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  • एक दिन में 47 फिल्में साइन करने वाला बॉलीवुड स्टार, पहली ही फिल्म ने बनाया सुपरस्टार, फिर फीका पड़ गया करियर

    एक दिन में 47 फिल्में साइन करने वाला बॉलीवुड स्टार, पहली ही फिल्म ने बनाया सुपरस्टार, फिर फीका पड़ गया करियर


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली। हालांकि, हर किसी की सफलता लंबे समय तक कायम नहीं रह पाती। अभिनेता Rahul Roy की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय था जब फिल्म निर्माता उनके साथ काम करने के लिए कतार में खड़े रहते थे और उनके पास फिल्मों की इतनी भरमार थी कि उन्होंने एक ही दिन में 47 फिल्में साइन कर ली थीं।

    हाल ही में राहुल रॉय टीवी शो लाफ्टर शेफ्स में नजर आए, जहां उनके फिल्मी करियर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सामने आया। शो के दौरान अभिनेता Karan Kundrra ने राहुल से पूछा कि क्या उन्होंने एक दिन में 150 फिल्में साइन की थीं। इस पर राहुल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि यह आंकड़ा गलत है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 150 नहीं, बल्कि 47 फिल्में एक ही दिन में साइन की थीं। यह सुनकर शो में मौजूद सभी लोग हैरान रह गए।

    राहुल रॉय को सबसे ज्यादा पहचान फिल्म Aashiqui से मिली थी। यह उनकी पहली फिल्म थी और रिलीज होते ही देशभर में जबरदस्त हिट साबित हुई। फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री Anu Aggarwal नजर आई थीं। रोमांटिक कहानी और यादगार संगीत के कारण ‘आशिकी’ ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली। फिल्म की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि राहुल रॉय को लंबे समय तक ‘आशिकी बॉय’ के नाम से जाना जाता रहा।

    एक इंटरव्यू में राहुल रॉय ने बताया था कि ‘आशिकी’ सिनेमाघरों में करीब छह महीने तक हाउसफुल चली थी। फिल्म की सफलता ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया और उनके पास फिल्मों के प्रस्तावों की बाढ़ आ गई। निर्माता और निर्देशक उन्हें अपनी फिल्मों में लेने के लिए उत्सुक रहते थे। इसी दौरान उन्होंने 47 फिल्मों पर हस्ताक्षर कर दिए।

    हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में फिल्में साइन करना उनके लिए मुश्किल साबित हुआ। राहुल ने बाद में स्वीकार किया था कि उनके पास सभी फिल्मों के लिए समय नहीं था। मजबूरी में उन्हें कई प्रोजेक्ट छोड़ने पड़े और लगभग 21 निर्माताओं को उनकी एडवांस राशि भी लौटानी पड़ी। यह उनके करियर का एक ऐसा दौर था जब लोकप्रियता अपने चरम पर थी, लेकिन सही प्रबंधन न होने के कारण वह उसका पूरा लाभ नहीं उठा सके।

    फिल्मों के अलावा राहुल रॉय रियलिटी शो की दुनिया में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। वे वर्ष 2007 में प्रसारित हुए Bigg Boss के पहले सीजन के विजेता रहे थे। बिग बॉस की ट्रॉफी जीतने के बाद भी उनके करियर को वैसी रफ्तार नहीं मिल सकी जैसी ‘आशिकी’ के दौर में देखने को मिली थी।

    राहुल रॉय ने अपने करियर में 28 से अधिक फिल्मों में काम किया, लेकिन उनकी बाद की अधिकांश फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकीं। धीरे-धीरे उनका स्टारडम कम होता गया और वे फिल्मी दुनिया से दूर होते चले गए।

    हाल के वर्षों में राहुल रॉय सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहे हैं। कुछ समय पहले एक कंटेंट क्रिएटर के साथ रील वीडियो बनाने को लेकर उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था। आलोचनाओं का जवाब देते हुए राहुल ने कहा था कि वह ईमानदारी से काम कर रहे हैं और मेहनत करके अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि लोग उनकी इतनी चिंता करते हैं तो उन्हें बेहतर काम दिलाने में मदद करें।

    राहुल रॉय की कहानी बॉलीवुड में सफलता और संघर्ष दोनों का अनोखा उदाहरण है। एक दौर में जहां वे इंडस्ट्री के सबसे चर्चित सितारों में शामिल थे, वहीं आज उनकी यात्रा नई पीढ़ी के कलाकारों को सफलता के साथ संतुलन बनाए रखने का संदेश देती है।

  • 52 साल के साथ और 41 साल के वैवाहिक रिश्ते को किया सलाम, किरण खेर के जन्मदिन पर अनुपम खेर का भावुक संदेश चर्चा में

    52 साल के साथ और 41 साल के वैवाहिक रिश्ते को किया सलाम, किरण खेर के जन्मदिन पर अनुपम खेर का भावुक संदेश चर्चा में

    नई दिल्ली । बॉलीवुड की वरिष्ठ अभिनेत्री और सांसद किरण खेर के जन्मदिन के अवसर पर अभिनेता अनुपम खेर ने एक भावुक संदेश साझा कर उन्हें विशेष अंदाज में शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया पर साझा किया गया उनका यह पोस्ट तेजी से चर्चा का विषय बन गया है और प्रशंसकों के साथ-साथ फिल्म जगत की कई हस्तियों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है।

    अनुपम खेर ने अपनी पत्नी किरण खेर के साथ एक खूबसूरत तस्वीर साझा करते हुए उनके लिए प्यार, सम्मान और आभार से भरा संदेश लिखा। उन्होंने अपने लंबे साथ को याद करते हुए कहा कि वह किरण को पांच दशक से अधिक समय से जानते हैं और इस दौरान उन्होंने उनसे जीवन के कई महत्वपूर्ण सबक सीखे हैं। अभिनेता ने अपने संदेश में उनके अच्छे स्वास्थ्य, खुशहाल जीवन और लंबी उम्र की कामना भी की।

