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  • मप्र में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक, खाद्य मंत्री बोले- अफवाहों पर न दें ध्यान

    मप्र में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक, खाद्य मंत्री बोले- अफवाहों पर न दें ध्यान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल, डीजल, पीएनजी और सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। किसी प्रकार की कमी नहीं हैं। लोग अफवाहों पर ध्यान न दें।

    खाद्य मंत्री राजपूत ने सोमवार को एक बयान में कहा कि देश में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और देश व प्रदेश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रही हैं। इससे पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति निरंतर बनी हुई है और किसी प्रकार की रुकावट की स्थिति नहीं है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में पीएनजी कनेक्शन लेने का भी आग्रह किया, जिससे एलपीजी पर निर्भरता कम हो और स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

    मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश के बॉटलिंग प्लांट में घरेलू एवं कॉमर्शियल एलपीजी का पर्याप्त भंडार बनाए रखा गया है। घरेलू गैस उपभोक्ताओं द्वारा की गई बुकिंग के अनुरूप एलपीजी सिलेंडरों का निरंतर वितरण किया जा रहा है। कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को शासन द्वारा निर्धारित प्राथमिकता क्रम और आवंटन प्रतिशत के आधार पर गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सतत रूप से की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में किसी प्रकार का अवरोध नहीं है। उपभोक्ताओं की मांग को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय तक कार्य कर रहे हैं तथा जिला स्तर तक बॉटलिंग प्लांट और वितरकों के पास उपलब्धता एवं वितरण की नियमित समीक्षा की जा रही है।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश की सभी ऑयल कंपनियों के पास पेट्रोल और डीजल (एमएस/एचएसडी) का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। रिटेल आउटलेट्स (पेट्रोल पंपों) पर भी पेट्रोल और डीजल की किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है। कंपनियों के डिपो से पेट्रोल और डीजल की लगातार आपूर्ति की जा रही है और स्थिति पूरी तरह सामान्य है। बढ़ी हुई मांग को देखते हुए ऑयल कंपनियों के डिपो अतिरिक्त समय तक कार्य कर रहे हैं जिससे मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

    खाद्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए निरंतर कार्रवाई की जा रही है। अब तक 2,110 स्थानों पर जांच की गई है, जिसमें 2,933 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए तथा 9 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके अतिरिक्त 391 पेट्रोल पंपों की जांच की गई, जिसमें एक प्रकरण दर्ज कर एफआईआर कराई गई है। प्रदेश के सभी जिला आपूर्ति नियंत्रकों और ऑयल कंपनियों के अधिकारियों को पेट्रोल पंपों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) संस्थाओं द्वारा घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शन से संबंधित मांग एवं शिकायतों के पंजीयन और उनके निराकरण के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। प्रदेश के जिन शहरों में पाइपलाइन नेटवर्क उपलब्ध है, वहां पाइपलाइन के आसपास के घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं। अन्य जिलों में पाइपलाइन विस्तार के बाद पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही सीजीडी संस्थाओं को विभिन्न अनुमतियां प्राप्त करने के लिए सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने की सुविधा भी प्रदान की गई है। इन संस्थाओं द्वारा संबंधित शहरों के लिए दूरभाष नंबर भी जारी किए गए हैं, जिन पर उपभोक्ता संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इनमें अवंतिका गैस लिमिटेड द्वारा पीथमपुर, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर के लिए संपर्क नंबर उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि गैल गैस लिमिटेड द्वारा देवास, रायसेन, शाजापुर और सीहोर के लिए संपर्क सुविधा दी गई है।

    इसी प्रकार नवेरिया गैस लिमिटेड द्वारा धार, थिंक गैस द्वारा भोपाल, राजगढ़ और शिवपुरी, आईओसीएल द्वारा गुना, मऊगंज, रीवा, अशोकनगर और मुरैना, बीपीसीएल द्वारा मैहर, सतना, शहडोल, सीधी और सिंगरौली तथा गुजरात गैस लिमिटेड द्वारा उज्जैन, देवास, इंदौर, रतलाम और झाबुआ क्षेत्रों के लिए दूरभाष नंबर जारी किए गए हैं, जिनके माध्यम से उपभोक्ता अपनी मांग या शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

    उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आवश्यकता अनुसार ही पेट्रोल और डीजल की खरीद करें तथा अनावश्यक संग्रह से बचें। ऑयल कंपनियों ने भी यह स्पष्ट किया है कि एलपीजी, पेट्रोल, डीजल, पीएनजी और सीएनजी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

