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  • स्लीप-एपनिया की पहली दवा जल्द हो सकती है उपलब्ध: खर्राटों और सांस रुकने की समस्या से मिलेगा आराम

    स्लीप-एपनिया की पहली दवा जल्द हो सकती है उपलब्ध: खर्राटों और सांस रुकने की समस्या से मिलेगा आराम


    नई दिल्ली।ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज AIIMS के अनुसार भारत में करीब 10.4 करोड़ लोग ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया OSA से पीड़ित हैं। यह गंभीर स्लीप डिसऑर्डर धीरे-धीरे हार्ट, ब्रेन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है।फिलहाल स्लीप एपनिया का इलाज मुख्य रूप से लाइफस्टाइल बदलाव और CPAP मशीन के जरिए किया जाता रहा है। लेकिन अमेरिका में विकसित नई ओरल पिल, थर्ड फेज क्लिनिकल ट्रायल पूरी कर चुकी है और FDA अप्रूवल का इंतजार कर रही है।

    दवा का काम करने का तरीका रात को सोने से पहले ली जाएगी गले की मांसपेशियों को एक्टिव रखेगी, जिससे नींद में सांस की नली बंद नहीं होगी ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर होगी और स्लीप एपनिया की गंभीरता घटेगी CPAP मशीन पर निर्भर मरीजों के लिए आसान विकल्प

    ट्रायल और असर
    फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में दवा ने स्लीप एपनिया की गंभीरता में लगभग 47% तक कमी दिखाई। हल्के साइड इफेक्ट में मुंह सूखना और नींद आने में थोड़ी कठिनाई देखने को मिली।

    भारत में उपलब्धता
    अभी यह दवा भारत में उपलब्ध नहीं होगी। अमेरिका या अन्य देशों में मंजूरी मिलने के बाद ही भारत में उपलब्ध हो सकेगी। संभावित समय 2027 की शुरुआत तक बताया जा रहा है।

    हेल्थ रिस्क अगर समय पर इलाज न हो
    हार्ट डिजीज

    हाई ब्लड प्रेशर

    स्ट्रोक

    डायबिटीज

    ब्रेन से जुड़ी समस्याएं

    इस नई दवा से स्लीप एपनिया के मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो CPAP मशीन का नियमित इस्तेमाल नहीं कर पाते।

  • अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाने का संकेत, वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा-रूसी तेल खरीद घटने से बड़ी जीत

    अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाने का संकेत, वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा-रूसी तेल खरीद घटने से बड़ी जीत


    नई दिल्ली। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ट्रम्प सरकार भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ में से आधा हटाने पर विचार कर सकती है, क्योंकि भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद काफी कम कर दी है। बेसेंट ने यह दावा किया कि 25% टैरिफ ने भारत की रूसी तेल खरीद घटाने में असर दिखाया है और अब राहत देने का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने इसे अमेरिका की बड़ी जीत बताया और कहा कि टैरिफ अभी भी लागू हैं,
    लेकिन धीरे-धीरे इन्हें हटाने की संभावना है।

    अमेरिका ने अगस्त 2025 में भारत पर दो बार 25-25% टैरिफ लगाए थेपहला व्यापार घाटे के आधार पर और दूसरा रूस से तेल खरीदने के कारण। बेसेंट ने यह भी आरोप लगाया कि यूरोपीय देश भारत पर टैरिफ इसलिए नहीं लगा रहे क्योंकि वे भारत के साथ बड़े व्यापार समझौते के लिए इच्छुक हैं, जबकि यूरोप खुद रिफाइंड तेल खरीदकर रूस की मदद कर रहा है।

    बेसेंट 500% टैरिफ के प्रस्ताव पर भी बोले
    बेसेंट ने कहा कि रूसी तेल खरीदने पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सीनेटर ग्राहम ने रखा है, लेकिन ट्रम्प को इसकी जरूरत नहीं है।

    राष्ट्रपति के पास पहले से ही IEEPA कानून के तहत राष्ट्रीय आपात स्थिति का हवाला देकर अन्य देशों पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार है।

