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  • भारत पर पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री का हमला, सिंधु जल संधि को लेकर हिना रब्बानी खार बोलीं— आक्रामक रुख से बढ़ सकता है तनाव

    भारत पर पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री का हमला, सिंधु जल संधि को लेकर हिना रब्बानी खार बोलीं— आक्रामक रुख से बढ़ सकता है तनाव

    नई दिल्ली । पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच दशकों से लागू यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता का महत्वपूर्ण आधार रहा है। इस्लामाबाद में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने भारत की नीतियों पर टिप्पणी करते हुए दावा किया कि हालिया घटनाक्रम दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा सकते हैं।

    अपने संबोधन में हिना रब्बानी खार ने कहा कि सिंधु जल संधि लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे की एक प्रभावी व्यवस्था के रूप में कार्य करती रही है। उनके अनुसार, यह समझौता कठिन परिस्थितियों और द्विपक्षीय तनाव के बावजूद कायम रहा तथा दोनों देशों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समझौतों की स्थिरता क्षेत्रीय शांति और विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

    पूर्व विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि यदि किसी भी स्तर पर इस संधि को कमजोर करने या उसके क्रियान्वयन में अनिश्चितता पैदा करने का प्रयास किया जाता है, तो उसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों का सम्मान और उनका निरंतर पालन वैश्विक कूटनीतिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। उनके अनुसार, ऐसे विषयों पर सभी पक्षों को जिम्मेदारी और संतुलन के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

    हिना रब्बानी खार ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि सिंधु जल संधि केवल जल बंटवारे का दस्तावेज नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से बने एक संस्थागत ढांचे का प्रतीक भी है। उन्होंने क्षेत्रीय सहयोग और संवाद को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विवादों का समाधान बातचीत और स्थापित प्रक्रियाओं के माध्यम से ही संभव है।

    सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच संपन्न एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसके तहत सिंधु नदी प्रणाली से संबंधित जल संसाधनों के उपयोग और बंटवारे के लिए विस्तृत प्रावधान निर्धारित किए गए थे। पिछले कई दशकों में दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मतभेदों के बावजूद यह संधि प्रभावी बनी रही है और समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर इसकी समीक्षा और व्याख्या को लेकर चर्चा होती रही है।

    हिना रब्बानी खार का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। ऐसे माहौल में उनके वक्तव्य ने एक बार फिर सिंधु जल संधि, क्षेत्रीय कूटनीति और जल सहयोग को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। राजनीतिक और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक बयान दोनों देशों के बीच चल रहे संवाद और भविष्य की रणनीतियों पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जल संसाधनों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते केवल तकनीकी विषय नहीं होते, बल्कि उनका सीधा संबंध क्षेत्रीय स्थिरता, विकास और द्विपक्षीय विश्वास से भी होता है। ऐसे में इस प्रकार के मुद्दों पर दोनों देशों के लिए संवाद, कानूनी प्रावधानों और स्थापित कूटनीतिक प्रक्रियाओं के दायरे में आगे बढ़ना महत्वपूर्ण माना जाता है। फिलहाल हिना रब्बानी खार के बयान के बाद सिंधु जल संधि और भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर राजनीतिक एवं कूटनीतिक चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं।

  • भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को नई उड़ान देने की तैयारी, बोइंग समझौते पर तेजी, ट्रंप प्रशासन ने निवेश और तकनीकी सहयोग पर दिया बड़ा संकेत

    भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को नई उड़ान देने की तैयारी, बोइंग समझौते पर तेजी, ट्रंप प्रशासन ने निवेश और तकनीकी सहयोग पर दिया बड़ा संकेत

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति के संकेत मिले हैं। अमेरिका के भारत स्थित राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्वयं भारत के साथ व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच एक नई बोइंग डील लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जिससे विमानन क्षेत्र के साथ-साथ व्यापक आर्थिक सहयोग को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हालिया बातचीत में बोइंग समझौता प्रमुख विषयों में शामिल रहा। उन्होंने इसे दोनों देशों के बढ़ते आर्थिक रिश्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि अमेरिका इस समझौते को जल्द अंतिम रूप तक पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है।

