Tag: Indore

  • MP: इंदौर की 3 वर्षीय अनिका के लिए एक-एक पल भारी, राशि जुटाने के बाद शुरू नहीं हुआ इलाज…. AIIMS में घूम रहीं फाइलें

    MP: इंदौर की 3 वर्षीय अनिका के लिए एक-एक पल भारी, राशि जुटाने के बाद शुरू नहीं हुआ इलाज…. AIIMS में घूम रहीं फाइलें


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) की तीन वर्षीय अनिका शर्मा (Anika Sharma) के लिए समय लगातार भारी पड़ता जा रहा है. स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी (Spinal Muscular Atrophy- SMA) टाइप-2 जैसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रही इस मासूम का इलाज अब भी शुरू नहीं हो पाया है. जबकि परिवार, समाज और संस्थाओं की मदद से उपचार के लिए अधिकांश राशि जुटाई जा चुकी है. इसके बावजूद प्रशासनिक देरी बच्ची के इलाज की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है.

    दरअसल, इसी मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सुनवाई करते हुए दिल्ली एम्स की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई. अदालत ने पाया कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद एम्स की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया. इस पर अदालत ने साफ निर्देश दिए कि हर हाल में 23 जुलाई 2026 तक जवाब पेश किया जाए. मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

    याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि इलाज के लिए अब केवल सीमित राशि की जरूरत है, लेकिन एम्स की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से जीवनरक्षक इंजेक्शन की खरीद अटकी हुई है. एक ओर केंद्र सरकार से स्वीकृत सहायता की प्रक्रिया लंबित है, तो दूसरी ओर क्राउडफंडिंग से जुटाई गई राशि भी इनवॉइस के अभाव में जारी नहीं हो पा रही है।

    हाईकोर्ट ने संकेत दिए हैं कि इतने संवेदनशील मामले में अब और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी, क्योंकि अनिका के लिए बीतता हर दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि जिंदगी और उम्मीद के बीच की दूरी बढ़ा रहा है।

    इससे पहले, हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से 22 जून को जवाब तलब किया था. साथ ही राज्य सरकार से यह बताने को कहा था कि वह बच्ची के इलाज में किसी प्रकार सहायता कर सकती है या नहीं?

    बता दें कि बच्ची के इलाज के लिए करीब 9.50 करोड़ रुपये की जरूरत है. परिजन अब तक करीब 8 करोड़ रुपये जुटा चुके हैं, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत 50 लाख रुपये और तमाम लोगों एवं सामाजिक संगठनों से प्राप्त सहयोग राशि शामिल है.

    बच्ची के इलाज के लिए अमेरिका से एक इंजेक्शन मंगाया जाना है. यह इंजेक्शन मंगवाकर उसका इलाज जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए, क्योंकि हर गुजरते दिन के साथ उसके स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ रहा है.

    स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक आनुवंशिक तंत्रिका-मांसपेशीय रोग है. इसमें रीढ़ की हड्डी में मौजूद ‘मोटर न्यूरॉन’ धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं, जिससे मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं और उनका क्षय होने लगता है.

    ‘मोटर न्यूरॉन’ मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में पाई जाने वाली खास तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं, जो दिमाग से शरीर की मांसपेशियों तक अलग-अलग क्रियाओं के वास्ते संदेश पहुंचाती हैं, जिनमें सांस लेना, निगलना और बोलना शामिल हैं. फिलहाल मासूम की हालत स्थिर है और उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।

  • दुर्लभ बीमारी से जूझ रही तीन वर्षीय बच्ची के इलाज में कथित देरी पर हाई कोर्ट सख्त, दिल्ली AIIMS से मांगा जवाब, 23 जुलाई तक रिपोर्ट तलब

    दुर्लभ बीमारी से जूझ रही तीन वर्षीय बच्ची के इलाज में कथित देरी पर हाई कोर्ट सख्त, दिल्ली AIIMS से मांगा जवाब, 23 जुलाई तक रिपोर्ट तलब


    मध्य प्रदेश: हाई कोर्ट ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-2 जैसी दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित तीन वर्षीय बच्ची के इलाज में कथित देरी को गंभीरता से लेते हुए नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) से निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की संवेदनशीलता और बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जवाब 23 जुलाई तक हर हाल में दाखिल किया जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है।

    इंदौर निवासी तीन वर्षीय अनिका शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी मरीज के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। सुनवाई के दौरान AIIMS की ओर से पेश अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय का अनुरोध किया, लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से इसका विरोध किया गया। उनका कहना था कि इलाज के लिए आवश्यक धनराशि का बड़ा हिस्सा जुटाए जाने के बावजूद उपचार शुरू नहीं हो सका है।

    इससे पहले भी अदालत केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले में जानकारी मांग चुकी है। न्यायालय ने यह भी जानना चाहा था कि क्या राज्य सरकार बच्ची के उपचार में किसी प्रकार की आर्थिक या प्रशासनिक सहायता उपलब्ध करा सकती है। अदालत का मानना है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के मामलों में संबंधित संस्थाओं को समयबद्ध और संवेदनशील तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए।

    याचिका के अनुसार बच्ची के इलाज के लिए लगभग 9.50 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। परिवार अब तक करीब 8 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर चुका है। इसमें केंद्र सरकार से स्वीकृत आर्थिक सहायता के अलावा सामाजिक संगठनों और विभिन्न दानदाताओं का सहयोग भी शामिल है। परिवार का कहना है कि उपचार में जितनी अधिक देरी होगी, बीमारी के बढ़ने का जोखिम उतना ही बढ़ता जाएगा।

    मामले में बताया गया है कि उपचार के लिए एक विशेष जीवनरक्षक इंजेक्शन विदेश से मंगाना आवश्यक है। यह दवा अमेरिका से आयात की जानी है और इसके बिना उपचार की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार एसएमए जैसी बीमारी में समय पर इलाज अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि देरी होने पर मांसपेशियों की कार्यक्षमता लगातार प्रभावित होती जाती है और रोगी की स्थिति अधिक जटिल हो सकती है।

    स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक दुर्लभ आनुवंशिक न्यूरोमस्कुलर बीमारी है, जिसमें रीढ़ की हड्डी के मोटर न्यूरॉन्स धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। इसके कारण शरीर की मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं और सांस लेने, निगलने तथा सामान्य गतिविधियां करने जैसी आवश्यक शारीरिक क्षमताएं भी प्रभावित हो सकती हैं। यही वजह है कि इस बीमारी में समय पर उपचार को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

    अब सभी की निगाहें AIIMS की ओर से अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब और आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि न्यायालय के निर्देशों के बाद उपचार प्रक्रिया को लेकर स्थिति जल्द स्पष्ट होगी और बच्ची को आवश्यक चिकित्सा सहायता समय पर उपलब्ध कराने की दिशा में आगे की कार्रवाई तेज होगी।

  • इंदौर में कारोबारी और आरटीआई कार्यकर्ता के विवाद ने पकड़ा तूल, शिकायतकर्ता पर ही एफआईआर से उठे सवाल

    इंदौर में कारोबारी और आरटीआई कार्यकर्ता के विवाद ने पकड़ा तूल, शिकायतकर्ता पर ही एफआईआर से उठे सवाल


    मध्य प्रदेश
    के इंदौर में एक शराब कारोबारी और आरटीआई कार्यकर्ता के बीच विवाद अब कानूनी और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है। दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ लगाए गए आरोपों के बीच पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। मामले की विशेष चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि ब्लैकमेलिंग और कथित रंगदारी की शिकायत करने वाले व्यक्ति के खिलाफ ही पहले मामला दर्ज हो गया, जबकि उसकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, शराब कारोबारी सूरज रजक ने स्थानीय पुलिस थाने में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा उनके खिलाफ सोशल मीडिया और व्हाट्सएप समूहों में कथित रूप से मानहानिकारक सामग्री प्रसारित की जा रही है। शिकायत में यह भी दावा किया गया कि उनसे कथित रूप से बड़ी धनराशि की मांग की गई और भुगतान नहीं करने पर और अधिक सामग्री सार्वजनिक करने की चेतावनी दी गई।

    कारोबारी का आरोप है कि उन्होंने पुलिस से ब्लैकमेलिंग, मानहानि और सूचना प्रौद्योगिकी कानून से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना है कि शिकायत देने के बावजूद कई दिनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी दौरान दूसरे पक्ष की ओर से भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर कारोबारी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।

    इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। कारोबारी का कहना है कि उन्होंने सबसे पहले पुलिस को शिकायत दी थी और अपनी बात रखने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया था। उनका आरोप है कि उनकी शिकायत पर कार्रवाई लंबित रहने के दौरान उनके खिलाफ दर्ज हुए मामले ने पूरे घटनाक्रम को विवादास्पद बना दिया है। वहीं दूसरे पक्ष की शिकायत के आधार पर दर्ज प्रकरण अब जांच का विषय बना हुआ है।

    मामले में दोनों पक्षों के आरोप और प्रत्यारोपों के बीच पुलिस की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति ने पहले गंभीर आरोपों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी, तो उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई और किस आधार पर दूसरे पक्ष की शिकायत पर पहले प्रकरण दर्ज किया गया। हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

    विवाद के दौरान आरटीआई कार्यकर्ता को लेकर भी विभिन्न प्रकार के दावे सामने आए हैं। कुछ सूत्रों के अनुसार उन पर पूर्व में भी सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों को लेकर दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए जाते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित पक्ष की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। इसलिए इन आरोपों को जांच पूरी होने तक प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

    फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों द्वारा दिए गए दस्तावेजों, शिकायतों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध तथ्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस बीच यह मामला शहर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं।

  • इंदौर के प्रॉपर्टी कारोबारी की संदिग्ध मौत में जांच तेज, भोपाल की युवती हिरासत में, कई एंगल से पड़ताल जारी

    इंदौर के प्रॉपर्टी कारोबारी की संदिग्ध मौत में जांच तेज, भोपाल की युवती हिरासत में, कई एंगल से पड़ताल जारी

    मध्य प्रदेश के इंदौर में एक प्रॉपर्टी कारोबारी की संदिग्ध मौत के मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। पुलिस ने जांच के सिलसिले में भोपाल की एक युवती को हिरासत में लिया है और मामले के विभिन्न पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। शुरुआती जांच के दौरान हनी ट्रैप की आशंका भी सामने आई है, हालांकि पुलिस ने इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष घोषित नहीं किया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं की निष्पक्ष जांच जारी है।

    पुलिस के अनुसार, हिरासत में ली गई युवती का कारोबारी से करीबी संबंध होने की जानकारी जांच के दौरान सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर दोनों के बीच लंबे समय से संपर्क होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां उनके बीच हुए आर्थिक लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल संचार और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं ताकि पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

    जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आया है कि कारोबारी से बड़ी राशि, आभूषण और एक लग्जरी कार लिए जाने की बात सामने आई है। इन आरोपों की फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस संबंधित दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय विवरणों का सत्यापन कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और साक्ष्यों की विस्तार से जांच की जाएगी।

    घटना वाले दिन कारोबारी एक होटल में ठहरे हुए थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार होटल की ऊंचाई से गिरने के कारण उनकी मौत हुई थी। पुलिस इस मामले में दुर्घटना, आत्महत्या और किसी संभावित आपराधिक साजिश सहित सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। होटल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, प्रवेश और निकास के विवरण तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

    जांच के दौरान कारोबारी के परिवार से भी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई गई है। पुलिस को एक मोबाइल फोन से कथित रूप से ऐसा वीडियो मिलने की जानकारी मिली है, जिसकी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता, उसके संदर्भ और उससे जुड़े सभी तथ्यों का तकनीकी परीक्षण कराया जा रहा है। साथ ही घटना के समय होटल में मौजूद अन्य लोगों से भी पूछताछ कर घटनाक्रम को समझने का प्रयास किया जा रहा है।

    पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के अलावा मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य फॉरेंसिक सामग्री का भी विश्लेषण कर रही है। जांच एजेंसियों का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि घटना से पहले और बाद में क्या परिस्थितियां बनीं तथा क्या किसी प्रकार का दबाव, विवाद या अन्य कारण इस मामले से जुड़े हुए थे।

    फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसे जांच का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि चिकित्सकीय रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की जा रही है तथा किसी भी व्यक्ति की भूमिका केवल ठोस साक्ष्य मिलने के बाद ही निर्धारित की जाएगी।

  • बीटेक की फीस के लिए जोड़ी मेहनत की कमाई साइबर ठगों ने उड़ाई, हेल्पलाइन और कार्रवाई पर छात्र ने उठाए सवाल

    बीटेक की फीस के लिए जोड़ी मेहनत की कमाई साइबर ठगों ने उड़ाई, हेल्पलाइन और कार्रवाई पर छात्र ने उठाए सवाल


    मध्य प्रदेश के इंदौर में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एक छात्र की उच्च शिक्षा की तैयारी को गंभीर झटका पहुंचाया है। बीटेक की फीस जमा करने के लिए महीनों तक मेहनत और ओवरटाइम कर बचाए गए 48 हजार रुपये कुछ ही मिनटों में साइबर अपराधियों ने बैंक खाते से निकाल लिए। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से मदद की गुहार लगाई, लेकिन समय पर राहत नहीं मिलने का आरोप लगाया है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, अशोकनगर निवासी केशव सैन इंदौर में एक निजी कंपनी में हेल्पर के रूप में कार्य करते हैं। वह नौकरी के साथ-साथ बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं और आगामी शैक्षणिक सत्र की फीस जमा करने के लिए लगातार अतिरिक्त समय तक काम कर पैसे बचा रहे थे। उनके अनुसार, खाते में जमा पूरी राशि उनकी शिक्षा और भविष्य की योजनाओं के लिए रखी गई थी।

    पीड़ित ने बताया कि अचानक उनके मोबाइल पर बैंक खाते से लगातार ऑनलाइन लेनदेन के संदेश आने लगे। कुछ ही मिनटों के भीतर खाते से कुल 48 हजार रुपये निकल गए। उनका दावा है कि राशि अमेज़न पे के माध्यम से अलग-अलग ट्रांजैक्शन में स्थानांतरित की गई। जब तक वह स्थिति को समझ पाते, खाते की पूरी जमा पूंजी समाप्त हो चुकी थी।

    घटना के तुरंत बाद छात्र ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया। पीड़ित का आरोप है कि तत्काल लेनदेन रोकने या तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें नजदीकी पुलिस थाने जाने की सलाह दी गई। इसके बाद वह इंदौर क्राइम ब्रांच पहुंचे, जहां भी उन्हें तत्काल समाधान नहीं मिलने का दावा किया गया। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

    पीड़ित का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर त्वरित कार्रवाई होती तो संभवतः राशि को रोका या रिकवर किया जा सकता था। अब फीस जमा करने की समयसीमा नजदीक होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और जल्द से जल्द राशि वापस दिलाने की मांग की है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत प्राप्त होने के बाद साइबर ठगी से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है। बैंक लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित खातों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि रकम के प्रवाह का पता लगाया जा सके और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।

    साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन भुगतान सेवाओं और डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऐसे मामलों में किसी भी संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिलते ही तुरंत बैंक, साइबर हेल्पलाइन और स्थानीय पुलिस को सूचित करना आवश्यक होता है। साथ ही अनजान लिंक, संदिग्ध कॉल और अविश्वसनीय मोबाइल एप्लिकेशन से सावधानी बरतने की भी सलाह दी जाती है।

    यह मामला एक बार फिर साइबर सुरक्षा व्यवस्था, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • कुछ सेकंड की जल्दबाजी बनी जानलेवा: इंदौर स्टेशन पर ट्रेन की चपेट में आने से ग्वालियर के युवक की मौत

    कुछ सेकंड की जल्दबाजी बनी जानलेवा: इंदौर स्टेशन पर ट्रेन की चपेट में आने से ग्वालियर के युवक की मौत


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में ग्वालियर निवासी युवक की जान चली गई। चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश के दौरान उसका पैर फिसल गया और वह ट्रेन की चपेट में आ गया। हादसा इतना भीषण था कि युवक की मौके पर ही मौत हो गई। रेलवे पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है और परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है।

    रेलवे पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान ग्वालियर के सुनार मोहल्ला निवासी हर्ष गुप्ता के रूप में हुई है। वह व्यापारिक कार्य से इंदौर आया था। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे वह ग्वालियर से आई ओवरनाइट एक्सप्रेस से इंदौर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-4 पर उतरा था।

    हर्ष को आगे रतलाम जाना था, जिसके लिए उसे प्लेटफॉर्म नंबर-1 से डेमू ट्रेन पकड़नी थी। प्लेटफॉर्म बदलने के दौरान उसने चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास किया, लेकिन संतुलन बिगड़ने से उसका पैर फिसल गया और वह ट्रेन के नीचे आ गया। हादसे में उसे गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

    घटना की सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस और स्टेशन स्टाफ मौके पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। इंदौर में रहने वाले उसके रिश्तेदार भी रेलवे स्टेशन पहुंच गए, जबकि ग्वालियर में रहने वाले परिजनों को सूचना देकर इंदौर बुलाया गया है।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हर्ष गुप्ता व्यापारिक काम से इंदौर आए थे और आगे रतलाम जाने की तैयारी में थे। रेलवे पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है और स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

    रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि कभी भी चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने का प्रयास न करें। कुछ क्षणों की जल्दबाजी जानलेवा साबित हो सकती है। यदि ट्रेन छूट जाए तो अगली ट्रेन का इंतजार करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।

  • इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक: इंडियामार्ट से एसी गैस खरीदने और बेटे की गिरफ्तारी का झांसा देकर 1.72 लाख उड़ाए

    इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक: इंडियामार्ट से एसी गैस खरीदने और बेटे की गिरफ्तारी का झांसा देकर 1.72 लाख उड़ाए


    इंदौर इंदौर में साइबर अपराधियों ने एक ही दिन में दो अलग-अलग वारदातों को अंजाम देकर दो लोगों से कुल 1.72 लाख रुपए की ठगी कर ली। एक मामले में इंडियामार्ट पर एसी गैस बेचने के नाम पर ऑटो पार्ट्स कारोबारी से 82 हजार रुपए हड़प लिए गए, जबकि दूसरे मामले में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को उसके बेटे की रेप केस में गिरफ्तारी का डर दिखाया गया और जमानत के नाम पर 90 हजार रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। दोनों मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पहला मामला छोटी ग्वालटोली थाना क्षेत्र का है। रानी बाग निवासी ऑटो पार्ट्स व्यापारी पवनदीप सिंह खनूजा ने एसी गैस खरीदने के लिए इंडियामार्ट पर सप्लायर का नंबर तलाशा। वहां उन्हें श्रुति इंटरप्राइजेज के नाम से कुलदीप अग्रवाल का मोबाइल नंबर मिला। बातचीत के बाद आरोपी ने व्हाट्सएप पर एसी गैस के 220 टिन का इनवॉइस और फोटो भेजकर 82 हजार रुपए ऑनलाइन जमा कराने को कहा।

    व्यापारी ने भरोसा कर मुंबई स्थित बैंक खाते में भुगतान कर दिया। इसके बाद आरोपी ने गति इंटरप्राइजेज के नाम से एक बिल्टी भी भेजी, लेकिन काफी समय तक सामान नहीं पहुंचा। जांच करने पर पता चला कि भेजी गई बिल्टी एआई तकनीक से तैयार की गई फर्जी दस्तावेज थी। जब आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया, तब व्यापारी को ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने बैंक में भुगतान रोकने का प्रयास किया और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।

    दूसरी घटना कनाड़िया थाना क्षेत्र की है। राज वर्मा के पास व्हाट्सएप कॉल कर खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि उनके बेटे को रेप के आरोप में तीन अन्य युवकों के साथ गिरफ्तार किया गया है। ठग ने बेटे को जेल से बचाने के लिए तत्काल तीन लाख रुपए की मांग की और डर का माहौल बनाकर पैसे भेजने का दबाव बनाया।

    घबराए राज वर्मा ने अपने पास केवल 90 हजार रुपए होने की बात कही। इसके बाद ठगों ने बताए गए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करा ली। कुछ देर बाद जब उन्होंने अपने बेटे से संपर्क किया तो पता चला कि वह पूरी तरह सुरक्षित है और उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

    दोनों मामलों में साइबर हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों के आधार पर संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच कर आरोपियों की पहचान में जुटी है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन खरीदारी के दौरान केवल सत्यापित विक्रेताओं से ही लेनदेन करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अग्रिम भुगतान न करें और यदि कोई पुलिस, सीबीआई या अन्य अधिकारी बनकर फोन पर गिरफ्तारी या जमानत के नाम पर पैसे मांगे तो पहले संबंधित व्यक्ति या स्थानीय पुलिस से पुष्टि जरूर करें। ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन धोखाधड़ी की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में दें।

  • चारधाम से लौटते वक्त मौत ने घेरा: 'बस छूट जाती तो पत्नी आज जिंदा होती', दौसा हादसे के पीड़ित की भावुक कहानी

    चारधाम से लौटते वक्त मौत ने घेरा: 'बस छूट जाती तो पत्नी आज जिंदा होती', दौसा हादसे के पीड़ित की भावुक कहानी


    मध्यप्रदेश । चारधाम यात्रा पूरी कर खुशियों के साथ घर लौट रहे इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार चंद्रप्रकाश (चंदू) गुप्ता ने कभी नहीं सोचा था कि यह सफर उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन जाएगा। 30 जून की रात राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर हुए भीषण बस हादसे में उनकी पत्नी निर्मला गुप्ता की मौत हो गई। हादसे से कुछ घंटे पहले ही निर्मला ने मुस्कुराते हुए सोशल मीडिया पर ‘यात्रा पूरी’ लिखकर स्टेटस लगाया था। परिवार से बात हुई, भविष्य की योजनाएं बनीं, लेकिन घर पहुंचने से पहले ही जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया जिसने पूरा परिवार बिखेर दिया।

    चंद्रप्रकाश गुप्ता बताते हैं कि उनकी पत्नी पिछले तीन वर्षों से दोबारा चारधाम यात्रा पर जाने की जिद कर रही थीं। पहले भी दोनों यात्रा कर चुके थे, लेकिन निर्मला का कहना था कि अब वहां काफी बदलाव हो चुके हैं और एक बार फिर दर्शन करना चाहती हैं। यात्रा की तैयारी पूरी थी और ट्रेन की कन्फर्म टिकट भी मिल चुकी थी, लेकिन सुविधा को देखते हुए बस से जाने का फैसला किया गया। आज उन्हें सबसे ज्यादा यही बात सालती है कि अगर उस दिन बस नहीं पकड़ी होती तो शायद उनकी पत्नी आज उनके साथ होती।

    हरिद्वार से लौटते समय बस पकड़ने के लिए दोनों ने काफी मशक्कत की। पहले गलत बस स्टैंड पहुंचे, फिर सामान उठाकर कई सौ मीटर पैदल चलना पड़ा। कई बार बस संचालक से संपर्क किया और आखिरकार इंदौर जाने वाली बस मिल गई। उस समय उन्हें लगा कि बस छूटने से बच गए, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यही बस निर्मला की आखिरी यात्रा साबित होगी।

    बस में बैठने के बाद निर्मला बेहद खुश थीं। उन्होंने बच्चों से फोन पर बात की और सोशल मीडिया पर ‘यात्रा पूरी’ का स्टेटस लगाया। इंदौर लौटने के बाद विदिशा, वृंदावन, सांवरिया सेठ और कुलदेवी के दर्शन की भी योजना बना ली गई थी। परिवार के साथ आने वाले दिनों की बातें हो रही थीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

    रात करीब ढाई बजे तेज धमाके के साथ बस आगे चल रहे ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि ऊपर की बर्थ पर सो रहे यात्री नीचे गिर पड़े और कुछ ही पलों में बस में अफरा-तफरी मच गई। चंद्रप्रकाश बताते हैं कि उनकी पत्नी खिड़की की तरफ सो रही थीं और उसी दिशा से ट्रेलर बस के अंदर तक घुस आया। उन्होंने कई बार पत्नी को आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

    उन्होंने किसी तरह पत्नी का फंसा हुआ पैर निकाला और उन्हें बाहर लाने की कोशिश की, लेकिन तभी किसी ने उन्हें जबरदस्ती बस से बाहर खींच लिया। कुछ ही क्षणों में बस आग की लपटों में घिर गई। वे दोबारा पत्नी को बचाने दौड़े, लेकिन आग इतनी तेजी से फैल चुकी थी कि अंदर जाना असंभव हो गया। उनकी आंखों के सामने ड्राइवर भी स्टीयरिंग में फंसा रह गया और जिंदा जल गया।

    चंद्रप्रकाश कहते हैं कि हादसे के बाद के वे सात-आठ मिनट उनकी पूरी जिंदगी बदल देने वाले थे। मोबाइल, सामान और जीवनसाथी—सब कुछ एक साथ छिन गया। सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात की रही कि आसपास मौजूद कई लोग वीडियो बनाते रहे, लेकिन मदद के लिए बहुत कम लोग आगे आए। आखिरकार एक युवक ने उन्हें अपना मोबाइल दिया, जिससे उन्होंने बेटे को फोन कर सिर्फ इतना कहा—”बहुत बड़ा हादसा हो गया है।”

    करीब 44 वर्षों तक साथ निभाने वाली निर्मला गुप्ता को याद करते हुए उनकी आंखें भर आती हैं। वे बताते हैं कि बच्चों की पढ़ाई से लेकर परिवार की हर जिम्मेदारी उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाई। तीनों बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने और जीवन में आगे बढ़ाने में उनका सबसे बड़ा योगदान था। सरल स्वभाव, सादगी और परिवार के प्रति समर्पण ही उनकी पहचान थी।

    आज चंद्रप्रकाश गुप्ता के लिए चारधाम यात्रा की यादें आस्था से ज्यादा एक ऐसे दर्द की कहानी बन चुकी हैं, जिसने कुछ ही मिनटों में उनका पूरा संसार बदल दिया। उनके शब्दों में, “हम घर लौट रहे थे… लेकिन एक पल में सब खत्म हो गया।”

  • नाना पटवारी ने मानी पुरानी ड्रग्स की लत, बोले- रिहैब के बाद छोड़ा नशा; कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को बताया राजनीतिक प्रतिशोध

    नाना पटवारी ने मानी पुरानी ड्रग्स की लत, बोले- रिहैब के बाद छोड़ा नशा; कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को बताया राजनीतिक प्रतिशोध


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी को पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। शुक्रवार को इंदौर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाना पटवारी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि वे करीब तीन साल पहले तक ड्रग्स का सेवन करते थे, लेकिन रिहैब सेंटर में इलाज के बाद उन्होंने नशा पूरी तरह छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि आज उनका ड्रग तस्करी से कोई संबंध नहीं है और उनकी सबसे बड़ी गलती सिर्फ इतनी है कि वे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई हैं।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाना पटवारी ने दावा किया कि ड्रग्स मामले में गिरफ्तार आरोपियों से उनका कोई लेन-देन या संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि वे अपनी कार की सर्विसिंग कराने गए थे, तभी पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई। उनके अनुसार थाने में उनसे केवल सामान्य पूछताछ की गई, लेकिन हिरासत में लेने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे दिन उन्हें अलग-अलग स्थानों पर घुमाया गया और देर रात बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया।

