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  • भोपाल में नवरात्रि की धूम, घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की आराधना शुरू, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

    भोपाल में नवरात्रि की धूम, घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की आराधना शुरू, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़


    नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही राजधानी भोपाल में मां दुर्गा की भक्ति और आराधना का माहौल बन गया है। नौ दिनों तक चलने वाले शक्ति उपासना के इस पर्व के पहले दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जा रही है। शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं और श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। तलैया स्थित काली माता मंदिर पीर गेट की कर्फ्यू वाली माता मंदिर और प्लेटिनम प्लाजा स्थित माता मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भक्त मां के दर्शन कर परिवार की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
    ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम के अनुसार इस वर्ष पूरे नौ दिनों की नवरात्रि का संयोग बना है। नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस बार माता रानी का आगमन हाथी पर माना गया है जिसे शुभता समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व है। पंडित गौतम के मुताबिक रविवार को घटस्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक निर्धारित बताया गया है। चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के कारण अभिजीत काल में घटस्थापना को बेहतर माना गया है। प्रदोष काल में अखंड ज्योति स्थापित करने की परंपरा निभाई जाएगी जबकि तांत्रिक साधक मध्यरात्रि में विशेष पूजा करेंगे।
    नवरात्रि के नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की पूजा के साथ विशेष भोग अर्पित करेंगे। घरों में कलश स्थापना के बाद दीप प्रज्ज्वलित कर मंत्र जाप दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाएगा। कई श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखेंगे और सात्विक भोजन के साथ संयमित दिनचर्या अपनाएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों में झूठ बोलने क्रोध करने और परिवार में विवाद से बचना चाहिए। माता पिता की सेवा गुरुजनों का सम्मान और महिलाओं के प्रति आदर का भाव रखने पर भी विशेष जोर दिया जाता है। भक्त देवी मां के दर्शन के दौरान नारियल लाल चुनरी लाल फूल कुमकुम और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सकते हैं। यदि पूजन सामग्री उपलब्ध न हो तो श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप और मां के नामों का स्मरण भी किया जा सकता है।
    पंचांग के अनुसार नवरात्रि के दौरान 18 अक्टूबर को महाअष्टमी और 19 अक्टूबर को महानवमी मनाई जाएगी। इसके बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। अंतिम दिनों में मंदिरों में विशेष पूजा अनुष्ठान और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की उम्मीद है।
    नवरात्रि के उत्साह का असर मां दुर्गा की प्रतिमाओं के बाजार में भी दिखाई दे रहा है। हबीबगंज बंगाली कॉलोनी स्थित प्रतिबिंब दक्षिणेश्वर कालीबाड़ी कला केंद्र में इस बार मां दुर्गा की करीब 160 प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। केंद्र के मूर्तिकार उत्तम कुमार नंदी के मुताबिक मूर्ति निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री महंगी होने से लागत बढ़ गई है। पहले 35 रुपये में मिलने वाली सामग्री अब 45 रुपये में मिल रही है। इसके बावजूद प्रतिमाओं की मांग बनी हुई है। केंद्र में पिछले 10 से 12 वर्षों से प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं और पश्चिम बंगाल तथा कोलकाता से आए करीब 12 से 13 कारीगर इस काम में जुटे हैं। यहां तैयार सबसे ऊंची प्रतिमा 12 फीट की है। प्रतिमाएं श्रद्धालुओं की पसंद के अनुसार बुक की जा रही हैं। नवरात्रि के आगमन के साथ भोपाल में आस्था उत्साह और भक्ति का माहौल है। श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना कर सुख शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
  • दोस्त को आखिरी ऑडियो भेजकर फंदे पर झूला नेपाल का युवक, भोपाल में नाबालिग गर्लफ्रेंड के साथ मिला शव, जांच में जुटी पुलिस

    दोस्त को आखिरी ऑडियो भेजकर फंदे पर झूला नेपाल का युवक, भोपाल में नाबालिग गर्लफ्रेंड के साथ मिला शव, जांच में जुटी पुलिस


    भोपाल । भोपाल की अरेरा कॉलोनी में एक युवक और नाबालिग लड़की की मौत का मामला सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। दोनों के शव एक बंगले के सर्वेंट क्वार्टर में फंदे पर लटके मिले। मृतक युवक की उम्र 22 वर्ष बताई गई है और वह मूल रूप से नेपाल का रहने वाला था। वहीं उसके साथ मृत मिली लड़की 16 वर्ष की थी और हबीबगंज क्षेत्र की निवासी थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती जांच में मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    पुलिस के मुताबिक युवक की पहचान अमन सारूमगर के रूप में हुई है। वह अरेरा कॉलोनी के ई-7 क्षेत्र में एक बंगले के सर्वेंट क्वार्टर में रहता था। उसकी मां उसी बंगले में खाना बनाने का काम करती थीं। अमन अपने पिता के साथ भोपाल में 11 नंबर क्षेत्र स्थित गणेश मंदिर के पास फास्ट फूड का ठेला भी लगाता था। परिवार में उसका एक बड़ा भाई और छोटी बहन हैं। बताया गया है कि करीब एक सप्ताह पहले उसका परिवार नेपाल गया था। परिवार के बाहर होने के कारण अमन घर में अकेला रह रहा था।

