Tag: India

  • भारत का फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर 703 अरब डॉलर के पार, आरबीआई के आंकड़े जारी..

    भारत का फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर 703 अरब डॉलर के पार, आरबीआई के आंकड़े जारी..


    नई दिल्ली।पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक सकारात्मक खबर सामने आई है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 703.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी हाल के सप्ताह में दर्ज की गई है, जिसमें भंडार में लगभग 2.3 अरब डॉलर की वृद्धि देखी गई है। यह संकेत देता है कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद देश की वित्तीय स्थिति स्थिर बनी हुई है।

    विदेशी मुद्रा भंडार में यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब पिछले कुछ महीनों से इसमें उतार-चढ़ाव देखा जा रहा था। वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता के कारण पहले भंडार पर दबाव बना था, जिससे इसमें गिरावट भी दर्ज की गई थी। हालांकि हाल के आंकड़े बताते हैं कि स्थिति अब धीरे-धीरे संतुलन की ओर बढ़ रही है।

    कुछ समय पहले भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपने रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद वैश्विक तनाव और मुद्रा बाजार में बदलाव के चलते इसमें कमी आई थी। अब फिर से इसमें सुधार देखने को मिल रहा है, जो आर्थिक स्थिरता के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    इस दौरान देश के सोने के भंडार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह 122 अरब डॉलर से अधिक के स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा विशेष आहरण अधिकार और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत की स्थिति में भी हल्का सुधार देखने को मिला है। ये सभी संकेत मिलकर देश की बाहरी आर्थिक मजबूती को दर्शाते हैं।

    विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार होता है। यह आयात भुगतान, विदेशी व्यापार और मुद्रा स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। मजबूत भंडार से देश को वैश्विक झटकों का सामना करने की क्षमता मिलती है और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है।

    हालिया बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि वैश्विक दबाव के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति स्थिर बनी हुई है और धीरे-धीरे और मजबूत हो रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितताएं अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार में यह सुधार आर्थिक संतुलन की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

  • भारत-उज्बेकिस्तान का ‘डस्टलिक’ युद्धाभ्यास संपन्न, आतंकवाद-रोधी क्षमता में दिखा दमदार समन्वय

    भारत-उज्बेकिस्तान का ‘डस्टलिक’ युद्धाभ्यास संपन्न, आतंकवाद-रोधी क्षमता में दिखा दमदार समन्वय


    नई दिल्ली। 
    भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आयोजित सातवां संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह अभ्यास उज्बेकिस्तान में दोनों देशों की सेनाओं के बीच रणनीतिक तालमेल और सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया। इस दौरान सैनिकों ने वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अभ्यास करते हुए तेज और सटीक कार्रवाई का प्रदर्शन किया। आतंकवाद-रोधी अभियानों को केंद्र में रखते हुए विभिन्न आधुनिक सैन्य तकनीकों और रणनीतियों का गहन अभ्यास किया गया, जिससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय और अधिक सुदृढ़ हुआ।
    अभ्यास के दौरान जवानों ने दुश्मन के ठिकानों की पहचान, निगरानी और उन पर सटीक कार्रवाई करने की रणनीतियों को व्यवहार में उतारा। आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ड्रोन और मानव रहित उपकरणों का प्रभावी उपयोग किया गया। इसके साथ ही युद्धक्षेत्र में घायल सैनिकों को सुरक्षित निकालने और उन्हें तत्काल सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया का भी विशेष अभ्यास किया गया। इन गतिविधियों ने सैनिकों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ उनके बीच आपसी तालमेल को भी बेहतर बनाया।

