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  • 'सिकंदर' के सेट पर फिजियोथेरेपी और भारी सुरक्षा घेरे के बीच काम होने का हुआ प्रामाणिक खुलासा

    'सिकंदर' के सेट पर फिजियोथेरेपी और भारी सुरक्षा घेरे के बीच काम होने का हुआ प्रामाणिक खुलासा


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा जगत के शीर्ष अभिनेताओं में शुमार सलमान खान के पेशेवर जीवन और उनकी कार्यशैली को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण खुलासा सामने आया है। अभिनेता विशाल वशिष्ठ ने फिल्म ‘सिकंदर’ के निर्माण के दौरान सेट पर बने वास्तविक हालातों को साझा करते हुए बताया कि सुपरस्टार सलमान खान ने अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों, मानसिक तनाव और असहनीय शारीरिक दर्द के बावजूद इस फिल्म के फिल्मांकन को पूरा किया था। यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब इस फिल्म के निर्माण और अभिनेता की सेट पर उपस्थिति को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं चल रही थीं। सह-कलाकार के इस बयान ने अभिनेता के काम के प्रति उनके गहरे समर्पण और उच्च व्यावसायिक प्रतिबद्धता को मजबूती से रेखांकित किया है।

    इस फिल्म के निर्माण का दौर अभिनेता के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के लिहाज से बेहद संवेदनशील और अत्यंत कठिन माना जा रहा था। साल 2024 में अपने बेहद करीबी मित्र और अनुभवी राजनेता बाबा सिद्दीकी की अचानक हुई हत्या के बाद सलमान खान गहरे मानसिक आघात और भावनात्मक संकट से गुजर रहे थे। इसके साथ ही, लगातार मिल रही सुरक्षा धमकियों के कारण उनके इर्द-गिर्द सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से कड़ा करना पड़ा था। इस प्रकार के भारी सुरक्षा घेरे, मानसिक तनाव और हर पल बने रहने वाले जान के खतरे के बीच सेट पर आकर काम करना पूरी टीम और स्वयं अभिनेता के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य बन चुका था।

    मानसिक और बाहरी दबावों के अलावा अभिनेता उस समय गंभीर शारीरिक समस्याओं और असहनीय कष्ट से भी जूझ रहे थे। फिल्म के मुख्य दृश्यों के फिल्मांकन के दौरान सलमान खान की पसली में गंभीर चोट आई थी, जिससे उन्हें उठने-बैठने, झुकने और सामान्य रूप से चलने में भी तीव्र दर्द का सामना करना पड़ रहा था। सेट पर मौजूद रहे सह-कलाकारों के अनुसार, यह कोई बनाई हुई कहानी नहीं थी बल्कि पूरी टीम ने इस दर्द को बेहद करीब से महसूस किया था। अभिनेता जैसे-तैसे बेहद धीमी गति से चलकर कैमरे के सामने अपने दृश्यों को पूरा करते थे और निर्देशक के कट बोलते ही तुरंत अपनी फिजियोथेरेपी प्रक्रिया के लिए चले जाते थे।

    इस भीषण शारीरिक कष्ट के बावजूद फिल्म की कहानी की मांग के अनुसार उन्हें लगातार भारी एक्शन दृश्यों की शूटिंग करनी पड़ी थी, जिसे उन्होंने बिना किसी शिकायत के पूरा किया। विशाल वशिष्ठ ने अभिनेता की प्रशंसा करते हुए कहा कि मनोरंजन उद्योग में इतने लंबे समय तक रहने और शीर्ष मुकाम पर होने के बाद भी उनका ऐसा समर्पण देखना किसी भी कलाकार के लिए प्रेरणा से कम नहीं है। सेट के बाहर उनके जीवन में क्या खतरनाक उथल-पुथल चल रही थी, इसका नकारात्मक प्रभाव उन्होंने कभी भी अपने काम की गति और सेट के माहौल पर नहीं पड़ने दिया।

    यह प्रामाणिक बयान हाल ही में निर्देशक एआर मुरुगाडोस के उन कथनों के परिप्रेक्ष्य में बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है, जिसमें उन्होंने फिल्म के कठिन शेड्यूल और शूटिंग के समय में किए गए बड़े बदलावों का जिक्र किया था। आंतरिक और बाहरी चुनौतियों के कारण कई बार दिन के शेड्यूल को रात में बदलना पड़ा था, जिससे क्रू को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। सह-कलाकार के इस नए वक्तव्य ने साफ कर दिया है कि समय में हुए वे बदलाव किसी लापरवाही का परिणाम नहीं बल्कि अभिनेता की गंभीर चिकित्सीय स्थिति और सुरक्षा कारणों की अनिवार्य आवश्यकता थे।

  • शाहिद कपूर की फिल्म की रिलीज के बाद दर्शकों में बढ़ा सिनेमाई उत्साह, 'अल्फा' और 'वेलकम टू द जंगल' सहित इन बड़े प्रोजेक्ट्स पर टिकीं सबकी नजरें

    शाहिद कपूर की फिल्म की रिलीज के बाद दर्शकों में बढ़ा सिनेमाई उत्साह, 'अल्फा' और 'वेलकम टू द जंगल' सहित इन बड़े प्रोजेक्ट्स पर टिकीं सबकी नजरें

    नई दिल्ली । भारतीय बॉक्स ऑफिस पर शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर फिल्म ‘कॉकटेल 2’ की भव्य रिलीज के साथ ही दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया है। इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के सिनेमाघरों में दस्तक देने के तुरंत बाद मनोरंजन जगत की प्रतिष्ठित ट्रैकिंग वेबसाइट आईएमडीबी ने दर्शकों की पसंद और उत्सुकता के आधार पर मोस्ट एंटीसिपेटेड यानी सबसे ज्यादा इंतजार की जाने वाली आगामी हिंदी फिल्मों की सूची को अपडेट कर दिया है। इस नई सूची से साफ संकेत मिलते हैं कि आने वाले हफ्तों में सिनेमाघरों से लेकर विभिन्न डिजिटल और टेलीविजन प्लेटफॉर्म्स पर बड़े सितारों के बड़े बजट वाले प्रोजेक्ट्स दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    इस सूची में सबसे पहला और बड़ा नाम निर्देशक अहमद खान के मार्गदर्शन में बन रही मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म ‘वेल्कम टू द जंगल’ का है। अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, परेश रावल, रवीना टंडन, अरशद वारसी और दिशा पाटनी जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी यह बड़े बजट की फिल्म आगामी 26 जून को सीधे सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। हाल ही में जारी हुए इसके ट्रेलर ने दर्शकों के बीच पहले ही भारी उत्सुकता पैदा कर दी है, जिससे इसे बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    थिएटर रिलीज की इस कतार में अगला बड़ा नाम निर्देशक इंद्र कुमार की सुपरहिट कॉमेडी फ्रेंचाइजी की अगली कड़ी ‘धमाल 4’ का है। साल 2007 में शुरू हुई इस मशहूर सीरीज के चौथे भाग में अजय देवगन, रितेश देशमुख, रवि किशन, संजय मिश्रा और जावेद जाफरी जैसे कलाकार अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को गुदगुदाने के लिए लौट रहे हैं। कॉमेडी शैली की यह फिल्म अगले महीने की 10 तारीख यानी 10 जुलाई को सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी, जिसे लेकर सिनेमाप्रेमियों के बीच जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है।

