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  • रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर के निर्यात में एफटीए बने गेमचेंजर, नए वैश्विक बाजारों तक भारत की पहुंच मजबूत

    रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर के निर्यात में एफटीए बने गेमचेंजर, नए वैश्विक बाजारों तक भारत की पहुंच मजबूत

    नई दिल्ली । भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 863.1 अरब डॉलर का अब तक का सर्वाधिक निर्यात दर्ज कर नया रिकॉर्ड बनाया है। सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि इस उपलब्धि में विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन समझौतों के माध्यम से भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिली, शुल्क रियायतों का लाभ बढ़ा और श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हुए। सरकार का कहना है कि एफटीए की बदौलत भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत हुई है और निर्यात के नए क्षेत्रों में विस्तार संभव हुआ है।

    लोकसभा में लिखित उत्तर देते हुए वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में वस्तु निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) 441.8 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवा क्षेत्र का निर्यात बढ़कर 421.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। दोनों क्षेत्रों के संयुक्त प्रदर्शन से देश का कुल निर्यात 863.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। उन्होंने कहा कि सरकार व्यापार समझौतों के तहत मिलने वाली शुल्क रियायतों के उपयोग की लगातार निगरानी कर रही है, ताकि भारतीय निर्यातकों को इनका अधिकतम लाभ मिल सके।

    सरकार के अनुसार भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) लागू होने के बाद अब तक 4.45 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय निर्यातकों ने शुल्क रियायतों का व्यापक रूप से उपयोग किया है। यूएई को निर्यात होने वाली एचएस 8-डिजिट टैरिफ लाइनों की संख्या भी वित्त वर्ष 2021-22 के 7,546 से बढ़कर 2025-26 में 8,053 हो गई। इन टैरिफ लाइनों के तहत 37.3 अरब डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया, जो भारतीय उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग का संकेत माना जा रहा है।

    भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) के तहत भी भारतीय निर्यातकों को उल्लेखनीय लाभ मिला है। समझौते के बाद अब तक 2.73 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए गए हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया को निर्यात होने वाली टैरिफ लाइनों की संख्या बढ़कर 5,668 हो गई है, जिनके माध्यम से 7.2 अरब डॉलर का निर्यात हुआ। इसी प्रकार भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौते (सीईसीपीए) के तहत भी टैरिफ लाइनों और निर्यात मूल्य दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे भारतीय उत्पादों की पहुंच नए क्षेत्रों तक विस्तारित हुई है।

    सरकार ने बताया कि भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के तहत भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को शुल्क मुक्त पहुंच प्राप्त हुई है। समझौता लागू होने के बाद ओमान को निर्यात में तेज वृद्धि देखने को मिली है। जून 2026 में ओमान को 622.8 मिलियन डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया, जो मई 2026 की तुलना में 54.7 प्रतिशत और जून 2025 की तुलना में 189.6 प्रतिशत अधिक रहा। इसके अलावा यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ लागू समझौते के बाद भी हजारों सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को शुल्क रियायतों का व्यापक लाभ मिला है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए एफटीए में टेक्सटाइल, चमड़ा और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और ईएफटीए जैसे साझेदार देशों के साथ हुए समझौतों ने भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजारों के द्वार खोले हैं। सरकार का कहना है कि इन समझौतों में घरेलू उद्योगों के हितों की सुरक्षा के साथ संतुलित रणनीति अपनाई गई है, जिससे निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ देश के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को भी नई गति मिली है।

  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए फार्मा क्षेत्र में अनुसंधान और निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन : पीयूष गोयल

    वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए फार्मा क्षेत्र में अनुसंधान और निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन : पीयूष गोयल

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश के फार्मास्युटिकल क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी और नवाचार आधारित बनाने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार ऐसा वातावरण तैयार करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जहां अनुसंधान, नई तकनीक और उन्नत चिकित्सा समाधानों को बढ़ावा मिले। इसके साथ ही आम लोगों तक किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    हाल ही में इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में फार्मा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष डॉ. शारविल पटेल ने किया। बैठक में सरकार और उद्योग जगत के बीच बेहतर सहयोग स्थापित करने तथा भारतीय फार्मा उद्योग को वैश्विक स्तर पर अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर विचार किया गया।

