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  • इंदौर में 25.90 लाख रुपये की MD ड्रग्स बरामद, लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए तस्करी करने वाला आरोपी गिरफ्तार

    इंदौर में 25.90 लाख रुपये की MD ड्रग्स बरामद, लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए तस्करी करने वाला आरोपी गिरफ्तार


    इंदौर।
    में क्राइम ब्रांच ने मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी के पास से 259 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 25 लाख 90 हजार रुपये बताई गई है। आरोपी कथित तौर पर जल्दी अमीर बनने और महंगी जीवनशैली अपनाने के लालच में ड्रग्स तस्करी से जुड़ा था।

    पुलिस को सूचना मिली थी कि मंदसौर जिले की तरफ से MD ड्रग्स की एक बड़ी खेप लेकर एक व्यक्ति इंदौर पहुंचने वाला है। सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच ने निगरानी बढ़ाई और सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में वाहनों की जांच के लिए व्यवस्था की गई। आने-जाने वाले वाहनों पर नजर रखी जा रही थी।

    इसी दौरान पुलिस टीम को काले रंग की बाइक पर एक संदिग्ध व्यक्ति आता दिखाई दिया। पुलिस के अनुसार, बाइक सवार ने पुलिस को देखते ही भागने की कोशिश की। इस व्यवहार से संदेह बढ़ गया और टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। इसके बाद बाइक की तलाशी ली गई।

    तलाशी के दौरान पुलिस को बाइक की पेट्रोल टंकी के पास प्लास्टिक की एक थैली छिपी हुई मिली। जांच में उसमें MD ड्रग्स होने की पुष्टि हुई। बरामद पदार्थ का कुल वजन 259 ग्राम बताया गया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर ड्रग्स और बाइक को अपने कब्जे में ले लिया।

    पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह कम समय में ज्यादा पैसा कमाना चाहता था। उसे महंगी गाड़ियां खरीदने, ब्रांडेड सामान इस्तेमाल करने और पब-क्लब जैसी आलीशान जिंदगी जीने का शौक था। उसकी आमदनी इन इच्छाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। पुलिस के अनुसार इसी लालच में उसने अवैध मादक पदार्थों की तस्करी का रास्ता चुना।

    पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी को MD ड्रग्स की यह खेप कहां से मिली थी। इसके अलावा इंदौर में इसकी डिलीवरी किस व्यक्ति या समूह को की जानी थी, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियां आरोपी के पिछले संपर्कों और संभावित आपराधिक नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं।

    पूछताछ में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी पहले भी इस तरह की तस्करी में शामिल रहा है या नहीं। साथ ही उसके संपर्क में रहने वाले लोगों और संभावित सप्लायरों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इस मामले के जरिए मादक पदार्थों की सप्लाई से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है। बरामद 259 ग्राम MD ड्रग्स की कीमत करीब 25.90 लाख रुपये आंकी गई है। आरोपी से पूछताछ के आधार पर तस्करी के नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    इंदौर में सामने आया यह मामला यह भी दिखाता है कि तेज और महंगी जीवनशैली हासिल करने की चाह में कुछ लोग अवैध गतिविधियों की ओर बढ़ जाते हैं। हालांकि इस मामले में आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी।

  • तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरे युवा, इंदौर में भाजपा की यात्रा में दिखा जोरदार उत्साह..

    तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरे युवा, इंदौर में भाजपा की यात्रा में दिखा जोरदार उत्साह..

     मध्य प्रदेश:  के इंदौर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से बड़ी तिरंगा यात्रा निकाली गई। टंट्या भील चौराहे से शुरू हुई इस यात्रा में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, युवा, नेता और आम नागरिक शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लेकर लोग देशभक्ति के नारे लगाते हुए शहर की सड़कों से आगे बढ़े।

    यात्रा के दौरान कई स्थानों पर तिरंगे नजर आए और माहौल में देशभक्ति का रंग दिखाई दिया। आयोजन में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और पदाधिकारी भी मौजूद रहे। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम को पार्टी की ओर से बड़े जनसंपर्क और संगठनात्मक सक्रियता के प्रदर्शन के तौर पर भी देखा गया।

    इंदौर में यह यात्रा ऐसे समय निकाली गई, जब शहर का टंट्या भील चौराहा पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां युवाओं की ओर से शिक्षा और परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया गया था। इसी पृष्ठभूमि में भाजपा की तिरंगा यात्रा को राजनीतिक संदेश से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

