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  • भारत की नदी में बहता था हीरा… इतना खजाना कि डच-ब्रिटिश हो गए मालामाल

    भारत की नदी में बहता था हीरा… इतना खजाना कि डच-ब्रिटिश हो गए मालामाल

    नई दिल्‍ली। भारत को सोने की चीड़िया कहा जाता था, पर क्या आपको पता है कि, इसी सोने की चीड़िया जैसे देश में एक ऐसी नदी थी जहां हीरे बहा करते थे. आज हम आपको भारत में बहने वाली हीरों के नदी के बारे में बताएंगे. कहा जाता है ये नदी जहां बहती है वहां समृद्धियों के स्रोत का कभी अंत नहीं हुआ. इस नदी और इसके आस-पास से निकालें हीरे, पूरी दुनिया में सबसे बेहतरीन माने जाते थे.

    हीरे की खानों की वजह से मिला नाम
    यह उपनाम नदी के पानी या बहाव के कारण नहीं बल्कि उसके आसपास के इलाके में हीरे की खानें और खनन के क्षेत्र होने की वजह से यह मिला था. सदियों तक कृष्णा नदी और उसके आसपास के इलाके दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक हीरा उत्पादक क्षेत्र रहे थे. व्यापारी, यात्री और शासक इस क्षेत्र की ओर आकर्षित होते थे. इसने न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया बल्कि भारत के राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव को भी दूर-दराज के देशों तक पहुंचाने का काम करवाया था.
    कृष्णा नदी के किनारे खासतौर पर गोलकोंडा क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से हीरे के लिए प्रसिद्ध था. गोलकोंडा के हीरे अपनी चमक, आकार और शुद्धता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर थे.

    माना जाता है कि कोह-ए-नूर, होप डायमंड और दरिया-ए-नूर जैसे प्रसिद्ध हीरे इसी क्षेत्र से निकले थे. इन हीरों ने भारत को कई शताब्दियों तक दुनिया का प्रमुख हीरा स्रोत बनाए रखा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इसकी ख्याति बढ़ाई थी.

    1,300 किलोमीटर लंबी नदी
    भूगोल की दृष्टि से कृष्णा नदी महाराष्ट्र के महाबलेश्वर के पास पश्चिमी घाट से निकलती है. यह नदी महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से होकर बंगाल की खाड़ी में मिलती है. लगभग 1,300 किलोमीटर लंबी यह नदी कृषि, बस्तियों और व्यापार के लिए उपजाऊ बेसिन प्रदान करती रही है. यही वजह है कि हीरा व्यापार से जुड़े क्षेत्रों की समृद्धि में इसका बड़ा योगदान रहा है.

    गोलकोंडा केवल एक किला या खदान नहीं था बल्कि कृष्णा के ईलाकों से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय हीरा व्यापार केंद्र था. मध्यकाल में यहां से निकले हीरे भारत के पूर्वी तट के बंदरगाहों के जरिए एशिया,

    मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंचते थे. डच, ब्रिटिश और अन्य यूरोपीय व्यापारी इन कीमती पत्थरों तक पहुंच बनाने के लिए प्रतिस्पर्धा करते रहते थे. 18वीं शताब्दी में ब्राजील में हीरे की खोज से पहले तक भारत दुनिया का प्रमुख हीरा स्रोत माना जाता था.
  • शेयर बाजारों में गिरावट सेंसेक्स 250 अंक टूटा; निफ्टी भी गिरकर बंद हुआ

    शेयर बाजारों में गिरावट सेंसेक्स 250 अंक टूटा; निफ्टी भी गिरकर बंद हुआ


    नई दिल्ली । मंगलवार को शेयर बाजारों में गिरावट का रुख देखा गया। विदेशों से मिले मिश्रित संकेतों और घरेलू स्तर पर निवेशकों के बीच सतर्कता की भावना ने बाजार को दबाव में डाला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 250.48 अंक यानी 0.30 प्रतिशत गिरकर 83 627.69 अंक पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 57.95 अंक यानी 0.22 प्रतिशत गिरकर 25, 732.30 अंक पर रहा विदेशी बाजारों से मिले संकेतों में मिश्रित रुझान देखे गए जिससे घरेलू निवेशकों ने सतर्कता बरती। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई जो भारतीय बाजारों पर असर डालने का कारण बनी। इसके अलावा घरेलू स्तर पर भी कुछ प्रमुख कंपनियों के तिमाही परिणामों को लेकर निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी रही जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा।
    इस गिरावट के बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि यह कोई लंबी अवधि की मंदी नहीं है। वे मानते हैं कि आगामी दिनों में बाजार में पुनः सुधार की संभावना हो सकती है खासकर अगर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ बेहतर होती हैं। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी पोर्टफोलियो को सावधानीपूर्वक देखें और लंबी अवधि के लिए निवेश करें। वहीं कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी पहलू मजबूत हैं और आने वाले समय में सकारात्मक रुझान दिख सकते हैं। सरकार के आर्थिक सुधारों और कॉरपोरेट क्षेत्र में संभावित वृद्धि को ध्यान में रखते हुए बाजार में भी सुधार की उम्मीद है। हालांकि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा और निवेशकों को सतर्क रहना होगा।
    इसी के साथ मंगलवार को मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की गिरावट आई। मिडकैप इंडेक्स में 0.32 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.25 प्रतिशत की गिरावट आई। बैंकों और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में भी दबाव देखा गया जबकि ऊर्जा और कच्चे तेल से संबंधित कंपनियों में कुछ राहत मिली। कुल मिलाकर मंगलवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजारों के लिए नकारात्मक रहा हालांकि आने वाले दिनों में कुछ सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे बाजार की मौजूदा स्थिति को समझते हुए अपने निवेश निर्णय लें और लघु अवधि के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए धैर्य रखें।

