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  • बॉक्स ऑफिस पर जब 'पार्टनर' ने मचाया था कोहराम: 28 करोड़ के बजट में 100 करोड़ कमाकर सलमान और गोविंदा के डूबते करियर को मिला था नया जीवन

    बॉक्स ऑफिस पर जब 'पार्टनर' ने मचाया था कोहराम: 28 करोड़ के बजट में 100 करोड़ कमाकर सलमान और गोविंदा के डूबते करियर को मिला था नया जीवन

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो न सिर्फ बॉक्स ऑफिस के समीकरण बदलती हैं, बल्कि डूबते हुए सितारों के करियर को भी एक नया जीवनदान दे देती हैं। वर्ष 2007 में रिलीज हुई निर्देशक डेविड धवन की फिल्म ‘पार्टनर’ को आज भी एक ऐसी ही कल्ट कॉमेडी फिल्म के रूप में याद किया जाता है। इस फिल्म ने न केवल दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया, बल्कि उस दौर में बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष कर रहे बॉलीवुड के दो दिग्गज अभिनेताओं, सलमान खान और गोविंदा के स्टारडम को फिल्म इंडस्ट्री में दोबारा मजबूती से स्थापित किया।

    यदि उस दौर के परिदृश्य पर नजर डालें तो नब्बे के दशक में सिनेमाई पर्दे पर राज करने वाले गोविंदा का करियर बेहद चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा था। सक्रिय राजनीति में कदम रखने के कारण उनका अभिनय से ध्यान भटक गया था और उनकी लगातार कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई थीं। फिल्म इंडस्ट्री उन्हें लगभग बिसरा चुकी थी। दूसरी तरफ, सलमान खान की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं थी। इस फिल्म के प्रदर्शन से ठीक पहले आई उनकी बड़े बजट की फिल्में जैसे ‘सलाम-ए-इश्क’, ‘जान-ए-मन’, ‘सांवरिया’ और ‘मैरीगोल्ड’ दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में नाकाम रही थीं। ऐसे नाजुक मोड़ पर दोनों ही कलाकारों को एक बड़ी व्यावसायिक सफलता की सख्त दरकार थी।

    निर्देशक डेविड धवन ने इस भांपते हुए महज 28 करोड़ रुपये के सीमित बजट में ‘पार्टनर’ का निर्माण किया। फिल्म ने सिनेमाघरों में आते ही बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तहलका मचाया कि पहले ही सप्ताह में घरेलू बाजार में 30 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया। यह उस समय के भारतीय सिनेमाई इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी डोमेस्टिक ओपनिंग दर्ज कराने वाली फिल्म बनी। दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने कुल 103 करोड़ रुपये से अधिक की शानदार कमाई की। इस ऐतिहासिक सफलता के लिए सलमान खान को जहां 15 करोड़ रुपये की भारी-भरकम फीस दी गई थी, वहीं उनके जोड़ीदार बने गोविंदा को 4 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।

    व्यावसायिक सफलता के बीच इस फिल्म की कहानी को लेकर एक बड़ा विवाद भी खड़ा हुआ था। दरअसल, ‘पार्टनर’ की पूरी पटकथा वर्ष 2005 में आई हॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म ‘हिच’ से प्रेरित थी, जिसमें विल स्मिथ ने एक लव गुरु की भूमिका निभाई थी। चूंकि भारतीय निर्माताओं ने हॉलीवुड फिल्म के आधिकारिक रीमेक राइट्स नहीं खरीदे थे, इसलिए ‘हिच’ की निर्माता कंपनी सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट ने ‘पार्टनर’ के मेकर्स पर 30 मिलियन डॉलर का कानूनी मुकदमा ठोकने की तैयारी कर ली थी। इस बड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवाद को कोर्ट पहुंचने से पहले ही आपसी सहमति से सुलझा लिया गया, जिसके तहत सोनी पिक्चर्स को इस फिल्म के वर्ल्डवाइड एक्सक्लूसिव सैटेलाइट ब्रॉडकास्टिंग राइट्स हमेशा के लिए सौंप दिए गए।

    फिल्म की सफलता में इसके संगीत का भी बहुत बड़ा योगदान था, जिसे संगीतकार जोड़ी साजिद-वाजिद ने तैयार किया था। फिल्म का मुख्य गीत ‘सोनी दी नखरे’ आज भी विवाह समारोहों और पार्टियों की मुख्य पसंद बना हुआ है। बेहद दिलचस्प बात यह है कि यह गाना वर्ष 1989 के मशहूर विदेशी ट्रैक ‘पंप अप द जैम’ से प्रेरित था। गोविंदा नब्बे के दशक में अपने अंतरराष्ट्रीय दौरों और स्टेज शोज के दौरान अक्सर इसी मूल अंग्रेजी गाने पर नृत्य किया करते थे। सालों बाद उन्हें उसी धुन के हिंदी रूपांतरण पर बड़े पर्दे पर थिरकने का मौका मिला, जिसने उनके इस कमबैक को भारतीय दर्शकों के लिए हमेशा-कहा के लिए यादगार बना दिया।