  • मप्रः शिवपुरी में युवक की पीट-पीटकर हत्या, नाले में मिला शव

    मप्रः शिवपुरी में युवक की पीट-पीटकर हत्या, नाले में मिला शव


    शिवपुरी।
    मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में रन्नौद थाना क्षेत्र के नेगमा गांव में एक युवक की पीट-पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया है। सोमवार को सुबह उसका शव गांव के पास नाले में मिला। पुलिस ने पांच लोगों पर हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार, ग्राम नेगमा निवासी अर्जुन पाल (26) का कोलारस की 20 वर्षीय युवती से प्रेम संबंध था। सोमवार को युवती की सगाई तय थी। एक दिन पहले उसने अर्जुन को जानकारी दी, जिसके बाद दोनों ने भागने की योजना बनाई। रविवार देर शाम अर्जुन अपने रिश्तेदार कल्ला पाल के साथ कोलारस पहुंचा। रात करीब एक बजे दोनों युवती के घर के पास पहुंचे, लेकिन पहले से सतर्क परिजनों ने दोनों को पकड़ लिया। कल्ला मौके से भाग निकला, जबकि अर्जुन को परिजन घर ले गए।

    आरोप है कि परिजनों ने अर्जुन को घर में बंधक बनाकर रातभर बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद शव को घर से करीब 100 मीटर दूर नाले में फेंक दिया गया। सोमवार सुबह ग्रामीणों ने नाले में शव देखा और पुलिस को सूचना दी। पहचान अर्जुन पाल के रूप में हुई। बताया जा रहा है कि युवती का दादा खुद थाने पहुंचा और मारपीट की जानकारी दी।

    कल्ला पाल के मुताबिक अर्जुन पास के एक कृषि फार्म पर मजदूरी करता था। करीब 4-6 माह पहले उसी फार्म पर युवती भी काम करने आई थी, जहां दोनों की मुलाकात हुई। इसके बाद दोनों ने मोबाइल नंबर बदले और बातचीत शुरू हो गई। करीब डेढ़ माह पहले युवती को फोन पर बात करते हुए परिजनों ने पकड़ लिया था। अलग-अलग समाज होने के कारण परिवार ने उस पर पाबंदियां लगा दी थीं। परिजनों को प्रेम संबंध का पता चलने के बाद अर्जुन को फोन पर धमकियां दी जा रही थीं। इसके चलते वह कोलारस छोड़कर ट्रक पर काम करने चला गया था, हालांकि दोनों के बीच संपर्क बना रहा।

    कल्ला के मुताबिक, अर्जुन ने उसे फोन कर युवती को भगाने में मदद मांगी थी। प्लान था कि युवती खुद घर से निकलेगी और वे बस से शिवपुरी जाकर कोर्ट मैरिज करेंगे। लेकिन युवती की जगह उसके परिजन मौके पर पहुंच गए और हमला कर दिया। कल्ला पाल की शिकायत पर पुलिस ने युवती के पिता, दादा और तीन अन्य के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। थाना प्रभारी गब्बर सिंह गुर्जर ने बताया कि आरोपियों की तलाश जारी है।

  • मप्र में बदला मौसम, भोपाल समेत कई जगह तेज बारिश, 6 जिलों में हुई ओलावृष्टि

    मप्र में बदला मौसम, भोपाल समेत कई जगह तेज बारिश, 6 जिलों में हुई ओलावृष्टि


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में सोमवार को अचानक मौसम बदल गया और कई जिलों में अचानक तेज बारिश और ओलावृष्टि का दौर शुरू हो गया। नीमच और उज्जैन में बारिश के साथ ओले गिरे, जबकि भोपाल, मंदसौर, रीवा और बैतूल समेत कई इलाकों में तेज बारिश दर्ज की गई।

    मौसम विभाग ने छह जिलों में आंधी के साथ ओले गिरने का अलर्ट जारी किया है। इनमें खंडवा, बैतूल, देवास, नीमच, श्योपुर और खरगोन शामिल हैं। वहीं 10 से ज्यादा जिलों में बारिश-आंधी का असर देखने को मिलेगा। इनमें छिंदवाड़ा, रतलाम, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा और अनूपपुर (अमरकंटक) में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। यह सिस्टम अगले 3 से 4 दिनों तक सक्रिय रहेगा।

    प्रदेश के आसपास सक्रिय मौसम प्रणालियों के चलते प्रदेश में मौसम का मिजाज सोमवार को पूरी तरह बदल गया है। सोमवार को प्रदेश के कई जिलों में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को खासा नुकसान हुआ है। मालवा-निमाड़ अंचल के नीमच, जावद, मनासा, डीकेन, खरगोन के भीकनगांव क्षेत्र और धार के डही में तेज बारिश के साथ ओले गिरे। ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी और कटाई के बाद रखी गेहूं व चना की फसल को नुकसान पहुंचा है।