    बैठक के दौरान अनुसंधान एवं विकास, क्लीनिकल रिसर्च और उन्नत उपचार तकनीकों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। चर्चा में यह भी माना गया कि यदि इन क्षेत्रों में अधिक निवेश आकर्षित किया जाता है तो भारत का फार्मा इनोवेशन इकोसिस्टम और मजबूत होगा तथा नई दवाओं और उपचार पद्धतियों के विकास को गति मिलेगी। इससे देश की वैज्ञानिक क्षमता बढ़ने के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मजबूत होगी।

    पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार उद्योग के साथ मिलकर ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार करना चाहती है, जहां नवाचार को प्रोत्साहन मिले और निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़े। उनका मानना है कि अनुसंधान आधारित विकास ही भविष्य में भारतीय फार्मा उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकास की इस प्रक्रिया में आम नागरिकों के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना समान रूप से महत्वपूर्ण रहेगा।

    भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग पहले से ही दुनिया के प्रमुख दवा उद्योगों में गिना जाता है। विशेष रूप से कम लागत वाली जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दुनिया के अनेक देशों में भारतीय दवाओं की मांग लगातार बनी हुई है, जिससे यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और निर्यात में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसी कारण सरकार घरेलू विनिर्माण क्षमता, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर लगातार पहल कर रही है।

    फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र के हालिया कारोबारी आंकड़े भी इस उद्योग की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाते हैं। वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में इस क्षेत्र में 13.9 अरब डॉलर मूल्य के 65 सौदे दर्ज किए गए। बड़े विदेशी अधिग्रहण को अलग रखने के बाद भी कुल सौदों का मूल्य पिछली तिमाही की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक रहा, जो निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत माना जा रहा है।

    इसी अवधि में विलय एवं अधिग्रहण गतिविधियों में भी उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। कुल 35 एमएंडए सौदों का मूल्य 13.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया। लेनदेन की संख्या में तिमाही आधार पर 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि कुल सौदों का मूल्य अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। उल्लेखनीय है कि कुल एमएंडए मूल्य में लगभग 96 प्रतिशत योगदान विदेशी अधिग्रहणों का रहा, जिससे स्पष्ट होता है कि भारतीय फार्मा कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मौजूदगी लगातार मजबूत कर रही हैं।

  • FCNR योजना के उत्साहजनक नतीजे…. भारत आ सकते हैं 7 लाख करोड़ रुपये

    FCNR योजना के उत्साहजनक नतीजे…. भारत आ सकते हैं 7 लाख करोड़ रुपये


    नई दिल्ली।
    आरबीआई (RBI) की ओर से विदेशी मुद्रा (Foreign Currency) जुटाने के लिए शुरू की गई एफसीएनआर (बी) योजना (FCNR (B) Scheme) के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के जरिए भारत में कुल 80 से 85 अरब डॉलर (लगभग 7.1 लाख करोड़ रुपये) की विदेशी मुद्रा आ सकती है।


    आखिर 45 दिनों में कैसे टूटा 13 साल पुराना रिकॉर्ड?

    रिपोर्ट में बताया गया है कि योजना के जरिए बैंकों ने महज 45 दिनों में ही इतना फंड जुटा लिया है, जिसने वर्ष 2013 में तीन महीने के दौरान जुटाए गए कुल फंड के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। यह योजना 30 सितंबर तक खुली रहेगी। एसबीआई रिसर्च ने एफसीएनआर (बी) योजना के अपने पुराने अनुमान (40-45 अरब डॉलर) को संशोधित कर बढ़ा दिया है।


    योजना के अंत तक कितना निवेश आने की उम्मीद है?

    रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल एफसीएनआर जमा के जरिए ही योजना के अंत तक 65 से 70 अरब डॉलर आने की उम्मीद है। इसके अलावा, अगस्त और सितंबर 2026 में परिपक्व होने वाले पुराने डिपॉजिट का एक बड़ा हिस्सा भी ऊंची ब्याज दरों के आकर्षण में इसी योजना में दोबारा निवेश हो जाएगा।


    अब तक किस माध्यम से कितना निवेश आया है?