    गोर ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि दुनिया के विभिन्न देश अत्याधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाले विमानों का उपयोग करें तथा बोइंग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत के साथ प्रस्तावित नया समझौता दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक और औद्योगिक सहयोग का मजबूत आधार बनेगा। उनके अनुसार अमेरिका भारत को केवल एक व्यापारिक साझेदार नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक आर्थिक सहयोगी के रूप में देखता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से उभरती हुई शक्ति बन चुका है और अमेरिका इस विकास यात्रा का सहभागी बनना चाहता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत तकनीक, विमानन, रक्षा और अन्य आधुनिक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उनका कहना था कि दोनों देशों की क्षमताओं का समन्वय भविष्य में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा दे सकता है।

    निवेश के मुद्दे पर बोलते हुए अमेरिकी राजदूत ने कहा कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस वर्ष अमेरिका में निवेश आकर्षित करने के मामले में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि लगभग 20.5 अरब डॉलर के नए निवेश को बढ़ावा देने में दूतावास की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके अनुसार यह उपलब्धि भारत में कार्यरत अमेरिकी कंपनियों के बढ़ते विश्वास और स्थिर कारोबारी वातावरण का परिणाम है।

    गोर ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश से पहले बौद्धिक संपदा की सुरक्षा, नियामकीय स्थिरता और कारोबारी माहौल जैसे विषयों पर जानकारी प्राप्त करती हैं। उन्होंने कहा कि भारत के प्रति बढ़ते भरोसे ने निवेशकों का विश्वास मजबूत किया है और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध लगातार गहरे हो रहे हैं। उन्होंने उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि यदि किसी व्यावसायिक परियोजना के दौरान प्रशासनिक या प्रक्रियागत कठिनाइयां आती हैं तो अमेरिकी दूतावास हर संभव सहयोग के लिए उपलब्ध रहेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप विदेशी बाजारों में अमेरिकी कंपनियों के हितों को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार यदि किसी व्यावसायिक समझौते से अमेरिका में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं तो राष्ट्रपति स्वयं भी उस दिशा में पहल करने से पीछे नहीं हटते। इससे स्पष्ट होता है कि अमेरिकी प्रशासन अंतरराष्ट्रीय आर्थिक साझेदारियों को रोजगार और औद्योगिक विकास से जोड़कर देख रहा है।

    भारत आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल है और आने वाले वर्षों में हजारों नए विमानों की आवश्यकता का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में प्रस्तावित बोइंग समझौता केवल विमान खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में निवेश, तकनीक, रक्षा, ऊर्जा, एयरोस्पेस और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर भी पैदा कर सकता है। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है, जिसके लिए व्यापक आर्थिक सहयोग को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर, जानें क्यों नहीं मिल रही राहत

    कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर, जानें क्यों नहीं मिल रही राहत


    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत जहां युद्ध के दौरान करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, वहीं अब यह घटकर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। इसके बावजूद भारत में ईंधन की कीमतों में कोई बड़ी कटौती देखने को नहीं मिल रही है, जबकि पाकिस्तान, भूटान, म्यांमार और नेपाल जैसे देशों में हाल ही में पेट्रोल-डीजल सस्ता हुआ है।

    पड़ोसी देशों में घटे दाम, भारत में स्थिरता

    रिपोर्ट्स के अनुसार, भूटान में पेट्रोल की कीमत लगभग 109.73 रुपये से घटकर 99.94 रुपये प्रति लीटर हो गई है। पाकिस्तान में पेट्रोल 130.82 रुपये से घटकर 101.91 रुपये प्रति लीटर तक आ गया है। वहीं म्यांमार, चीन, नेपाल और श्रीलंका में भी पेट्रोल की कीमतों में कमी दर्ज की गई है।

    डीजल के मामले में भी यही रुझान देखा गया है। पाकिस्तान और चीन में डीजल के दामों में बड़ी गिरावट आई है, जबकि भारत में औसत डीजल कीमत लगभग 98 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है।

    भारत में क्यों नहीं घट रहे दाम?

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुसार नहीं बदलते। इसका एक बड़ा कारण यह है कि जब वैश्विक बाजार में कच्चा तेल महंगा हुआ था, तब सरकारी तेल कंपनियों ने लंबे समय तक कीमतों में वृद्धि नहीं की थी। इस दौरान कंपनियों को भारी नुकसान हुआ, जिसका अनुमान लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक लगाया जा रहा है।

    अब जब कच्चे तेल की कीमतें नीचे आई हैं, तो तेल कंपनियां पहले अपने पुराने घाटे की भरपाई कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रक्रिया में दो से तीन महीने का समय लग सकता है, जिसके बाद ही कीमतों में कटौती की संभावना बन सकती है।

