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  • ईरान के तेल भंडार पर इज़राइल का बड़ा हमला, ट्रम्प बोले- “ईरान लड़ने लायक नहीं बचेगा”

    ईरान के तेल भंडार पर इज़राइल का बड़ा हमला, ट्रम्प बोले- “ईरान लड़ने लायक नहीं बचेगा”



    नई दिल्ली। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी जंग का नौवां दिन बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इज़राइल ने ईरान में तेल भंडार से जुड़े ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। इज़राइली मीडिया के अनुसार, ईरान के 30 फ्यूल टैंकों और कई तेल डिपो को निशाना बनाया गया है।

    अमेरिकी रुख:
    पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान पूरी तरह हार मान ले। उनका कहना है कि या तो ईरान खुद आत्मसमर्पण करे या उसकी सैन्य ताकत इतनी कमजोर कर दी जाए कि वह लड़ने लायक ही न बचे। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान अब मिडिल ईस्ट का दबंग नहीं, बल्कि ‘लूजर’ बन गया है।

    ईरान की चेतावनी:
    ईरानी सेना ने भी धमकी दी है कि अगर अमेरिकी जहाज फारस की खाड़ी में आए, तो उन्हें समुद्र में डुबो दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने खाड़ी में ऑयल टैंकर भेजने की बात कही थी, जो आमतौर पर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते हैं।

    जंग के आँकड़े:

    सिविल इलाकों पर हमला: 6,668

    घर और दुकानें नष्ट: 5,535 घर और 1,041 दुकानें

    मेडिकल सेंटर और स्कूल: 14 मेडिकल सेंटर और 65 स्कूल

    मृत्यु: 1,483

    इज़राइल में घायल: 1,765 लोग

    रेड क्रिसेंट सेंटर: 13 हमले का शिकार

    अंतरराष्ट्रीय दबाव और ईरान की प्रतिक्रिया:
    ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पड़ोसी देशों से माफी मांगी है और कहा कि अब सिर्फ तब हमला होगा जब उन देशों की जमीन से ईरान पर हमला किया जाए। ट्रम्प ने इसे अमेरिका और इज़राइल के लगातार हमलों का नतीजा बताया।

    संक्षेप में:
    इज़राइल के हमलों ने ईरान के तेल भंडारों को बुरी तरह नुकसान पहुँचाया है। अमेरिका की धमकियों और ट्रम्प के बयान ने ईरान की स्थिति को कमजोर कर दिया है। अब युद्ध का रुख सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तेल और ऊर्जा ढांचे पर भी असर पड़ रहा है, जिससे वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल की आशंका बढ़ गई है।

  • लारा दत्ता इमोशनल हुईं, बेटी के साथ दुबई में फंसीं: शूटिंग के दौरान धमाके और फाइटर जेट देखे

    लारा दत्ता इमोशनल हुईं, बेटी के साथ दुबई में फंसीं: शूटिंग के दौरान धमाके और फाइटर जेट देखे



    नई दिल्ली। एक्ट्रेस लारा दत्ता दुबई में अपनी बेटी सायरा के साथ वर्क ट्रिप पर थीं, जब अचानक वहां तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। लारा ने बताया कि 28 फरवरी को दुबई के एक स्टूडियो में शूटिंग के दौरान उन्हें ऊपर से तेज धमाके सुनाई दिए और आसमान में कई फाइटर जेट उड़ते दिखे। उन्होंने कहा कि हालात डराने वाले थे, लेकिन वह खुद को असुरक्षित महसूस नहीं कर रही थीं।

    लारा ने बताया कि धमाकों के समय उनका परिवार सुरक्षित विला में था, लेकिन खिड़कियां और दरवाजे हिल रहे थे। उन्होंने यूएई सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि वहां हर व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है और लोग अपने सामान्य कामों में लगे हुए हैं। लारा ने कहा कि फ्लाइट्स सीमित हैं, लेकिन वे मुंबई लौटने की कोशिश कर रहे हैं ताकि उनकी बेटी और अन्य लोग इस तनावपूर्ण स्थिति से सुरक्षित रहें।

    एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि किसी भी आम नागरिक को डर के माहौल में जीने का अधिकार नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थिति जल्द सामान्य होगी और सही फैसले लिए जाएंगे।

    इस बीच दुबई में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई उड़ानें रद्द हुईं और हजारों यात्री फंसे। लारा ने वीडियो में अपने अनुभव साझा किए और इमोशनल होते हुए कहा कि हालात पिछले कुछ दिनों में काफी तनावपूर्ण रहे।

  • ईरान-इजरायल युद्ध लंबा चला तो भारत में खाद और उर्वरक की हो सकती है किल्लत

    ईरान-इजरायल युद्ध लंबा चला तो भारत में खाद और उर्वरक की हो सकती है किल्लत


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब सिर्फ तेल और गैस पर ही नहीं, बल्कि भारत के कृषि और व्यापार क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच जंग लंबी खिंचती है और खाड़ी देशों में तनाव बढ़ता है, तो भारत को पेट्रोलियम उत्पादों के साथ-साथ उर्वरक, खाद्य सामग्री और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की सप्लाई में भी समस्या हो सकती है।
    उर्वरक की आपूर्ति हो सकती है प्रभावित
    भारत यूरिया और फॉस्फेट जैसे उर्वरकों के बड़े हिस्से के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है। विशेष रूप से डीएपी और यूरिया का करीब 46 प्रतिशत आयात अकेले ओमान से होता है। अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है, तो उर्वरक की कमी के कारण कृषि क्षेत्र पर सीधे असर पड़ेगा और कीमतों में तेजी आएगी।

    सोना और अन्य आयातित उत्पाद महंगे हो सकते हैं
    संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों से भारत में सोने का आयात होता है। शिपिंग लागत बढ़ने से सोने की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसके अलावा खजूर और कुछ प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पादों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। भारत अपनी कुल खजूर का लगभग 80-90 प्रतिशत खाड़ी देशों से आयात करता है, खासकर यूएई और ओमान से। तनाव बढ़ने और समुद्री मार्ग बंद होने की स्थिति में इन उत्पादों की कीमतों में उछाल आ सकता है।

    निर्यात क्षेत्र भी होगा प्रभावित
    भारत के निर्यात पर भी खाड़ी देशों में तनाव का असर पड़ेगा। प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं:-

    खाद्यान्न और चावल: सऊदी अरब, ईराक, यूएई और ओमान भारत के बड़े खरीदार हैं। समुद्री मार्ग बंद होने पर शिपमेंट में देरी होगी, नई आपूर्ति रूट लंबा होगा और ढुलाई लागत बढ़ेगी। भारत का लगभग 50 प्रतिशत बासमती निर्यात खाड़ी देशों और ईरान को जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 60 लाख टन बासमती निर्यात किया, जिसकी कीमत लगभग 50,312 करोड़ रुपये थी।

    मांस और समुद्री उत्पाद: जमी हुई मछली और झींगा जैसी वस्तुएं खाड़ी देशों में बड़ी मांग में हैं। लॉजिस्टिक बाधाओं से निर्यात घट सकता है।

    फार्मास्यूटिकल्स: भारत जेनेरिक दवाओं का बड़ा सप्लायर है। आपूर्ति बाधित होने पर निर्यात राजस्व प्रभावित होगा और कंपनियों को सामान पहुंचाने में मुश्किलें आएंगी।

    इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स: मशीनरी, ऑटो पार्ट्स और निर्माण सामग्री की खेप में देरी से विशेषकर एमएसएमई प्रभावित होंगे। जनवरी में खाड़ी देशों को मशीनरी निर्यात में 16 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी।

    कपड़ा और परिधान: खाड़ी देशों का बाजार रेडीमेड गारमेंट और टेक्सटाइल निर्यात के लिए अहम है। भारत का खाड़ी देशों को कुल परिधान निर्यात लगभग 1.79 बिलियन डॉलर का है। शिपिंग लागत बढ़ने से प्रतिस्पर्धा घट सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चलता है और हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव जारी रहता है, तो किसानों और निर्यातक दोनों के लिए चुनौतियां गंभीर रूप से बढ़ सकती हैं।

  • ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच संघर्ष चौथे दिन भी जारी, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा, खेल और तेल रूट भी प्रभावित

    ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच संघर्ष चौथे दिन भी जारी, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा, खेल और तेल रूट भी प्रभावित


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया से बड़ी खबर है, जहाँ एशियाई महिला फुटबॉल कप के उद्घाटन मैच में ईरानी महिला फुटबॉल टीम ने राष्ट्रगान नहीं गाया। खिलाड़ी लाइन में खड़ी रहीं, लेकिन चुप रहीं। कोच मारजियेह जाफरी मुस्कुराती रहीं। यह कदम हाल के अमेरिका और इजराइल के हमलों और ईरान के नेताओं की मौत के विरोध का प्रतीक माना जा रहा है। कप्तान जहरा घानबरी और कोच से खामेनेई की मौत पर सवाल किए गए, लेकिन उन्हें जवाब नहीं देने दिया गया।

    हार्मुज स्ट्रेट बंद: ईरान ने चेतावनी दी है कि इस रणनीतिक तेल रूट से गुजरने वाले जहाजों पर हमला किया जाएगा। भारत का करीब 50% तेल इसी मार्ग से आता है। अगर इस मार्ग को अवरुद्ध रखा गया, तो वैश्विक तेल बाजार में कीमतों में तेजी आने की संभावना है और भारत सहित तेल आयातक देशों पर दबाव बढ़ सकता है।

    जंग का हाल: चार दिन में 787 लोग मारे गए हैं। 153 शहरों को निशाना बनाया गया और कुल 1,039 हमले हुए। यह जानकारी ईरानियन रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने दी। बढ़ता हिंसक संघर्ष क्षेत्रीय सुरक्षा और मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन गया है।

    लेबनान में हिजबुल्लाह पर प्रतिबंध: राष्ट्रपति मिशेल औन ने घोषणा की कि हिजबुल्लाह को अपने हथियार सरकार को सौंपने होंगे। यह कदम लेबनान-इजराइल सीमा पर हालिया रॉकेट हमलों और बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया। उनका कहना है कि अब युद्ध और शांति का निर्णय केवल लेबनानी राज्य के हाथ में होगा।

    इजराइल पर ईरान का मिसाइल हमला: ईरान की मिसाइल ने इजराइल के सेंट्रल शहर पेटाह टिकवा को निशाना बनाया। मिसाइल के टुकड़े शहर में गिरे, जिससे कुछ नुकसान हुआ। इजराइली मीडिया के अनुसार यह हमला अमेरिका और इजराइल की ईरान विरोधी सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में किया गया।

    पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि ईरान पर चल रही जंग पाकिस्तान के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा पैदा कर रही है। उन्होंने जायनिस्ट विचारधारा और इजराइल की गतिविधियों को मुस्लिम दुनिया में अस्थिरता का मुख्य कारण बताया। पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने भी कहा कि पाकिस्तान को ट्रम्प द्वारा बनाए “बोर्ड ऑफ पीस” से बाहर निकलना चाहिए।

    फ्रांस तैयार: विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा कि अगर फ्रांस के सहयोगी देशों को मदद की जरूरत पड़ी, तो फ्रांस रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। करीब 4 लाख फ्रांसीसी नागरिक प्रभावित देशों में मौजूद हैं, जिन्हें सुरक्षित लाने के लिए कमर्शियल और सैन्य उड़ानों की व्यवस्था की जाएगी।

    अंतरराष्ट्रीय असर: हार्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा, क्षेत्रीय तनाव और ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है।

  • अमेरिका-इजराइल का संयुक्त हमला, ईरान परमाणु विवाद में 742 मौतों के बाद सुरक्षा अलर्ट

    अमेरिका-इजराइल का संयुक्त हमला, ईरान परमाणु विवाद में 742 मौतों के बाद सुरक्षा अलर्ट



    नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों के बीच ईरान में संकट गहराता जा रहा है। यह संघर्ष अब चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका के स्पेशल प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ परमाणु समझौते की अंतिम कोशिश भी नाकाम रही। अमेरिका ने ईरान को प्रस्ताव दिया था कि वह अगले 10 साल तक यूरेनियम इनरिचमेंट पूरी तरह बंद कर दे, और बदले में अमेरिका न्यूक्लियर फ्यूल उपलब्ध कराने को तैयार था। हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। बातचीत टूटते ही अमेरिका और इजराइल ने मिलकर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी।

    इस संघर्ष में अब तक ईरान में 742 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 176 बच्चे शामिल हैं। घायल हुए लोगों की संख्या 750 से अधिक है। इस हिंसा ने पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा की स्थिति पैदा कर दी है। लेबनान के बेरूत में इजराइली सेना ने हिज्बुल्लाह से जुड़े अल-मनार टीवी स्टेशन की इमारत को निशाना बनाया, जिससे प्रसारण कुछ समय के लिए बाधित हुआ। हालांकि, हमले के बाद प्रसारण फिर से शुरू कर दिया गया।

    ईरान के मिनाब शहर में गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले में मारी गई 165 लड़कियों का अंतिम संस्कार भी हुआ। इस दौरान हजारों लोग इकट्ठा हुए, और एक मां ने मंच से अमेरिका पर हमले का आरोप लगाया। भीड़ ने ‘अमेरिका मुर्दाबाद’, ‘इजराइल मुर्दाबाद’ और ‘नो सरेंडर’ जैसे नारे लगाए। ईरानी मीडिया ने हमले का आरोप इजराइल पर लगाया, जबकि इजराइली सेना ने इसे नकारा।

    इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध लंबा और अंतहीन नहीं होगा। उनका कहना है कि यह संघर्ष क्षेत्र में स्थायी शांति लाने का अवसर बन सकता है। उन्होंने पहले हुए अब्राहम अकॉर्ड्स का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ मिलकर अब और देशों के साथ शांति समझौते भी संभव हैं।

    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प अमेरिका को लंबी और अनिश्चित लड़ाई में नहीं फंसने देंगे। उन्होंने कहा कि ईरान पर हमला विशेष रणनीति के तहत किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों। ट्रम्प की अनुमति के बिना कोई युद्ध लंबे समय तक जारी नहीं रहेगा, जिससे अमेरिका को इराक और अफगानिस्तान जैसी लंबी लड़ाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    सुरक्षा के मद्देनजर अमेरिका ने जॉर्डन, बहरीन और इराक से गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है। जॉर्डन और बहरीन में ईरान से ड्रोन और मिसाइल हमले का खतरा है, जबकि इराक में हिंसा और अपहरण का भी जोखिम बना हुआ है। अमेरिकी दूतावासों में केवल आवश्यक स्टाफ ही रहेंगे, और फ्लाइट्स रद्द होने के कारण नागरिकों को सुरक्षित निकासी का निर्देश दिया गया है।

    अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति को गंभीर बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने शांति बहाल करने और संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस बीच अमेरिका और इजराइल की मिलीजुली कार्रवाई, ईरानी नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नए संकट की घंटी साबित हो रही है।

  • इजरायल और अमेरिका के बीच संघर्ष गहराया, लेबनान तक फैल रहा तनाव

    इजरायल और अमेरिका के बीच संघर्ष गहराया, लेबनान तक फैल रहा तनाव

    तेहरान। इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य टकराव अब और अधिक भीषण होता जा रहा है। ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी की खबरें सामने आई हैं, जिनमें शीर्ष सैन्य अधिकारियों, सैनिकों और आम नागरिकों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है।

    लेबनान तक फैलता संघर्ष
    तनाव अब पड़ोसी लेबनान तक फैल गया है। ईरान के समर्थन में माने जाने वाले संगठन हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर हुए हमलों की जिम्मेदारी ली है। इसके बाद इजरायल ने उत्तरी मोर्चे पर जवाबी कार्रवाई तेज करते हुए हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर गोलाबारी शुरू कर दी।

    मिसाइल और ड्रोन हमलों से बढ़ा तनाव
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल के शहर तेल अवीव के पास मिसाइल गिरने और यरूशलम पर भी हमले की कोशिश की गई। इसके अलावा वेस्ट बैंक के ऊपर संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की बात कही गई। इन हमलों को पहले ईरान की सीधी प्रतिक्रिया माना जा रहा था, लेकिन बाद में हिज्बुल्लाह ने जिम्मेदारी ली।
    इजरायल का सैन्य अभियान
    इजरायली सेना Israel Defense Forces (IDF) ने बताया कि उसने पहले से तैयार सैन्य योजना के तहत कार्रवाई शुरू की है। इजरायल का आरोप है कि हिज्बुल्लाह, ईरानी नेतृत्व के निर्देश पर उसके नागरिक इलाकों को निशाना बना रहा है।

    अमेरिका का कड़ा रुख
    इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि जब तक अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल नहीं कर लेता, तब तक अभियान जारी रहेगा। उनका कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को समाप्त करना और Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है।

    क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर बढ़ी चिंता
    लगातार हो रही सैन्य कार्रवाइयों से पूरे मध्य पूर्व में व्यापक अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि यदि तनाव नहीं थमा तो यह संघर्ष बहु-देशीय युद्ध का रूप ले सकता है।

  • ईरान में तबाही: खामनेई की मौत के बाद अयातुल्ला आराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर, अमेरिका-इजराइल पर ईरानी पलटवार

    ईरान में तबाही: खामनेई की मौत के बाद अयातुल्ला आराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर, अमेरिका-इजराइल पर ईरानी पलटवार



    नई दिल्ली। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के अगले दिन ही देश के राजनीतिक और धार्मिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया। 67 वर्षीय अयातुल्ला अलीरेजा आराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आराफी लंबे समय से ईरान की धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वे असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के उपाध्यक्ष हैं और गार्जियन काउंसिल के सदस्य रह चुके हैं। वर्तमान में वे ईरान की सेमिनरी प्रणाली का नेतृत्व कर रहे हैं। अब असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स स्थायी सुप्रीम लीडर का चयन करेगी।

    खामनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिन की छुट्टी घोषित की गई। ईरानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि देश ने एक महान नेता खो दिया है। वहीं, ईरानी सेना ने खतरनाक अभियान की चेतावनी दी और अमेरिकी ठिकानों पर हमले की योजना बनाई।

    अमेरिका-इजराइल ने किया आक्रमण

    इजराइल और अमेरिका ने संयुक्त हमले में ईरान पर 24 घंटे में 1,200 से अधिक बम गिराए। इस हमले में सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत हुई। उनके ऑफिस कॉम्प्लेक्स पर 30 मिसाइलों से हमला हुआ। हमले में उनके परिवार के सदस्य और 40 कमांडर्स भी मारे गए। इजराइल के पीएम नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने खामनेई की मौत की पुष्टि की।

    इस हमले में 200 से अधिक लोग मारे गए और 740 से ज्यादा घायल हुए। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 148 छात्राओं की मौत हो गई।

    ईरान का जवाबी हमला

    ईरान ने अमेरिका और इजराइल के हमलों का जवाब देते हुए 9 देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया। इसमें इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागी गईं। इसके अलावा कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब, UAE में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। दुबई में पाम होटल एंड रिसॉर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन हमला हुआ।

    पृष्ठभूमि और विवाद

    ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच विवाद के मुख्य कारण हैं: न्यूक्लियर प्रोग्राम पर शक, बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास, क्षेत्रीय अस्थिरता और मिडिल ईस्ट में राजनीतिक दखल। अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। इसके जवाब में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज करने और कठोर बयान देने जैसे कदम उठाए।

    अयातुल्ला अली खामनेई का जीवन

    खामनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को मशहद में हुआ। उन्होंने 1963 में शाह के खिलाफ भाषण दिया और गिरफ्तार हुए। 1979 की इस्लामी क्रांति में वे प्रमुख आंदोलनकारी बने। 1981 में उन पर बम हमले हुए, उसी वर्ष वे ईरान के राष्ट्रपति बने। 1989 में खोमैनी की मौत के बाद उन्हें सुप्रीम लीडर बनाया गया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक कट्टर शासन का आरोप लगाते हैं।

  • इजरायल-ईरान संघर्ष: भारत पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और अर्थव्यवस्था पर असर

    इजरायल-ईरान संघर्ष: भारत पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और अर्थव्यवस्था पर असर


    नई दिल्ली। शनिवार को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की, जिससे मध्यपूर्व में तनाव चरम पर पहुँच गया है। ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में से एक है और इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता की चेतावनी सामने आई है। तेल की सप्लाई बाधित होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर सीधे पड़ेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस हमले का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख सकता है। अनिश्चितता के चलते निवेशक बड़े पैमाने पर बिकवाली कर सकते हैं, जिससे बाजार में दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल भारतीय बाजार इस हमले के बाद ईरान की प्रतिक्रिया और अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। बाजार की चाल मुख्य रूप से इस तनाव की अवधि और गंभीरता पर निर्भर करेगी।

    भारत में कच्चे तेल की मौजूदा कीमत लगभग 67 डॉलर प्रति बैरल है, और हाल ही में इसमें लगभग 2% की बढ़ोतरी हुई है। यदि ईरान पर यह तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो शॉर्ट और मीडियम टर्म में भारतीय बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। तेल महंगा होने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, पेट्रोल-डीजल, पेंट, एविएशन और टायर बनाने वाली कंपनियों पर सीधा असर पड़ेगा। उत्पादन लागत बढ़ने से उपभोक्ताओं को महंगे उत्पाद खरीदने पड़ सकते हैं।

    महंगाई पर भी इसका असर देखा जा सकता है। ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से देश में महंगाई बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले हफ्तों में बाजार अस्थिर रहेंगे और निवेशकों में बेचैनी बढ़ सकती है।

    सरकारी स्तर पर भी इस संकट को लेकर निगरानी बढ़ा दी गई है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्टॉक बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति पर नजर रख रहा है। वित्तीय और निवेश संस्थानों को भी निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    संक्षेप में, ईरान पर इजरायल-यूएस हमला भारत के लिए आर्थिक चुनौती लेकर आया है। तेल की कीमतों में तेजी, शेयर बाजार में दबाव और महंगाई में वृद्धि का खतरा बढ़ गया है। ऑयल, एविएशन, पेंट और टायर जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, इसलिए निवेशकों और उपभोक्ताओं को सतर्कता और समझदारी से आर्थिक फैसले लेने होंगे।

  • तेहरान समेत कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा

    तेहरान समेत कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा


    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय माहौल आज 28 फरवरी 2026 को अचानक तनावपूर्ण हो गया है जब Israel ने Iran पर एक बड़ा सैन्य हमला शुरू कर दिया। इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने बताया कि यह हमला पहले से किया गया हमला प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक था जिसका उद्देश्य देश पर संभावित खतरे को दूर करना है। इस कार्रवाई के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति अत्यधिक नाजुक हो गई है। इजरायल ने देश भर में विशेष और स्थायी आपातकाल लागू कर दिया है और नागरिकों से सतर्क रहने को कहा है क्योंकि संभावित मिसाइलों या जवाबी हमलों का खतरा बना हुआ है।

    तेहरान में जोरदार धमाके राजधानी में तनाव फैल गया
    ईरान की राजधानी तेहरान के केंद्र में आज सुबह कई धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं और धुएं का गुबार भी उठता देखा गया। ईरानी मीडिया के अनुसार राजधानी के रिपब्लिक और यूनिवर्सिटी स्ट्रीट जैसे इलाकों में मिसाइलें गिरीं जिससे इलाके में भारी तनाव का माहौल बन गया है। स्थानीय प्रशासन ने सक्रिय सुरक्षा बलों को मौके पर भेज दिया है लेकिन फिलहाल किसी नुकसान या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटनास्थल से धुएं के काले बादल उठते हुए देखे गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की चेतावनी जारी की गई है। इस हमले की पृष्ठभूमि और विस्तृत रणनीतिक वजहों पर अभी तक पूर्ण जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन यह घटना क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।

    क्या है इस हमले के पीछे कारण? ईरान-इजरायल तनाव की पृष्ठभूमि

    विश्लेषकों का कहना है कि यह हमला उन वर्षों से चल रहे तनावों का नवीनतम चरण है जिसमें इजरायल और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम बैलिस्टिक मिसाइल विकास और सैन्य विवाद शामिल रहे हैं। इजरायल लगातार चेतावनी देता रहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमताएं उसके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। पिछले साल दोनों देशों के बीच हवाई संघर्ष और मिसाइल दागे जाने जैसे कई घटनाक्रम भी सामने आ चुके हैं। ऐसे में आज का हमला इसी तनाव की परिणति भी माना जा रहा है।

    आपातकाल के बीच कैसा माहौल? नागरिकों के लिए क्या किया गया ऐलान
    इजरायल में आपातकाल के लागू होने के बाद वहां के नागरिकों को संभावित मिसाइल हमलों से निपटने के लिए चेतावनी जारी की गई है। सेना ने एयर राइड सायरन बजाने के साथ सुरक्षा आश्रयों के पास रहने की सलाह दी है और लोगों से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने को कहा गया है। वहीं ईरान ने भी अपनी एयर स्पेस बंद कर दी है और सुरक्षा बलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा चिंताओं और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है जिससे आसपास के देशों की सुरक्षा नीति पर भी प्रभाव दिख सकता है।

  • गाजा संघर्ष: युद्धविराम के बावजूद हिंसा जारी, मानवाधिकार संगठनों ने जांच की मांग की..

    गाजा संघर्ष: युद्धविराम के बावजूद हिंसा जारी, मानवाधिकार संगठनों ने जांच की मांग की..


    नई दिल्ली। वाशिंगटन/गाजा। गाजा संघर्ष में हालिया रिपोर्टों ने इजराइल पर कथित रूप से ‘वैक्यूम’ या थर्मोबैरिक बम इस्तेमाल करने के आरोप लगाए हैं। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इन आरोपों की गंभीरता पर ध्यान देते हुए जांच की मांग तेज कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार यह हथियार पहले हवा में ज्वलनशील कणों का बादल फैलाते हैं और फिर उसे विस्फोटित करते हैं, जिससे अत्यधिक ताप और दबाव उत्पन्न होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बंद या घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इसका असर व्यापक विनाशकारी होता है।

    गाजा की सिविल डिफेंस एजेंसियों के अनुसार कई घटनाओं में शव तक नहीं मिले और हजारों लोग अभी भी लापता हैं। आधिकारिक युद्धविराम लागू होने के बावजूद हिंसा जारी है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, युद्धविराम के बाद भी सैकड़ों लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं। इस स्थिति ने क्षेत्र में मानवीय संकट और सामाजिक अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।

    मानवाधिकार समूहों ने चेतावनी दी है कि यदि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस प्रकार के हथियारों का इस्तेमाल हुआ, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन माना जा सकता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से तत्काल जांच की अपील की है। हालांकि इन आरोपों पर इजराइल की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से नहीं आई है।

    संघर्ष के कारण गाजा का बुनियादी ढांचा व्यापक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के आकलनों के अनुसार बड़ी आबादी विस्थापन, भोजन और पानी की कमी जैसी समस्याओं का सामना कर रही है। राहत एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि युद्ध की लंबी अवधि का प्रभाव क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक संरचना पर गहरा पड़ेगा।

    इसी बीच अमेरिका और इजराइल के शीर्ष नेतृत्व के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, मानवीय सहायता और युद्धविराम को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत भी हुई। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि चर्चा जारी है, लेकिन ठोस प्रगति की अभी पुष्टि नहीं हुई है। क्षेत्रीय स्थिरता, मानवाधिकारों की रक्षा और मानवीय सहायता वितरण इस समय अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

    वैश्विक समुदाय इस पर नजर बनाए हुए है कि क्या गाजा में हथियारों के कथित इस्तेमाल की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। युद्धविराम के बावजूद जारी हिंसा और नागरिक हताहतों की संख्या ने अंतरराष्ट्रीय चिंता को और बढ़ा दिया है।