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  • सोना फिर हुआ महंगा, 24 कैरेट 1.46 लाख रुपये के पार; खरीदारी से पहले जानें 22K, 18K और चांदी के ताजा भाव

    सोना फिर हुआ महंगा, 24 कैरेट 1.46 लाख रुपये के पार; खरीदारी से पहले जानें 22K, 18K और चांदी के ताजा भाव

    नई दिल्ली । घरेलू सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने की कीमतों में मजबूती देखने को मिली, जबकि चांदी के दाम स्थिर बने रहे। ताजा कारोबार में 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम 480 रुपये की बढ़त के साथ 1,46,135 रुपये पर पहुंच गया। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव लगभग 440 रुपये बढ़कर 1,33,960 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। दूसरी ओर चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 2,36,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती रही। लगातार बदलते भावों के बीच ज्वेलरी खरीदने और निवेश की योजना बना रहे लोगों के लिए बाजार की चाल पर नजर रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    देश के प्रमुख शहरों में सोने के दाम लगभग समान स्तर पर बने रहे। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, जयपुर, गुरुग्राम, चंडीगढ़, पुणे और नागपुर सहित अधिकांश शहरों में 24 कैरेट सोना 1,46,135 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता रहा। कुछ शहरों जैसे इंदौर, अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में यह मामूली अंतर के साथ 1,46,035 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। 22 कैरेट सोने की कीमत अधिकांश शहरों में 1,33,960 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं 18 कैरेट सोने के दाम भी अंतरराष्ट्रीय रुझानों के अनुरूप बढ़त के साथ कारोबार करते रहे, हालांकि इनमें स्थानीय बाजार और ज्वेलर्स के अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

    चांदी के बाजार में आज स्थिरता देखने को मिली। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, लखनऊ, अहमदाबाद, पुणे, बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहरों में चांदी का भाव 2,36,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर बना रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक मांग और वैश्विक कमोडिटी बाजार की स्थिति के आधार पर आने वाले दिनों में चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार सोने और चांदी की कीमतों पर कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों का प्रभाव पड़ता है। वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं की मांग, अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी, प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों से जुड़ी नीतियां, अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियां और रुपये की विनिमय दर जैसे कारक कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा त्योहारी सीजन, शादी-ब्याह की मांग और निवेशकों की खरीदारी भी घरेलू बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रति ग्राम या प्रति 10 ग्राम कीमत देखकर आभूषण खरीदने का निर्णय नहीं लेना चाहिए। खरीदारी के समय मेकिंग चार्ज, वस्तु एवं सेवा कर (GST), हॉलमार्क प्रमाणन और शुद्धता की जांच करना भी उतना ही आवश्यक है। निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदने वाले लोगों को अलग-अलग विक्रेताओं के दामों की तुलना करने और बाजार की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के बाद ही निर्णय लेना चाहिए।

    बाजार जानकारों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की धारणा में बदलाव के कारण आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए यह जरूरी होगा कि वे नियमित रूप से बाजार के रुझानों पर नजर रखें और अपनी आवश्यकता तथा वित्तीय योजना के अनुसार ही खरीदारी का निर्णय लें।

  • भारत-फिनलैंड ने 2030 तक व्यापार दोगुना करने का रखा लक्ष्य, ईयू-भारत एफटीए से बढ़ेंगी नई संभावनाएं

    भारत-फिनलैंड ने 2030 तक व्यापार दोगुना करने का रखा लक्ष्य, ईयू-भारत एफटीए से बढ़ेंगी नई संभावनाएं

    नई दिल्ली । भारत और फिनलैंड ने आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने के उद्देश्य से वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रस्तावित यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते (ईयू-भारत एफटीए) को इस लक्ष्य की प्राप्ति का प्रमुख माध्यम माना जा रहा है। दोनों देशों के वरिष्ठ नेताओं ने हेलसिंकी में हुई उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान व्यापार, निवेश, डिजिटल प्रौद्योगिकी और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा की।