  • 27 साल बाद फिर गूंज सकती है ‘ताल’ की धुन, सुभाष घई ने ‘ताल-2’ को लेकर फैंस से मांगी राय

    27 साल बाद फिर गूंज सकती है ‘ताल’ की धुन, सुभाष घई ने ‘ताल-2’ को लेकर फैंस से मांगी राय


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा की चर्चित म्यूजिकल फिल्मों में शामिल ‘ताल’ एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। फिल्म के निर्माता-निर्देशक Subhash Ghai ने इसके संभावित सीक्वल को लेकर ऐसा संकेत दिया है, जिससे फिल्म प्रेमियों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने प्रशंसकों से सीधा सवाल पूछा कि क्या उन्हें ‘ताल-2’ का निर्माण करना चाहिए। इस सवाल के सामने आते ही फिल्म के सीक्वल को लेकर उत्साह बढ़ गया है।

    सुभाष घई ने अपने पोस्ट में फिल्म ‘ताल’ से जुड़ी एक खास याद साझा की। उन्होंने बताया कि उन्हें इस फिल्म के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली थी। उन्होंने उस अवसर को याद किया जब प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक Roger Ebert ने फिल्म की प्रशंसा की थी। घई ने बताया कि एक विशेष फिल्म समारोह में ‘ताल’ के प्रदर्शन के दौरान फिल्म को संगीत, प्रस्तुति और अभिनय के लिए काफी सराहा गया था।

    निर्देशक के अनुसार, फिल्म को उस दौर में भारतीय सिनेमा की एक अलग पहचान के रूप में देखा गया था। इसकी कहानी, भावनात्मक प्रस्तुति और संगीत ने देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों का भी ध्यान आकर्षित किया था। यही वजह है कि वर्षों बाद भी यह फिल्म दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों में गिनी जाती है।

    अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सुभाष घई ने यह भी संकेत दिया कि यदि ‘ताल-2’ बनती है तो इसमें नई पीढ़ी के कलाकारों और एक युवा निर्देशक को अवसर दिया जा सकता है। उन्होंने सीधे तौर पर फैंस से राय मांगी कि क्या दर्शक इस क्लासिक फिल्म की नई कहानी को बड़े पर्दे पर देखना चाहते हैं। इस सवाल के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म प्रेमियों की प्रतिक्रियाएं तेजी से सामने आने लगी हैं।

    साल 1999 में रिलीज हुई Taal उस दौर की सबसे सफल और चर्चित फिल्मों में शामिल रही थी। फिल्म में Aishwarya Rai, Anil Kapoor और Akshaye Khanna ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म की कहानी के साथ-साथ इसके गीत और संगीत भी जबरदस्त लोकप्रिय हुए थे। आज भी इसके कई गाने श्रोताओं की पसंदीदा सूची में शामिल हैं।

    फिल्म की सफलता का एक बड़ा कारण इसका संगीत भी माना जाता है। शानदार गीतों, आकर्षक लोकेशनों और प्रभावशाली अभिनय ने इसे उस समय की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल कर दिया था। बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल करने के साथ-साथ फिल्म ने कई पुरस्कार भी अपने नाम किए थे।

    फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में क्लासिक फिल्मों के सीक्वल और रीबूट को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला है। ऐसे में यदि ‘ताल-2’ का निर्माण होता है तो यह नई पीढ़ी के दर्शकों को पुराने दौर की लोकप्रिय फिल्म से जोड़ने का अवसर भी बन सकता है। हालांकि, फिलहाल सीक्वल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सुभाष घई के सवाल ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि इस दिशा में संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

  • बंदर’ फिल्म के किरदार से जुड़ा बॉबी देओल का निजी अनुभव, बहनों की शादी को लेकर मन में रहता था असुरक्षा का भाव

    बंदर’ फिल्म के किरदार से जुड़ा बॉबी देओल का निजी अनुभव, बहनों की शादी को लेकर मन में रहता था असुरक्षा का भाव

    नई दिल्ली । अभिनेता बॉबी देओल इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘बंदर’ को लेकर चर्चा में हैं, जो अपने विषय और प्रस्तुति के कारण लगातार सुर्खियां बटोर रही है। फिल्म के ट्रेलर रिलीज के बाद दर्शकों में इसे लेकर उत्साह और अधिक बढ़ गया है। इसी बीच बॉबी देओल ने अपने किरदार और निजी जीवन से जुड़ा एक ऐसा भावुक पहलू साझा किया है, जिसने उनके अभिनय को और भी गहराई प्रदान की है। उन्होंने बताया कि फिल्म में निभाया गया उनका रोल केवल एक पेशेवर जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह उनके बचपन की कई भावनाओं और अनुभवों से भी जुड़ा हुआ है, जिन्हें उन्होंने लंबे समय तक अपने भीतर महसूस किया है।