    हालांकि यात्रा में किसी एक मुद्दे को केंद्र में रखने के बजाय राष्ट्रभक्ति को प्रमुख विषय बनाया गया। कार्यकर्ताओं और युवाओं ने हाथों में तिरंगा लेकर यात्रा में हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण शहर में कई जगह आयोजन को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ।

    यात्रा में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अलावा विधायक मधु वर्मा, रमेश मेंदोला और भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा समेत कई नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आम नागरिक भी यात्रा का हिस्सा बने। इससे आयोजन का दायरा केवल पार्टी कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहा।

    तिरंगा यात्रा में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से दिखाई दी। बड़ी संख्या में युवा तिरंगा लेकर आगे बढ़ते नजर आए। भाजपा की ओर से युवाओं की इस भागीदारी को संगठन के प्रति समर्थन और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रभक्ति की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।

    टंट्या भील चौराहे पर हाल में हुए प्रदर्शन के बाद भाजपा की ओर से निकाली गई यह यात्रा शहर की राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रही। एक ओर जहां युवाओं से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन हुआ, वहीं दूसरी ओर भाजपा ने तिरंगा यात्रा के जरिए राष्ट्रभक्ति को केंद्र में रखते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

    यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। सड़क पर तिरंगा लेकर चल रहे लोगों और देशभक्ति के नारों से माहौल में उत्सव जैसा वातावरण बना रहा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए भाजपा ने संगठन की सक्रियता के साथ युवाओं और आम लोगों की भागीदारी को भी सामने रखा।

    इंदौर में स्वतंत्रता दिवस के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के बीच भाजपा की यह तिरंगा यात्रा राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से चर्चा में रही। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने आयोजन को व्यापक रूप दिया और शहर में राष्ट्रभक्ति से जुड़े कार्यक्रमों के बीच इसकी अलग पहचान बनी।

  • इंदौर नगर निगम ARO के दो ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, 31 साल की नौकरी में 80 लाख वेतन के मुकाबले मिली 2.53 करोड़ संपत्ति

    इंदौर नगर निगम ARO के दो ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, 31 साल की नौकरी में 80 लाख वेतन के मुकाबले मिली 2.53 करोड़ संपत्ति

    मध्य प्रदेश। के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने नगर पालिक निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र कुमार पांडेय के दो ठिकानों पर एक साथ छापेमार कार्रवाई की है। कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों से जुड़ी है। जांच के दौरान अधिकारी के 31 वर्ष के सेवाकाल में प्राप्त अनुमानित वेतन और सामने आए कुल व्यय के बीच बड़ा अंतर पाया गया है।

    लोकायुक्त के अनुसार जितेंद्र कुमार पांडेय को पूरे सेवाकाल में करीब 80 लाख रुपये का अनुमानित वेतन प्राप्त हुआ। इसके मुकाबले जांच में करीब 2.53 करोड़ रुपये की संपत्ति और व्यय का पता चलने की बात सामने आई है। प्रारंभिक गणना के अनुसार यह राशि उनकी वैध आय से करीब 1.73 करोड़ रुपये अधिक बताई गई है।

    जांच एजेंसी के मुताबिक यह अंतर अनुमानित वैध आय की तुलना में 216.35 प्रतिशत अधिक है। इसी आधार पर अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। कार्रवाई के दौरान संपत्तियों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

    लोकायुक्त की टीम ने इंदौर में अधिकारी से जुड़े दो ठिकानों पर एक साथ तलाशी शुरू की। जांच में सामने आया कि अधिकारी की पत्नी भावना पांडेय के नाम पर आनंद नगर एक्सटेंशन, नवलखा चितावद और गजाधर नगर क्षेत्र में संपत्तियां होने की जानकारी मिली है।

    एक संपत्ति पर जी प्लस तीन मंजिला भवन का निर्माण किए जाने की बात सामने आई है। यह भवन 40 बाय 50 आकार के भूखंड पर बनाया गया है। जांच के अनुसार इस निर्माण पर करीब 1.20 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान लगाया गया है। लोकायुक्त टीम अब निर्माण लागत और संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

    इसी तरह गजाधर नगर, चितावद क्षेत्र में गुलमोहर का बगीचा इलाके में एक अन्य भूखंड पर जी प्लस दो मंजिला भवन का निर्माण पाया गया है। इस भवन में छात्रावास संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच के मुताबिक इस निर्माण पर करीब 91.50 लाख रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है।

    लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में अधिकारी की पत्नी, पुत्र और पुत्री के नाम से चार पहिया और दो पहिया वाहन खरीदे जाने तथा अन्य खर्चों की जानकारी भी सामने आई है। इन मदों में करीब 14 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।

    अधिकारी की संपत्तियों और खर्चों का आकलन करने के बाद लोकायुक्त टीम ने आय और व्यय के बीच अंतर को गंभीरता से लिया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि तलाशी की कार्रवाई अभी जारी है और दस्तावेजों तथा अन्य संपत्तियों की विस्तृत जांच के बाद वास्तविक स्थिति और स्पष्ट होगी।

    कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर की गई। इंदौर लोकायुक्त पुलिस की टीम में उप पुलिस अधीक्षक सुनील तालान, उप पुलिस अधीक्षक आनंद चौहान, निरीक्षक आशुतोष मिठास और निरीक्षक सचिन पटेरिया सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। टीम दोनों ठिकानों पर दस्तावेजों, संपत्तियों और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है।

    मामले में आगे की जांच के दौरान यह भी निर्धारित किया जाएगा कि सामने आई संपत्तियों और खर्चों का भुगतान किन माध्यमों से किया गया तथा उनकी वैध आय से उनका क्या संबंध है। तलाशी पूरी होने और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही अनुपातहीन संपत्ति की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई जारी है और मामले में आगे कानूनी प्रक्रिया जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे बढ़ेगी।

  • MP: इंदौर में लोगों की जान से खिलवाड़…. नगर निगम ने स्पीड ब्रेकर की जगह लगाए रंबल स्ट्रिप, रोज रहे हादसे

    MP: इंदौर में लोगों की जान से खिलवाड़…. नगर निगम ने स्पीड ब्रेकर की जगह लगाए रंबल स्ट्रिप, रोज रहे हादसे


    इंदौर।
    नगर निगम (Municipal council) द्वारा शहर के विभिन्न हिस्सों में लगाए जा रहे फोर लेयर रंबल स्ट्रिप (Four-layer rumble strip) वाहन चालकों के लिए हादसों का सबब बन रहे हैं। स्पीड ब्रेकर (Speed ​​breaker) के स्थान पर लगाई जाने वाली यह प्लास्टिक व रबर की रंबल स्ट्रिप लगने के कुछ ही दिनों बाद टूट रही हैं। शहर में अधिकांश स्थानों पर जहां इन्हें स्थापित किया गया था, वहां से ये स्ट्रिप पूरी तरह उखड़ चुकी हैं। इन स्ट्रिप को मजबूत पकड़ देने के लिए लोहे की कीलों से सड़क पर ठोका गया था। अब स्ट्रिप के टूटने और उखड़ने के बाद सड़क पर उभरी हुई नुकीली कीलें राहगीरों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं। इन उभरी कीलों के कारण आए दिन वाहनों के टायर पंक्चर हो रहे हैं। अचानक सामने दिखने वाली कीलों से बचने की कोशिश में वाहन चालक अनियंत्रित होकर एक-दूसरे से टकरा जाते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं।


    प्रमुख मार्गों पर उखड़े स्पीड ब्रेकर और फैली कीलें

    एलआईजी चौराहा से लेकर कलश चौराहा तक 4 से ज्यादा स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, जिनकी ऊंचाई सामान्य मानकों से काफी अधिक है। इन रबर के स्पीड ब्रेकरों को लगाते समय लोहे की कीलें ठोकी गई थीं। समय के साथ रबर के पल्ले उखड़ गए और अब केवल खतरनाक कीलें ही सड़क पर शेष बची हैं। उल्लेखनीय है कि एक पल्ले को कसने के लिए 4 से 6 कीलें ठोकी गई थीं, जो अब बाहर निकल आई हैं। इसी प्रकार पोलो ग्राउंड स्थित सांदिपनी स्कूल के सामने लगाया गया डबल स्पीड ब्रेकर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है और उसके बीच के बॉक्स पूरी तरह उखड़ गए हैं। एमआर 4 तथा मरीमाता लिंक रोड पर 2 स्थानों पर लगाए गए रंबल स्ट्रिप लगभग पूरी तरह उखड़ चुके हैं। बाणगंगा क्षेत्र में मनोचिकित्सालय से लेकर ओवरब्रिज के बीच 2 स्थानों पर लगे रंबल स्ट्रिप का बड़ा हिस्सा टूट गया है। इसके अलावा एमटीएच कंपाउंड स्थित यातायात थाना के पास और मालवा ब्रिज से लेकर परदेशीपुरा तक 2 स्थानों पर लगाए गए स्पीड ब्रेकर भी उखड़कर जर्जर हो चुके हैं।


    आईडीए चौराहे पर रंबल स्ट्रिप टूटी और वाहन चालक परेशान

    रेसकोर्स रोड पर स्थित इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) चौराहे पर नगर निगम द्वारा फोर लेयर रंबल स्ट्रिप लगाई गई थी, जो घटिया निर्माण के कारण कुछ ही दिनों में टूटने लगी। वर्तमान में यहां की अधिकांश स्ट्रिप टूट चुकी हैं और केवल नुकीली कीलें सड़क पर बाहर निकली हुई हैं। स्थानीय वाहन चालक मुकेश बरोले ने बताया कि रंबल स्ट्रिप की इन उभरी कीलों के कारण उनकी गाड़ी का टायर 3 बार पंक्चर हो चुका है। क्षेत्रीय रहवासियों का कहना है कि इस मार्ग पर फोर लेयर रंबल स्ट्रिप की आवश्यकता ही नहीं थी। लैंटर्न चौराहे और जंजीरावाला चौराहे से आने-जाने वाले यातायात की गति को सामान्य स्पीड ब्रेकर के माध्यम से भी आसानी से नियंत्रित किया जा सकता था। रंबल स्ट्रिप पर वाहन अत्यंत धीमी गति से गुजरते हैं, फिर भी इनका इतनी जल्दी टूट जाना घटिया निर्माण गुणवत्ता की ओर सीधा इशारा करता है।


    नियमों की अनदेखी और सड़क सुरक्षा समिति के निर्णयों पर अमल नहीं

    आर्किटेक्ट अतुल शेठ के अनुसार शहर में स्पीड ब्रेकर का निर्माण करते समय किसी भी निर्धारित तकनीकी नियम व मानक का पालन नहीं किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप न केवल आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं, बल्कि वाहनों के झटकों से लोगों को कमर दर्द व अन्य शारीरिक परेशानियां भी झेलनी पड़ रही हैं। अगस्त 2025 में आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की आधिकारिक बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था कि शहर की कॉलोनियों और मुख्य सड़कों से सभी अवैध स्पीड ब्रेकर तत्काल हटाए जाएंगे, परंतु इस निर्णय पर आज तक अमल नहीं हो सका। समिति ने यह प्रावधान भी किया था कि सड़क सुरक्षा समिति की पूर्व मंजूरी के बिना कहीं भी नया स्पीड ब्रेकर नहीं बनाया जा सकेगा और यदि कोई निर्माण होता है तो उसकी संपूर्ण राशि संबंधित निर्माण एजेंसी से वसूल की जाएगी। इस आदेश को पारित हुए 1 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

  • प्रतियोगी परीक्षा का दबाव या मानसिक तनाव इंदौर में 18 वर्षीय छात्र ने उठाया खौफनाक कदम

    प्रतियोगी परीक्षा का दबाव या मानसिक तनाव इंदौर में 18 वर्षीय छात्र ने उठाया खौफनाक कदम


    इंदौर । प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इंदौर आए एक 18 वर्षीय छात्र की आत्महत्या की घटना ने एक बार फिर छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और अकेलेपन की समस्या को उजागर कर दिया है। भंवरकुआ थाना क्षेत्र में किराए के कमरे में रह रहे छात्र ने सोमवार रात फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना की जानकारी तब मिली जब उसके दोस्त कोचिंग से लौटे और कमरे का दरवाजा खोलने पर उसे फंदे से लटका पाया। आनन फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान प्रियांश पुत्र अजीत कौरव निवासी इंद्रपुरी कॉलोनी जिला नरसिंहगढ़ गाडरवाड़ा के रूप में हुई है। प्रियांश एसएससी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के उद्देश्य से करीब पंद्रह दिन पहले ही इंदौर आया था। वह भंवरकुआ क्षेत्र में अपने तीन दोस्तों के साथ किराए के कमरे में रहकर कोचिंग कर रहा था और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटा हुआ था।

    मृतक के दोस्त शिवम ने बताया कि सोमवार शाम वह और एक अन्य साथी नियमित कोचिंग के लिए गए थे। इससे कुछ समय पहले उनका तीसरा दोस्त भी किसी परिचित से मिलने बाहर चला गया था। उस समय प्रियांश कमरे में अकेला था। जब दोनों दोस्त कोचिंग से वापस लौटे तो उन्होंने देखा कि प्रियांश फंदे पर लटका हुआ है। दोस्तों ने तुरंत उसे नीचे उतारकर नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जहां प्राथमिक जांच के बाद उसे एमवाय अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    दोस्तों ने पुलिस को बताया कि इंदौर आने के बाद से ही प्रियांश का पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था। वह एसएससी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग में डेमो क्लास कर रहा था लेकिन नए माहौल और पढ़ाई के दबाव के कारण वह सहज महसूस नहीं कर पा रहा था। उसने कुछ दिन पहले अपने माता पिता से फोन पर बातचीत करते हुए घर लौटने की इच्छा भी जताई थी। परिजनों ने उसे वापस आने के लिए कह दिया था लेकिन उससे पहले ही उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।

    प्रियांश एक किसान परिवार से था। परिवार में माता पिता के अलावा उसका एक बड़ा भाई है जो भोपाल में बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजन देर रात इंदौर पहुंचे जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद शव उन्हें सौंपा जाएगा।

    भंवरकुआ थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने कमरे की तलाशी ली लेकिन वहां से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। फिलहाल पुलिस दोस्तों और परिजनों के बयान दर्ज कर आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में किसी तरह की आपराधिक आशंका सामने नहीं आई है लेकिन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।

    यह घटना प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के सामने मौजूद मानसिक तनाव और भावनात्मक चुनौतियों की ओर भी गंभीर संकेत देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए शहर में अकेलापन पढ़ाई का दबाव और भविष्य की चिंता कई बार छात्रों पर गहरा मानसिक प्रभाव डालती है। ऐसे में परिवार मित्रों और संस्थानों को छात्रों की भावनात्मक स्थिति पर भी बराबर ध्यान देने की जरूरत है ताकि समय रहते उन्हें आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन मिल सके।

  • वृद्धाश्रम टूटा तो टूट गया मां-बेटे का साथ, इंदौर में ममता से दूर मासूम की दर्दभरी कहानी आई सामने

    वृद्धाश्रम टूटा तो टूट गया मां-बेटे का साथ, इंदौर में ममता से दूर मासूम की दर्दभरी कहानी आई सामने


    इंदौर । इंदौर के प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद प्रशासन की कार्रवाई ने जहां पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा वहीं इस कार्रवाई के बीच एक ऐसी मानवीय कहानी सामने आई जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। वृद्धाश्रम को खाली कराए जाने और बाद में उसे ध्वस्त किए जाने की प्रक्रिया में एक साल का मासूम अपनी मां से बिछड़ गया। पिछले तीन दिनों से वह मां की गोद के लिए तड़प रहा है जबकि उसकी मां भी दूसरे आश्रय गृह में भेज दी गई है। यह घटना प्रशासनिक कार्रवाई के बीच मानवीय संवेदनाओं और छोटे बच्चे की जरूरतों को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है।

    जानकारी के अनुसार करीब 30 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को 21 जून 2025 को लसूडिया पुलिस ने रेलवे ट्रैक के पास लावारिस हालत में रेस्क्यू किया था। उस समय वह गर्भवती थी और उसकी पहचान या परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी थी। ऐसे में प्रशासन ने उसे संरक्षण देते हुए प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में रहने की व्यवस्था की थी ताकि उसकी देखभाल सुरक्षित माहौल में हो सके।

    कुछ ही समय बाद जुलाई 2025 में महिला ने एक बेटे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के बाद मां और बेटा दोनों प्रेमाश्रय में ही साथ रह रहे थे। आश्रय गृह में मौजूद लोग बताते हैं कि मां अपने बेटे की देखभाल करती थी और बच्चा भी पूरी तरह उसी पर निर्भर था। दोनों का जीवन सीमित संसाधनों के बावजूद एक-दूसरे के सहारे चल रहा था।

    लेकिन प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे आश्रय गृह को खाली कराने का फैसला लिया। इस दौरान वहां रह रहे सभी बुजुर्गों और आश्रितों को अलग-अलग आश्रय गृहों तथा अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया। इसी प्रक्रिया में मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को दूसरे आश्रय गृह भेज दिया गया जबकि उसका एक साल का बेटा प्रेमाश्रय में ही रह गया। इस तरह प्रशासनिक कार्रवाई के बीच मां और बेटा एक-दूसरे से अलग हो गए।

    वृद्धाश्रम में मौजूद लोगों का कहना है कि बच्चे को समय पर दूध और अन्य आवश्यक भोजन दिया जा रहा है तथा उसकी देखभाल में कोई कमी नहीं रखी जा रही। इसके बावजूद जब भी उसे मां की गोद नहीं मिलती वह रोने लगता है और काफी देर तक बेचैन रहता है। उसे चुप कराने और बहलाने की कोशिश की जाती है लेकिन मां का स्नेह और स्पर्श किसी भी व्यवस्था से पूरा नहीं हो पा रहा। उसकी मासूम आंखें हर पल अपनी मां को तलाशती दिखाई देती हैं।

    इस घटना ने सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों को भी भावुक कर दिया है। उनका कहना है कि एक वर्ष की उम्र में बच्चा पूरी तरह मां के स्नेह और देखभाल पर निर्भर होता है। ऐसे में लंबे समय तक दोनों का अलग रहना बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसलिए प्रशासन को जल्द से जल्द ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे मां और बेटे को फिर से एक साथ रखा जा सके।

    यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई का नहीं बल्कि संवेदनशील मानवीय पहलू का भी है। जहां एक ओर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है वहीं दूसरी ओर ऐसे मासूम बच्चों और असहाय महिलाओं की भावनात्मक जरूरतों का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। अब सभी की नजर प्रशासन पर है कि वह इस मां और बेटे को दोबारा मिलाने के लिए कितनी जल्दी और क्या कदम उठाता है।

  • दतिया की हार से भाजपा सतर्क, कैलाश विजयवर्गीय बोले- भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, करेंगे मंथन

    दतिया की हार से भाजपा सतर्क, कैलाश विजयवर्गीय बोले- भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, करेंगे मंथन


    इंदौर । मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली हार के बाद पार्टी के भीतर आत्ममंथन का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कहा कि उपचुनाव का महत्व भले ही आम चुनाव जितना न हो, लेकिन हार को कभी हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस परिणाम की गंभीर समीक्षा करेगी और यह पता लगाएगी कि किन कारणों से पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

    इंदौर में मीडिया से बातचीत के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि चुनावी हार हमेशा सीख देने वाली होती है। उन्होंने कहा कि पार्टी का संगठन हर चुनाव के बाद उसकी समीक्षा करता है और दतिया उपचुनाव के परिणामों का भी गहराई से विश्लेषण किया जाएगा। उनका कहना था कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन इस हार पर गंभीरता से विचार करेगा और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

    विजयवर्गीय ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर चुनाव महत्वपूर्ण होता है। जीत से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है, जबकि हार संगठन को आत्मविश्लेषण का अवसर देती है। इसलिए पार्टी इस परिणाम को नजरअंदाज नहीं करेगी, बल्कि सभी पहलुओं पर विचार करते हुए संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर सुधार की दिशा में काम करेगी।

    मीडिया ने जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के प्रभाव वाले क्षेत्र में आए चुनाव परिणाम को लेकर सवाल किया तो विजयवर्गीय ने कहा कि वे स्वयं चुनाव प्रचार के लिए वहां गए थे। उन्होंने माना कि यह काफी हद तक व्यक्ति आधारित सीट थी और जिस नेता का उस क्षेत्र में व्यक्तिगत प्रभाव था, उनके चुनाव नहीं लड़ने का असर भी परिणामों पर देखने को मिला। उन्होंने कहा कि कई बार स्थानीय समीकरण और उम्मीदवार की व्यक्तिगत स्वीकार्यता चुनाव परिणामों को प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में राजनीतिक परिस्थितियां सामान्य चुनावों से अलग होती हैं।

    उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका, जनसंपर्क अभियान, चुनावी रणनीति और क्षेत्रीय समीकरणों का भी विस्तृत आकलन किया जाएगा। भाजपा का प्रयास रहेगा कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों और संगठन पहले से अधिक मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरे।

    दतिया उपचुनाव के परिणाम ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। कांग्रेस इस जीत को जनता का भाजपा सरकार के खिलाफ संदेश बता रही है, जबकि भाजपा इसे स्थानीय परिस्थितियों और उम्मीदवार आधारित चुनाव मानते हुए आगे की रणनीति बनाने में जुट गई है। पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने का प्रयास कर रहा है कि एक उपचुनाव का परिणाम उसके व्यापक जनाधार को प्रभावित नहीं करता, लेकिन इससे मिलने वाले संकेतों को गंभीरता से लेना आवश्यक है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा संगठन अब जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति को और मजबूत करने की दिशा में काम करेगा। वहीं कैलाश विजयवर्गीय के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी इस हार को केवल औपचारिक घटना मानकर नहीं छोड़ेगी, बल्कि इसके कारणों की विस्तृत समीक्षा कर संगठन को और अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश करेगी।

  • माइग्रेन के इलाज के बीच होटल में मिला महिला का शव, आत्महत्या के कारणों की तलाश में जुटी पुलिस

    माइग्रेन के इलाज के बीच होटल में मिला महिला का शव, आत्महत्या के कारणों की तलाश में जुटी पुलिस


    मध्य प्रदेश:
    के इंदौर शहर में इलाज के लिए आई एक महिला की होटल के कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने जहर सेवन कर आत्महत्या की आशंका जताई है। हालांकि घटना के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और महिला के मोबाइल सहित अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, खंडवा निवासी 26 वर्षीय महिला माइग्रेन की समस्या से लंबे समय से परेशान थी और उपचार के लिए समय-समय पर इंदौर आती रहती थी। इसी सिलसिले में वह इस बार भी इंदौर पहुंची और विजय नगर क्षेत्र स्थित एक होटल में कमरा लेकर ठहरी थी। दिनभर इलाज के बाद वह अपने कमरे में लौट गई थी।

    देर शाम होटल कर्मचारियों को उस समय संदेह हुआ जब काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला। कई बार आवाज देने और संपर्क करने की कोशिश के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर होटल प्रबंधन ने मास्टर चाबी की मदद से कमरा खोला। अंदर महिला अचेत अवस्था में बिस्तर पर मिली। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

    पुलिस ने महिला को अस्पताल भिजवाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और घटना की सूचना परिजनों को दी गई। परिजन खंडवा से इंदौर पहुंचे, जिनसे पुलिस ने घटना के संबंध में पूछताछ भी की।

    प्रारंभिक जांच के दौरान पुलिस को कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। ऐसे में आत्महत्या के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस ने महिला का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उसकी कॉल डिटेल, मैसेज तथा अन्य डिजिटल गतिविधियों की जांच की जा रही है, ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।

    परिजनों ने पुलिस को बताया कि महिला लंबे समय से माइग्रेन की समस्या से परेशान थी और उसका उपचार चल रहा था। हालांकि उन्होंने किसी पारिवारिक विवाद या अन्य कारण की जानकारी होने से इनकार किया है। पुलिस बीमारी, मानसिक स्थिति और अन्य संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है।

    जांच अधिकारी होटल के कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रहे हैं। होटल में प्रवेश और निकास से जुड़े रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि महिला के होटल पहुंचने के बाद क्या घटनाक्रम रहा और क्या किसी अन्य व्यक्ति का उससे संपर्क हुआ था।

    पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही महिला की मौत के वास्तविक कारणों के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।

  • इंदौर के रोबोट चौराहे की बदलेगी तस्वीर, 800 पेड़ों का होगा ट्रांसप्लांट, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

    इंदौर के रोबोट चौराहे की बदलेगी तस्वीर, 800 पेड़ों का होगा ट्रांसप्लांट, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत


    इंदौर । इंदौर के सबसे व्यस्त ट्रैफिक जंक्शनों में शामिल रोबोट चौराहे की तस्वीर जल्द बदलने वाली है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव और घंटों लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए यहां दोनों ओर चार-चार लेन का आधुनिक फ्लायओवर बनाया जाएगा। इस परियोजना के लिए चौराहे के दोनों तरफ मौजूद लगभग 150-150 मीटर लंबे ग्रीन बेल्ट का उपयोग किया जाएगा। हालांकि इस फैसले से इलाके की घनी हरियाली प्रभावित होगी, लेकिन इंदौर विकास प्राधिकरण का कहना है कि एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा और 800 से अधिक पेड़ों को दूसरी जगह ट्रांसप्लांट किया जाएगा।

    रोबोट चौराहे का यह ग्रीन बेल्ट वर्षों की मेहनत से तैयार हुआ है। बारिश के मौसम में यह क्षेत्र मिनी फॉरेस्ट जैसा दिखाई देता है और गर्मियों में राहगीरों को छांव उपलब्ध कराता है। स्थानीय रहवासियों ने स्वयं पौधे लगाकर इस हरित क्षेत्र को विकसित किया था, जो अब बड़े और घने पेड़ों में बदल चुके हैं। फ्लायओवर निर्माण के कारण यह हरियाली अस्थायी रूप से समाप्त होती नजर आएगी, लेकिन अधिकारियों का दावा है कि पेड़ों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर संरक्षित किया जाएगा।

    दरअसल, खजराना चौराहे पर फ्लायओवर बनने के बाद वहां से गुजरने वाले वाहन बिना रुके सीधे रोबोट चौराहे तक पहुंच रहे हैं। इससे इस चौराहे पर ट्रैफिक का दबाव कई गुना बढ़ गया है। पीक आवर्स में लंबी कतारें लग जाती हैं और वाहन चालकों को दो से तीन बार सिग्नल बदलने का इंतजार करना पड़ता है। पहले खजराना चौराहे पर ट्रैफिक रुक जाने से दबाव बंट जाता था, लेकिन अब रोबोट चौराहा शहर का नया ट्रैफिक बॉटलनेक बन गया है।

    इंदौर विकास प्राधिकरण ने फ्लायओवर परियोजना का फिजिबिलिटी सर्वे पूरा कर लिया है और प्रारंभिक डिजाइन भी तैयार कर ली है। प्रस्ताव के अनुसार खजराना फ्लायओवर की तर्ज पर यहां भी दोनों दिशाओं में चार-चार लेन का अलग-अलग स्ट्रक्चर बनाया जाएगा। इसके लिए करीब 150 मीटर लंबी और 30 मीटर से अधिक चौड़ी ग्रीन बेल्ट की जमीन का उपयोग किया जाएगा।

    आईडीए के अधिकारियों का कहना है कि परियोजना शुरू होने से पहले सुपर कॉरिडोर स्थित प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं में पेड़ों के लिए स्थान और गड्ढे तैयार किए जाएंगे। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से सभी पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन किया जाएगा, ताकि पर्यावरणीय नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।

    हालांकि शहर में इससे पहले भी कई बड़े फ्लायओवर निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ प्रभावित हुए हैं। फूटी कोठी, आईटी पार्क, मूसाखेड़ी, पीपल्याहाना, बंगाली और खजराना फ्लायओवर परियोजनाओं के दौरान 10 हजार से अधिक पेड़ हटाए जा चुके हैं। जिन पेड़ों को दूसरी जगह लगाया गया था, उन्हें नए वातावरण में दोबारा विकसित होने में एक से दो वर्ष का समय लगा था।

    अब रोबोट चौराहे का यह फ्लायओवर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुगम बनाने की दिशा में अहम परियोजना माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इसके पूरा होने के बाद रिंग रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और रोजाना हजारों वाहन चालकों को जाम से राहत मिलेगी।

  • NEET आंदोलन के समर्थन के बाद बढ़ा सियासी विवाद, कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप- पुलिस ने 10 बार बदलवाया बयान

    NEET आंदोलन के समर्थन के बाद बढ़ा सियासी विवाद, कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप- पुलिस ने 10 बार बदलवाया बयान


    इंदौर । इंदौर में NEET परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलन के समर्थन को लेकर कांग्रेस और पुलिस प्रशासन के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे से गुरुवार को पंढरीनाथ थाने में करीब पांच घंटे तक पूछताछ की गई। इस दौरान उन्हें लंबे समय तक थाने में बैठाए रखने की खबर फैलते ही पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा सहित कई कांग्रेस नेता और समर्थक थाने पहुंच गए। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जमा होने से थाने के बाहर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की। बाद में पुलिस ने चौकसे को जाने की अनुमति दे दी।

    थाने से बाहर आने के बाद चिंटू चौकसे ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि कांग्रेस ने टंट्या भील चौराहे पर NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया था और इसी वजह से उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि थाने पहुंचने के बाद पुलिस ने कई घंटे तक उन्हें बैठाए रखा और बयान में बार-बार संशोधन कराया। उनके अनुसार वहां मौजूद पुलिसकर्मी केवल वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन कर रहे थे और पूरा घटनाक्रम पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर हुआ।

    चौकसे ने दावा किया कि उनके बयान में लगभग दस बार संशोधन कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार बयान की भाषा और उसमें लिखी गई बातों को बदलने का दबाव बनाया गया। उनके मुताबिक यह केवल एक व्यक्ति को परेशान करने का मामला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि जो भी जनता की आवाज उठाता है या छात्र, किसान और आम लोगों के आंदोलनों का समर्थन करता है, उसे प्रशासनिक दबाव के जरिए चुप कराने का प्रयास किया जा रहा है।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी नेता राहुल गांधी के आह्वान पर कांग्रेस देशभर में छात्रों के समर्थन में खड़ी है और इंदौर में भी पार्टी ने NEET अभ्यर्थियों के आंदोलन को समर्थन दिया था। उनका आरोप है कि जैसे ही प्रशासन को कांग्रेस की सक्रिय भूमिका की जानकारी मिली, छह महीने पुराने मामले में उन्हें नोटिस भेज दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।

    चौकसे ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पहले कांग्रेस कार्यालय पर हमला हुआ, पत्थरबाजी हुई और कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हुए, लेकिन पुलिस ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की जबकि भाजपा से जुड़े लोगों के खिलाफ अज्ञात आरोपियों के रूप में मामला दर्ज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस के माध्यम से विपक्षी नेताओं को परेशान कर रही है और आंदोलनों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

    कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। चिंटू चौकसे ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में आने वाले दिनों में इंदौर पुलिस के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और राजनीतिक विरोध की आवाज को दबाने के किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा।

    हालांकि इस मामले में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में कांग्रेस के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।