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  • ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश ने भारत से मांगी अतिरिक्त डीजल आपूर्ति, पाइपलाइन के जरिए बढ़ेगा ईंधन सहयोग

    ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश ने भारत से मांगी अतिरिक्त डीजल आपूर्ति, पाइपलाइन के जरिए बढ़ेगा ईंधन सहयोग


    नई दिल्ली । बांग्लादेश में बिजली और गैस की कमी के बीच ऊर्जा संकट लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। इस स्थिति से निपटने के लिए बांग्लादेश ने भारत से सीमा पार पाइपलाइन के जरिए डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति करने की अपील की है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ ईंधन सुरक्षा को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

    बांग्लादेश के पावर, एनर्जी और मिनरल रिसोर्सेज मंत्री इकबाल हसन महमूद ने भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के साथ बैठक के बाद ऊर्जा सहयोग को चर्चा के प्रमुख मुद्दों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश पहले से ही पाइपलाइन के माध्यम से भारत से डीजल आयात करता है और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उसने भारत से इसकी आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध किया है।

    बांग्लादेश इस समय बिजली उत्पादन के लिए जरूरी ईंधन और गैस की उपलब्धता को लेकर दबाव का सामना कर रहा है। ऊर्जा की मांग पूरी करने के लिए डीजल की पर्याप्त आपूर्ति महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में भारत से अतिरिक्त ईंधन मिलने पर बांग्लादेश की घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है और बिजली उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

    भारत और बांग्लादेश के बीच ऊर्जा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार महत्वपूर्ण हुआ है। दोनों देशों के बीच बिजली के आदान-प्रदान के साथ ईंधन आपूर्ति और सीमा पार ऊर्जा संपर्क से जुड़ी व्यवस्थाएं भी विकसित हुई हैं। इसी सहयोग के तहत भारत से बांग्लादेश तक डीजल पहुंचाने के लिए सीमा पार पाइपलाइन का इस्तेमाल किया जाता है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया। बांग्लादेश की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत के साथ ऊर्जा संबंध दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े हैं। पड़ोसी देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए सहयोग को आगे बढ़ाना दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए डीजल आपूर्ति ने बांग्लादेश की ईंधन जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है। अप्रैल की शुरुआत में इस पाइपलाइन के माध्यम से भारत से बांग्लादेश को करीब 5,000 टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति शुरू हुई थी। उस समय पश्चिम एशिया में समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ी अनिश्चितता के बीच ईंधन आयात पर दबाव बढ़ने की आशंका थी। ऐसे माहौल में पाइपलाइन के जरिए आपूर्ति को बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया।

    मौजूदा बिजली और गैस संकट के बीच बांग्लादेश की अतिरिक्त डीजल मांग से दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों का महत्व और बढ़ गया है। यदि भारत की ओर से अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराई जाती है, तो इससे बांग्लादेश को बिजली उत्पादन और परिवहन समेत कई क्षेत्रों में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

    ऊर्जा सहयोग के साथ दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध भी इस समय चर्चा के केंद्र में हैं। सीमा पार बिजली और ऊर्जा संपर्क को मजबूत करने से क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को गति देने की संभावना है। बांग्लादेश की ताजा अपील ऐसे समय आई है जब वह अपनी तत्काल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भरोसेमंद ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है।

  • प्लास्टिक के 10-20 रुपये के नोट कब आएंगे? आरबीआई गवर्नर ने फील्ड ट्रायल और लॉन्च प्लान पर दी अहम जानकारी

    प्लास्टिक के 10-20 रुपये के नोट कब आएंगे? आरबीआई गवर्नर ने फील्ड ट्रायल और लॉन्च प्लान पर दी अहम जानकारी

