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  • भोपाल-इंदौर मास्टर प्लान पर जीतू पटवारी का अल्टीमेटम, तीन महीने में जारी नहीं हुआ तो 50 हजार लोग निकालेंगे पदयात्रा

    भोपाल-इंदौर मास्टर प्लान पर जीतू पटवारी का अल्टीमेटम, तीन महीने में जारी नहीं हुआ तो 50 हजार लोग निकालेंगे पदयात्रा

    मध्य प्रदेश : कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर सरकार को तीन महीने का समय देने की बात कही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में दोनों शहरों का मास्टर प्लान जारी नहीं किया गया और जनता तथा व्यापारियों की समस्याएं बनी रहीं, तो कांग्रेस इंदौर से भोपाल तक 50 हजार लोगों के साथ पदयात्रा निकालेगी।

    पटवारी भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा द्वारा भोपाल मास्टर प्लान लागू करने की मांग को लेकर आयोजित 31 घंटे के उपवास कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने इस कार्यक्रम को अपना समर्थन दिया। इस दौरान कांग्रेस के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

    पटवारी ने कहा कि भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर कांग्रेस लगातार आवाज उठाती रही है। उनके मुताबिक, भोपाल में मास्टर प्लान लागू करने की मांग को लेकर पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा ने उपवास किया है। इससे पहले व्यापारियों और विधायक आरिफ मसूद की ओर से भी इस मुद्दे को लेकर आंदोलन किया गया है।

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अलग-अलग अवसरों पर सरकार से भोपाल और इंदौर का मास्टर प्लान लागू करने की मांग करती रही है। अब पार्टी ने नगरीय प्रशासन मंत्री, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि अगले तीन महीने के भीतर दोनों शहरों का मास्टर प्लान जारी किया जाए।

    पटवारी का कहना है कि मास्टर प्लान के अभाव में दोनों शहरों का विकास बेतरतीब तरीके से हो रहा है। इसका असर आम जनता और व्यापारियों पर पड़ रहा है और उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार तय अवधि में मास्टर प्लान नहीं लाती है तो कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि इंदौर से भोपाल तक प्रस्तावित पदयात्रा केवल मास्टर प्लान की मांग तक सीमित नहीं रहेगी। पटवारी के अनुसार, इसमें प्रदेश में फैल रहे भ्रष्टाचार और बेतरतीब विकास के खिलाफ भी जनआंदोलन का रूप देने की कोशिश की जाएगी।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने जनता से वोट लिए हैं। यदि वही जनता मूलभूत सुविधाओं और व्यवस्थित विकास के लिए संघर्ष करने को मजबूर है तो इसे जनता के साथ अन्याय माना जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता और व्यापारियों की आवाज बनकर सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।

    पटवारी ने राहुल गांधी के 19 सितंबर को प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश के ऐसे पहले नेता प्रतिपक्ष हैं, जो किसी गैर-राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं। इसके बावजूद सरकार ने कार्यक्रम के लिए मैदान के उपयोग के नाम पर 10 लाख रुपये का शुल्क लिया है।

    उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वह नेता प्रतिपक्ष के रूप में भोपाल आते थे, तब कांग्रेस सरकार उन्हें कार्यक्रम की अनुमति देती थी और स्वयं भी उनके कार्यक्रम में शामिल होकर उन्हें सुनती थी। पटवारी ने राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए मैदान का शुल्क लिए जाने को दोनों सरकारों की सोच के बीच अंतर बताया।

    उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का कार्यक्रम छात्रों और युवाओं से जुड़ा है और इसमें बड़ी संख्या में युवा अपनी बात रखने के लिए शामिल होंगे। पटवारी ने सरकार से राजनीतिक दुर्भावना से ऊपर उठकर लोकतांत्रिक परंपराओं और जनभावनाओं का सम्मान करने की अपील की।

  • 14 हजार से 30 हजार स्टाइपेंड की मांग को लेकर डॉक्टर सड़क पर उतरे, हमीदिया में पुलिस से हुई झड़प

    14 हजार से 30 हजार स्टाइपेंड की मांग को लेकर डॉक्टर सड़क पर उतरे, हमीदिया में पुलिस से हुई झड़प

