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  • शिवपुरी में लेब्राडोर की संदिग्ध मौत, शव लेकर थाने पहुंची महिला ने FIR की मांग की

    शिवपुरी में लेब्राडोर की संदिग्ध मौत, शव लेकर थाने पहुंची महिला ने FIR की मांग की


    शिवपुरी मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक पालतू लेब्राडोर कुत्ते की मौत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शांति नगर क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने अपने पड़ोसियों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उसके आठ माह के पालतू लेब्राडोर को लाठियों से पीट-पीटकर मार डाला। घटना के विरोध में महिला शुक्रवार को कुत्ते का शव लेकर फिजिकल थाना पहुंची और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    महिला प्रीति परिहार के मुताबिक गुरुवार शाम उनका पालतू लेब्राडोर खाना खाने के बाद घर से बाहर निकल गया था। कुछ देर बाद वह पास स्थित एक आरओ प्लांट संचालक के घर की ओर चला गया। देर रात तक कुत्ता वापस नहीं लौटा तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। इस दौरान आसपास के लोगों से जानकारी मिली कि कुत्ते के साथ मारपीट की गई है।

    प्रीति परिहार का आरोप है कि आरओ प्लांट संचालक, उसके बेटे और ड्राइवर ने मिलकर लाठियों से उनके पालतू कुत्ते की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई। उनका यह भी आरोप है कि घटना के बाद कुत्ते के शव को दूर फेंक दिया गया ताकि मामला सामने न आए।

    महिला का कहना है कि जब वह घटना की जानकारी लेने आरोपियों के घर पहुंचीं तो उनके साथ गाली-गलौज की गई। विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और मारपीट करने की कोशिश भी की गई। शुक्रवार सुबह कुत्ते का शव मिलने के बाद वह उसे लेकर सीधे फिजिकल थाना पहुंचीं और पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    अपनी शिकायत में महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित आरओ प्लांट में रात के समय संदिग्ध और अनैतिक गतिविधियां संचालित होती हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    फिजिकल थाना पुलिस का कहना है कि शिकायत प्राप्त हो गई है। मामले में लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • जली लाश के पीछे छिपा था खौफनाक सच फोरेंसिक एक्सपर्ट के एक सुराग ने पहुंचाया पुलिस को कातिल तक

    जली लाश के पीछे छिपा था खौफनाक सच फोरेंसिक एक्सपर्ट के एक सुराग ने पहुंचाया पुलिस को कातिल तक


    इंदौर  इंदौर में बैंककर्मी पलक केशव हत्याकांड ने यह साबित कर दिया कि किसी भी आपराधिक मामले में फोरेंसिक विज्ञान की भूमिका कितनी अहम होती है। जिस घटना को शुरुआती तौर पर आग लगने से हुई दुर्घटना माना जा रहा था वही मामला फोरेंसिक विशेषज्ञों की सतर्कता और वैज्ञानिक जांच के कारण हत्या में बदल गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले ही विशेषज्ञों ने पुलिस को स्पष्ट संकेत दे दिए थे कि युवती की मौत आग से नहीं बल्कि पहले उसकी हत्या की गई और बाद में सबूत मिटाने के लिए शव को जलाया गया।

    हरदा जिले के टिमरनी की रहने वाली पलक इंदौर में किराए के मकान में रहकर बैंक में नौकरी कर रही थी। 25 जुलाई को उसका जला हुआ शव कमरे में मिला था। शुरुआती जांच में यह माना गया कि आग लगने से उसकी मौत हुई है लेकिन जब शव पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल पहुंचा तो फोरेंसिक विशेषज्ञों ने शरीर पर मौजूद चोटों और जलने के निशानों का बारीकी से परीक्षण किया। जांच में सामने आया कि सिर गर्दन और चेहरे पर गंभीर चोटें थीं जबकि शरीर पर आग से हुए निशान मृत्यु के बाद के थे। इससे साफ हो गया कि पहले हत्या की गई और बाद में आग लगाकर इसे हादसे का रूप देने की कोशिश की गई।

