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  • Super Sunday: आज दो बड़े मैच खेलेगी टीम इंडिया.. बांग्लादेश को लड़कियां और SA को लड़के सिखाएंगे सबक

    Super Sunday: आज दो बड़े मैच खेलेगी टीम इंडिया.. बांग्लादेश को लड़कियां और SA को लड़के सिखाएंगे सबक


    नई दिल्ली।
    क्रिकेट फैन्स (Cricket fans) के लिए संडे सच में सुपर होने वाला है. एक ही दिन में टीम इंडिया (Team India) दो बड़े मुकाबलों में मैदान पर उतर रही है. पहले एशिया कप राइजिंग स्टार्स टूर्नामेंट (Asia Cup Rising Stars Tournament) के फाइनल में भारतीय महिला टीम (Indian Women’s Team) बांग्लादेश से भिड़ेगी, और उसके बाद टी20 विश्व कप 2026 (T20 World Cup 2026) में भारतीय पुरुष टीम का सामना दक्षिण अफ्रीका से होगा। यानी दिन की शुरुआत महिला टीम के खिताबी मुकाबले से होगी और शाम को नजरें टी20 विश्व कप के सुपर-8 मुकाबले पर टिकी रहेंगी।


    पहले बांग्लादेश से खिताबी जंग

    एशिया कप राइजिंग स्टार्स के फाइनल में भारत और बांग्लादेश की महिला टीमें आमने-सामने होंगी. पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने संतुलित प्रदर्शन किया है. बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में टीम ने मजबूती दिखाई है, जिसके दम पर वह फाइनल तक पहुंची है. बांग्लादेश की टीम भी कम नहीं आंकी जा सकती. उपमहाद्वीप की परिस्थितियों में वह हमेशा चुनौती पेश करती है. ऐसे में फाइनल मुकाबला रोमांचक होने की पूरी उम्मीद है. भारतीय महिला टीम की कोशिश होगी कि वह दबाव के इस मुकाबले में संयम बनाए रखे और ट्रॉफी अपने नाम करे. दोनों टीमों के इस टूर्नामेंट के सफर पर अगर नजर डालें तो बांग्लादेश ने अपने 3 में से 3 मैच जीतकर फाइनल में जगह बनाई है. वहीं, भारत ने 3 में से 2 मैच जीते हैं और फाइनल में उसे जगह मिली है। भारत और बांग्लादेश के बीच ये फाइनल मैच बैंकॉक में दोपहर 2 बजे से खेला जाएगा।


    शाम को साउथ अफ्रीका से सुपर-8 की टक्कर

    महिला टीम के बाद बारी होगी पुरुष टीम की. टी20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 चरण में भारत का मुकाबला दक्षिण अफ्रीका से होगा. कप्तान सूर्यकुमार यादव की अगुवाई में भारतीय टीम अब तक टूर्नामेंट में शानदार लय में दिखी है. ग्रुप स्टेज में टीम ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए सुपर-8 में जगह बनाई. दक्षिण अफ्रीका की टीम भी संतुलित है और बड़े मैचों में कड़ी टक्कर देने के लिए जानी जाती है. ऐसे में यह मुकाबला सेमीफाइनल की राह तय करने में अहम साबित हो सकता है। भारतीय बल्लेबाजी क्रम से तेज शुरुआत की उम्मीद होगी, जबकि गेंदबाजों को मध्य ओवरों में नियंत्रण बनाकर रखना होगा. टीम मैनेजमेंट संतुलित संयोजन के साथ मैदान पर उतरने की तैयारी में है. मुकाबला अहमदाबाद में शाम 7 बजे से शुरू होगा।


    डबल जीत की उम्मीद

    एक ही दिन में दो बड़े मुकाबले होने से क्रिकेट प्रेमियों का उत्साह चरम पर है. अगर भारतीय महिला टीम बांग्लादेश को हराकर खिताब जीतती है और पुरुष टीम दक्षिण अफ्रीका को सुपर-8 में मात देती है, तो यह “सुपर संडे” यादगार बन सकता है. फैन्स की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या टीम इंडिया दोनों मोर्चों पर जीत दर्ज कर डबल डोज दे पाएगी।

  • बंगाल में CAA लागू करने के लिए मोदी सरकार ने बनाई विशेष समिति, विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा कदम

    बंगाल में CAA लागू करने के लिए मोदी सरकार ने बनाई विशेष समिति, विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा कदम