    घटना से पहले गुरुवार शाम अमन ने अपने दोस्त आर्यन से शराब लाने के लिए कहा था। दोस्त शराब पहुंचाने के बाद अपने कमरे पर लौट गया। रात करीब आठ बजे अमन ने उसे मोबाइल पर एक ऑडियो संदेश भेजा। इस संदेश में उसने दोस्त के प्रति आभार जताया और अलविदा कहा। संदेश सुनकर आर्यन को किसी अनहोनी की आशंका हुई और वह तुरंत अमन के कमरे पर पहुंचा। हालांकि कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। जब उसने खिड़की से अंदर झांककर देखा तो अमन और लड़की फंदे पर लटके मिले। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।


    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अमन और लड़की की पहचान करीब एक साल पहले इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और वे एक-दूसरे के करीब आ गए। लड़की दसवीं कक्षा में पढ़ती थी। वह अपने परिवार की इकलौती बेटी बताई गई है। उसके पिता कपड़े की दुकान पर सेल्समैन का काम करते हैं और परिवार में उसका एक बड़ा भाई भी है। दोनों की मौत की खबर मिलने के बाद परिवारों में शोक का माहौल है।

    पुलिस जांच के दौरान अमन के इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक प्रेगनेंसी टेस्ट किट की तस्वीर पोस्ट किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि इस तस्वीर का घटना से क्या संबंध है यह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस ने फिलहाल इसे मौत की वजह घोषित नहीं किया है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

    जांच अधिकारी सी अजय दुबे के मुताबिक दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज की मॉर्च्यूरी में रखवाया गया है। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ऑडियो संदेश सहित घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किन परिस्थितियों में दोनों की मौत हुई। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • कांग्रेस की चुनावी तैयारी तेज, 30 दिन में खुलेगी संगठन की पोल, निष्क्रिय बूथों और नाराज कार्यकर्ताओं की होगी पहचान

    कांग्रेस की चुनावी तैयारी तेज, 30 दिन में खुलेगी संगठन की पोल, निष्क्रिय बूथों और नाराज कार्यकर्ताओं की होगी पहचान


    भोपाल । भोपाल में करीब 930 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में आरोपी मोहित गोगिया के कथित बयान की कॉपी सामने आने के बाद प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। गोगिया ने अपने बयान में मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचूरा पर शराब दुकानों का ठेका दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया है। आरोपी का दावा है कि इसमें 50 लाख रुपये नकद दिए गए जबकि बाकी 50 लाख रुपये बैंक खाते के जरिए ट्रांसफर कराए गए। हालांकि ये आरोप फिलहाल आरोप ही हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। दीपम रायचूरा ने इन आरोपों को मनगढ़ंत बताते हुए खारिज किया है।

    गोगिया के कथित बयान के मुताबिक उसकी मुलाकात तनुजा सेठी ने दीपम रायचूरा से कराई थी। उस समय रायचूरा आबकारी विभाग में सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि रायचूरा ने उसे दीपक दुबे से मिलवाया और बताया कि वही उसके कामकाज को देखेंगे। गोगिया ने दावा किया कि वर्ष 2024-25 में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों का ठेका जसवंत कुमार के नाम पर दिलाने में मदद की गई। इसके बदले एक करोड़ रुपये दिए जाने का आरोप लगाया गया है।

    कथित बयान में रकम के लेनदेन का भी जिक्र है। गोगिया के अनुसार 50 लाख रुपये नकद होशंगाबाद रोड स्थित शालीमार फोर्ट लेजा के एक फ्लैट में दिए गए थे। वहीं बाकी 50 लाख रुपये आईएसबीटी के पास स्थित एक होटल के बैंक खाते में ट्रांसफर कराने का आरोप है। बयान में यह भी दावा किया गया है कि शराब दुकानों के ठेके के लिए जरूरी बैंक गारंटी से संबंधित फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद यानी एफडीआर को मंजूरी दिलाने में मदद की गई। इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों और लेनदेन की जांच अहम हो सकती है।

    मोहित गोगिया ने अपने कथित बयान में शराब की आपूर्ति से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी लिए हैं। उसका आरोप है कि दीपम रायचूरा ने उसे गौरव शिवहरे से मिलवाया और इसके बाद उसकी मुलाकात कारोबारी अमरीक सिंह से हुई। गोगिया ने दावा किया कि टीटी नगर की शराब दुकानों पर बिना लाइसेंस शराब की आपूर्ति और बिक्री में मदद की गई। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित लोगों का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

    बयान में भोपाल के सोल क्लब के संचालन और जांच एजेंसी की कार्रवाई रुकवाने के नाम पर कथित तौर पर 50 लाख रुपये मांगे जाने का भी उल्लेख है। गोगिया के मुताबिक इस मामले में सिद्धांत ओझा और पुलिस अधिकारी राजेश मिश्रा के संपर्क का जिक्र आया है। हालांकि बयान के अनुसार राजेश मिश्रा पर सीधे रकम मांगने का आरोप नहीं लगाया गया है।

    मोहित गोगिया पर करीब 200 लोगों से लगभग 930 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। वह फिलहाल पंजाब की जेल में बंद है। आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय उसकी संपत्तियों और कारोबारी गतिविधियों की जांच के तहत कार्रवाई कर चुके हैं और संपत्तियां फ्रीज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    दीपम रायचूरा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्हें किसी जांच एजेंसी से कोई नोटिस नहीं मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोगिया से उनका परिचय केवल भोपाल में सहायक आबकारी आयुक्त रहते हुए लाइसेंसधारी के रूप में हुआ होगा। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। अब इस मामले में कथित बयान की प्रामाणिकता और लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • ₹17 करोड़ खर्च फिर भी सड़क में भेदभाव का आरोप, HIG-MIG में सीमेंटेड और EWS-LIG में डामर रोड पर रहवासी नाराज

    ₹17 करोड़ खर्च फिर भी सड़क में भेदभाव का आरोप, HIG-MIG में सीमेंटेड और EWS-LIG में डामर रोड पर रहवासी नाराज


    भोपाल । भोपाल के बाग मुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी में 17 करोड़ रुपए की लागत से बन रही सड़क को लेकर गुरुवार सुबह रहवासियों ने प्रदर्शन किया। कॉलोनी में सड़क निर्माण के दौरान कहीं सीमेंटेड तो कहीं डामर की सड़क बनाए जाने को लेकर लोगों में नाराजगी है। रहवासियों का कहना है कि जब पूरी कॉलोनी के लिए सड़क निर्माण का बड़ा टेंडर हुआ है तो अलग अलग हिस्सों में सड़क की गुणवत्ता और निर्माण का तरीका अलग क्यों रखा जा रहा है। लोगों ने मांग की है कि पूरी कॉलोनी में सीमेंटेड सड़क बनाई जाए ताकि सड़क लंबे समय तक टिकाऊ रहे और बार बार उखड़ने की समस्या न हो।

    प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में रहवासी हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सड़क पर पहुंचे और नारेबाजी की। बाग मुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी विकास समिति के अध्यक्ष उमाशंकर तिवारी के मुताबिक करीब 85 एकड़ में फैली इस कॉलोनी में 1206 से अधिक मकान हैं। कॉलोनी में सड़क निर्माण के लिए 29 अप्रैल 2026 को करीब 17 करोड़ रुपए का टेंडर हुआ था। रहवासियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि इस राशि से कॉलोनी की सड़क व्यवस्था बेहतर होगी लेकिन निर्माण शुरू होने के बाद सड़क के अलग अलग हिस्सों में अलग तरीके से काम होता दिखाई दे रहा है।

    रहवासियों के अनुसार कॉलोनी के HIG और MIG आवासों वाले हिस्से में सीमेंटेड सड़क बनाई जा रही है। लोगों का आरोप है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों के सामने भी सीमेंटेड सड़क का निर्माण किया गया है। इसके बाद जब EWS और LIG आवासों वाले हिस्से में सड़क निर्माण शुरू हुआ तो वहां डामर की सड़क बनाए जाने की तैयारी शुरू हो गई। इसी बात को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया है।

    मामले की जानकारी क्षेत्रवासियों ने मंत्री कृष्णा गौड़ और PWD अधिकारियों तक भी पहुंचाई। रहवासियों ने मांग की कि EWS और LIG क्षेत्र में भी सीमेंटेड सड़क बनाई जाए। उनका कहना है कि छोटे मकानों वाले हिस्से में रहने वाले लोगों को भी उतनी ही मजबूत और टिकाऊ सड़क मिलनी चाहिए जितनी कॉलोनी के अन्य हिस्सों में बनाई जा रही है।

    वहीं PWD अधिकारियों की ओर से रहवासियों को बताया गया कि टेंडर में सीमेंटेड और डामर दोनों तरह की सड़कों का प्रावधान रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक EWS और LIG क्षेत्र में डामर की सड़क ही बनाई जाएगी। उनका कहना है कि यदि रहवासी सीमेंटेड सड़क की मांग पर जोर देते हैं तो इसके लिए अतिरिक्त फंड उपलब्ध नहीं है और ऐसी स्थिति में काम रोकना पड़ सकता है।

    रहवासियों का सवाल इसी बात को लेकर है कि यदि एक ही कॉलोनी में दोनों तरह की सड़क बनाने का प्रावधान था तो निर्माण का आधार क्या तय किया गया है। लोगों का कहना है कि अधिकारियों के आवासों वाले हिस्से में सीमेंटेड सड़क और छोटे आवासों वाले हिस्से में डामर सड़क होने से उन्हें असमानता महसूस हो रही है। उनका यह भी कहना है कि कुछ हिस्सों में छोटे आवासों को छोड़कर करीब 300 मीटर आगे फिर अधिकारियों के आवासों के सामने सीमेंटेड सड़क बनाई जा रही है।

    EWS और LIG-1 तथा LIG-2 क्षेत्र में डामर सड़क का काम शुरू होने के बाद गुरुवार सुबह रहवासी मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने निर्माण कार्य को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए अधिकारियों से सड़क निर्माण की व्यवस्था पर दोबारा विचार करने की मांग की। रहवासियों ने कहा कि वे सीमेंटेड सड़क की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखेंगे। इसी क्रम में शनिवार को सुंदरकांड का पाठ आयोजित करने की भी बात कही गई है। अब देखना होगा कि PWD और प्रशासन रहवासियों की मांग पर क्या निर्णय लेते हैं और सड़क निर्माण की मौजूदा योजना में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।

  • UPI पेमेंट पर चार्ज का विरोध तेज, भोपाल में आज व्यापारियों का ‘नो UPI डे’, 75 हजार के ट्रांजैक्शन पर 300 रुपए तक शुल्क

    UPI पेमेंट पर चार्ज का विरोध तेज, भोपाल में आज व्यापारियों का ‘नो UPI डे’, 75 हजार के ट्रांजैक्शन पर 300 रुपए तक शुल्क


    भोपाल । भोपाल में आज 8 अक्टूबर को थोक दाल और चावल व्यापारी नो UPI डे मनाकर प्रस्तावित MDR चार्ज का विरोध करेंगे। व्यापारियों ने इसे सांकेतिक आंदोलन बताते हुए कहा है कि 2 हजार रुपए से अधिक के ऑनलाइन भुगतान स्वीकार नहीं किए जाएंगे। व्यापारियों का यह विरोध 15 अक्टूबर से प्रस्तावित UPI चार्ज को लेकर है। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान आज कारोबार का अहम हिस्सा बन चुका है और इस पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया तो खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।

    व्यापारियों के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2 हजार रुपए से अधिक के व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाए जाने की बात कही जा रही है। वहीं 75 हजार रुपए या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपए तक हो सकता है। व्यापारियों का तर्क है कि थोक कारोबार में बड़ी रकम के भुगतान नियमित रूप से होते हैं। ऐसे में प्रत्येक लेनदेन पर शुल्क लगने से कारोबार की लागत बढ़ने की आशंका है।

    भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू के मुताबिक UPI भुगतान व्यापारियों और आम लोगों के लिए तेज सरल और सुविधाजनक माध्यम बन चुका है। व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में लगातार सहयोग किया है। ऐसे में UPI पर MDR चार्ज लागू होने से छोटे और मध्यम व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है। उनका कहना है कि सरकार को कारोबारियों की व्यावहारिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित शुल्क पर पुनर्विचार करना चाहिए।

    नो UPI डे के तहत व्यापारियों से अपील की गई है कि वे 8 अक्टूबर को 2 हजार रुपए से ज्यादा के UPI भुगतान स्वीकार न करें। इसे किसी तरह के टकराव के बजाय शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का माध्यम बताया गया है। दाल और चावल कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर व्यापारियों ने हमेशा सकारात्मक सहयोग किया है और डिजिटल इंडिया अभियान में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    चावल-दाल व्यापारी संघ के अध्यक्ष महेश रामरख्यानी और सचिव सचिन संगतानी ने भी MDR से जुड़ी व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग रखी है। उनका कहना है कि व्यापारियों ने डिजिटल लेनदेन को अपनाकर भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने में सहयोग दिया है। अब सरकार से उम्मीद है कि नए शुल्क का फैसला लेते समय व्यापारियों की लागत और बाजार की वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

    व्यापारियों का कहना है कि बड़े मूल्य के डिजिटल लेनदेन में मामूली प्रतिशत शुल्क भी लगातार कारोबार करने वालों के लिए महत्वपूर्ण राशि बन सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि एक कारोबारी दिन में 2 हजार रुपए से अधिक के कई UPI लेनदेन करता है तो प्रस्तावित शुल्क का कुल प्रभाव बढ़ सकता है। इसी वजह से व्यापारी संगठन सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।

    भोपाल में आज होने वाला नो UPI डे इसी विरोध का सांकेतिक रूप है। व्यापारियों की कोशिश है कि एक दिन के इस प्रदर्शन के जरिए सरकार तक अपनी मांग पहुंचाई जाए और प्रस्तावित MDR चार्ज पर दोबारा विचार किया जाए। अब देखना होगा कि इस सांकेतिक विरोध के बाद सरकार और संबंधित पक्ष इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।

  • वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो तुरंत करें आवेदन, भोपाल में 8-9 अक्टूबर को शिविर, युवाओं के लिए भी शुरू हुई प्रक्रिया

    वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो तुरंत करें आवेदन, भोपाल में 8-9 अक्टूबर को शिविर, युवाओं के लिए भी शुरू हुई प्रक्रिया


    भोपाल । भोपाल में मतदाता सूची को लेकर महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान सूची से बाहर हुए नामों की दोबारा जांच की जा रही है। इसके लिए भोपाल में 8 और 9 अक्टूबर को विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO घर घर जाकर भी जानकारी जुटा रहे हैं और यह पता किया जा रहा है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटे हैं उनमें कितने लोग वास्तव में पात्र मतदाता हैं। भोपाल में ऐसे करीब 3.88 लाख नामों की जांच की जा रही है। जिन लोगों के नाम जांच के दौरान पात्र पाए जाएंगे उनके नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़े जा सकेंगे। नागरिक ऑनलाइन माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं।

    करीब 11 महीने पहले SIR की प्रक्रिया के दौरान भोपाल की मतदाता संख्या में बड़ा बदलाव हुआ था। उस समय जिले में कुल 21 लाख 25 हजार 908 मतदाता दर्ज थे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह संख्या घटकर करीब 16.87 लाख रह गई। इस सूची में करीब 1 लाख 503 मतदाता ऐसे बताए गए हैं जो अनुपस्थित पाए गए थे जबकि 2 लाख 86 हजार 661 मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित यानी परमानेंट शिफ्टेड श्रेणी में रखा गया था। अब इन नामों का दोबारा सत्यापन किया जा रहा है ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखे जा सकें।

    भोपाल की सभी सात विधानसभा सीटों बैरसिया हुजूर भोपाल उत्तर भोपाल मध्य दक्षिण पश्चिम गोविंदपुरा और नरेला में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। 7 अक्टूबर को भी शिविरों में लोग पहुंचे और अपने नाम से जुड़ी जानकारी की जांच कराई। गुरुवार और शुक्रवार को भी नागरिक इन शिविरों में पहुंचकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके साथ ही BLO की ओर से तैयार की गई सूचियों को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ भी साझा किया जाएगा। इसका उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है।

    मतदाता सूची में ऐसे नाम भी शामिल हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए हैं। ऐसे मामलों की भी जांच की जा रही है। वहीं जो लोग स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं उनके नाम हटाए जाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। दूसरी ओर ऐसे वास्तविक मतदाता जो अपने पते पर नहीं मिले थे या SIR के दौरान किसी कारण से सूची से बाहर हो गए थे उनकी पात्रता की पुष्टि होने पर नाम फिर जोड़े जा सकेंगे।

    खास बात यह है कि 1 जनवरी 2027 को 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले युवाओं के लिए भी मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ऐसे युवा एडवांस में फॉर्म 6 भर सकते हैं। इसके लिए पहले जरूरी डिक्लेरेशन की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। प्रशासन का उद्देश्य अनुपस्थित स्थानांतरित मृत और दोहराए गए नामों की जांच के साथ यह सुनिश्चित करना है कि कोई वास्तविक और पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे। इसके अलावा नाइट शेल्टर मजदूर बस्तियों और बेघर लोगों के लिए भी विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक पात्र लोगों को मतदाता सूची से जोड़ा जा सके।

  • गरबा में मुस्लिम युवाओं के शामिल होने पर मुफ्ती की दो टूक, अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं पर रहें कायम

    गरबा में मुस्लिम युवाओं के शामिल होने पर मुफ्ती की दो टूक, अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं पर रहें कायम


    नई दिल्ली। नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रमों में मुस्लिम युवाओं के शामिल होने को लेकर भोपाल में धार्मिक बयान सामने आया है। मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर मुस्लिम युवाओं से गरबा में शामिल नहीं होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम युवाओं का दूसरी कौम के धार्मिक त्योहार या धार्मिक रस्म में शामिल होना जायज नहीं है। उनके मुताबिक दूसरी कौम की मुशाबहत यानी अनुकरण से भी बचना चाहिए। मुफ्ती ने खास तौर पर मुस्लिम युवाओं को दोस्तों के साथ गरबा में जाने से भी परहेज करने की सलाह दी है।

    अपने वीडियो में मुफ्ती गुफरान खान नदवी ने गरबा में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी के सवाल पर इसे हराम बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में होने वाले गरबा या हिंदू धार्मिक रस्म में मुस्लिम लड़कों का शामिल होना उचित नहीं है। उनका कहना है कि कुछ मुस्लिम युवक अपने दोस्तों के साथ गरबा में जाना सामान्य बात समझते हैं लेकिन उन्हें इससे बचना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम समाज के युवाओं से अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं के प्रति जागरूक रहने की बात कही।

    मुफ्ती ने कहा कि मुस्लिम समाज की अपनी धार्मिक परंपराएं और रीति रिवाज हैं और युवाओं को इन्हीं के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने दूसरी कौम की धार्मिक रस्मों के अनुकरण को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इस तरह का अनुकरण मुस्लिम समाज के लिए फितने का कारण बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों का अपना धर्म और उसकी परंपराएं उनके लिए पर्याप्त हैं और उन्हें दूसरे धर्मों के त्योहारों की ओर आकर्षित होने की जरूरत नहीं है।

    मुफ्ती गुफरान खान नदवी ने अपने बयान में मस्जिद और नमाज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले मस्जिद के गेट तक भी नहीं आते थे वे अब वहां तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को मुस्लिम धार्मिक परंपराओं के प्रति बढ़ती दिलचस्पी से जोड़ते हुए कहा कि अगर कोई मस्जिद के गेट तक आया है तो आगे चलकर अंदर भी आ सकता है। उन्होंने लोगों को नमाज और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का संदेश दिया।

    गरबा में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी को लेकर यह अपील केवल मुफ्ती की ओर से ही नहीं आई है। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी भी मुस्लिम युवाओं और समाज के लोगों से गरबा में जाने से परहेज करने की अपील कर चुकी है। कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेख इस्माइल खान ने 6 अक्टूबर को जारी अपील में कहा था कि इसका उद्देश्य किसी धर्म या धार्मिक आयोजन का विरोध करना नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखना और विवाद की स्थिति से बचना है।

    कमेटी की ओर से कहा गया है कि हाल के दिनों में गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवाओं की मौजूदगी को लेकर सार्वजनिक तौर पर आपत्तियां सामने आई हैं। इसी को देखते हुए कमेटी ने अपने पदाधिकारियों को प्रदेश संभाग और जिला स्तर पर अभियान चलाने के लिए कहा है। इसके तहत स्थानीय उलेमा और सामाजिक संगठनों से संपर्क कर मुस्लिम युवाओं को गरबा आयोजनों से दूर रहने की अपील की जाएगी।

    कमेटी के मुताबिक जिला प्रशासन को भी इस पहल की जानकारी दी जाएगी। उसका कहना है कि किसी धार्मिक आयोजन का विरोध करना उद्देश्य नहीं है बल्कि विवाद से बचना और शांति बनाए रखना प्राथमिकता है। गरबा और मुस्लिम युवाओं की भागीदारी को लेकर सामने आए इन बयानों के बीच अब यह मुद्दा धार्मिक पहचान सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक आयोजनों में भागीदारी को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

  • रियाज मंजिल पर किसका हक, आफताब जहां के स्वामित्व पर आपत्ति, 2024 के शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र की भी होगी जांच

