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  • माइग्रेन के इलाज के बीच होटल में मिला महिला का शव, आत्महत्या के कारणों की तलाश में जुटी पुलिस

    माइग्रेन के इलाज के बीच होटल में मिला महिला का शव, आत्महत्या के कारणों की तलाश में जुटी पुलिस


    मध्य प्रदेश:
    के इंदौर शहर में इलाज के लिए आई एक महिला की होटल के कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने जहर सेवन कर आत्महत्या की आशंका जताई है। हालांकि घटना के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और महिला के मोबाइल सहित अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, खंडवा निवासी 26 वर्षीय महिला माइग्रेन की समस्या से लंबे समय से परेशान थी और उपचार के लिए समय-समय पर इंदौर आती रहती थी। इसी सिलसिले में वह इस बार भी इंदौर पहुंची और विजय नगर क्षेत्र स्थित एक होटल में कमरा लेकर ठहरी थी। दिनभर इलाज के बाद वह अपने कमरे में लौट गई थी।

    देर शाम होटल कर्मचारियों को उस समय संदेह हुआ जब काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला। कई बार आवाज देने और संपर्क करने की कोशिश के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर होटल प्रबंधन ने मास्टर चाबी की मदद से कमरा खोला। अंदर महिला अचेत अवस्था में बिस्तर पर मिली। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

    पुलिस ने महिला को अस्पताल भिजवाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और घटना की सूचना परिजनों को दी गई। परिजन खंडवा से इंदौर पहुंचे, जिनसे पुलिस ने घटना के संबंध में पूछताछ भी की।

    प्रारंभिक जांच के दौरान पुलिस को कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। ऐसे में आत्महत्या के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस ने महिला का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उसकी कॉल डिटेल, मैसेज तथा अन्य डिजिटल गतिविधियों की जांच की जा रही है, ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।

    परिजनों ने पुलिस को बताया कि महिला लंबे समय से माइग्रेन की समस्या से परेशान थी और उसका उपचार चल रहा था। हालांकि उन्होंने किसी पारिवारिक विवाद या अन्य कारण की जानकारी होने से इनकार किया है। पुलिस बीमारी, मानसिक स्थिति और अन्य संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है।

    जांच अधिकारी होटल के कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रहे हैं। होटल में प्रवेश और निकास से जुड़े रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि महिला के होटल पहुंचने के बाद क्या घटनाक्रम रहा और क्या किसी अन्य व्यक्ति का उससे संपर्क हुआ था।

    पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही महिला की मौत के वास्तविक कारणों के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।

  • इंदौर के रोबोट चौराहे की बदलेगी तस्वीर, 800 पेड़ों का होगा ट्रांसप्लांट, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

    इंदौर के रोबोट चौराहे की बदलेगी तस्वीर, 800 पेड़ों का होगा ट्रांसप्लांट, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत


    इंदौर इंदौर के सबसे व्यस्त ट्रैफिक जंक्शनों में शामिल रोबोट चौराहे की तस्वीर जल्द बदलने वाली है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव और घंटों लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए यहां दोनों ओर चार-चार लेन का आधुनिक फ्लायओवर बनाया जाएगा। इस परियोजना के लिए चौराहे के दोनों तरफ मौजूद लगभग 150-150 मीटर लंबे ग्रीन बेल्ट का उपयोग किया जाएगा। हालांकि इस फैसले से इलाके की घनी हरियाली प्रभावित होगी, लेकिन इंदौर विकास प्राधिकरण का कहना है कि एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा और 800 से अधिक पेड़ों को दूसरी जगह ट्रांसप्लांट किया जाएगा।

    रोबोट चौराहे का यह ग्रीन बेल्ट वर्षों की मेहनत से तैयार हुआ है। बारिश के मौसम में यह क्षेत्र मिनी फॉरेस्ट जैसा दिखाई देता है और गर्मियों में राहगीरों को छांव उपलब्ध कराता है। स्थानीय रहवासियों ने स्वयं पौधे लगाकर इस हरित क्षेत्र को विकसित किया था, जो अब बड़े और घने पेड़ों में बदल चुके हैं। फ्लायओवर निर्माण के कारण यह हरियाली अस्थायी रूप से समाप्त होती नजर आएगी, लेकिन अधिकारियों का दावा है कि पेड़ों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर संरक्षित किया जाएगा।

