Tag: Investment

  • आईपीओ बाजार में फाइनेंशियल सेक्टर की मजबूत पकड़ 34% हिस्सेदारी

    आईपीओ बाजार में फाइनेंशियल सेक्टर की मजबूत पकड़ 34% हिस्सेदारी

    नई दिल्ली:  नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया यानी एनएसई की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग IPO के जरिए फंड जुटाने में फाइनेंशियल सेक्टर ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया है। अप्रैल से फरवरी की अवधि में जुटाई गई कुल राशि में इस सेक्टर की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत रही, जो अन्य सभी क्षेत्रों से अधिक है

    रिपोर्ट में बताया गया कि फाइनेंशियल सेक्टर के बाद कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी सेक्टर की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत रही, जबकि इंडस्ट्रियल सेक्टर ने 11 प्रतिशत योगदान दिया। यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान मुख्य रूप से वित्तीय और उपभोक्ता आधारित कंपनियों की ओर बना हुआ है

    एसएमई SME सेगमेंट में अलग रुझान देखने को मिला। यहां इंडस्ट्रियल सेक्टर 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा, जबकि कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी 23 प्रतिशत और मटेरियल सेक्टर 10 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शामिल रहे। यह दिखाता है कि छोटे और मझोले उद्योगों में औद्योगिक कंपनियों की भागीदारी ज्यादा है

    मेनबोर्ड आईपीओ की बात करें तो अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच 99 कंपनियों ने आईपीओ के जरिए 1,65,036 करोड़ रुपए जुटाए। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में भी मजबूत वृद्धि को दर्शाता है, जहां 79 कंपनियों ने 1,62,517 करोड़ रुपए जुटाए थे

    हालांकि, एसएमई आईपीओ में कुछ गिरावट देखी गई है। वित्त वर्ष 2026 में अब तक 105 एसएमई आईपीओ लिस्ट हुए, जिनसे कुल 5,121 करोड़ रुपए जुटाए गए, जबकि पिछले वर्ष 163 आईपीओ के जरिए 7,111 करोड़ रुपए जुटाए गए थे

    निवेशकों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। फरवरी 2026 तक एनएसई पर पंजीकृत निवेशकों की संख्या 12.8 करोड़ तक पहुंच गई। हर महीने औसतन 13.6 लाख नए निवेशक बाजार से जुड़ रहे हैं, जो भारत के पूंजी बाजार की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है

    राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र 2 करोड़ से अधिक निवेशकों के साथ पहला राज्य बन गया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल और राजस्थान प्रमुख निवेशक आधार वाले राज्य हैं

  • FD Scheme: एफडी कराने की सोच रहे हैं तो पत्नी के नाम से कराएं, हो जाएंगे मालामाल

    FD Scheme: एफडी कराने की सोच रहे हैं तो पत्नी के नाम से कराएं, हो जाएंगे मालामाल


    नई दिल्ली। जैसे जैसे निवेश के नए नए तरीके सामने आ रहे हैं वैसे वैसे लोग उन्हें अपनाते जा रहे है। हालांकि एक वर्ग ऐसा भी है जो आज भी एफड़ी और आरडी जैसे पारंपरिक निवेशों में यकीन रखता है। आमतौर पर देखा जाता है कि नौकरीपेशा लोग अपने नाम से एफडी कराते हैं। लेकिन अगर आप अपने बजाय अपनी पत्नी के नाम से एफडी कराएं तो आप न सिर्फ मोटा रिटर्न कमा सकते हैं बल्कि काफी पैसे भी बचा सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे?

