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  • गणेश उत्सव से पहले उज्जैन में अनोखी पहल स्कूलों में बच्चों को सिखा रहे मिट्टी के गणेश बनाना

    गणेश उत्सव से पहले उज्जैन में अनोखी पहल स्कूलों में बच्चों को सिखा रहे मिट्टी के गणेश बनाना


    उज्जैन । गणेश चतुर्थी से पहले उज्जैन में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक खास पहल शुरू की गई है। शहर के स्कूलों में बच्चों को मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसका उद्देश्य बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के साथ गणेश उत्सव में मिट्टी की प्रतिमाओं को बढ़ावा देना है। इसी अभियान के तहत गुरुवार को ढांचा भवन स्थित मॉडल स्कूल में गणेश प्रतिमा निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई जिसमें बड़ी संख्या में छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया।

    कार्यशाला में बच्चों ने अपने हाथों से मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं तैयार कीं। इस दौरान उज्जैन के विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा और एसपी प्रदीप शर्मा भी बच्चों के साथ प्रतिमा बनाने में शामिल हुए। जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी को बच्चों के साथ बैठकर मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाते देख विद्यार्थियों में खास उत्साह नजर आया। बच्चों ने पूरी रुचि के साथ प्रतिमा निर्माण की बारीकियां सीखीं और आकर्षक गणेश प्रतिमाएं तैयार कीं।

    इस अभियान का आयोजन लोकमान्य तिलक गणेशोत्सव महाआयोजन समिति की ओर से किया जा रहा है। समिति पिछले 12 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण और शास्त्रोक्त पूजन परंपरा को बढ़ावा देने के लिए अलग अलग गतिविधियां संचालित कर रही है। समिति के सहसंयोजक जगदीश पांचाल ने बताया कि समिति संयोजक विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा के मार्गदर्शन में स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से बच्चों और आम लोगों को मिट्टी के गणेश बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा ने कहा कि मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा पर्यावरण और जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा विसर्जन के बाद मिट्टी पानी में आसानी से घुल जाती है। इससे जलस्रोतों में प्रदूषण का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने बच्चों से भी पर्यावरण हितैषी तरीके से त्योहार मनाने की अपील की।

    एसपी प्रदीप शर्मा ने भी अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब बच्चे खुद अपने हाथों से गणेश प्रतिमा तैयार करेंगे तो उनमें प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होगी। कार्यशाला के बाद बच्चे इन्हीं प्रतिमाओं का पूजन करेंगे और विसर्जन के समय भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश लोगों तक पहुंचेगा।

    इससे पहले बुधवार को इंदिरा नगर स्थित नूतन कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में भी प्रतिमा निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया था। अभियान को आगे शहर के अन्य स्कूलों तक ले जाने की तैयारी है। आयोजकों का कहना है कि बच्चों को शुरुआत से ही पर्यावरण के अनुकूल परंपराओं से जोड़ना जरूरी है ताकि आने वाले समय में त्योहारों के साथ प्रकृति की सुरक्षा का संदेश भी मजबूत हो सके।

  • वाटरफॉल में इंसानियत शर्मसार चोरी के शक में दो बच्चों को पीटा कपड़े उतरवाकर बनाया वीडियो

    वाटरफॉल में इंसानियत शर्मसार चोरी के शक में दो बच्चों को पीटा कपड़े उतरवाकर बनाया वीडियो

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में बगदरी फॉल पर दो नाबालिग बच्चों के साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। करीब 12 साल के दोनों बच्चे बुधवार को पाटन से वाटरफॉल घूमने पहुंचे थे। इसी दौरान तेंदूखेड़ा से बाइक पर आए कुछ युवकों ने बच्चों पर चोरी करने का आरोप लगा दिया। इसके बाद युवकों ने दोनों बच्चों के साथ मारपीट शुरू कर दी। बच्चे लगातार खुद को निर्दोष बताते रहे और युवकों से उन्हें छोड़ने की गुहार लगाते रहे लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद उनके साथ मारपीट जारी रही।

    बताया जा रहा है कि युवक वाटरफॉल के पास अपने कपड़े और सामान रखकर नहाने गए थे। इसी दौरान वहां मौजूद दोनों बच्चों पर कपड़ों से रुपए निकालने का आरोप लगाया गया। युवकों ने बच्चों से पूछताछ के नाम पर उनके साथ मारपीट की। बच्चे बार बार कहते रहे कि उन्होंने कोई चोरी नहीं की है और अपने पिता को फोन लगाने की बात भी कहते रहे। इसके बावजूद युवकों ने उनकी बात नहीं मानी।

    मामला यहीं नहीं रुका। आरोप है कि दोनों बच्चों के कपड़े उतरवा दिए गए और उन्हें निर्वस्त्र कर घुमाया गया। इसी दौरान एक युवक मोबाइल से पूरी घटना का वीडियो बनाता रहा। वीडियो में बच्चे चोरी से इनकार करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वे लगातार युवकों से छोड़ने की अपील करते रहे। इस दौरान बच्चों के साथ मौजूद लोगों के सामने भी कथित तौर पर अभद्र और अमानवीय व्यवहार किया गया।

    बच्चों के मुताबिक उनके पास मोबाइल फोन भी था जिसे युवकों ने छीन लिया। आरोप है कि उनसे रुपए भी लिए गए और शराब के लिए पैसे मांगने की बात कही गई। घटना के बाद बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस तक मामला पहुंचा और अधिकारियों ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी।

    एएसपी सूर्यकांत शर्मा के मुताबिक सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के जरिए पुलिस को घटना की जानकारी मिली है। वीडियो में दो नाबालिग बच्चों के साथ मारपीट और उन्हें निर्वस्त्र किए जाने की बात सामने आई है। मामले की जांच पाटन थाना प्रभारी को सौंपी गई है। पुलिस वीडियो के आधार पर घटना में शामिल युवकों की पहचान करने में जुटी है।

    इस घटना ने बच्चों की सुरक्षा और पर्यटन स्थलों पर निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी बच्चे पर चोरी का संदेह होने की स्थिति में कानून हाथ में लेने के बजाय पुलिस को सूचना देना जरूरी है। बच्चों के साथ मारपीट करना और कथित तौर पर उन्हें निर्वस्त्र कर वीडियो बनाकर प्रसारित करना गंभीर मामला है। पुलिस अब वायरल वीडियो और उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

  • जर्जर मकान की छत ने उजाड़ दिया परिवार 2 साल के बेटे और मां की मौत पिता समेत दो बेटियां अस्पताल में भर्ती

    जर्जर मकान की छत ने उजाड़ दिया परिवार 2 साल के बेटे और मां की मौत पिता समेत दो बेटियां अस्पताल में भर्ती


    ग्वालियर । ग्वालियर के डबरा में बुधवार रात बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। जंगीपुरा इलाके में एक जर्जर दो मंजिला कच्चे मकान की छत अचानक भरभराकर नीचे गिर गई। उस समय परिवार के पांच सदस्य घर के अंदर मौजूद थे और सो रहे थे। छत का मलबा सीधे उनके ऊपर जा गिरा जिससे सभी लोग उसमें दब गए। हादसे की तेज आवाज सुनकर आसपास रहने वाले लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से मलबा हटाकर सभी को बाहर निकाला गया।
    हादसे के बाद घायलों को तत्काल डबरा सिविल अस्पताल ले जाया गया। रास्ते में दो साल के आदित्य रजक उर्फ गुन्नू ने दम तोड़ दिया। उसकी मां सीमा को भी गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं परिवार के मुखिया जागेंद्र रजक उम्र 38 वर्ष और उनकी बेटियां वैशाली उम्र 5 वर्ष तथा रागनी उम्र 8 वर्ष गंभीर रूप से घायल हैं। प्राथमिक उपचार के बाद तीनों को बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर किया गया है।

    हादसे की सूचना मिलते ही परिवार के रिश्तेदार और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग अस्पताल पहुंच गए। इसी दौरान परिजनों और पड़ोसियों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा किया। पड़ोसी वीरू रजक का दावा है कि जब सीमा को अस्पताल लाया गया था तब उनकी सांसें चल रही थीं। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर बेहतर उपचार मिलता तो शायद सीमा की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि इलाज में लापरवाही के आरोपों की आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

    अस्पताल में हंगामे की जानकारी मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। एसडीएम नवकिरण कौर एसडीओपी सौरभ कुमार और तहसीलदार नवीन भारद्वाज ने अस्पताल पहुंचकर परिवार से मुलाकात की। अधिकारियों ने परिजनों को मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। साथ ही परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता दिलाने की बात भी कही गई।

    बताया जा रहा है कि रजक परिवार करीब 15 साल से इसी मकान में किराए पर रह रहा था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। जागेंद्र ग्वालियर की एक जूता फैक्ट्री में काम करते थे और रोजाना ट्रेन से आना जाना करते थे। उनकी पत्नी सीमा घरों में झाड़ू पोंछा लगाने का काम करती थीं। लंबे समय से जर्जर हालत में रह रहे मकान की छत आखिरकार बारिश के दौरान परिवार पर ही कहर बनकर टूट पड़ी।

    इस हादसे में परिवार की दो बेटियां नैंसी और गौरी सुरक्षित बच गईं। हादसे के समय दोनों अपने चाचा राघवेंद्र रजक के घर पर थीं। अगर वे भी उसी मकान में मौजूद होतीं तो हादसे का असर और भयावह हो सकता था।

    बारिश के मौसम में जर्जर मकानों को लेकर लगातार खतरा बना रहता है। डबरा की यह घटना एक बार फिर ऐसे मकानों की सुरक्षा जांच और कमजोर परिवारों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब प्रशासनिक जांच के साथ अस्पताल में लगाए गए आरोपों की जांच का इंतजार है। वहीं परिवार के लिए यह हादसा ऐसा दुख छोड़ गया है जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी।

  • 120 करोड़ के बेशकीमती गहनों से होगा राधा-कृष्ण का श्रृंगार लॉकर से निकलेंगे अनमोल मोती पन्ने और हीरे

    120 करोड़ के बेशकीमती गहनों से होगा राधा-कृष्ण का श्रृंगार लॉकर से निकलेंगे अनमोल मोती पन्ने और हीरे


    ग्वालियर । ग्वालियर के ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में इस बार जन्माष्टमी का उत्सव बेहद खास होने जा रहा है। 4 सितंबर को भगवान राधा-कृष्ण का राजसी श्रृंगार बेशकीमती सोने चांदी हीरे मोती और पन्नों से जड़े आभूषणों से किया जाएगा। इन आभूषणों की कुल कीमत 120 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। साल में चुनिंदा विशेष अवसरों पर ही बैंक लॉकर से बाहर निकाले जाने वाले इन गहनों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इस बार करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    जन्माष्टमी के दिन सुबह करीब 10 बजे आभूषणों को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के लॉकर से निकालने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए नगर निगम आयुक्त की ओर से गठित विशेष समिति बैंक पहुंचेगी। सुरक्षा व्यवस्था के बीच आभूषणों को मंदिर तक लाया जाएगा। मंदिर पहुंचने के बाद सभी गहनों की सफाई की जाएगी और इसके बाद इन्हें भगवान राधा-कृष्ण के श्रृंगार में शामिल किया जाएगा।

    गोपाल मंदिर में रखे इन आभूषणों की खासियत सिर्फ उनकी कीमत नहीं बल्कि उनका ऐतिहासिक और कलात्मक महत्व भी है। भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार में सोने का मुकुट शामिल किया जाता है जिसमें पुखराज माणिक और पन्ने जैसे कीमती रत्न जड़े हैं। वहीं राधारानी का करीब तीन तोला वजन का रत्नजड़ित मुकुट भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहता है।

    इन आभूषणों में सबसे ज्यादा चर्चा सात लड़ियों वाले उस हार की होती है जिसमें 62 असली मोती और 55 पन्ने जड़े हुए हैं। इस हार की कीमत करीब 35 करोड़ रुपए आंकी गई है। इसके अलावा रत्नजड़ित मुकुट की कीमत करीब 25 करोड़ रुपए बताई जाती है। भगवान के श्रृंगार में शामिल सोने के मुकुट की कीमत भी करीब 1.25 करोड़ रुपए बताई गई है। अलग अलग आभूषणों में जड़े कीमती रत्न इस पूरे श्रृंगार को और भव्य बना देते हैं।

    जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर की सजावट भी खास अंदाज में की जाएगी। गोपाल मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाने के साथ फूल बंगला और रंगोली तैयार की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परिसर में एलईडी स्क्रीन भी लगाई जाएंगी। इन स्क्रीन के जरिए भगवान के दर्शन का लाइव प्रसारण किया जाएगा ताकि भीड़ के कारण सभी श्रद्धालुओं को गर्भगृह तक पहुंचने में परेशानी न हो।

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। मंदिर में पुलिसकर्मियों की तैनाती रहेगी और सीसीटीवी कैमरों से पूरे परिसर पर नजर रखी जाएगी। श्रद्धालुओं के आने और जाने के लिए अलग अलग व्यवस्था रखने की तैयारी है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

    गोपाल मंदिर का इतिहास भी बेहद खास है। इस मंदिर का निर्माण सिंधिया राजवंश की महारानी बैजाबाई ने वर्ष 1843 में कराया था। सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर की वास्तुकला में मराठा शैली के साथ यूरोपीय प्रभाव भी नजर आता है। मंदिर के गर्भगृह में चांदी से मढ़े दरवाजे इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।

    जन्माष्टमी पर जब इन दुर्लभ आभूषणों से राधा-कृष्ण का श्रृंगार होगा तो गोपाल मंदिर में राजसी परंपरा और धार्मिक आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। यही वजह है कि इस विशेष दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है।

  • NHAI सड़क की खुलेगी पोल! हाईकोर्ट के निर्देश पर JCB से लिए गए सैंपलों की होगी जांच

    NHAI सड़क की खुलेगी पोल! हाईकोर्ट के निर्देश पर JCB से लिए गए सैंपलों की होगी जांच


    ग्वालियर । ग्वालियर में लगातार खराब हो रही सड़कों को लेकर उठ रहे सवाल अब नेशनल हाईवे तक पहुंच गए हैं। शहर में एक साल के भीतर 12 से ज्यादा सड़कें धंसने और कई मार्गों की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम ने आगरा मुंबई हाईवे के एक हिस्से की गहन जांच शुरू की। गुरुवार को टीम की मौजूदगी में मेहरा टोल प्लाजा और सिकरौदा चौराहे के बीच सड़क को जेसीबी की मदद से खुदवाया गया। सड़क की ऊपरी सतह हटाने के बाद अलग अलग परतों से डामर गिट्टी और बेस मटेरियल के नमूने लिए गए हैं।

    इन नमूनों को अब प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों के मुताबिक सामग्री का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। इसके साथ ही डामर की मात्रा गिट्टी की गुणवत्ता सड़क की अलग अलग परतों की मजबूती और कॉम्पैक्शन जैसे तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जाएगी। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क निर्माण में कहीं गुणवत्ता से समझौता तो नहीं किया गया।

    हाईकोर्ट के निर्देश पर नेशनल हाईवे की सड़क को मौके पर खुदवाकर उसकी वास्तविक स्थिति जांचने की यह कार्रवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे सरकारी दस्तावेजों में दर्ज तकनीकी जानकारी का जमीन पर हुए निर्माण से मिलान किया जा सकेगा। जांच टीम की निगरानी में सड़क की परतें हटाई गईं और जरूरी स्थानों से सैंपल लिए गए। इससे केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर गुणवत्ता का आकलन करने के बजाय वास्तविक निर्माण की स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

    मामला शहर की खराब सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने सड़कों के बार बार धंसने गड्ढों और निर्माण गुणवत्ता को लेकर याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विभागीय रिपोर्टों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद वकीलों और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करते हुए चार सदस्यीय विशेष टीम बनाई गई।

    यह टीम इससे पहले ग्वालियर की कई प्रमुख सड़कों का निरीक्षण कर चुकी है। विक्की फैक्ट्री से झांसी रोड चेतकपुरी से सिंधिया महल गेट और चेतकपुरी से एजी ऑफिस पुल मार्ग समेत कई हिस्सों में सड़क की स्थिति डामर की मोटाई और क्षति का परीक्षण किया गया। 19 अगस्त को गुढ़ी गुढ़ा का नाका और बेटी बचाओ चौराहे के आसपास से भी कोर सैंपल लिए गए थे।

    जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सैंपलिंग की लोकेशन पहले से सार्वजनिक नहीं की जा रही है। सड़क का चयन सैंपल लेने से कुछ समय पहले किया जाता है ताकि संबंधित निर्माण एजेंसी को पहले से तैयारी करने का अवसर न मिले। टीम इससे पहले लेजर कैमरों और आधुनिक उपकरणों की मदद से सड़कों की हाईटेक स्कैनिंग भी कर चुकी है। इससे सड़क की सतह समतलीकरण और डामर की स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया।

    अब नेशनल हाईवे से लिए गए सैंपलों की जांच पीडब्ल्यूडी की केंद्रीय परीक्षण प्रयोगशाला ग्वालियर में की जाएगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद हाईकोर्ट के समक्ष तथ्य रखे जाएंगे। इसके बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और यदि कोई तकनीकी अनियमितता सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

  • बरगी बांध 93% भरा, 5 गेट एक मीटर तक खोले गए, नर्मदा का जलस्तर बढ़ने के आसार

    बरगी बांध 93% भरा, 5 गेट एक मीटर तक खोले गए, नर्मदा का जलस्तर बढ़ने के आसार

    जबलपुर। मंडला, डिंडौरी और अमरकंटक क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश का असर बरगी बांध के जलस्तर पर दिखाई दे रहा है। जबलपुर जिले में औसत से कम बारिश के बावजूद बांध में पानी की आवक लगातार बनी हुई है। बुधवार को बरगी बांध का जलस्तर 421.85 मीटर और जलभराव 93.33 प्रतिशत पहुंच गया। पानी की लगातार आवक को देखते हुए गुरुवार सुबह 11 बजे बांध के पांच गेट करीब एक-एक मीटर तक खोले गए। इनसे करीब 760 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है।

    गेट खोले जाने से पहले बरगी बांध प्रबंधन और जिला प्रशासन ने नर्मदा नदी के घाटों और आसपास के निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है। प्रबंधन के मुताबिक पानी छोड़े जाने के बाद नर्मदा के घाटों पर जलस्तर करीब 3 से 4 फीट तक बढ़ सकता है। लोगों से नदी और घाटों के आसपास सावधानी बरतने की अपील की गई है।

    बांध में 707 क्यूमेक पानी की आवक
    बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार 2 सितंबर की सुबह 8 बजे बांध में 707 क्यूमेक पानी की आवक दर्ज की गई थी। बारिश, मौसम के पूर्वानुमान और आगामी दिनों में संभावित जल आवक को देखते हुए पांच जलद्वार करीब एक मीटर तक खोले गए हैं। फिलहाल बांध से करीब 760 क्यूमेक पानी की निकासी की जा रही है।

    आवक के हिसाब से बदलेगी पानी छोड़ने की मात्रा
    प्रबंधन का कहना है कि बांध में वास्तविक जल आवक और जलस्तर की स्थिति के आधार पर पानी की निकासी की मात्रा में बदलाव किया जा सकता है। लगातार पानी की आवक बनी रहने पर आने वाले दिनों में गेटों से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा बढ़ाई या घटाई जा सकती है।

    प्रशासन और बांध प्रबंधन ने नर्मदा के घाटों तथा निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेष रूप से नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों से घाटों के आसपास जाने से बचने की अपील की गई है।

  • पोस्टमार्टम हाउस भी चोरों से नहीं बचा: शिवपुरी में कंप्रेसर और कॉपर केबल चोरी, पुलिस से शिकायत

    पोस्टमार्टम हाउस भी चोरों से नहीं बचा: शिवपुरी में कंप्रेसर और कॉपर केबल चोरी, पुलिस से शिकायत


    शिवपुरी ।
    शिवपुरी जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में चोरी की एक गंभीर घटना सामने आई है। अज्ञात चोरों ने उस जगह को निशाना बनाया जहां शवों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। चोर दो शव रखने वाले फ्रीजरों से कंप्रेसर, कॉपर पाइप और कॉपर केबल निकालकर ले गए। इसके साथ ही स्टेबलाइजर से जुड़ा सामान भी चोरी होने की जानकारी सामने है। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया और पोस्टमार्टम हाउस की महत्वपूर्ण व्यवस्था प्रभावित होने से चिंता बढ़ गई है।

    अस्पताल प्रबंधन के अनुसार पोस्टमार्टम हाउस में रखे दोनों फ्रीजरों को चोरों ने निशाना बनाया। फ्रीजरों में लगे कंप्रेसर और कॉपर से जुड़े जरूरी उपकरण गायब मिले। चोरी की वजह से शवों को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होने वाली फ्रीजर व्यवस्था प्रभावित हुई है। जब इस घटना की जानकारी अस्पताल के अधिकारियों तक पहुंची तो मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू कराई गई।

    पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद नोडल अधिकारी और को नोडल अधिकारी ने चोरी की घटना की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को दी। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस तक पहुंचाई गई। सिविल सर्जन एवं मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. रामप्रताप सिंह चौहान ने सिटी कोतवाली पुलिस को पत्र लिखकर अज्ञात चोरों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। अस्पताल प्रबंधन ने चोरी हुए सामान और फ्रीजरों को हुए नुकसान की जानकारी भी पुलिस को उपलब्ध कराई है।

    मामले में फरियादी आयुष खरे के आवेदन और अस्पताल प्रबंधन की शिकायत के आधार पर सिटी कोतवाली पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 305 ए के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आयुष खरे पोस्टमार्टम हाउस के पास शिवपुरी के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस अब चोरी की पूरी घटना की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि चोर पोस्टमार्टम हाउस तक कैसे पहुंचे और उन्होंने कब इस वारदात को अंजाम दिया।

    पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों की पहचान करना है। इसके लिए पोस्टमार्टम हाउस और जिला अस्पताल परिसर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा सकती है। साथ ही चोरी हुए कॉपर पाइप, कॉपर केबल और अन्य सामान की बरामदगी के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी की घटना में एक व्यक्ति शामिल था या फिर किसी गिरोह ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया।

    पोस्टमार्टम हाउस जैसी संवेदनशील जगह पर चोरी की घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शवों को सुरक्षित रखने वाले फ्रीजरों से जरूरी उपकरण चोरी होने के कारण अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • NH-46 पर एक रात में 7 गौवंश की मौत तेज रफ्तार ट्रकों ने 9 को कुचला

    NH-46 पर एक रात में 7 गौवंश की मौत तेज रफ्तार ट्रकों ने 9 को कुचला


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के बदरवास थाना क्षेत्र से होकर गुजरने वाला NH-46 बुधवार रात गौवंश के लिए बेहद दर्दनाक साबित हुआ। हाईवे पर अलग-अलग स्थानों पर हुए दो सड़क हादसों में तेज रफ्तार ट्रकों की चपेट में आने से कुल 9 गौवंश हादसे का शिकार हो गए। इनमें से 7 गौवंश की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो घायल बताए जा रहे हैं। लगातार हुए इन हादसों के बाद इलाके में गौवंश की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    पहला हादसा सुमेला बायपास के ओवरब्रिज पर हुआ। बताया जा रहा है कि यहां सड़क किनारे चार गौवंश मौजूद थे। इसी दौरान शिवपुरी से गुना की ओर जा रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तीन गौवंश ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। एक गौवंश गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद हाईवे पर कुछ समय के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    घटना की जानकारी मिलते ही सनातनी गो सेवा समिति की टीम मौके पर पहुंची। टीम के सदस्यों ने घायल गौवंश को संभाला और उसका उपचार कराया। साथ ही सड़क पर पड़े मृत गौवंश को हटाकर सुरक्षित स्थान पर किया गया ताकि हाईवे पर आने जाने वाले दूसरे वाहनों के लिए खतरा न बना रहे।

    इसी रात दूसरा हादसा ईश्वरी ओवरब्रिज पर हुआ। यहां गुना से शिवपुरी की ओर जा रहे एक ट्रक ने सड़क पर मौजूद पांच गौवंश को अपनी चपेट में ले लिया। इस दुर्घटना में चार गौवंश की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक घायल हो गया। एक ही रात में कुछ ही दूरी के अंतर पर हुए दोनों हादसों ने हाईवे पर गौवंश की मौजूदगी और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    ईश्वरी ओवरब्रिज पर हादसे की सूचना मिलने के बाद भी सनातनी गो सेवा समिति की टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने घायल गौवंश को इलाज उपलब्ध कराया और मृत गौवंश को सड़क से हटाकर किनारे किया। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि हाईवे पर आवारा या खुले में घूमने वाले गौवंश रात के समय तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ जाते हैं।

    NH-46 जैसे व्यस्त हाईवे पर वाहनों की रफ्तार काफी अधिक रहती है। ऐसे में सड़क पर अचानक गौवंश आ जाने से चालक के लिए वाहन नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। इससे न केवल गौवंश की जान को खतरा रहता है बल्कि वाहन सवार लोगों के लिए भी गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

    बुधवार रात हुए दोनों हादसों में कुल 9 गौवंश की चपेट में आने की जानकारी सामने आई है। इनमें 7 की मौत हो चुकी है जबकि दो घायल हैं। घटना के बाद गो सेवा समिति की सक्रियता से घायल पशुओं को समय पर उपचार मिल सका। हालांकि एक ही रात में सात गौवंश की मौत ने हाईवे पर पशुओं की सुरक्षा के इंतजामों और तेज रफ्तार वाहनों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे हादसों को रोकने के लिए हाईवे के संवेदनशील हिस्सों पर विशेष निगरानी और पशुओं को सड़क से दूर रखने के इंतजाम जरूरी माने जा रहे हैं।

  • अब टोल पर नहीं लगेगा जाम: फंदा टोल प्लाजा पर हाईटेक सिस्टम एक्टिव, कैमरे-सेंसर पहचानेंगे गाड़ी और खुद कट जाएगा टैक्स

    अब टोल पर नहीं लगेगा जाम: फंदा टोल प्लाजा पर हाईटेक सिस्टम एक्टिव, कैमरे-सेंसर पहचानेंगे गाड़ी और खुद कट जाएगा टैक्स


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सड़क परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भोपाल-देवास रोड पर स्थित फंदा टोल प्लाजा में पहली बार बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम का ट्रायल शुरू कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और गाड़ियां तेज रफ्तार से टोल क्षेत्र पार कर सकेंगी। बताया जा रहा है कि वाहन करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से भी टोल लेन से गुजर सकते हैं और इस दौरान फास्टैग के माध्यम से टोल शुल्क अपने आप कट जाएगा। फिलहाल इस हाईटेक व्यवस्था को एक लेन में परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया है। यदि ट्रायल सफल रहता है तो 1 जनवरी 2027 से भोपाल-देवास मार्ग के तीनों टोल प्लाजा की सभी लेनों में इस तकनीक को लागू करने की योजना बनाई गई है।

    नई टोल व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि यहां पारंपरिक बूम बैरियर नहीं होगा। अभी तक टोल प्लाजा पर पहुंचते ही वाहन को धीमा करना पड़ता है और फास्टैग स्कैन होने के बाद बैरियर खुलने का इंतजार करना पड़ता है। लेकिन बैरियर-लेस सिस्टम में यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से होगी। टोल लेन पर लगाए गए आधुनिक फास्टैग रीडर वाहन की पहचान करेंगे जबकि कैमरे और सेंसर वाहन का नंबर और उसकी श्रेणी का पता लगाएंगे। इसके बाद वाहन की कैटेगरी के अनुसार टोल शुल्क तय होगा और फास्टैग खाते से राशि स्वतः कट जाएगी।

    इस तकनीक से सबसे बड़ा फायदा वाहन चालकों को समय की बचत के रूप में मिलेगा। टोल प्लाजा पर लंबी कतारों और बार-बार रुकने की समस्या कम होगी। वाहनों को ब्रेक लगाने और फिर दोबारा गति बढ़ाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी जिससे पेट्रोल और डीजल की खपत में कमी आने की संभावना है। लगातार चलने वाले ट्रैफिक से सड़क पर जाम की स्थिति भी कम होगी और यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम बन सकेगी।

    यदि किसी वाहन के फास्टैग में पर्याप्त राशि नहीं है या वाहन नंबर की जानकारी में कोई तकनीकी समस्या सामने आती है तो सिस्टम इसके लिए भी डिजिटल विकल्प देगा। ऐसी स्थिति में वाहन मालिक को ई-चालान भेजा जाएगा और उसे तय समय के भीतर टोल राशि जमा करनी होगी। तीन दिन के अंदर भुगतान नहीं करने पर जुर्माने के साथ राशि वसूली जा सकती है।

    बैरियर-लेस टोलिंग व्यवस्था से टोल संचालन में कर्मचारियों पर निर्भरता भी कम होगी और पूरी प्रक्रिया अधिक डिजिटल और स्वचालित बनेगी। यूरोप और जर्मनी समेत कई देशों में ऐसी तकनीक का उपयोग पहले से किया जा रहा है और अब मध्यप्रदेश भी आधुनिक टोल प्रबंधन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। फंदा टोल पर शुरू हुआ यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले समय में राज्य के अन्य प्रमुख मार्गों पर भी बिना रुके डिजिटल टोल भुगतान की व्यवस्था देखने को मिल सकती है।

  • भोपाल में सीलिंग ने बढ़ाया सियासी और कारोबारी पारा: सड़क पर व्यापारी, पुलिस से भिड़ंत, शहरव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    भोपाल में सीलिंग ने बढ़ाया सियासी और कारोबारी पारा: सड़क पर व्यापारी, पुलिस से भिड़ंत, शहरव्यापी आंदोलन की चेतावनी


    भोपाल । भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई ने मंगलवार को एक बार फिर व्यापारियों के गुस्से को भड़का दिया। शहर में सुबह से शुरू हुई कार्रवाई के बाद भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के बैनर तले बड़ी संख्या में व्यापारी सड़कों पर उतर आए और सीलिंग अभियान को तुरंत बंद करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब व्यापारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने के लिए सीएम हाउस की ओर बढ़ने लगे और पुलिस ने उन्हें रोशनपुरा चौराहे के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

    नगर निगम की टीम ने मंगलवार सुबह करीब 9 बजे से रहवासी क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। कोहेफिजा क्षेत्र में चाय लीला कैफे सहित होटल बुक शॉप और बेकरी जैसे प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। कार्रवाई की सूचना मिलते ही कई व्यापारियों और प्रतिष्ठान संचालकों में नाराजगी फैल गई। कुछ संचालकों ने निगम की कार्रवाई से पहले ही अपने प्रतिष्ठान स्वेच्छा से बंद कर दिए लेकिन व्यापारिक संगठनों ने इसे कारोबारियों के लिए बड़ी परेशानी बताते हुए विरोध का फैसला किया।

    सुबह करीब 11 बजे बड़ी संख्या में व्यापारी न्यू मार्केट स्थित नानके पेट्रोल पंप के पास एकत्र हुए और वहां से मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च शुरू किया। व्यापारियों का कहना था कि वे सरकार तक अपनी मांग पहुंचाना चाहते हैं और सीलिंग की कार्रवाई बंद करने के साथ शहर में मास्टर प्लान लागू करने की मांग कर रहे हैं। जैसे ही प्रदर्शनकारी रोशनपुरा चौराहे के पास पहुंचे पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उनका रास्ता रोक दिया। इसके बाद कुछ व्यापारियों ने बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्कामुक्की की स्थिति बन गई। इस दौरान कुछ व्यापारी नीचे गिर गए हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली।

    प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने तानाशाही बंद करो के नारे लगाकर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। कई व्यापारी सशक्त आवाज व्यापारियों की आवाज लिखे बैनर पहनकर प्रदर्शन में पहुंचे। विरोध को अलग तरीके से दर्ज कराने के लिए व्यापारियों ने सरकार की सद्बुद्धि के लिए थाली शंख और डमरू भी बजाए। मौके पर मौजूद ACP अखिल पटेल ई रिक्शा पर चढ़कर व्यापारियों को समझाने और स्थिति को शांत करने की कोशिश करते नजर आए लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।

    भोपाल व्यापारी महासंघ संघर्ष समिति के अध्यक्ष नवीन सोनी ने कहा कि व्यापारी सरकार तक अपना ज्ञापन पहुंचाने आए हैं और उनकी सबसे बड़ी मांग सीलिंग की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को राहत देते हुए शहर में मास्टर प्लान लागू किया जाना चाहिए ताकि वर्षों से संचालित कारोबारियों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा न हो। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि अभी प्रदर्शन में भोपाल के केवल 10 प्रतिशत व्यापारी ही शामिल हुए हैं। यदि सीलिंग की कार्रवाई जारी रही तो शहर के सभी व्यापारी एकजुट होकर बड़ा आंदोलन करेंगे और पूरे भोपाल में विरोध तेज किया जाएगा।

    सीलिंग कार्रवाई को लेकर बढ़ता विरोध अब नगर निगम और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एक ओर निगम नियमों के तहत कार्रवाई जारी रखे हुए है तो दूसरी ओर व्यापारी इसे अपने कारोबार और भविष्य पर संकट बता रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन इस विवाद का क्या समाधान निकालते हैं इस पर अब पूरे शहर की नजर बनी हुई है।