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  • इंदौर: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत सरकार ने हाई कोर्ट में मृतकों की संख्या कम बताई विपक्षी दलों का आरोप

    इंदौर: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत सरकार ने हाई कोर्ट में मृतकों की संख्या कम बताई विपक्षी दलों का आरोप


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है और 35 से अधिक लोग गंभीर हालत में अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। सभी मरीजों में उल्टी दस्त और संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं जिससे पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह सभी मौतें गंदे और दूषित पानी पीने के कारण हुईं।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सक्रिय हो गए हैं लेकिन मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।इस बीच सरकार ने हाई कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों में मृतकों की संख्या कम बताई जबकि हकीकत यह है कि अब तक 16 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि जैसे कोरोना महामारी के दौरान मौतों के आंकड़े छिपाए गए थे उसी तरह अब भी सरकार मृतकों के असली आंकड़े छिपा रही है ताकि जिम्मेदारी से बचा जा सके।

    कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस मामले में सरकार की नाकामी पूरी तरह से उजागर हो चुकी है और अब समय आ गया है कि सच्चाई सामने लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए ताकि और लोगों की जान बचाई जा सके और दूषित पानी के कारण फैलने वाले संक्रमण को रोका जा सके।

    स्थानीय निवासियों की चिंता और बढ़ गई है क्योंकि दूषित पानी पीने से संक्रमण फैलने की संभावना अधिक है। स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में पानी की जांच शुरू कर दी है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन जनता की परेशानी लगातार बनी हुई है।यह मामला प्रशासन और सरकार की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है क्योंकि दूषित पानी पीने से होने वाली मौतें आम बात नहीं हैं और यह स्थिति तत्काल ध्यान देने योग्य है।

  • इंदौर में सर्द हवाओं से ठिठुरन अगले हफ्ते तक कोहरे और कड़ाके की ठंड का सामना करेंगे शहरवासी

    इंदौर में सर्द हवाओं से ठिठुरन अगले हफ्ते तक कोहरे और कड़ाके की ठंड का सामना करेंगे शहरवासी


    इंदौर । इंदौर में इन दिनों सर्द हवाओं और घने कोहरे ने शहरवासियों को ठिठुरन का अहसास करा दिया है। रविवार की सुबह भी कोहरे ने इंदौर को अपनी चपेट में लिया और शनिवार को भी कोहरा छाया हुआ था जिसके कारण दृश्यता 100 मीटर तक सिमट गई थी। इस घने कोहरे के कारण इंदौर एयरपोर्ट से दो दर्जन उड़ानें प्रभावित हुईं।

    उत्तर भारत से आ रही सर्द हवाओं के कारण शहरवासियों को दिन और रात दोनों समय ठंडक का अहसास हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में अगले एक हफ्ते तक कोहरे और शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी। 4 से 6 जनवरी के बीच न्यूनतम तापमान में और गिरावट की संभावना जताई गई है।

    वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से इंदौर में नमी आ रही है और उत्तरी हवाओं की वजह से ठंडक का असर दिन में भी महसूस हो रहा है। हालांकि तीन दिन बाद हवाओं का रुख पश्चिमी होने से तापमान में ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिलेगी। 10 जनवरी के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में बनेगा जिसके प्रभाव से इंदौर का तापमान बढ़ सकता है।

    शुक्रवार रात तीन बजे से शनिवार सुबह 4.30 बजे तक घना कोहरा छाया रहा और इस दौरान दृश्यता 100 मीटर तक सिमट गई। दिन में धूप भी बहुत कम समय के लिए निकली और अधिकांश समय बादल छाए रहे। शनिवार को इंदौर का अधिकतम तापमान 21.9 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से तीन डिग्री कम था जबकि न्यूनतम तापमान 12.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से तीन डिग्री अधिक था।भोपाल स्थित मौसम केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार अगले तीन दिनों तक इंदौर में शीतलता बरकरार रहेगी। रविवार तक कोहरे का असर जारी रहेगा और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है।

  • कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया

    कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके आरोप लगाया कि 2019 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग ने मध्य प्रदेश सरकार को इंदौर और भोपाल में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    कैग की 2019 की रिपोर्ट में साफ तौर पर दोनों शहरों की जल आपूर्ति में गंभीर कमियों का खुलासा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार इंदौर और भोपाल में जल आपूर्ति व्यवस्था में भारी गड़बड़ियां थीं जिनमें पानी के नमूनों का परीक्षण भी सही नहीं किया गया था और कई नमूनों में गंदगी और मल कोलिफॉर्म पाए गए थे जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरे का कारण हैं। इस रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जिससे अब इंदौर में गंदा पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई है।

    उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक एडीबी से 906 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था ताकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर में पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। हालांकि इस कर्ज का इस्तेमाल किया गया था लेकिन कैग की रिपोर्ट में यह साफ सामने आया कि इन शहरों में पानी का प्रबंधन अपर्याप्त था और भ्रष्टाचार के कारण पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ।कैग की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर किया गया था:

    इंदौर में सिर्फ चार जोनों और भोपाल में पांच जोनों को ही नियमित पानी की आपूर्ति हो रही है। शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से केवल 5.30 लाख परिवारों को नल कनेक्शन मिल पाए हैं।2013 से 2018 तक 4,481 पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे।दोनों शहरों में 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले सामने आए थे।नगर निगमों ने रिसाव को ठीक करने में बेहद लंबा समय लिया था 22 से 182 दिन ।पानी के 30 से 70 प्रतिशत हिस्से का कोई हिसाब नहीं था जो पानी बिना कारण बर्बाद हो रहा था।

    उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह एक गंभीर समस्या है जिस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कैग ने 2019 में ही इन मुद्दों को उठाया था लेकिन सरकार तब भी सोती रही और अब जब बड़ा हादसा हो चुका है तब सरकार जागी है। सिंघार का कहना था कि बिना किसी बड़ी त्रासदी के सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती और अब सरकार को इस गंभीर लापरवाही पर जवाब देना चाहिए।इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

  • जबलपुर में नालियों से गुजर रहीं पेयजल आपूर्ति की लाइनों से बढ़ रही चिंता इंदौर जैसी घटना का खतरा

    जबलपुर में नालियों से गुजर रहीं पेयजल आपूर्ति की लाइनों से बढ़ रही चिंता इंदौर जैसी घटना का खतरा


    जबलपुर । हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 15 लोगों की मौत ने प्रदेशभर में चिंता की लहर दौड़ा दी है और अब जबलपुर के नागरिकों में भी जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। जबलपुर में जल वितरण पाइपलाइनों की हालत बेहद खराब है क्योंकि शहर की करीब 80 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति लाइनें नाली-नालियों के नीचे से होकर गुजर रही हैं।

    इन पाइपलाइनों का निर्माण आमतौर पर 20 साल पहले किया गया था लेकिन कई लाइनें 40 से 50 साल पुरानी हो चुकी हैं। समय के साथ इन पाइपलाइनों में क्षरण हो चुका है और इनसे लगातार नाली के पानी धूल और मिट्टी का संपर्क होता है। इस कारण पाइपलाइनों में लीकेज हो रहा है जिससे गंदगी और दूषित पानी वितरण के दौरान पेयजल में घुलने की संभावना बढ़ गई है।

    इंदौर में हुई घटना के बाद जबलपुर नगर निगम ने इस गंभीर समस्या को लेकर सक्रियता दिखाई और जल विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों का गठन किया। ये टीमें शहर के विभिन्न हिस्सों से पेयजल के सैंपल लेकर उसकी गुणवत्ता जांचने में जुट गईं। हालांकि एक दिन सैंपल लेने के बाद विभागीय टीम की गतिविधियां सुस्त पड़ गईं जिससे इस मुद्दे को लेकर नागरिकों के बीच और भी चिंता बढ़ गई है।

    विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शहर में जल वितरण की पाइपलाइनों के रखरखाव और सही तरीके से मरम्मत की आवश्यकता है ताकि पानी की गुणवत्ता पर कोई असर न पड़े। यह समस्या इंदौर जैसी बड़ी घटनाओं को टालने के लिए जल्द सुलझाई जानी चाहिए।नागरिकों ने इस विषय पर नगर निगम और प्रशासन से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की है ताकि भविष्य में दूषित पानी से कोई स्वास्थ्य संकट उत्पन्न न हो।

  • इंदौर में जहरीले पानी से मौतों का मामला नगर निगम कमिश्नर हटाए गए 15 मौतों के बीच सरकार ने हाईकोर्ट में केवल 4 मौतें मानी

    इंदौर में जहरीले पानी से मौतों का मामला नगर निगम कमिश्नर हटाए गए 15 मौतों के बीच सरकार ने हाईकोर्ट में केवल 4 मौतें मानी


    इंदौर । इंदौर में दूषित और जहरीले पानी के कारण हुई मौतों का मामला प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गंभीर रूप ले चुका है। सरकारी तंत्र की लापरवाही और बढ़ते जनआक्रोश के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर नगर निगम के कमिश्नर दिलीप यादव को पद से हटा दिया। साथ ही एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई तब की गई जब इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में नर्मदा जल आपूर्ति से जुड़े पानी को पीने के बाद सैकड़ों लोग बीमार पड़े और कई की जान चली गई।

    स्थानीय लोगों ने पहले ही पानी में गंदगी और बदबू की शिकायत की थी लेकिन प्रशासन ने समय पर पानी की आपूर्ति को रोकने के बजाय इसे नजरअंदाज किया। इसके परिणामस्वरूप कई मौतें हुईं जिनकी संख्या को लेकर विवाद बना हुआ है। मृतकों के परिजनों और अस्पतालों के अनुसार अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है जबकि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट में केवल 4 मौतों की पुष्टि की है।

    हाईकोर्ट में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने बताया कि सभी मृतकों की उम्र 60 वर्ष से अधिक थी। मृतकों की सूची में उर्मिला 28 दिसंबर तारा 60 नंदा 70 और हीरालाल 65 शामिल हैं। सरकार ने इसे एक “प्रारंभिक रिपोर्ट” बताया जबकि अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को तय की है।

    इंदौर के अस्पतालों और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी द्वारा की गई जांच में पानी को पीने योग्य नहीं पाया गया। लैब रिपोर्ट में फीकल कॉलिफॉर्म ई-कोलाई विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। विशेष रूप से हैजा फैलाने वाला बैक्टीरिया विब्रियो कोलेरी भी पानी में मौजूद था हालांकि सरकार इसे सार्वजनिक नहीं करना चाहती। नगर निगम की लैब में भेजे गए सैंपल भी असंतोषजनक पाए गए।इस घटनाक्रम के बाद इंदौर नगर निगम में तीन नए अपर आयुक्त नियुक्त किए गए हैं। इनमें खरगोन के सीईओ आकाश सिंह आलीराजपुर के सीईओ प्रखर सिंह और इंदौर उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक शामिल हैं।

    राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बयानबाजी हो रही है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने इंदौर में लोगों को “पानी नहीं जहर” बांटने का आरोप लगाया। वहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान भी विवादों में रहे जिससे विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इंदौर के प्रभावित इलाकों में अब लोग टैंकरों बोतलबंद पानी और बोरिंग पर निर्भर हैं। प्रशासन ने पानी की आपूर्ति की निगरानी और जांच तेज करने का दावा किया है लेकिन मौतों के वास्तविक आंकड़े और जिम्मेदारी तय होने पर सवाल अभी भी खड़े हैं।

  • इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें, 30 साल पुरानी घटना ने फिर पकड़ी तूल

    इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें, 30 साल पुरानी घटना ने फिर पकड़ी तूल


    इंदौर । इंदौर के भागीरथीपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 15 लोगों की जान चली गई हैजिसके बाद स्थानीय प्रशासन और पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इस घटना के बाद 30 साल पुरानी एक भयानक घटना की यादें ताजा हो गई हैंजब सुभाष चौक इलाके में पानी की टंकी में सड़ी लाश का पानी सप्लाई होने से लोग बीमार हो गए थे।

