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  • फ्लाईदुबई की उड़ान में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट को इस्राइल देगा राष्ट्रपति पुरस्कार

    फ्लाईदुबई की उड़ान में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट को इस्राइल देगा राष्ट्रपति पुरस्कार


    तेल अवीव। फ्लाईदुबई की उड़ान में कथित अपहरण की कोशिश को नाकाम करने और बड़ी विमानन दुर्घटना टालने में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को इस्राइल नागरिक वीरता के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित करेगा। राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने गुरुवार को इसकी घोषणा की। घटना के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए कैप्टन मच्छार फिलहाल अबू धाबी के अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। इस्राइल ने विमान में सवार छह यात्रियों को भी उनकी बहादुरी के लिए सम्मानित किया है।

    छह इस्राइली यात्रियों को भी मिलेगा नागरिक वीरता पदक
    राष्ट्रपति हर्जोग ने पिछले सप्ताह फ्लाइट FZ1073 को दुर्घटनाग्रस्त करने की कथित कोशिश को विफल करने में मदद करने वाले छह इस्राइली यात्रियों को नागरिक वीरता के लिए राष्ट्रपति पदक प्रदान किया। जेरूसलम पोस्ट और टाइम्स ऑफ इस्राइल की रिपोर्ट के मुताबिक, सम्मानित होने वालों में ताली मानेस, ज्विका मानेस, यानिव हयौन, डॉ. शोता मुसायेव, आसफ राजुआन और ओर पारडिलोव शामिल हैं। इन सभी ने कथित अपहरण के प्रयास को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    यात्रियों की सूझबूझ से टली बड़ी विमानन दुर्घटना
    घटना के दौरान ताली मानेस ने सबसे पहले खतरे को भांपकर चेतावनी दी। इसके बाद यानिव हयौन, ज्विका मानेस, ओर पारडिलोव और आसफ राजुआन ने मिलकर सह-पायलट को काबू करने में मदद की। पेशे से चिकित्सक डॉ. शोता मुसायेव ने घायल पायलट को तत्काल चिकित्सा सहायता दी।

    राष्ट्रपति हर्जोग ने यरुशलम में इन यात्रियों की सराहना करते हुए कहा कि सामान्य नागरिकों ने असाधारण साहस दिखाकर खुद को सच्चा नायक साबित किया। उनके मुताबिक, साहस, दृढ़ संकल्प और सूझबूझ से इन लोगों ने एक विनाशकारी विमानन हादसे को टालने में मदद की। ऐसी घटना से पूरी दुनिया हिल सकती थी, लेकिन यात्रियों की तत्परता से 174 लोगों की जान बचाने में मदद मिली।

    वैकल्पिक पायलटों और अन्य यात्रियों का भी जताया आभार
    इस्राइली राष्ट्रपति ने विमान को संभालने वाले वैकल्पिक पायलटों और आपात स्थिति के दौरान मदद करने वाले अन्य यात्रियों के प्रति भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि संकट के समय सभी के सहयोग से बड़ी त्रासदी को टालना संभव हुआ।

    हालांकि, हर्जोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रियों की बहादुरी और सूझबूझ घटना की पूरी जांच की जरूरत को खत्म नहीं करती। उन्होंने कहा कि इस घटना से जुड़े सभी सवालों के जवाब हासिल करना जरूरी है। नागरिकों के साहस और तत्परता के बावजूद जांच की जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।

    पीएम नेतन्याहू ने भी कैप्टन स्मित की बहादुरी को सराहा
    इस घटना के बाद इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अस्पताल में भर्ती भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार से फोन पर बातचीत की थी। बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने उनकी बहादुरी और विपरीत परिस्थितियों में शांत रहने की क्षमता की प्रशंसा की।

    नेतन्याहू ने कहा था कि कैप्टन मच्छार ने कई लोगों की जान बचाई और दुनिया में मानवता की भावना को मजबूत किया। उन्होंने भारतीय पायलट को भारत और इस्राइल के लोगों के साथ-साथ पूरी दुनिया का हीरो बताया।

    नेतन्याहू ने इस्राइल आने का दिया न्योता
    प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार से स्वस्थ होने के बाद इस्राइल आने का आग्रह किया और कहा कि देश उनके साहस के लिए आभारी है। सूत्रों के मुताबिक, नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्राइल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया है। इस्राइल का स्वतंत्रता दिवस 14 मई को मनाया जाता है।

    अबू धाबी के अस्पताल में चल रहा इलाज
    कैप्टन मच्छार फिलहाल अबू धाबी के एक अस्पताल में अपनी चोटों से उबर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, उड़ान के कॉकपिट में सह-पायलट के कथित हमले के दौरान उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। इसके बावजूद संकट की स्थिति में उनकी भूमिका विमान और उसमें सवार यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से अहम रही।