  • भारत-जर्मनी के बीच शुरू होगी वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा…. दोनों देशों ने किए 19 समझौते

    भारत-जर्मनी के बीच शुरू होगी वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा…. दोनों देशों ने किए 19 समझौते


    अहमदाबाद।
    जर्मनी (Germany) ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए अपने एयरपोर्ट (Indian Passport holders) से वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा (Visa-free Transit facility) शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है। इसकी घोषणा सोमवार को भारत-जर्मनी संयुक्त बयान में की गई। इस नई सुविधा से भारतीय यात्रियों को जर्मन एयरपोर्ट से गुजरने के लिए अलग से ट्रांजिट वीजा की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय यात्रा अधिक सुगम और तेज हो जाएगी। जर्मनी के इस फैसले से न केवल यात्रा आसान होगी बल्कि भारत और जर्मनी के बीच आपसी संबंध और पर्यटन को भी नई मजबूती मिलेगी।


    19 महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और जर्मनी ने सोमवार को डिफेंस, ट्रेड, जरूरी मिनरल्स और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के उपायों का ऐलान किया। प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने के लिए दोनों देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने का वादा किया। नेताओं के बीच वार्ता के बाद दोनों देशों ने कुल 19 समझौतों पर साइन किए। इसमें डिफेंस इंडस्ट्रियल सहयोग के लिए एक रोडमैप और हायर एजुकेशन सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर समझौता भी शामिल है।


    डाक, एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में बड़ा समझौता

    भारत और जर्मनी ने डाक, एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में अपने आपसी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया। भारत और जर्मनी ने सीमा पार ई-कॉमर्स और समयबद्ध अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिहाज से डाक, एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक सेवाओं में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते का उद्देश्य सीमा पार होने वाले ई-कॉमर्स व्यापार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामान की समय पर आपूर्ति को बेहतर बनाना है। समझौता आपसी व्यापार को और अधिक सरल और प्रभावी बनाने में मदद करेगा।


    बढ़ेगा निर्यात, लॉजिस्टिक सिस्टम को मिलेगी मजबूती

    बयान में बताया गया है कि इस सहयोग से निर्यात बढ़ेगा और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा जिससे भारतीय लॉजिस्टिक सिस्टम को मजबूती मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान होने से भारतीय व्यापारियों को वैश्विक स्तर पर अपने कारोबार को बढ़ाने और नई पहचान बनाने में काफी मदद मिलेगी। यह कदम भारतीय व्यवसायों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।


    व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

    समझौते के जरिए भारत और जर्मनी मिलकर एक प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय एक्सप्रेस सेवा शुरू करेंगे। इस सेवा के तहत इंडिया पोस्ट के विशाल नेटवर्क और जर्मनी के डॉयचे पोस्ट-डीएचएल ग्रुप के वैश्विक एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक नेटवर्क की वैश्विक लॉजिस्टिक ताकत का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे भारत से विदेश भेजे जाने वाले सामान की डिलीवरी अब पहले से ज्यादा तेज और भरोसेमंद होगी। साथ ही ग्राहकों के लिए सामान भेजने से लेकर मिलने तक की पूरी निगरानी करना भी काफी आसान हो जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।


    रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों ने सैन्य अभ्यास प्रशिक्षण और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने पर सहमति जताई है। व्यापार और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार के 50 अरब डॉलर के पार पहुंचने पर खुशी जाहिर की। इसके साथ ही दोनों देशों ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने का समर्थन किया है ताकि आर्थिक रिश्तों को और मजबूती दी जा सके।


    सेमीकंडक्टर, खनिज और इनोवेशन पर भी सहयोग

    दोनों देशों ने बातचीत में टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और इनोवेशन के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों ने रिन्यूएबल इनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और क्लाइमेट ऐक्शन में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत में फ्री और नियम आधारित नेवीगेशन व्यवस्था का समर्थन किया। साथ ही वैश्विक शांति और संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर समान विचार व्यक्त किए।


    वीजा-मुक्त ट्रांजिट सुविधा की घोषणा

    दोनों देशों ने अपने नागरिकों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की। जर्मनी की ओर से भारतीय पासपोर्ट धारकों को वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा की घोषणा की गई। वीजा-फ्री ट्रांजिट सुविधा का मतलब है कि दूसरे देश जाते समय जर्मन एयरपोर्ट से गुजरने वाले भारतीय यात्रियों को अलग से ट्रांजिट वीजा के लिए आवेदन नहीं करना होगा। इस कदम से भारतीय नागरिकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय यात्रा आसान हो जाएगी। इससे दोनों देशों के नागरिकों के आपसी संबंध मजबूत होंगे। पीएम मोदी ने इस फैसले का स्वागत किया है।

  • HIV की चपेट में देश का यह राज्य… प्रसार दर 2.75 प्रतिशत, राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक

    HIV की चपेट में देश का यह राज्य… प्रसार दर 2.75 प्रतिशत, राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक


    नई दिल्ली।
    मिजोरम (Mizoram) में निवारक उपायों (Preventive measures) में सुधार के बावजूद वयस्कों में HIV प्रसार दर देश में सबसे अधिक 2.75 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 0.20 प्रतिशत से काफी ज्यादा है। मिजोरम राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी (Mizoram State AIDS Control Society) की परियोजना निदेशक डॉ. जेन आर राल्टे ने कहा कि राज्य में 2018 से एचआईवी संक्रमण के नए मामलों (New cases of HIV infection) में गिरावट दर्ज की जा रही है। उन्होंने बताया कि मिजोरम राष्ट्रीय एचआईवी रोकथाम रैंकिंग में वर्ष 2025-26 में दो पायदान चढ़कर तीसरे स्थान पर आ गया है जबकि 2024-25 में यह पांचवें स्थान पर था।

    राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के अनुसार, एड्स निवारक उपायों और इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों के मामले में मिजोरम ने अभूतपूर्व प्रगति की है। नए एचआईवी संक्रमण के मामलों में साल 2018 से लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा, ‘इस सकारात्मक रुझान के बावजूद, मिजोरम अब भी देश में सबसे अधिक वयस्क एचआईवी प्रसार दर (2.75 प्रतिशत) वाला राज्य बना हुआ है, जो 0.20 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।’ राल्टे ने बताया कि अप्रैल 2024 से नवंबर 2025 के बीच 1.4 लाख से अधिक रक्त नमूनों का परीक्षण किया गया, जिनमें से कम से कम 3,257 में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई। इन संक्रमित व्यक्तियों में 179 गर्भवती महिलाओं समेत 953 महिलाएं शामिल थीं।


    अब तक कुल 33,781 मामले सामने आए

    डॉ. राल्टे ने बताया कि एचआईवी के सर्वाधिक मामले 25-34 वर्ष के आयु वर्ग में पाए गए हैं। मिजोरम में एचआईवी का पहला मामला अक्टूबर 1990 में सामने आया था और अब तक कुल 33,781 मामले सामने आ चुके हैं। एमएसएसीएस के एक अधिकारी ने बताया कि फिलहाल राज्य में लगभग 26,321 लोग HIV से संक्रमित हैं। राल्टे ने यह जानकारी भी दी कि अप्रैल 2024 से नवंबर 2025 के बीच सामने आए 3,257 नए एचआईवी मामलों में से 70.4 प्रतिशत में संक्रमण का कारण यौन संबंध था। उन्होंने बताया कि इसके अलावा मादक पदार्थों का सेवन करने और विभिन्न लोगों द्वारा एक ही सुई से इंजेक्शन लगाने के कारण 27.3 प्रतिशत, माता-पिता से बच्चों में संक्रमण फैलने के 1.8 प्रतिशत, और अज्ञात कारणों से संक्रमण फैलने के 0.8 प्रतिशत मामले सामने आए।


    HIV संक्रमण की उच्च दर को करो नियंत्रित

    स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई ने कहा कि राज्य सरकार HIV संक्रमण की उच्च दर को नियंत्रित करने के लिए कई ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि मिजोरम में 14 एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां फिलहाल 18,355 संक्रमित मरीजों को मुफ्त उपचार किया जा रहा है। मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार अब गिरजाघरों के साथ मिलकर विवाह से पहले एचआईवी का परीक्षण कराने के लिए जागरूकता फैलाने पर विचार कर रही है ताकि लोग अपनी सेहत को लेकर अधिक सतर्क और जिम्मेदार बनें।

  • पाक-चीन की खैर नहीं…! भारत स्वदेशी रॉकेट की बढ़ाने जा रहा लंबी रेंज

    पाक-चीन की खैर नहीं…! भारत स्वदेशी रॉकेट की बढ़ाने जा रहा लंबी रेंज

    नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने रक्षा क्षेत्र में खुद को तेजी से मजबूत किया है। पिछले कुछ महीनों में भारतीय सेना ने स्वदेशी डिफेंस कंपनियों के साथ करोड़ों की डील की है। वहीं सेना का फोकस अमेरिका और रूस की सैन्य तकनीक पर भी है। अब सेना अपने पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर को बड़े पैमाने पर अपग्रेड कर रही है। इसके लिए निजी क्षेत्र की बड़ी रक्षा कंपनियां टाटा और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को ऑर्डर मिले हैं। ये कंपनियां पहले भी पिनाका सिस्टम बना चुकी हैं।

    इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत, ये दोनों कंपनियां सेना के बेस वर्कशॉप्स के साथ मिलकर काम करेंगी। वे पिनाका के जरूरी पुर्जों को अपग्रेड करेंगी, लगातार तकनीकी सहायता देंगी और पुराने हिस्सों को बदलेंगी। स्वदेशी पिनाका अब सेना का मुख्य रॉकेट सिस्टम बन गया है। इसकी रेंज को 150 किमी से ज्यादा बढ़ाने पर काम चल रहा है।

    यह साझेदारी, जिसमें टाटा और L&T भारतीय सेना के ईएमई कोरके साथ काम करेंगी, पिनाका रेजीमेंट की ऑपरेशनल तैयारी और आधुनिकीकरण को बेहतर बनाएगी। L&T के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘यह एक अनोखी साझेदारी है, जिसमें एक घरेलू निजी ओईएम (Original Equipment Manufacturer) और भारतीय सेना, फ्रंटलाइन तोपखाने प्रणालियों के रखरखाव के लिए साथ आए हैं। यह भारत में बने, सेवा में मौजूद तोपखाने प्रणालियों के प्रोडक्ट लाइफसाइकिल सपोर्ट के लिए एक बड़ा कदम है।’
    इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत, पहले चरण में 510 ABW के सहयोग से पिनाका लॉन्चर और बैटरी कमांड पोस्ट का एक पायलट ओवरहाल किया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद, बाकी सभी सिस्टम्स का ओवरहाल किया जाएगा। प्रवक्ता ने आगे कहा, ‘यह मॉडल अन्य रक्षा प्लेटफॉर्मों पर भी इसी तरह के लाइफसाइकिल मैनेजमेंट और अपग्रेड कार्यक्रमों के लिए एक खाका (Blueprint) का काम करेगा।’
    टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने भी इस कॉन्ट्रैक्ट की घोषणा की है। कंपनी ने बताया कि वे पहले से ही पिनाका लॉन्चर के निर्माण में लगभग 80% स्वदेशी सामग्री का उपयोग कर रहे हैं। टाटा के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने बड़ी संख्या में पिनाका एमएलआरएस (MLRS) की आपूर्ति की है, जो वर्तमान में भारतीय सेना की ओर से ऑपरेशनल रूप से तैनात हैं। इससे कंपनी के लैंड कॉम्बैट सिस्टम्स पोर्टफोलियो को और मजबूती मिली है।’

    क्या है पिनाका कार्यक्रम?
    पिनाका कार्यक्रम को डीआरडीओ (DRDO) ने विकसित किया है। इसके तहत प्राइवेट सेक्टर आधुनिक हथियारों का निर्माण कर रहा है। यह कार्यक्रम रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ की एक बड़ी सफलता की कहानी बन गया है। पिछले साल सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा घरेलू रक्षा कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। यह कॉन्ट्रैक्ट पिनाका रॉकेट के लिए था, जिसकी कीमत 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा थी।

  • ड्रीम मिलिट्री बनाने ट्रंप का 1.5 ट्रिलियन बजट का ऐलान; भारत भी पीछे नहीं

    ड्रीम मिलिट्री बनाने ट्रंप का 1.5 ट्रिलियन बजट का ऐलान; भारत भी पीछे नहीं

    वाशिंगटन। अमेरिका 2027 में रक्षा पर पहले से ज्यादा खर्च करने पर विचार कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रक्षा बजट बढ़ाने की बात कही है। साथ ही उन्होंने ज्यादा खर्च करने की क्षमता की वजह टैरिफ से होने वाली कमाई को बताया है। डिफेंस बजट बढ़ाए जाने की तैयारी ऐसे समय पर हो रही है, जब ट्रंप ने हाल ही में वेनेजुएला पर ऐक्शन लिया है और कई देशों पर कार्रवाई के संकेत दे रहे हैं।
    ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘सीनेटर्स, कांग्रेसमैन, सेक्रेटरी और अन्य राजनेताओं से लंबी और मुश्किल बातचीत के बाद, मैंने तय किया है कि हमारी देश की भलाई के लिए 2027 के लिए सैन्य बजट 1 ट्रिलियन डॉलर की जगह 1.5 ट्रिलियन डॉलर होगा। खासतौर से ऐसे मुश्किल भरे और खतरनाक समय में।’

    उन्होंने कहा कि ज्यादा खर्च के जरिए अमेरिका ऐसी सेना तैयार कर सकता है, जो किसी भी दुश्मन से देश को सुरक्षित रख सके। अमेरिकी राष्ट्रपति इसे ‘ड्रीम मिलिट्री’ बता रहे हैं।
    टैरिफ को बताया वजह

