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  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, आईएमएफ ने 2026 और 2027 के लिए विकास दर अनुमान 7% किया

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, आईएमएफ ने 2026 और 2027 के लिए विकास दर अनुमान 7% किया

    नई दिल्ली । दुनिया की अर्थव्यवस्था में सुस्ती की आशंकाओं, भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने के बावजूद भारत प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में सबसे आगे बना हुआ है। घरेलू मांग, सार्वजनिक निवेश, डिजिटल बदलाव और नीतिगत प्रबंधन को इस मजबूती के प्रमुख आधारों में गिना गया है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रमुख वैश्विक संस्थानों की ओर से भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के अनुमानों में संशोधन किया जाना देश की आर्थिक संभावनाओं को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 2026 और 2027, दोनों वर्षों के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है। इस अनुमान के आधार पर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति बनाए रख सकता है।

    भारत की आर्थिक मजबूती का एक बड़ा कारण उसका विशाल और विविध घरेलू बाजार है। घरेलू उपभोग, निजी निवेश और बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च मिलकर आर्थिक गतिविधियों को गति देते हैं। वैश्विक बाजारों में मांग कमजोर होने या अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में अस्थिरता बढ़ने पर घरेलू मांग अर्थव्यवस्था को सहारा प्रदान करती है। इससे बाहरी झटकों का प्रभाव सीमित करने में मदद मिलती है।

    निजी उपभोग का प्रभाव कई प्रमुख क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। ऑटोमोबाइल, आवास, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों को घरेलू मांग से समर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती आय, शहरीकरण, डिजिटल सेवाओं तक पहुंच और बेहतर कनेक्टिविटी लोगों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। इन बदलावों से निवेश और नवाचार के लिए भी नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

    डिजिटल परिवर्तन भी भारत की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और प्रौद्योगिकी आधारित सरकारी सेवाओं ने लेन-देन को आसान बनाया है तथा लागत कम करने में मदद की है। डिजिटल माध्यमों के विस्तार से छोटे व्यवसायों को भी अपने स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर व्यापक ग्राहक वर्ग तक पहुंचने का अवसर मिला है। इससे व्यापारिक गतिविधियों में तकनीक की भूमिका मजबूत हुई है।

    बुनियादी ढांचे में निवेश को भी आर्थिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कारक बताया गया है। परिवहन, लॉजिस्टिक्स, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं से वस्तुओं तथा सेवाओं की आवाजाही बेहतर हो रही है। बेहतर संपर्क व्यवस्था से बाजारों तक पहुंच का विस्तार होता है और कारोबार की लागत घटाने में मदद मिलती है। इसके साथ ही निर्यात में विविधता लाने, राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।

    रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का निर्यात एक ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। वर्ष 2030 तक निर्यात को दो ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। विनिर्माण क्षेत्र ने भी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। ये आंकड़े उत्पादन और बाहरी व्यापार के क्षेत्र में विस्तार की संभावनाओं की ओर संकेत करते हैं।

    कुल मिलाकर, भारत की आर्थिक स्थिति को घरेलू मांग, बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और नीतिगत प्रबंधन से समर्थन मिल रहा है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक सुस्ती, ऊर्जा बाजारों की अस्थिरता और व्यापारिक तनाव जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे माहौल में भारत की घरेलू आर्थिक बुनियाद और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता आने वाले वर्षों में उसकी विकास गति बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकती है।

  • कच्चे तेल की कीमत 116 डॉलर के पार, फिर भी 24 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर..

    कच्चे तेल की कीमत 116 डॉलर के पार, फिर भी 24 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर..

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है। शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 की सुबह ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव बढ़कर 116.27 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले इसकी कीमत 114.52 डॉलर प्रति बैरल थी। इस तरह एक दिन के भीतर कच्चे तेल के भाव में 1.75 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के बावजूद भारत में शनिवार को पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया।

    देश में पेट्रोल और डीजल के दैनिक खुदरा भाव तेल विपणन कंपनियों की ओर से जारी किए जाते हैं। 24 अक्टूबर को जारी दरों के अनुसार, प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें पहले के स्तर पर बनी रहीं। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में करों, स्थानीय निकाय कर और अन्य शुल्कों में अंतर होने के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम शहर और राज्य के हिसाब से अलग-अलग हैं।

    हाल के दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी भी हुई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। इसके बाद अब 24 अक्टूबर को दोनों ईंधनों के भाव में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है।

    राजधानी दिल्ली में शनिवार को पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध रहा। आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल का भाव 97.83 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया।

    कोलकाता में एक लीटर पेट्रोल के लिए 113.47 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं, जबकि डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 107.87 रुपये प्रति लीटर और डीजल का भाव 99.66 रुपये प्रति लीटर रहा। इन महानगरों में ईंधन की कीमतों में अंतर स्थानीय कर व्यवस्था और अन्य लागतों के कारण बना हुआ है।

    अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो लखनऊ में पेट्रोल 101.86 रुपये और डीजल 95.36 रुपये प्रति लीटर रहा। चंडीगढ़ में पेट्रोल 101.54 रुपये और डीजल 89.47 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध था। पटना में पेट्रोल की कीमत 113.37 रुपये और डीजल का भाव 99.36 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया।

