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  • छावनी सड़क चौड़ीकरण विवाद में नया मोड़: विरोधी पोस्टरों के बाद अब आभार संदेशों से सजे इलाके के रास्ते

    छावनी सड़क चौड़ीकरण विवाद में नया मोड़: विरोधी पोस्टरों के बाद अब आभार संदेशों से सजे इलाके के रास्ते


    मध्‍य प्रदेश । इंदौर के छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर पिछले कई सप्ताह से जारी विवाद के बीच अब एक नया घटनाक्रम सामने आया है। कुछ दिन पहले तक जहां क्षेत्र में प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में लगाए गए पोस्टर चर्चा का केंद्र बने हुए थे, वहीं अब उन्हीं इलाकों में मुख्यमंत्री, मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करने वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इस बदलाव ने क्षेत्रीय राजनीति और स्थानीय जनभावनाओं को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    नगर निगम द्वारा मास्टर प्लान के तहत छावनी और जिंसी क्षेत्र की सड़कों को 60 फीट चौड़ा करने की कार्रवाई शुरू की गई थी। इस दौरान कई मकानों और दुकानों के हिस्सों को हटाया गया। कार्रवाई के बाद प्रभावित रहवासियों और व्यापारियों ने नाराजगी जताते हुए आरोप लगाए थे कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया तथा कुछ स्थानों पर निर्धारित सीमा से अधिक हिस्से तोड़े गए। इन आरोपों के चलते क्षेत्र में विरोध का माहौल बन गया था।

    कार्रवाई के बाद कई मकानों और दुकानों के बाहर विरोध स्वरूप पोस्टर लगाए गए थे। इन पोस्टरों में प्रशासनिक कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त करते हुए संदेश लिखे गए थे। कुछ पोस्टरों में भविष्य में इसी तरह की कार्रवाई अन्य क्षेत्रों में होने की आशंका जताते हुए चेतावनी जैसे संदेश भी दिए गए थे। इन पोस्टरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रही थीं।

    अब उसी क्षेत्र में नए पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक गोलू शुक्ला और भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के प्रति आभार व्यक्त किया गया है। पोस्टरों में मधुमिलन चौराहे से छावनी तक सड़क को 60 फीट चौड़ा किए जाने को व्यापारियों और रहवासियों के हित में बताया गया है। जानकारी के अनुसार ये पोस्टर भाजपा कार्यकर्ता पलक जैन की ओर से लगाए गए हैं।

    सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई के दौरान एक हादसा भी चर्चा में रहा था। 22 मई को निगम की कार्रवाई के बीच बिजली का एक पोल गिर गया था, जिससे एक डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। स्थानीय लोगों के अनुसार घायल डॉक्टर की सर्जरी भी करनी पड़ी थी। इस घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा उपायों को लेकर भी सवाल उठे थे।

    इसके अलावा कुछ रहवासियों ने आरोप लगाया था कि कार्रवाई से पहले मकानों पर लगाए गए निशानों में बदलाव किया गया, जिसके कारण कुछ भवनों को अपेक्षा से अधिक नुकसान पहुंचा। वहीं निगम कर्मचारियों पर बदसलूकी और दबाव बनाने जैसे आरोप भी लगाए गए थे। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से अलग-अलग स्तर पर स्पष्टीकरण दिए जाने की बात सामने आई थी।

    सड़क चौड़ीकरण के विरोध में जनहित पार्टी ने क्षेत्र में ‘न्याय रैली’ भी निकाली थी। पार्टी ने आरोप लगाया था कि प्रभावित लोगों को पर्याप्त समय और उचित राहत नहीं दी गई। दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने भी प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए थे तथा राहत और मुआवजे की मांग की थी।

    फिलहाल छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। नए पोस्टरों के सामने आने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है और स्थानीय स्तर पर इसकी राजनीतिक एवं सामाजिक गूंज लगातार बनी हुई है।

  • इंदौर में बेकाबू नगर निगम टैंकर का कहर: कई वाहनों को मारी टक्कर, 4 घायल; गुस्साई भीड़ ने की तोड़फोड़

    इंदौर में बेकाबू नगर निगम टैंकर का कहर: कई वाहनों को मारी टक्कर, 4 घायल; गुस्साई भीड़ ने की तोड़फोड़