    ट्रंप ने टैरिफ से होने वाली कमाई का हवाला देते हुए खर्च बढ़ाने की बात कही है। उन्होंने कहा, ‘अगर अन्य देशों से टैरिफ (सीमा शुल्क) के माध्यम से इतनी बड़ी मात्रा में राशि प्राप्त न हो रही होती, जिनमें से कई देशों ने अतीत में संयुक्त राज्य अमेरिका को ऐसे स्तरों पर ‘लूटा’ है जो पहले कभी नहीं देखे गए, तो मैं 1 ट्रिलियन डॉलर की संख्या पर ही टिका रहता।’

    भारत का कितना था 2025 का बजट

    साल 2025-26 के लिए रक्षा मंत्रालय को 6.81 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। खास बात है कि आंकड़े में 2024-25 की तुलना में 9.53 प्रतिशत का इजाफा किया गया था।

    रक्षा मंत्रालय की 1 फरवरी 2025 को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, सशस्त्र बलों के पूंजीगत बजट के तहत 1.80 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। साथ ही घरेलू रक्षा उद्योगों से खरीद के लिए 1.12 लाख करोड़ रुपये निर्धारित हुए। रक्षा अनुसंधान और विकास बजट में 12% की बढ़त हुई थी। भारतीय तटरक्षक बल के पूंजी बजट में 43% की उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई थी।

  • अब ट्रंप भारतीय छात्रों से बोले- आपको अमेरिका से कभी भी निकाला जा सकता है

    अब ट्रंप भारतीय छात्रों से बोले- आपको अमेरिका से कभी भी निकाला जा सकता है

    वॉशिंगटन । भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में पिछले कुछ महीनों में दरार देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विभिन्न फैसलों और बयानों से दोनों देशों में तनाव और बढ़ा है। इस बीच, अमेरिका ने बुधवार को अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को चेतावनी दी है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने दो टूक कहा है कि अमेरिकी कानूनों को तोड़ने से स्टूडेंट वीजा रद्द हो सकता है और यहां तक कि आपको देश से भी निकाला जा सकता है।

    भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”अमेरिकी कानूनों को तोड़ने पर आपके स्टूडेंट वीजा के लिए गंभीर नतीजे हो सकते हैं।

    अगर आपको गिरफ्तार किया जाता है या आप कोई कानून तोड़ते हैं, तो आपका वीजा रद्द किया जा सकता है, आपको देश से निकाला जा सकता है, और आप भविष्य में अमेरिकी वीजा के लिए अयोग्य हो सकते हैं। नियमों का पालन करें और अपनी यात्रा को खतरे में न डालें। अमेरिकी वीजा एक सुविधा है, अधिकार नहीं।”

    अमेरिकी दूतावास समय-समय पर सोशल मीडिया के जरिए चेतावनियां जारी करता रहता है। पिछले दिनों उसने भारत से अमेरिका जाने वाले अवैध अप्रवासियों को एक सख्त पब्लिक चेतावनी जारी की थी।

    चेतावनी में साफ कहा गया कि इमिग्रेशन कानूनों का उल्लंघन करने पर ‘बड़ी क्रिमिनल सजा’ हो सकती है। चेतावनी का यह मैसेज सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, और यह यूनाइटेड स्टेट्स के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में इमिग्रेशन पर बढ़ती सख्ती के दौरान आया।

    अमेरिकी दूतावास ने एक्स पर लिखा था कि अगर आप अमेरिकी कानून तोड़ते हैं, तो आपको कड़ी क्रिमिनल सजा मिलेगी। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन अमेरिका में गैर-कानूनी इमिग्रेशन को खत्म करने और हमारे देश की सीमाओं और हमारे नागरिकों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वीजा नियमों के सख्त होने के कारण, पिछले साल नए इंटरनेशनल एनरोलमेंट में अमेरिका में स्टूडेंट वीजा पर आने वालों की संख्या में 17% की गिरावट आई है। इस बीच, H-1B वीजा आवेदकों को, जो कुशल इंटरनेशनल कर्मचारियों को अमेरिका में रोजगार खोजने की अनुमति देता है, अभूतपूर्व इंतजार का सामना करना पड़ रहा है।

  • ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर बांग्लादेश… तनाव के बावजूद खरीदेगा एक लाख 80 हजार टन डीजल

    ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर बांग्लादेश… तनाव के बावजूद खरीदेगा एक लाख 80 हजार टन डीजल


    गुवाहाटी।
    भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) के बीच चल रहे राजनीतिक तनाव के बावजूद, बांग्लादेश (Bangladesh) अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर है। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (Bangladesh Petroleum Corporation- BPC) ने भारत की सरकारी तेल कंपनी नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (Numaligarh Refinery Limited- NRL) से 180,000 मीट्रिक टन डीजल आयात करने का फैसला किया है। इस आयात की कुल लागत लगभग 14.62 अरब टका होगी जो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ बदल सकती है। यह सौदा 2026 के लिए हुआ है।

