिया के सवालों का जवाब भी दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वेनेजुएला में तेल उत्पादन से जुड़े मुद्दों पर रिलायंस के साथ चर्चा करेगा। इस संभावित बातचीत को ऊर्जा क्षेत्र में भारत-अमेरिका सहयोग के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

  • US-Iran शांति प्रस्ताव पर बन सकती है सहमति…. 6 अरब डॉलर के फंड में रियायत के आसार!

    US-Iran शांति प्रस्ताव पर बन सकती है सहमति…. 6 अरब डॉलर के फंड में रियायत के आसार!


    वाशिंगटन।
    ईरान-अमेरिका (Iran-America) के बीच शांति प्रस्ताव (Peace Proposal) पर इस हफ्ते सहमति बनने की संभावना है। दरअसल, कतर-पाकिस्तान (Qatar-Pakistan) की मध्यस्थता वाले नए समझौते के प्रस्ताव पर अमेरिका व ईरान दोनों ने कथित तौर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। कतर के सरकारी न्यूज चैनल अल अरबी अल जादीद ने मंगलवार को मध्यस्थता के प्रयासों से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया कि इस प्रस्ताव में फ्रीज किए गए 6 अरब डॉलर के ईरानी फंड ($6 Billion Iranian funds) में आंशिक रियायत और ईरान के परमाणु संयंत्रों के गोपनीय निरीक्षण की बात शामिल है।

    सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने तेहरान की यात्रा के दौरान यह प्रस्ताव ईरानी अधिकारियों के सामने रखा। प्रस्ताव को पहले ही अमेरिकी मंजूरी मिल चुकी है।

    होर्मुज के पास दो तेल टैंकर बारूदी सुरंगों से टकराए : होर्मुज में दो तेल टैंकर बारूदी सुरंगों की चपेट में आने के बाद आग की लपटों में घिर गए और रुक गए। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये किस समय हुआ।


    ईरान में अभी काम अधूरा, ट्रंप के साथ मिलकर करेंगे पूरा : नेतन्याहू

    दुबई। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने संकेत दिया है कि उनका देश और अमेरिका ईरान पर नए हमले कर सकते हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के साथ वीडियो कॉल का एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान में उनका काम अभी अधूरा है और इसे दोनों देश मिलकर पूरा करेंगे। नेतन्याहू ने इस्राइल के राष्ट्रीय चुनाव में समर्थन के लिए ट्रंप का आभार जताया। उन्होंने कहा, ट्रंप हमारे पास एक काम अधूरा है। आपने यह बात कही थी और हम इसे साथ मिलकर पूरा करेंगे। इसे पूरा करेंगे और कोई दूसरा ऐसा नहीं करेगा।


    ईरान-रूस के रिश्ते हुए मजबूत : अराघची

    तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान और रूस के संबंध इतिहास में कभी इतने करीबी नहीं रहे, जितने आज हैं। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ तेहरान में हुई बातचीत के बाद मंगलवार को अराघची ने सोशल मीडिया पर यह टिप्पणी की। अराघची ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच यूरोप से लेकर पश्चिम एशिया तक के घटनाक्रम पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने आर्थिक और परमाणु सहयोग के विस्तार पर भी जोर दिया। अराघची ने कहा कि क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक और राजनीतिक तरीकों से किया जाना चाहिए।

  • Survey: भारत में कम नहीं हुए रोजगार के अवसर… लेकिन AI के दौर में पहली नौकरी पाना हुआ मुश्किल

    Survey: भारत में कम नहीं हुए रोजगार के अवसर… लेकिन AI के दौर में पहली नौकरी पाना हुआ मुश्किल


    नई दिल्ली।
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) (Artificial Intelligence – AI) भारत (India) में नौकरियों को निगल नहीं रहा लेकिन कॅरिअर की पहली सीढ़ी को संकरा जरूर कर रहा है। विश्व बैंक (World Bank) की ताजा रिपोर्ट इंडिया डेवलपमेंट अपडेट अक्तूबर 2026 में यह दावा किया गया है। 

