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  • एमबीबीएस के बाद अब आयुष इंटर्न्स का प्रदर्शन, भोपाल कलेक्ट्रेट पहुंचकर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग

    एमबीबीएस के बाद अब आयुष इंटर्न्स का प्रदर्शन, भोपाल कलेक्ट्रेट पहुंचकर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग

    मध्यप्रदेश: की राजधानी भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आयुष इंटर्न डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को तेज हो गया। बड़ी संख्या में आयुष इंटर्न डॉक्टर भोपाल कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें वर्तमान में 9,383 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जो कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है।

    आयुष इंटर्न डॉक्टरों ने दोपहर करीब 12 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचकर घेराव किया। प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट को बंद कर दिया गया और इंटर्न डॉक्टरों को अंदर जाने से रोका गया। स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया।

    प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने अलग-अलग राज्यों में मिलने वाले स्टाइपेंड का हवाला देते हुए मध्यप्रदेश में राशि बढ़ाने की मांग रखी। उनका कहना है कि मौजूदा 9,383 रुपये का मासिक स्टाइपेंड 15 राज्यों की तुलना में सबसे कम है।

    डॉक्टरों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में आयुष इंटर्न्स को 33,099 रुपये प्रतिमाह, ओडिशा में 30 हजार रुपये और तेलंगाना में 29,792 रुपये का स्टाइपेंड मिलता है। बिहार में यह राशि 27 हजार रुपये, आंध्र प्रदेश में 25,906 रुपये और केरल में 23 हजार रुपये प्रतिमाह बताई गई है।

    इसी तरह कर्नाटक में 22,500 रुपये, असम और महाराष्ट्र में 18 हजार रुपये, छत्तीसगढ़ में 15,900 रुपये तथा पंजाब और उत्तराखंड में 15 हजार रुपये का स्टाइपेंड मिलने की जानकारी प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने दी। राजस्थान में 14 हजार रुपये के साथ डीए मिलने की बात भी कही गई है।

    हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों को 10 हजार रुपये प्रतिमाह मिलने का दावा किया गया। इन आंकड़ों के आधार पर आयुष इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि मध्यप्रदेश में मिलने वाला स्टाइपेंड बढ़ाया जाना चाहिए।

    आयुष इंटर्न डॉक्टरों का यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है, जब हाल ही में भोपाल में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने तीन दिन तक धरना प्रदर्शन किया था। इसके बाद सरकार ने उनके स्टाइपेंड में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का ऐलान किया।

    सरकार की घोषणा के बाद एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़कर 21,500 रुपये प्रतिमाह किया गया। हालांकि प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हुई थी। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों पर लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल की बात सामने आई थी, जिसमें कुछ डॉक्टर घायल हुए थे।

    इस मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया था और मामले की जांच जारी है। इसी घटनाक्रम के बीच अब आयुष विभाग से जुड़े इंटर्न डॉक्टरों ने भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया है।

    आयुष इंटर्न डॉक्टरों की मांग है कि उनकी आर्थिक स्थिति और अन्य राज्यों में मिलने वाली राशि को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश में भी स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी की जाए। कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान प्रशासन और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच स्थिति पर नजर रखी गई।

    अब आयुष इंटर्न डॉक्टरों की मांग पर सरकार और संबंधित विभाग की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर नजर है। प्रदर्शन के जरिए डॉक्टरों ने स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर अपनी मांग प्रशासन के सामने रख दी है।

  • एमपी पुलिस की नई सोशल मीडिया गाइडलाइन में वर्दी वाली रील और AI पर दस्तावेज अपलोड करने को लेकर सख्त निर्देश जारी

    एमपी पुलिस की नई सोशल मीडिया गाइडलाइन में वर्दी वाली रील और AI पर दस्तावेज अपलोड करने को लेकर सख्त निर्देश जारी