    भोपाल के मौसम विज्ञान केन्द्र से मिली जानकारी के मुताबिक, श्योपुर कलां में 3.0 मिमी, अनूपपुर में 0.5 मिमी और नीमच में 2.0 मिमी बारिश शाम साढ़े पांच बजे तक रिकॉर्ड की गई। ग्वालियर और चंबल को छोड़कर दोपहर बाद भोपाल समेत प्रदेश के आसमान पर बादल छा गए। इसके चलते इंदौर, छिंदवाड़ा समेत प्रदेश के कई शहरों में गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हुई। वहीं, नर्मदापुरम और खजुराहो में पारा 40 डिग्री सेल्सियस रहा। नौ जिलों में दिन का तापमान 39 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार पंजाब से होते हुए हरियाणा की तरफ एक द्रोणिका गुजर रही है, जो पश्चिमी राजस्थान से होते हुए अरब सागर तक बनी हुई है। वहीं, उत्तर-पश्चिमी उप्र पर चक्रवातीय हवाओं का घेरा बना हुआ है, जो ओडिशा तक एक द्रोणिका के रूप में है। यह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक पास हो रहा है। इसके चलते प्रदेश के मौसम में यह बादल आए हैं।

    मौसम वैज्ञानिक एचएस पांडे ने बताया कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी, पश्चिमी विक्षोभ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन के सक्रिय होने से प्रदेश में मौसम में यह बदलाव आया है। तीन अप्रैल तक प्रदेश के मौसम का मिजाज ऐसा ही रहेगा। मंगलवार से दिन के तापमान में गिरावट होगी। मौसम केंद्र द्वारा यलो अलर्ट जारी किया गया है। अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई शहरों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है।

    प्रदेश के दक्षिणी खंडवा, बैतूल, दक्षिणी देवास, उत्तरी नीमच, श्योपुर कलां और पूर्वी खरगोन में मध्यम तूफान के साथ ओलावृष्टि होने की संभावना है। साथ ही दक्षिणी नीमच, मंदसौर, गांधी सागर अभयारण्य, अनूपपुर, अमरकंटक, सिवनी, पांढुर्ना, पेंच, दक्षिणी छिंदवाड़ा, इंदौर, पश्चिम बड़वानी, दक्षिणी, पूर्वी धार, उत्तरी देवास, शाजापुर, उत्तरी रतलाम, दक्षिणी उज्जैन, रीवा, दक्षिणी बालाघाट में हल्की गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। दक्षिणी सीहोर और दक्षिणी भोपाल में बिजली गिरने, ओलावृष्टि के साथ मध्यम गरज के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने इन जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है।

  • मध्य प्रदेश डिजिटल गवर्नेंस में देश में दूसरा स्थान पर, मुख्यमंत्री ने दी बधाई

    मध्य प्रदेश डिजिटल गवर्नेंस में देश में दूसरा स्थान पर, मुख्यमंत्री ने दी बधाई


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश ने डिजिटल सेवाओं के मामले में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन (एनईएसडीए) रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश ने 1,752 ई-सेवाओं के साथ डिजिटल सेवाएं प्रदान कर देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डिजिटल गवर्नेंस में मध्य प्रदेश के देश में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि हमारे सद्प्रयासों को अब राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है। यह उपलब्धि सुशासन, पारदर्शिता, जनहितैषी और नागरिक-केंद्रित नीतियों के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस में मध्य प्रदेश ने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन के मानकों के अनुसार यह महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश ने 1,752 ई-सेवाओं के साथ डिजिटल सेवाएं प्रदान करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल होकर पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद गर्व का विषय है कि प्रदेश में 59 अनिवार्य सेवाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है।

    गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 1,752 ई-सेवाएं नागरिकों को ऑनलाइन दी जा रही हैं, जिससे लोगों को सरकारी काम के लिए दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ रहे हैं। खास बात यह है कि 59 अनिवार्य सेवाओं को 100 प्रतिशत लागू भी किया गया है। प्रदेश में डिजिटल सेवाओं के विस्तार में काफी तेजी दिखाई है। अब गांव से लेकर शहर तक लोग ऑनलाइन ही कई जरूरी काम आसानी से कर पा रहे हैं, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है।

    राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, ई-सेवाओं की संख्या के आधार पर कर्नाटक ने 2,102 सेवाओं के साथ पहला स्थान प्राप्त किया है, जबकि 1,752 सेवाओं के साथ मध्य प्रदेश दूसरे, 1,645 सेवाओं के साथ छत्तीसगढ़ तीसरे और 1,634 ई-सेवाओं के साथ तमिलनाडु चौथे स्थान पर है।

  • लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवा विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण : नरेन्द्र सिंह तोमर

    लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवा विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण : नरेन्द्र सिंह तोमर


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति, समुदाय या क्षेत्र की व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों की स्वतंत्रता, न्याय, समानता और बंधुता पर आधारित एक व्यापक व्यवस्था है। भारत का लोकतंत्र नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही मजबूत होता है।

