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  • सेवा और निष्ठा की विरासत का उत्सव सीआरपीएफ स्थापना दिवस पर सरकार ने देशभर के नागरिकों को दिया भागीदारी का अवसर

    सेवा और निष्ठा की विरासत का उत्सव सीआरपीएफ स्थापना दिवस पर सरकार ने देशभर के नागरिकों को दिया भागीदारी का अवसर


    नई दिल्ली । भारत की आंतरिक सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल माने जाने वाले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सीआरपीएफ के 88वें स्थापना दिवस को इस वर्ष विशेष अंदाज में मनाया जाएगा। भारत सरकार ने इस अवसर पर देशभर के नागरिकों को सीआरपीएफ के शौर्य समर्पण और सेवा भावना को सम्मान देने के लिए विभिन्न ऑनलाइन प्रतियोगिताओं और जनभागीदारी अभियानों से जोड़ने का फैसला किया है। सरकार ने सभी आयु वर्ग के लोगों से अपील की है कि वे इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें और देश की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करें।

    भारत सरकार के नागरिक सहभागिता मंच माई जीओवी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस विशेष अभियान की घोषणा करते हुए नागरिकों को सेवा और निष्ठा की गौरवशाली विरासत विषय पर आधारित पेंटिंग प्रतियोगिता क्विज शॉर्ट वीडियो प्रतियोगिता और नागरिक प्रतिज्ञा अभियान में भाग लेने का निमंत्रण दिया है। इच्छुक प्रतिभागी माई जीओवी पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण कर इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकते हैं।

    सरकार ने अपने संदेश में कहा है कि सीआरपीएफ केवल भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ही नहीं बल्कि देश की एकता अखंडता और आंतरिक सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तंभ भी है। वर्ष 1939 में स्थापित इस बल ने सेवा और निष्ठा के अपने मूल मंत्र को निभाते हुए हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित की है। चाहे आतंकवाद के खिलाफ अभियान हो वामपंथी उग्रवाद से मुकाबला हो कानून व्यवस्था बनाए रखना हो शांतिपूर्ण चुनाव कराना हो या प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्य करना हो सीआरपीएफ ने हर मोर्चे पर अपनी दक्षता और बहादुरी का परिचय दिया है।

    सीआरपीएफ की विशेष इकाइयों रैपिड एक्शन फोर्स और कोबरा ने भी समय समय पर कठिन अभियानों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। देश के दुर्गम इलाकों से लेकर संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों तक बल के जवान दिन रात राष्ट्र की सुरक्षा में तैनात रहते हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करते हैं।

    इस गौरवशाली यात्रा के दौरान सीआरपीएफ के 2270 से अधिक वीर जवान देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। उनका साहस समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सरकार का मानना है कि स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिताएं केवल प्रतिभा प्रदर्शन का मंच नहीं बल्कि नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति सुरक्षा और सेवा के मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी बनेंगी।

    सरकार ने सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाकर सीआरपीएफ के वीर जवानों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें। साथ ही अपनी रचनात्मकता और ज्ञान के माध्यम से उस बल के प्रति सम्मान प्रकट करें जिसने दशकों से भारत की एकता संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

  • कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत में राष्ट्रीय शोक नई दिल्ली मुंबई और केरल में आधा झुका तिरंगा

    कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत में राष्ट्रीय शोक नई दिल्ली मुंबई और केरल में आधा झुका तिरंगा


    नई दिल्ली । कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर भारत ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए पूरे देश में एक दिन का राष्ट्रीय शोक मनाया। भारत सरकार के निर्देश पर सोमवार को नई दिल्ली मुंबई केरल सहित देशभर के उन सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया जहां नियमित रूप से तिरंगा फहराया जाता है। इसके साथ ही राष्ट्रीय शोक के सम्मान में सभी आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम भी स्थगित कर दिए गए। भारत और कतर के दशकों पुराने मजबूत संबंधों को देखते हुए इस निर्णय को दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और मित्रता का प्रतीक माना जा रहा है।

    कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का रविवार को निधन हो गया था। उनके निधन की सूचना मिलते ही भारत सरकार ने राष्ट्रीय शोक की घोषणा की। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन पर तिरंगा आधा झुका रहा जबकि मुंबई के मंत्रालय और केरल के विभिन्न सरकारी भवनों पर भी राष्ट्रीय ध्वज सम्मान स्वरूप आधा झुकाया गया। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार पूरे देश में ध्वज संहिता का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए।

