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  • एशिया के सबसे अमीर परिवारों की नई सूची जारी, अंबानी परिवार टॉप पर, AI बूम से बढ़ी दौलत

    एशिया के सबसे अमीर परिवारों की नई सूची जारी, अंबानी परिवार टॉप पर, AI बूम से बढ़ी दौलत


    नई दिल्ली। दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI के तेज़ विस्तार ने एशिया के सबसे बड़े कारोबारी परिवारों की संपत्ति में बड़ा इजाफा किया है। ब्लूमबर्ग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार 2026 में एशिया के टॉप 10 सबसे अमीर परिवारों की कुल नेटवर्थ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसकी बड़ी वजह AI इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे डेटा सेंटर ऊर्जा चिप्स और कच्चे माल की बढ़ती मांग को माना जा रहा है। साथ ही हांगकांग के रियल एस्टेट सेक्टर में सुधार ने भी इन संपत्तियों को और मजबूती दी है।

    अंबानी परिवार सबसे आगे

    इस सूची में पहला स्थान एक बार फिर अंबानी परिवार के पास है जिनकी कुल संपत्ति लगभग 89.7 अरब डॉलर करीब 7.4 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ऊर्जा टेलीकॉम रिटेल और फाइनेंशियल सर्विसेज में लगातार विस्तार कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक परिवार ने अगले कुछ वर्षों में AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की योजना भी बनाई है।

    क्वोक परिवार दूसरे स्थान पर

    दूसरे नंबर पर क्वोक परिवार है जिनकी संपत्ति करीब 50.2 अरब डॉलर है। इनका मुख्य कारोबार हांगकांग का रियल एस्टेट सेक्टर है जहां हाल के समय में सुधार देखने को मिला है।

    सैमसंग का ली परिवार तीसरे स्थान पर

    तीसरे स्थान पर ली परिवार है जिनकी संपत्ति लगभग 45.5 अरब डॉलर है। सेमीकंडक्टर और स्मार्टफोन इंडस्ट्री में सैमसंग की मजबूत पकड़ और AI व रोबोटिक्स में बढ़ता फोकस इनके विकास को आगे बढ़ा रहा है।

    चौथे स्थान पर चेरावनोन्त परिवार
    चेरावनोन्त परिवार की कुल संपत्ति 44.8 अरब डॉलर के आसपास है। इनका चारोएन पोकफैंड ग्रुप फूड रिटेल और टेलीकॉम सेक्टर में सक्रिय है और एशिया में तेजी से विस्तार कर रहा है।

    एल्युमीनियम से बढ़ी झांग परिवार की कमाई
    झांग परिवार की संपत्ति लगभग 44.7 अरब डॉलर है। इलेक्ट्रिक वाहनों और AI इंडस्ट्री में एल्युमीनियम की बढ़ती मांग से इनके बिजनेस को बड़ा फायदा मिला है।

    त्साई परिवार की स्थिर ग्रोथ
    त्साई परिवार लगभग 34.3 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर से मजबूत आय बनाए हुए है।

    रेड बुल से चमका यूविदया परिवार

    यूविदया परिवार की संपत्ति करीब 32.9 अरब डॉलर है। रेड बुल ब्रांड ने उन्हें ग्लोबल स्तर पर मजबूत पहचान और लगातार मुनाफा दिया है।

    बैंकिंग सेक्टर में हार्टोनो परिवार
    हार्टोनो परिवार की संपत्ति लगभग 30.2 अरब डॉलर है और इंडोनेशिया के बैंकिंग सेक्टर में इनकी मजबूत पकड़ बनी हुई है।

    भारत के मिस्त्री और जिंदल परिवार भी सूची में

    भारत के मिस्त्री परिवार की संपत्ति करीब 29.5 अरब डॉलर और जिंदल परिवार की संपत्ति लगभग 29.4 अरब डॉलर आंकी गई है। दोनों परिवार क्रमशः इंफ्रास्ट्रक्चर स्टील एनर्जी और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।

  • जीवनशैली, नींद और संतुलन को लेकर सद्गुरु और आलिया भट्ट के बीच हुई बातचीत ने लोगों को सोचने पर मजबूर किया, उठे कई गहरे सवाल