    अपने भावनात्मक संदेश में अनुपम खेर ने कहा कि जीवन में कई सीखें ऐसी होती हैं जो समय के साथ धीरे-धीरे समझ में आती हैं। उन्होंने लिखा कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें एहसास होता है कि उन्होंने किरण से केवल शब्दों के माध्यम से नहीं, बल्कि उनके जीवन जीने के तरीके से बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने किरण की हिम्मत, ईमानदारी, मित्रता और व्यक्तित्व की सराहना करते हुए उनके जीवन में होने के लिए धन्यवाद भी व्यक्त किया।

    सोशल मीडिया पर साझा किया गया यह संदेश लोगों को काफी पसंद आ रहा है। प्रशंसकों ने इसे एक सच्चे और मजबूत रिश्ते की मिसाल बताया है। कई लोगों ने टिप्पणी करते हुए दोनों की जोड़ी की प्रशंसा की और किरण खेर को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। फिल्म जगत से जुड़े कई कलाकारों ने भी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देकर उन्हें बधाई संदेश भेजे।

    अनुपम और किरण खेर की प्रेम कहानी लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय रही है। दोनों की पहली मुलाकात थिएटर के दिनों में हुई थी, जब वे अभिनय की दुनिया में अपने शुरुआती कदम रख रहे थे। समय के साथ दोनों के बीच मित्रता गहरी हुई और बाद में यह रिश्ता जीवनसाथी के रूप में आगे बढ़ा। वर्ष 1985 में दोनों ने विवाह किया और तब से वे भारतीय मनोरंजन जगत के सबसे चर्चित और सम्मानित दंपतियों में गिने जाते हैं।

    किरण खेर ने फिल्मों, टेलीविजन और सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई है। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। वहीं अनुपम खेर भारतीय सिनेमा के सबसे अनुभवी और बहुमुखी कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने देश और विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

    जन्मदिन के अवसर पर साझा किया गया यह संदेश केवल शुभकामना भर नहीं, बल्कि एक लंबे और मजबूत रिश्ते की झलक भी प्रस्तुत करता है। वर्षों के साथ, विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित इस संबंध ने अनेक लोगों को प्रेरित किया है। सोशल मीडिया पर मिल रही प्रतिक्रियाएं इस बात का प्रमाण हैं कि दर्शक आज भी इस जोड़ी को उतना ही पसंद करते हैं जितना पहले करते थे।

    किरण खेर के जन्मदिन पर मिला यह विशेष संदेश उनके प्रशंसकों के लिए भी यादगार बन गया है। अभिनेता के शब्दों में झलकता स्नेह, सम्मान और अपनापन इस अवसर को और अधिक खास बना रहा है।

  • रॉयल ब्लू साड़ी में छाईं Madhuri Dixit, 'मां बहन' की सफलता के बीच फिर दिखा धक-धक गर्ल का शाही अंदाज

    रॉयल ब्लू साड़ी में छाईं Madhuri Dixit, 'मां बहन' की सफलता के बीच फिर दिखा धक-धक गर्ल का शाही अंदाज


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की सबसे लोकप्रिय और सदाबहार अभिनेत्रियों में शुमार Madhuri Dixit आज भी अपनी खूबसूरती, अभिनय और स्टाइल से करोड़ों प्रशंसकों के दिलों पर राज करती हैं। तीन दशक से अधिक लंबे करियर के बाद भी उनका आकर्षण जरा भी कम नहीं हुआ है। यही वजह है कि जब भी उनका कोई नया लुक सामने आता है, वह सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बन जाता है।

    हाल ही में सामने आई तस्वीरों में माधुरी दीक्षित रॉयल ब्लू रंग की खूबसूरत कढ़ाईदार साड़ी में नजर आ रही हैं। उनका यह एथनिक लुक भारतीय पारंपरिक फैशन की खूबसूरती को बेहद शानदार तरीके से प्रस्तुत करता है। साड़ी पर की गई बारीक कारीगरी, आकर्षक बॉर्डर और संतुलित रंग संयोजन पूरे लुक को शाही स्पर्श दे रहा है। इसके साथ पहने गए पारंपरिक झुमके, कंगन और सलीकेदार हेयरस्टाइल उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं।

    माधुरी की यह तस्वीरें इस बात का प्रमाण हैं कि क्लासिक फैशन कभी पुराना नहीं होता। हल्के मेकअप और उनकी सदाबहार मुस्कान ने पूरे लुक को और भी प्रभावशाली बना दिया है। फैशन विशेषज्ञों का मानना है कि उनका यह अंदाज शादी, पारिवारिक समारोहों और त्योहारों के लिए बेहतरीन प्रेरणा साबित हो सकता है।

    अभिनय की बात करें तो माधुरी दीक्षित ने अपने करियर में कई यादगार फिल्मों के जरिए दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है। Tezaab, Dil, Beta, Hum Aapke Hain Koun..!, Dil To Pagal Hai और Devdas जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड की सबसे सफल अभिनेत्रियों की सूची में शामिल किया।

    समय के साथ उन्होंने खुद को लगातार नए दौर के अनुसार ढाला है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उन्होंने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। The Fame Game और Maja Ma जैसे प्रोजेक्ट्स में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली। हाल के वर्षों में वह नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी उतनी ही लोकप्रिय बनी हुई हैं जितनी अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं।

    इन दिनों उनकी चर्चित फिल्म ‘मां बहन’ को लेकर भी खूब चर्चा हो रही है। दर्शकों और समीक्षकों ने उनके अभिनय की सराहना की है। फिल्म में उनके दमदार किरदार और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह आज भी इंडस्ट्री की सबसे प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में शामिल हैं।

