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  • गंदे पानी से बड़वानी में बवाल: सीवरेज लीकेज पर सड़क पर उतरे पार्षद और रहवासी

    गंदे पानी से बड़वानी में बवाल: सीवरेज लीकेज पर सड़क पर उतरे पार्षद और रहवासी


    बड़वानी । मध्यप्रदेश के बड़वानी शहर में उस समय हालात बिगड़ गए जब कालका माता मंदिर क्षेत्र में सीवरेज और पेयजल लाइनों में लीकेज के चलते घरों तक गंदे और बदबूदार पानी की सप्लाई होने लगी। जैसे ही लोगों ने नलों से दूषित पानी निकलते देखा, पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया और वार्डवासियों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया। समस्या से नाराज कांग्रेस पार्षदों ने भी मोर्चा संभालते हुए सड़क पर धरना शुरू कर दिया और नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में सीवरेज लाइन का काम चल रहा था, लेकिन निर्माण कार्य के दौरान भारी लापरवाही बरती गई। धरना स्थल पर पहुंचे नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष राकेश सिंह जाधव ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीवरेज कार्य के दौरान मुख्य पेयजल लाइन को नुकसान पहुंचा दिया गया, जिसके चलते यह स्थिति बनी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नियमों के अनुसार पेयजल और सीवरेज पाइपलाइन को साथ में नहीं डाला जा सकता, लेकिन यहां नियमों की अनदेखी करते हुए काम किया गया है।

    वार्ड नंबर 14 के पार्षद प्रतिनिधि हेमंत कुमावत ने भी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि दूषित पानी की समस्या की जानकारी एक दिन पहले ही अधिकारियों को दे दी गई थी, लेकिन समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके चलते अब हालात ऐसे बन गए हैं कि क्षेत्र में महामारी और जलजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है। लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे और केवल आश्वासन देकर मामले को टालने की कोशिश कर रहे हैं।

    जैसे ही प्रदर्शन की सूचना प्रशासन तक पहुंची, नगर पालिका के इंजीनियर और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें भरोसा दिलाया कि समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा। साथ ही संबंधित ठेकेदार को तत्काल लीकेज ठीक करने के निर्देश भी दिए गए। इसके बाद कुछ हद तक स्थिति शांत हुई, लेकिन लोगों का गुस्सा पूरी तरह ठंडा नहीं पड़ा है।

    पार्षदों और स्थानीय निवासियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन की टीम सुधार कार्य में जुटी हुई है, लेकिन यह घटना एक बार फिर शहरी विकास कार्यों में लापरवाही और निगरानी की कमी को उजागर करती है, जिससे आम नागरिकों को सीधे तौर पर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

  • ट्रैक्टर रैली के बाद रुका आंदोलन पर खत्म नहीं हुआ गुस्सा किसान बोले कागज पर भरोसा चाहिए

    ट्रैक्टर रैली के बाद रुका आंदोलन पर खत्म नहीं हुआ गुस्सा किसान बोले कागज पर भरोसा चाहिए


    हरदा ।मध्यप्रदेश के हरदा जिले में किसानों का उबाल फिलहाल दो दिनों के लिए थम जरूर गया है लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। किसान जन क्रांति आंदोलन के तहत हजारों किसानों ने अपनी मांगों को लेकर जिस तरह से एकजुटता दिखाई उसने प्रशासन को भी सक्रिय होने पर मजबूर कर दिया। हालांकि बातचीत के बाद आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है लेकिन किसानों का साफ कहना है कि जब तक उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा तब तक उनका भरोसा नहीं बनेगा।

    बुधवार को जिले में बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर रैली निकालते हुए कृषि उपज मंडी पहुंचे जहां उन्होंने MSP और गेहूं की स्लॉट बुकिंग में हो रही देरी समेत कई मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि लंबे समय से वे इन समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस समाधान नहीं निकल पा रहा है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुना और अपनी आवाज बुलंद की।