    यह फैसला 6 जनवरी को ढाका में हुई सरकारी खरीद सलाहकार समिति की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद ने की। सरकार संचालित बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसी) इस डीजल का आयात करेगी। भुगतान का कुछ हिस्सा बीपीसी अपने बजट से करेगी, जबकि शेष राशि बैंक लोन के माध्यम से जुटाई जाएगी।

    सूत्रों के अनुसार, आयात लागत एनआरएल के साथ बातचीत के बाद तय की गई है। असम स्थित एनआरएल ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) की सहायक कंपनी है। इस सौदे की कुल वैल्यू 119.13 मिलियन डॉलर तय की गई है, जो 83.22 डॉलर प्रति बैरल की बेस कीमत पर 5.50 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर आधारित है। अंतिम लागत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के अनुसार बदलती रहेगी।

    पत्रकारों के सवालों के जवाब में बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन सलाहकार मुहम्मद फौजुल कबीर खान ने कहा कि यह आयात पिछले सरकार के कार्यकाल में हस्ताक्षरित 15 वर्षीय दीर्घकालिक समझौते के तहत किया जा रहा है।

    एनआरएल की रिफाइनरी असम राज्य में स्थित है। डीजल को पहले सिलीगुड़ी तक ले जाया जाता है और फिर भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के माध्यम से बांग्लादेश पहुंचाया जाता है। यह पाइपलाइन 2022-23 में चालू हुई थी, जिससे परिवहन लागत और समय में काफी बचत हुई है। इससे पहले डीजल रेलवे वैगनों से आयात किया जाता था। यह आयात बांग्लादेश की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को मजबूत किया है।

    हालांकि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, अल्पसंख्यकों पर हमले और अन्य मुद्दों पर तनाव बना हुआ है, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग जारी है। बांग्लादेश की सालाना डीजल मांग का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है और भारत इसका विश्वसनीय स्रोत बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक जरूरतें राजनीतिक तनाव से ऊपर हैं, जिससे ऐसे समझौते बरकरार रहते हैं।

  • डिलीवरी ऐप ज़ोमैटो-स्विगी फूड एप्लीकेशन पर खाना क्यों है महंगा रेस्टोरेंट से ज्यादा प्राइस जानिए पूरी कहानी

    डिलीवरी ऐप ज़ोमैटो-स्विगी फूड एप्लीकेशन पर खाना क्यों है महंगा रेस्टोरेंट से ज्यादा प्राइस जानिए पूरी कहानी


    नई दिल्ली ।
    आजकल फूड डिलीवरी ऐप्स जैसे जोमैटो स्विगी और ब्लिंकिट का उपयोग बढ़ता जा रहा है लेकिन इन ऐप्स पर खाना ऑर्डर करना अब ग्राहकों के लिए महंगा साबित हो रहा है। लोकलसर्कल्स के एक हालिया सर्वे में यह बात सामने आई कि 55% कंज्यूमर्स ने बताया कि ऐप्स से खाना ऑर्डर करने पर उन्हें रेस्टोरेंट की तुलना में ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं। लेकिन इसके पीछे क्या कारण है

    महंगे होने का कारण,कमीशन और डिलीवरी चार्ज

    इन ऐप्स द्वारा रेस्टोरेंट से लिया जाने वाला 20-30% का भारी कमीशन जो सीधे ग्राहकों की जेब पर असर डालता है महंगे खाने का प्रमुख कारण है। डिलीवरी ऐप्स रेस्टोरेंट से इस कमीशन के अलावा खुद से भी डिलीवरी शुल्क वसूलते हैं जो कुल मिलाकर खाने की कीमत को काफी बढ़ा देता है। सर्वे में हिस्सा लेने वाले 79,000 से ज्यादा नागरिकों में से 55% ने इस बात को माना है कि यह कमीशन उन्हें रेस्टोरेंट में खाने की तुलना में कहीं अधिक खर्च करने के लिए मजबूर करता है।

    कंज्यूमर्स की बढ़ती नाराजगी

    सर्वे में यह भी देखा गया कि ग्राहक सिर्फ महंगे होने की वजह से नाराज नहीं हैं बल्कि डिलीवरी वर्कर्स की स्थिति को लेकर भी उन्हें चिंता है। कई बार ग्राहकों को लगता है कि डिलीवरी टाइम बहुत लंबा होता है और कभी-कभी खाना खराब या ठंडा हो जाता है जो ग्राहकों के अनुभव को और खराब करता है।