    इस्राइल की ओर से राष्ट्रपति पुरस्कार देने की घोषणा को कैप्टन मच्छार के साहस और कर्तव्यनिष्ठा की अंतरराष्ट्रीय पहचान के रूप में देखा जा रहा है। इस सम्मान के जरिए उस घटना में जोखिम उठाकर लोगों की जान बचाने में योगदान देने वालों के प्रयासों को भी मान्यता दी जाएगी। घटना में सह-पायलट की भूमिका और कथित अपहरण की कोशिश से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के नतीजे सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।

  • स्मित मच्छार पर हमले के बाद फ्लाईदुबई विमान को गिराने की तैयारी में था इजरायल, 150 यात्रियों की थी जान

    स्मित मच्छार पर हमले के बाद फ्लाईदुबई विमान को गिराने की तैयारी में था इजरायल, 150 यात्रियों की थी जान


    नई दिल्ली: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर सह-पायलट के हमले और विमान को कथित तौर पर अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश के बाद एक बड़ा खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉकपिट में हुए हमले की जानकारी मिलने के बाद इजरायल ने विमान को निशाना बनाने की तैयारी कर ली थी। इजरायल को आशंका थी कि यदि विमान को हाइजैक कर लिया जाता है तो उसका इस्तेमाल 11 सितंबर 2001 जैसी घटना को अंजाम देने के लिए किया जा सकता है। विमान में करीब 150 इजरायली यात्री सवार थे। ऐसे में इजरायल के सामने विमान को गिराने और संभावित रूप से किसी बड़े हादसे को रोकने के बीच फैसला लेने की स्थिति बन गई थी।

    घटना के दौरान ओमानी सह-पायलट ने कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर कुल्हाड़ी से हमला किया। हमले में मच्छार गंभीर रूप से घायल हो गए। शुरुआत में विमान में मौजूद अन्य लोगों को कॉकपिट के भीतर हुई घटना की जानकारी नहीं हो सकी। इसके बाद कैप्टन मच्छार ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इससे कुछ क्रू सदस्य और यात्री अंदर पहुंच सके और उन्होंने सह-पायलट को काबू में कर लिया। घटना के बाद विमान में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने नियंत्रण संभाला और विमान को सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया।

    विमान के सुरक्षित उतरने से उसमें सवार करीब 180 लोगों की जान बच गई। रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल की चिंता इस बात को लेकर थी कि अगर विमान अपना रास्ता बदलकर किसी बड़े शहर या ऊंची इमारत की ओर जाता है तो इससे बड़ी संख्या में लोगों की जान जा सकती है। इसी आशंका के कारण विमान के रास्ते में बदलाव नहीं होने की स्थिति में उसे निशाना बनाने की तैयारी की गई थी। हालांकि विमान को सुरक्षित उतार लिया गया और इजरायल को उस योजना को लागू करने की जरूरत नहीं पड़ी। घटना के बाद मामले की जांच कई स्तरों पर की जा रही है।

    इस मामले में ओमानी सह-पायलट की पुरानी गतिविधियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं। ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियां करीब एक दशक पहले उसके ऑस्ट्रेलिया में रहने के दौरान की गतिविधियों की जांच कर रही हैं। ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस के मुताबिक, संघीय और राज्य पुलिस तथा देश की घरेलू खुफिया एजेंसी की संयुक्त आतंकवाद रोधी टीम उसके ऑस्ट्रेलिया से संबंधों की जांच कर रही है। सह-पायलट फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात में हिरासत में है। उस पर इजरायल जा रहे विमान को अपने नियंत्रण में लेने की कथित कोशिश का आरोप है।

    न्यूजीलैंड की पुलिस ने भी कहा है कि सह-पायलट कुछ समय न्यूजीलैंड में रहा था और अधिकारी वहां उसके रहने से जुड़े पहलुओं की जांच करेंगे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उसे 2014 में ऑस्ट्रेलिया का छात्र वीजा मिला था और वह 2015 में एक विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल होने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंचा था। बताया गया है कि वह 2017 में ऑस्ट्रेलिया से चला गया। इसके बाद अधिकारियों ने पुष्टि की कि वह संबंधित पाठ्यक्रम में पंजीकृत नहीं था, जिसके बाद 2019 में उसका वीजा रद्द कर दिया गया था। इस पूरे घटनाक्रम में विमान पर हमला, उसके सुरक्षित उतरने और सह-पायलट की पृष्ठभूमि की जांच प्रमुख पहलू बने हुए हैं।

  • को-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने जुलाई में ही इजरायल में विमान क्रैश करने की योजना बनाई थी, आखिरी वक्त पर किया रद्द

    को-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने जुलाई में ही इजरायल में विमान क्रैश करने की योजना बनाई थी, आखिरी वक्त पर किया रद्द

    नई दिल्ली ।फ्लाईदुबई से इजरायल जा रहे विमान में हमला करने के आरोपी को-पायलट हमाम अल-हम्मामी को लेकर जांच में एक और अहम जानकारी सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, हम्मामी ने जुलाई में ही इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर एक विमान को क्रैश करने की योजना बनाई थी। हालांकि, उसने आखिरी समय में अपनी इस योजना को रद्द कर दिया था। मौजूदा मामले में पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार, हम्मामी पहले से ही इजरायल में विमान के जरिए हमला करने की योजना पर काम कर रहा था।

    बताया गया है कि हम्मामी ने जून में ही बेन गुरियन एयरपोर्ट से जुड़ी जानकारी जुटाना शुरू कर दी थी। इसके बाद जुलाई में उसने विमान को क्रैश करने की पूरी योजना तैयार की। हालांकि, जिस विमान को वह निशाना बनाने की योजना बना रहा था, उसके क्रू में उसका एक दोस्त भी शामिल था। इसी वजह से उसने कथित तौर पर आखिरी वक्त पर अपनी योजना बदल दी और हमले को रद्द कर दिया। इस जानकारी से पता चलता है कि जुलाई में ही उसने इजरायल में विमान के जरिए हमला करने की तैयारी शुरू कर दी थी।

    इसके बाद फ्लाईदुबई की इजरायल जाने वाली उड़ान को लेकर भी हम्मामी की कथित योजना सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, उसने जानबूझकर तेल अवीव जाने वाली उड़ान को चुना था। उसकी योजना कॉकपिट का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की थी। इसके बाद वह विमान को सामान्य तरीके से उड़ाता रहता और लैंडिंग के समय आखिरी पल में विमान को किसी इमारत या दूसरे विमान से टकराने की कोशिश करता। इस तरह विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की योजना बनाई गई थी।

    उड़ान के दौरान हम्मामी ने को-पायलट स्मित मछार पर हमला किया और विमान में आपात स्थिति के लिए रखी गई कुल्हाड़ी से उन पर वार किया। इसके बाद विमान के कैप्टन कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे। विमान में मौजूद कई यात्रियों ने हम्मामी को काबू में कर लिया। इसके बाद विमान में मौजूद ड्यूटी से बाहर के पायलटों ने विमान का नियंत्रण संभाला और उसे सुरक्षित रूप से उतार लिया। इस घटना के बाद हम्मामी से पूछताछ की जा रही है और उसके पहले से तैयार किए गए कथित हमले के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

    जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, इजरायली जांचकर्ताओं ने अब तक हम्मामी से सीधे पूछताछ नहीं की है। उसके बारे में सामने आई जानकारी संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में हुई जांच के दौरान सामने आने की बात कही गई है। मामले में अब यह भी जांच की जा रही है कि हम्मामी ने इजरायल जाने वाली उड़ान को क्यों चुना और उसके हमले की योजना कितनी पहले से तैयार थी। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात में उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है। उसे मौत की सजा दिए जाने की संभावना की बात सामने आई है, लेकिन अभी तक उसके खिलाफ कोई औपचारिक सजा सुनाई नहीं गई है। मामले की जांच जारी है।

  • यूएन में नेतन्याहू ने ममदानी पर साधा निशाना, कहा- न्यूयॉर्क में यहूदी खुद को सुरक्षित नहीं मानते

    यूएन में नेतन्याहू ने ममदानी पर साधा निशाना, कहा- न्यूयॉर्क में यहूदी खुद को सुरक्षित नहीं मानते

    नई दिल्ली । इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ममदानी की गाजा और इस्राइल से जुड़ी टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि उनकी बयानबाजी से न्यूयॉर्क में रहने वाले यहूदी समुदाय के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ी है। नेतन्याहू ने ममदानी को यहूदी-विरोधी मेयर भी बताया।

    अपने भाषण में नेतन्याहू ने कहा कि ममदानी के मेयर चुने जाने के बाद कई यहूदी न्यूयॉर्क में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग उनसे बातचीत के दौरान कहते हैं कि शहर तेजी से बदल गया है और अब वह पहले जैसा नहीं रहा। यह टिप्पणी दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चल रहे सार्वजनिक विवाद के बीच आई है।

    ममदानी गाजा में इस्राइल की सैन्य कार्रवाई के मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने नेतन्याहू के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं और फिलिस्तीनी अधिकारों की वकालत की है। ममदानी का रुख रहा है कि इस्राइल की नीतियों की आलोचना करना अपने आप में यहूदी-विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। दूसरी ओर, नेतन्याहू उनकी टिप्पणियों को इस्राइल और यहूदी समुदाय की सुरक्षा से जोड़ते रहे हैं।