    विधानसभा अध्यक्ष तोमर सोमवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में आयोजित युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के 25 नवंबर 1949 के संविधान सभा के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे लागू करने वाले लोग कितने प्रतिबद्ध और नैतिक हैं।

    तोमर ने कहा कि युवा विधायक लोकतंत्र में नागरिकों और शासन के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। उनकी नई ऊर्जा, आधुनिक सोच और नवाचार की क्षमता शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

    उन्होंने कहा कि युवा जनप्रतिनिधि सामाजिक कुरीतियों जैसे जातिवाद, नशाखोरी और लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध समाज को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस सोच का उल्लेख किया जिसमें राजनीति में नई ऊर्जा और पारदर्शिता लाने के लिए बड़ी संख्या में युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने के लिए चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम 2021 के माध्यम से मतदाता पंजीयन की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है।

    तोमर ने कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा ने भी लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। पहली बार निर्वाचित विधायकों की शून्यकाल सूचनाओं को प्राथमिकता देने तथा प्रश्नकाल से जुड़े उत्तरों की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने जैसे कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाए गए हैं। उन्होंने युवा विधायकों से आह्वान किया कि वे संसदीय परंपराओं, नियमों और प्रक्रियाओं का गंभीर अध्ययन करें, सदन की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा वरिष्ठ सदस्यों से मार्गदर्शन लेकर अपने ज्ञान और अनुभव को समृद्ध बनाएं। उन्होंने कहा कि अतीत के अनुभव और भविष्य की योजनाओं के बीच वर्तमान का सशक्त पुल युवा नेतृत्व ही बन सकता है।

    विधानसभा अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि युवा विधायक सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श और संवाद लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करेंगे तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान करेंगे।


    जनता और शासन के बीच सेतु बनें विधायक : वासुदेव देवनानी

    समारोह में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का मुख्य दायित्व जनता और शासन के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करना है। लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब जनता, विधायिका और शासन की प्रक्रियाओं के बीच पारदर्शिता और सहभागिता बढ़े। विधायक केवल चुनाव जीतने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने अध्ययन, चिंतन और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशीलता के माध्यम से समाज के विकास में सक्रिय योगदान दें। एक प्रभावी विधायक वही है जो सदन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग ले, प्रश्न पूछे, मुद्दों पर तैयारी के साथ चर्चा करे और जनता से जुड़े विषयों को गंभीरता से उठाए।

    देवनानी ने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह जनता की आकांक्षाओं और समस्याओं को सामने लाने का सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मंच है इसलिए आवश्यक है कि विधायकों में अध्ययन की प्रवृत्ति विकसित हो और वे संसद एवं विधानसभा की परंपराओं और प्रक्रियाओं की गहन समझ रखें। उन्होंने भ्रष्टाचार और सार्वजनिक संसाधनों के न्यायपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर भी बल देते हुए कहा कि शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता तभी बढ़ेगी जब जनप्रतिनिधि ईमानदारी और नैतिकता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।

    उन्होंने युवाओं की भूमिका पर भी विशेष बल दिया और कहा कि देश के विकास में युवा शक्ति की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। भारत का वास्तविक विकास तभी संभव है जब समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास के लाभ पहुंचे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब समावेशी विकास सुनिश्चित किया जाए और समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर प्राप्त हों। उन्होंने युवा जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे निरंतर अध्ययन, अनुभव और संवाद के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाएं तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और परंपराओं को और मजबूत करें।


    अपने क्षेत्र के लोगों से दिल से जुड़ना जरूरी : सिंघार

    मप्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि विधायक बनने के साथ ही हमारी स्वयं की कई अपेक्षाएं होती हैं। विधानसभा क्षेत्रवासी भी विधायक को विकास, जनसुविधा और जनकल्याण के कार्यों के लिए बहुत आशा से देखते हैं। विधायक का पद अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को मुखर करने का प्रभावी माध्यम है। अपने क्षेत्र के लोगों से दिल से जुड़ना और उनके साथ भावनात्मक संबंध बनाना जरूरी है। उन्होंने युवा विधायकों को विधानसभा की बैठकों में अधिक से अधिक भाग लेने तथा विकास के नाम पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सोचने के लिए प्रेरित किया। श्री सिंघार ने कहा कि युवा वर्ग में यह धारणा बनती जा रही है कि राजनीति बहुत खराब है और वे इस विचार के कारण राजनीति में आने से बच रहे हैं। देश हित और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए इस विचार को बदलने की आवश्यकता है।

