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  • भोपाल में अतिथि शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, वादों पर अमल न होने से नाराजगी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    भोपाल में अतिथि शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, वादों पर अमल न होने से नाराजगी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी


    भोपाल। अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे हजारों अतिथि शिक्षकों ने बुधवार को राजधानी भोपाल में जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने सरकार पर चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया और लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। उन्होंने साफ कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

    प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने गुरुजियों की तर्ज पर नीति लागू करने, सीधी भर्ती में बोनस अंक देने और वार्षिक अनुबंध के जरिए भविष्य सुरक्षित करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे शिक्षकों में गहरा असंतोष है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अतिथि शिक्षकों को न्याय दिलाने की बात कही थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई निर्णय सामने नहीं आया है।

    सरकार पर वादों से मुकरने का आरोप

    संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी रामचंद्र नागर और प्रदेश अध्यक्ष के.सी. पवार ने कहा कि सरकार वार्षिक अनुबंध लागू करने के अपने वादे से पीछे हटती नजर आ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 30 अप्रैल के बाद कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो करीब सवा लाख अतिथि शिक्षकों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने यह भी मांग रखी कि सीधी भर्ती, प्रमोशन और ट्रांसफर से प्रभावित अनुभवी अतिथि शिक्षकों को रिक्त पदों पर प्राथमिकता के आधार पर समायोजित किया जाए।

    ई-अटेंडेंस और भुगतान में समस्याएं उठाईं

    प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने ई-अटेंडेंस प्रणाली में आ रही तकनीकी खामियों पर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई बार तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जिससे मानदेय कट जाता है। साथ ही कुछ मामलों में सितंबर महीने का भुगतान भी अभी तक लंबित है।

    भर्ती प्रक्रिया में अनुभव को लेकर उठे सवाल
    बी.एम. खान ने भर्ती प्रक्रिया में मौजूद विसंगतियों को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को उनके अनुभव का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। वर्तमान में स्कोर कार्ड में केवल 5 साल का अनुभव जोड़ा जा रहा है, जबकि इसे बढ़ाकर हर वर्ष 10 अंक (अधिकतम 100 अंक) किया जाना चाहिए। इसके अलावा 2008 और 2011 की पात्रता परीक्षाओं के अंक भी शामिल करने की मांग की गई। प्रांत अध्यक्ष तूफान शर्मा ने कहा कि अतिथि शिक्षक सभी आवश्यक योग्यताओं को पूरा करते हैं, इसलिए उनके अनुभव के आधार पर उन्हें न्याय मिलना चाहिए।

    मुख्य मांगें इस प्रकार हैं
    नियमितीकरण के लिए विशेष विभागीय पात्रता परीक्षा आयोजित कर कम से कम 30% पद अतिथि शिक्षकों के लिए आरक्षित किए जाएं।
    शिक्षक भर्ती में 50% पद अतिथि शिक्षकों के लिए तय हों, हर वर्ष 4 बोनस अंक (अधिकतम 20) दिए जाएं और पात्रता अंकों में 10% की छूट दी जाए।
    स्कोर कार्ड में हर वर्ष 10 अंक (अधिकतम 100) जोड़े जाएं और 50 दिन कार्य पूर्ण होने पर अनुभव अंक मिले, साथ ही 2011 संविदा परीक्षा के अंक भी जोड़े जाएं।
    12 महीने का वार्षिक अनुबंध लागू किया जाए और कार्यमुक्त होने पर समायोजन सुनिश्चित किया जाए।
    बीमा, पीएफ, स्वास्थ्य सुविधाएं और 13 आकस्मिक व 3 ऐच्छिक अवकाश प्रदान किए जाएं।
    ई-अटेंडेंस प्रणाली में सुधार कर काटे गए मानदेय का शीघ्र भुगतान किया जाए।
    तकनीकी समस्या होने पर ऑफलाइन उपस्थिति को मान्यता दी जाए।
    पुराने आश्वासनों को लागू करने की मांग तेज
    प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि अतिथि शिक्षकों को लेकर पहले कई घोषणाएं की गई थीं और इस मुद्दे को राजनीतिक समर्थन भी मिला था। लेकिन अब उन वादों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे शिक्षकों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

  • कोतवाली क्षेत्र में पुलिस कमिश्नर की सख्ती रॉन्ग साइड एंट्री बंद करने के निर्देश

    कोतवाली क्षेत्र में पुलिस कमिश्नर की सख्ती रॉन्ग साइड एंट्री बंद करने के निर्देश


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कानून व्यवस्था और यातायात सुधार को लेकर पुलिस प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। इसी क्रम में पुलिस कमिश्नर संजय कुमार इमामी ने कोतवाली थाना क्षेत्र में नागरिकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया और उनकी समस्याएं सुनीं। इस जनसंवाद कार्यक्रम का उद्देश्य शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और जनता की भागीदारी बढ़ाना रहा।

    जनसंवाद के दौरान पुलिस कमिश्नर ने साफ तौर पर निर्देश दिए कि दुकानों के सामने होने वाली अवैध पार्किंग को तत्काल हटाया जाए क्योंकि इससे न केवल ट्रैफिक बाधित होता है बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस तरह की गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए।

    इसके साथ ही हमीदिया अस्पताल के आसपास रॉन्ग साइड एंट्री को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया। कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस क्षेत्र में गलत दिशा से आने वाले वाहनों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे और किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।

    कार्यक्रम के दौरान नागरिकों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए कहा गया कि यदि कहीं भी कोई संदिग्ध या अवैध गतिविधि नजर आए तो तुरंत डायल 112 पर सूचना दें। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी और शिकायतों का जल्द समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    जनसंवाद में ट्रैफिक नियमों को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया और उन्हें नियमों का पालन करने की शपथ दिलाई गई। साथ ही साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए साइबर सुरक्षा के प्रति भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई।

    पुलिस कमिश्नर ने मादक पदार्थों और अवैध हथियारों के खिलाफ भी लोगों से सहयोग मांगा और अपील की कि ऐसी किसी भी जानकारी को तुरंत पुलिस तक पहुंचाएं ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

    इस पहल के जरिए पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की कोशिश की जा रही है जिससे शहर को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके। पुलिस का मानना है कि आम नागरिकों की भागीदारी के बिना सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी बनाना संभव नहीं है।

  • मध्यप्रदेश में MPPSC एग्जाम शुरू, नए नियम लागू 90 मिनट पहले पहुंचना जरूरी

    मध्यप्रदेश में MPPSC एग्जाम शुरू, नए नियम लागू 90 मिनट पहले पहुंचना जरूरी


    भोपाल । मध्यप्रदेश में आज राज्य सेवा और राज्य वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित की जा रही है। राजधानी भोपाल समेत पूरे प्रदेश में यह परीक्षा 365 केंद्रों पर आयोजित हो रही है जहां लाखों अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। इस बार परीक्षा को लेकर नियमों में कई बदलाव किए गए हैं और सुरक्षा व्यवस्था को पहले से ज्यादा मजबूत किया गया है।

    यह परीक्षा दो सत्रों में आयोजित की जा रही है जिसमें पहला सत्र सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरा सत्र दोपहर 2.15 बजे से शाम 4.15 बजे तक चलेगा। परीक्षा के लिए प्रदेश के 54 जिला मुख्यालयों में केंद्र बनाए गए हैं ताकि अधिक से अधिक अभ्यर्थियों को सुविधा मिल सके।

    इस बार सबसे खास बात यह है कि परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश के लिए थ्री लेयर सिक्योरिटी सिस्टम लागू किया गया है। उम्मीदवारों को पहले बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से गुजरना होगा इसके बाद एडमिट कार्ड की स्कैनिंग की जाएगी और अंत में हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर के जरिए तलाशी ली जाएगी। इन सभी चरणों से गुजरने के बाद ही उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा।

    परीक्षा प्रबंधन के अनुसार हर उम्मीदवार की जांच में लगभग 5 से 7 मिनट का समय लग सकता है इसलिए सभी अभ्यर्थियों को निर्देश दिया गया है कि वे परीक्षा शुरू होने से कम से कम 90 मिनट पहले केंद्र पर पहुंचें। इसके साथ ही यह भी साफ किया गया है कि परीक्षा शुरू होने से 30 मिनट पहले केंद्र के प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाएंगे और इसके बाद किसी को भी अंदर प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

    केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ साथ अनुशासन बनाए रखने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों के बाहर और अंदर वर्जित वस्तुओं की सूची चस्पा की गई है ताकि उम्मीदवार पहले से ही सतर्क रहें और किसी भी प्रकार की परेशानी से बच सकें।

    प्रशासन का कहना है कि इन सख्त नियमों का उद्देश्य परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और नकल की घटनाओं को देखते हुए इस बार कोई भी लापरवाही नहीं बरती जा रही है।

    कुल मिलाकर MPPSC की यह परीक्षा न केवल अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि प्रशासन के लिए भी एक बड़ी जिम्मेदारी है जिसमें सुरक्षा और व्यवस्था दोनों पर खास ध्यान दिया जा रहा है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे सभी नियमों का पालन करें और समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचकर अपनी तैयारी को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करें।

  • डिजिटल जनगणना 2027 पर पीएम मोदी का जोर भोपाल में सीएम मोहन यादव ने मन की बात के जरिए जोड़ा संवाद

    डिजिटल जनगणना 2027 पर पीएम मोदी का जोर भोपाल में सीएम मोहन यादव ने मन की बात के जरिए जोड़ा संवाद


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को एक अलग ही माहौल देखने को मिला जब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 133वें संस्करण का जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ सामूहिक श्रवण किया। वीआईपी रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित इस कार्यक्रम में आमजन की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली जिससे यह एक जनसंवाद का मंच बन गया।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि मन की बात आज देशवासियों के दिलों में अपनी खास जगह बना चुका है और यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि करोड़ों लोगों को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा कि इसके जरिए समाज के प्रेरक कार्यों नवाचारों और सकारात्मक प्रयासों को सामने लाया जाता है जिससे लोगों को नई दिशा और प्रेरणा मिलती है।

    कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए 2027 में होने वाली डिजिटल जनगणना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने इसे दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना बताते हुए कहा कि इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से की जाएगी। घर घर जाकर जानकारी एकत्र करने वाले कर्मचारियों के पास मोबाइल ऐप होगा जिसमें नागरिकों की जानकारी सीधे दर्ज की जाएगी।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि इस बार नागरिकों को खुद अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी दी जा रही है। कर्मचारी के आने से लगभग 15 दिन पहले यह सुविधा शुरू होगी जिससे लोग अपने समय अनुसार जानकारी भर सकेंगे। इसके बाद उन्हें एक विशेष आईडी मिलेगी जिसे वे कर्मचारी के आने पर दिखाकर अपनी जानकारी की पुष्टि कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया सरल होगी और समय की बचत भी होगी।

    उन्होंने जानकारी दी कि जिन राज्यों में स्व गणना का कार्य पूरा हो चुका है वहां घरों के सूचीकरण का काम भी शुरू हो गया है और अब तक करीब 1 करोड़ 20 लाख परिवारों का मकान सूचीकरण किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में बढ़ चढ़कर भाग लें क्योंकि यह केवल सरकारी कार्य नहीं बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उपस्थित युवाओं और आमजनों से आत्मीय संवाद भी किया। उन्होंने महिला सशक्तिकरण बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान और स्वरोजगार जैसे विषयों पर चर्चा की और बताया कि राज्य सरकार महिलाओं की शिक्षा सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों से भी मुलाकात की और उनसे संवाद कर उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने बच्चों को शिक्षा के महत्व और बड़ों के सम्मान की सीख दी तथा उनके साथ समय बिताया।

    कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मन की बात देश को सकारात्मक दिशा देने का एक अनूठा प्रयास है। उन्होंने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी बन रहा है और जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया जा रहा है।

    कुल मिलाकर भोपाल में आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ एक रेडियो प्रसारण नहीं बल्कि जनसंवाद और जनभागीदारी का उदाहरण बनकर सामने आया जिसमें सरकार और जनता के बीच संवाद को मजबूत करने की झलक देखने को मिली।

  • MP में हेलमेट पर सख्ती शुरू बिना हेलमेट पकड़े गए तो चालान के साथ लाइसेंस भी होगा सस्पेंड

    MP में हेलमेट पर सख्ती शुरू बिना हेलमेट पकड़े गए तो चालान के साथ लाइसेंस भी होगा सस्पेंड


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सख्त कदम उठाया गया है। राजधानी भोपाल समेत पूरे प्रदेश में आज से हेलमेट चेकिंग अभियान शुरू हो गया है। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाना भारी पड़ सकता है क्योंकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    यह अभियान आज से शुरू होकर 10 मई तक लगातार चलेगा और इस दौरान हर जिले में व्यापक स्तर पर चेकिंग की जाएगी। पुलिस की टीम सड़कों पर तैनात रहेगी और जो भी चालक बिना हेलमेट पाया जाएगा उसका चालान काटा जाएगा। इतना ही नहीं कई मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस के निलंबन की कार्रवाई भी की जा सकती है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ चालान काटना नहीं बल्कि लोगों को जागरूक करना भी है। आंकड़ों के अनुसार सड़क हादसों में होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण हेलमेट का उपयोग न करना है। करीब 50 प्रतिशत मामलों में दोपहिया चालक की मौत सिर्फ इसलिए हो जाती है क्योंकि उसने हेलमेट नहीं पहना होता।

    पुलिस मुख्यालय की ओर से इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। एडीजी पीटीआरआई विवेक शर्मा ने बताया कि प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय हैं और यातायात नियमों की अनदेखी इसके पीछे मुख्य वजह है। उन्होंने कहा कि हेलमेट पहनना सिर्फ कानूनी बाध्यता नहीं बल्कि जीवन की सुरक्षा का सबसे जरूरी उपाय है।

    अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभियान के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस टीम न केवल शहरों में बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी निगरानी बढ़ाएगी ताकि हर स्तर पर नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

    इस अभियान के पीछे मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करना है। सरकार और पुलिस विभाग चाहते हैं कि लोग अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और नियमों का पालन करें। कई बार छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो जाती है और हेलमेट जैसी साधारण चीज जीवन बचा सकती है।

    पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे बिना हेलमेट वाहन चलाने से बचें और अपने परिवार तथा खुद की सुरक्षा के लिए नियमों का पालन करें। यह अभियान एक चेतावनी भी है और एक अवसर भी कि लोग अपनी आदतों में सुधार लाएं। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में शुरू हुआ यह अभियान सड़क सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है जो आने वाले दिनों में लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव ला सकता है।

  • कोर्ट आदेश के बाद भी राहत नहीं कर्मचारियों का गुस्सा फूटा प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी

    कोर्ट आदेश के बाद भी राहत नहीं कर्मचारियों का गुस्सा फूटा प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर कर्मचारियों का असंतोष खुलकर सामने आ गया है। लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का संकेत दे दिया है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ की हाल ही में हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई और इसके बाद प्रदेश स्तर पर आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली गई है।

    संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि कर्मचारियों की समस्याएं वर्षों से लंबित हैं लेकिन अब तक उनका समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत के आदेश के बावजूद सरकार नव नियुक्त कर्मचारियों के लिए 70 80 और 90 प्रतिशत वेतन के बंधन को समाप्त नहीं कर रही है। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है और वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

    बैठक में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। कर्मचारियों ने मांग की कि अनुकंपा नियुक्ति में सीपीसीटी का बंधन समाप्त किया जाए ताकि प्रभावित परिवारों को जल्द राहत मिल सके। इसके अलावा यह भी कहा गया कि वर्ष 2019 से कोर्ट के आदेश के अनुसार कर्मचारियों को पूर्ण वेतन का लाभ दिया जाना चाहिए लेकिन अभी तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

    स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर भी कर्मचारियों ने नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि कर्मचारियों को केंद्र सरकार के समान बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए और इसके लिए व्यापक बीमा योजना लागू की जानी चाहिए। साथ ही यह मांग भी उठी कि कर्मचारियों को बैंक खातों के माध्यम से बड़े स्तर पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए।

    संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के मुद्दे भी बैठक में छाए रहे। संघ का कहना है कि इन कर्मचारियों को भी नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं और लाभ मिलना चाहिए ताकि उनके साथ भेदभाव खत्म हो सके। इसके अलावा शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर भी चर्चा हुई और इसे निरस्त करने की मांग उठाई गई।

    बैठक में महंगाई राहत को लेकर भी आवाज बुलंद हुई। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई राहत देने की मांग की गई ताकि उन्हें आर्थिक रूप से राहत मिल सके। इसके साथ ही केंद्रीय दर और तिथि के अनुसार लाभ देने की भी मांग रखी गई।

    इन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के बाद कर्मचारी संघ ने आगामी दिनों में प्रदेश स्तर पर आंदोलन करने का निर्णय लिया है। बैठक में विभिन्न संस्थानों के पदाधिकारी भी शामिल हुए और सभी ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करने की सहमति जताई।

    कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यह स्थिति सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में कर्मचारी इससे जुड़े हुए हैं। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में कर्मचारियों का यह बढ़ता असंतोष आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है जो सरकार और प्रशासन दोनों के लिए अहम परीक्षा साबित होगा।

  • MP: भोपाल के हमीदिया अस्पताल में चौकाने वाला मामला… युवाओं को लगी खून लेने की लत

    MP: भोपाल के हमीदिया अस्पताल में चौकाने वाला मामला… युवाओं को लगी खून लेने की लत


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया (Government Hospital Hamidia) के मनोरोग विभाग में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने डॉक्टरों को भी सोच में डाल दिया है. यहां हमीदिया अस्पताल में पिछले एक साल में अब तक ऐसे 5 युवा इलाज के लिए पहुंचे हैं, जिन्हें ब्लड कंपोनेंट्स (Blood Components) लेने की आदत पड़ गई है. अब तक आपने शराब, सिगरेट और ड्रग्स जैसे नशों के बारे में सुना होगा. लेकिन यह मामला एक नए और खतरनाक ट्रेंड की ओर इशारा करता है. जहां कुछ युवा खून के तत्वों को ही ताकत बढ़ाने का जरिया मान रहे हैं।

    डॉक्टरों के अनुसार, इन सभी युवाओं की उम्र 18 से 25 साल के बीच है और इन मामलों में एक समान पैटर्न देखने को मिला है. जैसे ही परिवार को इसकी जानकारी मिली। उन्होंने युवाओं की गतिविधियों पर रोक लगा दी. कई दिनों तक समझाने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बाद युवक चिड़चिड़े और आक्रामक हो गए. हालत बिगड़ने पर परिवार उन्हें मनोरोग विशेषज्ञों के पास काउंसलिंग के लिए लेकर पहुंचे।

    डॉक्टरों की प्रारंभिक जांच में तीन मुख्य वजहें सामने आई हैं जिज्ञासा, गलत जानकारी और अवैध माध्यमों की उपलब्धता. बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ वीडियो इस प्रवृत्ति को बढ़ा रहे हैं, जहां यह दावा किया जाता है कि प्लाज्मा या अन्य ब्लड कंपोनेंट्स लेने से ताकत बढ़ती है. तनाव कम होता है और शरीर में ऊर्जा आती है।

    हालांकि, विशेषज्ञ इन दावों को पूरी तरह गलत बताते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि बिना किसी चिकित्सकीय जरूरत के ब्लड कंपोनेंट्स लेना बेहद जोखिम भरा हो सकता है. इससे इंफेक्शन, एलर्जी, सूजन और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है यानी जिस फायदे की उम्मीद में यह कदम उठाया जा रहा है. वह सिर्फ एक भ्रम है, जबकि नुकसान बेहद गंभीर हो सकते हैं।


    विशेषज्ञों की चेतावनी

    हमीदिया अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. जय प्रकाश अग्रवाल के अनुसार, युवा जिसे ताकत समझ रहे हैं, वह सिर्फ एक ‘हाइपोथेटिकल’ यानी काल्पनिक सुख है। इसके वास्तविक परिणाम बेहद खतरनाक हैं. इससे से गैंग्रीन का खतरा यानी गलत तरीके से इन्फ्यूजन लेने से अंग सड़ सकते हैं।

    इसके अलावा, डॉक्टर ने चेताया कि HIV और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा होता है. वहीं, बिना डॉक्टरी सलाह के ब्लड कंपोनेंट लेना तत्काल ‘एनाफिलेक्टिक शॉक’ दे सकता है. यही नहीं, शरीर के अंदरूनी हिस्सों में गंभीर सूजन और अंग भी फेल हो सकते हैं।

  • मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले: भोपाल में खुलेगा FTRI, उज्जैन एयरपोर्ट के लिए ₹590 करोड़ की स्‍वीकृति

    मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले: भोपाल में खुलेगा FTRI, उज्जैन एयरपोर्ट के लिए ₹590 करोड़ की स्‍वीकृति


    भोपाल। भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। इनमें वित्तीय शोध संस्थान की स्थापना, उज्जैन एयरपोर्ट के लिए फंड और छात्रों के लिए स्कॉलरशिप बढ़ाने के फैसले प्रमुख हैं।

    भोपाल में खुलेगा FTRI

    कैबिनेट ने राज्य में वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के लिए फाइनेंशियल ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (FTRI) खोलने की मंजूरी दी है। यह संस्थान बजट विश्लेषण, वित्तीय रिसर्च और प्रशासनिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करेगा। शुरुआती संचालन प्रशासन अकादमी, भोपाल से किया जाएगा।

    उज्जैन एयरपोर्ट के लिए ₹590 करोड़

    सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में एयरपोर्ट विकसित करने के लिए 590 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह राशि भूमि अधिग्रहण पर खर्च होगी। केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत बनने वाले इस एयरपोर्ट से एयरबस जैसे बड़े विमानों का संचालन संभव होगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी। धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर और सांदीपनि आश्रम जैसे प्रमुख स्थल स्थित हैं, जहां हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

    SC छात्रों को ₹10,000 प्रतिमाह स्कॉलरशिप

    कैबिनेट ने अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों के लिए स्कॉलरशिप बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रतिमाह करने का फैसला किया है। पहले यह राशि 2,000 रुपये थी। यह लाभ ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को मिलेगा।

    विकास योजनाओं पर हजारों करोड़ मंजूर

    राज्य सरकार ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए कुल 16,720 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।

    – वाणिज्यिक कर विभाग की योजनाओं के लिए 2030-31 तक 2,952 करोड़
    – चना और मसूर उपार्जन के लिए 3,174 करोड़
    – वन संरक्षण और पुनर्स्थापना के लिए 5,215 करोड़
    – RTE के तहत फीस प्रतिपूर्ति के लिए 3,039 करोड़
    – पीएम श्री स्कूल योजना के लिए 940 करोड़
    – कक्षा 9 से 12 तक मुफ्त किताबों के लिए 693 करोड़

    कातना सिंचाई परियोजना को मंजूरी

    मंदसौर जिले की कातना सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 88.41 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे 3,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी और 120 गांवों के 1,358 परिवारों को लाभ होगा।

    चना और मसूर खरीदी का फैसला

    सरकार ने चना और मसूर की खरीदी को भी मंजूरी दी है। चने का समर्थन मूल्य 5,000 रुपये और मसूर का 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। सरकार चने का 25% और मसूर का 100% उपार्जन करेगी।

  • भोपाल स्कूल में भय का माहौल, 600 से ज्यादा छात्र छोड़ चुके स्कूल

    भोपाल स्कूल में भय का माहौल, 600 से ज्यादा छात्र छोड़ चुके स्कूल


    भोपाल ।
    पंचशील नगर स्थित शासकीय नूतन सुभाष उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में छात्राओं और छात्रों के लिए सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। सालों से प्रतिष्ठित यह स्कूल अब असुरक्षा और भय के माहौल में संघर्ष कर रहा है। पहले यहां करीब 800 छात्र पढ़ते थे, लेकिन अब संख्या घटकर लगभग 200 रह गई है।

    स्कूल के आसपास नशाखोरों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। छात्राएं और स्थानीय लोग बताते हैं कि रोजाना नशे में धुत लोग गेट के पास फब्तियां कसते हैं, आवाजें लगाते हैं और छेड़छाड़ करते हैं। छात्रा अनन्या ने बताया कि रास्ते में नशाखोरों की वजह से हर दिन डर के साए में गुजरता है। छात्रा निशा ने भी बताया कि कभी-कभी लड़के कमेंट पास करते हैं और एक बार तो बदतमीजी की कोशिश भी हुई, लेकिन शिक्षिका के आने पर वे भाग गए।

    छात्र शुभम ने बताया कि स्कूल में लगभग 40 दृष्टिहीन छात्र पढ़ते हैं, जो रोजाना 1 से 1.5 किमी पैदल आते हैं और कई बार बदसलूकी का सामना करते हैं। ऐसे माहौल में पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो गया है।

    स्कूल परिसर में भी सुरक्षा गंभीर समस्या बनी हुई है। प्रिंसिपल डॉ. अभिषेक बैस ने बताया कि एक साल पहले कुछ लोग स्कूल में घुसे और बाथरूम में एक व्यक्ति की हत्या कर शव जला दिया। यहां तलवार और महिलाओं के कपड़े भी मिल चुके हैं। कई बार स्कूल के गेट के ताले तोड़ दिए गए, बेंच उठाई या तोड़ी गईं, और छात्रों से चाकू दिखाकर पैसे लूटे गए।

    स्कूल के बाहर का माहौल भी भयावह है। मीट शॉप्स, बार्बर शॉप्स और शराब पीने वाले लोग स्कूल के पास जमा रहते हैं। केवल 100 मीटर के दायरे में पूरा क्षेत्र नशाखोरी का केंद्र बन चुका है। छात्राएं और महिलाएं स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि अतिक्रमण और असामाजिक गतिविधियों के कारण स्कूल परिसर तक सुरक्षा की गंभीर कमी है।

    इस भयावह माहौल के कारण पिछले दो साल में 600 से ज्यादा छात्र-छात्राएं स्कूल छोड़ चुके हैं। छात्राओं की संख्या घटकर महज 12–15 रह गई है। जो बच्चे आते हैं, उनका ध्यान पढ़ाई पर कम और सुरक्षा पर ज्यादा रहता है।

    पुलिस ने कहा है कि क्षेत्र स्लम है और यहां असामाजिक गतिविधियां होती रहती हैं। टीटी नगर थाना प्रभारी गौरव सिंह ने बताया कि पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है और स्कूल प्रबंधन को संपर्क नंबर दिए गए हैं। हालांकि, अभिभावक और शिक्षक मानते हैं कि मौखिक शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    प्रिंसिपल बैस का कहना है कि कभी प्रतिष्ठित रहा यह स्कूल अब अपनी पहचान बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। शराबी और असामाजिक तत्व दिन और रात परिसर में घुस आते हैं। शिकायतें विधायक, कलेक्टर और मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

    यह स्थिति स्कूल के अस्तित्व और छात्रों की सुरक्षा पर सीधा असर डाल रही है। अभिभावक डरते हैं कि यदि उन्होंने स्कूल की स्थिति उजागर की तो बच्चों को स्कूल से हटवा दिया जाएगा। ऐसे में पढ़ाई और सुरक्षित शिक्षा का अधिकार गंभीर संकट में है।

  • MP: भोपाल में बंसल वन मॉल के बाहर नशे में धुत युवकों ने मचाया उत्पात…

    MP: भोपाल में बंसल वन मॉल के बाहर नशे में धुत युवकों ने मचाया उत्पात…


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में देर रात की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर कटघरे में है. बुधवार रात करीब 1:30 बजे बंसल वन मॉल (Bansal One Mall) के बाहर नशे में धुत कुछ युवकों ने जमकर उत्पात मचाया. सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हो रहे एक वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे 4-5 लड़के एक लाल रंग की कार को घेरते हैं और उसमें बैठे दो युवकों को कॉलर पकड़कर बाहर घसीट लेते हैं.

    चश्मदीदों के अनुसार, यह हाई-वोल्टेज ड्रामा करीब 10 मिनट तक चलता रहा. हमलावर युवकों ने कार सवारों को जमीन पर पटककर लात, घूंसों और थप्पड़ों से जमकर पीटा. इस दौरान मौके पर मौजूद कुछ लड़कियां बीच-बचाव करने की कोशिश करती रहीं, लेकिन हमलावर पूरी तरह बेकाबू थे. इस हंगामे की वजह से रात के समय भी सड़क पर 20 मिनट तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही।


    विवाद की वजह

    शुरुआती जानकारी के मुताबिक, विवाद की शुरुआत पार्किंग को लेकर हुई कहासुनी से हुई थी, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया. हमलावरों ने कार सवार युवकों पर छेड़खानी का भी आरोप लगाया है. हालांकि, मारपीट का तरीका इतना बर्बर था कि घायल युवकों को गंभीर चोटें आई हैं।

    हैरान करने वाली बात यह है कि जहां यह वारदात हुई, वहां से जीआरपी थाना महज कुछ मीटर की दूरी पर है, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी फरार होने में कामयाब रहे.


    पुलिस का पक्ष

    स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए FIR दर्ज कर ली है. पुलिस का कहना है कि वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है.

    भोपाल में बढ़ता ‘पब कल्चर’
    बता दें कि हाल ही में एमपी नगर जोन-1 में एक पब के बाहर नशे में धुत युवतियों के बीच मारपीट का वीडियो भी वायरल हुआ था. बार-बार सामने आ रही ऐसी तस्वीरें राजधानी की रात्रिकालीन सुरक्षा और युवाओं में बढ़ते नशे के चलन की ओर इशारा कर रही हैं.