    FD से मिले ब्याज पर 10% कटौती
    अगर कोई व्यक्ति एक लेखा वर्ष में एफडी पर 50 हजार रुपये से ज्यादा का ब्याज प्राप्त करता है तो उसे उस राशि पर 10 प्रतिशत TDS देय होता है। जबकि किसी व्यक्ति के पास पैन नंबर नहीं है तो इस राशि का प्रतिशत दोगुना हो जाता है यानी 20 प्रतिशत। ऐसी स्थिति में अगर आपकी पत्नी टैक्स ब्रैकेट से बाहर हैं या हाउसवाइफ हैं तो आपकी यह राशि एकमुश्त बच सकती है।

    पत्नी के नाम पर FD कराने से होगी बंपर बचत
    नए टैक्स सिस्टम में जिन लोगो की कुल टैक्सेबल इनकम 4 लाख रुपये से कम है और पुराने टैक्स सिस्टम में जिन लोगों की इनकम 2.5 लाख रुपये से कम है उन्हें एफड़ी पर TDS देय नहीं होता है। उन्हें TDS से छूट दी जाती है। लिहाजा अगर आपकी पत्नी हाउस वाइफ हैं तो स्वभाविक है कि वह टैक्स के दायरे से बाहर होंगी इसलिए उनके नाम से एफडी करवाने से आप TDS की पूरी पूरी बचत कर सकते हैं।

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    इसके अलावा, अगर आप जॉइंट एफडी कराते हैं और अपनी पत्नी को फर्स्ट होल्डर बनाते हैं तो ऐसी स्थिति में भी आप काफी बचत कर सकते हैं। बताते चलें कि ये फायदा सिर्फ उन लोगों को मिल सकता है, जिनकी पत्नी जॉब नहीं करती हैं।

  • अगले हफ्ते शेयर बाजार में IPO की बारिश, 4 कंपनियां खोलेंगी पब्लिक इश्यू, निवेशकों के लिए बड़ा मौका

    अगले हफ्ते शेयर बाजार में IPO की बारिश, 4 कंपनियां खोलेंगी पब्लिक इश्यू, निवेशकों के लिए बड़ा मौका

    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए अगला हफ्ता बेहद अहम रहने वाला है। 9 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में देश में चार नए आईपीओ खुलने जा रहे हैं। इनमें से तीन पब्लिक इश्यू मेनबोर्ड सेगमेंट से जुड़े हैं जबकि एक आईपीओ एसएमई सेगमेंट का है। इसके अलावा पहले से खुले दो आईपीओ में भी निवेश का मौका मिलेगा। ऐसे में निवेशकों के पास अलग अलग सेक्टर की कंपनियों में पैसा लगाने का अच्छा अवसर रहेगा।

    आने वाले सप्ताह में जिन कंपनियों के आईपीओ खुलने वाले हैं उनमें राजपूताना स्टेनलेस, इनोविजन, एप्सिस एरोकॉम और राजमार्ग इंफ्रा इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट शामिल हैं। इन कंपनियों के जरिए बाजार से हजारों करोड़ रुपये जुटाने की योजना है।

    सबसे पहले राजपूताना स्टेनलेस का आईपीओ 9 मार्च को खुलेगा और 11 मार्च को बंद होगा। यह लगभग 254.98 करोड़ रुपये का इश्यू है। कंपनी ने इसके लिए 116 से 122 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है और एक लॉट में 110 शेयर होंगे। इस कंपनी के शेयर 16 मार्च को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होने की संभावना है।

    इसके बाद इनोविजन का आईपीओ 10 मार्च को खुलेगा और 12 मार्च को बंद होगा। कंपनी का लक्ष्य लगभग 322.84 करोड़ रुपये जुटाना है। इसके लिए 521 से 548 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है और एक लॉट में 27 शेयर शामिल होंगे। कंपनी के शेयर 17 मार्च को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध हो सकते हैं।

    तीसरा आईपीओ एप्सिस एरोकॉम का है जो 11 मार्च को खुलेगा और 13 मार्च को बंद होगा। यह एसएमई सेगमेंट का इश्यू है और कंपनी करीब 35.77 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसके लिए 104 से 110 रुपये प्रति शेयर का प्राइस तय किया गया है और लॉट साइज 1200 शेयर का है। इस कंपनी के शेयर 18 मार्च को एनएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने की संभावना है।