    भोपाल: के हमीदिया अस्पताल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन सोमवार को तनावपूर्ण हो गया। मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च निकालने की कोशिश कर रहे डॉक्टरों को रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान वाटर कैनन की चपेट में आने से एक इंटर्न डॉक्टर के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

    प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों की मुख्य मांग स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की है। उनका कहना है कि वर्तमान में उन्हें हर महीने 14,337 रुपये स्टाइपेंड मिल रहा है, जबकि वे इसे बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इस संबंध में शासन की ओर से निर्णय लेने का मौखिक आश्वासन दिया गया था, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ।

    इसी के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए मार्च निकालने का फैसला किया। डॉक्टरों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात कर अपनी समस्या रखना चाहते थे। हालांकि मार्च शुरू होने से पहले ही अस्पताल परिसर में पुलिस बल तैनात कर दिया गया और बाहर निकलने वाले रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

    पुलिस की तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच विवाद बढ़ गया। कुछ इंटर्न डॉक्टरों ने हमीदिया अस्पताल के गेट और बैरिकेड तोड़ दिए। इसके बाद वे अस्पताल परिसर से बाहर निकलकर फतेहगढ़ की मुख्य सड़क पर पहुंच गए और वहीं बैठकर विरोध जताने लगे। प्रदर्शन के दौरान सड़क पर डॉक्टरों के बैठने से इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।

    अस्पताल परिसर में पुलिस की ओर से इमरजेंसी गेट को भी ब्लॉक किए जाने की बात सामने आई। मौके पर वाटर कैनन वाहन सहित पुलिस के अन्य वाहन तैनात रहे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान वाटर कैनन चलाया गया और एक छात्र के घायल होने की जानकारी सामने आई।

    इंटर्न डॉक्टर मोहित मिश्रा ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर पहले संवैधानिक तरीके से अपनी बात रख चुके हैं और सभी नियमों का पालन किया गया, लेकिन जब उनकी मांग पर निर्णय नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने का फैसला लिया गया।

    डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें केवल मौखिक आश्वासन नहीं चाहिए। उनकी मांग है कि स्टाइपेंड बढ़ाने का फैसला लिखित सरकारी आदेश के रूप में जारी किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें 14,337 रुपये नहीं, बल्कि न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड चाहिए।

    मोहित मिश्रा के मुताबिक उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल की ओर से पहले कहा गया था कि यदि उत्तर प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाया जाता है तो मध्य प्रदेश में भी उस दिशा में निर्णय लिया जाएगा। अब उत्तर प्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये किए जाने का आदेश जारी होने के बाद मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टर भी अपने राज्य में इसी तरह के निर्णय की मांग कर रहे हैं।

    प्रदर्शनकारियों के अनुसार मध्य प्रदेश में करीब दो हजार शासकीय इंटर्न डॉक्टर हैं, जबकि प्रदेश में कुल इंटर्न डॉक्टरों की संख्या लगभग 3,600 बताई जा रही है। दूसरे मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों के भी आंदोलन में शामिल होने का दावा किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सागर के इंटर्न डॉक्टरों की बस को नादरा बस स्टैंड पर रोका गया।

    डॉक्टरों ने कहा है कि जब तक मुख्यमंत्री स्वयं सामने आकर स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल हमीदिया अस्पताल परिसर में डॉक्टरों के प्रदर्शन और पुलिस की तैनाती के कारण स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

  • मध्य प्रदेश में बारिश के बीच मुख्यमंत्री ने लिया आपदा प्रबंधन का जायजा, एसडीआरएफ एनडीआरएफ की मुस्तैदी पर जताया संतोष

    मध्य प्रदेश में बारिश के बीच मुख्यमंत्री ने लिया आपदा प्रबंधन का जायजा, एसडीआरएफ एनडीआरएफ की मुस्तैदी पर जताया संतोष