    जीवनशैली, नींद और संतुलन को लेकर सद्गुरु और आलिया भट्ट के बीच हुई बातचीत ने लोगों को सोचने पर मजबूर किया, उठे कई गहरे सवाल

    नई दिल्ली:   अभिनेत्री आलिया भट्ट और आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के बीच हुई एक बातचीत इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है। इस बातचीत में नींद, जीवनशैली और जीवन के संतुलन जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई, जहां आलिया भट्ट ने अपनी दैनिक दिनचर्या साझा की और सद्गुरु ने उस पर एक ऐसा सवाल उठाया जिसने माहौल को हल्का लेकिन विचारशील बना दिया।

    कार्यक्रम के दौरान आलिया भट्ट ने बताया कि उन्हें पर्याप्त नींद लेना बेहद पसंद है और वह सामान्यतः आठ से नौ घंटे तक आराम करती हैं। उन्होंने कहा कि नींद उनके लिए केवल शारीरिक आवश्यकता नहीं बल्कि मानसिक शांति और सुकून पाने का एक तरीका भी है। आलिया ने सहजता से यह भी स्वीकार किया कि आराम उनकी जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे उन्हें अगले दिन के लिए ऊर्जा मिलती है।

    इस पर सद्गुरु ने मुस्कुराते हुए एक ऐसा सवाल किया जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने पूछा कि यदि दिन का इतना बड़ा हिस्सा सोने में ही निकल जाएगा तो फिर जीवन जीने का समय कब मिलेगा। उनका यह सवाल पहले तो हल्के मजाक के रूप में लिया गया, लेकिन धीरे धीरे इसने गहरी सोच को जन्म दे दिया।

    सद्गुरु ने आगे जीवनशैली और ऊर्जा संतुलन पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग दिनभर की थकान और तनाव के कारण अधिक नींद की ओर आकर्षित होते हैं, जबकि असली समस्या शरीर और मन के असंतुलन में होती है। उनके अनुसार यदि व्यक्ति अपने भीतर संतुलन बना ले तो उसे लंबे समय तक सोने की आवश्यकता कम हो सकती है और वह अधिक सक्रिय जीवन जी सकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि जीवन का उद्देश्य केवल आराम करना नहीं बल्कि हर क्षण को पूरी तरह से अनुभव करना है। उनके अनुसार जागरूकता के साथ जीया गया जीवन अधिक अर्थपूर्ण होता है और व्यक्ति अपनी ऊर्जा का बेहतर उपयोग कर सकता है। यह दृष्टिकोण आधुनिक जीवनशैली में संतुलन की आवश्यकता को उजागर करता है, जहां लोग व्यस्तता और थकान के बीच अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना भूल जाते हैं।

    बातचीत के दौरान जब पारिवारिक जीवन का जिक्र आया तो सद्गुरु ने बच्चों से सीखने की बात कही। उन्होंने कहा कि बच्चे जीवन को बिना किसी बोझ के जीते हैं और उनकी सरलता वयस्कों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख हो सकती है। उनके अनुसार माता पिता को बच्चों को केवल सिखाना ही नहीं बल्कि उनसे सीखने की कोशिश भी करनी चाहिए क्योंकि वे जीवन को बहुत स्वाभाविक तरीके से समझते हैं।

    इस बातचीत का एक हल्का और मनोरंजक क्षण तब आया जब सद्गुरु ने मजाकिया अंदाज में अपनी भावनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें भी कभी कभी अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करने का मन होता है। इस पर माहौल हल्का हो गया और बातचीत में एक मानवीय और सरल पक्ष सामने आया।

    यह पूरा संवाद केवल एक सामान्य बातचीत नहीं रह गया बल्कि जीवनशैली, संतुलन और सोच के नजरिए पर एक गहरी चर्चा में बदल गया, जिसे लोग अपने अपने तरीके से समझ और साझा कर रहे हैं।

  • नीतीश युग का अंत, ‘सम्राट युग’ की शुरुआत, बिहार में नई सरकार के सामने ये हैं बड़ी चुनौतियां

    नीतीश युग का अंत, ‘सम्राट युग’ की शुरुआत, बिहार में नई सरकार के सामने ये हैं बड़ी चुनौतियां


    पटना। बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दो दशक से मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने पद से इस्तीफा दे दिया है और मंत्रिमंडल भंग होने के बाद राज्य में नए राजनीतिक युग की शुरुआत हो गई है। एनडीए विधायक दल ने सम्राट चौधरी को अपना नेता चुन लिया है, जिसके बाद अब उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ माना जा रहा है।

    बिहार में सम्राट युग की शुरुआत
    नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल के बाद अब बिहार में पहली बार बीजेपी से मुख्यमंत्री बनने की संभावना है। नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रशासनिक ढांचे को संभालने और विकास की रफ्तार को बनाए रखने की होगी। इसके अलावा राज्य में भ्रष्टाचार और अफसरशाही को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। रेड टेप कल्चर के कारण कई सरकारी योजनाएं जमीन पर सही ढंग से लागू नहीं हो पातीं, जिससे जनता तक योजनाओं का पूरा लाभ नहीं पहुंच पाता।

    बेरोजगारी और पलायन पर फोकस जरूरी

    बिहार में बेरोजगारी और पलायन हमेशा से बड़ा मुद्दा रहा है। युवाओं का लगातार अन्य राज्यों की ओर जाना सरकार के लिए गंभीर चुनौती है। पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे भी राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहे हैं।

    शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि ढांचा कमजोर
    राज्य में उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और कृषि व सिंचाई ढांचे की कमजोर स्थिति विकास में बाधा बनती रही है।

    शराबबंदी पर भी चर्चा तेज
    बिहार में लागू शराबबंदी नीति एक बार फिर चर्चा में है। कुछ एनडीए नेताओं द्वारा इस पर पुनर्विचार की मांग भी उठती रही है। हालांकि इस फैसले के सामाजिक और राजनीतिक असर को लेकर मतभेद बने हुए हैं।

    नीतीश से अलग पहचान बनाने की चुनौती

    नई सरकार के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि और कार्यशैली से अलग पहचान बनाना भी होगी। नीतीश कुमार की सुशासन बाबू की छवि ने लंबे समय तक जनता को प्रभावित किया है। ऐसे में नई सरकार को ऐसी नीतियां और योजनाएं लानी होंगी, जो सीधे जनता, खासकर महिलाओं और युवाओं के जीवन में बदलाव ला सकें।

    कुल मिलाकर बिहार अब एक नए राजनीतिक चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां नेतृत्व परिवर्तन के साथ उम्मीदें भी बढ़ी हैं और चुनौतियां भी। नई सरकार के प्रदर्शन पर ही आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा तय होगी।

  • राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोड वाहनों के खिलाफ सख्त नियम लागू, सरकार ने बदला शुल्क ढांचा

    राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोड वाहनों के खिलाफ सख्त नियम लागू, सरकार ने बदला शुल्क ढांचा

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोडेड वाहनों के संचालन को नियंत्रित करने और सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए शुल्क संबंधी नियमों में बड़ा संशोधन किया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी नए प्रावधानों के तहत अब ओवरलोडिंग की मात्रा के आधार पर शुल्क तय किया जाएगा। इस निर्णय का उद्देश्य न केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है, बल्कि हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को होने वाले नुकसान को भी कम करना है। नए नियम 15 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू होंगे।

    संशोधित व्यवस्था के अनुसार यदि कोई वाहन निर्धारित वजन सीमा से अधिक लेकिन दस प्रतिशत तक अतिरिक्त भार लेकर चलता है, तो उस पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। लेकिन यदि ओवरलोडिंग दस प्रतिशत से अधिक और चालीस प्रतिशत तक पाई जाती है, तो वाहन मालिक को बेस रेट का दोगुना शुल्क देना होगा। वहीं चालीस प्रतिशत से अधिक ओवरलोड वाले वाहनों पर चार गुना शुल्क लागू किया जाएगा, जिससे अत्यधिक लोडिंग पर सख्त रोक लगाई जा सके।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि ओवरलोडिंग की जांच टोल प्लाजा पर लगाए गए प्रमाणित और आधुनिक वजन मापने वाले उपकरणों से की जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी तरह की माप में गड़बड़ी की संभावना कम होगी। जिन टोल प्लाजा पर वजन मापने की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, वहां ओवरलोड शुल्क लागू नहीं किया जाएगा, जिससे तकनीकी ढांचे के विस्तार को भी बढ़ावा मिलेगा।

    नए नियमों के तहत ओवरलोड शुल्क का भुगतान केवल फास्टैग प्रणाली के माध्यम से ही किया जाएगा। इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा और पूरी प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी बनेगी। इसके अलावा ऐसे सभी वाहनों का रिकॉर्ड राष्ट्रीय वाहन रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा, जिससे निगरानी व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सके। बिना वैध फास्टैग के हाईवे पर प्रवेश करने वाले वाहनों के खिलाफ मौजूदा नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ निजी निवेश आधारित परियोजनाओं पर यह नियम तत्काल लागू नहीं होंगे, जब तक संबंधित कंपनियां इन्हें अपनाने की सहमति नहीं देतीं। इससे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है।

    इसके साथ ही वेट इन मोशन तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया गया है, जिसके तहत वाहनों का वजन चलते हुए ही मापा जा सकेगा। इससे टोल प्लाजा पर रुकावट कम होगी और ट्रैफिक प्रवाह भी सुचारू रहेगा। सरकार का मानना है कि इन नए नियमों से ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण होगा, सड़कें अधिक सुरक्षित होंगी और राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता और आयु में भी सुधार आएगा।

  • बिहार की राजनीति में निर्णायक मोड़, नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सत्ता का पूरा गणित बदला,नई सरकार के गठन की तैयारियां तेज,

    बिहार की राजनीति में निर्णायक मोड़, नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सत्ता का पूरा गणित बदला,नई सरकार के गठन की तैयारियां तेज,

    नई दिल्ली:   बिहार की राजनीति में हाल ही में हुए बड़े घटनाक्रम के बाद सम्राट चौधरी को भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। इस निर्णय के साथ ही राज्य में नई राजनीतिक दिशा और संभावित सत्ता परिवर्तन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के भीतर सर्वसम्मति से लिए गए इस फैसले ने बिहार की सियासत में एक महत्वपूर्ण मोड़ पैदा कर दिया है और आने वाले समय की राजनीतिक रणनीति को लेकर भी नई संभावनाएं खुल गई हैं।

    विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद सम्राट चौधरी ने पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह पिछले लगभग तीस वर्षों से लगातार संगठन और जनसेवा से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए केवल एक पद नहीं बल्कि जनता की सेवा करने का अवसर है, जिसे वह पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनका संकल्प बिहार के विकास को गति देना और लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना है।

    उन्होंने अपने बयान में कहा कि राजनीतिक जीवन में जिम्मेदारियां बदलती रहती हैं, लेकिन उनका उद्देश्य हमेशा बिहार के हित में काम करना रहा है और आगे भी वे इसी दिशा में निरंतर कार्य करते रहेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि पार्टी नेतृत्व ने जो भरोसा उन पर जताया है, उस पर वह पूरी तरह खरा उतरने का प्रयास करेंगे और जनता के विश्वास को मजबूत बनाए रखेंगे।

    बैठक के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की उपस्थिति में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। इस दौरान राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संगठनात्मक रणनीति और भविष्य की दिशा को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद लिए गए फैसले की औपचारिक घोषणा के साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखा गया।

    सम्राट चौधरी ने कहा कि वे केंद्र और राज्य नेतृत्व के मार्गदर्शन में बिहार को विकास, सुशासन और समृद्धि की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार बनने की स्थिति में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, रोजगार सृजन और आधारभूत ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।

    इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा और तेज हो गई है कि बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नए नेतृत्व के सामने विकास, रोजगार, कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन जैसी कई महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी, जिनसे निपटने की दिशा में रणनीति तय की जाएगी।

    समर्थकों और कार्यकर्ताओं में इस निर्णय के बाद उत्साह का माहौल है और पार्टी के भीतर नई ऊर्जा का संचार देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है।

  • सनस्क्रीन से लेकर आयुर्वेद तक: बदल रहे हैं भारत के स्किन केयर ट्रेंड्स

    सनस्क्रीन से लेकर आयुर्वेद तक: बदल रहे हैं भारत के स्किन केयर ट्रेंड्स


    नई दिल्ली। आजकल स्किन केयर सिर्फ खूबसूरती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह हेल्थ और लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन चुका है। भारत में बदलते मौसम, प्रदूषण और स्ट्रेस के कारण स्किन प्रॉब्लम्स तेजी से बढ़ रही हैं, जिसके चलते स्किन केयर इंडस्ट्री में नए ट्रेंड सामने आ रहे हैं।

    1. सनस्क्रीन का इस्तेमाल अब “डेली रूटीन” बना

    डर्मेटोलॉजिस्ट लगातार सलाह दे रहे हैं कि सनस्क्रीन अब सिर्फ गर्मियों के लिए नहीं, बल्कि रोजाना जरूरी है।
    UV किरणों से बचाव के लिए SPF 30 से 50 तक की सनस्क्रीन ज्यादा इस्तेमाल हो रही है।

    2. “Skin Barrier Repair” प्रोडक्ट्स की बढ़ती डिमांड

    आजकल लोग harsh केमिकल्स की बजाय ऐसे प्रोडक्ट्स पसंद कर रहे हैं जो स्किन की natural barrier को ठीक करें।
    Ceramide, Hyaluronic Acid और Niacinamide वाले प्रोडक्ट्स की बिक्री तेजी से बढ़ी है।

    3. नेचुरल और आयुर्वेदिक स्किन केयर की वापसी

    हल्दी, एलोवेरा, चंदन और नीम आधारित प्रोडक्ट्स फिर से ट्रेंड में हैं।
    लोग केमिकल-फ्री और ऑर्गेनिक स्किन केयर को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं।

    4. “Glass Skin” और “Hydrated Glow” ट्रेंड

    कोरियन ब्यूटी ट्रेंड्स का असर भारत में भी दिख रहा है।
    लोग अब matte लुक से ज्यादा चमकदार और हाइड्रेटेड स्किन पसंद कर रहे हैं।

    5. Dermatologist-led skincare का चलन बढ़ा

    अब लोग सोशल मीडिया टिप्स की बजाय डॉक्टर-प्रमाणित स्किन केयर रूटीन को फॉलो कर रहे हैं।
    Retinol, Vitamin C serum और chemical exfoliation को लेकर जागरूकता बढ़ी है।

    6. गलत स्किन केयर से नुकसान के मामले भी बढ़े

    बिना सलाह के स्टेरॉइड क्रीम, फेयरनेस क्रीम और हार्श केमिकल्स के उपयोग से स्किन डैमेज के केस बढ़ रहे हैं। डॉक्टर चेतावनी दे रहे हैं कि गलत प्रोडक्ट से स्थायी नुकसान हो सकता है।

  • मऊगंज में दर्दनाक सड़क हादसा, खड़े ट्रेलर ट्रक से टकराईं दो बाइक, 3 युवकों की मौत, 2 गंभीर घायल

    मऊगंज में दर्दनाक सड़क हादसा, खड़े ट्रेलर ट्रक से टकराईं दो बाइक, 3 युवकों की मौत, 2 गंभीर घायल


    मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में मंगलवार को एक भीषण सड़क हादसे में तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा लौर थाना क्षेत्र के पन्नी-पथरिया नेशनल हाईवे पर हुआ, जहां दो तेज रफ्तार बाइक सड़क किनारे खड़े एक ट्रेलर ट्रक से जा टकराईं।

    पुलिस के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 11 बजे तीन युवक पल्सर बाइक से हाईवे पर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि वे तेज गति में बाइक चलाने के साथ-साथ मोबाइल पर रील भी बना रहे थे। इसी दौरान उनका ध्यान भटक गया और बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े ट्रेलर से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तीनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई।

    पहली दुर्घटना के तुरंत बाद पीछे से आ रही एक अन्य टीवीएस अपाचे बाइक भी हादसे का शिकार हो गई। दूसरी बाइक का चालक अचानक स्थिति को संभाल नहीं पाया और वह भी उसी ट्रेलर से टकरा गया। इस दूसरी टक्कर में दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।

    घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और घायलों को तत्काल मऊगंज के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    थाना प्रभारी रीना सिंह ने बताया कि हादसे में तीन युवकों की मौत हुई है, जिनकी पहचान बेला गांव निवासी उपलक्ष्य कोल (17), अमरीश कोल (22) और हेमराज कोल (17) के रूप में हुई है। वहीं चितई पुरवा पिपरा निवासी प्रशांत द्विवेदी (19) और प्रदीप द्विवेदी (17) गंभीर रूप से घायल हैं।

    पुलिस को मृतकों के पास से एक गन लाइटर भी मिला है। फिलहाल ट्रेलर ट्रक को जब्त कर लिया गया है और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

  • बालों की हर समस्या का समाधान? कॉफी से मिल सकता है नेचुरल हेयर केयर

    बालों की हर समस्या का समाधान? कॉफी से मिल सकता है नेचुरल हेयर केयर


    नई दिल्ली। आज के समय में बाल झड़ना और काफी ज्यादा डैंड्रफ होना आम बात बन गया है।आजकल प्रदूषण और केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से बालों का झड़ना, डैंड्रफ और रूखापन एक आम समस्या बन गई है। हम अक्सर महंगे पार्लर ट्रीटमेंट पर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं, लेकिन नतीजा हमेशा अच्छा नहीं आता है इसलिए हम आपके लिए ऐसा ट्रिक लेकर आए हैं जिससे आप अपने बाल को काफी सुंदर और डैंड्रफ फ्री बन सकती हैं।

    कॉफी दिखाएगा का कमाल
    हमारे किचन में रखा हुआ काफी हम पीने के लिए उपयोग करते हैं लेकिन हमें इसके बारे में बिल्कुल नहीं पता कि इसे हमारे बाल भी काफी अच्छे हो सकते हैं। आपको बता दें, कॉफी हेयर मास्क का इस्तेमाल कर आप मात्र 2 हफ्ते में रेशमी, चमकदार और डैंड्रफ मुक्त बाल पा सकते हैं।

    कॉफी के बड़े फायदे
    कॉफी में मौजूद कैफीन बालों की जड़ों को मजबूत करने में मदद करता है, जिससे हेयर ग्रोथ बढ़ती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स स्कैल्प को डिटॉक्स करते हैं और ब्लड सर्कुलेशन में सुधार लाते हैं। कॉफी बालों के क्यूटिकल्स को स्मूथ बनाती है, जिससे बाल सिल्की नजर आते हैं।

    सिल्की बालों के लिए लगे काफी दही और शहद
    शहद नमी को लॉक करता है और दही बालों को गहराई से कंडीशन करता है। आप 2 चम्मच कॉफी पाउडर, 1 चम्मच शहद, 2 चम्मच ताजा दही लें। तीनों चीजों को मिलाकर एक चिकना पेस्ट बना लें। इसके बाद इसे आप अपने बालों पर पेस्ट की तरह लगे थोड़ी देर रुकने के बाद इसे धूल दे आपकी बाल काफी मुलायम हो जायेगे और साइन करने लगेंगे।

    डैंड्रफ के लिए नींबू कॉफ़ी और तेल
    नींबू डैंड्रफ खत्म करता है और नारियल तेल स्कैल्प को पोषण देता है। आप 2 चम्मच कॉफी पाउडर, 1 चम्मच नारियल तेल, कुछ बूंदें नींबू का रस लें। आप इसे मिलाकर हल्का गुनगुना कर लें ताकि यह स्कैल्प में अच्छे से समा जाए।मास्क लगाने से पहले बालों को अच्छे से कंघी कर लें ताकि कोई गांठ न रहे। ब्रश या उंगलियों की मदद से मास्क को स्कैल्प से लेकर बालों की पूरी लंबाई तक लगाएं।हल्के हाथों से 5 मिनट तक स्कैल्प की मसाज करें। इससे कैफीन जड़ों के अंदर तक जाएगा।मास्क को 30 से 45 मिनट तक लगा रहने दें। अगर आप ऐसा दो हफ्तों में तीन-चार बार करेंगी तो आपके बाल काफी अच्छे और घने बन जाएंगे

  • राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अंबेडकर जयंती पर दी श्रद्धांजलि लोकभवन में हुआ कार्यक्रम

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अंबेडकर जयंती पर दी श्रद्धांजलि लोकभवन में हुआ कार्यक्रम

    भोपाल । भोपाल में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर श्रद्धा और सम्मान का वातावरण देखने को मिला। इस मौके पर मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर बाबा साहेब को नमन किया।

    कार्यक्रम का आयोजन भोपाल स्थित लोकभवन के बैंक्वेट हॉल में किया गया जहां राज्यपाल ने डॉ. अंबेडकर के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने संविधान निर्माता के रूप में बाबा साहेब के अतुलनीय योगदान को याद किया और उनके विचारों को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

    इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लोकभवन के अधिकारी और कर्मचारियों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया और बाबा साहेब को आदरांजलि अर्पित की।

    समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने डॉ. अंबेडकर के विचारों और उनके द्वारा स्थापित मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि बाबा साहेब ने भारतीय समाज को समानता न्याय और अधिकारों का जो संदेश दिया वह आज भी प्रासंगिक है और देश के विकास का मार्गदर्शन करता है।

    यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक चेतना और समता के संदेश को दोहराने का अवसर भी बना। बाबा साहेब के जीवन और संघर्ष को याद करते हुए लोगों ने उनके आदर्शों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    इस प्रकार भोपाल के लोकभवन में आयोजित यह कार्यक्रम अंबेडकर जयंती के अवसर पर श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक बनकर उभरा जहां संविधान निर्माता को पूरे आदर भाव के साथ याद किया गया।

  • नीतीश कुमार के करीबी को मिल सकती है नई सरकार में अहम जिम्मेदारी..

    नीतीश कुमार के करीबी को मिल सकती है नई सरकार में अहम जिम्मेदारी..

    नई दिल्ली:   बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सत्ता समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। इस राजनीतिक हलचल के बीच नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो गई है और संभावित मंत्रिमंडल को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इसी क्रम में जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता और अनुभवी विधायक विजय कुमार चौधरी का नाम उपमुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों में प्रमुखता से सामने आ रहा है।

    नीतीश कुमार के साथ लंबे समय से काम कर रहे विजय कुमार चौधरी बिहार की राजनीति में एक भरोसेमंद और अनुभवी चेहरे के रूप में पहचाने जाते हैं। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक समझ के कारण उन्हें पार्टी के भीतर एक मजबूत रणनीतिक नेता माना जाता है। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में उनके नाम पर चर्चा यह संकेत दे रही है कि नई सरकार में अनुभव और संतुलन को प्राथमिकता दी जा सकती है।

    विजय कुमार चौधरी का जन्म बिहार के समस्तीपुर जिले में हुआ था और उन्होंने शिक्षा पूरी करने के बाद कुछ समय तक बैंकिंग क्षेत्र में भी कार्य किया, लेकिन बाद में उन्होंने पूरी तरह राजनीति को अपना करियर बना लिया। वे लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं और कई बार विधानसभा चुनाव जीतकर जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ साबित कर चुके हैं।

    अपने राजनीतिक सफर में उन्होंने राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली है, जिनमें वित्त, जल संसाधन, शिक्षा, ग्रामीण विकास और संसदीय कार्य जैसे अहम मंत्रालय शामिल रहे हैं। इसके अलावा वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने सदन की कार्यवाही को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में काम किया।

    जातिगत चर्चा के बीच यह भी स्पष्ट है कि बिहार की राजनीति में उपनाम और सामाजिक पहचान अलग-अलग संदर्भों में देखी जाती है, लेकिन विजय कुमार चौधरी की राजनीतिक पहचान मुख्य रूप से उनके प्रशासनिक कौशल और लंबे अनुभव पर आधारित रही है। वे नीतीश कुमार के करीबी सहयोगियों में गिने जाते हैं और सरकार के निर्णयों में उनकी भूमिका अक्सर महत्वपूर्ण रही है।

    वर्तमान समय में जब एनडीए सरकार के गठन को लेकर मंथन चल रहा है, तब विजय कुमार चौधरी का नाम उपमुख्यमंत्री पद के लिए उभरकर सामने आना यह दर्शाता है कि संगठन अनुभवी और स्थिर नेतृत्व को प्राथमिकता दे सकता है। उनकी छवि एक शांत, संतुलित और प्रशासनिक रूप से दक्ष नेता की रही है, जो सरकार की नीतियों को सुचारू रूप से लागू करने में सक्षम माने जाते हैं।

    बिहार की बदलती राजनीतिक तस्वीर में अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार में किन नेताओं को अहम जिम्मेदारी मिलती है और क्या विजय कुमार चौधरी को उपमुख्यमंत्री के रूप में बड़ी भूमिका सौंपी जाती है या नहीं, इसका आधिकारिक फैसला आने वाले समय में राजनीतिक दिशा को और स्पष्ट करेगा।