    इसके अलावा राजमार्ग इंफ्रा इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट का बड़ा आईपीओ भी 11 मार्च को खुलेगा और 13 मार्च को बंद होगा। करीब 6000 करोड़ रुपये के इस इश्यू के लिए कंपनी ने 99 से 100 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। इस कंपनी के शेयर 24 मार्च को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होने की उम्मीद है।

    इन नए आईपीओ के अलावा दो ऐसे आईपीओ भी हैं जो पहले से खुले हुए हैं और जिनमें निवेशक अब भी पैसा लगा सकते हैं। एल्फिन एग्रो इंडिया का आईपीओ 5 मार्च को खुला था और 9 मार्च को बंद होगा। कंपनी करीब 25.03 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है और इसका प्राइस 47 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। एक लॉट में 3000 शेयर हैं और कंपनी के शेयर 12 मार्च को बीएसई एसएमई पर लिस्ट होने की संभावना है।

    वहीं श्रीनिबासा प्रधान कंस्ट्रक्शन्स का आईपीओ 6 मार्च को खुला था और 10 मार्च को बंद होगा। करीब 20.32 करोड़ रुपये के इस इश्यू को अभी तक लगभग 9 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन मिला है। इसके लिए 91 से 98 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड रखा गया है और लॉट साइज 1200 शेयर है। कंपनी के शेयर 13 मार्च को एनएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर डेब्यू कर सकते हैं।

    आने वाला सप्ताह आईपीओ बाजार के लिहाज से काफी व्यस्त रहने वाला है। मेनबोर्ड और एसएमई दोनों सेगमेंट में कई कंपनियां बाजार में उतर रही हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे निवेश करने से पहले कंपनियों के कारोबार, वित्तीय स्थिति और जोखिम कारकों का सावधानी से विश्लेषण करें, ताकि सही निर्णय लेकर बेहतर रिटर्न हासिल किया जा सके।

  • सोने-चांदी के दामों में जोरदार उछाल, निवेशकों की मांग बढ़ी.

    सोने-चांदी के दामों में जोरदार उछाल, निवेशकों की मांग बढ़ी.


    नई दिल्ली। शुक्रवार सुबह घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। Multi Commodity Exchange यानी MCX पर सोने के भाव 500 रुपये से अधिक बढ़ गए और चांदी के भाव में 9,000 रुपये से भी अधिक की उछाल दर्ज की गई। सुबह के शुरुआती कारोबार में अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 525 रुपये बढ़कर 1,60,234 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। इसी तरह मई डिलीवरी वाली चांदी में 9,547 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी के बाद भाव 2,77,500 रुपये तक जा पहुंचा। हालांकि दिन के मध्य में थोड़ी मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में तेजी की लहर मजबूत बनी रही।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी की इस तेजी के पीछे वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक तनाव मुख्य कारण हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती अनिश्चितता, अमेरिकी टैरिफ को लेकर निवेशकों की चिंताएं और वैश्विक बाजार में सॉलिडिटी की तलाश ने कीमती धातुओं में मांग बढ़ा दी है। निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ते हुए सोने-चांदी को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    विशेष रूप से चांदी की कीमत में इतनी तेज बढ़ोतरी देखी गई है कि यह फिर से 2.75 लाख रुपये प्रति किलो के पार चली गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और बढ़ता रहा तो यह रुझान आगे भी जारी रह सकता है। सोने में निवेशकों की मजबूत रुचि के कारण एमसीएक्स पर सोने के कारोबार में भी जोरदार तेजी बनी रही।

    इस तेजी का असर सिर्फ निवेशकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि ज्वेलरी मार्केट और स्थानीय सोने-चांदी व्यापारियों के भाव में भी असर दिखा। व्यापारियों ने कहा कि खरीदारी में तेजी के चलते कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। विशेषकर त्योहार और शादी के सीजन में सोने-चांदी की कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी आम लोगों के बजट को प्रभावित कर सकती है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह दे रहे हैं कि निवेशक भावों में अचानक उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर निवेश करें। हालांकि सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोना और चांदी हमेशा आकर्षक रहे हैं, लेकिन मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के कारण उतार-चढ़ाव अधिक देखने को मिल रहा है।