    फोरेंसिक विशेषज्ञों के इस इनपुट के बाद पुलिस ने जांच का पूरा फोकस बदल दिया। तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस दतिया निवासी मयंक शाक्य तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पिछले पांच वर्षों से पलक के संपर्क में था और उससे शादी करना चाहता था। हालांकि पलक ने शादी से इनकार कर दिया था क्योंकि उसके परिवार ने उसके लिए दूसरा रिश्ता तय कर दिया था।

    आरोपी के मुताबिक वह दतिया से इंदौर पलक से मिलने पहुंचा था। दोनों पहले सराफा चौपाटी गए और वहां साथ में समय बिताया। कमरे पर लौटने के बाद जब उसने एक बार फिर शादी का प्रस्ताव रखा तो पलक ने साफ मना कर दिया। इसी बात पर दोनों के बीच विवाद हुआ और गुस्से में आकर आरोपी ने पहले पलक का गला घोंट दिया। हत्या के बाद उसने शव के ऊपरी हिस्से पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी ताकि घटना को दुर्घटना साबित किया जा सके। इतना ही नहीं उसने रसोई में गैस चूल्हे के पास शव रखकर हादसे जैसा माहौल बनाने का प्रयास भी किया और अपने जले हुए कपड़े साथ लेकर वहां से फरार हो गया।

    एमवाय अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ बजरंग कुमार सिंह ने बताया कि ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम के दौरान मिलने वाले छोटे से छोटे संकेत भी जांच की दिशा बदल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संवेदनशील मामलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी पोस्टमार्टम के समय जरूरी होनी चाहिए ताकि चिकित्सकों और जांच एजेंसियों के बीच तत्काल समन्वय स्थापित हो सके और अपराध की तह तक जल्दी पहुंचा जा सके।

    पलक हत्याकांड एक बार फिर यह साबित करता है कि आधुनिक फोरेंसिक तकनीक अपराधियों को कानून से बचने नहीं देती। वैज्ञानिक जांच और पुलिस की सतर्कता के कारण इस मामले का खुलासा बेहद कम समय में हो गया और आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच गया। यह घटना समाज के लिए भी एक संदेश है कि रिश्तों में अस्वीकार को स्वीकार करना सीखना जरूरी है क्योंकि जुनून और हिंसा केवल जीवन ही नहीं बल्कि कई परिवारों की खुशियां भी छीन लेती है।

  • शादी से मना करना पड़ा भारी: दतिया से इंदौर पहुंचा प्रेमी, बैंककर्मी युवती की हत्या कर आग लगाकर हादसा दिखाने की साजिश

    शादी से मना करना पड़ा भारी: दतिया से इंदौर पहुंचा प्रेमी, बैंककर्मी युवती की हत्या कर आग लगाकर हादसा दिखाने की साजिश


    इंदौर । इंदौर में बैंककर्मी युवती की हत्या के मामले में पुलिस ने ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया है। पांच साल पुराने प्रेम संबंध का अंत बेहद दर्दनाक तरीके से हुआ जब शादी से इनकार करने पर प्रेमी ने अपनी ही प्रेमिका की गला घोंटकर हत्या कर दी और बाद में सबूत मिटाने के लिए शव पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। पुलिस ने आरोपी को दतिया से गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

    मामला इंदौर के खजराना थाना क्षेत्र के तपेश्वरी बाग का है जहां 26 वर्षीय पलक केशव किराए के कमरे में रहती थीं और एक निजी बैंक में कार्यरत थीं। शनिवार रात उनके कमरे से जला हुआ शव बरामद होने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। शुरुआती जांच में घटना को हादसा मानने की आशंका जताई जा रही थी लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि युवती की मौत आग से नहीं बल्कि दम घुटने के कारण हुई थी जिसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी।

    जांच के दौरान पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और मोबाइल कॉल डिटेल्स का विश्लेषण किया। इससे पता चला कि घटना से एक दिन पहले दतिया निवासी मयंक शाक्य पलक से मिलने उसके कमरे पर आया था। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को दतिया से हिरासत में लिया और पूछताछ में उसने हत्या की बात स्वीकार कर ली।