    एक्शन और थ्रिलर के शौकीनों के लिए यशराज फिल्म्स के चर्चित स्पाई यूनिवर्स की अगली बड़ी पेशकश ‘अल्फा’ भी सिनेमाघरों में तहलका मचाने को तैयार है। शिव रवैल द्वारा निर्देशित इस कड़क स्पाई थ्रिलर फिल्म में आलिया भट्ट और शरवरी वाघ मुख्य भूमिकाओं में हैरतअंगेज एक्शन करती नजर आएंगी। बॉबी देओल और अनिल कपूर जैसे मजबूत अभिनेताओं से सजी इस फिल्म में सुपरस्टार ऋतिक रोशन का एक विशेष कैमियो भी शामिल किया गया है, जो दर्शकों के लिए बड़ा सरप्राइज होगा। यह फिल्म आगामी 3 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।

    सिल्वर स्क्रीन के अलावा डिजिटल स्पेस और टेलीविजन क्षेत्र में भी मनोरंजन का बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। निर्देशक सिद्धार्थ पी मल्होत्रा की बहुप्रतीक्षित थ्रिलर फिल्म ‘इक्का’ आगामी 10 जुलाई को सीधे नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम की जाएगी, जिसमें सनी देओल एक कड़क वकील की मुख्य भूमिका में अक्षय खन्ना और दिया मिर्जा के साथ स्क्रीन साझा करते दिखेंगे। वहीं दूसरी ओर, प्रख्यात फिल्म निर्माता राजकुमार हिरानी भी डिजिटल माध्यम में अपना पहला कदम रख रहे हैं। उनके निर्देशन में बनी कॉमेडी क्राइम सारांश सीरीज ‘प्रीतम पेड्रो’ 3 जुलाई को जियो हॉटस्टार पर रिलीज होगी, जिसमें विक्रांत मैसी, संजय दत्त और बोमन ईरानी मुख्य भूमिकाओं में हैं। छोटे पर्दे की बात करें तो कलर्स टीवी पर 29 जून से एक नया धारावाहिक ‘जूही मुही’ शुरू हो रहा है, जिसमें ईशा सिंह एक ऑटिस्टिक बच्ची का चुनौतीपूर्ण किरदार निभा रही हैं और उनके साथ वरिष्ठ अभिनेता संजय सूरी भी अहम भूमिका में नजर आएंगे।

  • रणवीर सिंह विवाद से आगे बढ़े फरहान अख्तर, सुपरस्टार सलमान खान को लेकर दो भागों में मेगा बजट फिल्म बनाने की योजना

    रणवीर सिंह विवाद से आगे बढ़े फरहान अख्तर, सुपरस्टार सलमान खान को लेकर दो भागों में मेगा बजट फिल्म बनाने की योजना

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे फिल्म उद्योग और प्रशंसकों के बीच हलचल मचा दी है। अभिनेता रणवीर सिंह के साथ चल रहे ‘डॉन 3’ विवाद की सुर्खियों के बीच, मशहूर निर्माता-निर्देशक फरहान अख्तर अब बॉलीवुड के सुल्तान सलमान खान के साथ एक महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम करने की योजना बना रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों दिग्गज एक बड़े बजट की पीरियोडिक ड्रामा फिल्म के लिए हाथ मिला सकते हैं, जो यदि धरातल पर उतरती है, तो सिनेमाई इतिहास में पहली बार होगा जब सलमान खान और फरहान अख्तर किसी प्रोजेक्ट में एक साथ नजर आएंगे।

    ताजा मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सुपरस्टार सलमान खान और एक्सेल एंटरटेनमेंट के कर्ता-धर्ता फरहान अख्तर पिछले एक महीने से लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं और उनके बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। प्रोजेक्ट से जुड़े करीबी सूत्रों का दावा है कि सलमान खान को फिल्म की शुरुआती स्क्रिप्ट और इसकी मूल अवधारणा काफी पसंद आई है और उन्होंने इस ऐतिहासिक कहानी में अपनी गहरी दिलचस्पी दिखाई है। बताया जा रहा है कि फरहान जिस फिल्म को लेकर सलमान के साथ चर्चा कर रहे हैं, वह एक विशाल ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित दो भागों (टू-पार्ट्स) में रिलीज होने वाली फिल्म होगी।

    हालांकि, दोनों पक्षों के बीच चल रही यह बातचीत अभी अपने बेहद शुरुआती चरण में है और अभी तक किसी भी तरह का कानूनी या लिखित पेपर वर्क शुरू नहीं किया गया है। शुरुआती सहमति बनने के बाद दोनों ही पार्टियां इस अनूठे सहयोग को लेकर काफी उत्साहित हैं। इस मेगा प्रोजेक्ट से जुड़ी आधिकारिक घोषणा और विस्तृत जानकारी इस साल के अंत तक सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल फिल्म के निर्देशक का नाम तय नहीं किया गया है, क्योंकि फरहान अख्तर इस प्रोजेक्ट को केवल प्रोड्यूस (निर्माण) करेंगे। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो इस फिल्म की शूटिंग अगले साल यानी 2027 के शुरुआती महीनों में शुरू की जा सकती है।

    यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब फरहान अख्तर और रणवीर सिंह के बीच ‘डॉन 3’ को छोड़ने को लेकर गहरा विवाद चल रहा है। दरअसल, रणवीर सिंह द्वारा अचानक इस बहुप्रतीक्षित फिल्म से कदम पीछे खींचने के बाद फरहान ने फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लाइज (FWICE) में अभिनेता की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद संगठन ने असहयोग का निर्देश भी जारी किया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। इस बीच उद्योग में ऐसी अफवाहें भी उड़ी थीं कि सलमान खान ने दोनों के बीच सुलह कराने की मध्यस्थता की है, लेकिन बाद में इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।

    दूसरी ओर, सलमान खान इन दिनों अपने अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स में भी व्यस्त हैं। वह जल्द ही निर्देशक अपूर्व लाखिया की फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ (जिसका पूर्व नाम बैटल ऑफ गलवान था) में कर्नल बी संतोष बाबू की मुख्य भूमिका निभाते नजर आएंगे, जिसमें उनके साथ चित्रांगदा सिंह भी अहम किरदार में हैं। ऐसे में फरहान अख्तर के प्रोडक्शन हाउस के तहत बनने वाली इस नई पीरियोडिक फिल्म से जुड़ने की खबर ने इंडस्ट्री का पारा बढ़ा दिया है, हालांकि इस संबंध में अभी तक सलमान खान या फरहान अख्तर की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान या पुष्टि साझा नहीं की गई है।

  • जुबली गर्ल आशा पारेख के त्याग की अनकही दास्तान: शादीशुदा फिल्ममेकर से बेइंतहा मोहब्बत के बाद भी ताउम्र क्यों कुंवारी रहीं दिग्गज अभिनेत्री

    जुबली गर्ल आशा पारेख के त्याग की अनकही दास्तान: शादीशुदा फिल्ममेकर से बेइंतहा मोहब्बत के बाद भी ताउम्र क्यों कुंवारी रहीं दिग्गज अभिनेत्री

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में साठ और सत्तर के दशक में सिल्वर स्क्रीन
     राज करने वाली सदाबहार अभिनेत्री आशा पारेख की पेशेवर जिंदगी जितनी चकाचौंध और सफलताओं से भरी रही, उनकी निजी जिंदगी में उतनी ही खामोशी और त्याग की एक अनूठी कहानी छिपी रही। अपनी बेमिसाल खूबसूरती और बेहतरीन अभिनय के दम पर करोड़ों प्रशंसकों को अपना दीवाना बनाने वाली इस महान अदाकारा ने अपनी असल जिंदगी में प्यार की एक ऐसी गरिमापूर्ण मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा आज भी बॉलीवुड के गलियारों में बेहद सम्मान के साथ की जाती है। उन्होंने एक शादीशुदा मर्द से सच्ची मोहब्बत तो की, लेकिन समाज में ‘घर तोड़ने वाली’ कहलाने का कलंक झेलने की बजाय ताउम्र कुंवारी रहने का रास्ता चुना।

    इस निश्छल और मूक प्रेम कहानी की शुरुआत वर्ष उन्नीस सौ उनसठ में हुई थी, जब मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक नासिर हुसैन ने युवा आशा पारेख की प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें अपनी फिल्म ‘दिल देके देखो’ में मुख्य अभिनेत्री के तौर पर एक बड़ा ब्रेक दिया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इसके बाद इस जोड़ी ने एक के बाद एक कई शानदार और जुबली फिल्में सिनेमा जगत को दीं। सेट पर एक साथ लगातार काम करने के दौरान आशा पारेख कब अपने निर्देशक को दिल दे बैठीं, उन्हें खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ और दूसरी तरफ नासिर हुसैन के दिल में भी उनके लिए वही सम्मानजनक भावनाएं थीं।

    नासिर हुसैन के लिए अपने दिल में बेइंतहा मोहब्बत और कशिश होने के बावजूद आशा पारेख ने कभी भी अपने हक के लिए उनके सामने कोई जिद या शर्त नहीं रखी। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह थी कि नासिर हुसैन पहले से ही शादीशुदा थे और बाल-बच्चों के साथ एक खुशहाल जीवन बिता रहे थे। अभिनेत्री के भीतर के नैतिक मूल्यों ने उन्हें कभी इस बात की इजाजत नहीं दी कि उनके व्यक्तिगत सुख या प्यार की खातिर किसी दूसरी औरत का सुहाग और एक हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए बिखर जाए। उन्होंने अपने दिल की आवाज को दबाकर दूसरे के आशियाने की हिफाजत करना ज्यादा जरूरी समझा।

    दशकों तक इस खामोश दर्द और मोहब्बत को अपने सीने में दफन रखने के बाद, आशा पारेख ने वर्ष दो हजार सत्रह में प्रकाशित हुई अपनी आत्मकथा ‘द हिट गर्ल’ में इस राज से पर्दा उठाया था। उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में स्वीकार किया था कि नासिर हुसैन ही उनकी जिंदगी के एकमात्र ऐसे पुरुष थे जिनसे उन्होंने बेहद शिद्दत से प्यार किया था। लेकिन किसी का घर उजाड़कर अपनी खुशियों का महल खड़ा करना उनके संस्कारों के खिलाफ था, यही वजह थी कि उन्होंने नासिर हुसैन पर शादी का दबाव बनाने की बजाय खुद अकेले जिंदगी काटने का एक बेहद कठिन और साहसिक निर्णय लिया।

    अपनी पूरी जिंदगी तन्हाई और अकेलेपन में गुजारने के बाद भी इस उम्र में पद्मश्री और दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित अभिनेत्री के मन में अपने अतीत के फैसलों को लेकर कोई मलाल, कड़वाहट या शिकायत नहीं है। उनका हमेशा से यह दृढ़ विश्वास रहा है कि किसी दूसरे को दुख देकर हासिल की गई खुशी कभी भी स्थायी और सच्ची नहीं हो सकती। आज बयासी वर्ष से अधिक की उम्र पार कर चुकीं आशा पारेख अपने इस फैसले पर अडिग रहते हुए पूरे आत्मसम्मान, सुकून और गरिमा के साथ अपनी एकाकी जिंदगी का आनंद ले रही हैं, जो आज के दौर के रिश्तों के लिए एक बहुत बड़ी नजीर है।

  • सिनेमाई इतिहास का वो विवादित वाकया: जब फिल्म 'प्रेम धर्म' के इंटीमेट सीन के दौरान बेकाबू हुए विनोद खन्ना, गुस्से में डिंपल कपाड़िया ने उठाया था बड़ा कदम

    सिनेमाई इतिहास का वो विवादित वाकया: जब फिल्म 'प्रेम धर्म' के इंटीमेट सीन के दौरान बेकाबू हुए विनोद खन्ना, गुस्से में डिंपल कपाड़िया ने उठाया था बड़ा कदम


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे किस्से दर्ज हैं जो फिल्मों की सफलता से इतर सेट पर घटित विवादित वाकयों के लिए हमेशा चर्चा में रहे। अस्सी के दशक में भी एक ऐसा ही वाकया सामने आया था, जिसने तत्कालीन फिल्म जगत में भारी सनसनी मचा दी थी। यह पूरा मामला हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर के सुपरस्टार विनोद खन्ना और दिग्गज अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया से जुड़ा हुआ है। वर्ष उन्नीस सौ अस्सी में आई फिल्म ‘प्रेम धर्म’ की शूटिंग के दौरान एक बेहद संवेदनशील और अंतरंग दृश्य को फिल्माते समय ऐसा घटनाक्रम हुआ कि सेट पर मौजूद हर व्यक्ति हैरान रह गया।

    इस बहुचर्चित फिल्म का निर्देशन मशहूर फिल्मकार महेश भट्ट कर रहे थे, जो अपनी फिल्मों में दृश्यों को बेहद यथार्थवादी और भावुक बनाने के लिए जाने जाते हैं। फिल्म के एक खास सीक्वेंस के लिए विनोद खन्ना और डिंपल कपाड़िया के बीच एक बेहद इंटीमेट और इमोशनल सीन शूट किया जाना तय हुआ था। इस दृश्य को अधिक वास्तविक रूप देने और कलाकारों की झिझक दूर करने के उद्देश्य से निर्देशक महेश भट्ट ने सेट की सभी लाइटों को काफी धीमा करवा दिया था और मुख्य कैमरा टीम को छोड़कर बाकी पूरी यूनिट को भी उस स्थान से थोड़ा दूर रहने के निर्देश दिए गए थे।

    जैसे ही कैमरे ने रोल करना शुरू किया, विनोद खन्ना ने स्क्रिप्ट की मांग के अनुसार अपनी सह-कलाकार डिंपल कपाड़िया को चूमना शुरू कर दिया। दृश्य के पूरा होते ही निर्देशक महेश भट्ट ने लाउडस्पीकर पर ‘कट’ की घोषणा की, लेकिन विनोद खन्ना दृश्य की भावुकता और तीव्रता में इस कदर खो चुके थे कि उन्होंने निर्देशक की आवाज नहीं सुनी। ‘कट’ बोले जाने के बाद भी वे लगातार डिंपल कपाड़िया को किस करते रहे, जिससे सेट पर असहज स्थिति पैदा हो गई। डिंपल कपाड़िया को शुरुआत में समझ ही नहीं आया कि उनके सह-कलाकार आखिर क्या कर रहे हैं।

    माहौल को अचानक गंभीर और अजीब होते देख निर्देशक महेश भट्ट ने अपनी जगह से उठकर बेहद जोर-जोर से ‘कट’ बोलना शुरू किया, जिसके बाद कहीं जाकर विनोद खन्ना होश में आए और पीछे हटे। इस अप्रत्याशित और अचानक हुई घटना से युवा अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया पूरी तरह स्तब्ध और गहरे सदमे में आ गईं। उन्हें विनोद खन्ना के इस अनपेक्षित व्यवहार पर भारी गुस्सा भी आया और वे तुरंत सेट से भागकर सीधे अपने मेकअप रूम की तरफ चली गईं।

    अपने स्वाभिमान और गरिमा को ठेस पहुंचने से आहत अभिनेत्री ने मेकअप रूम के भीतर पहुंचकर खुद को अंदर से पूरी तरह बंद कर लिया और बाहर आने से साफ मना कर दिया। सेट पर पैदा हुए इस गंभीर तनाव को देखते हुए निर्देशक महेश भट्ट ने तुरंत स्थिति को संभाला और वे स्वयं डिंपल कपाड़िया के कमरे के बाहर पहुंचे। उन्होंने अभिनेत्री से इस पूरी घटना के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगी और उन्हें आश्वस्त किया कि यह केवल एक भूल थी। दूसरी तरफ, सुपरस्टार विनोद खन्ना भी अपनी इस अनियंत्रित हरकत के बाद बेहद शर्मिंदा महसूस कर रहे थे।

    बॉलीवुड के गलियारों में आज भी इस किस्से को संवेदनशीलता के साथ याद किया जाता है, जो यह दर्शाता है कि चकाचौंध भरी फिल्मों के निर्माण के दौरान कई बार कलाकारों के लिए स्थितियां कितनी असहज और चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं। हालांकि, बाद में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे सुलझा लिया गया था, लेकिन सेंसर बोर्ड की कैंची और सेट पर मचे इस बवाल के कारण यह फिल्म और इससे जुड़ा यह विवाद हमेशा-कहमेशा के लिए फिल्मी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।

  • अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की ब्लॉकबस्टर जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा था इतिहास, इन ९ फिल्मों में साथ आकर दर्शकों को बनाया दीवाना

    अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की ब्लॉकबस्टर जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा था इतिहास, इन ९ फिल्मों में साथ आकर दर्शकों को बनाया दीवाना


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे प्रतिष्ठित और स्क्रीन पर तहलका मचाने वाली जोड़ियों का जिक्र होता है, तो अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। सत्तर और अस्सी के दशक में इन दोनों दिग्गज कलाकारों ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा चमत्कारी तालमेल दिखाया कि डिस्ट्रीब्यूटर्स और दर्शकों के बीच यह माना जाने लगा था कि जिस फिल्म में ये दोनों साथ हैं, उसका सुपरहिट होना तय है। इस ब्लॉकबस्टर जोड़ी की लोकप्रियता का आलम यह था कि इनकी एक कल्ट क्लासिक फिल्म रिलीज के बाद लगातार पांच सालों तक सिनेमाघरों से नहीं उतरी थी, जो अपने आप में एक अटूट कीर्तिमान है। इन दोनों महानायकों ने मुख्य भूमिकाओं से लेकर खास कैमियो रोल्स तक, कुल ९ फिल्मों में एक साथ स्क्रीन शेयर कर सिल्वर स्क्रीन पर अपनी दोस्ती और अभिनय का लोहा मनवाया।

