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  • CWG 2026: भारत की पदक तालिका में लंबी छलांग….एक दिन में 8 गोल्ड सहित रिकॉर्ड 16 मेडल जीते

    CWG 2026: भारत की पदक तालिका में लंबी छलांग….एक दिन में 8 गोल्ड सहित रिकॉर्ड 16 मेडल जीते


    नई दिल्ली।
    ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स (Glasgow Commonwealth Games) के 10वें दिन भारत (India) की झोली में रिकॉर्ड 16 मेडल (Record 16 medals) आए। इन मेडल के दम पर भारत ने ओवरऑल मेडल टैली में लंबी छलांग लगाई है। भारत अब कुल 39 मेडल के साथ चौथे पायदान पर पहुंच गया है।

    भारत ने 10वें दिन 8 गोल्ड, 5 सिल्वर और 3 बॉन्ज मेडल जीते, जिसमें 7 गोल्ड तो बॉक्सिंग में आए। बॉक्सर प्रीति पवार, जैस्मीन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने टॉप मेडल जीते, जबकि जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने अपने-अपने वेट कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीते। लॉन्ग-डिस्टेंस रनर गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 5000m फाइनल में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर CWG 2026 का अपना दूसरा मेडल जीता। दूसरी ओर, पुरुषों के F57 शॉट पुट इवेंट में भारत 1-2 पर रहा, जिसमें सोमन राणा ने गोल्ड और शुभम जुयाल ने सिल्वर मेडल जीता। पुरुषों के ट्रिपल जंप इवेंट में, प्रवीण चित्रवेल ने सिल्वर मेडल जीता, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। जूडोका उन्नति शर्मा ने भी ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। भारत के कुल 39 मेडल (13 गोल्ड, 17 ​​सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज) हो गए हैं, जिससे देश मेडल टेबल में चौथे नंबर पर आ गया है।


    कॉमनवेल्थ गेम्स के 10वें दिन मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स

    गोल्ड प्रीति पवार – महिलाओं की 54kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड जैस्मिन लैम्बोरिया – महिलाओं की 57kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड सोमन राणा – पुरुषों की शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    गोल्ड साक्षी चौधरी – महिलाओं की 51kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड प्रिया घनघस – महिलाओं की 60kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड अरुंधति चौधरी – महिलाओं की 70kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड सचिन सिवाच – पुरुषों की 60kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड अंकुश पंघाल – पुरुषों का 80kg (बॉक्सिंग)
    सिल्वर प्रवीण चित्रावेल – पुरुषों का ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    सिल्वर जदुमणि सिंह मंडेंगबाम – पुरुषों का 55kg (बॉक्सिंग)
    सिल्वर शुभम जुयाल – पुरुषों का शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    सिल्वर लवलीना बोरगोहेन – महिलाओं का 75kg (बॉक्सिंग)
    सिल्वर नरेंद्र बेरवाल – पुरुषों का +90kg (बॉक्सिंग)
    ब्रॉन्ज सेल्वा प्रभु थिरुमारन – पुरुषों की ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    ब्रॉन्ज उन्नति शर्मा – महिलाओं की -57kg (जूडो)
    ब्रॉन्ज गुलवीर सिंह – पुरुषों की 5000m (एथलेटिक्स)


    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स (13)

    मीराबाई चानू – महिलाओं की 48kg (वेटलिफ्टिंग)
    शर्मिला धनखड़ – महिलाओं की शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    दिलीप महादू गावित – पुरुषों की 100m T47 (पैरा एथलेटिक्स)
    अस्मिता डे – महिलाओं की -48kg (जूडो)
    हर्ष सिंह – पुरुषों की -60kg (जूडो)
    प्रीति पवार – महिलाओं की 54kg (बॉक्सिंग)
    जैस्मिन लैम्बोरिया – महिलाओं की 57kg (बॉक्सिंग)
    सोमन राणा – पुरुषों की शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    साक्षी चौधरी – महिलाओं की 51kg (बॉक्सिंग)
    प्रिया घनघस – महिलाओं की 60kg (बॉक्सिंग)
    अरुंधति चौधरी – महिलाओं की 70kg (बॉक्सिंग)
    सचिन सिवाच – पुरुषों की 60kg (बॉक्सिंग)
    अंकुश पंघाल – पुरुषों का 80kg (बॉक्सिंग)


    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स (17)

    ऋषिकांत सिंह – पुरुषों का 60kg (वेटलिफ्टिंग)
    मुथुपंडी राजा – पुरुषों का 65kg (वेटलिफ्टिंग)
    ज्ञानेश्वरी यादव – महिलाओं का 53kg (वेटलिफ्टिंग)
    वल्लूरी अजय बाबू – पुरुषों का 79kg (वेटलिफ्टिंग)
    हरजिंदर कौर – महिलाओं का 69kg (वेटलिफ्टिंग)
    सर्वेश कुशारे – पुरुषों का हाई जंप (एथलेटिक्स)
    गुलवीर सिंह – पुरुषों का 10,000m (एथलेटिक्स)
    एम. श्रीशंकर – पुरुषों का लॉन्ग जंप (एथलेटिक्स)
    मोहम्मद बेसिल – पुरुषों का 100m T47 (पैरा एथलेटिक्स)
    लवप्रीत सिंह – पुरुषों का +110kg (वेटलिफ्टिंग)
    यामिनी मौर्या – महिलाओं का -57kg (जूडो)
    नीरज चोपड़ा – पुरुषों का जेवलिन थ्रो (एथलेटिक्स)
    प्रवीण चित्रावेल – पुरुषों का ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    जदुमणि सिंह मंडेंगबाम – पुरुषों का 55kg (बॉक्सिंग)
    शुभम जुयाल – पुरुषों का शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    लवलीना बोरगोहेन – महिलाओं का 75kg (बॉक्सिंग)
    नरेंद्र बेरवाल – पुरुषों का +90kg (बॉक्सिंग)


    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स (9)

    झंडू कुमार – पुरुषों का हैवीवेट (पैरा पावरलिफ्टिंग)
    बिंद्यारानी देवी – महिलाओं का 58kg (वेटलिफ्टिंग)
    शिल्पा के. शायला – महिलाओं का शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    सीमा कालीरमना – महिलाओं का डिस्कस थ्रो (एथलेटिक्स)
    तेजस्विन शंकर – डेकाथलॉन (एथलेटिक्स)
    यश वीर सिंह – पुरुषों की जैवलिन थ्रो (एथलेटिक्स)
    सेल्वा प्रभु थिरुमारन – पुरुषों की ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    उन्नति शर्मा – महिलाओं की -57kg (जूडो)
    गुलवीर सिंह – पुरुषों की 5000m (एथलेटिक्स)

  • PoK में पाक सेना की फायरिंग में 40 लोगों की मौत… भारत की जांच की मांग

    PoK में पाक सेना की फायरिंग में 40 लोगों की मौत… भारत की जांच की मांग


    नई दिल्ली।
    पाक अधिकृत कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir- PoK) में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) की फायरिंग में 40 लोगों की मौत पर भारत (India) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकृष्ट कराते हुए जांच की मांग की है। भारत ने कहा कि इस प्रकरण में पाकिस्तान (Pakistan) ने स्वीकारा है कि वह भारत में खून बहाने के लिए मुजाहिदीन भेजता है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेस में कहा कि प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग में पीओके में 40 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने इन लोगों को अपना दुश्मन बताया। राजनीतिक मामलों पर प्रधानमंत्री के विशेष सहायक ने खुले तौर पर माना कि जिन मुजाहिदीन को पाकिस्तान सरकार ने ट्रेनिंग और हथियार दिए और भारत में खून बहाने के लिए भेजा,अब वे इसका इस्तेमाल पाक के खिलाफ ही करने लगे हैं। जैसवाल ने कहा, इससे पाकिस्तान ने अपनी करतूतों की पुष्टि कर दी है।

    पीओके में निहत्थे लोगों पर हमला
    पीओके में पाक की बर्बरता के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा। आरोप है कि सुरक्षाबल निहत्थे लोगों पर सुरक्षाबल ताकत का इस्तेमाल कर रहे। लोग मारे जा रहे हैं, मीडिया पर प्रतिबंध लगा हुआ है। शुक्रवार को लोग पाक के खिलाफ सड़कों पर उतरे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। रावलकोट के रहने वाले सरदार अमन खान कश्मीरी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अकील ने बयान जारी कर बताया कि पाकिस्तान शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग कर रहा। दोनों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से स्थिति की जमीनी हकीकत के बारे में बताने की अपील की है।

    अमन खान ने पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों को आतंकी बताया जा रहा। पाक रेंजर, फ्रंटियर कॉर्प्स और अन्य सुरक्षाबल घरों की छतों पर तैनात हैं और बेकसूर लोगों को निशाना बना रहे। अमन खान ने बताया कि सुरक्षाबल राष्ट्रीय सुरक्षा में इस्तेमाल होने वाले घातक हथियारों का इस्तेमाल निहत्थे लोगों पर कर रहे हैं। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे।

