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  • एनएसई आईपीओ की ग्रे मार्केट चमक फीकी, एक हफ्ते में जीएमपी करीब 32 प्रतिशत गिरा, निवेशकों की नजर वित्तीय प्रदर्शन पर

    एनएसई आईपीओ की ग्रे मार्केट चमक फीकी, एक हफ्ते में जीएमपी करीब 32 प्रतिशत गिरा, निवेशकों की नजर वित्तीय प्रदर्शन पर


    नई दिल्ली ।लंबे समय से प्रतीक्षित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई का आईपीओ गुरुवार से आम निवेशकों के लिए खुल गया। हालांकि, आईपीओ के बाजार में आने के साथ ही इसके ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है। पिछले एक सप्ताह के दौरान एनएसई के जीएमपी में करीब 32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे आईपीओ को लेकर निवेशकों की नजर अब केवल संभावित लिस्टिंग पर ही नहीं, बल्कि कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर भी बनी हुई है।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 11 सितंबर को एनएसई के आईपीओ का जीएमपी 218 रुपये प्रति शेयर था। इसके बाद 12 सितंबर को यह 208 रुपये, 13 सितंबर को 210 रुपये और 14 सितंबर को 208 रुपये रहा। 15 सितंबर को जीएमपी घटकर 160 रुपये और 16 सितंबर को 145 रुपये पर आ गया। 17 सितंबर को यह 125 रुपये बताया गया, जबकि दोपहर तीन बजे के आसपास यह 148 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर पहुंच गया। एक सप्ताह के दौरान इस स्तर पर कुल मिलाकर करीब 32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    ग्रे मार्केट प्रीमियम किसी आईपीओ के शेयरों के लिए अनौपचारिक बाजार में इश्यू प्राइस के ऊपर चल रहे प्रीमियम को दर्शाता है। हालांकि, जीएमपी आधिकारिक बाजार मूल्य नहीं होता और इसके आधार पर शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत की गारंटी नहीं दी जा सकती। आईपीओ की लिस्टिंग के समय बाजार की परिस्थितियां, निवेशकों की मांग और अन्य कारक वास्तविक कीमत को प्रभावित कर सकते हैं।

    एनएसई का आईपीओ 17 सितंबर से 21 सितंबर तक आम निवेशकों के लिए खुला रहेगा। कंपनी ने इसके लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी मूल्य सीमा के आधार पर इश्यू का आकार 22,561.57 करोड़ रुपये है। आईपीओ में कुल 12.64 करोड़ शेयर पेश किए जा रहे हैं।

    यह पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस के रूप में है। इसका मतलब है कि आईपीओ के तहत पेश किए जा रहे शेयर मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी से संबंधित हैं। इसलिए इश्यू से मिलने वाली राशि कंपनी के कारोबार में नई पूंजी के रूप में सीधे नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा निवेशकों को प्राप्त होगी।

    एनएसई के आईपीओ को लेकर निवेशकों के लिए कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की ऑपरेशन से आय 16,601.31 करोड़ रुपये रही। यह वित्त वर्ष 2025 में दर्ज 17,140.67 करोड़ रुपये की आय से कम है। इस तरह सालाना आधार पर ऑपरेशन से आय में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।

    कंपनी की आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल ट्रांजैक्शन चार्जेज में भी कमी आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार समीक्षा अवधि में यह आय 13,635.76 करोड़ रुपये से घटकर 13,057.01 करोड़ रुपये रह गई। यानी इसमें सालाना आधार पर करीब चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

    आईपीओ खुलने के साथ अब निवेशकों के सामने कंपनी के मूल्यांकन, वित्तीय प्रदर्शन, इश्यू प्राइस और बाजार में संभावित मांग जैसे कई पहलू हैं। वहीं जीएमपी में आई हालिया गिरावट ने संभावित लिस्टिंग प्रीमियम को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव का संकेत दिया है। हालांकि अंतिम लिस्टिंग कीमत का निर्धारण आधिकारिक बाजार में कारोबार शुरू होने के बाद ही होगा।

  • MP News: सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से की मुलाकात, निवेश और विकास परियोजनाओं पर हुई चर्चा

    MP News: सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से की मुलाकात, निवेश और विकास परियोजनाओं पर हुई चर्चा

    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्य एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया और केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात की। इन बैठकों में मध्यप्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों के साथ राज्य में निवेश और विकास परियोजनाओं को गति देने पर चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के बीच हुई मुलाकात में मध्यप्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। बातचीत के दौरान युवाओं के कौशल विकास और राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करने से जुड़े विषय प्रमुख रहे।

    मुख्यमंत्री ने युवाओं के कौशल विकास से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर केंद्रीय मंत्री के साथ चर्चा की। इसके साथ ही रोजगार के नए अवसरों के सृजन को लेकर भी विचार साझा किए गए। मुलाकात में मध्यप्रदेश के विकास को आगे बढ़ाने से जुड़े विषयों पर सार्थक बातचीत हुई।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से उनके नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित आवास पर मुलाकात की। इस दौरान मध्यप्रदेश में वस्त्र एवं टेक्सटाइल उद्योग में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