    17 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक आए कुल निवेश में मुख्य योगदान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का रहा। इसमें बाहरी वाणिज्यिक कर्ज (ईसीबी) से 1.34 अरब डॉलर और विदेशी मुद्रा में कर्ज से 1.97 अरब डॉलर की राशि शामिल है।

    आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि विदेशी मुद्रा को आकर्षित करने के लिए जून में घोषित योजनाओं के तहत अब तक 32 अरब डॉलर की राशि भारत आ चुकी है। टैक्स नियमों में रियायत मिलने के बाद डेट सिक्योरिटीज में विदेशी निवेशकों ने करीब 7 अरब डॉलर का निवेश किया है।

  • बाजार की अस्थिरता से घबराने की जरूरत नहीं, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा समय बेहतर अवसर: रमेश दमानी

    बाजार की अस्थिरता से घबराने की जरूरत नहीं, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा समय बेहतर अवसर: रमेश दमानी

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच दिग्गज निवेशक रमेश दमानी ने लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य बनाए रखने और बाजार की अल्पकालिक अस्थिरता से प्रभावित न होने की सलाह दी है। उनका मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में बाजार की दैनिक हलचल पर ध्यान देने के बजाय मजबूत कंपनियों में लंबे समय तक निवेश बनाए रखना बेहतर रणनीति साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत हैं और यही निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत है।

    एक कार्यक्रम के दौरान अपने विचार रखते हुए रमेश दमानी ने कहा कि शेयर बाजार स्वभाव से अस्थिर होता है और समय-समय पर इसमें तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। ऐसे दौर में कई निवेशक घबराकर जल्दबाजी में फैसले लेते हैं, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जो निवेशक अनुशासन बनाए रखते हैं और बाजार की अल्पकालिक चाल के बजाय लंबी अवधि के लक्ष्य पर ध्यान देते हैं, उनके लिए संपत्ति निर्माण की संभावनाएं अधिक मजबूत होती हैं।

    उन्होंने कहा कि निवेश के क्षेत्र में धैर्य सबसे महत्वपूर्ण गुणों में से एक है। यदि किसी निवेशक ने मजबूत आधार वाली कंपनियों का चयन किया है, तो उसे बाजार में आने वाली अस्थायी गिरावट से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, समय के साथ गुणवत्तापूर्ण कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करती हैं और निवेशकों को अच्छे प्रतिफल का अवसर देती हैं।

    रमेश दमानी ने भारत की आर्थिक स्थिति पर भी विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि देश की युवा आबादी, बढ़ती खपत, तेज़ी से विकसित होता औद्योगिक ढांचा और सुधारों पर आधारित आर्थिक नीतियां भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा को मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत को लगभग आठ प्रतिशत की आर्थिक विकास दर बनाए रखने के लिए लगातार विदेशी निवेश की आवश्यकता होगी। विदेशी पूंजी से उद्योगों का विस्तार, रोजगार के नए अवसर और आधुनिक तकनीकों का विकास संभव होता है। उनके अनुसार, यदि भारत अपनी विकास गति को बनाए रखना चाहता है, तो विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की निरंतर उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    आधुनिक तकनीकों पर चर्चा करते हुए रमेश दमानी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ऐसे कई उद्योग और व्यवसाय हैं, जिन पर एआई का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहेगा और भविष्य में वही क्षेत्र निवेशकों के लिए नए अवसर लेकर आ सकते हैं। उनका कहना था कि निवेशकों को केवल चर्चित क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय व्यापक दृष्टिकोण अपनाकर संभावनाओं का आकलन करना चाहिए।

    उन्होंने विदेशी निवेश के रुझानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में निवेश लगातार बढ़ रहा है। इससे देश के तकनीकी और औद्योगिक विकास को गति मिलने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक निवेशकों का भरोसा भारत की आर्थिक क्षमता और भविष्य की विकास संभावनाओं को दर्शाता है।

    वैश्विक बाजारों पर टिप्पणी करते हुए रमेश दमानी ने कहा कि अमेरिकी शेयर बाजार अपने उच्च स्तर के करीब दिखाई देता है, जबकि कुछ औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों में चीन अब भी मजबूत स्थिति में है। इसके बावजूद उनका मानना है कि भारत के पास विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने निवेशकों से अपील की कि वे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएं, क्योंकि अनुशासित निवेश और धैर्य ही समय के साथ बेहतर संपत्ति निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम साबित होता है।

  • भारत और यूक्रेन के गृहप्रवेश में कितना अंतर? महिला ने बताया दोनों देशों की परंपराओं का फर्क, वीडियो देख गदगद हुए लोग

    भारत और यूक्रेन के गृहप्रवेश में कितना अंतर? महिला ने बताया दोनों देशों की परंपराओं का फर्क, वीडियो देख गदगद हुए लोग

    कीव। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यूक्रेन की कंटेंट क्रिएटर सैंड्रा ऑन की पोस्ट ने भारतीय परंपराओं की तारीफ बटोरी. उन्होंने बताया कि यूरोप में जहां नए घर की खुशी दोस्तों के साथ खाने-पीने और बातचीत से शुरू होती है, वहीं भारत में हाउसवार्मिंग से पहले पूजा-पाठ और घर की खुशहाली की कामना की जाती है. सैंड्रा ने भारतीय गृह प्रवेश समारोह को परंपरा, आस्था और परिवार से जुड़ा खूबसूरत अनुभव बताया.