    एक प्रश्न के उत्तर में जैसवाल ने कहा कि रूसी सेना से अब तक 139 भारतीयों की रिहाई हो चुकी है। अभी 24 भारतीयों के वहां होने की खबर है। सरकार उनकी रिहाई की कोशिश कपीओके में पाक की बर्बरता के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा। आरोप है कि सुरक्षाबल निहत्थे लोगों पर सुरक्षाबल ताकत का इस्तेमाल कर रहे। लोग मारे जा रहे हैं, मीडिया पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

    अमेरिकी समाचार पत्र द्वारा पीओके को पाकिस्तानी कश्मीर बताने वाली रिपोर्ट पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि पीओके पर अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मीडिया संस्थानों को कानूनी नामों का इस्तेमाल करना होगा। जम्मू- कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है, था और हमेशा रहेगा।

  • भारत में इबोला को लेकर हाई अलर्ट…. कांगो से लौटे BSF जवान में दिखे लक्षण

    भारत में इबोला को लेकर हाई अलर्ट…. कांगो से लौटे BSF जवान में दिखे लक्षण


    नई दिल्ली।
    दुनियाभर में इबोला वायरस (Ebola virus) के मंडराते खतरे के बीच भारत (India) भी अलर्ट (Alert) पर है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) से लौटे सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force-BSF) के एक 52 वर्षीय जवान में इबोला के संदिग्ध लक्षण दिखने के बाद हड़कंप मच गया है। एहतियात के तौर पर जवान को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के इबोला आइसोलेशन वॉर्ड में भर्ती कराया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि देश में अभी तक इबोला के एक भी कन्फर्म मामले की पुष्टि नहीं हुई है और सरकार स्थिति पर पूरी मुस्तैदी से नजर बनाए हुए है।


    क्वारंटीन के 20वें दिन बिगड़ी जवान की तबीयत

    संदिग्ध लक्षणों वाला यह बीएसएफ जवान संयुक्त राष्ट्र (UN) शांति मिशन का हिस्सा था और बीते 11 जुलाई को ही कांगो से भारत लौटा था। इबोला प्रभावित क्षेत्र से आने के कारण नियमों के तहत जवान को एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (APHO) में 21 दिनों के अनिवार्य क्वारंटीन में रखा गया था।

    क्वारंटीन पीरियड के 20वें दिन की शाम को जवान को अचानक तेज बुखार और बदन दर्द की शिकायत हुई, जो इबोला संक्रमण के शुरुआती लक्षण माने जाते हैं। प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करते हुए मरीज को तुरंत RML अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया।

    स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, जवान के खून के नमूने जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे भेजे गए हैं। फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार है और यह केवल एक संदिग्ध मामला है।


    एक्शन में सरकार, 11 हजार यात्रियों की हो चुकी है स्क्रीनिंग

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा ‘बुंदीबुग्यो इबोला आउटब्रेक’ को अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद से ही भारत सरकार अलर्ट मोड पर है। शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने संसद में बताया कि 23 मई से अब तक इबोला प्रभावित देशों से भारत आए 10,974 अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच की जा चुकी है।


    यात्रा पर बैन नहीं, लेकिन निगरानी सख्त

    कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान जैसे इबोला प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की कड़ी निगरानी की जा रही है। भारत सरकार ने यात्रा पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन एयर सुविधा 2.0 पोर्टल और ‘सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म’ के जरिए उन सभी यात्रियों की पहचान की जा रही है, जो पिछले 21 दिनों में इन देशों में गए थे।


    इन शहरों के एयरपोर्ट्स पर सबसे ज्यादा जांच

    स्क्रीनिंग के मामले में मुंबई एयरपोर्ट सबसे आगे है, जहां अब तक 7,568 यात्रियों की जांच की गई है। इसके बाद दिल्ली में 1,833, हैदराबाद में 532, चेन्नई में 210, बेंगलुरु में 205 और अहमदाबाद में 200 यात्रियों की स्क्रीनिंग हो चुकी है।


    इबोला से निपटने के लिए भारत की क्या है तैयारी?

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इबोला के संभावित खतरे से निपटने के लिए नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC), ICMR और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ मिलकर एक मजबूत रणनीति तैयार की है। देशभर के अस्पतालों में विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार किए गए हैं।

    प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर अतिरिक्त डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती कर दी गई है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए NCDC का पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर 24×7 काम कर रहा है। इसके अलावा, देश भर के चुनिंदा अस्पतालों में मॉक ड्रिल भी आयोजित की गई हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध मामले के सामने आने पर बिना देरी के तुरंत एक्शन लिया जा सके।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर का ऐतिहासिक कारनामा, डेकाथलॉन में भारत को मिला पहला पदक

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर का ऐतिहासिक कारनामा, डेकाथलॉन में भारत को मिला पहला पदक


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने ऐसा इतिहास रचा है, जिसने भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दिला दी है। पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में 7976 अंक हासिल कर उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया और राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में इस कठिन स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि डेकाथलॉन को ट्रैक एंड फील्ड की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिताओं में गिना जाता है, जिसमें खिलाड़ी की ताकत, गति, तकनीक, सहनशक्ति और मानसिक मजबूती सभी की एक साथ परीक्षा होती है।

    इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक ग्रेनाडा के लिंडन विक्टर ने 8096 अंकों के साथ जीता, जबकि कनाडा के अनुभवी एथलीट डेमियन वार्नर 8036 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। तेजस्विन शंकर ने दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया और भारत के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक सुनिश्चित किया।

    तेजस्विन की शुरुआत 100 मीटर दौड़ में सातवें स्थान से हुई थी, लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की। लंबी कूद में दूसरे स्थान पर रहते हुए उन्होंने अंकतालिका में सुधार किया। हाई जंप में 2.15 मीटर की शानदार छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया और कुल रैंकिंग में दूसरे स्थान पर पहुंच गए। पहले दिन के अंत तक उन्होंने खुद को पदक की दौड़ में मजबूती से बनाए रखा।

    दूसरे दिन भी तेजस्विन ने दमदार प्रदर्शन जारी रखा। 110 मीटर बाधा दौड़ और डिस्कस थ्रो में उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया। हालांकि पोल वॉल्ट और भाला फेंक में उन्हें उम्मीद के मुताबिक अंक नहीं मिले, जिससे वह तीसरे स्थान पर खिसक गए। इसके बावजूद अंतिम इवेंट 1500 मीटर दौड़ में उन्होंने संयम बनाए रखा और कुल 7976 अंक के साथ कांस्य पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया।

    डेकाथलॉन को एथलेटिक्स की सबसे कठिन स्पर्धाओं में से एक माना जाता है। यह प्रतियोगिता दो दिनों तक चलती है और इसमें कुल 10 अलग-अलग इवेंट शामिल होते हैं। पहले दिन खिलाड़ियों को 100 मीटर दौड़, लंबी कूद, शॉटपुट, हाई जंप और 400 मीटर दौड़ में हिस्सा लेना होता है। दूसरे दिन 110 मीटर बाधा दौड़, डिस्कस थ्रो, पोल वॉल्ट, भाला फेंक और 1500 मीटर दौड़ आयोजित की जाती है। हर स्पर्धा में प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाते हैं और अंत में सभी 10 इवेंट्स के अंकों को जोड़कर अंतिम परिणाम तय किया जाता है।

    समय आधारित प्रतियोगिताओं जैसे 100 मीटर, 400 मीटर और 1500 मीटर में कम समय लेने वाले खिलाड़ी को अधिक अंक मिलते हैं। वहीं लंबी कूद, हाई जंप, पोल वॉल्ट, शॉटपुट, डिस्कस और भाला फेंक जैसी फील्ड स्पर्धाओं में जितनी अधिक दूरी या ऊंचाई हासिल होती है, उतने अधिक अंक दिए जाते हैं। इसके लिए विश्व एथलेटिक्स द्वारा निर्धारित आधिकारिक स्कोरिंग प्रणाली लागू होती है।

    तेजस्विन शंकर का यह कांस्य पदक केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए मील का पत्थर है। लगातार दो दिनों तक दस अलग-अलग स्पर्धाओं में उच्च स्तर का प्रदर्शन करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में इस कठिन प्रतियोगिता में भारत का पहला पदक जीतकर तेजस्विन ने साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी अब बहु-इवेंट एथलेटिक्स में भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उनकी यह ऐतिहासिक सफलता आने वाली पीढ़ी के एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और भारतीय एथलेटिक्स के भविष्य को नई दिशा देगी।

  • भारत में जुट सकते हैं दुनिया के बड़े नेता, BRICS समिट में शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की संभावित मौजूदगी पर टिकी नजर

    भारत में जुट सकते हैं दुनिया के बड़े नेता, BRICS समिट में शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की संभावित मौजूदगी पर टिकी नजर

    नई दिल्ली । भारत सितंबर 2026 में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी की तैयारी में जुटा है। इस सम्मेलन को लेकर सबसे अधिक चर्चा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को लेकर हो रही है। यदि उनका दौरा तय होता है, तो यह कोविड-19 महामारी और वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुए सीमा विवाद के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है, यह सम्मेलन भारत की कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भी शामिल होने की संभावना है। रूस की ओर से पहले ही संकेत दिए जा चुके हैं कि राष्ट्रपति पुतिन भारत यात्रा कर सकते हैं। वहीं ब्रिक्स के नए सदस्य देशों में शामिल ईरान भी सम्मेलन में भाग लेने की तैयारी कर रहा है। हालांकि ईरान की ओर से किस स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। यदि सभी प्रमुख नेता सम्मेलन में शामिल होते हैं तो यह हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय बैठकों में से एक होगी।

    ब्रिक्स सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले महीने किर्गिस्तान में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने की संभावना भी जताई जा रही है। इस दौरान उनकी रूस, चीन और ईरान सहित कई सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात हो सकती है। यह बैठक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद एससीओ देशों की पहली शीर्ष स्तरीय बैठक मानी जा रही है, इसलिए क्षेत्रीय सुरक्षा, पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा सहयोग, व्यापार और बहुपक्षीय साझेदारी जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शी जिनपिंग नई दिल्ली आते हैं तो यह भारत और चीन के संबंधों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत होगा। पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद और तनाव के कारण दोनों देशों के रिश्तों में दूरी आई थी, लेकिन हाल के महीनों में संवाद बढ़ाने के प्रयास भी तेज हुए हैं। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की संभावित मुलाकात द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से अहम मानी जा रही है। सीमा प्रबंधन, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर भी चर्चा की संभावना जताई जा रही है।

    इस बीच पाकिस्तान की ओर से भी संकेत मिले हैं कि वर्ष 2027 में इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए भारत सहित सभी सदस्य देशों को औपचारिक निमंत्रण भेजा जाएगा। पाकिस्तान सितंबर 2026 से एससीओ की अध्यक्षता संभालेगा और मेजबान देश होने के नाते सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को आमंत्रित करना उसकी जिम्मेदारी होगी। इस घटनाक्रम को भी क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नई दिल्ली में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर अब दुनिया की नजरें टिकी हैं। यदि चीन, रूस, भारत और अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेता एक मंच पर आते हैं, तो वैश्विक आर्थिक सहयोग, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, व्यापार, निवेश, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे कई अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है। ऐसे में यह सम्मेलन केवल सदस्य देशों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीतिक परिदृश्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

  • भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिर मजबूत, 682.23 अरब डॉलर पर पहुंचा; गोल्ड रिजर्व में भी दर्ज हुई बड़ी बढ़ोतरी

    भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिर मजबूत, 682.23 अरब डॉलर पर पहुंचा; गोल्ड रिजर्व में भी दर्ज हुई बड़ी बढ़ोतरी

    नई दिल्ली । भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार मजबूत होता जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 24 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 6.118 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के साथ 682.2354 अरब डॉलर पर पहुंच गया। लगातार दूसरे सप्ताह दर्ज हुई इस वृद्धि को देश की बाहरी आर्थिक स्थिति के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    इससे पहले 17 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 1.08 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। लगातार दो सप्ताह तक विदेशी मुद्रा भंडार में हुई वृद्धि से यह संकेत मिल रहा है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत की वित्तीय स्थिति स्थिर बनी हुई है और विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार का क्रम जारी है।

    केंद्रीय बैंक के अनुसार, इस दौरान स्वर्ण भंडार के मूल्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। समीक्षा अवधि में गोल्ड रिजर्व 1.308 अरब डॉलर बढ़कर 103.058 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां भी 4.873 अरब डॉलर बढ़कर 555.929 अरब डॉलर हो गईं। यह बढ़ोतरी देश की समग्र वित्तीय मजबूती का संकेत देती है।

    भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया कि विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में केवल अमेरिकी डॉलर ही नहीं बल्कि यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का भी प्रभाव शामिल होता है। इसलिए विदेशी मुद्रा भंडार में होने वाले बदलाव वैश्विक मुद्रा बाजार की गतिविधियों से भी प्रभावित होते हैं।

    हालांकि इस अवधि में स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) में मामूली गिरावट दर्ज की गई। यह 5.3 करोड़ डॉलर घटकर 18.617 अरब डॉलर रह गया। इसके बावजूद विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य प्रमुख घटकों में हुई वृद्धि के कारण कुल भंडार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली।

    वर्ष 2026 की शुरुआत में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बना था। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते रुपये पर भी दबाव देखा गया, जिसके बाद बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने समय-समय पर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया था। इसके कारण कुछ सप्ताह तक विदेशी मुद्रा भंडार में कमी दर्ज की गई थी।

    उल्लेखनीय है कि फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। उसके बाद आई गिरावट से अब धीरे-धीरे उबरने का क्रम जारी है और हाल के सप्ताहों में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है।

    आरबीआई का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी विशेष विनिमय दर को बनाए रखना नहीं है, बल्कि केवल बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करना और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है। आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता है ताकि रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोका जा सके।

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार होता है। इससे आयात भुगतान, बाहरी ऋण दायित्वों का निर्वहन और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौरान वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है। हालिया बढ़ोतरी को भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति और वैश्विक चुनौतियों से निपटने की क्षमता के रूप में देखा जा रहा है।

  • नागरिकता को लेकर बहस के बीच सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, भारतीय पासपोर्ट जारी करने के नियमों पर संसद में दी जानकारी

    नागरिकता को लेकर बहस के बीच सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, भारतीय पासपोर्ट जारी करने के नियमों पर संसद में दी जानकारी

    नई दिल्ली । भारतीय पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है और इसके लिए निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जाती है। हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया कि पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना गया है, बल्कि यह मुख्य रूप से विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला आधिकारिक दस्तावेज है।

    राज्यसभा में भारतीय पासपोर्ट की स्थिति और नागरिकता से जुड़े सवाल उठाए गए थे। इस दौरान सरकार से पूछा गया था कि क्या भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जा सकता है और विदेश की नागरिकता लेने के बाद भारतीय नागरिकता की स्थिति क्या होती है। इसके अलावा नागरिकता कानून से जुड़े कई अन्य विषयों पर भी जानकारी मांगी गई थी।

    सरकार ने जवाब में बताया कि भारतीय पासपोर्ट पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत जारी किया जाता है। पासपोर्ट जारी करने से पहले आवेदक की पात्रता, दस्तावेजों और अन्य जरूरी जानकारियों का सत्यापन किया जाता है। सरकार के अनुसार, यह प्रक्रिया इसलिए अपनाई जाती है ताकि केवल योग्य भारतीय नागरिकों को ही पासपोर्ट जारी किया जा सके।

    केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट भारत के नागरिकों को विदेश यात्रा की सुविधा देने वाला आधिकारिक दस्तावेज है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को नियंत्रित और व्यवस्थित करना है। हालांकि पासपोर्ट नागरिकता से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज जरूर है, लेकिन इसे नागरिकता का एकमात्र और अंतिम प्रमाण नहीं बताया गया है।

    सरकार ने यह भी दोहराया कि भारत में दोहरी नागरिकता की व्यवस्था नहीं है। यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी दूसरे देश की नागरिकता प्राप्त करता है, तो भारतीय कानूनों के अनुसार उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है। ऐसी स्थिति में उसका भारतीय पासपोर्ट भी वैध नहीं रहता और उसे संबंधित प्रक्रिया के तहत इसे वापस करना पड़ता है।

    नागरिकता कानून के प्रावधानों के अनुसार विदेशी नागरिकता लेने के बाद किसी व्यक्ति का भारतीय नागरिक दर्जा समाप्त हो सकता है। इसी वजह से पासपोर्ट जारी करने और उसकी वैधता बनाए रखने के लिए नागरिकता की स्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है। सरकार ने कहा कि पासपोर्ट जारी करने की पूरी प्रक्रिया कानून और निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होती है।

    पासपोर्ट जारी करने से इनकार करने के मामलों का भी कानून में प्रावधान है। यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि आवेदक भारतीय नागरिक नहीं है या वह निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करता, तो उसका आवेदन रोका जा सकता है। इसके अलावा सुरक्षा और कानूनी कारणों के आधार पर भी पासपोर्ट जारी करने से इनकार किया जा सकता है।

    सरकार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में नागरिकता, पहचान और दस्तावेजों को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। केंद्र ने अपने जवाब के माध्यम से यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि भारतीय पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया नियमों और सत्यापन व्यवस्था के आधार पर होती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पासपोर्ट किसी व्यक्ति की विदेश यात्रा के अधिकार से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन नागरिकता का निर्धारण अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है। ऐसे में पासपोर्ट और नागरिकता को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता। सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद नागरिकता और पासपोर्ट से जुड़े नियमों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हुई है।

  • अमेरिका की नई रणनीति में भारत अहम केंद्र, चीन के सूचना अभियान का मुकाबला करने के लिए सोशल मीडिया डिप्लोमेसी पर बढ़ेगा जोर

    अमेरिका की नई रणनीति में भारत अहम केंद्र, चीन के सूचना अभियान का मुकाबला करने के लिए सोशल मीडिया डिप्लोमेसी पर बढ़ेगा जोर

    नई दिल्ली । अमेरिका ने चीन के बढ़ते सूचना प्रभाव और डिजिटल अभियानों का मुकाबला करने के लिए अपनी पब्लिक डिप्लोमेसी रणनीति में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। इस नई रणनीति में भारत को एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वाशिंगटन अब पारंपरिक मीडिया माध्यमों के साथ-साथ सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी नागरिकों तक अपनी पहुंच मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

    अमेरिकी एजेंसी फॉर ग्लोबल मीडिया (यूएसएजीएम) का नेतृत्व करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से नामित सारा रोजर्स ने सीनेट फॉरेन रिलेशंस कमेटी के सामने अपनी रणनीति को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एशिया अमेरिका की प्राथमिकताओं में प्रमुख क्षेत्र होगा, क्योंकि चीन समेत कई देशों द्वारा चलाए जा रहे सूचना अभियानों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

    रोजर्स ने कहा कि अमेरिका को बदलते मीडिया इस्तेमाल के तरीकों के अनुसार अपनी अंतरराष्ट्रीय संचार नीति को आधुनिक बनाना होगा। उन्होंने संकेत दिया कि अब केवल रेडियो और टेलीविजन प्रसारण पर निर्भर रहने के बजाय सोशल मीडिया, छोटे वीडियो, पॉडकास्ट और डिजिटल कम्युनिटी के माध्यम से लोगों से सीधा संवाद स्थापित करने की जरूरत है।

    उन्होंने भारत और जापान जैसे देशों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोगों के बीच संवाद का एक बड़ा माध्यम बन चुके हैं। इसी वजह से अमेरिका अपनी डिजिटल रणनीति के तहत इन क्षेत्रों में अधिक सक्रिय भागीदारी बढ़ाने की योजना बना रहा है।

    अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि सूचना का क्षेत्र अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। चीन लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि मजबूत करने और अपने विचारों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल करता रहा है। ऐसे में अमेरिका भी अपनी पहुंच और प्रभाव को बढ़ाने के लिए नई तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लेना चाहता है।

    रोजर्स ने कहा कि यूएसएजीएम की प्राथमिकताओं में एजेंसी को अधिक प्रभावी बनाना, नेतृत्व को मजबूत करना और उसकी कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाना शामिल होगा। इसके अलावा उन्होंने रिसर्च क्षमता को बेहतर करने पर भी जोर दिया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अमेरिकी संदेश कितने लोगों तक पहुंच रहे हैं और उनका प्रभाव कितना है।

    नई रणनीति के तहत अमेरिका उन देशों और क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहता है जहां स्वतंत्र जानकारी तक लोगों की पहुंच सीमित है। एशिया के अलावा मध्य पूर्व, ईरान, अफगानिस्तान और क्यूबा जैसे क्षेत्रों को भी अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय प्रसारण रणनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत का महत्व अमेरिका के लिए केवल आर्थिक और रक्षा संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब सूचना और डिजिटल प्रभाव के क्षेत्र में भी बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत होने के साथ ही डिजिटल संवाद और सार्वजनिक कूटनीति के नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं।

    यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा व्यापार, तकनीक और सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक सूचना व्यवस्था के क्षेत्र में भी बढ़ रही है। अमेरिका की नई रणनीति का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों के जरिए अपनी पहुंच को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रभाव को बनाए रखना है।

  • हूती नाकेबंदी के बीच भारत के लिए राहत, सऊदी तेल लेकर लाल सागर से सुरक्षित निकले दो टैंकर

    हूती नाकेबंदी के बीच भारत के लिए राहत, सऊदी तेल लेकर लाल सागर से सुरक्षित निकले दो टैंकर


    नई दिल्ली । यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब की तेल आपूर्ति पर नाकेबंदी की घोषणा के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत आ रहे दो बड़े तेल टैंकर लाल सागर के संवेदनशील क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकल गए हैं। इससे फिलहाल भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर तत्काल किसी बड़े असर की आशंका कम हो गई है, हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है।

    सूत्रों के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) द्वारा किराए पर लिया गया सुएजमैक्स श्रेणी का टैंकर अमेजन सऊदी अरब के यनबू बंदरगाह से करीब 10 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर रवाना हुआ था। वहीं मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) के लिए अफ्रामैक्स श्रेणी का टैंकर रोडोस लगभग 7 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है। दोनों जहाज 20 जुलाई के आसपास यनबू बंदरगाह से निकले थे और शुरुआत में स्वेज नहर की दिशा में आगे बढ़े।

    हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी तेल आपूर्ति को निशाना बनाने की चेतावनी के बाद दोनों टैंकरों ने सुरक्षा कारणों से अपनी लोकेशन बताने वाला ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिया और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के रास्ते लाल सागर से बाहर निकल गए। यह कदम समुद्री सुरक्षा के लिहाज से एहतियात के तौर पर उठाया गया, क्योंकि हाल के महीनों में इस क्षेत्र में कई व्यापारिक जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

    लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माने जाते हैं। एशिया और यूरोप के बीच बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य सामान इसी रास्ते से भेजा जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव या नाकेबंदी अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर सीधा असर डाल सकती है।

    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है और सऊदी अरब उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। इसलिए इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा भारतीय अर्थव्यवस्था, ईंधन कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकती है। फिलहाल दोनों टैंकरों के सुरक्षित आगे बढ़ने से तत्काल आपूर्ति बाधित होने का खतरा टल गया है।

    हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या लाल सागर के समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक खतरा बना रहता है, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। इससे भारत जैसे आयातक देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक आपूर्ति और समुद्री मार्गों का उपयोग किया जा सके।

  • रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर के निर्यात में एफटीए बने गेमचेंजर, नए वैश्विक बाजारों तक भारत की पहुंच मजबूत

    रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर के निर्यात में एफटीए बने गेमचेंजर, नए वैश्विक बाजारों तक भारत की पहुंच मजबूत

    नई दिल्ली । भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 863.1 अरब डॉलर का अब तक का सर्वाधिक निर्यात दर्ज कर नया रिकॉर्ड बनाया है। सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि इस उपलब्धि में विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन समझौतों के माध्यम से भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिली, शुल्क रियायतों का लाभ बढ़ा और श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हुए। सरकार का कहना है कि एफटीए की बदौलत भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत हुई है और निर्यात के नए क्षेत्रों में विस्तार संभव हुआ है।

    लोकसभा में लिखित उत्तर देते हुए वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में वस्तु निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) 441.8 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवा क्षेत्र का निर्यात बढ़कर 421.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। दोनों क्षेत्रों के संयुक्त प्रदर्शन से देश का कुल निर्यात 863.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। उन्होंने कहा कि सरकार व्यापार समझौतों के तहत मिलने वाली शुल्क रियायतों के उपयोग की लगातार निगरानी कर रही है, ताकि भारतीय निर्यातकों को इनका अधिकतम लाभ मिल सके।

    सरकार के अनुसार भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) लागू होने के बाद अब तक 4.45 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय निर्यातकों ने शुल्क रियायतों का व्यापक रूप से उपयोग किया है। यूएई को निर्यात होने वाली एचएस 8-डिजिट टैरिफ लाइनों की संख्या भी वित्त वर्ष 2021-22 के 7,546 से बढ़कर 2025-26 में 8,053 हो गई। इन टैरिफ लाइनों के तहत 37.3 अरब डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया, जो भारतीय उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग का संकेत माना जा रहा है।

    भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) के तहत भी भारतीय निर्यातकों को उल्लेखनीय लाभ मिला है। समझौते के बाद अब तक 2.73 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए गए हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया को निर्यात होने वाली टैरिफ लाइनों की संख्या बढ़कर 5,668 हो गई है, जिनके माध्यम से 7.2 अरब डॉलर का निर्यात हुआ। इसी प्रकार भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौते (सीईसीपीए) के तहत भी टैरिफ लाइनों और निर्यात मूल्य दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे भारतीय उत्पादों की पहुंच नए क्षेत्रों तक विस्तारित हुई है।

    सरकार ने बताया कि भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के तहत भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को शुल्क मुक्त पहुंच प्राप्त हुई है। समझौता लागू होने के बाद ओमान को निर्यात में तेज वृद्धि देखने को मिली है। जून 2026 में ओमान को 622.8 मिलियन डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया, जो मई 2026 की तुलना में 54.7 प्रतिशत और जून 2025 की तुलना में 189.6 प्रतिशत अधिक रहा। इसके अलावा यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ लागू समझौते के बाद भी हजारों सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को शुल्क रियायतों का व्यापक लाभ मिला है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए एफटीए में टेक्सटाइल, चमड़ा और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और ईएफटीए जैसे साझेदार देशों के साथ हुए समझौतों ने भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजारों के द्वार खोले हैं। सरकार का कहना है कि इन समझौतों में घरेलू उद्योगों के हितों की सुरक्षा के साथ संतुलित रणनीति अपनाई गई है, जिससे निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ देश के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को भी नई गति मिली है।