    भारत ने रूस से तेल खरीद घटाई, पर पूरी तरह नहीं रोकी
    अमेरिकी दावों के बावजूद भारत सरकार का कहना है कि रूस से तेल खरीद अभी भी जारी है और भारत अपनी ऊर्जा नीति अपने हितों के आधार पर तय करता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में भारत की रूस से तेल खरीद में गिरावट आई और वह तीसरे नंबर पर खिसक गया। वहीं तुर्की दूसरे सबसे बड़े खरीदार बन गया।

    चीन अभी भी रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है।

    भारत की खरीद में गिरावट का कारण
    रूस ने अब तेल की छूट घटा दी है और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत भी कम हो गई है, जिससे भारत के लिए रूस से तेल खरीदना पहले जैसा लाभकारी नहीं रहा। इसके अलावा शिपिंग, बीमा और भुगतान में दिक्कतें भी बढ़ीं। इसी वजह से भारत सऊदी, UAE और अमेरिका जैसे स्थिर सप्लायर्स से भी तेल खरीद बढ़ा रहा है।

    अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता और टैरिफ में नरमी
    अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते की बातचीत चल रही है, ऐसे में टैरिफ घटाने के संकेत दोनों देशों के रिश्तों में नरमी की तरफ माना जा रहा है।
    अमेरिका के टैरिफ में राहत के संकेत से भारत-यूएस संबंधों में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन रूस से तेल खरीद पर भारत की नीति अभी भी अपने हितों पर आधारित है।

  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत माता के सच्चे सपूत थे : सीएम योगी..

    नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत माता के सच्चे सपूत थे : सीएम योगी..


    नई दिल्ली :लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर नेताजी सुभाष चौक हजरतगंज लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि नेताजी भारत की आजादी का ऐसा नाम हैं जो प्रत्येक भारतीय के मन में सर्वोच्च सम्मान के साथ किसी भी विपरीत परिस्थिति में देशद्रोही तत्वों के सामने न झुकने का दृढ़ संकल्प उत्पन्न करता है भारत माता के सच्चे सपूत नेताजी का नाम लेते ही हर भारतीय के मन में श्रद्धा सम्मान और राष्ट्रप्रेम की भावना स्वतः जाग्रत हो जाती है

    सीएम योगी ने कहा कि नेताजी ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी उनका आह्वान तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा भारत की आजादी का मंत्र बन गया उनका प्रत्येक शब्द स्वतंत्रता संग्राम का संदेश बन जाता था दिल्ली चलो का उद्घोष हर भारतीय को प्रेरित करता है उनका कदम कदम बढ़ाए जा खुशी के गीत गाए जा गीत आज भी भारतीय सेना के दीक्षांत समारोह में बड़ी शान से गाया जाता है नेताजी का योगदान महात्मा गांधी के नेतृत्व वाले आंदोलन को भी नई ऊर्जा प्रदान करता है

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नेताजी ने क्रांतिकारियों के सिरमौर के रूप में आजादी की लड़ाई का नेतृत्व किया भारत के अंदर और बाहर जाकर स्वतंत्रता के लिए जो संघर्ष किया वह अविस्मरणीय है जर्मनी जापान और अन्य देशों में जाकर उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया यह हमारे लिए प्रेरणा की गाथा है

    मुख्यमंत्री ने नेताजी के जीवन पर भी प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि नेताजी का जन्म 1897 में कटक में एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता परिवार में हुआ बचपन में ही उन्हें उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन भेजा गया आईसीएस की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने अंग्रेजों की चाकरी करने से इनकार कर दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े उनका विराट व्यक्तित्व और देश के प्रति अमूल्य योगदान आज भी हम सबको प्रेरणा देता हैसीएम योगी ने कहा कि हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और उनके श्रीचरणों में प्रदेशवासियों की ओर से नमन करते हैं उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और उनका आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत रह

  • सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और टीएमसी को इतिहास पर घेरा..

    सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और टीएमसी को इतिहास पर घेरा..


