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  • मास्टर प्लान को लेकर दिशा बैठक में गरमाई राजनीति विधायक और जनपद अध्यक्ष में तीखी बहस सांसद बोले जल्द हो लागू

    मास्टर प्लान को लेकर दिशा बैठक में गरमाई राजनीति विधायक और जनपद अध्यक्ष में तीखी बहस सांसद बोले जल्द हो लागू


    भोपाल । भोपाल के बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान को लेकर जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति दिशा की बैठक शुक्रवार को राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बन गई। मास्टर प्लान के लंबे समय से लागू नहीं होने के मुद्दे पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील ने बैठक में तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजधानी के विकास का सबसे अहम दस्तावेज ही लागू नहीं हो पा रहा है तो विकास समीक्षा बैठकों का क्या औचित्य रह जाता है। इसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के हस्तक्षेप से माहौल और अधिक गरमा गया और बैठक में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।

    विवाद के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी बात सांसद से हो रही थी ऐसे में बीच में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसे है। दोनों पक्षों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि कुछ समय तक बैठक का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है और नाराज होकर बैठक से बाहर निकल गए। बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने दोनों नेताओं को रोकने और समझाने का प्रयास किया लेकिन वे वापस नहीं लौटे।

    बैठक के बाद सांसद आलोक शर्मा ने भी स्वीकार किया कि भोपाल के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से जल्द मुलाकात कर मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह किया जाएगा। उनका मानना है कि राजधानी के भविष्य के विकास और बुनियादी ढांचे को व्यवस्थित बनाने के लिए मास्टर प्लान सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

    बैठक के दौरान केवल मास्टर प्लान ही नहीं बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना भी जनप्रतिनिधियों के निशाने पर रही। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने परियोजना की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर बड़े निर्माण तो हुए लेकिन नागरिक सुविधाओं की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई इमारतों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और दशहरा मैदान जैसी महत्वपूर्ण जगहों का भी नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी के बड़े व्यावसायिक प्लॉट छोटे किए जाएं ताकि उनकी बिक्री आसान हो और परियोजना की आय बढ़ सके।

    महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्ट्रीट लाइट जैसी सामान्य समस्याओं का समाधान भी समय पर नहीं हो पाता जिससे आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इस पर कलेक्टर एवं स्मार्ट सिटी बोर्ड के अध्यक्ष प्रियंक मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि अलग बैठक कर सभी समस्याओं की समीक्षा की जाएगी और समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। उन्होंने पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाने का सुझाव दिया ताकि सभी विभाग मिलकर बेहतर तरीके से काम कर सकें। इस दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि यदि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि समस्याओं की ओर ध्यान दिला रहे हैं तो अधिकारियों को उन्हें गंभीरता से लेकर जल्द समाधान करना चाहिए।

    बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण के गठन को लेकर भी पारित किया गया। प्रस्ताव के अनुसार संभागायुक्त को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जाए जबकि भोपाल और सीहोर के कलेक्टर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा जनप्रतिनिधियों को इसमें शामिल किया जाए। इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के पास भेजने का निर्णय लिया गया। साथ ही भोपाल को आधिकारिक रूप से वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी बैठक में प्रमुखता से उठाई गई।

  • वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विरोध ताजुल मसाजिद से सरकार तक पहुंचेगा मुस्लिम समाज का संदेश

    वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विरोध ताजुल मसाजिद से सरकार तक पहुंचेगा मुस्लिम समाज का संदेश


    भोपाल । मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजधानी भोपाल में एक बड़े प्रतीकात्मक विरोध के रूप में सामने आने जा रहा है। शुक्रवार को ऐतिहासिक ताजुल मसाजिद में शहरभर से आने वाले नमाजी हाथों पर काली पट्टी बांधकर जुमे की नमाज अदा करेंगे और सरकार के फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे। मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आपत्ति सरकार तक पहुंचाना है।