    केरल में इस शोक का विशेष महत्व देखने को मिला क्योंकि राज्य का बड़ा प्रवासी समुदाय लंबे समय से कतर और अन्य खाड़ी देशों में कार्यरत है। कतर के साथ केरल के आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध काफी मजबूत माने जाते हैं। राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि अपने अधिकार क्षेत्र के प्रत्येक सरकारी कार्यालय और संस्थान में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें और राष्ट्रीय शोक से जुड़े सभी प्रोटोकॉल का पालन कराया जाए।

    विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शोक के दौरान पूरे भारत में उन सभी सरकारी और सार्वजनिक भवनों पर तिरंगा आधा झुका रहेगा जहां नियमित रूप से ध्वज फहराया जाता है। साथ ही इस दिन किसी भी प्रकार के आधिकारिक सांस्कृतिक या मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे ताकि दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त किया जा सके।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शेख हमद दूरदर्शी नेतृत्व वाले ऐसे शासक थे जिन्होंने कतर को विकास समृद्धि और वैश्विक पहचान की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत का सच्चा मित्र बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती मिली और सहयोग के अनेक नए रास्ते खुले।

    जानकारी के अनुसार केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भारत सरकार की ओर से शोक संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए जल्द ही कतर जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि शेख हमद बिन खलीफा अल थानी ने वर्ष 1995 से 2013 तक कतर का नेतृत्व किया और बाद में सत्ता अपने पुत्र शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सौंप दी। उनके कार्यकाल को कतर के आधुनिक विकास और वैश्विक प्रभाव के विस्तार का महत्वपूर्ण दौर माना जाता है।

  • ईरान अमेरिका तनाव के बीच भारत तैयार कच्चे तेल एलपीजी और गैस का पर्याप्त भंडार संकट से देगा सुरक्षा

    ईरान अमेरिका तनाव के बीच भारत तैयार कच्चे तेल एलपीजी और गैस का पर्याप्त भंडार संकट से देगा सुरक्षा


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में एक बार फिर बढ़ते भू राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर यह है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के मामले में पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में खड़ा है। ईरान और अमेरिका के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव तथा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने समय रहते आवश्यक तैयारियां कर ली हैं। इसी कारण संभावित आपूर्ति संकट का असर फिलहाल सीमित रहने की उम्मीद है।

    हाल के घटनाक्रम में अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने 11 जुलाई को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने का ऐलान किया। इसके बाद इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई। यह समुद्री रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का प्रमुख माध्यम है इसलिए इसके प्रभावित होने का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत दिखाई देने लगा।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो सितंबर और अक्टूबर के दौरान कच्चे तेल की आपूर्ति लागत बढ़ सकती है। हालांकि भारत ने पहले से ही अगस्त तक के लिए कच्चे तेल और एलपीजी के आयात की व्यवस्था सुरक्षित कर ली है। यही वजह है कि निकट भविष्य में देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में कुछ चुनौतियां जरूर सामने आ सकती हैं लेकिन उन्हें भी प्रभावी तरीके से संभाला जा सकता है।

    मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड करीब पांच प्रतिशत की बढ़त के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी लगभग पांच प्रतिशत बढ़कर 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतें 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच सकती हैं।

    हालांकि इस बार वैश्विक बाजार में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि गैर ओपेक देशों ने अपना उत्पादन पहले ही बढ़ा दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति का दबाव कुछ हद तक कम हुआ है और संभावित कमी की भरपाई करने की क्षमता भी बनी हुई है। यही कारण है कि कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका के बावजूद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर स्थिति पहले जैसी गंभीर नहीं मानी जा रही।

    भारत सरकार भी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क बनी हुई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि देश के पास लगभग 60 दिनों के लिए कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है जबकि एलपीजी का करीब 45 दिनों का स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा वैकल्पिक आयात स्रोतों और रणनीतिक भंडारण की व्यवस्था भी लगातार मजबूत की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में आम लोगों और उद्योगों पर असर कम से कम पड़े।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जो काम किया है उसका फायदा अब दिखाई दे रहा है। यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबा भी खिंचता है तो भारत के पास स्थिति से निपटने के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत तैयारी मौजूद है। यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश की ऊर्जा सुरक्षा फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है।

  • 8वें वेतन आयोग से जुड़े कर्मचारियों के लिए राहत, डेटा जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई तक बढ़ी, मंत्रालयों और विभागों को मिला अतिरिक्त समय

