Tag: Israel

  • इस्राइल के विदेश मंत्री बोले- 'हमास का लश्कर से संबंध….. भारत इसे आतंकवादी संगठन घोषित करे

    इस्राइल के विदेश मंत्री बोले- 'हमास का लश्कर से संबंध….. भारत इसे आतंकवादी संगठन घोषित करे


    तेल अवीव।
    इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार (Israeli Foreign Minister Gideon Saar) ने कहा कि यरूशलम और नई दिल्ली (Jerusalem and New Delhi) के बीज संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों में सकारात्मक बदलाव दिख रहा है।

    गिदोन सार ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने एक वैश्विक प्रतिनिधिमंडल के साथ जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि उन्हें दुनिया भर से आए सम्मानित हिंदू नेताओं के एक समूह को जानकारी देने का अवसर मिला। इस बातचीत में उन्होंने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और इस्राइल से जुड़े संघर्ष की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस्राइल पिछले ढाई साल से इस्लामी चरमपंथ के खिलाफ एक गंभीर युद्ध लड़ रहा है, जिसका लक्ष्य इस्राइल को खत्म करना है। उन्होंने इसे एक ‘बहुत बड़ा खतरा’ बताया।

    सार ने यह भी कहा कि इस्राइल ने कई मोर्चों पर बढ़त हासिल की है और उसने इस्लामी चरमपंथ के ‘आतंकी नेटवर्क’ को काफी कमजोर किया है, जिसका नेतृत्व ईरान करता है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का असर पश्चिम एशिया से बाहर भी देखने को मिलेगा। भारत के साथ सुरक्षा सहयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को हमास को एक आतंकवादी संगठन घोषित करना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि हमास के संबंध अन्य चरमपंथी संगठनों से हैं, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) भी शामिल है। इस्राइली विदेश मंत्री ने कहा कि इस तरह के संगठनों के बीच वैश्विक स्तर पर जुड़ाव है और ये मिलकर काम करते हैं। इस्राइल पहले ही लश्कर-ए-तैयबा को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है और वह चाहता है कि भारत भी हमास को उसी तरह सूचीबद्ध करे। इस्राइल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत सरकार इन नेटवर्क और उनके संबंधों के बारे में जानकारी रखती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के आईआरजीसी, हमास और हिजबुल्ला जैसे संगठन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क की मदद से हमले करते हैं। अधिकारी ने कहा कि आमतौर पर ईरानी एजेंट सीधे यूरोप में हमला नहीं करते, बल्कि वे किसी स्थानीय आपराधिक समूह के जरिये हमला करवाते हैं।

    एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अगर भारत सिर्फ यह घोषणा भी करता है, तो इसका वैश्विक स्तर पर बड़ा असर होगा, क्योंकि बांग्लादेश, पाकिस्तान और मालदीव जैसे देश भारत के रुख को देखते हैं और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इससे यह संदेश जाएगा कि भारत की जमीन पर ऐसे किसी भी व्यक्ति को काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

  • अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल-लेबनान वार्ता तय, 14 अप्रैल को वॉशिंगटन में होगी बैठक

    अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल-लेबनान वार्ता तय, 14 अप्रैल को वॉशिंगटन में होगी बैठक

    तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच Israel और Lebanon बातचीत की मेज पर आने को तैयार हो गए हैं। दोनों देशों ने 14 अप्रैल को Washington, D.C. में औपचारिक बैठक करने पर सहमति जताई है, जिसमें United States मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।

    लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह पहल अमेरिकी मध्यस्थता से हुई है और इसमें लेबनान में अमेरिकी राजदूत भी शामिल थे। दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क बेहद दुर्लभ माना जाता है, क्योंकि उनके बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं और लंबे समय से तनाव बना हुआ है।

    रिपोर्टों के अनुसार, यह संपर्क अमेरिकी नेतृत्व में हुआ, जिसका उद्देश्य संघर्षविराम लागू करना और दोनों पक्षों को वार्ता की मेज तक लाना था।

    सहमति के मुताबिक 14 अप्रैल को वॉशिंगटन स्थित अमेरिकी विदेश विभाग में आमने-सामने बैठक होगी, जहां तनाव कम करने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।