    सरकारी नीति और टैक्स का असर

    जानकारों के मुताबिक, कीमतें स्थिर रहने की एक वजह सरकार की कर नीति भी है। चुनावी अवधि के दौरान केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में प्रति लीटर 10 रुपये की कटौती की थी, जिससे आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली थी।

    हालांकि, इससे सरकार के राजस्व पर भी असर पड़ा और अनुमान के मुताबिक करीब एक लाख करोड़ रुपये तक की आय में कमी आई। इसी कारण फिलहाल कीमतों में बड़ी कटौती की संभावना सीमित मानी जा रही है।

    तुरंत राहत की उम्मीद कम

    विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक तेल कंपनियों का पिछला नुकसान पूरी तरह से कवर नहीं हो जाता और वैश्विक बाजार में कीमतें स्थिर नहीं रहतीं, तब तक पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है। ऐसे में आम उपभोक्ताओं को फिलहाल कीमतों में राहत के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

  • वेनेजुएला भूकंप संकट में भारत की बड़ी मानवीय पहल, ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के तहत राहत और चिकित्सा सहायता से हजारों जिंदगियों को संबल

    वेनेजुएला भूकंप संकट में भारत की बड़ी मानवीय पहल, ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के तहत राहत और चिकित्सा सहायता से हजारों जिंदगियों को संबल

    नई दिल्ली । उत्तरी वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद उत्पन्न गंभीर मानवीय संकट के बीच भारत ने तेजी से राहत अभियान शुरू करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की मिसाल पेश की है। 7.5 तीव्रता के इस भूकंप से व्यापक तबाही हुई है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत और लापता होने की स्थिति ने संकट को और गहरा दिया है। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के तहत आपात राहत और चिकित्सा सहायता भेजी है।

    भारतीय वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमान राहत सामग्री लेकर वेनेजुएला पहुंचे हैं। यह सामग्री कोटे डी आइवर के अबिदजान के रास्ते प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाई गई है। इस अभियान का उद्देश्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत पहुंचाकर जीवन बचाने और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करना है।

    इस राहत मिशन में विदेश मंत्रालय द्वारा लगभग 6 टन आवश्यक दवाइयां और आपातकालीन मेडिकल सामग्री भेजी गई है। इसके साथ ही एक विशेष भारतीय फील्ड अस्पताल टीम भी तैनात की गई है, जिसमें कुल 41 सदस्य शामिल हैं। इस टीम में मेडिकल अफसर, पैरामेडिकल स्टाफ और विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं, जो गंभीर रूप से घायल लोगों के उपचार, ट्रॉमा केयर और आपात सर्जरी जैसी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

    भारत की इस मानवीय पहल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अत्याधुनिक ‘भीष्म क्यूब’ तकनीक है, जिसे आपदा क्षेत्रों में तेजी से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है। इस मिशन के तहत दो भीष्म क्यूब वेनेजुएला भेजे गए हैं, जो एक कॉम्पैक्ट और मोबाइल अस्पताल प्रणाली के रूप में कार्य करते हैं। यह तकनीक कम समय में स्थापित होकर बड़े पैमाने पर मरीजों को उपचार सुविधा देने में सक्षम है।

    भीष्म क्यूब की क्षमता के अनुसार यह एक साथ बड़ी संख्या में मरीजों को ट्रॉमा केयर, इमरजेंसी सर्जरी और आईसीयू स्तर की चिकित्सा सुविधा प्रदान कर सकता है। इसमें पोर्टेबल वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम और आधुनिक डायग्नोस्टिक उपकरण शामिल हैं, जिससे आपदा के समय तुरंत चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जा सकती है।

    वेनेजुएला में भूकंप के बाद स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। कई शहरों और कस्बों में इमारतें ढह गई हैं और राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। मलबे के नीचे फंसे लोगों को निकालने के लिए स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां संयुक्त रूप से प्रयास कर रही हैं।

    इस आपदा में भारी जनहानि और व्यापक विस्थापन की स्थिति ने मानवीय संकट को और गंभीर बना दिया है। ऐसे समय में भारत की त्वरित सहायता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो आपदा प्रबंधन और वैश्विक सहयोग की दिशा में एक मजबूत संदेश देता है।

    भारत का यह राहत अभियान न केवल चिकित्सा सहायता तक सीमित है, बल्कि यह आपदा प्रभावित लोगों के जीवन को बचाने और पुनर्वास प्रयासों को गति देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के माध्यम से भारत ने एक बार फिर वैश्विक मानवीय सहयोग में अपनी सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया है।

  • पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अमेजन का बड़ा दांव, भारत में 1.24 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश से एआई और क्लाउड सेक्टर को मिलेगी रफ्तार

    पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अमेजन का बड़ा दांव, भारत में 1.24 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश से एआई और क्लाउड सेक्टर को मिलेगी रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत वैश्विक निवेशकों के लिए लगातार आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है और दुनिया की अग्रणी प्रौद्योगिकी एवं ई-कॉमर्स कंपनियां देश में अपनी मौजूदगी और निवेश बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही हैं। इसी क्रम में अमेजन ने भारत में 13 अरब डॉलर यानी लगभग 1.24 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश की घोषणा कर एक बड़ा संकेत दिया है। यह निवेश मुख्य रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर केंद्रित रहेगा।

    अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी के भारत दौरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद यह घोषणा सामने आई है। कंपनी का कहना है कि भारत आने वाले वर्षों में उसके सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बाजारों में शामिल रहेगा। नए निवेश के साथ देश में डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने और व्यवसायों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।

    कंपनी के ताजा निवेश प्रस्ताव के बाद भारत में अमेजन की कुल घोषित निवेश योजना 48 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। इससे पहले कंपनी ने दिसंबर 2025 में 35 अरब डॉलर के बड़े निवेश की घोषणा की थी। दोनों घोषणाओं को मिलाकर देखा जाए तो केवल छह महीनों के भीतर अमेजन ने भारत में 48 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जो देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर उसके बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

    अमेजन के अनुसार, वर्ष 2030 तक एआई और क्लाउड सेवाओं की मांग में तेज वृद्धि होने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी भारत में डेटा सेंटर, क्लाउड नेटवर्क, डिजिटल सेवाओं और एआई आधारित समाधानों के विस्तार पर विशेष फोकस करेगी। इससे न केवल बड़ी कंपनियों बल्कि स्टार्टअप, डेवलपर्स, छोटे व्यवसायों और सार्वजनिक संस्थानों को भी आधुनिक तकनीकी संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी।

    कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल बाजारों में से एक है। ई-कॉमर्स, डिजिटल भुगतान, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती मांग ने वैश्विक कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। अमेजन लंबे समय से भारतीय बाजार में सक्रिय है और लाखों ग्राहकों, विक्रेताओं तथा उद्यमियों को विभिन्न सेवाएं उपलब्ध करा रही है।

    एंडी जेसी ने भारत में कंपनी की भूमिका को केवल व्यवसाय तक सीमित न बताते हुए रोजगार और उद्यमिता से भी जोड़ा। उनके अनुसार, अमेजन ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार अवसरों के सृजन में योगदान दिया है। कंपनी का दावा है कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म ने भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे निर्यात को भी बढ़ावा मिला है।

    कंपनी ने छोटे और मध्यम कारोबारियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी कई योजनाएं तैयार की हैं। एआई आधारित समाधान, डिजिटल टूल्स और क्लाउड सेवाओं के माध्यम से लाखों छोटे व्यवसायों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में भी तकनीकी पहुंच बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक छात्रों और संस्थानों को डिजिटल संसाधनों का लाभ मिल सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेजन की यह निवेश योजना भारत के डिजिटल परिवर्तन अभियान को नई गति दे सकती है। एआई, क्लाउड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाला निवेश न केवल तकनीकी क्षेत्र को मजबूत करेगा बल्कि रोजगार, नवाचार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा करेगा। भारत में वैश्विक कंपनियों की बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि देश भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

  • नीति आयोग समर्थित राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज में युवा स्टार्टअप्स का दमदार प्रदर्शन, सस्टेनेबिलिटी आधारित छह नवाचारों को मिली बड़ी पहचान और वित्तीय सहायता

    नीति आयोग समर्थित राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज में युवा स्टार्टअप्स का दमदार प्रदर्शन, सस्टेनेबिलिटी आधारित छह नवाचारों को मिली बड़ी पहचान और वित्तीय सहायता

    नई दिल्ली । देश में नवाचार और उद्यमिता को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित राष्ट्रीय स्तर की एक प्रमुख प्रतियोगिता में युवाओं द्वारा संचालित छह स्टार्टअप्स को विजेता घोषित किया गया है। सस्टेनेबिलिटी, संसाधन संरक्षण और सामाजिक प्रभाव पर आधारित इन स्टार्टअप्स ने अपने अभिनव समाधानों के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। चयनित उद्यमों को वित्तीय सहायता के साथ-साथ प्रशिक्षण, मेंटरशिप और उद्योग जगत से जुड़ने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उनके विचारों को बड़े स्तर पर विकसित करने में मदद मिलेगी।