    मध्‍य प्रदेश । इंदौर के पटेल ब्रिज पर गुरुवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब नगर निगम का एक पानी का टैंकर अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर दौड़ने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टैंकर को अपनी ओर तेजी से आता देख सड़क पर मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और कई लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। हादसे में चार लोगों के घायल होने की सूचना है, जबकि कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार टैंकर के ब्रेक फेल होने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि टैंकर अचानक नियंत्रण से बाहर हो गया और आगे बढ़ते हुए सड़क पर चल रहे कई वाहनों को टक्कर मारता चला गया। टक्कर की आवाज और घटनास्थल पर मची अफरा-तफरी के कारण आसपास मौजूद लोग भी घबरा गए। कुछ ही पलों में इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि स्थिति को गंभीर होते देख चालक ने टैंकर को फुटपाथ की ओर मोड़ने का प्रयास किया। इसके बाद टैंकर फुटपाथ पर चढ़ गया और वहां लगी रेलिंग को नुकसान पहुंचाते हुए रुक गया। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि चालक टैंकर को फुटपाथ की ओर नहीं मोड़ता तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था तथा अधिक संख्या में वाहन और लोग इसकी चपेट में आ सकते थे।

    घटना में तीन से चार कारों और दो मोटरसाइकिलों को नुकसान पहुंचा है। कई वाहनों के अगले हिस्से और बॉडी को गंभीर क्षति पहुंची है। टैंकर में सवार एक व्यक्ति के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक किसी गंभीर जनहानि की सूचना नहीं मिली है। घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    हादसे के बाद स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिली। प्रत्यक्षदर्शियों और आसपास मौजूद लोगों का आरोप है कि वाहन की तकनीकी स्थिति की समय पर जांच नहीं की गई, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। आक्रोशित लोगों ने टैंकर में तोड़फोड़ भी की। कुछ समय के लिए क्षेत्र में यातायात प्रभावित रहा और लंबा जाम लग गया।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और यातायात को सामान्य बनाने के प्रयास शुरू किए। अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। चालक के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है, क्योंकि घटना के बाद उसके मौके से चले जाने की बात सामने आई है।

    पुलिस के अनुसार मामले की जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं नगर निगम की ओर से भी वाहन की तकनीकी स्थिति और हादसे के कारणों की समीक्षा किए जाने की संभावना है।

  • बिजली बिल अपडेट के नाम पर रिटायर्ड अधिकारी से साइबर ठगी, खाते से उड़ाए लाखों रुपए

    बिजली बिल अपडेट के नाम पर रिटायर्ड अधिकारी से साइबर ठगी, खाते से उड़ाए लाखों रुपए


    मध्यप्रदेश। इंदौर में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर आम नागरिकों को निशाना बनाते हुए ऑनलाइन ठगी की वारदात को अंजाम दिया है। इस बार ठगों के जाल में जिला पंजीयक कार्यालय से सेवानिवृत्त अधिकारी फंस गए। बिजली बिल अपडेट नहीं होने और कनेक्शन काटने की चेतावनी देकर साइबर ठगों ने उनके मोबाइल में कथित रूप से एप डाउनलोड करवाए और बैंक खाते से बड़ी राशि निकाल ली। मामले की शिकायत मिलने के बाद कनाड़िया थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार संचार नगर निवासी रमेश कुंबारे, जो जिला पंजीयक कार्यालय से सेवानिवृत्त हैं, इस साइबर ठगी का शिकार हुए हैं। घटना 2 जून की रात की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक उनकी पत्नी ज्योति के मोबाइल नंबर पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को बिजली विभाग का कर्मचारी बताते हुए अपना नाम राकेश बताया।

    फोन पर उसने कहा कि मई माह का बिजली बिल विभाग के सिस्टम में अपडेट नहीं हुआ है। साथ ही उसने व्हाट्सएप पर भी संदेश भेजा। इसके बाद रमेश कुंबारे ने उसी नंबर पर संपर्क कर बताया कि बिजली बिल का भुगतान पहले ही किया जा चुका है और भुगतान संबंधी संदेश भी उनके पास मौजूद है।

    आरोप है कि कॉल करने वाले व्यक्ति ने उन्हें विश्वास में लेते हुए कहा कि विभाग के रिकॉर्ड में भुगतान दिखाई नहीं दे रहा है। उसने यह भी कहा कि यदि तुरंत अपडेट नहीं कराया गया तो बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद कथित रूप से दो मोबाइल एप डाउनलोड करने और 12 रुपए का अपडेट शुल्क जमा करने की बात कही गई।

    ठग ने व्हाट्सएप पर एक फॉर्म भेजा और उसे खोलने के लिए कहा। शिकायत के अनुसार जैसे ही फॉर्म खोला गया, मोबाइल स्क्रीन कुछ समय के लिए बंद हो गई। शुरुआत में इसे तकनीकी समस्या समझा गया, लेकिन बाद में जब मोबाइल दोबारा चालू किया गया तो उसमें ‘Electricity Online Customer Support’ नाम के दो एप डाउनलोड मिले।

    कुछ ही देर बाद मोबाइल पर बैंक खाते से राशि कटने के संदेश आने लगे। पहले 24 हजार 500 रुपए की निकासी का संदेश मिला। जब खाते की जानकारी जांची गई तो पता चला कि खाते से कई अलग-अलग ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं। शिकायत के अनुसार 25-25 हजार रुपए के तीन ट्रांजेक्शन के अलावा 24 हजार और 68 हजार रुपए की राशि भी खाते से निकाल ली गई।

    घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। कनाड़िया थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर ठगों की पहचान और रकम के ट्रांजेक्शन से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार लोगों को सलाह देते हैं कि बिजली बिल, केवाईसी अपडेट, बैंक सत्यापन या किसी अन्य सेवा के नाम पर आने वाले संदिग्ध कॉल और लिंक से सावधान रहें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में एप डाउनलोड न करें और न ही स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस की अनुमति दें। थोड़ी सी सावधानी साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय साबित हो सकती है।

  • कोर्ट में कथित फर्जीवाड़े के दो मामले उजागर, महिला डॉक्टर समेत दो आरोपियों पर एफआईआर

    कोर्ट में कथित फर्जीवाड़े के दो मामले उजागर, महिला डॉक्टर समेत दो आरोपियों पर एफआईआर


    मध्यप्रदेश। इंदौर में जिला न्यायालय से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने न्यायिक प्रक्रिया में दस्तावेजों की सत्यता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों मामलों में अदालत को कथित रूप से भ्रामक जानकारी और दस्तावेज प्रस्तुत करने के आरोप सामने आए हैं। न्यायालय के निर्देश पर एमजी रोड थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पहला मामला एक महिला डॉक्टर से जुड़ा है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने एक आपराधिक प्रकरण में आरोपी की जमानत के लिए ऐसी संपत्ति को आधार बनाया, जिसका विक्रय पहले ही किया जा चुका था। पुलिस के अनुसार शिकायत शासन की ओर से अली असलम अंसारी निवासी एमटीएच कम्पाउंड द्वारा दर्ज कराई गई है।

    एफआईआर के मुताबिक डॉक्टर आसमा (30), निवासी मैजेस्टिक नगर, खजराना ने एक मामले में जमानतदार के रूप में अपनी संपत्ति के दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए थे। बाद में दस्तावेजों की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संबंधित संपत्ति पहले ही किसी अन्य व्यक्ति को बेची जा चुकी थी। आरोप है कि इसके बावजूद उसी संपत्ति को आधार बनाकर आरोपी गुलाब की जमानत लेने का प्रयास किया गया।

    मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) इंदौर रवि कुमार साहू ने उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड का परीक्षण किया। प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने इसे गंभीर मानते हुए 5 जून 2026 को संबंधित जमानतदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और दस्तावेजों की वैधानिक स्थिति की पड़ताल की जा रही है।