    बैठक में मध्यप्रदेश की वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। राज्य में इस क्षेत्र से जुड़ी निवेश संभावनाओं और रोजगार सृजन के अवसरों पर भी चर्चा की गई।

    मुख्यमंत्री और केंद्रीय वस्त्र मंत्री के बीच बातचीत में मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में और अधिक सशक्त बनाने से जुड़े विषयों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान राज्य की मौजूदा वस्त्र एवं परिधान क्षमता को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने और निवेश की संभावनाओं को गति देने पर विचार हुआ।

    चर्चा का एक प्रमुख पक्ष वस्त्र क्षेत्र के माध्यम से रोजगार के अवसरों से भी जुड़ा रहा। मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल और परिधान उद्योग की संभावनाओं को देखते हुए निवेश और रोजगार सृजन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई इन मुलाकातों में राज्य के विकास से जुड़े अलग-अलग विषय सामने रहे। एक ओर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्य एवं खेल मंत्री के साथ युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के नए अवसरों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, वहीं केंद्रीय वस्त्र मंत्री के साथ टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश और रोजगार की संभावनाओं पर बातचीत हुई।

    वस्त्र क्षेत्र को लेकर हुई चर्चा में मध्यप्रदेश की क्षमता को और मजबूत करने तथा राज्य को देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित करने से जुड़े विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श किया गया। निवेश की संभावनाओं और रोजगार सृजन के पहलुओं को भी बातचीत में शामिल किया गया।

    मुख्यमंत्री की इन बैठकों का उद्देश्य मध्यप्रदेश के विकास से जुड़े विषयों को आगे बढ़ाने और राज्य में निवेश तथा विकास परियोजनाओं को गति देने से संबंधित पहलुओं पर चर्चा करना रहा। केंद्रीय मंत्रियों के साथ मुलाकात में युवाओं, रोजगार, कौशल विकास और टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई।

    इस दौरान देश के समावेशी विकास को गति देने और मध्यप्रदेश के वस्त्र क्षेत्र की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के दिल्ली प्रवास में हुई इन बैठकों में राज्य में निवेश और रोजगार की संभावनाओं को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से सामने रहे।

  • ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत का ट्रेड प्लान, जयशंकर बोले- कारोबार के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद माहौल जरूरी

    ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत का ट्रेड प्लान, जयशंकर बोले- कारोबार के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद माहौल जरूरी


    नई दिल्ली ।
    ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत ने सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद कारोबारी माहौल बनाने पर जोर दिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने और अलग-अलग भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की दिशा में काम करने की बात कही।

    एस जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स अपनी सदस्यता, एजेंडे और सहयोग के तरीकों के लिहाज से लगातार विकसित हो रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में अस्थिरता और अनिश्चितता बनी हुई है, सदस्य देशों के लिए आर्थिक सहयोग को मजबूत करना महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया बड़े राजनीतिक और आर्थिक बदलावों के दौर से गुजर रही है और जटिल परिस्थितियां वैश्विक व्यवस्था की पहचान बन गई हैं।

    विदेश मंत्री के अनुसार, ब्रिक्स देशों के लिए आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने का अर्थ अपनी आत्मनिर्भरता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े और प्रतिस्पर्धी बने रहते हुए आर्थिक झटकों को सहने की क्षमता को मजबूत करना है। इसके लिए कारोबारी व्यवहार को बाजार के वास्तविक सिद्धांतों के अनुरूप बनाए रखना और व्यापारिक साझेदारियों में भरोसे को बढ़ाना जरूरी है।

    उन्होंने विविध व्यापारिक संबंधों, पारदर्शी व्यापार और निवेश व्यवस्था तथा ऐसे कारोबारी वातावरण की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसका अनुमान लगाया जा सके। उनके मुताबिक, कारोबारियों के लिए स्पष्ट और भरोसेमंद परिस्थितियां तैयार होने से उन्हें नए साझेदार तलाशने, नए बाजारों तक पहुंच बनाने और अलग-अलग देशों की क्षमताओं को व्यावहारिक कारोबारी साझेदारी में बदलने में मदद मिलेगी।

    जयशंकर ने ब्रिक्स देशों के बीच आपूर्ति नेटवर्क को जोड़ने की जरूरत भी बताई। मजबूत सप्लाई चेन तैयार होने से सदस्य देशों के कारोबारियों के लिए आपसी व्यापार और सहयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि देशों को अपनी क्षमताओं को व्यावहारिक कारोबारी साझेदारी में बदलने के लिए समन्वित प्रयास करने चाहिए।

    व्यापार और निवेश में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ निष्पक्ष बाजार व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। भारत की ओर से ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में विविधता लाने और आर्थिक सहयोग को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत बताई गई। इसके साथ ही सदस्य देशों की भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ने का सुझाव भी दिया गया।

    भारत नई दिल्ली में शनिवार और रविवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। ब्रिक्स में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को इसमें शामिल किया गया। इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी संगठन का सदस्य बना।