    नई जगह जाना और अपना घर खरीदना हर किसी के लिए खास पल होता है. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोग इस खुशी को अपने-अपने तरीके से मनाते हैं. लेकिन भारत की हाउसवार्मिंग यानी गृह प्रवेश की परंपरा ने एक यूक्रेनी महिला का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.

    यूक्रेन की रहने वाली कंटेंट क्रिएटर सैंड्रा ऑन ने सोशल मीडिया पर भारत और यूरोप के हाउसवार्मिंग समारोह (गृह प्रवेश समारोह) के बीच का अंतर बताया. उन्होंने कहा कि भारत आने से पहले उन्हें लगता था कि दुनिया के हर देश में नए घर की पार्टी लगभग एक जैसी ही होती होगी. लेकिन जब उन्होंने भारत में एक गृह प्रवेश कार्यक्रम देखा तो उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया. सैंड्रा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उन्हें लगा था कि नया घर खरीदने के बाद लोग परिवार और दोस्तों को बुलाते हैं, खाना खाते हैं, घर दिखाते हैं और फिर पार्टी खत्म हो जाती है. लेकिन भारत में उन्होंने जो देखा, वह उनके लिए बिल्कुल नया अनुभव था.
    यूरोप में शाम की पार्टी, भारत में सुबह से शुरू होती है तैयारी
    सैंड्रा ने बताया कि यूरोप में आमतौर पर गृह प्रवेश पार्टी शाम के समय शुरू होती है. लोग शाम को नए घर पहुंचते हैं, साथ बैठते हैं, खाना खाते हैं, बातचीत करते हैं और घर की तारीफ करते हैं. कई जगह लोग ड्रिंक और म्यूजिक के साथ इस खास दिन को सेलिब्रेट करते हैं. लेकिन भारत में उन्होंने देखा कि गृह प्रवेश का कार्यक्रम सुबह बहुत जल्दी शुरू हो जाता है. उन्होंने बताया कि यहां कई परिवार सुबह 6 बजे से ही पूजा और धार्मिक रस्मों की तैयारी शुरू कर देते हैं. सैंड्रा के मुताबिक, भारत में सबसे पहले नए घर को शुभ बनाने और भगवान का आशीर्वाद लेने पर ध्यान दिया जाता है. परिवार पंडितों को बुलाते हैं, पूजा कराते हैं और घर में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं.
    पूजा के बाद शुरू होता है असली जश्न

    सैंड्रा ने बताया कि भारत में गृह प्रवेश का मुख्य मकसद सिर्फ पार्टी करना नहीं होता, बल्कि नए घर के लिए आभार जताना होता है. पूजा खत्म होने के बाद ही बाकी कार्यक्रम शुरू होते हैं. उन्होंने बताया कि कई जगहों पर पूजा के बाद भजन, मंत्र और धार्मिक गीतों का आयोजन होता है. इसके बाद परिवार और रिश्तेदार साथ बैठकर खाना खाते हैं. धीरे-धीरे माहौल एक पारंपरिक समारोह से बदलकर खुशी भरी पार्टी जैसा हो जाता है. सैंड्रा को सबसे ज्यादा यह बात पसंद आई कि भारत में घर को सिर्फ एक बिल्डिंग नहीं माना जाता. लोगों के लिए घर एक ऐसी जगह होती है, जहां परिवार अपने भविष्य की यादें बनाता है.

  • भारत की दो टूक…. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारतीय क्षेत्रों पर चीन ने कर रखा है अवैध कब्जा

    भारत की दो टूक…. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारतीय क्षेत्रों पर चीन ने कर रखा है अवैध कब्जा


    नई दिल्ली।
    भारत (India) ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उसने कभी भी चीन (China) की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं किया है, उलटा चीन जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) तथा लद्दाख (Ladakh) में भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा किए हुए है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (Randhir Jaiswal) से शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग में यह सवाल पूछा गया कि हाल ही में मनीला में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की वार्ता के बाद चीन ने कहा है कि भारतीय विदेश मंत्री ने वार्ता के दौरान कहा कि ताइवान को लेकर भारत के रुख में बदलाव नहीं आया है और वह चीन की संप्रभुता का सम्मान करता है।

    प्रवक्ता जायसवाल ने स्पष्ट किया कि विदेश मंत्री ने साथ ही यह भी कहा कि भारत किसी भी प्रकार से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता है और वह चीन से भी इसी तरह के सम्मान की अपेक्षा करता है लेकिन चीन ने 1963 से भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा कर रखा है।

    प्रवक्ता ने आगे कहा , “विदेश मंत्री ने कहा कि जब संप्रभुता के मुद्दों की बात आती है, तो वास्तव में भारत को ही उन्हें उठाना चाहिए और भारत उन्हें उठाता भी है। भारत किसी भी प्रकार से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता और इस मामले में लगातार एक समान रुख पर कायम रहा है। लेकिन चीन 1963 से जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्ज़ा किए हुए है, जहां भारत का अधिकार स्वयं चीन द्वारा भी आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया है। इसके अतिरिक्त, जम्मू कश्मीर के उन क्षेत्रों में, जो भारत के हैं, चीन की परियोजनाएं चल रही हैं, और हम इसका विरोध करते हैं।” उल्लेखनीय है कि जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री के बीच मनीला में आसियान क्षेत्रीय मंच की बैठक से इतर द्विपक्षीय वार्ता हुई थी।


    ‘भारत जानबूझकर नहीं छोड़ रहा पानी’

    वहीं, भारत ने पाकिस्तान के मीडिया में आ रही इन रिपोर्टों को पूरी तरह से निराधार बताया है जिनमें, आरोप लगाया गया है कि भारत जानबूझकर पानी छोड़ कर पाकिस्तान में बाढ की स्थिति उत्पन्न कर रहा है। भारत का कहना है कि चेनाब नदी में पानी की वृद्धि जम्मू और आसपास के क्षेत्रों में भारी मॉनसूनी बारिश का नतीजा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को यहां मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि पाकिस्तानी मीडिया का यह आरोप कि भारत जानबूझकर पानी छोड़ कर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न कर रहा है , पूरी तरह से निराधार है। उन्होंने कहा कि 20 से 23 जुलाई के दौरान चेनाब नदी के बहाव में हाल ही में हुई वृद्धि, जम्मू और उसके आसपास केक्षेत्रों में हुई भारी मानसूनी बारिश का सीधा नतीजा है।

    बाढ़ पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
    प्रवक्ता ने कहा कि गौर करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान के लाहौर स्थित बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने 22 जुलाई को जारी अपनी बाढ़ चेतावनी में, चेनाब नदी में बाढ़ के ऊंचे स्तर का कारण ऊपरी जल क्षेत्र में हुई भारी बारिश को ही बताया था। इसमें यह भी कहा गया था कि मराला में पानी का तेज बहाव बना रहेगा और बारिश कम होने पर यह धीरे-धीरे घटेगा। जायसवाल ने कहा कि इसलिए, नदी के बहाव में यह वृद्धि भारी मानसूनी बारिश की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है न कि भारत द्वारा जानबूझकर उठाए गए कदम का नतीजा। मौसम की वजह से आई बाढ़ की इस घटना को ऊपरी क्षेत्र से की गई छेड़छाड़ के रूप में पेश करने की कोशिशें गलत और तकनीकी रूप से आधारहीन हैं। उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान की अपनी आधिकारिक बाढ़ चेतावनियों के भी विपरीत है।

  • सीरीज जीतने के इरादे से उतरेगी टीम इंडिया, हरारे में दूसरे टी20 में भारत का पलड़ा फिर दिख रहा भारी

    सीरीज जीतने के इरादे से उतरेगी टीम इंडिया, हरारे में दूसरे टी20 में भारत का पलड़ा फिर दिख रहा भारी

    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का दूसरा मुकाबला 25 जुलाई को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। पहला मैच सात विकेट से जीतकर सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर चुकी भारतीय टीम अब दूसरा मुकाबला जीतकर सीरीज अपने नाम करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। युवा खिलाड़ियों से सजी टीम ने पहले मैच में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में संतुलित प्रदर्शन किया था, जिससे टीम प्रबंधन के सामने विजयी संयोजन को बरकरार रखने का विकल्प मजबूत माना जा रहा है।

    पहले मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने लक्ष्य का पीछा करते हुए आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन किया। शीर्ष क्रम ने टीम को मजबूत शुरुआत दी, जबकि मध्यक्रम ने बिना किसी दबाव के जीत सुनिश्चित कर दी। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने तेज अर्धशतक लगाकर अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया और टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी संयमित नेतृत्व करते हुए खिलाड़ियों का प्रभावी उपयोग किया, जिससे टीम पूरे मैच में नियंत्रण में दिखाई दी।

    गेंदबाजी विभाग में तेज गेंदबाजों ने शुरुआती ओवरों में जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों पर दबाव बनाया। नई गेंद से मिले अतिरिक्त उछाल का भारतीय गेंदबाजों ने पूरा फायदा उठाया। मयंक यादव की रफ्तार और सटीक लाइन-लेंथ ने विपक्षी बल्लेबाजी को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। अन्य युवा गेंदबाजों ने भी अनुशासित प्रदर्शन करते हुए टीम की जीत की मजबूत नींव रखी। ऐसे में दूसरे मुकाबले में भी भारतीय टीम उसी गेंदबाजी संयोजन के साथ उतर सकती है।

    संभावित प्लेइंग इलेवन में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। पहले मैच में सभी विभागों के संतुलित प्रदर्शन को देखते हुए टीम प्रबंधन विजयी संयोजन पर भरोसा जता सकता है। हालांकि अंतिम एकादश को लेकर फैसला मैच से पहले पिच और परिस्थितियों का आकलन करने के बाद लिया जाएगा। यदि कोई बदलाव होता भी है तो वह गेंदबाजी विभाग में सीमित हो सकता है।

    हरारे स्पोर्ट्स क्लब की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों और तेज गेंदबाजों दोनों के लिए उपयोगी मानी जाती है। मैच के शुरुआती चरण में नई गेंद को अतिरिक्त उछाल और हल्की मूवमेंट मिल सकती है, जिससे तेज गेंदबाजों को मदद मिलने की संभावना रहती है। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, बल्लेबाजी अपेक्षाकृत आसान होती जाती है। स्पिनरों को यहां बहुत अधिक सहायता मिलने की उम्मीद नहीं है, इसलिए तेज गेंदबाज एक बार फिर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इस मैदान पर 170 से 180 रन का स्कोर प्रतिस्पर्धी माना जाता है।

    रिकॉर्ड की बात करें तो हरारे में भारत का प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत रहा है। हाल के मुकाबलों में भारतीय टीम ने लगातार प्रभावशाली जीत दर्ज की है और मौजूदा फॉर्म भी उसके पक्ष में दिखाई देता है। दूसरी ओर, जिम्बाब्वे अपने घरेलू मैदान का लाभ उठाकर सीरीज में वापसी की कोशिश करेगा। मेजबान टीम के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा होगा, क्योंकि हार की स्थिति में वह सीरीज गंवा देगी।

    मौजूदा फॉर्म, टीम संतुलन और पहले मैच के प्रदर्शन को देखते हुए भारत को दूसरे टी20 में भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है। यदि भारतीय बल्लेबाज शुरुआती बढ़त बनाए रखते हैं और तेज गेंदबाज नई गेंद का प्रभावी उपयोग करते हैं, तो टीम के पास लगातार दूसरी जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने का सुनहरा अवसर रहेगा।

  • 15 अगस्त तक 100 नए शहरों में पहुंचेगा 10 किलो एलपीजी सिलेंडर, छोटे परिवारों और कम खपत वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    15 अगस्त तक 100 नए शहरों में पहुंचेगा 10 किलो एलपीजी सिलेंडर, छोटे परिवारों और कम खपत वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    नई दिल्ली । घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को उनकी जरूरत के अनुसार अधिक सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने बड़ा विस्तार कार्यक्रम शुरू किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 15 अगस्त तक देश के 24 राज्यों के 100 नए शहरों में 10 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य उन उपभोक्ताओं को राहत देना है, जिनकी गैस खपत अपेक्षाकृत कम होती है और जिन्हें 14.2 किलो के पारंपरिक घरेलू सिलेंडर की आवश्यकता नहीं पड़ती।

    कंपनी का मानना है कि छोटे आकार का सिलेंडर विशेष रूप से छोटे परिवारों, अकेले रहने वाले लोगों, किराए के मकानों में रहने वाले उपभोक्ताओं तथा सीमित गैस उपयोग करने वाले परिवारों के लिए अधिक उपयोगी साबित होगा। ऐसे उपभोक्ताओं को अब अपनी आवश्यकता के अनुसार सिलेंडर चुनने का विकल्प मिलेगा, जिससे घरेलू खर्च और उपयोग दोनों में बेहतर संतुलन बनाया जा सकेगा। साथ ही छोटे सिलेंडर का वजन कम होने से उसे उठाने और उपयोग करने में भी आसानी होगी।

