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  • कल की चिंता नहीं करता' लेकर भोपाल आ रहे स्टैंड-अप स्टार रवि गुप्ता, टिकट बुकिंग शुरू

    कल की चिंता नहीं करता' लेकर भोपाल आ रहे स्टैंड-अप स्टार रवि गुप्ता, टिकट बुकिंग शुरू


    भोपाल । भोपाल के लोगों के लिए जुलाई का आखिरी सप्ताह हंसी और मनोरंजन से भरपूर होने वाला है। देश के लोकप्रिय स्टैंड-अप कॉमेडियन रवि गुप्ता अपने चर्चित इंडिया टूर ‘कल की चिंता नहीं करता’ के तहत 26 जुलाई को राजधानी भोपाल पहुंच रहे हैं। उनका लाइव कॉमेडी शो शहर के प्रतिष्ठित रविंद्र भवन में आयोजित किया जाएगा, जहां वे अपने खास ऑब्जर्वेशनल ह्यूमर और दमदार कॉमिक अंदाज से दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर करेंगे। शो को लेकर कॉमेडी प्रेमियों में उत्साह देखने को मिल रहा है और टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू हो चुकी है।

    पिछले कुछ वर्षों में रवि गुप्ता ने भारतीय स्टैंड-अप कॉमेडी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाली छोटी-छोटी घटनाओं, पारिवारिक रिश्तों, छोटे शहरों की संस्कृति, कॉर्पोरेट लाइफ, सामाजिक व्यवहार और आम आदमी की परेशानियों को बेहद सहज और मजेदार अंदाज में मंच पर पेश करते हैं। उनकी कॉमेडी में न तो बनावटीपन होता है और न ही अनावश्यक शोर, बल्कि साधारण बातों को असाधारण तरीके से प्रस्तुत करने की उनकी कला ही उन्हें दर्शकों का पसंदीदा बनाती है।

    सोशल मीडिया पर भी रवि गुप्ता की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। उनके स्टैंड-अप वीडियो करोड़ों बार देखे जा चुके हैं और यूट्यूब सहित विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उन्हें लाखों लोग फॉलो करते हैं। यही वजह है कि देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित उनके लाइव शो अक्सर हाउसफुल रहते हैं। अब भोपाल के दर्शकों को भी उन्हें मंच पर लाइव देखने का मौका मिलेगा।

    ‘कल की चिंता नहीं करता’ शो में रवि गुप्ता अपनी नई और चर्चित कॉमेडी प्रस्तुत करेंगे। उनकी शानदार टाइमिंग, सहज संवाद शैली और दर्शकों से जुड़ने का अंदाज हर उम्र के लोगों को पसंद आता है। युवा वर्ग के साथ-साथ परिवार भी उनकी कॉमेडी का भरपूर आनंद लेते हैं। यही कारण है कि उनके शो में हर आयु वर्ग के दर्शकों की अच्छी-खासी मौजूदगी देखने को मिलती है।

    आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम 26 जुलाई को रविंद्र भवन में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन के मुख्य प्रायोजक मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी हैं, जबकि सेज ग्रुप और ओरिएंटल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पावर्ड बाय पार्टनर के रूप में जुड़े हुए हैं। शो का आर्टिस्ट मैनेजमेंट ओरियल एंटरटेनमेंट द्वारा किया जा रहा है।

    शो के लिए टिकटों की बुकिंग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बुक माय शो पर शुरू हो चुकी है। आयोजकों का कहना है कि सीटों की संख्या सीमित है और रवि गुप्ता के बढ़ते क्रेज को देखते हुए टिकटें तेजी से बुक हो रही हैं। ऐसे में जो लोग इस लाइव कॉमेडी अनुभव का हिस्सा बनना चाहते हैं, उन्हें समय रहते अपनी सीट सुनिश्चित कर लेनी चाहिए।

    अगर आप भी रोजमर्रा की भागदौड़ और तनाव से कुछ देर की राहत चाहते हैं, तो 26 जुलाई की शाम रविंद्र भवन में आयोजित यह स्टैंड-अप कॉमेडी शो आपके लिए यादगार अनुभव साबित हो सकता है। हंसी, मनोरंजन और बेहतरीन कॉमिक अंदाज से भरपूर यह शाम भोपाल के दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने के लिए तैयार है।