    नई दिल्ली: भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कांग्रेस तथा तृणमूल कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस के कारण अंग्रेजों का भारत पर कब्जा करने का सपना चकनाचूर हो गया

    सुधांशु त्रिवेदी ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कटाक्ष किया उन्होंने कहा कि आपकी पार्टी भी कांग्रेस से निकली है आप भी कांग्रेस में थीं इतने सालों तक क्यों नहीं याद आया कि नेताजी को सम्मान और उचित स्थान मिलना चाहिए अगर टीएमसी के मन में नेताजी के प्रति सम्मान है तो उन्हें अपने नाम से कांग्रेस हटा देना चाहिए अन्यथा बंगाल की प्रबुद्ध जनता उन्हें जड़-मूल से खत्म कर देगीउन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सबसे सच्चा सम्मान दिया 2018 में आजाद हिंद की निर्वासित सरकार के 75 वर्ष पूरे होने पर सभी जीवित सेनानियों को गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल किया गया और उनका सम्मान किया गया किसी भी राजनीतिक दल ने इससे पहले ऐसा सम्मान नहीं दिया इंडिया गेट पर 1968 तक जॉर्ज पंचम की मूर्ति रही थी वहां नेताजी की मूर्ति पुनर्स्थापित की गई

    सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा कि भारत की स्वतंत्रता में कई लोगों ने योगदान दिया लेकिन सुभाष चंद्र बोस का योगदान अग्रणी और अविस्मरणीय है इसे भुलाने के अनेक कुत्सित प्रयास हुए हैं उन्होंने डॉ भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि 1955 में दिए साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना की निष्ठा अंग्रेजों के प्रति बदल चुकी थी और नेताजी के नेतृत्व ने ब्रिटिश शासन की धारणा को तोड़ दिया

    त्रिवेदी ने 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत के बाद नेताजी द्वारा इसे ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाने का अवसर बताया और सवाल उठाया कि उस समय कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन पर दबाव क्यों नहीं बनाया उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी के 14 जुलाई 1942 के रेजोल्यूशन का हवाला दिया जिसमें कहा गया कि ब्रिटिश सरकार के खिलाफ नकारात्मक भाव को सहयोग और सकारात्मक में बदला जाएगा और कांग्रेस पूरी स्वेच्छा से ब्रिटिश फौजों के समर्थन के लिए तैयार थी यही कारण था कि कांग्रेस ने 1931 से 1947 तक 1942 को छोड़कर कोई आंदोलन नहीं किया

    सुधांशु त्रिवेदी का कहना है कि इतिहास में नेताजी के योगदान को सही रूप में प्रस्तुत करना और उनका सम्मान करना आवश्यक है यह केवल भारत के गौरव के लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है

  • पाक की नापाक हरकत, LoC पर सर्विलांस कैमरे लगाते समय की गोलीबारी, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब

    पाक की नापाक हरकत, LoC पर सर्विलांस कैमरे लगाते समय की गोलीबारी, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब


    जम्मू।
    उत्तरी कश्मीर (North Kashmir) के कुपवाड़ा जिले (Kupwara district) के केरन सेक्टर में 20-21 जनवरी की रात भारत और पाकिस्तानी (India and Pakistan) सैनिकों के बीच गोलीबारी हुई। रक्षा सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह झड़प तब हुई जब 6 राष्ट्रीय राइफल्स के सैनिक केरन बाला इलाके में सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और लाइन ऑफ कंट्रोल (Line of Control) के साथ ब्लाइंड स्पॉट को खत्म करने के लिए हाई-टेक सर्विलांस कैमरे लगा रहे थे। पाकिस्तानी सैनिकों की गोलीबारी का भारतीय जवानों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया।

    पाकिस्तानी सैनिकों ने इंस्टॉलेशन को रोकने के लिए छोटे हथियारों से दो राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में भारतीय पक्ष से एक, सोच-समझकर जवाबी गोली चलाई गई। हालांकि दोनों तरफ से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन भारतीय सेना ने घने जंगल वाले इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया है, क्योंकि उन्हें शक है कि आग का इस्तेमाल घुसपैठ की कोशिश से ध्यान भटकाने के लिए किया गया हो सकता है।