    इस सैन्य अभ्यास में पर्वतीय और अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में ऑपरेशन चलाने की विशेष ट्रेनिंग दी गई। सैनिकों ने रस्सियों के सहारे उतरने, ऊंचाई वाले इलाकों में तेजी से मूवमेंट करने और स्नाइपर ऑपरेशन जैसी जटिल चुनौतियों का सामना किया। इसके अलावा रॉकेट हमलों और जवाबी कार्रवाई का भी अभ्यास किया गया, जिससे उनकी युद्धक क्षमता और रणनीतिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। संयुक्त रूप से योजनाएं बनाकर उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करने की क्षमता भी इस अभ्यास के माध्यम से विकसित हुई।

    अभ्यास का एक महत्वपूर्ण पहलू अवैध सशस्त्र समूहों के खिलाफ कार्रवाई की रणनीतियों को मजबूत करना रहा। सैनिकों ने आतंकवादी ठिकानों में घुसकर कार्रवाई करने, तलाशी अभियान चलाने और छापेमारी जैसी तकनीकों का अभ्यास किया। इससे वास्तविक परिस्थितियों में संयुक्त ऑपरेशन को अधिक प्रभावी और सफल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इस तरह के अभ्यास से दोनों देशों की सेनाओं के बीच साथ मिलकर काम करने की क्षमता और अधिक बेहतर होती है, जिससे भविष्य में किसी भी चुनौती का सामना संयुक्त रूप से किया जा सकेगा।

    समापन के अवसर पर इस अभ्यास को दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाला बताया गया। ‘डस्टलिक’ ने न केवल सैन्य साझेदारी को मजबूत किया है, बल्कि भविष्य में संयुक्त मिशनों को अधिक कुशलता और प्रभावशीलता के साथ अंजाम देने की क्षमता भी विकसित की है। यह अभ्यास इस बात का संकेत है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में दोनों देश आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और आपसी सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

  • हॉर्मुज में भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरानी फायरिंग के बाद ऐक्शन में भारत…

    हॉर्मुज में भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरानी फायरिंग के बाद ऐक्शन में भारत…


    नई दिल्ली।
    भारत (India) ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में दो भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps.- IRGC) के सैनिकों द्वारा की गई गोलीबारी की घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। यह घटना 18 अप्रैल को हुई थी। सरकार ने तत्काल कूटनीतिक कदम उठाते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया और इस घटना पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। अभी भी हॉर्मुज में करीब 14 भारतीय जहाज फंसे हैं जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए भारत ने प्रयास तेज कर दिए हैं। दूसरी ओर भारतीय नौसेना ने 7 युद्धपोत तैनात कर जहाजों को एस्कॉर्ट करना शुरू कर दिया है।


    कूटनीतिक प्रतिक्रिया और भारत का रुख

    गोलीबारी की घटना के बाद भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूत से मुलाकात कर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट रूप से इस क्षेत्र से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की है कि भारत ने राजनयिक चैनलों के माध्यम से तेजी से कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा- हम भारतीय जहाजों की सुरक्षा के संबंध में ईरानी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं और उन्हें सुरक्षित रास्ता दिलाने के लिए प्रयासरत हैं।

    यह फायरिंग ईरानी अधिकारियों और स्थानीय IRGC यूनिट के बीच ‘संचार की कमी’ का नतीजा प्रतीत होती है। राहत की बात ये है कि जहाजों को कोई बड़ा ढांचागत नुकसान नहीं पहुंचा है। घटना के दौरान जहाजों के कुछ हिस्सों में शीशे (कांच) टूटने की सूचना मिली है।


    UKMTO की रिपोर्ट और हमलों का विवरण

    यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी अपनी रिपोर्ट में इस घटना का जिक्र किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 18 अप्रैल को कुल तीन जहाजों को निशाना बनाया गया, जिनमें से दो भारतीय थे।

    पहली घटना: एक भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकर के पास दो ईरानी सैन्य गनबोट (हथियारबंद नावें) आईं और बिना किसी पूर्व चेतावनी या रेडियो संपर्क के फायरिंग शुरू कर दी। गनीमत रही कि चालक दल पूरी तरह सुरक्षित बच गया।

