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  • दिल्ली एयरपोर्ट पर सीजेपी नेताओं को हिरासत में लेने के दौरान विमान में महिला यात्री और सौरव दास के बीच तीखी बहस, वीडियो वायरल

    दिल्ली एयरपोर्ट पर सीजेपी नेताओं को हिरासत में लेने के दौरान विमान में महिला यात्री और सौरव दास के बीच तीखी बहस, वीडियो वायरल

    नई दिल्ली । दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को विमान के भीतर से हिरासत में लिए जाने के दौरान विवाद सामने आया। इस कार्रवाई के समय पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और एक महिला यात्री के बीच तीखी बहस हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सीजेपी के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के विरोध में जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे।

    विमान के एयरपोर्ट पर उतरने के बाद दिल्ली पुलिस की टीम उसके भीतर पहुंची। पुलिस ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया। इसी दौरान विमान में मौजूद यात्रियों और पार्टी नेताओं के बीच बहस की स्थिति बनी। सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मियों को सौरव दास को विमान से बाहर ले जाते हुए देखा जा सकता है। उसी समय एक महिला यात्री उनसे कुछ कहती दिखाई देती है, जिसके बाद दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो जाती है।

    वीडियो में महिला यात्री सौरव दास से नाराजगी जताते हुए उन्हें “शर्म करो” कहती सुनाई देती है। इससे पहले दास भी तल्ख लहजे में प्रतिक्रिया देते नजर आते हैं। इसके बाद महिला यात्री की नाराजगी और बढ़ जाती है। फुटेज के एक हिस्से में पुलिस अधिकारियों के विमान में दाखिल होने के दौरान महिला यात्री को हंसते हुए भी देखा जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध वीडियो से यह स्पष्ट नहीं होता कि महिला और सौरव दास के बीच बहस किस बात को लेकर शुरू हुई थी। इस विवाद के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है।

    इस घटनाक्रम के दौरान सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके भी पुलिस की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते दिखाई देते हैं। उनके इंस्टाग्राम लाइव से सामने आए वीडियो में महिला पुलिसकर्मियों समेत पुलिस टीम को विमान के भीतर उनकी ओर बढ़ते देखा जा सकता है। दीपके कहते सुनाई देते हैं कि दिल्ली पुलिस विमान में आ गई है और उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है। इसके बाद वह कहते हैं कि वे गिरफ्तार होने के लिए ही आए हैं और पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर लेना चाहिए।

    वीडियो में अभिजीत दीपके पुलिसकर्मियों के सामने “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे लगाते भी सुनाई देते हैं। उनका यह बयान और विमान के भीतर पुलिस की कार्रवाई से जुड़े दृश्य घटना के प्रमुख हिस्से के रूप में सामने आए हैं। इस दौरान पार्टी के अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। पूरी कार्रवाई उस समय हुई, जब सीजेपी के नेता चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के एसआईआर से जुड़े मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए राजधानी पहुंचे थे।

    प्रदर्शन को लेकर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने बिना पूर्व अनुमति प्रदर्शन या अनधिकृत सभा आयोजित करने पर रोक से संबंधित सुरक्षा कारणों का हवाला दिया। इसी के तहत नेताओं को एयरपोर्ट पर ही रोककर हिरासत में लिया गया। हालांकि, इस मामले में पुलिस कार्रवाई से संबंधित विस्तृत कानूनी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए हिरासत के आधार और आगे की प्रक्रिया को लेकर इससे अधिक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    विमान के भीतर हुई बहस और सीजेपी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। सीजेपी समर्थक पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ प्रतिक्रियाओं में विमान के भीतर हुए विवाद और सह-यात्रियों को हुई संभावित असुविधा पर चर्चा की जा रही है। महिला यात्री और सौरव दास के बीच बहस की वजह स्पष्ट नहीं होने के कारण विवाद के मूल कारण को लेकर स्थिति अब भी साफ नहीं है।

  • CJP नेताओं की हिरासत पर शशि थरूर ने उठाए सवाल, दिल्ली में 22 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और प्रतिबंधों पर जताई चिंता

    CJP नेताओं की हिरासत पर शशि थरूर ने उठाए सवाल, दिल्ली में 22 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और प्रतिबंधों पर जताई चिंता

    नई दिल्ली ।दिल्ली में 10 अक्टूबर को सिटिजन जस्टिस एंड पीस (CJP) के प्रदर्शन के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने राजधानी में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती को युद्ध जैसी स्थिति बताते हुए कहा कि शहर में जिस स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है, वैसी स्थिति उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। थरूर के अनुसार, वह रात दो बजे के बाद राष्ट्रीय राजधानी लौटे और इसके बाद उन्होंने शहर में व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त तथा आवाजाही पर प्रतिबंध देखे।