    मध्य प्रदेश: में लगातार हो रही बारिश और कई क्षेत्रों में अतिवृष्टि की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को भोपाल स्थित होमगार्ड कार्यालय के एसडीआरएफ स्टेट कमांड सेंटर का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने यहां प्रदेश में बारिश से उत्पन्न परिस्थितियों, संभावित बाढ़ और राहत एवं बचाव अभियानों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और बचाव दलों की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कमांड सेंटर से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आपदा प्रबंधन की स्थिति का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों और संबंधित टीमों से प्रभावित इलाकों की जानकारी ली तथा राहत कार्यों की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने बचाव एवं राहत अभियान में जुटे personnel से संवाद भी किया और उनके कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

    डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फिलहाल बारिश का दौर जारी है। पश्चिमी मध्य प्रदेश को छोड़कर राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की आवश्यकता पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि लगातार वर्षा के कारण निचले इलाकों में पानी भरने जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जिससे नागरिकों के साथ-साथ पशुधन के लिए भी चुनौती उत्पन्न हो सकती है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले एक महीने के दौरान एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने मिलकर 2783 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। अचानक आई बाढ़ और जलभराव जैसी परिस्थितियों में इन टीमों की तत्परता से कई लोगों और मवेशियों को बचाने में मदद मिली है।

    उन्होंने कहा कि पिछले दो से चार दिनों में प्रदेश में ऐसी कोई गंभीर आपात स्थिति सामने नहीं आई है, लेकिन बचाव दलों को लगातार सतर्क रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की स्थिति में कुछ ही समय के भीतर पानी का स्तर बढ़ने से निचले इलाकों में परेशानी पैदा हो सकती है। ऐसे में प्रशासन, पुलिस और बचाव दलों की त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है।

    डॉ. यादव ने आपदा प्रबंधन में पुलिस और बचाव दलों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जवानों ने अचानक आई बाढ़ जैसी परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करते हुए नागरिकों और पशुधन की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार का प्रयास है कि संकट की स्थिति में प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाई जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश का मौसम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले कुछ दिनों में भी वर्षा की संभावना बनी हुई है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए।

    इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से सीधा संवाद भी किया और वहां की परिस्थितियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए। सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा तथा किसी भी संभावित आपदा में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम रखना है।

  • शिक्षक दिवस पर सीएम मोहन यादव की बड़ी घोषणा, मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा अब ऑफलाइन मोड में आयोजित होगी

    शिक्षक दिवस पर सीएम मोहन यादव की बड़ी घोषणा, मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा अब ऑफलाइन मोड में आयोजित होगी

    मध्यप्रदेश: शिक्षक दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी को ऑफलाइन मोड में आयोजित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों के हित में जरूरी निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर लगातार काम किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने यह घोषणा भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में की। समारोह का शुभारंभ राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम से पहले एनसीसी कैडेट्स ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

    समारोह में प्रदेश के 33 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल कक्षाओं में विद्यार्थियों को पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देते हैं। उनके अनुसार देश का नक्शा कागज पर तैयार होता है, लेकिन देश की किस्मत कक्षाओं में बनती है।

    डॉ. यादव ने कहा कि भारत की गुरु-शिष्य परंपरा प्राचीन और गौरवशाली रही है। तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे शिक्षा केंद्रों ने दुनिया के विद्यार्थियों को ज्ञान दिया। उन्होंने मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और शैक्षणिक परंपरा का उल्लेख करते हुए उज्जैन के सांदीपनि आश्रम का भी जिक्र किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षकों की मेहनत और योगदान का सम्मान करती है। उन्होंने दावा किया कि बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में मेरिट सूची में बड़ी संख्या सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की होती है। इसके पीछे शिक्षकों का मार्गदर्शन, परिश्रम और विद्यार्थियों के प्रति उनकी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि मध्यप्रदेश के शासकीय स्कूल गुणवत्ता के मामले में निजी स्कूलों से बेहतर बनें। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक सुधारों पर काम किया जा रहा है। इसी क्रम में शिक्षक पात्रता परीक्षा को ऑफलाइन कराने का निर्णय शिक्षकों और अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने शिक्षक सम्मान समारोह में प्रदेश के सभी शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शिक्षक ज्ञान के साथ संस्कार देकर बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षा को बदलती वैश्विक जरूरतों और रोजगार के अवसरों के अनुरूप लगातार विकसित करने की आवश्यकता है।