  • राजधानी भोपाल को मिली ग्रीन ट्रांसपोर्ट की सौगात, 3 रूट पर शुरू हुआ ई-बसों का ट्रायल

    राजधानी भोपाल को मिली ग्रीन ट्रांसपोर्ट की सौगात, 3 रूट पर शुरू हुआ ई-बसों का ट्रायल


    भोपाल । भोपाल शहर में स्वच्छ और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। सोमवार से राजधानी की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसों का ट्रायल रन शुरू हो गया। बैरागढ़ स्थित डिपो से निकलीं ई-बसें शहर के तीन प्रमुख रूटों पर दौड़ती नजर आईं। फिलहाल यह पांच दिनों का ड्राय रन है, जिसमें यात्रियों को सफर करने की अनुमति नहीं होगी। यदि सभी तकनीकी और संचालन संबंधी परीक्षण सफल रहते हैं तो अगस्त से ये बसें आम लोगों के लिए नियमित रूप से संचालित की जाएंगी।

    रविवार को जगदीशपुर में आयोजित प्रदेश कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने इन्हीं इलेक्ट्रिक बसों में सफर कर नई व्यवस्था का अनुभव लिया था। इसके बाद सोमवार से ट्रायल रन की औपचारिक शुरुआत कर दी गई।

    ड्राय रन के दौरान बसों के संचालन, चार्जिंग सिस्टम, रूट की व्यवहारिकता, यातायात की स्थिति और तकनीकी प्रदर्शन का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियमित संचालन शुरू होने पर यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इस दौरान बसों का संचालन दो शिफ्टों में किया जा रहा है। पहली शिफ्ट सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित की गई है।

    ई-बसों का संचालन बैरागढ़ डिपो से शुरू होकर पुराने भोपाल, बोर्ड ऑफिस, भोपाल रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म नंबर-1 और कोलार के बैरागढ़-चीचली मार्ग तक किया जा रहा है। इन रूटों पर ट्रैफिक दबाव, बसों की आवाजाही और चार्जिंग क्षमता का आकलन किया जाएगा। ट्रायल के दौरान कुछ जनप्रतिनिधियों और पार्षदों को भी बसों में बैठाकर फीडबैक लिया जाएगा, ताकि नियमित सेवा शुरू होने से पहले आवश्यक सुधार किए जा सकें।

    भोपाल नगर निगम और परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब तक शहर में 21 इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं। अगले 10 से 12 दिनों में 20 और नई बसें आने की उम्मीद है। इसके बाद राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा और मजबूत होगा तथा सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलेगी।

    बसों के संचालन को ध्यान में रखते हुए बैरागढ़ डिपो में आधुनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर लिया गया है। यहां 11 चार्जिंग प्वाइंट स्थापित किए गए हैं, ताकि बसों की नियमित चार्जिंग बिना किसी बाधा के हो सके। भविष्य में बसों की संख्या बढ़ने पर चार्जिंग सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा।

    इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से शहर में प्रदूषण कम करने, ईंधन की बचत करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही यात्रियों को आधुनिक, आरामदायक और कम शोर वाली परिवहन सुविधा मिलेगी। यदि ट्रायल पूरी तरह सफल रहता है तो अगस्त से भोपालवासियों को राजधानी की सड़कों पर नई और पर्यावरण अनुकूल ई-बसों में सफर करने का अवसर मिलेगा।

  • विधानसभा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मॉनसून सत्र के पहले दिन कार्य मंत्रणा समिति से विधायक दल की बैठक तक व्यस्त रहेगा पूरा कार्यक्रम

    विधानसभा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मॉनसून सत्र के पहले दिन कार्य मंत्रणा समिति से विधायक दल की बैठक तक व्यस्त रहेगा पूरा कार्यक्रम

    मध्य प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया, जिसके साथ ही राज्य की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कार्यक्रम पूरी तरह विधानसभा और उससे जुड़ी बैठकों पर केंद्रित रहा। सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की तैयारी है, वहीं विपक्ष भी विभिन्न जनहित और प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह विधानसभा पहुंचे। इसके बाद कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही, विभिन्न विधायी कार्यों और चर्चा के एजेंडे पर विचार किया गया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुए, जहां पहले दिन की गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रही।

