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  • एमपी सरकार की नई पहल: स्कूल छोड़ चुके बच्चे फिर से शुरू कर सकेंगे पढ़ाई

    एमपी सरकार की नई पहल: स्कूल छोड़ चुके बच्चे फिर से शुरू कर सकेंगे पढ़ाई


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से पढ़ाई से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘शिक्षा घर योजना’ को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन छात्रों को दोबारा शिक्षा से जोड़ना है, जिन्होंने किसी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी।

    यह निर्णय हाल ही में मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया, जहां मौजूदा योजनाओं की प्रगति और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत खासतौर पर कक्षा 8 या उससे ऊपर पढ़ाई छोड़ चुके विद्यार्थियों को दोबारा शिक्षा प्रणाली में शामिल किया जाएगा।

    सरकार का मानना है कि प्रदेश में अब भी कई क्षेत्रों में ड्रॉपआउट दर चिंता का विषय बनी हुई है। आर्थिक कठिनाइयों, सामाजिक परिस्थितियों या अन्य कारणों से कई छात्र स्कूल छोड़ देते हैं, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होता है। ‘शिक्षा घर योजना’ के जरिए ऐसे छात्रों की पहचान कर उन्हें फिर से स्कूलों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    योजना के तहत शिक्षा विभाग गांव-गांव और शहरों में ऐसे बच्चों का सर्वे करेगा जो पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इसके बाद उन्हें नजदीकी स्कूलों, ओपन स्कूलिंग सिस्टम या अन्य वैकल्पिक शिक्षा कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। इससे छात्रों को अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करने का अवसर मिलेगा और वे आगे बेहतर करियर की ओर बढ़ सकेंगे।

    बैठक में मुख्यमंत्री ने एक और महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही। उनका कहना है कि इससे छात्रों को भारतीय इतिहास और संस्कृति की बेहतर समझ मिलेगी और उनमें राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

    इसके अलावा बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि स्कूल शिक्षा विभाग की 14 प्रमुख योजनाओं को जारी रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन समय पर और प्रभावी ढंग से किया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    साथ ही, स्कूल भवनों की स्थिति की समीक्षा करते हुए आंशिक रूप से जर्जर भवनों की तत्काल मरम्मत के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार का फोकस सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने पर है, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

    फिलहाल, शिक्षा विभाग ‘शिक्षा घर योजना’ के मॉडल को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है और उम्मीद की जा रही है कि इसे जल्द ही पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। यह योजना शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।

  • हाईटेंशन लाइन के नीचे शिफ्टिंग का विरोध, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बंगले पहुंचे रहवासी

    हाईटेंशन लाइन के नीचे शिफ्टिंग का विरोध, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बंगले पहुंचे रहवासी


    भोपाल ।
    भोपाल के बावड़ियाकलां स्थित दीपक नगर झुग्गी बस्ती से 35 परिवारों को बाग मुगालिया एक्सटेंशन में शिफ्ट किए जाने का मामला अब विवादों में घिर गया है। नई जगह पर पुनर्वास का विरोध करते हुए सोमवार को स्थानीय रहवासी नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बंगले पहुंचे और उन्हें ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।

    रहवासियों और स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि जिन परिवारों को बाग मुगालिया एक्सटेंशन में बसाया गया है, वह क्षेत्र ग्रीन बेल्ट के अंतर्गत आता है। इसके अलावा वहां से हाईटेंशन बिजली लाइन भी गुजर रही है, जिससे लोगों की सुरक्षा को लेकर खतरा बना हुआ है।

    पर्यावरणविद् उमाशंकर तिवारी ने कहा कि इस तरह की शिफ्टिंग से न केवल हरियाली को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि वहां रहने वाले परिवारों की जिंदगी भी जोखिम में पड़ सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित और बेहतर स्थान पर पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।

    मामले को लेकर रहवासियों ने भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा से भी शिकायत की है। लोगों का कहना है कि बिना उचित सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था के परिवारों को वहां बसाना सही नहीं है।

    रहवासियों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से अपील की है कि पुनर्वास नीति को मानवीय और सुरक्षित तरीके से लागू किया जाए, ताकि लोगों को मूलभूत सुविधाओं के साथ सुरक्षित आवास मिल सके और शहर की हरियाली भी प्रभावित न हो।