    राज्यपाल ने शिक्षकों से विद्यार्थियों की प्रतिभा पहचानने और उनकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने में सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने बच्चों में सहनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

    स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश का प्रत्येक शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी है। उन्होंने शिक्षकों के समर्पण और ग्रामीण तथा चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में उनके योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों से जुड़ी कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए प्रयास कर रही है।

    समारोह में सम्मानित शिक्षकों में शिवलाल दांगी, धन्नालाल बिसेन, रितेश कुमार पथाड़े, सुखनंदन साहू, नरेंद्र कुमार भारद्वाज, शिखा शर्मा, ज्योति पाठक, सीमा परमार, पूनम मिश्रा, मनीष तिवारी, अजय कुमार मिश्रा, पूजा पांडे और अन्य चयनित शिक्षक शामिल रहे। शिक्षक दिवस पर टीईटी को ऑफलाइन कराने की घोषणा और उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार के रुख को सामने लाता है।

  • MP: भोपाल में CJP की बैठक में हंगामा….छात्रों ने लगाए नारे, माइक छीनने की कोशिश

    MP: भोपाल में CJP की बैठक में हंगामा….छात्रों ने लगाए नारे, माइक छीनने की कोशिश


    भोपाल।
    भोपाल (Bhopal) में सीजेपी (CJP) की बैठक के दौरान उस वक्त हंगामा हो गया, जब छात्रों और युवाओं का एक समूह बैठक में पहुंच गया. युवकों ने CJP के प्रतिनिधियों (Representatives) से स्कूलों के ऑडिट (School audits) और संगठन की गतिविधियों को लेकर सवाल किए. सवाल-जवाब के दौरान विवाद बढ़ गया और कुछ युवकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. इस दौरान माइक छीनने की कोशिश भी की गई. हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस गांधी भवन पहुंची और छात्रों को समझाइश देकर मामला शांत कराया।

    दरअसल, शहर के गांधी भवन का यह मामला है. यहां CJP की बैठक के दौरान अचानक हंगामे की स्थिति बन गई. दरअसल, छात्रों और युवाओं का एक समूह बैठक के दौरान अंदर पहुंचा था. इनमें कुछ युवक काली टी-शर्ट पहने हुए थे। युवकों ने CJP के प्रतिनिधियों से स्कूलों के ऑडिट को लेकर सवाल पूछना शुरू किया।

    सवाल-जवाब के दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया. युवकों ने दिल्ली में हुए पिछले प्रदर्शनों और संगठन की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए। इसी दौरान कुछ युवकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. ‘यह दिल्ली नहीं, भोपाल है’, ‘कॉकरोच पार्टी मुर्दाबाद’ और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए गए. मामला बढ़ने पर माइक छीनने की कोशिश भी हुई।

    हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस बल गांधी भवन पहुंचा. पुलिस ने मौके पर मौजूद छात्रों और युवाओं को समझाइश दी. पुलिस की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ. घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बैठक के दौरान युवकों की नारेबाजी और हंगामे का दृश्य दिखाई दे रहा है।

  • भोपाल में बदमाश का पीछा कर रही पुलिस बाइक ने 8 साल की बच्ची को मारी टक्कर! सिर में चोट के बाद सिविल ड्रेस वाले जवानों को भीड़ ने घेरा

    भोपाल में बदमाश का पीछा कर रही पुलिस बाइक ने 8 साल की बच्ची को मारी टक्कर! सिर में चोट के बाद सिविल ड्रेस वाले जवानों को भीड़ ने घेरा


    भोपाल । भोपाल के हबीबगंज थाना क्षेत्र में शनिवार शाम बदमाश का पीछा कर रहे दो पुलिसकर्मियों की बाइक की चपेट में आने से आठ साल की बच्ची घायल हो गई। हादसा 11 नंबर इलाके में हुआ जहां गुंडा स्क्वाड के पुलिसकर्मी एक फरार आरोपी का पीछा कर रहे थे। टक्कर के बाद बच्ची सड़क पर गिर गई और उसके सिर में चोट लगने से खून निकलने लगा। बच्ची को घायल देखकर मौके पर मौजूद लोग आक्रोशित हो गए और सिविल ड्रेस में मौजूद दोनों पुलिसकर्मियों को घेर लिया। कुछ देर तक मौके पर झूमाझटकी की स्थिति बनी रही। बाद में पुलिसकर्मियों ने अपनी पहचान बताकर आईडी कार्ड दिखाया जिसके बाद लोगों को पता चला कि वे पुलिसकर्मी हैं और मामला शांत हुआ।

