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  • MP की सियासत में हलचल: भुट्टा बेचने वाले युवक ने सीएम को सुनाई बेरोजगारी की हकीकत, कांग्रेस नेता को मंच से लौटते वक्त थप्पड़

    MP की सियासत में हलचल: भुट्टा बेचने वाले युवक ने सीएम को सुनाई बेरोजगारी की हकीकत, कांग्रेस नेता को मंच से लौटते वक्त थप्पड़


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार का दिन कई ऐसे घटनाक्रमों का गवाह बना, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा बटोरी। एक ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने एक दिव्यांग युवक ने अपनी बेरोजगारी की कहानी सुनाकर व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, वहीं राजगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष चंदर सिंह सोंधिया के साथ हुई बदसलूकी ने सियासी माहौल गरमा दिया। इसके अलावा दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद भावुक हुए पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं पर भाजपा नेताओं के अलग-अलग बयान भी चर्चा का विषय बने रहे।

    धार जिले के राजगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला गुजर रहा था, तभी सड़क किनारे भुट्टा बेच रहे एक दिव्यांग युवक ने उन्हें आवाज लगाई। मुख्यमंत्री ने काफिला रुकवाया, युवक से भुट्टा खरीदा, बातचीत की और उसे 500 रुपए भी दिए। बातचीत के दौरान युवक ने बताया कि उसने मास्टर ऑफ सोशल वर्क की पढ़ाई की है, लेकिन नौकरी नहीं मिलने के कारण उसे भुट्टा बेचने और चाय-पकौड़े की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करना पड़ रहा है। युवक की यह बात सामने आने के बाद बेरोजगारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने इसे पढ़े-लिखे युवाओं की मौजूदा स्थिति का उदाहरण बताया, जबकि राजनीतिक हलकों में भी इस घटना की चर्चा होती रही।

    उधर राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान बड़ा विवाद हो गया। प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप की मौजूदगी में जिला पंचायत अध्यक्ष और कांग्रेस नेता चंदर सिंह सोंधिया को पहले कार्यक्रम में प्रवेश से रोका गया। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें अंदर जाने दिया गया, लेकिन इस घटनाक्रम से नाराज होकर उन्होंने मंच के सामने बैठकर विरोध जताया। बाद में जब वह कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद पुलिस उन्हें थाने ले गई, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।

    इसी बीच दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद सार्वजनिक मंच पर भावुक हुए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को लेकर भाजपा के भीतर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा कि वर्ष 2018 में उनका भी टिकट कटा था और तब उनकी आंखों में भी आंसू आए थे, लेकिन किसी ने उनकी चिंता नहीं की। उन्होंने पार्टी के फैसले को उचित बताते हुए कहा कि नए लोगों को अवसर देने के लिए कभी-कभी पुराने नेताओं को पीछे हटना पड़ता है।

    वहीं भाजपा के वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने अलग राय रखते हुए कहा कि राजनीति में सक्रिय व्यक्ति का भविष्य कभी समाप्त नहीं होता। उन्होंने संकेत दिया कि नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक भूमिका आगे भी महत्वपूर्ण रह सकती है। इन बयानों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की रणनीति को लेकर अलग-अलग सोच मौजूद है।

    इधर प्रशासनिक गलियारों में भी नई चर्चाओं ने जोर पकड़ा। नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव को लेकर मंत्रालय में हलचल बनी रही। आदेश जारी होने से पहले ही एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा मंत्रालय छोड़ने की तैयारी और बाद में उनकी नई पदस्थापना को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

    इन तीनों घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखाया कि मध्य प्रदेश की राजनीति में जमीनी मुद्दों, राजनीतिक टकराव और सत्ता के भीतर की हलचल लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं।

  • पूर्व IAS नियाज़ खान की राजनीति में एंट्री की इच्छा: बोले- कांग्रेस और भाजपा शायद स्वीकार न करें, नई पार्टी बनी तो करूंगा जॉइन

    पूर्व IAS नियाज़ खान की राजनीति में एंट्री की इच्छा: बोले- कांग्रेस और भाजपा शायद स्वीकार न करें, नई पार्टी बनी तो करूंगा जॉइन