    फैशन हो, अभिनय हो या फिर डिजिटल मनोरंजन की दुनिया, माधुरी दीक्षित हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। उनका यह नया साड़ी लुक एक बार फिर यह साबित करता है कि वह केवल बॉलीवुड की धक-धक गर्ल ही नहीं, बल्कि भारतीय फैशन और ग्लैमर जगत की सबसे प्रभावशाली स्टाइल आइकन्स में से एक हैं।

  • बॉक्स ऑफिस की चिंता आज भी बरकरार, ‘धमाल 4’ के ट्रेलर लॉन्च पर अजय देवगन ने बताया क्यों होती है घबराहट

    बॉक्स ऑफिस की चिंता आज भी बरकरार, ‘धमाल 4’ के ट्रेलर लॉन्च पर अजय देवगन ने बताया क्यों होती है घबराहट

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता Ajay Devgn इन दिनों अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म Dhamaal 4 को लेकर चर्चा में हैं। लोकप्रिय कॉमेडी फ्रेंचाइजी की चौथी किस्त के ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम में अभिनेता ने अपनी फिल्मों को लेकर खुलकर बात की और यह स्वीकार किया कि लंबे अनुभव के बावजूद हर नई फिल्म की रिलीज से पहले उन्हें घबराहट महसूस होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना में महीनों की मेहनत और समर्पण लगा होता है, इसलिए रिलीज के समय थोड़ा दबाव और उत्सुकता स्वाभाविक होती है।

    ट्रेलर लॉन्च के दौरान मीडिया से बातचीत में अजय देवगन ने बताया कि किसी फिल्म की सफलता केवल कलाकारों के लिए नहीं, बल्कि उससे जुड़े पूरे दल के लिए महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि जब किसी प्रोजेक्ट पर लंबे समय तक मेहनत की जाती है तो यह उम्मीद भी रहती है कि दर्शक उसे पसंद करें। यही कारण है कि रिलीज के करीब आने पर उत्साह के साथ-साथ चिंता भी बनी रहती है।

    अभिनेता ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्षों के अनुभव के बाद भी यह भावना समाप्त नहीं होती। उनके अनुसार हर फिल्म एक नई चुनौती होती है और हर बार दर्शकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की जिम्मेदारी बनी रहती है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण की प्रक्रिया में शामिल सभी लोग चाहते हैं कि उनका काम दर्शकों तक पहुंचे और उन्हें पसंद आए। इसी वजह से रिलीज के समय स्वाभाविक रूप से मानसिक दबाव महसूस होता है।

    बातचीत के दौरान अजय देवगन से बॉलीवुड में सीक्वल फिल्मों की लगातार बढ़ती लोकप्रियता को लेकर भी सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि किसी भी सीक्वल की सफलता का सबसे बड़ा आधार उसके किरदार होते हैं। जब दर्शक किसी फिल्म के पात्रों को पसंद करने लगते हैं और उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं, तब कहानी को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि सफल फ्रेंचाइजी की सबसे बड़ी ताकत उसके यादगार किरदार होते हैं।

    अजय देवगन ने उदाहरण देते हुए बताया कि दर्शक कई लोकप्रिय फिल्मों के पात्रों को उनके नाम से पहचानते हैं। यही जुड़ाव समय के साथ सीक्वल फिल्मों की मांग को बढ़ाता है। उनका मानना है कि यदि दर्शकों को पात्रों और उनकी दुनिया में रुचि बनी रहती है, तो अगली कड़ी के प्रति उत्सुकता स्वतः पैदा हो जाती है।

    ‘धमाल’ फ्रेंचाइजी का सफर वर्ष 2007 में शुरू हुआ था और पहली फिल्म को दर्शकों ने भरपूर प्यार दिया था। इसके बाद आई दूसरी और तीसरी फिल्मों ने भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छी सफलता हासिल की। तीसरे भाग में अजय देवगन की एंट्री हुई थी, जिसने फ्रेंचाइजी को एक नया आयाम दिया। अब चौथे भाग को लेकर भी दर्शकों के बीच काफी उत्साह देखा जा रहा है।

    फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि कॉमेडी और मनोरंजन से भरपूर यह फ्रेंचाइजी भारतीय दर्शकों के बीच मजबूत पहचान बना चुकी है। यही कारण है कि ‘धमाल 4’ को लेकर भी सकारात्मक माहौल बना हुआ है। ट्रेलर को मिली प्रतिक्रिया ने फिल्म के प्रति उत्सुकता को और बढ़ा दिया है।

    अब दर्शकों की निगाहें फिल्म की रिलीज पर टिकी हैं। 10 जुलाई को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही ‘धमाल 4’ से निर्माताओं और कलाकारों को बड़ी उम्मीदें हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकप्रिय फ्रेंचाइजी का यह नया अध्याय बॉक्स ऑफिस पर कैसा प्रदर्शन करता है।

  • अक्षय कुमार से अरशद वारसी तक, ‘वेलकम टू द जंगल’ की स्टारकास्ट की नेटवर्थ ने खींचा ध्यान; करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं कलाकार

    अक्षय कुमार से अरशद वारसी तक, ‘वेलकम टू द जंगल’ की स्टारकास्ट की नेटवर्थ ने खींचा ध्यान; करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं कलाकार

    नई दिल्ली । बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ इन दिनों अपनी भव्य स्टारकास्ट और बड़े पैमाने पर तैयार किए गए मनोरंजन पैकेज को लेकर चर्चा में है। फिल्म में 30 से अधिक कलाकारों को शामिल किया गया है, जिनमें हिंदी सिनेमा के कई दिग्गज और लोकप्रिय चेहरे मौजूद हैं। ट्रेलर रिलीज होने के बाद दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। हालांकि फिल्म की कहानी और कलाकारों के किरदारों के साथ-साथ उनकी आर्थिक हैसियत भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