    पुलिस के मुताबिक कमला नगर थाने में संपत्ति हड़पने के मामले में एक आरोपी फरार चल रहा है। उसकी तलाश में गुंडा स्क्वाड की टीम लगातार जुटी हुई है। शनिवार शाम करीब छह बजे पुलिसकर्मी दीपक कटियार और बलराम बाइक से 11 नंबर इलाके में आरोपी की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान आरोपी भी बाइक से भाग रहा था और दोनों पुलिसकर्मी उसका पीछा कर रहे थे। पीछा करने के दौरान अचानक आठ साल की बच्ची पुलिस बाइक के सामने आ गई। पुलिसकर्मी संभल पाते उससे पहले बाइक बच्ची से टकरा गई।

    हादसे में बच्ची सड़क पर गिर गई और उसके सिर में गंभीर चोट लगने से खून निकलने लगा। टक्कर के बाद जिस आरोपी का पुलिस पीछा कर रही थी वह मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया। पुलिसकर्मियों ने आरोपी का पीछा जारी रखने के बजाय तुरंत घायल बच्ची को संभाला। उन्होंने बच्ची की स्थिति देखी और आसपास के लोगों की मदद से उसे संभालने की कोशिश की। घटना की सूचना मिलने के बाद डायल 112 की टीम भी मौके पर पहुंच गई। बच्ची को इलाज के लिए हजेला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसका उपचार जारी है।

    हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों को यह जानकारी नहीं थी कि बाइक सवार दोनों व्यक्ति पुलिसकर्मी हैं। दोनों सिविल ड्रेस में थे और उनके पास पुलिस की वर्दी नहीं थी। बच्ची के घायल होने के बाद लोगों का गुस्सा दोनों पर फूट पड़ा। प्रत्यक्षदर्शी अखिलेश गिनारे के मुताबिक लोगों ने दोनों को घेर लिया और उनके साथ झूमाझटकी शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ती देख पुलिसकर्मियों ने अपना परिचय दिया और पहचान पत्र दिखाया। इसके बाद लोगों को उनकी वास्तविक पहचान के बारे में जानकारी हुई और मौके पर तनाव कम हुआ।

    घटना में दोनों पुलिसकर्मियों को चोट नहीं आई है। वहीं घायल बच्ची का अस्पताल में इलाज चल रहा है। हबीबगंज थाना प्रभारी संजीव चौकसे के मुताबिक फिलहाल बच्ची के परिजनों की ओर से पुलिस को कोई शिकायत नहीं मिली है। पुलिस का कहना है कि बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट और परिजनों की शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस के सामने एक तरफ फरार आरोपी को पकड़ने की चुनौती है तो दूसरी तरफ हादसे में घायल बच्ची की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि सिविल ड्रेस में किसी आरोपी का पीछा करते समय पुलिसकर्मियों को सड़क पर सुरक्षा और आम लोगों की मौजूदगी का कितना ध्यान रखना चाहिए। पुलिस अब मेडिकल रिपोर्ट और पूरे घटनाक्रम के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

  • पसंद की शादी करना चाहती थी 17 साल की आयुषी, मां और मामा पर हत्या का आरोप! दुपट्टे से गला घोंटने का दावा

    पसंद की शादी करना चाहती थी 17 साल की आयुषी, मां और मामा पर हत्या का आरोप! दुपट्टे से गला घोंटने का दावा