    नाना पटवारी ने कहा कि उनकी कार संजय कौशल उर्फ रॉनी के सर्विस सेंटर पर सर्विस होती है और वहीं काम करने वाले कुछ लोगों के बारे में पुलिस ने उनसे पूछताछ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस स्कॉर्पियो वाहन की चर्चा हो रही है, वह उनकी नहीं बल्कि संजय कौशल की है और उसमें मिले किसी भी सामान से उनका कोई संबंध नहीं है।

    इस पूरे मामले को कांग्रेस ने राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों को निशाना बना रही है। उनका कहना है कि नाना पटवारी का ड्रग तस्करी प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें केवल राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से हिरासत में लिया गया।

    दूसरी ओर इंदौर पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह जांच के आधार पर की गई। डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत के मुताबिक राजेंद्र नगर क्षेत्र से ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार दो आरोपियों इरफान खान उर्फ गोलू चंदेरी और संजय कौशल उर्फ रॉनी ने पूछताछ के दौरान नाना पटवारी और मानव गंगवानी का नाम लिया था। इसी आधार पर दोनों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस ने बताया कि फिलहाल कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है और जांच में जिसकी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    नाना पटवारी पहले भी कई मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनके खिलाफ हत्या के प्रयास सहित लगभग दस आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आ चुकी है। वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया था। वहीं वर्ष 2025 में जमीन विवाद और 2018 में महिला से कथित अभद्रता के मामले में भी उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। उनका नाम खुशी कूलवाल आत्महत्या मामले की जांच के दौरान भी सामने आया था, हालांकि उस मामले में उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।

    फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, जबकि पुलिस का कहना है कि जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

  • खेती छोड़ बना ड्रग तस्कर, मंदसौर से ब्राउन शुगर लाकर इंदौर में करता था सप्लाई, 11 लाख का माल जब्त

    खेती छोड़ बना ड्रग तस्कर, मंदसौर से ब्राउन शुगर लाकर इंदौर में करता था सप्लाई, 11 लाख का माल जब्त


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के अभियान के तहत इंदौर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। खजराना थाना पुलिस ने शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए 110 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है। बरामद मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 11 लाख रुपए आंकी गई है। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया है कि वह मंदसौर से सस्ते दामों पर ब्राउन शुगर खरीदकर इंदौर में ऊंचे दामों पर बेचता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस अवैध कारोबार के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।

    पुलिस के अनुसार मुखबिर से सूचना मिली थी कि बायपास स्थित वाघेला गार्डन के पास एक युवक बड़ी मात्रा में ब्राउन शुगर लेकर ग्राहकों की तलाश में घूम रहा है। सूचना मिलते ही खजराना थाना पुलिस ने तत्काल घेराबंदी की और संदिग्ध युवक को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 110 ग्राम ब्राउन शुगर और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

    गिरफ्तार आरोपी की पहचान 28 वर्षीय रामकिशन उर्फ रामनिवास गिरी निवासी ग्राम काटिया थाना सुवासरा जिला मंदसौर के रूप में हुई है। वह आठवीं तक पढ़ा है और खेती का काम करता था। पूछताछ में उसने बताया कि वह स्वयं भी नशे का आदी है। इसी लत और जल्दी पैसा कमाने की चाहत ने उसे नशे के कारोबार में धकेल दिया। आरोपी ने स्वीकार किया कि वह मंदसौर के कोटड़ी क्षेत्र से ब्राउन शुगर खरीदकर इंदौर लाता था और यहां अधिक कीमत पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाता था।

    थाना प्रभारी मनोज सिंह सेंधव ने बताया कि आरोपी को पुलिस रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य ब्राउन शुगर की सप्लाई चेन का पता लगाना और उन लोगों की पहचान करना है जो इस अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं। पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन की भी जांच कर रही है ताकि उसके संपर्क में रहने वाले सप्लायरों और ग्राहकों तक पहुंचा जा सके।

    इंदौर पुलिस का कहना है कि शहर में नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास नशे की खरीद-फरोख्त या संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। जनसहयोग और सख्त कार्रवाई के जरिए ही युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाया जा सकता है और समाज को इस गंभीर खतरे से सुरक्षित रखा जा सकता है।