    फिनलैंड की उप प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री रिक्का पुर्रा और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच हुई बैठक में आर्थिक संबंधों को अधिक विविध, मजबूत और दीर्घकालिक बनाने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने माना कि ईयू-भारत एफटीए लागू होने के बाद व्यापारिक बाधाएं कम होंगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे और दोनों देशों की कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा स्तर से दोगुना करने का लक्ष्य भी अधिक व्यावहारिक माना गया।

    बैठक के बाद फिनलैंड की उप प्रधानमंत्री रिक्का पुर्रा ने कहा कि डिजिटलाइजेशन और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में भारत और फिनलैंड की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा। उनके अनुसार डिजिटल और टिकाऊ प्रौद्योगिकी समाधान विकसित करने में फिनलैंड की विशेषज्ञता भारत की विकास यात्रा और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है, जिससे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

    रिक्का पुर्रा ने यह भी कहा कि भविष्य में स्पेस, रक्षा और अन्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा किया जाएगा। उन्होंने भारत को एक विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीकी नवाचार और औद्योगिक सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

    वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि उनकी बैठकों में आर्थिक और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने, व्यापार और निवेश बढ़ाने तथा डिजिटलाइजेशन और उभरती प्रौद्योगिकियों में साझेदारी का विस्तार करने पर विशेष चर्चा हुई। उन्होंने फिनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री साकारी पुइस्तो से भी मुलाकात की, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 6जी संचार, क्वांटम प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष तकनीक और सस्टेनेबिलिटी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

    फिनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक प्रगति और ईयू-भारत एफटीए की संभावनाएं फिनलैंड की कंपनियों के लिए नए अवसर लेकर आएंगी। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार का विशाल आकार पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ नई प्रौद्योगिकी आधारित क्षेत्रों में भी निवेश और व्यावसायिक विस्तार के पर्याप्त अवसर प्रदान करता है।

    अपनी यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने फिनलैंड की प्रमुख प्रौद्योगिकी और औद्योगिक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की। उन्होंने कंपनियों को भारत में विनिर्माण इकाइयों, अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और निर्यात आधारित उत्पादन में निवेश बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। दोनों देशों का मानना है कि प्रौद्योगिकी, नवाचार और निवेश पर आधारित यह साझेदारी आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • भारतीय टेक्सटाइल उद्योग का दम, 130 देशों की भागीदारी के बीच मिले 14,300 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव

    भारतीय टेक्सटाइल उद्योग का दम, 130 देशों की भागीदारी के बीच मिले 14,300 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव

    नई दिल्ली । भारत के टेक्सटाइल और परिधान उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले भारत टेक्स 2026 ने इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और पारंपरिक भारतीय शिल्प को एक ही मंच पर जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। तीसरे संस्करण के रूप में आयोजित इस प्रदर्शनी में दुनिया के 130 से अधिक देशों से छह हजार से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खरीदार पहुंचे, जबकि करीब 1.30 लाख व्यापारिक आगंतुकों ने इसमें भाग लिया। व्यापक वैश्विक भागीदारी ने यह संकेत दिया कि भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के प्रति अंतरराष्ट्रीय बाजार का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।

    करीब 1.6 मिलियन वर्ग फुट क्षेत्र में आयोजित इस विशाल प्रदर्शनी में 20 हजार से अधिक टेक्सटाइल उत्पाद प्रदर्शित किए गए। आयोजन का उद्देश्य केवल व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराना नहीं था, बल्कि भारतीय विरासत, पारंपरिक शिल्प, आधुनिक तकनीक और सतत विकास को एक साथ प्रस्तुत करना भी रहा। प्रदर्शनी में टेक्सटाइल उद्योग की पूरी वैल्यू चेन को शामिल किया गया, जिससे घरेलू और विदेशी खरीदारों को एक ही स्थान पर विविध उत्पादों और नवाचारों का व्यापक परिचय मिला।

    प्रदर्शनी में फाइबर, यार्न, फैब्रिक, रेडीमेड परिधान, होम टेक्सटाइल्स, टेक्निकल टेक्सटाइल्स, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट्स सहित अनेक क्षेत्रों के उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इससे भारतीय उद्योग की विविधता और उत्पादन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तथा निवेशकों के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर मिला। विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कला और वस्त्र परंपराओं ने भी विदेशी प्रतिनिधियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