    रिपोर्ट के मुताबिक, 10 शहरों की 651 आईटी कंपनियों के सर्वे में एआई के कारण कुल रोजगार में कमी नहीं मिली लेकिन 55 फीसदी कंपनियों ने नए कर्मचारियों की भर्ती घटा दी। मध्यम स्तर की भर्ती घटाने वाली कंपनियां 25 फीसदी और वरिष्ठ पदों पर घटाने वाली 14% थीं। रिपोर्ट का आकलन है कि समायोजन अब तक मुख्यतः धीमी भर्ती के रास्ते हुआ है, मौजूदा कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी से नहीं। रूटीन कोडिंग, टेस्टिंग, डॉक्यूमेंटेशन और डेटा प्रोसेसिंग जैसे काम, जो आम तौर पर फ्रेशर्स के हिस्से आते थे, एआई के लिए सबसे आसान हैं।

    आईटी क्षेत्र की तस्वीर बंटी हुई है। छह सबसे बड़ी आईटी-सेवा कंपनियों ने 17 लाख के संयुक्त कार्यबल में से करीब 64 हजार कम किए। इसी दौरान जीसीसी (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर) समेत बाकी टेक-सेवा क्षेत्र ने तीन साल में करीब सात लाख लोगों को जोड़ा। इससे इस क्षेत्र का कुल रोजगार लगभग 44 लाख पहुंच गया। रिपोर्ट इसे पूरे उद्योग का सिकुड़ना नहीं, चुनिंदा बड़ी कंपनियों में कर्मचारी संख्या की छंटाई मानती है।

    नोमुरा के मुताबिक, 2022 से अगस्त 2026 के बीच एशिया की 69 कंपनियों की घोषणाओं में करीब 1.31 लाख एआई-संबंधी भर्तियां और 61 हजार छंटनी दर्ज हुए। भारत में 83,100 भर्तियां और 31,921 छंटनी हुईं, यानी शुद्ध करीब 51 हजार पदों की बढ़त।


    किस पर और कितना प्रभाव?

    भारत में कुल रोजगार का केवल 22 प्रतिशत हिस्सा एआई के ‘उच्च जोखिम’ के दायरे में आता है, जबकि उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में यह आंकड़ा लगभग 60 प्रतिशत है। इसका मुख्य कारण भारत में कृषि और मैनुअल कार्यों की अधिकता है।

    22 प्रतिशत हिस्से में से 8 प्रतिशत कार्य ऐसे हैं जहां एआई काम का स्वरूप बदल देगा (जैसे वित्तीय और दूरसञ्चार सेवाएं), जबकि 14 प्रतिशत हिस्से (जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा) में उत्पादकता बढ़ने की संभावना है। एआई का प्रभाव मुख्य रूप से शहरी, उच्च शिक्षित और पेशवर युवाओं पर पड़ रहा है, जबकि खेत मजदूरों और निर्माण श्रमिकों पर इसका असर नगण्य है।


    कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी हो रहा इस्तेमाल

    एआई और भारत का श्रम बाजार आमने-सामने नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक बनकर खड़े हो रहे हैं। वैश्विक मंच पर एआई को अपनाने के मामले में भारत 83 अर्थव्यवस्थाओं में 10वें स्थान पर है।


    कृषि में क्रांति:

    केरल का काथिर प्लेटफॉर्म (केरल कृषि प्रौद्योगिकी केंद्र और सूचना भंडार) और महाराष्ट्र का महाविस्तार-एआई उपग्रह तस्वीरों और एआई एनालिटिक्स के जरिये किसानों को उनकी अपनी स्थानीय भाषा में बोलकर कीट नियंत्रण, मौसम और मंडी भाव की सटीक जानकारी दे रहे हैं।


    स्वास्थ्य सेवा में चमत्कार:

    एआई-संचालित चेस्ट एक्स-रे टूल्स दूरदराज के गांवों में बिना इंटरनेट के भी गंभीर बीमारियों की पहचान पारंपरिक तरीकों से कहीं अधिक सटीकता और बेहद कम खर्च में कर रहे हैं।

  • AAP का आरोप…. दिल्ली एयरपोर्ट पर CM भगवंत मान को 3 घंटे तक रोका… 50 हजार का जुर्माना लगाया?