    जानकारी के अनुसार भोपाल के अलग अलग इलाकों से बड़ी संख्या में लोग जुमे की नमाज के लिए ताजुल मसाजिद पहुंचेंगे। नमाज के दौरान सभी लोग काली पट्टी बांधकर वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के फैसले के खिलाफ अपनी असहमति व्यक्त करेंगे। आयोजकों का कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सरकार के निर्णय के विरोध में है।

    वक्फ बोर्ड के गठन के बाद से राजधानी में विरोध लगातार तेज होता गया है। सबसे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने इस नियुक्ति का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया था। इसके बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर वर्तमान वक्फ बोर्ड को भंग करने और नियुक्ति संबंधी आदेश वापस लेने की मांग भी की गई। इस घटनाक्रम के बाद विरोध का दायरा लगातार बढ़ता गया।

    इसी बीच निकाह काजी मोहम्मद मआज़ खान नोमानी नदवी ने दीनी तालीमी बोर्ड के महासचिव पद से इस्तीफा देकर अपने वैचारिक मतभेद सार्वजनिक किए। उन्होंने वक्फ बोर्ड के कुछ सदस्यों के समर्थन पर असहमति जताते हुए अपने पद से अलग होने का फैसला लिया। उनके इस्तीफे के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया।

    पिछले दो दिनों के दौरान कई उलेमा और मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश के सदर मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता के नाम पर वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम प्रतिनिधियों को शामिल कर रही है तो यही व्यवस्था अन्य धार्मिक संस्थाओं में भी समान रूप से लागू की जानी चाहिए। नायब सदर मुफ्ती जिया कासमी ने भी इसी तरह की मांग उठाते हुए सभी धार्मिक संस्थाओं के लिए समान नीति अपनाने की बात कही।

    विवाद उस समय और गहरा गया जब मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के नव नियुक्त अध्यक्ष सनव्वर पटेल के स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के बाद कई धार्मिक पदाधिकारियों और संगठनों ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई। कुछ ने वीडियो संदेश जारी किए तो कई लोगों ने बयान देकर अपने विरोध को दर्ज कराया।

    आज ताजुल मसाजिद में होने वाला काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह अब तक हुए ज्ञापनों प्रदर्शन इस्तीफों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पहला बड़ा सामूहिक और प्रतीकात्मक आयोजन होगा। प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है जबकि आयोजकों ने सभी लोगों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है।

  • भोपाल में दर्दनाक घटना लंबे समय से बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे बुजुर्ग ने किया सुसाइड

    भोपाल में दर्दनाक घटना लंबे समय से बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे बुजुर्ग ने किया सुसाइड


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है जहां लंबे समय से गंभीर बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे 60 वर्षीय बुजुर्ग ने घर के भीतर फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है जबकि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि मृतक पिछले कई महीनों से पैरालिसिस की बीमारी से पीड़ित थे और इसी कारण गहरे अवसाद में चले गए थे।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान मनोहर लाल रैकवार पिता मोहनलाल रैकवार निवासी बेटा गांव बैरागढ़ के रूप में हुई है। वह पेशे से प्लंबर थे और अपने परिवार के साथ रहते थे। करीब आठ महीने पहले उन्हें पैरालिसिस का अटैक आया था जिसके बाद उनके शरीर का एक हिस्सा ठीक से काम नहीं कर रहा था। बीमारी के चलते उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई थी और सामान्य काम भी दूसरों की मदद के बिना कर पाना मुश्किल हो गया था।

    परिजनों के अनुसार लगातार बिगड़ती सेहत और शारीरिक असहायता ने उन्हें मानसिक रूप से भी काफी परेशान कर दिया था। धीरे धीरे वह अवसाद की स्थिति में पहुंच गए थे और अधिकतर समय घर में ही रहते थे। बीमारी के कारण उनका सामाजिक और पेशेवर जीवन भी प्रभावित हो गया था जिससे उनकी चिंता और बढ़ती चली गई।