    इस मॉनसून सत्र की सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित विधेयक को माना जा रहा है। मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद सरकार इसे सदन में प्रस्तुत करने की तैयारी कर चुकी है। यदि विधेयक पेश होता है तो इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच व्यापक चर्चा होने की संभावना है। सरकार इसे महत्वपूर्ण विधायी पहल के रूप में देख रही है, जबकि विपक्ष इसके विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाने की तैयारी में है।

    मुख्यमंत्री के दिनभर के कार्यक्रम में दोपहर के समय जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों से मुलाकात का समय भी निर्धारित रहा। इसके बाद समिति कक्ष में गुरु पूर्णिमा महोत्सव से संबंधित बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजन और अन्य व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। आधिकारिक बैठकों के बाद मुख्यमंत्री के निवास लौटने का कार्यक्रम तय रहा। शाम को समत्व भवन में विधायक दल की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें आगामी सदन की रणनीति और विभिन्न विधायी विषयों पर विचार-विमर्श किया जाना प्रस्तावित है।

    विधानसभा का यह मॉनसून सत्र 24 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ-साथ विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार विकास योजनाओं, प्रशासनिक निर्णयों और नई नीतियों को सदन के माध्यम से आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष राज्य से जुड़े अनेक मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति बना चुका है।

    सत्र के दौरान केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित विस्थापितों के मुआवजे, उज्जैन में भूमि खरीद से जुड़े मामलों, नीट यूजी परीक्षा से संबंधित विवाद, सीबीएसई परीक्षा में कथित अनियमितताओं सहित कई अन्य विषयों के सदन में उठने की संभावना है। विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि सत्ता पक्ष अपने फैसलों और योजनाओं का पक्ष मजबूती से रखने का प्रयास करेगा।

    राजनीतिक दृष्टि से यह सत्र काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें राज्य सरकार की कई नीतियों और निर्णयों की परीक्षा भी होगी। सत्ता पक्ष जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा, वहीं विपक्ष जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर सरकार की जवाबदेही तय करने की कोशिश करेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही पर प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों की नजर बनी रहेगी।

  • बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम नहीं बदलेगा, कांग्रेस के सवाल पर उच्च शिक्षा मंत्री ने स्थिति की साफ की तस्वीर

    बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम नहीं बदलेगा, कांग्रेस के सवाल पर उच्च शिक्षा मंत्री ने स्थिति की साफ की तस्वीर

    मध्य प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र में राजधानी भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं पर सरकार ने स्पष्ट रुख सामने रख दिया है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उनके इस जवाब के बाद पिछले कुछ महीनों से जारी अटकलों और राजनीतिक बहस पर फिलहाल विराम लग गया है।

    बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का मुद्दा उस समय चर्चा में आया था, जब विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने इसका नाम बदलकर “मां वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” करने का प्रस्ताव पारित किया था। यह प्रस्ताव राज्य सरकार और कुलाधिपति के पास भेजा गया था। प्रस्ताव सामने आने के बाद राजनीतिक स्तर पर इस विषय को लेकर विभिन्न दलों के बीच मतभेद भी देखने को मिले और इसे लेकर सार्वजनिक बहस तेज हो गई थी।

    विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक आतिफ आरिफ अकील ने इस विषय पर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने तारांकित प्रश्न के माध्यम से पूछा कि क्या शासन ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि यदि ऐसा कोई प्रस्ताव है तो नया नाम क्या होगा और लगभग तीन दशक से अधिक समय से स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलने के पीछे सरकार की मंशा क्या है।

    विधायक ने अपने प्रश्न में यह मुद्दा भी उठाया कि डॉ. बरकतउल्ला भोपाली भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या राज्य सरकार उन्हें स्वतंत्रता सेनानी के रूप में मान्यता देती है और यदि ऐसा है तो उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलना किस आधार पर उचित माना जाएगा। इसके अलावा विश्वविद्यालय का नाम बदलने की वैधानिक प्रक्रिया और आवश्यक स्वीकृतियों के संबंध में भी जानकारी मांगी गई।

    उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने लिखित उत्तर में स्पष्ट कहा कि सरकार ने विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आगे कोई प्रश्न उत्पन्न नहीं होता। डॉ. बरकतउल्ला भोपाली से जुड़े प्रश्न पर मंत्री ने बताया कि संबंधित जानकारी एकत्रित की जा रही है। वहीं विश्वविद्यालय का नाम बदलने की प्रक्रिया के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तित करने के लिए उसे संचालित करने वाले अधिनियम में संशोधन करना आवश्यक होता है, जो विधेयक के माध्यम से किया जाता है। अन्य प्रक्रियात्मक जानकारी निर्धारित अभिलेखों में उपलब्ध है।

    सरकार के इस आधिकारिक जवाब के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि वर्तमान समय में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की कोई सरकारी योजना नहीं है। इससे लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगने की संभावना है। हालांकि विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा पारित प्रस्ताव और उससे जुड़ी चर्चाओं को लेकर राजनीतिक विमर्श भविष्य में भी जारी रह सकता है। फिलहाल विधानसभा में सरकार के स्पष्ट बयान ने इस विषय पर अपनी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दी है।

  • मानसून सत्र की शुरुआत हंगामेदार, कांग्रेस विधायकों का विधानसभा परिसर में प्रदर्शन, किसानों की समस्याओं पर सरकार से जवाब की मांग

    मानसून सत्र की शुरुआत हंगामेदार, कांग्रेस विधायकों का विधानसभा परिसर में प्रदर्शन, किसानों की समस्याओं पर सरकार से जवाब की मांग

    मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार को राजनीतिक गर्माहट के साथ हुई। सत्र के पहले ही दिन कांग्रेस विधायक दल ने किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर विधानसभा परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। खाद की कमी, सरकारी खरीद में कथित अनियमितताओं और किसानों को समय पर उचित मुआवजा नहीं मिलने के आरोपों के साथ विपक्ष ने राज्य सरकार को घेरते हुए इन मुद्दों पर तत्काल समाधान की मांग की। प्रदर्शन के दौरान विधानसभा परिसर में राजनीतिक माहौल काफी गर्म रहा।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस के विधायकों ने सरकार के खिलाफ सांकेतिक विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान कुछ विधायकों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री के मुखौटे पहनकर विरोध जताया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान में गंभीरता नहीं दिखा रही है और कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की लगातार अनदेखी की जा रही है।

    कांग्रेस विधायकों का कहना है कि प्रदेश के कई हिस्सों में किसान खाद की उपलब्धता को लेकर परेशान हैं और उन्हें लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। साथ ही फसलों के उचित दाम, मुआवजे के भुगतान और सरकारी खरीद व्यवस्था को लेकर भी किसानों में असंतोष है। विपक्ष का आरोप है कि किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार प्रभावी कदम उठाने में असफल रही है। कांग्रेस ने दावा किया कि वह इन सभी मुद्दों को विधानसभा के भीतर मजबूती से उठाएगी और जरूरत पड़ने पर सदन के बाहर भी आंदोलन जारी रखेगी।

    विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आवास पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में मानसून सत्र के दौरान उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर रणनीति बनाई गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसानों की परेशानी के अलावा बेरोजगारी, युवाओं को रोजगार, अतिथि शिक्षकों की मांगें, पिछड़ा वर्ग से जुड़े विषय और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मामलों पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। विपक्ष का कहना है कि राज्य के विभिन्न वर्गों से जुड़े मुद्दों को पूरी मजबूती के साथ सदन में रखा जाएगा।

    कांग्रेस ने यह भी कहा कि केन-बेतवा परियोजना, प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विषय और अन्य जनहित के मामलों पर भी सरकार को घेरने की तैयारी की गई है। विपक्ष का मानना है कि प्रदेश के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं, जिन पर गंभीर चर्चा और ठोस निर्णय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से विधायक दल ने सत्र के दौरान समन्वित रणनीति अपनाने का फैसला किया है।