    भोपाल स्थित विधानसभा के विधान परिषद हाल में हुआ कार्यक्रम वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। सम्मेलन में राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र 6) के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान के 45 वर्ष आयु तक के विधायक सम्मिलित हुए। सम्मेलन के प्रथम दिन राजस्थान और छत्तीसगढ़ से आये युवा विधायकों ने अपने विचार साझा किये।

  • राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक है। वे ही इस क्षेत्र में सक्रिय और सफल हो सकते हैं, जिनमें जनसेवा और जनकल्याण की भावना हो। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से राजनीति में आने वाले लोगों के कारण लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में आयोजित युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के लिए जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील होना, अध्ययनशील होना, तनाव प्रबंधन में दक्ष होना और जनहित के लिए पूर्ण समर्पण से कार्य करना आवश्यक है। कोई समस्या आने पर जनप्रतिनिधि का व्यवहार और समस्या निराकरण के लिए उनका प्रबंधन कौशल, उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है। सकारात्मक और समाज हित की गतिविधियों और विकास कार्यों के लिए हमें दलगत मतभेदों से ऊपर उठकर सोचना और कार्य करना चाहिए।

    भोपाल स्थित विधानसभा के विधान परिषद हाल में हुआ कार्यक्रम वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार विशेष रूप से उपस्थित थे। सम्मेलन में राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र 6) के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान के 45 वर्ष आयु तक के विधायक सम्मिलित हुए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह मानना कि लोकतंत्र के विचार की उत्पत्ति पश्चिम से हुई थी, पूर्णत: सत्य नहीं है। लोकतंत्र, भारतीय राजनैतिक व्यवस्था का नैसर्गिक गुण है। भारतीय व्यवस्थाओं में सदैव से ही मत भिन्नता को सम्मान दिया गया है, राजनैतिक और धार्मिक व्यवस्थाओं में शास्त्रार्थ की परम्परा प्राचीन समय से रही है। भारत में विचारों की अभिव्यक्ति को सभी क्षेत्रों में सम्मान और महत्व प्रदान किया गया। भारत में ऐतिहासिक रूप से जुड़े लोकतंत्र के संस्कारों और मूल्यों का ही परिणाम है कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी देश में लोकतंत्र पर आधारित व्यवस्थाएं सुगमता से संचालित होती रहीं। जबकि अन्य पड़ोसी देशों का हाल सबके सामने है।

    उन्होंने युवा विधायकों को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें हर स्थिति में सम भाव से रहने की प्रेरणा मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम से लेना चाहिए। जब उन्हें राजपाट सौंपा जाना था, तब उन्हें वनवास दे दिया गया। परंतु उन्होंने दोनों स्थितियों को समभाव से लिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य सहित कई भारतीय शासकों के इतिहास से ज्ञात होता है कि उन्होंने कभी अपनी अगली पीढ़ी को राज सत्ता सौंपने का उपक्रम नहीं किया। राज्य के प्रबंधन में लगे लोगों ने ही उनके बाद व्यवस्थाएं संभाली। ऐसे महान शासकों का मानना था कि यदि अगली पीढ़ी में नेतृत्व क्षमता और राज सत्ता के प्रबंधन की दक्षता होगी, तो वे स्वयं इस दिशा में सक्रिय होंगे। इन भारतीय मूल्यों और परम्पराओं का वर्तमान में भी पालन होना आवश्यक है।

    उन्होंने कहा कि इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों और सत्ता से जुड़े लोगों का अपने परिवार को समय देना और उन्हें अच्छे संस्कार देना भी आवश्यक है। अच्छे संस्कारों के अभाव में अगली पीढ़ी द्वारा यश प्रभावित करने की संभावना बनी रहती है। जनप्रतिनिधियों को इस ओर से विशेष रूप से संवेदनशील और सतर्क रहना चाहिए।

    मप्र के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि प्रजातंत्र जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए शासन है। अत: लोकतंत्र के सशक्त होने के लिए जनप्रतिनिधि का सशक्त होना आवश्यक है। विधायक होना बहुत महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व है, विधायक बड़ी जनसंख्या की आशाओं, आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी दुख, तकलीफों, अपेक्षाओं को वाणी प्रदान करते हैं। विधायकगण अपने विधानसभा क्षेत्र का प्रबंधन कैसे करते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवा विधायकों को संयत व्यवहार रखने, जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए उनके निराकरण की ठोस कोशिश करने, कार्यालय प्रबंधन के लिए संवेदनशील और सक्रिय स्टाफ रखने, अद्यतन डिजिटल तकनीकों के उपयोग में समय के साथ चलने की सलाह दी। सस्ती लोकप्रियता के लिए की गई गतिविधियां दीर्घकालिक दृष्टि से लाभकारी नहीं होती हैं।

  • Travel Tips: पार्टनर के साथ घूमने की बेस्ट जगहें, आज ही बनाएं रोमांटिक प्लान

    Travel Tips: पार्टनर के साथ घूमने की बेस्ट जगहें, आज ही बनाएं रोमांटिक प्लान


    नई दिल्ली। अगर आप अपने राजभवन के साथ सार्वभौम के साथ कुछ पल का मौका ढूंढ रहे हैं तो आपके लिए ये खास समय है। अपने तेलंगाना के साथ कहीं भी घूमने जाना न सिर्फ मूड को तरोताजा करता है, बल्कि दूसरे में फिर से प्यार की नई शिंगरी भी जगा देता है। इसके लिए आपको इन जगहों पर एक बार जरूर जाना चाहिए।

    मनाली
    रोमांटिक ट्रिप की बात हो और मनाली का नाम ना आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। घने चीड़ों के जंगल, नदियाँ, हरे-भरे मैदान और घने जंगल यहाँ के घने जंगलों को बेहद खास बनाते हैं। इस समय भी यहां पर काफी लेयर्ड हो रही है। इसके लिए इस बार भी यहां जाने के लिए फ़ार्फैक्ट है। यहां कपल्स को ऐसा लगता है जैसे वे किसी खूबसूरत कहानी का हिस्सा हों। तिब्बती मठों की सैर, नदी किनारे कैंपिंग और भृगु झील तक ट्रेक करना ये सब काफी अच्छा अनुभव कराती है।

    लैंडौर 

    हिमालय के विकाश में बसा लैंडौर एक छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। कोहरे से बूढ़ी पहाड़ियाँ जैसे, देवदार के जंगल और बुरेंश के लाल फूल यहाँ के स्मारक को किसी पुराने ब्रिटिश गाँव में बनाए जाते हैं। मसूरी के ऊपर स्थित इस शांत जगह पर लाल टिब्बा, सेंट पॉल चर्च, फोर शॉप और केलॉग मेमोरियल चर्च जैसे कई आकर्षण हैं। यहां का भी मौसम इस समय काफी अच्छा है। तो आप यहां बिना देरी किए जाने का बी प्लान बनवा सकते हैं।

    शिमला
    इस समय पद पर नियुक्ति हो सकती है। अद्वितीय-ठंडी हवाएं, हरे-भरे जंगल, खूबसूरत और पहाड़ियां आपको सर्वोच्च और साहसिक दोनों का अनुभव। मॉल रोड पर स्वादिष्ट और स्वादिष्ट व्यंजन का मजा भी अलग है। रिज, कुफरी और चैल जैसी जगहों पर आप एडवेंचर और कॉमेडी का आनंद ले सकते हैं। इस सीजन में स्वाद का मौसम सुहाना और नज़ारे अद्भुत होते हैं।

  • इस दिन से खुलेगा केदारनाथ का कपाट, जानिए 6 महीने क्यों बंद रहता है मंदिर

    इस दिन से खुलेगा केदारनाथ का कपाट, जानिए 6 महीने क्यों बंद रहता है मंदिर


    नई दिल्ली। केदारनाथ मंदिर (Kedarnath Dham) जो भगवान शिव का एक प्राचीन और प्रमुख तीर्थस्थल है, हर साल लगभग यहां लाखों लोग आते हैं और पूजा अर्चना करते हैं। अब मंदिर की यात्रा शुरू होने वाली है यानि इसका कपाट खुलने जा रहा है। आपको बता दें कि, ये मंदिर हर 6 महीने बंद रहता है। इस दौरान भक्तगण बाबा केदारनाथ के दर्शन ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में कर सकते हैं।

    इस कारण बंद रहता हैं मंदिर
    केदारनाथ मंदिर के बंद होने का मुख्य कारण है भारी बर्फबारी और मौसम की कठिनाइयाँ, जो नवंबर से मई तक रहती हैं। इस दौरान मंदिर और आसपास के क्षेत्र में भारी बर्फबारी हो जाती है और रास्ते अवरुद्ध हो जाते हैं, जिससे तीर्थयात्रियों का पहुंचना असंभव हो जाता है।

    मौसम की यह चुनौती न केवल यात्रियों के लिए जोखिमपूर्ण होती है, बल्कि मंदिर प्रशासन के लिए भी सुरक्षा और व्यवस्थाओं को बनाए रखना मुश्किल कर देती है। उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, शीतकालीन महीनों में रास्तों पर हिमस्खलन और भूस्खलन का खतरा सबसे अधिक होता है। इसलिए मंदिर को बंद करना अनिवार्य हो जाता है।

    भाई दूज के दिन ही बंद होते हैं केदारनाथ मंदिर के कपाट
    केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने और बंद होने की एक तिथि भी तय होती है। इसी तिथि में मंदिर के कपाट खोले और बंद किए जाते हैं। बाबा केदारनाथ धाम के कपाट भी हर भाई दूज यानी दिवाली के दो दिन बाद बंद कर दिए जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ हिमालय पहुंचे जहां उन्होंने भगवान शिव के मंदिर का निर्माण किया। इसके बाद उन्होंने यहीं पर अपने पितरों का तर्पण किया है। इसके बाद ही उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई। कहते हैं कि जिस दिन पांडवों ने अपने पूर्वजों का तर्पण किया था वो भाई दूज का ही दिन था, इसलिए तब से इसी दिन केदारनाथ के कपाट बंद होने लगे।

    एक और वजह
    दूसरी वजह यह है कि भैया दूज के दिन से ही शीतकाल का आरंभ होता है। इस दौरान हिमालय क्षेत्र में रहना बहुत मुश्किल होता है। दरअसल, शीतकाल के समय हिमालय में जबरदस्त बर्फबारी होती है। इन कारणों से भी भैया दूज के बाद बाबा केदारनाथ के दर्शन रोक दिए जाते हैं और मंदिर के कपाट अगले 6 महीनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं।

    इस दिन खुलेगा कपाट
    केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने ही वाले हैं। उत्तराखंड में इस समय सरकार चार धाम यात्रा की तैयारियों में जुटी हुई है। इस वर्ष केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे। हालांकि, गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को खुलने के साथ ही प्रदेश की पवित्र चार धाम यात्रा की शुरुआत हो जाएगी। बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलने हैं।

    केदारनाथ धाम पहुंचने के लिए
    Kedarnath Temple तक पहुंचना अपने आप में एक आध्यात्मिक और रोमांचक यात्रा है। इस पवित्र धाम के दर्शन के लिए सबसे पहले श्रद्धालुओं कोहरिद्वार/ऋषिकेश पहुंचना होता है। यहां से सड़क मार्ग द्वारा बस या टैक्सी के जरिए सोनप्रयाग तक सफर किया जाता है।

    सोनप्रयाग से आगे का रास्ता और भी दिलचस्प हो जाता है। यहां से छोटी गाड़ियों के माध्यम से यात्रियों को गौरीकुंड पहुंचाया जाता है, जो केदारनाथ यात्रा का मुख्य बेस कैंप है। गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक लगभग 16-18 किलोमीटर का ट्रेक शुरू होता है। यह रास्ता पहाड़ों, झरनों और हरियाली से भरपूर होता है, जो यात्रा को और भी यादगार बना देता है।

    गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक
    इस ट्रेक को पैदल तय कर सकते हैं या फिर घोड़ा, खच्चर और पालकी का सहारा ले सकते हैं। वहीं, जो लोग कम समय में यात्रा करना चाहते हैं, उनके लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है, जिससे वे सीधे मंदिर के पास पहुंच सकते हैं।

    केदारनाथ धाम जाने की प्रमुख तिथिया
    अक्षय तृतीया: इसी दिन केदारनाथ के कपाट खोले जाते हैं।
    श्रावण मास: भगवान शिव की पूजा का सबसे शुभ समय होता है ।
    भैया दूज: इस दिन मंदिर के कपाट बंद किए जाते हैं।

  • डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 95 पार, करेंसी मार्केट में बड़ा बदलाव

    डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 95 पार, करेंसी मार्केट में बड़ा बदलाव


    नई दिल्ली।भारतीय रुपए ने सोमवार को डॉलर के मुकाबले पहली बार 95 के स्तर को पार किया और 95.2 का नया निचला स्तर देखा। हालांकि दिन के अंत में रुपया 94.83 पर बंद हुआ, जो कि शुक्रवार के 94.81 के बंद से 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।

    मध्य पूर्व तनाव और तेल की कीमतों का असर

    विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के चलते रुपए में कमजोरी लगातार बढ़ रही है। अकेले मार्च महीने में भारतीय मुद्रा ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भी सोमवार को गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,947.55 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत कमजोर होकर 22,331.40 पर बंद हुआ। मार्च 2026 में निफ्टी में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई, जो कि मार्च 2020 के बाद मासिक आधार पर सबसे बड़ी गिरावट है।

    आरबीआई की नई दिशा, ओवरनाइट नेट ओपन लिमिट

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में बैंकों के लिए ओवरनाइट नेट ओपन पोजिशन लिमिट को 100 मिलियन डॉलर करने का निर्णय लिया। इसके बाद रुपया शुरुआती कारोबार में मजबूती के साथ खुला, लेकिन सत्र के दौरान 160 पैसे गिरावट के साथ शुरुआती स्तर खो दिया। केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को कहा था कि बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 10 अप्रैल तक हर कारोबारी दिन के अंत में उनकी नेट ओपन रुपया पोजिशन 100 मिलियन डॉलर से अधिक न हो। अनुमान है कि इन निवेशों का आकार 25 अरब डॉलर से लेकर 50 अरब डॉलर तक हो सकता है।

    तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव

    पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 115 डॉलर प्रति बैरल पर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 101.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की बढ़ती कीमतों और मुद्रा कमजोर होने के कारण भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव बढ़ा है। निवेशकों ने सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख किया, जिससे बाजार में गिरावट और तेज हुई।

    मार्च 2026 का आखिरी कारोबारी सप्ताह भारतीय निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। रुपए ने पहली बार 95 का स्तर पार कर नई चुनौतियों का संकेत दिया, वहीं शेयर बाजार में गिरावट ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व तनाव, तेल की ऊंची कीमतें और आरबीआई की नई दिशा रुपए और शेयर बाजार दोनों पर असर डाल रही हैं। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा और निवेशकों की प्रतिक्रिया इस समय की आर्थिक नीतियों और वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेगी।

  • ब्लैक बॉक्स ने प्रेफरेंशियल इश्यू पूरा किया, वारंट कन्वर्जन से मिले 386 करोड़ रुपए

    ब्लैक बॉक्स ने प्रेफरेंशियल इश्यू पूरा किया, वारंट कन्वर्जन से मिले 386 करोड़ रुपए


    नई दिल्ली। ग्लोबल डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी ब्लैक बॉक्स लिमिटेड ने सोमवार को बताया कि 27 सितंबर, 2024 को जारी किए गए वारंटों के कन्वर्जन के माध्यम से 386.36 करोड़ रुपए सफलतापूर्वक प्राप्त किए गए हैं। इस कदम से कंपनी की वित्तीय मजबूती और निवेशकों के प्रति विश्वास को और बढ़ावा मिला है।

    वारंट कन्वर्जन का पूरा लाभ

    कंपनी ने 92,65,215 वारंट को 417 रुपए प्रति शेयर के निर्गम मूल्य पर इक्विटी शेयरों में बदल दिया। सभी वारंट धारकों ने अपने अधिकारों का पूर्ण रूप से उपयोग किया, और किसी ने भी अपने अधिकार नहीं गंवाए। इस पूरी प्रक्रिया के समय पर और सफलतापूर्वक होने से ब्लैक बॉक्स के व्यापारिक सिद्धांत, विकास रणनीति और क्रियान्वयन क्षमता में निवेशकों और प्रमोटरों का मजबूत विश्वास दिखाई देता है।

    प्रमोटरों ने किया बड़ा योगदान

    इस प्रेफरेंशियल इश्यू में प्रमोटरों का योगदान भी अहम रहा, जिन्होंने कुल निवेश का 51.76 प्रतिशत यानी लगभग 200 करोड़ रुपए जुटाए। हस्तांतरण के बाद प्रमोटरों की कुल शेयरधारिता 69.99 प्रतिशत हो गई है। यह कंपनी के प्रति उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और शेयरधारकों के साथ एकजुटता को दर्शाता है।

    विकास और रणनीतिक उपयोग

    ब्लैक बॉक्स के सीईओ संजीव वर्मा ने कहा”हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि प्रमोटरों और निवेशकों दोनों की पूर्ण भागीदारी के साथ यह पूंजी जुटाना सफल रहा। 386 करोड़ रुपए के इस निवेश से हमारी बैलेंस शीट मजबूत हुई है और विकास लक्ष्यों को गति देने के लिए हमें अतिरिक्त लचीलापन मिला है।उन्होंने आगे कहा कि यह राशि कंपनी को डिजिटल अवसंरचना क्षमताओं को बढ़ाने, बाजार में उपस्थिति का विस्तार करने और ग्राहकों एवं शेयरधारकों को लगातार मूल्य प्रदान करने में मदद करेगी।

    वित्तीय दृष्टिकोण और निवेशकों का विश्वास

    ब्लैक बॉक्स के मुख्य वित्तीय अधिकारी दीपक बंसल ने कहा,”हम अपने निवेशकों के निरंतर विश्वास और समर्थन के लिए आभारी हैं। यह पूंजी हमें प्राथमिकता वाले विकास क्षेत्रों में निवेश करने की क्षमता देती है और पूंजी आवंटन, परिचालन दक्षता और प्रतिफल के प्रति अनुशासित दृष्टिकोण बनाए रखने में भी सहायक है।उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी अब सभी बाजारों में उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है।

    ब्लैक बॉक्स का यह प्रेफरेंशियल इश्यू न केवल 386 करोड़ रुपए की पूंजी जुटाने में सफल रहा, बल्कि प्रमोटरों और निवेशकों के बीच विश्वास और सहयोग को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है। कंपनी अब डिजिटल अवसंरचना क्षेत्र में विस्तार और मजबूत वित्तीय स्थिति के साथ अपने अगले विकास चरण की ओर बढ़ रही है।