    भोपाल । भोपाल के पिपलानी इलाके में 17 साल की नाबालिग आयुषी की संदिग्ध मौत के मामले ने सनसनी फैला दी है। पुलिस ने अब इस मामले में हत्या का केस दर्ज करते हुए मृतका की मां कमला और मामा विजय राय को गिरफ्तार किया है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आयुषी अपनी पसंद के युवक से शादी करना चाहती थी जबकि उसकी मां बेटी की शादी अपनी पसंद के युवक से करवाना चाहती थी। शादी को लेकर मां और बेटी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद को पुलिस हत्या की संभावित वजह मानकर जांच कर रही है और मामले में ऑनर किलिंग के एंगल को भी खंगाला जा रहा है।

    पुलिस के मुताबिक आयुषी अपनी मां के साथ घरों में काम करती थी। परिवार में उसकी शादी को लेकर बातचीत चल रही थी लेकिन मां और बेटी की पसंद अलग थी। आयुषी अपनी पसंद के युवक से शादी करना चाहती थी जबकि उसकी मां चाहती थी कि बेटी उसकी पसंद के युवक से विवाह करे। इसी मुद्दे को लेकर दोनों के बीच लगातार तनाव बना हुआ था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि विवाद किस तरह बढ़ा और घटना वाले दिन घर में वास्तव में क्या हुआ था।

    जांच के अनुसार 26 अगस्त को शादी की बात को लेकर घर में फिर विवाद हुआ। आरोप है कि इसी दौरान कमला और उसके भाई विजय राय ने आयुषी का दुपट्टे से गला घोंट दिया। इसके बाद उसकी मौत हो गई। हालांकि पुलिस अभी घटना के पूरे क्रम और दोनों आरोपियों की वास्तविक भूमिका को लेकर विस्तृत जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना में और कोई व्यक्ति शामिल था या नहीं।

    आयुषी की मौत के बाद परिजन कथित तौर पर बिना पोस्टमार्टम कराए शव का अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस को घटना की जानकारी मिली। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इसके बाद मामले में अहम मोड़ 29 अगस्त की शाम आया जब पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट में गला घोंटने के कारण मौत होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने मामले को हत्या की दिशा में आगे बढ़ाया।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद पिपलानी पुलिस ने रविवार तड़के आयुषी की मां कमला और मामा विजय राय के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया और दोनों को गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। खासतौर पर शादी को लेकर चल रहे विवाद घटना से पहले की परिस्थितियों और अंतिम संस्कार की तैयारी के पीछे की वजहों को समझने की कोशिश की जा रही है।

    पुलिस की शुरुआती जांच में पसंद की शादी को लेकर परिवार में चल रहा विवाद हत्या की संभावित वजह के तौर पर सामने आया है। इसी कारण मामले में ऑनर किलिंग की आशंका को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। हालांकि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हत्या की वास्तविक वजह और आरोपियों की भूमिका को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल नाबालिग की मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और पुलिस घटना से जुड़े हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

  • भोपाल के कटारा हिल्स में नगर निगम के खिलाफ फूटा गुस्सा! जलभराव और गड्ढों से परेशान लोगों ने फूंका पुतला

    भोपाल के कटारा हिल्स में नगर निगम के खिलाफ फूटा गुस्सा! जलभराव और गड्ढों से परेशान लोगों ने फूंका पुतला


    भोपाल । भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में बारिश के बीच मूलभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर रहवासियों का गुस्सा रविवार को सड़क पर देखने को मिला। अमलतास चौराहे पर बड़ी संख्या में लोगों ने नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया। रहवासियों का आरोप है कि इलाके में जलभराव सड़कों पर गड्ढे गंदगी और बंद स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। बारिश के दौरान हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं जिससे लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनसे नियमित रूप से टैक्स वसूला जा रहा है लेकिन उसके बदले जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। रहवासियों के मुताबिक कटारा हिल्स की मुख्य सड़कों से लेकर कॉलोनियों के अंदर की सड़कों तक जगह जगह बड़े गड्ढे हैं। बारिश होने के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाता है और सड़क की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इससे दोपहिया वाहन चालकों के साथ पैदल राहगीरों को भी परेशानी होती है और हादसे का खतरा बना रहता है।

    इलाके के लोगों का कहना है कि रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है क्योंकि कई जगहों पर स्ट्रीट लाइटें बंद रहती हैं। अंधेरे और खराब सड़कों के कारण वाहन चालकों को गड्ढे दिखाई नहीं देते। ऐसे में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। रहवासियों ने मांग की है कि खराब स्ट्रीट लाइटों को जल्द दुरुस्त कराया जाए और सड़कों की मरम्मत कराकर जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता भी लोगों के साथ मौजूद रहे। युवक कांग्रेस के अनिकेत द्विवेदी ने वार्ड 85 के कई इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वार्ड में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। मुख्य सड़क से लेकर अंदरूनी मार्ग तक गड्ढों की वजह से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    रहवासियों ने बताया कि तेज बारिश के दौरान इलाके के कई हिस्सों में पानी जमा हो जाता है। कॉलोनियों के आसपास जलभराव के साथ कीचड़ फैलने से लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं होने का आरोप लगाया गया। लोगों का कहना है कि जल निकासी की व्यवस्था बेहतर नहीं होने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहता है और रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित होती है।

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा। पुलिस की मौजूदगी में ही प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम का पुतला जलाया। इस दौरान लोगों ने निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि वार्ड की मूलभूत समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और व्यापक किया जाएगा।

    प्रदर्शन में मध्य प्रदेश कांग्रेस झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष निकेश सिंह चौहान भोपाल युवा कांग्रेस ग्रामीण के अध्यक्ष राहुल मंडलोई रोहित राजोरिया शिवी शर्मा लोकेंद्र शर्मा अनिल मीणा और राजकुमार सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे। फिलहाल कटारा हिल्स में रहवासियों के प्रदर्शन ने बारिश के दौरान शहर की जल निकासी सड़क और सफाई व्यवस्था से जुड़े सवालों को एक बार फिर सामने ला दिया है।

  • ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता

    ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता


    भोपाल। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। इस आपदा के बीच भोपाल से भी एक चिंताजनक खबर सामने आई है। शहर की रहने वाली देविका अधिकारी के परिवार के चार सदस्य नेपाल हादसे के बाद से संपर्क से बाहर हैं। इनमें उनके बड़े भाई, छोटे भाई और दोनों भाभियां शामिल हैं।

    देविका अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद चारों से कोई संपर्क नहीं हो सका है। इस दौरान परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

    आखिरी बातचीत में कहा- ‘सबकी जान खतरे में है’

    देविका के मुताबिक, परिवार की आखिरी बार बड़े भाई से बातचीत हुई थी। उस समय उन्होंने बताया था कि ‘सबकी जान खतरे में है’ और वे लोग जान बचाने के लिए पहाड़ पर जाकर छिपे हुए हैं।

    परिवार के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्होंने बच्चों का ध्यान रखने की बात भी कही थी। इसके बाद से ही चारों का फोन संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार अब नेपाल में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन से मिलने वाली जानकारी का इंतजार कर रहा है।

    सरकार ने जारी की हेल्पलाइन

    नेपाल में लगातार बिगड़ते हालात के बीच भोपाल के नेपाली समाज और लापता लोगों के परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने नेपाल में फंसे लोगों और उनके परिजनों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 011-26772005 और व्हाट्सऐप नंबर 9818963273 जारी किया है।

    परिजन इन नंबरों पर संपर्क कर नेपाल में फंसे या लापता लोगों से संबंधित जानकारी हासिल कर सकते हैं।

    392 लोगों की मौत, 1500 से ज्यादा लापता

    नेपाल में बाढ़ के बाद आई भीषण तबाही में अब तक 392 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद 290 भारतीय नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिनकी तलाश की जा रही है।

    नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। बाढ़ के कारण सड़क और संपर्क व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं। इससे कई इलाकों का एक-दूसरे से संपर्क टूट गया है और राहत एवं बचाव अभियान में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं।

    नेपाल की इस आपदा के बीच अब भोपाल समेत मध्य प्रदेश के उन परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है, जिनके अपने लोग वहां फंसे हुए हैं या जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