    वहीं, विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी दिनों में सदन के भीतर किसानों, कृषि, रोजगार, शिक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। विपक्ष ने सरकार से किसानों के हितों की रक्षा, खाद की पर्याप्त उपलब्धता, पारदर्शी खरीद व्यवस्था और लंबित मुआवजे के मामलों का शीघ्र समाधान करने की मांग दोहराई है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार इन आरोपों और मांगों पर सदन के भीतर क्या जवाब देती है और किसानों से जुड़े मुद्दों पर कौन से ठोस कदम सामने आते हैं।

  • भोपाल में भक्ति का सागर उमड़ा चतुर्मास के लिए आचार्य समय सागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश हजारों श्रद्धालु बने साक्षी

    भोपाल में भक्ति का सागर उमड़ा चतुर्मास के लिए आचार्य समय सागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश हजारों श्रद्धालु बने साक्षी


    भोपाल  भोपाल रविवार को जैन समाज की आस्था श्रद्धा और गुरु भक्ति के रंग में पूरी तरह रंगा नजर आया। चतुर्मास के पावन अवसर पर आचार्य समय सागर महाराज का 20 मुनियों के संघ के साथ राजधानी में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनने पहुंचे। पूरे मार्ग पर गुरु भक्ति के जयकारे गूंजते रहे और श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ आचार्य संघ का स्वागत किया।

    मंगल प्रवेश के उपलक्ष्य में नारायण नगर जैन मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में महिलाएं युवा बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। श्रद्धालु पूरे मार्ग पर आचार्य विद्यासागर महाराज और आचार्य समय सागर महाराज के जयकारे लगाते हुए भक्ति भाव से आगे बढ़ते रहे। धार्मिक उल्लास और अनुशासित वातावरण ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।

    यात्रा के दौरान नाके चौराहे पर एक भावुक और आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला जब मुनि निर्णय सागर महाराज उपाध्याय विश्रुत सागर महाराज और निर्यापक मुनि संभव सागर महाराज सहित पूरे मुनि संघ ने आचार्य समय सागर महाराज की परिक्रमा कर चरण वंदना की। श्रद्धालुओं ने इस दिव्य क्षण को अत्यंत श्रद्धा के साथ देखा और गुरु भक्ति के इस दृश्य ने सभी को भावविभोर कर दिया।

    शोभायात्रा में आकर्षक झांकियां भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। जीव दया गोसेवा और हथकरघा को प्रोत्साहित करने वाले संदेशों के साथ निकाली गई झांकियों ने समाज को सेवा और करुणा का संदेश दिया। निर्माणाधीन रानी कमलापति जिनालय की प्रतिकृति ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। विभिन्न मंदिर समितियों महिला मंडलों युवा मंडलों सामाजिक संगठनों पाठशाला परिवारों और दिव्य घोष दल ने गुरु भक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया।

    इस आयोजन में केवल भोपाल ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र दिल्ली राजस्थान और आसपास के कई राज्यों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे। शहर के अनेक सामाजिक व्यापारिक और राजनीतिक संगठनों ने विभिन्न स्थानों पर स्वागत मंच बनाकर आचार्य संघ का अभिनंदन किया और श्रद्धा के साथ उनका स्वागत किया।

    शोभायात्रा के समापन पर रानी कमलापति जिनालय में धर्मसभा आयोजित की गई। यहां भगवान आदिनाथ के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने श्रीफल अर्पित कर अष्टद्रव्य से आचार्य श्री के गुणों का स्मरण और वंदन किया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।

    अपने संबोधन में आचार्य समय सागर महाराज ने आचार्य विद्यासागर महाराज के दीक्षा दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्र निर्माण संस्कृति संरक्षण और आत्मकल्याण का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज के आदर्श केवल जैन समाज ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं और उनका मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों को भी सही दिशा देता रहेगा।

    चतुर्मास के शुभारंभ के साथ भोपाल में धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का नया अध्याय शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में प्रवचन स्वाध्याय तप और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक साधना का विशेष अवसर प्राप्त होगा।

  • भोपाल में कांग्रेस विचार विभाग की बैठक, केप्टन डाबर बोले- नेहरू ने आधुनिक भारत बनाया, भाजपा ने अफवाह तंत्र खड़ा किया

    भोपाल में कांग्रेस विचार विभाग की बैठक, केप्टन डाबर बोले- नेहरू ने आधुनिक भारत बनाया, भाजपा ने अफवाह तंत्र खड़ा किया