    नेतन्याहू और ममदानी के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय यानी आईसीसी का गिरफ्तारी वारंट भी रहा है। ममदानी ने अपने चुनाव अभियान के दौरान कहा था कि यदि नेतन्याहू न्यूयॉर्क आए तो वह उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लागू कराने की कोशिश करेंगे। बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि न्यूयॉर्क शहर के पास किसी विदेशी नेता को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है। हाल के दिनों में उन्होंने अमेरिकी संघीय सरकार से आईसीसी के वारंट का सम्मान करने की अपील भी की है।

    नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान इस मुद्दे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ममदानी ने उन्हें न्यूयॉर्क आने से रोकने और चुप कराने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि न तो उन्हें और न ही सच्चाई को चुप कराया जा सकता है।

    इसी सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ममदानी के बीच न्यूयॉर्क में मुलाकात भी हुई थी। दोनों नेताओं के बीच कई राजनीतिक और नीतिगत मतभेद हैं, लेकिन बैठक में शहर से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई। नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप के इस्राइल के प्रति समर्थन की प्रशंसा की और उन्हें अपना महत्वपूर्ण साझेदार बताया।

    इस पूरे विवाद में एक तरफ ममदानी इस्राइल की गाजा नीति और फिलिस्तीनी अधिकारों को लेकर अपनी आलोचना पर कायम हैं, वहीं नेतन्याहू उनकी टिप्पणियों को यहूदी समुदाय की सुरक्षा और यहूदी-विरोधी भावना के संदर्भ में पेश कर रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक टकराव अब गाजा युद्ध के साथ-साथ न्यूयॉर्क में यहूदी सुरक्षा, आईसीसी के गिरफ्तारी वारंट और अमेरिकी सरकार की भूमिका जैसे मुद्दों से भी जुड़ गया है।

    नेतन्याहू के संयुक्त राष्ट्र संबोधन के दौरान कई प्रतिनिधि सभागार से बाहर भी चले गए और न्यूयॉर्क में उनके दौरे के खिलाफ प्रदर्शन हुए। इस घटनाक्रम ने उनके भाषण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी राजनीतिक मतभेदों को भी सामने ला दिया।

  • वेस्ट बैंक विवाद पर इजरायल का ब्रिटेन को जवाब, पूर्वी यरूशलम का ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास बंद करने का ऐलान

    वेस्ट बैंक विवाद पर इजरायल का ब्रिटेन को जवाब, पूर्वी यरूशलम का ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास बंद करने का ऐलान


    नई दिल्ली। वेस्ट बैंक को लेकर इजरायल और ब्रिटेन के बीच बढ़ता तनाव अब राजनयिक स्तर पर भी पहुंच गया है। इजरायल ने पूर्वी यरूशलम स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने का फैसला किया है। इजरायल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने बताया कि यह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मिलकर लिए गए कई फैसलों का हिस्सा है। यह कार्रवाई ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा की उस पहल के बाद हुई है, जिसमें कब्जे वाले वेस्ट बैंक की यहूदी बस्तियों से आने वाले सामान के आयात पर रोक लगाने की बात कही गई है।

    ब्रिटेन को गाजा मिशन से भी हटाएगा इजरायल

    पूर्वी यरूशलम का ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास ब्रिटेन और फिलिस्तीनी अथॉरिटी के बीच संबंधों से जुड़े मामलों को देखता था। इजरायल ने इसके अलावा अमेरिका की अगुआई वाले गाजा समन्वय मिशन से ब्रिटेन को बाहर करने की बात कही है। साथ ही फिलिस्तीनी सुरक्षा बलों को ब्रिटेन की ओर से दी जा रही ट्रेनिंग भी रोकने का फैसला किया गया है।

    जेरेमी कॉर्बिन समेत 12 ब्रिटिश अधिकारियों पर रोक

    इजरायल ने ब्रिटेन के पूर्व नेता जेरेमी कॉर्बिन समेत 12 चुने हुए ब्रिटिश अधिकारियों और कुछ अन्य नागरिकों के देश में प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। इजरायल का आरोप है कि इन लोगों की गतिविधियां यहूदी विरोधी और इजरायल विरोधी रही हैं।

    विदेश मंत्री गिडियन सार ने ब्रिटेन की पहल को गलत बताया। उन्होंने इसे किसी संप्रभु देश के आंतरिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप करार दिया। सार ने ब्रिटेन के विदेश सचिव एड मिलिबैंड के उस आरोप को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि वेस्ट बैंक के कुछ इलाकों से फिलिस्तीनियों को जबरन हटाया जा रहा है।

    अमेरिका ने व्यापारिक पाबंदियों का किया विरोध

    दूसरी तरफ अमेरिका ने ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा की प्रस्तावित व्यापारिक पाबंदियों का समर्थन नहीं किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका इस अभियान का हिस्सा नहीं बनेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम वेस्ट बैंक में तनाव और अस्थिरता को और बढ़ा सकते हैं।

    वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने संयुक्त बयान में कहा कि यह कदम दो-राष्ट्र समाधान की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण मोड़ है। तीनों नेता सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में हैं। डेनमार्क, नॉर्वे, पोलैंड, स्पेन और स्वीडन ने भी दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन को दोहराया है।

    पाबंदी का आर्थिक असर सीमित, राजनीतिक संदेश बड़ा

    वेस्ट बैंक की यहूदी बस्तियों से मुख्य रूप से खजूर, खट्टे फल, जड़ी-बूटियां और वाइन जैसे कृषि उत्पादों का निर्यात होता है। इजरायल के कुल निर्यात में इनका हिस्सा काफी छोटा है। ऐसे में प्रस्तावित व्यापारिक पाबंदियों का सीधा आर्थिक प्रभाव सीमित माना जा रहा है, लेकिन इसका कूटनीतिक और राजनीतिक संदेश काफी महत्वपूर्ण है।

    इसी बीच इजरायल वेस्ट बैंक में करीब 1,000 नए घरों के निर्माण की योजना पर आगे बढ़ रहा है। इनमें ई1 बस्ती परियोजना को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जताई जा रही है। इसे लेकर इजरायल और उसके पश्चिमी सहयोगियों के बीच मतभेद और गहराने की आशंका है।

  • जवायदा और नुसेइरात में इजरायली कार्रवाई से गाजा में फिर बिगड़े हालात, नागरिकों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

    जवायदा और नुसेइरात में इजरायली कार्रवाई से गाजा में फिर बिगड़े हालात, नागरिकों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल


    नई दिल्ली ।गाजा में इजरायल और हमास के बीच जारी तनाव के बीच ताजा इजरायली सैन्य हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत होने की खबर है। मृतकों में चार साल का एक बच्चा भी शामिल बताया गया है। हमलों में सात अन्य लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, घायलों का इलाज अस्पतालों में कराया जा रहा है।

    ताजा घटनाक्रम ने गाजा में लागू युद्धविराम की स्थिति को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, मध्य गाजा के जवायदा शहर में एक इमारत को निशाना बनाया गया, जिससे उसे काफी नुकसान पहुंचा। हमले से पहले इलाके के नागरिकों को अपनी संपत्ति और क्षेत्र खाली करने की चेतावनी दिए जाने की बात भी सामने आई है।

    स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक, हमले के बाद घटनास्थल से मलबा और छर्रे काफी दूरी तक फैल गए। इस घटना में कई लोग घायल हुए। घायलों में चार वर्षीय मोहम्मद अब्देल सलाम ताहा भी शामिल था। बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना में अन्य घायल लोगों का उपचार जारी रहने की जानकारी है।

    गाजा के स्थानीय निवासी अबू अहमद ने मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि जमीन पर हालात युद्धविराम जैसे दिखाई नहीं दे रहे हैं। उनके मुताबिक, क्षेत्र के लोग ऐसा स्थायी समाधान चाहते हैं जिससे उन्हें लगातार हिंसा और असुरक्षा के बीच जीवन न बिताना पड़े। लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण गाजा में बड़ी संख्या में लोग विस्थापन और मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं।

    स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक अन्य हमले की जानकारी नुसेइरात शरणार्थी शिविर से भी दी है। बताया गया कि यहां भी हवाई हमला हुआ। नुसेइरात शिविर गाजा में लंबे समय से विस्थापित लोगों की आबादी का प्रमुख क्षेत्र रहा है। ऐसे में वहां किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर आम नागरिकों पर पड़ने की आशंका रहती है।

    ताजा हमलों से पहले भी इजरायली सेना और हमास के बीच युद्धविराम के उल्लंघन को लेकर आरोप लगते रहे हैं। इजरायली पक्ष की ओर से कहा गया है कि हमास से जुड़े लोग सैन्य गतिविधियां जारी रख रहे हैं। दूसरी ओर, फिलिस्तीनी क्षेत्रों में नागरिकों की मौत और विस्थापन को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है।

    इजरायली सेना ने इससे पहले देर अल-बलाह में हमास के एक वरिष्ठ सशस्त्र सदस्य शरीफ अल हसनत को मार गिराने का दावा किया था। सेना के मुताबिक, वह हमास के भूमिगत बुनियादी ढांचे को दोबारा तैयार करने के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा था। इजरायली पक्ष ने उस पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था।

    गाजा में ताजा हिंसा ऐसे समय सामने आई है जब क्षेत्र में संघर्ष को नियंत्रित करने और युद्धविराम को बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं। आम नागरिकों की मौत और घायल होने की घटनाओं ने मानवीय स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। लगातार सामने आ रही हिंसा के बीच स्थायी शांति और सुरक्षित माहौल स्थापित करना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

  • इजरायल ने सीरिया के इदलिब में एयरबेस पर किए हवाई हमाले…. रनवे को उड़ाया

    इजरायल ने सीरिया के इदलिब में एयरबेस पर किए हवाई हमाले…. रनवे को उड़ाया


    नई दिल्ली। 1
    8 अगस्त 2026 की रात सीरिया (Syria) के उत्तर-पश्चिमी प्रांत इदलिब (Eastern Northwestern Province Idlib) के पूर्वी इलाके में स्थित अबू अल-दुहुर सैन्य एयरबेस (Abu al-Duhur Military Airbase) पर चार हवाई हमले हुए हैं. स्थानीय सीरियाई स्रोत, सोशल मीडिया अकाउंट्स और कुछ समाचार एजेंसियों ने बताया कि हमलों का मुख्य निशाना एयरबेस का रनवे था. आकाश में रोशनी वाले फ्लेयर छोड़े जाने का भी जिक्र है, जो आमतौर पर रात के ऑपरेशन में लक्ष्य को रोशन करने या निगरानी के लिए इस्तेमाल होते हैं।

    इन हमलों को इजरायली लड़ाकू विमानों द्वारा अंजाम दिया गया बताया, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में अभी यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि हमला किसने किया. अब तक इजरायल, तुर्की या सीरिया की नई सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, इसलिए ये खबरें अभी तक स्वतंत्र रूप से पूरी तरह पुष्ट नहीं हुई हैं।

    अबू अल-दुहुर एयरबेस सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान महत्वपूर्ण रहा है. 2012 से 2015 तक विद्रोही ताकतों ने इसे घेरे रखा था और आखिरकार कब्जा कर लिया था. बाद में असद शासन ने इसे वापस लिया, लेकिन दिसंबर 2024 में असद शासन के पतन के बाद विद्रोही समूहों ने इसे फिर से अपने नियंत्रण में ले लिया.

    फिलहाल यह बेस सीरिया की नई और सीमित वायुसेना के नियंत्रण में बताया जाता है. यहां पुराने सोवियत काल के Su-22 लड़ाकू-बमवर्षक, L-39 ट्रेनर विमान और कुछ हेलीकॉप्टर रखे गए हैं. हाल के हफ्तों में इन पुराने Su-22 विमानों के प्रशिक्षण उड़ानें भरने की खबरें आई थीं, जिससे इजरायल में चिंता जताई गई थी कि नई सीरियाई वायुसेना धीरे-धीरे अपनी क्षमताएं बढ़ा रही है।


    रणनीतिक महत्व और संभावित उद्देश्य

    इदलिब क्षेत्र तुर्की के प्रभाव क्षेत्र के करीब है और सीरिया के नए प्रशासन के लिए उत्तरी हिस्से में नियंत्रण बनाए रखने के लिहाज से अहम है. रनवे को निशाना बनाना यह संकेत देता है कि हमला करने वाली ताकत एयरबेस की परिचालन क्षमता को सीमित करना चाहती थी, ताकि विमान उड़ान न भर सकें.

    इजरायल लंबे समय से सीरिया में किसी भी सैन्य क्षमता के विकास को रोकने की नीति अपनाता रहा है, खासकर असद शासन के पतन के बाद जब उसने कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे, ताकि हथियार और विमान नए प्रशासन के हाथ में पूरी तरह न जा सकें. हालिया Su-22 उड़ानों के बाद इस हमले को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में तुर्की बलों की मौजूदगी का भी जिक्र है, जिससे क्षेत्रीय जटिलताएं और बढ़ सकती हैं।


    क्षेत्रीय प्रभाव और अनिश्चितता

    यह घटना मध्य पूर्व की नाजुक सुरक्षा स्थिति को और तनावपूर्ण बना सकती है. सीरिया की नई सरकार अपनी सैन्य क्षमताएं फिर से खड़ी करने की कोशिश कर रही है, जबकि इजरायल अपनी सुरक्षा रेखा बनाए रखना चाहता है. तुर्की की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि वह इदलिब में प्रभाव रखता है.

    फिलहाल नुकसान का पूरा आकलन उपलब्ध नहीं है. न ही किसी बड़े हताहत की पुष्टि हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आधिकारिक पुष्टि या सैटेलाइट चित्र नहीं आते, तब तक पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं होगी. यह घटना दिखाती है कि असद के बाद के सीरिया में भी बाहरी शक्तियां सक्रिय रूप से सैन्य संतुलन प्रभावित कर रही हैं.

  • पेजेशकियान ने 48 घंटे में ईरान पर कब्जे की कथित योजना का किया खुलासा, मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील

    पेजेशकियान ने 48 घंटे में ईरान पर कब्जे की कथित योजना का किया खुलासा, मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील

    नई दिल्ली । ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव और सैन्य संघर्ष को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने यह लड़ाई शुरू नहीं की थी, बल्कि उसके खिलाफ पहले सैन्य कार्रवाई की गई। पेजेशकियान के अनुसार, ईरान पर लगातार दबाव बनाया गया और उसे कमजोर करने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बावजूद देश अपनी स्थिति पर मजबूती से कायम है। उन्होंने कहा कि ईरानी नेतृत्व ने संकट के बीच देश की एकता और मजबूती बनाए रखने पर जोर दिया है।

    पेजेशकियान ने बताया कि संघर्ष शुरू होने से पहले उनकी सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहती थी। उनका कहना है कि ईरान युद्ध नहीं चाहता था और तनाव को कूटनीतिक माध्यमों से कम करने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि, उनके मुताबिक दूसरी ओर से सैन्य कार्रवाई की गई, जिसके बाद हालात तेजी से बदल गए। राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान पर सैन्य और राजनीतिक दबाव के बावजूद देश ने अपने फैसलों से पीछे हटने के बजाय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है। उनके बयान में ईरान की ओर से संघर्ष को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश दिखाई देती है।

    ईरानी राष्ट्रपति ने विरोधियों की कथित रणनीति का जिक्र करते हुए कहा कि यह अनुमान लगाया गया था कि ईरान ज्यादा समय तक दबाव का सामना नहीं कर पाएगा। उनके अनुसार, सीरिया जैसे हालात पैदा करके 48 घंटे के भीतर ईरान पर कब्जा करने या उसे कमजोर करने की योजना बनाई गई थी। पेजेशकियान ने दावा किया कि यह आकलन गलत साबित हुआ। उन्होंने कहा कि मुश्किल परिस्थितियों के दौरान ईरान ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया और देश को टूटने नहीं दिया। राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि ईरान आने वाले समय में भी अपने फैसलों और राष्ट्रीय हितों पर कायम रहेगा।

    पेजेशकियान ने मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि अगर मुस्लिम देश एक साथ खड़े होते हैं तो बाहरी दबाव और चुनौतियों का सामना करना कम मुश्किल हो सकता है। उनके इस आह्वान को मौजूदा क्षेत्रीय संकट के बीच समर्थन जुटाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। ईरान का मानना है कि क्षेत्रीय देशों की एकजुटता से बाहरी दबाव का प्रभाव कम किया जा सकता है। ऐसे में पेजेशकियान का संदेश केवल घरेलू जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि मुस्लिम देशों के लिए भी राजनीतिक संकेत देता है।

    ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर भी पेजेशकियान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उनसे संपर्क करना आसान नहीं है। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने खामेनेई की मौजूदगी को देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ईरान के मौजूदा नेतृत्व और संकट के दौरान निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खामेनेई की भूमिका को लेकर ईरानी नेतृत्व की प्राथमिकता भी इस बयान में दिखाई देती है।

    पेजेशकियान के बयान ऐसे समय में सामने आए हैं जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। ईरानी राष्ट्रपति एक तरफ बातचीत की कोशिशों और युद्ध शुरू नहीं करने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ किसी भी दबाव के सामने मजबूती से खड़े रहने का संदेश दे रहे हैं। आने वाले समय में सैन्य गतिविधियों के साथ कूटनीतिक प्रयास भी महत्वपूर्ण होंगे। यदि बातचीत का रास्ता खुलता है तो तनाव कम करने की संभावना बन सकती है, लेकिन सैन्य टकराव बढ़ने की स्थिति में इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है।

  • ट्रंप का दावा: गाजा से चरणबद्ध तरीके से हटेगी इजरायली सेना, हमास के निरस्त्रीकरण पर हुआ समझौता

    ट्रंप का दावा: गाजा से चरणबद्ध तरीके से हटेगी इजरायली सेना, हमास के निरस्त्रीकरण पर हुआ समझौता


    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा संघर्ष को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की मध्यस्थता में हमास और गाजा में सक्रिय अन्य सशस्त्र संगठनों के पूर्ण निरस्त्रीकरण पर एक “ऐतिहासिक समझौता” हुआ है। ट्रंप के अनुसार, इस प्रक्रिया के पूरा होने के साथ ही इजरायल अपनी सेना को गाजा से चरणबद्ध तरीके से वापस बुलाएगा।

    निरस्त्रीकरण के साथ होगी सेना की वापसी
    ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि जैसे-जैसे हमास और अन्य हथियारबंद संगठनों का निरस्त्रीकरण पूरा होगा, इजरायली सेना गाजा से पीछे हटेगी। इसके बाद गाजा की सुरक्षा की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय स्टेबलाइजेशन फोर्स और नई फिलिस्तीनी पुलिस संभालेगी। उनका कहना है कि इससे इजरायल की सुरक्षा मजबूत होगी और गाजा का इस्तेमाल भविष्य में किसी आतंकी हमले के लिए नहीं हो सकेगा।

    नई फिलिस्तीनी सरकार बनाने की योजना
    ट्रंप के मुताबिक, समझौते के तहत गाजा में नई फिलिस्तीनी सरकार का गठन किया जाएगा, जो ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के साथ मिलकर प्रशासन, पुनर्निर्माण और सामान्य जनजीवन बहाल करने का काम करेगी। उन्होंने इसे अपने 20-सूत्रीय शांति योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और कहा कि इसका उद्देश्य क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना है।

    मध्यस्थ देशों की सराहना
    अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस समझौते में मिस्र, कतर और तुर्किये की मध्यस्थता की सराहना की। हालांकि, ट्रंप के दावों पर हमास की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    हिंसा अब भी जारी
    समझौते के दावे के बीच गाजा में हिंसा थमने के संकेत नहीं मिले हैं। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार को इजरायली हवाई हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत हुई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं।

    व्हाइट हाउस ने भी किया समर्थन
    व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ने गाजा में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के पूर्ण निरस्त्रीकरण पर ऐतिहासिक समझौता कराया है। इसे क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

    क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’?
    ट्रंप के अनुसार, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ वर्ष 2026 में गठित एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसे गाजा में युद्ध के बाद पुनर्निर्माण, प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ट्रंप इस संस्था के संस्थापक अध्यक्ष हैं। उनका दावा है कि यह पहल गाजा में नई शासन व्यवस्था स्थापित करने और भविष्य में 7 अक्टूबर जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में अहम साबित होगी।

  • मिडिल ईस्ट में युद्ध का नया मोर्चा: अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, ईरान समर्थक ठिकानों पर हमला, तनाव चरम पर

    मिडिल ईस्ट में युद्ध का नया मोर्चा: अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, ईरान समर्थक ठिकानों पर हमला, तनाव चरम पर


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक नए और अधिक संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और सऊदी अरब ने संयुक्त सैन्य अभियान चलाते हुए इराक में ईरान समर्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स यानी पीएमएफ के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों में कम से कम 20 लड़ाकों की मौत हुई है जबकि 32 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है तथा युद्ध के व्यापक रूप लेने की आशंका गहरा गई है।

    अमेरिकी सेना का दावा है कि जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया वहां से अमेरिकी सैनिकों और सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों की तैयारी की जा रही थी। सुरक्षा एजेंसियों को मिली खुफिया जानकारी के आधार पर यह संयुक्त कार्रवाई की गई। हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान की ओर से जवाबी कदम उठाया गया और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने की दिशा में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। हालांकि अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने सभी मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही हवा में नष्ट कर दिया।

    इस घटनाक्रम के बीच व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की महत्वपूर्ण बैठक भी चर्चा का केंद्र रही। बैठक के बाद नेतन्याहू ने कहा कि दोनों देशों के बीच इस बात पर स्पष्ट सहमति बनी है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। माना जा रहा है कि यह बैठक मिडिल ईस्ट की भविष्य की रणनीति तय करने के लिहाज से बेहद अहम रही।

    इसी दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी ट्रंप से मुलाकात कर एयर डिफेंस सिस्टम रक्षा सहयोग और रूस यूक्रेन युद्ध पर विस्तार से चर्चा की। दूसरी ओर ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण को लेकर नया प्रस्ताव रखा है जिसमें इस रणनीतिक समुद्री मार्ग का संचालन क्षेत्र के सभी देशों की साझेदारी से करने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव को खाड़ी क्षेत्र के कई देशों का समर्थन मिलने की खबर है।

    बढ़ते तनाव के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की खबरों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली है। हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

    उधर यमन के हूती विद्रोहियों की चेतावनी के बाद रेड सी में जहाजों की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा बन गई है। रिपोर्टों के अनुसार चीन ने अपने तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हूती प्रतिनिधियों से सीधे संपर्क किया है ताकि समुद्री व्यापार प्रभावित न हो।

    संयुक्त राष्ट्र में भी इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताई गई है। पाकिस्तान ने कहा कि सऊदी अरब को इस संघर्ष में घसीटने की कोशिश हो रही है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। वहीं गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल ने सऊदी अरब पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए उसकी सुरक्षा और संप्रभुता के समर्थन का भरोसा दोहराया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह संघर्ष केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर डाल सकता है।