    प्रदर्शन के दौरान मौके पर पहुंचे दिवाकर नारायण पटेल ने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। अधिकारियों और किसानों के बीच हुई चर्चा में यह सहमति बनी कि गेहूं स्लॉट बुकिंग की समस्या को अगले दो दिनों के भीतर सुधार लिया जाएगा। साथ ही अन्य मांगों पर भी सकारात्मक रुख अपनाने का भरोसा दिया गया।

    हालांकि किसानों ने स्पष्ट कर दिया कि अब वे केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि पहले भी कई बार वादे किए गए लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं दिखा इसलिए इस बार सभी मांगों पर लिखित आश्वासन जरूरी है। इसी मांग के चलते आंदोलन को फिलहाल दो दिन के लिए स्थगित करने पर सहमति बनी है ताकि प्रशासन को समाधान लागू करने का समय मिल सके।

    जन क्रांति आंदोलन के संयोजक राजेंद्र पटेल ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में लिखित आश्वासन नहीं दिया गया तो किसान फिर से सड़कों पर उतरेंगे और बिना किसी पूर्व सूचना के कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल एक जिले की नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के अधिकारों से जुड़ी है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि किसानों के मुद्दे अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहे बल्कि वे एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकते हैं। MSP और कृषि व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं लगातार किसानों की चिंता का कारण बनी हुई हैं और यदि समय रहते इनका समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है।

    फिलहाल प्रशासन के पास दो दिन का समय है जिसमें उसे अपनी प्रतिबद्धता साबित करनी होगी। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या किसानों को लिखित आश्वासन मिलेगा या फिर हरदा एक बार फिर बड़े आंदोलन का केंद्र बनेगा।

  • मैहर में दर्दनाक हादसा: तालाब में नहाने गई चार लड़कियां डूबीं, दो की मौत, दो की जान बची

    मैहर में दर्दनाक हादसा: तालाब में नहाने गई चार लड़कियां डूबीं, दो की मौत, दो की जान बची

    मैहर । मध्य प्रदेश के मैहर जिले में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां तालाब में नहाने गई चार लड़कियां डूब गईं। इस घटना में दो लड़कियों की मौत हो गई, जबकि दो को ग्रामीणों ने समय रहते बचा लिया।

    नहाने के दौरान हुआ हादसा

    कोतवाली थाना क्षेत्र के पटेहरा तालाब में यह घटना हुई। जानकारी के अनुसार, पटेहरा बीड़ी कॉलोनी की एक युवती और तीन नाबालिग किशोरियां सुबह नहाने के लिए तालाब पहुंची थीं। इसी दौरान एक किशोरी का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चली गई।

    बचाने की कोशिश बनी जानलेवा

    पहली किशोरी को बचाने के प्रयास में बाकी तीनों भी आगे बढ़ीं, लेकिन संतुलन बिगड़ने से चारों पानी में डूबने लगीं। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और दो लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि, दो की जान नहीं बचाई जा सकी।

    मृतकों की पहचान

    हादसे में जान गंवाने वाली लड़कियों की पहचान पूनम चौधरी (10) और आंचल चौधरी (20) के रूप में हुई है, जो पटेहरा बीड़ी कॉलोनी की निवासी थीं। दोनों के शवों को सिविल अस्पताल मैहर भेजा गया है। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम दिव्या पटेल, तहसीलदार जितेंद्र पटेल और थाना प्रभारी महेंद्र सिंह चौहान मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    इलाके में पसरा मातम

    इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। एक छोटी सी चूक ने दो जिंदगियां छीन लीं, जिससे स्थानीय लोग स्तब्ध हैं।

  • श्योपुर हादसे पर CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान मृतकों को 4 लाख घायलों को आर्थिक मदद

    श्योपुर हादसे पर CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान मृतकों को 4 लाख घायलों को आर्थिक मदद

    श्योपुर । मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है इस घटना पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता का बड़ा ऐलान किया है मुख्यमंत्री ने इस हादसे को बेहद पीड़ादायक बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया

    मुख्यमंत्री द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी वहीं गंभीर रूप से घायल लोगों को 1 लाख रुपए और अन्य घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं यह घोषणा मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से की और संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से राहत कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए

    यह दर्दनाक हादसा श्योपुर जिले के विजयपुर थाना क्षेत्र के खितरपाल गांव के पास हुआ जहां एक ट्रैक्टर ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई बताया जा रहा है कि ट्रॉली में सवार सभी लोग वीरपुर क्षेत्र के घूघस गांव से विजयपुर के झारबड़ौदा में भात देने जा रहे थे इसी दौरान गैस गोदाम के पास अचानक संतुलन बिगड़ने से ट्रैक्टर ट्रॉली पलट गई और उसमें सवार कई लोग उसके नीचे दब गए

    हादसा इतना भयावह था कि मौके पर ही चार महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए घटना के तुरंत बाद मौके पर चीख पुकार मच गई और आसपास के लोग सहायता के लिए दौड़ पड़े स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव कार्य शुरू करते हुए घायलों को बाहर निकाला और उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जहां उनका इलाज जारी है

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि इस दुखद घटना में घायल हुए सभी लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना भी की साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए

    इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में यात्रियों को ले जाने के लिए उपयोग किए जाने वाले ट्रैक्टर ट्रॉली जैसे असुरक्षित साधनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं अक्सर देखा जाता है कि ऐसे वाहनों में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जाता है जिससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है

    फिलहाल प्रशासन द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है वहीं घायलों के इलाज और पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाने का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है इस हादसे ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैला दी है और लोग मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं

  • छुट्टियों की खुशियां बदलीं मातम, में उज्जैन में जहरीली गैस से दो बच्चियों की मौत

    छुट्टियों की खुशियां बदलीं मातम, में उज्जैन में जहरीली गैस से दो बच्चियों की मौत


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर के नानाखेड़ा थाना क्षेत्र स्थित त्रिवेणी हिल्स से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है जहां गर्मियों की छुट्टियां मनाने आए दो परिवारों की खुशियां अचानक मातम में बदल गईं। यहां नाना के घर आए परिवार के दो मासूम बच्चों की बंद कमरे में जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई जिससे पूरे इलाके में शोक का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार, परिवार के सदस्य जिस छोटे से कमरे में सो रहे थे वहां बड़ी मात्रा में गेहूं का भंडारण किया गया था। यह कमरा लगभग 10 बाय 15 फीट का था और रात के समय पूरी तरह बंद होने के कारण अंदर ऑक्सीजन की कमी और संभवतः रासायनिक प्रतिक्रिया से जहरीली गैस का निर्माण हो गया। इसी स्थिति में कमरे में सो रहे बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी।

    सुबह करीब 9 बजे जब परिजनों की नींद खुली तो उन्होंने देखा कि बच्चों की हालत बेहद गंभीर है। मासूमों के मुंह से झाग निकल रहा था और वे बेहोश अवस्था में थे। घबराए परिजन तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन तब तक स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी।

    इस हादसे में शाजापुर की रहने वाली मात्र डेढ़ महीने की मासूम तृषा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया जबकि कायथा निवासी चार वर्षीय अनिका की भी मौत हो गई। दोनों मासूमों की मौत ने परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

    बताया जा रहा है कि छुट्टियों के चलते कई रिश्तेदार एक साथ त्रिवेणी हिल्स स्थित नाना के घर इकट्ठा हुए थे और वहीं यह दुखद घटना घटित हो गई। प्रारंभिक आशंका के अनुसार गेहूं के भंडारण के साथ रखी गई कीटनाशक दवाओं या बंद कमरे में हुई रासायनिक प्रक्रिया के कारण जहरीली गैस बनने की संभावना जताई जा रही है।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वास्तव में गैस बनने का कारण क्या था और क्या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही शामिल थी।

    इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और पीड़ित परिवारों का रो रोकर बुरा हाल है। मासूमों की असामयिक मौत ने एक बार फिर घरों में अनाज भंडारण और सुरक्षा उपायों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव महिला सशक्तिकरण और योजनाओं पर करेंगे संबोधन…

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव महिला सशक्तिकरण और योजनाओं पर करेंगे संबोधन…


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 15 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन अभियान के अंतर्गत एक भव्य और वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन शहर के प्रतिष्ठित रवींद्र भवन में संपन्न होगा, जहां राज्य के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मुख्य रूप से उपस्थित रहकर संबोधित करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक भागीदारी और उनके समग्र विकास की दिशा में सरकार की योजनाओं और प्रयासों को जन-जन तक पहुंचाना है।

    यह कार्यक्रम नारी शक्ति वंदन पखवाड़े का हिस्सा है, जो 25 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में विभिन्न गतिविधियों के साथ मनाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से महिलाओं के उत्थान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान को केंद्र में रखते हुए कई स्तरों पर जागरूकता और लाभकारी योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है। राजधानी में होने वाला यह मुख्य कार्यक्रम इस पूरे अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव नारी सशक्तिकरण पर विस्तार से अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। सरकार का मानना है कि बेटियों और बहनों का विकास ही समाज और प्रदेश के समग्र विकास की आधारशिला है। इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि राज्य सरकार महिलाओं के हित में किस प्रकार निरंतर कार्य कर रही है।

    राज्य सरकार द्वारा लाडली बहना योजना को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। इस योजना के तहत प्रदेश की बड़ी संख्या में महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रही हैं। अब तक इस योजना के माध्यम से करोड़ों की राशि सीधे महिलाओं के खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है, जिससे इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है।

    नारी शक्ति वंदन पखवाड़े के दौरान राज्यभर में जागरूकता कार्यक्रम, संवाद सत्र और विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ देना ही नहीं बल्कि उन्हें समाज के हर क्षेत्र में समान भागीदारी के लिए प्रेरित करना भी है। इसी क्रम में लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की दिशा में भी चर्चा और पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और निरंतर ऐसी नीतियां लागू की जा रही हैं जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए। इस आयोजन को प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के प्रति सरकार की गंभीरता और संकल्प का प्रतीक माना जा रहा है।

  • खजराना में भीषण आग से मची अफरा तफरी समय रहते बचाए गए तीन बच्चे टला बड़ा हादसा

    खजराना में भीषण आग से मची अफरा तफरी समय रहते बचाए गए तीन बच्चे टला बड़ा हादसा


    इंदौर । इंदौर में गुरुवार रात एक बड़ा हादसा होते होते टल गया जब खजराना थाना क्षेत्र में स्थित एक तीन मंजिला मकान में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा घर धुएं और लपटों से घिर गया। घर में मौजूद परिवार के सदस्य किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे लेकिन तीसरी मंजिल पर तीन छोटे बच्चे फंस गए जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। आसपास के लोगों ने तत्काल पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी और मौके पर अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और हालात को समझते हुए बिना समय गंवाए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। उस समय तक फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर नहीं पहुंची थी ऐसे में पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत टैंकर मंगवाया। टैंकर पर सीढ़ी लगाकर तीसरी मंजिल तक पहुंचने की कोशिश की गई। घना धुआं और अंधेरा इस काम को बेहद मुश्किल बना रहे थे लेकिन पुलिसकर्मियों ने हिम्मत नहीं हारी।

    पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर मानव श्रृंखला बनाई और बेहद जोखिम उठाते हुए सीढ़ी के सहारे तीसरी मंजिल तक पहुंचे। वहां फंसे बच्चों को एक एक कर सुरक्षित नीचे उतारा गया। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान हर पल खतरा बना हुआ था क्योंकि आग लगातार फैल रही थी लेकिन सूझबूझ और तेजी से काम करते हुए सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बच्चों के सुरक्षित बाहर आते ही मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।

    इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई जो कि सबसे बड़ी राहत की बात रही। हालांकि मकान का कुछ हिस्सा आग की चपेट में आ गया लेकिन समय रहते बचाव कार्य होने से बड़ा नुकसान टल गया। बाद में फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया।

    यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि पिछले महीने ही इंदौर में एक दर्दनाक हादसा हुआ था जहां एक मकान के बाहर खड़ी इलेक्ट्रिक कार में आग लगने से पूरे घर में आग फैल गई थी। उस हादसे में घर के अंदर फंसे लोग समय पर बाहर नहीं निकल सके और इलेक्ट्रॉनिक लॉक नहीं खुलने के कारण आठ लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। उस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था।

    ताजा घटना में जिस तरह पुलिस ने तत्परता दिखाई और बिना किसी संसाधन के तत्काल निर्णय लेकर बच्चों की जान बचाई वह सराहनीय है। यह घटना न केवल आपात स्थिति में सूझबूझ की अहमियत को दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि समय पर लिया गया निर्णय कितनी बड़ी त्रासदी को टाल सकता है।

  • जिंदगी की जंग लड़ रहा भागीरथ बोरवेल से सुरक्षित निकालने की कोशिशें तेज

    जिंदगी की जंग लड़ रहा भागीरथ बोरवेल से सुरक्षित निकालने की कोशिशें तेज


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील अंतर्गत ग्राम झालरिया में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है जहां 3 साल का मासूम बच्चा बोरवेल में गिर गया। घटना के बाद से ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास तेजी से जारी हैं।

    जानकारी के अनुसार बच्चा भागीरथ अपने परिवार के साथ भेड़ चराने के लिए क्षेत्र में आया था। खेलते-खेलते वह खुले पड़े बोरवेल के पास पहुंच गया जहां पहले ढक्कन लगा हुआ था लेकिन बताया जा रहा है कि जानवरों के चरने के दौरान वह ढक्कन हट गया और इसी कारण यह हादसा हो गया।

    हादसा गुरुवार रात करीब 8 से 9 बजे के बीच हुआ जिसके बाद तुरंत प्रशासन, पुलिस और रेस्क्यू टीमों को सूचना दी गई। घटना के बाद से रातभर लगातार राहत और बचाव कार्य चलता रहा और मशीनों की मदद से ऑपरेशन को तेज किया गया।

    पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि बच्चे को करीब 75 फीट की गहराई पर लोकेट कर लिया गया है। बोरवेल के अंदर कैमरे और विशेष उपकरण डालकर बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि हर पल की जानकारी मिल सके और उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

    रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने के लिए मौके पर 5 पोकलेन और जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं। इसके साथ ही बोरवेल के पास समानांतर गड्ढा खोदकर टनल बनाने का काम भी तेजी से किया जा रहा है ताकि वैकल्पिक रास्ते से बच्चे तक पहुंचा जा सके।

    प्रशासन ने पूरे इलाके को घेराबंदी कर दिया है और किसी भी तरह की भीड़ को रोकने के निर्देश दिए हैं ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे मौके पर न जुटें और राहत कार्य में सहयोग करें।

    मासूम भागीरथ, जो राजस्थान के पाली जिले के निवासी बताए जा रहे हैं, अपने परिवार के साथ कुछ दिनों से इस क्षेत्र में रुके हुए थे। फिलहाल पूरे प्रशासन का ध्यान केवल एक ही लक्ष्य पर है किसी भी तरह बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालना।

    यह हादसा एक बार फिर खुले बोरवेल की खतरनाक स्थिति और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। राहत टीमों का ऑपरेशन लगातार जारी है और सभी की नजर अब सिर्फ इस बात पर है कि मासूम को कब तक सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा।

  • रश्मि शमी ने लिया पेट्रोलियम आपूर्ति का जायजा, पीएनजी कनेक्शन और कालाबाजारी पर निर्देश