    8वें वेतन आयोग से जुड़े कर्मचारियों के लिए राहत, डेटा जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई तक बढ़ी, मंत्रालयों और विभागों को मिला अतिरिक्त समय


    नई दिल्ली ।
    आठवें वेतन आयोग की प्रक्रिया से जुड़े केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक अपडेट सामने आया है। आयोग ने केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों को कर्मचारी एवं पेंशनर संबंधी आवश्यक जानकारी जमा करने के लिए अतिरिक्त समय प्रदान किया है। पहले यह प्रक्रिया 30 जून तक पूरी की जानी थी, लेकिन अब इसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई है। इस निर्णय से विभिन्न विभागों को आवश्यक आंकड़ों का संकलन और सत्यापन पूरा करने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।

    आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद से ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच नई वेतन एवं पेंशन सिफारिशों को लेकर लगातार उत्सुकता बनी हुई है। आयोग द्वारा मांगी जा रही जानकारी भविष्य की वेतन संरचना, भत्तों और पेंशन संबंधी सिफारिशों के लिए आधार तैयार करेगी। ऐसे में सभी मंत्रालयों और विभागों से सटीक तथा अद्यतन आंकड़े उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    आयोग के अनुसार कई मंत्रालयों और विभागों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक सूचनाओं का संकलन पूरा नहीं होने की जानकारी दी थी। विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से कर्मचारी एवं पेंशनर संबंधी आंकड़ों को अंतिम रूप देने में अधिक समय की आवश्यकता महसूस की गई। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने अंतिम तिथि को एक महीने के लिए आगे बढ़ाने का निर्णय लिया, ताकि सभी संबंधित विभाग निर्धारित प्रारूप में पूरी जानकारी उपलब्ध करा सकें।

    आयोग ने अपने निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया है कि सभी नोडल अधिकारी निर्धारित ऑनलाइन डेटा कलेक्शन पोर्टल के माध्यम से ही जानकारी अपलोड करेंगे। किसी भी प्रकार की भौतिक प्रति, ईमेल, एक्सेल शीट, पीडीएफ या अन्य माध्यम से भेजे गए दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। आयोग का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और एकरूप बनाए रखना है, जिससे आंकड़ों का विश्लेषण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

    डेटा संग्रह प्रक्रिया के तहत विभागों से पिछले तीन वर्षों के व्यय का विवरण, नियमित कर्मचारियों और पेंशनर्स की प्रोफाइल, विभिन्न श्रेणियों में कार्यरत मानव संसाधन की जानकारी तथा आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े आंकड़े भी मांगे गए हैं। इन सूचनाओं के आधार पर सरकारी कार्यबल की संरचना, सेवानिवृत्ति की प्रवृत्ति, वेतन व्यय और भविष्य की वित्तीय आवश्यकताओं का विस्तृत आकलन किया जाएगा। यही जानकारी आयोग की आगामी सिफारिशों के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय सीमा बढ़ाए जाने से आयोग की अंतिम रिपोर्ट पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। इसके बजाय यह कदम सुनिश्चित करेगा कि सभी विभागों से अधिक सटीक और व्यापक जानकारी प्राप्त हो सके। इससे आयोग को वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप वेतन, भत्तों और पेंशन से संबंधित सुझाव तैयार करने में सुविधा मिलेगी।

    आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ भविष्य में बड़ी संख्या में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने की उम्मीद है। ऐसे में डेटा संग्रह की यह प्रक्रिया पूरे आयोग के कार्य का महत्वपूर्ण चरण मानी जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि सभी संबंधित विभाग समय सीमा के भीतर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि आयोग अपनी समीक्षा प्रक्रिया को तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ाते हुए समय पर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कर सके।

  • EPFO की एमनेस्टी स्कीम 2026 से संस्थानों को बड़ी राहत, छह महीने में PF ट्रस्ट रिकॉर्ड नियमित कराने का मिला एकमुश्त अवसर

    EPFO की एमनेस्टी स्कीम 2026 से संस्थानों को बड़ी राहत, छह महीने में PF ट्रस्ट रिकॉर्ड नियमित कराने का मिला एकमुश्त अवसर

    नई दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने उन संस्थानों को बड़ी राहत देने के उद्देश्य से एमनेस्टी स्कीम 2026 लागू की है, जो अपने कर्मचारियों के भविष्य निधि का संचालन स्वयं के छूट प्राप्त पीएफ ट्रस्ट के माध्यम से करते हैं। इस विशेष योजना के तहत पात्र संस्थानों को छह महीने की अवधि में अपने ट्रस्ट की कानूनी स्थिति, रिकॉर्ड और आवश्यक दस्तावेजों को नियमों के अनुरूप नियमित कराने का एकमुश्त अवसर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य ऐसे ट्रस्टों को नियामकीय व्यवस्था के अनुरूप लाना है, जिनके पास आयकर कानून के तहत मान्यता तो है, लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि कानून के तहत औपचारिक छूट आदेश उपलब्ध नहीं है।

    यह योजना वित्त अधिनियम 2026 में किए गए संशोधनों के बाद लागू की गई है। नए प्रावधानों के अनुसार अब केवल उन्हीं भविष्य निधि ट्रस्टों को आयकर कानून के तहत मान्यता मिलेगी, जिन्हें कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम की धारा 17 के अंतर्गत विधिवत छूट प्राप्त होगी। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए EPFO ने यह विशेष योजना शुरू की है ताकि पात्र संस्थान समय रहते अपनी स्थिति को पूरी तरह कानूनी रूप से नियमित कर सकें।

    योजना का लाभ उन संस्थानों को मिलेगा, जो आयकर अधिनियम 1961 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त पीएफ ट्रस्ट का संचालन कर रहे हैं, लेकिन उनके पास केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी औपचारिक छूट आदेश नहीं है। यह योजना 29 जून 2026 से प्रभावी है और इसकी अवधि छह महीने निर्धारित की गई है। इस दौरान आवेदन करने वाले पात्र संस्थानों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का अवसर मिलेगा।

    EPFO ने योजना के लिए पात्र संस्थानों को दो श्रेणियों में विभाजित किया है। पहली श्रेणी में वे संस्थान शामिल हैं जो अपने ट्रस्ट का पूर्व प्रभाव से नियमितीकरण कराना चाहते हैं और वर्तमान में बिना औपचारिक छूट के नियमों का पालन कर रहे हैं या आगे भी उसी व्यवस्था में काम करना चाहते हैं। दूसरी श्रेणी में वे संस्थान हैं जो अपने ट्रस्ट का नियमितीकरण कराने के साथ भविष्य में भी सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत छूट प्राप्त संस्थान के रूप में कार्य जारी रखना चाहते हैं।

    इस योजना के तहत पात्र ट्रस्टों को उनके गठन की तारीख से निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक पूर्व प्रभाव से छूट और मान्यता प्रदान की जा सकती है। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के कुछ प्रावधानों में भी विशेष राहत दी गई है। इनमें न्यूनतम कर्मचारियों की संख्या, ट्रस्ट फंड की न्यूनतम सीमा तथा तीन वर्ष के पूर्व अनुपालन जैसी शर्तों में छूट शामिल है। इससे अनेक संस्थानों के लिए नियामकीय प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हो जाएगी।

    यदि किसी ट्रस्ट ने अपने कर्मचारियों के खातों में कानून के अनुरूप या उससे अधिक अंशदान और ब्याज जमा किया है, तो उससे संबंधित बकाया राशि, हर्जाना और ब्याज के लंबित मामलों को वापस लेने पर भी विचार किया जा सकता है। इसके साथ ही पहले जारी किए गए कुछ आदेशों को भी शून्य माना जा सकता है, जिससे पात्र संस्थानों को अतिरिक्त राहत मिलने की संभावना है।

    योजना का लाभ लेने के इच्छुक संस्थानों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन संबंधित EPFO क्षेत्रीय कार्यालय को ईमेल के माध्यम से भेजना होगा। आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज और वित्तीय अभिलेख प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। संस्थानों को अपने खातों का ऑडिट चार्टर्ड अकाउंटेंट से कराना होगा। यदि EPFO किसी विशेष या अनुपालन ऑडिट का निर्देश देता है, तो आवेदन जमा होने के तीन महीने के भीतर उसे पूरा करना आवश्यक होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना पात्र पीएफ ट्रस्टों के लिए अपने रिकॉर्ड नियमित करने, कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करने और भविष्य में नियामकीय जटिलताओं से बचने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है।

  • रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारत ने बढ़ाई रफ्तार, जून में 34 प्रतिशत उछाल के साथ ऊर्जा आयात रणनीति हुई और मजबूत

    रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारत ने बढ़ाई रफ्तार, जून में 34 प्रतिशत उछाल के साथ ऊर्जा आयात रणनीति हुई और मजबूत