    भोपाल । मध्य प्रदेश के पूर्व आईएएस अधिकारी और चर्चित लेखक नियाज़ खान ने सक्रिय राजनीति में आने की इच्छा जाहिर कर एक नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि देश में बढ़ते भ्रष्टाचार और राजनीतिक व्यवस्था में सुधार लाने के लिए अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना जरूरी हो गया है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।

    नियाज़ खान ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह कांग्रेस पार्टी में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि उनके हिंदू उदारवादी विचारों के कारण कांग्रेस उन्हें स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने भी उनके साथ हमेशा अलग व्यवहार किया और प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्हें कभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां नहीं दीं। उनके अनुसार, इससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा भी उन्हें अपने साथ जोड़ने की इच्छुक नहीं रही।

    पूर्व आईएएस अधिकारी ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि यदि भविष्य में कॉकरोच जनता पार्टी राजनीति में सक्रिय रूप से उतरती है तो वह उस पार्टी से जुड़ने पर विचार करेंगे। उनका कहना है कि वर्तमान समय में राजनीति ही समाज और देश की सबसे बड़ी सेवा का माध्यम बन चुकी है। इसलिए यदि व्यवस्था में बदलाव लाना है तो राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बनना आवश्यक है।

    नियाज़ खान प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ साहित्य जगत में भी अपनी अलग पहचान रखते हैं। उन्होंने ‘ब्राह्मण द ग्रेट’, ‘ब्राउन डेजर्ट IV-786’ और ‘बी रेडी टू डाई’ जैसे कई चर्चित उपन्यास लिखे हैं। उनकी किताबें अक्सर सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर केंद्रित रही हैं, जिसके कारण वे समय-समय पर सार्वजनिक बहस का हिस्सा भी बने हैं।

    सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट सामने आने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने उनके राजनीति में आने के फैसले का स्वागत किया, जबकि कुछ ने उनके बयान को लेकर सवाल भी उठाए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह का इस तरह खुलकर अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं सार्वजनिक करना चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है।

    हालांकि, नियाज़ खान ने फिलहाल किसी राजनीतिक दल में औपचारिक रूप से शामिल होने की घोषणा नहीं की है। उनका बयान केवल अपनी इच्छा और संभावित विकल्पों को लेकर है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में वह वास्तव में सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनते हैं या नहीं और यदि बनते हैं तो किस राजनीतिक मंच से अपनी नई पारी की शुरुआत करते हैं।

  • बात खरी है: बच्चों से चुनावी नारे, कांग्रेस मार्च में मारपीट और नशे में पुलिसकर्मी का ड्रामा

    बात खरी है: बच्चों से चुनावी नारे, कांग्रेस मार्च में मारपीट और नशे में पुलिसकर्मी का ड्रामा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाओं ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। दतिया उपचुनाव के प्रचार से लेकर भोपाल में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन और रीवा के थाने तक, कई घटनाओं ने सवाल खड़े किए हैं। इन घटनाओं ने चुनावी आचार संहिता, राजनीतिक अनुशासन और पुलिस व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।

    दतिया उपचुनाव के प्रचार के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में वे छोटे बच्चों से कांग्रेस के समर्थन में चुनावी नारे लगवाते नजर आ रहे हैं। बच्चों से “जात पे न पात पे, मुहर लगेगी हाथ पे” और “जीतेगा भाई जीतेगा, हाथ का पंजा जीतेगा” जैसे नारे लगवाने के बाद पटवारी ने उनसे पूछा कि उनकी बात सही है या गलत। इस पर बच्चों ने मासूमियत से “गलत” कह दिया। हालांकि उन्होंने इसे नजरअंदाज कर भाषण जारी रखा, लेकिन अब इस वीडियो को लेकर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार चुनाव प्रचार में बच्चों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

