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  • ट्रंप को पाकिस्तान का बड़ा झटका, रक्षा मंत्री बोले- इजरायल से समझौता हमारी विचारधारा के खिलाफ

    ट्रंप को पाकिस्तान का बड़ा झटका, रक्षा मंत्री बोले- इजरायल से समझौता हमारी विचारधारा के खिलाफ




    नई दिल्ली। पाकिस्तान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य बनाने वाले अब्राहम समझौते का हिस्सा बनने के पक्ष में नहीं है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने कहा कि इस तरह का समझौता देश की बुनियादी विचारधारा से मेल नहीं खाता और पाकिस्तान फिलहाल इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाएगा।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब Donald Trump ने मध्य-पूर्व में चल रही कूटनीतिक कोशिशों के बीच कई मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील की है। अमेरिका चाहता है कि Saudi Arabia, Qatar, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश भी इजरायल के साथ संबंध सामान्य करें।

    सोमवार रात एक टीवी कार्यक्रम में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर उन्हें नहीं लगता कि पाकिस्तान को ऐसे किसी समझौते का हिस्सा बनना चाहिए जो उसकी वैचारिक और राजनीतिक नीति के खिलाफ हो। उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान का पुराना रुख आज भी कायम है और जब तक 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना नहीं होती, तब तक पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देगा।

    पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने इजरायल पर भरोसे का सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि जिन देशों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, उनके साथ स्थायी समझौता करना मुश्किल है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान के पासपोर्ट पर आज भी साफ लिखा होता है कि यह इजरायल की यात्रा के लिए मान्य नहीं है।

    गौरतलब है कि अब्राहम अकॉर्ड 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता से शुरू हुआ था। इसके तहत United Arab Emirates और Bahrain समेत कई अरब देशों ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए थे। बाद में मोरक्को और सूडान भी इस समझौते का हिस्सा बने।

    ख्वाजा आसिफ पहले भी इजरायल के खिलाफ कड़े बयान दे चुके हैं। हाल ही में उन्होंने इजरायल को “इंसानियत के लिए अभिशाप” बताते हुए गाजा में कथित नरसंहार का आरोप लगाया था। पाकिस्तान सरकार का यह ताजा बयान संकेत देता है कि फिलहाल इस्लामाबाद अमेरिका के दबाव के बावजूद अपने पारंपरिक फिलिस्तीन समर्थक रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

  • सऊदी-इजरायल संबंध: MBS के रुख को लेकर दावे तेज, अब्राहम अकॉर्ड पर फिर बढ़ी हलचल

    सऊदी-इजरायल संबंध: MBS के रुख को लेकर दावे तेज, अब्राहम अकॉर्ड पर फिर बढ़ी हलचल




    नई दिल्ली। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) को लेकर इजरायल को मान्यता देने के दावों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी माइक इवांस के बयान के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि MBS निजी बातचीत में इजरायल को मान्यता देने की इच्छा जता चुके हैं।

    इवांस के अनुसार, क्राउन प्रिंस ने कहा था कि वह इजरायल को मान्यता देने के पक्ष में हैं, लेकिन उनके पिता यानी सऊदी किंग सलमान के कारण यह निर्णय आगे नहीं बढ़ पा रहा है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    अब्राहम अकॉर्ड पर ट्रंप की सक्रियता
    पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अब्राहम अकॉर्ड को विस्तार देने की कोशिशों में जुटे हैं। उन्होंने सऊदी अरब समेत कई मुस्लिम देशों पर इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने का दबाव बढ़ाया है। ट्रंप का कहना है कि इससे मध्य-पूर्व में शांति की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।

    अब्राहम अकॉर्ड की शुरुआत 2020 में हुई थी, जब यूएई और बहरीन ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने पर सहमति जताई थी। बाद में मोरक्को, सूडान और कुछ अन्य देश भी इसमें शामिल हुए।

    सऊदी अरब का आधिकारिक रुख
    हालांकि सऊदी अरब की ओर से अब तक साफ कर दिया गया है कि जब तक फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं मिलती, तब तक वह इजरायल को मान्यता नहीं देगा। रियाद का कहना है कि फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान ही किसी भी सामान्यीकरण की पहली शर्त है।

    राजनीतिक बयान और कूटनीतिक दबाव
    माइक इवांस ने दावा किया कि उन्होंने क्राउन प्रिंस के साथ लंबी बातचीत की थी, जिसमें इजरायल को लेकर सकारात्मक संकेत मिले थे। हालांकि इन दावों को लेकर कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है।दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन और उनके सहयोगी लगातार यह तर्क दे रहे हैं कि अब्राहम अकॉर्ड का विस्तार क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग के लिए जरूरी है।

  • ईरान बोला- अमेरिका की धमकियों से नहीं डरते, इजराइल पर बातचीत बिगाड़ने का आरोप; होर्मुज और समझौते को लेकर बढ़ा तनाव

    ईरान बोला- अमेरिका की धमकियों से नहीं डरते, इजराइल पर बातचीत बिगाड़ने का आरोप; होर्मुज और समझौते को लेकर बढ़ा तनाव




    नई दिल्ली। ईरान ने एक बार फिर अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के बीच सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि वह किसी भी तरह की धमकियों से डरने वाला नहीं है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ईस्माइल बघाई ने साफ कहा कि अमेरिका पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकि यह गारंटी नहीं है कि वह किसी संभावित समझौते का पूरी तरह पालन करेगा।

    ईरान ने आरोप लगाया है कि इजराइल लगातार अमेरिका-ईरान वार्ता को कमजोर करने और उसे पटरी से उतारने की कोशिश कर रहा है। बघाई के मुताबिक, कुछ देश युद्ध और टकराव का माहौल बनाकर बातचीत को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।

    इसी बीच ईरान ने संकेत दिया है कि हाल के कूटनीतिक बदलावों में कुछ देशों, जिनमें पाकिस्तान और अन्य क्षेत्रीय साझेदार शामिल हैं, की मध्यस्थता की भूमिका रही है, हालांकि तेहरान आने को लेकर कोई आधिकारिक कार्यक्रम तय नहीं है।

    वहीं, पिछले 24 घंटे में बातचीत से जुड़े कई अहम अपडेट सामने आए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच अपेक्षित समझौते पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं, जबकि ओमान के जरिए दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।

    ईरान ने दोहराया है कि देश में किसी भी बड़े फैसले के लिए सुप्रीम लीडर की मंजूरी जरूरी होती है, जिससे अंतिम निर्णय प्रक्रिया और जटिल हो जाती है।

    उधर, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर इजराइल की चिंता बढ़ी हुई है, खासकर होर्मुज जलमार्ग से जुड़े रणनीतिक मुद्दों को लेकर। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने बातचीत का स्वागत करते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और परमाणु अप्रसार पर जोर दिया है।

    फिलहाल अमेरिका की ओर से भी यह संकेत दिए गए हैं कि बातचीत जारी है और जल्द कोई बड़ा अपडेट सामने आ सकता है, लेकिन अंतिम समझौते पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

  • ट्रंप बोले… इजराइल में मेरी लोकप्रियता की रेटिंग 99%…. दो साल बाद वहां जाकर लडूंगा PM चुनाव

    ट्रंप बोले… इजराइल में मेरी लोकप्रियता की रेटिंग 99%…. दो साल बाद वहां जाकर लडूंगा PM चुनाव


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने मंगलवार को फिर एक ऐसा दावा किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय जगत में हलचल पैदा हो गई है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि इज़रायल (Israel) में उनकी लोकप्रियता 99 प्रतिशत है और मजाकिया अंदाज में कहा कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद का कार्यकाल पूरा होने के बाद (2028 में) वह वहां प्रधानमंत्री पद का चुनाव (Prime Minister’s post, election) लड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें एक ताज़ा सर्वेक्षण में बेहद ऊंची रेटिंग मिली है। उन्होंने कहा, “तो शायद यह काम पूरा करने के बाद, मैं इज़रायल जाऊंगा और प्रधानमंत्री पद का चुनाव (Prime Minister’s post, election) लड़ूंगा। आज सुबह ही एक जनमत सर्वेक्षण आया है, जिसमें मेरी रेटिंग 99% है।”

    जब पत्रकारों ने उनसे ईरान पर संभावित हमले के बारे में पूछा, तो ट्रंप ने कहा कि इस्लामिक गणराज्य के साथ किसी समझौते पर पहुंचने की उन्हें “कोई जल्दी नहीं है।” उन्होंने कहा, “हमें होर्मुज समुद्री मार्ग को खोलना होगा, वह तुरंत खुल जाएगा, इसलिए हम इसे एक मौका देंगे। मुझे कोई जल्दी नहीं है। हर कोई कह रहा है, ‘ओह, मध्यावधि चुनाव आ रहे हैं।’ आदर्श रूप से, मैं चाहूंगा कि कम से कम लोग मारे जाएं, न कि बहुत ज़्यादा।”