    कोलकाता। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। यह कदम 2024 में अधिसूचित CAA नियमों के तहत बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    समिति का काम अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के नागरिकता आवेदन की जांच और मंजूरी देना है। यह सुनिश्चित करेगी कि सभी आवेदन पूरी तरह से सही हों और आवेदक नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6B के अनुसार पात्र हों।

    समिति में शामिल अधिकारी
    केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार समिति का गठन इस प्रकार हुआ है:
    अध्यक्ष: डिप्टी रजिस्ट्रार जनरल, जनगणना कार्य निदेशालय, पश्चिम बंगाल

    प्रमुख सदस्य:
    सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) का उप सचिव स्तर का अधिकारी
    क्षेत्रीय विदेशी पंजीकरण अधिकारी (FRRO) द्वारा नामित अवर सचिव स्तर का अधिकारी
    राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), पश्चिम बंगाल का अवर सचिव स्तर का अधिकारी
    पश्चिम बंगाल के पोस्ट मास्टर जनरल या उनके द्वारा नामित डाक अधिकारी

    विशेष आमंत्रित सदस्य:
    पश्चिम बंगाल सरकार का प्रमुख सचिव (गृह) या अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) कार्यालय का प्रतिनिधि
    रेलवे के क्षेत्रीय मंडल रेल प्रबंधक (DRM) का प्रतिनिधि

    नागरिकता पात्रता और आवेदन प्रक्रिया
    नियम 11A के तहत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय के लोग जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए थे, नागरिकता के लिए पात्र हैं। इन आवेदकों को अपना आवेदन इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा करना होगा।

    राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और मतुआ समुदाय
    यह कदम पश्चिम बंगाल की राजनीति में संवेदनशील है।

    मतुआ समुदाय: बांग्लादेश से आए लाखों मतुआ और बंगाली हिंदू लंबे समय से भारतीय नागरिकता की प्रतीक्षा कर रहे हैं और यह उनका बड़ा वोट बैंक है।

    टीएमसी का रुख: सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कहना है कि CAA लागू होने से मतुआ समुदाय के वोटिंग अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने समुदाय से CAA शिविरों से दूर रहने की अपील की है, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि वह बंगाल में CAA लागू नहीं होने देंगी।

    गृह मंत्रालय का उद्देश्य इस सशक्त समिति के माध्यम से पश्चिम बंगाल में CAA से जुड़ी भ्रम और लंबित आवेदनों के गतिरोध को दूर करना है।

  • तारिक रहमान का शपथग्रहण कल…. ओम बिरला होंगे शामिल, PM मोदी नहीं जाएंगे बांगलादेश

    तारिक रहमान का शपथग्रहण कल…. ओम बिरला होंगे शामिल, PM मोदी नहीं जाएंगे बांगलादेश

    ढाका। बांग्लादेश (Bangladesh.) के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Tariq Rahman.) के शपथग्रहण समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi.) नहीं जाएंगे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) को भारत बांग्लादेश भेज रहा है। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी होंगे। यह समारोह 17 फरवरी को ढाका के राष्ट्रीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में आयोजित होगा।

    एक खबर में सूत्रों के हवाले से बताया कि यह प्रतिनिधिमंडल भारत-बांग्लादेश के गहरे और स्थायी दोस्ती को रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रण मिला था, लेकिन वे मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से द्विपक्षीय वार्ता और दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट की तैयारी के कारण नहीं जा पा रहे।

    हाल ही में बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारी जीत दर्ज की। तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर 2025 में लंदन से वापस लौटे थे, अब प्रधानमंत्री पद संभालने जा रहे हैं। उनके पिता जिया उर रहमान बीएनपी के संस्थापक थे और मां खालिदा जिया पूर्व प्रधानमंत्री रही हैं। 2008 में भ्रष्टाचार के आरोपों में देश छोड़ने वाले रहमान ने चुनाव में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया। यह चुनाव 2024 के छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद पहला था। रहमान ने जीत के बाद राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया और कहा कि वे लोकतंत्र, कानून व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता को मजबूत करेंगे।


    भारत के साथ कैसे होंगे रिश्ते

    प्रधानमंत्री मोदी ने 13 फरवरी को तारिक रहमान को फोन पर बधाई दी और उन्हें लोकतंत्र की रक्षा करने वाले सभी बलिदानों को याद किया। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने 13 देशों के नेताओं को आमंत्रित किया, जिसमें चीन, पाकिस्तान, सऊदी अरब और मलेशिया जैसे देश शामिल हैं। भारत की ओर से उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला दोनों देशों के बीच नई शुरुआत का प्रतीक है। बीएनपी ने हमेशा भारत के साथ संतुलित संबंधों पर जोर दिया है और रहमान ने कहा है कि वे किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता नहीं रखेंगे, बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बनाएंगे।

    यह शपथ ग्रहण समारोह बांग्लादेश में लोकतंत्र की वापसी का प्रतीक माना जा रहा है। तारिक रहमान ने युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने, भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती और रोजगार सृजन का वादा किया है। भारत के लिए बांग्लादेश एक अहम पड़ोसी है और दोनों देश साझा इतिहास, संस्कृति व सीमा से जुड़े हैं। ओम बिरला और विक्रम मिस्री की उपस्थिति से व्यापार, सुरक्षा, जल संसाधन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई गति मिलने की उम्मीद है। दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि के लिए काम करेंगे, जो दक्षिण एशिया के भविष्य के लिए अहम है।

  • बांग्लादेश में BNP की ऐतिहासिक विजय…. जमात-ए-इस्लामी की जीत से बढ़ी भारत की चिंता, सीमावर्ती राज्यों में अलर्ट

    बांग्लादेश में BNP की ऐतिहासिक विजय…. जमात-ए-इस्लामी की जीत से बढ़ी भारत की चिंता, सीमावर्ती राज्यों में अलर्ट


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में पिछले दो दशकों के राजनीतिक गतिरोध (Political Deadlock) को तोड़ते हुए, तारिक रहमान (Tariq Rahman.) के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) (Bangladesh Nationalist Party – BNP) ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर आम चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। 297 घोषित सीटों में से 212 पर कब्जा कर BNP ने दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है। इस जीत के साथ ही 20 साल बाद देश में BNP की वापसी हुई है। हालांकि, इस चुनावी परिणाम ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों और सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। इसका मुख्य कारण जमात-ए-इस्लामी और उसके 11 सहयोगियों द्वारा 77 सीटों पर दर्ज की गई शानदार जीत है।

    भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि जमात-ए-इस्लामी ने जिन सीटों पर जीत हासिल की है, उनमें से एक बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल और असम की सीमा से लगे बांग्लादेशी जिलों में स्थित है। सेंटर फॉर स्टडीज इन सोशल साइंसेज के प्रोफेसर मैदुल इस्लाम ने इस स्थिति का विश्लेषण करते हुए बताया कि शेख हसीना की अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के बाद मुकाबला मूल रूप से जमात और BNP के बीच था।

    प्रोफेसर इस्लाम ने कहा, “BNP की जीत यह संकेत देती है कि बांग्लादेश में स्वतंत्र पहचान और राष्ट्रवाद का मुद्दा अभी भी जनता के लिए महत्वपूर्ण है। जमात ने 1971 के मुक्ति संग्राम के इतिहास को चुनौती देने की कोशिश की, जो व्यर्थ साबित हुई। हालांकि, जनमत संग्रह यह भी संकेत देता है कि अब 1972 के संविधान में संशोधन के प्रयास किए जाएंगे।”


    भारत के सीमावर्ती राज्य हाई अलर्ट पर

    जमात की चुनावी ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने पश्चिम बंगाल के छह जिलों जलपाईगुड़ी, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना से लगी सीमा के साथ-साथ असम के सिलचर से लगे क्षेत्रों में अपना प्रभुत्व फिर से स्थापित कर लिया है। सुरक्षा जानकारों का मानना है कि यह स्थिति भारत के सीमा सुरक्षा बल (BSF) और खुफिया एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकती है। सीमा के वे हिस्से जहां कंटीली तारें नहीं लगी हैं, वे लंबे समय से मानव तस्करी और तस्करी के लिए उपयोग किए जाते रहे हैं। इस फैसले के बाद भारत को हाई अलर्ट पर रखा गया है।


    अल्पसंख्यकों की चिंता

    राजनीतिक विज्ञान की प्रोफेसर पांचाली सेन ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी ने भारत के प्रति अपनी सार्वजनिक मुद्रा को नरम किया है और पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों के लिए खुलापन दिखाया है, लेकिन भारत के लिए सुरक्षा और आतंकवाद एक प्रमुख चिंता बनी रहनी चाहिए। प्रोफेसर सेन ने जोर देकर कहा, “बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा, जिन पर पहले ही हमले हो चुके हैं, भारतीय सरकार की प्राथमिकता सूची में होनी चाहिए। चूंकि भारत ने इस फैसले का स्वागत किया है, दिल्ली ढाका के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखने और क्षेत्र में शक्ति संतुलन सुनिश्चित करने के लिए एक सतर्क नीति अपना सकती है।”


    आतंकवाद का खतरा

    खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) जैसे आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों पर अभी कोई भी भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी। JMB ने भारत में भी अपना नेटवर्क स्थापित किया है। अधिकारी ने कहा, “भारत में आतंकवादी समूहों के रूप में सूचीबद्ध छह बांग्लादेशी संगठनों में से JMB ने हाल के वर्षों में सबसे अधिक वृद्धि दिखाई है। 2020 और 2025 के बीच पश्चिम बंगाल और कोलकाता में एक दर्जन से अधिक JMB ऑपरेटरों को गिरफ्तार किया गया है। ये तत्व उन संगठनों की ओर देखते हैं जो जमात का समर्थन करते हैं।”

    दिसंबर 2025 में पश्चिम बंगाल और असम के विभिन्न हिस्सों से 2016 में गिरफ्तार किए गए JMB के पांच सदस्यों को कोलकाता की एक अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेज (IED) के घटक जब्त किए गए थे।

  • Bangladesh में हिंदुओं की आबादी 8% … मगर चुनाव में 300 सीटों में से मात्र 3 हिंदू चुने गए सांसद

    Bangladesh में हिंदुओं की आबादी 8% … मगर चुनाव में 300 सीटों में से मात्र 3 हिंदू चुने गए सांसद


    ढाका।
    बांग्लादेश चुनाव (Bangladesh Election) पूरा हो गया है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (Bangladesh Nationalist Party) को 209 सीटों पर जीत हासिल हुई है. तारिक रहमान (Tariq Rahman) पीएम बन सकते हैं. जमात-ए-इस्लामी (Jamaat-e-Islami) को 68 और छात्रों वाली पार्टी NCP को सिर्फ 6 सीटों पर वोट मिला. चुनाव के बाद अब जो आंकड़े आए हैं, वह हैरान करने वाले हैं. खासकर हिंदुओं की जीत को लेकर. दरअसल बांग्लादेश की कुल आबादी करीब 16.5 करोड़ है. 2022 की जनगणना के मुताबिक इनमें 1 करोड़ 31 लाख से ज्यादा हिंदू हैं. यानी देश की करीब 8 प्रतिशत आबादी हिंदू समुदाय से आती है. यह कोई छोटी संख्या नहीं है. लेकिन 2026 के ताजा संसदीय चुनाव में हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व बेहद कम रह गया है. 300 सीटों वाली संसद में इस बार सिर्फ 3 हिंदू सांसद चुने गए हैं. यह आंकड़ा तब आया है जब हाल के दिनों में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा देखी गई है।


    बांग्लादेश चुनाव में कितने हिंदू जीते?

    पहले हिंदुओं की बड़ी संख्या अवामी लीग (AL) से होती थी. AL क्योंकि बैन है, इसलिए तीनों हिंदू उम्मीदवार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) से जीते हैं.
    गायेश्वर चंद्र रॉय- ढाका-3 सीट से
    निताई रॉय चौधरी – मगरी-2 सीट से
    एडवोकेट दिपेन देवान – रंगामाटी सीट से
    इसके अलावा साचिंग प्रू नाम के एक और अल्पसंख्यक उम्मीदवार ने बंदरबन से जीत दर्ज की, लेकिन कुल संख्या फिर भी बहुत कम है.


    जमात का हिंदू कैंडिडेट हारा

    ध्यान देने वाली बात यह है कि जमात-ए-इस्लामी ने इस बार एक हिंदू उम्मीदवार कृष्णा नंदी को खुलना-1 सीट से मैदान में उतारा था. लेकिन वे चुनाव हार गए. इसका मतलब यह हुआ कि जमात के टिकट पर कोई भी अल्पसंख्यक उम्मीदवार जीत नहीं पाया.


    पहले क्या स्थिति थी?

    रिपोर्ट्स के मुताबिक शेख हसीना के लंबे कार्यकाल के दौरान संसद में हिंदू सांसदों की संख्या इससे कहीं ज्यादा रही थी.
    2009-2014 की संसद में 16 हिंदू सांसद थे
    2014-2019 में यह संख्या बढ़कर 17 (और आरक्षित सीटों के साथ 20 तक) पहुंची
    2019-2024 में करीब 14 अल्पसंख्यक सांसद थे
    यानी पहले जहां 14 से 20 के बीच हिंदू सांसद होते थे, अब संख्या घटकर सिर्फ 3 रह गई है. 2006-09 तक बांग्लादेश में केयरटेकर सरकार रही. ऐसे में हम कह सकते हैं कि यह 20 साल में सबसे कम संख्या है. यह गिरावट काफी बड़ी मानी जा रही है।


    कितने हिंदू उम्मीदवार मैदान में थे?

    इस चुनाव में कुल 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में थे. इनमें 10 महिलाएं भी शामिल थीं. 60 में से 22 राजनीतिक दलों ने अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे थे. BNP ने 6 अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे, जिनमें से 4 जीत पाए. लेकिन कुल संख्या फिर भी बहुत कम रही.


    सवाल क्यों उठ रहे हैं?

    देश की लगभग 8 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद संसद में 1 प्रतिशत से भी कम प्रतिनिधित्व होना चिंता का विषय माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अल्पसंख्यक समुदाय कई इलाकों में निर्णायक भूमिका निभाता है, लेकिन टिकट वितरण और चुनावी गणित में उनकी हिस्सेदारी सीमित रह जाती है. इसके अलावा चुनाव के दौरान सांप्रदायिक तनाव और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा भी चर्चा में रहा।

    बांग्लादेश चुनाव में कितनी महिलाएं जीतीं?
    इस बार चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या भी बहुत कम रही. हालांकि 7 महिलाओं ने जीत दर्ज की, जिनमें ज्यादातर बीएनपी से थीं. जमात-ए-इस्लामी के कुछ बयानों ने महिलाओं की भागीदारी पर भी विवाद खड़ा किया था।

  • यूनुस की भविष्यवाणी पड़ी उलटी, कहा था भारतीय कंपनियां बांग्लादेश आएंगी, अब खुद की मिलों पर गहराया संकट

    यूनुस की भविष्यवाणी पड़ी उलटी, कहा था भारतीय कंपनियां बांग्लादेश आएंगी, अब खुद की मिलों पर गहराया संकट


    नई दिल्ली। भारत को लेकर बांग्लादेश में हालिया घटनाक्रम लगातार सुर्खियों में है। इसी बीच अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस की एक पुरानी टिप्पणी फिर चर्चा में आ गई है। वर्ष 2025 में यूनुस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ को लेकर उत्साहित नजर आए थे। तब उन्होंने दावा किया था कि ऊंचे टैरिफ और ज्यादा लागत के चलते भारतीय उद्योग, खासकर टेक्सटाइल सेक्टर, भारत छोड़कर बांग्लादेश में निवेश करेंगे।

    अमेरिकी पत्रकार मेहदी हसन को दिए एक इंटरव्यू में यूनुस ने कहा था कि अमेरिका के भारी टैरिफ के कारण भारतीय कंपनियां भारत में उत्पादन करना छोड़ेंगी और बांग्लादेश में फैक्ट्रियां लगाएंगी, क्योंकि वहां लागत कम है और टैरिफ भी अपेक्षाकृत कम हैं। हालांकि मौजूदा हालात उनकी इस भविष्यवाणी से बिल्कुल उलट दिखाई दे रहे हैं।

    खुद का टेक्सटाइल सेक्टर संकट में

    जनवरी 2026 के अंत तक बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग गंभीर संकट में फंस गया है। जहां एक ओर भारत पर अमेरिकी टैरिफ को लेकर बयानबाजी की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर देश की घरेलू टेक्सटाइल मिलें बंद होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन BTMA ने ऐलान किया है कि 1 फरवरी 2026 से देशभर की टेक्सटाइल मिलें अनिश्चितकाल के लिए बंद की जाएंगी।

    BTMA अध्यक्ष शौकत अजीज रसेल के अनुसार मिल मालिक बैंक कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं हैं। उद्योग की पूंजी 50 प्रतिशत से अधिक घट चुकी है और कई यूनिट पहले ही ताले लगा चुकी हैं। उद्योग का आरोप है कि भारत से आयातित सस्ते सूत ने स्थानीय बाजार को नुकसान पहुंचाया है। करीब 12 हजार करोड़ टका का तैयार माल गोदामों में बिना बिके पड़ा है। वहीं गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के चलते उत्पादन क्षमता भी 50 प्रतिशत तक गिर गई है। संगठन ने सरकार से 10 से 30 काउंट के सूत पर ड्यूटी-फ्री आयात सुविधा खत्म करने और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

    भारत–EU समझौता बढ़ाएगा दबाव

    भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। यह समझौता बांग्लादेश के गारमेंट निर्यात के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अभी LDC श्रेणी में होने के कारण बांग्लादेश को EU बाजार में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलती है, जबकि भारत को करीब 12 प्रतिशत शुल्क देना पड़ता है।

    समझौता लागू होने के बाद भारत को भी शून्य टैरिफ का लाभ मिलेगा। भारत के पास कपास और सूत जैसे कच्चे माल की मजबूत उपलब्धता है, जिससे उसके उत्पाद सस्ते और बेहतर गुणवत्ता वाले हो सकते हैं। वहीं बांग्लादेश 2026-27 तक LDC सूची से बाहर हो जाएगा, जिससे उसका ड्यूटी-फ्री लाभ समाप्त हो जाएगा। ऐसे में यूरोपीय बाजार में भारत से प्रतिस्पर्धा करना उसके लिए बेहद कठिन होगा। फिलहाल EU में हर तीसरा व्यक्ति बांग्लादेशी डेनिम पहनता है, लेकिन इस डील के बाद भारत इस बाजार का बड़ा हिस्सा अपने कब्जे में कर सकता है।

    कुल मिलाकर, जहां मोहम्मद यूनुस भारतीय कंपनियों के बांग्लादेश आने की उम्मीद जता रहे थे, वहीं जमीनी सच्चाई यह है कि बांग्लादेश का अपना टेक्सटाइल आधार और बैकवर्ड लिंकेज तेजी से कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।

  • क्या पाकिस्तान ने बांग्लादेश को झांसा दिया? वर्ल्ड कप ड्रामेबाजी की चौंकाने वाली इनसाइड स्टोरी

    क्या पाकिस्तान ने बांग्लादेश को झांसा दिया? वर्ल्ड कप ड्रामेबाजी की चौंकाने वाली इनसाइड स्टोरी


    नई दिल्ली। वर्ल्ड कप का रोमांच बढ़ता जा रहा है और इसी बीच बांग्लादेश- पाकिस्तान के बीच चल रही ड्रामेबाजी ने सबकी नज़रें खींच ली हैं। इस विवाद की कहानी केवल मैदान तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक बहस में बदल गई है। insiders के अनुसार, पाकिस्तान की रणनीति ने बांग्लादेश को ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया जहां से वापसी मुश्किल लग रही है।

    सबसे पहले क्या हुआ?

    पाकिस्तान ने शुरुआत में बांग्लादेश के साथ मैत्रीपूर्ण रुख दिखाया, मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर मिलनसारता का भाव पैदा किया। फिर धीरे-धीरे टेंशन बढ़ाने वाली बातें और रणनीतिक संकेत सामने आने लगे। यही “ललचाने” की रणनीति बांग्लादेश को भावनात्मक रूप से कमजोर करने का काम कर रही है, कहा जा रहा है।

    फिर क्या हुआ?
    जैसे ही टूर्नामेंट आगे बढ़ा, पाकिस्तान ने अपने मैच और रणनीति के जरिए बांग्लादेश की टीम पर दबाव बढ़ाया।

    बांग्लादेश के खिलाड़ियों के ऊपर बढ़ते दबाव, टीम की असमंजस स्थिति और रणनीतिक उलझनों ने “ड्रामा” का रंग बढ़ा दिया।

    और फिर ‘धोखा’ का दावा…
    कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश को मैनिपुलेटिव रणनीति के तहत फंसा दिया, जिससे बांग्लादेश के लिए मैच की स्थिति और भी कठिन हो गई।लेकिन यह बात अभी अधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे “सूत्रों के अनुसार” ही देखा जा रहा है।

    वर्ल्ड कप ड्रामेबाजी की असली वजह क्या है?
    विश्लेषकों का कहना है कि क्रिकेट में ऐसे ड्रामे अक्सर स्ट्रेटेजिक और मानसिक खेल का हिस्सा होते हैं।
    किसी भी टीम की कमजोरी को पकड़कर माइंड गेम खेलना भी एक रणनीति होती हैऔर इस बार पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच यह खेल ज़्यादा तीखा दिख रहा है।

    क्या है आगे?
    अब सबकी नजरें बांग्लादेश के अगले मैच पर हैं, जहां यह टीम अपने मानसिक दबाव को पार कर सकेगी या नहीं। और पाकिस्तान की रणनीति क्या अगले मैचों में भी असर दिखाएगीयह समय ही बताएगा।

  • बांग्लादेश में हिंदू युवक की जघन्य हत्या, BNP नेता ने कार से कुचलकर कर उतारा मौत के घाट

    बांग्लादेश में हिंदू युवक की जघन्य हत्या, BNP नेता ने कार से कुचलकर कर उतारा मौत के घाट


    नई दिल्ली। बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले में BNP नेता अबुल हाशेम सुजन ने पेट्रोल पंप कर्मचारी रिपन साहा को 5,000 टका का पेट्रोल बिना भुगतान करने पर अपनी जीप से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी और ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है।

    बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की दर्दनाक हत्या ने देश में सनसनी फैला दी है। राजबाड़ी जिले के पेट्रोल पंप पर काम करने वाले 30 वर्षीय रिपन साहा को कथित तौर पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता अबुल हाशेम सुजन ने अपनी ब्लैक लैंड क्रूजर जीप से कुचल दिया।

    घटना शुक्रवार की सुबह लगभग 4:30 बजे हुई।

    पुलिस और स्थानीय लोगों के अनुसार, सुजन ने अपने वाहन में करीब 5,000 टका का ऑक्टेन भरवाया, लेकिन भुगतान किए बिना भागने की कोशिश की। रिपन ने वाहन रोककर भुगतान की मांग की तो आरोपी और उनके ड्राइवर कमल हुसैन ने गुस्से में आकर अपशब्द कहे और गाड़ी तेज कर दी।

    सीसीटीवी में साफ दिखा क्रूर हमला
    पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि रिपन पेट्रोल पंप के पास खड़ा था, वहीं सुजन की गाड़ी आती है, रिपन भुगतान मांगता है और फिर अचानक गाड़ी तेज कर दी जाती है।रिपन को गाड़ी के नीचे कुचलते हुए देखा गया। सिर और चेहरे को बुरी तरह कुचला गया। घटनास्थल से शव ढाका-खुलना हाईवे पर पड़ा मिला।

     रिपन की सिर और चेहरे को बुरी तरह कुचला गया और वह मौके पर ही मृत हो गया। शव बाद में ढाका-खुलना हाईवे पर पड़ा मिला।

    BNP नेता समेत दो गिरफ्तार
    पुलिस ने वाहन जब्त कर लिया और अबुल हाशेम सुजन को उनके गांव बारो मुरारीपुर से गिरफ्तार किया। उनके ड्राइवर कमल हुसैन को भी हिरासत में लिया गया।

    राजबाड़ी सदर पुलिस स्टेशन के ओसी खोंडकर जियाउर रहमान ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान के आधार पर दोनों को हिरासत में लिया गया है।

    हिंदू समुदाय में भय का माहौल
    स्थानीय हिंदू समुदाय में इस घटना के बाद दहशत का माहौल है। यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा के पैटर्न से जुड़ी मानी जा रही है। कई रिपोर्टों में इसे सांप्रदायिक हिंसा के रूप में देखा जा रहा है, जबकि पुलिस इसे मुख्य रूप से भुगतान विवाद बता रही है।
    इस घटना ने स्थानीय हिंदू समुदाय में भय और आक्रोश बढ़ा दिया है। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बीच यह घटना एक बार फिर सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा सकती है। जबकि पुलिस इसे भुगतान विवाद बता रही है, कई लोगों का मानना है कि यह हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की एक कड़ी है। 

  • T20 वर्ल्ड कप 2026: बांग्लादेश ने भारतीय मूल ICC अधिकारी को वीजा न देकर विवाद खड़ा किया

    T20 वर्ल्ड कप 2026: बांग्लादेश ने भारतीय मूल ICC अधिकारी को वीजा न देकर विवाद खड़ा किया


    नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की तरफ से उठाए जा रहे कदम लगातार विवादों का कारण बन रहे हैं। ताजा विवाद तब सामने आया जब बांग्लादेश ने भारतीय मूल के एक वरिष्ठ ICC अधिकारी को वीजा देने से इनकार कर दिया। यह कदम क्रिकेट जगत में बेहद असहज और शर्मनाक माना जा रहा है और ICC तथा बांग्लादेश के बीच तनाव और बढ़ गया है।

    बांग्लादेश की ओर से यह मांग की जा रही है कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 में उसके भारत में होने वाले चार ग्रुप मैचों को श्रीलंका में शिफ्ट किया जाए।

    भारत और श्रीलंका इस टूर्नामेंट के सह-मेजबान हैं, लेकिन टूर्नामेंट शुरू होने में समय कम होने के कारण शेड्यूल में बदलाव करना मुश्किल माना जा रहा है।

    ICC ने इस मसले को सुलझाने के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों को बांग्लादेश भेजा था। इनमें से एक भारतीय मूल का अधिकारी भी था। लेकिन बांग्लादेश सरकार ने उसे वीजा देने में देरी की और अंततः वीजा नहीं दिया। नतीजतन ICC का प्रतिनिधिमंडल अधूरा रह गया और केवल एंटी करप्शन यूनिट एवं सिक्योरिटी प्रमुख एंड्रयू एफग्रेव ही ढाका पहुंच सके।

    ICC अधिकारियों का यह दौरा मुख्य रूप से सुरक्षा चिंताओं को दूर करने और BCB को आश्वस्त करने के लिए था कि भारत में बांग्लादेशी टीम को किसी भी तरह का खतरा नहीं है। ICC का मानना है कि भारत में सभी टीमों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरे में ICC अधिकारी BCB के साथ-साथ बांग्लादेश के युवा और खेल मंत्रालय के पदाधिकारियों से भी चर्चा कर रहे थे।

    टी20 वर्ल्ड कप 2026 में बांग्लादेश के चार मैच भारत में तय हैं

    कोलकाता के ईडन गार्डन्स में तीन और मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में एक। हाल में बांग्लादेश में हिंदू युवकों की हत्या के विरोध में भारत में विरोध-प्रदर्शन और कुछ विवादित घटनाओं के बाद BCB ने भारत में मैचों को कराने पर असमर्थता जताई और शिफ्ट करने की मांग उठाई।

    अब ICC के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह टूर्नामेंट की निष्पक्षता, सुरक्षा और शेड्यूल को बनाए रखते हुए इस विवाद को कैसे सुलझाता है। अगर यह विवाद समय रहते नहीं सुलझा तो T20 वर्ल्ड कप 2026 की छवि और आयोजन व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

  • भारत के सेना प्रमुख ने दिया जवाब, पाकिस्तान के साथ मिलकर थर्ड फ्रंट बना रहा है बांग्लादेश?

    भारत के सेना प्रमुख ने दिया जवाब, पाकिस्तान के साथ मिलकर थर्ड फ्रंट बना रहा है बांग्लादेश?


    नई दिल्‍ली। सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने पाकिस्तान और चीन के बाद बांग्लादेश की ओर से तीसरे मोर्चे की आशंकाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के साथ भारत के सैन्य नेतृत्व की बातचीत होती रहती है और अभी वहां से इस तरह के कोई संकेत नहीं है। जनरल द्विवेदी ने मंगलवार को यहां वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में सवालों के जवाब में यह बात कही। उनसे पूछा गया था कि क्या पाकिस्तान और चीन के बाद अब बांग्लादेश की ओर से भारत के लिए तीसरा मोर्चा खुल गया है।
    उन्होंने स्पष्ट किया कि वैसे सेना वहां स्थिति पर निरंतर नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले लिए यह समझना जरूरी है कि बांग्लादेश में कैसी सरकार है। उन्होंने कहा, ‘यदि वह एक अंतरिम सरकार है तो हमें यह देखना होगा कि वह जो कदम उठा रही है वह चार से पांच वर्षों के लिए हैं या केवल चार से पांच महीनों के लिए हैं। यह सोचना होगा कि क्या हमें तुरंत किसी प्रतिक्रिया की आवश्यकता है या नहीं।’

    उन्होंने कहा कि दूसरी बात यह है कि अभी तीनों सेनाओं के चैनल पूरी तरह खुले हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं वहां के सेना प्रमुख के साथ नियमित संपर्क में हूं। इसी तरह अन्य माध्यमों से भी हमारा संपर्क बना हुआ है। हमने वहां एक प्रतिनिधिमंडल भेजा था, जिसने सभी संबंधित लोगों से मुलाकात की। इसी प्रकार नौसेना प्रमुख और वायुसेना प्रमुख ने भी बातचीत की है।

    सेना प्रमुख ने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रकार की गलतफहमी या संपर्क की कमी न हो। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि आज की स्थिति में तीनों सेनाओं द्वारा जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, वे किसी भी रूप में भारत के खिलाफ नहीं हैं।’

    पाकिस्तान और चीन की सेनाओं के साथ बांग्लादेश की सेनाओं की बढ़ती नजदीकियों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि क्षमता बढ़ाना एक एक सतत प्रक्रिया है। भारत भी ऐसा कर रहा है और अन्य देश भी। उन्होंने कहा कि वैसे भारतीय सेना वहां की स्थिति पर निरंतर नजर रखे हुए है और स्थिति की निगरानी कर रही है।