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  • शिवपुरी के सीएम राइज स्कूल के प्राचार्य पर महिला शिक्षिकाओं को परेशान करने के आरोप, पैर पकड़कर माफी मांगने का वीडियो वायरल

    शिवपुरी के सीएम राइज स्कूल के प्राचार्य पर महिला शिक्षिकाओं को परेशान करने के आरोप, पैर पकड़कर माफी मांगने का वीडियो वायरल

    मध्य प्रदेश”: के शिवपुरी जिले के कोलारस स्थित सीएम राइज स्कूल के प्राचार्य राकेश कुलश्रेष्ठ से जुड़ा एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। वीडियो में प्राचार्य एक महिला के पैर पकड़कर माफी मांगते दिखाई दे रहे हैं। इस घटनाक्रम के साथ महिला अतिथि शिक्षिकाओं की ओर से लगाए गए अनुचित व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली घटना की पूरी परिस्थितियों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।

    महिला शिक्षिका का आरोप है कि प्राचार्य खाली पीरियड के दौरान उन्हें अपने साथ बाहर घूमने के लिए कहते थे। वायरल वीडियो में शिक्षिका कथित तौर पर प्राचार्य से कहती सुनाई देती हैं कि उन्होंने ऐसा एक बार नहीं, बल्कि तीन बार कहा था। शिक्षिका के मुताबिक, स्कूल में खाली समय को लेकर दिए गए इस निर्देश से वह असहज थीं। मामले को लेकर स्कूल परिसर में विवाद होने और शिक्षिका की ओर से पुलिस थाने जाने की बात कहे जाने का भी उल्लेख किया गया है।

    वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम के अनुसार, जब महिला शिक्षिका ने थाने जाने की बात कही, तो प्राचार्य उनके पैर पकड़कर माफी मांगते नजर आए। इस दृश्य के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि विवाद किन परिस्थितियों में हुआ था और माफी मांगने की नौबत क्यों आई। हालांकि, केवल वीडियो के आधार पर पूरे मामले के सभी पहलुओं या आरोपों की सत्यता का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    वीडियो में महिला शिक्षिका एक अन्य शिक्षिका का जिक्र करते हुए यह भी कहती सुनाई देती हैं कि उन्होंने पहले महिला एवं बाल विकास विभाग के समक्ष अपने बयान बदलकर प्राचार्य को बचाया था। शिक्षिका कथित तौर पर यह मांग भी करती हैं कि स्कूल में भविष्य में इस तरह का व्यवहार दोबारा नहीं होना चाहिए। यह बयान मामले में पहले हुई किसी शिकायत या विभागीय प्रक्रिया की ओर संकेत करता है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में उस प्रक्रिया के आधिकारिक निष्कर्षों का विवरण नहीं दिया गया है।

    मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, दोनों महिला शिक्षिकाओं को बाद में नौकरी छोड़नी पड़ी। आरोप है कि प्राचार्य महिला शिक्षिकाओं को अकेले में बुलाते थे और खाली पीरियड के दौरान अपने साथ समय बिताने का दबाव बनाते थे। शिक्षिकाओं की ओर से कथित अनुचित टिप्पणियों और मानसिक परेशानी की शिकायत भी सामने आई है। हालांकि, नौकरी छोड़ने के कारणों और परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।

    दूसरी ओर, प्राचार्य राकेश कुलश्रेष्ठ ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि आरोप लगाने वाली दोनों महिलाओं ने झूठी शिकायतें की थीं और बाद में नौकरी छोड़कर चली गईं। इस तरह मामले में शिकायतकर्ता पक्ष के आरोप और प्राचार्य का पक्ष एक-दूसरे से अलग हैं। वायरल वीडियो ने विवाद को सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है, लेकिन पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट करने के लिए संबंधित पक्षों के बयान, शिकायतों के रिकॉर्ड और किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

    शिक्षण संस्थानों में कार्यरत महिला कर्मचारियों की गरिमा, सुरक्षित वातावरण और शिकायतों के निष्पक्ष निपटारे का मुद्दा इस मामले के केंद्र में है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित विभाग या प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई और जांच से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का सामने आना जरूरी है।

  • उज्जैन से दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा शुरू, पत्नी संग दर्शन के बाद 70 दिन पैदल चलेंगे

    उज्जैन से दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा शुरू, पत्नी संग दर्शन के बाद 70 दिन पैदल चलेंगे

    मध्य प्रदेश: के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा 20 अक्टूबर को उज्जैन से शुरू हो गई। मंदिरों में चढ़ावे और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर निकाली जा रही यह यात्रा लगभग 950 किलोमीटर की दूरी तय करके अयोध्या स्थित राम मंदिर पहुंचेगी। इसे करीब 70 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे।

    यात्रा शुरू करने से पहले दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी अमृता सिंह के साथ धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया। उन्होंने सबसे पहले चिंतामन गणेश मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद नृसिंह घाट के पास बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। महाकाल मंदिर में दर्शन करने के बाद यात्रा आगे बढ़ी।

    यात्रा के पहले दिन लगभग तीन हजार लोगों के शामिल होने की जानकारी दी गई। आगे के पड़ावों पर प्रतिदिन एक हजार से 1,500 लोगों के जुड़ने का अनुमान है। इसमें साधु-संतों, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं, विधायकों और महिलाओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है। यात्रा के माध्यम से मंदिरों में आने वाले चढ़ावे और धार्मिक स्थलों के संचालन से संबंधित व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की मांग उठाई जा रही है।

    दिग्विजय सिंह ने यात्रा के दौरान भोजन, नाश्ते, चाय और ठहरने की व्यवस्था को लेकर भी बात कही है। अलग-अलग पड़ावों पर सहयोग करने वाले लोग इन व्यवस्थाओं में मदद करेंगे। उनका कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि यात्रा के दौरान भोजन और भंडारों का खर्च कौन उठा रहा है। यात्रा का उद्देश्य धार्मिक स्थलों से जुड़ी व्यवस्थाओं और चढ़ावे के उपयोग में स्पष्टता की मांग को सामने लाना है।

    यात्रा का पहला पड़ाव उज्जैन के कानीपुरा में रखा गया है। शहर में यात्रा पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, कमरी मार्ग चौराहा, टंकी चौराहा, मिर्जा नईम बेग मार्ग, तेलीवाड़ा चौराहा, कंठाल चौराहा, निजातपुरा और कोयला फाटक सहित कई इलाकों से होकर गुजरेगी। इसके बाद नगर निगम के सामने, गाड़ी अड्डा चौराहा, दरगाह मंडी और कानीपुरा रोड से आगे बढ़ेगी। तराना रोड स्थित श्री साईं कुंज कॉलोनी में रात के भोजन और विश्राम की व्यवस्था रखी गई है।

    कानीपुरा से आगे यात्रा सिंदुरिया, तराना और कनासिया होते हुए शाजापुर जिले की ओर जाएगी। मध्य प्रदेश में इसका प्रस्तावित मार्ग सारंगपुर, खुजनेर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर और चंदेरी से होकर गुजरेगा। इसके बाद यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी। वहां तालबेहट, जेरोन और ओरछा के बाद चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी होते हुए अयोध्या पहुंचने की योजना है। यात्रा का अंतिम पड़ाव राम मंदिर होगा।

    यात्रा के साथ एक विशेष रथ भी चल रहा है। इसमें भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। रथ में गंगा, यमुना, शिप्रा, कावेरी और नर्मदा नदियों के जल से भरे कलश भी रखे गए हैं। इस रथ का निर्माण भरत पोरवाल के निर्देशन में महावीर जैन और सतीश शर्मा ने किया है।

    करीब 70 दिनों में यात्रा पूरी करने के लिए दिग्विजय सिंह ने पैदल चलने की तैयारी पहले से की थी। इसके लिए वह प्रतिदिन लगभग आठ किलोमीटर पैदल चलने का अभ्यास कर रहे थे। अब उज्जैन से शुरू हुई यह यात्रा निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ते हुए अयोध्या में समाप्त होगी।

  • देवास में जवारा विसर्जन के दौरान मधुमक्खियों का हमला, 20 से अधिक ग्रामीण घायल और 11 अस्पताल में भर्ती

    देवास में जवारा विसर्जन के दौरान मधुमक्खियों का हमला, 20 से अधिक ग्रामीण घायल और 11 अस्पताल में भर्ती

    मध्यप्रदेश: के देवास जिले के रजोदा गांव में मंगलवार सुबह जवारा विसर्जन के पारंपरिक अनुष्ठान के दौरान मधुमक्खियों के अचानक हमले से अफरा-तफरी मच गई। इस घटना में 20 से अधिक ग्रामीण घायल हो गए। घायलों में से 11 लोगों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्साकर्मी घायलों का उपचार कर रहे हैं। धार्मिक आयोजन के दौरान हुई इस घटना से मौके पर मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और कई ग्रामीणों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा।

    जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार सुबह करीब 9 बजे की है। रजोदा गांव में ग्रामीण जवारा विसर्जन की परंपरा निभाने के लिए एक कुएं के पास एकत्रित हुए थे। इसी दौरान पांच से छह लोग नहाने के लिए कुएं में कूद गए। कुएं के ठीक ऊपर स्थित एक बड़े पीपल के पेड़ पर मधुमक्खियों का छत्ता बना हुआ था। नहाते समय पानी की कुछ छींटें छत्ते पर जा गिरीं। इसके बाद मधुमक्खियां आक्रामक हो गईं और वहां मौजूद लोगों पर हमला कर दिया।

    अचानक हुए हमले के कारण लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। मधुमक्खियों के झुंड ने ग्रामीणों को निशाना बनाया और कई लोगों के सिर, हाथ तथा शरीर के अन्य हिस्सों पर डंक मारे। हमले के बाद घटनास्थल पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लोग मधुमक्खियों से बचने के लिए अलग-अलग दिशाओं में भागने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए करीब दो किलोमीटर तक दौड़ते रहे।

    मधुमक्खियों के हमले से बचने के लिए ग्रामीणों ने अलग-अलग तरीके अपनाए। कुछ लोगों ने नीम की टहनियों का सहारा लिया और हाथों से मधुमक्खियों को दूर भगाने की कोशिश की। वहीं, कुछ ग्रामीणों ने खुद को जालों से ढककर सुरक्षित रखने का प्रयास किया। ऐसे लोग करीब 15 मिनट तक जाल के नीचे छिपे रहे। इस दौरान मधुमक्खियों का झुंड उनके आसपास मंडराता रहा। वे तब तक बाहर नहीं निकले, जब तक मधुमक्खियां वहां से चली नहीं गईं।

    घटना के बाद घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। कुल 20 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है, जबकि 11 ग्रामीणों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्साकर्मी घायलों का प्राथमिकता के आधार पर इलाज कर रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सभी घायलों की स्थिति और उन्हें लगी चोटों की गंभीरता का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

    देवास जिले में इस तरह की घटना पहले भी सामने आ चुकी है। सोनकच्छ क्षेत्र के अगेरा गांव में मूर्ति विसर्जन के दौरान मधुमक्खियों ने श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया था। उस घटना में लगभग 25 लोग घायल हुए थे, जिनमें से 13 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने धार्मिक आयोजनों के दौरान आसपास के वातावरण और सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित किया है।

    रजोदा गांव की घटना के बाद सामूहिक कार्यक्रमों में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। पेड़ों पर मधुमक्खियों के छत्ते होने की स्थिति में उनके आसपास भीड़ जुटाने या ऐसी गतिविधियां करने से बचना जरूरी है, जिनसे मधुमक्खियां उत्तेजित हो सकती हैं। विशेष रूप से कुओं, तालाबों और खुले स्थानों पर होने वाले धार्मिक आयोजनों के दौरान आसपास के पेड़ों तथा संभावित जोखिम वाले स्थानों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।

    जवारा विसर्जन के दौरान हुई इस घटना में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के घायल होने से गांव में चिंता का माहौल बना। फिलहाल अस्पताल में भर्ती लोगों का उपचार जारी है। यह घटना बताती है कि पारंपरिक आयोजनों के दौरान आसपास मौजूद प्राकृतिक परिस्थितियों को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है और थोड़ी सी सावधानी से ऐसी परिस्थितियों में नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है।

  • मध्यप्रदेश में 750 पुलिस बैंड पदों पर भर्ती की तैयारी, मोहन यादव सरकार 2027 को मनाएगी युवा वर्ष

    मध्यप्रदेश में 750 पुलिस बैंड पदों पर भर्ती की तैयारी, मोहन यादव सरकार 2027 को मनाएगी युवा वर्ष


    मध्यप्रदेश:
    में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और पुलिस विभाग की व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए करीब 750 पुलिस बैंड पदों पर भर्ती की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार आगामी वर्ष को युवा वर्ष के रूप में मनाने की योजना बना रही है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की विशेष परीक्षा जनवरी-फरवरी में आयोजित कराने की भी तैयारी है। इन पहलों का उद्देश्य युवाओं को अवसर उपलब्ध कराने के साथ पुलिस विभाग की कार्यक्षमता और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना है।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य सरकार चाहती है कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में पुलिस बैंड की व्यवस्था हो। इसके लिए करीब 750 पदों पर भर्ती की जा रही है। इस पहल से जिलों में पुलिस बैंड तैयार करने और राष्ट्रीय पर्वों पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को अधिक व्यवस्थित तथा आकर्षक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसरों पर पुलिस बैंड की प्रस्तुति समारोह का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

    मुख्यमंत्री ने गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान पुलिस बैंड की प्रस्तुति, मधुर भजनों और पुलिसकर्मियों की दक्षता की सराहना की। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व शासन के लिए भी दीपावली के समान महत्व रखते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से देशभक्ति, राष्ट्रीय गौरव और अनुशासन की भावना व्यक्त होती है। प्रत्येक जिले में पुलिस बैंड की उपलब्धता से ऐसे आयोजनों को बेहतर ढंग से संपन्न कराने में सहायता मिल सकती है।

    सरकार की योजना केवल पुलिस बैंड तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग को नए संशोधित कानूनों के अनुरूप मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने और विभिन्न स्तरों पर नई भर्तियों सहित अन्य व्यवस्थाओं को विकसित करने पर काम किया जा रहा है। पुलिस की विवेचना और अनुसंधान प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के साथ न्यायालयों में मामलों की बेहतर पैरवी तथा संचालन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

    पुलिस विभाग की जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मी चौबीसों घंटे जनसेवा में जुटे रहते हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें कई बार लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ती है। इस दौरान वे अपने परिवार से दूर भी रहते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों के साथ उनके परिवारों का योगदान भी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि उन्हें भी ड्यूटी की परिस्थितियों के अनुसार अपने जीवन में बदलाव करने पड़ते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पुलिसकर्मियों के व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन से जुड़ी जरूरतों के प्रति संवेदनशील है। उनके कल्याण और आवश्यक सहयोग के लिए उचित कदम उठाने की प्रतिबद्धता भी जताई गई। पुलिसकर्मियों की कार्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उनकी जरूरतों पर ध्यान देना विभाग की कार्यक्षमता और सेवा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

    गार्ड ऑफ ऑनर में महिला पुलिसकर्मियों की भागीदारी को भी मुख्यमंत्री ने सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की क्षमताओं को लेकर पुरानी सोच बदलने की जरूरत है। महिलाएं अपनी योग्यता, दक्षता और सामर्थ्य के बल पर हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं और जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा सकती हैं। महिला पुलिसकर्मियों की भागीदारी को इसी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया गया।

    मुख्यमंत्री ने विजयादशमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कामना की कि दशहरे का पर्व लोगों के जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल लेकर आए। उन्होंने इस त्योहार को असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक बताया।

    मध्यप्रदेश में करीब 750 पुलिस बैंड पदों पर भर्ती, हर जिले में बैंड स्थापित करने की तैयारी और एमपीपीएससी की विशेष परीक्षा की योजना युवाओं तथा पुलिस विभाग से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणाएं हैं। सरकार ने आगामी वर्ष को युवा वर्ष के रूप में मनाने की तैयारी भी जताई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में भर्ती की विस्तृत अधिसूचना, आवेदन की तारीख और पात्रता संबंधी शर्तों का उल्लेख नहीं किया गया है।

  • पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के परिवारों से मिले अमित शाह, न्याय का भरोसा और 2029 तक नशा खत्म करने का लक्ष्य

    पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के परिवारों से मिले अमित शाह, न्याय का भरोसा और 2029 तक नशा खत्म करने का लक्ष्य

    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को पंजाब के एक दिवसीय दौरे के दौरान नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में मृतकों के परिवारों की बातें सुनीं और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस दौरान नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की मांगें प्रमुख मुद्दे रहे। शाह ने दिसंबर 2029 तक नशे के कारोबार को खत्म करने का लक्ष्य भी दोहराया।

    दशहरे के अवसर पर शाह सबसे पहले बटाला पहुंचे और वहां से गुरदासपुर जिले के मारी पनवां गांव गए। यहां उन्होंने 15 अक्टूबर को मारे गए बिक्रमजीत सिंह के परिवार से मुलाकात की। ग्रामीणों का आरोप है कि बिक्रमजीत ने अपने क्षेत्र में नशीले पदार्थों की तस्करी का विरोध किया था, जिसके कारण उन्हें निशाना बनाया गया। हालांकि, पुलिस के अनुसार, उनकी हत्या मोबाइल फोन को लेकर दो गुटों के बीच हुए विवाद का परिणाम थी। दोनों पक्षों के बीच बताए गए घटनाक्रम को लेकर जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

    बिक्रमजीत के परिजनों ने गृह मंत्री के सामने मामले में न्याय की मांग रखी। परिवार के एक सदस्य के मुताबिक, शाह ने उनका ज्ञापन पढ़ा और उनकी बातें ध्यानपूर्वक सुनीं। बिक्रमजीत के चाचा गुरनाम सिंह ने भी कहा कि गृह मंत्री ने परिवार को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। इस मुलाकात के दौरान पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों भी मौजूद रहे। शाह के दौरे को देखते हुए गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

    इसके बाद गृह मंत्री संगरूर पहुंचे, जहां उन्होंने तुरबंजारा गांव के गुलजार सिंह के परिवार से मुलाकात की। दलित समुदाय से संबंध रखने वाले गुलजार की सात सितंबर को मृत्यु हो गई थी। परिवार का आरोप है कि उन्होंने अपने क्षेत्र में नशीले पदार्थों की आपूर्ति को लेकर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल किया था। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और जातिसूचक टिप्पणियां की गईं। परिजनों के अनुसार, इन परिस्थितियों से परेशान होकर गुलजार ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच और तथ्यों की पुष्टि इस मामले में महत्वपूर्ण है।

    संगरूर के बाद शाह मानसा पहुंचे, जहां उन्होंने नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिजनों से मुलाकात की। झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा के एक व्यस्त बाजार में स्थित मेडिकल स्टोर के भीतर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के समय वह फेसबुक लाइव कर रहे थे। आरोप है कि मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार ने एक बुजुर्ग को नशीली दवाएं बेचने पर सवाल उठाए जाने के बाद झोटा को गोली मारी। पुलिस ने आरोपी को राजस्थान के सालासर से हिरासत में लिया था।

    झोटा के पिता भीम सिंह ने पहले ही बेटे की हत्या की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग उठाने की बात कही थी। शाह के पंजाब पहुंचने से कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने इस हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है। इससे मामले की जांच को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है।

    पंजाब में नशे की समस्या और उससे जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। अमित शाह का यह 20 दिनों के भीतर दूसरा पंजाब दौरा है। इससे पहले 30 सितंबर को उन्होंने जालंधर में भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन पर रैली को संबोधित किया था। अब मृतकों के परिवारों से मुलाकात और नशे के कारोबार को खत्म करने के लक्ष्य ने इस मुद्दे को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने 42 साल बाद उसी किरण विमान से भरी आखिरी उड़ान, पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी रहे साथ

    वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने 42 साल बाद उसी किरण विमान से भरी आखिरी उड़ान, पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी रहे साथ

    नई दिल्ली । भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को अपने लंबे फ्लाइंग करियर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि पूरी की। उन्होंने हैदराबाद के पास डुंडीगल स्थित एयर फोर्स एकेडमी में एचजीटी-16 किरण ट्रेनर विमान से अपनी ‘यूनिफॉर्म में आखिरी उड़ान’ भरी। इस 55 मिनट की उड़ान को खास बनाने वाली बात यह रही कि उनके साथ उनके पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) वीएस कोचर भी मौजूद थे। यह उड़ान उनके चार दशक से अधिक लंबे विमानन करियर के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में सामने आई।

    एपी सिंह ने 28 जनवरी 1984 को इसी एयर फोर्स एकेडमी से किरण विमान के जरिए अपनी पहली उड़ान भरी थी। चार दशक से अधिक समय बाद उसी स्थान और उसी प्रकार के विमान में अंतिम आधिकारिक उड़ान पूरी करके उन्होंने अपने करियर के एक खास अध्याय को प्रतीकात्मक रूप से पूरा किया। विमान की पहचान संख्या U 707 थी। इस उड़ान के साथ उनकी शुरुआती प्रशिक्षण यात्रा और वर्तमान जिम्मेदारी के बीच एक अनूठा जुड़ाव देखने को मिला।

    उड़ान पूरी होने के बाद एपी सिंह ने कहा कि उन्होंने अपनी वायुसेना यात्रा इसी बेसिक ट्रेनर विमान से शुरू की थी। उन्होंने यह भी कहा कि संभवतः वह पहले ऐसे वायुसेना प्रमुख हैं, जो उसी बेसिक ट्रेनर विमान से सेवानिवृत्ति की ओर बढ़ रहे हैं, जिसे उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में उड़ाया था और जो अब भी सेवा में है। उन्होंने अपने पहले प्रशिक्षक वीएस कोचर के प्रति आभार जताते हुए कहा कि कोचर ने इसी स्थान पर उन्हें उड़ान भरना सिखाया था। इसी वजह से वह अपने फ्लाइंग करियर का यह महत्वपूर्ण पड़ाव उनके साथ पूरा करना चाहते थे।

    किरण विमान के एयर फोर्स एकेडमी के रनवे पर उतरते ही वहां मौजूद वायुसेना के अधिकारियों और जवानों ने वाटर कैनन सैल्यूट देकर उनका स्वागत किया। यह सम्मान वायुसेना में एक विशेष अवसर पर दिया जाने वाला पारंपरिक अभिनंदन है। इस मौके पर एपी सिंह के पूर्व प्रशिक्षक वीएस कोचर भी मौजूद थे। 73 वर्षीय कोचर अपने पूर्व छात्र के साथ दोबारा आसमान में उड़ान भरने के अनुभव से भावुक नजर आए।

    कोचर ने एपी सिंह की प्रशंसा करते हुए उन्हें अपने सबसे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि एपी सिंह बेहतरीन वायुसेना प्रमुखों में शामिल हैं और उनके साथ दोबारा उड़ान भरना किसी सपने के सच होने जैसा है। इस अनुभव ने प्रशिक्षक और प्रशिक्षु के उस रिश्ते को भी रेखांकित किया, जो प्रशिक्षण के वर्षों बाद भी कायम रहता है।

    इससे पहले 12 अक्टूबर को एपी सिंह ने जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ के दौरान स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस में अपनी अंतिम फाइटर जेट उड़ान भरी थी। तेजस की उड़ान लड़ाकू विमान संचालन से जुड़ी उनकी यात्रा का एक अहम पड़ाव थी, जबकि किरण विमान में मंगलवार को भरी गई उड़ान वर्दी में उनकी अंतिम आधिकारिक उड़ान बनी।

    एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की सेवानिवृत्ति इसी महीने के अंत में निर्धारित बताई गई है। ऐसे समय में अपने पहले प्रशिक्षक के साथ उसी विमान में उड़ान भरना, जिसमें उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान करियर शुरू किया था, उनके लिए विशेष महत्व रखता है। यह घटना वायुसेना के प्रशिक्षण, पेशेवर अनुशासन और अनुभव की निरंतरता को भी सामने लाती है।

    चार दशक से अधिक के फ्लाइंग करियर के इस पड़ाव में पहली उड़ान से अंतिम आधिकारिक उड़ान तक का जुड़ाव विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। जिस संस्थान और विमान से एपी सिंह ने अपने विमानन जीवन की शुरुआत की थी, उसी से जुड़कर उन्होंने वर्दी में अपनी अंतिम उड़ान पूरी की। उनके साथ पहले प्रशिक्षक की मौजूदगी ने इस अवसर को और यादगार बना दिया।

  • दो SIM और 5G इस्तेमाल करने से कितनी जल्दी खत्म होती है फोन की बैटरी, जानें बचाने के आसान तरीके

    दो SIM और 5G इस्तेमाल करने से कितनी जल्दी खत्म होती है फोन की बैटरी, जानें बचाने के आसान तरीके

    नई दिल्ली । स्मार्टफोन में दो सिम कार्ड इस्तेमाल करना आज आम बात है। कई लोग निजी और कामकाजी जरूरतों के लिए अलग-अलग नंबर रखते हैं, जबकि कुछ लोग एक सिम कॉलिंग और दूसरी इंटरनेट के लिए इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या फोन में दो सिम सक्रिय रखने से बैटरी जल्दी खत्म होती है। इसके साथ ही 5G नेटवर्क के इस्तेमाल को भी बैटरी की खपत से जोड़कर देखा जाता है। इसका जवाब फोन की तकनीक, नेटवर्क की स्थिति और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करता है।

    जब स्मार्टफोन में दो सिम सक्रिय होती हैं, तो उसे दोनों मोबाइल नेटवर्क से जुड़े रहने और संबंधित सेवाओं के लिए तैयार रहने की जरूरत पड़ सकती है। इस प्रक्रिया में नेटवर्क से जुड़ा सिस्टम ऊर्जा खर्च करता है। इसलिए कुछ परिस्थितियों में दो सिम इस्तेमाल करने से बैटरी की खपत बढ़ सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्मार्टफोन में दो सिम लगाने से बैटरी तेजी से खत्म होगी। आधुनिक फोन में ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

    बैटरी पर नेटवर्क की मजबूती का भी महत्वपूर्ण असर पड़ता है। यदि किसी इलाके में मोबाइल सिग्नल कमजोर है, तो फोन बेहतर कनेक्शन खोजने और उपलब्ध नेटवर्क से जुड़े रहने की कोशिश कर सकता है। इस दौरान सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अधिक ऊर्जा खर्च हो सकती है। घर के अंदर, बेसमेंट, लिफ्ट के आसपास या ऐसे स्थानों पर जहां सिग्नल बार-बार कमजोर होता है, बैटरी तेजी से घटने की समस्या दिखाई दे सकती है। यदि दोनों सिम को कमजोर नेटवर्क मिल रहा हो, तो खपत बढ़ने की संभावना भी रहती है।

    5G नेटवर्क का इस्तेमाल भी कुछ स्थितियों में बैटरी की खपत बढ़ा सकता है। तेज इंटरनेट कनेक्शन के दौरान फोन के नेटवर्क सिस्टम पर काम का दबाव बढ़ सकता है। खासकर जब 5G सिग्नल कमजोर हो और फोन बार-बार 4G तथा 5G नेटवर्क के बीच स्विच कर रहा हो, तो बैटरी पर अतिरिक्त असर पड़ सकता है। इसके अलावा, वीडियो स्ट्रीमिंग, बड़ी फाइलें डाउनलोड करने और ऑनलाइन गेम खेलने जैसे काम भी ऊर्जा की खपत बढ़ा सकते हैं।

    हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि हर 5G स्मार्टफोन की बैटरी 4G के मुकाबले जल्दी खत्म हो। नेटवर्क की गुणवत्ता, फोन का मॉडल और इस्तेमाल की जाने वाली सेवाएं बैटरी के प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं। इसी तरह, दो सिम और 5G एक साथ सक्रिय होने पर भी बैटरी कितनी खर्च होगी, इसका कोई एक समान जवाब नहीं है।

    बैटरी बचाने के लिए सबसे पहले फोन की सेटिंग में जाकर बैटरी इस्तेमाल का विवरण देखना चाहिए। इससे पता चल सकता है कि कौन-से ऐप सबसे ज्यादा ऊर्जा खर्च कर रहे हैं। जिन ऐप की जरूरत नहीं है और जो बैकग्राउंड में लगातार काम कर रहे हैं, उनकी गतिविधि सीमित करना उपयोगी हो सकता है।

    स्क्रीन की चमक कम रखना भी बैटरी बचाने का आसान तरीका है। ऑटो-ब्राइटनेस सुविधा चालू रखने से रोशनी को आसपास की परिस्थितियों के अनुसार समायोजित किया जा सकता है। यदि दूसरी सिम की जरूरत नहीं है, तो उसे कुछ समय के लिए बंद करके भी देखा जा सकता है। इससे खासकर कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में कुछ फोन की बैटरी खपत कम हो सकती है।

    इसी तरह, यदि आपके इलाके में 5G सिग्नल कमजोर है और तेज इंटरनेट की आवश्यकता नहीं है, तो फोन की नेटवर्क सेटिंग में 4G विकल्प चुनना मददगार हो सकता है। हालांकि, इसका असर हर डिवाइस पर एक जैसा नहीं होगा। मजबूत 5G नेटवर्क वाले क्षेत्र में यह बदलाव बहुत कम अंतर पैदा कर सकता है।

    कुल मिलाकर, फोन की बैटरी जल्दी खत्म होने के लिए केवल दो सिम या 5G को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। नेटवर्क की स्थिति, स्क्रीन की चमक, बैकग्राउंड ऐप और बैटरी की पुरानी हालत भी महत्वपूर्ण कारण हैं। इसलिए बैटरी बचाने के लिए पहले फोन की बैटरी सेटिंग में खपत की जांच करना और उसके बाद जरूरत के अनुसार नेटवर्क तथा ऐप की सेटिंग बदलना बेहतर तरीका है।

  • मोहन भागवत ने विजयादशमी भाषण में स्वदेशी, OTT नियंत्रण, नशे और आंदोलनों को लेकर रखे विचार

    मोहन भागवत ने विजयादशमी भाषण में स्वदेशी, OTT नियंत्रण, नशे और आंदोलनों को लेकर रखे विचार

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर संबोधन दिया। संघ के शताब्दी वर्ष के समापन से जुड़े इस कार्यक्रम में उन्होंने भारत की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता, स्वदेशी, नई पीढ़ी के सामने मौजूद चुनौतियों और वैश्विक परिस्थितियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने नागरिकों से एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने तथा व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में अपने कर्तव्यों का पालन करने की अपील की।

    भागवत ने स्वदेशी अपनाने और अपने देश की पहचान को समझने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने संविधान में निहित ‘हम भारत के लोग’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि विविधताओं के बावजूद भारतीय समाज भावनात्मक रूप से एकजुट है। इस संबंध को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उनके अनुसार, देश की सांस्कृतिक चेतना और नागरिकों के बीच परस्पर जुड़ाव राष्ट्रीय जीवन को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    अपने संबोधन में उन्होंने संत रविदास की 650वीं जयंती, स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के 100 वर्ष और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के कार्यों का भी स्मरण किया। उन्होंने इन महापुरुषों के जीवन और योगदान से प्रेरणा लेने की बात कही। इसके साथ ही बंगाल के राज नारायण बसु के जन्म के 200वें वर्ष का उल्लेख करते हुए स्वदेशी मेलों के माध्यम से आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने के प्रयासों की चर्चा की।

    नेपाल में आई त्रासदी पर चिंता जताते हुए भागवत ने हिमालयी क्षेत्र में विकास के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए। उन्होंने भारत, तिब्बत, भूटान और चीन में हुए एकांगी विकास को क्षेत्रीय संकट के संदर्भ में रेखांकित किया। उनके अनुसार, हिमालयी क्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकास की समग्र और संतुलित दृष्टि अपनाने की जरूरत है।

    भारत की विविधता और सांस्कृतिक परंपरा पर बात करते हुए उन्होंने सनातन संस्कृति को राष्ट्रीय एकता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि यह दृष्टि विभिन्न पंथों, जातियों और समुदायों के प्रति सम्मान का भाव रखती है। सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए उन्होंने सामाजिक समरसता, परिवारों में संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, स्व-बोध और नागरिक अनुशासन को महत्वपूर्ण बताया।

    नई पीढ़ी पर डिजिटल माध्यमों के प्रभाव का उल्लेख करते हुए भागवत ने उचित और अनुचित के बीच अंतर समझने की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विशेष रूप से ओटीटी मंचों पर नियंत्रण और अनुशासन की जरूरत का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि परिवार, विद्यालय और सामाजिक वातावरण से मिलने वाले संस्कारों की भूमिका कम होने के कारण बच्चों और युवाओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। उन्होंने नशीली दवाओं की बढ़ती समस्या पर भी चिंता जताई और इसके समाधान के लिए शासन-प्रशासन तथा समाज को मिलकर देशव्यापी प्रयास करने की जरूरत बताई।

    भागवत ने हिंदू भाव को किसी एक पूजा पद्धति, भाषा, खानपान या रहन-सहन तक सीमित मानने से इनकार किया। उन्होंने इसे आध्यात्मिकता, मानवता और विश्वबंधुत्व से जुड़ी व्यापक दृष्टि के रूप में प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने भारत और हिंदू समाज को कमजोर करने की कोशिश करने वाली विभाजनकारी ताकतों के प्रति सतर्क रहने की बात कही। उनके भाषण में विदेशी शक्तियों और उनके कथित सहयोगियों द्वारा भारत में आंतरिक मतभेद बढ़ाने की आशंका भी शामिल रही।

    आंदोलनों के संबंध में भागवत ने कहा कि सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था में कमियों के कारण विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन आंदोलनों का उद्देश्य समाधान निकालना होना चाहिए। उन्होंने आंदोलनकारियों, शासन-प्रशासन और राजनीतिक नेताओं से संविधान, कानून और शालीन व्यवहार की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उनके अनुसार, राजनीतिक लाभ, वोट और लोकप्रियता की इच्छा सामाजिक सद्भाव को प्रभावित नहीं करनी चाहिए।

    अंत में उन्होंने नागरिकों से व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु और समृद्ध राष्ट्र बनाने का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक के प्रयास, जिम्मेदारी और कर्तव्यपालन से ही हासिल किया जा सकता है।

  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, वित्तीय स्थिरता बनाए रखने पर जोर

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, वित्तीय स्थिरता बनाए रखने पर जोर

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं और वित्तीय जोखिमों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने मंगलवार को कहा कि भारत का अनुभव बताता है कि मजबूत व्यापक आर्थिक आधार किसी देश को चुनौतीपूर्ण अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भी स्थिरता और निरंतर विकास बनाए रखने में मदद कर सकता है। उन्होंने यह बात भारतीय रिजर्व बैंक के अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘संवाद 2026’ के दूसरे दिन वित्तीय स्थिरता पर आयोजित विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कही।

    अनुराधा ठाकुर के अनुसार, भारत की राजकोषीय स्थिति विश्वसनीय रही है। इसके साथ ही, मुद्रास्फीति को निर्धारित लक्ष्य के भीतर रखने की लचीली व्यवस्था ने महंगाई को लेकर लोगों और बाजारों की अपेक्षाओं को स्थिर बनाए रखने में भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भारत मौजूदा चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात का सामना व्यापक आर्थिक स्थिरता की मजबूत स्थिति के साथ कर रहा है। उनके संबोधन में आर्थिक आधार को मजबूत बनाए रखने और बदलते वैश्विक वातावरण में स्थिरता कायम रखने के महत्व पर जोर दिया गया।

    संगोष्ठी में आयोजित पैनल चर्चा के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने वित्तीय स्थिरता को एक स्वतंत्र नीतिगत उद्देश्य के रूप में देखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी नीतियों का दायरा अब केवल अलग-अलग संस्थानों की स्थिति तक सीमित नहीं रह गया है। इसके बजाय पूरी वित्तीय प्रणाली की मजबूती पर ध्यान दिया जा रहा है। इस व्यापक दृष्टिकोण में बैंकों के साथ गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों की भूमिका और उनसे जुड़े जोखिमों को भी शामिल किया गया है।

    चर्चा में शामिल विशेषज्ञों ने आगाह किया कि वित्तीय संकट अब पहले की तुलना में अधिक तेजी से सामने आ सकते हैं और उनकी गंभीरता भी बढ़ सकती है। ऐसे में वित्तीय प्रणाली की निगरानी, जोखिमों की समय रहते पहचान और संस्थानों की संकट से निपटने की क्षमता को मजबूत करना जरूरी है। पैनल के सदस्यों ने यह भी कहा कि वित्तीय क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देते समय पिछली आर्थिक मंदियों और संकटों से मिली सीख को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। वित्तीय पुनर्गठन से पैदा होने वाले संभावित दुष्प्रभावों का आकलन भी नीतिगत फैसलों का हिस्सा होना चाहिए।

    वित्तीय स्थिरता से जुड़ी चुनौतियों में जलवायु परिवर्तन के जोखिम, गैर-बैंकिंग वित्तीय मध्यस्थों का बढ़ता प्रभाव, फिनटेक कंपनियों की भूमिका और मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन कारकों को वित्तीय नीतियों और जोखिम आकलन में उचित महत्व देना आवश्यक है। इसके अलावा, वित्तीय आंकड़ों को साझा करने में मौजूद कमियों को दूर करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित एजेंटों के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़ी चिंताओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

    पैनल ने वित्तीय सुरक्षा के दायरे को व्यापक बनाने पर जोर देते हुए कहा कि केवल बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत होना पर्याप्त नहीं है। कंपनियों और परिवारों की वित्तीय स्थिति भी ऐसी होनी चाहिए कि वे अचानक पैदा होने वाले आर्थिक झटकों का सामना कर सकें। इस दृष्टिकोण के तहत पूरी वित्तीय व्यवस्था की मजबूती और विभिन्न क्षेत्रों के बीच जोखिमों के प्रभाव को समझना महत्वपूर्ण माना गया।चर्चा में भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष अजय सेठ, भूटान की रॉयल मॉनेटरी अथॉरिटी की गवर्नर यांगचेन त्शोग्येल, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अथानासियोस वाम्वाकिडिस और इनवेस्को के पॉल जैक्सन भी शामिल हुए।

    दो दिवसीय ‘संवाद 2026’ का उद्घाटन सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने किया था। इस अवसर पर केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्य संबोधन दिया। आयोजन में विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों के गवर्नर, वरिष्ठ नीति निर्माता, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ वैश्विक वित्तीय प्रणाली के सामने मौजूद चुनौतियों तथा संभावित अवसरों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।

  • भोपाल पुलिस लाइन में मंत्री विश्वास सारंग ने किया शस्त्र पूजन, विजयादशमी पर दी शुभकामनाएं

    भोपाल पुलिस लाइन में मंत्री विश्वास सारंग ने किया शस्त्र पूजन, विजयादशमी पर दी शुभकामनाएं

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया। प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने नेहरू नगर स्थित पुलिस लाइन के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान के साथ शस्त्रों का पूजन किया और प्रदेशवासियों को दशहरे की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में विजयादशमी की परंपरा और शस्त्र पूजन के महत्व को रेखांकित किया गया।

    मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि विजयादशमी का पर्व पूरी दुनिया में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने इस अवसर पर सभी लोगों को दशहरे की बहुत-बहुत शुभकामनाएं दीं। उनके संदेश में पर्व की परंपरा, उसके सांस्कृतिक महत्व और शुभ अवसर पर लोगों को बधाई देने की भावना प्रमुख रही।

    विजयादशमी के अवसर पर मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में शस्त्र पूजन के आयोजन किए गए। इस परंपरा के तहत शस्त्रों की पूजा कर उनके महत्व को सम्मान दिया जाता है। भोपाल की पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम भी इसी परंपरा का हिस्सा रहा, जिसमें मंत्री सारंग ने स्वयं पूजन की विधि पूरी की।

    शस्त्र पूजन भारतीय परंपरा में शक्ति और सामर्थ्य के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। विजयादशमी के दिन इस अनुष्ठान के आयोजन का उद्देश्य परंपरागत मान्यताओं के प्रति सम्मान व्यक्त करना है। इस अवसर पर शस्त्रों की पूजा के माध्यम से शक्ति के महत्व को दर्शाया जाता है। मध्य प्रदेश में भी दशहरे के मौके पर इस परंपरा का पालन किया गया।

    मंत्री सारंग ने अपने संदेश में कहा कि शस्त्र शक्ति का प्रतीक हैं। उन्होंने देश और प्रदेश की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आगे बढ़ रहा है और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश भी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सनातन परंपराओं का पालन करते हुए आगे बढ़ने की बात कही।

    भोपाल के नेहरू नगर पुलिस लाइन स्थित मैदान में हुआ यह आयोजन विजयादशमी के अवसर पर आयोजित धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की कड़ी का हिस्सा रहा। शस्त्र पूजन के माध्यम से पर्व की परंपरा का निर्वहन किया गया। मंत्री सारंग ने पूजन के बाद अपने संदेश में विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए बुराई पर अच्छाई की जीत के महत्व को सामने रखा।

    विजयादशमी भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख पर्वों में शामिल है। इस दिन विभिन्न स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठान और परंपरागत कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मध्य प्रदेश में भी पर्व के अवसर पर शस्त्र पूजन की परंपरा निभाई गई। भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विश्वास सारंग की भागीदारी इसी आयोजन का प्रमुख हिस्सा रही।