    थरूर ने कहा कि दिल्ली में हर कुछ सौ मीटर की दूरी पर सुरक्षा चौकियां बनाई गई हैं। सड़कों पर कंक्रीट के बैरिकेड और स्पाइक स्ट्रिप्स लगाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि पूरे शहर में लगभग 22,000 पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। उनके बयान के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था के बीच 250 ट्रेनें रद्द कर दी गईं और 45 मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए गए। कांग्रेस सांसद ने इन व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जताई और राजधानी में आम लोगों की आवाजाही पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया।

    थरूर ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में युवाओं को उनके घरों और सड़कों से हिरासत में लिए जाने की खबरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी चुनावों की निष्पक्षता पर शांतिपूर्ण तरीके से सवाल उठाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने राजधानी के मध्य हिस्से में इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने को भी दमनकारी कदम बताया। उनके अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में नागरिकों के लिए अपनी बात रखना और सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

    कांग्रेस सांसद ने जंतर-मंतर तक पहुंचने पर लगाई गई पाबंदियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस स्थान को नागरिकों के लिए अपनी असहमति व्यक्त करने के उद्देश्य से निर्धारित किया गया था, लेकिन प्रदर्शन के दौरान वहां जाने वाली सड़कों पर भी प्रतिबंध लगा दिए गए। थरूर ने इसे आवागमन की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत होती है, तब इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और ऐसी तत्परता क्यों दिखाई नहीं देती।

    थरूर ने हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि यदि प्रदर्शनकारी सोमवार को दोबारा राजधानी में एकत्र होते हैं, तो क्या प्रशासन फिर से इसी तरह प्रतिबंध लगाएगा। उन्होंने कहा कि चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले नागरिकों के साथ सरकार का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, यदि सरकार चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा रखती है, तो उसे सवाल उठाने वालों का स्वागत करना चाहिए। इसके विपरीत, राजधानी को किले में बदलने जैसी व्यवस्था लोगों के संदेह को कम करने के बजाय बढ़ा सकती है।

    कांग्रेस सांसद ने कहा कि केवल बैरिकेड लगाने से चुनाव आयोग के प्रति लोगों का विश्वास बहाल नहीं होगा। उनके मुताबिक, आयोग जितनी जल्दी जनता के सवालों का जवाब देगा, उतनी जल्दी शांति बहाल होने की संभावना बनेगी। उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती को इस बात से जोड़कर देखा कि संस्थाएं अपने कामकाज पर सवाल उठाने वाले लोगों के साथ कैसा व्यवहार करती हैं। थरूर ने दिल्ली में दिखाई गई व्यवस्था को शर्मनाक और अमानवीय बताया। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण असहमति और चुनावों की निष्पक्षता से जुड़े सवालों का जवाब देना जरूरी है। उन्होंने हिरासत, सुरक्षा प्रतिबंधों और सार्वजनिक आवाजाही से जुड़े मुद्दों पर सरकार तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए।

  • सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़िता के इलाज पर सर गंगा राम अस्पताल को दिए सख्त निर्देश, छुट्टी तक मुफ्त उपचार जारी रखने का आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़िता के इलाज पर सर गंगा राम अस्पताल को दिए सख्त निर्देश, छुट्टी तक मुफ्त उपचार जारी रखने का आदेश

    नई दिल्ली । दिल्ली में एसिड अटैक की शिकार हुई महिला के इलाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सर गंगा राम अस्पताल को निर्देश दिया कि पीड़िता को भर्ती रखकर सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसमें दवाएं, प्लास्टिक सर्जरी और जरूरत के अनुसार अन्य उपचार भी शामिल हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि पीड़िता को तब तक अस्पताल से छुट्टी नहीं दी जाए, जब तक वह वहां से जाने के लिए चिकित्सकीय रूप से फिट न हो जाए और उसे केवल बाह्य रोगी विभाग यानी ओपीडी में उपचार की जरूरत न रह जाए। अदालत ने इलाज पर होने वाले खर्च की परवाह किए बिना उपचार जारी रखने और उसका बिल अदालत में जमा करने को भी कहा।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को मामले पर तत्काल सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने याचिका में सामने आए तथ्यों को चिंताजनक बताया। यह मामला एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास और कल्याण के लिए काम करने वाले संगठन ब्रेव सोल्स फाउंडेशन की ओर से उठाया गया था। संगठन की प्रमुख शाहीन मलिक के मुताबिक, महिला पर छह अक्टूबर को दिल्ली के भजनपुरा इलाके में एसिड अटैक हुआ था। इस हमले में वह लगभग 45 प्रतिशत तक झुलस गई थी।

    शाहीन मलिक ने अदालत को बताया कि कानून के तहत मुफ्त इलाज का अधिकार होने के बावजूद महिला को दिल्ली के बड़े निजी अस्पतालों में पर्याप्त उपचार नहीं मिल पा रहा था। उनके आरोप के मुताबिक, सर गंगा राम अस्पताल और अपोलो अस्पताल ने बर्न वार्ड की सुविधा उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर इलाज से इनकार किया था। पीड़िता को इलाज के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ा। इस स्थिति के बाद संगठन ने मामले में हस्तक्षेप किया और पीड़िता के उपचार के लिए न्यायिक मदद मांगी।

    पीड़िता की मां के अनुसार, हमले के बाद पुलिस कंट्रोल रूम की मदद से उनकी बेटी को सबसे पहले जग प्रवेश चंद्र अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे गुरु तेग बहादुर अस्पताल भेज दिया गया। मां ने बताया कि बेटी को दर्द से जूझते देखना उनके लिए बेहद मुश्किल था और उन्हें लगा कि उसकी परेशानी पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। उनके मुताबिक, गुरुवार दोपहर बेटी को गुरु तेग बहादुर अस्पताल से छुट्टी दिलाकर सर गंगा राम अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद परिवार को उसके इलाज को लेकर लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा।

    मां ने आरोप लगाया कि शुक्रवार रात सर गंगा राम अस्पताल के कर्मचारियों ने परिवार से बाहर से दवाएं खरीदने को कहा। जब उन्होंने बताया कि उनके पास दवाएं खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं, तो शनिवार सुबह उन्हें बेटी को किसी दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए कहा गया। हालांकि, गुरु तेग बहादुर अस्पताल के अतिरिक्त निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार ने वहां इलाज में लापरवाही के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि अस्पताल ने मरीज की जरूरत के अनुसार पूरा उपचार दिया था। उनके मुताबिक, परिवार अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराना चाहता था, इसलिए मरीज को वहां से छुट्टी दिलाई गई।

    याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 397 का हवाला दिया गया है। इस प्रावधान के तहत सरकारी और निजी अस्पतालों को एसिड अटैक पीड़ितों को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा और मुफ्त उपचार उपलब्ध कराना होता है। शाहीन मलिक ने कहा कि पीड़िता और उसके परिवार को इलाज के लिए कई अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने चाहिए थे। उन्होंने एसिड पर प्रतिबंध के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी में इसकी बिक्री जारी रहने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि पीड़िता को इलाज दिलाने के लिए संगठन और वकीलों को हस्तक्षेप करना पड़ा तथा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

  • सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन से रेलवे सतर्क, 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने वाली कई ट्रेनें रद्द, यात्रियों की यात्रा पर असर

    सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन से रेलवे सतर्क, 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने वाली कई ट्रेनें रद्द, यात्रियों की यात्रा पर असर

    नई दिल्ली । राजधानी में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय रेलवे ने कई ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया है। नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने वाली कुछ ट्रेनों को रद्द किया गया है, जबकि कुछ ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है। स्टेशनों के आसपास संभावित भारी यातायात जाम की आशंका के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। इस बदलाव का असर बिहार, मुंबई, हावड़ा और सियालदह से दिल्ली आने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है।

    रेलवे प्रशासन के अनुसार, 9 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे के बाद अपने शुरुआती स्टेशन से रवाना होने वाली ऐसी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें, जिन्हें 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली या हजरत निजामुद्दीन पहुंचना था, उन्हें शुरुआती स्टेशन से ही रद्द करने का फैसला लिया गया है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की पुष्टि कर लें। ट्रेनों के संचालन, रद्द होने और समय में बदलाव से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए रेलवन ऐप और एनटीईएस ऐप देखने को कहा गया है।

    दानापुर मंडल से संबंधित चार ट्रेनों को रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें गाड़ी संख्या 20801 मगध एक्सप्रेस शामिल है। यह ट्रेन 9 अक्टूबर को इस्लामपुर से दोपहर 3:30 बजे रवाना होने वाली थी और अगले दिन दोपहर 12 बजे नई दिल्ली पहुंचने का निर्धारित समय था। प्रदर्शन के मद्देनजर इस ट्रेन का परिचालन रद्द कर दिया गया है।