    ब्रिक्स के विस्तार के साथ संगठन के भीतर व्यापार और निवेश सहयोग का दायरा भी बढ़ा है। ऐसे में भारत ने सदस्य देशों के कारोबारियों के लिए अधिक बाजारों तक पहुंच, बेहतर सप्लाई नेटवर्क, पारदर्शी व्यापार व्यवस्था और भरोसेमंद कारोबारी माहौल को महत्वपूर्ण आधार के रूप में सामने रखा है। आर्थिक अनिश्चितता के दौर में इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को सदस्य देशों की आर्थिक क्षमता मजबूत करने से जोड़ा गया है।

  • अगस्त में म्यूचुअल फंड SIP निवेश रिकॉर्ड 32,297 करोड़ रुपए पहुंचा, गोल्ड ETF में भी 67 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज

    अगस्त में म्यूचुअल फंड SIP निवेश रिकॉर्ड 32,297 करोड़ रुपए पहुंचा, गोल्ड ETF में भी 67 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज

    नई दिल्ली ।अगस्त 2026 में म्यूचुअल फंड में निवेश का रुझान मजबूत बना रहा। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया यानी एम्फी के आंकड़ों के अनुसार, इस महीने सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिए निवेश बढ़कर रिकॉर्ड 32,297 करोड़ रुपए पहुंच गया। जुलाई में यह आंकड़ा 31,961 करोड़ रुपए था। अगस्त का एसआईपी निवेश अब तक का सबसे ऊंचा स्तर रहा।

    अगस्त का आंकड़ा मार्च में दर्ज 32,087 करोड़ रुपए और पहले दर्ज किए गए 31,781 करोड़ रुपए के उच्च स्तर से भी अधिक रहा। एसआईपी खातों में योगदान भी सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचकर 10.2 करोड़ हो गया, जबकि इससे पहले यह संख्या 9.9 करोड़ थी। अगस्त में नए एसआईपी खातों की संख्या 66.39 लाख रही, जो पिछले आंकड़े 61.44 लाख से अधिक है। वहीं बंद किए गए खातों की संख्या 53.82 लाख रही, जबकि पहले यह 50.30 लाख थी। इसके साथ कुल सक्रिय एसआईपी खातों की संख्या 10.62 करोड़ हो गई।

    अगस्त में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी गोल्ड ईटीएफ में भी निवेश में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड ईटीएफ में शुद्ध निवेश बढ़कर 2,596.70 करोड़ रुपए हो गया। जुलाई में यह 1,559 करोड़ रुपए था। इस तरह एक महीने में गोल्ड ईटीएफ निवेश में करीब 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

    गोल्ड ईटीएफ में यह लगातार तीसरा महीना रहा, जब सकारात्मक निवेश प्रवाह दर्ज किया गया। सोने की कीमतों में बढ़ोतरी और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ते रुझान के बीच निवेशकों की दिलचस्पी इस श्रेणी में बनी रही। अगस्त के दौरान मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोने की कीमत करीब 7.7 प्रतिशत बढ़ी।

    इसी अवधि में चांदी आधारित निवेश उत्पादों में भी निवेशकों की रुचि दिखाई दी। अगस्त में सिल्वर ईटीएफ में 1,270.63 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज हुआ। औद्योगिक मांग और निवेश मांग दोनों के मजबूत रहने के कारण चांदी निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनी रही।

    अगस्त में सक्रिय रूप से प्रबंधित इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में भी निवेश बढ़ा। इन योजनाओं में 29,328.62 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया, जबकि जुलाई में यह 24,697.39 करोड़ रुपए था। इस तरह निवेश में करीब 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद इक्विटी में लगातार निवेश से लंबी अवधि की निवेश रणनीति के प्रति भरोसा दिखाई दिया।

    इक्विटी योजनाओं में स्मॉलकैप फंड सबसे अधिक पसंद किए गए। इनमें 7,973 करोड़ रुपए का निवेश आया। इसके बाद मिडकैप फंड में 6,989 करोड़ रुपए, फ्लेक्सीकैप फंड में 5,059 करोड़ रुपए और लार्ज एंड मिडकैप फंड में 3,873 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। आंकड़ों से पता चलता है कि निवेशकों की रुचि अलग-अलग इक्विटी श्रेणियों में बनी हुई है।

    दूसरी ओर, अगस्त में डेट म्यूचुअल फंड योजनाओं से 8,127.32 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी हुई। इसके विपरीत हाइब्रिड योजनाओं में 10,045 करोड़ रुपए का निवेश आया। हाइब्रिड श्रेणी में मल्टी एसेट एलोकेशन फंड में 3,671 करोड़ रुपए और आर्बिट्रेज फंड में 3,789 करोड़ रुपए का निवेश दर्ज हुआ।

    लिक्विड फंड्स में 19,934 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया, जबकि ओवरनाइट फंड्स से 30,654 करोड़ रुपए की निकासी हुई। अगस्त के आंकड़ों में एसआईपी, इक्विटी और गोल्ड ईटीएफ में मजबूत निवेश के साथ निवेशकों की अलग-अलग परिसंपत्ति श्रेणियों में बदलती प्राथमिकताएं भी दिखाई दीं।

  • मोहन यादव ने शारजाह के उद्योग जगत को दिया जीआईएस 2027 का न्योता, फूड प्रोसेसिंग समेत कई क्षेत्रों में निवेश अवसर बताए