    दूसरा मामला एक जब्त वाहन को छुड़ाने के प्रयास से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार आरोपी अनिल पुत्र सीताराम सिसोदिया, निवासी जगजीवनराम नगर ने स्वयं को वाहन से संबंधित अधिकार रखने वाला व्यक्ति बताते हुए न्यायालय में दस्तावेज प्रस्तुत किए। आरोप है कि उसने वाहन स्वामी शिवनारायण पुत्र शंकर सिंह गौर के नाम से दस्तावेज पेश कर सुपुर्दगी आदेश प्राप्त करने का प्रयास किया।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने कथित रूप से वाहन मालिक के नाम से तैयार सुपुर्दगीनामा न्यायालय में जमा किया, जिस पर शिवनारायण के हस्ताक्षर दर्शाए गए थे। पहचान के लिए आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए। हालांकि दस्तावेजों की जांच के दौरान कथित विसंगतियां सामने आने पर मामला उजागर हो गया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों मामलों में दर्ज शिकायतों और न्यायालय के आदेश के आधार पर जांच की जा रही है। दस्तावेजों की सत्यता, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका तथा कथित फर्जीवाड़े के पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों की विश्वसनीयता न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे मामलों में यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रामक जानकारी सामने आती है तो यह न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने वाला गंभीर विषय माना जाता है। फिलहाल दोनों मामलों में पुलिस जांच जारी है और जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जा रहा है।

  • कबड्डी टूर्नामेंट में विवाद ने लिया हिंसक रूप, युवक से मारपीट का वीडियो वायरल

    कबड्डी टूर्नामेंट में विवाद ने लिया हिंसक रूप, युवक से मारपीट का वीडियो वायरल


    मध्यप्रदेश। इंदौर के चिमनबाग कबड्डी ग्राउंड पर आयोजित एक कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। प्रतियोगिता से एक टीम को बाहर किए जाने के फैसले को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। एमजी रोड थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से भी पुलिस को शिकायत आवेदन दिया गया है, जिसके आधार पर पूरे मामले की जांच की जा रही है।

    पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार फरियादी यश टिकलिया (21) निवासी आदर्श बिजासन नगर, परदेशीपुरा ने शिकायत दर्ज कराई है कि वह अपने साथियों अनिकेत बांगर और ऋषभ मेहरा के साथ 9 जून की देर रात करीब 12:15 बजे चिमनबाग कबड्डी ग्राउंड पर मौजूद था। इसी दौरान मयंक गौड़ और रोहन मेहरा वहां पहुंचे और संस्था वैष्णवी की टीम को टूर्नामेंट से बाहर किए जाने के संबंध में जानकारी मांगने लगे।

    शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बातचीत के दौरान दोनों युवकों और आयोजन समिति से जुड़े लोगों के बीच बहस शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। जब यश ने इसका विरोध किया तो स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। शिकायतकर्ता के अनुसार इसके बाद दोनों आरोपियों ने उसके साथ हाथ-मुक्कों से मारपीट की।

    मौके पर मौजूद अन्य खिलाड़ियों और दर्शकों ने बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद मामला शांत हुआ, लेकिन घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच टूर्नामेंट के संचालन और विवाद के कारणों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई।

    घटना के बाद यश टिकलिया ने एमजी रोड थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मयंक गौड़ और रोहन मेहरा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और उपलब्ध वीडियो फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल की जाएगी।

    पुलिस ने यह भी बताया कि दूसरे पक्ष की ओर से भी शिकायत आवेदन प्राप्त हुआ है। ऐसे में दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास किया जा रहा है। जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    खेल प्रतियोगिताओं के दौरान खिलाड़ियों और आयोजकों के बीच विवाद की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं, लेकिन खेल भावना को बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी होती है। फिलहाल चिमनबाग कबड्डी ग्राउंड की यह घटना पुलिस जांच का विषय बनी हुई है और सभी की नजरें जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं।

  • इंदौर का रेती मंडी ब्रिज बना इंजीनियरिंग फेलियर का नया उदाहरण, MANIT ने पकड़ी बड़ी खामी

    इंदौर का रेती मंडी ब्रिज बना इंजीनियरिंग फेलियर का नया उदाहरण, MANIT ने पकड़ी बड़ी खामी


    इंदौर । इंदौर का बहुप्रतीक्षित रेती मंडी ब्रिज अब तकनीकी लापरवाही और खराब प्लानिंग को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। भोपाल के चर्चित 90 डिग्री ब्रिज विवाद के बाद अब यह प्रोजेक्ट भी इंजीनियरिंग की गंभीर चूक का उदाहरण बनता नजर आ रहा है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद चार साल से निर्माणाधीन यह ब्रिज अब तक पूरा नहीं हो पाया है और नई तकनीकी खामी सामने आने के बाद इसका काम फिर से करीब छह महीने आगे बढ़ गया है।

    सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यदि समय रहते इस गलती को नहीं पकड़ा जाता तो भविष्य में यहां बड़ा हादसा हो सकता था। दरअसल रेती मंडी ब्रिज के टर्निंग पॉइंट पर सड़क की चौड़ाई केवल 7.50 मीटर रखी गई थी। जब मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी MANIT की विशेषज्ञ टीम ने प्रूफ चेक किया तो इसे गंभीर तकनीकी खामी बताया गया।

    विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी कम चौड़ाई वाले टर्न पर भारी वाहनों और तेज रफ्तार ट्रैफिक के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता था। इसके बाद लोक निर्माण विभाग को पूरे डिजाइन में बदलाव करना पड़ा है। अब इस टर्निंग पॉइंट की चौड़ाई 7.50 मीटर से बढ़ाकर 10 मीटर की जा रही है।

    नई चौड़ाई को सपोर्ट देने के लिए दो अतिरिक्त पिलर भी लगाए जाएंगे। यानी जो काम शुरुआती प्लानिंग में होना चाहिए था, उसे अब निर्माण के बीच में बदलना पड़ रहा है। इससे न केवल प्रोजेक्ट की लागत बढ़ेगी बल्कि काम पूरा होने में भी और देरी होगी।

    तकनीकी विशेषज्ञ अतुल सेठ ने कहा कि उन्होंने पहले ही इस खामी की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। उनके अनुसार किसी भी बड़े टर्निंग पॉइंट पर इतनी कम चौड़ाई पर्याप्त नहीं मानी जाती। अगर समय रहते सुधार नहीं किया जाता तो भविष्य में यह ब्रिज गंभीर हादसों का कारण बन सकता था।

    मामले को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने लोक निर्माण विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए इसे सरकारी लापरवाही का उदाहरण बताया है। कांग्रेस प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला ने आरोप लगाया कि इंदौर को प्रयोगशाला बनाकर बिना उचित प्लानिंग के निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कभी 90 डिग्री ब्रिज बनाया जाता है, कभी पिलर गायब हो जाते हैं और अब रेती मंडी ब्रिज में तकनीकी खामी सामने आ रही है।

    रेती मंडी ब्रिज अब केवल अधूरा प्रोजेक्ट नहीं बल्कि सरकारी सिस्टम की कार्यशैली और इंजीनियरिंग की कमजोरियों पर बड़ा सवाल बन चुका है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

  • इंजीनियरिंग छात्रों की शर्मनाक हरकत: पार्टी के बाद हॉस्टल में जमकर तोड़फोड़, प्रशासन सख्त

    इंजीनियरिंग छात्रों की शर्मनाक हरकत: पार्टी के बाद हॉस्टल में जमकर तोड़फोड़, प्रशासन सख्त

    मध्‍य प्रदेश/इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में फाइनल ईयर छात्रों की कथित हरकतों ने पूरे शैक्षणिक माहौल को सवालों के घेरे में ला दिया है। कोर्स पूरा होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक पार्टी उस समय विवादों में आ गई जब कुछ छात्रों ने हॉस्टल परिसर में जमकर हंगामा और तोड़फोड़ कर दी। इस घटना के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए छात्रों के रिजल्ट रोकने और प्लेसमेंट प्रक्रिया को होल्ड करने का निर्णय लिया है।

    जानकारी के अनुसार रामानुजन हॉस्टल में बीटेक फाइनल ईयर के छात्रों द्वारा पार्टी का आयोजन किया गया था। शुरुआत में यह आयोजन सामान्य जश्न के रूप में देखा गया, जिसमें संगीत, नृत्य और उत्सव का माहौल था। लेकिन देर रात तक चले इस कार्यक्रम ने धीरे-धीरे उग्र रूप ले लिया। आरोप है कि इस दौरान कुछ छात्रों ने नशे की हालत में हॉस्टल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो फुटेज के अनुसार, छात्रों ने हॉस्टल के फर्नीचर, खिड़कियों के शीशे और पानी के स्टोरेज टैंक तक को क्षतिग्रस्त कर दिया। कई जगहों पर कुर्सियां और टेबल टूटे हुए पाए गए, जबकि परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। यह उत्पात देर रात से लेकर तड़के लगभग चार बजे तक चलता रहा, जिससे हॉस्टल प्रशासन को स्थिति संभालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