    इस बीच, घरेलू वायदा बाजार में एमसीएक्स के आंकड़े बताते हैं कि सोना और चांदी में तेजी की शुरुआत सुबह के शुरुआती कारोबार से ही हुई थी और निवेशकों ने इसी लहर का फायदा उठाया। अप्रैल डिलीवरी वाले सोने का भाव लगातार बढ़कर 1,60,234 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया जबकि मई डिलीवरी वाली चांदी ने 2,77,500 रुपये प्रति किलो का स्तर छू लिया।

    वैश्विक निवेशकों की नजरों में बढ़ते तनाव और टैरिफ अस्थिरता ने सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश का प्रमुख साधन बना दिया है। इसलिए घरेलू बाजार में भी तेजी की यह लहर मजबूत बनी हुई है। निवेशक और व्यापारी इस उछाल का लाभ उठाने की रणनीति बना रहे हैं।

  • चांदी ₹6,667 लुढ़की, ₹2.34 लाख पर आई; सोना ₹2,903 गिरकर ₹1.51 लाख, 4 दिन में बड़ी गिरावट

    चांदी ₹6,667 लुढ़की, ₹2.34 लाख पर आई; सोना ₹2,903 गिरकर ₹1.51 लाख, 4 दिन में बड़ी गिरावट


    नई दिल्ली । सोना-चांदी की कीमतों में आज 17 फरवरी को लगातार चौथे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई। India Bullion and Jewellers Association IBJA के अनुसार, एक किलो चांदी 6,667 रुपए गिरकर ₹2.34 लाख पर आ गई है। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,903 रुपए सस्ता होकर ₹1.51 लाख पर पहुंच गया है।

    पिछले चार कारोबारी दिनों में चांदी की कीमत में कुल ₹32 हजार की गिरावट आई है। 29 जनवरी को चांदी ने ₹3.86 लाख प्रति किलो का ऑल टाइम हाई बनाया था। तब से अब तक इसमें ₹1.51 लाख की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। सोना भी दबाव में है। चार दिनों में यह करीब ₹6 हजार सस्ता हुआ है। 29 जनवरी को 10 ग्राम सोना ₹1.76 लाख के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, जो अब तक ₹25 हजार तक टूट चुका है।

    हालांकि साल 2025 के पूरे आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर अलग दिखती है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹76 हजार था, जो 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर ₹1.33 लाख हो गयायानी सालभर में ₹57 हजार करीब 75% की तेजी। इसी अवधि में चांदी ₹86 हजार प्रति किलो से बढ़कर ₹2.30 लाख हो गई, यानी ₹1.44 लाख करीब 167% की उछाल।

    अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग क्यों?

    ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी लागत: आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ईंधन और सुरक्षा खर्च बढ़ता है, जिससे स्थानीय रेट प्रभावित होते हैं। खपत और बल्क खरीद: दक्षिण भारत में करीब 40% खपत होने से ज्वेलर्स बड़ी मात्रा में खरीद करते हैं, जिससे उन्हें छूट मिलती है। लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य के अपने एसोसिएशन होते हैं, जो मांग-सप्लाई के आधार पर स्थानीय रेट तय करते हैं। पुराना स्टॉक: ज्वेलर्स ने स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, इसका असर भी बिक्री मूल्य पर पड़ता है।

    सोना खरीदते समय रखें ध्यान

    हमेशा Bureau of Indian Standards BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। खरीद से पहले IBJA या अन्य विश्वसनीय स्रोतों से रेट क्रॉस-चेक करें।

    असली चांदी की पहचान के तरीके

    मैग्नेट टेस्ट: असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती। आइस टेस्ट: असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली चांदी में कोई गंध नहीं होती। क्लॉथ टेस्ट: सफेद कपड़े से रगड़ने पर काला निशान आना शुद्धता का संकेत हो सकता है। इसी बीच Morgan Stanley की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में करीब 34,600 टन सोना जमा है, जिसकी कुल वैल्यू देश की GDP से भी ज्यादा आंकी गई है।

  • चांदी में गिरावट ₹1,486, सोना बढ़ा ₹1,333; निवेशकों में खरीदारी का रुझान

    चांदी में गिरावट ₹1,486, सोना बढ़ा ₹1,333; निवेशकों में खरीदारी का रुझान


    नई दिल्ली। 16 फरवरी 2026 को चांदी की कीमत में लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन IBJA के अनुसार, एक किलो चांदी 1,486 रुपए सस्ती होकर ₹2,40,947 पर आ गई है। शुक्रवार को यह ₹2,42,433 प्रति किलो था। 18 दिनों में चांदी की कीमत में कुल ₹1,44,986 की गिरावट हो चुकी है।

    वहीं, सोने में बढ़त देखी गई है। आज 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹1,333 महंगा होकर ₹1,54,098 पर पहुंच गया। शुक्रवार को सोने का भाव ₹1,52,765 प्रति 10 ग्राम था। पिछले तीन कारोबारी दिनों में सोना ₹3,224 और चांदी ₹25,502 सस्ता हुआ था। 29 जनवरी को सर्राफा बाजार में सोने ने ₹1,76,121 और चांदी ने ₹3,85,933 का ऑल टाइम हाई बनाया था। तब से अब तक सोने की कीमत में ₹22,023 और चांदी में ₹1,44,986 की गिरावट आई है।

    शहरों में अलग-अलग रेट क्यों?

    IBJA के रेट्स में 3% GST, ज्वेलर्स का मेकिंग चार्ज और मार्जिन शामिल नहीं होता, इसलिए विभिन्न शहरों में कीमतें अलग हो सकती हैं। RBI सोवरेन गोल्ड बॉन्ड और कई बैंक गोल्ड लोन के रेट तय करने में इन रेट्स का उपयोग करते हैं।

    निवेशक खरीदारी में सक्रिय

    सोने-चांदी में हालिया गिरावट के बाद निवेशक निचले स्तर पर खरीदारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी एकमुश्त निवेश की बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर होगा।

    सोना खरीदते समय ध्यान रखें:

    सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें हमेशा BIS हॉलमार्क वाला गोल्ड लें, जो अल्फान्यूमेरिक नंबर जैसे AZ4524 के साथ आता है। कीमत क्रॉस चेक करें खरीद के दिन सही वजन और 24, 22 या 18 कैरेट के हिसाब से कीमत की पुष्टि करें। चांदी और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए अवसर और सावधानी दोनों का संकेत है।

  • इस्पात मंत्रालय ने 85 विशेष इस्पात परियोजनाओं के लिए 11,887 करोड़ रुपये के निवेश वाले एमओयू पर किए हस्ताक्षर

    इस्पात मंत्रालय ने 85 विशेष इस्पात परियोजनाओं के लिए 11,887 करोड़ रुपये के निवेश वाले एमओयू पर किए हस्ताक्षर


    नई दिल्‍ली।
    इस्पात मंत्रालय (Ministry of Steel) ने 85 विशेष इस्पात परियोजनाओं (Special Steel Projects) के लिए 11,887 करोड़ रुपये के निवेश वाले एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) (Memorandum of Understanding – MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। मंत्रालय ने सोमवार को विशेष इस्पात के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) योजना 1.2 के तहत 55 कंपनियों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।

    इस्पात मंत्रालय ने जारी एक बयान में बताया कि नई दिल्ली के विज्ञान भवन में इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी तथा इस्पात मंत्रालय के अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में विशेष इस्पात के लिए उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना 1.2 के तीसरा चरण के तहत 55 कंपनियों की 85 परियोजनाओं के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

    केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने इस अवसर पर उद्योग की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना भारत सरकार का एक प्रमुख सुधार है जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि हालांकि भारत ने पहले ही विशेष और मिश्र धातु इस्पात विनिर्माण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। इन नए निवेशों के साथ भारत अपनी क्षमताओं को और गहरा करेगा, आयात निर्भरता कम करेगा, विदेशी मुद्रा संरक्षित करेगा तथा विश्व के लिए उच्च-मूल्य वाले इस्पात के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरेगा।