    यह प्रतियोगिता देश में उभरते उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और सतत विकास से जुड़े समाधान विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। इसमें सर्कुलर इकोनॉमी, टिकाऊ वस्त्र एवं फैशन, पर्यावरण-अनुकूल खाद्य प्रणालियां तथा जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को केंद्र में रखा गया। इन विषयों पर आधारित नवाचारों ने न केवल तकनीकी क्षमता दिखाई बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रस्तुत कीं।

    प्रतियोगिता को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रतिस्पर्धा मिली। देश के 28 राज्यों से 350 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 50 संभावनाशील स्टार्टअप्स का चयन एक विशेष क्षमता विकास कार्यक्रम के लिए किया गया। तीन महीने तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को व्यवसाय विकास, बाजार रणनीति, प्रभाव मूल्यांकन और निवेशकों से संवाद जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और उद्योग जगत से जुड़े अनुभवी पेशेवरों ने मार्गदर्शन प्रदान किया।

    कार्यक्रम के तहत सभी चयनित स्टार्टअप्स को अपने विचार और व्यवसाय मॉडल विशेषज्ञों की जूरी के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिला। मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद शीर्ष 20 स्टार्टअप्स को एक विशेष इमर्शन बूटकैंप के लिए चुना गया, जहां उन्हें उद्यमिता से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों और उद्योग की वास्तविक चुनौतियों को समझने का अवसर मिला। इस दौरान निवेशकों, नीति निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और सफल उद्यमियों के साथ संवाद ने प्रतिभागियों को अपने मॉडल को और अधिक मजबूत बनाने में सहायता प्रदान की।

    अंतिम चरण में तीन स्टार्टअप्स को विजेता घोषित करते हुए उन्हें 3.5 लाख रुपये की सीड ग्रांट प्रदान की गई, जबकि तीन अन्य स्टार्टअप्स को उपविजेता के रूप में 2.2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी गई। इसके अतिरिक्त सभी विजेता टीमों को क्षमता विकास कार्यक्रमों और राष्ट्रीय नवाचार नेटवर्क से जोड़ने की व्यवस्था भी की गई है ताकि वे अपने समाधानों को व्यापक स्तर पर लागू कर सकें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में प्रतिभा और नवाचार की कमी नहीं है, लेकिन संसाधनों और अवसरों का समान वितरण अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। बड़े शहरों में निवेश और मार्गदर्शन अपेक्षाकृत अधिक उपलब्ध है, जबकि छोटे शहरों, दूरस्थ क्षेत्रों और पूर्वोत्तर राज्यों के उद्यमियों तक ऐसे अवसर सीमित रूप से पहुंच पाते हैं। इसी अंतर को कम करने के लिए इस प्रकार की पहलें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि चयनित स्टार्टअप्स में महिला उद्यमियों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। कुल चयनित उद्यमों में 40 प्रतिशत से अधिक महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो देश के नवाचार परिदृश्य में बढ़ती महिला भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, युवा नेतृत्व, तकनीकी नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व का यह संगम भारत को सतत विकास के लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

  • ब्रिटिश PM किएर स्टार्मर ने दिया इस्तीफा…. भारत के साथ रिश्तों की दी मजबूती

    ब्रिटिश PM किएर स्टार्मर ने दिया इस्तीफा…. भारत के साथ रिश्तों की दी मजबूती


    नई दिल्ली।
    किएर स्टार्मर (Keir Starmer) ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री (British Prime Minister) पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद अब लेबर पार्टी के लिए अपना नया लीडर चुनने का समय और बढ़ गया है. वहीं, नए चुने गए पार्लियामेंट मेंबर एंडी बर्नहैम (Parliament Member Andy Burnham) आने वाले हफ्तों में 10 डाउनिंग स्ट्रीट में चार्ज संभालने वाले हैं।

    ब्रिटिश इंडियन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर के तौर पर उनके स्टार्मर ने सिर्फ भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को पूरा किया. इसके साथ ही उन्होंने आगे के लिए भी आपसी रिश्तों को मजबूती दी, जिस पर देश के नए पीएम आगे काम कर सकते हैं।