    एलपीजी वितरण नेटवर्क के विस्तार के साथ कंपनी ऊर्जा सेवाओं को अधिक उपभोक्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर रही है। 100 नए शहरों में सुविधा शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में ऐसे परिवारों को लाभ मिलने की संभावना है, जो अब तक केवल बड़े घरेलू सिलेंडर पर निर्भर थे। इससे उपभोक्ताओं के पास अपनी जरूरत और खपत के अनुरूप विकल्प उपलब्ध होंगे, जिससे सुविधा और उपयोगिता दोनों में वृद्धि होगी।

    कंपनी ने अपने परिचालन से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की हैं। जून तिमाही के दौरान कच्चे तेल की खरीद में विविधता लाने पर विशेष ध्यान दिया गया। रूस के अलावा वेनेजुएला और अंगोला जैसे देशों से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई गई है। कंपनी के अनुसार, स्पॉट मार्केट से खरीद का हिस्सा भी बढ़ा है, जिससे वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप खरीद रणनीति को अधिक लचीला बनाया जा सका है।

    ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से कंपनी ने पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार भी बनाए रखा है। उपलब्ध भंडार लगभग 35 दिनों की आवश्यकता पूरी करने के लिए पर्याप्त बताया गया है। इससे वैश्विक बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव या आपूर्ति संबंधी चुनौतियों की स्थिति में परिचालन को स्थिर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। कंपनी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर भविष्य के वित्तीय प्रदर्शन पर पड़ सकता है, इसलिए खरीद और भंडारण रणनीति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि 10 किलो एलपीजी सिलेंडर का विस्तार उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया व्यावहारिक कदम है। इससे ऐसे परिवारों को आर्थिक और उपयोग संबंधी सुविधा मिलेगी, जिनकी मासिक गैस खपत कम रहती है। साथ ही यह पहल घरेलू एलपीजी वितरण व्यवस्था को अधिक लचीला और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    15 अगस्त तक विस्तार योजना पूरी होने के बाद जिन शहरों में यह सुविधा शुरू होगी, वहां के उपभोक्ताओं को पारंपरिक बड़े सिलेंडर के साथ एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होगा। इससे घरेलू एलपीजी सेवाओं का दायरा बढ़ने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार बेहतर और अधिक सुविधाजनक चयन करने का अवसर मिलेगा।

  • फार्मा सेक्टर के लिए नए नियम लागू, मार्केटिंग खर्च का खुलासा अनिवार्य; अनैतिक प्रचार पर कड़ी निगरानी

    फार्मा सेक्टर के लिए नए नियम लागू, मार्केटिंग खर्च का खुलासा अनिवार्य; अनैतिक प्रचार पर कड़ी निगरानी

    नई दिल्ली । दवा कंपनियों की मार्केटिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और नैतिक मानकों को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने नए सख्त नियम लागू किए हैं। इन प्रावधानों के तहत दवा कंपनियों के प्रचार-प्रसार के तरीकों पर निगरानी बढ़ाई गई है और डॉक्टरों को गिफ्ट, नकद लाभ या अन्य प्रकार के व्यक्तिगत प्रलोभन देने पर स्पष्ट रोक लगा दी गई है। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य दवाओं के प्रचार को जिम्मेदार, पारदर्शी और जनहित के अनुरूप बनाना है।

    सरकार के अनुसार, यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (यूसीपीएमपी) 2024 के तहत सभी दवा कंपनियों को अपनी आंतरिक नैतिक व्यवस्था को मजबूत करना होगा। इसके लिए प्रत्येक कंपनी को एथिक्स कमेटी का गठन करना, एथिक्स ऑफिसर नियुक्त करना और शिकायतों के निपटारे के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही नियमों के पालन से संबंधित स्व-घोषणा भी देनी होगी, जिससे कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

    नए नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि दवा कंपनियां अपने वार्षिक मार्केटिंग खर्च का विस्तृत विवरण निर्धारित पोर्टल पर उपलब्ध कराएं। विशेष रूप से डॉक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़ी प्रचार गतिविधियों, कॉन्फ्रेंस, सेमिनार, कार्यशालाओं तथा कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन और कंटीन्यूइंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट कार्यक्रमों पर किए गए खर्च का भी खुलासा करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे फार्मा उद्योग में वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक प्रभाव की संभावनाएं कम होंगी।