    दरअसल, खजराना चौराहे पर फ्लायओवर बनने के बाद वहां से गुजरने वाले वाहन बिना रुके सीधे रोबोट चौराहे तक पहुंच रहे हैं। इससे इस चौराहे पर ट्रैफिक का दबाव कई गुना बढ़ गया है। पीक आवर्स में लंबी कतारें लग जाती हैं और वाहन चालकों को दो से तीन बार सिग्नल बदलने का इंतजार करना पड़ता है। पहले खजराना चौराहे पर ट्रैफिक रुक जाने से दबाव बंट जाता था, लेकिन अब रोबोट चौराहा शहर का नया ट्रैफिक बॉटलनेक बन गया है।

    इंदौर विकास प्राधिकरण ने फ्लायओवर परियोजना का फिजिबिलिटी सर्वे पूरा कर लिया है और प्रारंभिक डिजाइन भी तैयार कर ली है। प्रस्ताव के अनुसार खजराना फ्लायओवर की तर्ज पर यहां भी दोनों दिशाओं में चार-चार लेन का अलग-अलग स्ट्रक्चर बनाया जाएगा। इसके लिए करीब 150 मीटर लंबी और 30 मीटर से अधिक चौड़ी ग्रीन बेल्ट की जमीन का उपयोग किया जाएगा।

    आईडीए के अधिकारियों का कहना है कि परियोजना शुरू होने से पहले सुपर कॉरिडोर स्थित प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं में पेड़ों के लिए स्थान और गड्ढे तैयार किए जाएंगे। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से सभी पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन किया जाएगा, ताकि पर्यावरणीय नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।

    हालांकि शहर में इससे पहले भी कई बड़े फ्लायओवर निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ प्रभावित हुए हैं। फूटी कोठी, आईटी पार्क, मूसाखेड़ी, पीपल्याहाना, बंगाली और खजराना फ्लायओवर परियोजनाओं के दौरान 10 हजार से अधिक पेड़ हटाए जा चुके हैं। जिन पेड़ों को दूसरी जगह लगाया गया था, उन्हें नए वातावरण में दोबारा विकसित होने में एक से दो वर्ष का समय लगा था।

    अब रोबोट चौराहे का यह फ्लायओवर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुगम बनाने की दिशा में अहम परियोजना माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इसके पूरा होने के बाद रिंग रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और रोजाना हजारों वाहन चालकों को जाम से राहत मिलेगी।

  • NEET आंदोलन के समर्थन के बाद बढ़ा सियासी विवाद, कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप- पुलिस ने 10 बार बदलवाया बयान

    NEET आंदोलन के समर्थन के बाद बढ़ा सियासी विवाद, कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप- पुलिस ने 10 बार बदलवाया बयान


    इंदौर इंदौर में NEET परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलन के समर्थन को लेकर कांग्रेस और पुलिस प्रशासन के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे से गुरुवार को पंढरीनाथ थाने में करीब पांच घंटे तक पूछताछ की गई। इस दौरान उन्हें लंबे समय तक थाने में बैठाए रखने की खबर फैलते ही पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा सहित कई कांग्रेस नेता और समर्थक थाने पहुंच गए। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जमा होने से थाने के बाहर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की। बाद में पुलिस ने चौकसे को जाने की अनुमति दे दी।

    थाने से बाहर आने के बाद चिंटू चौकसे ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि कांग्रेस ने टंट्या भील चौराहे पर NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया था और इसी वजह से उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि थाने पहुंचने के बाद पुलिस ने कई घंटे तक उन्हें बैठाए रखा और बयान में बार-बार संशोधन कराया। उनके अनुसार वहां मौजूद पुलिसकर्मी केवल वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन कर रहे थे और पूरा घटनाक्रम पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर हुआ।