    शुक्रवार सुबह जब उनकी पत्नी नींद से उठकर घर की पहली मंजिल पर पहुंचीं तो उन्होंने मनोहर लाल को पाइप के सहारे बनाए गए फंदे पर लटका देखा। यह दृश्य देखकर उन्होंने तुरंत शोर मचाया जिसके बाद आसपास रहने वाले रिश्तेदार और पड़ोसी मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर उन्हें नीचे उतारा लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना तत्काल बैरागढ़ थाना पुलिस को दी गई।

    सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में बीमारी और उससे उपजे मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या की आशंका सामने आई है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि गंभीर बीमारी केवल शरीर को ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक चलने वाली शारीरिक समस्याएं कई बार व्यक्ति को अवसाद और निराशा की ओर धकेल देती हैं। ऐसे समय में परिवार और समाज का भावनात्मक सहयोग तथा समय पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से मानसिक तनाव अवसाद या निराशा से जूझ रहा हो तो उसकी भावनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए और उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। समय पर संवाद और चिकित्सकीय सहायता कई बार किसी की जिंदगी बचा सकती है।

  • RGPV में बड़ा फेरबदल परीक्षा संचालन की कमान फिर प्रो. संजीव शर्मा को विभागीय जांच की तैयारी शुरू

    RGPV में बड़ा फेरबदल परीक्षा संचालन की कमान फिर प्रो. संजीव शर्मा को विभागीय जांच की तैयारी शुरू


    भोपाल । राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। प्रो. अर्चना तिवारी से परीक्षा नियंत्रक सहित सभी अतिरिक्त जिम्मेदारियां वापस ले ली गई हैं जबकि प्रो. संजीव शर्मा को फिर से परीक्षा नियंत्रक बनाया गया है। विश्वविद्यालय ने विभागीय जांच की तैयारी के भी निर्देश दिए हैं।

    भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए परीक्षा व्यवस्था और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जून जुलाई 2026 की परीक्षाओं के सुचारु संचालन को ध्यान में रखते हुए परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी प्रो. अर्चना तिवारी से वापस लेकर प्रो. संजीव शर्मा को सौंप दी है। आदेश जारी होते ही यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

    विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रो. अर्चना तिवारी को परीक्षा नियंत्रक के पद से मुक्त करने के साथ ही परीक्षा संबंधी सभी कार्यों से तत्काल प्रभाव से अलग कर दिया गया है। इतना ही नहीं उनके कार्यालय में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को भी परीक्षा से जुड़े कार्यों से अलग करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि परीक्षा संचालन पूरी तरह नई व्यवस्था के तहत किया जा सके।

    प्रशासनिक फेरबदल केवल परीक्षा नियंत्रक के पद तक सीमित नहीं रहा। विश्वविद्यालय ने प्रो. अर्चना तिवारी को स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के प्रभारी निदेशक पद से भी हटा दिया है। उनकी जगह डॉ. जितेन्द्र अग्रवाल को अगले आदेश तक प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया है। इसके अलावा प्रो. तिवारी से डायरेक्टर आईक्यूएसी सहित सभी अतिरिक्त प्रशासनिक दायित्व भी वापस ले लिए गए हैं।

    विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि जून जुलाई परीक्षा सत्र के दौरान किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधा से बचने और परीक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से प्रो. संजीव शर्मा को दोबारा परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू रहेगा और परीक्षा संचालन की पूरी जिम्मेदारी अब उनके पास होगी।

    इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू विभागीय जांच की तैयारी है। आदेश की प्रतिलिपि में उपकुलसचिव स्थापना को निर्देश दिए गए हैं कि प्रो. अर्चना तिवारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने जांच अधिकारी नियुक्त करने और आरोप पत्र जारी करने के लिए अलग से प्रस्ताव तैयार किया जाए। इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन केवल जिम्मेदारियों में बदलाव तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि मामले की विस्तृत जांच भी कराना चाहता है।

    जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय जांच समिति की अंतरिम रिपोर्ट मिलने के बाद की गई है। समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में माना है कि परीक्षा प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने परीक्षा संचालन में आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करने में अपेक्षित स्तर की सावधानी नहीं बरती गई। इसी आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल प्रशासनिक बदलाव का निर्णय लिया।

    विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश कुलपति की स्वीकृति से जारी किया गया है और तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है। हालांकि आदेश में प्रस्तावित विभागीय जांच के विस्तृत कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है लेकिन प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब सभी की नजर विभागीय जांच की आगामी प्रक्रिया और उसकी अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

  • मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड को लेकर बढ़ा विवाद गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के विरोध में तेज हुआ आंदोलन

    मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड को लेकर बढ़ा विवाद गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के विरोध में तेज हुआ आंदोलन


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर प्रदेश में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने इस फैसले का विरोध करते हुए अब सीधे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन के मुख्य संरक्षक शमशुल हसन ने कहा कि वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने से मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। इसी को लेकर दोनों संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं को पत्र भेजकर मौजूदा आदेश को वापस लेने और बोर्ड का नए सिरे से पुनर्गठन करने की मांग की गई है।

    शमशुल हसन ने कहा कि संगठन को वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनव्वर पटेल या अन्य मुस्लिम सदस्यों के कामकाज पर कोई आपत्ति नहीं है। उनका विरोध केवल उन दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर है जिन्हें बोर्ड में शामिल किया गया है। उनका कहना है कि वक्फ इस्लाम से जुड़ी धार्मिक और सामाजिक संस्था है इसलिए इसके संचालन और प्रबंधन में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों की ही भागीदारी होनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में यह भी आग्रह किया गया है कि वर्तमान वक्फ बोर्ड को भंग कर समाज की भावनाओं के अनुरूप नए बोर्ड का गठन किया जाए। उनका विश्वास है कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोग इस विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए उचित निर्णय लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में भी जनभावनाओं को देखते हुए कई महत्वपूर्ण फैसलों पर पुनर्विचार किया गया है इसलिए इस मामले में भी सरकार सकारात्मक कदम उठा सकती है।

    इस मुद्दे पर शमशुल हसन ने उन उलेमाओं और मुस्लिम धर्मगुरुओं पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए जिन्होंने नए वक्फ बोर्ड और उसके अध्यक्ष का स्वागत किया है। उनका कहना है कि धार्मिक नेतृत्व को समाज की भावनाओं के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुरान और हदीस की शिक्षाओं से परिचित होने के बावजूद यदि कोई ऐसे फैसलों का समर्थन करता है तो इससे समाज में नाराजगी बढ़ती है। उन्होंने धार्मिक नेतृत्व से अपने रुख पर पुनर्विचार करने की अपील भी की।

    शमशुल हसन ने कहा कि इतिहास में मुस्लिम उलेमाओं ने समाज और धार्मिक संस्थाओं की रक्षा के लिए कई संघर्ष किए हैं। आज भी धार्मिक नेतृत्व की जिम्मेदारी केवल बयान देने तक सीमित नहीं है बल्कि समुदाय के अधिकारों और धार्मिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने की भी है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस मुद्दे पर चुप हैं या समर्थन कर रहे हैं उन्हें इतिहास से सीख लेते हुए समाज के हित में आवाज उठानी चाहिए।

    संगठन का दावा है कि केवल मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों में मुस्लिम समाज इस फैसले से असंतुष्ट है। उनका कहना है कि यह विरोध किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं बल्कि एक ऐसे निर्णय के विरोध में है जिसे समुदाय अपनी धार्मिक व्यवस्था में हस्तक्षेप के रूप में देख रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो संगठन लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से अपना आंदोलन आगे भी जारी रखेगा।

    गौरतलब है कि मध्यप्रदेश सरकार ने हाल ही में वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए पहली बार दो गैर मुस्लिम सदस्यों को बोर्ड में शामिल किया है। इसी फैसले के बाद विभिन्न मुस्लिम संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन देने का सिलसिला लगातार जारी है।