    दूसरी घटना: इसके कुछ ही समय बाद, ओमान के तट के पास एक अन्य भारतीय सुपरटैंकर को निशाना बनाया गया। इस जहाज पर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल (गोला/मिसाइल) टकराने की खबर है, जिससे इस अहम समुद्री मार्ग में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

    इस गंभीर घटना के बीच, भारतीय नौसेना ने क्षेत्र में 7 युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। फंसे जहाजों को लारक आइलैंड से दूर रहने और केवल अनुमति मिलने पर आगे बढ़ने की एडवाइजरी जारी की गई है। नौसेना जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही है।


    वर्तमान स्थिति और भारतीय जहाजों की मौजूदगी

    इस समय स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। हॉर्मुज स्ट्रेट में कम से कम 14 भारतीय ध्वज वाले जहाज अभी भी लंगर डाले हुए हैं, जिनमें तीन बड़े तेल टैंकर और एक एलपीजी (LPG) कैरियर शामिल हैं। 28 फरवरी को मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद से भारत पहले ही 10 भारतीय एलपीजी और तेल टैंकरों को इस क्षेत्र से सुरक्षित निकाल चुका है। अब बाकी बचे 14 जहाजों की सुरक्षित वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं। ईरान में भारी संख्या में भारतीय नागरिक भी मौजूद हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना नई दिल्ली की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत लगातार ईरान पर कूटनीतिक दबाव बना रहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो और भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी मिल सके।

  • भारत के इस पड़ोसी देश में सरकारी कर्मियों को महीने में दो बार मिलेगी सैलरी…

    भारत के इस पड़ोसी देश में सरकारी कर्मियों को महीने में दो बार मिलेगी सैलरी…


    काठमांडू।
    भारत (India) के पड़ोसी देश नेपाल (Neighboring country Nepal) में युवा सरकार आने के बाद लगातार रिफॉर्म्स हो रहे हैं। इसी क्रम में रविवार को बालेन सरकार (Balen Government) के वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि अब से नेपाली सरकारी कर्मचारियों (Nepali Government Employees) को एक महीने में दो बारे वेतन मिलेगी।

    एजेंसी के मुताबिक नेपाली सरकार के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि 17 अप्रैल को बालेन सरकार ने इस फैसले पर मुहर लगाई है। अब से नेपाल के सिविल सेवकों, पुलिसकर्मियों और अन्य कर्मचारियों को हर 15 दिन के अंतर पर सैलरी मिलेगी।

    नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, सरकार का यह निर्णय अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के प्रयास के फलस्वरूप लिया गया है। क्योंकि सरकार का मानना है कि महीने में दो बार वेतन मिलने से कर्मचारियों के खर्च में वृद्धि हो सकती है, जिससे बाजार में ज्यादा पैसा आएगा और नकदी सुधार संभव होगा।

    बालेन सरकार के इस फैसले पर नेपाली कर्मचारियों की वेतन नियंत्रित करने वाली संस्था का भी बयान सामने आया है। एफसीजीओ के प्रवक्ता दीपक लामिछाने ने कहा, “तकनीकी रूप से, हमें इस प्रणाली को लागू करने में कोई समस्या नहीं है। हम सिविल सेवकों, नेपाल सेना, पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और अन्य सरकारी कर्मचारियों का वेतन किसी भी समय जारी कर सकते हैं।” हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नए फैसले को लागू करने के लिए कानूनी संसोधनों की आवश्यकता होगी।

    बता दें, नेपाल के संविधान के अनुसार प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को महीने के अंत में वेतन देने का प्रावधान है। लामिछाने ने कहा कि सरकार अपने इस फैसले को लेकर प्रतिबद्ध है। वह जल्दी ही कोई रास्ता निकालकर इस फैसले को लागू करेगी।