    पानी में सड़ी लाश मिलने की घटना ने उस समय पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था। टंकी में पड़ा कंकाल पानी में मिलकर पूरे इलाके में सप्लाई हो रहा थाजिससे लोग दस्तउल्टी और बुखार जैसी समस्याओं से जूझने लगे थे। हालांकिइस घटना में किसी की मौत नहीं हुई थीलेकिन लोगों में गहरे डर का माहौल बन गया था।

    अब 30 साल बादभागीरथीपुरा इलाके में फिर से दूषित पानी ने लोगों की जान ली है। कांग्रेस पार्टी ने इसे लेकर प्रदेश सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि पानी की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस घटना ने इंदौर में पानी के सिस्टम की गुणवत्ता और प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है।

    इंदौर नगर निगम के अधिकारियों ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी हैलेकिन स्थानीय लोग और नेताओं ने प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इन मौतों के बादसियासी माहौल भी गर्मा गया है और सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है।यह घटना इंदौर में पानी की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े करती हैऔर यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताती है कि जनता को स्वच्छ और सुरक्षित पानी मिल सके।

  • इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर बोला हमला

    इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर बोला हमला


    इंदौर । इंदौर में गंदा पानी पीने से हुए मौतों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन से अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 338 नए मरीजों में से 32 की हालत गंभीर है। गंदे पानी की लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया। इस पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर में आम आदमी को पानी नहीं बल्कि जहर दिया गया है। उनका कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ है और अब भी कार्रवाई नहीं हो रही है।

    राहुल गांधी ने ट्विटर पर इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि “इंदौर में पानी नहीं जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में था। घर-घर मातम है गरीब बेबस हैं लेकिन भाजपा के नेता घमंड में चूर हैं। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है उन्हें सांत्वना मिलनी चाहिए थी लेकिन सरकार ने घमंड परोस दिया।” उन्होंने यह भी पूछा कि गंदा पानी प्रशासन ने क्यों नहीं रोका और सीवर पानी पीने का कारण क्या था। राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “क्यों नहीं कार्रवाई की गई।

    इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बयान दिया था जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के बाहर प्रदर्शन किया। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने दूषित पानी की आपूर्ति पर सरकार से जवाबदेही की मांग की। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया।

    राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार प्रशासन और नेतृत्व इस घटना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने मध्य प्रदेश को कुप्रशासन का एपिसेंटर बताया और कहा कि यहां लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं जिनमें गरीबों की जान जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर हमेशा की तरह खामोश रहते हैं जब गरीब मरते हैं। इस घटना के बाद से जनता में गुस्सा और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश फैल गया है और इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और प्रदर्शनों का दौर जारी है।

  • इंदौर की घटना पर भड़के ओवैसी? कहा-चले हैं विश्वगुरु बनने, चुल्लू भर पानी में डूब मरें ये लोग…

    इंदौर की घटना पर भड़के ओवैसी? कहा-चले हैं विश्वगुरु बनने, चुल्लू भर पानी में डूब मरें ये लोग…


    हैदराबाद। भाजपा शासित मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले और देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा जीतने वाले इंदौर में दूषित पानी पीने के कारण उल्टी-दस्त के प्रकोप से अब तक 13 मौत का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस आंकड़े पर स्थानीय लोगों, सरकार और अधिकारियों के बीच विरोधाभास बना हुआ है।
    इस बीच, हैदराबाद से सांसद और AIMIM की चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस हादसे के लिए भाजपा को न सिर्फ जिम्मेदार ठहराया है बल्कि उसकी नीतियों की भी आलोचना की है। ओवैसी ने दो टूक कहा कि ये लोग आम लोगों के घरों पर बुलडोजर तो चलवा सकते हैं लेकिन उन्हें साफ पानी पीने जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं दे सकते हैं।

    हैदराबाद में पत्रकारों से बात करते हुए ओवैसी ने कहा, “…उन्हें (बीजेपी) सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन की परवाह है… वे साफ पीने के पानी जैसी ज़रूरी चीज़ें भी नहीं दे सकते और खुद को विश्वगुरु कहते हैं।”