    घटना के बाद जब विश्वविद्यालय प्रशासन को इसकी जानकारी मिली तो तुरंत जांच के आदेश दिए गए। आईईटी निदेशक ने मौके पर पहुंचकर हॉस्टल का निरीक्षण किया, जहां व्यापक स्तर पर नुकसान के संकेत मिले। कई कमरों की खिड़कियां टूटी हुई पाई गईं और परिसर में पार्टी से जुड़ी सामग्री जैसे डीजे उपकरण और सजावट के सामान भी बिखरे हुए मिले।

    प्रशासन का कहना है कि यह घटना न केवल अनुशासनहीनता का गंभीर उदाहरण है बल्कि शैक्षणिक संस्थान की मर्यादा को भी ठेस पहुंचाने वाली है। इसी के चलते प्रारंभिक कार्रवाई के तहत छात्रों के रिजल्ट रोकने और प्लेसमेंट प्रक्रिया को अस्थायी रूप से होल्ड करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही शासकीय संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए जुर्माना लगाने की भी तैयारी की जा रही है।

    विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की पूरी जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही छात्रों के अभिभावकों को भी इस घटना की जानकारी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि स्थिति की गंभीरता को समझा जा सके।

    इस घटना ने एक बार फिर कॉलेज परिसरों में अनुशासन, नशे के प्रभाव और जिम्मेदार व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर छात्र अपने शैक्षणिक जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव पर हैं, वहीं इस तरह की घटनाएं उनके भविष्य पर भी गहरा असर डाल सकती हैं। प्रशासन अब पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटा हुआ है और आगे की कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।

  • भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आज, इंदौर-धार में हाई अलर्ट

    भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आज, इंदौर-धार में हाई अलर्ट


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर आज हाईकोर्ट की इंदौर बेंच का अहम फैसला आ सकता है। वर्षों से चल रहे इस संवेदनशील मामले में कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया गया है।

    फैसले को देखते हुए इंदौर और धार जिले में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। खास बात यह है कि आज शुक्रवार का दिन है और इसी दिन भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज अदा की जाती है, जिससे स्थिति की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।

    धार शहर में करीब 1200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को 12 लेयर में बांटा गया है, जिसमें रिजर्व पुलिस फोर्स और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी शामिल किया गया है। पुलिस कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जा रही है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात है।

    भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में कलेक्टर और एसपी ने खुद सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया है। सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट या अफवाह को फैलने से रोका जा सके।

    यह विवाद 2022 में दायर याचिकाओं के बाद और अधिक चर्चा में आया था, जिसमें भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर अदालत में मांगें रखी गई थीं। हिंदू पक्ष ने इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर बताते हुए नियमित पूजा का अधिकार मांगा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे लंबे समय से उपयोग में रही मस्जिद बताता है।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी इस मामले में 98 दिन का वैज्ञानिक सर्वे किया था, जिसकी रिपोर्ट को लेकर दोनों पक्षों में अलग-अलग दावे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले कुछ व्यवस्थाओं को लेकर अनुमति दी थी, जिसके बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया।

    फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था सर्वोपरि है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयार हैं।

  • MP: इंदौर में BJP नेता को थप्पड़ मारना महिला पुलिस अधिकारी को पड़ा महंगा, हंगामे के बाद 3 सस्पेंड

    MP: इंदौर में BJP नेता को थप्पड़ मारना महिला पुलिस अधिकारी को पड़ा महंगा, हंगामे के बाद 3 सस्पेंड


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के कार्यकर्ताओं ने एक व्यस्त चौराहे को जाम कर दिया. यह विरोध प्रदर्शन तब हुआ जब एक महिला ट्रैफिक पुलिस अधिकारी (Female Traffic Police Officer) ने कथित तौर पर पार्टी के एक नेता को थप्पड़ मार दिया था. इस घटना के बाद पुलिस बल के तीन कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

    BJP नेता वीरेंद्र शेंडगे ने पत्रकारों को बताया कि यह घटना तब हुई जब वह अपने दोपहिया वाहन पर थे और महू नाका चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल के हरे से लाल होने से पहले उसे पार करने की कोशिश कर रहे थे। शेंडगे ने दावा किया कि एक महिला पुलिस अधिकारी ने उन पर गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन पर बात करने का आरोप लगाते हुए उन्हें थप्पड़ मार दिया।

    शेंडगे, जो यहां BJP के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 4 के प्रभारी हैं, ने कहा, “मैं अपने मोबाइल फोन पर बात नहीं कर रहा था. जब मैंने अपनी बात रखने की कोशिश की और थप्पड़ मारे जाने पर आपत्ति जताई, तो ट्रैफिक पुलिस कर्मियों ने मेरे साथ दुर्व्यवहार किया.” बाद में, BJP कार्यकर्ताओं ने शेंडगे के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस के खिलाफ नारे लगाए, जिसमें उन्होंने पुलिस पर मनमानी करने का आरोप लगाया. कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं को सड़क जाम करने के लिए पुलिस बैरिकेड्स का इस्तेमाल करते हुए भी देखा गया।

    सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) सुप्रिया चौधरी ने बताया कि ट्रैफिक पुलिस थाने की प्रभारी राधा यादव को कथित लापरवाही के आरोप में फील्ड ड्यूटी से हटाकर पुलिस उपायुक्त (DCP) कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है, जबकि सूबेदार (सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी) लक्ष्मी धार्वे और कांस्टेबल शेखर गावड़े को निलंबित कर दिया गया है। ACP शिवेंदु जोशी ने बताया कि घटना के संबंध में CCTV फुटेज की जांच की जा रही है और विस्तृत जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • MP: इंदौर में रोड पर लावारिश पड़े मिले 3 बैगों से 2.83 करोड़ रुपये कैश बरामद, जांच में जुटी पुलिस

    MP: इंदौर में रोड पर लावारिश पड़े मिले 3 बैगों से 2.83 करोड़ रुपये कैश बरामद, जांच में जुटी पुलिस


    इंदौर।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में इंदौर (Indore) के सांवेर-उज्जैन रोड (Sanwer-Ujjain Road) पर गुरुवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सड़क किनारे पड़े तीन लावारिस बैगों (Unclaimed bags) से करोड़ों रुपये की संदिग्ध नकदी बरामद हुई. बैगों में 500 रुपये के नोटों की सैकड़ों गड्डियां मिलीं, लेकिन जांच में सामने आया कि कई गड्डियों में असली नोटों के साथ नकली नोट और रंगीन कागज भी रखे गए थे।

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी. दरअसल इंदौर जिले के सांवेर-उज्जैन रोड स्थित भुट्टा चौराहे के पास गुरुवार सुबह एक संदिग्ध मामला सामने आया. सड़क किनारे पेड़ के नीचे रखे तीन लावारिस बैगों को देखकर स्थानीय किसान को शक हुआ, जिसके बाद उसने पुलिस को सूचना दी।

    सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बैगों को कब्जे में लेकर जांच शुरू की. जब बैग खोले गए तो उनके अंदर 500 रुपये के नोटों की बड़ी संख्या में गड्डियां मिलीं. शुरुआती अनुमान के मुताबिक कुल रकम करीब 2 करोड़ 83 लाख रुपये बताई जा रही है. हालांकि जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गड्डियों के ऊपर रखे कुछ नोट असली दिखाई दे रहे थे, लेकिन अंदर नकली नोटों के साथ रंगीन सादे कागज भरे गए थे।

    आशंका जताई जा रही है कि किसी बड़ी ठगी या अवैध लेनदेन के लिए इन बैगों को तैयार किया गया होगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आसपास के इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है. हाईवे और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बैग वहां कौन छोड़कर गया और इसके पीछे क्या मकसद था. फिलहाल पुलिस ने संदिग्ध नोटों को जब्त कर लिया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।