    रश्मि शमी ने लिया पेट्रोलियम आपूर्ति का जायजा, पीएनजी कनेक्शन और कालाबाजारी पर निर्देश


    भोपाल । भोपाल में बुधवार को अपर मुख्य सचिव खाद्य श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों के अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी, नगर निगम और नगर पालिका के अधिकारी, ऑयल कंपनी और सीजीडी के अधिकारियों के साथ पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता और आपूर्ति की समीक्षा बैठक की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन हाउसहोल्ड्स में पीएनजी की लाइन कनेक्ट की जा चुकी है, वहाँ आगामी दस दिनों के अंदर पीएनजी सप्लाई शुरू की जाए। इसके साथ ही, उपभोक्ताओं को यह भी समझाईश दी जाए कि यदि वे पीएनजी सप्लाई नहीं लेते हैं, तो भारत सरकार के निर्देशानुसार तीन माह के अंदर उनकी एलपीजी सप्लाई बंद की जा सकती है।

    एसीएस रश्मि शमी ने गृह विभाग के अधीन आने वाले संस्थानों, सुधार गृहों, पुलिस, सीएपीएफ, डिफेंस एस्टेब्लिशमेंट, ऑफिसर्स कॉलोनी, सामान्य प्रशासन पूल के घरों, पुलिस मुख्यालय और पुलिस कॉलोनी जैसी जगहों को प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन देने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलों को निर्देशित किया कि जहां पाइपलाइन बिछी हुई है, वहाँ के रहवासियों और व्यवसायियों की सूची तैयार की जाए और कॉलोनियों में जागरूकता कैम्प लगाए जाएँ। इन कैम्पों में नगर निगम, नगर पालिका के अधिकारी, वार्ड पार्षद और अन्य जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाना अनिवार्य होगा।

    औद्योगिक क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछी होने वाले क्षेत्रों की पहचान कर उन उद्योगों को पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश भी दिए गए। सीजीडी संस्थाओं के मैनपावर बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन पॉलीटेक्निक, आईटीआई और अन्य प्रशिक्षण संस्थाओं से प्रशिक्षार्थियों की सूची उपलब्ध करवा रहा है, जिन्हें लघु प्रशिक्षण के बाद कार्य में लगाया जाएगा।

    बैठक में यह भी बताया गया कि जिले के माइग्रेट लेबर और छात्रों के लिए खाना पकाने के उद्देश्य से ऑयल कंपनी द्वारा 5 किलो के सिलेण्डर 1529 रुपये प्रति कनेक्शन के हिसाब से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस सिलेण्डर को एड्रेस प्रूफ के बिना भी लिया जा सकता है और रिफिल चार्ज 585 रुपये निर्धारित किया गया है। नगर निगम और नगर पालिका के माध्यम से जिंगल और कचरा गाड़ियों का उपयोग कर पीएनजी के प्रचार-प्रसार की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए। शादी गार्डन, कैटरर्स और स्ट्रीट वेंडर्स को 70 प्रतिशत सीमा के अधीन कमर्शियल सिलेण्डर उपलब्ध कराए जाएंगे।

    सीजीडी संस्थाओं को पाइपलाइन बिछाने की अनुमति और ROU स्वीकृतियां 24 घंटे के भीतर जारी की जा रही हैं। अभी तक सभी स्वीकृतियां पूरी तरह जारी की जा चुकी हैं और कोई भी आवेदन शेष नहीं है।

    अपर मुख्य सचिव ने कालाबाजारी रोकने की दिशा में भी सख्त रुख अपनाया। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एलपीजी कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार कार्यवाही जारी है। अब तक 3226 स्थानों पर जांच की गई, 3961 एलपीजी सिलेण्डर जब्त किए गए और 11 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई। प्रदेश के सभी जिला आपूर्ति नियंत्रक, अधिकारी और ऑयल कंपनी के अधिकारी गैस एजेंसी और पेट्रोल पंपों की नियमित जांच के लिए सतत रूप से निर्देशित हैं।

    बैठक के निष्कर्ष में यह स्पष्ट किया गया कि प्रदेश में पीएनजी और एलपीजी आपूर्ति को सुचारू रूप से सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। घरों, औद्योगिक इकाइयों और संवेदनशील संस्थानों में समय पर सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी प्रकार की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • मुलताई स्टेशन पर चलती ट्रेन में चढ़ते समय यात्री की मौत, पुलिस जांच में जुटी

    मुलताई स्टेशन पर चलती ट्रेन में चढ़ते समय यात्री की मौत, पुलिस जांच में जुटी


    बैतूल । बैतूल जिले के मुलताई रेलवे स्टेशन पर मंगलवार दोपहर ट्रेन में चढ़ते समय एक यात्री की दर्दनाक मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, सिकंदराबाद-जयपुर एक्सप्रेस के ठहराव के दौरान महाराष्ट्र के अमरावती जिले के दर्यापुर निवासी सलीम खान (42) पानी लेने के लिए ट्रेन से नीचे उतरे। इसी दौरान उनकी नज़र फिसल गई और वह ट्रैक पर गिर गए।

    पुलिस ने बताया कि हादसा बहुत जल्दी और अचानक हुआ। ट्रेन ठहरी थी लेकिन सलीम खान की गिरने की स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें तुरंत उठाया नहीं जा सका। स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने शोर मचाया और रेलवे कर्मचारियों को सूचना दी। रेलवे और पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुँची और सलीम खान को प्राथमिक सहायता दी, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

    हादसे के बाद स्टेशन पर हड़कंप मच गया। यात्री और रेलवे कर्मचारी घटना स्थल पर जमा हुए। रेलवे पुलिस ने ट्रैक और प्लेटफार्म की जांच की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दुर्घटना किसी तकनीकी या सुरक्षा कारण से तो नहीं हुई। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार यह एक व्यक्तिगत हादसा था, जिसमें यात्री की असावधानी और ट्रेन से उतरने के दौरान फिसलने की वजह से मौत हुई।

    रेलवे पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के परिजन और स्थानीय प्रशासन को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस ने पूरे मामले में रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन पर सुरक्षा उपाय पर्याप्त हैं, लेकिन यात्रियों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

    रेलवे यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेन से उतरते समय किसी भी प्रकार की जल्दबाज़ी या असावधानी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। रेलवे स्टेशन पर चेतावनी बोर्ड और कर्मचारियों की मौजूदगी होती है, लेकिन यात्रियों की सतर्कता भी बेहद महत्वपूर्ण है।

    स्थानीय लोगों ने कहा कि सलीम खान का यह हादसा काफी दुखद है और रेलवे स्टेशन पर ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए और कड़े उपाय किए जाने चाहिए। यात्रियों को ट्रेन के रुकने और चलने की स्थिति में प्लेटफार्म पर सावधानी से चलने के निर्देश दिए जाने चाहिए।

    मुलताई स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ते समय या उतरते समय यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे ने समय-समय पर चेतावनी जारी की है, लेकिन असावधानी से होने वाली घटनाओं को रोकना चुनौतीपूर्ण होता है। इस हादसे ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा और यात्रियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठाया है।

    रेलवे प्रशासन ने कहा कि घटना की पूरी जांच की जा रही है और भविष्य में ऐसे हादसों से बचाव के लिए अतिरिक्त सतर्कता और सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। यात्रियों से अपील की गई है कि ट्रेन के चलने या रुकने के समय प्लेटफार्म पर सावधानी बरतें और कभी भी ट्रेन से भागते हुए या जल्दी में उतरते हुए जोखिम न लें।

    इस घटना ने मुलताई रेलवे स्टेशन और आसपास के यात्रियों में सुरक्षा के प्रति चेतना बढ़ा दी है। रेलवे और पुलिस मिलकर जांच और सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के दुखद हादसे रोके जा सकें।