    चौकसे ने दावा किया कि उनके बयान में लगभग दस बार संशोधन कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार बयान की भाषा और उसमें लिखी गई बातों को बदलने का दबाव बनाया गया। उनके मुताबिक यह केवल एक व्यक्ति को परेशान करने का मामला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि जो भी जनता की आवाज उठाता है या छात्र, किसान और आम लोगों के आंदोलनों का समर्थन करता है, उसे प्रशासनिक दबाव के जरिए चुप कराने का प्रयास किया जा रहा है।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी नेता राहुल गांधी के आह्वान पर कांग्रेस देशभर में छात्रों के समर्थन में खड़ी है और इंदौर में भी पार्टी ने NEET अभ्यर्थियों के आंदोलन को समर्थन दिया था। उनका आरोप है कि जैसे ही प्रशासन को कांग्रेस की सक्रिय भूमिका की जानकारी मिली, छह महीने पुराने मामले में उन्हें नोटिस भेज दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।

    चौकसे ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पहले कांग्रेस कार्यालय पर हमला हुआ, पत्थरबाजी हुई और कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हुए, लेकिन पुलिस ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की जबकि भाजपा से जुड़े लोगों के खिलाफ अज्ञात आरोपियों के रूप में मामला दर्ज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस के माध्यम से विपक्षी नेताओं को परेशान कर रही है और आंदोलनों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

    कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। चिंटू चौकसे ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में आने वाले दिनों में इंदौर पुलिस के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और राजनीतिक विरोध की आवाज को दबाने के किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा।

    हालांकि इस मामले में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में कांग्रेस के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

  • अवैध बैनर पोस्टरों पर कार्रवाई अधूरी, कलेक्टोरेट के सामने ही नियमों की उड़ रही धज्जियां, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

    अवैध बैनर पोस्टरों पर कार्रवाई अधूरी, कलेक्टोरेट के सामने ही नियमों की उड़ रही धज्जियां, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल


    इंदौर । हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इंदौर शहर में अवैध राजनीतिक धार्मिक और सामाजिक बैनर पोस्टरों पर कार्रवाई अधूरी नजर आ रही है। आदेश के तीसरे दिन भी शहर के प्रमुख मार्गों और सरकारी कार्यालयों के बाहर बड़ी संख्या में अवैध होर्डिंग्स और पोस्टर लगे दिखाई दिए। सबसे ज्यादा चर्चा कलेक्टोरेट परिसर के बाहर बने विशाल प्रवेश द्वार की हो रही है जो जिम्मेदार अधिकारियों की नजरों से अब तक ओझल बना हुआ है।

    कलेक्टोरेट के सामने बना यह बड़ा प्रवेश द्वार ऐसे स्थान पर स्थित है जहां से रोजाना कलेक्टर सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी गुजरते हैं। इसके बावजूद अब तक इसे हटाने की कोई कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यालयों के सामने ही नियमों का पालन नहीं होगा तो शहरभर में अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    नगर निगम की ओर से दावा किया गया है कि शहरभर से अब तक करीब एक हजार अवैध बैनर पोस्टर हटाए जा चुके हैं और अभियान लगातार जारी है। बुधवार को भी कई इलाकों में कार्रवाई कर अवैध पोस्टर और बैनर हटाए गए। हालांकि शहर के कई प्रमुख मार्गों पर अब भी बड़ी संख्या में राजनीतिक धार्मिक और सामाजिक आयोजनों से जुड़े पोस्टर और होर्डिंग्स लगे हुए दिखाई दिए।

    एबी रोड और एमजी रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर भी यूनीपोल मिनी पोल और लॉलीपॉप पोल पर बड़ी संख्या में बैनर पोस्टर लगे मिले। इनमें राजनीतिक कार्यक्रमों धार्मिक आयोजनों और सामाजिक गतिविधियों के प्रचार संबंधी सामग्री शामिल थी। बताया जा रहा है कि इनमें से कई होर्डिंग्स के लिए नगर निगम में निर्धारित शुल्क भी जमा नहीं कराया गया है।

    इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब शहरभर में अवैध होर्डिंग्स हटाने का अभियान चलाया जा रहा है तो सरकारी कार्यालयों के बाहर लगे बैनर पोस्टरों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। कलेक्टोरेट जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र के बाहर अवैध प्रवेश द्वार और पोस्टरों का बने रहना अभियान की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है।

    शहर के विभिन्न इलाकों में भी हालात लगभग एक जैसे हैं। कई स्थानों पर धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के बैनर अब भी सार्वजनिक स्थलों पर लगे हुए हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि हाईकोर्ट के आदेश का पूरी गंभीरता से पालन कराया जाए तो अभियान की शुरुआत सबसे पहले सरकारी परिसरों और प्रमुख प्रशासनिक भवनों के बाहर से होनी चाहिए।

    अब लोगों की नजरें नगर निगम और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी सरकारी परिसरों के बाहर लगे अवैध होर्डिंग्स और प्रवेश द्वारों पर भी समान रूप से कार्रवाई करते हैं या फिर अभियान केवल चुनिंदा स्थानों तक ही सीमित रह जाता है।

  • बस की टक्कर से ऑटो चालक की मौत करंट लगने से युवक ने तोड़ा दम फूड डिलीवरी बॉय ने उठाया आत्मघाती कदम

    बस की टक्कर से ऑटो चालक की मौत करंट लगने से युवक ने तोड़ा दम फूड डिलीवरी बॉय ने उठाया आत्मघाती कदम


    इंदौर । इंदौर में बुधवार रात और गुरुवार सुबह अलग-अलग इलाकों में हुई तीन दर्दनाक घटनाओं ने शहर को झकझोर दिया। एक ओर सड़क हादसे में ऑटो चालक की मौत हो गई तो दूसरी ओर पानी की मोटर चालू करते समय करंट लगने से एक युवक ने दम तोड़ दिया। वहीं लसूड़िया क्षेत्र में एक फूड डिलीवरी बॉय का शव फंदे पर लटका मिला। पुलिस ने तीनों मामलों में जांच शुरू कर दी है।

    पहली घटना तिलक नगर थाना क्षेत्र की है जहां निजी ट्रेवल्स की बस की टक्कर से 24 वर्षीय राजा गोयल की मौत हो गई। राजा अपने दोस्त मांझी के साथ बाइक से पिपल्याहाना स्थित एक दुकान पर सामान लेने गया था। देर रात लौटते समय तेज रफ्तार बस ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टरों ने राजा को मृत घोषित कर दिया जबकि उसके साथी का इलाज जारी है।

    मृतक राजा शांति नगर मूसाखेड़ी का रहने वाला था और पेशे से ऑटो चालक था। उसके परिवार में पत्नी ढाई साल का बेटा और बड़ा भाई हैं। पुलिस ने हादसे के बाद बस को जब्त कर चालक को हिरासत में ले लिया है। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

    दूसरी घटना आजाद नगर थाना क्षेत्र के इंदिरा एकता नगर की है। यहां 25 वर्षीय वसीम अपने घर में पानी की मोटर चालू कर रहा था। इसी दौरान अचानक उसे तेज करंट लग गया और वह जमीन पर गिर पड़ा। आसपास के लोग और परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन चिकित्सक उसकी जान नहीं बचा सके।

    वसीम भी ऑटो चालक था और अपने परिवार का मुख्य सहारा माना जाता था। उसके परिवार में दो छोटे बच्चे भाई और बहन हैं। पुलिस ने मामले में आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है और बिजली के करंट लगने की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

    तीसरी घटना लसूड़िया थाना क्षेत्र की है जहां 22 वर्षीय रजनीश ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। रजनीश मूल रूप से कटनी जिले का रहने वाला था और करीब छह महीने पहले रोजगार की तलाश में इंदौर आया था। वह अपने बड़े भाई शुभम के साथ किराए के मकान में रहकर फूड डिलीवरी का काम करता था।

    बुधवार देर रात जब शुभम काम से वापस घर लौटा तो काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद मकान मालिक की मदद से कमरे का ताला तोड़ा गया। अंदर रजनीश का शव फंदे से लटका मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। ऐसे में आत्महत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस परिजनों और परिचितों से पूछताछ कर सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    इन तीनों घटनाओं ने अलग-अलग परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। सड़क सुरक्षा बिजली उपकरणों के सुरक्षित उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दे एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। पुलिस ने सभी मामलों में जांच जारी रखते हुए लोगों से सतर्कता बरतने और किसी भी तरह की परेशानी होने पर समय रहते मदद लेने की अपील की है।

  • आर्थिक संकट और मानसिक तनाव ने ली दो जिंदगियां इंदौर में मां बेटे की मौत ने झकझोर दिया पूरा शहर

    आर्थिक संकट और मानसिक तनाव ने ली दो जिंदगियां इंदौर में मां बेटे की मौत ने झकझोर दिया पूरा शहर


    इंदौर । इंदौर के परदेशीपुरा क्षेत्र से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है जहां आर्थिक तंगी और लंबे समय से मानसिक बीमारी से जूझ रहे मां और बेटे ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया था लेकिन इलाज के दौरान पहले बेटे और फिर मां की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है और एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य तथा आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पुलिस के अनुसार 62 वर्षीय इंदिरा और उनके 35 वर्षीय बेटे संजय मंगलवार दोपहर अपने घर से करीब 100 मीटर दूर स्थित एक बगीचे में पहुंचे थे। वहीं दोनों ने जहरीला पदार्थ खा लिया। कुछ समय बाद स्थानीय लोगों ने उन्हें बेसुध हालत में देखा और परिजनों को सूचना दी। सूचना मिलते ही दोनों को तत्काल एमवाय अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने उनका उपचार शुरू किया। इलाज के दौरान बुधवार शाम संजय ने दम तोड़ दिया जबकि गुरुवार सुबह इंदिरा की भी मौत हो गई।

    परदेशीपुरा थाना पुलिस के मुताबिक प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों ने अपनी इच्छा से जहरीला पदार्थ खाया था। अस्पताल में होश आने पर दिए गए शुरुआती बयान में भी मां और बेटे ने किसी पर आरोप नहीं लगाया और स्वयं जहर खाने की बात स्वीकार की थी। पुलिस अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि की जा सके।

    परिजनों ने बताया कि इंदिरा के पति का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था। इसके बाद वह अपनी बहन और उनके परिवार के साथ रह रही थीं। परिवार ही उनके रहने खाने और अन्य जरूरतों का पूरा खर्च उठाता था। बेटा संजय भी किसी प्रकार का रोजगार नहीं करता था और लंबे समय से घर पर ही रह रहा था। आर्थिक परेशानियों के साथ दोनों मानसिक बीमारी से भी पीड़ित थे जिसके चलते उनका इलाज बाणगंगा स्थित मानसिक चिकित्सालय में चल रहा था।

    रिश्तेदारों के अनुसार मंगलवार दोपहर एक परिचित ने सूचना दी कि मां और बेटा घर के पास बने बगीचे में बेहोश पड़े हैं। जब परिवार मौके पर पहुंचा तब दोनों की सांसें चल रही थीं। आसपास मौजूद लोगों की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों को बचाया नहीं जा सका।

    पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं। मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है और जहरीले पदार्थ के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी तरह की आपराधिक साजिश के संकेत नहीं मिले हैं लेकिन सभी तथ्यों की जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।

    यह घटना समाज के सामने मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक संकट जैसी गंभीर चुनौतियों को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक आर्थिक दबाव और मानसिक बीमारी का समय पर उपचार तथा सामाजिक सहयोग न मिलने पर व्यक्ति गहरे अवसाद में जा सकता है। ऐसे मामलों में परिवार समाज और स्वास्थ्य संस्थाओं की समय पर मदद कई बार बड़ी त्रासदी को टाल सकती है।

  • वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं पर बरसी हैवानियत नाबालिग ने डंडे से पीटा वीडियो सामने आने के बाद मचा हड़कंप

    वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं पर बरसी हैवानियत नाबालिग ने डंडे से पीटा वीडियो सामने आने के बाद मचा हड़कंप


    इंदौर । इंदौर के एक वृद्धाश्रम से सामने आया मारपीट का वीडियो लोगों को झकझोर देने वाला है। वीडियो में एक नाबालिग लड़का वृद्ध महिलाओं पर डंडे से हमला करता दिखाई दे रहा है। बीच बचाव करने पहुंची अन्य महिलाओं के साथ भी उसने हाथापाई की। घटना सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन सक्रिय हो गया है तथा मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नाबालिग की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं बताई जा रही है और इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    घटना शहर के मरीमाता पानी की टंकी के पास स्थित महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी द्वारा संचालित वृद्धाश्रम की है। वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि करीब 14 वर्षीय लड़का हाथ में डंडा लेकर एक बुजुर्ग महिला पर लगातार हमला कर रहा है। जब आश्रम में मौजूद अन्य महिलाएं उसे रोकने की कोशिश करती हैं तो वह उनके साथ भी मारपीट करने लगता है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग उठने लगी।

    मामले की जानकारी मिलते ही बाणगंगा थाना पुलिस ने वृद्धाश्रम की संचालिका नीलम दुबे को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। पुलिस ने उनसे पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए आवश्यक निर्देश दिए। फिलहाल पुलिस ने संचालिका को समझाइश देकर छोड़ दिया है जबकि पूरे मामले की जांच जारी है।

    एसीपी रुबीना मिजवानी के अनुसार पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि नाबालिग करीब पांच महीने पहले अपनी मां के साथ वृद्धाश्रम में रहने आया था। उसकी मां गंभीर रूप से झुलस गई थीं और कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। मां के निधन के बाद से लड़का वहीं रह रहा था। पुलिस के अनुसार बुधवार को किसी बात को लेकर उसका एक बुजुर्ग महिला से विवाद हो गया जिसके बाद उसने गुस्से में डंडा उठाकर हमला कर दिया। वीडियो में यह भी दिखाई दे रहा है कि बीच बचाव करने वाले लोगों के साथ भी उसने आक्रामक व्यवहार किया।

    पुलिस का कहना है कि बच्चे की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं होने की जानकारी मिली है इसलिए उसके साथ संवेदनशील तरीके से कार्रवाई की जाएगी। सबसे पहले उसकी विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग कराई जाएगी ताकि उसकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति का सही आकलन किया जा सके। इसके साथ ही वृद्धाश्रम प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि उसे तत्काल बुजुर्गों से अलग रखा जाए ताकि किसी अन्य व्यक्ति की सुरक्षा को खतरा न हो।

    प्रशासन ने यह भी निर्णय लिया है कि नाबालिग को वृद्धाश्रम से हटाकर बाल संरक्षण से जुड़ी संस्था के सुपुर्द किया जाएगा जहां उसकी उचित देखभाल इलाज और काउंसलिंग की व्यवस्था की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि उसकी परिस्थितियों और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास की दिशा में काम करना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    इस घटना ने वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसे संस्थानों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की नियमित निगरानी मानसिक स्वास्थ्य की जांच और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि बुजुर्ग सुरक्षित वातावरण में अपना जीवन व्यतीत कर सकें। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और वीडियो के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

  • इंदौर नगर निगम घोटाला: 103.42 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने पेश की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट

    इंदौर नगर निगम घोटाला: 103.42 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने पेश की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट


    इंदौर । इंदौर नगर निगम के बहुचर्चित 103.42 करोड़ रुपये के फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 32 आरोपियों के खिलाफ करीब 20 हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट विशेष पीएमएलए अदालत, इंदौर में दाखिल की है। इस मामले में ठेकेदारों के अलावा नगर निगम, लोकल फंड ऑडिट और रेजिडेंट ऑडिट कार्यालय के कई अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।

    ईडी ने यह शिकायत 24 जुलाई को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष अदालत में प्रस्तुत की। अदालत ने चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं और मामले की अगली सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित कर दी है।

    जांच एजेंसी के अनुसार आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी बिल, नकली वर्क ऑर्डर, फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन की निकासी की। जांच में यह भी सामने आया कि रिकॉर्ड में हेरफेर कर नगर निगम से लगभग 103.42 करोड़ रुपये का भुगतान कराया गया, जिसे बाद में विभिन्न माध्यमों से इस्तेमाल किया गया। ईडी इस पूरे लेनदेन को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला मानते हुए इसकी वित्तीय परतों की भी जांच कर रही है।

    चार्जशीट में शामिल दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी ने आरोप लगाया है कि सरकारी धन की निकासी के लिए व्यवस्थित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की जांच की गई और उन्हें आरोपी बनाया गया।

    अब विशेष पीएमएलए अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों की कानूनी समीक्षा होगी। मामले को इंदौर नगर निगम से जुड़े सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है और आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

  • अवैध बैनर-होर्डिंग पर हाई कोर्ट सख्त: शिकायत मिलते ही 24 घंटे में कार्रवाई, जिम्मेदारों पर एफआईआर के निर्देश

    अवैध बैनर-होर्डिंग पर हाई कोर्ट सख्त: शिकायत मिलते ही 24 घंटे में कार्रवाई, जिम्मेदारों पर एफआईआर के निर्देश


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में अब अवैध राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर-होर्डिंग लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इस मामले में अहम आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर अवैध बैनर और होर्डिंग हटाए जाएं। इतना ही नहीं, नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

    न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने यह आदेश वैध होर्डिंग पर बिना अनुमति राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर लगाए जाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने कहा कि जबलपुर हाई कोर्ट द्वारा वर्ष 2022 में दिए गए निर्देशों और 1 नवंबर 2019 के शासन परिपत्र का अक्षरशः पालन किया जाए। कोर्ट ने साफ किया कि सार्वजनिक स्थानों पर नियमों के विपरीत लगाए गए विज्ञापन और बैनर किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।

    इस फैसले का प्रभाव भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश में देखने को मिलेगा। भोपाल नगर निगम के अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि अदालत के आदेश के अनुरूप विशेष अभियान चलाकर अवैध राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक होर्डिंग हटाए जाएंगे। नगर निगम के अनुसार पहले चरण में सर्वे कराया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी स्ट्रक्चर चिन्हित किए जाएंगे। अयोध्या बायपास क्षेत्र में पहले ही पांच अवैध यूनिपोल हटाए जा चुके हैं। साथ ही संबंधित संस्था की बैंक गारंटी जब्त करने और बकाया शुल्क वसूलने जैसी कार्रवाई भी की गई है।

    आउटडोर मीडिया नियम-2017 के अनुसार बिना अनुमति लगाए गए फ्लेक्स, पोस्टर, कटआउट, सुरक्षा प्रमाणपत्र के बिना स्थापित विज्ञापन संरचनाएं, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के प्रतिबंधित दायरे में लगे होर्डिंग, ट्रैफिक संकेतों को ढंकने वाले विज्ञापन, फुटपाथ और सर्विस रोड पर लगाए गए यूनिपोल तथा निर्धारित मानकों से बड़े या असुरक्षित स्ट्रक्चर पूरी तरह अवैध माने जाते हैं।

    भोपाल में वीआईपी रोड, एमपी नगर, लिंक रोड, होशंगाबाद रोड, रायसेन रोड, अयोध्या बायपास, बैरसिया रोड, लालघाटी और गांधी नगर सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे होर्डिंग लगे होने की बात सामने आई है जो नियमों के अनुरूप नहीं हैं। अनुमान है कि शहर में लगभग 20 प्रतिशत होर्डिंग किसी न किसी रूप में नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

    दरअसल, यह मामला इंदौर की एक विज्ञापन कंपनी द्वारा दायर याचिका के बाद अदालत पहुंचा था। कंपनी का कहना था कि उसने नगर निगम से विधिवत अनुमति लेकर विज्ञापन संरचनाएं स्थापित की हैं, लेकिन उन पर बिना अनुमति राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर लगा दिए जाते हैं। इससे न केवल संरचनाओं को नुकसान पहुंचता है बल्कि कंपनी को आर्थिक हानि भी होती है।

