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  • फैशन जगत में शोक की लहर मनीष मल्होत्रा की मां का निधन अंतिम विदाई में उमड़े सितारे

    फैशन जगत में शोक की लहर मनीष मल्होत्रा की मां का निधन अंतिम विदाई में उमड़े सितारे

    नई दिल्ली:प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के जीवन में एक गहरा और भावुक क्षण तब आया जब उनकी मां सुदर्शन मल्होत्रा ने 94 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म और फैशन जगत में शोक की लहर दौड़ गई और कई दिग्गज हस्तियां मनीष मल्होत्रा के आवास पर पहुंचकर उन्हें सांत्वना देने के लिए उपस्थित हुईं। यह दृश्य बेहद भावुक था जहां एक ओर दुख का माहौल था तो दूसरी ओर सितारे इस कठिन समय में परिवार के साथ मजबूती से खड़े नजर आए।

    श्रद्धांजलि देने पहुंचे प्रमुख चेहरों में कई बड़े नाम शामिल थे जिनमें ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन जैसे लोकप्रिय कलाकार भी मौजूद रहे। इसके अलावा कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा, करण जौहर, करिश्मा कपूर, रवीना टंडन, उर्मिला मातोंडकर, अनन्या पांडे, संजय कपूर और उनकी बेटी शनाया, रोनित रॉय, अलवीरा खान, वरुण धवन और नताशा दलाल, अर्जुन कपूर, सोनाली बेंद्रे और नुसरत भरूचा जैसे कई सितारे भी अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे। यह उपस्थिति इस बात का संकेत है कि मनीष मल्होत्रा इंडस्ट्री में कितने सम्मानित और प्रिय हैं।

    मनीष मल्होत्रा और उनकी मां के बीच गहरा और मजबूत रिश्ता रहा है। सुदर्शन मल्होत्रा हमेशा अपने बेटे के सपनों और करियर के पीछे एक मजबूत स्तंभ की तरह खड़ी रहीं। मनीष ने कई बार इंटरव्यू और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी मां के प्रति अपने प्रेम और कृतज्ञता को व्यक्त किया है। मदर्स डे पर लिखे गए उनके भावुक शब्द इस रिश्ते की गहराई को दर्शाते हैं जहां उन्होंने अपनी मां को अपनी ताकत और प्रेरणा बताया था।

    अपने एक पोस्ट में मनीष ने लिखा था कि उनकी मां ने बचपन से ही उनके कपड़ों और फिल्मों के प्रति जुनून को प्रोत्साहित किया और हमेशा उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। यह रिश्ता केवल मां और बेटे का नहीं बल्कि एक मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत का भी था जिसने मनीष मल्होत्रा के करियर को आकार दिया।

    परिवार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि सुदर्शन मल्होत्रा का अंतिम संस्कार 20 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे मुंबई के सांता क्रूज़ पश्चिम स्थित हिंदू श्मशान घाट में किया जाएगा। बयान में यह भी कहा गया कि वह अपने पीछे एक लंबी और समृद्ध जीवन यात्रा, अनमोल यादें और एक मजबूत विरासत छोड़कर गई हैं जो हमेशा परिवार को मार्गदर्शन देती रहेगी।

    मनीष मल्होत्रा के लिए यह समय बेहद कठिन है और पूरी इंडस्ट्री उनके साथ खड़ी नजर आ रही है। इस दुखद घड़ी में हर कोई प्रार्थना कर रहा है कि परिवार को इस क्षति को सहने की शक्ति मिले और सुदर्शन मल्होत्रा की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

  • रिश्तों की सच्चाई पर्दे के पीछे होती है डेजी शाह को अब भी है पलाश स्मृति के फिर साथ आने की उम्मीद

    रिश्तों की सच्चाई पर्दे के पीछे होती है डेजी शाह को अब भी है पलाश स्मृति के फिर साथ आने की उम्मीद


    नई दिल्ली। म्यूजिक कंपोजर से डायरेक्टर बने पलाश मुच्छल और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार बल्लेबाज़ स्मृति मंधाना की शादी कभी फैंस के लिए किसी सपने से कम नहीं थी लेकिन यह सपना 25 नवंबर 2025 को हकीकत बनने से पहले ही टूट गया। सांगली में होने वाली इस शादी को सेरेमनी से ठीक एक दिन पहले अचानक रद्द कर दिया गया जिसने दोनों के चाहने वालों को हैरान और मायूस कर दिया। शुरुआत में इसकी वजह स्मृति के पिता की खराब तबीयत बताई गई लेकिन धीरे धीरे सोशल मीडिया और खबरों में कई तरह के आरोप प्रत्यारोप सामने आने लगे जिससे मामला और उलझता चला गया।