    मध्य प्रदेश: पुलिस मुख्यालय ने अधिकारियों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। 24 बिंदुओं वाली इस नीति में वर्दी में रील, संवेदनशील जानकारी साझा करने, सरकारी दस्तावेजों को AI टूल्स पर अपलोड करने और सोशल मीडिया से कमाई सहित कई गतिविधियों को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उद्देश्य पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया उपयोग में अनुशासन, गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    नई गाइडलाइन के अनुसार पुलिस अधिकारी या कर्मचारी ड्यूटी के दौरान अथवा ड्यूटी के बाद वर्दी में रील, फोटो, वीडियो या ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकेंगे। अशोभनीय वेशभूषा में भी ऐसी सामग्री साझा करने पर रोक रहेगी। पहले से मौजूद अनुचित सामग्री को हटाने और भविष्य में निर्देशों का पालन करने के लिए भी कहा गया है।

    पुलिसकर्मियों को सरकारी दस्तावेजों की गोपनीयता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे दस्तावेजों को स्कैन, स्क्रीनशॉट या किसी अन्य माध्यम से सोशल मीडिया पर साझा नहीं किया जा सकेगा। खास तौर पर गोपनीय और सुरक्षा से जुड़ी सरकारी जानकारी को ChatGPT, Gemini जैसे AI टूल्स पर अपलोड करने से भी स्पष्ट रूप से मना किया गया है।

    संवेदनशील ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को अपनी जिम्मेदारी, काम की प्रकृति और तैनाती वाले स्थान की जानकारी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक नहीं करने को कहा गया है। ऐसे स्थानों पर सोशल मीडिया इस्तेमाल करते समय लोकेशन और जियो टैगिंग जैसी सुविधाएं बंद रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग की आशंका कम हो।

    नई नीति में सोशल मीडिया से होने वाली कमाई को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। सरकार की पूर्व अनुमति के बिना पुलिसकर्मी अपने, आश्रितों या परिजनों के नाम से बनाए गए खातों के माध्यम से पेड प्रमोशन या मॉनेटाइजेशन नहीं करा सकेंगे। व्यक्तिगत व्यवसाय, कंपनी, उत्पाद या सेवा के प्रचार पर भी प्रतिबंध रहेगा। सोशल मीडिया से हुई किसी आय का विवरण निर्देश जारी होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर विभाग को देना होगा।

    दुर्भावनापूर्ण, अश्लील या जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव दिखाने वाली सामग्री पोस्ट करने पर भी रोक लगाई गई है। ऐसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देने से भी बचने को कहा गया है। विशिष्ट और अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा के दौरान महत्वपूर्ण स्थानों के फोटो या सेल्फी साझा करना प्रतिबंधित रहेगा। हथियारों के प्रशिक्षण, ड्रिल, चांदमारी, दबिश और अन्य संवेदनशील कार्रवाई के फोटो या वीडियो पोस्ट या लाइव नहीं किए जा सकेंगे।

    किसी शिकायत, जांच या विवेचना के दौरान पीड़ित, साक्षी, आवेदक, आरोपी अथवा अन्य संबंधित लोगों के फोटो और वीडियो साझा करने पर भी रोक है। आवश्यक परिस्थितियों में अनुमति के बाद और पहचान छिपाकर ही सामग्री साझा की जा सकेगी। जारी जांच या अदालत में लंबित मामलों से जुड़ी ऐसी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की जाएगी, जिससे जांच या अभियोजन प्रभावित हो।

    महिला और बालिका से जुड़े यौन अपराधों के पीड़ितों तथा कानून के संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों की पहचान उजागर करने वाली सामग्री साझा नहीं की जा सकेगी। न्यायालय के निर्देशों या फैसलों पर ऐसी टिप्पणी से भी बचना होगा, जिससे अवमानना की स्थिति उत्पन्न हो।

    गाइडलाइन में संदिग्ध या आपराधिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के साथ सोशल मीडिया पर मित्रता, फॉलो या सहयोग से बचने को कहा गया है। पुलिस यूनिफॉर्म, वाहन और सरकारी हथियारों का इस्तेमाल निजी प्रचार के लिए करने पर भी रोक रहेगी। सरकारी नीतियों, विभागीय कार्यप्रणाली या वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ पद की गरिमा के विपरीत टिप्पणियां करने की अनुमति नहीं होगी।

    पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया के अनावश्यक व्यक्तिगत इस्तेमाल से भी बचना होगा। पुलिस की रणनीति, फील्ड क्राफ्ट, जांच तकनीक और कार्यप्रणाली से जुड़ी जानकारी बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति साझा नहीं की जा सकेगी। सेवा संबंधी शिकायतों के लिए सोशल मीडिया को माध्यम बनाने के बजाय वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष शिकायत रखने को कहा गया है।

    निर्देशों को थाना स्तर से लेकर पुलिस मुख्यालय, प्रशिक्षण संस्थानों और अन्य इकाइयों में कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से पढ़कर सुनाने के निर्देश दिए गए हैं। जानबूझकर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

  • भोपाल के 5-स्टार होटल में लिफ्ट फंसने के बाद खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, तीन लिफ्टों पर लगा अस्थायी ताला

    भोपाल के 5-स्टार होटल में लिफ्ट फंसने के बाद खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, तीन लिफ्टों पर लगा अस्थायी ताला

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की पत्नी समेत तीन लोग फंस गए। घटना के बाद नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद होटल की लिफ्ट और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की गई, जिसमें कई कमियां सामने आईं।

    यह घटना अरेरा हिल्स स्थित कोर्टयार्ड बाय मैरियट होटल में रविवार सुबह हुई। जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की पत्नी एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए होटल पहुंची थीं। उनके साथ एक डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ का सदस्य भी था।

    करीब 10:40 बजे तीनों लिफ्ट में सवार हुए। इसी दौरान लिफ्ट बीच में रुक गई और सभी अंदर फंस गए। करीब 20 से 25 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहने के बाद मदद के लिए प्रयास किए गए। लिफ्ट में उपलब्ध संपर्क नंबर पर फोन किया गया, लेकिन तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद महिला ने अपने पति को घटना की जानकारी दी।

    सूचना मिलने के बाद नगर निगम का फायर ब्रिगेड, विद्युत विभाग और स्वास्थ्य विभाग का संयुक्त अमला होटल पहुंचा। टीम ने लिफ्ट खोलकर अंदर फंसे तीनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद अधिकारियों ने केवल घटना की जांच तक सीमित न रहते हुए होटल में लिफ्ट और सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण शुरू किया।

    जांच में सामने आया कि संबंधित लिफ्ट में ऑटोमेटिक रेस्क्यू डिवाइस यानी ARD की व्यवस्था नहीं थी। यह उपकरण बिजली जाने या किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में लिफ्ट को सुरक्षित तरीके से नजदीकी मंजिल तक पहुंचाने में मदद करता है।

    लिफ्ट के नियमित रखरखाव को लेकर भी कमी मिली। दस्तावेजों की जांच में पता चला कि 31 अगस्त 2026 को निर्धारित मासिक मेंटेनेंस नहीं कराया गया था। जिस लिफ्ट में लोग फंसे थे, उसका पिछला निर्धारित निरीक्षण 29 मई 2026 को हुआ था।

    नगर निगम की टीम ने लिफ्ट के अलावा होटल की फायर सेफ्टी व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और एग्जिट गेट की स्थिति की जांच की गई। अधिकारियों के मुताबिक कुछ व्यवस्थाएं निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं मिलीं।

    इन कमियों के सामने आने के बाद नगर निगम ने होटल की तीन लिफ्टों को अस्थायी रूप से सील कर दिया। इसके साथ ही होटल के खाद्य सुरक्षा लाइसेंस और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की गई।

    नगर निगम के अनुसार होटल का पहले भी निरीक्षण किया जा चुका है और सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए नोटिस दिए गए थे। इसके बावजूद लिफ्ट रखरखाव और फायर सेफ्टी से संबंधित कमियां मिलने के बाद कार्रवाई की गई।

    घटना के बाद भोपाल में अन्य बहुमंजिला इमारतों, होटलों और अस्पतालों की लिफ्टों की जांच कराने की तैयारी भी की गई है। इस अभियान में लिफ्टों के नियमित मेंटेनेंस, सुरक्षा उपकरणों और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी।

    नगर निगम प्रशासन ने संबंधित संस्थानों को लिफ्टों का समय पर रखरखाव कराने और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जहां सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • MP में युवाओं के रोजगार पर सरकार का बड़ा फोकस, IT पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस से बढ़ेंगे शिक्षा और कौशल के अवसर

    MP में युवाओं के रोजगार पर सरकार का बड़ा फोकस, IT पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस से बढ़ेंगे शिक्षा और कौशल के अवसर

    मध्यप्रदेश: में युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ाने को लेकर सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की बात कही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में युवाओं को बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिनसे शिक्षा, तकनीक, कौशल और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।

    मुख्यमंत्री के मुताबिक IT पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस के माध्यम से युवाओं को केवल शिक्षा प्राप्त करने तक सीमित अवसर नहीं मिलेंगे, बल्कि उन्हें रोजगार और कौशल विकास से जुड़े नए विकल्प भी उपलब्ध होंगे। तकनीकी क्षेत्र के विस्तार के साथ युवाओं को बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में तकनीक, नवाचार और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक आधार तैयार किया जा रहा है। IT क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों का उद्देश्य रोजगारपरक प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना और युवाओं को आधुनिक तकनीकी अवसरों से जोड़ना है। इससे शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को नए क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने इंदौर और भोपाल के विकास को लेकर भी सरकार की योजना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों शहरों को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस दिशा में सुनियोजित शहरी विकास, बेहतर सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    इंदौर और भोपाल को बड़े शहरी और आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित करने का असर रोजगार के अवसरों पर भी पड़ सकता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन शहरों में नई तकनीक, नवाचार और उद्योगों को बढ़ावा मिलने से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही प्रदेश के समग्र विकास को भी गति मिलेगी।

    प्रदेश में तकनीकी और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ IT क्षेत्र को भी महत्व दिया जा रहा है। तकनीकी बुनियादी ढांचे और रोजगारपरक कौशल को बढ़ाने से युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इससे कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़े अवसरों के विस्तार की संभावना बढ़ेगी।

    सरकार का जोर विकास को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति को गति देने पर भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में विकास और प्रगति के लिए सरकार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इसी क्रम में उद्योग, तकनीक, शिक्षा और कौशल विकास को रोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में प्रगति के लिए काम कर रही है। साथ ही आगामी सिंहस्थ की तैयारियों को भी गति दी जा रही है और उससे जुड़े आवश्यक विकास कार्यों को तेजी से किए जाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    इन पहलों के जरिए सरकार का लक्ष्य युवाओं को शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। IT पार्क, इंजीनियरिंग कैंपस, औद्योगिक गतिविधियों और मेट्रोपॉलिटन शहरों के विकास को रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़कर आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

  • UCC पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध, भोपाल बैठक में कानूनी लड़ाई की रणनीति और 17 सितंबर के कार्यक्रम पर चर्चा

    UCC पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध, भोपाल बैठक में कानूनी लड़ाई की रणनीति और 17 सितंबर के कार्यक्रम पर चर्चा

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC को लेकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक हुई। खानूगांव कैंपस में आयोजित बैठक में UCC के विरोध के साथ इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई की रणनीति पर भी चर्चा की गई। बैठक के बाद शहर काजी मुश्ताक अली नदवी और बोर्ड के रुक्न-ए-आमला एवं कांग्रेस नेता आरिफ मसूद ने मुस्लिम समाज की ओर से अपना पक्ष रखा।

    शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि मुस्लिम समाज UCC को स्वीकार नहीं करता और इस मुद्दे पर पहले भी अपनी बात रखता आया है। उन्होंने कहा कि संविधान धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की गारंटी देता है। ऐसे में UCC की जरूरत और उसके संभावित असर पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार और जिम्मेदार लोगों से इस विषय पर गंभीरता से सोचने की बात कही।

    शहर काजी ने अपने पक्ष को रखते हुए आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक एमएस गोलवलकर के 1972 में दिल्ली में दिए गए एक भाषण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस भाषण में गोलवलकर ने कौमी इत्तेहाद के लिए सिविल कोड को जरूरी नहीं बताया था। शहर काजी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े विषयों पर मुस्लिम समाज और इस विषय के जानकारों की बात सुनी जानी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि पर्सनल लॉ को समझने के लिए उसे पढ़ना और उस पर अमल करना जरूरी है। उनका कहना था कि इस विषय को केवल सामान्य चर्चा के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इससे जुड़े पक्षों को भी गंभीरता से समझना जरूरी है।

    बैठक में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को लेकर भी चर्चा हुई। शहर काजी ने कहा कि इस्लाम ने महिलाओं को पहले से अधिकार और सम्मान दिया है। उन्होंने महिलाओं के मां, बेटी और पत्नी के रूप में अधिकारों के साथ संपत्ति में हिस्सेदारी का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि महिलाओं के अधिकारों के मामले में मुस्लिम समाज किसी से पीछे नहीं है।

    UCC के खिलाफ आगे की रणनीति को लेकर 17 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले कार्यक्रम का भी मुद्दा बैठक में उठा। मध्य प्रदेश से लोगों से इस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की गई। शहर काजी ने मुस्लिम समाज के साथ सेक्युलर नागरिकों से भी कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की।

    आरिफ मसूद ने कहा कि UCC के खिलाफ कानूनी लड़ाई के लिए बोर्ड की लीगल टीम तैयार है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग जिलों में भी वकील अपने स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। बोर्ड की ओर से याचिका का मसौदा तैयार होने की जानकारी भी दी गई। उन्होंने लोगों से जल्दबाजी में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करने के बजाय कानूनी लड़ाई के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने की अपील की।

    इस तरह भोपाल की बैठक में UCC को लेकर विरोध के साथ आंदोलन और कानूनी प्रक्रिया, दोनों स्तरों पर आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। बोर्ड की ओर से 17 सितंबर के दिल्ली कार्यक्रम में भागीदारी बढ़ाने और कानूनी कार्रवाई को संगठित तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल से की मुलाकात, सेवा संकल्प अभियान और नि:शुल्क रजिस्ट्री की दी जानकारी

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल से की मुलाकात, सेवा संकल्प अभियान और नि:शुल्क रजिस्ट्री की दी जानकारी

    मध्य प्रदेश। के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को लोक भवन पहुंचकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल से सौजन्य भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से शुरू होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत प्रदेश में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की जानकारी राज्यपाल को दी।

    मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ के तहत होने वाले विशेष अभियान के बारे में भी बताया। इसके तहत प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्र के 50 लाख से अधिक लोगों के पट्टों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने की योजना है। इस रजिस्ट्री का पूरा खर्च सरकारी स्तर पर वहन किया जाएगा।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के साथ ही सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए गए कार्यों को स्मरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर दीपोत्सव का आयोजन भी किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि 17 सितंबर को ग्रामीण क्षेत्रों के 50 लाख से अधिक पट्टों की रजिस्ट्री निशुल्क कराई जाएगी। इसके लिए होने वाला पूरा सरकारी खर्च शासन की ओर से वहन किया जाएगा। इस अभियान को प्रधानमंत्री के जनसेवा के संकल्प से जुड़ी विकास यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किए जा रहे सेवा संकल्प अभियान का हिस्सा बताया गया है।

    ‘सेवा-संकल्प अभियान’ 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक पूरे मध्य प्रदेश में संचालित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की अविरल सेवा-संकल्प की यात्रा को प्रदेश के लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से इस अभियान में शामिल होने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि सभी लोग इस महाअभियान का हिस्सा बनें और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की यात्रा में सहभागी बनें।

    राज्यपाल से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने अभियान से संबंधित कार्यक्रमों और नि:शुल्क रजिस्ट्री की योजना की जानकारी साझा की। ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ के तहत होने वाली रजिस्ट्री ग्रामीण क्षेत्र के पट्टाधारकों से जुड़ी है और इसमें सरकारी स्तर पर खर्च वहन किए जाने की बात कही गई है।

    सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर होगी और इसका संचालन एक महीने तक किया जाएगा। इस दौरान प्रदेश में अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इसे प्रधानमंत्री की जनसेवा से जुड़ी 25 वर्षों की यात्रा को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बताया है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल को मुख्यमंत्री द्वारा दी गई जानकारी में अभियान के कार्यक्रमों के साथ-साथ 50 लाख से अधिक ग्रामीण पट्टों की नि:शुल्क रजिस्ट्री से संबंधित योजना भी शामिल रही। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अभियान में सहभागिता की अपील करते हुए इसे विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ी यात्रा में भागीदारी का अवसर बताया।

  • मिसाइल टिप्पणी पर ओवैसी और रामेश्वर शर्मा आमने-सामने, काजी कैंप से UCC तक भोपाल में तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

    मिसाइल टिप्पणी पर ओवैसी और रामेश्वर शर्मा आमने-सामने, काजी कैंप से UCC तक भोपाल में तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विवाद की शुरुआत रामेश्वर शर्मा की उस टिप्पणी से हुई, जिसमें उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान करोंद चौराहे से काजी कैंप तक मिसाइल गिराने की बात कही थी। बाद में शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इशारा भोपाल के काजी कैंप की ओर नहीं, बल्कि इस्लामाबाद के काजी कैंप की ओर था।

    इस बयान के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया। 15 सितंबर को भोपाल में आयोजित सभा में असदुद्दीन ओवैसी ने रामेश्वर शर्मा की टिप्पणी का जिक्र किया। उन्होंने शर्मा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है तो काजी कैंप में आकर मिसाइल गिराकर दिखाएं। ओवैसी ने यह भी कहा कि वह इस तरह के बयानों से डरने वाले नहीं हैं।

    ओवैसी की टिप्पणी के बाद रामेश्वर शर्मा ने भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर ओवैसी बैरिस्टर हैं तो उन्हें बदतमीजी की भाषा छोड़कर उनका पूरा बयान सुनना चाहिए। शर्मा ने कहा कि यदि उनके बयान को लेकर कोई आपत्ति है तो अदालत का रास्ता अपनाया जा सकता है।

    रामेश्वर शर्मा ने अपने जवाब में ऑपरेशन सिंदूर, भारतीय मिसाइलों और आतंकवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की सेना ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में अपनी ताकत दिखाई है। शर्मा का कहना था कि जहां आतंकवाद के कैंप और भारत विरोधी गतिविधियां होंगी, वहां भारत की मिसाइल तैयार है।

    शर्मा ने यह भी कहा कि वह अपने पहले दिए गए बयान पर कायम हैं। इस दौरान उन्होंने ओवैसी के खिलाफ कई व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं, जिससे दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी और तीखी हो गई।

    यह राजनीतिक विवाद केवल मिसाइल वाली टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा। समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर भी रामेश्वर शर्मा और असदुद्दीन ओवैसी के बीच मतभेद सामने आए। रामेश्वर शर्मा ने UCC का समर्थन करते हुए कहा कि यदि राजनीतिक दल हिंदुओं के वोट चाहते हैं तो हिंदू कानून को लेकर सवाल क्यों उठाए जाते हैं।

    शर्मा ने कहा कि UCC लागू होने से शादी और परिवार से जुड़े नियमों में एक समान व्यवस्था आएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू होने की बात कही है और मध्य प्रदेश में यह लागू हो चुका है।

    वहीं, असदुद्दीन ओवैसी UCC का लगातार विरोध करते रहे हैं। भोपाल में आयोजित सभा के दौरान उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। इस तरह दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद मिसाइल टिप्पणी से आगे बढ़कर समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे तक पहुंच गए।

    करोंद चौराहे और काजी कैंप के संदर्भ से शुरू हुआ यह विवाद अब आतंकवाद और UCC से जुड़े बयानों तक पहुंच चुका है। दोनों नेताओं की ओर से लगातार सामने आए बयानों और जवाबी टिप्पणियों के कारण भोपाल में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई है। फिलहाल पूरा विवाद दोनों नेताओं के सार्वजनिक बयानों और उनके जवाबी बयानों के इर्द-गिर्द केंद्रित है।