    क्विक डिलीवरी ऐप्स पर जंक फूड का दबदबा

    एक और दिलचस्प बात यह सामने आई कि क्विक डिलीवरी ऐप्स पर बेचे जाने वाले आधे से ज्यादा पैकेट वाले फूड आइटम्स में ज्यादा फैट चीनी और नमक होता है या ये अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड होते हैं। 39% परिवार नियमित रूप से सॉफ्ट ड्रिंक्स बिस्कुट चिप्स और नूडल्स जैसी चीजें ऑर्डर करते हैं। यह स्थिति मुख्यतः बच्चों और युवाओं के बीच अधिक देखी जाती है जो जंक फूड की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

    भारत का ऑनलाइन फूड डिलीवरी मार्केट

    भारत का ऑनलाइन फूड डिलीवरी मार्केट 2024 में लगभग $31.8 बिलियन ₹2.86 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है और इस मार्केट के 2030 तक ₹12 लाख करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। स्मार्टफोन और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के कारण यह मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है। हालांकि इस बढ़ती मांग के बावजूद इन ऐप्स पर खाद्य पदार्थों की बढ़ी हुई कीमतें ग्राहकों को परेशान कर रही हैं।

    क्या हो सकता है समाधान

    इन समस्याओं का समाधान ग्राहक को पारदर्शिता और ऑप्शन की सुलभता में हो सकता है। उदाहरण स्वरूप रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के बीच कम कमीशन या बेहतर डील्स पर बातचीत हो सकती है जिससे ग्राहक को थोड़ी राहत मिल सके। इसके अलावा डिलीवरी शुल्क को भी ग्राहकों के लिए और अधिक स्पष्ट और उचित बनाया जा सकता है।

  • राजस्थान ने क्षेत्रीय एआई प्रभाव सम्मेलन की मेजबानी की जो समावेशी और जिम्मेदार एआई के लिए भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहा है

    राजस्थान ने क्षेत्रीय एआई प्रभाव सम्मेलन की मेजबानी की जो समावेशी और जिम्मेदार एआई के लिए भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहा है


    नई दिल्ली । राजस्थान क्षेत्रीय एआई प्रभाव सम्मेलन मंगलवार6 जनवरी 2026 को आयोजित किया गयाजिसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तर के नेतृत्वनीति निर्माताओंउद्योगपतियोंस्टार्टअप्स और शिक्षाविदों को एक मंच उपलब्‍ध कराया गया ताकि शासनबुनियादी ढ़ांचेनवाचार और कार्यबल विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ताएआईकी परिवर्तनकारी भूमिका पर विचार-विमर्श किया जा सके। यह सम्मेलन 15-20 फरवरी 2026 को आयोजित होने वाले इंडिया एआई प्रभाव सम्‍मेलन का पूर्वाभ्यास है।

    इस सम्मेलन में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्माभारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णवजो वर्चुअल रूप से उपस्थित थेभारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद और राजस्थान सरकार के सूचना एवं संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौर सहित एमईआईटीवाई और राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। उनकी भागीदारी ने भारत की एआई-आधारित विकास यात्रा में राजस्थान को एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करने में केंद्र और राज्य के मजबूत सहयोग को रेखांकित किया।सभा को संबोधित करते हुए भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहाऔद्योगिक क्रांतिबिजलीकंप्यूटरसेमीकंडक्टरइंटरनेट और मोबाइल प्रौद्योगिकी के माध्यम से जिस प्रकार का परिवर्तन आया हैवैसा ही परिवर्तन अब एआई के माध्यम से होने वाला है। प्रधानमंत्री का स्पष्ट लक्ष्य प्रौद्योगिकी का लोकतांत्रिकरण करना है ताकि एआई से संचालित ज्ञान कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित न रहकर प्रत्येक व्यक्तिप्रत्येक घर और प्रत्येक उद्यमी तक पहुंचे। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आज एक कार्यक्रम शुरू किया गया है जिसके तहत दस लाख युवाओं को एआई कौशल में प्रशिक्षित किया जाएगाजिससे भारत के युवा इस नए तकनीकी युग के लिए पूरी तरह से तैयार हो सकें।

    भारत सरकार में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृढ़ विश्वास है कि प्रौद्योगिकी का लोकतांत्रिकरण होना चाहिए। इसी सोच से प्रेरित होकर सरकार ने कृषिस्वास्थ्य सेवाशिक्षा और पर्यावरण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में एआई का लाभ उठाने के लिए इंडिया एआई मिशन के तहत 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसका उद्देश्य नागरिकों की आय बढ़ानाजीवन स्तर में सुधार करना और एआई के जिम्मेदार और समावेशी उपयोग के माध्यम से राष्ट्र की समग्र उत्पादकता को बढ़ावा देना है।

    राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा आज राजस्थान ई-गवर्नेंस और समावेशन से आगे बढ़कर एआई और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में अग्रणी बनने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है। एआई हमारे देश की प्रगति का अगला महत्वपूर्ण चरण है। इस दिशा में और आगे बढ़ते हुए हमने एक एआई और मशीन लर्निंग नीति लागू की है। यह नीति सुनिश्चित करेगी कि एआई प्रणालियां अधिक पारदर्शीनिष्पक्ष और सत्यनिष्ठा के सिद्धांतों के प्रति जवाबदेह बनें। एआई और मशीन लर्निंग के उपयोग से सार्वजनिक सेवाओं का वितरण तेजअधिक पारदर्शी और अधिक नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। इससे प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि होगी और नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय कई एआई पहलों की घोषणा और शुभारंभ थाजिसने एआई-आधारित नवाचार और शासन के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में राजस्थान की भूमिका को मजबूत किया। ये कार्यक्रम और पहलें इस प्रकार हैं:

    सभी के लिए युवा एआई – राष्ट्रीय एआई साक्षरता कार्यक्रमभारत सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसका नेतृत्व एमईआईटीवाई के अंतर्गत इंडियाएआई मिशन कर रहा है। इसका उद्देश्य देशभर के छात्रों और युवाओं में एआई की बुनियादी जानकारी का विकास करना है। राष्ट्रीय युवा दिवस12 जनवरीके उपलक्ष्य में शुरू किया गया यह अभियान लाखों शिक्षार्थियों को एक संक्षिप्तस्व-गति से संचालित बुनियादी एआईएआई 101पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए प्रेरित करना चाहता हैजिससे विकसित भारत की परिकल्पना और समावेशीलोकतांत्रिक एआई अपनाने के अनुरूप सामूहिक एआई शिक्षण का एक राष्ट्रव्यापी माहौल तैयार हो सके।

    राजस्थान एआई/एमएल नीति 2026 का शुभारंभ किया गया हैजिसका उद्देश्य शासन को सुदृढ़ करनाआर्थिक विकास को गति देनाअनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना और उच्च मूल्य वाले रोजगार सृजित करना है। इस नीति के शुभारंभ के साथ ही राजस्थान के एआई पोर्टल का भी शुभारंभ किया गया।राज्यभर में कौशल विकासउद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आईस्टार्ट लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टमएलएमएसका उपयोग किया जाएगा।

    राजस्थान एवीजीसी-एक्‍सआर पोर्टल का उद्देश्य राज्य में एनिमेशनवीएफएक्‍सगेमिंगकॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी इकोसिस्टम को मजबूत करना है। भारत और राजस्थान के एआई विजन को प्रदर्शित करने वाला एक एआई -थीम वाला वीडियो भी जारी किया गया।संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में गूगलआईआईटी दिल्लीनेशनल लॉ यूनिवर्सिटीजोधपुर और स्किल डेवलपमेंट नेटवर्कवाधवानी फाउंडेशनके साथ एआई अनुसंधानकौशल विकासनैतिक ढांचे और नवाचार संस्‍कृति को आगे बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापनएमओयूपर हस्ताक्षर किए गए।

    भारत में आयोजित एक उच्च स्तरीय रणनीतिक सत्र में एमईआईटीवाई के अतिरिक्त सचिवइंडियाएआई मिशन के सीईओ और एनआईसी के महानिदेशक श्री अभिषेक सिंह ने एनवीडिया के दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक श्री विशाल धूपर के साथ वार्तालाप किया। इस सत्र का संचालन प्राइमस पार्टनर्स के प्रबंध निदेशक श्री समीर जैन ने किया। चर्चा में एआई अवसंरचना के लोकतांत्रिकरणसार्वजनिक-निजी सहयोग को बढ़ानेबड़े पैमाने पर नवाचार को सक्षम बनाने और जिम्मेदार एवं विश्वसनीय एआई के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की क्षमता निर्माण के साथ-साथ वैश्विक एआई सुरक्षा कॉमन के निर्माण को आगे बढ़ाने की भारत की रणनीति का विश्लेषण किया गया।

    श्रीमती कविता भाटियावैज्ञानिक ‘जी’समूह समन्वयकएमईआईटीवाई भारत एआई मिशन की सीओओ ने भारत एआई मिशन का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया और इंडिया एआई प्रभाव समिट 2026 के विजन और प्राथमिकताओं की रूपरेखा बताई।सम्मेलन में आईआईटी जोधपुर के प्रोफेसर श्री अविनाश शर्मा द्वारा वैश्विक एआईराष्ट्रीय एआई और क्षेत्रीय एआई पर परिप्रेक्ष्य विषय पर एक सत्र भी आयोजित किया गयाजिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान वैश्विक स्तर पर प्रासंगिकसंदर्भ-जागरूक एआई समाधानों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    समानांतर विषयगत सत्रों में शासन बुनियादी ढ़ांचेनवाचारनैतिकता और रोजगार के क्षेत्रों में एआई के वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों की जांच की गई।राजस्थान क्षेत्रीय एआई प्रभाव सम्मेलन ने इंडिया एआई प्रभाव समिट 2026 की तैयारी में एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय उपलब्‍धि हासिल कियाजिससे सार्वजनिक भलाईसमावेशी विकास और क्षेत्रों में सतत विकास के लिए एआई का लाभ उठाने की भारत की प्रतिबद्धता को बल मिला।