    अब इस पूरे विवाद पर बॉलीवुड एक्ट्रेस डेजी शाह ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। खास बात यह है कि डेजी शाह जल्द ही पलाश मुच्छल की अगली डायरेक्टोरियल फिल्म में नजर आने वाली हैं ऐसे में उनका बयान और भी अहम माना जा रहा है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान डेजी ने न सिर्फ इस मुद्दे पर खुलकर बात की बल्कि एक संतुलित और परिपक्व सोच भी सामने रखी।

    डेजी शाह ने बताया कि शादी कैंसिल होने के बाद पलाश सीधे उनसे संपर्क करने में हिचकिचा रहे थे। उन्हें कुछ अनजान लोगों के जरिए फिल्म का ऑफर मिला जो उन्हें थोड़ा असामान्य लगा। डेजी के अनुसार उनकी पलाश की बहन पलक से अच्छी दोस्ती है इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि अगर पलाश सच में उन्हें फिल्म में लेना चाहते तो वह सीधे या परिवार के माध्यम से संपर्क करते। इस अजीब स्थिति को समझने के लिए डेजी ने खुद पहल की और पलाश को मैसेज कर पूरी बात पूछी। इस पर पलाश ने जवाब दिया कि मौजूदा हालात को देखते हुए वह किसी से सीधे बातचीत करने से बच रहे हैं क्योंकि उन्हें डर था कि बात का गलत मतलब निकाला जा सकता है।

    डेजी ने इस पूरे मामले पर अपनी राय रखते हुए कहा कि वह किसी की निजी जिंदगी के आधार पर उसे जज करने में विश्वास नहीं रखतीं। उनका मानना है कि पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को अलग अलग रखना चाहिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा हमें नहीं पता कि असल में क्या हुआ है। हर सिक्के के दो पहलू होते हैं और हम सिर्फ सुनी सुनाई बातों के आधार पर अपनी राय बना लेते हैं। यह दो परिवारों का निजी मामला है और सच्चाई क्या है यह वही लोग बेहतर जानते हैं।

    डेजी शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह नजरिया किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं है बल्कि वह निष्पक्ष रहने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी इंसान को उसके निजी जीवन की घटनाओं के आधार पर जज करना सही नहीं है खासकर तब जब पूरी सच्चाई सामने न आई हो। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि मीडिया और सोशल मीडिया पर जो बातें सामने आती हैं वे हमेशा पूरी सच्चाई नहीं होतीं।

    अंत में डेजी ने उम्मीद जताई कि पलाश और स्मृति के बीच चीजें फिर से ठीक हो सकती हैं। उन्होंने कहा वे दोनों बहुत प्यारी जोड़ी हैं और मुझे उम्मीद है कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा और वे फिर से साथ आ सकते हैं। डेजी का यह बयान न केवल उनके संवेदनशील और संतुलित नजरिए को दर्शाता है बल्कि यह भी बताता है कि रिश्तों को समझने के लिए धैर्य और निष्पक्षता कितनी जरूरी होती है।

  • ‘धुरंधर’ को लेकर कमल जैन ने की तारीफ बोले यह फिल्म दर्शकों को खींचने वाला सिनेमाई अनुभव

    ‘धुरंधर’ को लेकर कमल जैन ने की तारीफ बोले यह फिल्म दर्शकों को खींचने वाला सिनेमाई अनुभव


    फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ के निर्माता कमल जैन ने अपनी नई फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर बेहद सकारात्मक राय व्यक्त की है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐसा सिनेमाई अनुभव है जो दर्शकों को न सिर्फ जोड़ता है बल्कि उन्हें पूरी तरह से अपनी कहानी में खींच लेता है। उन्होंने इसे एक ऐसा प्रोजेक्ट बताया है जो दर्शकों के देखने के नजरिए को बदलने की क्षमता रखता है।

    कमल जैन का मानना है कि असली सफलता सिर्फ एक अच्छी कहानी से नहीं आती, बल्कि उसमें मौजूद उस खास जादू से आती है जो दर्शकों को बांधकर रखता है। उन्होंने कहा कि ‘मैजिक ही असल में बिकता है’ और यही वह तत्व है जो किसी फिल्म को सामान्य से अलग बनाता है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ में वही दुर्लभ जादू मौजूद है, जिसे हमने पहले भी ‘दीवार’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘भाग मिल्खा भाग’, ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘विकी डोनर’ और ‘संजू’ जैसी फिल्मों में देखा है।

    उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि इस तरह के जादू के लिए जरूरी है कि फिल्म के क्रिएटर्स की सोच और इरादे मजबूत हों। जब प्रोड्यूसर की व्यावसायिक दृष्टि और निर्देशक की रचनात्मक सोच एक साथ मिलकर काम करती हैं, तब एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव तैयार होता है। ‘धुरंधर’ इसी तरह की मजबूत सिनर्जी का उदाहरण है, जहां कहानी, निर्देशन और प्रस्तुति एक दूसरे के साथ तालमेल बनाते हैं।

    कमल जैन ने यह भी कहा कि आज के दौर में जब दुनिया पूरी तरह से कनेक्टेड है, तब फिल्में सिर्फ दर्शकों तक पहुंचती नहीं बल्कि उन्हें सिनेमाघरों तक खींचने की क्षमता भी रखती हैं। ‘धुरंधर’ भी इसी तरह का प्रभाव छोड़ने में सक्षम दिखाई देती है, जो दर्शकों को थिएटर तक आकर्षित करने का दम रखती है।

    उन्होंने फिल्म की टीम की भी सराहना की और कहा कि इसमें मेकर्स की स्पष्टता और मजबूत सोच साफ दिखाई देती है। आदित्य की लेखनी, निर्देशन, संगीत और कलाकारों का प्रदर्शन कहानी को और गहराई प्रदान करता है। साथ ही ज्योति देशपांडे की मजबूत मार्केटिंग और वितरण रणनीति ने इसे एक बड़े सिनेमाई प्रोजेक्ट में बदल दिया है।

    कमल जैन के अनुसार जब कंटेंट खुद बोलने लगता है और दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है, तब वह केवल एक फिल्म नहीं रहता बल्कि एक प्रभावशाली अनुभव बन जाता है। यही ‘धुरंधर’ की खासियत है, जो कहानी कहने की कला को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है।

     कमल जैन की राय के अनुसार ‘धुरंधर’ एक ऐसी फिल्म है जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि दर्शकों के दिल और दिमाग दोनों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। यह फिल्म उस स्तर पर खड़ी दिखाई देती है जहां कला, कहानी और प्रस्तुति का संगम एक यादगार अनुभव तैयार करता है
  • धुरंधर 2 रिव्यू: रणवीर सिंह का जलवा बरकरार, लेकिन पहले पार्ट की तरह धमाका नहीं

    धुरंधर 2 रिव्यू: रणवीर सिंह का जलवा बरकरार, लेकिन पहले पार्ट की तरह धमाका नहीं


    नई दिल्ली । रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर: द रिवेंज रिलीज हो चुकी है और पहले पार्ट की सफलता के बाद इस फिल्म को लेकर हाइप तो जबरदस्त था। दर्शकों ने एडवांस बुकिंग कर अपनी वफादारी दिखाई लेकिन कुछ शहरों में प्रीव्यू शोज़ कैंसल होने से निराशा भी हुई। जो लोग फिल्म देखने पहुंचे उनके लिए अनुभव मिला लेकिन पूरी तरह संतोषजनक नहीं।

    कहानी
    फिल्म की कहानी छह चैप्टर में बंटी है। शुरुआत में जसकीरत सिंह रांगी रणवीर सिंह और उसके परिवार की पृष्ठभूमि दिखाई जाती है। पिता भी फौजी थे और जसकीरत भी फौज में भर्ती होने वाला था लेकिन परिवार की रक्षा के लिए उसे बंदूक उठानी पड़ती है। अपनी खुद की जंग लड़ते हुए जसकीरत देश के लिए एजेंट बनता है और पाकिस्तान में हमजा अली मजारी के रूप में काम करता है।

    पहले पार्ट की कहानी रहमान डकैत अक्षय खन्ना की मौत पर खत्म हुई थी। इस पार्ट में जसकीरत हमजा उसका भाई उजैर दानिश पंडोर को सत्ता में बैठाकर अपने मिशन में आगे बढ़ता है। मेजर इकबाल अर्जुन रामपाल उसे उसके बड़े साहब से मिलवाते हैं जिससे कहानी आगे बढ़ती है।

    अभिनय

    रणवीर सिंह पूरे चार घंटे स्क्रीन पर छाए रहते हैं। उनके एक्शन इमोशन और गुस्से के सीन परफेक्ट हैं। अर्जुन रामपाल को अधिक स्क्रीन स्पेस मिला है लेकिन उनके किरदार में उतनी गहराई नहीं। संजय दत्त और सारा अर्जुन के सीन सीमित हैं जबकि माधवन और राकेश बेदी बीच-बीच में फिल्म में जान डालते हैं।

    निर्देशन

    आदित्य धर का रिसर्च और डिटेल्ड वर्क काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने नोटबंदी अतीक अहमद और दाऊद इब्राहिम का कनेक्शन कहानी में जोड़ा है। लेकिन पहले पार्ट के मुकाबले इस बार कहानी में सरप्राइज एलिमेंट कम हैं और कई सीन लंबी खींची गई लगती हैं। शुरुआत और क्लाइमैक्स दमदार हैं लेकिन बीच का हिस्सा थोड़ा धीमा और अनुमानित लगता है।

    संगीत
    संगीत इस बार पहले पार्ट जितना प्रभावशाली नहीं। एक-दो गाने छोड़कर बाकी यादगार नहीं हैं और रोमांटिक सॉन्ग थोड़े जबरन ठूंसे हुए लगते हैं।

    देखें या नहीं
    अगर आपने पहला पार्ट देखा है तो यह जरूर देखें। हाइप या सेलेब्स के रिव्यू से प्रभावित न हों। फिल्म ठीक-ठाक एंटरटेनमेंट देती है लेकिन पहले पार्ट जैसी रोमांचक सरप्राइज और दमदार कहानी की उम्मीदें कम रखें।

  • अमिताभ बच्चन के लिए गाने से मना कर दिया था किशोर कुमार ने, कहा क्या तुम मुझे तानसेन समझते हो?

    अमिताभ बच्चन के लिए गाने से मना कर दिया था किशोर कुमार ने, कहा क्या तुम मुझे तानसेन समझते हो?


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के अमिताभ बच्चन को लेकर कई किस्से मशहूर हैं लेकिन उनमें से एक बेहद मज़ेदार और कम जानी-पहचानी कहानी है। यह कहानी जुड़ी है उनकी फिल्म ‘नमक हलाल से जिसमें किशोर कुमार ने एक गाने के लिए शुरू में मना कर दिया था।

    कहानी यह है कि फिल्म के गाने कि पग घुंघरू बांध मीरा नाची थीं को कंपोज़ किया था बप्पी लहरी ने। बप्पी लहरी चाहते थे कि यह गाना उनके मामा किशोर कुमार गाएं। जब उन्होंने किशोर कुमार को यह गाना पहली बार सुनाया तो किशोर कुमार ने बेहद मज़ाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी यह गाना है या कहानी? मैं यह नहीं गाऊंगा। क्या तुम मुझे तानसेन समझते हो?”

    किशोर कुमार के अनुसार यह गाना इतना लंबा और जटिल था कि उन्होंने शुरू में इसे गाने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि लोग इतनी बड़ी-बड़ी रचनाएँ लेकर आते हैं और इसे गाना आसान नहीं है। लेकिन बप्पी लहरी की लगातार समझाइश और मनाने के बाद किशोर कुमार आखिरकार राज़ी हो गए और उन्होंने यह गाना गाया।

    फिल्म के निर्देशक थे प्रकाश मेहरा और इस फिल्म का बजट करीब 2 करोड़ 80 लाख रुपये था। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने जबरदस्त सफलता हासिल की और कुल ग्रॉस कलेक्शन करीब 12 करोड़ 64 लाख रुपये रहा। इस गाने ने दर्शकों के बीच खासा लोकप्रियता हासिल की और किशोर कुमार की आवाज़ को अमिताभ बच्चन की अदाकारी के साथ जोड़कर यादगार बना दिया।

    यह किस्सा यह दिखाता है कि भले ही किशोर कुमार जैसी महान आवाज़ वाले कलाकार के लिए भी कभी-कभी किसी गाने की शुरुआत चुनौतीपूर्ण होती थी लेकिन आखिरकार उनकी प्रतिभा और समझाइश ने हर बाधा पार कर दी। गाने और कहानी के बीच का यह मज़ेदार संवाद आज भी बॉलीवुड प्रेमियों के बीच चर्चित है।

  • शूटिंग के दौरान अजीब वाकया जब एक युवक ने मनोज बाजपेयी को जड़ दिया जोरदार थप्पड़

    शूटिंग के दौरान अजीब वाकया जब एक युवक ने मनोज बाजपेयी को जड़ दिया जोरदार थप्पड़


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता मनोज बाजपेयी ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपने करियर से जुड़ा एक चौंकाने वाला किस्सा साझा किया जिसने सभी को हैरान कर दिया। यह घटना उनकी चर्चित फिल्म गली गुलियां की शूटिंग के दौरान हुई थी जब एक आम युवक ने अचानक गुस्से में आकर उन्हें थप्पड़ जड़ दिया।

    मनोज बाजपेयी ने बताया कि फिल्म की शूटिंग एक बेहद संकरी और सुनसान गली में हो रही थी जिसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया था ताकि शूटिंग बिना किसी व्यवधान के पूरी हो सके। आसपास के लोगों को भी कुछ समय के लिए रुकने के लिए कहा गया था। सब कुछ योजना के मुताबिक चल रहा था तभी अचानक 21 22 साल का एक युवक वहां आ गया।

    अभिनेता के अनुसार वह युवक बिना किसी की बात सुने आगे बढ़ने लगा और उसने साफ कह दिया कि उसे अपने काम से जाना है और वह किसी भी हालत में रुकेगा नहीं। टीम ने पहले उसे समझाने की कोशिश की लेकिन जब वह नहीं माना तो आखिरकार उसे जाने दिया गया।

    यहीं से कहानी ने अप्रत्याशित मोड़ लिया। मनोज बाजपेयी ने बताया कि जब वह युवक उनके पास से गुजर रहा था तो उसने अचानक उनके कूल्हे पर जोरदार थप्पड़ मार दिया। यह घटना इतनी अचानक हुई कि कोई भी कुछ समझ नहीं पाया। अभिनेता ने कहा कि वह युवक शायद इस बात से नाराज था कि उसे शूटिंग के कारण रोका गया और वह अपनी झुंझलाहट निकालना चाहता था।

    मनोज बाजपेयी ने इस घटना को याद करते हुए कहा कि शूटिंग के दौरान ऐसे कई अजीब और अप्रत्याशित अनुभव होते हैं जिनके लिए कोई भी तैयार नहीं होता। हालांकि यह घटना चौंकाने वाली थी लेकिन उन्होंने इसे हल्के फुल्के अंदाज में साझा किया।

    फिल्म गली गुलियां भले ही बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाई लेकिन समीक्षकों ने इसकी कहानी और मनोज बाजपेयी के अभिनय की खूब तारीफ की थी। फिल्म एक ऐसे व्यक्ति की मानसिक स्थिति को दर्शाती है जो अपने आसपास हो रही घटनाओं को लेकर गहरे मानसिक तनाव में होता है और चाइल्ड एब्यूज जैसे गंभीर मुद्दे को उठाती है।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो मनोज बाजपेयी लगातार अलग अलग और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उनका नाम भागम भाग 2 को लेकर चर्चा में है। इसके अलावा वह फिल्म घूसखोर पंडित को लेकर भी सुर्खियों में रहे जिसमें उन्होंने एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया। यह फिल्म अपने टाइटल को लेकर विवादों में भी रही। यह किस्सा एक बार फिर दिखाता है कि फिल्मी दुनिया के पीछे कई अनदेखे और अनसुने अनुभव छिपे होते हैं जो सितारों के जीवन को आम लोगों से अलग और कभी कभी चुनौतीपूर्ण बना देते हैं।

  • असरानी को समर्पित है भूत बंगला, राजपाल यादव ने कहा प्रियदर्शन कॉमेडी के जादूगर

    असरानी को समर्पित है भूत बंगला, राजपाल यादव ने कहा प्रियदर्शन कॉमेडी के जादूगर


    नई दिल्ली । अभिनेता राजपाल यादव इन दिनों अपनी आगामी हॉरर-कॉमेडी फिल्म भूत बंगला के प्रमोशन में व्यस्त हैं। हाल ही में एक बातचीत के दौरान उन्होंने फिल्म में अपने साथ काम करने वाले दिग्गज अभिनेता असरानी को याद करते हुए भावुक अंदाज में श्रद्धांजलि दी। राजपाल यादव ने कहा कि असरानी जैसे महान कलाकार के साथ स्क्रीन साझा करना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था। उन्होंने बताया कि असरानी न सिर्फ बेहतरीन अभिनेता थे, बल्कि एक ऐसे एंटरटेनर भी थे जो अपनी अदाकारी से बड़े से बड़े दर्शक समूह को लगातार हंसा और बांधे रख सकते थे।

    राजपाल यादव ने कहा कि उन्होंने अपने करियर में कई कलाकारों के साथ काम किया है, लेकिन असरानी जैसा एंटरटेनर उन्होंने बहुत कम देखा है। उनके मुताबिक असरानी में ऐसी अद्भुत ऊर्जा थी कि वह 200-250 लोगों के सामने बैठकर सिर्फ अपनी परफॉर्मेंस के दम पर एक घंटे तक सभी का मनोरंजन कर सकते थे। उन्होंने कहा कि भूत बंगला में असरानी के साथ काम करना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा। राजपाल ने यह भी बताया कि फिल्म की यादें उनके दिल के बेहद करीब हैं, क्योंकि यह उनके लिए उस दिग्गज कलाकार के साथ बिताया गया अनमोल समय है।

    राजपाल यादव ने आगे कहा कि आज असरानी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन भूत बंगला में उनका किरदार और उनकी मौजूदगी हमेशा दर्शकों के दिलों में जिंदा रहेगी। उन्होंने कहा कि यह फिल्म और उसका किरदार कहीं न कहीं असरानी की यादों को समर्पित है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जब दर्शक इस फिल्म को देखेंगे तो उन्हें असरानी की शानदार कॉमिक टाइमिंग और अभिनय की झलक जरूर देखने को मिलेगी।

    गौरतलब है कि दिग्गज अभिनेता असरानी का निधन पिछले साल 20 अक्तूबर को 84 वर्ष की उम्र में हुआ था। हिंदी सिनेमा में उनकी पहचान एक बेहतरीन कॉमेडियन और चरित्र अभिनेता के रूप में रही है। उनकी अदाकारी ने कई पीढ़ियों के दर्शकों को हंसाया और मनोरंजन किया।

    फिल्म के निर्देशक प्रियदर्शन के बारे में बात करते हुए राजपाल यादव ने उन्हें कॉमेडी का जादूगर बताया। उन्होंने कहा कि प्रियदर्शन की फिल्मों में मनोरंजन का खास अंदाज होता है। भूत बंगला भी उसी शैली की फिल्म है जिसमें कॉमेडी और डर दोनों का दिलचस्प मिश्रण देखने को मिलेगा। राजपाल ने कहा कि फिल्म दर्शकों को एक साथ हंसाने और डराने का काम करेगी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह उन्हें पूरी तरह मनोरंजन से जोड़े रखेगी।

    प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अक्षय कुमार मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। उनके साथ तब्बू, वामिका गब्बी, परेश रावल, राजपाल यादव और असरानी सहित कई कलाकार अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। फिल्म का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है, जिसे दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। यह हॉरर-कॉमेडी फिल्म 10 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है और दर्शकों को इससे भरपूर मनोरंजन की उम्मीद है।

  • मंदाना करीमी भारत छोड़ेंगी: कहा‑ भारत ने मुझे धोखा दिया, काम मिलना बंद, ईरान आज़ाद होते ही लौटूंगी

    मंदाना करीमी भारत छोड़ेंगी: कहा‑ भारत ने मुझे धोखा दिया, काम मिलना बंद, ईरान आज़ाद होते ही लौटूंगी



    नई दिल्ली। ईरानी मूल की बॉलीवुड अभिनेत्री मंदाना करीमी ने बड़ा बयान दिया है कि वह जल्द ही भारत छोड़कर अपने देश ईरान लौटने का निर्णय कर चुकी हैं। उन्होंने कहा है कि भारत में अब उनकी कोई आवाज़ नहीं बची है और उन्हें ‘भारत ने धोखा दिया’ जैसा महसूस हो रहा है।

    मंदाना, जिन्होंने कई फिल्मों और रियलिटी शो में अपनी पहचान बनाई थी, ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्होंने अपना सारा सामान पहले से ही पैक कर लिया है और जैसे ही ईरान में मौजूदा शासन बदलने का ऐलान होगा, वह तुरंत वहीं लौट जाएँगी। उन्होंने कहा कि वह भारत से अब अपना नाता तोड़ रही हैं।

    क्या कहा मंदाना ने?
    मंदाना ने कहा, “मैं भारत से ब्रेकअप कर रही हूँ। भारत ने मुझे मॉडलिंग और एक्टिंग करियर दिया, लेकिन अब मुझे लगता है कि यहाँ मेरी आवाज़ नहीं सुनी जाती।
    उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों में उन्हें काम बिल्कुल नहीं मिल रहा और उनके कई कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिए गए हैं। इसका कारण वह अपनी खुली राय और ईरान के समर्थन में प्रदर्शन मानती हैं।

    मंदाना ने कहा कि मुंबई में अकेलापन महसूस हुआ, और कुछ पुराने दोस्त भी उनसे दूर हो गए क्योंकि उन्होंने बहुत खुले तौर पर राय व्यक्त की।

    ईरान के प्रति उनकी राय
    मंदाना ने कहा कि उनका सपना एक ऐसा ईरान है जहाँ महिलाएं आज़ाद हों, अपनी मर्जी के कपड़े पहन सकें और किसी भी यूनिवर्सिटी में पढ़ सकें। उन्होंने कहा कि ईरान में राजनीतिक बदलाव आने पर वह तुरंत वापस चली जाएँगी।

    काम और मीडिया में गिरावट
    एक अन्य इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जनवरी 2026 से उन्हें काम मिलना लगभग बंद हो गया, और कई कॉन्ट्रैक्ट भी कैंसिल हो गए। मंदाना ने यह अपने राजनीतिक बयान और विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने से जोड़कर बताया।
    कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि उन्होंने भारतीय मीडिया पर ‘एकतरफ़ा कवरेज़’ का आरोप लगाया है और चाहती हैं कि वैकल्पिक आवाज़ों को भी मंच मिले।


    उनका बॉलीवुड सफर
    मंदाना करीमी का जन्म तेहरान, ईरान में हुआ।
    वह 2010 में मॉडलिंग के लिए भारत आईं और 2013 से मुंबई में ही बस गईं।
    उन्होंने ‘क्या कूल हैं हम 3’, ‘मैं और चार्ल्स’, ‘भाग जॉनी’ जैसी फिल्मों में काम किया और ‘बिग बॉस’ और ‘लॉकअप’ जैसे रियलिटी शो में भी हिस्सा लिया।
    2017 में उनका भारतीय बिजनेसमैन गौरव गुप्ता से विवाह हुआ, लेकिन 2021 में उनका तलाक हो गया था।
    मंदाना करीमी ने कहा है कि वह भारत छोड़ेंगी क्योंकि उन्हें लगता है कि यहाँ उनकी आवाज़ दब गई है और उन्हें धोखा महसूस हुआ है। उन्होंने कहा है कि काम मिलना बंद हो गया है और कॉन्ट्रैक्ट रद्द हो गए हैं। वह ईरान में बदलाव आने पर वापस लौटना चाहती हैं, खासकर महिलाओं के अधिकारों और आज़ादी के लिए।उन्होंने भारतीय मीडिया पर भी आलोचनात्मक टिप्पणी की है कि रिपोर्टिंग एकतरफ़ा है।
  • पैदा होते ही टाइगर श्रॉफ को मिला था 'साइनिंग अमाउंट', सुभाष घई ने किया था ये बड़ा वादा

    पैदा होते ही टाइगर श्रॉफ को मिला था 'साइनिंग अमाउंट', सुभाष घई ने किया था ये बड़ा वादा


    नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्शन और डांस स्टार टाइगर श्रॉफ की कहानी खास है। आज उन्हें उनके जबरदस्त स्टंट्स, फिटनेस और स्टाइल के लिए जाना जाता है, लेकिन कम लोग जानते हैं कि टाइगर को जन्म के समय ही बॉलीवुड से पहला साइनिंग अमाउंट मिल चुका था। मशहूर फिल्ममेकर सुभाष घई ने जन्म के समय ही टाइगर के हाथ में 101 रुपए रखकर यह वादा किया था कि वह उन्हें बड़े होकर हीरो बनाएंगे।

    टाइगर श्रॉफ का जन्म 2 मार्च 1990 को मुंबई में हुआ। उनका असली नाम जय हेमंत श्रॉफ है। वे बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ और फिल्म प्रोड्यूसर आयशा श्रॉफ के बेटे हैं। बचपन में उनकी फुर्ती और शरारत के चलते घर में उन्हें प्यार से ‘टाइगर’ कहा जाने लगा। यही नाम आगे चलकर उनकी पहचान बन गया।

    जन्म के समय ही सुभाष घई टाइगर से मिलने आए। घई ने जैकी श्रॉफ को फिल्म ‘हीरो’ से लॉन्च किया था। टाइगर को देखकर उन्होंने 101 रुपए साइनिंग अमाउंट के रूप में दिए और कहा कि भविष्य में वे ही टाइगर को हीरो बनाएंगे। हालांकि, समय के साथ सुभाष घई ने इस वादे को निभाया नहीं, लेकिन टाइगर की किस्मत ने उनके लिए दूसरा रास्ता बनाया। निर्माता साजिद नाडियाडवाला ने टाइगर को बॉलीवुड में डेब्यू का मौका दिया।

    टाइगर ने 2014 में फिल्म ‘हीरोपंती’ से बॉलीवुड में कदम रखा। इस फिल्म में उनके एक्शन और डांस को खूब सराहा गया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और टाइगर को बेस्ट मेल डेब्यू का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। इसके बाद उन्होंने ‘बागी’, ‘ए फ्लाइंग जट’, ‘मुन्ना माइकल’, और ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2’ जैसी फिल्मों में काम किया। इनमें कुछ फिल्में सुपरहिट रहीं, जबकि कुछ ने बॉक्स ऑफिस पर खास प्रदर्शन नहीं किया।

    साल 2019 में आई फिल्म ‘वॉर’ उनके करियर की बड़ी हिट साबित हुई। इस फिल्म में उनके साथ बॉलीवुड के एक्शन आइकन ऋतिक रोशन थे, जिन्हें टाइगर अपना आदर्श मानते हैं। ‘वॉर’ ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की और टाइगर की लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी।

    टाइगर को डेब्यू फिल्म के लिए कई सम्मान मिले, जिनमें फिल्मफेयर अवॉर्ड और आईफा अवॉर्ड शामिल हैं। कम फिल्मों में काम करने के बावजूद टाइगर श्रॉफ आज के दौर के सबसे चर्चित और पसंदीदा एक्शन स्टार माने जाते हैं।

    टाइगर का यह जन्मकालीन किस्सा और बॉलीवुड में उनके सफर ने यह साबित किया कि प्रतिभा, मेहनत और सही मौके का संयोजन किसी को भी स्टार बना सकता है, और टाइगर श्रॉफ इसके जीते-जागते उदाहरण हैं।

  • अमर अकबर एंथनी का फीमेल वर्जन बना, लेकिन कभी नहीं हो पाई रिलीज़ सुधा चंद्रन ने सुनाई अनसुनी कहानी

    अमर अकबर एंथनी का फीमेल वर्जन बना, लेकिन कभी नहीं हो पाई रिलीज़ सुधा चंद्रन ने सुनाई अनसुनी कहानी


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की सदाबहार फिल्मों में शुमार अमर अकबर एंथनी आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह रखता है। अमिताभ बच्चन विनोद खन्ना और ऋषि कपूर जैसे सितारों से सजी इस फिल्म ने भाईचारे और मनोरंजन का अनोखा संगम पेश किया था। लेकिन अब अभिनेत्री सुधा चंद्रन ने इस फिल्म से जुड़ा एक ऐसा राज़ खोला है जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया।

    हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में सुधा चंद्रन ने बताया कि अमर अकबर एंथनी का एक फीमेल वर्जन भी बनाया गया था। इस फिल्म का नाम था सीता सलमा सूज़ी । यह प्रोजेक्ट मूल फिल्म से प्रेरित था और इसमें तीन बहनों की कहानी दिखाई जानी थी। सुधा ने बताया कि वे इस फिल्म में लीड रोल निभा रही थीं और उनके साथ अर्चना पूरन सिंह और मुनमुन सेन भी मुख्य भूमिकाओं में थीं।

    सुधा ने याद करते हुए कहा कि उस समय पूरी टीम को विश्वास था कि वे एक बड़ी और यादगार फिल्म बना रहे हैं। फिल्म में पुरुष कलाकारों में जीत उपेंद्र और शेखर सुमन जैसे नाम शामिल थे। सभी कलाकार बेहद समर्पण के साथ काम कर रहे थे लेकिन दुर्भाग्यवश यह फिल्म कभी रिलीज़ नहीं हो पाई। इसके पीछे क्या कारण थे यह साफ नहीं हो सका और यह प्रोजेक्ट अधूरा रह गया।

    इस अनरिलीज़्ड फिल्म से जुड़ी एक और दिलचस्प बात यह है कि इसी के सेट पर सुधा चंद्रन की मुलाकात उनके भावी पति रवि डांग से हुई थी जो फिल्म में एसोसिएट डायरेक्टर थे। सुधा ने बताया कि शुरुआत में उन्हें रवि का व्यवहार थोड़ा अजीब लगा क्योंकि वे उनके गुड मॉर्निंग का जवाब नहीं देते थे। जब उन्होंने इस बारे में पूछा तो रवि ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें काम के लिए पैसे मिलते हैं औपचारिक अभिवादन के लिए नहीं। रवि की यह साफगोई और काम के प्रति समर्पण सुधा के दिल को छू गया।

    धीरे धीरे दोनों के बीच दोस्ती और फिर प्यार पनपा। हालांकि शादी का फैसला आसान नहीं था क्योंकि परिवार इंडस्ट्री से जुड़े व्यक्ति को अपनाने को लेकर आशंकित था। लेकिन सुधा के आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय ने आखिरकार परिवार को मना लिया। उनकी मां ने भरोसा जताया कि उनकी बेटी कभी गलत फैसला नहीं ले सकती।

    सीता सलमा सूजी भले ही बड़े पर्दे तक नहीं पहुंच सकी लेकिन यह फिल्म सुधा चंद्रन के जीवन की एक अहम कड़ी बन गई। एक ओर जहां यह प्रोजेक्ट अधूरा रह गया वहीं दूसरी ओर इसी के जरिए उनकी जिंदगी में एक नया रिश्ता और नई शुरुआत जुड़ गई। बॉलीवुड के इतिहास में यह किस्सा आज भी एक दिलचस्प लेकिन अनकही कहानी के रूप में दर्ज है।