    बॉबी देओल ने कहा कि वह ऐसे परिवार और सामाजिक वातावरण में बड़े हुए हैं, जहां बहनों की सुरक्षा और उनके भविष्य को लेकर मन में एक स्थायी चिंता बनी रहती थी। उन्होंने स्वीकार किया कि पुरुष-प्रधान सोच वाले समाज में पले-बढ़ने के कारण उनके भीतर हमेशा यह डर रहा कि उनकी बहनों की शादी के बाद उनका जीवन कैसा होगा और क्या उन्हें सही सम्मान और सुरक्षा मिल पाएगी। इसी कारण उनके मन में एक जिम्मेदारी और भावनात्मक दबाव हमेशा बना रहता था, जो उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन गया था।

    अभिनेता ने यह भी साझा किया कि उनकी कई बहनें हैं और परिवार के इस माहौल ने उनके सोचने के तरीके को गहराई से प्रभावित किया। बहनों की शादी को लेकर उनके मन में अक्सर असुरक्षा और चिंता के भाव आते थे, जिन्हें वह उस समय पूरी तरह समझ भी नहीं पाते थे, लेकिन वे लगातार उनके साथ बने रहते थे। इसी भावनात्मक पृष्ठभूमि ने फिल्म ‘बंदर’ में उनके किरदार को निभाते समय एक अलग ही वास्तविकता प्रदान की, क्योंकि वह उस डर और जिम्मेदारी को अभिनय से अलग नहीं कर पाए।

    फिल्म ‘बंदर’ में बॉबी देओल एक ढलते हुए पॉप स्टार समीर मेहरा की भूमिका निभा रहे हैं, जिसकी जिंदगी तब पूरी तरह बदल जाती है जब उस पर गंभीर आरोप लगते हैं। इसके बाद वह मीडिया ट्रायल और कानूनी लड़ाई के जटिल दौर में फंस जाता है, जहां उसे अपनी प्रतिष्ठा और पहचान दोनों को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। कहानी उसके मानसिक दबाव, सामाजिक छवि और सिस्टम के साथ टकराव को गहराई से दर्शाती है।

    इस फिल्म का निर्देशन अनुराग कश्यप ने किया है, जबकि इसकी कहानी अभिषेक बनर्जी और सुदीप शर्मा ने मिलकर तैयार की है। फिल्म निर्माण से जुड़े अन्य प्रमुख नामों में निकिल द्विवेदी और Zee Studios का समर्थन शामिल है, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट को बड़े स्तर पर आकार दिया है। फिल्म को वर्ष 2026 की बहुचर्चित परियोजनाओं में गिना जा रहा है और इसके ट्रेलर ने पहले ही दर्शकों के बीच मजबूत चर्चा पैदा कर दी है।

    ‘बंदर’ की रिलीज 5 जून 2026 को निर्धारित है और इसके साथ ही बॉबी देओल एक बार फिर अपने अलग और चुनौतीपूर्ण किरदार के जरिए दर्शकों के सामने नजर आएंगे। फिल्म को लेकर उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं और दर्शक इसके रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

  • तेलुगु और तमिल सिनेमा में बढ़ती दिलचस्पी, लेकिन मलयालम फिल्मों से दूरी बनाएंगी जाह्नवी कपूर

    तेलुगु और तमिल सिनेमा में बढ़ती दिलचस्पी, लेकिन मलयालम फिल्मों से दूरी बनाएंगी जाह्नवी कपूर

    नई दिल्ली । अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने अपने फिल्मी करियर और दक्षिण भारतीय सिनेमा को लेकर एक अहम बयान दिया है, जिसमें उन्होंने मलयालम फिल्मों में काम करने को लेकर अपनी असहजता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि तेलुगु और तमिल फिल्मों में काम करने का अनुभव उनके लिए सकारात्मक रहा है, लेकिन मलयालम भाषा उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हुई है। इस वजह से उन्होंने फिलहाल मलयालम सिनेमा से दूरी बनाए रखने की बात कही है।

    जाह्नवी कपूर ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा कि वह लगातार अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में काम कर रही हैं और खुद को बहुभाषी अभिनेत्री के रूप में विकसित करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने बताया कि तेलुगु फिल्मों में काम करने का अनुभव उन्हें काफी पसंद आया और वह तमिल सिनेमा में भी आगे काम करने की इच्छुक हैं। हालांकि मलयालम भाषा की ध्वनियों और उच्चारण को समझना उनके लिए काफी कठिन साबित हुआ, जिसके कारण उन्हें इसमें सहजता महसूस नहीं हुई।

    अभिनेत्री ने यह भी कहा कि हर भाषा की अपनी एक खूबसूरती होती है और मलयालम भाषा भी बेहद समृद्ध और सुंदर है, लेकिन उसके फोनेटिक्स को पकड़ना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। इसी वजह से उन्होंने यह माना कि फिलहाल वह मलयालम फिल्मों में दोबारा काम करने के लिए तैयार नहीं हैं। उनके अनुसार, अभिनय केवल भावनाओं का नहीं बल्कि भाषा के सही उच्चारण और अभिव्यक्ति का भी संतुलन होता है, जो मलयालम में उनके लिए कठिन रहा।

    दूसरी ओर, जाह्नवी कपूर ने तेलुगु सिनेमा में अपनी बढ़ती रुचि को लेकर उत्साह भी जताया है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारतीय फिल्मों का दायरा बहुत व्यापक है और वहां की कहानियां, संस्कृति और प्रस्तुति शैली उन्हें आकर्षित करती है। तमिल फिल्मों में भी काम करने की उनकी इच्छा बनी हुई है और वह भविष्य में इन इंडस्ट्रीज में अधिक सक्रिय भूमिका निभाना चाहती हैं।

    जाह्नवी कपूर ने अपने करियर की शुरुआत हिंदी फिल्मों से की थी और धीरे-धीरे उन्होंने विभिन्न प्रकार की भूमिकाओं में खुद को स्थापित किया है। अब वह दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। उनकी आने वाली फिल्म एक बड़े स्तर की प्रोजेक्ट है, जिसमें वह एक अहम भूमिका निभा रही हैं और यह फिल्म रिलीज से पहले ही चर्चा में बनी हुई है।

    फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि आज के समय में कलाकारों का विभिन्न भाषाओं की फिल्मों में काम करना एक सामान्य ट्रेंड बन चुका है। ऐसे में भाषा की चुनौती के बावजूद कई कलाकार नए क्षेत्रों में खुद को साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। जाह्नवी कपूर का यह बयान इसी बदलते फिल्मी परिदृश्य को दर्शाता है, जहां कलाकार अपनी क्षमता और सुविधा के अनुसार प्रोजेक्ट चुन रहे हैं।

    फिलहाल जाह्नवी कपूर अपनी आगामी फिल्म की रिलीज को लेकर व्यस्त हैं और दर्शकों को उनसे इस प्रोजेक्ट में एक नए अंदाज की उम्मीद है।

  • डॉन 3’ विवाद में नया ट्विस्ट: सलमान खान की मध्यस्थता की खबर निकली अफवाह, रणवीर-फरहान विवाद पर बड़ा खुलासा

    डॉन 3’ विवाद में नया ट्विस्ट: सलमान खान की मध्यस्थता की खबर निकली अफवाह, रणवीर-फरहान विवाद पर बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली । बहुचर्चित फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह फिल्म से जुड़े कलाकारों के बीच मतभेद नहीं बल्कि सलमान खान की कथित मध्यस्थता को लेकर फैली अफवाहें हैं। पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा तेज थी कि सुपरस्टार सलमान खान ने रणवीर सिंह और निर्देशक फरहान अख्तर के बीच चल रहे कथित विवाद को सुलझाने के लिए हस्तक्षेप किया है, लेकिन अब सामने आई रिपोर्ट्स ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

    सूत्रों के अनुसार सलमान खान का इस पूरे मामले से कोई संबंध नहीं है और न ही उन्होंने किसी भी स्तर पर रणवीर सिंह या फरहान अख्तर के बीच सुलह कराने की कोई कोशिश की है। इस स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि यह खबर केवल अटकलों पर आधारित थी और इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। इसके साथ ही ‘डॉन 3’ को लेकर चल रही चर्चाओं में एक नया मोड़ आ गया है।

    दरअसल ‘डॉन 3’ की घोषणा वर्ष 2023 में की गई थी, जब रणवीर सिंह को इस प्रतिष्ठित फ्रेंचाइजी का नया चेहरा घोषित किया गया था। घोषणा के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह देखा गया था, लेकिन इसके बाद से प्रोजेक्ट लगातार देरी का सामना कर रहा है। इस देरी के पीछे मुख्य कारणों में शेड्यूलिंग और अन्य फिल्मों की प्रतिबद्धताएं बताई जा रही हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, निर्देशक फरहान अख्तर और निर्माता रितेश सिधवानी की ओर से प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन रणवीर सिंह की पहले से तय फिल्मों की व्यस्तता के कारण शूटिंग शेड्यूल प्रभावित होता रहा। बताया जा रहा है कि उस समय रणवीर सिंह ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ और अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स में व्यस्त थे, जिसके चलते ‘डॉन 3’ की शूटिंग शुरू नहीं हो सकी।

    इसके अलावा यह भी सामने आया है कि रणवीर सिंह ने बाद में अन्य फिल्मों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया, जिसमें ‘धुरंधर’ जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसी वजह से ‘डॉन 3’ की शुरुआत और भी पीछे खिसक गई। सूत्रों का कहना है कि दिसंबर 2025 में रणवीर सिंह ने निर्माताओं को अपने फैसले से अवगत कराया, जिससे फिल्म की तैयारियों पर असर पड़ा।

    इस घटनाक्रम के बाद प्रोडक्शन हाउस को कथित तौर पर आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है और कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि करोड़ों रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है, जो लोकेशन, प्री-प्रोडक्शन और तकनीकी तैयारियों पर खर्च किया गया था। इस मामले को लेकर इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों तक भी चर्चा पहुंची, हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई है।

    कुल मिलाकर ‘डॉन 3’ फिलहाल अनिश्चितताओं के दौर में है, जहां एक ओर अफवाहों का बाजार गर्म है तो दूसरी ओर फिल्म की वास्तविक स्थिति को लेकर स्पष्टता की कमी बनी हुई है। सलमान खान की कथित एंट्री को लेकर चल रही चर्चाएं अब थम गई हैं, लेकिन फिल्म के भविष्य और इसकी शूटिंग को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं।

  • संघर्ष से सफलता तक: ‘सारांश’ के 42 साल पर अनुपम खेर ने सुनाई सपनों, मेहनत और पहचान बनने की कहानी

    संघर्ष से सफलता तक: ‘सारांश’ के 42 साल पर अनुपम खेर ने सुनाई सपनों, मेहनत और पहचान बनने की कहानी

    नई दिल्ली।हिंदी सिनेमा में कुछ कहानियां केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वे संघर्ष, मेहनत और सपनों की जीवंत मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी दिग्गज अभिनेता Anupam Kher की है, जिन्होंने सीमित साधनों और बड़े सपनों के साथ अपने सफर की शुरुआत की और आज भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित कलाकारों में अपनी जगह बनाई। उनकी पहली फिल्म Saaransh के 42 साल पूरे होने के मौके पर अभिनेता ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए एक भावुक संदेश साझा किया, जिसने एक बार फिर उनके संघर्षपूर्ण सफर को चर्चा में ला दिया।

    वर्ष 1984 में रिलीज हुई इस फिल्म ने अनुपम खेर को फिल्म इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाई थी। खास बात यह थी कि अपने करियर की शुरुआत में ही उन्होंने उम्र से कहीं अधिक बड़े किरदार को निभाकर अभिनय की ऐसी छाप छोड़ी, जिसे आज भी याद किया जाता है। यह फिल्म उनके करियर के लिए केवल शुरुआत नहीं थी, बल्कि एक ऐसे सफर की नींव बनी जिसने आगे चलकर उन्हें सैकड़ों फिल्मों तक पहुंचाया।

    अपने अनुभव साझा करते हुए अभिनेता ने बताया कि जब वह सपनों की नगरी मुंबई पहुंचे थे, तब उनके पास केवल 37 रुपए थे। न कोई बड़ा सहारा था और न ही इंडस्ट्री में मजबूत पहचान। लेकिन उनके पास एक चीज थी—अपने सपनों पर अटूट विश्वास। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि व्यक्ति मेहनत और धैर्य बनाए रखे तो सफलता की राह बनाई जा सकती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि बीते चार दशकों में दर्शकों, निर्देशकों, निर्माताओं और साथी कलाकारों से उन्हें जो प्यार मिला, वह उनकी कल्पना से कहीं ज्यादा था। अपने सफर को याद करते हुए उन्होंने गर्व के साथ कहा कि अब तक वे 551 फिल्मों का हिस्सा बन चुके हैं। यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, समर्पण और अभिनय के प्रति उनके जुनून की कहानी भी बयां करता है।

    अभिनेता ने अपने सफर में साथ देने वाले लोगों का भी आभार व्यक्त किया और उन फिल्मकारों को विशेष धन्यवाद दिया, जिनका उनके करियर में महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने अपने शुरुआती दौर की कई यादों को भी साझा किया और बताया कि फिल्म रिलीज के समय परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन समय ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था।

    आज भी जब भारतीय सिनेमा में दमदार अभिनय और यादगार किरदारों की बात होती है तो उनकी पहली फिल्म का नाम जरूर सामने आता है। उनका सफर उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। यह कहानी बताती है कि सफलता की शुरुआत अक्सर छोटी होती है, लेकिन हौसले बड़े होने चाहिए।