    इस अवसर पर इस्पात मंत्रालय के सचिव संदीप पौंडरिक ने इस बात का उल्लेख किया कि योजना की सफलता भाग लेने वाली कंपनियों द्वारा समय पर निवेश, कमीशनिंग तथा उत्पादन की निरंतरता पर निर्भर करती है। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि मंत्रालय भाग लेने वाली कंपनियों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करेगा।

    इस्‍पात मंत्रालय के मुताबिक पीएलआई 1.2 के तीसरा चरण का शुभारंभ भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस चरण में भाग लेने वाली कंपनियों ने 11,887 करोड़ रुपये का निवेश तथा डाउनस्ट्रीम इस्पात और मिश्र धातु निर्माण में 87 लाख टन की प्रतिबद्ध क्षमता का वचन दिया है।

    उल्‍लेखनीय है कि विशेष इस्पात के लिए उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को जुलाई, 2021 में इस्पात क्षेत्र के डाउनस्ट्रीम खंड में विनिर्माण को बढ़ावा देने, पूंजी निवेश आकर्षित करने तथा प्रौद्योगिकी उन्नयन का समर्थन करने के लिए शुरू किया गया था।

  • IPL 2026 में बदल सकता है विराट कोहली की RCB का मालिक, अदर पूनावाला के पोस्ट से बढ़ीं अटकलें

    IPL 2026 में बदल सकता है विराट कोहली की RCB का मालिक, अदर पूनावाला के पोस्ट से बढ़ीं अटकलें


    नई दिल्ली। IPL 2026 में बदल सकता है विराट कोहली की RCB का मालिक, अदर पूनावाला के पोस्ट से बढ़ीं अटकलें
    बेंगलुरु। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के स्वामित्व में बदलाव की खबरों ने क्रिकेट प्रेमियों में हलचल मचा दी है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदर पूनावाला ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पोस्ट में संकेत दिए कि वह RCB के लिए “मजबूत और प्रतिस्पर्धी” बोली लगाने जा रहे हैं।

    पूनावाला ने अपने पोस्ट में लिखा: “आने वाले कुछ महीनों में मैं आईपीएल की सबसे बेहतरीन टीमों में से एक RCB के लिए एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बोली पेश करूंगा।” हालांकि उन्होंने बोली की समय-सीमा या संभावित राशि का जिक्र नहीं किया।

    आईपीएल 2026 की शुरुआत 26 मार्च से प्रस्तावित है, इसलिए यह प्रक्रिया जल्द पूरी करनी होगी।

    RCB की बिक्री की पृष्ठभूमि:
    ‘फोर्ब्स इंडिया’ के अनुसार, RCB का मूल्य लगभग 105 मिलियन डॉलर है। मौजूदा मालिक यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (यूएसएल) है, जो डियाजियो की भारतीय इकाई है। टीम के चार जून 2025 को हुए जीत समारोह में हुई भगदड़ में 11 प्रशंसकों की मौत के बाद बिक्री प्रक्रिया को तेज किया गया था। बता दें कि यूनाइटेड स्पिरिट्स ने 2016 में विजय माल्या के कारोबार के पतन के बाद RCB को अधिग्रहित किया था। 

    https://twitter.com/adarpoonawalla/status/2014318866147742087

    घरेलू मुकाबलों का स्थान भी सवालों में:
    पूनावाला के बयान के साथ ही अटकलें लगाई जा रही हैं कि आईपीएल 2026 में RCB अपने घरेलू मुकाबले बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर खेल सकती है। पुणे, मुंबई और रायपुर ने टीम से अपने शहर में मैचों की मेजबानी के लिए संपर्क किया है।
    कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (KCSA) ने RCB से बेंगलुरु में ही मैच आयोजित करने का आग्रह किया है।