    इस बेमिसाल जोड़ी के करियर और हिंदी सिनेमा के इतिहास में साल १९७५ में आई फिल्म ‘शोले’ एक मील का पत्थर साबित हुई। निर्देशक रमेश सिप्पी की इस एक्शन-ड्रामा फिल्म में जय और वीरू के किरदारों में अमिताभ और धर्मेंद्र ने जिगरी दोस्ती की ऐसी अनूठी मिसाल पेश की, जो आज आधी सदी बीत जाने के बाद भी मुहावरा बनी हुई है। यह फिल्म न केवल उस दौर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी, बल्कि मुंबई के मिनर्वा थिएटर में लगातार पांच सालों तक चलकर इसने इतिहास रच दिया। इसी साल इस सुपरहिट जोड़ी की एक और क्लासिक फिल्म ‘चुपके चुपके’ रिलीज हुई थी। ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी यह बेहतरीन कॉमेडी फिल्म बंगाली सिनेमा की रीमेक थी। फिल्म में दोनों की कॉमिक टाइमिंग कमाल की थी और एसडी बर्मन के संगीत से सजे इसके गाने आज भी चाव से सुने जाते हैं।

    एक्शन और कॉमेडी के बाद इस जोड़ी ने साल १९८० में आई फिल्म ‘राम बलराम’ के जरिए थ्रिलर जॉनर में अपनी धाक जमाई। विजय आनंद द्वारा निर्देशित इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में दोनों ने ऐसे दो भाइयों का किरदार निभाया था, जिनका पालन-पोषण धोखे से उनके माता-पिता के हत्यारे चाचा ने किया था। इसके अलावा यह जोड़ी ऋषिकेश मुखर्जी की ही एक और कल्ट फिल्म ‘गुड्डी’ में भी एक साथ नजर आई थी। हालांकि इस फिल्म में मुख्य भूमिका अभिनेत्री जया बच्चन की थी, लेकिन धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने फिल्म इंडस्ट्री की असलियत दिखाते हुए इसमें बेहद प्रभावी कैमियो रोल किए थे, जिसने फिल्म की कहानी को एक नया आयाम दिया था।

    सिल्वर स्क्रीन पर नए प्रयोग करने के मामले में भी यह जोड़ी पीछे नहीं रही। साल १९७७ में रिलीज हुई फिल्म ‘चरणदास’ एकमात्र ऐसी अनूठी फिल्म है, जिसमें अमिताभ और धर्मेंद्र दोनों ने कव्वाली गायकों के रूप में एक विशेष और बेहद दिलचस्प भूमिका निभाई थी। आशा भोसले और मुकेश की आवाज में सजे इस फिल्म के कव्वाली गीत आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इसके बाद निर्देशक दुलल गुहा की फिल्म ‘दोस्त’ में भी अमिताभ बच्चन ने ‘आनंद’ नाम के किरदार में एक बेहद प्रभावशाली कैमियो किया था, जहां मुख्य भूमिका में धर्मेंद्र मौजूद थे। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत से सजी इस फिल्म में दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब सराहा था।

    इन दोनों सितारों की जुगलबंदी का सिलसिला आगे भी जारी रहा, जिसमें एक हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘जादूगर’ शामिल है। इस रहस्यमयी कहानी में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने क्रमशः वीरेंद्र और फ्रैंक जेम्स की भूमिकाएं निभाकर दर्शकों को चौंका दिया था, जिसकी पृष्ठभूमि एक सुनसान हवेली से जुड़ी थी। इसके बाद फिल्म ‘दिल्लगी’ में भी दोनों का जादू देखने को मिला, जहां अमिताभ बच्चन का रोल भले ही छोटा था, लेकिन एक गंभीर और सीधे-सादे प्रोफेसर की भूमिका निभा रहे धर्मेंद्र के साथ उनकी ऑनस्क्रीन मौजूदगी ने फिल्म की रौनक बढ़ा दी थी। इसके अतिरिक्त इस लिस्ट में एक अन्य फिल्म ‘हम कौन हैं’ का नाम भी प्रमुखता से शामिल है, जिसमें इस महान जोड़ी ने अपने अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

  • न मनमुटाव, न तलाक, फिर भी ३७ सालों से अलग शहरों में रह रहे हैं अलका याग्निक और नीरज कपूर, खुद सिंगर ने खोला इस अनोखे रिश्ते का राज

    न मनमुटाव, न तलाक, फिर भी ३७ सालों से अलग शहरों में रह रहे हैं अलका याग्निक और नीरज कपूर, खुद सिंगर ने खोला इस अनोखे रिश्ते का राज


    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत पर दशकों तक राज करने वाली दिग्गज गायिका अलका याग्निक की सुरीली आवाज से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन उनकी निजी जिंदगी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। अलका याग्निक ने साल १९८९ में बिजनेसमैन नीरज कपूर से शादी की थी, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि शादी के करीब ३७ साल बीत जाने के बाद भी यह कपल एक-दूसरे से अलग रहता है। अमूमन फिल्म इंडस्ट्री में अलग रहने का मतलब मनमुटाव या तलाक माना जाता है, मगर इस जोड़े के बीच ऐसा कुछ भी नहीं है। दोनों के बीच आज भी अटूट प्यार और आपसी समझ कायम है। दरअसल, अलका याग्निक के पति नीरज कपूर मूल रूप से मेघालय की राजधानी शिलांग के रहने वाले हैं और वहीं रहकर अपना पूरा बिजनेस संभालते हैं, जबकि अलका अपने काम के सिलसिले में मुंबई में रहती हैं।

    इस अनोखे रिश्ते की शुरुआत एक पारिवारिक जुड़ाव से हुई थी। नीरज कपूर की आंटी और अलका याग्निक की मां बचपन में क्लासमेट हुआ करती थीं। इसी पारिवारिक कनेक्शन के चलते नीरज जब मुंबई आए, तो उनकी पहली मुलाकात अलका से हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला बढ़ा और यह दोस्ती गहरी मोहब्बत में बदल गई। उस दौर में दोनों के बीच रात-रात भर फोन पर बातें हुआ करती थीं और जब घर पर फोन का भारी-भरकम बिल आया, तब जाकर अलका की मां को इस अफेयर की भनक लगी। अलका उस समय तक यह पूरी तरह तय कर चुकी थीं कि वह जीवनसाथी के रूप में सिर्फ नीरज को ही चुनेंगी। हालांकि, जब दोनों ने अपने परिवारों के सामने शादी की इच्छा जताई, तो अलका के माता-पिता इस रिश्ते के सख्त खिलाफ खड़े हो गए।