    नियमों के तहत मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और अन्य मार्केटिंग कर्मचारियों की गतिविधियों की जिम्मेदारी संबंधित दवा कंपनी की होगी। यदि किसी कर्मचारी द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उसकी जवाबदेही कंपनी पर भी तय की जाएगी। इसके अलावा स्वतंत्र, रैंडम अथवा जोखिम आधारित ऑडिट का भी प्रावधान रखा गया है, ताकि नियमों के अनुपालन की नियमित समीक्षा की जा सके।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी दवा कंपनी को डॉक्टरों या उनके परिवार के सदस्यों को उपहार, नकद लाभ, महंगे आतिथ्य या अन्य व्यक्तिगत सुविधाएं उपलब्ध कराने की अनुमति नहीं होगी। इस कदम का उद्देश्य चिकित्सकीय निर्णयों को व्यावसायिक प्रभाव से मुक्त रखना और मरीजों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। इसके साथ ही डॉक्टरों और दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों के बीच होने वाले संपर्क और प्रचार गतिविधियों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं।

    शिकायतों के निपटारे के लिए दो-स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है, जबकि अपीलों का अंतिम निपटारा संबंधित विभाग द्वारा किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन व्यवस्थाओं से शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगी। साथ ही कंपनियों को नियमों के पालन के लिए नियमित निगरानी और उत्तरदायित्व की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।

    स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन प्रावधानों का प्रभावी ढंग से पालन कराया जाता है तो फार्मास्युटिकल उद्योग में पारदर्शिता बढ़ेगी, चिकित्सकीय निर्णयों की निष्पक्षता मजबूत होगी और मरीजों का स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा भी और सुदृढ़ होगा। सरकार का यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में नैतिक आचरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

  • NEET विवाद पर दीया मिर्जा ने उठाए सवाल, प्रधानमंत्री के बयान में छात्रों के दर्द और परिवारों की पीड़ा का जिक्र न होने पर जताई नाराजगी

    NEET विवाद पर दीया मिर्जा ने उठाए सवाल, प्रधानमंत्री के बयान में छात्रों के दर्द और परिवारों की पीड़ा का जिक्र न होने पर जताई नाराजगी

    नई दिल्ली । NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया वीडियो संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए छात्रों और उनके परिवारों की पीड़ा को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद में प्रभावित छात्रों और उनके परिजनों के दर्द के प्रति अधिक संवेदनशीलता दिखाई जानी चाहिए थी। सोशल मीडिया पर साझा की गई उनकी टिप्पणी के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

    दीया मिर्जा ने अपनी पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री के संबोधन में उन परिवारों के लिए पर्याप्त सहानुभूति दिखाई नहीं दी, जिन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों और उनके समर्थन में आवाज उठाने वाले लोगों की भावनाओं का भी उल्लेख होना चाहिए था। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ मानवीय संवेदना भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

    अभिनेत्री ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार की ओर से प्रतिक्रिया आने में काफी समय लगा। उनका कहना था कि इतने दिनों बाद जारी संदेश में ऐसी बातें अपेक्षित थीं, जो छात्रों और अभिभावकों के मन में पैदा हुई चिंता और निराशा को कुछ हद तक कम कर सकें। उन्होंने इस मुद्दे को केवल परीक्षा प्रणाली का संकट नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य और विश्वास से जुड़ा विषय बताया।

    दीया मिर्जा की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों ने उनके विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का समर्थन करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। इस तरह सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के विचार सामने आए।

    इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने वीडियो संदेश में कहा था कि पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए बेहद पीड़ादायक हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस तरह के मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कानूनी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़े कानूनी प्रावधानों की दिशा में कदम उठाने की भी जानकारी दी थी।

    इसी बीच शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चले अपने अनशन को समाप्त करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि विभिन्न पक्षों के साथ बातचीत और व्यापक अपील के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। उनके अनशन की समाप्ति के बावजूद परीक्षा सुधार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और छात्रों के हितों की सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक बहस जारी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, समयबद्ध जांच, कठोर कानूनी कार्रवाई और छात्रों का विश्वास बनाए रखना भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती होगी। वहीं सार्वजनिक जीवन से जुड़े विभिन्न व्यक्तियों की प्रतिक्रियाएं यह भी दर्शाती हैं कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं।