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  • इंदौर की महावीर कॉलोनी में पानी का संकट गहराया: दूषित जल से लोग बीमार, नर्मदा लाइन का अब भी इंतजार

    इंदौर की महावीर कॉलोनी में पानी का संकट गहराया: दूषित जल से लोग बीमार, नर्मदा लाइन का अब भी इंतजार


    मध्य प्रदेश । इंदौर के वार्ड क्रमांक-16 स्थित महावीर नगर में पेयजल संकट और दूषित पानी की समस्या एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। भागीरथपुरा जलकांड की यादें अभी लोगों के जहन से मिट भी नहीं पाई थीं कि अब महावीर नगर के रहवासियों को भी इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बोरिंग के पानी में सीवरेज मिलने की शिकायत सामने आने के बाद नगर निगम ने सरकारी बोरिंग बंद कर दी है, जिससे पूरे इलाके के लोग टैंकरों के भरोसे रहने को मजबूर हो गए हैं।

    महावीर नगर और आसपास की कॉलोनियों के लोग वर्षों से नर्मदा जलापूर्ति योजना का इंतजार कर रहे हैं। क्षेत्र में आज तक नर्मदा की पाइपलाइन नहीं पहुंच सकी है, जिसके कारण लोग बोरिंग और टैंकरों से मिलने वाले पानी पर निर्भर हैं। लेकिन अब जब बोरिंग का पानी भी दूषित होने लगा है, तो लोगों की चिंता और बढ़ गई है। रहवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।

    स्थानीय निवासी बसंत राव निकम बताते हैं कि पिछले 35 वर्षों से वे इस क्षेत्र में रह रहे हैं और अक्सर बोरिंग के पानी में गंदगी तथा सीवरेज की समस्या देखने को मिलती है। शिकायत के बाद निगम की टीम चैंबर साफ कर देती है, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। उनका कहना है कि वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।

    इसी तरह क्षेत्र की अन्य महिलाओं ने भी अपनी परेशानी साझा की। सीमा साखले और ममता मालवीय का कहना है कि वे कई वर्षों से यहां रह रही हैं, लेकिन आज तक नर्मदा जलापूर्ति का लाभ नहीं मिल पाया। ऐसे में उन्हें मजबूरी में बोरिंग का पानी इस्तेमाल करना पड़ता है, जो कई बार दूषित निकलता है।

    इस बीच एक मासूम बच्ची की तबीयत बिगड़ने के बाद मामला और गंभीर हो गया। बच्ची के पिता नागेश्वर खालोटिया का दावा है कि दूषित पानी के सेवन के कारण उनकी बेटी अविका खालोटिया गंभीर रूप से बीमार हो गई। उसे लगातार दस्त, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होने लगीं। इंदौर के अस्पतालों में उपचार के बाद भी जब स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो परिवार उसे बेहतर इलाज के लिए अहमदाबाद लेकर गया। चिकित्सकों ने संक्रमण की पुष्टि की और दूषित भोजन या पानी को संभावित कारण बताया।

    रहवासियों का कहना है कि केवल एक बच्ची ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोग भी उल्टी-दस्त और पेट संबंधी बीमारियों से प्रभावित हुए हैं। इससे पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। लोगों को डर है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित बोरिंग को बंद कर दिया गया है और नई बोरिंग कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। साथ ही अमृत-2 योजना के तहत 30 लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकी और नई जलापूर्ति व्यवस्था विकसित करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार आगामी कुछ महीनों में इस दिशा में काम शुरू हो सकता है, जिससे क्षेत्र की 30 से 40 कॉलोनियों को लाभ मिलेगा।

    फिलहाल महावीर नगर के लोग स्वच्छ पानी और नर्मदा लाइन के इंतजार में हैं। उनका कहना है कि विकास के दावों के बीच यदि लोगों को आज भी पीने के सुरक्षित पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

  • “साहब, ये मुझे मार डालेगा…” ट्रस्टी की चेतावनी हुई सच, एक महीने बाद चौकीदार ने ली जान

    “साहब, ये मुझे मार डालेगा…” ट्रस्टी की चेतावनी हुई सच, एक महीने बाद चौकीदार ने ली जान


    मध्य प्रदेश । इंदौर के अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र स्थित 150 साल पुराने बारामत्था बगीची शिव-हनुमान मंदिर के ट्रस्टी कैलाश चंद्र मोदी की निर्मम हत्या ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। 70 वर्षीय कैलाश मोदी की मौत केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी का ऐसा मामला बन गई है, जिसमें पीड़ित ने अपनी जान को खतरा होने की आशंका पहले ही जाहिर कर दी थी। दुखद बात यह रही कि उनकी चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया और आखिरकार वही हुआ, जिसका डर उन्हें लगातार सता रहा था।

    परिजनों के अनुसार कैलाश मोदी पिछले कई महीनों से मंदिर परिसर के चौकीदार मुकेश शर्मा की गतिविधियों से परेशान थे। उन्होंने पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर, एसीपी और थाना प्रभारी सहित कई अधिकारियों को लिखित शिकायतें देकर बताया था कि आरोपी मंदिर परिसर में अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहा है और विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां देता है। 13 मई को दिए गए आवेदन में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि आरोपी कभी भी उनकी हत्या कर सकता है।

    बताया जाता है कि मुकेश शर्मा पर पहले से ही मारपीट, धमकी, अवैध हथियार रखने और अवैध वसूली जैसे पांच आपराधिक मामले दर्ज थे। इसके बावजूद वह लगातार खुलेआम घूमता रहा। पुलिस ने उसके खिलाफ बाउंड ओवर और जिलाबदर की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन वह कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। इसी बीच आरोपी की गुंडागर्दी और बढ़ती गई।

    कैलाश मोदी ने केवल एक-दो नहीं, बल्कि करीब 40 शिकायतें विभिन्न विभागों को सौंपी थीं। उन्होंने मंदिर परिसर में शराबखोरी, जुआ-सट्टा, अवैध गतिविधियों और कब्जे के प्रयासों की जानकारी भी प्रशासन को दी थी। दिसंबर 2025 में आरोपी ने मंदिर परिसर में ही कैलाश मोदी पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। उस समय भी मामला दर्ज हुआ, लेकिन सख्त कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण रहा कि आरोपी के हौसले लगातार बुलंद होते गए।

    मंगलवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे आरोपी मुकेश शर्मा कथित तौर पर नशे की हालत में मंदिर पहुंचा। वहां किसी बात को लेकर विवाद हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के मुताबिक जब कैलाश मोदी ने उसे समझाने का प्रयास किया तो वह आक्रामक हो गया और डंडा लेकर उनके पीछे दौड़ पड़ा। जान बचाने के लिए मोदी पास स्थित गुरुद्वारे की ओर भागे, लेकिन आरोपी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। उसने ताबड़तोड़ डंडों से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया।

    घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें आरोपी लगातार बुजुर्ग ट्रस्टी पर हमला करता दिखाई दे रहा है। गंभीर रूप से घायल कैलाश मोदी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि पुलिस और प्रशासन ने समय रहते शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई की होती तो आज कैलाश मोदी जीवित होते।

    अब पुलिस हत्या के मामले की जांच कर रही है और मृतक द्वारा पहले की गई शिकायतों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। लेकिन यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि जब कोई नागरिक अपनी जान को खतरा बताते हुए बार-बार गुहार लगाता है, तब उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

  • सोसाइटी विवाद में पुलिस पर पक्षपात के आरोप: महिला बोली- FIR से आरक्षक का नाम हटाया, न्याय के लिए भटक रहा परिवार

    सोसाइटी विवाद में पुलिस पर पक्षपात के आरोप: महिला बोली- FIR से आरक्षक का नाम हटाया, न्याय के लिए भटक रहा परिवार

     
    इंदौर ; इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र स्थित गुलमार्ग परिसर हाउसिंग सोसाइटी में चल रहा विवाद अब केवल सोसाइटी प्रबंधन और वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोसाइटी की रहवासी सुलोचना शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे के साथ हुई मारपीट के मामले में एक पुलिस आरक्षक को बचाने के लिए एफआईआर में उसका नाम शामिल नहीं किया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि न्याय पाने के लिए वे थाने से लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

    महिला के अनुसार पूरा विवाद सोसाइटी के हैंडओवर, मेंटेनेंस फंड और कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर चल रहा है। उनका आरोप है कि सोसाइटी के फंड से करीब 15 लाख रुपए का गबन किया गया है और कुछ पदाधिकारी चार्ज हस्तांतरण से इसलिए बच रहे हैं ताकि कथित अनियमितताएं उजागर न हों। इसके अलावा नगर निगम की जमीन पर कथित अतिक्रमण और वहां धार्मिक संरचना स्थापित करने को लेकर भी विवाद बना हुआ है।

    पीड़िता का कहना है कि 8 जून की रात सोसाइटी परिसर में विवाद के दौरान उनके बेटे कार्तिक शर्मा ने केवल गाली-गलौज का विरोध किया था। इसके बाद कुछ लोगों ने उस पर लाठियों, लात-घूंसों से हमला कर दिया। परिवार का आरोप है कि हमले में कार्तिक गंभीर रूप से घायल हुआ और उसके गले से सोने की चेन भी गायब हो गई। घटना के बाद परिवार शिकायत लेकर कनाड़िया थाने पहुंचा, लेकिन रातभर इंतजार कराने के बाद रिपोर्ट दर्ज की गई।

    सबसे गंभीर आरोप यह है कि घटना में शामिल बताए जा रहे कनाड़िया थाने के आरक्षक नारायण जाट का नाम एफआईआर से हटा दिया गया। महिला का कहना है कि उन्होंने पुलिस को कई नाम बताए थे, लेकिन रिपोर्ट में केवल कुछ लोगों के नाम शामिल किए गए। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस विभाग से जुड़े होने के कारण आरक्षक को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

    सुलोचना शर्मा ने थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब वे कार्रवाई की मांग लेकर थाने पहुंचीं तो उन्हें केवल जांच का आश्वासन दिया गया। दूसरी ओर कनाड़िया थाना प्रभारी सहर्ष यादव का कहना है कि मामले में दर्ज शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है और जिस आरक्षक पर आरोप लगाए गए हैं, उसकी भूमिका की भी जांच जारी है। पुलिस का दावा है कि महिला द्वारा बताए गए सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

    उधर, आरक्षक नारायण जाट ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वह घटना के समय मौके पर मौजूद थे, लेकिन किसी प्रकार की मारपीट में शामिल नहीं थे। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी पहले सोसाइटी में सचिव पद पर थीं, जिसके कारण उनका नाम विवाद में घसीटा जा रहा है।

    इस पूरे मामले ने सोसाइटी के रहवासियों के बीच तनाव और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। पीड़ित परिवार ने पुलिस कमिश्नर और नगर निगम आयुक्त से हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • जॉइंट डायरेक्टर की संपत्तियों पर लोकायुक्त की नजर: सूदखोरी, चेक बाउंस और करोड़ों के निवेश की जांच तेज

    जॉइंट डायरेक्टर की संपत्तियों पर लोकायुक्त की नजर: सूदखोरी, चेक बाउंस और करोड़ों के निवेश की जांच तेज


    इंदौर इंदौर में महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के खिलाफ चल रही आय से अधिक संपत्ति की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। लोकायुक्त पुलिस की छापामार कार्रवाई के बाद अब ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, जिनसे जांच का दायरा और बढ़ सकता है। कंडवाल के परिवार के नाम पर करोड़ों रुपए की संपत्तियां, निवेश और व्यवसाय मिलने के साथ-साथ सूदखोरी और चेक बाउंस मामलों को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

    लोकायुक्त पुलिस ने हाल ही में कंडवाल के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान उनकी पत्नी शारदा कंडवाल, पुत्रवधु तनु और हर्षिता के नाम पर कई संपत्तियों और निवेश का पता चला। शुरुआती जांच में इन संपत्तियों का मूल्य करोड़ों रुपए में आंका गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय की तुलना में काफी अधिक हो सकती है।

    जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। जानकारी के अनुसार कंडवाल के पुत्र अभिषेक के नाम से वर्ष 2022 में रमेश मलकानी के खिलाफ चेक बाउंस के छह मामले दर्ज कराए गए थे। ये मामले न्यायालय तक पहुंचे और बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। हालांकि इन मामलों से जुड़े वित्तीय लेनदेन को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।

    सूत्रों के अनुसार जिन चेकों को लेकर मुकदमे दर्ज हुए थे, वे केसरबाग रोड स्थित एक संपत्ति के सौदे से जुड़े बताए जाते हैं। बाद में समझौते के तहत राशि प्राप्त होने के बाद मामला समाप्त कर दिया गया था। लेकिन जांच एजेंसियां अब यह जानने का प्रयास कर सकती हैं कि उस समय पढ़ाई कर रहे अभिषेक के पास इतनी बड़ी रकम कहां से आई और संपत्ति निवेश के लिए धन का स्रोत क्या था।

    जानकारों का कहना है कि यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि निवेश की राशि वास्तव में लक्ष्मी नारायण कंडवाल द्वारा उपलब्ध कराई गई थी, तो बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर दर्ज संपत्तियों की भी गहन जांच हो सकती है। लोकायुक्त टीम इस बात का भी परीक्षण कर सकती है कि कहीं परिवार के नाम का उपयोग कर संपत्तियां तो नहीं बनाई गईं।

    कंडवाल ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1986 में ग्राम सुनाला के माध्यमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में की थी। इसके बाद वे विभिन्न पदों पर पदोन्नत होते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग में संयुक्त संचालक के पद तक पहुंचे। नौकरी के दौरान उनकी पदस्थापना नीमच, खरगोन, उज्जैन, जबलपुर, भोपाल, रीवा सहित कई जिलों में रही।

    लोकायुक्त जांच में यह भी सामने आया है कि उनके पुत्र अभिषेक और पवन के नाम पर एक सुपर मार्केट संचालित है, जिसमें लाखों रुपए का निवेश किया गया है। इसके अलावा एक आधुनिक और आलीशान जिम की जानकारी भी सामने आई है, जहां अत्याधुनिक फिटनेस उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन निवेशों और व्यवसायों के वित्तीय स्रोतों की भी जांच की जा रही है।

    लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। सभी संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और वित्तीय लेनदेन का विस्तृत मूल्यांकन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट राज्य शासन को भेजी जाएगी। साथ ही विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को भी पत्र भेजा जा सकता है। इस मामले ने प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है और अब सभी की नजर लोकायुक्त की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

  • शराब पार्टी बनी मौत की वजह: दोस्त ने बोतल और पानी की मोटर से किया हमला, युवक की मौत

    शराब पार्टी बनी मौत की वजह: दोस्त ने बोतल और पानी की मोटर से किया हमला, युवक की मौत


    मध्य प्रदेश; मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में एक बार फिर शराब के नशे में हुई हिंसक वारदात ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। एरोड्रम थाना क्षेत्र की पंचवटी कॉलोनी में मंगलवार दोपहर शराब पीने के दौरान दो दोस्तों के बीच हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि एक युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी। आरोपी ने पहले शराब की बोतल से हमला किया और फिर पास में रखी पानी भरने की मोटर उठाकर दोस्त के सिर पर दे मारी। गंभीर चोटों के कारण युवक की मौके पर ही मौत हो गई।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान जितेन्द्र पुत्र फूलचंद मीणा के रूप में हुई है। वह एक निजी बैंक में कार्यरत था और पंचवटी कॉलोनी क्षेत्र में रहता था। बताया जा रहा है कि मंगलवार दोपहर करीब एक बजे जितेन्द्र अपने दोस्त धर्मेंद्र पंवार के साथ बैठकर शराब पी रहा था। दोनों के बीच बातचीत के दौरान किसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। शुरुआत में यह सामान्य बहस थी, लेकिन कुछ ही देर में मामला हिंसक झड़प में बदल गया।

    प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार विवाद बढ़ने पर धर्मेंद्र ने अपना आपा खो दिया। उसने पहले शराब की बोतल उठाकर जितेन्द्र पर हमला किया। इसके बाद भी उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ और उसने पास में रखी पानी भरने वाली मोटर को हथियार बना लिया। आरोपी ने मोटर से जितेन्द्र के सिर पर कई वार किए। सिर में गंभीर चोट लगने से वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा।

    घटना के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही एरोड्रम थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घायल युवक को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

    थाना प्रभारी वरेन्द्र कुशवाह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हत्या का कारण आपसी विवाद है, जो शराब पीने के दौरान हुआ था। आरोपी धर्मेंद्र पंवार घटना के बाद मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और जल्द गिरफ्तारी का दावा कर रही है।

    जानकारी के मुताबिक जितेन्द्र का निजी जीवन भी काफी संघर्षपूर्ण रहा था। उसकी पत्नी करीब सात वर्ष पहले उसे छोड़कर चली गई थी और वह अकेले रहकर नौकरी कर रहा था। परिवार और परिचितों के अनुसार वह शांत स्वभाव का व्यक्ति था। उसकी अचानक हुई मौत से परिजनों और परिचितों में शोक का माहौल है।

    यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि नशे की हालत में छोटे-छोटे विवाद भी किस तरह गंभीर अपराध का रूप ले सकते हैं। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की जाएगी।

  • मंदिर ट्रस्टी की बेरहमी से हत्या: शराब पीने से टोका तो चौकीदार ने डंडे से किए 31 वार, गुरुद्वारे में घुसकर भी नहीं छोड़ा

    मंदिर ट्रस्टी की बेरहमी से हत्या: शराब पीने से टोका तो चौकीदार ने डंडे से किए 31 वार, गुरुद्वारे में घुसकर भी नहीं छोड़ा


    इंदौर इंदौर शहर एक बार फिर सनसनीखेज हत्या की घटना से दहल उठा है। अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र में स्थित करीब 150 साल पुराने मंदिर के ट्रस्टी कैलाश मोदी (70) की मंदिर के चौकीदार ने बेरहमी से हत्या कर दी। आरोप है कि शराब पीने से रोकने और समझाइश देने पर चौकीदार मुकेश शर्मा इतना गुस्से में आ गया कि उसने बुजुर्ग ट्रस्टी पर डंडे से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हैरानी की बात यह है कि जान बचाने के लिए भाग रहे कैलाश मोदी का आरोपी ने पीछा किया और गुरुद्वारे के अंदर घुसकर भी उन पर हमला जारी रखा। पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसने इलाके में दहशत फैला दी है।

    पुलिस के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे मंदिर परिसर में यह खूनी वारदात हुई। बताया जा रहा है कि मंदिर का चौकीदार मुकेश शर्मा लंबे समय से शराब का आदी है और अक्सर नशे की हालत में मंदिर परिसर में विवाद करता था। मंदिर ट्रस्टी कैलाश मोदी उसे कई बार समझा चुके थे और उसके व्यवहार को लेकर लोगों की शिकायतें भी सामने आती रही थीं।

    घटना वाले दिन भी मुकेश नशे की हालत में मंदिर पहुंचा था। जब कैलाश मोदी ने उसे समझाने का प्रयास किया तो वह भड़क गया। उसने पास में रखा डंडा उठा लिया और मोदी पर हमला करने दौड़ा। अपनी जान बचाने के लिए मोदी वहां से भागे, लेकिन आरोपी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। कुछ दूरी पर उन्हें पकड़कर डंडे से लगातार वार करना शुरू कर दिया।

    गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैलाश मोदी किसी तरह खुद को बचाते हुए पास स्थित गुरुद्वारे तक पहुंच गए। उन्होंने अंदर जाकर गेट बंद करने की कोशिश की, लेकिन आरोपी वहां भी पहुंच गया। सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रहा है कि आरोपी ने गुरुद्वारे के भीतर उन्हें जमीन पर गिराकर सिर, हाथ और पैरों पर लगातार डंडे बरसाए। जानकारी के मुताबिक आरोपी ने करीब 31 बार हमला किया, जिससे मोदी गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हमले के बाद आरोपी उन्हें लहूलुहान अवस्था में छोड़कर फरार हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन सिर में गंभीर चोट और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    गुरुद्वारे के वाइस प्रेसिडेंट दिलराज छाबड़ा ने बताया कि घटना के समय सुबह का सत्संग चल रहा था और लाउडस्पीकर की आवाज के कारण किसी को हमले की भनक नहीं लगी। उन्होंने बताया कि कैलाश मोदी लंबे समय से मंदिर की सेवा कर रहे थे और क्षेत्र में उनका सम्मान था।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी मुकेश शर्मा के खिलाफ पहले भी शिकायतें की जा चुकी थीं। उसके व्यवहार और नशे की आदत को लेकर प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया था, लेकिन समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं होने से यह दुखद घटना सामने आ गई।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर मामले की जांच जारी है। वहीं कैलाश मोदी की हत्या से पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।

  • इंदौर में दूषित पानी से हड़कंप: सीवरेज मिला पानी पीने से 10 लोग बीमार, निगम की जांच शुरू

    इंदौर में दूषित पानी से हड़कंप: सीवरेज मिला पानी पीने से 10 लोग बीमार, निगम की जांच शुरू


    इंदौर  इंदौर शहर में एक बार फिर दूषित पेयजल की समस्या ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। भागीरथपुरा क्षेत्र में सामने आए मामले के बाद अब वार्ड क्रमांक 16 के महावीर नगर में पीने के पानी में सीवरेज मिलने की शिकायत ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दूषित पानी पीने से अब तक करीब 10 लोग बीमार पड़ चुके हैं। प्रभावित लोगों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और अन्य पेट संबंधी समस्याओं के लक्षण देखे जा रहे हैं।

    स्थानीय रहवासियों का कहना है कि पिछले कई दिनों से उनके घरों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा था। उन्होंने इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से भी की थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण स्थिति गंभीर हो गई। लोगों का आरोप है कि यदि नगर निगम नियमित रूप से जल स्रोतों और पाइपलाइन की निगरानी करता तो इतनी बड़ी समस्या पैदा नहीं होती।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे और क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने रहवासियों से चर्चा कर स्थिति की जानकारी ली और पानी की सप्लाई व्यवस्था तथा बोरवेल की जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान यह आशंका जताई जा रही है कि इलाके के एकमात्र बोरवेल में सीवरेज का पानी मिल जाने से पूरा जल स्रोत दूषित हो गया, जिसके कारण गंदा पानी सीधे घरों तक पहुंचा।

    क्षेत्र में रहने वाले लोगों का कहना है कि पानी से तेज दुर्गंध आ रही थी और उसका रंग भी सामान्य नहीं था। कई परिवारों ने पानी का उपयोग बंद कर दिया, जबकि कुछ लोग अनजाने में उसी पानी का सेवन करते रहे, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई। बीमार लोगों का स्थानीय स्तर पर उपचार कराया जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी भी बढ़ा दी गई है।

    नगर निगम ने पानी के नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही दूषित पानी के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। फिलहाल प्रभावित क्षेत्र में जलापूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है और समस्या के स्थायी समाधान के लिए तकनीकी टीम को लगाया गया है।

    इस बीच नगर निगम के साथ-साथ एक एनजीओ की टीम भी मौके पर पहुंची है। टीम घर-घर जाकर जानकारी जुटा रही है कि कितने लोग बीमार हुए हैं और दूषित पानी का स्रोत कहां से आया। वहीं वार्ड की पार्षद सोनाली मुकेश धारकर भी मौके पर पहुंचीं और रहवासियों की समस्याएं सुनीं। जोनल अधिकारियों ने दावा किया है कि निगम की टीम लगातार काम कर रही है और जल्द ही समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के मौसम में जल स्रोतों के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में नागरिकों को सावधानी बरतते हुए पानी को उबालकर या फिल्टर करके ही पीना चाहिए। फिलहाल महावीर नगर के लोग सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

  • खजराना गणेश मंदिर में गर्भगृह का गेट होगा चौड़ा, ट्रांसपेरेंट ग्लास कवर के पीछे विराजे भगवान गणेश

    खजराना गणेश मंदिर में गर्भगृह का गेट होगा चौड़ा, ट्रांसपेरेंट ग्लास कवर के पीछे विराजे भगवान गणेश


    मध्यप्रदेश । इंदौर का प्रसिद्ध Khajrana Ganesh Temple देशभर के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र माना जाता है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त भगवान गणेश के दर्शन करने पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह के मुख्य प्रवेश द्वार के चौड़ीकरण का कार्य शुरू कर दिया है। इस दौरान भगवान गणेश की प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए विशेष स्टील और ट्रांसपेरेंट ग्लास से बने संरक्षित कवर में रखा गया है, जिससे निर्माण कार्य के दौरान धूल, मलबा या अन्य किसी प्रकार का प्रभाव प्रतिमा पर न पड़े।

    मंदिर प्रशासन के अनुसार यह कार्य खजराना गणेश मंदिर के मास्टर प्लान के तहत किया जा रहा है। गर्भगृह के प्रवेश द्वार की चौड़ाई बढ़ने से श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक सुगम होगी और एक समय में अधिक संख्या में भक्त भगवान के दर्शन कर सकेंगे। वर्तमान में भीड़ के दौरान दर्शन व्यवस्था प्रभावित होती है, जिसे सुधारने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

    निर्माण कार्य शुरू करने से पहले गर्भगृह के मुख्य द्वार और आसपास की दीवारों पर लगी लगभग 150 किलोग्राम चांदी को सावधानीपूर्वक हटाया गया था। मंदिर के पुजारी Ashok Bhatt के अनुसार निकाली गई चांदी को सुरक्षित रूप से ट्रेजरी में जमा कर दिया गया है। गेट चौड़ीकरण का काम पूरा होने के बाद इस चांदी को दोबारा उसी स्थान पर स्थापित किया जाएगा।

    पुजारी अशोक भट्ट ने बताया कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भवन की संरचनात्मक मजबूती की जांच कराई गई थी। इसके लिए SGSITS की विशेषज्ञ टीम ने निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट के आधार पर ही चौड़ीकरण कार्य को मंजूरी दी गई। अनुमान है कि इस कार्य को पूरा होने में एक सप्ताह या उससे अधिक समय लग सकता है।

    मंदिर प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि निर्माण कार्य के कारण श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसी वजह से अधिकांश काम रात के समय किया जा रहा है, जबकि दिन में दर्शन व्यवस्था सामान्य रूप से संचालित की जा रही है।

    गर्भगृह के मुख्य द्वार के बाद मंदिर परिसर में स्थित सभा मंडप में भी बदलाव किए जाएंगे। मंदिर प्रशासन की योजना सभा मंडप को लगभग दो से ढाई फीट नीचे करने की है। वर्तमान में भीड़ बढ़ने पर पीछे खड़े श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन करने में कठिनाई होती है। मंडप को नीचे करने से दूर खड़े भक्त भी आसानी से भगवान गणेश के दर्शन कर सकेंगे।

    इसके अलावा भविष्य में दर्शन हॉल के विकास कार्य भी किए जाएंगे। मंदिर प्रशासन का मानना है कि आगामी Simhastha और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु खजराना गणेश मंदिर पहुंच सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं।

  • इंदौर में दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की मौत, सड़क हादसे में ठेकेदार ने तोड़ा दम

    इंदौर में दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की मौत, सड़क हादसे में ठेकेदार ने तोड़ा दम


    मध्यप्रदेश । इंदौर में रविवार को दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई। एक ओर तेजाजी नगर क्षेत्र में रहने वाले एक पेंटिंग ठेकेदार की सड़क दुर्घटना में जान चली गई, वहीं दूसरी ओर पलासिया इलाके में एक निजी बीमा कंपनी के कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। दोनों मामलों में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    पहला मामला तेजाजी नगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार शक्करखेड़ी निवासी Pappu Kewat को गंभीर हालत में एमवाय अस्पताल लाया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह पेंटिंग ठेकेदारी का काम करते थे और रविवार को एक निर्माण स्थल का निरीक्षण करने निपानिया क्षेत्र गए थे।

    परिजनों के मुताबिक, रविवार को अवकाश होने के कारण वह अपने काम से संबंधित एक स्थान देखने गए थे। वहां से लौटते समय किसी अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे के बाद वे सड़क पर घायल अवस्था में पड़े रहे। बाद में राहगीरों की नजर उन पर पड़ी और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    परिवार के सदस्य अंकित ने बताया कि मृतक अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। उनके तीन बच्चे हैं, जिनमें से दो की शादी हो चुकी है। माता-पिता गांव में रहते हैं। अचानक हुई इस घटना से परिवार गहरे सदमे में है। पुलिस आसपास के क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की मदद से अज्ञात वाहन की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

    उधर, दूसरी घटना पलासिया क्षेत्र से सामने आई है, जहां एक निजी बीमा कंपनी में कार्यरत कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, Ramchandra निवासी ओल्ड पलासिया को रविवार रात उनके परिचित एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    परिजनों ने पुलिस को बताया कि रविवार शाम वह सामान्य रूप से घर पर थे। कुछ समय बाद वह बाथरूम गए और बाहर आने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। बताया गया कि उन्हें अचानक उल्टियां शुरू हो गईं। स्थिति गंभीर होने पर परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उपचार शुरू होने से पहले ही उनकी मौत हो गई।

    पुलिस के अनुसार, मृतक एक निजी बीमा कंपनी में कार्यरत थे। उनका एक बेटा जबलपुर एयरपोर्ट पर नौकरी करता है, जबकि दूसरा बेटा इंदौर में रहता है। परिवार मूल रूप से छतरपुर का रहने वाला है।

    पलासिया पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।

    दोनों घटनाओं के बाद संबंधित थाना पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए जांच आगे बढ़ा दी है। एक मामले में सड़क हादसे के जिम्मेदार वाहन चालक की तलाश जारी है, जबकि दूसरे मामले में चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • काशवी और डॉ. अमन केस में जांच पर उठे सवाल, रिपोर्ट और बयानों के बाद भी कार्रवाई नहीं

    काशवी और डॉ. अमन केस में जांच पर उठे सवाल, रिपोर्ट और बयानों के बाद भी कार्रवाई नहीं


    मध्यप्रदेश । इंदौर में हाल ही में सामने आए दो संवेदनशील मामलों ने पुलिस और संबंधित विभागों की जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर दो वर्षीय काशवी यादव की संदिग्ध मौत का मामला है, तो दूसरी ओर मेडिकल छात्र Aman Patel की आत्महत्या का प्रकरण। दोनों मामलों में परिजनों और संबंधित पक्षों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के बावजूद अब तक कोई स्पष्ट निष्कर्ष या कार्रवाई सामने नहीं आई है।

    दो वर्षीय काशवी यादव की मौत के मामले में उसके माता-पिता निशा और नितिन यादव ने पुलिस को दिए बयानों में आरोप लगाया है कि भोलाराम उस्ताद मार्ग स्थित एक निजी क्लिनिक में उपचार के दौरान लापरवाही हुई, जिसके कारण उनकी बेटी की हालत बिगड़ी। परिजनों के अनुसार, बच्ची को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद क्लिनिक ले जाया गया था, जहां उपचार के बाद उसकी तबीयत लगातार खराब होती गई। बाद में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अनुमति के बाद बच्ची के शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया था। परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को सौंपे जाने और प्रमुख बयानों के दर्ज होने के बाद भी जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। उनका सवाल है कि यदि जांच में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही नहीं मिली है तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही, और यदि लापरवाही के संकेत हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

    इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। परिजनों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि संबंधित क्लिनिक की कार्यप्रणाली, उपचार प्रक्रिया और चिकित्सा मानकों के पालन की जांच के संबंध में अब तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी बेटी वापस नहीं आ सकती, लेकिन यदि किसी स्तर पर गलती हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

    इसी तरह मेडिकल छात्र Aman Patel की आत्महत्या का मामला भी चर्चा में बना हुआ है। 17 मई को उनका शव एमजीएम मेडिकल कॉलेज हॉस्टल परिसर में मिला था। जांच के दौरान पुलिस ने परिजनों, दोस्तों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए हैं। परिजनों ने पुलिस को बताया है कि छात्र हाल के दिनों में मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। उन्होंने कुछ व्यक्तिगत और सामाजिक परिस्थितियों को भी जांच का हिस्सा बनाने की मांग की है।

    परिवार का कहना है कि घटना से पहले की बातचीत, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्य जांच के महत्वपूर्ण बिंदु हैं। हालांकि पुलिस द्वारा जांच जारी होने की बात कही जा रही है, लेकिन अब तक किसी निष्कर्ष या आगे की कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे परिवार और परिचितों में असंतोष बढ़ रहा है।

    दोनों मामलों में पुलिस का कहना है कि जांच प्रक्रिया जारी है और सभी उपलब्ध साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा बयानों का परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही किसी प्रकार के निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

    फिलहाल दोनों परिवार न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि समयबद्ध और पारदर्शी जांच ही इन मामलों की सच्चाई सामने ला सकती है तथा समाज में विश्वास कायम रख सकती है।