    नई दिल्ली । भारत ने जून 2026 में रूस से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज करते हुए अपनी ऊर्जा आयात रणनीति को और मजबूत किया है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच भारत ने रूस से 4.5 अरब यूरो मूल्य का कच्चा तेल आयात किया, जो मई के मुकाबले 34 प्रतिशत अधिक है। इस बढ़ोतरी के साथ भारत चीन के बाद रूस के हाइड्रोकार्बन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध रूसी तेल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आयात लागत को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    ऊर्जा और स्वच्छ वायु पर शोध करने वाली संस्था की रिपोर्ट के अनुसार जून महीने में भारत के कुल रूसी जीवाश्म ईंधन आयात का सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का रहा। कुल 5.5 अरब यूरो के रूसी हाइड्रोकार्बन आयात में 83 प्रतिशत हिस्सेदारी केवल कच्चे तेल की रही, जिसकी कीमत 4.5 अरब यूरो आंकी गई। इससे स्पष्ट है कि भारत की ऊर्जा जरूरतों में रूसी कच्चे तेल का महत्व लगातार बना हुआ है।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत के कुल कच्चे तेल आयात में भी मासिक आधार पर 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान देश की कई प्रमुख रिफाइनरियों ने रूस से तेल खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां लागत और उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए रूसी आपूर्ति का अधिक उपयोग कर रही हैं।

    देश की सबसे बड़ी रिफाइनिंग इकाइयों में इस दौरान रूसी तेल की आपूर्ति में तेज वृद्धि देखने को मिली। जामनगर रिफाइनरी में रूस से आने वाले कच्चे तेल का आयात पिछले महीने की तुलना में 150 प्रतिशत बढ़ गया। वहीं पारादीप रिफाइनरी में यह वृद्धि 126 प्रतिशत रही। कोच्चि रिफाइनरी ने भी अपनी खरीद में 83 प्रतिशत का इजाफा किया, जबकि वाडिनार रिफाइनरी में रूसी तेल की आपूर्ति 45 प्रतिशत बढ़ी। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि प्रमुख रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल पर पहले से अधिक भरोसा जता रही हैं।

    भारत की बढ़ी हुई मांग का असर रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात पर भी दिखाई दिया। जून के दौरान रूस के कच्चे तेल के निर्यात की मात्रा में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अपेक्षाकृत कम रहने के कारण रूस की निर्यात आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो सकी। कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली दैनिक आय घटकर 348 मिलियन यूरो रह गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि अधिक मात्रा में निर्यात होने के बावजूद कम कीमतों ने राजस्व पर दबाव बनाए रखा।

    रूस के कुल जीवाश्म ईंधन निर्यात से होने वाली आय में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार निर्यात की मात्रा बढ़ने के बावजूद कुल दैनिक आय एक प्रतिशत घटकर 734 मिलियन यूरो रह गई। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव और मांग के संतुलन को दर्शाती है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कच्चे तेल के अलावा भारत ने रूस से 488 मिलियन यूरो मूल्य के तेल उत्पाद और 444 मिलियन यूरो का कोयला भी आयात किया। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार लगातार मजबूत बना हुआ है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यदि वैश्विक बाजार में कीमतें अनुकूल रहती हैं और आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और लागत प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद को प्राथमिकता देता रह सकता है।

  • AI रणनीति ने बदली IT कंपनी की तस्वीर, पहली तिमाही में 17% बढ़ा मुनाफा, 1.68 अरब डॉलर के नए ऑर्डर से मजबूत हुई भविष्य की कारोबारी संभावनाएं

    AI रणनीति ने बदली IT कंपनी की तस्वीर, पहली तिमाही में 17% बढ़ा मुनाफा, 1.68 अरब डॉलर के नए ऑर्डर से मजबूत हुई भविष्य की कारोबारी संभावनाएं

    नई दिल्ली । आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एलटीआईमाइंडट्री ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 1,466 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 1,254 करोड़ रुपये था। बेहतर आय और लगातार बढ़ती कारोबारी मांग ने कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती दी है।

    पहली तिमाही के दौरान कंपनी की परिचालन आय भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी। ऑपरेशन से प्राप्त राजस्व 17.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 11,608 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि एक वर्ष पहले यह 9,840.6 करोड़ रुपये था। पिछली तिमाही की तुलना में भी राजस्व में सुधार दर्ज किया गया, जिससे संकेत मिलता है कि कंपनी लगातार नए व्यवसाय हासिल करने और मौजूदा ग्राहकों से कारोबार बढ़ाने में सफल रही है।