  • बेटे वरुण संग आखिरी फिल्म के बाद रिटायरमेंट की तैयारी ने फैंस को किया भावुक

    बेटे वरुण संग आखिरी फिल्म के बाद रिटायरमेंट की तैयारी ने फैंस को किया भावुक

    नई दिल्ली ।   बॉलीवुड को सालों तक अपनी कॉमेडी फिल्मों से हंसाने वाले मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. वे अब फिल्में बनाना छोड़ रहे हैं, यानी वे रिटायर होने जा रहे हैं. उनकी आखिरी फिल्म बेटे वरुण धवन के साथ ‘है जवानी तो इश्क होना है’ होगी. अपनी रिटायरमेंट का ऐलान उन्होंने हाल ही में पीवीआर के एक खास इवेंट में किया. इस खबर को सुनकर इंडस्ट्री के कई लोग और उनके फैंस को झटका लगा है, क्योंकि अब डेविड धवन फिल्मों का डायरेक्शन करते हुए नजर नहीं आएंगे. उन्होंने अपने अब तक के करियर में करीब 45 फिल्मों का निर्देशन किया है. डायरेक्टर ने अपने करियर की शुरुआत साल 1989 में आई फिल्म ‘ताकतवर’ से की थी. डेविड धवन ने बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान का भी कमबैक कराया था.
    डेविड धवन क्यों हुए इमोशनल
    फेमस डायरेक्टर डेविड धवन इन दिनों अपने बेटे की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. इस फिल्म के ट्रेलर लॉन्च में डेविड धवन भी नजर आए थे. इस दौरान मीडिया से बात करते हुए वे इमोशनल हो गए. उन्होंने ट्रेलर इवेंट में बेटे वरुण धवन की जमकर तारीफ की. डायरेक्टर ने कहा, ‘जब मैं साल 2022 में बीमार पड़ा था, तो वह मेरे साथ अस्पताल में सोया करता था.’ पिता को इमोशनल देख एक्टर वरुण धवन ने उन्हें शांत किया. वरुण धवन की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ सिनेमाघरों में 5 जून को रिलीज होगी, जो डेविड धवन की आखिरी फिल्म होगी.

    डेविड धवन ने फिल्म मेकिंग से लिया संन्यास?

    बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने 23 मई 2026 को डायरेक्शन की दुनिया को अलविदा कह दिया है. उन्होंने इसका ऐलान एक इवेंट के दौरान किया. इस पार्टी में बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान, करण जौहर, पूजा हेगड़े, वरुण धवन और चंकी पांडे जैसे सितारे शामिल हुए थे. दरअसल, डायरेक्टर की रिटायरमेंट की खबर की पुष्टि करण जौहर ने की है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी शेयर की, जिसमें उन्होंने लिखा, ‘कल जब मैं डेविड जी के सेलिब्रेशन में गया, तो उन्होंने मुझे बताया कि यह ‘है जवानी तो इश्क होना है’ उनकी आखिरी फिल्म होने वाली है.’
    डेविड धवन ने बॉलीवुड को दी कई हिट कॉमेडी
    फेमस डायरेक्टर डेविड धवन को बॉलीवुड के सबसे बड़े कॉमेडी डायरेक्टर्स में गिना जाता है. उन्होंने 90 और 2000 के दशक में एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दी हैं, जिन्होंने दर्शकों को खूब हंसाया है. उन्होंने इंडस्ट्री को राजा बाबू, जुड़वा, पार्टनर, मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी, हीरो नंबर 1, हसीना मान जाएगी, मुझसे शादी करोगी, कुली नंबर 1 और मैंने प्यार किया जैसी कई फिल्में दी हैं।
    कई बड़े कलाकारों संग किया काम
    डेविड धवन को बॉलीवुड इंडस्ट्री में कॉमेडी फिल्मों के सबसे सफल निर्देशकों में माना जाता है. उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में कई बड़े सितारों संग काम किया है. इसमें अमिताभ बच्चन, गोविंदा, सलमान खान, अक्षय कुमार, तापसी पन्नू, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर जैसे कई सितारे शामिल हैं. डेविड धवन ने करीब 6 साल के ब्रेक के बाद ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के साथ डायरेक्शन में वापसी की है. इसमें उनके बेटे वरुण धवन के अलावा मृणाल ठाकुर, पूजा हेगड़े, मौनी रॉय, राकेश बेदी, राजेश कुमार और मनीष पॉल जैसे सितारे नजर आएंगे. सिनेमाघरों में यह फिल्म 5 जून को रिलीज होगी.
  • मीना कुमारी के आखिरी दिनों का सबसे भावुक किस्सा, मौत के बिस्तर पर मोहम्मद रफी से सुना था अपना पसंदीदा गीत

    मीना कुमारी के आखिरी दिनों का सबसे भावुक किस्सा, मौत के बिस्तर पर मोहम्मद रफी से सुना था अपना पसंदीदा गीत


    नई दिल्ली ।  हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय और खूबसूरती से छाप छोड़ने वाली मीना कुमारी का आखिरी वक्त बुरा गुजरा। एक्ट्रेस लीवर सिरोसिस से पीड़ित थीं। और लंबे इलाज के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। लेकिन जब वो बीमार, बिस्तर पर पड़ी थीं तो अक्सर एक गाना सुना करती थीं। उन्हें हमेशा से लगता था कि ये गाना उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा हुआ है।
    वो एक ऐसा गीत था जो तकलीफ भरे दिनों में मीना कुमारी को राहत की सांस देता था। मीना जब-जब इस गीत को गुनगुनाया करतीं तो अपने आधे ग़मों को भूल जाया करती थीं। मीना कुमारी का इस गाने से इतना गहरा जुड़ाव था कि जब मोहम्मद रफी उनसे मिलने आए तो एक्ट्रेस ने उनसे ये गाना गाने की रिक्वेस्ट की थी।
    बुरे दिनों में मीना कुमारी का साथी था ये गाना
    1961 में मीना कुमारी की एक रिलीज हुई थी जिसका नाम था प्यार का सागर। इस फिल्म में मीना के साथ एक्टर राजेंद्र कुमार लीड रोल में थे। इस फिल्म में वैसे कई खूबसूरत गाने थे लेकिन ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले’। इस गाने को मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने गाया था। ये गाना मीना कुमारी के दर्द की दवा बन गया था। अपना अकेलापन, दर्द भूलने के लिए अक्सर एक्ट्रेस इसी गाने को गुनगुनाया करती थीं।
    ये वो समय था जब मीना बहुत बीमार पड़ चुकी थीं, मौत से लड़ रही थीं। उन्हें फिल्मों के सेट पर नहीं बल्कि घर के एक कमरे में पड़े बिस्तर पर बीमार हालत में देखा जाता था। उनके आखिरी समय में फिल्मी जगत के कई कलाकार उनसे मिलने पहुंचा करते थे। एक दिन सिंगर मोहम्मद रफी भी पहुंचे। और मौत के बिस्तर पर मीना ने मोहम्मद रफी से वो गाना गाने की रिक्वेस्ट कर दी जो उनके दिल के बहुत करीब था।

    आत्मा में उतर चुका था मोहम्मद रफी का ये गीत
    बीमार, मौत से लड़ रही मीना कुमारी की इस इच्छा को मोहम्मद रफी ने टाला नहीं। वो उनके सिरहाने बैठे थे। उन्होंने उसी दर्द, और फीलिंग्स के साथ मीना के सामने गाया ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले’। ये गाना मीना की आत्मा में उतर चुका था।
    ऐसे बना था ये गाना

    इस गाने को बनाने की भी एक अलग कहानी है। फिल्म प्यार का सागर में कुल 8 गाने थे। इन सभी गानों को रवि और प्रेम धवन ने कंपोज़ किया था। असद भोपाली ने गीत लिखे थे। इन गानों को आशा भोसले। शमशाद बेगम, मोहम्मद रफी और मुकेश ने गाए थे। फिल्म का गाना ‘ ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले’ गाने को अगले दिन फिल्माया जाना था,
    लेकिन उस वक़्त तक रिकॉर्डिंग नहीं हुई थी।
    प्रेम धवन ने गाने को लिखा था और सिंगर मोहम्मद रफी को गाना रिकॉर्डिंग के लिए उसी दिन बुला लिया गया। लेकिन फीमेल सिंगर के लिए आशा भोसले और लता मंगेशकर से संपर्क नहीं हो पा रहा था। ऐसे में कंपोजर रवि ने सुमन कल्यानपुर से बात की गई। उन्होंने आने का वादा किया लेकिन वो स्टूडियो पहुंची नहीं। बहुत इंतजार के बाद अंत में एक बार फिर आशा भोसले से संपर्क किया गया और उनसे इस गाने को लेकर बात पक्की हो गई। आशा भोसले और मोहम्मद रफी ने मिलकर इस गाने को गया। अगले दिन गाने की शूटिंग को गई। मीना कुमारी और राजेंद्र इस गाने में नजर आए थे।
  • जलसा के बाहर हंगामा: अमिताभ बच्चन के दीदार के इंतजार में फैन बेहोश, ‘दर्शन’ कल्चर पर भड़के लोग

    जलसा के बाहर हंगामा: अमिताभ बच्चन के दीदार के इंतजार में फैन बेहोश, ‘दर्शन’ कल्चर पर भड़के लोग




    नई दिल्ली(New Delhi)। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के जुहू स्थित बंगले जलसा के बाहर रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया। भीषण गर्मी में अमिताभ बच्चन की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार कर रहा एक फैन अचानक बेहोश हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसकी मदद की और पानी डालकर उसे होश में लाया।

    जानकारी के मुताबिक, हर रविवार की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में फैंस अमिताभ बच्चन के वीकली अपीयरेंस का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान एक अधेड़ उम्र का फैन गर्मी और भीड़ के बीच अचानक गिर पड़ा, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि समय रहते उसे राहत मिल गई और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

    इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए वीडियो के कमेंट सेक्शन में कई यूजर्स ने इस तरह की भीड़ और “दर्शन संस्कृति” पर सवाल उठाए हैं। कुछ लोगों ने लिखा कि “ये कोई भगवान नहीं हैं”, तो कुछ ने भीड़ को गैरजरूरी बताया।

    वहीं दूसरी ओर कई यूजर्स ने फैन के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि भीषण गर्मी में इस तरह घंटों इंतजार करना खतरनाक हो सकता है और ऐसी भीड़ पर नियंत्रण जरूरी है।

    बताया जा रहा है कि अमिताभ बच्चन हर रविवार अपने फैंस से जलसा के बाहर मिलते हैं और उनके साथ तस्वीरें भी साझा करते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने ब्लॉग में फैंस के प्रति आभार जताते हुए उनके साथ अच्छे व्यवहार की बात भी कही थी।

    इस घटना के बाद एक बार फिर फैंस की सुरक्षा और इस तरह के सार्वजनिक जमावड़े को लेकर बहस तेज हो गई है।

  • फिल्मों के नाम में ‘के’ था सफलता का फॉर्मूला, लेकिन एक कहानी ने तोड़ दिया करण जौहर का भ्रम

    फिल्मों के नाम में ‘के’ था सफलता का फॉर्मूला, लेकिन एक कहानी ने तोड़ दिया करण जौहर का भ्रम


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की दुनिया में जब सफल फिल्म निर्माताओं का जिक्र होता है तो निर्देशक और निर्माता Karan Johar का नाम प्रमुखता से सामने आता है। बीते कई वर्षों में उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई है। बड़े सेट, भावनात्मक कहानियां, रिश्तों की गहराई और पारिवारिक मूल्यों को पर्दे पर भव्य तरीके से दिखाने की उनकी शैली ने उन्हें फिल्म जगत का एक बड़ा नाम बना दिया। हालांकि फिल्मों के अलावा करण अपनी निजी सोच और मान्यताओं को लेकर भी कई बार चर्चा में रहे हैं।

    एक समय ऐसा था जब करण जौहर न्यूमरोलॉजी यानी अंकों और अक्षरों के प्रभाव पर काफी विश्वास करते थे। उनका मानना था कि अंग्रेजी का ‘K’ अक्षर उनके लिए बेहद शुभ है और इसी वजह से उनकी फिल्मों को सफलता मिलती है। यही कारण था कि उन्होंने लगातार अपनी फिल्मों के नाम ऐसे चुने जिनकी शुरुआत इसी अक्षर से होती थी। उनकी कई चर्चित और सफल फिल्मों के नाम इसी पैटर्न पर आधारित रहे। उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में भी न्यूमरोलॉजी को लेकर खास आकर्षण देखा जाता था और कई लोग नामों की स्पेलिंग तक बदलते नजर आते थे।

    करण जौहर की फिल्मी यात्रा भी काफी दिलचस्प रही है। फिल्मी माहौल में बड़े होने के कारण उनका झुकाव बचपन से सिनेमा की ओर था। उन्होंने शुरुआत पर्दे के पीछे काम करते हुए की और बाद में निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। उनकी पहली निर्देशित फिल्म ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई और उसके बाद उन्होंने कई यादगार फिल्मों का निर्माण किया। उनकी फिल्मों ने केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल नहीं की बल्कि दर्शकों के दिलों में भी खास जगह बनाई।

    लेकिन समय के साथ करण की सोच में बदलाव आया। उन्होंने एक बातचीत के दौरान बताया था कि निर्देशक Rajkumar Hirani की फिल्म Lage Raho Munna Bhai देखने के बाद उनकी सोच बदल गई। फिल्म में अंधविश्वास और न्यूमरोलॉजी जैसे विषयों को हल्के अंदाज में दिखाया गया था, जिसने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्हें महसूस हुआ कि किसी फिल्म की सफलता उसके नाम के पहले अक्षर से नहीं बल्कि उसकी कहानी, मेहनत और दर्शकों से जुड़ाव से तय होती है।

    इसके बाद उन्होंने फिल्मों के नाम को लेकर अपनी पुरानी मान्यता छोड़ दी और नए विचारों के साथ आगे बढ़ना शुरू किया। आने वाले वर्षों में उन्होंने कई अलग-अलग शीर्षकों वाली सफल फिल्में दीं और निर्माता के रूप में नए कलाकारों को भी मौका दिया। आज करण जौहर केवल एक सफल निर्देशक नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की बदलती सोच और आधुनिक फिल्म निर्माण शैली की एक बड़ी पहचान बन चुके हैं। उनकी यात्रा यह भी दिखाती है कि समय के साथ विचार बदलना और नई सोच अपनाना सफलता का अहम हिस्सा हो सकता है।