  • कर्ज के दबाव में मालदीव, अब भारत से फिर उम्मीद; करेंसी स्वैप बढ़ाने की गुहार

    कर्ज के दबाव में मालदीव, अब भारत से फिर उम्मीद; करेंसी स्वैप बढ़ाने की गुहार


    नई दिल्ली। आर्थिक संकट से जूझ रहे मालदीव ने एक बार फिर भारत की ओर रुख किया है। बढ़ते कर्ज और घटते विदेशी मुद्रा भंडार के बीच राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की सरकार ने भारत से करेंसी स्वैप सुविधा को आगे बढ़ाने की अपील की है। हालांकि, भारत के लिए मौजूदा नियमों और शर्तों के चलते इस मांग पर फैसला लेना आसान नहीं माना जा रहा।
    दरअसल, मालदीव इस समय गंभीर वित्तीय दबाव में है। अंतरराष्ट्रीय कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा है। ऊपर से पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पर्यटन सेक्टर को झटका दिया है। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने संकट को और गहरा कर दिया है।

    नियम बने बड़ी बाधा

    सूत्रों के अनुसार, मालदीव ने भारत से करेंसी स्वैप सुविधा के विस्तार की मांग की है, लेकिन भारतीय व्यवस्था में दो बार निकासी के बीच ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ अनिवार्य होता है। इसके अलावा कर्ज को आगे बढ़ाने (रोल-ओवर) की भी सीमाएं तय हैं। ऐसे में तकनीकी कारणों से भारत के लिए तुरंत राहत देना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि इस बार मदद नहीं मिलती, तो मालदीव की आर्थिक हालत और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    भारत पहले भी दे चुका है सहारा

    भारत पहले भी कई बार मालदीव की मदद करता रहा है। अक्टूबर 2024 में 400 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप सुविधा दी गई थी, जिसे दो बार बढ़ाया गया। इसके अलावा 2025 में 50-50 मिलियन डॉलर के ब्याज मुक्त ट्रेजरी बिलों की अवधि भी बढ़ाई गई।

    जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा के दौरान 565 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट देने और कर्ज चुकाने की शर्तों में राहत का ऐलान भी किया गया था।

    रेटिंग एजेंसियों की चेतावनी

    वैश्विक एजेंसियों ने भी मालदीव की स्थिति को चिंताजनक बताया है। Fitch Ratings ने देश की रेटिंग ‘CC’ पर रखी है, जो डिफॉल्ट के उच्च खतरे का संकेत देती है, जबकि Moody’s ने ‘CAA2’ रेटिंग बरकरार रखी है।

    कर्ज चुकाने से खाली हुआ खजाना

    अप्रैल 2026 में मालदीव पर करीब 1 अरब डॉलर चुकाने का दबाव था। इसमें 500 मिलियन डॉलर का सुकुक बॉन्ड शामिल था, जिसे सरकार ने अपने सॉवरेन डेवलपमेंट फंड से चुका दिया। हालांकि, इससे विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी कमी आ गई।

    पर्यटन पर टिकी अर्थव्यवस्था

    मालदीव की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर है। लेकिन मिडिल ईस्ट संकट के चलते पर्यटकों की संख्या घटी है और ईंधन महंगा हुआ है। ऐसे हालात में नए कर्ज जुटाना भी मुश्किल होता जा रहा है।

    कुल मिलाकर, मालदीव इस समय आर्थिक मोर्चे पर नाजुक दौर से गुजर रहा है और उसकी नजरें एक बार फिर भारत की मदद पर टिकी हैं।

  • अक्षय तृतीया पर इन वस्तुओं से रहें दूर सोना चांदी के साथ ये गलत खरीदारी ला सकती है पनौती

    अक्षय तृतीया पर इन वस्तुओं से रहें दूर सोना चांदी के साथ ये गलत खरीदारी ला सकती है पनौती


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ और समृद्धि देने वाला पर्व माना जाता है इस दिन सोना चांदी जमीन और वाहन जैसी कीमती वस्तुओं की खरीदारी को विशेष रूप से शुभ समझा जाता है मान्यता है कि इस दिन शुरू किए गए कार्य का फल लंबे समय तक और अक्षय रूप में मिलता है यानी उसका शुभ प्रभाव कभी समाप्त नहीं होता

    वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी यह शुभ तिथि 19 अप्रैल सुबह 10 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 20 अप्रैल सुबह 7 बजकर 28 मिनट तक रहेगी इस दौरान कई महत्वपूर्ण शुभ योग भी बन रहे हैं जिनमें सर्वार्थ सिद्धि योग अमृत सिद्धि योग और गज केसरी योग शामिल हैं साथ ही रोहिणी नक्षत्र का संयोग इस दिन को और अधिक फलदायी बना रहा है

    हालांकि इस दिन को बेहद शुभ माना जाता है लेकिन ज्योतिष और लोक मान्यताओं के अनुसार कुछ वस्तुओं की खरीदारी से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें नकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है माना जाता है कि गलत चीजें खरीदने से घर में अशांति आर्थिक बाधाएं या मानसिक तनाव बढ़ सकता है

    विशेषज्ञों के अनुसार इस दिन लोहे और स्टील से बनी वस्तुएं जैसे बर्तन या मशीनरी घर लाना शुभ नहीं माना जाता क्योंकि इसे नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है इसी तरह प्लास्टिक की वस्तुएं भी अशुभ मानी जाती हैं जो घर की समृद्धि पर असर डाल सकती हैं

    इसके अलावा काले रंग की वस्तुओं को भी इस दिन न खरीदने की सलाह दी जाती है क्योंकि काला रंग शनि और नकारात्मक ऊर्जा से संबंधित माना जाता है धारदार या नुकीली चीजें जैसे चाकू कैंची या सुई आदि भी इस दिन घर लाना शुभ नहीं माना जाता क्योंकि यह तनाव और विवाद का कारण बन सकता है

    कांच से बनी वस्तुओं को भी राहु ग्रह से जोड़कर देखा जाता है इसलिए इन्हें भी इस दिन खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है साथ ही इस दिन किसी को उधार देना या लेना भी अशुभ माना जाता है क्योंकि इससे आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दिन पैसों से जुड़े निर्णय भी सोच समझकर लेने चाहिए और अनावश्यक खर्च या उधारी से बचना चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि बनी रहे कुल मिलाकर अक्षय तृतीया का दिन जितना शुभ माना जाता है उतना ही जरूरी है कि इस दिन सही और गलत खरीदारी के बारे में जागरूक रहा जाए ताकि इस पर्व का पूरा लाभ प्राप्त किया जा सके

  • शादी से लेकर गृह प्रवेश ,तक बिना मुहूर्त के, भी होते हैं शुभ कार्य जानिए अबूझ मुहूर्त के दिन

    शादी से लेकर गृह प्रवेश ,तक बिना मुहूर्त के, भी होते हैं शुभ कार्य जानिए अबूझ मुहूर्त के दिन


    नई दिल्ली । हिंदू परंपराओं में शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है लेकिन कुछ ऐसे विशेष समय भी होते हैं जब किसी पंचांग या ज्योतिषीय गणना की आवश्यकता नहीं होती और इन समयों को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है आम धारणा यह है कि यह योग केवल अक्षय तृतीया तक ही सीमित होता है लेकिन वास्तविकता यह है कि साल में कई ऐसे अवसर आते हैं जब बिना मुहूर्त देखे भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साल में लगभग साढ़े तीन दिन ऐसे माने जाते हैं जिन्हें स्वयंसिद्ध या अबूझ मुहूर्त कहा जाता है इन दिनों में ग्रह नक्षत्रों की स्थिति इतनी अनुकूल होती है कि किसी भी शुभ कार्य की सफलता के लिए अलग से मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती

    इन विशेष अवसरों में चैत्र नवरात्रि का पहला दिन, अक्षय तृतीया, विजयादशमी और एक आधा अतिरिक्त शुभ योग शामिल होता है इन दिनों को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है और धार्मिक दृष्टि से इन्हें अत्यधिक महत्व प्राप्त है