    पूरे सेक्टर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, क्योंकि सेना सर्दियों के महीनों में पारंपरिक घुसपैठ के रास्तों पर नजर रखने के लिए टेक्निकल सर्विलांस को अपग्रेड कर रही है।

    इससे पहले, जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के ऊपरी इलाकों में आतंकवादियों का पता लगाने के लिए अभियान चलाया गया। इसके तीसरे दिन मंगलवार को सुरक्षा बलों ने कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। चतरू क्षेत्र के मन्द्राल-सिंहपुरा के पास सोनार गांव में रविवार को अभियान शुरू किया गया था और इस बीच हुई मुठभेड़ में एक ‘पैराट्रूपर’ शहीद हो गया तथा छिपे हुए आतंकवादियों द्वारा अचानक किए गए ग्रेनेड हमले से सात अन्य घायल हो गए।

    आतंकवादी घने जंगल में भाग गए, लेकिन खाने-पीने की चीजें, कंबल और बर्तनों सहित बड़ी मात्रा में सर्दियों के सामान से भरे उनके ठिकाने का भंडाफोड़ किया गया। जम्मू जोन के पुलिस महानिरीक्षक भीम सेन तुती और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जम्मू महानिरीक्षक आर. गोपाल कृष्ण राव सहित वरिष्ठ अधिकारी भी मुठभेड़ स्थल पर पहुंच गए तथा वे अभियान की निगरानी के लिए वर्तमान में कई सेना अधिकारियों के साथ वहीं डेरा डाले हुए हैं।

  • अमेरिका सांसदों ने ट्रंप से किया आग्रह… बोले- भारत से टैरिफ कम करवाने के लिए करें बात

    अमेरिका सांसदों ने ट्रंप से किया आग्रह… बोले- भारत से टैरिफ कम करवाने के लिए करें बात


    नई दिल्ली।
    पूरी दुनिया के देश जहां ट्रंप (Trump) से टैरिफ (Tariffs) कम करने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के सांसद (American MP) अपने राष्ट्रपति से आग्रह करते नजर आ रहे हैं कि वह भारत से बात करके टैरिफ कम करवाने की कोशिश करें। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के दो सांसद स्टीव डेंस (मोंटाना) और क्रेविन क्रेमर (नॉर्थ डकोटा) ने पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वह होने वाले समझौते में भारत को दलहन के ऊपर से टैरिफ कम करने का आग्रह करें।

    अमेरिकी राष्ट्रपति (American President Donald Trump) को लिखे अपने पत्र में सांसदों ने बताया कि उनके क्षेत्र मोंटाना और नॉर्थ डकोटा दलहन उत्पान में अग्रणी है। इन क्षेत्रों के दलहन उत्पादन का सबसे बड़ा उपभोक्ता भारत ही है। दलहन के क्षेत्र में भारत की कुल खपत वैश्विक खपत की 27 फीसदी है। लगातार चलते टैरिफ वॉर के बीच सांसदों ने कहा कि भारत ने अमेरिका से आने वाली पीली मटर पर 30 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की है। यह नवंबर 2025 से प्रभावी हो गया है। ऐसे में भारतीय बाजार में अमेरिकी निर्यातकों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

    सांसदों ने ट्रंप से आग्रह किया कि वह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी से बात करें और टैरिफ को कम करने के लिए मनाएं। अगर भारत ऐसा करने के लिए तैयार हो जाता है, तो इससे अमेरिकी निर्यातकों को फायदा होगा और एक हद तक भारत के उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिलेगा। आपको बता दें,अमेरिकी सांसदों द्वारा ट्रंप को लिखा गया यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका ने भारतीय आयात पर 50 फीसदी टैरिफ लागू किया हुआ है। इस 50 फीसदी में से 25 फीसदी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीद के लिए दंड के रूप में लगाया है।


    भारत ने अमेरिकी दलहनों पर क्यों लगाया 30 फीसदी टैरिफ?