    गाड़ी संख्या 12309 राजेंद्र नगर-नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस भी रद्द कर दी गई है। यह ट्रेन 9 अक्टूबर को राजेंद्र नगर से शाम 7:10 बजे चलने वाली थी और 10 अक्टूबर को सुबह 7:40 बजे नई दिल्ली पहुंचती। इसके अलावा गाड़ी संख्या 12393 संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस का संचालन भी नहीं होगा। यह ट्रेन राजेंद्र नगर से 9 अक्टूबर को शाम 7:20 बजे रवाना होकर 10 अक्टूबर को सुबह 7:55 बजे नई दिल्ली पहुंचने वाली थी।

    रद्द की गई चौथी ट्रेन गाड़ी संख्या 22361 राजेंद्र नगर-नई दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस है। इसका निर्धारित प्रस्थान समय 9 अक्टूबर को शाम 7:50 बजे था, जबकि नई दिल्ली पहुंचने का समय 10 अक्टूबर को दोपहर 1:10 बजे तय था। इन चारों ट्रेनों के रद्द होने से इनके निर्धारित समय पर यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

    इस बीच, भोपाल होकर चलने वाली मुंबई-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस भी रद्द कर दी गई है। गाड़ी संख्या 22221 को परिचालन संबंधी कारणों से 9 अक्टूबर को उसके शुरुआती स्टेशन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबई से ही रद्द किया गया है। भोपाल स्टेशन से इस ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को यात्रा की योजना दोबारा बनाने और रेलवे की सूचना एवं पूछताछ सेवाओं से अपडेट जानकारी लेने की सलाह दी गई है। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद जताया है।

    पूर्वी रेलवे ने भी शुक्रवार के लिए हावड़ा और सियालदह से दिल्ली आने वाली दो राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द किए जाने की जानकारी दी है। इनमें गाड़ी संख्या 12301 हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस और गाड़ी संख्या 12313 सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस शामिल हैं। इस तरह दिल्ली आने वाली कई प्रमुख ट्रेनों के रद्द होने से यात्रियों को प्रस्थान से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति जांचना जरूरी है। जिन यात्रियों ने इन ट्रेनों में टिकट बुक कराए हैं, उन्हें यात्रा से जुड़ी जानकारी की पुष्टि करके ही स्टेशन के लिए निकलना चाहिए।

  • दिल्ली में CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर विवाद, मौलाना ने लाउडस्पीकर से मुस्लिम समुदाय से शामिल नहीं होने की अपील की

    दिल्ली में CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर विवाद, मौलाना ने लाउडस्पीकर से मुस्लिम समुदाय से शामिल नहीं होने की अपील की


    नई दिल्ली ।दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन को लेकर विवाद सामने आया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को रद्द करने की मांग को लेकर पार्टी ने प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पुलिस की ओर से प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। इसी बीच दिल्ली के हर्ष विहार स्थित एक मस्जिद से मौलाना ने लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों से प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की अपील की है।

    मौलाना ने अपने ऐलान में कहा कि जंतर-मंतर पर होने वाला CJP का प्रदर्शन अवैध है और मुस्लिम समुदाय के लोगों को इसमें शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने लोगों से प्रशासन का सहयोग करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। मौलाना ने कहा कि सरकार ने जंतर-मंतर पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की है। ऐसे में लोगों को वहां जाने से बचना चाहिए और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्रदर्शन में शामिल होने जाता है और उसके साथ कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की नहीं होगी। उन्होंने लोगों से इस चेतावनी को गंभीरता से लेने और प्रस्तावित कार्यक्रम से दूर रहने की अपील दोहराई।

    दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के पीछे निर्धारित प्रक्रिया और सूचना देने से जुड़े नियमों का हवाला दिया है। दिल्ली पुलिस की संयुक्त आयुक्त नूपुर प्रसाद ने बताया कि CJP की ओर से सौरव दास के नाम से 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने के संबंध में आवेदन प्राप्त हुआ था। इस प्रदर्शन का उद्देश्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही की मांग करना बताया गया था। पुलिस ने आवेदन पर विचार करने के बाद पाया कि कार्यक्रम की सूचना बहुत कम समय पहले दी गई थी। निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शन से कम से कम 10 दिन पहले सूचना प्राप्त होनी चाहिए थी। पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई।

    पुलिस ने पार्टी और प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने की योजना बना रहे लोगों को चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद कार्यक्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है कि पुलिस ने इसे आयोजित करने की मंजूरी नहीं दी है। वहीं, मौलाना की अपील भी इसी घटनाक्रम के बीच सामने आई है, जिसमें उन्होंने लोगों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और किसी भी तरह की परेशानी से बचने को कहा है।

    दूसरी ओर, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास ने प्रदर्शन करने के अपने फैसले पर कायम रहने की बात कही है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि 10 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और उन्हें अपने ऊपर लगाए गए गंभीर आरोपों पर जवाबदेही देनी होगी। अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि पुलिस या सुरक्षाकर्मी प्रदर्शनकारियों को रोकेंगे, तो वे जिस स्थान पर रोके जाएंगे, वहीं जंतर-मंतर जैसा प्रदर्शन स्थल बना देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता सरकार के पास हो सकती है, लेकिन सड़कें देश की जनता की हैं। उनके अनुसार, नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से नहीं रोका जाना चाहिए। इस तरह, एक ओर पुलिस ने अनुमति नहीं दी है और कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि दूसरी ओर CJP ने प्रदर्शन करने का ऐलान दोहराया है।

  • दिल्ली में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से रेल यातायात प्रभावित, नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन आने वाली कई ट्रेनें रद्द

    दिल्ली में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से रेल यातायात प्रभावित, नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन आने वाली कई ट्रेनें रद्द

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को होने वाले विरोध प्रदर्शन का असर रेल यात्रियों की आवाजाही पर पड़ने की संभावना है। प्रदर्शन को देखते हुए रेलवे ने नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन आने वाली कई ट्रेनों को रद्द करने का फैसला किया है। इससे शनिवार को दिल्ली पहुंचने की योजना बना रहे यात्रियों को परेशानी हो सकती है। जिन लोगों ने 10 अक्टूबर के लिए ट्रेन का टिकट बुक कराया है, उन्हें घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।

    रेलवे के मुताबिक, 10 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे के बाद अपने शुरुआती स्टेशन से रवाना होने वाली कुछ ट्रेनें रद्द रहेंगी। इस फैसले के दायरे में ऐसी ट्रेनें भी शामिल हैं, जिन्हें शनिवार सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली या हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंचना था। ऐसे में दिल्ली आने वाले यात्रियों के लिए अपनी ट्रेन से संबंधित जानकारी पहले से प्राप्त करना जरूरी है। इससे उन्हें स्टेशन पहुंचने के बाद ट्रेन रद्द होने या यात्रा कार्यक्रम में बदलाव के कारण होने वाली असुविधा से बचने में मदद मिल सकती है।

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन प्रस्तावित है। प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के आसपास भीड़ बढ़ने और यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए कुछ मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने का निर्णय लिया गया है। रेलवे के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को संभावित परेशानियों से बचाने में मदद करना है। प्रदर्शन के दौरान संबंधित इलाकों में आवाजाही बढ़ने की आशंका के कारण यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाते समय सावधानी बरतने की जरूरत है।

    यह विरोध प्रदर्शन चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया जा रहा है। इसके चलते दिल्ली में रेल यात्रियों की आवाजाही पर भी असर पड़ने की संभावना बताई गई है। खासकर उन यात्रियों को अपनी यात्रा से जुड़ी जानकारी पर ध्यान देना चाहिए, जिन्हें शनिवार सुबह दिल्ली पहुंचना है। ट्रेन रद्द होने की स्थिति में यात्रियों को अपने कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ सकता है। इसलिए स्टेशन के लिए रवाना होने से पहले ट्रेन की निर्धारित स्थिति की पुष्टि करना महत्वपूर्ण है।

    यात्री अपनी ट्रेन के संचालन और रद्द होने से संबंधित जानकारी रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या नेशनल ट्रेन इन्क्वायरी सिस्टम (एनटीईएस) ऐप के माध्यम से देख सकते हैं। इन माध्यमों से यह पता लगाया जा सकता है कि संबंधित ट्रेन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चल रही है या उसे रद्द किया गया है। यात्रियों को केवल पुराने टिकट या पहले से तय समय पर निर्भर रहने के बजाय यात्रा से पहले उपलब्ध ताजा जानकारी जांचनी चाहिए। खासकर नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन आने वाली ट्रेनों से सफर करने वाले लोगों को यह जांच कर लेनी चाहिए कि उनकी ट्रेन पर रद्दीकरण का असर पड़ा है या नहीं।

  • जंतर-मंतर पर तीन महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप, दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी

    जंतर-मंतर पर तीन महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप, दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी

    नई दिल्ली ।दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। क्राइम ब्रांच अब संबंधित महिला पत्रकारों के बयान दर्ज करेगी और पूरे मामले की जांच करेगी। आरोप उस समय से जुड़ा है, जब प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई की जा रही थी। महिला पत्रकारों में से एक ने दावा किया है कि मौके पर कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी।

    एक महिला पत्रकार के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के दौरान AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को पकड़ा जा रहा था। इसी दौरान उसने ACP विवेक भगत पर उसके सीने पर हाथ मारने और धक्का देकर वहां से चले जाने का आरोप लगाया। महिला पत्रकार का दावा है कि घटना के समय वहां महिला पुलिसकर्मी नहीं थी। आरोप सामने आने के बाद मामले को जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है, जो अब संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करेगी और घटना से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी।

    मामले को लेकर CJP की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। CJP ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने यौन उत्पीड़न की शिकायत पर FIR दर्ज करने से इनकार किया। संगठन के अनुसार, पुलिस का कहना है कि FIR दर्ज करने से पहले CCTV फुटेज की जांच की जाएगी। CJP ने सवाल उठाया कि क्या पुलिस गंभीर शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय संबंधित ACP को बचाने की कोशिश कर रही है। इसी मुद्दे को लेकर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने रविवार को पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर प्रदर्शन भी किया।

    इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि जंतर-मंतर पर लगातार दो दिनों तक हुए प्रदर्शनों से जुड़ी है। 3 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी लगातार दूसरे दिन जंतर-मंतर पहुंचे थे। इनमें AISA समेत छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोग शामिल थे। इस दौरान करीब 200 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इससे एक दिन पहले 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर और आसपास हुए प्रदर्शन के दौरान करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था। बाद में इनमें से कई लोगों को छोड़ दिया गया। दिल्ली पुलिस ने 2 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर कम से कम तीन FIR भी दर्ज की थीं।

    इन प्रदर्शनों के पीछे चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद भी बताया गया है। SIR को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने कहा था कि ये फैसले और आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए। इसके बाद SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए गए। आयोग ने कहा कि किसी संस्था में चर्चा के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामान्य हैं। आयोग के अनुसार उसके सभी आदेशों को कानूनी आधार हासिल है और वे तय कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जारी किए गए हैं।

  • मुंबई के बाद दिल्ली कूच करेगी CJP, दिपके का ऐलान- ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो जंतर-मंतर पर जुटेंगे

    मुंबई के बाद दिल्ली कूच करेगी CJP, दिपके का ऐलान- ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो जंतर-मंतर पर जुटेंगे


    नई दिल्ली। मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके ने अब दिल्ली कूच का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 10 अक्टूबर को देशभर से लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटेंगे। दिपके ने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन बताया है।

    2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी अपनी अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद बड़ी संख्या में समर्थक वहां पहुंचे। प्रदर्शन में युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले पोस्टर और तिरंगे नजर आए।

    शिवाजी पार्क में जुटी बड़ी भीड़

    शिवाजी पार्क बड़े राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों के लिए जाना जाता है। प्रदर्शन के दौरान तेज गर्मी और बैरिकेडिंग के बावजूद बड़ी संख्या में युवा वहां पहुंचे। दादर स्टेशन और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

    मंच से दिपके ने इसे “जंतर-मंतर 2.0” बताते हुए ‘चलो दिल्ली’ का नारा दिया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो देशभर के युवा और Gen-Z दिल्ली पहुंचेंगे। CJP की ओर से आगे अन्य शहरों में भी आंदोलन करने की बात कही गई है।

    वोटर लिस्ट को लेकर दिपके के क्या आरोप?

    दिपके ने चुनावी मतदाता सूची को लेकर कई दावे किए। उनका आरोप है कि दो साल में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए। उन्होंने 2024 के करीब 97 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं और लोकसभा चुनाव में NDA और विपक्षी गठबंधन के बीच करीब 2 प्रतिशत के वोट शेयर अंतर का हवाला देते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का चुनावी नतीजों पर असर पड़ सकता है।

    दिपके ने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सीट से करीब 40 हजार वोटर हटाए जाने और तमिलनाडु में करीब एक लाख नाम हटाए जाने का भी दावा किया। पश्चिम बंगाल में भी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का आरोप उन्होंने लगाया। ये आंकड़े और आरोप CJP तथा दिपके के दावे हैं; इनका अंतिम सत्यापन या न्यायिक निष्कर्ष इस रिपोर्ट में स्थापित नहीं है।

    दिपके ने यह भी आरोप लगाया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में करीब 40 लाख वोटर जोड़े गए और इसे चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी से जोड़ा। बीजेपी समर्थकों की ओर से तेलंगाना, कर्नाटक और झारखंड में विपक्षी दलों की जीत का उदाहरण दिए जाने पर उन्होंने कहा कि अगर मैच फिक्स हो तो हर गेंद नो-बॉल नहीं होती और हर कैच नहीं छूटता।

    CJP की प्रमुख मांगें क्या हैं?

    मुंबई प्रदर्शन में CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग रखी। पार्टी ने SIR प्रक्रिया को रोकने और 2024 लोकसभा चुनाव से पहले वाली मतदाता सूची को बहाल करने की मांग भी उठाई है। इसके साथ नए मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन के लिए स्वतंत्र संस्था बनाने की मांग भी सामने रखी गई है।

    दिपके ने ‘एक देश, एक चुनाव’ की बहस को लेकर भी केंद्र सरकार पर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बीजेपी का लक्ष्य ‘एक देश, एक पार्टी’ की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने महाराष्ट्र में शिवसेना और NCP से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने का आरोप लगाया और शिंदे गुट की शिवसेना को ‘शेल कंपनी’ कहा। ये दिपके के राजनीतिक आरोप हैं।

    प्रदर्शन में फिल्मी हस्तियां भी पहुंचीं

    शिवाजी पार्क के प्रदर्शन में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, निर्देशक विशाल भारद्वाज, फिल्मकार हंसल मेहता, संगीतकार विशाल ददलानी और महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी समेत कई लोग मौजूद रहे। शिवसेना (यूबीटी) ने भी प्रदर्शन को समर्थन दिया।

    स्थानीय विधायक महेश सावंत ने बताया कि आदित्य ठाकरे की तबीयत खराब होने के कारण वह प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए।

    CJP नेता ने दिल्ली पुलिस को दी चेतावनी

    CJP नेता सौरव दास ने पिछले जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर दिल्ली पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा कि वह अपने रवैये में सुधार करे, वरना आंदोलन और तेज किया जाएगा। CJP नेताओं ने इसे ‘जंतर-मंतर सीजन 2’ बताया है।

    वामपंथी कार्यकर्ता शैलेश कांबले ने कहा कि कई वामपंथी संगठन भी आंदोलन में शामिल हुए हैं। वहीं, कानून के छात्र आयान पटेल ने मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया पर चिंता जताई। मंच से बोलने वाली किशोरी अनुजा ने भी सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।

    अब CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अगला प्रदर्शन करने की घोषणा की है। हालांकि, इस प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी स्थिति अलग विषय है और इसमें बदलाव संभव है।

  • दिल्ली में असम की महिला वकील से कथित मारपीट, संपत्ति विवाद में ‘बाहरी’ बताकर निशाना बनाने का आरोप

    दिल्ली में असम की महिला वकील से कथित मारपीट, संपत्ति विवाद में ‘बाहरी’ बताकर निशाना बनाने का आरोप

    नई दिल्ली । दिल्ली के प्रसाद नगर इलाके में संपत्ति विवाद के दौरान असम की एक महिला वकील के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। महिला वकील ने आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान उन्हें दिल्ली में ‘बाहरी’ होने के कारण निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ नस्लीय टिप्पणियां की गईं और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उनके साथ कथित तौर पर मारपीट हुई।

    घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें महिला वकील रोती और परेशान दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह फोन पर किसी व्यक्ति से घटना के बारे में बात करती नजर आती हैं। महिला के मुताबिक, वह संपत्ति विवाद से जुड़े एक पक्ष की ओर से वकील के तौर पर वहां मौजूद थीं।

    महिला वकील ने आरोप लगाया कि उनके क्लाइंट के विरोधी पक्ष ने उन्हें इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वह दिल्ली की स्थानीय निवासी नहीं हैं। उनका दावा है कि विवाद के दौरान दूसरे पक्ष की ओर से उन्हें ‘बाहरी’ कहकर निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के सामने उनके साथ मारपीट हुई, लेकिन हमलावरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं की गई।

    महिला के अनुसार, उनके क्लाइंट का अगले दिन एक कार्यक्रम होना था। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी पक्ष उस कार्यक्रम को खराब करना चाहता था और इसी वजह से विवाद बढ़ा। महिला ने दावा किया कि दूसरे पक्ष के लोग स्थानीय प्रभाव रखने वाले व्यक्तियों के साथ थे और इसी कारण स्थिति उनके खिलाफ हो गई।

    झड़प के दौरान महिला ने नस्लीय टिप्पणियां किए जाने का भी आरोप लगाया। उनके मुताबिक, उनसे और पूर्वोत्तर भारत से जुड़े लोगों को लेकर आपत्तिजनक सवाल किए गए। आरोप है कि दूसरे पक्ष की ओर से यह सवाल भी किया गया कि पूर्वोत्तर के लोग काम करने के लिए दिल्ली क्यों आते हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के जरिए होना बाकी है।

    वीडियो में महिला वकील दिल्ली की मुख्यमंत्री से भी मदद की अपील करती नजर आती हैं। उन्होंने दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए और कहा कि यदि एक महिला वकील के साथ इस तरह की घटना हो सकती है तो सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का जिक्र करते हुए भी अपनी बात रखी।

    पुलिस के अनुसार, महिला वकील जिस संपत्ति विवाद में शामिल थीं, उसमें वह ‘डॉलर बाबा’ नाम के व्यक्ति का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। प्रसाद नगर इलाके की एक संपत्ति को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के दौरान घटना सामने आई।

    महिला वकील ने अपनी शिकायत में मारपीट के साथ छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया है। पुलिस के मुताबिक, शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जा रही है। मामले की जांच के दौरान घटना से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है।

    इस मामले में दूसरे पक्ष की ओर से भी पुलिस में शिकायत दी गई है। इसमें मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस के अनुसार, दूसरी शिकायत के आधार पर भी क्रॉस-एफआईआर दर्ज की गई है। दोनों पक्षों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    फिलहाल महिला वकील की ओर से लगाए गए मारपीट, छेड़छाड़ और नस्लीय टिप्पणी के आरोप जांच का विषय हैं। घटना से जुड़े वीडियो और दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर पुलिस मामले के तथ्यों की जांच कर रही है।

  • दिल्ली में गैंगरेप और अपराध की घटनाओं पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मानी प्रशासनिक कमी, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दिया आश्वासन

    दिल्ली में गैंगरेप और अपराध की घटनाओं पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मानी प्रशासनिक कमी, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दिया आश्वासन

    नई दिल्ली ।दिल्ली में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ हुई गंभीर आपराधिक घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रशासनिक स्तर पर हुई कमियों को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं से प्रशासन को सबक मिला है और राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी आपराधिक घटना को रोकने के लिए संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और निगरानी जरूरी है।

    चलती बस में 16 वर्षीय लड़की के साथ गैंगरेप की घटना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने माना कि संबंधित बस की जांच नहीं हो पाई थी। उनसे पूछा गया था कि वर्ष 2012 के निर्भया कांड के बाद भी करीब 47 किलोमीटर तक चलने वाली बस कई चेकपॉइंट से गुजरती रही, लेकिन उसकी जांच क्यों नहीं की गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में निश्चित रूप से गलती हुई और बस की जांच नहीं की गई थी। घटना के बाद सभी संबंधित एजेंसियों को यह एहसास हुआ कि किसी भी बस को बिना जांच के आगे नहीं जाने दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि मामले में 11 चालान काटे गए हैं।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, निजी एजेंसियों के ड्राइवर और कंडक्टर सहित बसों से जुड़े कर्मचारियों के पुलिस रिकॉर्ड और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले किसी व्यक्ति को स्कूल बस, निजी बस या सरकारी बस चलाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में महिलाओं और बेटियों के साथ होने वाली हर घटना सरकार के लिए चिंता का विषय है। सरकार का प्रयास ऐसी घटनाओं को रोकना है और प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस बल बेहतर परिणाम देने के लक्ष्य के साथ काम करते हैं, लेकिन एक भी आपराधिक घटना होना चिंता का विषय है।

    दक्षिण दिल्ली के कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में नाबालिग से गैंगरेप की घटना के बाद उठे सुरक्षा संबंधी सवालों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और व्यवस्था में क्या सुधार जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली के डार्क स्पॉट को सुरक्षित करने के निर्देश संबंधित एजेंसियों को दिए गए हैं।

    मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद करीब एक लाख नई स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं। उनके अनुसार, ये लाइटें सेंसर से जुड़ी हैं और खराब होने पर कंट्रोल रूम को अलर्ट मिलता है, जिसके बाद संबंधित एजेंसी को उन्हें ठीक करने के लिए भेजा जाता है।

    सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के मामले पर मुख्यमंत्री ने सरकार और नगर निगम की जिम्मेदारी से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली की मौजूदा व्यवस्थाएं कई वर्षों में विकसित हुई हैं और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था में सुधार जरूरी है।

    PG रजिस्ट्रेशन के सवाल पर मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों के कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद करीब डेढ़ साल का समय हुआ है और यह भी देखा जाना चाहिए कि उनसे पहले ऐसी व्यवस्थाएं क्यों नहीं बनाई गईं।

    मुख्यमंत्री ने दिल्ली में SDRF का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले ऐसी विशेष व्यवस्था नहीं थी, जबकि आपदा या आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव के लिए इसकी जरूरत होती है। उनके मुताबिक अब दिल्ली के पास अपनी SDRF है और इसका इस्तेमाल आपात परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए किया जा सकता है।