    पुलिस के अनुसार मयंक और पलक पिछले करीब पांच वर्षों से एक-दूसरे के संपर्क में थे। दोनों के बीच प्रेम संबंध था और मयंक शादी करना चाहता था लेकिन पलक इसके लिए तैयार नहीं थीं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। घटना वाले दिन भी दोनों के बीच इसी मुद्दे पर कहासुनी हुई जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले गई। गुस्से में आरोपी ने पलक का गला घोंट दिया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    हत्या के बाद आरोपी ने अपराध को छिपाने की पूरी कोशिश की। उसने कमरे में पेट्रोल छिड़ककर शव को आग लगा दी ताकि मामला दुर्घटना या आग लगने की घटना जैसा दिखाई दे। इतना ही नहीं उसने किचन का गैस बर्नर भी खुला छोड़ दिया जिससे पुलिस को भ्रमित किया जा सके। हालांकि वैज्ञानिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने उसकी पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।

    जब दो दिन तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला और आसपास के लोगों को संदेह हुआ तो उन्होंने दरवाजा तोड़कर अंदर देखा। कमरे के भीतर जला हुआ शव मिलने के बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने सबूत जुटाए और जांच के बाद हत्या की पुष्टि हुई।

    फिलहाल आरोपी को इंदौर लाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए यह भी पता लगाने में जुटी है कि हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी या विवाद के दौरान अचानक वारदात को अंजाम दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर रिश्तों में बढ़ती हिंसा और अस्वीकार किए जाने की मानसिकता से उपजने वाले गंभीर अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

  • सरकारी खजाने पर डाका इंदौर में 8 करोड़ के गबन मामले में नया खुलासा आरोपी के खाते में पहुंचे थे 13.72 लाख रुपए

    सरकारी खजाने पर डाका इंदौर में 8 करोड़ के गबन मामले में नया खुलासा आरोपी के खाते में पहुंचे थे 13.72 लाख रुपए


    इंदौर । इंदौर में करीब 8 करोड़ रुपए के शासकीय धन के गबन से जुड़े बहुचर्चित मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। रावजी बाजार थाना पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत से तीन दिन की पुलिस रिमांड हासिल की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी के बैंक खाते में शासकीय मद से 13 लाख 72 हजार रुपए ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम का इस्तेमाल कहां और किस तरह किया गया तथा इस पूरे घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

    यह मामला मार्च 2023 में सामने आया था जब तत्कालीन संयुक्त कलेक्टर मुनीष सिंह सिकरवार की शिकायत के आधार पर रावजी बाजार थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने मिलाप चौहान रंजीत करोड़ मनीषा चौहान राहुल चौहान सहित कई लोगों को आरोपी बनाया था। इसके बाद लगातार जांच का दायरा बढ़ता गया और कई अहम जानकारियां सामने आईं।

    पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के बैंक खातों से जुड़ी जानकारी का दुरुपयोग किया। जिन खातों में तकनीकी कारणों से भुगतान नहीं हो पाया था उन खातों की जानकारी हासिल कर आरोपियों ने फर्जी स्वीकृति आदेश तैयार किए। इसके बाद वास्तविक हितग्राहियों के बैंक खातों की जगह अपने परिजनों दोस्तों और परिचितों के बैंक खातों की जानकारी दर्ज कर दी गई। इसी फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी राशि दोबारा जनरेट कर अलग-अलग निजी खातों में ट्रांसफर की जाती रही।

    जांच एजेंसियों के अनुसार इसी तरीके से लगभग 8 करोड़ रुपए की शासकीय राशि का गबन किया गया। यह मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की थी। अब तक कई आरोपियों की भूमिका सामने आ चुकी है और लगातार नए तथ्य भी उजागर हो रहे हैं।

    इसी कड़ी में पुलिस ने सोमवार को सर्वहारा नगर परदेशीपुरा निवासी मनोज उर्फ हल्लू को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि सह आरोपी रंजीत करोड़ ने सरकारी मद से मनोज के बैंक खाते में 13 लाख 72 हजार रुपए ट्रांसफर किए थे। पुलिस का दावा है कि इस रकम का उपयोग आरोपी और उसके सहयोगियों ने विभिन्न कार्यों में किया। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस राशि का कितना हिस्सा निकाला गया कितना खर्च हुआ और क्या इसे आगे अन्य खातों में भी भेजा गया।

    पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में इस पूरे घोटाले से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि सरकारी धन के गबन की इस साजिश में किसकी क्या भूमिका थी और किन लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा बैंक खातों में राशि ट्रांसफर कराने में मदद की।

    यह मामला सरकारी वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रशासन का कहना है कि पूरे प्रकरण की गहन जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का उद्देश्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है बल्कि गबन की पूरी राशि का हिसाब जुटाना और सरकारी धन की रिकवरी सुनिश्चित करना भी है।

  • इंदौर में दो दर्दनाक घटनाएं ई रिक्शा चालक ने इलाज के दौरान तोड़ा दम मासूम की मौत के मामले में ठेकेदार पर कसा शिकंजा

    इंदौर में दो दर्दनाक घटनाएं ई रिक्शा चालक ने इलाज के दौरान तोड़ा दम मासूम की मौत के मामले में ठेकेदार पर कसा शिकंजा


    इंदौर । इंदौर में दो अलग-अलग घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और निर्माण स्थलों पर बरती जाने वाली लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सड़क हादसे में घायल ई रिक्शा चालक ने कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद अस्पताल में दम तोड़ दिया तो दूसरी ओर चार साल के मासूम की निर्माणाधीन मकान की खुली पानी की टंकी में डूबकर हुई मौत के मामले में पुलिस ने ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। दोनों घटनाओं ने शहरवासियों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

    पहली घटना बाणगंगा थाना क्षेत्र की है जहां पंचम की फेल निवासी 38 वर्षीय कपिल रमनवाल बीते 24 जुलाई की शाम अपने ई रिक्शा से गुजर रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रहे दूसरे वाहन को बचाने के प्रयास में उनका ई रिक्शा असंतुलित होकर पलट गया। हादसा इतना गंभीर था कि कपिल के सिर हाथ और पैर में गहरी चोटें आईं। राहगीरों और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तत्काल एमवाय अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा था। कई दिनों तक इलाज के बाद सोमवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली।

    पुलिस ने बताया कि कपिल पिछले कई वर्षों से ई रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। उनके परिवार में माता पिता दो बच्चे और एक भाई हैं। उनकी असमय मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने मर्ग कायम कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें किसी अन्य वाहन की भी भूमिका थी।

    दूसरी घटना कनाड़िया क्षेत्र की है जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया। यहां चार वर्षीय रुद्र चौहान की निर्माणाधीन मकान परिसर में बनी खुली पानी की टंकी में गिरने से मौत हो गई थी। घटना 10 जुलाई की बताई गई है। पुलिस जांच में सामने आया कि बच्चे के पिता गोलू काम पर गए हुए थे जबकि मां पूजा घर पर दोनों बच्चों के साथ मौजूद थीं। खेलते खेलते रुद्र घर से निकलकर पास के निर्माणाधीन मकान तक पहुंच गया जहां सुरक्षा के कोई पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। खुली पानी की टंकी में गिरने से उसकी मौत हो गई।

    घटना के बाद परिजनों ने बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार राजेश पवैया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। जांच में यह सामने आया कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था जिससे यह दुखद हादसा हुआ।

    दोनों घटनाएं यह संकेत देती हैं कि सड़क पर सावधानी और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय लोगों ने भी मांग की है कि शहर में निर्माण स्थलों पर सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • पांच हत्याओं के सनसनीखेज मामले में जांच तेज फरार आरोपी ऋतुराज हिरासत में बुधगांव कनेक्शन और डॉक्टर की डिग्री भी जांच के घेरे में

    पांच हत्याओं के सनसनीखेज मामले में जांच तेज फरार आरोपी ऋतुराज हिरासत में बुधगांव कनेक्शन और डॉक्टर की डिग्री भी जांच के घेरे में


    नरसिंहपुर । नरसिंहपुर जिले के बहुचर्चित पांच हत्याकांड की जांच में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। 19 जुलाई को इंदिरानगर में हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड में फरार चल रहे आरोपी ऋतुराज को पुलिस ने रविवार शाम हिरासत में ले लिया। आरोपी को जबलपुर के मढ़ाताल थाना क्षेत्र से नरसिंहपुर लाया गया है जहां उससे पूरे घटनाक्रम और फरार आरोपियों के संबंध में गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि उसकी पूछताछ से मामले के कई अहम राज सामने आ सकते हैं।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी के जबलपुर में होने की सूचना मिलने के बाद नरसिंहपुर पुलिस की विशेष टीम वहां पहुंची और उसे अभिरक्षा में लेकर जिले आई। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आरोपी ने स्वयं थाने में पहुंचकर आत्मसमर्पण किया था या पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। फिलहाल जांच एजेंसियां उससे हत्या की साजिश वारदात की योजना और अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर लगातार पूछताछ कर रही हैं।

    इस हत्याकांड में अब तक कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें आनंद लोधी अनुज लोधी और राजा पटेल को दो दिन की पुलिस रिमांड पर लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पूछताछ की गई। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद तीनों आरोपियों को सोमवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। पूछताछ के दौरान पुलिस ने हत्या की साजिश पैसों के लेनदेन और फरार आरोपियों की लोकेशन से जुड़े सवाल किए लेकिन पुलिस के अनुसार तीनों आरोपी पहले दिए गए बयानों पर ही कायम रहे और फरार आरोपियों प्रीतम तथा शुभम के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दे सके।

    जांच के दौरान पुलिस का फोकस अब घटना के बाद सामने आए बुधगांव कनेक्शन पर भी है। पुलिस आनंद लोधी के उस दावे की पड़ताल कर रही है जिसमें उसने वारदात के बाद बुधगांव पहुंचकर सतीश पटेल के यहां वाहन छोड़ने की बात कही थी। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इस घटनाक्रम में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी या नहीं और आरोपी के बयान कितने तथ्यात्मक हैं।

    मामले में गिरफ्तार जबलपुर निवासी डॉ. अमित खरे भी जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं। पुलिस अब उनकी शैक्षणिक योग्यता और मेडिकल डिग्री का सत्यापन कराने की प्रक्रिया में जुटी है। इसके लिए जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से पत्राचार किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनकी डिग्री वैध है या नहीं। पुलिस का मानना है कि जांच के इस पहलू से भी कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

    पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा ने बताया कि फरार आरोपी ऋतुराज से पूछताछ जारी है और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं फरार अन्य आरोपियों की तलाश लगातार जारी है। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गहन जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • सराफा दुकान में चोरी की बड़ी साजिश नाकाम गैस कटर लेकर पहुंचे बदमाश गिरफ्तार गिरोह का सरगना अब भी फरार

    सराफा दुकान में चोरी की बड़ी साजिश नाकाम गैस कटर लेकर पहुंचे बदमाश गिरफ्तार गिरोह का सरगना अब भी फरार


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले की बैराड़ पुलिस ने सराफा दुकान में चोरी की कोशिश करने वाले अंतरजिला गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई टाटा नेक्सॉन कार 315 बोर का एक देशी कट्टा और तीन जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। मामले में गिरोह का सरगना समेत अन्य फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे गिरोह को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    थाना प्रभारी सुरेश शर्मा ने बताया कि बैराड़ स्थित प्रिंस ज्वेलर्स के संचालक जगदीश प्रसाद गुप्ता ने 22 जुलाई को चोरी के प्रयास की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार 21 जुलाई की रात दुकान बंद कर घर जाने के बाद करीब 1 बजकर 20 मिनट पर पुलिस ने दुकान के बाहर आग जैसी स्थिति होने की सूचना दी। जब मौके पर पहुंचकर देखा गया तो पता चला कि बदमाश गैस कटर की मदद से दुकान का ताला काटकर अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस की आहट मिलते ही आरोपी मौके से फरार हो गए।

    घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर तीन संदिग्ध बदमाश गैस कटर से ताला काटते दिखाई दिए। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों मुखबिरों की सूचना और फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू की। जांच में रिंकू उर्फ योगेश कुशवाह निवासी जौरा राकेश कुशवाह और उनके साथियों की संलिप्तता सामने आई।

    पुलिस को 26 जुलाई को सूचना मिली कि गिरोह के सदस्य टाटा नेक्सॉन कार से पहाड़गढ़ की ओर आने वाले हैं। सूचना के आधार पर सहसराम पहाड़गढ़ मार्ग पर घेराबंदी की गई और संदिग्ध कार को रोक लिया गया। कार में सवार सौरभ कुशवाह निवासी भूराडाढ़ा जिला मुरैना और आकाश रावत निवासी भूपतपुरा जौरा को गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी के दौरान सौरभ के पास से 315 बोर का देशी कट्टा और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए।

    पूछताछ में सौरभ ने खुलासा किया कि उसका जीजा रिंकू उर्फ योगेश कुशवाह पूरे गिरोह का सरगना है। उसने राकेश कुशवाह देवेंद्र उर्फ देवू उर्फ चुटिया सविता और अन्य साथियों के साथ मिलकर बैराड़ की सराफा दुकानों को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। योजना के तहत रिंकू गैस कटर लेकर आया था जबकि सौरभ और देवू हथियारों के साथ पहुंचे थे। वहीं आकाश नशे की हालत में कार में ही सो गया था। इसी दौरान पुलिस की भनक लगने पर सभी आरोपी बिना चोरी किए मौके से फरार हो गए।

    पूछताछ में यह भी सामने आया कि सौरभ और रिंकू पहले भी धौलपुर भिंड और आगरा में चोरी के मामलों में जेल जा चुके हैं। पुलिस के अनुसार रिंकू पर विभिन्न जिलों में चोरी के कई मामले दर्ज हैं और वही पूरे गिरोह का संचालन करता है। फिलहाल पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल नेक्सॉन कार हथियार और कारतूस जब्त कर लिए हैं। फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा कर दिया जाएगा।

  • राजधानी भोपाल में पुलिस की बड़ी कार्रवाई इतवारा इलाके में 200 पुलिसकर्मियों का फ्लैग ऑपरेशन गांजा समेत नशीले पदार्थ जब्त

    राजधानी भोपाल में पुलिस की बड़ी कार्रवाई इतवारा इलाके में 200 पुलिसकर्मियों का फ्लैग ऑपरेशन गांजा समेत नशीले पदार्थ जब्त


    भोपाल। राजधानी भोपाल के संवेदनशील माने जाने वाले इतवारा इलाके में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात पुलिस ने नशे के कारोबार और आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया। डीसीपी जोन तीन आयुष गुप्ता के नेतृत्व में करीब 200 पुलिसकर्मियों की टीम ने सुनियोजित तरीके से इलाके के 24 से अधिक घरों और संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। देर रात शुरू हुआ यह ऑपरेशन कई घंटों तक चलता रहा जिससे पूरे इलाके में हड़कंप की स्थिति बन गई।

    पुलिस की यह कार्रवाई पहले से तैयार रणनीति के तहत की गई। बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ अलग अलग टीमों ने एक ही समय पर कई स्थानों पर छापेमारी की ताकि किसी भी संदिग्ध को भागने या सबूत नष्ट करने का मौका न मिल सके। कार्रवाई के दौरान कई घरों की गहन तलाशी ली गई और पुलिस ने गांजा सहित अन्य अवैध मादक पदार्थ बरामद किए। हालांकि जब्त किए गए नशीले पदार्थों की कुल मात्रा का आधिकारिक खुलासा अभी नहीं किया गया है।

    छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक दर्जन से अधिक संदिग्ध लोगों को हिरासत में भी लिया है। अधिकारियों के अनुसार इन सभी से पूछताछ की जा रही है और उनके आपराधिक रिकॉर्ड तथा नशे के अवैध कारोबार से संभावित संबंधों की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा या पूछताछ के बाद कुछ को छोड़ दिया जाएगा।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और मामले की जांच लगातार जारी है। बरामद मादक पदार्थों की जांच की जा रही है तथा अन्य संभावित ठिकानों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का उद्देश्य नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना और इस अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना है।

    सूत्रों के अनुसार यह अभियान लंबे समय से मिल रही शिकायतों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर चलाया गया। इतवारा क्षेत्र में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही थी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने एक साथ बड़े स्तर पर कार्रवाई का फैसला लिया ताकि पूरे नेटवर्क को एक ही अभियान में निशाना बनाया जा सके।

    पुलिस ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से साझा की जाएगी। इसमें बरामद नशीले पदार्थों की मात्रा गिरफ्तार आरोपियों की संख्या और उनके खिलाफ दर्ज किए गए मामलों की पूरी जानकारी दी जाएगी। पुलिस ने यह भी संकेत दिए हैं कि राजधानी में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आगे भी इसी तरह के विशेष अभियान लगातार जारी रहेंगे ताकि युवाओं को नशे के जाल से बचाया जा सके और शहर में कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।

  • झांसी में महिला प्रधान के बेटे की हत्‍या मामले में खुलासा, पिस्टल से हुई थी हत्या, सिर में फंसी मिली गोली

    झांसी में महिला प्रधान के बेटे की हत्‍या मामले में खुलासा, पिस्टल से हुई थी हत्या, सिर में फंसी मिली गोली

    झांसी। झांसी में महिला प्रधान के बेटे और एलएलबी छात्र संजय सिंह उर्फ संजू (33) की हत्या पिस्टल से किए जाने की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई है। शुक्रवार शाम डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम के दौरान संजय के सिर के भीतर फंसी गोली बरामद की। गोली सिर के पिछले हिस्से में मारी गई थी, जिससे गंभीर चोट और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई। अब तक पुलिस देशी तमंचे से हत्या की आशंका जता रही थी, लेकिन पोस्टमार्टम के बाद स्पष्ट हो गया कि हमलावर ने पिस्टल का इस्तेमाल किया था।

    रेस्टोरेंट में दोस्तों के साथ खाना खाते समय मारी गोली
    गुरुवार रात संजय अपने चार दोस्तों के साथ इलाइट चौराहे से करीब 300 मीटर दूर स्थित द मेड किचन रेस्टोरेंट में भोजन करने गया था। इसी दौरान एक युवक अंदर पहुंचा और संजय के सिर पर सटाकर गोली मार दी। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। मामले में मृतक के भाई सर्वेश सिंह की शिकायत पर नवाबाद थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।

    पेशेवर शूटर होने का शक
    पुलिस का मानना है कि वारदात को जिस तरीके से अंजाम दिया गया, उससे पेशेवर शूटर की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रत्यक्षदर्शियों और सीसीटीवी फुटेज के अनुसार आरोपी सीधे संजय की टेबल तक पहुंचा, बेहद करीब से एक गोली चलाई और पिस्टल लहराते हुए बाहर निकल गया। पार्किंग में मौजूद गार्ड ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह धक्का देकर बाहर खड़ी बिना नंबर की बाइक पर साथी के साथ फरार हो गया।

    महज छह मिनट में दिया वारदात को अंजाम
    सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक आरोपी रात 9:23 बजे रेस्टोरेंट में दाखिल हुआ और 9:29 बजे हत्या कर बाहर निकल गया। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी बिहारी तिराहा होते हुए रक्सा टोल की दिशा में भागे। एसओजी और सर्विलांस टीम ने घटनास्थल से लेकर रक्सा टोल तक लगे 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली है और कुछ अहम सुराग हाथ लगे हैं।

    छह साल से झांसी में रह रहा था संजय
    संजय सिंह मूल रूप से गरौठा क्षेत्र के हैवतपुरा गांव का रहने वाला था। उसकी मां रामदेवी गांव की प्रधान हैं। परिवार में बड़ा भाई सर्वेश और बहन रचना हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। संजय अविवाहित था और पिछले छह वर्षों से झांसी में रिश्तेदार के यहां रहकर अधिवक्ता दशरथ सिंह के पास मुंशी का काम करता था।