    भारत सरकार के राजस्व विभाग ने पीली मटर के आयात के ऊपर 30 प्रतिशत शुल्क की घोषणा पिछली साल अक्तूबर में कर दी थी। विभाग की तरफ से जारी आदेश में कहा गया था कि इस 30 फीसदी टैरिफ में से 10 प्रतिशत मानक दर और 20 फीसदी कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर के रूप में था। नवंबर से जारी हुआ यह आदेश मार्च 2026 तक जारी रहने वाला है। इस आदेश से पहले भारत में पीली मटर के आयात पर कोई शुल्क नहीं था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार की तरफ से उठाया गया यह कदम सस्ते आयात की वजह से घरेलू दालों की गिरती कीमत की वजह था।


    अमेरिकी सांसदों ने किया भारत के कदम का विरोध

    नॉर्थ डकोटा और मोंटाना के सांसदों ने भारत के इस कदम का विरोध किया। उन्होंने कहा कि भारत में पीली मटर के निर्यात को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए 2020 में प्रधानमंत्री मोदी को उन्होंने स्वयं यह पत्र दिया था। लेकिन इसका ज्यादा कोई फायदा नहीं हुआ। भारत ने फिर से वही कदम उठाया है।

  • ट्रंप टैरिफ का हल… पूरी को सामान बेचने वाला देश अब भारत से कर रहा खरीदारी

    ट्रंप टैरिफ का हल… पूरी को सामान बेचने वाला देश अब भारत से कर रहा खरीदारी


    नई दिल्‍ली।
    अमेरिका (America) ने भारत (India) पर 50 फीसदी टैरिफ (50 Percent Tariff) लगाकर निर्यात (Exports) को नुकसान पहुंचाने की कोशिश तो की, लेकिन मोदी सरकार ने जल्‍द ही इसका हल भी निकाल लिया और अपना सामान ऐसे देश को बेचना शुरू कर दिया जो खुद पूरी दुनिया को सामान बेच रहा है. वाणिज्‍य मंत्रालय की ओर से जारी ट्रेड आंकड़ों को देखकर साफ पता चलता है कि भारत ने अमेरिका को हुए निर्यात के नुकसान की भरपाई चीन से कर ली है. आईये इस पूरे गणित को आसान शब्‍दों में समझते हैं।

    सबसे पहले बात करते हैं चीन के साथ कारोबार की. वाणिज्‍य मंत्रालय ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और समुद्री उत्पादों जैसी विभिन्न वस्तुओं के निर्यात में उछाल से पिछले साल दिसंबर में चीन को होने वाला भारतीय निर्यात 67.35 फीसदी बढ़कर 2.04 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. निर्यात में यह तेजी मुख्य रूप से तेल खली, समुद्री उत्पाद, दूरसंचार उपकरण और मसालों जैसे उत्पादों के कारण रही।

    कितना रहा कुल कारोबार
    आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में चीन से आयात भी 20 फीसदी बढ़कर 11.7 अरब डॉलर पहुंच गया है. इस तरह देखा जाए तो चालू वित्तवर्ष में अप्रैल-दिसंबर अवधि के दौरान चीन को होने वाला निर्यात 36.7 फीसदी बढ़कर 14.24 अरब डॉलर रहा, जबकि पहले नौ महीनों के दौरान आयात 13.46 फीसदी बढ़कर 95.95 अरब डॉलर हो गया. यानी पहले 9 महीने में ही देश का व्‍यापार घाटा 81.71 अरब डॉलर रहा. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘यह एक स्वागत योग्य वृद्धि है।

    किन चीजों को हमसे खरीद रहा चीन
    इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में वृद्धि दर्ज करने वाली मुख्य वस्तुओं में ‘पॉपुलेटेड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड’ (पीसीबी), ‘फ्लैट पैनल डिस्प्ले मॉड्यूल’ और टेलीफोनी के लिए अन्य विद्युत उपकरण शामिल रहे.. भारत से निर्यात किए जाने वाले प्रमुख कृषि और समुद्री उत्पादों में सूखी मिर्च, ब्लैक टाइगर झींगा, मूंग, वनमेई झींगा और तेल खल अवशेष शामिल हैं. इसी तरह, एल्युमीनियम और परिष्कृत तांबा सिल्लियों ने भी निर्यात वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उल्लेखनीय है कि अमेरिका के बाद चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. यह अलग बात है कि अभी तक हम चीन से सिर्फ खरीद रहे थे, अब उसे बेचना शुरू किया है।

