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  • गंगा का रौद्र रूप और बारिश का कहर यूपी में बिगड़े हालात सड़कें जलमग्न घाट डूबे कई गांवों पर बाढ़ का खतरा

    गंगा का रौद्र रूप और बारिश का कहर यूपी में बिगड़े हालात सड़कें जलमग्न घाट डूबे कई गांवों पर बाढ़ का खतरा


    उत्तर प्रदेशउत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता ने कई जिलों में हालात बिगाड़ दिए हैं। लगातार हो रही बारिश के चलते नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और कई इलाकों में सड़कें तथा घर पानी में डूब गए हैं। बिजनौर में गंगा का पानी स्टेट हाईवे तक पहुंच गया है। सड़क पर करीब दो फीट तक पानी बहने के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। हालात ऐसे बने कि लोगों को अपनी कार और बाइक ट्रैक्टर ट्रॉली की मदद से पानी पार करानी पड़ी। वहीं प्रयागराज में पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।

    प्रयागराज के करेली इलाके में बारिश का पानी लोगों के घरों के भीतर तक पहुंच गया है। कई मकानों में करीब दो फीट तक पानी भर गया है। पानी बढ़ने के कारण घरों में रखा बेड सोफा और दूसरे जरूरी सामान भी प्रभावित हुए हैं। कुछ परिवारों को मजबूरी में घर की पहली मंजिल या छत पर शरण लेनी पड़ी है। लगातार बारिश के कारण इलाके के लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। वहीं रामबाग रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर भी बारिश का पानी जमा हो गया जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों पर हालात चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। घाटों के किनारे बने कई मंदिरों में गंगा का पानी प्रवेश कर गया है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के शवदाह स्थल भी जलमग्न हो गए हैं। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए घाट के ऊपरी हिस्से का इस्तेमाल किया जा रहा है। नमो घाट की सीढ़ियां भी पानी में डूब गई हैं। गंगा का पानी लगातार बढ़ने के कारण प्रशासन ने लोगों को नदी के किनारे जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की है। दशाश्वमेध घाट पर होने वाली प्रसिद्ध गंगा आरती भी अब घाट के ऊपरी हिस्से और छत पर कराई जा रही है।

    गोंडा में घाघरा नदी के उफान ने ग्रामीण इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिले के पांच गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं और नदी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में मवेशियों के लिए पहुंचाए गए सूखे भूसे को लेकर भी अफरा तफरी का माहौल देखने को मिला। भूसा लेने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुट गई और स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा। बाद में पुलिस की मौजूदगी में भूसे का वितरण कराया गया ताकि सभी जरूरतमंद लोगों तक चारा पहुंच सके।

    लखनऊ में भी पिछले चार दिनों से बारिश का सिलसिला जारी है। बुधवार सुबह राजधानी के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई। इसके अलावा बाराबंकी समेत कई जिलों में बूंदाबांदी दर्ज की गई। आगरा वाराणसी कानपुर समेत प्रदेश के 40 से अधिक शहरों में सुबह बादल छाए रहे हालांकि बाद में कुछ इलाकों में धूप निकल आई। इसके बावजूद मौसम विभाग ने प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है।

    मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। प्रयागराज गोंडा कौशांबी गाजीपुर और भदोही में 12वीं कक्षा तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। वहीं जौनपुर सोनभद्र और मिर्जापुर में आठवीं कक्षा तक के स्कूल बंद रखने का फैसला लिया गया है। प्रशासन लगातार जलभराव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है।

    लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक हवा में कम दबाव का क्षेत्र बनने मानसून ट्रफ के उत्तर की ओर खिसकने और बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी आने के कारण मानसून सक्रिय हुआ है। उनके अनुसार 23 अगस्त तक मानसूनी गतिविधियों में तेजी बनी रह सकती है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव वाले सिस्टम के प्रभाव से बारिश का सिलसिला आगे भी जारी रहने की संभावना है। 20 और 21 अगस्त को प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।

    ऐसे में अगले कुछ दिन उत्तर प्रदेश के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं। नदियों का बढ़ता जलस्तर बारिश और जलभराव पहले ही कई जिलों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा चुका है। प्रशासन की ओर से लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों और नदियों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लोगों की नजर अब आने वाले दिनों की बारिश पर टिकी है क्योंकि लगातार बारिश से हालात और गंभीर होने की आशंका बनी हुई है।

  • अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद निर्णायक मोड़ पर, ट्रंप की समयसीमा से पहले समझौते की कोशिशें तेज, टैरिफ बढ़ने का खतरा मंडराया

    अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद निर्णायक मोड़ पर, ट्रंप की समयसीमा से पहले समझौते की कोशिशें तेज, टैरिफ बढ़ने का खतरा मंडराया


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से चल रहा व्यापार विवाद अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां आने वाले कुछ घंटे दोनों देशों के आर्थिक और राजनीतिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के साथ समझौते के लिए बुधवार दोपहर 12 बजकर 1 मिनट तक की समयसीमा तय की है। निर्धारित समय तक सहमति नहीं बनने की स्थिति में कनाडा से अमेरिका पहुंचने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी गई है। इससे दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण व्यापारिक रिश्तों पर दबाव और बढ़ गया है।