  • एमपी के 35 जिलों में झमाझम बारिश, खजुराहो-मंडला में 4 इंच से ज्यादा पानी; कई जगह जनजीवन प्रभावित

    एमपी के 35 जिलों में झमाझम बारिश, खजुराहो-मंडला में 4 इंच से ज्यादा पानी; कई जगह जनजीवन प्रभावित


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में जुलाई की शुरुआत के साथ ही मानसून ने पूरी रफ्तार पकड़ ली है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 35 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक वर्षा खजुराहो में 4.4 इंच और मंडला में 4.2 इंच रिकॉर्ड की गई। लगातार छह दिनों से हो रही बारिश के कारण प्रदेश की औसत वर्षा करीब 7 इंच तक पहुंच गई है। जून के आखिर तक जहां प्रदेश में बारिश सामान्य से 33 प्रतिशत कम थी, वहीं अब यह कमी घटकर केवल 1 प्रतिशत रह गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार सतना, रतलाम, सीधी, उमरिया, पन्ना, पचमढ़ी, रीवा, श्योपुर, नौगांव, भोपाल, नरसिंहपुर, दमोह, टीकमगढ़, बैतूल, नर्मदापुरम, इंदौर, सिवनी, सागर, शिवपुरी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, रायसेन, धार, जबलपुर, गुना, उज्जैन, खंडवा, खरगोन, दतिया, मैहर, शाजापुर, सीहोर, छतरपुर, बुरहानपुर, बड़वानी और पांढुर्णा समेत कई जिलों में अच्छी बारिश हुई।

    बारिश से जनजीवन प्रभावित, दो छात्राएं घायल

    लगातार बारिश के बीच बड़वानी जिले के सेंधवा स्थित सांदीपनि (सीएम राइज) स्कूल में बड़ा हादसा हो गया। कक्षा 9 के कमरे की छत का प्लास्टर गिरने से दो छात्राओं के सिर में मामूली चोट आई। दोनों को तत्काल सिविल अस्पताल ले जाकर उपचार कराया गया। वहीं इंदौर के पास खुड़ैल रोड स्थित जेतकारण गांव में सड़क धंस जाने से स्कूली बच्चों की आवाजाही प्रभावित हुई। उफनते नाले को पार कराने के लिए ग्रामीणों ने मानव शृंखला बनाकर बच्चों को सुरक्षित दूसरी ओर पहुंचाया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है।

    खजुराहो में नदी उफान पर, सड़क बंद

    खजुराहो में लगातार 24 घंटे से हो रही मूसलधार बारिश के कारण खूडर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। एहतियात के तौर पर खजुराहो-जटकरा मार्ग को बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के पास जाने से बचने की अपील की है। पन्ना जिले में हरसा-बागोहा नाला उफान पर है। पुल के ऊपर से पानी बहने के बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।

    हरदा में सामान्य से ज्यादा बारिश

    हरदा जिले में उमस के बाद बारिश का दौर शुरू हुआ। मौसम विभाग के मुताबिक जिले में इस मानसून सीजन में अब तक करीब 13 इंच बारिश हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से अधिक है। किसानों का कहना है कि खरीफ फसलों के लिए यह बारिश बेहद लाभदायक साबित होगी।

    इन जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम विभाग ने गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर और छतरपुर जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा बड़वानी, धार, बुरहानपुर, रतलाम, टीकमगढ़, पन्ना सहित कई जिलों में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों, जलभराव वाले क्षेत्रों और कमजोर पुल-पुलियों से दूरी बनाए रखें तथा मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करें।

  • बेतवा को प्रदूषण मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी, 2053 तक साफ रखने के लिए बनेगी दीर्घकालिक योजना

    बेतवा को प्रदूषण मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी, 2053 तक साफ रखने के लिए बनेगी दीर्घकालिक योजना


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश सरकार ने बेतवा नदी को आने वाले तीन दशकों तक स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए व्यापक योजना तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केवल वर्तमान जरूरतों को नहीं, बल्कि वर्ष 2053 तक की संभावित आबादी, शहरी विस्तार और बढ़ने वाले सीवेज भार को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। सरकार का उद्देश्य ऐसा स्थायी सिस्टम विकसित करना है, जिससे भविष्य में बार-बार नई परियोजनाओं की आवश्यकता न पड़े और नदी की जल गुणवत्ता लगातार बेहतर बनी रहे।

    भविष्य की जरूरतों के हिसाब से बनेगा पूरा नेटवर्क

    योजना के तहत सीवर लाइन, पंपिंग स्टेशन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और इंटरसेप्शन नेटवर्क की क्षमता भविष्य की आबादी के अनुसार तय की जाएगी। साथ ही अतिरिक्त क्षमता भी रखी जाएगी ताकि आने वाले वर्षों में आबादी बढ़ने के बावजूद व्यवस्था प्रभावित न हो।

    नदी में गिरने से पहले रोका जाएगा गंदा पानी

    परियोजना का सबसे अहम हिस्सा यह है कि बेतवा नदी में मिलने वाले सभी नालों की पहचान कर उनका गंदा पानी नदी तक पहुंचने से पहले रोक लिया जाएगा। पाइपलाइन के माध्यम से इस पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक भेजा जाएगा, जहां वैज्ञानिक तरीके से उसका शोधन होगा। जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन संभव नहीं होगी, वहां पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी के लिए अलग निकासी व्यवस्था भी बनाई जाएगी ताकि एसटीपी पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

    मंडीदीप और विदिशा सबसे बड़े प्रदूषण स्रोत

    प्रस्तुतीकरण में सामने आया कि बेतवा नदी में सबसे अधिक प्रदूषण मंडीदीप और विदिशा क्षेत्र से पहुंच रहा है। मंडीदीप में घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और खुले नालों का गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है। यहां अब तक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) उपलब्ध नहीं है। वहीं विदिशा के तीन प्रमुख नालों का बिना शोधन वाला पानी भी सीधे बेतवा में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा कोलार जलशोधन संयंत्र का बैकवॉश पानी और जलकुंभी भी नदी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।

    15 वर्षों तक होगी डिजिटल निगरानी

    परियोजना केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रहेगी। इसके तहत 15 वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। आधुनिक SCADA और ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) की मदद से पानी की गुणवत्ता और एसटीपी के संचालन पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी। किसी भी तकनीकी खराबी या प्रदूषण की स्थिति का तुरंत पता लगाया जा सकेगा।

    वैज्ञानिक सर्वे के बाद बनेगी डीपीआर

    डीपीआर तैयार करने से पहले नदी, नालों और पूरे जलग्रहण क्षेत्र का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। इसमें नदी और नालों का सर्वे, मिट्टी और भू-आकृति का परीक्षण, सीवेज की मात्रा का आकलन, उपयुक्त ट्रीटमेंट तकनीक का चयन, इंजीनियरिंग डिजाइन, परियोजना लागत और पर्यावरणीय स्वीकृतियों जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

    लंबी अवधि के संरक्षण पर रहेगा फोकस

    सरकार का लक्ष्य केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि बेतवा नदी के संरक्षण के लिए स्थायी और आर्थिक रूप से टिकाऊ व्यवस्था विकसित करना है। योजना में स्थानीय निकायों की जवाबदेही तय करने, संचालन व्यवस्था को मजबूत बनाने और आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

    यदि यह योजना निर्धारित रूप में लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में बेतवा नदी की जल गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।

  • भोपाल-राजगढ़ को जोड़ने वाला डायवर्सन जलमग्न, प्रशासन ने आवाजाही पर लगाया प्रतिबंध

    भोपाल-राजगढ़ को जोड़ने वाला डायवर्सन जलमग्न, प्रशासन ने आवाजाही पर लगाया प्रतिबंध