  • ‘मेरी जिंदगी नर्क बन चुकी है… मुझे यहां से ले जाओ’, ट्विशा शर्मा की मां संग चैट आई सामने

    ‘मेरी जिंदगी नर्क बन चुकी है… मुझे यहां से ले जाओ’, ट्विशा शर्मा की मां संग चैट आई सामने



    भोपाल। भोपाल के चर्चित कटारा हिल्स संदिग्ध मौत मामले में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा सामने आया है। पूर्व जज की बहू ट्विशा शर्मा और उसकी मां के बीच हुई व्हाट्सएप चैट सार्वजनिक हुई है, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। इन चैट्स में ट्विशा ने अपनी शादीशुदा जिंदगी को “नर्क” बताते हुए मां से उसे वहां से ले जाने की गुहार लगाई थी।

    जानकारी के मुताबिक, 12 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिली 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा ने मौत से करीब पांच दिन पहले अपनी मां को कई भावुक मैसेज भेजे थे। चैट में ट्विशा लिखती है— “मेरी जिंदगी नर्क बन चुकी है… ये लोग बहुत क्रूर हैं… समर्थ मुझसे ठीक से बात तक नहीं करता… तुम यहां आओ और मुझे यहां से ले जाओ… ये लोग मुझे जीने नहीं देंगे।”

    इन चैट्स के सामने आने के बाद मृतका का परिवार इसे आत्महत्या नहीं बल्कि प्रताड़ना से जुड़ा मामला बता रहा है। परिवार का आरोप है कि शादी के कुछ ही महीनों बाद ट्विशा मानसिक रूप से टूट चुकी थी और लगातार दबाव में जी रही थी।

    इधर कोर्ट में आरोपी पक्ष की ओर से भी कई दावे किए गए हैं। ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह ने जमानत आवेदन में आरोप लगाया कि ट्विशा ड्रग एडिक्ट थी और उसे मूड स्विंग्स की समस्या थी। इस पर ट्विशा की मां ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब उनकी बेटी इस दुनिया में नहीं है, इसलिए उसके बारे में कुछ भी कहा जा रहा है।

    मामले में एक और चौंकाने वाला दावा सामने आया है। परिवार के अनुसार ट्विशा करीब दो महीने की गर्भवती थी और उसके पति समर्थ सिंह ने उसके चरित्र पर सवाल उठाए थे। आरोप है कि समर्थ ने ट्विशा से बच्चे को लेकर आपत्तिजनक सवाल किए थे, जिससे वह मानसिक रूप से और ज्यादा परेशान हो गई थी।

    ट्विशा के चचेरे भाई आशीष शर्मा ने दावा किया है कि समर्थ खुद नशा करता था और जब ट्विशा ने इसका विरोध किया तो उसे प्रताड़ित किया जाने लगा। परिवार का आरोप है कि आरोपी पक्ष प्रभावशाली होने के कारण पुलिस जांच प्रभावित हो रही है। इसी वजह से परिजन अब मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग कर रहे हैं।

    फिलहाल पुलिस एसआईटी के जरिए मामले की जांच कर रही है। वहीं ट्विशा की मौत से जुड़े हर नए खुलासे के बाद यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

  • स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर-सूरत को टक्कर देने मैदान में उतरा भोपाल, 106 नोडल अफसरों ने संभाला मोर्चा

    स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर-सूरत को टक्कर देने मैदान में उतरा भोपाल, 106 नोडल अफसरों ने संभाला मोर्चा


    नई दिल्ली। स्वच्छ सर्वेक्षण में देश के सबसे साफ शहरों की रेस अब और दिलचस्प हो गई है। इंदौर, सूरत और नवी मुंबई जैसे शहरों को चुनौती देने के लिए भोपाल नगर निगम ने इस बार पूरी ताकत झोंक दी है। राजधानी भोपाल ने सुपर स्वच्छ लीग में एंट्री के बाद अपनी रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है और शहर को चमकाने के लिए 106 नोडल अधिकारियों को मैदान में उतार दिया गया है।

    नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन खुद इस अभियान की निगरानी कर रही हैं। उनके निर्देशन में शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को युद्ध स्तर पर सुधारने का काम जारी है। खासतौर पर उन इलाकों पर फोकस किया जा रहा है, जहां पहले गंदगी और अव्यवस्था की शिकायतें सबसे ज्यादा आती थीं।

    भोपाल की तंग गलियों, सरकारी क्वार्टर्स के पीछे के हिस्सों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुबह-सुबह सफाई कर्मचारी सड़कों से धूल हटाने, कचरा साफ करने, गड्ढे भरने और दीवारों की पुताई करने में जुटे नजर आ रहे हैं। नगर निगम ने साफ कर दिया है कि स्वच्छता अभियान में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाल ही में गंदगी मिलने पर दो अधिकारियों को सस्पेंड भी किया गया है, जबकि कई अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं।

    निगम का कहना है कि संसाधन सीमित होने के बावजूद टीम पूरी मेहनत से काम कर रही है। अशोका गार्डन, गिन्नोरी, नारायण नगर और बिजली नगर जैसे इलाकों में अब साफ-सफाई का असर दिखाई देने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों पर कचरा कम हुआ है और दीवारों पर की गई पेंटिंग व सजावट से मोहल्लों की तस्वीर बदल रही है।

    इस बार उत्कृष्ट काम करने वाले सफाई कर्मचारियों और फील्ड वर्कर्स को विशेष सम्मान देने की भी तैयारी है। नगर निगम का लक्ष्य सिर्फ रैंकिंग सुधारना नहीं, बल्कि भोपाल को देश के सबसे स्वच्छ और सुंदर शहरों की सूची में मजबूत पहचान दिलाना है।

  • भोपाल बहू सुसाइड केस में नया मोड़: रिटायर्ड जज सास ने ट्विशा को बताया ड्रग एडिक्ट, परिजन ने जांच पर उठाए सवाल

    भोपाल बहू सुसाइड केस में नया मोड़: रिटायर्ड जज सास ने ट्विशा को बताया ड्रग एडिक्ट, परिजन ने जांच पर उठाए सवाल



    भोपाल। भोपाल के कटारा हिल्स स्थित बागमुगालिया एक्सटेंशन में रिटायर्ड महिला जज की बहू ट्विशा शर्मा की आत्महत्या का मामला लगातार उलझता जा रहा है। घटना के छह दिन बाद भी परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया है, जबकि आरोपी सास को मिली जमानत के बाद विवाद और गहरा गया है।

    इसी बीच केस में नया मोड़ तब आया जब आरोपी सास गिरीबाला सिंह की जमानत याचिका के कुछ हिस्से सामने आए। याचिका में उन्होंने बहू ट्विशा को ड्रग एडिक्ट बताया है और दावा किया है कि उसे नशे की लत थी, नशा न मिलने पर उसके व्यवहार में बदलाव आता था। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि ट्विशा मानसिक रूप से अस्थिर थी और उसका इलाज मनोचिकित्सक व काउंसलर से चल रहा था।

    जमानत आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्विशा 17 अप्रैल को दिल्ली गई थी और करीब 12 घंटे तक लापता रही थी, लेकिन उसने इस बारे में किसी को जानकारी नहीं दी। इसके अलावा सास की ओर से दावा किया गया है कि बहू को हर महीने उसकी जरूरत के हिसाब से 5 हजार से 50 हजार रुपये तक ऑनलाइन पैसे दिए जाते थे, जिसके ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड भी कोर्ट में पेश किए गए हैं।

    वहीं परिजनों ने इन दावों को खारिज करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि पुलिस कार्रवाई में लापरवाही बरती जा रही है और आरोपी पति समर्थ की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। परिजनों ने एम्स में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने और बाहरी एजेंसी से जांच की मांग की है।

    पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसीपी मिसरोद के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी है, जिसमें छह सदस्य शामिल हैं। टीम मामले के हर पहलू की जांच कर रही है, जबकि आरोपी पति की तलाश जारी है।