    फिल्म का नेतृत्व अभिनेता Akshay Kumar कर रहे हैं, जो लंबे समय से हिंदी सिनेमा के सबसे सफल और व्यस्त सितारों में गिने जाते हैं। तीन दशक से अधिक समय के करियर में उन्होंने अनेक सुपरहिट फिल्मों के जरिए न केवल लोकप्रियता हासिल की है बल्कि बड़ी संपत्ति भी अर्जित की है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार उनकी कुल संपत्ति हजारों करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुकी है, जिससे वे फिल्म की स्टारकास्ट में सबसे प्रभावशाली आर्थिक स्थिति रखने वाले कलाकारों में शामिल हैं।

    फिल्म में Suniel Shetty भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अभिनय के साथ-साथ होटल, फिटनेस और अन्य व्यवसायों में निवेश के कारण उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्षों से मनोरंजन उद्योग में सक्रिय रहने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत मानी जाती है। इसी तरह Raveena Tandon भी लंबे समय से फिल्म उद्योग का हिस्सा रही हैं और सफल अभिनय करियर के दम पर उल्लेखनीय संपत्ति अर्जित कर चुकी हैं।

    दिग्गज अभिनेता Jackie Shroff भी इस मल्टीस्टारर परियोजना का हिस्सा हैं। कई दशकों से सक्रिय जैकी श्रॉफ ने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई है। फिल्मों, विज्ञापनों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के जरिए उन्होंने भी मजबूत आर्थिक आधार तैयार किया है। उनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है और नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी उनकी अच्छी पहचान है।

    फिल्म में हास्य का प्रमुख आकर्षण बनने जा रहे Johnny Lever को हिंदी सिनेमा के सबसे सफल कॉमेडियनों में गिना जाता है। दशकों तक दर्शकों को हंसाने वाले जॉनी लीवर ने अपनी प्रतिभा और निरंतर सक्रियता के बल पर उल्लेखनीय संपत्ति अर्जित की है। कॉमेडी जगत में उनकी स्थिति आज भी बेहद मजबूत मानी जाती है और वे देश के सबसे समृद्ध हास्य कलाकारों में शामिल हैं।

    इसके अलावा Disha Patani और Jacqueline Fernandez जैसी अभिनेत्रियां भी फिल्म का हिस्सा हैं। फिल्मों, ब्रांड एंडोर्समेंट और सोशल मीडिया लोकप्रियता के कारण दोनों कलाकारों ने मनोरंजन उद्योग में मजबूत आर्थिक स्थिति बनाई है। युवा दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता फिल्म को अतिरिक्त आकर्षण प्रदान करती है।

    फिल्म की स्टारकास्ट में Tusshar Kapoor और Arshad Warsi भी शामिल हैं। विशेष रूप से अरशद वारसी ने कॉमेडी और चरित्र भूमिकाओं के जरिए वर्षों में मजबूत पहचान बनाई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उनकी संपत्ति भी सैकड़ों करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच चुकी है, जिससे वे फिल्म के सबसे संपन्न कलाकारों में गिने जाते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ‘वेलकम टू द जंगल’ केवल अपनी कहानी या हास्य तत्वों के कारण ही नहीं, बल्कि एक साथ इतने बड़े और प्रभावशाली सितारों की मौजूदगी के कारण भी चर्चा में है। फिल्म में शामिल कलाकारों की सामूहिक लोकप्रियता और आर्थिक हैसियत इसे वर्ष की सबसे चर्चित मल्टीस्टारर फिल्मों में शामिल कर रही है। दर्शकों को उम्मीद है कि यह फिल्म मनोरंजन, कॉमेडी और स्टारपावर का शानदार मिश्रण साबित होगी।

  • दीपिका पादुकोण की तारीफ में बोलीं कंगना रनौत: ‘बॉलीवुड में बढ़ रही है नेगेटिविटी और इनसिक्योरिटी’

    दीपिका पादुकोण की तारीफ में बोलीं कंगना रनौत: ‘बॉलीवुड में बढ़ रही है नेगेटिविटी और इनसिक्योरिटी’


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में अपने बेबाक बयानों के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर चर्चा में हैं। हालांकि इस बार उन्होंने किसी विवादित मुद्दे पर टिप्पणी नहीं की, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ती असुरक्षा, जलन और कलाकारों के बीच कम होते भाईचारे को लेकर अपनी राय साझा की है। खास बात यह रही कि बातचीत के दौरान कंगना ने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की खुलकर तारीफ की और बताया कि उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर में उनसे कई सकारात्मक बातें सीखीं।

    एक इंटरव्यू में कंगना ने कहा कि उन्हें अक्सर यह देखकर आश्चर्य होता है कि कई लोग कितनी असुरक्षा की भावना के साथ जीवन जीते हैं। उनके अनुसार किसी व्यक्ति के पास क्या है और क्या नहीं है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी मानसिकता होती है। उन्होंने कहा कि इंसान के भीतर जलन, असुरक्षा या दूसरों से खुद की तुलना करने जैसी भावनाएं होना सामान्य बात है, लेकिन इन भावनाओं को अपने ऊपर हावी होने देना या उन पर नियंत्रण रखना व्यक्ति की अपनी पसंद होती है।

    कंगना का मानना है कि नकारात्मक भावनाएं किसी भी व्यक्ति की प्रतिभा, आकर्षण और निर्णय क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कई ऐसे लोगों को देखा है जो बेहद प्रतिभाशाली, आकर्षक और सफल हैं, लेकिन असुरक्षा की भावना उन्हें भीतर से कमजोर बना देती है। यही कारण है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में ही यह तय कर लिया था कि वे ऐसी भावनाओं को अपने व्यक्तित्व पर हावी नहीं होने देंगी।