    इन अबूझ मुहूर्तों में विवाह जैसे बड़े मांगलिक कार्य विशेष रूप से किए जाते हैं क्योंकि माना जाता है कि इस समय किया गया विवाह स्थायी और सुखद होता है खासकर उन जोड़ों के लिए जिनकी कुंडली का मिलान कठिन होता है उनके लिए यह दिन वरदान के समान माने जाते हैं

    इसके अलावा गृह प्रवेश, नए मकान की नींव रखना, सोना चांदी, वाहन या जमीन की खरीदारी जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी इन दिनों में शुभ माने जाते हैं व्यवसाय शुरू करना भी इस समय अत्यंत लाभकारी माना जाता है क्योंकि यह समय सफलता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है

    बच्चों से जुड़े संस्कार जैसे अन्नप्राशन, कर्णवेध, नामकरण, विद्यारंभ और मुंडन संस्कार भी इन शुभ दिनों में संपन्न किए जाते हैं धार्मिक मान्यता है कि इस समय किए गए सभी कार्यों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है और उन्हें अक्षय पुण्य प्राप्त होता है

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार अबूझ मुहूर्त का अर्थ है ऐसा समय जो स्वयं में पूर्ण रूप से शुभ हो और जिसमें किसी विशेष गणना की आवश्यकता न हो इन दिनों को इतना शुभ माना जाता है कि कोई भी कार्य बिना बाधा के सफल होने की संभावना अधिक रहती है कुल मिलाकर यह मान्यता भारतीय संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है जहां समय को केवल कैलेंडर नहीं बल्कि शुभ और अशुभ ऊर्जा के आधार पर भी देखा जाता है

  • बंगाल में बदलाव की हुंकार सीएम मोहन यादव बोले जंगलराज से मुक्ति दिलाएगी भाजपा

    बंगाल में बदलाव की हुंकार सीएम मोहन यादव बोले जंगलराज से मुक्ति दिलाएगी भाजपा

    कोलकाता/भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान कोलकाता में भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में जोरदार चुनाव प्रचार किया। उन्होंने कमरहाटी क्षेत्र के वार्ड 24 और 112 में घर घर पहुंचकर लोगों से मुलाकात की और दुकानों पर जाकर आम नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में बदलाव और विकास के नाम पर भाजपा को समर्थन देने की अपील की।

    कोलकाता में जनसंपर्क अभियान के दौरान डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अब पश्चिम बंगाल की जनता ठहराव नहीं बल्कि विकास चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य विकास की दौड़ में पीछे छूटता जा रहा है जबकि देश के अन्य राज्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार बंगाल को फिर से प्रगति के रास्ते पर लाने के लिए भाजपा की सरकार बनना जरूरी है।

    उन्होंने कहा कि बंगाल अब जंगलराज से मुक्ति चाहता है और यहां की जनता बदलाव के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आगामी चुनाव में जनता प्रचंड बहुमत से भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में लाने का मन बना चुकी है। उन्होंने भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल को विकास और समृद्धि का प्रतीक बताते हुए लोगों से इसे चुनने का आग्रह किया।

    इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का भी जिक्र किया और कहा कि देश के कई राज्यों में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। मध्यप्रदेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी विकास की गति लगातार बढ़ी है और इसी मॉडल को बंगाल में भी लागू किया जा सकता है।

    जनसंपर्क के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय नागरिकों की समस्याएं भी सुनीं और भरोसा दिलाया कि भाजपा की सरकार बनने पर जनकल्याण योजनाओं को तेजी से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना ही उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए मजबूत और स्थिर सरकार जरूरी है।

    डॉ. मोहन यादव का यह दौरा दो दिनों का बताया जा रहा है जिसमें वे विभिन्न क्षेत्रों में जनसभाएं और संपर्क अभियान चला रहे हैं। राजनीतिक रूप से यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके जरिए भाजपा बंगाल में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

  • प्रदर्शन पड़ा भारी ,केन बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध, में 50 लोगों पर केस दर्ज

    प्रदर्शन पड़ा भारी ,केन बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध, में 50 लोगों पर केस दर्ज


    छतरपुर । मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। इस मामले में यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार समेत करीब 50 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कार्रवाई के बाद इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

    जानकारी के अनुसार ग्राम ढोड़न में परियोजना के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा था जहां स्थिति उस समय बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान शासकीय कार्य में बाधा डाली गई कर्मचारियों के साथ अभद्रता की गई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। इन आरोपों के आधार पर बमीठा थाने में गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है।

    बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई की शुरुआत चंद्रनगर रेंजर की शिकायत के बाद हुई। मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह वीडियो कथित तौर पर अभिषेक परमार की ओर से अपलोड किया गया था जिसके आधार पर पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों की पहचान शुरू की। अब तक 15 से 20 लोगों की पहचान की जा चुकी है और आगे भी जांच जारी है।

    बमीठा थाना प्रभारी वाल्मीकि चौबे के मुताबिक वन परिक्षेत्र अधिकारी राजेंद्र तिवारी ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। FIR में सरकारी कर्मचारी पर हमला शासकीय कार्य में बाधा डालना और लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3 (1) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

    पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे भी आरोपियों की पहचान की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में है और इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

    यह मामला अब सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि राजनीतिक रंग भी लेता नजर आ रहा है। एक ओर जहां प्रशासन इसे कानून के उल्लंघन का मामला बता रहा है वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी इसे अपने अधिकारों की आवाज बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

  • भारत में बढ़ी चीतों की संख्या…… दक्षिण अफ्रीका से बेंगलुरु पहुंचे 4 नए मेहमान

    भारत में बढ़ी चीतों की संख्या…… दक्षिण अफ्रीका से बेंगलुरु पहुंचे 4 नए मेहमान


    बेंगलुरु।
    भारत (India) में चीतों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है. दक्षिण अफ्रीका (South Africa) से चार और चीतों को भारत लाया गया है. ये सभी चीते सुरक्षित तरीके से बेंगलुरु पहुंचे चुके हैं और उन्हें कर्नाटक (Karnataka) के बैनरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क (Bannerghatta Biological Park) में रखा जाएगा. यह कदम राज्य में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने और लोगों में जैव-विविधता के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से उठाया गया है.

    अधिकारियों के मुताबिक, चीतों को विशेष निगरानी के बीच लाया गया है. फिलहाल वन विभाग और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर रख रही है. शुरुआती जांच के बाद सभी चीतों को निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत निगरानी में रखा गया है, जिससे नए वातावरण में उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।


    कर्नाटक के वन मंत्री ने दिए ये निर्देश

    कर्नाटक के वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि जलवायु और पर्यावरण में बदलाव के कारण चीतों को किसी प्रकार का तनाव या स्वास्थ्य संबंधी समस्या न हो. उन्होंने कहा कि सभी चीतों को कम से कम 30 दिनों के लिए क्वारंटीन में रखा जाएगा. इस दौरान उन्हें निर्धारित आहार दिया जाएगा और किसी भी संक्रमण या बीमारी की पूरी जांच की जाएगी।

    वन मंत्री ने यह भी कहा कि चीतों को उनके नए आवास में छोड़ने से पहले सभी आवश्यक मेडिकल परीक्षण पूरे किए जाएंगे. सुरक्षा और देखभाल में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

    कर्नाटक में चीतों को कहा जाता है ‘शिवंगी’
    गौरतलब है कि कर्नाटक में कभी चीतों को स्थानीय रूप से ‘शिवंगी’ कहा जाता था. हालांकि यह प्रजाति दशकों पहले राज्य के जंगलों से विलुप्त हो चुकी थी. अब चीतों की वापसी को वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.