    घरवालों के विरोध की सबसे बड़ी वजह दोनों के करियर और अलग-अलग शहर थे। नीरज शिलांग में पूरी तरह सेटल थे और अलका उस दौर में अपने सिंगिंग करियर के पीक पर थीं, जिसके कारण उनका मुंबई में रहना बेहद जरूरी था। माता-पिता का मानना था कि एक पार्टनर मुंबई में और दूसरा शिलांग में रहेगा, तो इतनी दूरी के बीच शादी का चलना नामुमकिन हो जाएगा। हालांकि, अलका और नीरज के दृढ़ निश्चय के आगे आखिरकार दोनों परिवारों को झुकना पड़ा और साल १९८९ में दोनों पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह के बंधन में बंध गए। शादी के शुरुआती दिनों में दोनों ने एक बीच का रास्ता निकाला था, जिसके तहत तय हुआ था कि अलका एक महीने के लिए शिलांग जाएंगी और नीरज अगले महीने मुंबई आएंगे।

    शादी के तुरंत बाद अलका याग्निक का करियर इतनी तेजी से चमका कि उनके लिए एक दिन के लिए भी मुंबई छोड़ना पूरी तरह नामुमकिन हो गया। साल १९९० में उनकी बेटी सायशा का जन्म हुआ और उसके ठीक बाद जनवरी १९९१ में उनका गाना ‘एक दो तीन’ ब्लॉकबस्टर साबित हुआ। इस सफलता ने अलका को बॉलीवुड की सबसे व्यस्त गायिका बना दिया। अलका बताती हैं कि उनके पति अक्सर मजाक में उन्हें चिढ़ाते हैं कि वह अलका के करियर के लिए तो बहुत लकी साबित हुए, लेकिन अपने खुद के वैवाहिक जीवन के लिए अनलकी रहे। खुद अलका भी मानती हैं कि पूरी जिंदगी अलग-अलग शहरों में रहने की वजह से जब भी वे लंबे समय बाद मिलते हैं, तो एक-दूसरे के तौर-तरीकों को दोबारा समझने में दो-चार दिन का समय लग जाता है, लेकिन इस दूरी ने उनके रिश्ते के विश्वास को कभी कमजोर नहीं होने दिया।

  • परदे पर शराबी का अमर अभिनय करने वाले केष्टो मुखर्जी की अनसुनी दास्तान, मंदिर जाते वक्त सड़क हादसे में थम गई थीं सांसें

    परदे पर शराबी का अमर अभिनय करने वाले केष्टो मुखर्जी की अनसुनी दास्तान, मंदिर जाते वक्त सड़क हादसे में थम गई थीं सांसें

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के सुनहरे इतिहास में कई ऐसे कलाकारों ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है, जिनकी रील और रीयल लाइफ में जमीन-आसमान का अंतर था। एक ऐसे ही बेमिसाल अभिनेता थे केष्टो मुखर्जी, जिन्होंने परदे पर हमेशा एक पक्के शराबी का किरदार निभाकर दर्शकों को लोटपोट किया, लेकिन असल जिंदगी में उन्होंने कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया। अपनी खास कॉमिक टाइमिंग, अनूठी शारीरिक भाषा और लड़खड़ाती जुबान से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले केष्टो मुखर्जी ने अपने करियर में ९० से भी अधिक फिल्मों में काम किया, मगर उनका यह मुकाम कड़े संघर्षों और बेहद अजीबो-गरीब दौर से गुजरकर हासिल हुआ था। कोलकाता के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे केष्टो को बचपन से ही अभिनय का गहरा शौक था, जिसके चलते उन्होंने शुरुआती दिनों में नुक्कड़ नाटकों और रंगमंच का रुख किया था।

    कोलकाता के रंगमंच पर सक्रियता के दौरान मशहूर फिल्मकार ऋत्विक घटक की पारखी नजर उन पर पड़ी। घटक ने केष्टो की असाधारण प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें अपनी बांग्ला फिल्म ‘नागरिक’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका दे दी। किस्मत का खेल देखिए कि यह फिल्म साल १९५२ में बनकर पूरी हो चुकी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से इसे सिनेमाघरों तक पहुंचने में पूरे २५ साल लग गए। जब यह फिल्म १९७७ में रिलीज हुई, तब तक ऋत्विक घटक इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे। अपने गुरु और मार्गदर्शक के निधन के गहरे सदमे के कारण केष्टो मुखर्जी ने इस फिल्म को अपने जीवन में कभी नहीं देखा। कोलकाता में कई बंगाली फिल्मों का हिस्सा रहने के बावजूद केष्टो को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था, जिससे न तो उनके भीतर की अभिनय की भूख मिट रही थी और न ही परिवार का गुजारा हो पा रहा था।

    आर्थिक तंगहाली से जूझते हुए केष्टो मुखर्जी ने एक दिन आंखों में बड़े सपने लिए मायानगरी बॉम्बे का रुख किया। बॉम्बे आकर उन्होंने नए सिरे से काम की तलाश शुरू की और किसी तरह दिग्गज निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी से संपर्क साधे रखा। ऋषिकेश मुखर्जी ने उनकी अभिनय क्षमता का सम्मान करते हुए अपनी फिल्म ‘मुसाफिर’ में उन्हें एक स्ट्रीट डांसर का बेहद छोटा सा रोल दिया। इस छोटे से ब्रेक के बाद भी बॉम्बे जैसे बड़े शहर में खुद को स्थापित करने के लिए उनका संघर्ष थमा नहीं था। इसी जद्दोजहद के बीच एक दिन वह महान फिल्मकार बिमल रॉय से मिलने उनकी फिल्म के सेट पर पहुंच गए। बिमल रॉय उस समय शूटिंग के बेहद व्यस्त शेड्यूल में व्यस्त थे, इसलिए केष्टो वहीं एक कोने में बैठकर घंटों तक उनके फ्री होने का इंतजार करने लगे।

    काफी देर बाद जब बिमल रॉय फुर्सत में आए और केष्टो उनके सामने पहुंचे, तो उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि फिलहाल उनके पास कोई काम नहीं है और वह बाद में आएं। इस साफ इनकार के बाद भी केष्टो वहां से हिले नहीं, जिससे चिढ़कर बिमल रॉय ने उनसे पूछ लिया कि क्या तुम भौंक सकते हो, क्योंकि उन्हें अपनी फिल्म के एक दृश्य के लिए कुत्ते की आवाज की जरूरत थी। आम तौर पर ऐसा तीखा सवाल सुनकर कोई भी स्वाभिमानी कलाकार वहां से चला जाता, लेकिन केष्टो ने धैर्य रखा और तुरंत पूरी शिद्दत के साथ सेट पर ही कुत्ते की आवाज निकालने लगे। उनकी इस अप्रत्याशित हरकत और अभिनय के प्रति गजब का समर्पण देखकर बिमल रॉय पूरी तरह हैरान रह गए और उन्होंने तुरंत केष्टो को अपनी फिल्म के लिए साइन कर लिया।

    इस ऐतिहासिक घटना के बाद केष्टो मुखर्जी की बॉलीवुड में राह आसान हो गई और उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा और भरोसेमंद हास्य कलाकारों में शुमार हो गए, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। महज ५६ वर्ष की उम्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने उनके इस सुनहरे सफर पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया। वह मुंबई के समीप स्थित एक प्रसिद्ध गणपति मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे, तभी पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान अगले ही दिन दिल का दौरा पड़ने के कारण इस महान कलाकार का असमय निधन हो गया।

  • वास्तविक जीवन में मदिरा को हाथ न लगाने वाले हास्य अभिनेता की अनसुनी दास्तान, मंदिर जाते समय हुए सड़क हादसे में थम गई थीं सांसें

    वास्तविक जीवन में मदिरा को हाथ न लगाने वाले हास्य अभिनेता की अनसुनी दास्तान, मंदिर जाते समय हुए सड़क हादसे में थम गई थीं सांसें

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे विलक्षण कलाकार हुए हैं, जिनकी ऑन-स्क्रीन छवि और वास्तविक जीवन के आचरण में जमीन-आसमान का अंतर था। इस फेहरिस्त में सबसे लोकप्रिय नामों में से एक नाम दिवंगत अभिनेता केष्टो मुखर्जी का है। केष्टो मुखर्जी ने रुपहले पर्दे पर हमेशा एक ऐसे शराबी के किरदारों को जीवंत किया, जिसे देखकर दर्शक अपनी हंसी नहीं रोक पाते थे। आम जनता उन्हें असल जिंदगी में भी शराबी समझने की भूल कर बैठती थी, जबकि हकीकत यह थी कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया था। उनका पूरा सफरनामा कला के प्रति अटूट निष्ठा, कड़े संघर्षों और अप्रत्याशित मोड़ों की एक अनूठी दास्तान है।

    पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जन्मे केष्टो मुखर्जी को बचपन से ही अभिनय का गहरा शौक था, जिसके कारण उन्होंने बेहद कम उम्र में ही नुक्कड़ नाटकों और स्थानीय रंगमंच से अपने अभिनय सफर की शुरुआत कर दी थी। रंगमंच पर उनकी शानदार प्रतिभा को देखकर उस दौर के महान बंगाली फिल्मकार ऋत्विक घटक बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने केष्टो को अपनी प्रतिष्ठित बांग्ला फिल्म ‘नागरिक’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका की पेशकश की। नियति का खेल देखिए कि यह फिल्म साल 1952 में ही बनकर पूरी तरह तैयार हो चुकी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से इसे रिलीज होने में पूरे 25 साल का लंबा समय लग गया। जब यह फिल्म 1977 में सिनेमाघरों में पहुंची, तब तक ऋत्विक घटक इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे। अपने गुरु के जाने के गम में केष्टो मुखर्जी इतने भावुक हो गए थे कि उन्होंने इस फिल्म को जीवनभर कभी नहीं देखा।

    कोलकाता के सिनेमाई हलकों में कई बंगाली फिल्मों का हिस्सा रहने के बावजूद केष्टो मुखर्जी को वह पहचान और आर्थिक संबल नहीं मिल पा रहा था, जिसके वह हकदार थे। न तो उनके परिवार का गुजारा ठीक से हो पा रहा था और न ही उनके भीतर के कलाकार की भूख शांत हो रही थी। आखिरकार, अपनी आंखों में एक बड़ा मुकाम हासिल करने का सपना संजोकर उन्होंने देश की आर्थिक राजधानी और मायानगरी बॉम्बे का रुख किया। मुंबई आने के बाद शुरुआती दिन बेहद तंगहाली और संघर्ष में बीते। उन्होंने हार न मानते हुए लगातार प्रयास किए और किसी तरह मशहूर निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी से संपर्क स्थापित किया। ऋषिकेश मुखर्जी ने उनकी प्रतिभा का सम्मान करते हुए अपनी फिल्म ‘मुसाफिर’ में उन्हें एक स्ट्रीट डांसर का बहुत छोटा सा रोल दिया, जिससे उनके हिंदी सिनेमा के सफर का आधिकारिक तौर पर आगाज हुआ।

    बॉम्बे में खुद को स्थापित करने की इसी जद्दोजहद के दौरान केष्टो मुखर्जी से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक वाकया सामने आया, जब वह काम की तलाश में महान फिल्ममेकर बिमल रॉय के सेट पर पहुंचे थे। बिमल रॉय उस समय अपनी फिल्म की शूटिंग में बेहद व्यस्त थे और केष्टो बिना थके घंटों एक कोने में खड़े होकर उनकी फुर्सत का इंतजार करते रहे। काफी देर बाद जब बिमल रॉय की नजर उन पर पड़ी, तो उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि फिलहाल उनके पास देने के लिए कोई काम नहीं है और वह बाद में आएं। इसके बावजूद केष्टो वहां से नहीं गए। कुछ समय बाद बिमल रॉय ने जब दोबारा उन्हें वहीं खड़ा देखा, तो वह थोड़े असहज और चिढ़ गए। उन्होंने केष्टो से पूछा कि क्या तुम भौंक सकते हो, मुझे अपनी फिल्म के एक दृश्य के लिए कुत्ते की प्रामाणिक आवाज की जरूरत है, क्या तुम यह कर पाओगे।

    यह एक ऐसा सवाल था जो किसी भी स्वाभिमानी अभिनेता को निराश और आहत कर सकता था, लेकिन केष्टो मुखर्जी ने इसे एक बड़ी चुनौती और अवसर के रूप में स्वीकार किया। वह कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत हुए और फिर पूरे समर्पण के साथ सेट पर ही जोर-जोर से कुत्ते की आवाज निकालने लगे। उनकी इस अप्रत्याशित और सजीव प्रस्तुति ने बिमल रॉय समेत पूरे सेट पर मौजूद लोगों को हैरान कर दिया। बिमल रॉय के पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं बचे थे और उन्होंने केष्टो की प्रतिभा का लोहा मानते हुए तुरंत उन्हें अपनी फिल्म के लिए अनुबंधित कर लिया। इस घटना के बाद केष्टो मुखर्जी के लिए बॉलीवुड के दरवाजे पूरी तरह खुल गए और उन्होंने अपने पूरे करियर में 90 से अधिक फिल्मों में अपनी विशिष्ट अदाकारी का लोहा मनवाया।

    सफलता के शिखर पर पहुंचने और दर्शकों को दशकों तक हंसाने वाले इस महान कलाकार का अंत बेहद दुखद रहा। मात्र 56 वर्ष की आयु में नियति ने उन्हें हमसे छीन लिया। एक दिन जब वह मुंबई के पास स्थित एक प्रसिद्ध गणपति मंदिर में दर्शन करने के लिए अपनी कार से जा रहे थे, तभी पीछे से आ रहे एक अनियंत्रित तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण सड़क हादसे में केष्टो मुखर्जी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद दुर्घटना के अगले ही दिन दिल का दौरा पड़ने के कारण इस महान हास्य अभिनेता का असमय निधन हो गया।

  • मुगल-ए-आजम के सेट से सामने आया इतिहास का अनसुना पन्ना: मधुबाला के हुस्न के दीवाने थे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो

    मुगल-ए-आजम के सेट से सामने आया इतिहास का अनसुना पन्ना: मधुबाला के हुस्न के दीवाने थे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में अपनी बेमिसाल खूबसूरती और जीवंत अभिनय से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री मधुबाला का जादू सिर्फ देश की सीमाओं तक ही सीमित नहीं था। हाल ही में सामने आए ऐतिहासिक और सिनेमाई संस्मरणों के अनुसार, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो भी इस कदर हुस्न की मल्लिका के दीवाने थे कि वे अक्सर उनसे मिलने के लिए भारत आया करते थे। यह उस दौर की बात है जब मधुबाला अपनी सर्वकालिक महान फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ की शूटिंग में व्यस्त थीं। उस समय जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान की राजनीति में कोई बहुत बड़ा नाम नहीं थे, बल्कि एक बेहद पढ़े-लिखे, हैंडसम और उभरते हुए युवा राजनेता के तौर पर मुंबई के दौरों पर आते-जाते रहते थे।

    मध्य प्रदेश। इस ऐतिहासिक और दिलचस्प किस्से की पृष्ठभूमि साल 1950 के दशक के अंतिम वर्षों से जुड़ती है। यह वह दौर था जब एक तरफ मधुबाला और महानायक दिलीप कुमार के बीच के रिश्तों में गंभीर तल्खी आ चुकी थी और उनका सालों पुराना संबंध टूटने की कगार पर था। ठीक उसी समय जुल्फिकार अली भुट्टो की जिंदगी में मधुबाला की एंट्री हुई। भुट्टो अक्सर मुंबई प्रवास के दौरान ‘मुगल-ए-आजम’ के भव्य सेट पर पहुंच जाते थे, जहां वे घंटों बैठकर मधुबाला को अभिनय करते हुए निहारते थे। धीरे-धीरे दोनों के बीच मुलाकातों का सिलसिला बढ़ा और यह दोस्ती गहरी होती चली गई। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, दोनों अक्सर फिल्म के सेट पर ही एक साथ दोपहर का भोजन करते थे और भुट्टो हमेशा मधुबाला के करीब रहने का बहाना ढूंढते थे।

    इस रिश्ते का सबसे जटिल पहलू यह था कि जब जुल्फिकार अली भुट्टो मधुबाला के करीब आ रहे थे, तब वे पहले से ही शादीशुदा थे और उनकी शादी शिरीन नामक महिला से हो चुकी थी। इसके बावजूद मधुबाला की जादुई शख्सियत के आकर्षण में बंधकर भुट्टो ने अपनी शादीशुदा जिंदगी की परवाह नहीं की। मीडिया रिपोर्ट्स और उस दौर के राजनैतिक-सिनेमाई गलियारों के दावों के अनुसार, भुट्टो ने एक दिन अपने दिल की बात खुलकर मधुबाला के सामने रख दी थी और उनके समक्ष बकायदा विवाह का प्रस्ताव भी पेश किया था। वे हर हाल में मधुबाला को अपनी जीवनसंगिनी बनाना चाहते थे और इसके लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार थे।

    मधुबाला उस दौर में जुल्फिकार भुट्टो की बुद्धिमत्ता और उनके व्यक्तित्व का सम्मान जरूर करती थीं और उनके साथ पर्याप्त समय भी बिताती थीं, लेकिन वे एक बेहद व्यावहारिक महिला भी थीं। उन्हें इस बात का पूरा संज्ञान था कि भुट्टो न सिर्फ शादीशुदा हैं बल्कि एक दूसरे देश की सक्रिय राजनीति का हिस्सा भी हैं। ऐसे किसी संवेदनशील मोड़ पर शादी जैसा बड़ा और गंभीर फैसला लेना उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन के लिए सही नहीं था। यही कारण रहा कि मधुबाला ने भुट्टो के प्रेम प्रस्ताव को बेहद शालीनता से ठुकरा दिया और अपने रिश्ते को एक सीमित दायरे से आगे नहीं बढ़ने दिया। आखिरकार उन्होंने भुट्टो से अपनी दूरियां बना लीं और इस तरह राजनीति और कला का यह अध्याय हमेशा के लिए अधूरा रह गया।

    इस अधूरी प्रेम कहानी के अंत के बाद दोनों की राहें पूरी तरह जुदा हो गईं। जुल्फिकार अली भुट्टो से अलग होने के तुरंत बाद साल 1960 में मधुबाला ने मशहूर गायक और अभिनेता किशोर कुमार से शादी कर ली। इसके कुछ समय बाद ही वे गंभीर बीमारियों की चपेट में आ गईं और महज 36 वर्ष की अल्पायु में साल 1969 में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। दूसरी ओर, जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान की राजनीति के शीर्ष पर पहुंचे और देश के विदेश मंत्री, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बने। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था और साल 1979 में तख्तापलट के बाद महज 51 वर्ष की आयु में भुट्टो को पाकिस्तान में फांसी दे दी गई।