    लेबनानी अधिकारियों का दावा है कि Hezbollah के खिलाफ इजरायली कार्रवाई में करीब 2000 लोगों की मौत हो चुकी है और 6300 से अधिक घायल हुए हैं। इनमें हाल के हमलों में हुई सैकड़ों मौतें भी शामिल बताई जा रही हैं।

    1948 से जारी है टकराव

    इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष का इतिहास 1948 से जुड़ा है। दोनों देशों के बीच समय-समय पर झड़पें होती रही हैं।

    विशेष रूप से 2006 Lebanon War में हजार से अधिक लोगों की जान गई थी और लेबनान में भारी तबाही हुई थी।

    दक्षिणी लेबनान क्षेत्र में तनाव लगातार बना रहता है, जहां ईरान समर्थित समूह हिजबुल्लाह सक्रिय है और यह इलाका इजरायल की सीमा से लगा हुआ है। ऐसे में 14 अप्रैल की प्रस्तावित वार्ता को क्षेत्रीय शांति की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

  • इजरायल के पास परमाणु हथियार, तो ईरान क्यों नहीं?

    इजरायल के पास परमाणु हथियार, तो ईरान क्यों नहीं?


    तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह सवाल फिर चर्चा में है कि जब के पास परमाणु हथियार होने की बात कही जाती है, तो को इन्हें हासिल करने से क्यों रोका जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका कारण अंतरराष्ट्रीय कानून की संरचना और देशों की संधियों में भागीदारी से जुड़ा है।
    विशेषज्ञ बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानून में परमाणु हथियार रखने पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है। केवल वे देश ही बाध्य होते हैं, जिन्होंने संबंधित संधियों को स्वीकार किया है। इसी संदर्भ में Nuclear Non-Proliferation Treaty यानी एनपीटी को अहम माना जाता है, जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देना है

    इस संधि के तहत दुनिया को परमाणु हथियार संपन्न और गैर-परमाणु देशों में बांटा गया। 1 जनवरी 1967 से पहले परमाणु परीक्षण करने वाले देशों अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन—को परमाणु संपन्न माना गया, जबकि अन्य देशों ने ऐसे हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता जताई।

    ईरान 1970 से एनपीटी का सदस्य है, इसलिए वह गैर-परमाणु देश की श्रेणी में आता है और उसे परमाणु हथियार विकसित न करने की शर्तों का पालन करना होता है। साथ ही उसका परमाणु कार्यक्रम International Atomic Energy Agency की निगरानी में रहता है।

    इसके विपरीत, इजरायल एनपीटी का सदस्य नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, कोई भी देश उस संधि से बाध्य नहीं होता जिसका वह हिस्सा नहीं है। इसी वजह से इजरायल पर एनपीटी के नियम लागू नहीं होते।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यही कारण है कि दोनों देशों की कानूनी स्थिति अलग दिखाई देती है।

    इजरायल के अलावा India, Pakistan और North Korea जैसे देश भी एनपीटी के बाहर रहते हुए परमाणु क्षमता रखते हैं।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में परमाणु हथियारों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। केवल वे देश ही बाध्य होते हैं, जिन्होंने एनपीटी या 2017 की परमाणु हथियार निषेध संधि जैसे समझौतों को स्वीकार किया है। इस तरह ईरान और इजरायल के बीच अंतर किसी दोहरे मापदंड से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कानून की सहमति-आधारित व्यवस्था को दर्शाता है।

  • ट्रंप बोले पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं ; ईरान युद्ध अभी लंबा खिंच सकता है

    ट्रंप बोले पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं ; ईरान युद्ध अभी लंबा खिंच सकता है


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध अब और लंबा चल सकता है। वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दुनिया पागलों के नियंत्रण में परमाणु हथियार नहीं रहने दे सकती। ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई करके यह सुनिश्चित किया कि यह देश कभी परमाणु खतरा न बने।

    28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल ने मिलकर ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। ट्रंप ने बताया कि बिना इस कार्रवाई के ईरान पहले ही परमाणु ताकत बन चुका होता। उन्होंने कहा कि उस समय ईरान परमाणु हथियार हासिल करने से सिर्फ दो हफ्ते दूर था और कूटनीतिक बातचीत काम नहीं आती।

    राष्ट्रपति ने कहा युद्ध बहुत अच्छे से आगे बढ़ रहा है। हम बहुत बढ़िया काम कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि यह संघर्ष कब तक चलेगा। ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका भविष्य में लौट सकता है लेकिन अब तक मकसद यह सुनिश्चित करना था कि किसी और राष्ट्रपति को ऐसी परेशानी न झेलनी पड़े।

    इस बीच ट्रंप प्रशासन को अंदरूनी झटका भी लगा है। नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के प्रमुख जोसेफ केंट ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई के विरोध में इस्तीफा दे दिया। केंट ने सोशल मीडिया पर अपने त्याग पत्र में लिखा कि अमेरिका पर ईरान की ओर से कोई आसन्न खतरा नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह युद्ध इज़रायल और उसके प्रभावशाली लॉबी समूहों के दबाव में शुरू किया गया। केंट ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी अंतरात्मा के खिलाफ इस युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते।

    इस इस्तीफे के समय ऑपरेशन एपिक फ्यूरी अपने तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि ईरान संकट न केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बल्कि अमेरिकी प्रशासन के अंदर भी गंभीर बहस का विषय बन गया है।

  • Israel-Iran: ‘दुश्मनों को ढूंढकर खत्म करेंगे’, ईरान के नए सुप्रीम लीडर को लेकर इस्राइल का सख्त संदेश

    Israel-Iran: ‘दुश्मनों को ढूंढकर खत्म करेंगे’, ईरान के नए सुप्रीम लीडर को लेकर इस्राइल का सख्त संदेश

    तेल अवीव। इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस्राइल रक्षा बल (आईडीएफ) ने स्पष्ट किया है कि वह हर उस व्यक्ति को निशाना बनाएगा जो उसके लिए खतरा है। इसमें ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई भी शामिल हैं। हालांकि, आईडीएफ ने यह भी माना है कि फिलहाल उन्हें खामेनेई के ठिकाने की जानकारी नहीं है।

    ठिकाने की जानकारी नहीं, लेकिन कार्रवाई तय

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आईडीएफ के सैन्य प्रवक्ता एफि डेफ्रिन ने कहा कि खामेनेई की लोकेशन को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि इस्राइल अपने दुश्मनों को छोड़ेगा नहीं। उनका कहना था कि जो भी इस्राइल के खिलाफ कदम उठाएगा, उसे ढूंढकर खत्म किया जाएगा।

    बासिज बलों पर भी इस्राइल की नजर

    आईडीएफ ने यह भी संकेत दिए हैं कि ईरान के अर्धसैनिक बासिज बल भी उसके निशाने पर हैं। डेफ्रिन ने दोहराया कि इस्राइल हर उस व्यक्ति तक पहुंचेगा, जो उसके खिलाफ काम कर रहा है। पहले आईडीएफ यह दावा कर चुका है कि उसने बासिज कमांडर गुलामरेजा सुलेमानी को मार गिराया था।

    लंबे सैन्य अभियान की तैयारी

    इस्राइल ने साफ कर दिया है कि वह लंबे समय तक चलने वाले अभियान के लिए तैयार है। इसमें यहूदी पर्व फसह के दौरान भी सैन्य गतिविधियां जारी रह सकती हैं। इस बीच, ईरान की ओर से दागी जा रही मिसाइलों को रोकने के लिए भी इस्राइल लगातार अपने रक्षा तंत्र को सक्रिय रखे हुए है।

    तेल अवीव और यरुशलम में गूंजे सायरन

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल अवीव और यरुशलम में एयर रेड सायरन सुनाई दिए। रात के समय आसमान में तेज चमक देखी गई, जिसमें तेल अवीव के ऊपर क्लस्टर म्यूनिशन मिसाइल भी शामिल थी। इसके बाद बचाव दलों को ग्रेटर तेल अवीव के कई इलाकों में भेजा गया।

    बहरीन ने भी रोकीं मिसाइलें और ड्रोन

    इस बीच बहरीन रक्षा बल ने दावा किया है कि उसने ईरान से दागी गई 129 मिसाइलों और 233 ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट किया है। यह घटनाक्रम अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच सामने आया है, जो पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से जारी है।

  • फिनलैंड के राष्ट्रपति की अपील पश्चिम एशिया में सीजफायर के लिए भारत निभाए अहम भूमिका

    फिनलैंड के राष्ट्रपति की अपील पश्चिम एशिया में सीजफायर के लिए भारत निभाए अहम भूमिका


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत से अहम कूटनीतिक भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने अमेरिका ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच तुरंत सीजफायर की जरूरत बताई है।

    ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में स्टब ने कहा कि वैश्विक समुदाय को दुश्मनी रोकने और संवाद के रास्ते खोलने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि भारत अपनी संतुलित विदेश नीति के चलते इस संकट को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    स्टब ने कहा हमें तत्काल सीजफायर की जरूरत है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने एस. जयशंकर द्वारा पहले की गई शांति अपील का भी उल्लेख किया।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के बीच सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। हाल ही में विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से बातचीत कर स्थिति पर चर्चा की। इस दौरान ईरान ने मौजूदा संघर्ष को अमेरिका और इजरायल के हमलों का परिणाम बताया और आत्मरक्षा के अपने अधिकार पर जोर दिया।

    भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। खासतौर पर क्षेत्रीय स्थिरता ऊर्जा आपूर्ति और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार सतर्क है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से भी बातचीत की।

    बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने आम नागरिकों की बढ़ती मौतों पर चिंता जताते हुए शांति और स्थिरता बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता भारत की प्राथमिकता है।मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भारत मध्यस्थता की भूमिका निभाता है तो यह क्षेत्र में शांति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

  • ईरान की मार से बैकफुट पर आया इजरायल, शिया मुल्क के लोगों से लगाने लगा गुहार

    ईरान की मार से बैकफुट पर आया इजरायल, शिया मुल्क के लोगों से लगाने लगा गुहार

    वाशिंगटन। अमेरिका और इजरायल ने एकजुट होकर ईरान पर अटैक कर दिया. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई मारे जा चुके हैं. सेना के कई ठिकाने तबाह हो चुके हैं, लेकिन तेहरान के पास मिसाइल्‍स और ड्रोन का भंडार अभी भी बाकी है.
    यही वजह है कि ईरान की तरफ से इजरायल और अरब देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन अटैक किया जा रहा है. ईरान के साथ ही इजरायल पर भी युद्ध का काफी असर पड़ा है. व्‍यापक पैमाने पर तबाही मची है. अमेरिका और इजरायल का अनुमान था कि खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान आसानी से सरेंडर कर देगा, पर इसके आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं. दूसरी तरफ, दुनिया भर में एनर्जी संकट जैसी स्थिति पैदा हो गई है. ऐसे में इजरायल के रुख में नरमी दिखने लगी है.
    बेंजामिन नेतन्‍याहू बैकफुट पर दिख रहे हैं. शायद यही वजह है कि इजरायल पीएम ने ईरान की जनता से खास गुहार लगाई है. उन्‍होंने ईरानी जनता के लिए भावुक संदेश जारी किया है.

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान की जनता को संबोधित करते हुए एक कड़ा और भावनात्मक संदेश जारी किया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात ईरान के लोगों के लिए जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर है, जिसके जरिए वे अयातुल्ला खामेनेई के शासन को हटाकर अपनी स्वतंत्रता हासिल कर सकते हैं. नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव और संघर्ष लगातार बढ़ रहा है.

    नेतन्याहू ने अपने संदेश में कहा कि इजरायल और अमेरिका मिलकर तेहरान के तानाशाहों के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों की कार्रवाई से ईरान की सत्ता से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया है और इस अभियान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े हजारों लड़ाके तथा कई मिसाइल लॉन्चर नष्ट किए गए हैं.
    हमारा टार्गेट ईरानी शासन के ठिकाने – नेतन्‍याहू
    इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य केवल ईरानी शासन के ठिकाने हैं, न कि आम नागरिक. उन्होंने कहा कि इजरायल पूरी कोशिश कर रहा है कि ईरान की जनता को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे.
    उनके मुताबिक, इजरायल खुद को ईरान के लोगों का सहयोगी मानता है और उनकी संस्कृति, संप्रभुता तथा विरासत का सम्मान करता है. नेतन्याहू ने अपने संबोधन में दावा किया कि अयातुल्ला और उनके सहयोगी अब भाग रहे हैं और उनके पास छिपने की कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ऐसी परिस्थितियां बनाई जाएंगी, जिससे ईरान की जनता अपने भविष्य का फैसला खुद कर सके.
  • ईरान-USA-इजराइल जंग: मजबूरी में लड़ रहा ईरान, नए सुप्रीम लीडर घायल, UAE ने मिसाइलों को नष्ट किया

    ईरान-USA-इजराइल जंग: मजबूरी में लड़ रहा ईरान, नए सुप्रीम लीडर घायल, UAE ने मिसाइलों को नष्ट किया


    नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के साथ जारी ईरान संघर्ष आज 10वें दिन पहुंच गया है। ईरान ने साफ किया है कि यह जंग उनकी पसंद नहीं, बल्कि मजबूरी में लड़नी पड़ रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि इस जंग को देश पर जबरन थोप दिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल मध्यस्थता या सीजफायर पर चर्चा करना संभव नहीं है, क्योंकि सैन्य टकराव जारी है और प्राथमिकता देश की सुरक्षा पर है।बघाई ने जोर देकर कहा कि ईरान ने जंग शुरू नहीं की थी, और किसी अन्य देश तुर्किये, साइप्रस और अजरबैजान पर हमला नहीं किया गया।

    नए सुप्रीम लीडर पर हमला
    ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल हमले में मौत हुई थी। 1989 से ईरान की सर्वोच्च सत्ता पर काबिज अली खामेनेई ने 1979 की इस्लामिक क्रांति में अहम भूमिका निभाई थी और 1981 में आठ साल के लिए राष्ट्रपति भी रहे।

    उनके उत्तराधिकारी, मुजतबा खामेनेई, बीती रात नए सुप्रीम लीडर घोषित हुए, लेकिन उन्हें हाल ही में इजराइली हमले में चोट लगी। ईरानी सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने कहा कि नए नेतृत्व से देश में उम्मीद और एकजुटता बढ़ी है, जबकि अमेरिका और इजराइल के लिए यह निराशाजनक संकेत है।

    UAE ने रोकी ईरान की मिसाइलें और ड्रोन
    संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान से दागी गई 12 बैलिस्टिक मिसाइलें और 17 ड्रोन हवा में ही नष्ट कर दिए। युद्ध शुरू होने के बाद UAE की तरफ कुल 253 मिसाइलें और 1,440 ड्रोन दागे जा चुके हैं।

    स्थिति तनावपूर्ण, लेकिन ईरान ने मजबूती दिखाई
    ईरानी अधिकारियों ने कहा कि देश की सुरक्षा मजबूत है और नए सुप्रीम लीडर के नेतृत्व में ईरान और भी एकजुट दिखाई देगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश की रक्षा के लिए मजबूरी में जंग लड़नी पड़ रही है, और किसी अन्य क्षेत्र पर आक्रामकता नहीं दिखाई जा रही।

  • US-Iran युद्ध की आग में सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के, शेयर बाजार में हाहाकार

    US-Iran युद्ध की आग में सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के, शेयर बाजार में हाहाकार


    नई दिल्‍ली । भारतीय शेयर बाजार पर सोमवार को अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष का असर देखने को मिला। सेंसेक्स 2,366 अंक टूटकर 76,552 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 717 अंकों की गिरावट के साथ 23,732 पर आ गया। सभी प्रमुख स्टॉक्स लाल निशान में रहे। इंडिगो 7% से अधिक लुढ़ककर शीर्ष नुकसान में रहा। इसके अलावा टाटा स्टील 5.59%, मारुति 5.40% और इटरनल 5.19% टूटकर बंद हुए।

    शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट

    सुबह के कारोबार में भी बाजार में दबाव साफ दिखा। बीएसई सेंसेक्स 1,862 अंक की गिरावट के साथ 77,056 पर खुला, जबकि निफ्टी 582 अंक नीचे 23,868 पर आया। NSE पर केवल 249 शेयर ही हरे निशान में थे, जबकि 403 स्टॉक्स 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए। निफ्टी फ्यूचर्स पिछले बंद भाव से करीब 722 अंकों की गिरावट के साथ 23,824 के आसपास ट्रेड कर रहे थे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी-ईरान संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू बाजार में भारी बिकवाली हुई। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं, जिससे वैश्विक निवेशक भी सतर्क हो गए।

    एशियाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाहाकार

    सोमवार को एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव देखा गया। जापान का निक्की 225 सूचकांक 6.22% गिरकर 53,000 के स्तर से नीचे चला गया, जबकि टॉपिक्स 5.27% टूट गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स पिछले सप्ताह 11% गिरने के बाद सोमवार को 8% से अधिक लुढ़का, जिसमें सैमसंग और SK हाइनिक्स जैसी कंपनियां सबसे अधिक प्रभावित रहीं। गिरावट के चलते सर्किट ब्रेकर चालू किए गए और ट्रेडिंग 20 मिनट के लिए रोक दी गई। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी तेज गिरावट के साथ खुला। वॉल स्ट्रीट में भी दबाव रहा। डॉउ जोन्स फ्यूचर्स में 950 अंक तक की गिरावट आई, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 100 अंक से अधिक लुढ़के और नैस्डैक फ्यूचर्स में 400 अंकों की गिरावट दर्ज हुई।

    कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल

    अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच हुर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरे और खाड़ी के तेल उत्पादकों द्वारा उत्पादन में कटौती के कारण कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड ऑयल 18.03% बढ़कर 109.40 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड फ्यूचर्स 20.23% उछलकर 109.29 डॉलर पर पहुंच गए। यह दोनों स्तर रूस के 2022 में यूक्रेन पर हमले के शुरुआती महीनों के बाद नहीं देखे गए थे। कतर के ऊर्जा मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर युद्ध के कारण खाड़ी देशों का उत्पादन बाधित हुआ, तो कच्चे तेल की कीमत $150 तक पहुंच सकती है।

  • इजराइल-ईरान जंग: तेल डिपो पर मिसाइल, 5 देशों पर हमला, 6 महीने तक संघर्ष का एलान

    इजराइल-ईरान जंग: तेल डिपो पर मिसाइल, 5 देशों पर हमला, 6 महीने तक संघर्ष का एलान


    नई दिल्ली। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जंग का नौवां दिन जारी है। इस बीच इजराइल ने ईरान में तेल भंडार और रिफाइनरी फैसिलिटी को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए। इजराइली मीडिया वाइनेट के मुताबिक, ईरान के 3 तेल डिपो और 30 फ्यूल टैंक तबाह हुए हैं।

    वहीं, ईरान ने पलटवार किया और इजराइल के अलावा कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर भी हमले किए। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि वे अमेरिका और इजराइल के खिलाफ छह महीने तक जंग लड़ने में सक्षम हैं। IRGC प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी ने बताया कि ईरानी सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड दोनों लंबे समय तक संघर्ष कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजराइल से जुड़े 200 से अधिक सैन्य ठिकानों और फैसिलिटी को निशाना बनाया गया है।

    जंग के पांच बड़े अपडेट
    ईरान में अब तक 6,668 सिविल इलाकों को निशाना बनाया गया।

    5,535 घर और 1,041 दुकानें नुकसान में।

    14 मेडिकल सेंटर्स और 65 स्कूल प्रभावित।

    अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग में अब तक 1,483 मौतें।

    इजराइल में 1,765 लोग घायल।

    पाकिस्तान नागरिकों की वापसी
    दुबई में मिसाइल हमले में मारे गए दो पाकिस्तानी नागरिकों के शव स्वदेश भेजे जाएंगे। पाकिस्तान सरकार UAE अधिकारियों के साथ इस प्रक्रिया में लगातार संपर्क में है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि पाकिस्तान का राजनयिक मिशन दुबई प्रशासन के साथ मिलकर मृतकों की जल्दी और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कर रहा है।

    ईरान में नए सुप्रीम लीडर का चयन
    ईरान में नए सुप्रीम लीडर के चयन को लेकर अहम फैसला हो गया है। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उम्मीदवार तय कर लिया है, हालांकि अभी तक नाम का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ। फार्स न्यूज एजेंसी और आईएसएनए के अनुसार, बहुमत की राय से उम्मीदवार का चयन किया गया है और जल्द ही नाम सामने आने की संभावना है।

    जंग और राजनीतिक हलचल के बीच मिडिल ईस्ट की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संघर्ष पर कड़ी नजर बनाए हुए है।