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  • जेप्टो ने फ्री डिलीवरी के लिए बढ़ाई न्यूनतम ऑर्डर राशि, सामान्य समय में 199 और पीक डिमांड में 299 रुपये खर्च जरूरी

    जेप्टो ने फ्री डिलीवरी के लिए बढ़ाई न्यूनतम ऑर्डर राशि, सामान्य समय में 199 और पीक डिमांड में 299 रुपये खर्च जरूरी


    नई दिल्ली । 
    क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो ने ग्राहकों के लिए फ्री डिलीवरी से जुड़ी अपनी न्यूनतम ऑर्डर राशि में बदलाव किया है। अब सामान्य परिस्थितियों में मुफ्त डिलीवरी का लाभ लेने के लिए ग्राहकों को कम से कम 199 रुपये का ऑर्डर करना होगा। इससे पहले यह सीमा 149 रुपये थी। वहीं अधिक मांग वाले समय में फ्री डिलीवरी के लिए न्यूनतम ऑर्डर राशि 299 रुपये तक पहुंच सकती है।

    नई व्यवस्था का सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से कम कीमत की कुछ जरूरी वस्तुएं ही मंगाते हैं। पहले 149 रुपये के ऑर्डर पर फ्री डिलीवरी उपलब्ध होने के कारण छोटे ऑर्डर करना अपेक्षाकृत आसान था। अब ऐसे ग्राहकों को मुफ्त डिलीवरी पाने के लिए अपनी खरीदारी में अतिरिक्त सामान जोड़ना पड़ सकता है।

    जेप्टो की नई न्यूनतम ऑर्डर सीमा सामान्य समय और पीक डिमांड के हिसाब से अलग रखी गई है। सामान्य परिस्थितियों में ग्राहक को 199 रुपये का ऑर्डर करना होगा, जबकि जब मांग अधिक होगी, तब यह सीमा बढ़कर 299 रुपये तक हो सकती है। इस तरह फ्री डिलीवरी का लाभ लेने के लिए ग्राहक की ओर से किया जाने वाला न्यूनतम खर्च समय के अनुसार बदल सकता है।

    क्विक कॉमर्स कंपनियों के कारोबार में डिलीवरी की लागत एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। कुछ मिनटों में सामान पहुंचाने के लिए कंपनियों को डार्क स्टोर, डिलीवरी नेटवर्क, कर्मचारियों और लॉजिस्टिक्स पर लगातार खर्च करना पड़ता है। ऐसे में न्यूनतम ऑर्डर राशि बढ़ाने का उद्देश्य प्रति ऑर्डर मिलने वाले राजस्व और डिलीवरी लागत के बीच बेहतर संतुलन बनाना हो सकता है।

    इस बदलाव से जेप्टो की फ्री डिलीवरी नीति प्रतिस्पर्धी क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के करीब आती दिखाई दे रही है। बाजार में कंपनियां लगातार अपनी फीस, डिलीवरी शर्तों और न्यूनतम ऑर्डर मूल्य में बदलाव कर रही हैं। इसका उद्देश्य ग्राहकों को प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने के साथ कारोबार की लाभप्रदता को बेहतर करना भी है।

    नई व्यवस्था से ग्राहकों की खरीदारी की आदतों में भी बदलाव आने की संभावना है। जिन उपभोक्ताओं को केवल एक या दो छोटी जरूरत की चीजें तत्काल मंगानी होती हैं, वे अतिरिक्त सामान खरीदने या डिलीवरी शुल्क का विकल्प चुनने के बीच फैसला कर सकते हैं। वहीं नियमित ग्राहक अपनी खरीदारी को एक साथ करने पर विचार कर सकते हैं, ताकि न्यूनतम ऑर्डर सीमा पूरी हो सके।

    क्विक कॉमर्स क्षेत्र में लाभप्रदता का मुद्दा पिछले कुछ समय से महत्वपूर्ण बना हुआ है। कंपनियां तेजी से डिलीवरी के साथ परिचालन लागत को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं। डिलीवरी शुल्क और न्यूनतम ऑर्डर राशि में बदलाव इसी व्यापक कारोबारी रणनीति का हिस्सा माने जा सकते हैं।

    ऑनलाइन डिलीवरी क्षेत्र में केवल क्विक कॉमर्स ही नहीं, बल्कि फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म भी शुल्क संबंधी बदलाव करते रहे हैं। मार्च में जोमैटो ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की थी। इसके बाद स्विगी ने भी प्रति ऑर्डर प्लेटफॉर्म शुल्क बढ़ाया था। इन बदलावों से संकेत मिलता है कि डिलीवरी आधारित कारोबार में कंपनियां राजस्व बढ़ाने और परिचालन खर्च का दबाव कम करने के लिए अलग-अलग मूल्य निर्धारण रणनीतियों का इस्तेमाल कर रही हैं।

    जेप्टो की नई सीमा ऐसे समय सामने आई है जब भारतीय क्विक कॉमर्स बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज है। ग्राहकों के लिए कीमत, डिलीवरी समय और सुविधा महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं। ऐसे में कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि वे लागत और लाभप्रदता को नियंत्रित करते हुए ग्राहकों को आकर्षक सेवा उपलब्ध कराती रहें। जेप्टो की बढ़ी हुई न्यूनतम ऑर्डर राशि इसी संतुलन की दिशा में उठाया गया कदम है।

  • सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे बोले, विनियमित संस्थाएं एआई और मशीन लर्निंग उपकरणों के उपयोग की खुद होंगी जिम्मेदार

    सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे बोले, विनियमित संस्थाएं एआई और मशीन लर्निंग उपकरणों के उपयोग की खुद होंगी जिम्मेदार

    नई दिल्ली ।भारतीय वित्तीय बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसी बीच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट किया है कि सेबी के दायरे में आने वाली सभी विनियमित संस्थाएं अपने द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एआई और मशीन लर्निंग उपकरणों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार रहेंगी।

    मुंबई में आयोजित एक उद्योग सम्मेलन को संबोधित करते हुए सेबी चेयरमैन ने कहा कि किसी संस्था द्वारा इस्तेमाल की जा रही तकनीक चाहे उसके भीतर विकसित की गई हो या किसी बाहरी कंपनी अथवा तीसरे पक्ष से प्राप्त की गई हो, उसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था की ही होगी। इसका उद्देश्य वित्तीय बाजारों में तकनीकी नवाचार के साथ जवाबदेही की व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना है।

    तुहिन कांत पांडे ने कहा कि वित्तीय बाजारों में तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसकी भूमिका और महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, तकनीकी बदलाव के बीच निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बाजार की विश्वसनीयता को प्राथमिकता देना जरूरी है। सेबी इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए नियामकीय ढांचे को विकसित करने पर काम कर रहा है।

    सेबी अध्यक्ष के अनुसार नियामकीय व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो नई तकनीकों और नवाचार को बढ़ावा दे, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता और जवाबदेही से समझौता न हो। एआई आधारित प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ने के साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि संस्थाएं अपने तकनीकी फैसलों और उनसे जुड़े संभावित जोखिमों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निभाएं।

    उन्होंने बाजार अवसंरचना संस्थानों की तकनीकी क्षमता और जोखिम से निपटने की तैयारी को मापने के लिए एक सूचना प्रौद्योगिकी सुदृढ़ता सूचकांक की संभावना पर भी जानकारी दी। सेबी इस तरह के ढांचे की व्यवहार्यता का अध्ययन कर रहा है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण तकनीकी प्रणालियों की मजबूती और जोखिम प्रतिरोधक क्षमता का वस्तुनिष्ठ तरीके से आकलन करना है।

    तुहिन कांत पांडे ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि के अगले चरण में तकनीक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी। वित्तपोषण के नए माध्यम विकसित करने, निवेश के अवसरों का विस्तार करने और नियामकीय व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने में तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। इसके लिए नियामक व्यवस्था को भी बदलते तकनीकी वातावरण के साथ आगे बढ़ना होगा।

    सेबी की रणनीति को उन्होंने संतुलित, अनुपातिक और भविष्य केंद्रित बताया। उनके अनुसार बाजार में नवाचार के लिए पर्याप्त अवसर होने चाहिए, लेकिन साथ ही निवेशकों के हित, निष्पक्षता, सुरक्षा और बाजार की विश्वसनीयता भी कायम रहनी चाहिए।

    सेबी चेयरमैन ने भारतीय पूंजी बाजार में घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि म्यूचुअल फंड और सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के माध्यम से बड़ी संख्या में परिवार बाजार आधारित निवेश से जुड़े हैं। इससे भारतीय पूंजी बाजार की पहुंच और मजबूती बढ़ी है, हालांकि निवेशकों की भागीदारी को और व्यापक बनाने की गुंजाइश अभी बनी हुई है।

    उन्होंने कहा कि भारतीय पूंजी बाजार अब केवल आर्थिक गतिविधियों का प्रतिबिंब नहीं रह गए हैं, बल्कि आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण माध्यमों में भी शामिल हो चुके हैं। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ निवेश और वित्तपोषण की जरूरतें भी बढ़ेंगी। ऐसे में पूंजी बाजार को अधिक गहरा और नवोन्मेषी बनाने के साथ उन्हें निष्पक्ष, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाए रखना भी जरूरी होगा।

  • यूपी जापान इन्वेस्टमेंट मीट में मुख्यमंत्री ने निवेशकों को दिया सहयोग का भरोसा, नीतियों और बुनियादी ढांचे पर गिनाईं उपलब्धियां

    यूपी जापान इन्वेस्टमेंट मीट में मुख्यमंत्री ने निवेशकों को दिया सहयोग का भरोसा, नीतियों और बुनियादी ढांचे पर गिनाईं उपलब्धियां

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान के प्रमुख उद्योगपतियों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ हुई राउंड टेबल मीटिंग में राज्य में निवेश की संभावनाओं को सामने रखा। यूपी जापान इन्वेस्टमेंट मीट के दौरान मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से उत्तर प्रदेश में कारोबारी गतिविधियों का विस्तार करने का आह्वान किया। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार निवेश की प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान कानून व्यवस्था, आधारभूत ढांचे, कनेक्टिविटी और औद्योगिक वातावरण के क्षेत्र में बदलाव हुए हैं। उनके अनुसार इन सुधारों के कारण राज्य में कारोबार के लिए परिस्थितियां पहले की तुलना में अधिक अनुकूल हुई हैं। उन्होंने निवेशकों के सामने प्रदेश में उपलब्ध अवसरों और सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं को भी रखा।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कारोबार शुरू करने या मौजूदा गतिविधियों का विस्तार करने वाली कंपनियों को सरकारी स्तर पर जरूरी सहयोग दिया जाएगा। निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर जोर देने की बात उन्होंने कही। मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत को भरोसा दिया कि निवेशकों की व्यावहारिक जरूरतों और सामने आने वाली समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा।

    राउंड टेबल बैठक के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों की ओर से रखे गए सुझावों और अपेक्षाओं को भी मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि निवेशकों द्वारा उठाए गए विषयों पर सरकार की टीम ध्यान दे रही है। जिन क्षेत्रों में व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आएंगी, वहां समाधान के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की बड़ी युवा आबादी को निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण ताकत बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में उद्योगों के लिए व्यापक मानव संसाधन उपलब्ध है। सरकार युवाओं को उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। बेहतर संपर्क व्यवस्था के साथ कुशल मानव संसाधन और कारोबारी माहौल तैयार करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनका कहना था कि इन क्षेत्रों में लगातार सुधार से निवेशकों के लिए उत्तर प्रदेश में कारोबार शुरू करना और उसका विस्तार करना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कानून व्यवस्था में सुधार और औद्योगिक वातावरण को मजबूत करने के साथ निवेश को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    इन्वेस्टमेंट मीट को मुख्यमंत्री ने सरकार और उद्योग जगत के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उनके अनुसार ऐसे आयोजनों से निवेशकों की वास्तविक जरूरतों और अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिलता है। साथ ही उद्योग प्रतिनिधियों को उत्तर प्रदेश में उपलब्ध कारोबारी अवसरों, आधारभूत सुविधाओं और नीतिगत सहयोग की जानकारी भी मिलती है।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश में प्रमुख उद्योग समूहों की बढ़ती रुचि से आने वाले समय में नए निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने जापानी उद्योग जगत से प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने और यहां उपलब्ध निवेश अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।

  • रियलमी पी4एस 5जी में सैमसंग एम14 डिस्प्ले तकनीक, 6500 निट्स लोकल पीक ब्राइटनेस और एआई गेमिंग फीचर्स मिलेंगे

    रियलमी पी4एस 5जी में सैमसंग एम14 डिस्प्ले तकनीक, 6500 निट्स लोकल पीक ब्राइटनेस और एआई गेमिंग फीचर्स मिलेंगे

    नई दिल्ली । भारत के स्मार्टफोन बाजार में खरीदारों की प्राथमिकताएं लगातार बदल रही हैं। कैमरा, प्रोसेसर और डिजाइन के साथ अब डिस्प्ले क्वालिटी भी फोन खरीदने के फैसले में अहम भूमिका निभा रही है। ओटीटी स्ट्रीमिंग, मोबाइल गेमिंग, सोशल मीडिया और वीडियो कॉलिंग के बढ़ते इस्तेमाल के कारण उपयोगकर्ता ऐसी स्क्रीन चाहते हैं जो लंबे समय तक इस्तेमाल के दौरान बेहतर विजुअल और स्मूथ अनुभव दे सके।

    इसी बदलते रुझान के बीच रियलमी अपनी पी सीरीज के तहत नया पी4एस 5जी स्मार्टफोन भारत में पेश करने की तैयारी कर रही है। कंपनी के अनुसार यह फोन 26 अगस्त को लॉन्च होगा और इसकी बिक्री फ्लिपकार्ट तथा रियलमी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से होगी। नए स्मार्टफोन में डिस्प्ले और गेमिंग अनुभव को प्रमुखता दी गई है।

    रियलमी पी4एस 5जी में 17.22 सेंटीमीटर यानी 6.78 इंच का सैमसंग 1.5के एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है। यह स्क्रीन 144 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है। कंपनी ने इसमें सैमसंग की एम14 ल्यूमिनसेंट मटेरियल तकनीक का इस्तेमाल किया है, जिसे आम तौर पर ज्यादा प्रीमियम स्मार्टफोन में देखा जाता है।

    कंपनी के मुताबिक यह डिस्प्ले पारंपरिक एमोलेड पैनल की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक ल्यूमिनस एफिशिएंसी और 50 प्रतिशत तक लंबी स्क्रीन लाइफ देने में सक्षम है। फोन में 1400 निट्स ग्लोबल पीक ब्राइटनेस भी दी गई है, जिससे तेज रोशनी वाले वातावरण में स्क्रीन की विजिबिलिटी बेहतर रहने का दावा किया गया है।

    एचडीआर कंटेंट के लिए फोन 6500 निट्स तक लोकल पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करता है। इसके अलावा एचडीआर10 प्लस और नेटफ्लिक्स एचडीआर सपोर्ट भी दिया गया है। कंपनी के अनुसार इन सुविधाओं से वीडियो और अन्य कंटेंट में बेहतर कॉन्ट्रास्ट, डिटेल और रंगों का अनुभव मिल सकता है।

    गेमिंग को ध्यान में रखते हुए 144 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट के साथ 3000 हर्ट्ज इंस्टेंटेनियस टच सैंपलिंग रेट दिया गया है। इसका उद्देश्य स्क्रीन पर स्वाइप, एनिमेशन और गेमिंग कमांड को अधिक प्रतिक्रियाशील बनाना है। खासकर तेज गति वाले गेम में टच रिस्पॉन्स उपयोगकर्ता के नियंत्रण अनुभव को प्रभावित करता है।

    फोन में रियलमी का हाइपर विजन प्लस एआई क्लिप सिस्टम मीडियाटेक डाइमेंसिटी 7400 अल्ट्रा चिपसेट के साथ काम करता है। कंपनी के अनुसार यह सेटअप एआई आधारित फ्रेम इंटरपोलेशन की मदद से गेमिंग के दौरान विजुअल फ्लूडिटी और प्रभावी फ्रेम रेट को बेहतर करने के लिए तैयार किया गया है।

    रियलमी पी4एस 5जी में आंखों के आराम को ध्यान में रखते हुए टीयूवी राइनलैंड लो ब्लू लाइट सर्टिफिकेशन भी दिया गया है। इसके साथ फुल ब्राइटनेस डीसी डिमिंग तकनीक मौजूद है, जिसका उद्देश्य अलग-अलग ब्राइटनेस स्तरों पर स्क्रीन फ्लिकर को कम करना है।

    पी सीरीज के पिछले मॉडल भी कंपनी के प्रदर्शन और डिजाइन केंद्रित पोर्टफोलियो का हिस्सा रहे हैं। कंपनी के अनुसार पी3 सीरीज की वैश्विक शिपमेंट तीन मिलियन यूनिट से अधिक रही है। अब पी4एस 5जी के जरिए रियलमी डिस्प्ले, गेमिंग और रोजमर्रा के उपयोग को एक साथ बेहतर बनाने पर जोर दे रही है।

    कुल मिलाकर नए स्मार्टफोन में स्क्रीन को केवल एक स्पेसिफिकेशन के बजाय उपयोगकर्ता अनुभव के प्रमुख हिस्से के रूप में पेश किया गया है। 1.5के रिजॉल्यूशन, 144 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट, एम14 तकनीक, एचडीआर सपोर्ट और एआई गेमिंग फीचर्स इसे भारतीय बाजार में डिस्प्ले केंद्रित स्मार्टफोन के तौर पर स्थापित करने की कंपनी की कोशिश को दिखाते हैं।

  • सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए कॉजपा संस्थापक का सुझाव, जनप्रतिनिधि सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं अपने बच्चे

    सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए कॉजपा संस्थापक का सुझाव, जनप्रतिनिधि सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं अपने बच्चे

    नई दिल्ली । देश में सरकारी शिक्षा प्रणाली की स्थिति और उसमें आवश्यक सुधारों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक बयान जारी कर मांग की है कि शिक्षा विभाग से जुड़े सभी मंत्रियों, प्रशासनिक अधिकारियों, प्राचार्यों और शिक्षकों को अपने बच्चों का दाखिला अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूलों में ही कराना चाहिए। उनका मानना है कि यदि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपने बच्चों को इन संस्थानों में भेजेंगे, तो सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में बहुत जल्द सकारात्मक और व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।

    अभिजीत दीपके ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक सरकारी नीतियों को लागू करने वाले अधिकारी और जनप्रतिनिधि स्वयं इन सेवाओं का उपयोग नहीं करेंगे, तब तक वास्तविक सुधार संभव नहीं है। उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों अधिकारी और मंत्री अपने बच्चों को निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ाना पसंद करते हैं। क्या उन्हें अपने ही विभाग और सरकारी नीतियों की कार्यप्रणाली पर भरोसा नहीं है। उनका यह बयान देश भर में सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के लिए चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों के संदर्भ में आया है।

    इस विचार को धरातल पर उतारने और व्यवस्था की कमियों को उजागर करने के उद्देश्य से उन्होंने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में स्थित अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी का दौरा किया था। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला परिषद द्वारा संचालित स्थानीय स्कूल में पहुंचे दीपके ने वहां की बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि कक्षाओं में खिड़कियों के शीशे टूटे हुए थे, सीसीटीवी कैमरे निष्क्रिय थे और स्वच्छता से जुड़ी कई मूलभूत सुविधाएं बदहाल स्थिति में थीं।

    उनके द्वारा उजागर की गई कमियों के बाद स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत तुरंत हरकत में आई। संतुक पिंपरी के स्थानीय सरपंच विजय पुरी ने जानकारी दी है कि अभिजीत दीपके द्वारा चिन्हित की गई सभी समस्याओं को दूर करने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर शुरू कर दिया गया है। स्कूल में क्षतिग्रस्त खिड़कियों और उनके फ्रेम को बदला जा रहा है, नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, तथा शौचालयों में पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

    शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए स्कूल प्रबंधन को मरम्मत कार्य जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर स्कूल की ढांचागत स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में भी सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और सुविधाओं को लेकर समय-समय पर इस तरह की मांगें उठती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सार्वजनिक सेवाओं के उपयोग को अनिवार्य या प्रोत्साहित किया जाए, तो इससे प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ती है। अभिजीत दीपके की इस पहल और उनके सुझाव ने एक बार फिर शिक्षा के अधिकार और सरकारी शैक्षणिक संस्थानों के स्तर को ऊंचा उठाने की दिशा में गंभीर मंथन शुरू कर दिया है।

  • अमिताभ बच्चन का बड़ा खुलासा, शुरुआती दिनों में लंबाई के कारण मिलते थे ताने, सेट से निकाल दिया गया था

    अमिताभ बच्चन का बड़ा खुलासा, शुरुआती दिनों में लंबाई के कारण मिलते थे ताने, सेट से निकाल दिया गया था

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने शुरुआती करियर के दौरान झेले गए कड़े संघर्ष और रिजेक्शन के दिनों को याद किया है। आज भले ही वे अपनी अभिनय क्षमता, विशिष्ट आवाज और व्यक्तित्व के लिए विश्व भर में जाने जाते हों, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उनकी लंबी कद-काठी और डायलॉग डिलीवरी को लेकर निर्देशकों द्वारा उन्हें खारिज कर दिया जाता था। इस बात का खुलासा उन्होंने टेलीविजन शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के एक विशेष एपिसोड के दौरान किया।

    शो के दौरान एक प्रतियोगी द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए अमिताभ बच्चन ने बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें फिल्म सेट पर काफी डांट का सामना करना पड़ता था। कई बार निर्देशक और निर्माता उनकी लंबाई को लेकर टिप्पणी करते थे और कहते थे कि अभिनय उनके बस की बात नहीं है, इसलिए उन्हें वापस लौट जाना चाहिए। इस तरह के तानों और लगातार मिल रही असफलताओं के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सुधार करने का प्रयास जारी रखा।

    अमिताभ बच्चन ने एक विशिष्ट घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि जब उन्हें धीरे-धीरे काम मिलना शुरू हुआ, तब भी संवाद अदायगी के तरीकों को लेकर उन्हें सेट पर खरी-खोटी सुननी पड़ती थी। उन्हें निर्देशित किया जाता था कि वे किस प्रकार खड़े होकर संवाद बोलें। वे लगातार अपनी कमियों को दूर करते रहे और निर्देशकों के मार्गदर्शन के अनुसार अपने प्रदर्शन में सुधार लाते रहे।

    अनुशासन और समय की पाबंदी को लेकर अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने एक अन्य किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि वे हमेशा समय से सेट पर पहुंचने का प्रयास करते थे, लेकिन एक दिन जब वे किसी अन्य की गाड़ी से देरी से पहुंचे, तो फिल्म के निर्देशक ने उनके साथ बहुत सख्त व्यवहार किया। निर्देशक ने उन्हें स्पष्ट रूप से कह दिया कि शूटिंग का काम समाप्त हो चुका है और वे तुरंत वहां से चले जाएं। उस समय खुद की कार न होने के कारण उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता था।

    वर्तमान में 80 वर्ष से अधिक की आयु पार कर चुके अमिताभ बच्चन आज भी मनोरंजन उद्योग में पूरी लगन के साथ सक्रिय हैं। हाल के दिनों में उनके लंबे शूटिंग शेड्यूल और काम के प्रति समर्पण की व्यापक रूप से प्रशंसा की जा रही है। वे आने वाले समय में कई बड़ी बजटीय फिल्मों और बहुचर्चित प्रोजेक्ट्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते नजर आएंगे।

    सिनेमा विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई से लेकर मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों तक अमिताभ बच्चन का जीवन संघर्ष युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। शुरुआती दौर में मिले गंभीर रिजेक्शन के बाद भी जिस तरह से उन्होंने अपनी पहचान बनाई, वह उनकी कड़ी मेहनत और अनुशासन का परिणाम है।

  • 'अंधभक्त' कहे जाने पर ईशा कोपिकर और कंगना रनौत का पलटवार, राष्ट्रप्रेम और देशहित को बताया सर्वोपरि

    'अंधभक्त' कहे जाने पर ईशा कोपिकर और कंगना रनौत का पलटवार, राष्ट्रप्रेम और देशहित को बताया सर्वोपरि

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर अक्सर अभिनेत्रियों और सार्वजनिक हस्तियों को अपनी बेबाक राय के कारण आलोचनाओं और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। हाल ही में अभिनेत्री ईशा कोपिकर को इंटरनेट पर ‘अंधभक्त’ कहकर निशाना बनाया गया, जिसके बाद उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत भी ईशा कोपिकर के समर्थन में आगे आई हैं और उन्होंने इस विषय पर अपनी सहमति व्यक्त की है।

    यह विवाद तब शुरू हुआ था जब ईशा कोपिकर ने देश में चल रहे छात्र आंदोलनों के दौरान प्रधानमंत्री के प्रति आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने वाले लोगों का विरोध किया था। उन्होंने ऐसे कृत्य को देशहित के खिलाफ बताते हुए अपनी असहमति दर्ज कराई थी। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा। इसके जवाब में ईशा ने एक वीडियो संदेश जारी कर स्पष्ट किया कि यदि देश की भलाई सोचना और उसके प्रति निष्ठा रखना भक्ति है, तो वे इस शब्द को स्वीकार करने में संकोच नहीं करेंगी।

    ईशा कोपिकर के इस रुख की सराहना करते हुए कंगना रनौत ने उनके वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया। कंगना ने लिखा कि ईशा ने इस मुद्दे को बहुत ही स्पष्ट और तार्किक तरीके से जनता के सामने रखा है। उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों का संदर्भ देते हुए कहा कि अपने अधिकारों, न्याय और राष्ट्र के प्रति आवाज उठाना हमेशा से उनके स्वभाव का हिस्सा रहा है। उन्होंने छात्र जीवन से लेकर अपने पेशेवर करियर तक में अनुचित बातों के खिलाफ हमेशा स्टैंड लिया है।

    कंगना रनौत ने आगे कहा कि अपने परिवार, समाज और देश के प्रति सम्मान और प्रेम रखना किसी भी नागरिक का स्वाभाविक गुण होना चाहिए। वे जिन भी लोगों और विचारों से प्रभावित होती हैं, उनके प्रति आदर भाव रखती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश और देशवासियों के प्रति निष्ठा को किसी नकारात्मक टैग से जोड़कर देखना अनुचित है। जब भी समाज में कुछ गलत होगा, तो उसके खिलाफ बोलना और जब कुछ अच्छा होगा, तो उसकी सराहना करना एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है।

    ईशा कोपिकर ने भी अपने संदेश में यह साफ कर दिया था कि वे किसी राजनीतिक एजेंडे से प्रभावित होकर नहीं, बल्कि एक नागरिक के रूप में अपनी राय रखती हैं। वे गलत नीतियों का विरोध और सही कार्यों की प्रशंसा बिना किसी हिचकिचाहट के करती रहेंगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे देशहित में सोचने वालों के प्रति अपनी मानसिकता में बदलाव लाएं और रचनात्मक चर्चा को बढ़ावा दें।

    इस घटनाक्रम के बाद मनोरंजन जगत और राजनीतिक क्षेत्रों में अभिव्यक्ति की आजादी और ऑनलाइन ट्रोलिंग को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में भी सोशल मीडिया यूजर्स इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि राष्ट्रप्रेम और व्यक्तिगत विचारों की अभिव्यक्ति को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय एक स्वतंत्र सोच के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • सुरेश मेनन के साथ बदसलूकी पर भड़के थे जैकी श्रॉफ, निर्माता को सबके सामने मांगनी पड़ी थी माफी

    सुरेश मेनन के साथ बदसलूकी पर भड़के थे जैकी श्रॉफ, निर्माता को सबके सामने मांगनी पड़ी थी माफी


    नई दिल्ली । 
    हिंदी सिनेमा जगत में अपनी विशिष्ट जीवनशैली और स्पष्टवादी रवैये के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ अभिनेता जैकी श्रॉफ से जुड़ा एक पुराना घटनाक्रम हाल ही में चर्चा में आया है। अपने शांत और सहयोगात्मक व्यवहार के लिए जाने जाने वाले इस कलाकार का एक समय ऐसा भी था जब सेट पर उनका प्रभाव और कड़ा रुख देखने को मिलता था। हास्य अभिनेता और कलाकार सुरेश मेनन ने एक कार्यक्रम के दौरान जैकी श्रॉफ के साथ हुए अपने एक विशेष संस्मरण को साझा किया है।

    घटना के बारे में विस्तार से बताते हुए सुरेश मेनन ने जानकारी दी कि अपने शुरुआती करियर के दौरान वे एक बड़े प्रोडक्शन हाउस की फिल्म में काम कर रहे थे। उसी दौरान उन्हें मुंबई में एक अन्य अनिवार्य शूटिंग प्रतिबद्धता के सिलसिले में कुछ समय की अनुमति चाहिए थी। जब उन्होंने इस संबंध में संबंधित निर्माता से केवल एक घंटे की छूट देने का अनुरोध किया, तो निर्माता ने इसे अनुशासनहीनता माना और उनके साथ अनुचित व्यवहार करते हुए उन्हें अचानक परियोजना से बाहर कर दिया।

    सुरेश मेनन के अनुसार, निर्माता ने न केवल उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया बल्कि बेहद अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए सेट से जाने को कह दिया। इस अचानक हुए अपमान और काम से निकाले जाने के कारण वे काफी परेशान हो गए थे और सेट के एक कोने में चुपचाप बैठ गए थे। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की भनक मुख्य भूमिका निभा रहे जैकी श्रॉफ को लग चुकी थी।

    जब जैकी श्रॉफ को अपने सहयोगी कलाकार के साथ हुई इस बदसलूकी के बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत सुरेश मेनन को अपने पास बुलवाया। पूरा मामला समझने के बाद वे काफी नाराज हुए और उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया। जैकी श्रॉफ स्वयं सुरेश मेनन को साथ लेकर सीधे संबंधित निर्माता के पास पहुंचे और उनके इस दुर्व्यवहार का कड़ा विरोध दर्ज कराया।

    सेट पर मौजूद सभी लोगों के सामने जैकी श्रॉफ ने निर्माता को चेतावनी दी कि किसी भी जूनियर कलाकार या सहयोगी के साथ अपमानजनक व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने सह-कलाकारों के साथ ऐसा बर्ताव बर्दाश्त नहीं करेंगे। जैकी श्रॉफ के इस कड़े रुख के बाद निर्माता को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्हें सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी पड़ी। इसके बाद सुरेश मेनन को सम्मानपूर्वक काम जारी रखने की अनुमति दी गई।

    सिनेमा उद्योग के विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई और मध्य प्रदेश जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले कई नए और जूनियर कलाकारों को अक्सर इस तरह की प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में स्थापित अभिनेताओं का अपने सह-कर्मियों के पक्ष में खड़ा होना एक मिसाल बनता है। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद एक बार फिर जैकी श्रॉफ के सहयोगी रवैये और उनके बिंदास व्यक्तित्व की सराहना की जा रही है।

  • सोनाक्षी सिन्हा की ट्रोलिंग पर भड़के शत्रुघ्न सिन्हा, बीजेपी आईटी सेल पर लगाए गंभीर आरोप, जानिए पूरा मामला

    सोनाक्षी सिन्हा की ट्रोलिंग पर भड़के शत्रुघ्न सिन्हा, बीजेपी आईटी सेल पर लगाए गंभीर आरोप, जानिए पूरा मामला


    नई दिल्ली ।
    अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा को सोशल मीडिया पर निशाना बनाए जाने के मुद्दे पर उनके पिता और तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने दावा किया है कि उनकी बेटी के खिलाफ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर किया जा रहा विरोध स्वाभाविक नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से सुनियोजित और प्रायोजित है। शत्रुघ्न सिन्हा ने इस प्रकार की गतिविधियों के पीछे सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल से जुड़े लोगों और उनकी नीतियों का समर्थन करने वाले समूहों को जिम्मेदार ठहराया है।

    एक समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार में शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि जो लोग उनकी बेटी को ट्रोल कर रहे हैं और विवाद खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं, वे पेशेवर और पेड ट्रोल्स हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों को स्वतंत्र रूप से अपनी राय व्यक्त करने की समझ नहीं होती, बल्कि उन्हें जो लिखित सामग्री दी जाती है, वे उसी के आधार पर अभियानों को अंजाम देते हैं। उन्होंने इसे एक बनावटी और राजनीतिक रूप से प्रेरित हमला करार दिया।

    यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोनाक्षी सिन्हा ने छात्र आंदोलनों और नागरिक अधिकारों से जुड़ी पहलों के समर्थन में अपनी बात रखी थी। इस दौरान जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को रोके जाने और प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कार्रवाई की उन्होंने खुलकर निंदा की थी। सोनाक्षी ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे युवाओं की सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर संदेश साझा किए थे, जिसके बाद वे कुछ वर्गों के निशाने पर आ गईं।

    बेटी के रुख का समर्थन करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि सोनाक्षी ऐसे भ्रामक और नकारात्मक अभियानों पर ध्यान नहीं देती हैं। उन्होंने अपनी बेटी के मानसिक धैर्य और निडरता की तारीफ की। जब उनसे सवाल किया गया कि क्या सोनाक्षी भविष्य में सक्रिय राजनीति में कदम रख सकती हैं, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस विषय पर पहले से कोई दावा नहीं कर सकते, हालांकि उन्होंने सोनाक्षी की क्षमताओं पर पूरा विश्वास व्यक्त किया।

    साक्षात्कार के दौरान शत्रुघ्न सिन्हा से यह भी पूछा गया कि क्या सोनाक्षी का समर्थन केवल चुनिंदा मुद्दों तक सीमित है। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बेटी ने विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों के छात्रों से जुड़े विषयों पर भी समय-समय पर अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने राजनीतिक आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि जनहित के मुद्दों पर बोलना किसी भी नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और राजनीतिक बहसों के स्वरूप पर चर्चा को जन्म दे दिया है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भी इस विषय को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। शत्रुघ्न सिन्हा के इस बयान के बाद आईटी सेल और ऑनलाइन ट्रोल्स की भूमिका को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।

  • पुलिस हिरासत और मीडिया की अफवाहों पर छलका राज कुंद्रा का दर्द, शिल्पा शेट्टी से जुड़े कई राज किए उजागर

    पुलिस हिरासत और मीडिया की अफवाहों पर छलका राज कुंद्रा का दर्द, शिल्पा शेट्टी से जुड़े कई राज किए उजागर


    नई दिल्ली ।
    अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और व्यवसायी राज कुंद्रा ने साल 2021 में हुई अपनी गिरफ्तारी और उसके बाद जेल में बिताए कठिन समय से जुड़े कई नए पहलुओं को उजागर किया है। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने बताया कि किस प्रकार कानूनी कानूनी समस्याओं के साथ-साथ उन्हें व्यक्तिगत जीवन में भी कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। जब वे सलाखों के पीछे थे, तब उनके पास कई तरह की भ्रामक खबरें पहुंच रही थीं, जिसने उन्हें मानसिक रूप से बेहद तोड़ दिया था।

    राज कुंद्रा ने खुलासा किया कि उन्हें अपनी गिरफ्तारी की जानकारी भी काफी नाटकीय ढंग से मिली थी। वे पुलिस स्टेशन केवल पूछताछ में शामिल होने के लिए गए थे, लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें सोशल मीडिया के जरिए पता चला कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया है। इस बारे में जब उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से सवाल किया, तो उन्हें बताया गया कि उच्च अधिकारियों के आदेश के तहत यह कार्रवाई की गई है। इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी उनके परिवार और पत्नी शिल्पा शेट्टी को भी मीडिया माध्यमों के जरिए ही मिल सकी थी।

    जेल में बिताए दिनों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि व्यावसायिक स्तर पर भी उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। उनके भारतीय व्यवसाय में हजारों लोग कार्यरत थे, और उनके अचानक हिरासत में जाने से पूरा काम ठप हो गया। इस दौरान उनकी पत्नी शिल्पा शेट्टी ने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के बजाय तुरंत बंद करने का कठिन फैसला लिया, क्योंकि अनिश्चितता के माहौल में प्रबंधन संभालना लगभग असंभव हो गया था। एक ही झटके में सब कुछ बदल जाने से वे गहरा सदमा महसूस कर रहे थे।

    सबसे अधिक निराशाजनक स्थिति तब पैदा हुई जब जेल के भीतर उन तक यह खबर पहुंची कि उनकी पत्नी उनसे अलग हो रही हैं और तलाक की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। राज कुंद्रा के अनुसार, इस एक अफवाह ने उन्हें अंदर से पूरी तरह झकझोर दिया था। उस समय उन्हें लगा कि जीवन का कोई अर्थ नहीं बचा है, क्योंकि उनके लिए उनका परिवार ही सबसे पहली प्राथमिकता था। मानसिक तनाव इस कदर बढ़ गया था कि वे रातों को सो नहीं पाते थे और उनके मन में बेहद नकारात्मक विचार आने लगे थे।

    हालांकि, बाद में सच्चाई सामने आने और परिवार के स्पष्ट रुख से उन्हें संबल मिला। शिल्पा शेट्टी ने हर परिस्थिति में अपने पति का समर्थन करने का फैसला किया, जिससे उन्हें इस कठिन दौर से बाहर निकलने में मदद मिली। रिहाई के बाद राज कुंद्रा ने अपने जीवन को दोबारा पटरी पर लाने का प्रयास शुरू किया और एक नई शुरुआत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जांच में पूरा सहयोग दे रहे हैं और यदि किसी भी अदालत में वे दोषी पाए जाते हैं, तो वे हर प्रकार की सजा भुगतने के लिए तैयार हैं।

    इस मामले के तार देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े हुए थे, जहां जांच एजेंसियों ने कई राज्यों में फैली डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल की थी। कानूनी जानकारों और मध्य प्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों के विश्लेषकों का मानना है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में मीडिया रिपोर्ट्स का व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। फिलहाल राज कुंद्रा अपने व्यापारिक उपक्रमों को फिर से स्थापित करने और अपनी छवि को सुधारने में जुटे हुए हैं।