    उधर राजधानी भोपाल में भाजपा कार्यालय तक निकाले गए कांग्रेस के पैदल मार्च के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कुछ कार्यकर्ताओं ने एक युवक को जेबकतरा बताकर बीच सड़क पर पीटना शुरू कर दिया। युवक को दौड़ा-दौड़ाकर लात-घूंसों से मारा गया। मौके पर मौजूद पुलिस ने हस्तक्षेप कर उसे भीड़ से बचाया और अस्पताल पहुंचाया। घायल युवक माज कुरैशी ने दावा किया कि वह कांग्रेस कार्यकर्ता है और सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की। वहीं कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनका इस घटना से कोई संबंध नहीं है। घटना ने कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इधर रीवा के अमहिया थाने से सामने आए एक वीडियो ने पुलिस विभाग की छवि को झटका दिया है। वीडियो में प्रधान आरक्षक अच्छेलाल शराब के नशे में थाने के भीतर हंगामा करते दिखाई दे रहे हैं। वह खुद को “पुलिस लाइन का गुंडा” बताते हुए खुलेआम शराब पीने की बात स्वीकार करता नजर आया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पुलिस विभाग प्रदेशभर में “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान चला रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन घटना ने पुलिस व्यवस्था और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इसी बीच राज्य के नए मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। बताया जा रहा है कि अंतिम समय तक कई वरिष्ठ अधिकारियों के बीच इस पद के लिए जोर-आजमाइश चलती रही। नए मुख्य सचिव के कार्यभार संभालने के बाद भी नौकरशाही में इसे लेकर चर्चाएं थमती नजर नहीं आ रही हैं।

  • पीएम मोदी के बयान के बाद खरगे का हमला, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर उठाए गंभीर सवाल

    पीएम मोदी के बयान के बाद खरगे का हमला, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा के बाद देश की राजनीति में इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केवल घोषणाओं से युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। उनका कहना है कि छात्रों और युवाओं को भरोसा दिलाने के लिए सरकार को ठोस और प्रभावी फैसले लेने होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है और युवाओं के सामने रोजगार तथा भविष्य को लेकर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

    खरगे ने कहा कि देश के छात्र और युवा लंबे समय से बेहतर शिक्षा व्यवस्था, निष्पक्ष परीक्षाओं और रोजगार की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों का विश्वास प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल नई घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि दोषियों के खिलाफ समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है ताकि युवाओं का भरोसा फिर से कायम हो सके।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के कार्यकाल में छात्रों के आंदोलनों के दौरान कई स्थानों पर बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले युवाओं के साथ कठोर व्यवहार किया गया, जबकि लोकतंत्र में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि छात्रों की समस्याओं को कानून-व्यवस्था का विषय बनाने के बजाय संवाद और संवेदनशीलता के साथ समाधान तलाशा जाए।

    खरगे ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी दोहराईं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए, छात्रों पर हुई कार्रवाई के लिए सरकार सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और जिन विद्यार्थियों को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है, उन्हें न्याय सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना था कि युवाओं का भविष्य किसी भी राजनीतिक मतभेद से ऊपर होना चाहिए और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

    उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। खरगे का आरोप है कि देश में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर अपेक्षित गति से नहीं बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्थायी नौकरियों की संख्या सीमित होती जा रही है, जबकि संविदा आधारित नियुक्तियों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिससे भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों को शीघ्र एवं कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री के इसी बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिससे शिक्षा, परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

  • लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

    लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव उस समय बढ़ गया, जब भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस प्रदेश कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कई कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया और काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने से रोक दिया। मौके पर कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई।

    दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के बाहर भी सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई थी। कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता लाठी लेकर परिसर में तैनात नजर आईं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता शांतिप्रिय है, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए और उनके पोस्टरों पर जूते-चप्पल भी बरसाए। दोनों दलों के समर्थकों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही।

    यह प्रदर्शन 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन की प्रतिक्रिया के रूप में आयोजित किया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यालय के घेराव का ऐलान किया गया था। विपक्ष के उस प्रदर्शन में राहुल गांधी, अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने हिस्सा लिया था, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।

    पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और निगरानी की व्यवस्था की। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

  • राहुल गांधी की हिरासत के विरोध में देवास में कांग्रेस का प्रदर्शन, पोस्टर जलाकर जताया विरोध

    राहुल गांधी की हिरासत के विरोध में देवास में कांग्रेस का प्रदर्शन, पोस्टर जलाकर जताया विरोध


    देवास । नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली में राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में मध्य प्रदेश के देवास में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। मंगलवार रात आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, रैली निकाली और पोस्टर जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

    प्रदर्शन की शुरुआत रात करीब साढ़े नौ बजे शहर के मंडूक पुष्कर तालाब क्षेत्र से हुई। यहां बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एकत्र हुए और धरना-प्रदर्शन के बाद विरोध मार्च निकाला। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए सयाजी द्वार पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के नेताओं के पोस्टर जलाकर अपना विरोध जताया।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जवाब देने के बजाय विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि नीट पेपर लीक जैसे संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

    कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

    प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। कार्यकर्ताओं ने छात्रों के हितों की रक्षा और पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई। पूरे प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बनाए रखी गई।

    इस विरोध कार्यक्रम में शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रयास गौतम सहित पार्टी के कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

  • CM कक्ष के बाहर देर रात तक डटे कांग्रेस विधायक, जीतू पटवारी बोले- छात्रों को देशद्रोही कहना गलत

    CM कक्ष के बाहर देर रात तक डटे कांग्रेस विधायक, जीतू पटवारी बोले- छात्रों को देशद्रोही कहना गलत


    मध्य प्रदेश। दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में मध्य प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। प्रदेशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर कांग्रेस विधायक धरने पर बैठे रहे। बाद में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी धरना स्थल पहुंचे और विधायकों का समर्थन करते हुए सरकार पर छात्रों के मुद्दों को दबाने का आरोप लगाया।

    इससे पहले जीतू पटवारी राजभवन के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठे थे। पुलिस ने उन्हें और अन्य प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाकर हिरासत में लिया और वाहन में बैठाया। रिहा होने के बाद वे सीधे विधानसभा पहुंचे, जहां नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

    धरना देर रात करीब 11.30 बजे समाप्त हुआ। धरना खत्म होने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस अगले दिन भी विधानसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगी और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से छात्रों को लेकर दिए गए कथित बयान पर सार्वजनिक माफी की मांग करेगी।

    धरना स्थल पर पहुंचे जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस अपने विधायकों और नेता प्रतिपक्ष के फैसले के साथ खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को देशद्रोही और राजद्रोही बताने वाले मंत्री को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक करने वाले और उन्हें संरक्षण देने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले ही असली दोषी हैं।

    यह पूरा विवाद दिल्ली में छात्र आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ। प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसी कार्रवाई के विरोध में मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी राज्यभर में प्रदर्शन आयोजित किए।

    विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होने के बाद कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। विरोध के दौरान कुछ विधायक फर्श पर लेट गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने उन्हें समझाकर धरना समाप्त कराने की कोशिश की, लेकिन विधायक अपनी मांगों पर अड़े रहे। बाद में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी बातचीत के लिए पहुंचे। इस दौरान उनकी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और अन्य कांग्रेस विधायकों से तीखी बहस हुई।

    भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर, कटनी, खंडवा, हरदा, शाजापुर, टीकमगढ़, रतलाम, डबरा और खरगोन सहित कई जिलों में कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए। कई स्थानों पर रैलियां निकाली गईं, नारेबाजी हुई और कुछ जगहों पर पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। हालांकि देर रात तक अधिकांश स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गए।

    मध्य प्रदेश की राजनीति में इस घटनाक्रम ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। कांग्रेस छात्रों के मुद्दे और राहुल गांधी की गिरफ्तारी को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है, जबकि सत्ता पक्ष विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहा है।

  • विधानसभा में दिनभर सियासी संग्राम, UCC बिल पास तो पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस का धरना

    विधानसभा में दिनभर सियासी संग्राम, UCC बिल पास तो पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस का धरना


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन से लेकर मुख्यमंत्री कक्ष तक राजनीतिक हलचल तेज रही। दिन की शुरुआत समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन से हुई, जबकि दिन का समापन पेपर लीक मामले और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में मुख्यमंत्री कक्ष के सामने कांग्रेस विधायकों के धरने के साथ हुआ। पूरे दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

    सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में समान नागरिक संहिता के विरोध में सांकेतिक प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान तीन सांकेतिक शव रखे गए, जिन पर भाजपा, आरएसएस और एबीवीपी के नाम लिखे कफन ओढ़ाए गए। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि सरकार बेरोजगारी, किसानों और युवाओं के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए अन्य विषयों को प्राथमिकता दे रही है।

    इसके बाद सरकार ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक सदन में पेश किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधेयक को विस्तृत समीक्षा के लिए प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के चलते विधानसभा अध्यक्ष को दो बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में सरकार ने बहुमत के आधार पर UCC सहित चार महत्वपूर्ण विधेयक पारित करा लिए।

    विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेताओं ने संविधान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का मुद्दा उठाया। विपक्षी विधायकों ने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा और सभी पक्षों से राय लेना जरूरी था। सरकार का पक्ष था कि विधेयक पूरी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लाया गया है और इसे पारित किया जाना आवश्यक है।

    शाम को कांग्रेस ने दिल्ली में पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मुद्दा विधानसभा में उठाया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस विषय पर सदन में चर्चा कराने की मांग की, लेकिन अनुमति नहीं मिली। इसके बाद कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के सामने धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

    धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। उनका कहना था कि पेपर लीक जैसे मामलों का असर देशभर के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है, इसलिए इस विषय पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

    सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिस विषय को लेकर कांग्रेस चर्चा चाहती है, वह राज्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला है। सरकार ने विधानसभा के नियमों का हवाला देते हुए चर्चा से इनकार किया और विपक्ष के विरोध को राजनीतिक प्रदर्शन बताया।

    दिनभर चले घटनाक्रम ने एक बार फिर विधानसभा के मानसून सत्र को राजनीतिक रूप से बेहद गर्म बना दिया। एक ओर सरकार ने महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया, तो दूसरी ओर विपक्ष ने छात्रों, युवाओं और संविधान से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की।

  • धरना प्रदर्शन और सियासी तकरार भोपाल में कांग्रेस भाजपा आमने-सामने कई घटनाओं ने खींचा ध्यान

    धरना प्रदर्शन और सियासी तकरार भोपाल में कांग्रेस भाजपा आमने-सामने कई घटनाओं ने खींचा ध्यान


    मध्य प्रदेश। दिल्ली में छात्रों के मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस नेताओं की हिरासत के बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी राजनीतिक माहौल गर्म रहा। विधानसभा परिसर से लेकर राजभवन तक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई घटनाएं चर्चा का केंद्र बनीं, जिनमें एनएसयूआई कार्यकर्ताओं की नारेबाजी में हुई चूक, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का कांग्रेस विधायक के साथ हल्का-फुल्का व्यवहार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की गिरफ्तारी जैसी तस्वीरें सामने आईं।

    छात्र संगठन एनएसयूआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते समय कुछ कार्यकर्ताओं के मुंह से गलती से “नरेंद्र मोदी जिंदाबाद” के नारे निकल गए। हालांकि तुरंत गलती का एहसास होने पर नारे बदल दिए गए, लेकिन घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया।

    उधर मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने दिल्ली की घटना के विरोध में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरना दिया। इसी दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय धरना स्थल पर पहुंचे और कांग्रेस विधायकों से बातचीत की। चर्चा के बाद लौटते समय उन्होंने कांग्रेस विधायक विजय चौरे के गाल पर हल्के अंदाज में थपथपाया। इस घटना को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं और यह दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    राजभवन के सामने भी कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठे। पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया और बाद में उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस वाहन में बैठाया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराते रहे।

    धरने से पहले जारी एक वीडियो संदेश में जीतू पटवारी से भी जुबान फिसल गई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद में धरने पर बैठे हैं, जबकि प्रदर्शन प्रधानमंत्री आवास के बाहर किया गया था। इस बयान को लेकर भी राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर टिप्पणियां देखने को मिलीं।