    मध्यप्रदेश: की राजधानी भोपाल में आयोजित कांग्रेस विचार विभाग की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केंद्र सरकार पर कई राजनीतिक एवं वैचारिक मुद्दों को लेकर तीखे आरोप लगाए। कांग्रेस विचार विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष केप्टन प्रवीण डाबर ने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जबकि भाजपा ने देश में अफवाहों का तंत्र खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि नेहरू की सोच वैज्ञानिक दृष्टिकोण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और आधुनिक विकास पर आधारित थी, जिसे आज भी देश की प्रगति का आधार माना जाता है।

    बैठक के दौरान केप्टन डाबर ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों के प्रतीक हैं। मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं और प्रबंधन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    डाबर ने राम मंदिर के लिए नए मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यदि नियुक्ति के लिए केवल “राम भक्त” होने की शर्त रखी जाती है तो यह अन्य देवी-देवताओं के श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने सवाल किया कि भगवान को अलग-अलग वर्गों में बांटने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है और धार्मिक संस्थानों में समान भाव की भावना बनाए रखना अधिक आवश्यक है।

    प्रदेश कांग्रेस विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय हितों और देश की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर सतर्क रहने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के ऐसे समझौतों से बचना चाहिए जो देश के हितों को प्रभावित कर सकते हों। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से वैचारिक रूप से सक्रिय रहने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जनता के बीच संवाद बढ़ाने का आह्वान किया।

    बैठक में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मंदिरों के संचालन और धार्मिक संस्थाओं में संघ के प्रचारकों की भूमिका बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिरों का संचालन संतों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों के हाथों में रहना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि धर्म का मूल आधार इंसानियत और मानवता है तथा कांग्रेस सभी धर्मों के सम्मान और समानता में विश्वास करती है। उन्होंने मंदिरों के संचालन में शंकराचार्यों की भूमिका सुनिश्चित किए जाने की भी मांग रखी।

    बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सामाजिक सौहार्द, धार्मिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा को पार्टी की प्राथमिकता बताया। वहीं भाजपा और सरकार पर लगाए गए आरोपों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इन बयानों के बाद संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया का भी इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि इस तरह के मुद्दे प्रदेश की राजनीति में आगे भी बहस का विषय बने रह सकते हैं।

  • मंत्री तुलसी सिलावट ने डॉ. ए.के. द्विवेदी के सुझावों को सराहा, अधिकारियों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

    मंत्री तुलसी सिलावट ने डॉ. ए.के. द्विवेदी के सुझावों को सराहा, अधिकारियों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

    मध्य प्रदेश में जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक, शिक्षाविद एवं देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी द्वारा प्रस्तुत जल संरक्षण संबंधी सुझावों की सराहना करते हुए विभागीय अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने कहा कि जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और इस दिशा में किए गए प्रयास भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपयोगी साबित होंगे।

    डॉ. ए.के. द्विवेदी ने मंत्री से मुलाकात के दौरान प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में प्रतिवर्ष “जल ही जीवन है” विषय पर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने का प्रस्ताव सौंपा। उनका मानना है कि यदि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए, तो समाज में पानी के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी और भविष्य में जल संकट की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना किया जा सकेगा।

    प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया कि इस विषय को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय के सीपीग्राम्स पोर्टल के माध्यम से भी सुझाव भेजे गए थे। इसके बाद संबंधित विभाग द्वारा आवश्यक प्रक्रिया प्रारंभ करते हुए अधिकारियों को मामले पर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए मंत्री सिलावट ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि प्रस्ताव का सकारात्मक परीक्षण करते हुए प्रमुख सचिव को आवश्यक अनुशंसा शीघ्र भेजी जाए, ताकि इसे प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा सकें।

    डॉ. द्विवेदी ने अपने प्रस्ताव में प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों को “वॉटर कंजर्वेशन कैंपस” के रूप में विकसित करने की अवधारणा भी प्रस्तुत की है। इसके तहत परिसरों में वर्षा जल संचयन व्यवस्था को बढ़ावा देने, भूजल संवर्धन के उपाय लागू करने तथा जल संरक्षण को व्यवहारिक शिक्षा का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया गया है। उनका मानना है कि जब विद्यार्थी स्वयं इन गतिविधियों से जुड़ेंगे, तो समाज में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

    प्रस्ताव के अनुसार विद्यार्थियों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया जा सकता है। इनमें निबंध लेखन, भाषण, वाद-विवाद, पोस्टर एवं चित्रकला प्रतियोगिताएं, स्लोगन लेखन, जन-जागरूकता रैलियां तथा जल संरक्षण की शपथ जैसे कार्यक्रम शामिल किए जाने का सुझाव दिया गया है। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें व्यवहारिक रूप से जल बचाने के लिए प्रेरित करना है।

    मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि शिक्षण संस्थानों के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किए जाते हैं, तो जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सकता है। इससे जल संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी विकसित होगा।

    डॉ. ए.के. द्विवेदी ने उम्मीद जताई कि यदि उनके सुझावों पर प्रभावी अमल होता है, तो मध्य प्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है। उनका मानना है कि विद्यार्थियों में जल बचाने के संस्कार विकसित करना भविष्य की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों का स्थायी समाधान साबित हो सकता है।

  • MP: भोपाल में दांत साफ करते समय टूथब्रश का हिस्सा टूटकर गले में फंसा… डॉक्टरों ने बचाई 5 साल के बच्चे की जान

    MP: भोपाल में दांत साफ करते समय टूथब्रश का हिस्सा टूटकर गले में फंसा… डॉक्टरों ने बचाई 5 साल के बच्चे की जान


    भोपाल।
    MP की राजधानी भोपाल (Bhopal) में एक 5 वर्षीय मासूम के साथ दर्दनाक हादसा हो गया. दांत साफ (Clean teeth) करते समय टूथब्रश अचानक टूट गया और उसका टूटा हुआ हिस्सा बच्चे के मुंह से होते हुए गले में गहराई तक फंस गया. बच्चे को तेज दर्द, बोलने और निगलने में परेशानी होने लगी. घबराए परिजन उसे तत्काल हमीदिया अस्पताल (Hamidia Hospital) लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने समय रहते ऑपरेशन कर उसकी जान बचा ली।

    हमीदिया अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि टूथब्रश का टूटा हुआ हिस्सा गले के अंदर संवेदनशील हिस्से में फंसा हुआ है. स्थिति गंभीर होने के कारण ईएनटी विशेषज्ञों की टीम ने तुरंत ऑपरेशन करने का फैसला लिया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने बेहद सावधानी से टूथब्रश का टूटा हुआ हिस्सा बाहर निकाला. पूरी प्रक्रिया सफल रही और बच्चे को किसी तरह की गंभीर क्षति नहीं पहुंची।


    डॉक्टरों की निगरानी में बच्चा

    हमीदिया अस्पताल की डॉ कीर्ति वाईके ने बताया कि इलाज में थोड़ी भी देरी होती तो टूथब्रश का हिस्सा श्वास नली या भोजन नली को नुकसान पहुंचा सकता था. इससे संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव या सांस लेने में गंभीर परेशानी जैसी जटिलताएं पैदा हो सकती थीं. समय पर अस्पताल पहुंचने और विशेषज्ञों की त्वरित कार्रवाई से बच्चे की जान बच गई. फिलहाल मासूम की हालत स्थिर है और उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।

    ‘ब्रश करते समय कभी अकेला न छोड़ें’
    डॉ कीर्ति वाईके ने अभिभावकों से अपील की है कि छोटे बच्चों को ब्रश करते समय कभी अकेला न छोड़ें. बच्चों को हमेशा निगरानी में ब्रश कराएं और टूथब्रश की गुणवत्ता पर भी ध्यान दें. यदि ब्रश टूट जाए या किसी भी तरह की दुर्घटना हो जाए तो उसे स्वयं निकालने की कोशिश न करें, बल्कि तुरंत अस्पताल पहुंचें।

    यह घटना सभी अभिभावकों के लिए एक बड़ी सीख है कि छोटी-सी लापरवाही भी बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. समय पर इलाज और हमीदिया अस्पताल के डॉक्टरों की सतर्कता से इस मासूम की जान बच गई और एक बड़ा हादसा टल गया।

  • बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने के लिए भोपाल में हुई राज्य स्तरीय कार्यशाला

    बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने के लिए भोपाल में हुई राज्य स्तरीय कार्यशाला


    भोपाल । मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग, भोपाल द्वारा दिनांक 17 जुलाई, 2026 को मध्यप्रदेश काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (MPCST), भोपाल में “लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो अधिनियम) एवं किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रभावी क्रियान्वयन में बाल कल्याण समिति (CWC) की भूमिका” विषय पर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।

    कार्यक्रम रामेन्द्र सिंह, महासचिव, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, मध्यप्रदेश। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. अनिल कोठारी, गहानिदेशक, मध्यप्रदेश काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (MPCST), भोपाल तथा श्रीमती सुधा विजय सिंह भदौरिया, सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी, जिला न्यायालय, भोपाल, आयोग की सदस्य श्रीमती सोनम निनामा एवं श्रीमती अर्चना गुप्ता की गरिमामयी उपस्थिति रही।

    बाल कल्याण समितियों की कार्यप्रणाली में एकरूपता लाना मुख्य उद्देश्य

    कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश की समस्त बाल कल्याण समितियों की कार्यप्रणाली में एकरूपता स्थापित करना, सदस्यों की विधिक एवं पुक्रियागत दक्षता का संवर्धन करना, विभिन्न जिलों के अनुभवों एवं श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान सुनिश्चित करना तथा राज्य की वाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी एवं “बालहित सर्वोपरि” (Best Interest of Child) के सिद्धांत के अनुरूप सुटढ़ बनाना था।

    कानूनी प्रावधानों और व्यावहारिक चुनौतियों पर गहन मंथन

    इस प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला में प्रदेश के समस्त जिलों की बाल कल्याण समितियों के अध्यक्षों एवं सदस्यों को लैंगिक अपराधों से चालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो अधिनियम) तथा किशोर न्याय (वालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण में वाल संरक्षण संबंधी वैधानिक प्रावधानों, प्रक्रियात्मक कार्यवाही, वालहित सर्वोपरि के सिद्धांत, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन, विभागीय समन्वय, बाल कल्याण समिति की भूमिका, प्रकरण प्रबंधन (Case Management), अभिलेख संधारण, आयोग की रिपोर्टिंग प्रणाली तथा संवेदनशील प्रकरणों के प्रभावी एवं समयबद्ध निराकरण जैसे महत्वपूर्ण विपयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

    प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में रामेन्द्र सिंह द्वारा बाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक संवेदनशील एवं प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रकरण में बालक अथवा बालिका के सर्वोतम हित को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करते हुए वाल कल्याण समितियों को आपसी समन्वय, संवे संवेदनशील दृष्टिकोण एवं विधिक प्रावधानों के अनुरूप कार्य करना चाहिए। उन्होंने समितियों को प्रत्येक प्रकरण में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उत्तरदायित्वपूर्ण एवं निष्पक्ष निर्णय लेने हेतु प्रेरित किया।

    एमपीसीएसटी के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने अपने उद्धोधन में वर्तमान समय में बाल संरक्षण प्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नवीनतम तकनीकी संसाधनों एवं डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग से वाल संरक्षण तंत्र को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है।

    कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में श्रीमती सुधा विजय सिंह भदौरिया द्वारा बाल कल्याण समितियों को विस्तृत विधिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम एवं किशोर न्याय अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक पीड़ित बालक अथवा बालिका के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया सुरक्षित, संवेदनशील एवं बाल-अनुकूल सामाजिक वातावरण में सुनिधित की जानी चाहिए। उन्होंने समितियों को विधिक प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन करते हुए पीड़ित के अधिकारों एवं गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करने के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।

    मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने बाल संरक्षण से संबंधित प्रत्येक प्रकरण में समयबद्ध, निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यवाही सुनिधित की जाए उन्होंने सतत संवाद, प्रभावी समन्वय तथा बालहित सर्वोपरि के सिद्धांत को प्रत्येक निर्णय का आधार बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत पीड़ित बच्चों के लिए सपोर्ट पर्सन की नियुक्ति पूर्ण पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तियों का चयन किया जाए जो पीड़ित बच्चों के सर्वोतम हितों की प्रभावी रूप से रक्षा कर सकें।