    अमेरिका को कितना रहा निर्यात
    टैरिफ बढ़ने की वजह से भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात में दिसंबर के दौरान 1.83 फीसदी घटकर 6.88 अरब डॉलर रह गया. अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी तक शुल्क लगाए जाने के बाद पिछले वर्ष सितंबर और अक्टूबर में भी निर्यात घटा था. हालांकि, नवंबर महीने में इसमें 22.61 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी. दिसंबर में अमेरिका से आयात 7.57 फीसदी बढ़कर 4.03 अरब डॉलर हो गया. चालू वित्तवर्ष में अप्रैल-दिसंबर अवधि के दौरान देश का अमेरिका को निर्यात 9.75 फीसदी बढ़कर 65.87 अरब डॉलर जबकि आयात 12.85 फीसदी बढ़कर 39.43 अरब डॉलर रहा. जाहिर है कि अमेरिका के निर्यात में आई गिरावट की चीन से पूरी तरह भरपाई हो चुकी है।

  • वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत के निर्यात में 1.87 फीसदी का इजाफा

    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत के निर्यात में 1.87 फीसदी का इजाफा


    नई दिल्ली।
    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं (Global Economic Uncertainties) के बीच बीते महीने (दिसंबर 2025) में भारत (India) से होने वाले वस्तु निर्यात (Commodity Export) में 1.87 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान भारत ने 38.51 अरब डॉलर का निर्यात किया है। जबकि, उससे पहले वर्ष की की समान अवधि (दिसंबर 2024) में 37.80 अरब डॉलर का निर्यात किया था।

    वहीं, बीते महीने वस्तुओं का आयात 8.7 प्रतिशत बढ़कर 63.55 अरब डॉलर रहा, जो दिसंबर 2024 में 58.43 अरब डॉलर का रहा है। इस तरह से बीते महीने वस्तुओं के आयात में वृद्धि के चलते व्यापार घाटा बढ़कर 25.04 अरब डॉलर हो गया।

    गुरुवार को वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से जारी आयात-निर्यात के आंकड़ों से पता चलता है कि वस्तु एवं सेवाओं को मिलाकर भारत ने बीते महीने 74.01 अरब डॉलर का निर्यात किया है, जबकि दिसंबर 2024 में 74.77 अरब डॉलर का निर्यात किया था।

    सेवा के निर्यात में गिरावट
    इस अवधि में सेवा के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है, जो 36.97 से घटकर 36.50 अरब डॉलर रही है। वहीं, आयात की बात करें तो दिसंबर 2025 में भारत ने वस्तु एवं सेवा का कुल निर्यात 80.84 अरब डॉलर का रहा है, जो दिसंबर 2024 में 76.23 अब ड़लर का रहा था। चालू वित्त वर्ष (अप्रैल-दिसंबर) के दौरान देश का कुल वस्तु निर्यात 2.44 प्रतिशत बढ़कर 330.29 अरब डॉलर का रहा है। जबकि आयात 5.9 प्रतिशत बढ़कर 578.61 अरब डॉलर हो गया।


    नौ महीनों में कुल व्यापार घाटा 248.32 अरब डॉलर पर पहुंचा

    इस तरह वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में कुल व्यापार घाटा 248.32 अरब डॉलर दर्ज किया गया। अगर वस्तु एवं सेवा क्षेत्र के निर्यात को जोड़कर देखा जाए तो बीते नौ महीनों में निर्यात 4.33 प्रतिशत बढ़ गया है जो वित्तीय वर्ष 2024-25 में 607.93 अरब डॉलर का था लेकिन चालू वित्तीय वर्ष दिसंबर तक ही निर्यात बढ़कर 634.26 अरब डॉलर का रहा है।


    निर्यात के मोर्चे पर सकारात्मक रुझान

    वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल का निर्यात को लेकर कहना है कि तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का निर्यात सकारात्मक दिखाई दे रहा है। मौजूदा रुझानों को देखते हुए उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में कुल निर्यात (वस्तु और सेवाएं) 850 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर सकता है। बीते महीने इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री उत्पाद और दवा जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ा है। इसके साथ अमेरिका, चीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को भारत का निर्यात स्थिर गति से बढ़ रहा है।


    अमेरिका-चीन के साथ बढ़ रहा कारोबार

    वैश्विक खींचतान के बीच अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया हुआ है लेकिन उसके बावजूद अमेरिका को होने वाला निर्यात नवंबर की तुलना में दिसंबर में भी स्थिर रहा है। बीते महीने भारत से 6.89 अरब डॉलर का निर्यात हुआ है। जबकि नवंबर 2025 में 6.98 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था। अगर दिसंबर 2024 के मुकाबले देखा जाए तो थोड़ी से कमी दिखाई देती है क्योंकि दिसंबर 2024 में भारत से 7.01 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था। उधर, चालू वित्तीय वर्ष में वित्तीय वर्ष 2024-25 के मुकाबले 9.75 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई देती है। वहीं, चीन को होने वाले निर्यात में 36.68 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • विदेशियों को आकर्षित नहीं कर पा रहा भारत…. राजस्थान से भी छोटे देश वियतनाम पहुंचे 3 गुना से भी ज्यादा टूरिस्ट

    विदेशियों को आकर्षित नहीं कर पा रहा भारत…. राजस्थान से भी छोटे देश वियतनाम पहुंचे 3 गुना से भी ज्यादा टूरिस्ट


    नई दिल्ली।
    साल 2025 के पहले नौ महीनों में भारत (India) सिर्फ 6.18 मिलियन विदेशी पर्यटकों (6.18 Million Foreign Tourists) को ही आकर्षित कर पाया. यह आंकड़ा चौंकाने वाला है, क्योंकि अकेला पेरिस शहर (Paris city) एक साल में करीब 18 मिलियन अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का स्वागत कर चुका है. भारत के बेहद करीब वियतनाम (Vietnam), जो क्षेत्रफल में राजस्थान से भी छोटा है, उसने 2025 में 20 मिलियन विदेशी पर्यटकों का रिकॉर्ड बनाया.


    क्या भारत अब बजट डेस्टिनेशन नहीं रहा?

    आज भारत न तो विदेशी टूरिस्ट के लिए सस्ता है और न ही अपने ही नागरिकों के लिए. घरेलू छुट्टी का खर्च कई बार श्रीलंका या थाईलैंड जैसे देशों की इंटरनेशनल ट्रिप से ज्यादा हो जाता है. घरेलू फ्लाइट्स महंगी हैं, होटल ओवरप्राइस्ड हैं और सर्विस क्वालिटी में लगातार गिरावट देखी जा रही है. वियतनाम में एक हफ्ते की अच्छी ट्रिप 50 से 60 हजार रुपये प्रति व्यक्ति में हो जाती है. वहीं गोवा की इसी तरह की यात्रा का खर्च इतना ही या उससे ज्यादा हो सकता है. यही वजह है कि कई भारतीयों को विदेशी यात्रा ज्यादा सस्ती और ज्यादा आकर्षक लगने लगी है।


    इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं में क्या कमी है?

    भारत में पब्लिक ट्रांसपोर्ट भरोसेमंद नहीं है. कई टूरिस्ट प्लेस पर कैब ड्राइवर मीटर से चलने से इनकार करते हैं और गैंग बनाकर मनमाना किराया वसूलते हैं. मेट्रो शहरों से आखिरी मील कनेक्टिविटी कमजोर है. इसके अलावा प्रदूषण भी एक बड़ा कारण है, राजधानी दिल्ली में AQI महीनों तक तीन अंकों में बना रहता है. सार्वजनिक स्थानों पर थूकना आम है. ऐतिहासिक स्मारकों पर लिखावट और नुकसान दिखाई देता है. शौचालय गंदे हैं और कई हेरिटेज साइट्स पर बदबू पर्यटकों का स्वागत करती है. ऐसी हालत में लोग ऊंची कीमत चुकाने से पहले सौ बार सोचते हैं।


    टूरिज्म में सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता क्यों?

    सुरक्षा भारत की सबसे कमजोर कड़ी बन चुकी है. महिला वर्ल्ड कप के दौरान ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के साथ छेड़छाड़, राजस्थान में फ्रेंच टूरिस्ट के साथ रेप और कर्नाटक में इजरायली महिला के साथ गैंगरेप जैसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक पहुंचती हैं. ये घटनाएं भारत की वैश्विक छवि को गहराई से प्रभावित करती हैं. गोवा या केरल के बजट में लोग बाली, कुआलालंपुर या दुबई घूम लेते हैं. थाईलैंड में अलग से टूरिस्ट पुलिस है. वहां इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर, शहर साफ और सुरक्षा सिस्टम मजबूत है. ऐसे में सवाल उठता है कि कोई भारत क्यों चुने, जब खर्च ज्यादा और अनुभव कमजोर हो।


    भारत पर्यटन को मजबूत कैसे बना सकता है?

    भारत के पास प्राचीन मंदिर, जीवंत संस्कृति, रेगिस्तान, पहाड़, समुद्र तट और जंगल हैं. सबसे पहले सुरक्षा पर जीरो टॉलरेंस जरूरी है. साफ-सफाई को सख्ती से लागू करना होगा और नागरिकों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी. कीमत और सुविधाओं में संतुलन, बेहतर सर्विस स्टैंडर्ड और प्रोफेशनल प्रमोशन जरूरी है. पर्यटन सिर्फ स्मारक नहीं, अनुभव है और वही तय करता है कि पर्यटक दोबारा लौटेगा या नहीं.

  • कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती… रूस से ईंधन खरीदने के मामले में तीसरे स्थान पर आया भारत

    कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती… रूस से ईंधन खरीदने के मामले में तीसरे स्थान पर आया भारत


    नई दिल्ली।
    रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों (Public sector Refineries) द्वारा कच्चे तेल के आयात (Crude oil Imports) में भारी कटौती (Significant Reduction ) के बाद दिसंबर 2025 में रूस से इस ईंधन को खरीदने के मामले में भारत तीसरे स्थान पर आ गया है। यूरोपीय शोध संस्थान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इसके अनुसार भारत द्वारा रूस से कुल हाइड्रोकार्बन आयात दिसंबर में 2.3 अरब यूरो रहा, जो पिछले महीने के 3.3 अरब यूरो से कम है।

    रिपोर्ट में कहा गया, तुर्की भारत को पीछे छोड़ते हुए दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया, जिसने रूस से दिसंबर में 2.6 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन खरीदे। चीन शीर्ष खरीदार बना रहा, जिसकी रूस के शीर्ष पांच आयातकों से होने वाली निर्यात आय में 48 प्रतिशत (छह अरब यूरो) की हिस्सेदारी रही।

    सीआरईए ने कहा कि भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात में मासिक आधार पर 29 प्रतिशत की भारी गिरावट हुई। रिपोर्ट के अनुसार इस कटौती की मुख्य वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी रही, जिसने दिसंबर में रूस से अपने आयात को आधा कर दिया। सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों ने भी दिसंबर में रूसी आयात में 15 प्रतिशत की कटौती की।


    तेल की कीमतें प्रभावित होने के आसार नहीं

    क्रिसिल रेटिंग्स ने मंगलवार को कहा कि वेनेजुएला के हालिया घटनाक्रमों से कच्चे तेल की कीमतों पर निकट भविष्य में कोई ठोस प्रभाव पड़ने के आसार नहीं है क्योंकि वैश्विक आपूर्ति में इस लातिन अमेरिकी देश की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत बेहद कम है।

    वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति में इस देश की हिस्सेदारी केवल 1.5 प्रतिशत है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें हाल के दिनों में काफी हद तक स्थिर रही हैं जो 60 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के ठीक ऊपर बनी हुई हैं। भारत के संदर्भ में, वेनेजुएला से होने वाला आयात भारत के कुल आयात का 0.25 प्रतिशत से भी कम है। वित्त वर्ष 2024-25 में हुए लगभग 14,000 करोड़ रुपये के आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से अधिक थी।