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  • भोपाल के मिक्स लैंड यूज विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, हजारों भूखंड मालिकों की निगाहें फैसले पर

    भोपाल के मिक्स लैंड यूज विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, हजारों भूखंड मालिकों की निगाहें फैसले पर


    भोपाल । भोपाल में आवासीय भवनों में वर्षों से संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस मामले पर शहर के हजारों व्यापारी और बड़ी संख्या में रहवासी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि अदालत का फैसला आगे की कार्रवाई की दिशा तय कर सकता है। रहवासियों का कहना है कि वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होंगे और हाल ही में नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई के फोटो और वीडियो भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

    दरअसल राजधानी के अरेरा कॉलोनी रोहित नगर बावड़ियाकलां 10 नंबर 11 नंबर और 12 नंबर मार्केट सहित कई इलाकों में लंबे समय से आवासीय भवनों से व्यवसाय संचालित किए जा रहे हैं। इसको लेकर स्थानीय रहवासियों ने लगातार आपत्ति जताई और हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा जहां से सख्त रुख अपनाए जाने के बाद नगर निगम ने कई प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू की। कुछ दुकानों को सील किया गया जबकि कई व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे।

    हालांकि इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई जिसमें व्यापारियों की समस्याओं पर भी चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि पूरे मामले की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी। यह समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समिति की रिपोर्ट आने तक व्यापारियों को अनावश्यक घबराने की जरूरत नहीं है। इसी निर्णय के बाद सोमवार को अधिकांश बंद दुकानें दोबारा खुल गईं।

    रहवासी संगठन इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद नगर निगम ने अपेक्षित कार्रवाई पूरी नहीं की और जिन प्रतिष्ठानों को बंद किया गया था उनके दोबारा खुलने से अदालत के आदेशों की भावना प्रभावित हुई है। उनका मानना है कि आवासीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से ट्रैफिक जाम पार्किंग की समस्या शोर प्रदूषण और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं जिससे लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।

    दूसरी ओर व्यापारी संगठन इस पूरे मामले को व्यावहारिक नजरिए से देखने की मांग कर रहे हैं। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज का कहना है कि वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने के कारण शहर में पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं हो सके। ऐसी स्थिति में हजारों व्यापारियों ने मजबूरी में आवासीय परिसरों से अपना कारोबार शुरू किया। संगठन का कहना है कि व्यापारी नियमित रूप से व्यावसायिक दर पर संपत्ति कर बिजली बिल और अन्य सभी सरकारी शुल्क का भुगतान कर रहे हैं जिससे शासन को करोड़ों रुपए का राजस्व भी प्राप्त हो रहा है।

    व्यापारियों ने गुजरात की तर्ज पर मिक्स लैंड यूज व्यवस्था लागू करने की मांग दोहराई है ताकि आवासीय क्षेत्रों में नियंत्रित और नियमानुसार व्यवसाय संचालित किए जा सकें। उनका कहना है कि इससे व्यापार भी प्रभावित नहीं होगा और आम नागरिकों को आवश्यक सेवाएं भी अपने क्षेत्र में मिलती रहेंगी।

    अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के निर्देश न केवल भोपाल बल्कि प्रदेश के अन्य शहरों में भी आवासीय और व्यावसायिक उपयोग से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण आधार साबित हो सकते हैं। सरकार की समीक्षा समिति की रिपोर्ट और न्यायालय के निर्देशों के बाद ही इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का स्थायी समाधान निकलने की उम्मीद है।

  • राम मंदिर चढ़ावा व्यवस्था को लेकर भोपाल में हंगामा, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की

    राम मंदिर चढ़ावा व्यवस्था को लेकर भोपाल में हंगामा, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की


    भोपालभोपाल में शनिवार को राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर संसद परिसर में हुए विपक्ष के प्रदर्शन के विरोध में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व्यापम चौराहे पर एकत्र हुए और वहां से विरोध मार्च निकालते हुए लिंक रोड की ओर बढ़े। प्रदर्शन के दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और राहुल गांधी के पुतले का दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया। पुलिस ने पहले से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे और बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की जिससे कुछ समय के लिए पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का मुक्की जैसी स्थिति बन गई। हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखा और किसी बड़े विवाद की नौबत नहीं आने दी। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

    विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि संसद परिसर में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर जिस प्रकार सांकेतिक प्रदर्शन किया गया उससे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना था कि भगवान श्रीराम और संत परंपरा से जुड़े प्रतीकों का जिस तरह इस्तेमाल किया गया वह उचित नहीं था और इसी के विरोध में भोपाल में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया।

    संगठन के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच पहले से चल रही है। उनके अनुसार मामले में विशेष जांच दल जांच कर रहा है और न्यायिक प्रक्रिया भी जारी है। उनका कहना था कि जिन लोगों पर आरोप लगे थे उनके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है और इस विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।

    प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने विपक्ष के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि राम मंदिर और हिंदू आस्था को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। विरोध मार्च के दौरान राहुल गांधी का पुतला जलाया गया और प्रतीकात्मक रूप से विरोध दर्ज कराया गया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने पुतले पर आपत्तिजनक व्यवहार भी किया।

    इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि संसद के मानसून सत्र से जुड़ी है जहां निर्दलीय सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में संसद परिसर पहुंचे थे। विपक्षी सांसदों के साथ उन्होंने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया था। विपक्ष का कहना था कि उनका उद्देश्य केवल पारदर्शिता और जांच की मांग उठाना था जबकि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे धार्मिक आस्था का अपमान बताया।

    मध्य प्रदेश संत समाज के प्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि रामलला और संत परंपरा करोड़ों लोगों की आस्था का विषय है और ऐसे मामलों में संवेदनशीलता बनाए रखना आवश्यक है।

    दूसरी ओर विपक्ष पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसका प्रदर्शन कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग से जुड़ा था और इसका उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था। इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज बनी हुई है।

    भोपाल में हुआ यह प्रदर्शन एक बार फिर यह संकेत देता है कि धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर देश में बहस लगातार तेज हो रही है। ऐसे मामलों में प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती कानून व्यवस्था बनाए रखने और सभी पक्षों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अवसर देना रहती है।

  • सुभालय विहार में गरजा बुलडोजर, अवैध निर्माण पर निगम का एक्शन; नियम तोड़कर बनी दो मंजिला बिल्डिंग ध्वस्त

    सुभालय विहार में गरजा बुलडोजर, अवैध निर्माण पर निगम का एक्शन; नियम तोड़कर बनी दो मंजिला बिल्डिंग ध्वस्त


    भोपाल । भोपाल में अवैध निर्माण और अनधिकृत प्लॉटिंग के खिलाफ नगर निगम ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को बावड़ियाकलां स्थित सुभालय विहार में अवैध रूप से निर्मित दो मंजिला भवन पर जेसीबी चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया गया। नगर निगम की इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों की मौजूदगी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।

    नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई गौरव गृह निर्माण सहकारी समिति के अंतर्गत आने वाले सुभालय परिसर में स्थित मकान क्रमांक बी 93 पर की गई। जांच में सामने आया कि जिस भूखंड पर निर्माण किया गया उसका मूल क्षेत्रफल 1312 वर्गमीटर था जबकि लगभग 900 वर्गमीटर क्षेत्र में जी प्लस वन भवन का निर्माण कर लिया गया था। सबसे अहम बात यह रही कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग द्वारा स्वीकृत लेआउट में इस भूखंड को एकल प्लॉट के रूप में स्वीकृति मिली थी लेकिन इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए इसका अवैध विभाजन कर दिया गया।

    नगर निगम की जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित भूखंड को अनधिकृत तरीके से छोटे हिस्सों में बांटकर बेचा गया और बाद में स्वीकृत मानकों के विपरीत भवन निर्माण कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का निर्माण पूरी तरह नियमों के खिलाफ था इसलिए नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। निगम का कहना है कि शहर में अवैध प्लॉटिंग और बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जहां भी नियमों का उल्लंघन मिलेगा वहां इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    कार्रवाई के दौरान नगर निगम के इंजीनियर राजस्व विभाग के अधिकारी और पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन ने पूरे अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराया ताकि किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।

    नगर निगम ने शहरवासियों से भी अपील की है कि किसी भी संपत्ति की खरीद या निर्माण कार्य शुरू करने से पहले संबंधित विभागों से उसकी वैधता और स्वीकृत लेआउट की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें। बिना अनुमति के निर्माण या अवैध प्लॉटिंग में निवेश करने से लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।

    नगर निगम का कहना है कि अवैध निर्माण केवल शहर की नियोजित विकास व्यवस्था को प्रभावित नहीं करता बल्कि भविष्य में सड़क जल निकासी पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर भी गंभीर असर डालता है। इसी कारण प्रशासन ऐसे मामलों में लगातार अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।

    प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि शहर में वैध और नियमानुसार विकास सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। इसलिए जो लोग बिना स्वीकृति के निर्माण कर रहे हैं या अवैध प्लॉटिंग में शामिल हैं उनके खिलाफ आने वाले समय में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

  • नकली पिस्टल के दम पर राहगीरों से वसूली, भोपाल में LLB छात्र सहित दो फर्जी पुलिसकर्मी गिरफ्तार

    नकली पिस्टल के दम पर राहगीरों से वसूली, भोपाल में LLB छात्र सहित दो फर्जी पुलिसकर्मी गिरफ्तार


    भोपाल । भोपाल में फर्जी पुलिस बनकर राहगीरों से वसूली करने वाले दो युवकों का भंडाफोड़ हो गया। राजधानी के शाहपुरा थाना क्षेत्र में दोनों आरोपी सिविल ड्रेस पहनकर चौराहे पर वाहन चालकों को रोकते थे और खुद को पुलिसकर्मी बताकर हेलमेट व अन्य यातायात नियमों के नाम पर लोगों से पैसे वसूलने की कोशिश करते थे। गुरुवार रात लोगों की सतर्कता और सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से एक नकली पिस्टल भी बरामद हुई है जिसके बाद उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    पुलिस के अनुसार गुरुवार रात करीब साढ़े नौ बजे शाहपुरा चौराहे से सूचना मिली कि दो युवक खुद को पुलिसकर्मी बताकर वाहन चालकों की जांच कर रहे हैं और उनसे रुपए मांग रहे हैं। सूचना मिलते ही शाहपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान दोनों ने पहले खुद को कोहेफिजा थाने में पदस्थ पुलिसकर्मी बताया लेकिन जब उनसे पहचान संबंधी दस्तावेज मांगे गए और सख्ती से पूछताछ की गई तो उनका झूठ सामने आ गया।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमान खान और कार्तिक मिश्रा के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में अमान खान ने बताया कि वह एमपी नगर स्थित एक निजी आईटी कंपनी में एचआर के पद पर कार्यरत है जबकि कार्तिक मिश्रा एलएलबी का छात्र है। तलाशी के दौरान अमान खान की कमर से एक नकली पिस्टल भी बरामद हुई जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया।

    घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों को दोनों युवकों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। लोगों ने उनसे पूछा कि वे किस थाने से हैं और अपना पहचान पत्र दिखाएं। जब दोनों कोई वैध पहचान नहीं दिखा सके तो लोगों ने उनका वीडियो बनाना शुरू कर दिया। वीडियो में लोग यह भी सवाल करते दिखाई दे रहे हैं कि जब वे खुद बिना हेलमेट वाहन चला रहे हैं तो दूसरों को किस अधिकार से रोक रहे हैं। इसी दौरान पुलिस को सूचना दी गई जिसके बाद दोनों की पोल खुल गई।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी हेलमेट नहीं पहनने या अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन का डर दिखाकर लोगों से मौके पर ही पैसे मांगते थे। हालांकि वे किसी भी वाहन चालक का वैधानिक चालान नहीं काटते थे। पुलिस का मानना है कि दोनों लोगों को पुलिस कार्रवाई का भय दिखाकर अवैध वसूली कर रहे थे।

    गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने सफाई देते हुए कहा कि वे लोगों के साथ केवल प्रैंक कर रहे थे लेकिन पुलिस ने इस दावे को खारिज कर दिया। थाना प्रभारी के मुताबिक मौके पर कोई वीडियो शूट नहीं हो रही थी और ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि दोनों केवल मजाक कर रहे थे। पुलिस इसे सुनियोजित तरीके से लोगों को धोखा देकर पैसे ऐंठने का मामला मान रही है।

    फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने पहले भी इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं। अमान खान के खिलाफ पहले से मारपीट का एक मामला दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है जबकि कार्तिक मिश्रा के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि दोनों अब तक कितने लोगों से फर्जी पुलिस बनकर वसूली कर चुके हैं और इस पूरे नेटवर्क में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

  • भोपाल में जल गुणवत्ता पर विवाद, यूनियन कार्बाइड क्षेत्र के पानी में फीकल कोलीफॉर्म मिलने का दावा

    भोपाल में जल गुणवत्ता पर विवाद, यूनियन कार्बाइड क्षेत्र के पानी में फीकल कोलीफॉर्म मिलने का दावा


    भोपाल । भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गैस पीड़ितों के चार संगठनों ने दावा किया है कि फैक्ट्री के आसपास की बस्तियों में लोगों को सीवेज से दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही है जिससे बड़े स्तर पर स्वास्थ्य संकट पैदा होने का खतरा बढ़ गया है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हालात किसी बड़े जलजनित रोग के प्रकोप में बदल सकते हैं।

    संगठनों ने बताया कि इस महीने प्रभावित इलाकों की 30 बस्तियों से पेयजल के 63 नमूने एकत्र किए गए थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के बैक्टीरिया की मौजूदगी इस बात का संकेत होती है कि पेयजल में मल या सीवेज का मिश्रण हो चुका है और ऐसा पानी स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने कहा कि जांच के नतीजे बेहद चिंताजनक हैं। उनका दावा है कि करीब 70 प्रतिशत नमूने दूषित पाए गए हैं और 30 में से 19 बस्तियों में लोगों तक असुरक्षित पानी पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ा तालाब से सप्लाई किए गए पानी के अधिकांश नमूने और कोलार डैम से जुड़े कुछ नमूने भी जांच में दूषित मिले हैं।

    गैस पीड़ित संगठनों का आरोप है कि प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग लंबे समय से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इसके कारण दस्त उल्टी टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उनका कहना है कि कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और स्थानीय क्लीनिकों में संक्रमण से जुड़े मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

    संगठनों ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड परिसर के आसपास भूजल के रासायनिक प्रदूषण को गंभीर मानते हुए प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पानी पहुंचाने की व्यवस्था करने की बात कही गई थी लेकिन उनका आरोप है कि जमीनी स्तर पर आज भी स्थिति संतोषजनक नहीं है।

    भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने कहा कि वर्ष 2018 में भी सुप्रीम कोर्ट ने सीवर लाइन और ड्रेनेज व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए थे। नगर निगम ने तय समय में काम पूरा करने का भरोसा दिया था लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी अधिकांश क्षेत्रों में समस्या जस की तस बनी हुई है।

    भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने मांग की कि दूषित पेयजल आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मामले में लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। साथ ही प्रभावित इलाकों में सीवर और ड्रेनेज परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र एवं नियमित निगरानी की व्यवस्था भी लागू की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

  • सावन में शिवभक्ति का महासंगम: 31 जुलाई से निकलेगी भव्य कांवड़ यात्रा भोपाल से नर्मदापुरम तक गूंजेगा हर हर महादेव

    सावन में शिवभक्ति का महासंगम: 31 जुलाई से निकलेगी भव्य कांवड़ यात्रा भोपाल से नर्मदापुरम तक गूंजेगा हर हर महादेव


    भोपाल। सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही राजधानी भोपाल शिवभक्ति के रंग में रंगने जा रही है। भगवान भोलेनाथ की आराधना को समर्पित चार दिवसीय विशाल कांवड़ यात्रा 31 जुलाई से प्रारंभ होगी। ॐ शिव सेवा भक्त मंडल के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक यात्रा में बड़ी संख्या में शिवभक्त भोपाल से नर्मदापुरम पहुंचकर मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर पदयात्रा के माध्यम से वापस राजधानी आएंगे और भगवान शिव का विधिवत जलाभिषेक करेंगे। पूरे आयोजन के दौरान हर हर महादेव और बोल बम के जयघोष से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहेगा।

    मंडल के पदाधिकारियों के अनुसार श्रद्धालुओं का जत्था 31 जुलाई शुक्रवार को दोपहर दो बजे भोपाल से नर्मदापुरम के लिए रवाना होगा। वहां मां नर्मदा के पावन तट से जल भरने के बाद श्रद्धालु कांवड़ लेकर पैदल यात्रा करते हुए भोपाल लौटेंगे। यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं बल्कि आस्था अनुशासन और सेवा भावना का भी प्रतीक मानी जाती है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

    चार दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में श्रद्धालु भजन कीर्तन मंत्रोच्चार और शिव नाम के संकीर्तन के साथ आगे बढ़ेंगे। पूरे मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां भी की गई हैं। जगह जगह पेयजल चिकित्सा और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि कांवड़ियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा भी यात्रा के दौरान सेवा कार्य किए जाएंगे।

    यात्रा का सबसे प्रमुख आयोजन 3 अगस्त सोमवार को होगा। इस दिन प्राचीन श्री पिपलेश्वर महादेव मंदिर पात्रा पुल से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए परम पूज्य बाबा बटेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेगी जहां मां नर्मदा के पवित्र जल से भगवान शिव का महाजलाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद यात्रा का समापन बड़े वाले महादेव मंदिर कायस्थपुरा में धार्मिक अनुष्ठानों और आरती के साथ होगा।

    आयोजकों ने बताया कि पूरे आयोजन के दौरान महाआरती शिव भजन रुद्राभिषेक और ॐ नमः शिवाय के मंत्रों की गूंज श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगी। सावन में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि इस दौरान भगवान शिव को नर्मदा और गंगा जैसे पवित्र जल से अभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होने की धार्मिक मान्यता है।

    मंडल ने राजधानी और आसपास के क्षेत्रों के सभी शिवभक्तों से इस पावन यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक एकता सेवा और भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का भी प्रतीक है। सावन के इस पावन अवसर पर निकलेगी यह विशाल कांवड़ यात्रा निश्चित रूप से भोपाल को शिवमय बना देगी और हर ओर हर हर महादेव के जयघोष से भक्तिमय वातावरण देखने को मिलेगा।

  • मांगें पूरी होने तक नहीं लौटेंगे किसान भोपाल में पैदल मार्च के साथ सीएम हाउस घेराव की तैयारी सात दिन के राशन के साथ पहुंचे प्रदर्शनकारी

    मांगें पूरी होने तक नहीं लौटेंगे किसान भोपाल में पैदल मार्च के साथ सीएम हाउस घेराव की तैयारी सात दिन के राशन के साथ पहुंचे प्रदर्शनकारी

    भोपाल  मध्यप्रदेश में किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। मूंग की शत प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हजारों किसानों ने भोपाल की ओर कूच कर दिया। मंगलवार को राजधानी की सीमा पर मंडीदीप स्थित कलियासोत नदी के पुल के पास पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगाई थी लेकिन बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने उसे हटाते हुए भोपाल में प्रवेश कर लिया। इसके बाद किसानों का विशाल पैदल मार्च राजधानी की ओर बढ़ता गया और पूरे इलाके में जय जवान जय किसान के नारों से माहौल गूंज उठा।

    आंदोलन में शामिल किसानों का कहना है कि वे केवल प्रदर्शन करने नहीं बल्कि अपनी मांगों को पूरा करवाने के इरादे से आए हैं। उनका लक्ष्य मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना है और जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती तब तक वे वापस नहीं लौटेंगे। आंदोलन को लंबा खींचने की तैयारी के तहत किसान अपने साथ सात दिन का राशन पानी और जरूरी सामान भी लेकर पहुंचे हैं। कई किसान अपने ट्रैक्टर ट्रॉली में पहले से तैयार भोजन और दाल बाटी जैसी खाद्य सामग्री भी साथ लाए हैं ताकि आंदोलन के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि सरकार को कई बार ज्ञापन और बातचीत के माध्यम से किसानों की समस्याओं से अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। किसानों का आरोप है कि मूंग की सरकारी खरीदी सीमित होने के कारण उन्हें अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसके अलावा खाद वितरण की ई टोकन व्यवस्था भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। उनका कहना है कि तकनीकी खामियों और अव्यवस्था के चलते समय पर खाद नहीं मिल रही जिससे खेती प्रभावित हो रही है।

    भोपाल सीमा पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसानों को राजधानी में प्रवेश से रोका जा सके लेकिन किसानों के भारी दबाव के आगे बैरिकेडिंग टिक नहीं सकी। किसानों के प्रवेश के बाद पुलिस और प्रशासन पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है तथा राजधानी के कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

    आंदोलन में शामिल किसान हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़ रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की बात कह रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक फसल या एक जिले का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के अधिकारों की लड़ाई है। यदि सरकार जल्द सकारात्मक पहल नहीं करती तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

    अब सभी की नजर सरकार और किसान संगठनों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हुई है। यदि जल्द समाधान नहीं निकलता तो राजधानी में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियां भी प्रभावित होने की संभावना है।

  • देवशयनी एकादशी पर भोपाल में उमड़ी आस्था सुंदरकांड पाठ भजन संध्या और 111 दीपों की महाआरती ने बांधा समां

    देवशयनी एकादशी पर भोपाल में उमड़ी आस्था सुंदरकांड पाठ भजन संध्या और 111 दीपों की महाआरती ने बांधा समां


    भोपाल । देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर राजधानी भोपाल का वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया। नवयुवक मंडल साहू समाज द्वारा श्री लक्ष्मीनारायण साहू समाज मंदिर स्थित मां कर्मा देवी रोड घोड़ा निक्कास में भव्य श्रीरामचरितमानस सुंदरकांड पाठ एवं भजन संध्या का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीराम और संकटमोचन हनुमानजी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर जय श्रीराम और बजरंगबली के जयघोष से गूंजता रहा।

    कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और विधि विधान के साथ हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ किया। सुंदरकांड के प्रत्येक चौपाई और दोहे के साथ पूरा वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के आदर्शों और हनुमानजी की अटूट भक्ति का स्मरण करते हुए सुख समृद्धि और समाज के कल्याण की कामना की।

    सुंदरकांड पाठ के पश्चात आयोजित भजन संध्या ने पूरे माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया। प्रसिद्ध भजन गायक रुपेश राज और हरीश कुशवाहा ने श्रीराम और हनुमानजी की महिमा का गुणगान करते हुए एक से बढ़कर एक भक्ति गीत प्रस्तुत किए। उनकी मधुर प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु देर रात तक भक्ति में लीन होकर झूमते रहे। पूरा मंदिर परिसर भक्ति संगीत और जयकारों से गूंजता रहा।

    कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और भावपूर्ण क्षण 111 दीपों से की गई भव्य महाआरती रही। दीपों की दिव्य रोशनी और आरती की गूंज ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया। महाआरती के बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया और सभी ने धर्म एवं समाज की उन्नति की प्रार्थना की।

    नवयुवक मंडल साहू समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि यह मंडल का पहला सामूहिक धार्मिक आयोजन था। इसका उद्देश्य समाज में धार्मिक सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को मजबूत करना तथा युवाओं को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन नियमित रूप से किए जाएंगे ताकि समाज में आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिल सके।

    इस अवसर पर प्रदेश जिला और स्थानीय इकाइयों के पदाधिकारी समाज के वरिष्ठजन महिलाएं युवा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे समाज को एकजुट करने वाला प्रेरणादायी प्रयास बताया। श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं बल्कि सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करते हैं।

    देवशयनी एकादशी के इस भव्य आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होकर धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे बढ़ता है तो आस्था के साथ साथ सामाजिक एकता भी मजबूत होती है। सुंदरकांड पाठ भजन संध्या और 111 दीपों की महाआरती ने इस धार्मिक उत्सव को श्रद्धा भक्ति और सांस्कृतिक गौरव का यादगार आयोजन बना दिया।

  • भोपाल में नशामुक्ति का संकल्प टीटी नगर स्टेडियम से निकली रन फॉर लाइफ मैराथन में युवाओं ने दिखाई एकजुटता

    भोपाल में नशामुक्ति का संकल्प टीटी नगर स्टेडियम से निकली रन फॉर लाइफ मैराथन में युवाओं ने दिखाई एकजुटता


    भोपाल । राजधानी भोपाल में रविवार को नशे के खिलाफ जनजागरूकता का बड़ा संदेश देते हुए रन फॉर लाइफ मैराथन का आयोजन किया गया। मध्य प्रदेश पुलिस के प्रदेशव्यापी महाअभियान नशे से दूरी है जरूरी 2.0 के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों युवाओं खिलाड़ियों पुलिस अधिकारियों और आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पुलिस और सामाजिक न्याय विभाग की संयुक्त पहल से आयोजित इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

    मैराथन की शुरुआत सुबह टीटी नगर स्टेडियम से हुई। प्रतिभागियों के लिए दो किलोमीटर वॉकथॉन पांच किलोमीटर हाफ मैराथन और दस किलोमीटर मैराथन जैसी अलग अलग श्रेणियां रखी गई थीं ताकि हर आयु वर्ग के लोग इस अभियान से जुड़ सकें। तिरंगा हाथों में लेकर दौड़ते युवाओं ने नशामुक्त समाज का संदेश दिया और पूरे आयोजन में देशभक्ति तथा सामाजिक जिम्मेदारी का उत्साह दिखाई दिया।

    कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों को नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई गई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नशे के खिलाफ यह केवल एक प्रतीकात्मक दौड़ नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार तथा समाज को भी इस बुराई से बचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

    इस अवसर पर एडीजी नारकोटिक्स डी श्रीनिवास वर्मा ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश के हर व्यक्ति तक यह संदेश पहुंचाना है कि स्वस्थ जीवन ही सबसे बड़ी पूंजी है और नशे से दूर रहकर ही बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नशे की लत केवल एक व्यक्ति को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करती है। इसलिए सभी नागरिकों को से नो टू ड्रग्स का संकल्प लेकर समाज को नशामुक्त बनाने में योगदान देना चाहिए।

    एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस मुख्यालय एवं अपराध डॉ मोनिका शुक्ला ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि इसमें पूरे समाज की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई और पुरानी दोनों पीढ़ियों को मिलकर इस सामाजिक बुराई के खिलाफ जागरूकता फैलानी होगी ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके।

    मैराथन के दौरान प्रतिभागियों में खासा उत्साह देखने को मिला। युवाओं ने इस अभियान को सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि खेल और फिटनेस की गतिविधियां युवाओं को नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कार्यक्रम के अंत में पुलिस अधिकारियों ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे जनजागरूकता अभियानों को लगातार जारी रखने का भरोसा दिलाया।

    मध्य प्रदेश पुलिस का नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान प्रदेशभर में लगातार चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना और समाज में नशामुक्ति की मजबूत संस्कृति विकसित करना है। भोपाल में आयोजित रन फॉर लाइफ मैराथन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जिसने युवाओं को सामाजिक बदलाव की मुहिम से जोड़ने का प्रभावी संदेश दिया।

  • भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव: आज से हर 15 मिनट में मिलेगी ट्रेन, दोनों ट्रैक पर दौड़ेगी; 50 ट्रिप का शेड्यूल लागू

    भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव: आज से हर 15 मिनट में मिलेगी ट्रेन, दोनों ट्रैक पर दौड़ेगी; 50 ट्रिप का शेड्यूल लागू


    भोपाल । भोपाल मेट्रो ने शहर के यात्रियों को बड़ी सौगात दी है। शनिवार, 25 जुलाई से राजधानी में मेट्रो सेवा और अधिक तेज, सुविधाजनक और आधुनिक हो गई है। अब सुभाषनगर से एम्स स्टेशन के बीच मेट्रो दोनों ट्रैक पर संचालित होगी और पीक ऑवर्स में यात्रियों को हर 15 मिनट में ट्रेन उपलब्ध होगी। पहले जहां मेट्रो सिंगल ट्रैक पर चलने के कारण यात्रियों को करीब 75 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब यह अंतर काफी कम हो जाएगा।

    मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (MPMRCL) के अनुसार, नए सिग्नलिंग सिस्टम के लागू होने के बाद प्रतिदिन कुल 50 ट्रिप संचालित की जाएंगी। सुभाषनगर स्टेशन से पहली मेट्रो सुबह 9 बजे रवाना होगी। व्यस्त समय में हर 15 मिनट और सामान्य समय में हर 30 मिनट के अंतराल पर ट्रेन उपलब्ध रहेगी। इससे ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

    भोपाल मेट्रो की शुरुआत 20 दिसंबर 2025 को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की थी। अगले दिन से आम यात्रियों के लिए सेवा शुरू हुई थी, लेकिन अब तक मेट्रो केवल एक ट्रैक पर संचालित हो रही थी। करीब सात महीने बाद आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के चालू होने से पहली बार दोनों ट्रैक पर नियमित संचालन संभव हो पाया है।

    इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले जून महीने में कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम ने दो दिन तक निरीक्षण किया था। आवश्यक सुरक्षा परीक्षण पूरे होने और मंजूरी मिलने के बाद शनिवार से नए सिस्टम के अनुसार संचालन शुरू कर दिया गया है।

    यात्रियों को आकर्षित करने के लिए मेट्रो प्रबंधन ने विशेष प्रमोशनल डिस्काउंट भी लागू किया है। रिटर्न जर्नी टिकट पर 5 प्रतिशत तथा ग्रुप टिकट पर 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी। वहीं, MPMRCL मोबाइल ऐप के जरिए ई-वॉलेट रिचार्ज करने पर 8 से 15 प्रतिशत तक अतिरिक्त बोनस राशि दी जाएगी। 200 से 499 रुपए तक के रिचार्ज पर 8 प्रतिशत, 500 से 999 रुपए पर 10 प्रतिशत, 1000 से 1499 रुपए पर 12 प्रतिशत और 1500 से 2000 रुपए तक के रिचार्ज पर 15 प्रतिशत बोनस का लाभ मिलेगा।

    यात्रियों की सुविधा के लिए सभी स्टेशन पहली ट्रेन के निर्धारित समय से 15 मिनट पहले खोल दिए जाएंगे, ताकि सुरक्षा जांच और टिकट लेने में किसी तरह की परेशानी न हो। प्रत्येक स्टेशन के निर्धारित प्रवेश द्वार पर मैनुअल टिकटिंग की व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी।

    करीब 800 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया यह अत्याधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक तकनीक पर आधारित है। यह सिस्टम ट्रेनों की गति नियंत्रित करने, सुरक्षित दूरी बनाए रखने, दोनों ट्रैक पर संचालन और भविष्य में मेट्रो की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। माना जा रहा है कि इस नई व्यवस्था के बाद भोपाल मेट्रो का संचालन पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और यात्रियों के लिए सुविधाजनक हो जाएगा।