    उन्होंने कहा, “उन्हें सिर्फ बुलडोजर की फिक्र है। किसी मुसलमनान पर इल्जाम लगा तो उसको लाकर पीटते हैं और घर तोड़ देते हैं। इनकी सरकार ऐसी ही है कि देश में इंसानों को बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया नहीं करा सकते। हम 2026 में आ गए हैं और ये लोग विश्वगुरू बनने का दावा करते हैं लेकिन साफ पानी भी नहीं दे सकते हैं। लोग गंदा पानी पीकर मर रहे हैं तो इन लोगों (बीजेपी के लोगों) को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।”

    13 लोगों के मरने का दावा
    बता दें कि इंदौर में स्थानीय नागरिकों ने दूषित जल के प्रकोप के दौरान पिछले आठ दिन में छह माह के बच्चे समेत 13 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है, जबकि प्रशासन ने डायरिया से केवल चार लोगों की मौत की पुष्टि की है। अधिकारियों के मुताबिक पहली नजर में लीकेज के कारण पेयजल की पाइपलाइन में ड्रेनेज का गंदा पानी मिलने के कारण भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला। भागीरथपुरा, राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ में आता है।
    अधिकारियों के मुताबिक चार लोगों की मौत

    विजयवर्गीय ने संवाददाताओं को बताया कि उल्टी-दस्त के प्रकोप से भागीरथपुरा में 1,400 से 1,500 लोग प्रभावित हुए जिनमें से लगभग 200 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं।

    उन्होंने कहा कि इन मरीजों की हालत खतरे से बाहर है और स्वस्थ होने पर लोगों को अस्पताल से लगातार छुट्टी दी जा रही है।विजयवर्गीय ने उल्टी-दस्त के प्रकोप से मरे लोगों के आंकड़े को लेकर जारी विरोधाभास पर कहा,‘‘मुझे प्रशासन के अधिकारियों ने इस प्रकोप से चार लोगों की मौत की जानकारी दी है, पर यहां (भागीरथपुरा में) आठ-नौ लोगों की मौत की सूचना है। हम इस सूचना की तसदीक कर लेंगे और इसके सही पाए जाने पर संबंधित मृतकों के परिवारों के मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा के अनुसार सहायता राशि प्रदान की जाएगी।’’
    अतिरिक्त मुख्य सचिव का दौरा

    इस बीच, राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने स्थानीय अफसरों के साथ भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा करके हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि पेयजल की आपूर्ति की पाइपलाइन के लीकेज को दुरुस्त करने के बाद भागीरथपुरा में बृहस्पतिवार को जलप्रदाय किया गया और घरों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए।

  • इंदौर दूषित पानी कांड: 5 महीने के मासूम अव्यान की मौत, 1,100 से अधिक लोग बीमार

    इंदौर दूषित पानी कांड: 5 महीने के मासूम अव्यान की मौत, 1,100 से अधिक लोग बीमार


    इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पीने के पानी से फैल रही गंभीर बीमारी ने एक परिवार की खुशियाँ छीन लीं। पांच महीने के मासूम अव्यान साहू की मौत दस्त और उल्टी से हुई। बच्चे के परिवार ने बताया कि घर में गाढ़े दूध में नगर निगम के नल का पानी मिलाकर पिलाया गया था, लेकिन वही पानी जहरीला साबित हुआ। स्थानीय निवासियों और अधिकारियों के अनुसार, दूषित पानी ने पूरे इलाके में व्यापक स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया।

    अव्यान का परिवार पिछले 10 सालों से उसकी उपस्थिति का इंतजार कर रहा था, लेकिन यह खुशी मातम में बदल गई। पिता सुनील साहू ने मीडिया से बताया कि बच्चे को उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हुई थी। चिकित्सक से परामर्श के बाद घर पर दवाइयां दी जा रही थीं, लेकिन हालत बिगड़ती चली गई। उन्होंने कहा कि दूध गाढ़ा था, इसलिए वे इसे नगर निगम के नल के पानी में मिलाकर पिला रहे थे, लेकिन वही पानी उनके बच्चे के लिए जानलेवा साबित हुआ।