    नेतन्याहू बहुत अच्छे इंसान

    पत्रकार लगातार ट्रंप से पूछते रहे कि उन्होंने इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से इस हमले के बारे में क्या कहा है? इस पर रिपब्लिकन नेता ने जवाब दिया, “वह बहुत अच्छे इंसान हैं; वह वही करेंगे जो मैं उनसे करवाना चाहूंगा। और वह एक बेहतरीन व्यक्ति हैं… यह मत भूलिए कि वह युद्धकालीन प्रधानमंत्री रह चुके हैं।” उन्होंने यह दावा भी किया कि इज़रायल में नेतन्याहू के साथ “सही बर्ताव नहीं किया जाता है। ट्रंप ने कल ही ईरान को एक नई चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि “एक और बड़ा हमला” हो सकता है, क्योंकि दोनों देश एक स्थायी शांति समझौते की शर्तों को लेकर एक गंभीर गतिरोध पर पहुंच गए हैं।


    ट्रंप और नेतन्याहू पर 58 मिलियन डॉलर का इनाम?

    इस बीच, खबरों के अनुसार ईरान, ट्रंप और नेतन्याहू पर 58 मिलियन डॉलर का इनाम रखने पर विचार-विमर्श कर रहा है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अज़ीज़ी ने घोषणा की है कि यह समिति “इस्लामिक गणराज्य के सैन्य और सुरक्षा बलों द्वारा जवाबी कार्रवाई” नामक एक विधेयक तैयार कर रही है। ईरान वायर और द टेलीग्राफ यूके की रिपोर्टों के अनुसार, इस विधेयक के माध्यम से किसी भी ऐसे व्यक्ति या संस्था को 50 मिलियन यूरो (लगभग 58.23 मिलियन डॉलर) की राशि का भुगतान औपचारिक रूप से सुनिश्चित किया जाएगा, जो अमेरिका और इज़रायल के इन नेताओं की हत्या करेगा। ईरानी संसद 28 फरवरी को तेहरान पर हुए हमलों के लिए,जिनमें तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई मारे गए थे,ट्रंप और नेतन्याहू की हत्या के लिए इनाम देने वाले एक बिल पर मतदान करने वाली है।

  • ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया पर फूटा मतभेद, संयुक्त बयान अटका; 63 बिंदुओं का अलग दस्तावेज जारी

    ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया पर फूटा मतभेद, संयुक्त बयान अटका; 63 बिंदुओं का अलग दस्तावेज जारी



    नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में हुई ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए, जिसके चलते इस बार कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया जा सका। बैठक में ईरान, इजरायल और अमेरिका से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिली, जिससे साझा सहमति बनाना मुश्किल हो गया। इसके बाद अध्यक्ष की ओर से एक विस्तृत बयान जारी किया गया, जिसमें 63 बिंदुओं के जरिए सभी देशों के विचारों को शामिल किया गया।

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में ईरान ने मांग रखी थी कि इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों की निंदा ब्रिक्स मंच से की जाए, लेकिन इस पर सभी सदस्य देश सहमत नहीं हो सके। कुछ देशों ने कहा कि किसी एक पक्ष को सीधे तौर पर निशाना बनाना कूटनीतिक संतुलन के खिलाफ होगा, जबकि अन्य देशों ने क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए सख्त रुख अपनाने की वकालत की।

    इसी असहमति के कारण संयुक्त बयान पर सहमति नहीं बन सकी। बाद में जारी अध्यक्षीय बयान में कहा गया कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर सदस्य देशों के विचार अलग-अलग हैं, लेकिन सभी देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि संकट का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। बयान में अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर भी जोर दिया गया।

    बयान में यह भी कहा गया कि ब्रिक्स देशों ने एकतरफा प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत दंडात्मक उपायों की आलोचना की है। साथ ही मानवीय संकटों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। बैठक में फलस्तीन के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, जिसमें 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फलस्तीन राज्य के समर्थन की बात दोहराई गई।

    इस तरह पश्चिम एशिया के संवेदनशील मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण के कारण ब्रिक्स बैठक में एकजुटता की कमी दिखी, हालांकि संवाद और शांति की आवश्यकता पर सभी देशों ने सहमति व्यक्त की।

  • तेल संकट के बीच ईरान का बड़ा बयान: अमेरिका-इजरायल पर आरोप, भारत समेत दुनिया पर असर

    तेल संकट के बीच ईरान का बड़ा बयान: अमेरिका-इजरायल पर आरोप, भारत समेत दुनिया पर असर



    नई दिल्ली। ईरान ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच वैश्विक सप्लाई चेन और तेल संकट पर गंभीर चिंता जताई है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि इस स्थिति से ईरान “खुश नहीं” है, लेकिन इसके लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिन्होंने क्षेत्र में तनाव को बढ़ाया है।

    बकाई के अनुसार, पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट की जड़ में अमेरिका और इजरायल की नीतियां हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए खाड़ी क्षेत्र के देशों की जमीन का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए किया। उन्होंने कहा कि ईरान को अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जवाबी कदम उठाने पड़े, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उचित हैं।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को इस संघर्ष के कारण भारत या किसी अन्य देश को होने वाले आर्थिक नुकसान पर कोई खुशी नहीं है। उनके मुताबिक, ईरान एक तटीय देश होने के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर काफी निर्भर है और वह इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा चाहता है।

    तेल और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा यह संकट वैश्विक स्तर पर असर डाल रहा है, जिससे सप्लाई चेन बाधित हुई है और कई देशों में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। भारत जैसे देश, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, इस स्थिति से सीधे प्रभावित हो रहे हैं।

    ईरानी प्रवक्ता ने यह भी संकेत दिया कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सभी देशों के हित में है और इसे खुला और स्थिर बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही संभव है, न कि सैन्य टकराव से।

    फिलहाल यह संकट अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा के बीच गहरे तनाव को दर्शा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।

  • नेतन्याहू का बड़ा आरोप: पाकिस्तान चला रहा है इजरायल-अमेरिका के खिलाफ डिजिटल युद्ध, भारत की खुलकर तारीफ

    नेतन्याहू का बड़ा आरोप: पाकिस्तान चला रहा है इजरायल-अमेरिका के खिलाफ डिजिटल युद्ध, भारत की खुलकर तारीफ




    नई दिल्ली। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक अमेरिकी टीवी इंटरव्यू में पाकिस्तान को लेकर बड़ा और तीखा बयान दिया है। CBS के कार्यक्रम “60 Minutes” में बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सोशल मीडिया के जरिए एक संगठित डिजिटल अभियान चला रहा है, जिसका मकसद इजरायल और अमेरिका के रिश्तों को कमजोर करना है। नेतन्याहू के अनुसार यह अभियान फर्जी अकाउंट्स और बॉट नेटवर्क के जरिए चलाया जा रहा है, जिसमें इजरायल विरोधी नैरेटिव फैलाए जा रहे हैं।

    नेतन्याहू ने कहा कि कई देशों द्वारा सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और फर्जी प्रचार के जरिए हेरफेर की कोशिशें की जा रही हैं और पाकिस्तान जैसे देशों से ऐसे डिजिटल ऑपरेशन सामने आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इंटरनेट पर जो इजरायल विरोधी संदेश तेजी से फैलते हैं, उनकी शुरुआती गतिविधियां अक्सर पाकिस्तान से जुड़ी पाई जाती हैं। हालांकि इन आरोपों पर पाकिस्तान की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

    इसी इंटरव्यू में नेतन्याहू ने भारत की जमकर तारीफ की और भारत-इजरायल संबंधों को बेहद मजबूत और भरोसेमंद बताया। उन्होंने कहा कि जब वे अपनी पत्नी के साथ भारत यात्रा पर गए थे तो वहां उन्हें जिस तरह का सम्मान और गर्मजोशी मिली, वह उनके लिए “प्यार के उत्सव” जैसा अनुभव था। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में इजरायल और उसके नागरिकों को काफी सम्मान मिलता है और दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं।

    नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी सराहना की और कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी बहुत गहरी है। उन्होंने बताया कि भारत और इजरायल के बीच रक्षा, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्रों में लगातार सहयोग बढ़ रहा है।

    इसी बातचीत के दौरान ईरान मुद्दे पर बोलते हुए नेतन्याहू ने दावा किया कि अगर हालिया सैन्य कार्रवाई नहीं की जाती तो ईरान बहुत जल्दी परमाणु हथियार विकसित कर सकता था। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को मजबूत करने में लगा हुआ है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।

    नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि ईरान के भीतर राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है और शासन के अंदर दरारें सामने आ रही हैं। उनके अनुसार देश में हाल की घटनाओं के बाद विरोध प्रदर्शन और असंतोष बढ़ा है, जिससे वहां की सरकार कमजोर स्थिति में दिखाई दे रही है।

    कुल मिलाकर इस इंटरव्यू में नेतन्याहू ने एक तरफ पाकिस्तान पर डिजिटल युद्ध और दुष्प्रचार के गंभीर आरोप लगाए, वहीं दूसरी तरफ भारत के साथ रिश्तों को मजबूत और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण बताया, जिससे यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

  • इजरायल, ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव पर बड़ा दावा: ‘युद्ध भड़काने की थी साजिश, लेकिन MBS ने रोका बड़ा संकट’

    इजरायल, ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव पर बड़ा दावा: ‘युद्ध भड़काने की थी साजिश, लेकिन MBS ने रोका बड़ा संकट’



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया की राजनीति एक बार फिर बड़े दावों और आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। सऊदी अरब के पूर्व खुफिया प्रमुख और पूर्व राजदूत प्रिंस तुर्की अल-फैसल ने दावा किया है कि यदि इजरायल की कथित रणनीति सफल हो जाती, तो ईरान और सऊदी अरब के बीच सीधा सैन्य संघर्ष भड़क सकता था, जिससे पूरा क्षेत्र विनाशकारी युद्ध की चपेट में आ जाता। हालांकि उन्होंने कहा कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) की सूझबूझ और संयम की नीति के चलते सऊदी अरब इस बड़े संकट से बच गया।

    पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ते आरोप
    तुर्की अल-फैसल ने अपने लेख में दावा किया कि हाल के वर्षों में क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच कुछ बाहरी ताकतें चाहती थीं कि सऊदी अरब और ईरान सीधे टकराव में आ जाएं। उनके अनुसार, यदि यह स्थिति बनती तो खाड़ी देशों की तेल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और नागरिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंच सकता था।

    हालांकि यह सभी दावे उनके व्यक्तिगत विश्लेषण और राय पर आधारित हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद यह बयान क्षेत्रीय भू-राजनीति की जटिलता को उजागर करता है।

    सऊदी अरब की ‘संयम नीति’ का दावा
    तुर्की अल-फैसल का कहना है कि सऊदी नेतृत्व ने इस पूरे तनाव के दौरान आक्रामक प्रतिक्रिया देने के बजाय कूटनीति और संयम का रास्ता अपनाया। उनके मुताबिक, अगर सऊदी अरब ईरान के हमलों का सैन्य जवाब देता, तो हालात तेजी से युद्ध में बदल सकते थे और खाड़ी क्षेत्र की तेल सुविधाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती थीं।

    उन्होंने दावा किया कि सऊदी अरब ने पर्दे के पीछे रहकर तनाव को कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की।

    ‘युद्ध में धकेलने की कोशिश’ का आरोप
    पूर्व खुफिया प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक समूहों के जरिए सऊदी अरब पर दबाव बनाने और उसे संघर्ष में खींचने की कोशिश की गई। लेकिन नेतृत्व ने सार्वजनिक बयानबाजी से दूरी बनाकर स्थिति को बिगड़ने से रोका। उनके अनुसार, यदि उस समय स्थिति नियंत्रण से बाहर जाती तो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और सुरक्षा ढांचे को भारी नुकसान पहुंच सकता था।

    MBS की रणनीति पर फोकस
    तुर्की अल-फैसल ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की नीति को “दूरदर्शी और व्यावहारिक” बताया। उनके अनुसार, सऊदी अरब ने सीधे टकराव से बचकर क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता दी, जिससे एक बड़े युद्ध की आशंका टल गई।

    क्षेत्रीय राजनीति पर असर
    यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों के बीच तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दावे भले ही राजनीतिक दृष्टिकोण हों, लेकिन ये क्षेत्र में जारी शक्ति संतुलन और कूटनीतिक संघर्ष को दर्शाते हैं।

    तुर्की अल-फैसल का यह दावा एक बार फिर दिखाता है कि पश्चिम एशिया की राजनीति कितनी जटिल और संवेदनशील है। जहां एक ओर सैन्य तनाव की आशंकाएं बनी रहती हैं, वहीं दूसरी ओर कूटनीति और संयम कई बार बड़े युद्धों को टालने में अहम भूमिका निभाते हैं।

  • पश्चिम एशिया में फिर भड़की जंग की चिंगारी, बेरूत में हिजबुल्ला कमांडर ढेर; कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला

    पश्चिम एशिया में फिर भड़की जंग की चिंगारी, बेरूत में हिजबुल्ला कमांडर ढेर; कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। युद्धविराम और कूटनीतिक कोशिशों के बीच Israel ने दावा किया है कि बेरूत के दक्षिणी इलाके में किए गए हवाई हमले में हिजबुल्ला के कई शीर्ष कमांडर मारे गए हैं। वहीं कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले से नया संकट खड़ा हो गया है।

    बेरूत हमले में हिजबुल्ला कमांडर मारे जाने का दावा
    इज़राइल रक्षा बल ने दावा किया कि बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में हुए हमले में हिजबुल्ला की रदवान यूनिट के कमांडर अहमद बलूत मारे गए। इसके अलावा नासेर यूनिट के इंटेलिजेंस प्रमुख मोहम्मद अली बाजी और एयर डिफेंस अधिकारी हुसैन हसन रोमानि के भी मारे जाने की बात कही गई है।रिपोर्ट्स के अनुसार गाज़ा शहर में अलग कार्रवाई के दौरान हमास नेता खलील अल-हय्या के बेटे अज्जाम अल-हय्या के मारे जाने का भी दावा किया गया है।

    कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला
    कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले के बाद ईंधन टैंक में आग लग गई। अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती जांच में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। दमकल और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर काबू पाने में जुटी हैं।

    ईरान-इस्राइल तनाव जारी
    इस बीच ईरान  और इस्राइल के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। तेल अवीव के पास बनेई बराक में एक इमारत ईरानी मिसाइल हमले की चपेट में आने से ढह गई, जिसमें कई लोग घायल बताए जा रहे हैं।

    वहीं डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत जारी है और जल्द समझौता संभव है। दूसरी ओर ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ ने अमेरिकी रणनीति का मजाक उड़ाते हुए उसे “ऑपरेशन ट्रस्ट मी ब्रो” बताया।

    लेबनान और गाजा में बढ़ा संकट
    रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले 24 घंटों में लेबनान में इस्राइली हमलों में कई लोगों की मौत हुई है। वहीं लेबनान की ओर से दागे गए रॉकेट हमलों में उत्तरी इस्राइल में भी हताहत होने की खबरें हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी यह संघर्ष फिलहाल थमता नहीं दिख रहा और आने वाले दिनों में क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।

  • हाइपरसोनिक हमले की आशंका: क्या ईरान-अमेरिका टकराव नए मोड़ पर?

    हाइपरसोनिक हमले की आशंका: क्या ईरान-अमेरिका टकराव नए मोड़ पर?


    नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सैन्य टकराव को लेकर गंभीर संकेत सामने आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका पहली बार ईरान के खिलाफ हाइपरसोनिक मिसाइलों के इस्तेमाल पर विचार कर रहा है, जिससे हालात और भी विस्फोटक हो सकते हैं।

    सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को संभावित सैन्य विकल्पों की जानकारी दी है। व्हाइट हाउस में हुई इस बैठक में एक ‘छोटा लेकिन बेहद प्रभावशाली’ हमले का प्रस्ताव रखा गया, जिसमें ईरान के सैन्य ढांचे, मिसाइल सिस्टम और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने की बात कही गई है।

    इस रणनीति में ‘डार्क ईगल’ जैसी अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल शामिल हो सकता है। यह मिसाइल 3,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम मानी जाती है। इसके अलावा B-1B लांसर जैसे भारी बमवर्षक विमानों की तैनाती भी बढ़ाई जा रही है, जो इस तरह के हमलों को अंजाम देने में सक्षम हैं।

    तनाव सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं है। मुजतबा खामेनेई ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि अगर हमला हुआ तो उसका जवाब समुद्र में दिया जाएगा। वहीं तेल बाजार में भी इसका असर साफ दिख रहा है कच्चे तेल की कीमतें अचानक उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का संकेत है।

    इसी बीच इजराइल ने लेबनान में हमले तेज कर दिए हैं और गाजा जाने वाले सहायता जहाजों को भी रोका है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है, जो वैश्विक व्यापार के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हाइपरसोनिक हथियारों का इस्तेमाल होता है, तो यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि युद्ध की प्रकृति में बड़ा बदलाव होगा। ऐसे हथियारों को रोकना बेहद मुश्किल होता है, जिससे जवाबी कार्रवाई का जोखिम भी बढ़ जाता है।

    कुल मिलाकर, हालात बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुके हैं। एक छोटी सी चूक भी बड़े युद्ध में बदल सकती है। ऐसे में दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि कूटनीति हावी होती है या फिर हथियारों की भाषा आगे बढ़ती है।