    रियाज मंजिल पर किसका हक, आफताब जहां के स्वामित्व पर आपत्ति, 2024 के शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र की भी होगी जांच


    भोपाल । भोपाल में नवाबी दौर की संपत्तियों को लेकर चल रहा विवाद अब प्रशासनिक सुनवाई के अगले चरण में पहुंच गया है। बैरागढ़ एसडीएम कोर्ट में मंगलवार को रियाज मंजिल कोठी और खसरा नंबर 42 से जुड़े मामले में दोनों पक्ष अपने रिकॉर्ड और दस्तावेज पेश करेंगे। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन संपत्तियों को नवाब हमीदुल्लाह खान की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम से जुड़ा मानते हुए शत्रु संपत्ति के तौर पर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि इस कार्रवाई को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं और संबंधित पक्षों ने पुराने सरकारी रिकॉर्ड की जांच की मांग की है।

    खानूगांव स्थित ऐतिहासिक रियाज मंजिल कोठी के साथ खसरा नंबर 42 के स्वामित्व को लेकर मुख्य विवाद सामने आया है। आपत्तिकर्ताओं का कहना है कि उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन आफताब जहां बेगम के नाम दर्ज नहीं है। उनके अनुसार रिकॉर्ड में इसका संबंध नवाब हमीदुल्लाह खान और बाद में उनकी उत्तराधिकारी नवाब बेगम साजिदा सुल्तान से बताया गया है। ऐसे में केवल किसी व्यक्ति के संपत्ति में रहने के आधार पर उसके कानूनी स्वामित्व को तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए पुराने दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड देखना जरूरी है।

    आपत्तियों में वर्ष 2020 की राजस्व जांच का भी उल्लेख किया गया है। दावा है कि तत्कालीन तहसीलदार संत हिरदाराम नगर ने खसरा नंबर 42 से संबंधित राजस्व प्रकरण में जांच की थी। इस जांच में आफताब जहां के पक्ष में कथित हिबा या दान के आधार पर किए गए नामांतरण के दावे को सिद्ध नहीं माना गया था। अब इसी बिंदु को आधार बनाकर सवाल उठाया गया है कि यदि पिछली राजस्व जांच में उनका मालिकाना हक स्थापित नहीं हुआ था तो वर्ष 2024 में इसी संपत्ति को उनके स्वामित्व वाली मानकर शत्रु संपत्ति घोषित करने का आधार क्या था।

    मामले में 29 अप्रैल 2024 को जारी बताए जा रहे शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र की प्रामाणिकता और उसे जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। आपत्तिकर्ताओं ने इसे सीधे फर्जी नहीं बताया है बल्कि इसकी मूल फाइल और उससे जुड़े दस्तावेज बुलाने की मांग की है। इसके लिए भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय से संबंधित मूल या प्रमाणित रिकॉर्ड मंगाने की मांग की गई है। इसमें नोटशीट अनुमोदन आदेश संपत्ति सत्यापन रिपोर्ट स्वामित्व का आधार और केंद्र तथा राज्य के बीच हुए पत्राचार को शामिल करने की मांग की गई है।

    पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि रियाज मंजिल और खसरा नंबर 42 का वास्तविक कानूनी स्वामित्व किसके पास था। साथ ही यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि आफताब जहां बेगम के स्वामित्व का आधार क्या था और वर्ष 2024 में जारी प्रमाण-पत्र किन दस्तावेजों और जांच के आधार पर तैयार किया गया।

    नवाबी संपत्तियों का विवाद केवल रियाज मंजिल तक सीमित नहीं है। भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान की संपत्तियों को लेकर सैफ अली खान और उनके परिवार के साथ नवाब की तीसरी बेटी राबिया सुल्तान के वारिसों की ओर से भी दावे किए गए हैं। संपत्तियों की जांच और सत्यापन के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की गई है। बैरागढ़ टीटी नगर कोलार हुजूर और गोविंदपुरा के एसडीएम अलग अलग क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड का सर्वेक्षण और सत्यापन कर रहे हैं।

    विवाद का एक प्रमुख पक्ष शत्रु संपत्ति से भी जुड़ा है। केंद्र सरकार की ओर से पूर्व नवाब की कुछ संपत्तियों को शत्रु संपत्ति माना गया है। इसके पीछे यह तर्क दिया गया है कि नवाब की बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान विभाजन के समय पाकिस्तान चली गई थीं। वहीं सैफ अली खान पटौदी और उनके परिवार की ओर से दावा किया गया है कि उनकी दादी साजिदा सुल्तान वास्तविक उत्तराधिकारी थीं। इस बीच राबिया सुल्तान के वारिसों ने भी अदालत में संपत्तियों के बंटवारे की मांग की है। अब एसडीएम कोर्ट की सुनवाई में सामने आने वाले पुराने रिकॉर्ड इस विवाद को समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • मेट्रो काम को लेकर विधायक का विरोध, शाही कब्रिस्तान के नीचे रूट पर बोले बिना अनुमति नहीं चलेगा काम

    मेट्रो काम को लेकर विधायक का विरोध, शाही कब्रिस्तान के नीचे रूट पर बोले बिना अनुमति नहीं चलेगा काम


    भोपाल । भोपाल में मेट्रो के फेज 2 के रूट को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार देर रात भोपाल टॉकीज के पास स्थित शाही कब्रिस्तान में मेट्रो की टीम पहुंची और बैरिकेड्स लगाने का काम शुरू किया तो उत्तर से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील मौके पर पहुंच गए। कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो का अंडरग्राउंड रूट निकाले जाने को लेकर विधायक ने कड़ी आपत्ति जताई और मेट्रो तथा पुलिस अधिकारियों से काम रोकने को कहा। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से सख्त लहजे में कहा कि बाहर निकलो वरना मैं बदतमीजी करने लगूंगा। विधायक के इस तेवर के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच भी हलचल देखने को मिली।

    बताया गया कि देर रात विधायक को जानकारी मिली कि मेट्रो कॉरपोरेशन की टीम कब्रिस्तान के पास बैरिकेड्स लगाने के लिए मशीनें और अन्य सामान लेकर पहुंची है। इसके बाद वह समाज के लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। विधायक ने अधिकारियों से सवाल किया कि जब यह शाही कब्रिस्तान की संपत्ति है तो यहां काम शुरू करने से पहले अनुमति ली गई या नहीं। उन्होंने कहा कि पहले शाही औकाफ से अनुमति ली जानी चाहिए और उसके बाद ही किसी तरह का निर्माण कार्य किया जाना चाहिए।

    विधायक आतिफ अकील ने स्पष्ट कहा कि बिना वैधानिक अनुमति के कब्रिस्तान में किसी भी तरह का काम नहीं होना चाहिए। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से मशीनें और सामान हटाने की मांग की। विधायक का कहना है कि इस कब्रिस्तान में उनके पूर्वजों की कब्रें हैं और यहां बड़ी संख्या में कब्रें मौजूद हैं। ऐसे में वह कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो लाइन निकाले जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस स्थान से मेट्रो रूट को हटाकर कोई दूसरा विकल्प तलाशा जाना चाहिए।

    दरअसल भोपाल में मेट्रो के ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाषनगर से एम्स के बीच मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है। अब फेज 2 में सुभाषनगर से करोंद तक मेट्रो रूट का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस पूरे कॉरिडोर की लंबाई करीब 16.74 किलोमीटर बताई गई है। इसमें कुछ हिस्सा एलिवेटेड होगा जबकि पुराने शहर के महत्वपूर्ण हिस्से में मेट्रो को अंडरग्राउंड ले जाने की योजना है।

    फेज 2 के तहत करीब 5.38 किलोमीटर हिस्से में छह एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाने हैं। इनमें पुल बोगदा ऐशबाग सिंधी कॉलोनी डीआईजी बंगला कृषि उपज मंडी और करोंद चौराहा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इस हिस्से के निर्माण पर करीब 650 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है। वहीं लगभग 3.39 किलोमीटर का हिस्सा अंडरग्राउंड रखा गया है। इस हिस्से में भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल होंगे। अंडरग्राउंड हिस्से के निर्माण पर करीब 890 करोड़ रुपये खर्च होने की योजना है।

    शाही कब्रिस्तान से जुड़े मेट्रो रूट को लेकर मामला पहले से ही विवाद में है। मध्य प्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में भी इस मुद्दे पर सुनवाई चल रही है और दोनों पक्ष अपना पक्ष रख रहे हैं। ऐसे में विधायक की ताजा आपत्ति ने इस विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। विधायक का कहना है कि जब तक संबंधित संस्था से आवश्यक अनुमति नहीं मिलती तब तक कब्रिस्तान में कोई काम नहीं होना चाहिए।

    अब देखना होगा कि मेट्रो परियोजना और कब्रिस्तान से जुड़े पक्ष के बीच यह विवाद किस तरह सुलझता है। एक तरफ भोपाल में मेट्रो के फेज 2 को तेजी से पूरा करने की कोशिश चल रही है तो दूसरी तरफ शाही कब्रिस्तान से जुड़े रूट को लेकर आपत्ति लगातार सामने आ रही है। ऐसे में इस हिस्से में निर्माण कार्य आगे बढ़ाने से पहले अनुमति और रूट को लेकर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • जेट खरीदने पर 350 करोड़ खर्च, फिर रनवे और संचालन पर भी करोड़ों, जानिए MP सरकार के लिए कितनी महंगी है पूरी डील

    जेट खरीदने पर 350 करोड़ खर्च, फिर रनवे और संचालन पर भी करोड़ों, जानिए MP सरकार के लिए कितनी महंगी है पूरी डील


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार का नया बिजनेस जेट बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 कनाडा से भारत पहुंचने की तैयारी में है। सरकार ने इसे मुख्यमंत्री राज्यपाल और दूसरे वीआईपी के इस्तेमाल के लिए खरीदा है। लेकिन करीब 350 करोड़ रुपये की कीमत वाला यह विमान आने के बाद तुरंत नियमित उड़ान भरने की स्थिति में नहीं होगा। इसे भारत में जरूरी औपचारिकताओं से गुजरना होगा और इसके संचालन के लिए प्रशिक्षित पायलटों से लेकर हैंगर और रखरखाव तक की व्यवस्था करनी होगी। सबसे अहम बात यह है कि यह जेट प्रदेश के हर एयरपोर्ट या हवाई पट्टी पर उतर भी नहीं सकेगा।

    सरकार के अपने विमान की जरूरत उस समय ज्यादा महसूस हुई जब 6 मई 2021 को राज्य का बीचक्राफ्ट किंग एयर बी-200जीटी ग्वालियर एयरबेस पर क्रैश लैंडिंग का शिकार हो गया था। यह विमान करीब 65 करोड़ रुपये में खरीदा गया था लेकिन बीमा नहीं होने के कारण सरकार को नुकसान की भरपाई नहीं मिल सकी। अब इसे करीब 7 करोड़ रुपये की रिजर्व कीमत पर बेचने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद से मुख्यमंत्री और दूसरे वीआईपी के लिए सरकार को निजी विमान किराए पर लेने पड़ रहे हैं।

    विधानसभा में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2021 से नवंबर 2025 के बीच विमान और हेलिकॉप्टर किराए पर करीब 290 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2025 में नवंबर तक ही यह खर्च 90 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया था। विमानन विभाग का तर्क है कि लगातार बढ़ रहे किराये के खर्च को कम करने के लिए अपना जेट खरीदना जरूरी है। हालांकि जेट खरीदने के बाद भी सरकार को इसके संचालन पर हर साल बड़ी रकम खर्च करनी होगी।

    चैलेंजर 3500 की खरीद को लेकर अलग अलग समय पर अलग कीमतें सामने आई हैं। वर्ष 2022 में सरकार करीब 120 करोड़ रुपये के जेट पर विचार कर रही थी। बाद में कीमत और डिलीवरी से जुड़े कारणों से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। मार्च 2024 में नए टेंडर में बॉम्बार्डियर और एम्ब्रेयर ने हिस्सा लिया। जुलाई 2024 में कैबिनेट ने बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 खरीदने की मंजूरी दी और उस समय कीमत करीब 233 करोड़ रुपये बताई गई। अब टैक्स ट्रांसपोर्ट और अन्य खर्च जोड़ने के बाद कुल अनुमान करीब 350 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

    सिर्फ खरीद कीमत ही पूरी तस्वीर नहीं है। विमान को चलाने में क्रू हैंगर बीमा मेंटेनेंस और ईंधन समेत कई खर्च होते हैं। अनुमान के मुताबिक 450 घंटे सालाना उड़ान पर इसका कुल खर्च करीब 30 से 33 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यानी प्रति उड़ान घंटे लागत किराए के विमान की तुलना में ज्यादा भी हो सकती है। हालांकि यदि किराए के विमान पर लगने वाला स्टैंडिंग चार्ज पूरी तरह समाप्त हो जाता है तो सरकार के कुल खर्च में कुछ राहत मिल सकती है।

    जेट के साथ सरकार ने एयरबस ACH160 हेलिकॉप्टर भी खरीदा है। हेलिकॉप्टर की कीमत करीब 150 करोड़ रुपये बताई गई थी जबकि टैक्स और अन्य शुल्क जोड़ने पर खर्च करीब 225 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इस तरह जेट और हेलिकॉप्टर के बाद हवाई ढांचे को तैयार करने का खर्च भी सरकार के सामने है।

    चैलेंजर 3500 को चलाने के लिए सरकार को पायलटों की ट्रेनिंग और जरूरी प्रमाणन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। विदेश में प्रशिक्षण लेने गए प्रदेश के दो पायलट पहली कोशिश में टेस्ट पास नहीं कर सके। फिलहाल उन्हें को पायलट का प्रमाणपत्र मिला है। इसलिए शुरुआत में बॉम्बार्डियर का एक प्रशिक्षित पायलट विमान उड़ाएगा। सरकारी पायलटों को उसके साथ निर्धारित उड़ान अनुभव पूरा करने के बाद स्वतंत्र रूप से जेट उड़ाने की अनुमति मिल सकेगी।

    सबसे बड़ी चुनौती रनवे को लेकर है। विभाग के आकलन के अनुसार जेट के लिए कम से कम करीब 1800 मीटर और बेहतर संचालन के लिए लगभग 2100 मीटर लंबा रनवे जरूरी माना जा रहा है। प्रदेश के सभी एयरपोर्ट और हवाई पट्टियां इस जरूरत को पूरा नहीं करतीं। मौजूदा आकलन के अनुसार करीब 10 स्थानों पर यह जेट उतर सकता है। इनमें भोपाल इंदौर ग्वालियर जबलपुर खजुराहो रीवा और दतिया के एयरपोर्ट के अलावा मंदसौर सिवनी और मंडला की हवाई पट्टियां शामिल हैं।

    सरकार कई अन्य हवाई पट्टियों के विस्तार की तैयारी भी कर रही है। इसके लिए जिलों से जमीन की जानकारी मांगी गई है। सरकारी जमीन मिलने पर एक पट्टी के विस्तार में करीब 10 से 15 करोड़ रुपये जबकि निजी जमीन अधिग्रहण की स्थिति में 30 से 40 करोड़ रुपये तक खर्च होने का अनुमान है। कुल मिलाकर हवाई पट्टियों के विस्तार पर करीब 300 से 400 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं।

    ऐसे में जेट हेलिकॉप्टर और रनवे विस्तार को जोड़कर पूरी योजना का अनुमानित खर्च करीब 875 से 975 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसमें हेलिपैड नेटवर्क का खर्च शामिल नहीं है। इसलिए सरकार के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि अपना जेट खरीदने से किराए का खर्च कितना बचेगा बल्कि यह भी है कि विमान को प्रभावी तरीके से चलाने के लिए अगले कई वर्षों में कितना अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। अंतिम फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार जेट का कितना नियमित इस्तेमाल करती है और मौजूदा किराये तथा स्टैंडिंग चार्ज में वास्तविक रूप से कितनी कमी आती है।