    बिहार की प्रसिद्ध टिकुली कला इस आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही। अपनी चमकदार रंग योजना और बारीक इनामेल कार्य के लिए प्रसिद्ध इस पारंपरिक कला ने भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाया। इसके अलावा देशभर के अनेक पारंपरिक हस्तशिल्प और वस्त्र उत्पादों ने भी आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया।

    हैंडलूम क्षेत्र को भी प्रदर्शनी में विशेष स्थान दिया गया। लगभग 120 बुनकरों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक निर्यातक हैंडलूम सहकारी संस्था ने रियायती स्टॉल के माध्यम से अपने उत्पाद अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रस्तुत किए। इस पहल से छोटे बुनकरों और पारंपरिक उत्पादकों को वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिला, जिससे निर्यात की संभावनाओं को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    भारत टेक्स 2026 में 1,600 से अधिक प्रदर्शकों और 11 हजार से ज्यादा खरीदारों की भागीदारी रही। आयोजन के दौरान 28 हजार से अधिक बिजनेस-टू-बिजनेस बैठकें आयोजित की गईं, जबकि 100 से अधिक गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट और बिजनेस-टू-गवर्नमेंट संवाद भी हुए। इन बैठकों के परिणामस्वरूप 14,300 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जो भारतीय टेक्सटाइल उद्योग में बढ़ते निवेश विश्वास का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    इस आयोजन के साथ आयोजित इंडी हाट 2026 ने भी भारतीय हैंडलूम और हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसमें 48 कारीगरों और बुनकरों के साथ 12 डिजाइन आधारित ब्रांड्स ने भाग लेकर क्षेत्रीय कला और शिल्प परंपराओं का प्रदर्शन किया। गुलाबी मीनाकारी, डोकरा, उस्ता कला, पिचवाई, सोजनी कढ़ाई, ब्लू पॉटरी, सिल्वर फिलिग्री, चेरियाल पेंटिंग, माता नी पछेड़ी, पेपियर-माशे, बागरू ब्लॉक प्रिंटिंग, जामदानी साड़ियां, मूगा और एरी सिल्क तथा ओडिशा इकत जैसी अनेक पारंपरिक कलाओं ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध विविधता को वैश्विक मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

  • भारत के बीएफएसआई सेक्टर में निवेश को मिली नई रफ्तार, दूसरी तिमाही में डील वैल्यू 58 प्रतिशत बढ़कर 3.2 अरब डॉलर पहुंची

    भारत के बीएफएसआई सेक्टर में निवेश को मिली नई रफ्तार, दूसरी तिमाही में डील वैल्यू 58 प्रतिशत बढ़कर 3.2 अरब डॉलर पहुंची

    नई दिल्ली ।भारत के बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र में वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के दौरान निवेश गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है। इस अवधि में कुल 65 डील्स दर्ज की गईं, जिनकी संयुक्त वैल्यू 3.2 अरब डॉलर रही। तिमाही आधार पर यह मूल्य लगभग 58 प्रतिशत अधिक रहा, जो इस क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते विश्वास और रणनीतिक सौदों की सक्रियता को दर्शाता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय वित्तीय सेवाओं का बाजार निवेश आकर्षित करने में सक्षम बना हुआ है।

    तिमाही समीक्षा के अनुसार इस अवधि में बीएफएसआई सेक्टर की हिस्सेदारी कुल डील वॉल्यूम का लगभग 11 प्रतिशत और कुल डील वैल्यू का 8 प्रतिशत रही। डील वैल्यू में आई उल्लेखनीय वृद्धि के पीछे एक बड़े रणनीतिक ट्रांजैक्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े सौदों ने पूरे सेक्टर की निवेश क्षमता को मजबूती दी और बाजार में सकारात्मक संकेत भेजे।

    अप्रैल से जून 2026 के बीच विलय एवं अधिग्रहण यानी एमएंडए गतिविधियों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान 24 एमएंडए डील्स हुईं, जिनकी कुल वैल्यू 1.5 अरब डॉलर रही। तिमाही आधार पर एमएंडए डील्स की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि उनकी वैल्यू करीब पांच गुना बढ़ गई। इससे स्पष्ट होता है कि वित्तीय संस्थानों और निवेशकों ने विस्तार तथा रणनीतिक साझेदारियों पर अधिक ध्यान दिया।

    रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक बाजार की गतिविधियों को अलग रखने पर बीएफएसआई क्षेत्र में 62 एमएंडए तथा प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल से जुड़े लेनदेन दर्ज किए गए, जिनकी कुल वैल्यू 2.8 अरब डॉलर रही। यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण निवेश वातावरण पूरी तरह स्थिर नहीं माना जा रहा है। इसके बावजूद भारतीय वित्तीय क्षेत्र में निवेशकों की रुचि बनी रही।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों ने इस दौरान विशेष रूप से स्केलेबल, तकनीक आधारित और नियामकीय रूप से मजबूत कारोबारों को प्राथमिकता दी। पूंजी निवेश का रुख पहले की तुलना में अधिक संतुलित और सोच-समझकर किया गया। यही कारण रहा कि सीमित निवेश माहौल के बावजूद रणनीतिक डील्स ने पूरे सेक्टर के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    समीक्षा अवधि के दौरान प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल गतिविधियों में 38 सौदे दर्ज किए गए, जिनकी कुल वैल्यू 1.3 अरब डॉलर रही। दूसरी ओर, सार्वजनिक बाजार की गतिविधियां अपेक्षाकृत धीमी रहीं। इस दौरान एक प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के माध्यम से 97 मिलियन डॉलर जुटाए गए, जबकि दो क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट के जरिए 310 मिलियन डॉलर की पूंजी हासिल की गई। इससे संकेत मिलता है कि निजी निवेश फिलहाल सार्वजनिक पूंजी बाजार की तुलना में अधिक सक्रिय बना हुआ है।

    सेगमेंट के स्तर पर फिनटेक सबसे अधिक सक्रिय क्षेत्र रहा, जहां 31 डील्स के माध्यम से 1.4 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। वहीं वित्तीय सेवाओं और एसेट मैनेजमेंट क्षेत्र में 16 सौदों के जरिए 690 मिलियन डॉलर की डील वैल्यू सामने आई, जो पिछली तिमाही की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक रही। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां स्थिर होने और पूंजी बाजार में सुधार आने के साथ भारत का बीएफएसआई इकोसिस्टम आने वाले समय में भी घरेलू और विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।

  • एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 से तकनीकी निवेश को नई रफ्तार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्लोबल कंपनियों के साथ बनाई रणनीति, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में मध्यप्रदेश का बड़ा कदम

    एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 से तकनीकी निवेश को नई रफ्तार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्लोबल कंपनियों के साथ बनाई रणनीति, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में मध्यप्रदेश का बड़ा कदम

    मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य को देश के प्रमुख प्रौद्योगिकी और डिजिटल निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 के विशेष सत्र का आयोजन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश और विदेश की दस प्रतिष्ठित संस्थाओं तथा अग्रणी उद्योग समूहों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग स्तर पर विस्तृत चर्चा की। इन बैठकों का उद्देश्य राज्य में उच्च तकनीकी क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देना, नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन को गति देना और भविष्य के लिए दीर्घकालिक औद्योगिक सहयोग का मजबूत आधार तैयार करना रहा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार ऐसी औद्योगिक और तकनीकी नीतियों पर कार्य कर रही है, जिनसे मध्यप्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे उच्च-विकास वाले क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान मिल सके। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण, आवश्यक आधारभूत सुविधाएं और तेज प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    कॉन्क्लेव के दौरान विभिन्न कंपनियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और अनुसंधान एवं विकास से जुड़ी अपनी प्रस्तावित परियोजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। निवेशकों ने प्रदेश में तकनीकी अवसंरचना के विस्तार, आधुनिक उद्योगों की स्थापना और नवाचार आधारित परियोजनाओं में संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।

    इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़ी कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के साथ निवेश योजनाओं पर चर्चा की। इस दौरान उन्नत विनिर्माण, तकनीकी समाधान, डिजिटल सेवाओं और ऊर्जा आधारित औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर संभावित सहयोग पर विचार-विमर्श हुआ। राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नीतिगत सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल नवाचार को लेकर भी विशेष जोर दिया गया। आधुनिक कंप्यूटिंग, उन्नत तकनीकी समाधान और भविष्य की डिजिटल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य में नई तकनीकों के विकास और उनके औद्योगिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान वैश्विक तकनीकी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश के साथ दीर्घकालिक सहयोग और निवेश की संभावनाओं को सकारात्मक बताया।