    तिमाही के दौरान कंपनी को लगभग 1.68 अरब डॉलर के नए ऑर्डर प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 3.1 प्रतिशत अधिक हैं। वहीं पिछले बारह महीनों में कुल ऑर्डर बुक का मूल्य बढ़कर 6.65 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह वृद्धि बताती है कि कंपनी की सेवाओं की मांग वैश्विक ग्राहकों के बीच लगातार बनी हुई है और भविष्य के लिए उसकी कारोबारी स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है।

    कंपनी का कहना है कि इस प्रदर्शन के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधानों पर केंद्रित रणनीति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विभिन्न उद्योगों के ग्राहक अब AI तकनीक को तेजी से अपनाने की दिशा में निवेश कर रहे हैं, जिससे कंपनी को बड़े और दीर्घकालिक प्रोजेक्ट हासिल करने में मदद मिल रही है। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और ऑटोमेशन से जुड़े समाधान भी कंपनी की आय बढ़ाने में सहायक बने हैं।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक वेणु लाम्बू ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजे इस बात का संकेत हैं कि AI-केंद्रित रणनीति व्यावसायिक रूप से सकारात्मक परिणाम दे रही है। उनके अनुसार ग्राहक अब AI आधारित समाधानों से वास्तविक कारोबारी लाभ प्राप्त कर रहे हैं, जिसके कारण कंपनी को अधिक मूल्य वाले प्रोजेक्ट और नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाली तिमाहियों में भी यह रणनीति कंपनी की विकास यात्रा को गति देगी।

    मानव संसाधन के मोर्चे पर कंपनी में 30 जून तक कुल 87,886 कर्मचारी कार्यरत थे। पिछली तिमाही की तुलना में कर्मचारियों की संख्या में 64 की मामूली कमी दर्ज की गई। वहीं पिछले बारह महीनों की कर्मचारी त्याग दर 13.3 प्रतिशत पर स्थिर रही, जिससे संकेत मिलता है कि कार्यबल की स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है।

    हालांकि वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा है, लेकिन शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन अब भी दबाव में है। इस वर्ष अब तक शेयर में 33 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। पिछले एक वर्ष में भी निवेशकों को लगभग 24 प्रतिशत का नुकसान हुआ है, जबकि तीन वर्षों के दौरान शेयर करीब 19 प्रतिशत कमजोर हुआ है। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि मजबूत तिमाही नतीजे, बढ़ती ऑर्डर बुक और AI आधारित रणनीति आने वाले समय में कंपनी के शेयर प्रदर्शन को कितनी मजबूती दे पाते हैं।

  • बाजार में गिरावट के बीच ब्रोकरेज हाउस का बड़ा भरोसा, JM Financial और Motilal Oswal ने Vedanta Aluminium, TCS और Dr Reddy's पर जताया विश्वास, 12 महीनों में 25% तक रिटर्न की संभावना

    बाजार में गिरावट के बीच ब्रोकरेज हाउस का बड़ा भरोसा, JM Financial और Motilal Oswal ने Vedanta Aluminium, TCS और Dr Reddy's पर जताया विश्वास, 12 महीनों में 25% तक रिटर्न की संभावना

    नई दिल्ली । शेयर बाजार ने सप्ताह का समापन दबाव के साथ किया, जहां वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और निवेशकों की सतर्कता का असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला। निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि बाजार की इस कमजोरी के बीच प्रमुख ब्रोकरेज फर्म JM Financial और Motilal Oswal ने कुछ चुनिंदा कंपनियों के शेयरों को लेकर सकारात्मक रुख बनाए रखा है। दोनों संस्थानों का मानना है कि मौजूदा स्तरों पर कुछ गुणवत्ता वाले शेयर निवेशकों को अगले 12 महीनों में आकर्षक रिटर्न दे सकते हैं।

    JM Financial ने फार्मास्युटिकल क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Dr Reddy’s Laboratories पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने कंपनी के लिए 1,561 रुपये का लक्ष्य मूल्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य मौजूदा बाजार भाव की तुलना में करीब 25 प्रतिशत से अधिक संभावित बढ़त का संकेत देता है। हाल ही में कंपनी ने Semaglutide की व्यावसायिक आपूर्ति में देरी की जानकारी दी थी, जिसका कारण API के कुछ वैलिडेशन बैच का निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरना बताया गया।

    ब्रोकरेज का मानना है कि इस अस्थायी चुनौती के बावजूद कंपनी की दीर्घकालिक विकास संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। आने वाले वर्षों में नए उत्पादों की लॉन्चिंग और विस्तारित पोर्टफोलियो से कंपनी की आय में सकारात्मक योगदान मिलने की उम्मीद जताई गई है। इसी आधार पर JM Financial ने स्टॉक को मौजूदा मूल्यांकन पर निवेश के लिए आकर्षक माना है।

    वहीं Motilal Oswal ने Vedanta Aluminium पर पहली बार अपनी कवरेज शुरू करते हुए ‘बाय’ रेटिंग जारी की है। ब्रोकरेज ने कंपनी के शेयर के लिए 540 रुपये का लक्ष्य मूल्य तय किया है, जो हालिया बंद भाव की तुलना में लगभग 22 प्रतिशत संभावित बढ़त दर्शाता है। ब्रोकरेज के अनुसार डिमर्जर के बाद कंपनी अब भारत की सबसे बड़ी शुद्ध प्राइमरी एल्युमिनियम उत्पादक बन चुकी है और वैश्विक स्तर पर भी इसकी स्थिति काफी मजबूत हुई है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्पादन क्षमता, परिचालन दक्षता और बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए कंपनी के दीर्घकालिक प्रदर्शन की संभावनाएं बेहतर दिखाई देती हैं। यही कारण है कि ब्रोकरेज ने इसे धातु क्षेत्र के प्रमुख निवेश विकल्पों में शामिल किया है।

    आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Tata Consultancy Services पर भी Motilal Oswal ने अपनी सकारात्मक राय कायम रखी है। ब्रोकरेज ने स्टॉक पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 2,350 रुपये का लक्ष्य मूल्य दिया है, जो मौजूदा स्तर से करीब 14 प्रतिशत की संभावित बढ़त का संकेत देता है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, टैरिफ से जुड़े जोखिम और कॉरपोरेट ग्राहकों की सतर्क रणनीति के कारण आईटी सेक्टर पर फिलहाल दबाव बना हुआ है।

    इसके बावजूद ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में तकनीकी सेवाओं की मांग में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है। कंपनी की प्रबंधन टिप्पणी भी पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक रही है, जिससे दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह शेयर आकर्षक माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर, बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव और वैश्विक चुनौतियों के बीच ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर साबित हो सकती है। Vedanta Aluminium, Dr Reddy’s Laboratories और Tata Consultancy Services ऐसे ही शेयरों में शामिल हैं, जिनमें अगले एक वर्ष के दौरान बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई गई है।

  • होर्मुज संकट की वापसी से वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी हलचल, अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच भारत के लिए रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने की सलाह

    होर्मुज संकट की वापसी से वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी हलचल, अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच भारत के लिए रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने की सलाह

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तेज हुए सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर आवाजाही प्रभावित किए जाने के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक पर संकट गहरा गया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है और तेल तथा गैस की वैश्विक आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इस स्थिति का असर ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों, विशेषकर भारत, पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की कुल समुद्री तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा वहन करता है। ऐसे में इस मार्ग में किसी भी प्रकार की रुकावट का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिससे पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस जैसी आवश्यक ईंधन वस्तुओं की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।

    अर्थशास्त्री और योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने इस स्थिति को भारत के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी बताया है। उनका कहना है कि देश को अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का तेजी से विस्तार करना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी वैश्विक आपूर्ति संकट का प्रभाव सीमित किया जा सके। उनके अनुसार सीमित आपूर्ति मार्गों और कम आपातकालीन भंडार पर अत्यधिक निर्भरता ऊर्जा सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा करती है।

    उन्होंने कहा कि पिछले होर्मुज संकट ने यह स्पष्ट कर दिया था कि केवल एक या दो आपूर्ति मार्गों पर निर्भर रहना दीर्घकालिक समाधान नहीं है। भारत को विभिन्न देशों से ऊर्जा आयात बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू भंडारण क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि करनी होगी। वर्तमान में देश के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार की क्षमता 5.33 मिलियन मीट्रिक टन है, जिसे विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर स्थित भंडारण केंद्रों में सुरक्षित रखा जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पिछली बार उत्पन्न संकट के दौरान भारत ने वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों और सरकार द्वारा अपनाई गई रणनीतियों के कारण स्थिति को अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से संभाला था। ऊर्जा आयात के विविधीकरण, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और आपूर्ति श्रृंखला को लचीला बनाने जैसे कदमों ने संभावित संकट के प्रभाव को काफी हद तक कम किया। यही अनुभव भविष्य की रणनीति तैयार करने में भी उपयोगी माना जा रहा है।

    ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार केवल तेल ही नहीं, बल्कि हर महत्वपूर्ण संसाधन के लिए आपूर्ति के अनेक स्रोत विकसित करना समय की आवश्यकता है। किसी एक क्षेत्र या मार्ग पर अत्यधिक निर्भरता भू-राजनीतिक तनाव के समय आर्थिक जोखिम को बढ़ा सकती है। इसलिए भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का सबसे प्रभावी रास्ता रणनीतिक भंडार का विस्तार और आयात स्रोतों का व्यापक विविधीकरण माना जा रहा है।

    इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक बना रहता है या आपूर्ति बाधित होती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। ऐसे परिदृश्य में भारत के लिए समय रहते ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े दीर्घकालिक निवेश और रणनीतिक तैयारी को प्राथमिकता देना आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • भारतीय बाजार में लौटा विदेशी निवेश का विश्वास, मजबूत अर्थव्यवस्था और स्थिर रुपया बने एफपीआई आकर्षण की बड़ी वजह

    भारतीय बाजार में लौटा विदेशी निवेश का विश्वास, मजबूत अर्थव्यवस्था और स्थिर रुपया बने एफपीआई आकर्षण की बड़ी वजह


    नई दिल्ली । भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद, रुपए की अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति और निवेश से जुड़े नीतिगत सुधारों का असर अब विदेशी पोर्टफोलियो निवेश पर भी दिखाई देने लगा है। जुलाई के शुरुआती दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार में शुद्ध निवेश किया है, जिससे घरेलू वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बना है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की स्थिर आर्थिक स्थिति और सुधारवादी नीतियां वैश्विक निवेशकों का विश्वास लगातार मजबूत कर रही हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा डेट निवेश से जुड़े कर नियमों में किए गए बदलावों ने विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को अधिक आकर्षक बनाया है। इसके साथ ही रुपए में अपेक्षाकृत स्थिरता रहने से मुद्रा जोखिम कम हुआ है, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इन दोनों कारणों ने जुलाई के पहले दस दिनों में विदेशी निवेश प्रवाह को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने जुलाई की शुरुआत में शेयर और अन्य निवेश श्रेणियों में उल्लेखनीय निवेश किया है। इसके अलावा डेट मार्केट में भी निवेश लगातार बढ़ रहा है। यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशक केवल इक्विटी बाजार ही नहीं, बल्कि भारतीय ऋण बाजार में भी दीर्घकालिक संभावनाएं देख रहे हैं। इससे भारतीय वित्तीय बाजारों की मजबूती और निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत मिलता है।

    आर्थिक जानकारों का कहना है कि भारत के मजबूत व्यापक आर्थिक संकेतक भी इस बदलाव की प्रमुख वजह हैं। नियंत्रित महंगाई, बेहतर आर्थिक विकास दर, मजबूत बैंकिंग व्यवस्था और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार ने वैश्विक निवेशकों के बीच भारत की छवि को और मजबूत किया है। यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद विदेशी निवेशक भारत को अपेक्षाकृत सुरक्षित और बेहतर निवेश गंतव्य के रूप में देख रहे हैं।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि वैश्विक स्तर पर कुछ अन्य बाजारों में निवेश घटने का लाभ भी भारत को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय निवेशक अपने निवेश पोर्टफोलियो में बदलाव करते हुए ऐसे देशों की ओर रुख कर रहे हैं जहां आर्थिक आधार मजबूत हो और भविष्य में बेहतर प्रतिफल की संभावना दिखाई देती हो। भारत इस समय ऐसे प्रमुख बाजारों में शामिल है, जहां विकास की संभावनाएं लगातार बनी हुई हैं।

    हालांकि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव अभी भी निवेशकों की चिंता का विषय बने हुए हैं। पश्चिम एशिया की परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर समय-समय पर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ सकता है। इसके बावजूद यदि अंतरराष्ट्रीय हालात अधिक नहीं बिगड़ते हैं तो भारत में विदेशी निवेश का सकारात्मक रुख आगे भी जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे, प्रमुख आर्थिक आंकड़े और वैश्विक घटनाक्रम निवेशकों की रणनीति तय करेंगे। यदि घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत बने रहते हैं और नीतिगत स्थिरता कायम रहती है, तो विदेशी निवेश में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे भारतीय पूंजी बाजार को मजबूती मिलेगी, निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और देश की आर्थिक विकास यात्रा को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।