    तिरुवनंतपुरम में पेट्रोल 115.49 रुपये और डीजल 104.40 रुपये प्रति लीटर रहा। बेंगलुरु में पेट्रोल की कीमत 111.68 रुपये और डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई। भुवनेश्वर में पेट्रोल 108.97 रुपये और डीजल 100.68 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध रहा।

    वहीं, हैदराबाद में पेट्रोल 115.69 रुपये और डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर रहा। जयपुर में पेट्रोल की कीमत 113.19 रुपये और डीजल का भाव 98.25 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अलग-अलग शहरों में वाहन चालकों को ईंधन के लिए अलग-अलग राशि चुकानी पड़ रही है।

    कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के भाव स्थिर रहने से वाहन चालकों को शनिवार को तत्काल कोई अतिरिक्त कीमत नहीं चुकानी पड़ी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में आगे होने वाले बदलावों पर नजर बनी हुई है। फिलहाल 24 अक्टूबर की जारी दरों के अनुसार, देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई नया संशोधन नहीं किया गया है।

  • एशियन पैरा गेम्स में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 114 पदक जीतकर तोड़ा अपना पुराना रिकॉर्ड, खाते में आए 30 गोल्ड

    एशियन पैरा गेम्स में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 114 पदक जीतकर तोड़ा अपना पुराना रिकॉर्ड, खाते में आए 30 गोल्ड


    नई दिल्ली ।
    एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए नया इतिहास रच दिया है। भारतीय दल ने प्रतियोगिता में कुल 114 पदक जीतकर अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। इन पदकों में 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य शामिल हैं। इसके साथ ही भारत ने 2023 में हांगझोऊ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में जीते गए 108 पदकों के अपने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। प्रतियोगिता के अंतिम दिन शुक्रवार को भारतीय खिलाड़ियों ने नौ स्वर्ण पदक अपने नाम किए और देश के कुल पदकों की संख्या को नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया।

    इस बार भारत ने 168 खिलाड़ियों का दल प्रतियोगिता में उतारा था, जो 2023 में भेजे गए दल के आकार का लगभग आधा था। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने पिछले प्रदर्शन से बेहतर परिणाम हासिल किए। प्रतियोगिता के दौरान एथलेटिक्स, बैडमिंटन, तीरंदाजी और निशानेबाजी में खिलाड़ियों ने पदक जीतकर भारत की स्थिति मजबूत की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर था। शनिवार को कुछ अन्य स्पर्धाओं के फाइनल होने थे, जिनमें भारतीय खिलाड़ियों की भागीदारी नहीं थी। ऐसे में अंतिम पदक तालिका में स्थान बदलने की संभावना बनी हुई थी।

    एथलेटिक्स में भारत को मिले सबसे ज्यादा पदक

    भारतीय दल की कुल पदक संख्या बढ़ाने में एथलेटिक्स की सबसे बड़ी भूमिका रही। इस खेल में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 65 पदक जीते, जो 2023 के एशियन पैरा गेम्स की तुलना में 12 अधिक थे। एथलेटिक्स में मिले इन पदकों ने भारत के अभियान को मजबूती दी। इसके अलावा बैडमिंटन खिलाड़ियों और निशानेबाज मोना अग्रवाल ने भी अपने प्रदर्शन से पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    बैडमिंटन में नितेश और नवीन ने जीते स्वर्ण
    बैडमिंटन में भारतीय खिलाड़ियों ने तीन स्वर्ण पदक हासिल किए। पेरिस पैरालंपिक चैंपियन नितेश कुमार ने पुरुष एकल एसएल3 वर्ग के फाइनल में हमवतन प्रमोद भगत को हराकर स्वर्ण पदक जीता। नितेश ने यह मुकाबला 21-18, 21-16 से अपने नाम किया। प्रमोद भगत टोक्यो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता हैं। नितेश ने मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 वर्ग में थुलासिमथी मुरुगेसन के साथ मिलकर रजत पदक भी जीता।

    पहली बार एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा ले रहे नवीन शिवकुमार ने पुरुष एकल एसएल4 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। फाइनल में उन्होंने इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को 21-9, 21-17 से हराया। नवीन का यह प्रदर्शन भारतीय बैडमिंटन दल के लिए एक बड़ी उपलब्धि रहा।

    थुलासिमथी मुरुगेसन ने जीते तीन पदक

    24 वर्षीय थुलासिमथी मुरुगेसन ने प्रतियोगिता में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए एक स्वर्ण और दो रजत पदक हासिल किए। महिला युगल एसएल3-एसयू5 वर्ग में उन्होंने मानसी जोशी के साथ मिलकर स्वर्ण पदक जीता। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में चीन की यांग क्यूशिया और शियाओ जूजियान को 21-16, 21-13 से पराजित किया।

    थुलासिमथी ने महिला एकल एसयू5 वर्ग में रजत पदक भी जीता। फाइनल में उन्हें चीन की यांग क्यूशिया के खिलाफ 18-21, 11-21 से हार का सामना करना पड़ा। मिश्रित युगल में नितेश कुमार के साथ जीते रजत पदक के साथ उनका अभियान तीन पदकों पर समाप्त हुआ।

    भारतीय खिलाड़ियों के इस सामूहिक प्रदर्शन ने एशियन पैरा गेम्स में देश के लिए नया मानक स्थापित किया। 114 पदकों की उपलब्धि ने 2023 के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए भारत के पैरा खेलों में बढ़ते प्रदर्शन को रेखांकित किया।