    अभिनेत्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति उनसे कम अनुभवी या कम प्रतिभाशाली है तो वे उसकी मदद करने और उसे आगे बढ़ाने की कोशिश करती हैं। वहीं यदि कोई उनसे अधिक प्रतिभाशाली है तो वे उससे सीखने में विश्वास रखती हैं। उनके अनुसार सीखने और आगे बढ़ने की यह प्रक्रिया ही व्यक्ति को बेहतर बनाती है, जबकि असुरक्षा केवल विकास की राह में बाधा बनती है।

    बातचीत के दौरान कंगना ने अपने शुरुआती संघर्षों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब वे बहुत कम उम्र में अपने घर से निकलकर फिल्म इंडस्ट्री में आई थीं, तब उन्हें इस दुनिया के बारे में बहुत कम जानकारी थी। गांव से आने और सीमित अनुभव होने के कारण कई चीजें उनके लिए चुनौतीपूर्ण थीं। ऐसे समय में उन्होंने अपने आसपास के लोगों को देखकर और उनसे सीखकर खुद को विकसित किया।

    इसी संदर्भ में उन्होंने दीपिका पादुकोण का उदाहरण दिया। कंगना ने कहा कि दीपिका का खेलों से जुड़ा बैकग्राउंड रहा है और उन्होंने हमेशा उनकी फिटनेस, अनुशासन और समर्पण की भावना को करीब से देखा। उन्होंने बताया कि एक विज्ञान पृष्ठभूमि से आने वाली लड़की होने के बावजूद उन्होंने अपने समकालीन कलाकारों से बहुत कुछ सीखा और दीपिका उनमें से एक हैं। कंगना के अनुसार किसी व्यक्ति की अच्छी बातों को स्वीकार करना और उसकी प्रशंसा करना सीखने की पहली सीढ़ी है।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई किसी की खूबसूरती, प्रतिभा या विशेष गुणों को स्वीकार ही नहीं करेगा, तो उनसे सीखने का अवसर भी खो देगा। कंगना का मानना है कि प्रशंसा करने से व्यक्ति छोटा नहीं होता, बल्कि उसका दृष्टिकोण व्यापक होता है।

    अंत में कंगना ने वर्तमान पीढ़ी के कलाकारों के बीच बढ़ती दूरी पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि पहले के दशकों में कलाकारों के बीच दोस्ती और अपनापन अधिक दिखाई देता था, जबकि आज बातचीत और आपसी सराहना का माहौल कम होता जा रहा है। विशेष रूप से उन्होंने कहा कि आजकल लोग एक-दूसरे की खुलकर तारीफ करने से भी बचते हैं, जबकि सकारात्मकता और सहयोग किसी भी रचनात्मक क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है।

  • 'झिलमिल सितारों का आंगन होगा' गीत के फिल्मांकन के समय कगार पर थी दो बड़े सितारों की जान, धर्मेंद्र की सूझबूझ से बची अभिनेत्री राखी

    'झिलमिल सितारों का आंगन होगा' गीत के फिल्मांकन के समय कगार पर थी दो बड़े सितारों की जान, धर्मेंद्र की सूझबूझ से बची अभिनेत्री राखी

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर की यादें जितनी दिलचस्प हैं, उतनी ही रोमांचित करने वाली उनकी शूटिंग से जुड़ी कहानियां भी हैं। सत्तर के दशक में तकनीकों और विशेष प्रभावों की कमी के कारण अक्सर निर्देशकों को वास्तविक लोकेशंस पर जाकर ही जोखिम भरे दृश्य फिल्माने पड़ते थे। ऐसा ही एक अविस्मरणीय और डरा देने वाला वाकया अभिनेता धर्मेंद्र और दिग्गज अभिनेत्री राखी के साथ घटित हुआ था। दोनों कलाकार अपनी एक बेहद मशहूर फिल्म के रोमांटिक गीत की शूटिंग कर रहे थे, जहां अचानक प्रकृति के एक अनपेक्षित खतरे से उनका आमना-सामना हो गया और सेट पर मौजूद सभी लोगों की जान हलक में आ गई थी।

    यह पूरी घटना निर्देशक राजश्री प्रोडक्शंस की साल 1970 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म जीवन मृत्यु के फिल्मांकन के समय की है। इस फिल्म का एक बेहद लोकप्रिय और कालजयी गीत झिलमिल सितारों का आंगन होगा दर्शकों के बीच आज भी उतना ही पसंद किया जाता है। आनंद बक्शी के लिखे और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के मधुर संगीत से सजे इस गीत को महान गायक मोहम्मद रफी और स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। इस बेहद शांत और रोमांटिक मिजाज के गाने को एक खूबसूरत झील के बीच नाव के ऊपर फिल्माया जा रहा था, जहां दोनों मुख्य कलाकार स्क्रिप्ट के अनुसार एक-दूसरे के आकर्षण में पूरी तरह डूबे हुए थे।

    शेड्यूल के मुताबिक जब कैमरे रोल हो रहे थे और धर्मेंद्र व राखी नाव पर सवार होकर रोमांटिक शॉट दे रहे थे, तभी अचानक पानी में कुछ संदिग्ध हलचल शुरू हुई। किनारे पर खड़े क्रू मेंबर्स और कैमरे के पीछे मौजूद टीम ने जब ध्यान से देखा, तो उनके होश उड़ गए क्योंकि एक विशालकाय मगरमच्छ तैरता हुआ सीधे कलाकारों की छोटी सी नाव की तरफ बढ़ रहा था। जंगली जानवर को इतने करीब देखकर सेट पर हड़कंप मच गया और चीख-पुकार मचने की स्थिति पैदा हो गई। नाव बीच पानी में होने के कारण दोनों ही स्टार्स बेहद असुरक्षित स्थिति में थे और जरा सी चूक एक बड़े हादसे में बदल सकती थी।