    विधानसभा के भीतर कांग्रेस ने छात्रों, रोजगार, आरक्षण और किसानों के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने नाटक के माध्यम से भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और एबीवीपी पर निशाना साधा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं और किसानों के मुद्दों की अनदेखी कर रही है।

    भाजपा ने कांग्रेस के प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी बताया। पार्टी नेताओं का कहना था कि कांग्रेस जनता के मुद्दों के बजाय केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रही है। भाजपा विधायक हरदीप सिंह डंग ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष के नेताओं को फिल्मों में अभिनय करना चाहिए।

    इसी बीच विधानसभा के मानसून सत्र से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग भी सामने आया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पहले दिन सदन में देरी से पहुंचे। चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि देर रात तक फुटबॉल विश्व कप फाइनल देखने के कारण सुबह समय पर नहीं उठ सके। यह प्रसंग भी सत्ता और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा।

  • मानसून सत्र में गरमाई सियासत कांग्रेस का वॉकआउट जैसा विरोध सदन 15 मिनट के लिए स्थगित

    मानसून सत्र में गरमाई सियासत कांग्रेस का वॉकआउट जैसा विरोध सदन 15 मिनट के लिए स्थगित


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन राजनीतिक टकराव और तीखी बहसों के नाम रहा। दिल्ली में छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायकों ने सदन में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में विपक्ष ने इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव के तहत इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ और लगातार शोरगुल के चलते कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    कांग्रेस विधायकों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई और आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को दबाया जा रहा है। विपक्ष ने यह भी कहा कि छात्रों के सम्मान और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर सरकार जवाब देने से बच रही है। वहीं सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के विरोध को केवल राजनीतिक प्रदर्शन और मीडिया में सुर्खियां बटोरने का प्रयास बताया।

    शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दिल्ली में छात्रों के साथ हुई घटना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि छात्रों का अपमान किया गया और उनके खिलाफ बल प्रयोग हुआ। उन्होंने इस विषय पर सदन में चर्चा कराने की मांग की। जवाब में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यह मामला मध्य प्रदेश के अधिकार क्षेत्र से बाहर का है और विधानसभा के नियमों के अनुसार इस पर चर्चा नहीं कराई जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से सूचना निर्धारित समय के बाद दी गई थी।

    सदन में प्रश्नकाल के दौरान भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा गया। विधायकों ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था, आदिवासियों की जमीन, किसानों के लंबित मुआवजे, केन-बेतवा परियोजना, भोपाल सिटी लिंक परियोजना पर लगाए गए जुर्माने, वसीयत के आधार पर नामांतरण और चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना जैसे विषयों पर सरकार को घेरा।

    शिवपुरी की चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना पर कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने 167 करोड़ रुपये की परियोजना में भ्रष्टाचार और किसानों तक पानी नहीं पहुंचने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि वर्षों बाद भी किसानों को परियोजना का लाभ नहीं मिला और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इसके जवाब में मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि परियोजना पूरी हो चुकी है और हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जहां भी तकनीकी खामियां होंगी, वहां जांच कराकर सुधार कराया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी परियोजना का निरीक्षण कर कमियों को दूर करने के निर्देश दिए।

    पेसा एक्ट और सोलर प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण का मुद्दा भी सदन में गूंजा। विधायक बाला बच्चन ने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसानों को नोटिस दिए जा रहे हैं। हालांकि राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि किसी भी भूमि का अधिग्रहण नहीं किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में भूमि से जुड़े मामलों में स्थानीय समुदाय के अधिकारों और सामूहिक हितों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

    सत्र के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक को सदन ने पारित कर दिया। इसके बाद मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक पर चर्चा शुरू हुई। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने निजी विश्वविद्यालयों के लिए 25 एकड़ भूमि की अनिवार्यता समाप्त किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

    मानसून सत्र के तीसरे दिन विधानसभा के भीतर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, जनहित के मुद्दों पर बहस और विधायी कार्यवाही एक साथ देखने को मिली। आने वाले दिनों में भी किसानों, शिक्षा, आदिवासी अधिकारों और विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर सदन में तीखी बहस जारी रहने की संभावना है।