  • भारत का बड़ा लक्ष्य…. 5 साल में 30 मिलियन टन मछली उत्पादन, 1.25 लाख करोड़ के निर्यात की तैयारी

    भारत का बड़ा लक्ष्य…. 5 साल में 30 मिलियन टन मछली उत्पादन, 1.25 लाख करोड़ के निर्यात की तैयारी


    भोपाल।
    भारत (India) ने मत्स्य पालन (Fisheries) को लेकर बड़ा लक्ष्य (Big Target) रखा है. अगले पांच वर्षों पर फोकस किया गया है. मछली उत्पादन (Fish Production) बढ़ाने की तैयारी है. इसे 30 मिलियन टन तक पहुंचाना है. सीफूड निर्यात बढ़ाने का भी लक्ष्य है. इसे 1.25 लाख करोड़ तक पहुंचाना है. इसके लिए राष्ट्रीय कार्य योजना बनेगी. इसके विकास की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

    यह योजना छोटे मछुआरों पर केंद्रित होगी. खासकर अंतर्देशीय मत्स्य पालन पर फोकस रहेगा. मछुआरों की आजीविका सुधारने पर जोर होगा. उनकी आय बढ़ाने के प्रयास भी होंगे।


    अभी 19.7 मिलियन टन उत्पादन

    भारत का मछली उत्पादन लगातार बढ़ा है. अभी सालाना उत्पादन 19.7 मिलियन टन है. इसका बड़ा हिस्सा अंतर्देशीय क्षेत्र से आता है. करीब तीन-चौथाई उत्पादन इसी क्षेत्र से है. इसमें नदियों और जलाशयों की बड़ी भूमिका है. तालाब और झीलें भी शामिल हैं. भारत का सीफूड निर्यात भी बढ़ा है. यह 70 हजार करोड़ रुपये पार है. अब इसे और बढ़ाने की तैयारी है।


    नेशनल एक्शन प्लान पर काम शुरू

    केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग ने पहल शुरू की है. नेशनल प्लान ऑफ एक्शन तैयार होगा. इसे NPOA नाम दिया गया है। केंद्रीय मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने शुरुआत की. उन्होंने योजना के विकास चरण को लॉन्च किया. इसमें कई क्षेत्रों पर काम होगा. मछुआरों की आजीविका बेहतर करना प्राथमिकता है. वैल्यू चेन भी मजबूत की जाएगी. मीठे पानी के संसाधनों पर ध्यान रहेगा. इनके बेहतर प्रबंधन की योजना बनेगी।


    छोटे मछुआरों तक पहुंचे योजना

    डॉ. लिखी ने आउटरीच पर जोर दिया. उन्होंने मिशन मोड में काम मांगा है. योजना की जानकारी मछुआरों तक पहुंचाई जाएगी. उनका कहना है कि योजना व्यावहारिक होनी चाहिए. यह सिर्फ सरकारी कार्यालयों तक सीमित न रहे. इसका फायदा मछुआरा समुदायों को मिलना चाहिए. मछुआरों की आय बढ़ाने पर भी जोर है. इसके लिए वैल्यू चेन मजबूत होगी. बाजार तक पहुंच सुधारने पर काम होगा।


    जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती

    – अंतर्देशीय मत्स्य पालन के सामने चुनौतियां भी हैं. जलवायु परिवर्तन इनमें प्रमुख है. पानी की क्वालिटी भी चिंता का विषय है.
    – जलाशयों में ऑक्सीजन कम होना चुनौती है. इसका असर मछलियों पर पड़ सकता है. इसलिए क्लाइमेट रेजिलिएंस पर जोर रहेगा.
    – स्थानीय मछुआरों के अनुभव भी लिए जाएंगे. वे इन समस्याओं का सीधे सामना करते हैं. उनके अनुभव योजना बनाने में मदद करेंगे.


    नदी से तालाब तक होगा फोकस

    – प्रस्तावित योजना का दायरा काफी बड़ा है. इसमें नदियों का मत्स्य पालन शामिल होगा. नहरों को भी योजना में रखा गया है.
    – जलाशयों और झीलों पर भी फोकस होगा. बाढ़ वाले आर्द्रभूमि क्षेत्र भी शामिल होंगे. तालाबों को भी योजना में जगह मिलेगी. ठंडे पानी वाले तंत्र भी शामिल होंगे.
    – अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतें अलग हैं. इसलिए स्थानीय परिस्थितियों पर ध्यान दिया जाएगा. क्षेत्र के हिसाब से रणनीति बनाई जाएगी.


    FAO के ढांचे में बनेगी योजना

    – यह योजना अंतरराष्ट्रीय ढांचे के तहत बनेगी. संयुक्त राष्ट्र का FAO इसमें शामिल है. केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग इसका नेतृत्व करेगा.
    – बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम भी सहयोग करेगा. BOBP-IGO योजना तैयार करने में मदद करेगा.

    BOBP-IGO के निदेशक डॉ. पी. कृष्णन ने जानकारी दी. उनके मुताबिक, कई मुद्दों पर फोकस रहेगा. मछली पकड़ने के अधिकार पर ध्यान होगा. संसाधनों का प्रबंधन भी अहम रहेगा. रोजगार और सम्मानजनक काम पर फोकस होगा. लैंगिक समानता को भी जगह मिलेगी.


    वैल्यू चेन मजबूत करने की तैयारी

    – मछली उत्पादन के बाद का कारोबार अहम है. इसलिए वैल्यू चेन पर काम किया जाएगा. पोस्ट-हार्वेस्ट व्यापार भी योजना में शामिल है.
    – आपदा जोखिम पर भी ध्यान दिया जाएगा. जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय होंगे. छोटे मछुआरों के हितों को प्राथमिकता मिलेगी.

    योजना अभी विकास के चरण में है. स्टेकहोल्डर्स से इस पर चर्चा होगी. उनके सुझाव भी योजना में शामिल होंगे. इसके बाद अंतिम दस्तावेज तैयार किया जाएगा. अगले महीने इसे सार्वजनिक करने की तैयारी है. इसके बाद योजना को लागू किया जाएगा.

  • भारत मंडपम में पीएम मोदी ने किया चिन्मय अमृत महोत्सव सम्मेलन का उद्घाटन, युवा शक्ति को बताया मजबूत भारत की आधारशिला

    भारत मंडपम में पीएम मोदी ने किया चिन्मय अमृत महोत्सव सम्मेलन का उद्घाटन, युवा शक्ति को बताया मजबूत भारत की आधारशिला

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने युवा शक्ति को मजबूत और सक्षम भारत के निर्माण का आधार बताया। प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपनी मुलाकात और उनसे मिले आशीर्वाद को याद करते हुए कहा कि युवाओं की क्षमता का विकास देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। इस वैश्विक सम्मेलन में भारत और विदेशों से 9,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

    कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम को देखने और उनसे बातचीत का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि यह उनके लिए भावुक क्षण था, जिसने उन्हें वर्ष 1993 में वडोदरा में हुई मुलाकात की याद दिला दी। उस समय स्वामी चिन्मयानंद के साथ हुई बातचीत, उनका स्नेह और आशीर्वाद आज भी उनके स्मरण में हैं। प्रधानमंत्री ने इस अनुभव को संभव बनाने के लिए चिन्मय मिशन के सदस्यों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद के साथ उनकी बातचीत में युवा शक्ति के विकास और उसके माध्यम से मजबूत भारत के निर्माण का विषय प्रमुख रहा था। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने से लेकर सरकार के मुखिया के तौर पर काम करने तक गुरुदेव का आशीर्वाद उनके साथ रहा है। उनके संबोधन में युवाओं को देश की प्रगति और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर विशेष जोर दिखाई दिया।

    मोदी ने कहा कि युवाओं को सक्षम बनाने, उनकी प्रतिभा को निखारने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने से भारत मजबूत बन सकता है। युवाओं की ऊर्जा और क्षमता का सही उपयोग देश को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद कर सकता है। उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं को राष्ट्र निर्माण में भागीदारी के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी नीतियों के केंद्र में देश के युवा हैं।

    प्रधानमंत्री ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि यह पड़ाव केवल विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने का अवसर नहीं था, बल्कि भारत की उस ज्ञान परंपरा को दुनिया के सामने रखने का भी मौका था, जो प्राचीन विचारों और अनुभवों के माध्यम से संपूर्ण मानवता के कल्याण की बात करती है।

    उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारत के प्राचीन विचारों और अनुभवों को वर्तमान समय के संदर्भ में समझना तथा उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी इस विरासत को आगे बढ़ाने का हिस्सा है।

    चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है। यह चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में साल भर आयोजित कार्यक्रमों का समापन है। चिन्मय मिशन की स्थापना स्वामी चिन्मयानंद ने वर्ष 1951 में की थी। मिशन का प्रमुख उद्देश्य वेदांत और भगवद गीता के ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।

    समय के साथ चिन्मय मिशन ने आध्यात्मिक शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, युवा सशक्तिकरण और सामुदायिक सेवा जैसे क्षेत्रों में भी काम किया है। सम्मेलन के माध्यम से आध्यात्मिक विचारों, भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन समाज में उनके महत्व पर चर्चा की जा रही है। प्रधानमंत्री का संबोधन भी युवा शक्ति, सांस्कृतिक मूल्यों और विकसित भारत के लक्ष्य के बीच संबंध को रेखांकित करने पर केंद्रित रहा।

  • भारत की कारोबारी गतिविधियां अक्टूबर में चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंचीं, घरेलू मांग और निर्यात से मिली मजबूती

    भारत की कारोबारी गतिविधियां अक्टूबर में चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंचीं, घरेलू मांग और निर्यात से मिली मजबूती

    नई दिल्ली । भारत के निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में अक्टूबर 2026 के दौरान तेजी दर्ज की गई है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में नए ऑर्डरों की बढ़ोतरी, घरेलू मांग में मजबूती और विदेशी बाजारों से मिले बेहतर कारोबार के कारण गतिविधियां चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गईं। अक्टूबर के शुरुआती सर्वेक्षण आंकड़ों के अनुसार, कंपनियों को बाजार की परिस्थितियों में सुधार का लाभ मिला। इसके साथ ही उत्पादन लागत और बिक्री कीमतों पर पड़ने वाले दबाव में भी नरमी दर्ज की गई, जबकि रोजगार वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी रही।

    अक्टूबर में एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स बढ़कर 56.7 पर पहुंच गया, जबकि सितंबर में यह 55.9 था। यह सूचकांक विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की संयुक्त कारोबारी गतिविधियों का आकलन करता है। पीएमआई में 50 से ऊपर का स्तर गतिविधियों में विस्तार का संकेत देता है, जबकि इससे नीचे का स्तर संकुचन को दर्शाता है। अक्टूबर का आंकड़ा जून के बाद कारोबारी गतिविधियों में सबसे तेज वृद्धि का संकेत देता है।

    सर्वेक्षण के मुताबिक, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने नए ऑर्डरों में बढ़ोतरी और कारोबारी परिस्थितियों में सुधार की जानकारी दी। घरेलू बाजार से मिलने वाली मांग के साथ विदेशी ग्राहकों की ओर से भी ऑर्डर बढ़े। विशेष रूप से निर्यात ऑर्डरों में पिछले छह महीनों की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। इससे भारतीय कंपनियों को उत्पादन और सेवाओं से जुड़ी गतिविधियों में तेजी बनाए रखने में मदद मिली।

    विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन और नए ऑर्डरों की वृद्धि सितंबर के आसपास बनी रही, लेकिन निर्यात मांग में तेजी अक्टूबर की प्रमुख विशेषता रही। भारत की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, जून 2025 के बाद पहली बार निर्यात ऑर्डरों में इतनी मजबूत बढ़ोतरी देखी गई है। विदेशी बाजारों से मिले बेहतर संकेतों के बीच निर्माताओं ने कच्चे माल और तैयार उत्पादों का भंडार भी बढ़ाया। कंपनियों की यह गतिविधि बढ़ती मांग को पूरा करने की तैयारी के रूप में देखी जा सकती है।

    महंगाई के मोर्चे पर भी आंकड़ों में राहत के संकेत मिले हैं। उत्पादन लागत और बिक्री कीमतों पर दबाव लगातार कम होने की जानकारी सामने आई। लागत संबंधी दबाव में नरमी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उत्पादन और बिक्री से जुड़े फैसलों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े यह नहीं बताते कि आने वाले महीनों में महंगाई किस स्तर पर रहेगी। फिलहाल सर्वेक्षण अक्टूबर के दौरान लागत और कीमतों से जुड़े दबावों में कमी का संकेत देता है।

    रोजगार के मामले में स्थिति अपेक्षाकृत मिश्रित रही। निजी क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या बढ़ने की गति धीमी हुई। सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने लगातार नौ महीनों तक भर्ती बढ़ाने के बाद अक्टूबर में नई नियुक्तियों को लगभग रोक दिया। कंपनियों का मानना था कि मौजूदा कर्मचारियों की संख्या से कामकाज की जरूरतें पूरी हो रही हैं। वहीं, विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार बढ़ा, लेकिन इसकी रफ्तार सीमित रही। इससे स्पष्ट होता है कि कारोबारी गतिविधियों में तेजी के बावजूद भर्ती में समान स्तर का विस्तार नहीं हुआ।

    सर्वेक्षण में लंबित कार्यभार में भी गिरावट दर्ज की गई। कंपनियों के पास पहले से जमा काम का स्तर लगातार तीसरी बार घटा और यह संयुक्त रूप से पिछले साढ़े छह वर्षों की सबसे तेज गिरावट रही। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां लंबित काम को अपेक्षाकृत तेजी से पूरा कर पा रही हैं। अक्टूबर में विनिर्माण पीएमआई 54.9 दर्ज किया गया, जो इस क्षेत्र में लगातार विस्तार को दर्शाता है।

    कुल मिलाकर, अक्टूबर के शुरुआती पीएमआई आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था के निजी क्षेत्र में मजबूत कारोबारी गति का संकेत देते हैं। घरेलू मांग, निर्यात ऑर्डरों और विनिर्माण गतिविधियों से विस्तार को सहारा मिला है। हालांकि, रोजगार वृद्धि की धीमी रफ्तार यह बताती है कि कारोबार में तेजी का लाभ सभी क्षेत्रों में नई नियुक्तियों के रूप में समान रूप से दिखाई नहीं दिया है।

  • F-35 लड़ाकू विमान हर देश को नहीं देता अमेरिका, सर्जियो गोर ने भारत को बताया भरोसेमंद साझेदार, रक्षा सहयोग पर कही अहम बात

    F-35 लड़ाकू विमान हर देश को नहीं देता अमेरिका, सर्जियो गोर ने भारत को बताया भरोसेमंद साझेदार, रक्षा सहयोग पर कही अहम बात

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपना अत्याधुनिक एफ-35 लड़ाकू विमान हर देश को नहीं देता, बल्कि इसे केवल उन्हीं साझेदारों को उपलब्ध कराता है जिन पर उसे भरोसा होता है। गोर ने भारत को अमेरिका का भरोसेमंद साझेदार बताते हुए क्वॉड समूह में उसकी भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों, सैन्य अभ्यासों और संभावित लड़ाकू विमान सौदों को लेकर चर्चा जारी है।

    सर्जियो गोर ने भारत में हाल के संयुक्त सैन्य अभ्यासों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले एक महीने के दौरान करीब 500 अमेरिकी सैनिक भारत में आयोजित युद्धाभ्यास में शामिल हुए। इसके अलावा, तरंग शक्ति अभ्यास के दौरान अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमान भी भारत पहुंचे और भारतीय वायुसेना के साथ अभ्यास किया। इन गतिविधियों को दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    एफ-35 अमेरिका के आधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल है। इसमें स्टील्थ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसका उद्देश्य विमान को दुश्मन के रडार की पकड़ में आने से बचने में मदद करना है। इस तरह के विमान और उनसे जुड़ी तकनीक का इस्तेमाल तथा हस्तांतरण संवेदनशील रक्षा मामलों में गिना जाता है। गोर के बयान के मुताबिक, अमेरिका ऐसे विमानों के मामले में भरोसेमंद साझेदारों को प्राथमिकता देता है। हालांकि, भारत के लिए एफ-35 की खरीद को लेकर किसी अंतिम समझौते की घोषणा इस बयान में नहीं की गई।

    गोर ने भारत को क्वॉड समूह का मूल्यवान साझेदार भी बताया। क्वॉड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर काम करता है। चारों देशों के बीच संवाद और गतिविधियों का उद्देश्य क्षेत्रीय चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाना है। ऐसे में भारत के साथ अमेरिकी सैन्य अभ्यास और एफ-35 विमानों की भागीदारी दोनों देशों के रक्षा संबंधों की अहमियत को रेखांकित करती है।

    भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग केवल सैन्य अभ्यासों तक सीमित नहीं है। दोनों देश सैन्य क्षमताओं के समन्वय, संयुक्त प्रशिक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सहयोग करते हैं। संयुक्त अभ्यासों के दौरान सेनाओं को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, संचालन प्रक्रियाओं और क्षमताओं को समझने का अवसर मिलता है। इससे भविष्य में साथ काम करने की क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसी खास अभ्यास से तकनीक हस्तांतरण या विमान खरीद का समझौता अपने आप तय नहीं हो जाता।

    एफ-35 को लेकर गोर की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब भारत अपनी वायुसेना की क्षमताओं को मजबूत करने और विभिन्न देशों के साथ रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है। आधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़े फैसलों में लागत, तकनीकी जरूरतें, रखरखाव, परिचालन आवश्यकताएं और रणनीतिक प्राथमिकताएं जैसे कई पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए अमेरिकी राजदूत का बयान दोनों देशों के बीच भरोसे और सैन्य संपर्कों को तो दर्शाता है, लेकिन इसे किसी निश्चित विमान सौदे की पुष्टि नहीं माना जा सकता।

    कुल मिलाकर, सर्जियो गोर ने अपने बयान में भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार बताया है। हाल के सैन्य अभ्यासों और तरंग शक्ति में एफ-35 की भागीदारी को उन्होंने दोनों देशों के मजबूत होते रक्षा संबंधों के संदर्भ में रखा। फिलहाल, भारत को एफ-35 की बिक्री को लेकर किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले समय में दोनों देशों के रक्षा सहयोग की दिशा और संभावित समझौतों पर होने वाली बातचीत महत्वपूर्ण रहेगी।

  • भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट में ब्रह्मोस सबसे आगे, 2027-28 तक आएगा हल्का वर्जन: CEO जयतीर्थ जोशी

    भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट में ब्रह्मोस सबसे आगे, 2027-28 तक आएगा हल्का वर्जन: CEO जयतीर्थ जोशी


    नई दिल्ली। भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को पूरी तरह स्वदेशी बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के एमडी और सीईओ डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी के मुताबिक, भारत के रक्षा निर्यात में ब्रह्मोस की अहम भूमिका है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस मिसाइल के इस्तेमाल के बाद वैश्विक स्तर पर इसकी क्षमता और प्रतिष्ठा को लेकर चर्चा बढ़ी है। कंपनी अब उत्पादन बढ़ाने, सप्लाई चेन मजबूत करने और ब्रह्मोस के हल्के वर्जन विकसित करने पर जोर दे रही है।

    ब्रह्मोस को भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना में शामिल किया जा चुका है। अब इसके नेक्स्ट जेनरेशन वर्जन ब्रह्मोस-एनजी पर काम चल रहा है। इसके अलावा, लंबी दूरी तक मार करने वाले स्ट्राइक वेरिएंट की अवधारणा पर भी काम किया जा रहा है।

    डिफेंस एक्सपोर्ट में ब्रह्मोस की बढ़ती भूमिका
    भारत का रक्षा निर्यात सालाना 62.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 38,400 करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है। इसमें ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की अहम हिस्सेदारी है।

    डॉ. जोशी के मुताबिक, ब्रह्मोस की निर्यात सफलता की शुरुआत 2025 में इसके युद्ध में इस्तेमाल से पहले ही हो गई थी। वर्ष 2022 में भारत को इस मिसाइल के लिए पहला बड़ा निर्यात ऑर्डर मिला था। इस सौदे ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रक्षा उत्पादों की संभावनाओं को मजबूती दी।

    फिलीपींस के साथ शुरुआती निर्यात समझौते के बाद इस साल दक्षिण-पूर्व एशिया के दो और देशों के साथ सौदे किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम को मिले ऑर्डर और डिलीवरी के साथ ब्रह्मोस का निर्यात 600 मिलियन डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।

    सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए बढ़ेंगे साझेदार
    ब्रह्मोस की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनी उत्पादन क्षमता और सप्लाई चेन का विस्तार कर रही है। डॉ. जोशी ने बताया कि हैदराबाद, नागपुर, पिलानी और लखनऊ स्थित उत्पादन इकाइयां तेजी से काम कर रही हैं।

    कंपनी हर सिस्टम और सब-सिस्टम के लिए औद्योगिक साझेदारों की संख्या बढ़ाने की तैयारी में है। अभी जहां एक या दो प्रमुख साझेदारों पर निर्भरता रही है, वहीं इसे बढ़ाकर 45 सोर्स तक विकसित करने की योजना है। इससे उत्पादन में तेजी लाने के साथ गुणवत्ता और लागत के स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    2027-28 तक तैयार हो सकता है ब्रह्मोस-एनजी का प्रोटोटाइप
    ब्रह्मोस के नए संस्करणों में ब्रह्मोस-एनजी यानी नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल महत्वपूर्ण है। यह मौजूदा मिसाइल की तुलना में छोटी और हल्की होगी। इसका उद्देश्य लड़ाकू विमानों में इसे एकीकृत करना आसान बनाना और भारत की हवाई हमले की क्षमता को मजबूत करना है।

    इस मिसाइल को भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।

    डॉ. जोशी के अनुसार, ब्रह्मोस-एनजी का पहला प्रोटोटाइप 2027 या 2028 तक तैयार होने की उम्मीद है। इसमें अधिक स्वदेशी तकनीक और उन्नत सामग्री का इस्तेमाल करने की योजना है। इसके लिए व्यापक अनुसंधान एवं विकास की जरूरत होगी।

    1,500 किलोमीटर रेंज वाले वर्जन पर भी काम
    ब्रह्मोस एयरोस्पेस 1,500 किलोमीटर की रेंज वाले स्ट्राइक वेरिएंट पर भी काम कर रहा है। कंपनी के मुताबिक, मिसाइल ने जमीन, समुद्र और हवा से किए गए परीक्षणों में लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता दिखाई है। हालांकि, 1,500 किलोमीटर रेंज वाला वर्जन अभी अवधारणा के स्तर पर है।

    ब्रह्मोस की खासियत इसकी सुपरसोनिक गति, सटीक निशाना लगाने की क्षमता और अलग-अलग प्लेटफॉर्म से लॉन्च किए जाने की सुविधा है। नए संस्करणों के विकास से भारतीय सेनाओं की परिचालन क्षमता बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात की संभावनाओं को मजबूत करने का लक्ष्य है।

    नौसेना के लिए ब्रह्मोस का नया कॉन्ट्रैक्ट
    रक्षा मंत्रालय ने 6 अक्टूबर को भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर खरीदने के लिए ब्रह्मोस एयरोस्पेस के साथ अनुबंध किया। इस परियोजना में कम से कम 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) सहित विभिन्न भारतीय उद्योगों की भागीदारी भी रहेगी।

    डॉ. जोशी के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर ने ब्रह्मोस की परिचालन क्षमता को प्रदर्शित किया है। कंपनी का जोर अब इस मिसाइल को अधिक स्वदेशी बनाने, उत्पादन बढ़ाने और नई पीढ़ी के संस्करणों को विकसित करने पर है।

  • पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने की पीएम मोदी की तारीफ, भारत को बताया दुनिया के लिए उम्मीद की किरण

    पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने की पीएम मोदी की तारीफ, भारत को बताया दुनिया के लिए उम्मीद की किरण


    नई दिल्ली ।
    पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें अनिश्चितता और राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में दुनिया के लिए उम्मीद की किरण बताया। भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर आए टस्क ने द्विपक्षीय बातचीत के बाद संयुक्त बयान में कहा कि उन्हें मोदी को अपना मित्र कहने पर गर्व है। उन्होंने भारत और पोलैंड के बीच मजबूत होते संबंधों, साझा मूल्यों और आर्थिक विकास की भी सराहना की।

    डोनाल्ड टस्क ने कहा कि भारत जैसे शक्तिशाली देश का नेतृत्व नरेंद्र मोदी जैसे व्यक्ति के हाथों में होना हम सभी के लिए उम्मीद की किरण है। उन्होंने दोहराया कि उन्हें वास्तव में गर्व है कि वह खुद को प्रधानमंत्री मोदी का मित्र कह सकते हैं। टस्क के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत बेहद सफल रही है। इसकी वजह केवल भारत और पोलैंड के बीच समानताएं नहीं, बल्कि यह भी है कि भौगोलिक दूरी को छोड़कर दोनों देशों के संबंधों में कोई बड़ा अंतर या बाधा नहीं है।

    पोलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और पोलैंड के बीच तालमेल स्वाभाविक है और दोनों देशों के हितों में कोई टकराव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कोई ऐतिहासिक मुद्दा नहीं है जो दोनों देशों को एक-दूसरे से अलग करता हो। दोनों देश भरोसे, साझा मूल्यों और विचारों के आधार पर अपनी मित्रता को आगे बढ़ा रहे हैं। टस्क ने विशेष रूप से अहिंसा के विचार का उल्लेख करते हुए इसे दोनों देशों के साझा मूल्यों में शामिल बताया।

    टस्क ने भारत और पोलैंड की आर्थिक प्रगति की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पिछले 35 वर्षों में दोनों देशों ने असाधारण आर्थिक सफलता और तेज विकास देखा है। उनके अनुसार, दुनिया भारत और पोलैंड की विकास यात्रा को ईर्ष्या की नजर से देखती है। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब वैश्विक स्तर पर राजनीतिक अनिश्चितता और विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्षों के बीच देशों के बीच सहयोग और संवाद को अहम माना जा रहा है।

    बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और पोलैंड रक्षा, अंतरिक्ष तथा परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी का विस्तार करने और आपसी सहयोग को व्यापक बनाने के लिए कई कदम उठाने का फैसला किया है। मोदी के मुताबिक, भारत और पोलैंड द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने तथा विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए किए जा रहे सार्थक प्रयासों को भारत का समर्थन जारी रहने की बात भी कही। टस्क की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब यूक्रेन में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग के साथ वैश्विक शांति से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहे।

    मोदी ने अपनी वर्ष 2024 की पोलैंड यात्रा को याद करते हुए कहा कि उस दौरान डोनाल्ड टस्क ने उनका और उनके प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया था। उन्होंने टस्क का भारत में स्वागत करने पर खुशी जताई। दोनों नेताओं के बयानों से भारत और पोलैंड के बीच राजनीतिक संवाद, आपसी विश्वास और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की साझा इच्छा सामने आई। रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति इस साझेदारी के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल है।

  • वोट चोरी के मुद्दे पर INDIA गठबंधन की बैठक स्थगित, खरगे की अध्यक्षता में होनी थी चुनाव आयोग के खिलाफ रणनीति पर चर्चा

    वोट चोरी के मुद्दे पर INDIA गठबंधन की बैठक स्थगित, खरगे की अध्यक्षता में होनी थी चुनाव आयोग के खिलाफ रणनीति पर चर्चा


    नई दिल्ली ।
    कथित वोट चोरी के मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ आगे की रणनीति तैयार करने के लिए प्रस्तावित विपक्षी गठबंधन INDIA की बैठक फिलहाल स्थगित कर दी गई है। गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 की शाम होने वाली इस ऑनलाइन बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को करनी थी। बैठक में विपक्षी दलों के नेताओं को आगामी विरोध प्रदर्शनों की रूपरेखा, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आगे की कार्रवाई की मांग और दिल्ली में प्रस्तावित रैली की तैयारियों पर चर्चा करनी थी।

    विपक्षी गठबंधन के नेताओं की यह बैठक ऐसे समय में प्रस्तावित थी, जब कथित वोट चोरी का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में बना हुआ है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। बैठक में इस मुद्दे को आगे उठाने के लिए साझा रणनीति तैयार किए जाने की योजना थी। हालांकि, बैठक स्थगित होने के बाद गठबंधन की अगली बैठक की तारीख को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

    प्रस्तावित बैठक के एजेंडे में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दबाव बनाने के तरीकों पर विचार करना भी शामिल था। विपक्षी नेता कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर अपने विरोध को आगे बढ़ाने के विकल्पों पर चर्चा करने वाले थे। इसके साथ ही यह तय किया जाना था कि विभिन्न विपक्षी दल इस मुद्दे पर किस तरह संयुक्त रूप से अपनी गतिविधियां संचालित करेंगे। फिलहाल बैठक टलने के कारण इन विषयों पर प्रस्तावित चर्चा नहीं हो सकी।

    बैठक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य एक नवंबर को दिल्ली में होने वाली INDIA गठबंधन की रैली की तैयारियों की समीक्षा करना भी था। विपक्षी दलों को रैली के आयोजन और उसमें उठाए जाने वाले मुद्दों पर विचार-विमर्श करना था। इसके अलावा कथित वोट चोरी के मुद्दे को लेकर आगे के प्रदर्शनों की रूपरेखा पर भी चर्चा प्रस्तावित थी। गठबंधन की ओर से इस मुद्दे पर विरोध जारी रखने की रणनीति तैयार करने की योजना थी।

    सूत्रों के अनुसार, कुछ विपक्षी नेताओं के व्यस्त कार्यक्रमों के कारण बैठक स्थगित की गई। हालांकि, इसे दोबारा आयोजित करने के लिए किसी नई तारीख की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में एक नवंबर की रैली से पहले गठबंधन के नेताओं के बीच आगे कब चर्चा होगी, यह स्पष्ट नहीं है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब महिला आरक्षण अधिनियम को जल्द लागू करने के उद्देश्य से परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। हालांकि, प्रस्तावित बैठक के स्थगित होने की वजह के रूप में विपक्षी नेताओं के व्यस्त कार्यक्रमों का उल्लेख किया गया है।

    इससे पहले विपक्षी दल कथित वोट चोरी के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च कर चुके हैं। पिछले सप्ताह किए गए इस मार्च के जरिए विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया से संबंधित अपनी चिंताओं को सामने रखा था। इससे पहले 13 अक्टूबर को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने आवास पर INDIA गठबंधन के नेताओं को चाय पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया था।

    उस बैठक के बाद विपक्षी गठबंधन ने कथित वोट चोरी के खिलाफ अपना विरोध जारी रखने और इस मुद्दे पर अपनी लड़ाई को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का संकल्प जताया था। अब 22 अक्टूबर को प्रस्तावित ऑनलाइन बैठक स्थगित होने के बाद गठबंधन की अगली रणनीतिक चर्चा और एक नवंबर की रैली की तैयारियों पर नजर रहेगी।