    AAP का आरोप…. दिल्ली एयरपोर्ट पर CM भगवंत मान को 3 घंटे तक रोका… 50 हजार का जुर्माना लगाया?


    नई दिल्ली।
    पंजाब (Punjab) में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) होने वाले हैं। इसे देखते हुए पंजाब की राजनीति गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने आरोप लगाया है कि पेरिस (Paris) में एक फूड ट्रेड फेयर से लौटते समय 19 अक्टूबर की देर रात पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Chief Minister Bhagwant Mann) को दिल्ली एयरपोर्ट (Delhi Airport) पर तीन घंटे तक रोककर रखा गया। उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। AAP के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने ये आरोप लगाए हैं।

    आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह केंद्र सरकार भगवंत मान को अपमानित करने और पंजाब की गरिमा को ठेस पहुंचाने की एक सोची-समझी कोशिश है। पन्नू ने आरोप लगाया, “जब मुख्यमंत्री पेरिस से लौटकर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे तो उन्हें जानबूझकर रोका गया। बहाने बनाए गए कि उनका सामान अभी आ रहा है या अभी चेक हो रहा है। ये सरासर झूठ थे। तीन घंटे बाद जब भगवंत मान को जाने दिया गया तो उन पर 50,000 रुपये का चालान काट दिया गया।”


    चालान क्यों काटा गया?

    पन्नू ने आगे कहा, “तीन घंटे बाद जब भगवंत मान अपना सामान गाड़ी में रखकर निकलने ही वाले थे तो अधिकारी दौड़ते हुए उनके पास आए और कहा कि उन पर ऊपर से भारी दबाव है। इसके बाद उन्होंने 50,000 रुपये का एक बेतुका चालान काट दिया। यह पंजाब की पहचान और गरिमा पर सीधा हमला है।” पन्नू ने यह नहीं बताया कि जुर्माना किस वजह से लगाया गया।


    हाईकोर्ट से मिली थी भगवंत मान को मंजूरी

    आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने भगवंत मान की पेरिस यात्रा के लिए मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पंजाब सरकार पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट पहुंच गई। हाईकोर्ट ने केंद्र के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि केंद्र ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह राजनीतिक पहलू या दृष्टिकोण क्या है। पन्नू ने बताया कि मान की फ्रांस यात्रा को मंजूरी देते समय हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि पंजाब के मुख्यमंत्री को उचित प्रोटोकॉल दिया जाए, लेकिन केंद्र सरकार की दुर्भावना इतनी थी कि पेरिस में मौजूद कॉन्सल जनरल भी उनसे मिलने नहीं आए।

    पन्नू ने कहा, “क्या कभी किसी मुख्यमंत्री को इस तरह हवाई अड्डे पर तीन घंटे तक रोका गया है? क्या कभी किसी मुख्यमंत्री का 50,000 रुपये का चालान काटकर अपमान किया गया है? ऐसा सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि भगवंत सिंह मान एक पंजाबी हैं, पंजाब के मुख्यमंत्री हैं और पंजाब की बेहतरी के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।”

    पन्नू ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पंजाब और पंजाबी पहचान को कमजोर करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। चाहे किसानों को डेढ़ साल तक दिल्ली की सीमाओं पर रोके रखना हो या पंजाब के हक का फंड रोक देना हो, केंद्र सरकार ने लगातार हर स्तर पर पंजाब का गला घोंटने की कोशिश की है।”