  • नेपाल में आई तबाही के बाद भोपाल के 29 लोग लापता…. गोसाईकुंडा तीर्थ गए थे घूमने

    नेपाल में आई तबाही के बाद भोपाल के 29 लोग लापता…. गोसाईकुंडा तीर्थ गए थे घूमने


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) का एक परिवार और उनसे जुड़े कुल 29 लोग नेपाल (Nepal) में अचानक आई भीषण बाढ़ (Devastating floods) के बाद से लापता हैं। परिवार की एक महिला ने उनके बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ये सभी लोग जोड़े से नेपाल के रसुवा जिले में स्थित गोसाईकुंडा तीर्थ (Gosaikunda Pilgrimage) में घूमने गए थे। इसी दौरान वहां आई इस बाढ़ में फंस गए।

    महिला ने बताया कि परिवार के एक सदस्य से जो आखिरी बार बात हुई थी, उसमें उन्होंने कहा था कि हम लोग एक मकान की छत पर खड़े हुए हैं, लेकिन हमारा बचना मुश्किल है, आप लोग हमारे बच्चों को देख लेना, आप उनकी देखभाल करना।

    नेपाल में लापता हुए 29 सदस्यों की जानकारी देते हुए परिवार की महिला देवकी अधिकारी ने बताया, ‘मेरे जेठ-जेठानी, देवर-देवरानी, दीदी-जीजाजी को मिलाकर कुल 29 लोग वहां गए हैं। ये सभी लोग जोड़े से वहां एक तीर्थ की यात्रा करने गए हैं, जहां पर पूर्णिमा पर दर्शन करने जाते हैं।’


    खाना अधूरा छोड़कर भागे, सामान भी नहीं उठाया

    महिला ने बताया कि ये लोग बुधवार को जब निकले थे, तो वहां ऐसी कोई आशंका नहीं थी, कि आगे जाकर कोई खतरा हो सकता है। लेकिन आगे जाकर जब वे खाना खाने के लिए रुके थे, वहां उन्हें पता चला कि पीछे से कोई बाढ़ आ रही है, जिसमें जान का खतरा है। जिसके बाद वे जल्दबाजी में अधूरा खाना छोड़कर उठे और अपनी बस व सामान को छोड़कर वहां से भागे, और जैसे-तैसे पास में स्थिति पहाड़ पर चढ़कर वहां बने एक मकान की छत पर जाकर रूके।’


    ‘आधा घर डूब चुका है, अब हम लोग नहीं बचेंगे’

    महिला ने आगे कहा कि ‘वहां पहुंचकर उन्हें लगा था कि शायद वो बच जाएंगे। लेकिन जब ऐसा होना मुश्किल लगा तो उनमें से एक रिश्तेदार में घर पर फोन लगाकर पूरा घटनाक्रम बताया और कहा कि हमारी बस तो चली गई है और हम फिलहाल छत पर आकर रूके हैं, लेकिन अब हमारी जान को भी खतरा है। उन्होंने बताया कि ‘आधा घर डूब चुका है, और अब हम लोग नहीं बच पाएंगे। हमारे बच्चों को देख लेना’, महिला ने कहा, ‘बस उनके मुंह से इतना ही निकला था, कि फिर बगैर फोन कटे ही सामने से आवाज आना बंद हो गई।’


    बुधवार सुबह हुई बात के बाद कोई संपर्क नहीं हो पाया

    महिला ने बताया कि यह बात उनसे कल सुबह करीब साढ़े नौ बजे हुई थी और अब 24 घंटे से ज्यादा वक्त गुजरने के बाद भी वहां गए किसी भी व्यक्ति से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। महिला ने कहा, ‘जिस बस से वो लोग गए थे उसका भी कुछ पता नहीं है और उन 29 लोगों का भी फिलहाल कुछ पता नहीं चला है। एक की भी बॉडी अबतक नहीं मिली है।’


    बच्चों का रो रोकर बुरा हाल, सरकार से मांगी मदद

    महिला के अनुसार वहां गए सभी लोग आपस में परिचित थे और सभी कहीं ना कहीं एक-दूसरे के रिश्ते में लगते थे। उधर उनके लापता होने के बाद सभी के बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है, कोई ससुराल में है तो कोई नौकरी करने गया हुआ है और वे सभी अपने माता-पिता के लिए परेशान हो रहे हैं। महिला ने सरकार से उन लोगों का पता लगाने में मदद करने की गुहार लगाई है।