    ट्रंप की ओर से रखी गई मांगें केवल टैरिफ व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। अमेरिका चाहता है कि कनाडा अधिक अमेरिकी सैन्य उपकरण खरीदे। इसके अलावा कनाडा की अमेरिका के गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली में भागीदारी और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों तक अमेरिकी पहुंच भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। रणनीतिक खनिजों को लेकर अमेरिका की चिंता का संबंध चीन पर निर्भरता कम करने की व्यापक नीति से है। ऐसे खनिज आधुनिक रक्षा उपकरणों, ऊर्जा तकनीक और उच्च तकनीक वाले उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ट्रंप के बीच पिछले दो दिनों में दो बार फोन पर बातचीत हो चुकी है। कार्नी ने बातचीत को गहन और नाजुक बताया है और संकेत दिया है कि इस स्तर की चर्चा के विवरण को सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों पक्ष अंतिम समय तक समझौते की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों की प्राथमिकताओं में अंतर इतना बड़ा है कि समयसीमा समाप्त होने से पहले सहमति बनना आसान नहीं माना जा रहा।

    ट्रंप का कनाडा के प्रति मौजूदा रुख पारंपरिक अमेरिकी नीति से काफी अलग दिखाई देता है। उन्होंने कनाडाई उत्पादों पर अलग-अलग स्तर के टैरिफ लगाए हैं और कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने जैसी टिप्पणियां भी की हैं। इन बयानों और व्यापारिक कदमों से कनाडा में अमेरिका के प्रति असंतोष बढ़ा है। कनाडाई सरकार पर घरेलू स्तर पर यह दबाव भी है कि वह अमेरिकी दबाव के सामने अपने आर्थिक हितों से समझौता न करे।

    अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक मतभेद हालांकि नए नहीं हैं। सॉफ्टवुड लकड़ी, डेयरी बाजार और कई अन्य उत्पादों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद रहे हैं। मौजूदा टैरिफ संघर्ष ने इन पुराने मतभेदों को और गंभीर बना दिया है। हॉकी स्टिक और टंग डिप्रेशर जैसे उत्पादों पर भी अमेरिकी शुल्क लगाए जाने से विवाद का दायरा स्पष्ट होता है।

    दोनों देशों के बीच करीब 5,525 मील लंबी सीमा है और इस सीमा के जरिए रोजाना लगभग 3.3 लाख लोग तथा करीब 2 अरब डॉलर का सामान आवाजाही करता है। कनाडा के कुल माल निर्यात का लगभग 72 प्रतिशत अमेरिका को जाता है। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाला व्यापार युद्ध कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है, जबकि अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी महंगे आयात और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान का असर पड़ सकता है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप की तय समयसीमा समाप्त होने से पहले दोनों पक्ष कोई समझौता कर पाएंगे। अंतिम दौर की बातचीत जारी रहने से उम्मीद बनी हुई है, लेकिन अमेरिकी मांगों और कनाडा की घरेलू राजनीतिक मजबूरियों के बीच संतुलन बनाना कठिन है। यदि आखिरी समय में समझौता हो जाता है तो दोनों देशों को तत्काल आर्थिक दबाव से राहत मिल सकती है, लेकिन यदि बातचीत विफल रही तो नए और ऊंचे टैरिफ व्यापारिक संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकते हैं।

  • भारतीय मूल की पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेस क्षेत्र में डेमोक्रेटिक प्राथमिक चुनाव जीतकर नवंबर मुकाबले का रास्ता साफ किया

    भारतीय मूल की पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेस क्षेत्र में डेमोक्रेटिक प्राथमिक चुनाव जीतकर नवंबर मुकाबले का रास्ता साफ किया


    नई दिल्ली ।
    भारतीय मूल की पिया डांडिया ने अमेरिकी राजनीति में महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेस क्षेत्र के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी का प्राथमिक चुनाव जीत लिया है। पूर्व स्कूल प्रिंसिपल डांडिया ने वकील कायसिया अर्ली को हराकर नवंबर में होने वाले आम चुनाव के लिए पार्टी का उम्मीदवार बनने का रास्ता साफ कर लिया है। प्राथमिक चुनाव में डांडिया को 68.6 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी अर्ली को 31.4 प्रतिशत मत प्राप्त हुए।

    डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी ने प्राथमिक चुनाव में जीत के बाद पिया डांडिया को बधाई दी। पार्टी ने उनके लंबे समय से शिक्षा और समुदाय से जुड़े नेतृत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वह लोगों के लिए नए अवसर बढ़ाने और कामकाजी परिवारों के हितों के लिए काम करने के उद्देश्य से चुनाव मैदान में उतरी हैं।

    अब पिया डांडिया का मुकाबला नवंबर में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार पूर्व नौसैनिक कैसी असकर से होगा। यह चुनाव फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेस क्षेत्र में दोनों दलों के बीच सीधा मुकाबला होगा। इस सीट को चुनावी क्षेत्र के नए परिसीमन के बाद बनाया गया है और प्राथमिक चुनाव के समय यहां कोई मौजूदा सांसद चुनाव मैदान में नहीं था।

    पिया डांडिया इससे पहले फ्लोरिडा के 21वें जिले से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद ब्रायन मास्ट को चुनौती देने की कोशिश कर चुकी हैं। ब्रायन मास्ट विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हैं। बाद में डांडिया दक्षिण फ्लोरिडा के 22वें जिले में चली गईं और उन्होंने इसी क्षेत्र से डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी की।

    डांडिया की राजनीतिक पृष्ठभूमि से पहले उनका पेशेवर जीवन शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा रहा है। वह अमेरिका में हाई स्कूल की प्रिंसिपल रह चुकी हैं। शिक्षा क्षेत्र में काम करने के दौरान छात्रों और समुदाय से जुड़े मुद्दों पर उनका अनुभव रहा है। इसी पृष्ठभूमि को वह अपने राजनीतिक अभियान में भी प्रमुखता से सामने रख रही हैं।

    पिया डांडिया के माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। भारतीय मूल की पृष्ठभूमि के कारण उनकी राजनीतिक यात्रा अमेरिकी समुदाय के साथ-साथ भारतीय मूल के लोगों के बीच भी रुचि का विषय बनी हुई है। प्राथमिक चुनाव में मिली स्पष्ट जीत ने नवंबर के आम चुनाव के लिए उनकी स्थिति मजबूत की है।

    जीत के बाद डांडिया ने अपने संदेश में अभियान पर भरोसा जताने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह अपने छात्रों, अपने बेटे और जिले में बड़े हो रहे उन बच्चों के लिए चुनाव में उतरी हैं, जो बेहतर भविष्य के हकदार हैं। उन्होंने अपने अभियान को आम परिवारों की आर्थिक चुनौतियों से जोड़ते हुए खर्च कम करने और भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कही।

    डांडिया ने कहा कि उनका उद्देश्य वॉशिंगटन को फिर से आम लोगों के लिए काम करने वाला बनाना है। उनके अभियान में परिवारों के लिए रोजमर्रा के खर्च, स्वास्थ्य सेवाओं और आवास की लागत जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी इन्हीं मुद्दों को दक्षिण फ्लोरिडा के परिवारों से जोड़ते हुए डांडिया के समर्थन को आगे बढ़ाने की बात कही है।

    नवंबर में होने वाला चुनाव पिया डांडिया के राजनीतिक करियर के लिए अगली बड़ी परीक्षा होगा। प्राथमिक चुनाव में मजबूत प्रदर्शन के बाद अब उन्हें रिपब्लिकन उम्मीदवार कैसी असकर का सामना करना है। चुनाव परिणाम यह तय करेगा कि फ्लोरिडा का 22वां कांग्रेस क्षेत्र अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में किस दल का प्रतिनिधित्व करेगा। डांडिया की जीत के साथ भारतीय मूल के उम्मीदवार के रूप में उनकी राजनीतिक यात्रा ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है।

  • मूविंग सीट से लेकर रोलर कोस्टर राइड तक इंदौर जू का 14D थिएटर बना नया आकर्षण पहले दिन सभी शो फुल

    मूविंग सीट से लेकर रोलर कोस्टर राइड तक इंदौर जू का 14D थिएटर बना नया आकर्षण पहले दिन सभी शो फुल


    इंदौर इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में शुरू हुआ 14D थिएटर आम लोगों के लिए खुलते ही शहरवासियों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया है। मंगलवार को पहले दिन थिएटर के लगभग सभी शो हाउसफुल रहे और बड़ी संख्या में लोग परिवार तथा बच्चों के साथ यहां पहुंचे। सामान्य सिनेमा हॉल से बिल्कुल अलग अनुभव देने वाले इस थिएटर में दर्शकों को मूविंग सीट्स के साथ विजुअल इफेक्ट्स और अलग अलग राइडिंग इफेक्ट्स का अनुभव कराया जा रहा है। यही वजह रही कि पहले ही दिन थिएटर को देखने और इसमें फिल्म का रोमांच महसूस करने के लिए लोगों में जबरदस्त उत्साह नजर आया।

    14D थिएटर में फिल्म देखने के दौरान दर्शकों को केवल स्क्रीन पर दृश्य देखने तक सीमित नहीं रहना पड़ता बल्कि स्क्रीन पर दिखाई जा रही गतिविधियों के साथ सीटों की मूवमेंट और अलग अलग इफेक्ट्स का अनुभव भी मिलता है। कभी सीट आगे पीछे होती है तो कभी अचानक ऊपर नीचे की हलचल महसूस होती है। कई दृश्यों में ऐसा अनुभव कराया जाता है जैसे दर्शक खुद उसी घटना का हिस्सा हों। बच्चों के लिए यह अनुभव खास तौर पर रोमांचक रहा। पहले दिन थिएटर पहुंचे परिवारों में महिलाओं और बच्चों की संख्या काफी ज्यादा नजर आई।

    शो खत्म होने के बाद बच्चों में थिएटर के अनुभव को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। कई बच्चों ने बताया कि उन्होंने इससे पहले ऐसा थिएटर नहीं देखा था। उनके लिए सबसे ज्यादा रोमांचक रोलर कोस्टर जैसी राइड रही। सीटों का अचानक हिलना डुलना और स्क्रीन पर चल रहे दृश्यों के साथ शरीर को मिलने वाला मूवमेंट बच्चों को खूब पसंद आया। कुछ बच्चों के लिए यह अनुभव किसी मनोरंजन पार्क की राइड जैसा रहा और उन्होंने इसे दोबारा देखने की इच्छा भी जताई।

    बच्चों के साथ थिएटर पहुंचे अभिभावकों ने भी इसे सामान्य फिल्म देखने से अलग अनुभव बताया। कई माता पिता का कहना था कि बच्चों के साथ समय बिताने और उन्हें कुछ नया अनुभव कराने के लिहाज से यह जगह काफी अच्छी है। दर्शकों ने सीटों की मूवमेंट विजुअल इफेक्ट्स और अलग अलग राइडिंग इफेक्ट्स को थिएटर की सबसे बड़ी खासियत बताया। कुछ लोगों ने इसे पैसा वसूल अनुभव करार दिया। उनका कहना था कि इंदौर आने वाले रिश्तेदारों और बाहर से आने वाले मेहमानों को भी अब इस थिएटर का अनुभव कराया जा सकता है।

    14D थिएटर को लेकर युवाओं में भी खासा उत्साह दिखाई दिया। युवाओं ने बताया कि शहर में मनोरंजन के कई विकल्प मौजूद हैं लेकिन इस तरह का अनुभव अलग है। खास तौर पर सीटों की मूवमेंट और स्क्रीन पर दिखाई देने वाले दृश्यों के साथ होने वाले इफेक्ट्स ने उन्हें प्रभावित किया। पहले दिन बड़ी संख्या में युवाओं के पहुंचने से यह भी साफ हुआ कि थिएटर सिर्फ बच्चों तक सीमित आकर्षण नहीं है बल्कि अलग तरह के मनोरंजन की तलाश करने वाले लोगों को भी आकर्षित कर रहा है।

    हालांकि वर्चुअल जंगल सफारी को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। कुछ लोगों को इसका अनुभव अच्छा लगा जबकि कुछ दर्शकों को यह उनकी उम्मीद के मुताबिक प्रभावी नहीं लगा। इसके बावजूद 14D थिएटर के मुख्य अनुभव को लेकर ज्यादातर दर्शकों की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही।

    वहीं कुछ अभिभावकों ने छोटे बच्चों के टिकट की कीमत को लेकर भी सुझाव दिया। एक महिला दर्शक ने कहा कि छोटे बच्चों के लिए टिकट की दर कम होनी चाहिए क्योंकि अचानक होने वाली सीटों की तेज मूवमेंट और इफेक्ट्स से कुछ छोटे बच्चे डर सकते हैं। ऐसी स्थिति में माता पिता को शो बीच में छोड़कर बच्चे को बाहर लाना पड़ सकता है। इसके लिए छोटे बच्चों के टिकट पर अलग दर तय करने की मांग भी सामने आई।

    पहले ही दिन मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स के बाद कमला नेहरू जू का 14D थिएटर इंदौर में मनोरंजन के नए आकर्षण के तौर पर उभरता दिखाई दे रहा है। परिवार बच्चों और युवाओं की मौजूदगी ने इसकी लोकप्रियता की शुरुआत को खास बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि शुरुआती उत्साह के बाद भी दर्शकों की भीड़ इसी तरह बनी रहती है या नहीं।

  • अमेरिका ईरान तनाव के बीच यूएई में मिसाइल खतरे का अलर्ट, एयर डिफेंस ने कार्रवाई कर स्थिति संभाली

    अमेरिका ईरान तनाव के बीच यूएई में मिसाइल खतरे का अलर्ट, एयर डिफेंस ने कार्रवाई कर स्थिति संभाली


    नई दिल्ली । 
    पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर संयुक्त अरब अमीरात में भी देखने को मिला। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश की ओर बढ़ रहे मिसाइल खतरे का पता एयर डिफेंस सिस्टम ने लगाया। इसके बाद दुबई में लोगों के मोबाइल फोन पर पहली बार मिसाइल खतरे को लेकर इमरजेंसी अलर्ट भेजा गया। प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय आधिकारिक सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की।

    मिसाइल अलर्ट जारी होने के दौरान दुबई और आसपास के इलाकों में आसमान से तेज आवाजें सुनाई देने की जानकारी सामने आई। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन आवाजों का संबंध एयर डिफेंस सिस्टम की कार्रवाई से था। सुरक्षा प्रणाली ने देश की ओर बढ़ रहे मिसाइल खतरे का मुकाबला करने और मिसाइलों को हवा में रोकने की कोशिश की।

    यूएई सरकार ने कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखी। कुछ समय बाद एक दूसरा अलर्ट जारी किया गया, जिसमें बताया गया कि मिसाइल का खतरा समाप्त हो गया है और स्थिति सामान्य हो गई है।

    यूएई के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि ईरान की ओर से दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। मंत्रालय के अनुसार, इनमें से एक मिसाइल यूएई की समुद्री सीमा से बाहर जाकर गिरी, जबकि दूसरी मिसाइल देश की सीमा के अंदर गिरी। अधिकारियों ने लोगों को भरोसा दिलाया कि स्थिति नियंत्रण में है और सुरक्षा व्यवस्था लगातार सक्रिय है।

    मिसाइल अलर्ट के बाद यूएई में नागरिक सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ गई। मोबाइल फोन पर जारी आपात संदेश का उद्देश्य लोगों को संभावित खतरे के प्रति तत्काल सावधान करना था। प्रशासन की ओर से नागरिकों को अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक निर्देशों पर भरोसा करने की अपील की गई।

    इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने दोनों देशों के बीच तत्काल बातचीत की किसी योजना से भी इनकार किया।

    ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि समुद्री मार्ग जहाजों के लिए खुला है और पानी में बिछाई गई माइंस को हटा दिया गया है। दूसरी ओर, ईरान की ओर से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की बात सामने आने के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का प्रभाव पश्चिम एशिया से बाहर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ी है। तेल की कीमतों में लंबे समय तक मजबूती बनी रहने पर कई देशों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

    तनाव बढ़ने का असर शेयर बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ने से कई बाजारों में दबाव देखने को मिला है। इसके साथ ही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज की लागत बढ़ने की चिंता भी सामने आई है।

    फिलहाल यूएई में मिसाइल खतरा समाप्त होने की घोषणा के बाद स्थिति सामान्य बताई गई है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। आने वाले समय में दोनों देशों के सैन्य कदम, कूटनीतिक संपर्क और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

  • सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने फिर दिखाया दम ईस्ट दिल्ली राइडर्स को 30 रन से हराकर अंकतालिका में मजबूत की बादशाहत

    सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने फिर दिखाया दम ईस्ट दिल्ली राइडर्स को 30 रन से हराकर अंकतालिका में मजबूत की बादशाहत


    नई दिल्ली। दिल्ली प्रीमियर लीग 2026 में सेंट्रल दिल्ली किंग्स का शानदार अभियान लगातार जारी है। मंगलवार को अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में किंग्स ने ईस्ट दिल्ली राइडर्स को 30 रन से शिकस्त देकर टूर्नामेंट में अपनी आठवीं जीत दर्ज की। इस जीत के साथ सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने अंकतालिका में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। टीम ने अब तक खेले 9 मुकाबलों में 8 जीत हासिल की हैं और वह शीर्ष स्थान पर मजबूती से बनी हुई है। दूसरी ओर ईस्ट दिल्ली राइडर्स के लिए यह मुकाबला बेहद निराशाजनक रहा। सीजन में छठी हार के साथ उसकी खिताबी दौड़ खत्म हो गई है।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी सेंट्रल दिल्ली किंग्स की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने पहले ही ओवर में अपने दोनों सलामी बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए। मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं और महज 14 रन के स्कोर तक किंग्स ने अपना तीसरा विकेट भी खो दिया। शुरुआती झटकों के बाद केशव डबास और जोंटी सिद्धू ने पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 44 गेंदों में 54 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की और टीम को संकट से बाहर निकालने का प्रयास किया।

    केशव डबास 18 रन बनाकर आउट हुए जबकि जोंटी सिद्धू ने 28 गेंदों में 41 रन की उपयोगी पारी खेली। दोनों के जाने के बाद एक बार फिर किंग्स की पारी लड़खड़ाती नजर आई। हालांकि आदित्य भंडारी ने जिम्मेदारी संभाली और मनी ग्रेवाल के साथ 38 रन की साझेदारी की। इसके बाद उन्होंने वंश बेदी के साथ भी 32 रन जोड़कर टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाया। मनी ग्रेवाल ने 11 रन जबकि वंश बेदी ने 27 रन बनाए। सेंट्रल दिल्ली किंग्स की पूरी टीम 19.5 ओवर में 179 रन पर सिमट गई।

    ईस्ट दिल्ली राइडर्स की ओर से कप्तान सिमरजीत सिंह और रोहित यादव ने गेंदबाजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन तीन विकेट हासिल किए। आशीष मीणा रौनक वाघले और मयंक रावत को एक एक विकेट मिला। 180 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ईस्ट दिल्ली राइडर्स की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही। पारी की पांचवीं गेंद पर वंश मेहरा केवल एक रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद सुजल सिंह और अर्पिण राणा ने पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 23 गेंदों में 30 रन जोड़े। सुजल 11 गेंदों में 12 रन बनाकर आउट हुए और अगली ही गेंद पर अरुण पुंडीर ने उदय चावला को बिना खाता खोले पवेलियन भेज दिया।

    सिर्फ 32 रन के स्कोर तक ईस्ट दिल्ली राइडर्स अपने तीन विकेट गंवा चुकी थी। यहां से अर्पिण राणा ने पारी को संभाला और मयंक रावत तथा सूर्यांश रैना के साथ उपयोगी साझेदारियां कीं। अर्पिण ने 26 गेंदों में तीन चौकों की मदद से 25 रन बनाए। इसके बाद अंकित कुमार ने मोर्चा संभालते हुए सूर्यांश रैना के साथ छठे विकेट के लिए 23 रन और रौनक वाघले के साथ सातवें विकेट के लिए 20 रन की साझेदारी की। सूर्यांश रैना ने 38 रन का योगदान दिया लेकिन उनकी कोशिशें टीम को जीत तक नहीं पहुंचा सकीं।

    ईस्ट दिल्ली राइडर्स निर्धारित 20 ओवर में सात विकेट खोकर 149 रन ही बना सकी और उसे 30 रन से हार का सामना करना पड़ा। सेंट्रल दिल्ली किंग्स की ओर से गवनीश खुराना ने तीन विकेट लेकर शानदार गेंदबाजी की जबकि अरुण पुंडीर ने दो विकेट हासिल किए। इस जीत के साथ किंग्स ने जहां अंकतालिका में अपनी पकड़ मजबूत की वहीं ईस्ट दिल्ली राइडर्स की खिताबी उम्मीदों पर भी विराम लग गया। वहीं न्यू दिल्ली टाइगर्स भी अंतिम चार की दौड़ से बाहर हो गई है। अब टूर्नामेंट के अगले मुकाबलों में प्लेऑफ की तस्वीर और साफ होती जाएगी।

  • हॉकी विश्व कप में भारत-पाकिस्तान आमने सामने 16 साल बाद वर्ल्ड कप में टक्कर जीत के साथ इतिहास दोहराना चाहेगा भारत

    हॉकी विश्व कप में भारत-पाकिस्तान आमने सामने 16 साल बाद वर्ल्ड कप में टक्कर जीत के साथ इतिहास दोहराना चाहेगा भारत


    नई दिल्ली। हॉकी विश्व कप 2026 में बुधवार को भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला मुकाबला सिर्फ दो चिर प्रतिद्वंद्वी टीमों की भिड़ंत नहीं बल्कि अगले दौर में पहुंचने की जंग भी है। एम्सटेलवीन के वैगनर स्टेडियम में होने वाले इस मुकाबले पर दुनियाभर के हॉकी प्रशंसकों की नजरें टिकी हैं। दोनों पड़ोसी देशों के बीच हॉकी की प्रतिद्वंद्विता लंबे समय से बेहद खास रही है और विश्व कप जैसे बड़े मंच पर दोनों का आमना सामना इस मुकाबले को और रोमांचक बना देता है। भारत और पाकिस्तान की यह भिड़ंत 19 अगस्त को शाम 6:30 बजे भारतीय समयानुसार शुरू होगी।

    भारतीय टीम के लिए यह मुकाबला इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रुप डी में टीम ने अब तक एक मुकाबला जीता है और एक में हार का सामना किया है। भारत ने टूर्नामेंट की शुरुआत वेल्स के खिलाफ 3-1 की शानदार जीत के साथ की थी। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ उसे 2-4 से हार झेलनी पड़ी। ऐसे में पाकिस्तान के खिलाफ होने वाला आखिरी ग्रुप मुकाबला टीम इंडिया के लिए आगे की राह तय करने वाला है। भारत की कोशिश होगी कि मजबूत प्रदर्शन के साथ अगले चरण में अपनी जगह पक्की करे।

    दूसरी तरफ पाकिस्तान के लिए मुकाबले की चुनौती और भी बड़ी है। पाकिस्तान ने ग्रुप चरण में अब तक जीत दर्ज नहीं की है और उसकी स्थिति बेहद दबाव वाली है। चार टीमों वाले ग्रुप में भारत के साथ इंग्लैंड वेल्स और पाकिस्तान शामिल हैं। टूर्नामेंट के प्रारूप के मुताबिक ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल करने वाली टीम सीधे अगले चरण में जाएगी जबकि अन्य टीमों को आगे बढ़ने के लिए क्रॉसओवर मुकाबलों का रास्ता अपनाना होगा। इसलिए दोनों टीमों के लिए यह मैच बेहद अहम माना जा रहा है।

    भारत और पाकिस्तान के बीच हॉकी मुकाबलों का इतिहास बेहद पुराना और रोमांचक रहा है। दोनों टीमें जब भी मैदान पर उतरती हैं तो मुकाबले में खेल के साथ भावनाओं का भी खास रंग देखने को मिलता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत का प्रदर्शन पाकिस्तान के खिलाफ काफी मजबूत रहा है। विश्व कप के इतिहास में दोनों टीमें पांच बार आमने सामने आई हैं जिनमें भारत ने तीन मुकाबले जीते हैं जबकि पाकिस्तान को दो मैचों में सफलता मिली है। दोनों टीमों की पिछली विश्व कप भिड़ंत 2010 में हुई थी और उस मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 4-1 से हराया था।

    भारतीय टीम इस बार भी उसी दबदबे को कायम रखना चाहेगी। कप्तान हरमनप्रीत सिंह के नेतृत्व में टीम ने टूर्नामेंट की शुरुआत जीत के साथ की थी और कप्तान ने वेल्स के खिलाफ दो गोल कर अहम भूमिका निभाई थी। इंग्लैंड के खिलाफ हार के बाद भारतीय टीम अब अपनी गलतियों को सुधारते हुए पाकिस्तान के खिलाफ आक्रामक और संतुलित हॉकी खेलने के इरादे से मैदान में उतर सकती है।

    मुकाबले की खास बात यह भी है कि पाकिस्तान लंबे अंतराल के बाद हॉकी विश्व कप में लौटा है। चार बार का विश्व चैंपियन पाकिस्तान हाल के वर्षों में मुश्किल दौर से गुजरा है लेकिन विश्व कप जैसे बड़े मंच पर उसकी मौजूदगी भारत के मुकाबले को और खास बनाती है। दूसरी ओर भारत लंबे समय से विश्व कप खिताब का इंतजार कर रहा है और 1975 के बाद दूसरी बार ट्रॉफी जीतने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरा है।

    भारत-पाकिस्तान की इस भिड़ंत में सिर्फ तीन अंक या अगले दौर की स्थिति ही दांव पर नहीं होगी बल्कि दोनों टीमों के लिए प्रतिष्ठा भी महत्वपूर्ण होगी। भारत जहां पिछले प्रदर्शन की लय वापस हासिल करना चाहेगा वहीं पाकिस्तान विश्व कप में अपनी वापसी को यादगार बनाने के लिए बड़ा उलटफेर करने की कोशिश करेगा। ऐसे में वैगनर स्टेडियम में होने वाला यह मुकाबला हॉकी प्रशंसकों के लिए रोमांच और दबाव से भरपूर रहने की उम्मीद है।

  • वैश्विक दबाव में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एमसीएक्स पर सिल्वर करीब दो प्रतिशत फिसली

    वैश्विक दबाव में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एमसीएक्स पर सिल्वर करीब दो प्रतिशत फिसली


    नई दिल्ली । 
    वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बीच बुधवार को घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमती धातुओं पर बने दबाव का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी में करीब दो प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि सोना भी 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे कारोबार करता नजर आया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4350 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार करता रहा। इसी तरह हाजिर चांदी करीब 62.8 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास कमजोर बनी रही। वैश्विक बाजार में कीमतों में नरमी के साथ घरेलू निवेशकों की बिकवाली ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया।

    एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले कारोबारी सत्र के 2,32,419 रुपये प्रति किलोग्राम के बंद भाव से गिरकर 2,27,931 रुपये प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गई। इस स्तर पर चांदी में 4,488 रुपये यानी 1.93 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाद में इसमें कुछ सुधार हुआ और कारोबार के दौरान चांदी 3,734 रुपये यानी 1.61 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,28,685 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास रही।

    बाजार विश्लेषकों के मुताबिक व्यापक कमोडिटी बाजार में कमजोरी और मुनाफावसूली ने चांदी पर अतिरिक्त दबाव डाला। चांदी की कीमतों पर औद्योगिक मांग से जुड़े संकेतों और निवेश धारणा का भी असर पड़ता है, इसलिए बाजार में जोखिम बढ़ने पर इसमें सोने की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    सोने के वायदा भाव में भी गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स पर अक्टूबर डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स अपने पिछले बंद भाव 1,54,262 रुपये प्रति 10 ग्राम से 858 रुपये यानी 0.55 प्रतिशत गिरकर 1,53,404 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंचा। बाद में सोने में कुछ सुधार आया और यह 581 रुपये यानी 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,53,681 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता रहा।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की नरमी के साथ डॉलर इंडेक्स की मजबूती ने भी घरेलू कीमतों को प्रभावित किया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी को कीमती धातुओं के लिए महत्वपूर्ण दबाव वाले कारकों में शामिल किया जा रहा है। ऊंची बॉन्ड यील्ड निवेशकों को निश्चित रिटर्न वाले विकल्पों की ओर आकर्षित कर सकती है, जिससे ब्याज नहीं देने वाली संपत्तियों की मांग प्रभावित होती है।

    कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। डब्ल्यूटीआई क्रूड और ब्रेंट क्रूड की कीमतें क्रमशः करीब 85.5 डॉलर और 91.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। महंगे तेल से वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है, जिससे प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की संभावना मजबूत हो सकती है।

    मध्य पूर्व की स्थिति भी सोने और चांदी की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से जुड़े संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिजर्व का रुख, बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम कीमती धातुओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती बनी रहती है तो सोने और चांदी पर दबाव जारी रह सकता है। दूसरी ओर वैश्विक तनाव बढ़ने या ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होने पर दोनों धातुओं को दोबारा सुरक्षित निवेश की मांग से समर्थन मिल सकता है।

  • ब्यूटी विद ब्रेन से ग्लैमर गर्ल तक तानिया सचदेव ने चेस की दुनिया में ऐसे बनाई अलग पहचान अर्जुन अवॉर्ड से भी हुईं सम्मानित

    ब्यूटी विद ब्रेन से ग्लैमर गर्ल तक तानिया सचदेव ने चेस की दुनिया में ऐसे बनाई अलग पहचान अर्जुन अवॉर्ड से भी हुईं सम्मानित


    नई दिल्ली। भारतीय शतरंज की दुनिया में तानिया सचदेव एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा और खूबसूरती दोनों से अलग पहचान बनाई है। उन्हें अक्सर चेस की ग्लैमर गर्ल और ब्यूटी विद ब्रेन के नाम से जाना जाता है। शतरंज की बिसात पर शानदार प्रदर्शन करने के साथ तानिया मॉडलिंग और प्रेजेंटिंग की दुनिया में भी सक्रिय रही हैं। यही वजह है कि उनकी पहचान सिर्फ एक शतरंज खिलाड़ी तक सीमित नहीं रही बल्कि उन्होंने इस खेल को ग्लोबल मंच पर एक अलग अंदाज में पेश करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    तानिया सचदेव का जन्म 20 अगस्त 1986 को दिल्ली में हुआ था। महज छह साल की उम्र में उन्होंने शतरंज की दुनिया में कदम रखा और इस दिमागी खेल की बारीकियां सीखना शुरू कर दिया। शुरुआती दौर में उन्होंने केसी जोशी से प्रशिक्षण लिया। छोटी उम्र में ही उनकी प्रतिभा सामने आने लगी और महज आठ साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतकर यह संकेत दे दिया था कि आने वाले वर्षों में वह भारतीय शतरंज का बड़ा नाम बनने वाली हैं।

    युवा स्तर पर भी तानिया ने शानदार प्रदर्शन जारी रखा। अंडर 12 वर्ग की विश्व युवा शतरंज चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया। साल 2002 में उन्होंने एशियन जूनियर गर्ल्स चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। इसके बाद 2005 में तानिया विमेंस ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल करने वाली आठवीं भारतीय खिलाड़ी बनीं। उनकी सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका और उन्होंने लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी मजबूत पहचान बनाई।

    साल 2006 और 2007 में तानिया ने नेशनल महिला प्रीमियर शतरंज चैंपियनशिप का खिताब जीता। 2007 में ही उन्होंने महिला एशियाई शतरंज चैंपियनशिप अपने नाम कर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। 2008 में उन्होंने इंटरनेशनल मास्टर का खिताब हासिल किया। इसके बाद 2015 में रेक्जाविक ओपन में सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी का पुरस्कार उनके नाम रहा। इसी वर्ष एशियन कॉन्टिनेंटल विमेंस रैपिड चेस चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक भी जीता।

    तानिया का शानदार सफर कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में भी जारी रहा। उन्होंने 2016 2018 और 2019 में कॉमनवेल्थ विमेंस चेस चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। सितंबर 2024 में वह उस भारतीय टीम का हिस्सा थीं जिसने शतरंज ओलंपियाड में देश के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता। इस उपलब्धि ने भारतीय शतरंज की दुनिया में उनकी भूमिका को और मजबूत किया।

    शतरंज में देश का नाम रोशन करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के लिए तानिया सचदेव को 2009 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हालांकि अब वह पहले की तुलना में कम प्रतियोगिताओं में नजर आती हैं लेकिन शतरंज से उनका जुड़ाव लगातार बना हुआ है। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमेंटेटर और प्रेजेंटर के तौर पर भी अपनी पहचान बना चुकी हैं।

    तानिया सचदेव की कहानी उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो कम उम्र में किसी खेल की शुरुआत करके उसे अपने जीवन का लक्ष्य बना लेते हैं। छह साल की उम्र में शतरंज सीखने से लेकर आठ साल में अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने और फिर ग्रैंडमास्टर स्तर तक पहुंचने का उनका सफर भारतीय शतरंज की प्रेरणादायक कहानियों में शामिल है। उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिभा मेहनत और आत्मविश्वास के साथ खेल की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है।

  • गाले में भारत का दबदबा कायम श्रीलंका 206 रन पर ढेर सुथार ने दूसरी पारी में झटके 6 विकेट सीरीज में 1-0 की बढ़त

    गाले में भारत का दबदबा कायम श्रीलंका 206 रन पर ढेर सुथार ने दूसरी पारी में झटके 6 विकेट सीरीज में 1-0 की बढ़त


    नई दिल्ली। गाले इंटरनेशनल स्टेडियम में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका को पहले टेस्ट में 165 रन से हरा दिया। पांचवें दिन भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका की दूसरी पारी को 206 रन पर समेट दिया और इसी के साथ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में भारत ने 1-0 की बढ़त बना ली। भारत की इस बड़ी जीत के सबसे बड़े हीरो युवा बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार रहे जिन्होंने दूसरी पारी में 55 रन देकर 6 विकेट चटकाए। सुथार ने पूरे मैच में 10 विकेट अपने नाम किए और अपनी गेंदबाजी से श्रीलंकाई बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।

    श्रीलंका के सामने भारत ने जीत के लिए 372 रन का मुश्किल लक्ष्य रखा था। लक्ष्य का पीछा करने उतरी मेजबान टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और उसके शीर्ष चार बल्लेबाज सिर्फ 47 रन के स्कोर पर पवेलियन लौट गए। इस शुरुआती झटके के बाद श्रीलंका की टीम लगातार दबाव में रही। हालांकि कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने 59 रन की जुझारू पारी खेली जबकि पहली पारी में शतक लगाने वाले सोनल दिनुशा ने 84 रन बनाकर कुछ देर तक भारतीय गेंदबाजों का सामना किया। दोनों ने श्रीलंका की उम्मीदों को कुछ समय के लिए जिंदा रखा लेकिन भारत के गेंदबाजों के सामने यह साझेदारी ज्यादा देर नहीं टिक सकी।

    सोनल दिनुशा और धनंजय डी सिल्वा के आउट होते ही श्रीलंका की जीत की बची खुची उम्मीदें भी खत्म हो गईं। पूरी टीम 77.4 ओवर में 206 रन पर सिमट गई। मानव सुथार ने 23.4 ओवर में 55 रन देकर 6 विकेट लिए। उनके अलावा प्रसिद्ध कृष्णा ने 2 विकेट चटकाए जबकि मोहम्मद सिराज और रविंद्र जडेजा को एक एक सफलता मिली। सुथार की शानदार गेंदबाजी ने उन्हें मैच में 10 विकेट दिलाए और वह भारत की जीत के मुख्य सूत्रधार बनकर उभरे।

    इससे पहले भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 462 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। देवदत्त पडिक्कल ने शानदार 167 रन की पारी खेलकर टीम को मजबूत आधार दिया। उनके अलावा केएल राहुल ने 82 रन बनाए जबकि ध्रुव जुरेल ने 51 रनों का अहम योगदान दिया। बारिश से प्रभावित मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने परिस्थितियों के अनुरूप धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया। पडिक्कल की पारी को भारत की पहली पारी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना गया।

    भारत के 462 रन के जवाब में श्रीलंका की पहली पारी 284 रन पर समाप्त हुई। सोनल दिनुशा ने शानदार शतक लगाकर टीम को संभालने की कोशिश की जबकि निरोशन डिकवेला ने 80 रन बनाए। इसके बावजूद भारतीय गेंदबाज श्रीलंका को बड़ी साझेदारियां बनाने से रोकने में सफल रहे और भारत को पहली पारी में 178 रन की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल हुई।

    दूसरी पारी में भारत 193 रन पर ऑलआउट हो गया। ऋषभ पंत ने तेजतर्रार 66 रन की पारी खेलकर भारत की बढ़त को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। भारत की कुल बढ़त के आधार पर श्रीलंका को 372 रन का लक्ष्य मिला लेकिन मेजबान टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी।

    इस जीत के साथ भारत ने दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। अब दोनों टीमों की नजरें दूसरे टेस्ट पर होंगी जो 23 अगस्त से कोलंबो में खेला जाएगा। गाले में मिली इस जीत ने भारत के विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अभियान को भी मजबूती दी है। वहीं मानव सुथार के 10 विकेट ने भारतीय क्रिकेट में एक नए स्पिन सितारे के उभरने के संकेत दे दिए हैं।