    सेमीकंडक्टर निर्माण और अनुसंधान के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आए। संबंधित कंपनियों ने उत्पादन इकाइयों की स्थापना, अनुसंधान सुविधाओं के विकास और उच्च तकनीकी विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजनाओं पर मुख्यमंत्री के साथ विस्तार से चर्चा की। इन प्रस्तावों से प्रदेश में अत्याधुनिक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होने और तकनीकी उत्पादन क्षमता बढ़ने की संभावना व्यक्त की गई।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना ही नहीं, बल्कि प्रदेश में तकनीकी कौशल, नवाचार और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी है। सरकार का मानना है कि ऐसे प्रयासों से स्थानीय युवाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार की उद्योग समर्थक नीतियां, तेज निर्णय प्रक्रिया और निवेशकों के साथ निरंतर संवाद मध्यप्रदेश को तकनीकी विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में बढ़ते निवेश से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लक्ष्य को मजबूत आधार प्राप्त होगा। इससे राज्य देश के उभरते प्रौद्योगिकी मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद निवेश गंतव्य के रूप में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकेगा।

  • यूरोप के तीन देशों के दौरे पर जाएंगे पीयूष गोयल, व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी सहयोग को नई दिशा देने पर रहेगा फोकस

    यूरोप के तीन देशों के दौरे पर जाएंगे पीयूष गोयल, व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी सहयोग को नई दिशा देने पर रहेगा फोकस


    नई दिल्ली ।
    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 13 से 17 जुलाई तक स्पेन, बेल्जियम और फिनलैंड के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर जाएंगे। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और यूरोप के बीच व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी, नवाचार और टिकाऊ विकास के क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देना है। इस दौरान केंद्रीय मंत्री विभिन्न सरकारी प्रतिनिधियों, उद्योग संगठनों और वैश्विक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकों में भाग लेंगे।

    इस दौरे में पीयूष गोयल भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, रत्न एवं आभूषण, फूड प्रोसेसिंग, हेल्थकेयर और डिजाइन जैसे क्षेत्रों की प्रमुख भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सरकार का उद्देश्य भारतीय उद्योगों और यूरोपीय कंपनियों के बीच प्रत्यक्ष कारोबारी साझेदारी को बढ़ावा देना तथा नए निवेश अवसरों की पहचान करना है।

    यात्रा का पहला चरण स्पेन में होगा, जहां केंद्रीय मंत्री उद्योग संगठनों की ओर से आयोजित एक विशेष बिजनेस राउंडटेबल में भाग लेंगे। इस बैठक में ऑटोमोबाइल, नवीकरणीय ऊर्जा, रेलवे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, फूड प्रोसेसिंग और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि इस मंच पर भविष्य की साझेदारी और निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे।

    भारत और स्पेन के बीच यह संवाद ऐसे समय हो रहा है जब दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई स्पेनिश कंपनियों ने भारत में अपने निवेश और कारोबार का विस्तार किया है। वहीं भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी कंपनियां भी स्पेन में अपनी उपस्थिति लगातार मजबूत कर रही हैं, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और गहरे हुए हैं।

    दौरे के दूसरे चरण में भारतीय प्रतिनिधिमंडल 14 और 15 जुलाई को बेल्जियम पहुंचेगा। यहां पीयूष गोयल यूरोप के प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्र एंटवर्प पोर्ट का दौरा करेंगे। इस दौरान मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, ग्रीन लॉजिस्टिक्स और वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाने से जुड़े विभिन्न मॉडलों का अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही वे कई प्रमुख वैश्विक औद्योगिक समूहों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीईओ स्तर की बैठकें भी करेंगे।

    बेल्जियम में केंद्रीय मंत्री भारत-यूरोपीय संघ बिजनेस राउंडटेबल और ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की बैठकों में भी भाग लेंगे। इन बैठकों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, व्यापार को सरल बनाने, आधुनिक तकनीकों के उपयोग, टिकाऊ औद्योगिक विकास और मजबूत सप्लाई चेन जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। इन वार्ताओं का उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाना है।

    दौरे के अंतिम चरण में 16 और 17 जुलाई को प्रतिनिधिमंडल फिनलैंड जाएगा। यहां आयोजित इंडिया-फिनलैंड बिजनेस राउंडटेबल में डिजिटलाइजेशन, क्लीन एनर्जी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों पर विचार किया जाएगा। इस यात्रा को भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति के महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यूरोपीय देशों के साथ आर्थिक साझेदारी मजबूत होने, निवेश बढ़ने और भारतीय उद्योगों के लिए नए कारोबारी अवसर खुलने की उम्मीद है।

  • ऑकलैंड से पीएम मोदी का वैश्विक निवेशकों को संदेश, भारत को बताया दुनिया की विकास यात्रा का सबसे मजबूत लॉन्च पैड, रणनीतिक साझेदारी से खुलेंगे नए अवसर

    ऑकलैंड से पीएम मोदी का वैश्विक निवेशकों को संदेश, भारत को बताया दुनिया की विकास यात्रा का सबसे मजबूत लॉन्च पैड, रणनीतिक साझेदारी से खुलेंगे नए अवसर


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान भारत को वैश्विक आर्थिक विकास का प्रमुख केंद्र बताते हुए अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से भारत की विकास यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं है, बल्कि वैश्विक विकास के लिए एक मजबूत लॉन्च पैड बन चुका है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, स्थिर नीतियां, आधुनिक बुनियादी ढांचा और डिजिटल परिवर्तन भारत को निवेश के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक देशों में शामिल कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंध एक नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी केवल कूटनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि साझा विकास और दीर्घकालिक सहयोग का नया आधार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हाल के महीनों में हुए मुक्त व्यापार समझौते से व्यापार, निवेश, तकनीक, सेवाओं और प्रतिभा के आदान-प्रदान को नई गति मिलेगी। उनका कहना था कि यह समझौता दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों के लिए अनेक नए अवसर लेकर आएगा।

    उन्होंने बताया कि भारत और न्यूजीलैंड ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही न्यूजीलैंड की ओर से भारत में दीर्घकालिक निवेश की प्रतिबद्धता दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे का संकेत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल पूंजी निवेश नहीं, बल्कि भारत के विकास और नवाचार की यात्रा में साझेदारी का प्रतीक है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग और लगातार विकसित हो रहा बुनियादी ढांचा भारत को वैश्विक निवेश का पसंदीदा गंतव्य बना रहे हैं। सरकार की सुधार आधारित नीतियों ने उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया है और निवेशकों को दीर्घकालिक स्थिरता का भरोसा दिया है।

    उन्होंने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई प्रमुख उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने वैश्विक कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने का निमंत्रण दिया।

    प्रधानमंत्री ने विमानन, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का घरेलू विमानन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और दोनों देश कार्गो कॉरिडोर, बेहतर हवाई संपर्क तथा संयुक्त पर्यटन पैकेज विकसित कर सकते हैं। कृषि और बागवानी क्षेत्र में भी सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड की विशेषज्ञता और भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार का संयोजन वैश्विक निर्यात के नए अवसर तैयार कर सकता है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने डिजिटल भुगतान, फिनटेक, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और स्मार्ट शहरों जैसे क्षेत्रों को भविष्य की साझेदारी का आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत में निजी भागीदारी के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोला जा चुका है और बड़ी संख्या में स्टार्टअप नवाचार को आगे बढ़ा रहे हैं। जल प्रबंधन, शहरी परिवहन, कचरा प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा दी जा सकती है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि मजबूत आर्थिक सहयोग, नवाचार और साझा निवेश के माध्यम से भारत और न्यूजीलैंड आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास के महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरेंगे।

  • शेयर बाजार आउटलुक 11 जुलाई जानिए किन फैक्टर्स से तय होगी अगले सप्ताह बाजार की दिशा

    शेयर बाजार आउटलुक 11 जुलाई जानिए किन फैक्टर्स से तय होगी अगले सप्ताह बाजार की दिशा


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा क्योंकि बीएसई और एनएसई दोनों एक्सचेंज साप्ताहिक अवकाश के चलते बंद रहेंगे। हालांकि निवेशकों के लिए यह दिन अगले सप्ताह की रणनीति तैयार करने का अच्छा अवसर हो सकता है। बाजार भले ही बंद रहे लेकिन वैश्विक बाजारों की गतिविधियां कच्चे तेल की कीमतें डॉलर इंडेक्स विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री और कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले कारोबारी सत्र की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    बीते कुछ कारोबारी सत्रों में भारतीय बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला है। एक ओर घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेत निवेशकों का भरोसा बढ़ा रहे हैं तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम बाजार की चाल पर असर डाल रहे हैं। ऐसे में अगले सप्ताह निवेशकों की नजर सबसे पहले वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर रहेगी। यदि अमेरिका और एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार में भी अच्छी शुरुआत देखने को मिल सकती है।

    आईटी बैंकिंग ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर विशेष नजर बनी रहेगी। इन सेक्टरों की कई बड़ी कंपनियां तिमाही नतीजे जारी करने वाली हैं। यदि कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो संबंधित शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है। वहीं कमजोर नतीजों की स्थिति में मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगी। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी या गिरावट का असर भी भारतीय बाजार पर देखने को मिलेगा क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचना चाहिए और केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ही ध्यान देना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बाजार में आने वाली गिरावट अच्छे शेयरों में निवेश का अवसर बन सकती है। वहीं छोटे निवेशकों को किसी भी अफवाह के आधार पर निवेश करने से बचना चाहिए और अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखनी चाहिए।

    अगले कारोबारी सप्ताह में वैश्विक आर्थिक आंकड़े केंद्रीय बैंकों से जुड़े संकेत और कॉरपोरेट नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को धैर्य के साथ बाजार पर नजर रखने और सोच समझकर निवेश का फैसला लेने की सलाह दी जा रही है। सही रणनीति और मजबूत कंपनियों का चयन लंबे समय में बेहतर रिटर्न दिलाने में मददगार साबित हो सकता है।

  • सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों के लिए मजबूत संकेत, दीर्घकाल में रिकॉर्ड स्तर पर बनी रह सकती है चमक

    सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों के लिए मजबूत संकेत, दीर्घकाल में रिकॉर्ड स्तर पर बनी रह सकती है चमक

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलते निवेश माहौल के बीच सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि अल्पकालिक अस्थिरता निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से सोने का भविष्य अब भी मजबूत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सोने की मांग उच्च स्तर पर बनी रह सकती है और इसकी कीमतों में मजबूती देखने को मिल सकती है।

    दुनियाभर में जारी युद्ध जैसे हालात, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता और विभिन्न देशों की आर्थिक नीतियों में बदलाव का सीधा असर सोने के बाजार पर पड़ रहा है। ऐसे समय में निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसके कारण सोना एक बार फिर भरोसेमंद निवेश साधन के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। यही वजह है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार में इसकी अहमियत लगातार बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे देशों में सोने की मांग केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक परंपराओं से भी गहराई से जुड़ी हुई है। शादी-विवाह, त्योहारों और पारंपरिक अवसरों पर सोने की खरीदारी का चलन वर्षों से कायम है। इसके अलावा युवा आबादी में बढ़ती आय, संगठित ज्वैलरी बाजार का विस्तार और ब्रांडेड आभूषणों की बढ़ती स्वीकार्यता भी इस क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाओं को मजबूत बना रही है।

    हालांकि बढ़ती कीमतों का असर उपभोक्ताओं की खरीदारी पर भी दिखाई दिया है। जब सोने के दाम तेजी से बढ़ते हैं तो कई ग्राहक खरीदारी को कुछ समय के लिए टाल देते हैं। वहीं कीमतों में स्थिरता आने या सीमित गिरावट होने पर बाजार में मांग फिर से बढ़ने लगती है। इससे स्पष्ट है कि उपभोक्ता पूरी तरह बाजार से दूर नहीं हो रहे हैं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार अपने खरीद निर्णय में बदलाव कर रहे हैं।

    बीते वित्तीय वर्ष के दौरान सोने की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। इसका प्रभाव शुरुआती महीनों में मांग पर पड़ा और बाजार में खरीदारी अपेक्षाकृत धीमी रही। हालांकि वर्ष के दूसरे हिस्से में स्थिति में सुधार देखने को मिला और आभूषणों के साथ-साथ सोने के सिक्कों की मांग में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि ऊंची कीमतों के बावजूद सोने के प्रति उपभोक्ताओं का भरोसा बरकरार है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। कई देशों द्वारा व्यापारिक नीतियों में बदलाव, आयात शुल्क में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों ने कारोबारी रणनीतियों को प्रभावित किया है। इसके बावजूद कंपनियां बदलते वैश्विक माहौल के अनुरूप अपनी योजनाओं में संशोधन कर अवसरों का लाभ उठाने की दिशा में काम कर रही हैं। मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कारोबारी सतर्कता भी बढ़ाई गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अब भी एक महत्वपूर्ण परिसंपत्ति बना रहेगा। आर्थिक अस्थिरता, महंगाई और वैश्विक जोखिमों के दौर में सोना निवेश पोर्टफोलियो को संतुलित रखने का प्रभावी माध्यम माना जाता है। यही कारण है कि बाजार में अस्थायी उतार-चढ़ाव के बावजूद दीर्घकाल में सोने की चमक बरकरार रहने और इसकी मांग मजबूत बने रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

  • वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत पर पीएम मोदी का भरोसा, बोले- निवेश और कारोबार के लिए सबसे मजबूत बन रहा देश

    वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत पर पीएम मोदी का भरोसा, बोले- निवेश और कारोबार के लिए सबसे मजबूत बन रहा देश

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की विकास यात्रा और आर्थिक सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि देश आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में व्यवधान, व्यापारिक अनिश्चितता और मांग में कमी जैसी परिस्थितियों के बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक प्रदर्शन किया है और लगातार सुधारों के जरिए निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार किया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया अनेक आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है, लेकिन कठिन परिस्थितियां ही किसी देश की वास्तविक क्षमता की परीक्षा लेती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत ने ऐसे समय में अपनी आर्थिक मजबूती साबित की है और आने वाले वर्षों में भी विकास की गति बनाए रखने की पूरी क्षमता रखता है।

    उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में भारत ने 7.7 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर्ज की, जो वैश्विक परिस्थितियों के बीच देश की मजबूत आर्थिक नींव का संकेत है। उनके अनुसार पिछले बारह वर्षों में सरकार ने निरंतर सुधार की नीति अपनाते हुए अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक बदलाव किए हैं। लगातार सुधार और बेहतर नीतियों के माध्यम से देश के आर्थिक ढांचे को अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाया गया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के महीनों में कर व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और कारोबार सुगमता से जुड़े नई पीढ़ी के सुधार लागू किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य निवेशकों के लिए अनावश्यक बाधाओं को कम करना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और उद्योगों को अधिक अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी को लगातार बढ़ावा दे रही है और अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निवेश के लिए खोल दिया गया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में प्रोत्साहन योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका लाभ घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों को मिल सकता है। सरकार का प्रयास है कि उद्योगों को नीति स्थिरता, बेहतर बुनियादी ढांचा और तेज निर्णय प्रक्रिया उपलब्ध कराई जाए, जिससे भारत वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बन सके।

    प्रधानमंत्री ने जापानी उद्योग जगत का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में भारत जापानी कंपनियों के लिए सबसे पसंदीदा निवेश स्थलों में शामिल रहा है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी और आपसी विश्वास का परिणाम बताया। उन्होंने जापानी निवेशकों से भारत में उपलब्ध नए अवसरों का लाभ उठाने और दीर्घकालिक साझेदारी को और मजबूत बनाने का आग्रह किया।

    इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से विशेष ‘जापान बिजनेस वीक’ का आयोजन किया जाएगा। इस पहल के तहत वरिष्ठ अधिकारी जापानी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद करेंगे, उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनेंगे तथा कारोबार सुगमता से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए आवश्यक कदमों पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के साथ निरंतर संवाद और सहयोग के माध्यम से भारत को वैश्विक उद्योग एवं निवेश का और अधिक आकर्षक केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।