    मोहन यादव ने शारजाह के उद्योग जगत को दिया जीआईएस 2027 का न्योता, फूड प्रोसेसिंग समेत कई क्षेत्रों में निवेश अवसर बताए

    मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त अरब अमीरात के दौरे के दौरान शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री एवं एक्सपो सेंटर के चेयरमैन अब्दल्ला सुल्तान अल ओवैस से मुलाकात की। यह बैठक एनुअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग के दौरान हुई, जिसमें मध्य प्रदेश और शारजाह के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने तथा प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अब्दल्ला सुल्तान अल ओवैस को वर्ष 2027 में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए मध्य प्रदेश आने का औपचारिक निमंत्रण दिया। उन्होंने शारजाह के व्यापारिक समुदाय और कंपनियों से प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह भी किया।

    मुख्यमंत्री ने शारजाह चैंबर के साथ दीर्घकालिक और रणनीतिक आर्थिक साझेदारी विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने चेयरमैन ओवैस से मध्य प्रदेश में एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने का आग्रह किया। इसके साथ ही दोनों क्षेत्रों के कारोबारियों और उद्यमियों के बीच सेक्टर आधारित बिजनेस टू बिजनेस बैठकों के आयोजन के लिए मध्य प्रदेश-शारजाह बिजनेस फोरम बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया।

    चर्चा के दौरान मध्य प्रदेश के छोटे और मध्यम उद्यमों तथा निर्यातकों को खाड़ी देशों के प्रमुख खरीदारों और वितरकों से जोड़ने में शारजाह चैंबर के सहयोग की जरूरत पर भी बात हुई। मुख्यमंत्री ने शारजाह की कंपनियों को मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया।

    इन क्षेत्रों में फूड पार्क, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन परियोजनाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। बैठक में इन क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं और दोनों पक्षों के बीच कारोबारी सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश की निवेश क्षमता को रेखांकित करते हुए राज्य की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, प्रतिस्पर्धी लागत, औद्योगिक लैंड बैंक और इंफ्रास्ट्रक्चर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के बड़े बाजारों से बेहतर कनेक्टिविटी के कारण मध्य प्रदेश निवेश के लिए महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।

    उन्होंने राज्य सरकार की निवेशक-अनुकूल व्यवस्था का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार पारदर्शी नीतियों, त्वरित सिंगल विंडो व्यवस्था और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण के माध्यम से निवेशकों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

    बैठक में शारजाह के व्यापारिक नेटवर्क और कनेक्टिविटी को मध्य प्रदेश के स्थानीय उत्पादों के निर्यात, कौशल संवर्धन, रोजगार सृजन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया गया। दोनों पक्षों के बीच कारोबारी संपर्क बढ़ाने और उद्यमियों के लिए संभावित सहयोग के क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर जोर रहा।

    भारत और शारजाह के आर्थिक संबंधों को व्यापक भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी तथा सीईपीए का समर्थन प्राप्त है। शारजाह चैंबर की ओर से भारत में मुंबई सहित विभिन्न स्थानों पर ट्रेड मिशन और बिजनेस फोरम आयोजित किए गए हैं। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, ज्वेलरी, एसएमई, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, फूड इंडस्ट्री, टूरिज्म और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्र शामिल रहे हैं।

    अब्दल्ला सुल्तान अल ओवैस मई 2014 से शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और एक्सपो सेंटर शारजाह के चेयरमैन हैं। वे यूएई फेडरेशन ऑफ चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के वाइस चेयरमैन भी हैं। उन्हें सरकार, उद्योग, बैंकिंग, खाद्य उत्पादन, शिक्षा, कृषि और द्विपक्षीय व्यापारिक संस्थाओं में नेतृत्व का अनुभव है।

  • BRICS सम्मेलन में भारत-चीन के बीच कारोबार पर अहम बातचीत, तकनीक और निवेश से जुड़ी अड़चनें उठाएगा भारत

    BRICS सम्मेलन में भारत-चीन के बीच कारोबार पर अहम बातचीत, तकनीक और निवेश से जुड़ी अड़चनें उठाएगा भारत

    नई दिल्ली । में 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत और चीन के बीच आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत अहम हो सकती है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है और उनके साथ बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी आ सकता है। ऐसे में भारत चीन से आने वाली हाईटेक वस्तुओं के आयात में आ रही अड़चनों और चीन में भारतीय कंपनियों के निवेश से जुड़े प्रतिबंधों का मुद्दा उठा सकता है।

    भारत सरकार की ओर से चीनी तकनीक और महत्वपूर्ण सामान के आयात से जुड़ी परेशानियों पर उद्योग संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है। सरकार ने चीन की ओर से प्रमुख तकनीकी उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी अध्ययन किया है। भारतीय उद्योग जगत का मानना है कि इन प्रतिबंधों का असर देश की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

    चीन की ओर से कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्यात संबंधी प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें इंगट और वेफर तकनीक, बैटरी सेल और उससे जुड़ी तकनीक, हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट यानी HVDC उपकरण तथा कुछ विशेष ट्रांसमिशन कंपोनेंट्स शामिल हैं। HVDC तकनीक लंबी दूरी तक बिजली पहुंचाने में महत्वपूर्ण होती है और इससे ट्रांसमिशन के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलती है। यह रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड से जोड़ने और बिजली व्यवस्था को स्थिर रखने में भी उपयोगी मानी जाती है।