    दतिया से लौटने के बाद पहुंचे थे रेस्टोरेंट
    संजय के दोस्त शिवम ने बताया कि गुरुवार शाम वह अधिवक्ता दशरथ सिंह और अन्य साथियों के साथ दतिया स्थित पीतांबरा पीठ के दर्शन कर लौटे थे। वापस आने के बाद सभी लोग द मेड किचन रेस्टोरेंट में खाना खाने पहुंचे, जहां संजय ने अपने मित्र धर्मेंद्र को भी बुला लिया। भोजन समाप्त होने के तुरंत बाद एक युवक आया और संजय को गोली मारकर फरार हो गया।

    परिजनों ने रंजिश से किया इनकार, तीन पहलुओं पर जांच
    मृतक के भाई सर्वेश सिंह ने पुलिस को बताया कि परिवार की किसी से कोई दुश्मनी नहीं है और प्रधानी को लेकर भी कोई विवाद नहीं था। हालांकि उन्होंने बताया कि संजय जमीन के कारोबार से भी जुड़ा हुआ था।

    फिलहाल पुलिस जमीन विवाद, लव एंगल और पुरानी रंजिश समेत तीन प्रमुख बिंदुओं पर जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि संजय गांव कम क्यों जाता था और क्या उसके पीछे कोई पुराना विवाद था।

  • देवास में कॉलोनी की सुरक्षा पर सवाल घर के बाहर खड़ी कार पर हमला महिलाओं ने बताई शराबियों की दहशत

    देवास में कॉलोनी की सुरक्षा पर सवाल घर के बाहर खड़ी कार पर हमला महिलाओं ने बताई शराबियों की दहशत


    देवास । देवास की स्वास्थ्य कर्मचारी कॉलोनी में शुक्रवार देर रात हुई तोड़फोड़ की एक घटना ने इलाके के रहवासियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अज्ञात बदमाशों ने घर के बाहर खड़ी एक कार पर शराब की बोतल फेंककर उसका कांच तोड़ दिया। घटना के बाद कॉलोनी में दहशत और आक्रोश का माहौल है। सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

    पीड़ित समता श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी कार रोज की तरह घर के सामने खड़ी थी। देर रात किसी अज्ञात व्यक्ति ने शराब की बोतल फेंककर कार का शीशा तोड़ दिया। सुबह या घटना की जानकारी मिलने पर परिवार बाहर आया तो वाहन क्षतिग्रस्त मिला। उन्होंने बताया कि घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरी वारदात रिकॉर्ड हो गई है और इसकी फुटेज पुलिस को सौंप दी जाएगी ताकि आरोपियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जा सके।

    पुलिस ने आसपास लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगालना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का मानना है कि सीसीटीवी फुटेज से घटना में शामिल लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

    इस घटना के बाद कॉलोनी की महिलाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। समता श्रीवास्तव का आरोप है कि शाम होते ही कुछ असामाजिक तत्व कॉलोनी के आसपास खुलेआम शराब पीते हैं और वहां से गुजरने वाली महिलाओं पर अभद्र टिप्पणियां करते हैं। इससे महिलाओं और परिवारों में लगातार असुरक्षा की भावना बनी रहती है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

    कॉलोनी की अन्य महिलाओं ने भी इसी तरह की शिकायतें दोहराते हुए कहा कि इलाके में शराबियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा आम बात हो गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में और गंभीर घटनाएं हो सकती हैं। रहवासियों ने पुलिस प्रशासन से नियमित गश्त बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखने की मांग की है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कॉलोनी में खड़े वाहनों के साथ तोड़फोड़ और उपद्रव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से रहवासियों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका आरोप है कि असामाजिक तत्वों के खिलाफ समय पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलंद हो रहे हैं और वे बेखौफ होकर ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

    पीड़ित परिवार ने मामले की लिखित शिकायत कोतवाली थाने में देने की बात कही है। वहीं कॉलोनी के लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए शराब पीकर उपद्रव करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो और दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कानून के तहत कड़ी सजा दिलाई जाए ताकि कॉलोनी में रहने वाले परिवार सुरक्षित माहौल में रह सकें।

    कोतवाली पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज सहित उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।