  • MP: भोपाल में VIP रोड पर ओवैसी के काफिले का एक्सीडेंट….अचानक ब्रेक लगाने से आपस में टकराए वाहन

    MP: भोपाल में VIP रोड पर ओवैसी के काफिले का एक्सीडेंट….अचानक ब्रेक लगाने से आपस में टकराए वाहन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के काफिले (Convoy) से जुड़ा सड़क हादसा सामने आया है. शहर के VIP रोड पर ओवैसी के काफिले के दौरान हादसा हुआ, जिसमें करीब 4 से 5 बाइक सवारों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

    बताया जा रहा है कि VIP रोड पर ओवैसी का काफिला गुजर रहा था. इसी दौरान काफिले के वाहनों और बाइक सवारों (Motorcyclists) के बीच टक्कर हो गई. हादसा इतना अचानक हुआ कि मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया. सड़क पर मौजूद लोगों ने घायलों की मदद की और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची. पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है. हादसे में घायल बाइक सवारों को किस तरह की चोटें आई हैं।

    इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है. वहीं, VIP रोड पर हादसे के बाद कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित होने की सूचना है. पुलिस ने मौके पर व्यवस्था संभालते हुए यातायात को सामान्य कराया। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है. हादसा काफिले के किस वाहन से हुआ और दुर्घटना की वास्तविक वजह क्या थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    यातायात अतिरिक्त पुलिस आयुक्त वसंत कॉल ने बताया कि असदुद्दीन ओवैसी के काफिले में चल रही कुछ गाड़ियां एक दूसरे से टकराई हैं. काफिला मोड़ पर रोक गया था उसके बाद ये हादसा हुआ है. पुलिस ने तुरंत ही मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला. कुछ बाइक सवारों को चोट आई थी. उनको प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल पहुंचा दिया है।

    VIP रोड पर ओवैसी के काफिले के दौरान हुए इस हादसे ने एक बार फिर वीआईपी मूवमेंट के दौरान यातायात व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • भोपाल के रहवासी इलाकों में कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, 62,500 प्रतिष्ठानों पर फैसले का इंतजार

    भोपाल के रहवासी इलाकों में कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, 62,500 प्रतिष्ठानों पर फैसले का इंतजार

    भोपाल । शहर के रहवासी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई। जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण अब इस मामले की सुनवाई बाद में होगी। फिलहाल नई तारीख तय नहीं हुई है।

    इस सुनवाई में भोपाल के रहवासी क्षेत्रों में चल रहे करीब 62,500 प्रतिष्ठानों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला आने की उम्मीद थी। इसी मामले में मंगलवार, 15 सितंबर को सुनवाई तय थी। नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश करनी थी। अब सुनवाई टलने के बाद अगली तारीख का इंतजार है।

    इस मामले में भोपाल नगर निगम अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश कर चुका है। वहीं, रहवासी पक्ष ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपने दस्तावेज कोर्ट में पेश किए हैं।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का आरोप है कि निगम ने कार्रवाई को लेकर जो रिपोर्ट पेश की है, उसमें कई बातें सही नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि जिन प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, उनमें से कई दोबारा खुल गए हैं। रहवासी पक्ष ने निगम की कार्रवाई को लेकर कोर्ट के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

    दरअसल, 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल नगर निगम ने आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। करीब 15 दिनों तक नोटिस देने का अभियान चला।

    इस दौरान सूची में शामिल करीब 62,500 प्रतिष्ठानों में से 8,084 को नोटिस दिए गए। इसके बाद निगम ने 3 दिनों तक कार्रवाई करते हुए करीब 190 प्रतिष्ठानों को बंद किया था। हालांकि, व्यापारियों के विरोध के बाद कार्रवाई रोक दी गई।

    निगम की नोटिस और सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़क पर उतर आए थे। व्यापारियों के विरोध के बाद निगम ने कार्रवाई रोक दी। पिछले करीब 15 दिनों से इस मामले में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। दूसरी ओर, रहवासी निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय लोगों को लगातार परेशानी हो रही है।

    भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल और अवैध निर्माण को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। अगस्त के पहले सप्ताह में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।

    कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ओर से दुकान संचालकों को दिए गए राहत और स्टे ऑर्डर भी निरस्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    रहवासियों की मांग है कि आवासीय इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां बंद की जाएं। दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाले शोर और भीड़ को रोका जाए। बढ़ते ट्रैफिक और व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली सार्वजनिक परेशानी को कम किया जाए। रहवासी क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने के साथ स्कूली बच्चों की सुरक्षा का भी ध्यान रखने की मांग की गई है। साथ ही नियमों के खिलाफ चल रहे प्रतिष्ठानों पर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग है।

    अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। नई तारीख तय होने के बाद 62,500 प्रतिष्ठानों और भोपाल के रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर आगे की स्थिति साफ हो सकेगी।

  • सीएम डॉ. मोहन यादव का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर जोर, CSIR-AMPRI और PWD के बीच हुआ अहम समझौता

    सीएम डॉ. मोहन यादव का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर जोर, CSIR-AMPRI और PWD के बीच हुआ अहम समझौता


    मध्यप्रदेश:  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता देते हुए तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय अभियंता दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग तकनीक के साथ नए प्रयोग कर रहा है और अपने स्तर पर संसाधन जुटाकर अधोसंरचना तैयार कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान सीएसआईआर-एम्प्री भोपाल और मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान भी किया गया।

    मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। इसके बाद वंदे मातरम का गायन हुआ। उन्होंने कहा कि अभियंता दिवस समारोह अभियांत्रिकी कार्यों में गुणवत्ता और नवाचार की संस्कृति को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने महान अभियंता मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी बनाई संरचनाएं उनकी सोच और तकनीकी क्षमता को दर्शाती हैं।

    डॉ. यादव ने कहा कि इंजीनियर शब्द में उन्हें इंजन का आभास होता है। इंजन वह होता है जो पूरी ताकत और क्षमता के साथ संचालन करता है। उन्होंने मध्यप्रदेश की स्थापत्य और शिल्प परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में ऐतिहासिक इमारतों, चट्टानों को काटकर बनाए गए मंदिरों और उत्कृष्ट प्रतिमाओं के रूप में इंजीनियरिंग तथा कला-कौशल के अनेक उदाहरण मौजूद हैं। अजंता-एलोरा का कैलाश मंदिर, मंदसौर का धर्मराजेश्वर और अन्य प्राचीन संरचनाएं हजारों वर्षों पुरानी कला साधना की पहचान हैं।

    मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विभाग ने रानी दुर्गावती, सम्राट विक्रमादित्य और राजा भोज जैसी ऐतिहासिक विभूतियों को स्मरण किया है। उन्होंने कहा कि विभाग तकनीक के साथ नवाचार कर रहा है और अधोसंरचना निर्माण के लिए स्वयं संसाधन जुटाना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश के सभी विभाग विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और इसमें लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों का टीम वर्क महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग केवल तकनीक नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता भी है। उन्होंने इंजीनियरों के लिए खोजी स्वभाव, अनुभव और परफेक्शन को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार पिछले नौ महीनों में प्रदेश के 85 प्रतिशत इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया गया है।

    कार्यक्रम में CSIR-AMPRI भोपाल और लोक निर्माण विभाग के बीच हुए MoU के तहत फ्लायऐश आधारित सीमेंट से सड़क निर्माण की दिशा में काम किया जाएगा। इसके अलावा सीमेंट के बिना कांक्रीट सड़क निर्माण की तकनीक विकसित करने और सरकारी भवनों में ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी अपनाने की दिशा में भी काम होगा।

    समारोह में अधोसंरचना निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अभियंताओं, अधिकारियों, संयुक्त दलों और निर्माण एजेंसियों को लोक निर्माण पुरस्कार प्रदान किए गए। इस दौरान लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार कम्पेंडियम सर्कुलर का विमोचन भी किया गया। कई अधिकारियों और अभियंताओं को सम्मानित किया गया, जबकि सेवानिवृत्त सचिव लोक निर्माण विभाग सतीश चंद्र पांडे और सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता जीएस पल्नितकर को विशेष सम्मान दिया गया।