    भोपाल । लगातार हो रही बारिश के चलते भोपाल और राजगढ़ जिले को जोड़ने वाले पार्वती नदी के अस्थायी वैकल्पिक मार्ग पर आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। बैरसिया-नरसिंहगढ़ मार्ग पर नदी के बीच बनाए गए इस डायवर्सन पर पानी भर जाने और तेज बहाव के कारण प्रशासन ने सोमवार देर रात यह फैसला लिया। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।

    बैरसिया एसडीएम आशुतोष शर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि पार्वती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे नदी के बीच बना अस्थायी मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया है और वहां से गुजरना बेहद जोखिमभरा हो गया है। किसी भी संभावित हादसे को रोकने के लिए इस मार्ग पर सभी प्रकार के वाहनों और लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

    बैरिकेडिंग और निगरानी के निर्देश

    प्रशासन ने संबंधित विभागों को मार्ग के दोनों ओर बैरिकेडिंग लगाने, चेतावनी बोर्ड लगाने और सुरक्षा संकेतक स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति जोखिम उठाकर इस रास्ते का उपयोग न कर सके।

    आदेश के पालन की जिम्मेदारी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, जनपद पंचायत, लोक निर्माण विभाग (PWD) और पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई है। अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने तथा लोगों को सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों से भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

    उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    पहले भी हो चुके हैं हादसे

    यह वैकल्पिक मार्ग जनवरी 2025 में पार्वती नदी पर बने 49 वर्ष पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद तैयार किया गया था। बारिश शुरू होने से पहले तक इसी रास्ते से बसें, ट्रक, कारें और दोपहिया वाहन गुजर रहे थे, लेकिन जलस्तर बढ़ने के साथ यहां हादसों का खतरा भी बढ़ गया। पिछले वर्ष अक्टूबर में इसी मार्ग पर एक बस फंस गई थी, जबकि हाल ही में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पानी में गिर गई थी। हालांकि उस हादसे में चारों लोग सुरक्षित बच गए थे।

    कई जिलों की लाइफलाइन है यह मार्ग

    बैरसिया-नरसिंहगढ़ मार्ग पर स्थित यह पुल भोपाल और राजगढ़ के अलावा गुना, विदिशा, शिवपुरी, अशोकनगर, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन और इंदौर जैसे जिलों की आवाजाही के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यही मार्ग आगरा-बंबई राष्ट्रीय राजमार्ग से भी जुड़ता है।

    करीब 49 वर्ष पुराने इस पुल की अब तक केवल दो बार मरम्मत हुई है। रखरखाव के अभाव में इसकी स्थिति लगातार खराब होती गई और जनवरी 2025 में पुल धंसने के बाद इसे पूरी तरह बंद करना पड़ा था। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे बंद मार्ग से गुजरने का प्रयास न करें और केवल सुरक्षित वैकल्पिक रास्तों का ही उपयोग करें।

  • पहली बारिश में ही खुली करोड़ों की परियोजना की पोल, अटल भवन में जलभराव से निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल

    पहली बारिश में ही खुली करोड़ों की परियोजना की पोल, अटल भवन में जलभराव से निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल


    मध्य प्रदेश:
    की राजधानी भोपाल में हाल ही में तैयार किए गए नगर निगम के नए मुख्यालय अटल भवन की निर्माण गुणवत्ता पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इस भवन में वर्षा का पानी प्रवेश कर जाने से कार्यालय परिसर के भीतर जलभराव की स्थिति बन गई। घटना के सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के पालन और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    करीब 73 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस भवन को आधुनिक सुविधाओं से लैस प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। उद्देश्य यह था कि नगर निगम की विभिन्न शाखाओं को एक ही परिसर में बेहतर सुविधाओं के साथ संचालित किया जा सके। लेकिन पहली ही बारिश के दौरान भवन के भीतर पानी पहुंचने की घटना ने इस परियोजना की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है।

    बारिश के दौरान भवन के विभिन्न हिस्सों में पानी जमा होने से कर्मचारियों और अधिकारियों को कामकाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कार्यालय के भीतर जलभराव की स्थिति बनने से यह सवाल भी उठने लगा कि क्या भवन के निर्माण में जल निकासी और वर्षा प्रबंधन से जुड़े आवश्यक मानकों का पर्याप्त ध्यान रखा गया था।

    इस घटना ने निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली के साथ-साथ परियोजना की तकनीकी निगरानी पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। आमतौर पर इस स्तर की सार्वजनिक परियोजनाओं में निर्माण के दौरान गुणवत्ता परीक्षण, निरीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन की कई प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। ऐसे में पहली ही बारिश में सामने आई यह स्थिति इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए सरकारी भवन में वर्षा जल निकासी, छत की सीलिंग, ड्रेनेज नेटवर्क और जलरोधक व्यवस्था का विशेष महत्व होता है। यदि इन पहलुओं में किसी स्तर पर कमी रह जाए तो शुरुआती बारिश में ही ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए तकनीकी कारणों की विस्तृत जांच आवश्यक मानी जा रही है।

    घटना के बाद भवन की गुणवत्ता को लेकर लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। सार्वजनिक धन से निर्मित बड़ी परियोजनाओं से उच्च गुणवत्ता और दीर्घकालिक उपयोग की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में निर्माण के तुरंत बाद सामने आई इस तरह की समस्या ने जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराता है या नहीं और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मानकों की अनदेखी पाई जाती है तो उसके लिए जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल यह घटना सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण और प्रभावी निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता को एक बार फिर प्रमुखता से सामने लेकर आई है।

  • भोपाल के मोहम्मद कोनैन दाद भारतीय जूनियर हॉकी टीम में शामिल, बेल्जियम दौरे पर दिखाएंगे दम

    भोपाल के मोहम्मद कोनैन दाद भारतीय जूनियर हॉकी टीम में शामिल, बेल्जियम दौरे पर दिखाएंगे दम


    भोपाल । मध्यप्रदेश राज्य हॉकी अकादमी, भोपाल के प्रतिभाशाली खिलाड़ी मोहम्मद कोनैन दाद का चयन 5 से 18 जुलाई तक होने वाले भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम के बेल्जियम दौरे के लिए भारतीय टीम में हुआ है। इस दौरे के दौरान भारतीय जूनियर टीम बेल्जियम में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों में भाग लेते हुए अपनी तैयारियों को और मजबूत करेगी। मोहम्मद कोनैन डैड फॉरवर्ड खिलाड़ी के रूप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगे।

    अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की सशक्त उपस्थिति
    मोहम्मद कोनैन दाद का भारतीय जूनियर टीम में चयन मध्यप्रदेश राज्य हॉकी अकादमी में खिलाड़ियों को दिए जा रहे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, वैज्ञानिक खेल सुविधाओं एवं उत्कृष्ट कोचिंग व्यवस्था का परिणाम है। यह उपलब्धि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं के निरंतर उभरते स्तर को दर्शाती है तथा मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मानचित्र पर नई पहचान दिला रही है।

    मेहनत, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन का मिला प्रतिफल
    मोहम्मद कोनैन दाद ने विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन, तेज़ खेल कौशल एवं निरंतर मेहनत के बल पर भारतीय जूनियर टीम में स्थान बनाया है। उनका चयन उनके समर्पण, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रतिफल है। बेल्जियम दौरे के दौरान वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत और मध्यप्रदेश की प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

    प्रदेश के युवा हॉकी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा
    मोहम्मद कोनैन दाद की यह उपलब्धि प्रदेश के उभरते हॉकी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और दृढ़ संकल्प के साथ खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकते हैं। उनकी सफलता प्रदेश में हॉकी के प्रति युवाओं के उत्साह को और अधिक प्रोत्साहित करेगी।

    खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी शुभकामनाएँ
    खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मोहम्मद कोनैन दाद को भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम में चयनित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मोहम्मद कोनैन डैड बेल्जियम दौरे में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत और मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेंगे।