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  • भारतीय सिनेमा का गौरव: पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्रियां, कला के क्षेत्र में अमूल्य योगदान की पूरी सूची

    भारतीय सिनेमा का गौरव: पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्रियां, कला के क्षेत्र में अमूल्य योगदान की पूरी सूची

    नई दिल्ली। भारतीय फिल्म जगत यानी बॉलीवुड में ऐसे कई प्रतिभावान कलाकार हुए हैं, जिन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय और कला के प्रति समर्पण से न केवल दर्शकों के दिलों में जगह बनाई, बल्कि देश का नाम भी रोशन किया है। सिनेमा के क्षेत्र में उत्कृष्ट और अमूल्य योगदान देने वाले इन सितारों को भारत सरकार द्वारा समय-समय पर देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से अलंकृत किया गया है। इस प्रतिष्ठित सूची में फिल्म उद्योग की कई ऐसी दिग्गज अभिनेत्रियों के नाम शामिल हैं, जिन्होंने अपनी कलात्मक यात्रा से भारतीय सिनेमा को एक नया आयाम दिया है। इनमें से कुछ अभिनेत्रियां आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत हमेशा अमर रहेगी।

    इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाली अभिनेत्रियों में बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ कही जाने वाली हेमा मालिनी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। अपनी बेहतरीन अदाकारी और नृत्य कला के लिए प्रसिद्ध हेमा मालिनी को भारत सरकार द्वारा साल 2000 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। वहीं, हिंदी सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार मानी जाने वाली दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी को कला के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए साल 2013 में इस गौरवपूर्ण नागरिक सम्मान से नवाजा गया था। भले ही वे अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्में आज भी सिनेप्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं।

    समीक्षकों द्वारा सराहे गए अभिनय और अपनी बेबाक शैली के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री और निर्माता कंगना रनौत को साल 2020 में पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किया गया था। सत्तर और अस्सी के दशक की अपनी संजीदा अदाकारी से समां बांधने वाली सदाबहार अभिनेत्री रेखा को साल 2010 में इस सम्मान से विभूषित किया गया था। उन्होंने ‘उमराव जान’ और ‘खूबसूरत’ जैसी यादगार फिल्मों में दमदार भूमिकाएं निभाई हैं। नब्बे के दशक की लोकप्रिय और सफल अभिनेत्रियों में शामिल रवीना टंडन को हाल ही में वर्ष 2023 में महामहिम राष्ट्रपति द्वारा इस राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

    अपनी खूबसूरती और बेहतरीन अभिनय क्षमता के बल पर वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने वाली पूर्व विश्व सुंदरी ऐश्वर्या राय बच्चन को साल 2009 में पद्म श्री की उपाधि दी गई थी। वहीं, लीक से हटकर किरदारों को पर्दे पर जीवंत करने वाली सशक्त अभिनेत्री विद्या बालन को साल 2014 में इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। इसके अतिरिक्त, बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी कला का परचम लहराने वाली ग्लोबल आइकन प्रियंका चोपड़ा को साल 2016 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से अलंकृत किया गया था।

    गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को सहजता से निभाने वाली उत्कृष्ट अभिनेत्री तब्बू और अपनी चुलबुली अदाकारी से करोड़ों फैंस के दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री काजोल को साल 2011 में एक साथ इस सर्वोच्च सम्मान के लिए चुना गया था। अपने जमाने की बेहद खूबसूरत और बोल्ड अभिनेत्री मानी जाने वाली शर्मिला टैगोर को सिनेमाई दुनिया में उनके विशेष योगदान हेतु साल 2005 में इस उपाधि से विभूषित किया गया था। इस सूची में भारतीय समानांतर सिनेमा की मजबूत स्तंभ रहीं दिवंगत अभिनेत्री स्मिता पाटिल का नाम भी शामिल है, जिन्हें बहुत कम उम्र में, साल 1985 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। कला जगत में इन सभी महिलाओं का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।

  • सलमान खान से अलग होने के बाद मुश्किल वक्त में भी ऐश्वर्या राय ने खुद को संभाला, फिल्म 'शब्द' की को-स्टार ने खोल दिए राज

    सलमान खान से अलग होने के बाद मुश्किल वक्त में भी ऐश्वर्या राय ने खुद को संभाला, फिल्म 'शब्द' की को-स्टार ने खोल दिए राज

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित जोड़ियों और उनके आपसी रिश्तों को लेकर समय-समय पर कई तरह की बातें सामने आती रही हैं। इसी क्रम में, फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ में साथ काम कर चुकीं सह-कलाकार सादिया सिद्दीकी ने सुपरस्टार सलमान खान और ऐश्वर्या राय के बहुचर्चित ब्रेकअप के बाद के दौर को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि निजी जीवन में चल रहे इतने बड़े उतार-चढ़ाव और मुश्किलों के बावजूद ऐश्वर्या राय ने जिस तरह खुद को संभाला और अपने काम के प्रति निष्ठा दिखाई, वह वाकई तारीफ के काबिल था।

    एक हालिया साक्षात्कार के दौरान जब सादिया सिद्दीकी से पूछा गया कि क्या साल 2005 में आई फिल्म ‘शब्द’ की शूटिंग के दौरान उन्हें ऐश्वर्या राय की व्यक्तिगत जिंदगी में चल रहे तनाव का कोई अंदाजा हुआ था? इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि उस फिल्म में ऐश्वर्या के साथ उनका कोई सीधा सीन नहीं था और वे उन्हें व्यक्तिगत रूप से बहुत करीब से नहीं जानती थीं, लेकिन सेट पर उनके व्यवहार को देखकर कोई भी उनकी आंतरिक उथल-पुथल का अंदाजा नहीं लगा सकता था। उन्होंने अपनी भावनाओं और निजी जीवन की दिक्कतों को बहुत ही गरिमापूर्ण तरीके से छिपाकर रखा था।

    सह-कलाकार ने ऐश्वर्या राय के पेशेवर रवैये की जमकर सराहना करते हुए कहा कि वे हमेशा समय पर पूरी तैयारी के साथ सेट पर पहुंचती थीं। शूटिंग शुरू होने से पहले वे अपनी सभी पंक्तियों (लाइन्स) को अच्छी तरह याद रखती थीं, अपनी स्क्रिप्ट का गहराई से अध्ययन करती थीं और पूरे प्रोफेशनलिज्म के साथ अपना काम पूरा करती थीं। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत समस्याओं की परछाई को कभी भी अपने काम पर या सेट के माहौल पर नहीं पड़ने दिया।

    सादिया ने आगे बताया कि ऐश्वर्या अपने किरदारों को जीवंत करने के लिए काफी समर्पित थीं। वे दृश्यों को बेहतर बनाने के लिए बार-बार स्क्रिप्ट पढ़ती थीं और निर्देशक व साथी कलाकारों के साथ उस पर चर्चा करती थीं। वे अपने किरदार की मानसिक स्थिति और उसकी गहराई को समझने का पूरा प्रयास करती थीं, जो उनके एक बेहतरीन कलाकार होने का प्रमाण है। गौरतलब है कि साल 2005 में रिलीज हुई सस्पेंस थ्रिलर फिल्म ‘शब्द’ में ऐश्वर्या राय के साथ संजय दत्त और जायद खान मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे।

    यदि दोनों कलाकारों के वर्तमान पेशेवर जीवन की बात करें, तो सलमान खान आने वाले समय में फिल्म ‘मातृभूमि’ में दिखाई देंगे, जिसका निर्देशन अपूर्व लाखिया कर रहे हैं। इस फिल्म में उनके साथ चित्रांगदा सिंह मुख्य भूमिका में होंगी। इसके अतिरिक्त, वे दक्षिण भारतीय सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री नयनतारा के साथ भी एक अनाम फिल्म (एसवीसी63) पर काम कर रहे हैं, जिसका निर्देशन वामशी पैदिपल्ली कर रहे हैं और यह फिल्म साल 2027 की ईद के अवसर पर सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। दूसरी तरफ, ऐश्वर्या राय आखिरी बार साल 2023 में आई मणिरत्नम की ऐतिहासिक फिल्म ‘पोन्नियिन सेल्वन’ में नजर आई थीं, जिसमें बेहतरीन अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

  • फिल्म 'कोलोनी' में कलाकारों या स्टंटमैन ने नहीं, बल्कि ग्रुप डांसर्स ने निभाए रोंगटे खड़े कर देने वाले खूंखार एक्शन सीन्स

    फिल्म 'कोलोनी' में कलाकारों या स्टंटमैन ने नहीं, बल्कि ग्रुप डांसर्स ने निभाए रोंगटे खड़े कर देने वाले खूंखार एक्शन सीन्स

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में जब भी किसी फिल्म में खतरनाक और हैरतअंगेज एक्शन दृश्यों को फिल्माना होता है, तो आमतौर पर मुख्य अभिनेता खुद कमान संभालते हैं या फिर जोखिम भरे दृश्यों के लिए पेशेवर स्टंटमैन और बॉडी डबल की सेवाएं ली जाती हैं। लेकिन मनोरंजन जगत में हाल ही में एक ऐसा अनोखा प्रयोग देखने को मिला है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। साल 2026 में प्रदर्शित हुई एक नई फिल्म में बेहद पेचीदा और डरावने एक्शन सीक्वेंस को पूरा करने के लिए किसी स्टंटमैन को नहीं, बल्कि पेशेवर डांसर्स को अनुबंधित किया गया। इस अनूठे फैसले के पीछे की वजह फिल्म की बेहद अलग और जटिल पटकथा थी, जिसे सामान्य एक्शन कलाकारों के लिए कर पाना मुमकिन नहीं था।

    यह पूरा घटनाक्रम हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई चर्चित जॉम्बी थ्रिलर फिल्म ‘कोलोनी’ से जुड़ा हुआ है। यह फिल्म अपनी अनूठी कहानी के कारण पारंपरिक जॉम्बी फिल्मों से काफी अलग है। फिल्म की पटकथा के अनुसार, इसमें दिखाया गया वायरस इंसानी शरीर में प्रवेश करने के बाद एक अलग तरह का म्यूटेशन पैदा करता है, जिसे ‘हाइपर कोलिनेटेड’ कहा जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि वायरस से संक्रमित होने वाले सभी लोग अलग-अलग व्यवहार करने के बजाय एक सामूहिक मस्तिष्क यानी ‘कलेक्टिव माइंड’ की तरह काम करते हैं। यदि किसी एक संक्रमित को कोई जानकारी मिलती है, तो वह संदेश तुरंत एक ही पल में बाकी सभी जॉम्बीज तक पहुंच जाता है।

    इसी सामूहिक अवधारणा को स्क्रीन पर जीवंत करने के लिए निर्देशक को बेहद बारीकी से कोरियोग्राफ किए गए दृश्यों की आवश्यकता थी। फिल्म में कई दृश्य ऐसे थे जहां दर्जनों जॉम्बीज को एक साथ मिलकर बेहद पेचीदा शारीरिक गतिविधियां और एक समान स्टंट करने थे। इन दृश्यों में जरा सी भी चूक पूरे तालमेल को बिगाड़ सकती थी। किसी सामान्य स्टंटमैन के लिए शरीर को इस हद तक लचीला बनाना और सामूहिक रूप से एक ही समय पर सटीक शारीरिक मुद्राएं प्रदर्शित करना काफी कठिन काम था। इस चुनौती से निपटने के लिए निर्माण टीम को ग्रुप डांसर्स की आवश्यकता महसूस हुई, जो न केवल चेहरे पर सटीक भाव ला सकें, बल्कि सामूहिक टाइमिंग और मूवमेंट में भी पूरी तरह निपुण हों।

    यही कारण था कि फिल्म के निर्माताओं ने इस काम के लिए करीब 20 अनुभवी डांसर्स की एक विशेष टीम को काम पर रखा। दर्शकों को थिएटर्स में जिन दृश्यों को देखकर यह लग रहा है कि वे अत्याधुनिक विजुअल इफेक्ट्स (VFX) या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए गए हैं, वे असल में इन डांसर्स की कड़ी मेहनत और शारीरिक दक्षता का नतीजा हैं। इन कलाकारों ने बिना किसी तकनीक के सहारा लिए स्क्रीन पर एक साथ सटीक मूव्स दिखाकर दृश्यों को बेहद डरावना और वास्तविक बना दिया है।

    इस अनोखे प्रयोग और बेहतरीन तकनीकी काम की बदौलत फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों की तरफ से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) पर भी इस फिल्म को 7 के करीब रेटिंग हासिल हुई है, जो इस जॉनर की फिल्मों के लिए काफी बेहतर मानी जाती है। जो सिनेमाप्रेमी इस फिल्म को घर बैठे देखने का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें अभी थोड़ा और धैर्य रखना होगा। चालू वर्ष में रिलीज होने के कारण यह फिल्म फिलहाल किसी भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं कराई गई है और इसका आनंद अभी केवल सिनेमाघरों में ही लिया जा सकता है।

  • उर्फी जावेद ने धर्म और नाम बदलने के दावों को बताया पूरी तरह फर्जी, अफवाह फैलाने वालों को सोशल मीडिया पर दिया करारा जवाब

    उर्फी जावेद ने धर्म और नाम बदलने के दावों को बताया पूरी तरह फर्जी, अफवाह फैलाने वालों को सोशल मीडिया पर दिया करारा जवाब

    नई दिल्ली। अपने बेबाक बयानों और अनूठे पहनावे के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाली अभिनेत्री उर्फी जावेद एक बार फिर सोशल मीडिया पर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला उनके पहनावे का नहीं, बल्कि उनके नाम और धर्म परिवर्तन से जुड़ी एक बड़ी अफवाह का है। इंटरनेट पर पिछले कुछ दिनों से यह दावा किया जा रहा था कि अभिनेत्री ने इस्लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया है। इन खबरों के तेजी से वायरल होने के बाद अब खुद अभिनेत्री ने सामने आकर इन दावों के पीछे का पूरा सच बताया है और गलत जानकारी फैलाने वालों की जमकर क्लास लगाई है।

    दरअसल, सोशल मीडिया पर एक महिला द्वारा वीडियो साझा कर यह दावा किया गया था कि उर्फी जावेद ने अपना धर्म बदल लिया है और अब उनका नया नाम रीता भारद्वाज हो गया है। वीडियो में अभिनेत्री के पहनावे को लेकर भी कई तरह की नकारात्मक टिप्पणियां की गई थीं। इस तरह की भ्रामक खबरों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उर्फी जावेद ने साफ किया कि उन्होंने कभी भी अपना नाम या मजहब नहीं बदला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी धर्म या रूढ़िवादी विचारधारा में विश्वास नहीं रखती हैं, इसलिए उनके बारे में ऐसी बातें करना पूरी तरह निराधार है।

    अभिनेत्री ने बिना किसी हिचकिचाहट के अफवाह फैलाने वालों को नसीहत देते हुए कहा कि किसी के बारे में भी टिप्पणी करने से पहले पूरी जानकारी जुटा लेनी चाहिए। उन्होंने इंटरनेट का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति उनके पुराने टेलीविजन कार्यक्रमों की सूची और उनमें उनके नाम की जांच कर सकता है। अभिनेत्री ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनके काम या पहनावे की आलोचना की जा सकती है, लेकिन किसी के बारे में इस तरह की मनगढ़ंत और झूठी खबरें फैलाना पूरी तरह गलत और गैर-जिम्मेदाराना है।

    मिली जानकारी के अनुसार, इस विवाद के बढ़ने और अभिनेत्री द्वारा कड़ा रुख अपनाए जाने के बाद संबंधित महिला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वह वीडियो हटा दिया है और अभिनेत्री के अकाउंट को ब्लॉक कर दिया है। उर्फी जावेद ने इस बात की पुष्टि करते हुए कुछ संदेशों के स्क्रीनशॉट भी साझा किए और बताया कि झूठे दावों की पोल खुलने के बाद अब वास्तविकता सबके सामने आ चुकी है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत हमलों से प्रभावित नहीं होतीं, लेकिन तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    अगर उर्फी जावेद के पेशेवर जीवन की बात करें तो वे मनोरंजन जगत का एक जाना-माना नाम हैं। वे पिछले साल एक बड़े रियलिटी शो का हिस्सा रही थीं, जहां उन्होंने अपनी बेहतरीन रणनीति और खेल के दम पर जीत हासिल की थी। इसके अलावा वे कई अन्य लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिकों जैसे ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ और ‘कसौटी जिंदगी की 2’ में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुकी हैं। अभिनय के साथ-साथ वे कुछ डिजिटल शोज़ को बतौर होस्ट भी संभाल चुकी हैं और सोशल मीडिया पर उनकी एक बड़ी फैन फॉलोइंग है।

  • ओटीटी प्लेटफॉर्म पर डेब्यू करने जा रहे अभिनेता सनी देओल ने पुरानी यादें कीं ताजा, फिल्म 'दामिनी' के अपने आइकॉनिक वकील के किरदार पर खुलकर की बात

    ओटीटी प्लेटफॉर्म पर डेब्यू करने जा रहे अभिनेता सनी देओल ने पुरानी यादें कीं ताजा, फिल्म 'दामिनी' के अपने आइकॉनिक वकील के किरदार पर खुलकर की बात

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेताओं में शुमार सनी देओल जल्द ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपना कदम रखने जा रहे हैं। अपनी आने वाली नई फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के विशेष अवसर पर अभिनेता ने अपने फिल्मी सफर और अतीत की कुछ बेहद खास यादों को साझा किया। इस दौरान उन्होंने साल 1993 में आई अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘दामिनी’ में निभाए गए वकील के यादगार किरदार पर खुलकर बात की। अभिनेता ने स्वीकार किया कि जब उन्होंने इस फिल्म में काम करने का फैसला लिया था, तब उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उनका यह छोटा सा रोल दर्शकों के दिलों में इस कदर बस जाएगा और इतिहास रच देगा।

    अपनी आगामी कोर्टरूम ड्रामा फिल्म में भी सनी देओल एक बार फिर से वकील की भूमिका में नजर आने वाले हैं, जिसका सीधा जुड़ाव दर्शकों को उनकी पुरानी फिल्म से महसूस हो रहा है। ट्रेलर लॉन्च के कार्यक्रम के दौरान जब उनसे इस समानता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि वह उस समय हर हाल में उस फिल्म का हिस्सा बनना चाहते थे। उन्होंने बताया कि मूल कहानी में शुरुआत में उनका कोई बड़ा रोल नहीं था, लेकिन निर्देशक और उनके निर्माता दोस्तों के साथ बातचीत के बाद उन्हें इस छोटे से कैरेक्टर के बारे में बताया गया। उन्होंने इसके लिए तुरंत हामी भर दी क्योंकि वे इस खूबसूरत कहानी से जुड़ना चाहते थे।

    अभिनेता ने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कहा कि किसी भी कलाकार के लिए उसकी फिल्मों की यात्रा बेहद खूबसूरत होती है। उन्होंने सिनेमा प्रेमियों से फिल्मों का भरपूर आनंद लेने का आग्रह करते हुए कहा कि कोई भी यह पहले से तय नहीं कर सकता कि कौन सा किरदार दर्शकों को कितना प्रभावित करेगा। ‘दामिनी’ के उस छोटे से रोल ने देश के कोने-कोने में लोगों को अपना मुरीद बना लिया था। अभिनेता ने यह भी साझा किया कि उस फिल्म के बाद उन्हें काफी लंबे समय तक उस तरह का दमदार और प्रभावशाली कोर्टरूम ड्रामा किरदार निभाने का दोबारा मौका नहीं मिल सका था, जो अब जाकर उन्हें मिला है।

    इसी भव्य आयोजन के दौरान सनी देओल अपने परिवार और पिता को याद कर काफी भावुक भी नजर आए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में जब उनसे उनके पिता और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के बारे में सवाल किया गया कि उन्हें उनके नाम से कितना गर्व महसूस होता है, तो सनी देओल खुद पर काबू नहीं रख पाए। उन्होंने बेहद संजीदगी और भरे गले से कहा कि वे हमेशा केवल अपने पापा के बेटे रहेंगे और उनके लिए इससे बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं है। यह कहते हुए उनकी आंखें नम हो गईं, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को प्रभावित किया।

    डिजिटल माध्यम पर रिलीज होने जा रही यह नई फिल्म एक बार फिर से सनी देओल को उसी पुरानी दहाड़ और कानूनी दांव-पेंच वाले अवतार में वापस लेकर आ रही है, जिसका दर्शक लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों की तरफ से काफी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं और इसमें उनके साथ कई अन्य दिग्गज कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इस नए प्रोजेक्ट से अभिनेता को काफी उम्मीदें हैं क्योंकि यह उनके करियर की नई पारी की शुरुआत माना जा रहा है।

  • ‘गदर’ के पहले ही दिन घबरा गई थीं अमीषा पटेल, अमरीश पुरी के साथ पहला सीन बना यादगार; दिग्गज अभिनेता की सादगी ने जीता दिल

    ‘गदर’ के पहले ही दिन घबरा गई थीं अमीषा पटेल, अमरीश पुरी के साथ पहला सीन बना यादगार; दिग्गज अभिनेता की सादगी ने जीता दिल


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की चर्चित फिल्म ‘गदर’ को 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अभिनेत्री अमीषा पटेल ने फिल्म से जुड़ी कई यादगार बातें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि अपने करियर के शुरुआती दौर में जब उन्हें दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी के साथ काम करने का अवसर मिला, तब वह बेहद घबराई हुई थीं। हालांकि शूटिंग के दौरान अमरीश पुरी के व्यवहार और सहयोगी स्वभाव ने उनकी सारी झिझक दूर कर दी थी।

    अमीषा पटेल ने कहा कि दर्शकों के बीच अमरीश पुरी की पहचान एक सशक्त और प्रभावशाली अभिनेता के रूप में थी। फिल्मों में उनके निभाए गए नकारात्मक किरदारों ने उन्हें एक अलग पहचान दी थी, लेकिन वास्तविक जीवन में उनका व्यक्तित्व बिल्कुल अलग था। वह बेहद सरल, सहज और मजाकिया स्वभाव के इंसान थे। उनके साथ काम करने का अनुभव आज भी उनकी सबसे खास यादों में शामिल है।

    अभिनेत्री ने बताया कि ‘गदर’ उनके करियर की शुरुआती फिल्मों में से एक थी। उस समय वह इंडस्ट्री में नई थीं और बड़े कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव भी सीमित था। ऐसे में फिल्म के पहले दिन ही उनका महत्वपूर्ण दृश्य अमरीश पुरी के साथ रखा गया था। यह एक भावनात्मक दृश्य था, जिसे फिल्म की कहानी में अहम स्थान प्राप्त था। इतने बड़े कलाकार के साथ पहला ही सीन होने के कारण वह अंदर से काफी घबराई हुई थीं।

    उन्होंने कहा कि कैमरे के सामने आने से पहले उनके मन में कई तरह के सवाल और आशंकाएं थीं। उन्हें डर था कि कहीं वह दृश्य ठीक तरह से न कर पाएं या किसी तरह की गलती न हो जाए। लेकिन जैसे ही शूटिंग शुरू हुई, अमरीश पुरी ने अपने व्यवहार से माहौल को सहज बना दिया। उन्होंने कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वह एक नई कलाकार हैं और उनके सामने इंडस्ट्री के सबसे अनुभवी अभिनेताओं में से एक मौजूद हैं।

    अमीषा ने बताया कि अमरीश पुरी सेट पर हमेशा सकारात्मक ऊर्जा के साथ मौजूद रहते थे। वह कलाकारों और तकनीकी टीम के साथ घुलमिलकर रहते थे तथा माहौल को हल्का बनाए रखते थे। उनकी यही विशेषता उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती थी। एक बड़े अभिनेता होने के बावजूद उनके व्यवहार में किसी प्रकार का अहंकार नहीं था। यही कारण था कि उनके साथ काम करना किसी सीखने की प्रक्रिया से कम नहीं था।

    अभिनेत्री ने यह भी याद किया कि उस समय उनकी पहली फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई थी और दर्शक उन्हें पहचानते भी नहीं थे। बावजूद इसके अमरीश पुरी ने उन्हें पूरा सम्मान दिया और हर कदम पर उनका मनोबल बढ़ाया। उनके सहयोग से वह अपने किरदार को बेहतर ढंग से निभाने में सफल रहीं। अमीषा के अनुसार, किसी नए कलाकार के लिए ऐसा समर्थन बेहद महत्वपूर्ण होता है।

    ‘गदर’ भारतीय सिनेमा की सबसे लोकप्रिय फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म में सनी देओल, अमीषा पटेल और अमरीश पुरी की भूमिकाओं को दर्शकों ने खूब सराहा था। विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की थी और इसके संवाद व किरदार आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं।

    फिल्म की सफलता के वर्षों बाद भी कलाकारों द्वारा साझा की गई ऐसी यादें दर्शकों को उस दौर से जोड़ती हैं। अमीषा पटेल के ताजा बयान ने एक बार फिर यह दिखाया है कि बड़े कलाकारों की असली पहचान केवल उनके अभिनय से नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और सहयोगी स्वभाव से भी बनती है। अमरीश पुरी की यही विशेषताएं उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित कलाकारों में शामिल करती हैं।

  • ‘खुद को थप्पड़ मारने का मन करता था’, अक्षय कुमार ने सुनाया संघर्ष और बदलाव का किस्सा, बोले- आखिरी सांस तक कैमरे के सामने रहना चाहता हूं

    ‘खुद को थप्पड़ मारने का मन करता था’, अक्षय कुमार ने सुनाया संघर्ष और बदलाव का किस्सा, बोले- आखिरी सांस तक कैमरे के सामने रहना चाहता हूं

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के सबसे सक्रिय और सफल अभिनेताओं में शामिल अक्षय कुमार ने अपने लंबे फिल्मी सफर, करियर के उतार-चढ़ाव और खुद को लगातार बदलते रहने की प्रक्रिया पर खुलकर बात की है। करीब साढ़े तीन दशक से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय अभिनेता ने स्वीकार किया कि एक समय ऐसा भी था जब उन्हें अपनी ही फिल्मों को देखकर निराशा होती थी और महसूस होता था कि यदि उन्होंने अपने अभिनय और किरदारों में बदलाव नहीं किया तो उनका करियर एक सीमित दायरे में सिमट सकता है।

    अक्षय कुमार ने कहा कि फिल्म उद्योग में 35 वर्षों का सफर तय करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भी वह इसी ऊर्जा और समर्पण के साथ काम करते रहेंगे। अभिनेता ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा यही है कि जीवन के अंतिम क्षणों तक वह कैमरे के सामने सक्रिय रहें और अभिनय करते रहें। उनके अनुसार काम ही उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा है और वही उन्हें आगे बढ़ने की ऊर्जा देता है।

    अपने शुरुआती करियर को याद करते हुए अक्षय ने बताया कि जब उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा था तब उनका मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से सफल होना था। शुरुआती वर्षों में उन्होंने लगातार एक्शन फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे उनकी पहचान एक एक्शन स्टार के रूप में बन गई। हालांकि समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि एक ही तरह की भूमिकाएं निभाने से उनकी रचनात्मक संभावनाएं सीमित हो रही हैं।

    अभिनेता ने कहा कि करियर के लगभग एक दशक बाद जब उन्होंने अपनी पुरानी फिल्मों को दोबारा देखा तो उन्हें लगा कि वह खुद को दोहराने लगे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौर में उन्हें अपनी छवि बदलने की जरूरत महसूस हुई। यही वह समय था जब उन्होंने नए प्रयोग करने का निर्णय लिया और पारंपरिक एक्शन फिल्मों से आगे बढ़कर अलग-अलग विधाओं में काम शुरू किया।

    अक्षय कुमार के अनुसार यह बदलाव आसान नहीं था क्योंकि इंडस्ट्री और दर्शकों की नजर में उनकी छवि एक्शन हीरो की बन चुकी थी। बावजूद इसके उन्होंने जोखिम उठाया और कॉमेडी, रोमांस, सामाजिक संदेश देने वाली फिल्मों तथा विभिन्न प्रकार के किरदारों को अपनाया। उन्होंने माना कि यही निर्णय उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ और इससे उन्हें एक बहुमुखी अभिनेता के रूप में पहचान मिली।

    फिल्मी जानकारों का भी मानना है कि अक्षय कुमार ने समय-समय पर अपने अभिनय और फिल्मों के चयन में बदलाव कर खुद को प्रासंगिक बनाए रखा है। एक्शन फिल्मों से शुरुआत करने वाले अभिनेता ने बाद में कॉमेडी, पारिवारिक, सामाजिक और प्रेरणादायक विषयों पर आधारित फिल्मों में भी सफलता हासिल की। यही कारण है कि वह लंबे समय तक दर्शकों के बीच लोकप्रिय बने रहे।

    वर्तमान में भी अक्षय कुमार कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। उनकी आने वाली फिल्मों को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। अभिनेता का कहना है कि आज भी वह हर नए किरदार को सीखने और बेहतर बनने के अवसर के रूप में देखते हैं। उनके अनुसार कलाकार के लिए सबसे जरूरी चीज लगातार सीखते रहना और खुद को समय के अनुसार विकसित करना है।

    अक्षय कुमार की यह सोच उनके लंबे करियर की सफलता का महत्वपूर्ण कारण मानी जाती है। उन्होंने यह साबित किया है कि फिल्म उद्योग में केवल लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि निरंतर बदलाव और मेहनत भी लंबे समय तक टिके रहने के लिए जरूरी है। यही वजह है कि तीन दशक से अधिक समय बाद भी वह हिंदी सिनेमा के सबसे व्यस्त और चर्चित अभिनेताओं में शामिल हैं।

  • अक्षय कुमार के प्यार में ट्विंकल खन्ना का खुलासा आमिर खान का रिएक्शन चर्चा में

    अक्षय कुमार के प्यार में ट्विंकल खन्ना का खुलासा आमिर खान का रिएक्शन चर्चा में


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की पुरानी शूटिंग कहानियां एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। इस बार चर्चा का केंद्र बनी हैं ट्विंकल खन्ना औरआमिर खान की फिल्म मेला से जुड़ी एक मजेदार घटना। यह किस्सा उस समय का है जब दोनों कलाकार एक साथ फिल्म मेला की शूटिंग कर रहे थे और सेट पर माहौल हल्का फुल्का और हंसी मजाक से भरा रहता था।

    बताया जाता है कि एक इंटरव्यू और लॉन्च इवेंट के दौरान ट्विंकल खन्ना ने खुद इस पुराने अनुभव का जिक्र किया था। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान एक सीन के बीच जब आमिर खान ने उनसे काम को लेकर सवाल किया तो ट्विंकल ने मजाक में कह दिया कि वह उस समय अपने निजी जीवन के बारे में सोच रही थीं और उनका ध्यान काम पर नहीं था। इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वह उस समय अक्षय कुमार के बारे में सोच रही थीं।

    ट्विंकल की इस बात पर सेट का माहौल थोड़ा बदल गया और आमिर खान का रिएक्शन भी चर्चा का विषय बन गया। ट्विंकल ने हंसते हुए बताया था कि आमिर इतने रिएक्टिव हो गए थे कि वह मजाक में उन्हें थप्पड़ मारने तक की बात पर पहुंच गए थे। हालांकि यह सब पूरी तरह मजाकिया अंदाज में कहा गया था और शूटिंग सेट के हल्के माहौल को दिखाता है।

    इसी बातचीत में आमिर खान ने भी ट्विंकल के साथ काम करने के अनुभव को साझा किया था। उन्होंने कहा था कि ट्विंकल का सेंस ऑफ ह्यूमर काफी अलग और तेज है और वह अक्सर सेट पर लोगों को अपनी बातों से हंसा देती हैं। आमिर ने यह भी मजाक में कहा था कि ट्विंकल कई बार ऐसी बातें कर देती हैं जो सीधे दिल पर लगती हैं लेकिन उनका अंदाज मनोरंजक होता है।

    ट्विंकल खन्ना ने एक और दिलचस्प किस्सा साझा किया था जिसमें उन्होंने बताया कि आमिर खान अपने काम को लेकर कितने गंभीर हैं। उन्होंने बताया कि एक बार एक सीन को लेकर आमिर डायरेक्टर से बात करने गए थे लेकिन जब उनकी बात नहीं सुनी गई तो वह थोड़े भावुक हो गए और अकेले जाकर सेट पर एक कोने में खड़े हो गए थे। ट्विंकल के अनुसार यह पल उनके लिए थोड़ा हैरान करने वाला था क्योंकि आमिर हमेशा अपने काम को लेकर बहुत डेडिकेटेड रहते हैं।

    वहीं करण जौहर की मौजूदगी में भी यह पूरा किस्सा और रोचक हो गया था क्योंकि बातचीत के दौरान हंसी मजाक का माहौल बना रहा और सभी ने इस घटना को एक हल्के फुल्के अंदाज में लिया।

    ट्विंकल खन्ना ने साल 2001 में फिल्मी करियर को अलविदा कह दिया था। कई फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने एक्टिंग छोड़कर राइटिंग की दुनिया में कदम रखा। आज वह एक सफल लेखिका के रूप में जानी जाती हैं और उनकी कई किताबें पाठकों के बीच काफी लोकप्रिय रही हैं।

    यह पूरा किस्सा आज भी फैंस के बीच इसलिए चर्चा में रहता है क्योंकि इसमें बॉलीवुड के बड़े सितारों का एक अनोखा और मजेदार अंदाज देखने को मिलता है जहां प्रोफेशनल सेट पर भी हल्के फुल्के पल यादगार बन जाते हैं।

  • देवदास: एक प्रेम कहानी जिसने दर्द को अमर बना दिया, 16 साल तक लिखने से डरते रहे लेखक

    देवदास: एक प्रेम कहानी जिसने दर्द को अमर बना दिया, 16 साल तक लिखने से डरते रहे लेखक


    नई दिल्ली। भारतीय साहित्य और सिनेमा के इतिहास में कुछ किरदार ऐसे होते हैं, जो समय की सीमाओं को पार कर लोगों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। ऐसा ही एक नाम है ‘देवदास’। एक ऐसा किरदार, जिसके दर्द को दर्शकों ने अपना दर्द समझा, जिसकी अधूरी मोहब्बत ने लाखों दिलों को छुआ और जिसकी त्रासदी ने उसे अमर बना दिया।

    देवदास का जन्म वर्ष 1901 में महान साहित्यकार शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की कल्पना में हुआ था। कहा जाता है कि यह कहानी कहीं न कहीं उनके अपने जीवन के अनुभवों और भावनाओं से प्रेरित थी। लेकिन लेखक को इस किरदार को लेकर एक डर था। उन्हें लगता था कि उनका नायक आदर्शवादी नहीं है। वह प्रेम में असफल होता है, शराब का सहारा लेता है और अंततः दुखद मृत्यु को प्राप्त होता है। शायद इसी वजह से शरत चंद्र ने इस रचना को करीब 16 वर्षों तक प्रकाशित नहीं किया।

    आखिरकार 1917 में जब ‘देवदास’ उपन्यास प्रकाशित हुआ, तो उसने साहित्य जगत में तहलका मचा दिया। लोगों को इस कहानी में अपना दर्द दिखाई देने लगा। देवदास की अधूरी प्रेम कहानी, पारो के प्रति उसका समर्पण और समाज की बंदिशों के आगे उसकी हार ने पाठकों को भावुक कर दिया।

    साहित्य से निकलकर जब देवदास सिनेमा के पर्दे पर पहुंचा, तो उसकी लोकप्रियता कई गुना बढ़ गई। वर्ष 1928 में इस पर पहली मूक फिल्म बनी। इसके बाद 1936 में महान गायक-अभिनेता के.एल. सहगल ने देवदास को पर्दे पर जीवंत कर दिया। लेकिन 1955 में दिलीप कुमार ने जिस गहराई और संवेदनशीलता से इस किरदार को निभाया, उसने देवदास को भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर बना दिया।

    साल 2002 में निर्देशक संजय लीला भंसाली ने इस क्लासिक कहानी को भव्य अंदाज में पेश किया। फिल्म में शाहरुख खान ने देवदास, ऐश्वर्या राय ने पारो और माधुरी दीक्षित ने चंद्रमुखी का किरदार निभाया। फिल्म के भावनात्मक दृश्यों और भव्य प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके बाद 2009 में अनुराग कश्यप ने आधुनिक अंदाज में ‘देव डी’ बनाकर इस कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाया।

    आज तक ‘देवदास’ पर 14 से अधिक फिल्में और रूपांतरण बन चुके हैं। शायद यही उसकी सबसे बड़ी सफलता है कि एक सदी से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह किरदार लोगों के दिलों में जिंदा है। प्रेम, विरह, त्याग और आत्मसंघर्ष का यह प्रतीक भारतीय साहित्य और सिनेमा की सबसे अमर धरोहरों में गिना जाता है।

    देवदास सिर्फ एक पात्र नहीं, बल्कि एक ऐसी भावना है, जो हर उस इंसान को छूती है जिसने कभी प्रेम किया हो, खोया हो या दर्द को करीब से महसूस किया हो।

  • '3 इडियट्स' के सीक्वल पर राजकुमार हिरानी का बड़ा बयान; रैंचो, फरहान और राजू की जिंदगी में 20 साल बाद आए पारिवारिक और मानसिक तनाव पर केंद्रित होगी नई कहानी

    '3 इडियट्स' के सीक्वल पर राजकुमार हिरानी का बड़ा बयान; रैंचो, फरहान और राजू की जिंदगी में 20 साल बाद आए पारिवारिक और मानसिक तनाव पर केंद्रित होगी नई कहानी

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शुमार ‘3 इडियट्स’ के सीक्वल को लेकर दर्शकों का लंबा इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। प्रख्यात फिल्म निर्देशक राजकुमार हिरानी ने इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट की प्रगति और इसकी मूल कहानी को लेकर पहली बार आधिकारिक रूप से स्थिति साफ की है। एक विशेष साक्षात्कार के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी फिल्म का कथानक कॉलेज जीवन या पुरानी यादों के इर्द-गिर्द बिल्कुल भी नहीं बुना जाएगा। इसके बजाय, कहानी को समय के चक्र में आगे बढ़ाते हुए मुख्य किरदारों के वयस्क जीवन, उनके पारिवारिक दायित्वों और समकालीन युग की वास्तविक चुनौतियों के साथ पर्दे पर उतारा जाएगा।

    निर्देशक ने इस बात की पुष्टि की है कि वह वर्तमान में इस महत्वाकांक्षी सीक्वल की पटकथा के लेखन पर बेहद गंभीरता से काम कर रहे हैं। यद्यपि स्क्रिप्ट को अंतिम रूप देने में अभी काफी समय और रचनात्मक प्रयास बाकी हैं, लेकिन इसकी वैचारिक दिशा पूरी तरह तय हो चुकी है। सीक्वल में मूल फिल्म की कहानी से करीब 15 से 20 साल आगे का समय दिखाया जाएगा। दर्शकों के चहेते तीनों मुख्य किरदारों—रैंचो, फरहान और राजू की जिंदगी अब कॉलेज के दिनों से बहुत आगे निकल चुकी है। वे अब न केवल विवाहित हैं, बल्कि बच्चों के माता-पिता भी बन चुके हैं, जिससे कहानी में एक परिपक्व और नया दृष्टिकोण देखने को मिलेगा।

    राजकुमार हिरानी के अनुसार, फिल्म का मुख्य फोकस इस बात पर होगा कि उम्र के इस नए पड़ाव पर आने वाले मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक तनाव का सामना यह तीनों दोस्त किस प्रकार करते हैं। जहां साल 2009 में रिलीज हुई मूल फिल्म ‘3 इडियट्स’ में देश की शिक्षा प्रणाली पर तीखा व्यंग्य करते हुए युवाओं को अपने जुनून का पालन करने का एक मजबूत संदेश दिया गया था, वहीं सीक्वल में भी एक व्यापक सामाजिक मुद्दा उठाया जाएगा। निर्देशक ने हंसते हुए इस बात पर मुहर लगाई है कि इस बार भी फिल्म के माध्यम से समाज को एक बहुत बड़ा और प्रासंगिक संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है, जो आज के दौर के परिवारों के लिए मार्गदर्शक साबित होगा।

    इस नए सफर में दर्शकों को अपने पुराने और पसंदीदा चेहरे एक बार फिर पर्दे पर एक साथ देखने को मिलेंगे। सीक्वल के लिए आमिर खान उर्फ फुंसुक वांगडू (रैंचो), आर माधवन उर्फ फरहान कुरैशी, शर्मन जोशी उर्फ राजू रस्तोगी और करीना कपूर खान उर्फ पिया सहस्रबुद्धे की मुख्य भूमिकाओं में वापसी पूरी तरह पक्की मानी जा रही है। हालांकि, मूल फिल्म के अन्य बेहद लोकप्रिय किरदारों जैसे चतुर रामलिंगम (ओमी वैद्य), वीरू सहस्रबुद्धे उर्फ वायरस (बोमन ईरानी), मोना सिंह और जावेद जाफरी के किरदारों को नए कथानक में किस प्रकार शामिल किया जाएगा, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    उल्लेखनीय है कि अभिजात जोशी और राजकुमार हिरानी द्वारा संयुक्त रूप से लिखित ‘3 इडियट्स’ एक कड़क सैटायरिकल कॉमेडी-ड्रामा थी, जिसने बॉक्स ऑफिस के तत्कालीन तमाम रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे। फिल्म के अंत में रैंचो को लद्दाख में एक सफल वैज्ञानिक और शिक्षक के रूप में, फरहान को एक स्थापित वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर और राजू को एक कॉर्पोरेट अधिकारी के रूप में सेटल होते दिखाया गया था। अब, दो दशकों के बाद इन किरदारों के जीवन में आए बदलावों और उनकी नई सामाजिक-पारिवारिक लड़ाइयों को देखने के लिए सिनेमाप्रेमियों के बीच अभी से भारी उत्साह देखा जा रहा है।