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक देश में पॉलिमर यानी प्लास्टिक बैंक नोटों को प्रचलन में लाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल जारी है। इन परीक्षणों के नतीजों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही इन्हें बड़े स्तर पर बाजार में उतारने का अंतिम फैसला लिया जाएगा। यदि सभी परीक्षण सफल रहते हैं तो वित्त वर्ष 2027-28 तक इन नोटों को चरणबद्ध तरीके से जारी किए जाने की संभावना है।

    आरबीआई के अनुसार, पॉलिमर नोटों का परीक्षण देश के विभिन्न क्षेत्रों और अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ये नोट भारतीय मौसम, लगातार उपयोग और दैनिक लेनदेन की परिस्थितियों में कितने टिकाऊ और प्रभावी साबित होते हैं। परीक्षण के दौरान नोटों की मजबूती, घिसाव, सुरक्षा और परिचालन संबंधी कई पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है।

    केंद्रीय बैंक का मानना है कि पॉलिमर नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक समय तक उपयोग योग्य रहते हैं। विशेष रूप से 10 और 20 रुपये जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों का लेनदेन सबसे अधिक होता है, जिसके कारण वे जल्दी खराब हो जाते हैं। ऐसे में पॉलिमर सामग्री से बने नोट लंबे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं और बार-बार नए नोट छापने की आवश्यकता भी कम हो सकती है। इससे नोटों की छपाई और प्रतिस्थापन पर होने वाले खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है।

    सरकार पहले ही 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे चुकी है। पायलट परियोजना के तहत दोनों मूल्यवर्ग के बड़ी संख्या में नोट जारी कर विभिन्न परिस्थितियों में उनकी उपयोगिता का परीक्षण किया जा रहा है। इन परीक्षणों से प्राप्त आंकड़ों और अनुभवों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

    पॉलिमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा। इनमें पारदर्शी विंडो, उन्नत सुरक्षा फीचर और नकली नोटों की पहचान आसान बनाने वाली तकनीक शामिल हो सकती है। इससे जालसाजी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही नोटों की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा।

    आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कागजी मुद्रा को पूरी तरह बंद करने की कोई योजना नहीं है। पॉलिमर नोट जारी होने के बाद भी मौजूदा कागजी नोट कानूनी रूप से मान्य रहेंगे और दोनों प्रकार की मुद्रा समानांतर रूप से प्रचलन में रहेगी। इससे लोगों को नए नोटों को अपनाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और नकदी व्यवस्था पर किसी प्रकार का अचानक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फील्ड ट्रायल सफल रहता है तो भारत भी उन देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां पॉलिमर मुद्रा का व्यापक उपयोग किया जाता है। इससे नोटों की उम्र बढ़ाने, नकली मुद्रा पर अंकुश लगाने और नकदी प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल सभी की नजर फील्ड ट्रायल के परिणामों और आरबीआई के अंतिम निर्णय पर बनी हुई है।

  • मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी, सीएसएएम, डीपफेक और सिस्टम एरर को लेकर जताया खेद

    मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी, सीएसएएम, डीपफेक और सिस्टम एरर को लेकर जताया खेद

    नई दिल्ली । मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम), डीपफेक कंटेंट और ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़ी तकनीकी त्रुटियों को लेकर भारत सरकार से माफी मांगी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने कुछ मामलों में हुई चूक पर खेद व्यक्त करते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और भारतीय कानूनों के पालन को लेकर सरकार लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है।

    जानकारी के अनुसार, भारत सरकार ने मेटा को स्पष्ट किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका केवल तकनीकी माध्यम तक सीमित नहीं मानी जा सकती। सरकार का कहना है कि यदि कोई मंच सामग्री के प्रसार और दृश्यता को प्रभावित करता है, तो उस पर भारतीय कानूनों के अनुरूप आवश्यक जिम्मेदारियां भी लागू होती हैं। इसी संदर्भ में कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई और स्थानीय नियमों के पूर्ण अनुपालन पर जोर दिया गया।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान मेटा की ओर से सीएसएएम और डीपफेक जैसे संवेदनशील विषयों पर विशेष चिंता व्यक्त की गई। कंपनी ने स्वीकार किया कि इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अपने तकनीकी तंत्र और निगरानी प्रणाली को लगातार मजबूत बनाने की आवश्यकता है। साथ ही ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़ी कुछ तकनीकी त्रुटियों पर भी खेद जताते हुए उन्हें दूर करने की प्रक्रिया तेज करने की बात कही गई।

    यह मामला उस विवाद के बाद और अधिक चर्चा में आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो कुछ समय के लिए फेसबुक पर उपलब्ध नहीं रहा। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित संसदीय समिति ने मेटा से जवाब मांगा था और निर्धारित समय के भीतर बिना शर्त माफी की मांग की थी। समिति ने यह भी संकेत दिया था कि यदि कंपनी संतोषजनक जवाब देने में विफल रहती है तो नियामकीय स्तर पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।

    इसी क्रम में मेटा के एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सामग्री प्रबंधन, पारदर्शिता, जवाबदेही और भारतीय कानूनों के पालन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भारत में संचालित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को देश के लागू नियमों और कानूनी प्रावधानों का पूर्ण पालन करना होगा।

    मेटा और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधियों ने बैठक में कहा कि उनके प्लेटफॉर्म पर पहले से ही कंटेंट मॉडरेशन, फैक्ट-चेकिंग और सुरक्षा संबंधी कई आंतरिक व्यवस्थाएं लागू हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग रोकने और आपत्तिजनक सामग्री के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए लगातार तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं। सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच हुई यह बातचीत भविष्य में ऑनलाइन सुरक्षा, पारदर्शिता और डिजिटल जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • भारतीय कार्गो शिप पर समुद्र में बड़ा हमला, रेस्क्यू ऑपरेशन से बचाए गए सभी नाविक, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

    भारतीय कार्गो शिप पर समुद्र में बड़ा हमला, रेस्क्यू ऑपरेशन से बचाए गए सभी नाविक, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

    नई दिल्ली । यमन के तटीय क्षेत्र के पास भारतीय मालवाहक जहाज पर हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। भारतीय मालवाहक पोत ‘फैज नूरे औलिया’ अज्ञात दिशा से आए एक प्रोजेक्टाइल की चपेट में आने के बाद गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। टक्कर के प्रभाव से जहाज का संतुलन बिगड़ गया और उसमें तेजी से पानी भरने लगा। कुछ ही समय बाद जहाज समुद्र में पलटकर डूब गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी 14 चालक दल के सदस्यों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

    घटना के तुरंत बाद यमन के तटरक्षक बलों ने बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया। समुद्र में फंसे चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकालने के लिए कई बचाव इकाइयों को तैनात किया गया। अभियान के दौरान 13 भारतीय नागरिकों सहित सभी 14 नाविकों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। इसके बाद उन्हें मोखा बंदरगाह पहुंचाया गया, जहां उनकी आवश्यक चिकित्सा जांच और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की गईं। अधिकारियों ने बताया कि सभी नाविक सुरक्षित हैं और उनकी स्थिति सामान्य बनी हुई है।

    घटना की जानकारी मिलते ही भारत सरकार ने इस हमले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने इसे बिना किसी उकसावे के किया गया हमला बताया और समुद्री व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता व्यक्त की। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर इस प्रकार की घटनाएं वैश्विक व्यापार और नौवहन व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। भारत ने स्पष्ट किया कि ऐसे हमलों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    सरकार की ओर से महानिदेशक समुद्री प्रशासन को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर पूरे मामले की निगरानी करने, प्रभावित चालक दल को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने तथा क्षेत्र में मौजूद अन्य भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही स्थिति पर लगातार नजर रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक उपायों पर भी जोर दिया गया है।

    भारत ने इस कठिन परिस्थिति में त्वरित बचाव अभियान चलाने वाले यमन के अधिकारियों और तटरक्षक बलों के प्रति आभार भी व्यक्त किया है। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के कारण ही सभी नाविकों की जान बचाई जा सकी। इस बीच समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। भारत ने सुरक्षित समुद्री आवाजाही, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों से प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री व्यापार पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकती हैं, इसलिए संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना समय की आवश्यकता बन गई है।

  • PoJK Unrest: अधिकार मांगने वालों का दमन, खौफनाक हालात में बेबस मां ने सुनाई पीड़ा, पीओके पर भारत ने क्या कहा?