    कोबरा बीयर के फाउंडर और इंडिया ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप के को-चेयर लॉर्ड करण बिलिमोरिया ने कहा, ‘जब भारत की बात आती है, तो उनके प्राइम मिनिस्टर रहते हुए UK-इंडिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन हुए थे, जिस पर हमने जनवरी 2022 में ही बातचीत शुरू कर दी थी।


    भारत-ब्रिटेन के रिश्तों की मजबूती में स्टार्मर का रोल

    बिलिमोरिया ने आगे कहा, ‘भारत उनके लिए एक खास रिश्ते और एक खास देश के तौर पर बहुत, बहुत जरूरी है, जहां UK की बात है और हमेशा रहेगी. लेबर पार्टी का अगला लीडर कोई भी हो, भारत उनकी टॉप प्रायोरिटी होगी और वो दुनिया की पांचवीं और छठी सबसे बड़ी इकॉनोमी और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी इकॉनोमी भारत के बीच UK-भारत के रिश्ते के भविष्य को सबसे जरूरी मानेंगे।

    बिलिमोरिया ने स्टार्मर को एक ‘अच्छा इंसान’ बताया, जो बाइलेटरल पार्टनरशिप की बात आने पर हमेशा सुनते थे. उन्होंने बताया, ‘नौ साल तक, मैं एक के बाद एक प्राइम मिनिस्टर से कहता रहा, चाहे वो बोरिस जॉनसन हों, चाहे ऋषि सुनक हों, एक बड़ा बिजनेस डेलीगेशन भारत ले जाएं क्योंकि इससे बहुत बड़ा असर पड़ेगा. और उनमें से किसी ने ऐसा नहीं किया, लेकिन किएर स्टार्मर ने सुना और पिछले साल अक्टूबर में हम एक बड़ा बिजनेस डेलीगेशन मुंबई ले गए।


    ‘बिजनेस सरकार से पहले आता है…’

    यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के ग्रुप CEO डॉ. किशोर जयरामन ने इन डेवलपमेंट्स को ‘बदलाव का प्रोसेस’ बताया. जयरामन ने कहा, ‘जब FTA पर बातचीत हो रही थी, तब सरकार बदल गई. ग्रेट ब्रिटेन ने जो महानता दिखाई है, वो ये है कि वो सरकार से आगे है. बिजनेस सरकार से पहले आता है.’

    उन्होंने आगे कहा, ‘ये एक ऐसी पार्टनरशिप है जो बहुत लंबे समय तक चलेगी क्योंकि ये सिद्धांतों पर आधारित है, ये एक विन-विन एग्रीमेंट पर आधारित है और ये आगे बढ़ती रहेगी और ये दोनों तरफ की इंडस्ट्री को फायदा पहुंचाती रहेगी. UKIBC एक ट्रेड काउंसिल है जो बिजनेस ग्रोथ को बढ़ावा देती है और हम UK और इंडिया में बिजनेस को सपोर्ट करते रहेंगे और कॉरिडोर को बढ़ाते रहेंगे।


    ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए मजबूत किए UK-इंडिया के रिश्ते

    टेक एंटरप्रेन्योर और AI पॉलिसी लैब्स के फाउंडर उदय नागराजू हाल ही में हाउस ऑफ लॉर्ड्स में सबसे नए ब्रिटिश इंडियन लेबर पीयर्स में से एक बने हैं. उनका भी मानना है कि स्टार्मर ने कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट के साथ UK-इंडिया रिश्तों में एक बड़ा कदम आगे बढ़ाने में मदद की है।

    नागराजू ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हमारे प्राइम मिनिस्टर, किएर स्टार्मर, इज्जत और एक सीरियस रिकॉर्ड के साथ ऑफिस छोड़ रहे हैं. उन्होंने लेबर पार्टी को सरकार में वापस लाया, स्थिरता और आर्थिक भरोसे को ब्रिटिश राजनीति के केंद्र में वापस लाया. उन्होंने 2024 के आम चुनाव से पहले वादा किया था कि उनके प्रधानमंत्री रहते लेबर सरकार भारत के साथ रिश्ते फिर से ठीक करेगी, जो उन्होंने पूरा किया. उन्होंने कहा, ‘CETA का क्रेडिट किएर और बेशक, भारत सरकार को भी जाता है।

    उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे लगता है कि अगले लेबर प्राइम मिनिस्टर ग्रोथ, सिक्योरिटी, क्लीन एनर्जी स्किल्स, टेक, AI और भारत के साथ गहरी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के उस प्लेटफॉर्म पर काम करेंगे और उन्हें ऐसा करना चाहिए।


    ‘GDP में बड़े योगदान के लिए याद…’

    लेबर लीडर के तौर पर स्टार्मर के साथ मिलकर काम करने वाले कृष रावल ने स्टार्मर को ऐसा प्राइम मिनिस्टर बताया जिन्होंने भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन किया. उनके मुताबिक स्टार्मर को ब्रिटेन की GDP में उनके बड़े योगदान के लिए याद किया जाएगा।

  • UP: लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर में चला विशेष अभियान, फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थान सील

    UP: लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर में चला विशेष अभियान, फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थान सील


    कानपुर।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में कोचिंग संस्थान (Coaching Institute) से जुड़े हादसे के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने शहर के प्रमुख कोचिंग हब काकादेव में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है. सोमवार को चलाए गए विशेष अभियान (Special Campaign) के दौरान फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया. जांच में इन संस्थानों में भवन और सुरक्षा संबंधी मानकों के उल्लंघन की बात सामने आने पर यह कार्रवाई की गई।

    केडीए अधिकारियों की टीम ने अलग-अलग क्षेत्रों में निरीक्षण कर उन संस्थानों को चिह्नित किया, जहां आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था. कार्रवाई के दौरान संस्थानों को खाली कराया गया और बाद में उन्हें सील कर दिया गया।

    प्राधिकरण के अनुसार, अभियान के तहत विभिन्न जोनों में एक साथ कार्रवाई की गई. पहले चरण में 22 संस्थानों को चिह्नित किया गया है, जबकि अन्य कोचिंग संस्थानों की भी जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि मानकों की अनदेखी पाए जाने पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

    सील किए गए संस्थानों में फिजिक्स वाला, वर्कस्पेस, महेंद्राज और केमिस्ट्री वाले संजीव राठौर जैसे चर्चित नाम शामिल हैं. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। वहीं, इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए हैं. उनका कहना है कि शहर में लंबे समय से अनेक कोचिंग संस्थान बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों और निर्धारित मानकों के संचालित हो रहे हैं, लेकिन नियमित जांच नहीं की जाती।

    लोगों का आरोप है कि किसी बड़े हादसे के बाद ही विभाग सक्रिय होता है और फिर कुछ समय तक अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि समय-समय पर निरीक्षण और नियमों के अनुपालन की समीक्षा होती रहे, तो ऐसी स्थिति पैदा होने से पहले ही कमियों को दूर किया जा सकता है और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

  • US ने ईरान से तेल ब्रिक्री पर लगे प्रतिबंध को हटाया…. भारत को भी मिलेगा फायदा

    US ने ईरान से तेल ब्रिक्री पर लगे प्रतिबंध को हटाया…. भारत को भी मिलेगा फायदा


    तेहरान।
    अमेरिका (America) ने ईरान (Iran) के तेल सेक्टर (Oil sector) पर लगे कड़े प्रतिबंधों को अस्थायी तौर पर हटा दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से ईरान को 60 दिनों की राहत दी गई है। इसके तहत ईरान अब 21 अगस्त तक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों (Crude Oil and Petroleum Products) की बिक्री कर सकेगा। अमेरिका के इस कदम का असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट के साथ-साथ भारत पर भी देखने को मिलेगा।


    ईरान को क्यों मिली यह छूट?

    17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे। यह 60 दिनों की छूट उसी समझौते का हिस्सा है। इस समझौते के तहत ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बिना किसी रोक-टोक के मुक्त आवाजाही (फ्री एंड ओपन ट्रांजिट) की अनुमति देने का वादा किया है।

    इसके अलावा, ईरान अब अपने देश में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को भी आने की इजाजत देगा। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में हुई इस बातचीत को ‘अच्छी प्रगति’ बताया है और इसे एक बड़ी उपलब्धि करार दिया है।


    किन देशों को तेल बेच सकेगा ईरान?

    इस फैसले के बाद ईरान दुनिया के लगभग हर देश को अपना तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बेच सकता है। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे उत्तर कोरिया, क्यूबा और क्रीमिया को ईरान तेल नहीं बेच पाएगा। इस सौदे में एक अहम बात यह भी है कि ईरान को तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर में किया जा सकेगा।


    क्या अमेरिका भी करेगा ईरान से तेल का आयात?

    1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अमेरिका ने कभी भी ईरानी तेल का आयात नहीं किया है। लेकिन, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की ओर से जारी किए गए नए जनरल लाइसेंस के अनुसार, अगर तेल की बिक्री, डिलीवरी या ऑफलोडिंग की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जरूरी हुआ, तो ईरानी तेल को अमेरिका में भी आयात किया जा सकता है।


    भारत के लिए इस फैसले के क्या हैं मायने?

    साल 2019 में जब अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए थे, उससे पहले तक भारत ईरानी तेल का एक बहुत बड़ा खरीदार था। भारत के अलावा दक्षिण कोरिया, जापान, ग्रीस, ताइवान, इटली और तुर्की भी बड़े खरीदार थे।

    2009 के आंकड़ों पर गौर करें तो भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में ईरान की 14 फीसदी हिस्सेदारी थी और वह भारत का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर था। लेकिन 2019 में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति रहते हुए जब ईरान पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगाए गए, तब नई दिल्ली ने तेहरान से तेल खरीदना पूरी तरह से बंद कर दिया था। मौजूदा समय में दुनिया भर में तेल सप्लाई की जो किल्लत और अस्थिरता चल रही है, उसे देखते हुए अमेरिका की इस 60 दिन की छूट से भारत को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है।

    आपको बता दें कि फिलहाल भारत रूस से रिकॉर्ड स्तर पर तेल खरीद रहा है। मार्केट एनालिटिक्स फर्म केप्लर (Kpler) के अनुसार, केवल जून महीने में भारत ने रूस से 26 लाख बैरल प्रतिदिन तेल का आयात किया है, जो इसी अवधि में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 54 प्रतिशत है।

  • जम्मू कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के प्रचार को किया खारिज

    जम्मू कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के प्रचार को किया खारिज


    नई द‍िल्‍ली । जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के बासठवें सत्र में भारत ने पाकिस्तान और इस्लामी सहयोग संगठन की ओर से जम्मू कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज कर दिया। भारत ने स्पष्ट कहा कि जम्मू कश्मीर देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और इस विषय पर किसी भी प्रकार का भ्रम या गलत व्याख्या स्वीकार नहीं की जा सकती। भारतीय प्रतिनिधि ने मंच पर कहा कि पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और गलत इरादों पर आधारित हैं तथा इनका उद्देश्य केवल अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करना है।

    भारत ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से अपने घरेलू संकट और आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे प्रचार का सहारा लेता रहा है। भारतीय पक्ष ने यह भी कहा कि इस्लामी सहयोग संगठन द्वारा की गई टिप्पणियां तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और यह एकतरफा दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। भारत ने यह दोहराया कि जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा था और है तथा हमेशा रहेगा और इस वास्तविकता को कोई भी बयान बदल नहीं सकता।

    भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि असली मुद्दा वह क्षेत्र है जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है और जिसे पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर के रूप में जाना जाता है। भारत ने आरोप लगाया कि वहां दशकों से लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है और सैन्य दबाव के कारण जनता की मूलभूत स्वतंत्रताओं को सीमित किया गया है। भारत ने कहा कि यह स्थिति किसी भी प्रकार से लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है और लगातार असंतोष और अशांति का कारण बनी हुई है।

    भारत ने आगे कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी नीति के रूप में इस्तेमाल करता है और फिर खुद को आतंकवाद का शिकार बताने की कोशिश करता है। भारतीय प्रतिनिधि ने इस विरोधाभास को उजागर करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की दोहरी नीति लंबे समय से देखी जा रही है। भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे दावे वास्तविकता को नहीं बदल सकते और न ही तथ्यों को छिपा सकते हैं।

    सिंधु जल संधि पर टिप्पणी करते हुए भारत ने कहा कि यह समझौता उस समय की परिस्थितियों में हुआ था जब क्षेत्रीय स्थिति अलग थी लेकिन अब समय बदल चुका है और जल संसाधनों के प्रबंधन को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार देखना होगा। भारत ने संकेत दिया कि आतंकवाद और सहयोग एक साथ नहीं चल सकते और किसी भी प्रकार की साझेदारी तभी संभव है जब पारस्परिक विश्वास और जिम्मेदारी सुनिश्चित हो।

    भारत ने अपने वक्तव्य में यह भी स्पष्ट किया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति और स्थिरता के पक्ष में है लेकिन किसी भी प्रकार के झूठे प्रचार और राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित बयानों को स्वीकार नहीं करेगा। भारत ने दोहराया कि उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना है तथा वह इस दिशा में हर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।