    RCB ने कहा, “अभी कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर और विचार करने की जरूरत है। हम सभी सुझावों और पहलुओं पर गौर कर रहे हैं, ताकि टीम और प्रशंसकों के हित में जिम्मेदार निर्णय लिया जा सके।”

    अन्य संभावित दावेदार:
    पूनावाला के अलावा, विजय किरागंदूर की होम्बले फिल्म्स कंपनी भी RCB के स्वामित्व की दौड़ में मानी जा रही है। होम्बले फिल्म्स ‘केजीएफ’ और ‘कांतारा’ जैसी सुपरहिट फिल्मों की निर्माता है।

  • शेयर बाजार में जबरदस्त रिकवरी: सेंसेक्स 850 अंक उछलकर 82,750 पर, निफ्टी 25,400 के पार

    शेयर बाजार में जबरदस्त रिकवरी: सेंसेक्स 850 अंक उछलकर 82,750 पर, निफ्टी 25,400 के पार


    नई दिल्ली। गुरुवार, 22 जनवरी को घरेलू शेयर बाजार ने पिछले तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद दमदार वापसी की। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला और सेंसेक्स करीब 850 अंकों की छलांग लगाकर 82,750 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी में भी लगभग 250 अंकों की तेजी रही और यह 25,400 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। इस उछाल ने निवेशकों को बड़ी राहत दी और बाजार में दोबारा भरोसे का माहौल बना।

    बीएसई सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखे, जबकि केवल 2 शेयरों में हल्का दबाव रहा। जोमैटो, एशियन पेंट्स और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया SBI के शेयरों में 4 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा मेटल, ऑटो और आईटी सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार की चौड़ाई मजबूत रही और तेजी व्यापक आधार पर दिखाई दी।

    बाजार में इस मजबूती के पीछे सबसे अहम भूमिका ग्लोबल संकेतों की रही। अमेरिकी और एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक रुझानों ने घरेलू निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। इसके साथ ही पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयानों ने भी बाजार की चिंता को कम किया। ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर टैरिफ लगाने की धमकी वापस लेने और नाटो देशों के साथ बातचीत के संकेत देने से भू-राजनीतिक तनाव को लेकर आशंकाएं घटी हैं। इसके अलावा भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर उनके सकारात्मक रुख से निवेशकों में भरोसा बढ़ा है।एशियाई बाजारों की बात करें तो वहां मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। जापान का निक्केई इंडेक्स 1.77 प्रतिशत की तेजी के साथ 53,706 पर और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.87 प्रतिशत चढ़कर 5,001 के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स हल्की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। अमेरिकी बाजारों में भी मजबूती का असर दिखा, जहां 21 जनवरी को डाउ जोंस 1.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ था।

    निवेशकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 21 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों FIIs ने 1,787 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों DIIs ने 4,520 करोड़ रुपये की जोरदार खरीदारी कर बाजार को मजबूत सहारा दिया। दिसंबर 2025 में FIIs की भारी बिकवाली के बावजूद DIIs की सक्रिय भागीदारी ने बाजार को संतुलित बनाए रखा है।गौरतलब है कि बुधवार को बाजार दबाव में रहा था। उस दिन सेंसेक्स 270 अंक गिरकर 81,909 पर और निफ्टी 75 अंक टूटकर 25,157 पर बंद हुआ था। लेकिन गुरुवार की तेजी ने संकेत दिया है कि बाजार में रिकवरी की शुरुआत हो चुकी है। आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा काफी हद तक ग्लोबल संकेतों, भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़ी खबरों और निवेशकों की धारणा पर निर्भर करेगी।

  • FD की सुरक्षा, EMI का खर्च, SIP की ताकत: 20 साल बाद किसका पलड़ा भारी?

    FD की सुरक्षा, EMI का खर्च, SIP की ताकत: 20 साल बाद किसका पलड़ा भारी?


    नई दिल्ली। आज के समय में निवेश के लिए लोगों के पास तीन बड़े रास्ते हैंFD, EMI और SIP। FD को सुरक्षित माना जाता है, EMI से लोग अपनी जरूरतें पूरी करते हैं, जबकि SIP धीरे-धीरे पैसा बढ़ाने का काम करता है। लेकिन सवाल यह है कि 20 साल बाद कौन आपको अमीर बना सकता है? अगर आप आज अपनी कमाई का एक हिस्सा इन तीनों में से किसी भी रास्ते पर लगाते हैं, तो 20 साल बाद आपकी स्थिति कैसी होगी?
    चलिए एक आसान कैलकुलेशन के जरिए समझते हैं कि FD की सीमा क्या है, EMI का नुकसान कितना भारी है और SIP की कंपाउंडिंग पावर कितनी मजबूत है।

    सबसे पहले FD की बात करें। FD को भारत में भरोसे और सुरक्षा का दूसरा नाम माना जाता है।  20 साल बाद आपका फंड लगभग ₹52 लाख तक पहुंच सकता है। लेकिन अगर आप महंगाई को भी ध्यान में रखें, तो 20 साल बाद उस पैसे की असली वैल्यू लगभग ₹15-20 लाख के आसपास ही रह सकती है।

    इसका मतलब FD आपके पैसे को बचाती है, लेकिन महंगाई के हिसाब से बढ़ा नहीं पाती। FD में रिटर्न कम होने के कारण आपका पैसा “सुरक्षित” जरूर रहता है, लेकिन वह अमीर नहीं बनाता।

    अब EMI की बात करें। EMI आमतौर पर लोगों को तुरंत सुख देती है, लेकिन लंबे समय में यह आपके लिए भारी पड़ सकती है। जब आप किसी पर्सनल लोन या लग्जरी कार के लिए 20 साल तक ₹10,000 EMI भरते हैं, तो आप कुल मिलाकर लगभग ₹24 लाख तो दे ही देते हैं, साथ ही बैंक को ब्याज में लगभग ₹15-20 लाख अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। 20 साल बाद आपके पास केवल एक पुरानी चीज बचती है जिसकी वैल्यू काफी कम हो चुकी होती है।

    EMI असल में आपकी फ्यूचर की कमाई को आज ही खर्च कर देती है और आपके लिए एक लंबा ब्याज का बोझ छोड़ जाती है। इसलिए EMI आपको अमीर नहीं बनाती, बल्कि बैंक को अमीर बनाती है।

    तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण विकल्प SIP है। SIP में आप छोटे-छोटे निवेश करते हैं और कंपाउंडिंग की ताकत से लंबे समय में बड़ा फंड बनाते हैं। अगर आप हर महीने ₹10,000 की SIP करते हैं और औसतन 12% रिटर्न मानें, तो 20 साल बाद आपका निवेश लगभग ₹24 लाख होकर करीब ₹1 करोड़ से ज्यादा बन सकता है। और अगर रिटर्न 15% रहे तो यह राशि ₹1.5 करोड़ तक भी पहुंच सकती है।

    SIP का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बाजार के उतार-चढ़ाव को अपने पक्ष में इस्तेमाल करता है। शुरुआती सालों में मार्केट गिरती है तो units ज्यादा मिलते हैं, और बाद में जब मार्केट बढ़ता है तो वही units ज्यादा लाभ देती हैं।

    अब 20 साल की जंग में किसका पलड़ा भारी है? FD सुरक्षित है, लेकिन महंगाई के हिसाब से अमीर नहीं बनाती। EMI आपको तुरंत सुविधा देती है, लेकिन लंबी अवधि में यह आपकी कमाई को खा जाती है और ब्याज के बोझ से आपकी संपत्ति घटती है।

    वहीं SIP में जोखिम जरूर है, लेकिन लंबे समय में यह कंपाउंडिंग के जरिए सबसे ज्यादा फायदा देता है। अगर आपका लक्ष्य 20 साल में “वेल्थ” बनाना है और आप निवेश को समय के साथ बढ़ते देखना चाहते हैं, तो SIP सबसे बेहतर विकल्प माना जा सकता है।
    (नोट: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।)