    PoJK Unrest: अधिकार मांगने वालों का दमन, खौफनाक हालात में बेबस मां ने सुनाई पीड़ा, पीओके पर भारत ने क्या कहा?


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर अर्थात पीओके में अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे आम नागरिकों पर वहां की सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे दमन और अत्याचार की खौफनाक तस्वीरें सामने आ रही हैं। रावलकोट में एक 15 वर्षीय निर्दोष किशोर की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद परिजनों की बेबसी और चीत्कार ने क्षेत्र में व्याप्त भयावह स्थिति को उजागर कर दिया है।

    पीओके की जनता पिछले काफी समय से सस्ता आटा, किफायती बिजली और मूलभूत जनसुविधाओं की मांग को लेकर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन कर रही है। हालांकि जवाब में पाकिस्तानी प्रशासन और सुरक्षा बल नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियां चला रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारों की आवाज उठाने के एवज में युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे दर्जनों परिवारों के चिराग बुझ चुके हैं।

    क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह ठप कर दिया गया है और सड़कों पर कड़ा पहरा लगा दिया गया है, ताकि हिंसा की खबरें बाहर न आ सकें। स्थानीय अस्पतालों की स्थिति भी अत्यंत दयनीय बनी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार प्राथमिक इलाज की पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं है और इलाज कराने आने वाले घायल युवाओं में डर का माहौल है। लोगों को भय है कि अस्पताल जाने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा या फिर मार दिया जाएगा।

    दूसरी ओर भारत ने पीओके में हाल ही में आयोजित कराए गए चुनावों को पूरी तरह से एक ढोंग और छलावा करार दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान लोकतंत्र का दिखावा करके वहां चल रहे जनविरोध और हत्याओं के कड़वे सच को छिपाने का प्रयास कर रहा है। फर्जी चुनावों के जरिए अपनी अवैध वैधता साबित करने की यह कोशिश अंतरराष्ट्रीय समुदाय को धोखा देने जैसी है।

    विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार जून 2026 से लेकर अब तक वहां पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 90 बेगुनाह नागरिकों की जान जा चुकी है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों से मांग की है कि वैश्विक समुदाय को पाकिस्तान द्वारा नागरिकों पर किए जा रहे इन अत्याचारों, संचार प्रतिबंधों और मानवाधिकारों के दोहरे रवैये के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उसे जवाबदेह ठहराना चाहिए।

  • भारत-नेपाल सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, सुस्ता में अस्थायी बांध तोड़े जाने के आरोप से विवाद गहराया

    भारत-नेपाल सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, सुस्ता में अस्थायी बांध तोड़े जाने के आरोप से विवाद गहराया

    नई दिल्ली । भारत और नेपाल के बीच सीमा से जुड़े संवेदनशील सुस्ता क्षेत्र में एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई है। नेपाल की ओर से आरोप लगाया गया है कि भारतीय सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने नेपाली क्षेत्र में प्रवेश कर वहां बनाया जा रहा एक अस्थायी मिट्टी का बांध हटा दिया। नेपाली पक्ष का कहना है कि यह बांध नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ से स्थानीय बस्तियों की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाया जा रहा था। इस घटना के बाद सीमा क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया, हालांकि प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

    बताया जा रहा है कि विवाद उस समय सामने आया जब स्थानीय स्तर पर अस्थायी तटबंध निर्माण का कार्य चल रहा था। नेपाल का दावा है कि भारतीय सुरक्षा कर्मियों ने इस निर्माण पर आपत्ति जताई और बाद में बांध को हटाने की कार्रवाई की। इस दौरान स्थानीय लोगों और भारतीय सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस भी हुई। घटना का एक वीडियो भी सामने आने की चर्चा है, जिसके बाद मामला दोनों देशों के अधिकारियों तक पहुंच गया।

    नेपाल सरकार ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए राजनयिक स्तर पर भारत के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया है। नेपाल का कहना है कि सीमा से जुड़े मामलों में पहले से तय व्यवस्थाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी कार्रवाई से पहले आपसी समन्वय आवश्यक है। वहीं भारतीय पक्ष की ओर से यह बताया गया कि जिस क्षेत्र में निर्माण किया जा रहा था, वह लंबे समय से विवादित माना जाता है और ऐसे इलाकों में यथास्थिति बनाए रखने पर दोनों देशों के बीच पहले भी सहमति बन चुकी है।

    सुस्ता क्षेत्र भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। दोनों देश इस क्षेत्र पर अपना-अपना दावा करते रहे हैं। समय-समय पर सीमा निर्धारण, नदी की धारा में बदलाव और स्थानीय गतिविधियों को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी के मार्ग में परिवर्तन के कारण इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी समय के साथ बदलती रही है, जिससे सीमा संबंधी विवाद और जटिल हो गया है।

    स्थानीय प्रशासन ने बताया कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई है। एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है ताकि दोनों ओर के नागरिकों के बीच किसी प्रकार का तनाव न बढ़े। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

    भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बेहद मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच खुली सीमा व्यवस्था के कारण लाखों लोग रोजमर्रा के आवागमन और व्यापार से जुड़े हैं। ऐसे में सीमा से जुड़े किसी भी विवाद का शांतिपूर्ण और आपसी सहमति से समाधान निकालना दोनों देशों के हित में माना जाता है। जानकारों का मानना है कि संवाद और कूटनीतिक स्तर पर निरंतर संपर्क बनाए रखने से इस प्रकार के विवादों का स्थायी समाधान संभव हो सकता है और द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास कायम रहेगा।

  • नेपाल की भारत से नई अपील, सीमा पार यात्रा के लिए राष्ट्रीय पहचान पत्र को मान्यता देने का अनुरोध

    नेपाल की भारत से नई अपील, सीमा पार यात्रा के लिए राष्ट्रीय पहचान पत्र को मान्यता देने का अनुरोध

    नई दिल्ली । नेपाल ने भारत सरकार से औपचारिक रूप से अनुरोध किया है कि वह नेपाली नागरिकों के राष्ट्रीय पहचान पत्र (नेशनल आइडेंटिटी कार्ड) को सीमा पार यात्रा और हवाई सफर के लिए वैध यात्रा दस्तावेज के रूप में मान्यता दे। नेपाल का कहना है कि इस कदम से दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही अधिक सुरक्षित, आसान और आधुनिक पहचान प्रणाली के अनुरूप हो सकेगी।

    नेपाल और भारत के बीच लंबे समय से खुली सीमा व्यवस्था लागू है, जिसके तहत दोनों देशों के नागरिकों को सामान्य परिस्थितियों में बिना पासपोर्ट और वीजा के एक-दूसरे के देश में आने-जाने की अनुमति है। हालांकि, वर्तमान व्यवस्था में भारत मुख्य रूप से नेपाली नागरिकों के पासपोर्ट और नागरिकता प्रमाण पत्र को आधिकारिक पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार करता है। अब नेपाल चाहता है कि उसके राष्ट्रीय पहचान पत्र को भी इसी श्रेणी में शामिल किया जाए।

    नेपाल के आव्रजन विभाग के अनुसार, इस संबंध में जून के अंतिम सप्ताह में भारत सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव में अनुरोध किया गया है कि नेपाली नागरिकों के लिए राष्ट्रीय पहचान पत्र को सीमा पार आवागमन और हवाई यात्रा के दौरान वैध पहचान दस्तावेज के रूप में मान्यता दी जाए।

    नेपाल सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय पहचान पत्र आधुनिक बायोमेट्रिक तकनीक पर आधारित है। इसमें फिंगरप्रिंट, चेहरे की पहचान और आईरिस स्कैन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सुरक्षित रहती हैं। इसके कारण यह पारंपरिक नागरिकता प्रमाण पत्र की तुलना में अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय माना जाता है।

    नेपाल में सरकार विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए राष्ट्रीय पहचान पत्र के उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रही है। पासपोर्ट आवेदन, बैंक खाता खोलने, भूमि पंजीकरण और अन्य कई सरकारी कार्यों में इस पहचान पत्र को अनिवार्य बनाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य धीरे-धीरे पुराने नागरिकता प्रमाण पत्रों की जगह डिजिटल रूप से सत्यापित किए जा सकने वाले पहचान पत्रों को लागू करना है।

    नेपाल की ओर से प्रस्ताव भेजे जाने के बाद काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने राष्ट्रीय पहचान पत्र से जुड़े तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं के बारे में जानकारी भी प्राप्त की है। बताया गया कि यह औपचारिक वार्ता नहीं थी, बल्कि कार्ड की विशेषताओं और सुरक्षा व्यवस्था को समझने के उद्देश्य से जानकारी का आदान-प्रदान किया गया।

    नेपाल के अधिकारियों का मानना है कि यदि राष्ट्रीय पहचान पत्र को भारत में भी वैध यात्रा दस्तावेज का दर्जा मिल जाता है तो दोनों देशों की सुरक्षा व्यवस्था और पहचान सत्यापन प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो जाएगी। इससे सीमा पार आवाजाही के दौरान पहचान संबंधी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

    वर्तमान व्यवस्था के तहत भारत आने वाले नेपाली नागरिकों के लिए पासपोर्ट और नागरिकता प्रमाण पत्र स्वीकार किए जाते हैं। वहीं नेपाल जाने वाले भारतीय नागरिक पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र अथवा केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जारी कुछ अन्य मान्य पहचान पत्रों का उपयोग कर सकते हैं।

    नेपाल के राष्ट्रीय पहचान एवं नागरिक पंजीकरण विभाग के अनुसार अब तक 45 लाख से अधिक नागरिकों को राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि लगभग दो करोड़ लोगों ने इसके लिए पंजीकरण कराया है। नेपाल को उम्मीद है कि भविष्य में इस डिजिटल पहचान प्रणाली को भारत की मान्यता मिलने से दोनों देशों के बीच आवागमन और अधिक सुरक्षित तथा सुविधाजनक हो सकेगा।

  • राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत चौथे स्थान पर, 39 पदकों के साथ अभियान समाप्त

    राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत चौथे स्थान पर, 39 पदकों के साथ अभियान समाप्त


    ग्लासगो।
    राष्ट्रमंडल खेल 2026 के सभी मुकाबलों के समापन के साथ भारत ने पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। भारतीय दल ने कुल 39 पदक जीतकर लगातार दूसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में चौथे स्थान पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

    भारत के खाते में 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक आए। इनमें पुरुष खिलाड़ियों ने 5 स्वर्ण, 13 रजत और 5 कांस्य सहित कुल 23 पदक, जबकि महिला खिलाड़ियों ने 8 स्वर्ण, 4 रजत और 4 कांस्य सहित 16 पदक जीते।

    पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया 70 स्वर्ण, 45 रजत और 56 कांस्य सहित कुल 171 पदकों के साथ शीर्ष पर रहा। इंग्लैंड 110 पदकों के साथ दूसरे और कनाडा 62 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भारत और स्कॉटलैंड दोनों ने 39-39 पदक जीते, लेकिन अधिक रजत पदकों के आधार पर भारत चौथे स्थान पर रहा।

    अहम बात यह रही कि इस बार राष्ट्रमंडल खेल के कार्यक्रम में भारत के मजबूत खेलों में शामिल कुछ प्रमुख स्पर्धाएं नहीं थीं। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बर्मिंघम 2022 की तरह इस बार भी चौथा स्थान हासिल किया।

    भारत के अभियान में मुक्केबाजी, टेबल टेनिस, एथलेटिक्स, भारोत्तोलन, जूडो और अन्य खेलों में खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। महिला खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदकों की संख्या में पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए भारतीय दल की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  • दिल्ली में 22वीं कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप का भव्य समापन, भारत के खाते में 16 पदक

    दिल्ली में 22वीं कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप का भव्य समापन, भारत के खाते में 16 पदक


    नई दिल्ली।
    दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित 22वीं कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप 2026 का रविवार को भव्य समापन हुआ। समापन समारोह में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुख्य अतिथि के रूप में विजेता खिलाड़ियों को पदक एवं सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का संकल्प है कि राष्ट्रीय राजधानी को केवल देश की राजनीतिक राजधानी ही नहीं, बल्कि भारत की ‘स्पोर्ट्स कैपिटल’ के रूप में भी स्थापित किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 27 जुलाई से आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में 25 कॉमनवेल्थ देशों के खिलाड़ियों की भागीदारी ने दिल्ली की विश्वस्तरीय खेल आयोजनों की मेजबानी क्षमता को एक बार फिर साबित किया है। उन्होंने इसे खेल उत्कृष्टता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का उत्सव बताया।

    समारोह में शिक्षा एवं खेल मंत्री आशीष सूद, कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस फेडरेशन और टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारी, विभिन्न देशों के खिलाड़ी, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल तथा खेल जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। समापन समारोह में कलारीपयट्टू, फ्लाइंग ड्रमर्स, विशेष बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और मेडल सेरेमनी ने आकर्षण का केंद्र बनाया।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थियों को प्रतियोगिता देखने के लिए आमंत्रित किया गया, ताकि वे विश्वस्तरीय खिलाड़ियों से प्रेरणा लेकर खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने कहा कि खेल अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों का विकास करते हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत न केवल अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, बल्कि विश्वस्तरीय खेल आयोजनों की सफल मेजबानी भी कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2027 में दिल्ली आईएसएफ वर्ल्ड स्कूल रेसलिंग चैंपियनशिप और आईएसएफ वर्ल्ड स्कूल बैडमिंटन चैंपियनशिप की मेजबानी करेगी। इसके अलावा दिल्ली सरकार ने नेशनल गेम्स और खेलो इंडिया गेम्स की मेजबानी के लिए भी दावेदारी पेश की है।

    मुख्यमंत्री ने भारतीय टीम को विशेष रूप से बधाई देते हुए कहा कि पुरुष और महिला दोनों टीम स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर खिलाड़ियों ने देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने आयोजन समिति, तकनीकी अधिकारियों, स्वयंसेवकों, सुरक्षा एजेंसियों और सभी सहभागी देशों का सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।

    शिक्षा एवं खेल मंत्री आशीष सूद ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली को इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी का अवसर मिला, जिसने राजधानी को वैश्विक खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित करेंगे।

    भारत का शानदार प्रदर्शन

    चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 16 पदक अपने नाम किए। भारत ने पुरुष और महिला टीम स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतने के अलावा पुरुष एवं महिला एकल, महिला युगल, मिश्रित युगल तथा पुरुष युगल स्पर्धाओं में भी स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल कर प्रतियोगिता में अपना दबदबा कायम रखा। भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने विश्व मंच पर भारतीय टेबल टेनिस की बढ़ती ताकत को एक बार फिर साबित किया।

  • कच्चे तेल की खोज….. समुद्र मंथन योजना पर 84084 करोड़ खर्च करेगा भारत

    कच्चे तेल की खोज….. समुद्र मंथन योजना पर 84084 करोड़ खर्च करेगा भारत


    नई दिल्‍ली।
    भारत (India) एनर्जी निर्भरता (Energy Dependence) को कम करने के लिए कई बड़े कदम उठा रहा है. अब भारत ने समुद्र से कच्‍चे तेल (Crude Oil) को निकालने के लिए एक योजना शुरू किया है. इस योजना के तहत समुद्र के नीचे अधिक तेल और प्राकृतिक गैस की खोज की जाएगी. यह एक लॉन्‍गटर्म स्‍कीम है. इस प्रोग्राम का नाम ‘समुद्र मंथन’ रखा गया है.

    नेशनल आफसोर एक्‍सप्‍लोरेशन योजना (समुद्र मंथन) के तहत 84,084 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है. यह खर्च वित्त वर्ष 2030-31 तक चलेगा, जिसका लक्ष्य गहरे जल क्षेत्रों में घरेलू तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है. समुद्र में उन जगहों पर तेल और गैस की खोज की जाएगी, जहां पर विशाल संसाधन मौजूद हैं और अभी तक किसी ने खोज नहीं की है।

    सरकार के अनुसार, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस नजरिए को दर्शाती है, जिसे उन्होंने पहली बार 2025 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में चर्चा की थी, जिसमें भारत की ऊर्जा क्षमता को उजागर करने के लिए आधुनिक युग के समुद्र मंथन का संचालन करने की बात कही गई थी।

    यह कार्यक्रम ऐसे समय में शुरू किया गया है जब भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88-89% और प्राकृतिक गैस का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है. यानी देश की ऊर्जा की बढ़ती मांग विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है और जियो-पॉलिटिक तनाव के कारण भारत के लिए एनर्जी सप्‍लाई प्रभावित हुई है।


    इस योजना के तहत क्‍या होगा?

    भारत में कई आफशोर सेमीडेंट्र्री बेसिन हैं, जिनमें तेल और प्राकृतिक गैस मौजूद हो सकती है, लेकिन इनमें से कई अभी भी बड़े पैमाने पर अनछुए हैं क्योंकि वहां से तेल निकालना कठिन और महंगा है. इस योजना के तहत, सरकार बड़े पैमाने पर सर्वे, भूवैज्ञानिक अध्ययन, ड्रिलिंग और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे प्रमुख प्रारंभिक चरण के कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराएगी।

    इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले भूवैज्ञानिक डेटा का उत्पादन करना है जो आशाजनक हाइड्रोकार्बन संसाधनों की पहचान कर सके और तेल-गैस निकालने में मदद कर सके. भारत के इस कदम से घरेलू स्‍तर पर तेल और गैस में बड़ा निवेश आ सकता है. साथ ही भारत का एनर्जी क्षमता मजबूत हो सकती है।


    समुद्र मंथन आखिर करेगा क्या?

    इस योजना के तहत आधुनिक टेक्‍नोलॉजी का उपयोग करते हुए उन जगहों की पहचानल की जाएगी, जहां पर तेल और गैस के होने की संभावना है. इसके बाद आशाजनक गहरे पानी और अति-गहरे पानी के क्षेत्रों में ड्रिलिंग की जाएगी. इस योजना के तहत सीमावर्ती जगहों में वैज्ञानिक ड्रिलिंग, सामान्य उत्पादन और निकासी, तेल और गैस विनिर्माण और सेवा क्षेत्र, आधुनिक टेक, डिजिटल प्रोगाम मैनेजमेंट और क्षमता निर्माण भी शामिल हैं।

    इससे क्‍या लाभ हो सकता है?
    सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से समय के साथ तेल और गैस भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल के बराबर मात्रा जुड़ जाएगी. हालांकि व्यावसायिक उत्पादन में अभी कई साल लगेंगे, लेकिन सफल खोजों से भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, लॉन्‍गटर्म ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है, निवेश आकर्षित हो सकता है, रोजगार पैदा हो सकते हैं और देश की ऊर्जा क्षमताओं को बढ़ावा मिल सकता है।