    अदालत के इस आदेश के बाद उम्मीद की जा रही है कि शहरों में अवैध बैनर और होर्डिंग पर प्रभावी अंकुश लगेगा। इससे यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, सार्वजनिक स्थानों की सुंदरता बढ़ेगी, वैध विज्ञापन एजेंसियों के हित सुरक्षित रहेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा

  • बारिश में जानलेवा रोमांच! प्रतिबंध के बावजूद झरनों तक पहुंच रहे लोग, पांच साल में 70 मौतों के बाद भी नहीं सबक

    बारिश में जानलेवा रोमांच! प्रतिबंध के बावजूद झरनों तक पहुंच रहे लोग, पांच साल में 70 मौतों के बाद भी नहीं सबक


    इंदौर । बारिश का मौसम आते ही इंदौर और आसपास के झरने व प्राकृतिक पर्यटन स्थल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने लगते हैं। हालांकि यह रोमांच कई बार जानलेवा साबित हो रहा है। प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की बार-बार चेतावनी के बावजूद प्रतिबंधित क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही थमने का नाम नहीं ले रही है। नतीजा यह है कि पिछले पांच वर्षों में इंदौर और महू क्षेत्र के 13 प्रमुख पिकनिक स्पॉट पर 70 युवाओं की जान जा चुकी है। इसके बावजूद लोग बैरिकेड्स पार कर और जंगल के रास्तों से प्रतिबंधित इलाकों तक पहुंच रहे हैं।

    बीते दो दिनों में ही इंदौर के तीन लोगों की अलग-अलग हादसों में मौत हो चुकी है। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर लगातार हादसों और प्रशासनिक प्रतिबंधों के बावजूद लोग अपनी जान जोखिम में डालने से क्यों नहीं बच रहे हैं। सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो बनाने की चाहत भी इस लापरवाही की बड़ी वजह मानी जा रही है।

    महू और उसके आसपास स्थित कई पर्यटन स्थलों पर मानसून के दौरान प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। इनमें तिंछा फॉल, चोरल फॉल, चोरल डैम, शीतला माता फॉल, कजलीगढ़, गेंदी कुंड, जामन्या कुंड, मोहदी फॉल, रतवी फॉल, लोधिया कुंड, जूनापानी, चिड़िया भड़क, बामनिया कुंड, जोगी भड़क और हत्यारी खो जैसे स्थान शामिल हैं। इन जगहों पर तेज जलधारा, फिसलन, गहरी खाई और अचानक बढ़ते जलस्तर के कारण हर साल हादसे होते हैं। इसके बावजूद कई पर्यटक चेतावनी बोर्ड और बैरिकेड्स को नजरअंदाज कर खतरनाक इलाकों तक पहुंच जाते हैं।

    हाल ही में महेश्वर के सहस्त्रधारा घाट पर हुआ हादसा भी ऐसी ही लापरवाही का उदाहरण है। इंदौर निवासी अजीत हाड़ा अपने परिवार और दोस्तों के साथ घूमने पहुंचे थे। नर्मदा की तेज धारा में बहने के बाद उनका शव करीब 200 मीटर दूर एक खोह में फंसा मिला। यह घटना उनके परिजनों की आंखों के सामने हुई और पूरे परिवार को गहरा सदमा दे गई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के दौरान झरनों और नदियों का जलस्तर कुछ ही मिनटों में तेजी से बढ़ सकता है। ऊपर के इलाकों में हुई बारिश का असर नीचे अचानक दिखाई देता है, जिससे सुरक्षित दिखने वाली जगह भी पलभर में खतरनाक बन जाती है। ऐसे में बैरिकेड्स और प्रतिबंध केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए लगाए जाते हैं।

    प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि मानसून के दौरान प्रतिबंधित पिकनिक स्पॉट और झरनों के मुहानों तक जाने से बचें। थोड़ी सी लापरवाही न केवल अपनी बल्कि पूरे परिवार की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल सकती है। रोमांच का आनंद तभी तक अच्छा है, जब तक वह सुरक्षित हो। चेतावनियों को नजरअंदाज करना साहस नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही है।