  • भोपाल मॉडल डेथ केस: परिवार का हत्या का दावा, अग्रिम जमानत पर टिकी निगाहें, SIT जांच तेज

    भोपाल मॉडल डेथ केस: परिवार का हत्या का दावा, अग्रिम जमानत पर टिकी निगाहें, SIT जांच तेज

    भोपाल में मॉडल और साउथ इंडियन एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। शादी के कुछ ही महीनों बाद सामने आई इस घटना ने न केवल उनके परिवार को सदमे में डाल दिया है, बल्कि पूरे शहर में भी चर्चा का माहौल बना दिया है। परिवार ने साफ तौर पर इसे आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या बताया है और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां पर भी आरोप लगाए गए हैं, जिससे यह केस और अधिक संवेदनशील हो गया है।

    परिवार का कहना है कि शादी के बाद से ही ट्विशा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच उनकी संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा विवाद जांच प्रक्रिया को लेकर सामने आया है, जहां पोस्टमार्टम के दौरान वह बेल्ट उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसे कथित तौर पर घटना में इस्तेमाल किया गया बताया जा रहा है। बाद में उस बेल्ट को जांच के लिए भेजा गया, लेकिन तब तक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जांच प्रभावित हो चुकी थी।

    परिजनों ने इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शुरुआती जांच में गंभीर लापरवाही हुई है, जिससे साक्ष्यों के सही विश्लेषण में बाधा आई है। इसी आधार पर परिवार लगातार मामले की दोबारा जांच और उच्च स्तर की निगरानी की मांग कर रहा है। परिवार ने यह भी कहा है कि उन्हें न्याय मिलने तक वह शव लेने से इनकार कर रहे हैं।

    इस बीच, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच के लिए विशेष जांच दल गठित कर दिया गया है। वहीं, आरोपी पति की अग्रिम जमानत याचिका पर अदालत में सुनवाई होनी है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। परिवार इस याचिका का विरोध कर रहा है और जमानत रद्द करने की मांग कर रहा है।

    परिवार ने यह भी मांग की है कि मामले का दोबारा पोस्टमार्टम दिल्ली के एम्स में कराया जाए ताकि मौत के कारणों को लेकर कोई संदेह न रहे। साथ ही वे इस केस को किसी अन्य राज्य में ट्रांसफर करने की भी अपील कर रहे हैं, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।

    इस पूरे प्रकरण ने न केवल कानूनी और जांच प्रणाली को सवालों के घेरे में खड़ा किया है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर लगातार बहस जारी है। परिवार न्याय की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहा है, जबकि पुलिस और जांच एजेंसियां मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हुई हैं।

  • भोपाल के कोलार रोड पर SUV में लगी आग, इलाके में मची अफरा-तफरी

    भोपाल के कोलार रोड पर SUV में लगी आग, इलाके में मची अफरा-तफरी


    नई दिल्ली। राजधानी भोपाल के कोलार रोड इलाके में शनिवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सड़क किनारे खड़ी एक SUV में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया और करीब 10 फीट ऊंची लपटें उठने लगीं। घटना दोपहर करीब 3:30 बजे की बताई जा रही है। कोलार रोड स्थित चूनाभट्टी रेस्ट हाउस के आगे गार्डन रेसिडेंस के गेट के पास SUV खड़ी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पहले वाहन से धुआं निकलता दिखाई दिया और कुछ ही सेकंड में आग ने विकराल रूप ले लिया।

    EV चार्जिंग स्टेशन और ट्रांसफार्मर के कारण बढ़ा खतरा
    जिस स्थान पर SUV में आग लगी, उसके पास ही इलेक्ट्रिक व्हीकल का चार्जिंग स्टेशन और रहवासी इलाका मौजूद है। वहीं नजदीक में ट्रांसफार्मर भी लगा हुआ था। ऐसे में लोगों को किसी बड़े ब्लास्ट या हादसे का डर सताने लगा।
     आग की लपटें बढ़ते देख आसपास मौजूद लोग तुरंत दूर हट गए। स्थानीय लोगों ने एहतियातन आसपास खड़े वाहनों को हटाया और सड़क के एक हिस्से को खाली कराया। घटना के चलते कुछ देर के लिए इलाके में यातायात भी प्रभावित रहा।

    दमकल पहुंची, लेकिन तब तक जल चुकी थी कार
    सूचना मिलते ही कोलार फायर स्टेशन से दमकल की टीम मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड कर्मियों ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक SUV लगभग पूरी तरह जल चुकी थी। प्रत्यक्षदर्शी राहुल सिंगाड़िया ने बताया कि आग इतनी तेज थी कि वाहन के टायर तक जल गए। मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    शॉर्ट सर्किट की आशंका
    फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन शुरुआती तौर पर तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। पुलिस और फायर विभाग मामले की जांच कर रहे हैं।

  • भोपाल ट्रेन हादसा: युवक की मौत के बाद हत्या का आरोप, मां बोलीं- बेटे को धक्का देकर पटरी पर गिराया गया

    भोपाल ट्रेन हादसा: युवक की मौत के बाद हत्या का आरोप, मां बोलीं- बेटे को धक्का देकर पटरी पर गिराया गया


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब रचना नगर अंडरब्रिज के पास रेलवे ट्रैक पर एक युवक का शव मिला। मृतक की पहचान अशोक बामने के रूप में हुई है, जो गौतम नगर जनता क्वार्टर का निवासी था।
    पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में मामला ट्रेन से कटकर हुई मौत का लग रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। हालांकि, मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब मृतक की मां ने पड़ोसी पर गंभीर आरोप लगाए।
    मृतक की मां कृष्णा बामने का कहना है कि रात में पड़ोसी से किसी लड़की को लेकर विवाद हुआ था। उनका आरोप है कि उसी विवाद के बाद पड़ोसी उनके घर में घुस आया और उनके चार बेटों के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की।
    परिवार का दावा है कि इसके बाद आरोपियों ने अशोक को रेलवे ट्रैक पर ले जाकर ट्रेन के सामने धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, सुबह पुलिस ने सूचना दी तब उन्हें घटना की जानकारी मिली।
    अशोक अविवाहित था और मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। अचानक हुई इस घटना ने पूरे इलाके में तनाव और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
    फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं हादसा, आत्महत्या और हत्या को ध्यान में रखकर छानबीन की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
    यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए गहरा सदमा बन गई है, बल्कि पूरे इलाके में कई सवाल भी छोड़ गई है कि यह वाकई एक हादसा था या इसके पीछे कोई साजिश।

  • कोहेफिजा में दर्दनाक घटना: पहले छात्रा ने दी जान, फिर मकान मालिक की मौत से इलाके में हड़कंप

    कोहेफिजा में दर्दनाक घटना: पहले छात्रा ने दी जान, फिर मकान मालिक की मौत से इलाके में हड़कंप


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का पॉश इलाका कोहेफिजा इस समय दोहरी आत्महत्या की घटनाओं से स्तब्ध है। तीन महीने पहले गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) की एक होनहार छात्रा की मौत से उपजा विवाद थमा भी नहीं था कि अब उसी मकान के मालिक ने मौत को गले लगा लिया है। शनिवार देर रात हुई इस घटना ने पुलिस प्रशासन और जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मृतक की पहचान विजय राठौर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि विजय उसी मकान के मालिक थे, जहाँ एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा रोशनी किराए पर रहती थी। फरवरी माह में रोशनी का शव उसके बाथरूम में मिला था, जिसके बाद से ही विजय और उनका परिवार लगातार जांच के दायरे में और मानसिक तनाव में था।

    आरोपों के घेरे में जांच और छात्रा के परिजन
    विजय राठौर की आत्महत्या के बाद उनकी पत्नी करुणा राठौर ने व्यवस्था और छात्रा के परिजनों पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। करुणा का कहना है कि उनके पति अपराधी नहीं थे, लेकिन छात्रा की मौत के बाद से उन्हें एक अपराधी की तरह प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि रोशनी के परिजन लगातार घर आकर उन्हें धमकाते थे और झूठे केस में फंसाने का दबाव बना रहे थे।

    पत्नी का यह भी दर्द छलका कि पुलिस की कार्यप्रणाली ने विजय को मानसिक रूप से तोड़ दिया था। करुणा के अनुसार, पुलिस बार-बार बयान दर्ज करने के नाम पर विजय को थाने बुलाती थी और वहां घंटों बिना किसी ठोस वजह के बैठाकर रखा जाता था। सामाजिक लोक-लाज और लगातार पूछताछ के डर ने विजय को गहरे अवसाद (Depression) में धकेल दिया, जिसका परिणाम शनिवार की रात इस आत्मघाती कदम के रूप में सामने आया।

    क्या था रोशनी सुसाइड केस?
    मामले की जड़ें फरवरी 2026 की उस घटना में हैं, जब 19 वर्षीय छात्रा रोशनी ने अपने कमरे में खुदकुशी कर ली थी। उस वक्त मेडिकल कॉलेज के छात्रों और रोशनी के परिवार ने इसे हत्या करार देते हुए कोहेफिजा थाने का घेराव किया था। हालांकि, बाद में पुलिस को रोशनी के मोबाइल से एक ‘डिजिटल सुसाइड नोट’ मिला था, जिसमें उसने नीट और एमबीबीएस की पढ़ाई के अत्यधिक तनाव का जिक्र किया था। पुलिस ने मामले की गहराई से जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन भी किया था, लेकिन अब तक कोई आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं हुई थी।

    पुलिसिया कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
    मकान मालिक की आत्महत्या के बाद कोहेफिजा पुलिस एक बार फिर रक्षात्मक मुद्रा में है। थाना प्रभारी केजी शुक्ला ने बताया कि विजय राठौर की मौत के मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। पुलिस फिलहाल उनकी बेटी के बेंगलुरु से आने का इंतजार कर रही है, जिसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पुलिस का कहना है कि वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या वाकई विजय पर किसी तरह का बाहरी दबाव था या उन्होंने किसी अन्य निजी कारण से यह कदम उठाया।

    यह घटनाक्रम न केवल एक परिवार की तबाही की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किसी मामले की लंबी खिंचती जांच और सामाजिक दबाव किस तरह एक निर्दोष व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर घातक प्रहार कर सकते हैं। अब देखना यह होगा कि एसआईटी इन दोनों मौतों के अंतर्संबंधों की गुत्थी कैसे सुलझाती है।

  • भोपाल से सोमनाथ यात्रा की शुरुआत, CM मोहन यादव दिखाएंगे हरी झंडी

    भोपाल से सोमनाथ यात्रा की शुरुआत, CM मोहन यादव दिखाएंगे हरी झंडी


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। पहली बार ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा’ गुरुवार को भोपाल से रवाना होगी। इस विशेष ट्रेन को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (RKMP) के प्लेटफॉर्म नंबर-1 से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
    इस यात्रा में प्रदेशभर से लगभग 1100 श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। यह पहल संस्कृति विभाग द्वारा ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026’ के अंतर्गत आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक चेतना, आस्था और राष्ट्रीय गौरव को और मजबूत करना बताया जा रहा है।
    इस यात्रा का संबंध गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर से है, जिसे भारत के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। यह मंदिर भारतीय इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। इसी पृष्ठभूमि में इस विशेष यात्रा की शुरुआत की गई है।
    यह मध्य प्रदेश से पहली बार आयोजित होने वाली ऐसी धार्मिक ट्रेन यात्रा है, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालु एक साथ सोमनाथ धाम की ओर प्रस्थान करेंगे। यह ट्रेन भोपाल के साथ-साथ उज्जैन रेलवे स्टेशन से भी यात्रियों को अपने साथ लेकर आगे बढ़ेगी।
    यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को सोमनाथ मंदिर में दर्शन का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही वहां आयोजित होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक गतिविधियों में भी उनकी सहभागिता होगी।
    सरकारी स्तर पर इस यात्रा को सांस्कृतिक एकता और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की यात्राएं लोगों को भारत की समृद्ध विरासत और परंपराओं से जोड़ने में मदद करती हैं।
    मुख्यमंत्री मोहन यादव के इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। स्टेशन परिसर में सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और यात्री सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है ताकि यात्रा सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
    यह यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि इसे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और श्रद्धा के विस्तार के रूप में भी देखा जा रहा है।