    ऐसी विपरीत और जानलेवा परिस्थिति में अभिनेता धर्मेंद्र ने गजब के साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। मगरमच्छ को नाव के बिल्कुल करीब पाकर उन्होंने घबराने के बजाय सबसे पहले अभिनेत्री राखी को सुरक्षित करने का प्रयास किया। उन्होंने राखी को पकड़कर धीरे से नाव के उस कोने से हटाया जिसके पास मगरमच्छ मंडरा रहा था और उन्हें सुरक्षित छोर पर ले आए। हालांकि इस भयानक घटना से दोनों ही कलाकार अंदर से काफी डर गए थे, लेकिन पेशेवर प्रतिबद्धता दिखाते हुए उन्होंने स्थिति सामान्य होने के बाद अपना काम जारी रखा और उस खूबसूरत गाने की शूटिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया।

    उल्लेखनीय है कि इसी फिल्म जीवन मृत्यु के जरिए अभिनेत्री राखी ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा था और धर्मेंद्र के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। बाद में इस जोड़ी ने ब्लैकमेल और क्षत्रिय जैसी कई अन्य यादगार फिल्मों में भी साथ काम किया, जिनके गाने जैसे पल पल दिल के पास आज भी एवरग्रीन माने जाते हैं। धर्मेंद्र ने खुद कई सालों बाद एक टेलीविजन रियलिटी शो के मंच पर इस मगरमच्छ वाली घटना का जिक्र करते हुए पुरानी यादों को ताजा किया था। यह किस्सा साबित करता है कि परदे पर दिखने वाले खूबसूरत नजारों के पीछे कलाकारों को कितनी कठिन और खतरनाक परिस्थितियों से गुजरना पड़ता था।

  • मोहम्मद रफी के एक एवरग्रीन गाने ने पलट दी थी हिंदी सिनेमा की बाजी, धर्मेंद्र को मिला नया मुकाम तो फीका पड़ा राजेश खन्ना का जादू

    मोहम्मद रफी के एक एवरग्रीन गाने ने पलट दी थी हिंदी सिनेमा की बाजी, धर्मेंद्र को मिला नया मुकाम तो फीका पड़ा राजेश खन्ना का जादू

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में संगीतकारों, गायकों और अभिनेताओं के बीच की आपसी केमिस्ट्री ने कई बड़े सितारों के करियर की दिशा तय की है। सत्तर के दशक की शुरुआत में जब बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना बैक टू बैक 15 ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर सफलता के शिखर पर थे, तब उनकी फिल्मों में पार्श्वगायन के लिए किशोर कुमार पहली पसंद बन चुके थे। अधिकांश बड़े संगीत निर्देशकों द्वारा किशोर दा को प्राथमिकता दिए जाने के कारण, उस दौर के दिग्गज गायक मोहम्मद रफी का करियर कुछ समय के लिए डगमगाने लगा था। लेकिन साल 1973 में आई एक फिल्म और उसके एक सदाबहार गीत ने फिल्म इंडस्ट्री के पूरे परिदृश्य को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया।

    यह ऐतिहासिक बदलाव अभिनेता धर्मेंद्र की मुख्य भूमिका वाली फिल्म लोफर के माध्यम से देखने को मिला था। इस फिल्म में संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के निर्देशन में मोहम्मद रफी ने आज मौसम बड़ा बेईमान है गीत को अपनी जादुई आवाज दी थी। धर्मेंद्र और अभिनेत्री मुमताज पर फिल्माया गया यह रोमांटिक गीत रिलीज होते ही देश भर में एक बड़ा कल्ट क्लासिक साबित हुआ। इस एकल गीत की लोकप्रियता ने सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और यह उस दौर से लेकर आज तक भारतीय सिनेमा के सबसे पसंदीदा सदाबहार रोमांटिक गानों की सूची में शीर्ष पर बना हुआ है।

    इस गाने की अभूतपूर्व सफलता ने मोहम्मद रफी के करियर को एक नई और बेहद मजबूत संजीवनी प्रदान करने का काम किया। इस जबरदस्त वापसी के बाद फिल्म जगत के तमाम दिग्गज संगीतकारों ने एक बार फिर रफी साहब की तरफ रुख करना शुरू कर दिया और उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए साइन किया जाने लगा। वहीं दूसरी ओर, इस फिल्म की बड़ी कामयाबी ने अभिनेता धर्मेंद्र के पैर भी इंडस्ट्री में मजबूती से जमा दिए। लोफर की सफलता के बाद धर्मेंद्र को बड़े बैनर्स की फिल्मों के ढेरों ऑफर्स मिलने लगे, जिससे हिंदी सिनेमा में एक्शन और रोमांस का एक नया दौर शुरू हुआ।

    इस संगीत सफर में आए बदलाव का सीधा असर तत्कालीन सुपरस्टार राजेश खन्ना के करियर पर भी देखने को मिला। इसी कालखंड के दौरान फिल्म इंडस्ट्री का झुकाव राजेश खन्ना के रोमांटिक अंदाज से हटकर धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की एंग्री यंग मैन और एक्शन इमेज की तरफ बढ़ने लगा था। साल 1975 में रिलीज हुई निर्देशक रमेश सिप्पी की ऐतिहासिक फिल्म शोले ने इस बदलाव पर अंतिम मुहर लगा दी थी। शोले में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की जोड़ी ने जो इतिहास रचा, उसने राजेश खन्ना के स्टारडम के दौर को काफी पीछे धकेल दिया और उनके करियर का ग्राफ तेजी से नीचे आने लगा।

    सिनेमाई विश्लेषकों के अनुसार, लोफर फिल्म का वह एक गाना महज एक हिट ट्रैक नहीं था, बल्कि वह बॉलीवुड में दो बड़े युगों के बीच का टर्निंग पॉइंट था। उसने जहां एक तरफ भारतीय संगीत के सबसे सुरीले गायक मोहम्मद रफी को उनका खोया हुआ सिंहासन वापस दिलाया, वहीं दूसरी तरफ धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों के लिए आगे का रास्ता साफ किया। यही कारण है कि आज भी जब हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली गानों और गानों से बदलने वाली स्टार्स की किस्मत का जिक्र होता है, तो मोहम्मद रफी और धर्मेंद्र के इस जुगलबंदी को सबसे पहले याद किया जाता है।

  • हिंदी सिनेमा में डबल रोल का अनोखा ट्रेंड: जब बॉलीवुड के इन टॉप एक्टर्स ने एक ही स्क्रीन पर निभाया बाप और बेटे का दमदार रोल

    हिंदी सिनेमा में डबल रोल का अनोखा ट्रेंड: जब बॉलीवुड के इन टॉप एक्टर्स ने एक ही स्क्रीन पर निभाया बाप और बेटे का दमदार रोल


    नई दिल्ली।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में पटकथाओं की मांग और निर्देशकों के प्रयोगों ने समय-समय पर अभिनेताओं को अपनी अभिनय क्षमता की सीमाओं को लांघने का अवसर दिया है। बॉलीवुड में दोहरे किरदारों यानी डबल रोल का चलन दशकों पुराना है, लेकिन इस विधा में सबसे कठिन और प्रभावकारी प्रयोग तब माना जाता है जब एक ही अभिनेता को एक ही फिल्म के भीतर पिता और पुत्र दोनों की भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। यह प्रयोग न केवल अभिनेता के कौशल की परीक्षा लेता है बल्कि दर्शकों को भी एक ही पर्दे पर दो अलग-अलग पीढ़ियों के दृष्टिकोण को देखने का अवसर देता है। हाल के वर्षों में कई ऐसे बड़े अभिनेताओं ने इस चुनौती को स्वीकार किया और अपने किरदारों से सिनेमाघरों में दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    इस फेहरिस्त में सबसे पहला और सबसे मजबूत नाम हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन का आता है। उन्होंने अपने लंबे और शानदार करियर में कई बार इस तरह के चुनौतीपूर्ण प्रयोगों को पर्दे पर जीवंत किया है। फिल्म सूर्यवंशम में ठाकुर भानुप्रताप सिंह और उनके सीधे-सादे बेटे हीरा ठाकुर के रूप में उनका अभिनय आज भी टेलीविजन संस्कृति का एक अहम हिस्सा बन चुका है। इसके अलावा उन्होंने अदालत, आखिरी रास्ता और महान जैसी फिल्मों में भी पिता और पुत्र की भूमिकाएं बहुत ही संजीदगी के साथ निभाई थीं। महान फिल्म में तो उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए पिता और दो बेटों का ट्रिपल रोल निभाकर सबको हैरत में डाल दिया था।

    वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता शाहरुख खान ने भी इस श्रेणी में अपना नाम दर्ज कराया है। फिल्म इंग्लिश बाबू देसी मैम में बहुआयामी भूमिकाएं निभाने के बाद, उन्होंने हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म जवान में इस कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस फिल्म में उन्होंने कैप्टन विक्रम राठौड़ के रूप में एक निडर पिता और आजाद के रूप में एक न्यायप्रिय बेटे का किरदार निभाया था। दोनों किरदारों के बीच का तालमेल और स्क्रीन प्रेजेंस इतनी दमदार थी कि दर्शकों ने सिनेमाघरों में तालियों और सीटियों के साथ इसका स्वागत किया और फिल्म ने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।

    इस प्रकार के किरदारों को निभाने में एक्शन और फिक्शन फिल्मों के सुपरस्टार ऋतिक रोशन भी पीछे नहीं रहे हैं। उन्होंने अपनी बेहद लोकप्रिय सुपरहीरो फ्रेंचाइजी कृष और कृष 3 में एक साथ दो पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व किया। एक तरफ जहां उन्होंने मानसिक रूप से विशेष और बाद में बुजुर्ग हो चुके वैज्ञानिक पिता रोहित मेहरा का किरदार निभाया, वहीं दूसरी तरफ शक्तिशाली और रक्षक बेटे कृष्णा उर्फ कृष के रूप में भी खुद को स्थापित किया। एक ही फ्रेम में दो अलग उम्र और शारीरिक हाव-भाव वाले किरदारों को एक साथ निभाना ऋतिक रोशन के करियर के सबसे बेहतरीन प्रयोगों में गिना जाता है।

    समकालीन अभिनेताओं में रणबीर कपूर ने भी इस श्रेणी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने बड़े बजट की पीरियड ड्रामा फिल्म शमशेरा में पिता और पुत्र की दोहरी भूमिका निभाई थी। फिल्म में उन्होंने डकैत शमशेरा और उसके विद्रोही बेटे बल्ली के किरदारों को निभाने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से काफी मेहनत की थी। भले ही फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मिश्रित प्रतिक्रिया मिली हो, लेकिन रणबीर कपूर के इस दोहरे प्रयास और अभिनय की समीक्षकों द्वारा काफी सराहना की गई थी।

    इसी तरह एक्शन स्टार जॉन अब्राहम ने भी अपनी फिल्म सत्यमेव जयते के दूसरे भाग में इसी तरह का प्रयोग दोहराया था, जहां उन्होंने एक किसान पिता और उसके जुड़वां बेटों की तिहरी भूमिका निभाई थी। वहीं अभिनेता सलमान खान की फिल्म वीर में भी एक ऐसी ही कहानी देखने को मिली थी, जिसमें पिता के निधन के बाद बेटे का किरदार कहानी को आगे बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त, अक्षय कुमार जैसे कलाकार भी अपनी आने वाली फिल्मों और पिछले कुछ प्रोजेक्ट्स में इस तरह के किरदारों की संभावनाओं को टटोलते नजर आए हैं। कुल मिलाकर, एक ही फिल्म में पिता और बेटे का किरदार निभाना बॉलीवुड एक्टर्स के लिए हमेशा से अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित करने का सबसे बड़ा जरिया रहा है।

  • जब घर से रूठकर लापता हो गए थे लाडले श्याम सुंदर दास: जानिए कैसे एक लाचार पिता की मार्मिक वेदना ने रचे भारतीय सिनेमा के दो कालजयी गीत

    जब घर से रूठकर लापता हो गए थे लाडले श्याम सुंदर दास: जानिए कैसे एक लाचार पिता की मार्मिक वेदना ने रचे भारतीय सिनेमा के दो कालजयी गीत

    नई दिल्ली । संगीत और मानवीय संवेदनाओं का रिश्ता बेहद गहरा और रूहानी होता है। अक्सर जिन गीतों को सुनकर लोग झूम उठते हैं या जिन्हें विशुद्ध रूप से रोमांटिक विरह गीत मान लिया जाता है, उनके सृजन के पीछे कभी-कभी किसी रचनाकार की जिंदगी का सबसे बड़ा और असहनीय व्यक्तिगत दर्द छिपा होता है। भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1957 और 1959 के दौर में लिखे गए दो कालजयी गीतों— ‘जरा सामने तो आ ओ छलिए’ और ‘आ लौट के आजा मेरे मीत’ के साथ भी कुछ ऐसा ही जुड़ा हुआ है। इन गीतों को दशकों से लोग प्रेम की वेदना समझकर गाते आ रहे हैं, लेकिन वास्तव में ये बोल एक लाचार पिता के अपने कलेजे के टुकड़े से बिछड़ने की तड़प से पैदा हुए थे।

    इस भावुक कर देने वाली कहानी के केंद्र में महान गीतकार पंडित भरत व्यास और उनका परिवार है। भरत व्यास का बेटा श्याम सुंदर दास स्वभाव से बेहद संवेदनशील और उनका अत्यधिक लाडला था। एक दिन किसी घरेलू बात पर पिता से मामूली नाराजगी के बाद वह गुस्से में बिना बताए घर छोड़कर कहीं चला गया। शुरुआत में लगा कि वह जल्द लौट आएगा, लेकिन जब दिन बीतने लगे तो परिवार की चिंता गहरे डर में बदल गई। बेटे को ढूंढने के लिए भरत व्यास ने हर संभव जतन किए, अखबारों में विज्ञापन दिए, पोस्टर छपवाए और हर धार्मिक स्थल पर मन्नतें मांगीं, लेकिन बेटे का कहीं कोई सुराग नहीं मिला।

    इकलौते बेटे के इस तरह अचानक लापता हो जाने के गम ने पंडित भरत व्यास को भीतर से पूरी तरह तोड़ दिया था। वे गहरे डिप्रेशन और एक आत्म-अपराधबोध के जाल में फंस गए, जिसके कारण उन्होंने बाहरी दुनिया और अपने काम से पूरी तरह दूरी बना ली। वे दिन-रात गुमसुम रहने लगे। इसी मानसिक संकट के बीच एक फिल्म निर्माता उनके पास एक गीत लिखवाने की दरख्वास्त लेकर पहुंचे, जिसे भरत व्यास ने मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण गुस्से में मना कर दिया। बाद में उनकी पत्नी के समझाने और संबल देने पर वे काम करने के लिए राजी हुए और उन्होंने फिल्म ‘जनम जनम के फेरे’ के लिए एक गीत लिखा।

    अपने इसी मानसिक तनाव और बेटे की तलाश में भटकने के दर्द को उन्होंने पन्नों पर उतारा, जो आगे चलकर ‘जरा सामने तो आ ओ छलिए, छुपा-छुपा के नखरे दिखाए’ के रूप में सामने आया। लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की जादुई आवाजों से सजे इस गीत ने रेडियो पर आते ही लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, लेकिन इस बड़ी कामयाबी के बाद भी भरत व्यास का बेटा वापस नहीं लौटा था। इसके बाद साल 1959 में फिल्म ‘रानी रूपमति’ के लिए गीत लिखते समय भी उनके दिल का वह पुराना जख्म फिर हरा हो गया और उन्होंने बेटे को पुकारते हुए ‘आ लौट के आजा मेरे मीत, तुझे मेरे गीत बुलाते हैं’ जैसा मर्मस्पर्शी गीत लिख डाला।

    सिनेमाई पर्दे पर जब इन गानों को दर्शाया गया, तो दर्शकों ने इसे नायक-नायिका के विरह का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण माना। हालांकि, इन गीतों के बोलों को यदि एक पिता और लापता बेटे के संदर्भ में ध्यान से पढ़ा जाए, तो रचनाकार की आत्मा का रोना साफ महसूस होता है। इस बेहद दर्दनाक कहानी का अंत सुखद रहा क्योंकि ‘आ लौट के आजा मेरे मीत’ गीत की अभूतपूर्व सफलता और देश भर में गूंजने के कुछ समय बाद, उनका बेटा श्याम सुंदर दास आखिरकार सकुशल अपने पिता के पास वापस लौट आया, जिससे भरत व्यास के जीवन का सबसे लंबा और कठिन इंतजार हमेशा के लिए समाप्त हो गया।