    भारत की चिंता यह है कि महत्वपूर्ण तकनीक और कच्चे माल की आपूर्ति में लगातार अड़चनें आने से घरेलू विनिर्माण को नुकसान हो सकता है। इससे बैकवर्ड इंटीग्रेशन की प्रक्रिया भी प्रभावित होने की आशंका है। भारत बातचीत के दौरान प्रक्रियागत बाधाओं और सोर्सिंग से जुड़े नियमों में राहत के साथ पारस्परिकता का मुद्दा उठा सकता है, यानी दोनों देशों की कंपनियों को समान स्तर की सुविधा मिले।

    हालांकि भारत-चीन व्यापार की तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून अवधि में चीन को भारत का निर्यात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 28 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 5.55 अरब डॉलर हो गया। अमेरिकी टैरिफ के कारण कुछ क्षेत्रों में निर्यात प्रभावित होने के बीच चीन को बढ़े निर्यात ने भारत को कुछ राहत दी।

    भारत और चीन के संबंधों में हाल के महीनों में कुछ नरमी भी दिखाई दी है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की बहाली, नाथू ला के रास्ते सीमा व्यापार फिर शुरू होना और लोगों के बीच संपर्क बढ़ना इसी बदलाव के संकेत हैं। इसके अलावा, लैंड बॉर्डर साझा करने वाले देशों से FDI से जुड़े नियमों में भी कुछ बदलाव किए गए हैं।

    बिजली क्षेत्र में भी भारत ने चीन के साथ कुछ मामलों में नियमों में ढील दी है। मार्च में सरकारी बिजली उपकरण कंपनी BHEL को चीन से 21 महत्वपूर्ण वस्तुओं की खरीद पांच साल तक करने की अनुमति दी गई। जून में भारत में कारखाने रखने वाली चार चीनी बिजली उपकरण कंपनियों को महत्वपूर्ण बिजली परियोजनाओं से जुड़े सरकारी टेंडरों में भाग लेने की अनुमति मिली।

    2020 में LAC पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद चीनी कंपनियों के लिए सरकारी खरीद और निवेश से जुड़े नियम कड़े किए गए थे। अब कुछ क्षेत्रों में सीमित राहत से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में व्यावहारिक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

    BRICS सम्मेलन भारत-चीन के बीच इन आर्थिक मुद्दों पर उच्चस्तरीय बातचीत का अवसर बन सकता है। भारत की प्राथमिकता हाईटेक सामान और जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति आसान कराने के साथ भारतीय कंपनियों के लिए चीन में निवेश का माहौल बेहतर करना हो सकती है। ऐसे में शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर होने वाली बातचीत पर खास नजर रहेगी।

  • दुबई में AIM-2026 के मंच से सीएम मोहन यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश आने और रोजगार बढ़ाने का दिया निमंत्रण

    दुबई में AIM-2026 के मंच से सीएम मोहन यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश आने और रोजगार बढ़ाने का दिया निमंत्रण

    मध्यप्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 7 सितंबर को दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित एआईएम कांग्रेस-2026 में भाग लिया। Annual Investment Meeting के इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं और रोजगार के अवसरों को लेकर निवेशकों से संवाद किया। उन्होंने भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में शामिल होने के लिए निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया।

    एआईएम कांग्रेस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश और कारोबारी अवसरों के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। कार्यक्रम में 180 से अधिक देशों के करीब 20 हजार प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी दी गई। इसमें विभिन्न देशों की सरकारों के साथ बड़े निवेशक, कंपनियां और सोवरिन वेल्थ फंड्स निवेश से जुड़े अवसरों पर चर्चा कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने दुबई प्रवास के दौरान मध्यप्रदेश के स्थानीय उत्पादों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार के सामने रखा। बिजनेस बे स्थित ताज दुबई में आयोजित वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट और भौगोलिक संकेतक उत्पादों की प्रदर्शनी का उन्होंने उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी के जरिए राज्य की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की संभावनाएं सामने आईं।

    प्रदर्शनी में बैतूल का बेल मेटल क्राफ्ट, अशोकनगर की चंदेरी साड़ी, खरगोन के महेश्वर की महेश्वरी साड़ी, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, भोपाल की जरी-जरदोजी और ग्वालियर का कारपेट प्रदर्शित किया गया। इन उत्पादों के जरिए मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के साथ स्थानीय कारीगरों की उत्पादन क्षमता और निर्यात की संभावनाओं को भी सामने रखा गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद अहमद अल यामाही से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश, कृषि, पर्यटन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अरब देशों के निवेशकों को मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा, औषधि निर्माण, चिकित्सा उपकरण, वस्त्र, लॉजिस्टिक्स, उन्नत विनिर्माण और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़े अवसरों की जानकारी दी।

    बैठक के दौरान अरब व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल को मध्यप्रदेश आने और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में भाग लेने का निमंत्रण भी दिया गया। राज्य सरकार की कोशिश है कि अंतरराष्ट्रीय निवेश को मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास, स्थानीय कारोबार और रोजगार सृजन से जोड़ा जाए।

    दुबई यात्रा के दौरान कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश की संभावनाओं को महत्वपूर्ण बताया गया। संयुक्त अरब अमीरात खाद्य जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे बाजार में मध्यप्रदेश अपने कृषि उत्पादों और प्रसंस्कृत खाद्य सामग्री के लिए संभावित अवसर तलाश सकता है।

    आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार मध्यप्रदेश दाल उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है। राज्य अनाज उत्पादन में दूसरे स्थान पर है और देश के कुल अनाज उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 13.04 प्रतिशत बताई गई है। मक्का उत्पादन में मध्यप्रदेश पहले और गेहूं उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। गेहूं में राज्य की हिस्सेदारी 20.78 प्रतिशत बताई गई है।

    मध्यप्रदेश सोयाबीन उत्पादन के लिए भी देश में प्रमुख राज्य है और राज्य को ‘सोया प्रदेश’ के रूप में पहचान मिली है। दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कृषि उत्पादों की मांग को देखते हुए खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, भंडारण, ग्रेडिंग और लॉजिस्टिक्स में निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

    मुख्यमंत्री की इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य निवेश आकर्षित करने के साथ मध्यप्रदेश के उत्पादों और कारोबारी क्षमताओं को वैश्विक बाजार से जोड़ना है। सरकार को उम्मीद है कि नए निवेश से उद्योगों का विस्तार होगा, स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। इसके साथ ही किसानों और कारीगरों को भी बड़े बाजारों से जुड़ने का लाभ मिल सकता है।

  • निवेश के लिए मध्यप्रदेश बना देश का नया ग्रोथ हब : मुख्यमंत्री यादव

    निवेश के लिए मध्यप्रदेश बना देश का नया ग्रोथ हब : मुख्यमंत्री यादव


    भोपाल।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश निवेश, उद्योग और रोजगार के नए केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग, वस्त्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा, ड्रोन, रक्षा और साइंस सिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र की स्थानीय क्षमता को चिन्हित कर उसे उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसरों में बदला जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह बात दुबई प्रवास के पहले दिन मीडिया प्रतिनिधियों से संवाद के दौरान कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में व्यापार सुगमता के लिए किए गए सुधारों को मध्यप्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। राज्य सरकार ने कई अप्रासंगिक कानून समाप्त किए हैं और 25 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं। इन सुधारों से प्रदेश में उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को गति मिली है और निवेशकों के लिए कारोबारी वातावरण बेहतर हुआ है।

    एमएसएमई क्षेत्र में 1.10 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एमएसएमई क्षेत्र में 1 करोड़ 10 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। राज्य में बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है और निर्यात के क्षेत्र में भी प्रदेश अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। वर्ष 2026-27 में मध्यप्रदेश से 76 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात हुआ है।

    उन्होंने कहा कि सरकार की व्यापार हितैषी नीतियों का उद्देश्य बड़े निवेश को आकर्षित करने के साथ स्थानीय उद्यमों को विस्तार के अवसर देना भी है। इसके लिए उद्योगों की स्थापना और संचालन के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं।

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा, ड्रोन और रक्षा क्षेत्र पर जोर

    डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा, ड्रोन और रक्षा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। रीवा, इंदौर और उज्जैन में तीन नए आईटी पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से तकनीकी उद्योगों, स्टार्टअप और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।

    प्रदेश में साइंस सिटी भी विकसित की जा रही है। इससे विज्ञान, तकनीक, नवाचार और नई पीढ़ी के कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा।

    भूमि, बिजली और पानी की पर्याप्त उपलब्धता

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के लिए आवश्यक बुनियादी संसाधनों के मामले में मध्यप्रदेश की स्थिति मजबूत है। प्रदेश के पास पर्याप्त भूमि और लैंड बैंक, अतिरिक्त बिजली तथा जल संसाधन उपलब्ध हैं। ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भी राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    उन्होंने कहा कि सस्ती बिजली, ग्रीन एनर्जी, पर्याप्त भूमि और पानी के साथ बेहतर आधारभूत ढांचा एवं परिवहन सुविधाएं प्रदेश को निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी बनाती हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार मध्यप्रदेश में दुनिया की सबसे सस्ती बिजली बन रही है। इन सुविधाओं के कारण प्रदेश देशभर के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना है।

    नीतिगत सुधारों का लाभ निवेशकों तक पहुंचा

    डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने केवल नीतियां बनाने पर जोर नहीं दिया, बल्कि उनके माध्यम से निवेशकों को मिलने वाले लाभ को जमीन पर उपलब्ध कराया है। व्यापार हितैषी नीतियों और आवश्यक सुविधाओं के कारण प्रदेश में बड़े उद्योगों की स्थापना को गति मिली है और निवेशकों का विश्वास बढ़ा है।

    रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के बाद जिला स्तर पर विस्तार

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के अवसर मिले हैं। अब सरकार का ध्यान जिला स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने पर है।

    उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले और क्षेत्र के स्थानीय संसाधनों तथा क्षमताओं को चिन्हित कर उन्हें उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा रहा है। इससे औद्योगिक विकास बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिलों और स्थानीय क्षेत्रों तक पहुंचेगा।

    शिक्षा और स्वास्थ्य को रोजगार से जोड़ने की तैयारी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश के साथ कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र को भी मजबूत किया जा रहा है, जिससे बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ इस क्षेत्र में निवेश और रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकें।

    भोपाल-इंदौर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें, चार नए हवाईअड्डों की तैयारी

    डॉ. यादव ने कहा कि निवेश और पर्यटन के विकास के लिए बेहतर हवाई संपर्क आवश्यक है। भोपाल और इंदौर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन हो रहा है। प्रदेश में चार नए हवाईअड्डे विकसित करने की तैयारी है। ग्वालियर और जबलपुर भी हवाई संपर्क के लिहाज से तैयार हैं तथा भविष्य में यहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की संभावनाएं हैं।

    उन्होंने कहा कि सड़क, रेल और हवाई संपर्क बेहतर होने से मध्यप्रदेश देश और दुनिया से तेजी से जुड़ रहा है। इसका लाभ उद्योग, व्यापार, निवेश और पर्यटन को मिल रहा है।

    महाकाल लोक के बाद पर्यटन में बढ़ी गतिविधियां

    मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक निवेश के साथ मध्यप्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मध्यप्रदेश में करीब 14 करोड़ बाहरी पर्यटकों का आगमन हुआ है।

    पर्यटन के विस्तार से होटल, परिवहन, खान-पान, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद, फूड प्रोसेसिंग और सेवा क्षेत्र में रोजगार एवं निवेश के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

    स्थानीय क्षमता को निवेश और रोजगार में बदलने का लक्ष्य

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में फूड प्रोसेसिंग, वस्त्र, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा, ड्रोन, रक्षा और पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। पर्याप्त भूमि, बिजली, पानी, ग्रीन एनर्जी, लैंड बैंक, बेहतर आधारभूत ढांचा और विकसित हो रही हवाई कनेक्टिविटी प्रदेश की प्रमुख ताकत हैं।

    उन्होंने कहा कि सरकार ने नीतिगत सुधारों के साथ ऐसा निवेश वातावरण तैयार किया है, जिसमें स्थानीय संसाधनों और संभावनाओं को उद्योगों से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश का लक्ष्य स्पष्ट है कि स्थानीय क्षमता को निवेश, निवेश को उत्पादन और उत्पादन को रोजगार में परिवर्तित किया जाए।

  • दुबई प्रवास के दूसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एआईएम कांग्रेस में निवेश और वैश्विक संवाद से मध्यप्रदेश की संभावनाएं रखेंगे

    दुबई प्रवास के दूसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एआईएम कांग्रेस में निवेश और वैश्विक संवाद से मध्यप्रदेश की संभावनाएं रखेंगे

    मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के चार दिवसीय दुबई प्रवास का दूसरा दिन सोमवार, 7 सितंबर को मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री एआईएम कांग्रेस 2026 में भाग लेंगे और विभिन्न देशों के राजनीतिक एवं शासन स्तर के प्रतिनिधियों, निवेशकों तथा संयुक्त अरब अमीरात के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ संवाद करेंगे। दिनभर होने वाले कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश की निवेश क्षमता, औद्योगिक संभावनाओं और वैश्विक साझेदारी के अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआईएम कांग्रेस 2026 के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। इसके साथ ही वे मध्यप्रदेश पवेलियन का उद्घाटन करेंगे। एआईएम कांग्रेस के मंच पर मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्षमता, निवेश के अवसर और प्रदेश में उपलब्ध अनुकूल कारोबारी वातावरण को वैश्विक निवेश समुदाय के सामने रखा जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव संयुक्त अरब अमीरात की संघीय सर्वोच्च परिषद के सदस्य और रास अल खैमाह के शासक महामहिम शेख सऊद बिन सक्र अल कासिमी से शिष्टाचार भेंट करेंगे। यह मुलाकात मध्यप्रदेश और यूएई के बीच निवेश तथा आर्थिक सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगी।

    एआईएम कांग्रेस के लीडर्स सेशन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों की मौजूदगी में संबोधित करेंगे। इस वैश्विक मंच पर वे मध्यप्रदेश की विकास यात्रा, राज्य में मौजूद निवेश संभावनाओं और उद्योगों के लिए तैयार किए जा रहे अनुकूल इकोसिस्टम को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष रखेंगे। इसी अवसर पर इन्वेस्ट मध्यप्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 के लिए वैश्विक निवेशकों को आमंत्रित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव तातारस्तान गणराज्य, रूस के गवर्नर के साथ भी बैठक करेंगे। इस बैठक में मध्यप्रदेश और रूस के बीच औद्योगिक तथा निवेश सहयोग की संभावनाओं को लेकर संवाद होगा। इसके बाद दिन के प्रमुख कार्यक्रमों में ‘इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश, इंडिया’ निवेश सत्र आयोजित होगा।

    इस निवेश सत्र में मुख्यमंत्री वैश्विक निवेशकों और कारोबारी प्रतिनिधियों के सामने मध्यप्रदेश की निवेश क्षमता, प्रमुख क्षेत्रों, औद्योगिक अधोसंरचना और निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी देंगे। उनका संबोधन प्रदेश को एक विश्वसनीय और उभरते निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करने पर केंद्रित रहेगा।

    इसके बाद यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद अल जेयूदी की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव संबोधित करेंगे। यह संवाद भारत, मध्यप्रदेश और यूएई के बीच व्यापार तथा निवेश संबंधों को व्यापक बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यूएई के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री महामहिम अब्दुल्ला बिन तौक अल मरी के साथ भी बैठक होगी। इसमें निवेश, व्यापार, पर्यटन और आर्थिक सहयोग से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री विदेश व्यापार राज्य मंत्री और एआईएम कांग्रेस के अध्यक्ष महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद अल जेयूदी से बैठक करेंगे।

    दुबई प्रवास के दूसरे दिन लूलू ग्रुप इंटरनेशनल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक यूसुफ अली एम.ए. के साथ मुख्यमंत्री की बैठक भी महत्वपूर्ण रहेगी। इस दौरान मध्यप्रदेश में निवेश और व्यापार विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। दिन के समापन पर दुबई के महावाणिज्य दूत द्वारा आयोजित रात्रिभोज में मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहभागिता करेंगे।

  • निर्मला सीतारमण ने न्यूयॉर्क में वैश्विक कंपनियों के सीईओ से मुलाकात कर भारत में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया

    निर्मला सीतारमण ने न्यूयॉर्क में वैश्विक कंपनियों के सीईओ से मुलाकात कर भारत में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया

    नई दिल्ली ।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने न्यूयॉर्क में वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। इन बातचीत में उन्होंने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, मजबूत डिजिटल आधारभूत ढांचे और वित्तीय क्षेत्र में मौजूद निवेश अवसरों को रेखांकित करते हुए विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया।

    टिलमैन होल्डिंग्स के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव आहूजा के साथ हुई बैठक में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर विशेष चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने कहा कि हालिया बजट घोषणाओं सहित सरकार की नीतिगत दिशा डिजिटल क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है।

    उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल सेवाओं और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती गतिविधियों का उल्लेख किया। इन क्षेत्रों के विस्तार के साथ भारत में डेटा सेंटर, हाई कैपेसिटी नेटवर्क और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर की मांग भी बढ़ रही है।

    सीतारमण ने कहा कि इस बदलते डिजिटल परिदृश्य में टिलमैन होल्डिंग्स जैसी कंपनियों के लिए भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर के अगले चरण के विकास में भागीदारी के महत्वपूर्ण अवसर मौजूद हैं। सरकार की कोशिश ऐसे निवेशों के लिए नीतिगत और कारोबारी वातावरण को लगातार बेहतर बनाने की है।

    मार्श री के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डीन क्लिसुरा और कंपनी की रणनीति एवं कॉरपोरेट डेवलपमेंट प्रमुख देवांशु ध्यानी के साथ बैठक में भी भारत की आर्थिक और कारोबारी क्षमता पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक प्रोफेशनल सर्विसेज और रिस्क मैनेजमेंट कंपनियों को बड़ा घरेलू बाजार, कुशल प्रतिभा और तेजी से विकसित हो रहा इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता है।

    उन्होंने भारत की डिजिटल क्षमताओं और कारोबारी सुधारों की दिशा का भी उल्लेख किया। मार्श री की टीम ने भारत में सुधारों के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की और देश में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने तथा कारोबार का विस्तार करने की योजना बताई।

    मार्श री ने भारत को समान अवसर वाला बाजार बताते हुए नियामकीय व्यवस्था को भी सकारात्मक बताया। कंपनी ने गिफ्ट सिटी पर अपना ध्यान बढ़ाने की जानकारी दी और वहां विकसित हो रहे वित्तीय इकोसिस्टम के साथ उत्पादों तथा सेवाओं के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बढ़ाने की बात कही।

    वित्त मंत्री ने बीएनवाई मेलन के ग्रुप मुख्य परिचालन अधिकारी एलेजांद्रो पेरेज के साथ भी बातचीत की। इस बैठक में भारत की मजबूत विकास यात्रा और वैश्विक वित्तीय संस्थानों के लिए देश में निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

    पेरेज ने भारत के प्रति बीएनवाई मेलन की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कंपनी की वैश्विक गतिविधियों और विकास रणनीति में भारत एक महत्वपूर्ण बाजार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने आईआईटी सहित प्रमुख भारतीय संस्थानों के साथ कंपनी की साझेदारी का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिभाओं को विकसित करना है।

    बीएनवाई मेलन के भारत संचालन की बदलती भूमिका पर भी चर्चा हुई। भारत अब केवल डिलीवरी सेंटर के रूप में नहीं, बल्कि इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और एआई जैसी उन्नत क्षमताओं के लिए रणनीतिक वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

    बैठकों में डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और गिफ्ट सिटी आईएफएससी से जुड़े अवसरों पर भी चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने बीएनवाई मेलन की टीम को गिफ्ट सिटी आईएफएससी का दौरा करने और वहां उपलब्ध विभिन्न वित्तीय उत्पादों तथा सेवाओं से जुड़े अवसरों का आकलन करने के लिए आमंत्रित किया।