सूर्य पर्वत पर ‘विजय’ की रेखा
मस्तिष्क रेखा पर त्रिकोण
हथेली में अर्धचंद्र का बनना
हृदय रेखा पर ‘त्रिशूल
शुक्र पर्वत का उभार

सूर्य पर्वत पर ‘विजय’ की रेखा
मस्तिष्क रेखा पर त्रिकोण
हथेली में अर्धचंद्र का बनना
हृदय रेखा पर ‘त्रिशूल
शुक्र पर्वत का उभार

क्यों आती हैं उंगलियों पर झुर्रियां
कब यह चिंता का विषय है
विटामिन B12 की कमी: शरीर में विटामिन B12 की कमी नसों के कामकाज को प्रभावित करती है। इसकी कमी से उंगलियों में बेवजह सिकुड़न हाथों-पैरों में झुनझुनी, थकान और एनीमिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। शाकाहारी लोग इसकी पूर्ति के लिए दूध दही और पनीर का सेवन बढ़ा सकते हैं। डिहाइड्रेशन और थायराइड शरीर में पानी की भारी कमी होने पर त्वचा अपनी लोच खो देती है, जिससे वह झुर्रीदार दिखने लगती है। वहीं थायराइड विकार भी त्वचा के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर उसे ड्राई और सिकुड़ा हुआ बना सकते हैं।
सावधानी कब बरतें

पपीता और हरी सब्जियां: भीतर से आएगा निखार
खूबसूरत त्वचा के लिए केवल बाहरी लेप ही नहीं, बल्कि खान-पान भी जरूरी है. पपीता और हरी पत्तेदार सब्जियां विटामिन का खजाना होती हैं. ये शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति करती हैं और औषधि की तरह काम करती हैं. इनके सेवन से खून साफ होता है और त्वचा में अंदरूनी निखार आता है, जिससे चेहरा आकर्षक दिखने लगता है.
एक्सपर्ट की राय: केमिकल फ्री और नो साइड इफेक्ट
आयुर्वेद के वरिष्ठ डॉक्टर मनोज तिवारी ने लोकल 18 को बताया कि इन घरेलू औषधियों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता. चूंकि ये नुस्खे आप खुद घर पर तैयार करते हैं, इसलिए इनमें किसी भी तरह के हानिकारक केमिकल या मिलावट की गुंजाइश नहीं रहती. उन्होंने कहा कि आप अपनी जरूरत के अनुसार इन्हें तैयार कर सकते हैं और बिना किसी डर के दाग-धब्बों से छुटकारा पा सकते हैं.

महाभारत की संरचना में 18 का वर्चस्व
महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित इस अद्भुत ग्रंथ की हर परत में 18 का अंक समाहित है जो इसे अन्य महाकाव्यों से अलग और अधिक वैज्ञानिक बनाता है 18 पर्वों का संकलन: महाभारत की पूरी कथा को 18 मुख्य पर्वों अध्यायों के समूह में विभाजित किया गया है। आदि पर्व से शुरू होकर यह स्वर्गारोहण पर्व पर समाप्त होती है, जो जीवन की यात्रा के विभिन्न चरणों को दर्शाती है।
18 दिनों का महासंग्राम: इतिहास का सबसे विनाशकारी युद्ध, कुरुक्षेत्र का संग्राम ठीक 18 दिनों तक चला था। माना जाता है कि इन 18 दिनों में ही संसार की पुरानी व्यवस्था ध्वस्त हुई और धर्म के नए युग का सूत्रपात हुआ।गीता के 18 अध्याय: कुरुक्षेत्र की रणभेरी बजने से ठीक पहले, अर्जुन के विषाद को दूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने जो ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ सुनाई, उसमें भी ठीक 18 अध्याय हैं। यह मनुष्य के 18 तरह के मानसिक द्वंद्वों और उनके समाधान का प्रतीक है।
18 अक्षौहिणी सेना: युद्ध के मैदान में कुल 18 अक्षौहिणी सेनाएं उतरी थीं। इनमें से 11 कौरवों के पक्ष में थीं और 7 पांडवों की ओर से लड़ीं। आश्चर्यजनक रूप से इनका योग भी 18 ही है। 18 जीवित योद्धा: भीषण नरसंहार के बाद जब युद्ध समाप्त हुआ, तो पांडवों के पांचों भाई, श्रीकृष्ण और सात्यकि सहित कुल 18 प्रमुख योद्धा ही जीवित बचे थे।
क्या है इसका आध्यात्मिक और गणितीय आधार
अंक ज्योतिष और सनातन परंपरा की दृष्टि से देखें तो ’18’ का योग 9 -1+8=9 होता है। अंक 9 को भारतीय संस्कृति में पूर्णता और ‘सनातन’ का प्रतीक माना गया है क्योंकि 9 का पहाड़ा कभी अपनी मूल प्रकृति नहीं बदलता। यह इस बात का संकेत है कि महाभारत का युद्ध केवल जमीन के एक टुकड़े के लिए नहीं, बल्कि मानव चेतना की पूर्णता और धर्म की स्थापना के महा-उद्देश्य के लिए लड़ा गया था। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार 18 पुराण भी हैं जो बताते हैं कि व्यास जी ने ज्ञान के हर क्षेत्र को इसी संख्या में बांधने का प्रयास किया। महाभारत का यह महासूत्र हमें सिखाता है कि जीवन के हर संघर्ष और हर ज्ञान की एक निश्चित सीमा और पूर्णता होती है।

युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव मोहित सक्सेना और अंकित दुबे के नेतृत्व में यह प्रदर्शन किया गया। इसमें युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता गौरव अवस्थी, पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष निकी चौबे, NSUI जिला उपाध्यक्ष हर्षु सहित कई कार्यकर्ता शामिल रहे।
इधर, नगर निगम में विपक्षी पार्षदों ने भी महापौर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के पार्षद नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी के नेतृत्व में पार्षदों ने महापौर मालती राय को बर्खास्त करने की मांग की और कहा कि गोमांस मामले में जिम्मेदारी तय की जाए। पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग मामले में जिम्मेदार हैं, उन्हें बचाया जा रहा है और कम वेतन वाले विनियमित कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
पार्षदों का कहना है कि यह पूरा मामला मेयर-इन-काउंसिल (MIC) के सदस्यों की जानकारी और सहमति से हुआ, लेकिन जांच में उनकी भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है।
वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए अब उच्च स्तरीय जांच के लिए कमेटी बनाए जाने की तैयारी है। निगम के अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी के आदेश पर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के आयुक्त को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय कमेटी बनाने का अनुरोध किया है, ताकि निगम के जिम्मेदारों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो सके।
अब यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के बीच उच्च स्तरीय जांच की ओर बढ़ रहा है, जिससे जल्द ही असली जिम्मेदारों का खुलासा हो सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स यानी एफसीए इस वृद्धि में प्रमुख कारण रहा। 16 जनवरी को समाप्त सप्ताह में एफसीए में 9.652 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ, जिससे इसकी कुल वैल्यू बढ़कर 560.518 बिलियन डॉलर हो गई। एफसीए में अमेरिकी डॉलर के साथ-साथ यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं शामिल होती हैं, जिनका मूल्यांकन डॉलर के संदर्भ में किया जाता है।सोने के भंडार में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 4.623 बिलियन डॉलर बढ़कर 117.454 बिलियन डॉलर हो गई। वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है और इसमें बढ़ोतरी भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति को मजबूत बनाती है।
हालांकि, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स यानी एसडीआर और आईएमएफ में भारत की रिजर्व पोजिशन में हल्की गिरावट दर्ज की गई। एसडीआर की वैल्यू 35 मिलियन डॉलर घटकर 18.704 बिलियन डॉलर रह गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में रिजर्व पोजिशन 73 मिलियन डॉलर घटकर 4.684 बिलियन डॉलर पर आ गई।आंकड़ों पर नजर डालें तो इससे पहले 17 अक्टूबर 2025 को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 702.25 बिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंचा था। वहीं, देश का अब तक का ऑल-टाइम हाई विदेशी मुद्रा भंडार 704.89 बिलियन डॉलर रहा है, जो सितंबर 2024 में दर्ज किया गया था। मौजूदा आंकड़े उस रिकॉर्ड स्तर के बेहद करीब हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी देश के लिए मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार उसकी आर्थिक सेहत का अहम संकेतक होता है। यह न केवल आयात भुगतान और बाहरी झटकों से निपटने में मदद करता है, बल्कि मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। जब डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बढ़ता है, तब केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर रुपये को सहारा देता है।
बढ़ता हुआ विदेशी मुद्रा भंडार इस बात का संकेत भी है कि देश में विदेशी निवेश और डॉलर की आवक मजबूत बनी हुई है। इससे भारत की वैश्विक व्यापार क्षमता बढ़ती है और अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलती है। कुल मिलाकर, विदेशी मुद्रा भंडार में यह उछाल भारत की आर्थिक स्थिति के लिए बेहद सकारात्मक और भरोसेमंद संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

खाली बाल्टी क्यों है खतरनाक
वास्तु विज्ञान में पानी को संपन्नता और प्रवाह का प्रतीक माना गया है। जिस प्रकार बहता हुआ स्वच्छ जल सकारात्मकता लाता है उसी प्रकार बाथरूम में रखी खाली बाल्टी जीवन में अभाव और खालीपन को दर्शाती है। आर्थिक तंगी विशेषज्ञों का मानना है कि खाली बाल्टी घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को रोकती है। यह धन के आगमन में बाधा उत्पन्न करती है और अनावश्यक खर्चों को बढ़ाती है। मानसिक अशांति और चंद्रमा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जल का सीधा संबंध चंद्रमा से है जो हमारे मन का कारक है। जब हम रात के समय बाथरूम में खाली बर्तन या बाल्टी छोड़ते हैं तो यह मानसिक दोष उत्पन्न करता है जिससे परिवार के सदस्यों में तनाव चिड़चिड़ापन और नींद की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
हमेशा भरकर रखें पानी वास्तु के अनुसार, बाथरूम में बाल्टी को हमेशा साफ पानी से भरकर रखना चाहिए। यदि आप पूरी बाल्टी नहीं भर सकते तो कम से कम आधा जरूर भरें। यह घर में खुशहाली और लक्ष्मी के आगमन का मार्ग प्रशस्त करता है। नीले रंग का महत्व वास्तु में नीले रंग की बाल्टी को सबसे शुभ माना गया है। नीला रंग जल का प्रतीक है और यह घर के वास्तु दोषों को कम करने में मदद करता है।साफ-सफाई है जरूरी बाल्टी केवल भरी हुई ही नहीं बल्कि साफ भी होनी चाहिए। टूटी हुई या गंदी बाल्टी दरिद्रता को न्यौता देती है।
दरवाजा रखें बंद उपयोग के बाद बाथरूम का दरवाजा हमेशा बंद रखना चाहिए ताकि वहां की नकारात्मक ऊर्जा घर के बाकी हिस्सों में न फैले। विशेष टिप यदि आप रात को बाल्टी भरकर रखते हैं, तो ध्यान रखें कि वह पानी सुबह के समय इस्तेमाल कर लिया जाए या बदल दिया जाए। बासी और गंदा पानी भी वास्तु दोष का कारण बनता है।

इस बार हिस्सा ले रही हैं 16 टीमें 12 टीमें अगले राउंड में जाएंगी
आईसीसी ने अंडर 19 विश्व कप के लिए सभी टीमों को चार ग्रुप में बांटा है। इस बार इस टूर्नामेंट में कुल 16 टीमें हिस्सा ले रही हैं। यानी हर ग्रुप में चार टीमें हैं। इसमें जो टॉप की 3 टीमें होंगी वो अगले राउंड यानी सुपर 6 में जाएंगी। जो तय हो चुकी हैं। ग्रुप बी और सी को मिलाकर एक ग्रुप बनाया जाएगा और ग्रुप ए और डी को मिलाकर एक ग्रुप बनाया जाएगा। भारतीय टीम को जहां एक ओर ग्रुप बी में है वहीं पाकिस्तानी टीम ग्रुप सी में है। यानी दोनों टीमें एक ही सुपर 6 ग्रुप में आए जाएंगी। लेकिन केवल इतने भर से भारत बनाम पाकिस्तान मैच नहीं हो जाएगा। इसके लिए एक और कंडीशन लगाई गई है।
इस समीकरण को समझ लीजिए
सुपर 6 में टीमें एक दूसरे से खेलेंगी लेकिन दूसरे ग्रुप की समान नंबर पर आई टीम से उनका मैच नहीं होगा। इसे आप उदाहरण से समझिए। पाकिस्तानी टीम ग्रुप सी में है। पाकिस्तानी टीम अपने सारे लीग मैच खेल चुकी है और टीम इस वक्त दूसरे नंबर पर है। अब पाकिस्तानी टीम ग्रुप बी की टीम से नहीं भिड़ेगी। यानी भारतीय टीम अगर दूसरे नंबर पर रहती है तो उसका पाकिस्तान से मैच नहीं होगा लेकिन पहले और तीसरे पर रहने से मैच हो जाएगा।
भारत बनाम न्यूजीलैंड मैच के बाद तय होगी महामुकाबले की तारीख
भारतीय टीम चार अंक लेकर अपने ग्रुप में नंबर एक पर है वहीं न्यूजीलैंड की टीम दो अंक लेकर दूसरे स्थान पर है। शनिवार को जब भारत और न्यूजीलैंड के बीच मैच होगा तो अगर टीम इंडिया जीती तो वो पहले ही नंबर पर रहेगी। यानी भारत और पाकिस्तान के बीच मैच हो जाएगा। लेकिन अगर टीम इंडिया हारी और ज्यादा अंतर से हारी तो वो दूसरे नंबर पर पहुंच जाएगी यानी फिर मैच नहीं होगा। न्यूजीलैंड की जीत से उसके चार अंक तो हो जाएंगे जो कि भारत के बराबर होंगे। लेकिन भारत का नेट रन रेट काफी अच्छा है। ऐसे में भारतीय टीम को अगर बड़ी हार मिलती है तभी वो दूसरे नंबर पर आएगी। यानी सब कुछ भारत बनाम न्यूजीलैंड दूसरे मैच पर निर्भर करेगा कि क्या होगा। जो भी अपडेट होगा उसके बारे में हम आपको जानकारी देते रहेंगे।

इस विशेष अवसर के लिए ‘तिरंगा थीम’ अपनाते समय सबसे महत्वपूर्ण है रंगों का सही संतुलन। फैशन विशेषज्ञों का मानना है कि केसरिया सफेद और हरे रंग का उपयोग इस तरह होना चाहिए कि वह भड़काऊ न लगे। उदाहरण के तौर पर यदि आप शांति और शुद्धता के प्रतीक सफेद रंग का कुर्ता या अनारकली सूट पहन रही हैं तो उसके साथ लहरिया स्टाइल का तिरंगा दुपट्टा कैरी करें। आप चाहें तो केसरिया रंग का कुर्ता और सफेद बॉटम के साथ हरा स्टोल भी ले सकती हैं। चूंकि जनवरी में ठंड का असर रहता है, इसलिए अपने आउटफिट के साथ एक स्टाइलिश नेहरू जैकेट या कंट्रास्ट रंग की ऊनी शॉल को शामिल करना एक स्मार्ट और गरिमामय विकल्प होगा।
स्टाइलिंग की बात हो तो मेकअप और हेयरस्टाइल पर ध्यान देना अनिवार्य है। इस दिन के लिए लेस इज मोर कम ही ज्यादा है का मंत्र सबसे सटीक बैठता है। भारी-भरकम मेकअप के बजाय एक लाइट बेस या बीबी क्रीम का उपयोग करें। अपनी आंखों को थोड़ा पॉप-अप लुक देने के लिए आप तिरंगे के रंगों वाला आईलाइनर लगा सकती हैं या नाखूनों पर सूक्ष्म ‘ट्राई-कलर नेल आर्ट’ करवाकर अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित कर सकती हैं। बालों को बहुत ज्यादा उलझाने के बजाय एक साफ-सुथरी नीट पोनीटेल, सलीके से बना लो-बन या पारंपरिक चोटी आपके व्यक्तित्व को एक परिपक्व और गंभीर लुक देगी।
गणतंत्र दिवस पर आपका पहनावा न केवल आपकी स्टाइल को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्र के प्रति आपके सम्मान को भी प्रकट करता है। याद रखें, सादगी और शालीनता ही वह कुंजी है जो आपको भीड़ में सबसे अलग और आकर्षक बनाएगी। तो इस 26 जनवरी, आत्मविश्वास के साथ तिरंगे के रंगों को ओढ़ें और गणतंत्र का उत्सव मनाएं।