    सरकारी आंकड़ों और स्थानीय बयानों के अनुसार, अब तक भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण कम-से-कम सात लोगों की मौत हो चुकी है और 1,100 से अधिक लोग पेट और दस्त जैसी बीमारियों से प्रभावित हैं। कई गंभीर मरीज शहर के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती हैं।प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मुख्य जलापूर्ति लाइन में लीकेज के कारण नालों का गंदा पानी पीने के पानी की पाइपलाइन में मिला। नगर निगम के कर्मचारियों ने मंगलवार देर शाम इस लीकेज का पता लगाया। फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं ताकि स्थिति और अधिक गंभीर न हो।

    इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने अब तक सात मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय लोग यह दावा कर रहे हैं कि नौ लोगों की मौत दूषित पानी की वजह से हुई। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जांच जारी है।स्थानीय निवासियों ने बताया कि इलाके में गंदा पानी नल से बहते देखा गया है और पहले भी अस्वस्थ जल आपूर्ति पर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। लेकिन यह समस्या पिछले एक सप्ताह में जानलेवा रूप ले चुकी है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे और जांच अभियान शुरू किया है, और प्राथमिक उपचार तथा अस्पतालों में भर्ती की सुविधा प्रदान की जा रही है।

    यह मामला इंदौर जैसे “सबसे स्वच्छ शहर” के दावे पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जल स्रोत की सुरक्षा और जलापूर्ति अवसंरचना की निगरानी में खामियों ने स्थानीय निवासियों को भारी कीमत चुकाई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि दूषित पानी के फैलाव को रोकने, नियमित जांच करने और सार्वजनिक जल आपूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक हैअदालत और उच्च प्रशासन ने भी इस स्थिति पर संज्ञान लिया है। व्यापक जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए रिपोर्ट मांगी गई है। पीड़ित परिवारों को मुआवजा और चिकित्सा सहायता देने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

  • इंदौरः दो कारों के बीच जोरदार भिंड़त, एक की मौत और सात घायल

    इंदौरः दो कारों के बीच जोरदार भिंड़त, एक की मौत और सात घायल


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में ग्राम उमरीखेड़ा के पास सोमवार सुबह दो कारों के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।

    तेजाजी नगर थाना पुलिस के अनुसार, उमरीखेड़ा के पास सोमवार सुबह दो कारों के बीच टक्कर हो गई। इनमें से एक कार सनावद से इंदौर आ रही थी। उसमें एक मरीज था, जिसे इलाज के लिए इंदौर लाया जा रहा था। वहीं दूसरी कार उज्जैन से ओंकारेश्वर जा रही थी। यहां उज्जैन की कार के ड्राइवर को झपकी लग गई। वह सामने से आ रही कार से जा टकराया। सूचना के बाद तेजाजी नगर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

    इंदौर के तेजाजी नगर थाना प्रभारी देवेन्द्र मरकाम ने बताया कि सोमवार सुबह उमरीखेड़ा के पास उज्जैन से ओंकारेश्वर जा रही कार और सनावद से इंदौर आ रही कार आपस में टकरा गई। हादसे में मुंबई निवासी निखिल कोठारी, उनकी पत्नी सलोनी, अमन पुत्र रशीद खान निवासी उज्जैन, ओमप्रकाश पुत्र आलोक चंद निवासी सनावद, चेतराम पुत्र बारेलाल निवासी सनावद, अरबाज निवासी सनावद और पवन निवासी सदरसर घायल हैं। वहीं भैयालाल (45 वर्ष) पुत्र लक्ष्मलाल निवासी सनावद की अस्पताल में मौत हो गई है।

    परिवार के लोगों ने बताया कि इंदौर आ रही कार में ओमप्रकाश, चेतराम और मरीज भैयालाल सवार थे। भैयालाल को इंदौर इलाज के लिए लाया जा रहा था। हादसे में भैयालाल की मौत हो गई है। वहीं ओमप्रकाश को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चेतराम और भैयालाल आपस में रिश्तेदार हैं। मुंबई के दंपत्ति ने बताया कि वह उज्जैन-ओंकारेश्वर में दर्शन करने आए थे। यहां पर उज्जैन में रविवार को रुके थे। टैक्सी किराए से ली थी और ओंकारेश्वर के लिए निकले थे, तभी रास्ते में हादसा हो गया। दंपत्ति मुंबई में ही जॉब करते हैं। वे मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं।