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  • शिवपुरी में आदिवासियों का मतांतरण कराने का मामलाहिंदू संगठनों के विरोध के बाद प्रशासन ने ढहाया अवैध चर्च

    शिवपुरी में आदिवासियों का मतांतरण कराने का मामलाहिंदू संगठनों के विरोध के बाद प्रशासन ने ढहाया अवैध चर्च


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के बदरवास तहसील के कुछ गांवों में आदिवासी और भील परिवारों का कथित रूप से मतांतरण कराकर उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित किया जा रहा था। यह मामला तब सामने आया जब हिंदू संगठनों ने इसकी सूचना पुलिस और प्रशासन को दी। इन संगठनों का आरोप है कि यह प्रक्रिया अवैध तरीके से की जा रही थी और इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी।

    हिंदू संगठनों की सक्रियता और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
    हिंदू संगठनों ने गुढाल डांग गांव में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और प्रशासन को इस बारे में सूचित किया। पुलिस वन विभाग और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर वहां बन रहे एक चर्च को देखा जो अवैध रूप से निर्माणाधीन था। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस चर्च को ढहा दिया और इसके निर्माण से जुड़े लोगों के खिलाफ जांच शुरू कर दी।

    कथित मतांतरण और प्रशासन की भूमिका

    इस मामले में हिंदू संगठनों का कहना है कि आदिवासी और भील परिवारों को विभिन्न लालच देकर ईसाई धर्म में परिवर्तित किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार के गतिविधियां समाज में अस्थिरता और धार्मिक तनाव उत्पन्न कर सकती हैं। पुलिस और प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की और यह सुनिश्चित किया कि ऐसे किसी भी अवैध धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा न मिले।

    प्रशासन की ओर से कदम उठाए गए

    प्रशासन ने इस मामले में गंभीरता दिखाई और अवैध चर्च को ढहाने के साथ-साथ मामले की पूरी जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भी व्यक्ति या समूह ने इस प्रकार की गतिविधि की है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इस इलाके में किसी तरह का धार्मिक विवाद उत्पन्न न हो और शांति बनाए रखी जाए।

    शिवपुरी जिले के बदरवास तहसील में आदिवासी और भील परिवारों के कथित मतांतरण के मामले ने एक बार फिर से धार्मिक असहमति और समाज में सद्भाव बनाए रखने की आवश्यकता को उजागर किया है। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध चर्च को ढहा दिया है और अब मामले की जांच चल रही है। यह घटना इस बात का संदेश देती है कि किसी भी अवैध गतिविधि के खिलाफ प्रशासन सख्त कदम उठाएगा और समाज में शांति बनाए रखने के लिए कार्य करेगा।

  • पत्नी की हत्या के बाद गूगल सर्च हिस्ट्री से खुलासा पति को उम्रकैद की सजा

    पत्नी की हत्या के बाद गूगल सर्च हिस्ट्री से खुलासा पति को उम्रकैद की सजा


    रतलाम । मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में पत्नी की गला दबाकर हत्या करने के एक मामले में कोर्ट ने गूगल सर्च हिस्ट्री को अहम साक्ष्य मानते हुए पति राकेश गायरी को आजीवन कारावास और तीन हजार रुपये की जुर्माना सजा सुनाई है। रतलाम की प्रधान सत्र न्यायाधीश निना आशापुरे ने यह फैसला सुनाया जिसमें गूगल पर सर्च किए गए ‘गला दबाने के निशान मिटाने की क्रीम’ के बारे में जानकारी को महत्वपूर्ण सबूत माना गया।

    पति और पत्नी के बीच विवाद

    जिला लोक अभियोजक सुरेश कुमार वर्मा ने बताया कि मृतका बुलबुल और उसके पति राकेश के बीच अक्सर घरेलू विवाद होता था। बुलबुल को राकेश का आदत से शराब पीना और देर रात घर लौटने की आदत बिल्कुल भी पसंद नहीं थी। यही विवाद राकेश और बुलबुल के रिश्ते में तनाव का कारण बनता था। शराब पीने को लेकर बार-बार विवाद होने के बाद राकेश ने एक दिन गुस्से में आकर बुलबुल के साथ मारपीट की और फिर उसे गला दबाकर हत्या कर दी।

    गूगल सर्च हिस्ट्री से खुला सच

    हत्या के बाद राकेश ने पत्नी के शरीर पर गला दबाने के निशान मिटाने के लिए गूगल पर “गला दबाने के निशान मिटाने की क्रीम” की तलाश की। यह सर्च उसकी गहरी चिंता को दर्शाता था क्योंकि वह हत्या के बाद निशान को छिपाना चाहता था। यही सर्च हिस्ट्री अदालत में महत्वपूर्ण साक्ष्य बनी जिससे राकेश की अपराध में संलिप्तता साबित हुई। इस साक्ष्य के आधार पर उसे सजा सुनाई गई।

    कोर्ट का फैसला और सजा

    कोर्ट ने राकेश को गूगल सर्च हिस्ट्री शव पर पाई गई चोटों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराया। उसे आजीवन कारावास की सजा दी गई और साथ ही 3000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। यह फैसला घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश देता है। इस मामले में कोर्ट ने तकनीकी साक्ष्यों के महत्व को भी स्वीकार किया जो आजकल के समय में अपराधों की जांच में अहम भूमिका निभाते हैं। गूगल सर्च हिस्ट्री और अन्य डिजिटल साक्ष्य अब अपराधों को उजागर करने में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं जैसे कि इस मामले में हुआ।

    रतलाम में पत्नी की गला दबाकर हत्या करने के आरोपी राकेश को गूगल सर्च हिस्ट्री के आधार पर सजा मिलना इस बात का उदाहरण है कि कैसे डिजिटल साक्ष्य अब अपराधियों को पकड़ने में अहम साबित हो रहे हैं। यह घटना घरेलू हिंसा के खिलाफ कानून के सख्त कदमों और तकनीकी सहायता से जांच के महत्व को उजागर करती है।

  • मध्य प्रदेश जावरा में कुरान जलाने पर बवाल महिला पर आरोप मुस्लिम समुदाय ने किया सड़क पर विरोध

    मध्य प्रदेश जावरा में कुरान जलाने पर बवाल महिला पर आरोप मुस्लिम समुदाय ने किया सड़क पर विरोध


    रतलाम । मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के जावरा में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है जिसमें मुस्लिम समुदाय की पवित्र धार्मिक किताब कुरान को जलाने का आरोप एक रिटायर्ड शिक्षिका पर लगा है। घटना के बाद मुस्लिम समाज में आक्रोश फैल गया और इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार यह घटना गुरुवार दोपहर 1 बजे के आसपास हुई जब रिटायर्ड शिक्षिका अतिया खान अपने घर में पुरानी किताबों को जला रही थीं। उनका दावा है कि उनके पास बहुत सी पुरानी किताबें थीं और उन्होंने इन किताबों को जलाने का फैसला किया। इस दौरान उसने दावा किया कि उसे यह नहीं पता था कि किताबों के ढेर में कुरान शरीफ की एक पुरानी प्रति भी थी।

    हालांकि वहां मौजूद कुछ लोगों ने जलती हुई किताबों में कुरान को पहचान लिया। बाद में इन्हीं लोगों ने मुस्लिम समुदाय को इस घटना के बारे में सूचित किया। मुस्लिम समाज के लोग तुरंत जावरा औद्योगिक क्षेत्र थाना पहुंचे और कार्रवाई की मांग की लेकिन पुलिस की ओर से समय पर कोई कार्रवाई न होने पर गुस्साए लोग सड़क पर उतर आए और थाने का घेराव किया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब महिला ने कुरान को जलते देखा तो वह उसे लेकर भाग गई। एक शख्स ने कुरान की आग बुझाई और उसके अवशेष को संरक्षित कर लिया। इसके बाद मुस्लिम समुदाय ने पुलिस से शिकायत की और आरोप लगाया कि पुलिस ने घटना के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    रतलाम जिले के एएसपी राकेश खाखा ने मामले की जानकारी दी और बताया कि आरोपी महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और निष्पक्ष तरीके से पूरे मामले की जांच की जाएगी।

    विरोध प्रदर्शन के दौरान मुस्लिम समुदाय ने सख्त कार्रवाई की मांग की और आरोपी के खिलाफ जल्द से जल्द कानूनी कार्रवाई की अपील की। पुलिस इस मामले में जल्द से जल्द निष्कर्ष पर पहुंचने का वादा कर रही है ताकि दोनों समुदायों के बीच शांति बनी रहे।

  • देवास में हनीट्रैप दोस्ती का बहाना बनाकर युवती ने युवक को ब्लैकमेल किया लाखों रुपये और जमीन का हिस्सा मांगा

    देवास में हनीट्रैप दोस्ती का बहाना बनाकर युवती ने युवक को ब्लैकमेल किया लाखों रुपये और जमीन का हिस्सा मांगा


    देवास । मध्य प्रदेश के देवास जिले में एक सनसनीखेज हनीट्रैप मामला सामने आया है जिसमें युवती ने दोस्ती के बहाने युवक को प्रेम जाल में फंसाया और फिर उसके आपत्तिजनक वीडियो बनाकर लाखों रुपये और जमीन के हिस्से की मांग की। यह मामला देवास शहर के नहार दरवाजा थाना क्षेत्र का है जहां युवक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    पीड़ित युवक भावेश ठाकुर ने बताया कि आरोपी युवती परिधि नामदेव ने पहले दोस्ती का झांसा दिया और बाद में उसे शराब पिलाकर उसकी आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बना लिए। इसके बाद परिधि ने उसे लगातार ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। आरोप है कि युवती ने युवक से शाही जिंदगी जीने का दबाव बनाया और उसे पैसे व जमीन का आधा हिस्सा देने की धमकी दी।

    जब युवक मानसिक रूप से परेशान हुआ तो उसने अपनी शिकायत और ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ पुलिस की मदद ली। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(6) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। जांच में यह भी सामने आया कि परिधि नामदेव पहले भी ऐसे मामलों में शामिल रही है और पुलिस उसकी पुरानी रिकॉर्ड भी खंगाल रही है।

    देवास के एडिशनल एसपी जयवीर सिंह भदोरिया ने पुष्टि की कि आरोपी के खिलाफ पहले भी एक मामला दर्ज है और फिलहाल पुलिस पूरी गंभीरता से मामले की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि कैसे प्रेम और दोस्ती के बहाने से लोगों को जाल में फंसाकर शारीरिक और मानसिक रूप से शोषण किया जा रहा है। पुलिस अब यह देखेगी कि इस मामले में आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोका जा सके।

  • पक्की नौकरी और पगार बढ़ाने का झासा…; एएसआई पर महिला ने लगाए दुष्कर्म के आरोप

    पक्की नौकरी और पगार बढ़ाने का झासा…; एएसआई पर महिला ने लगाए दुष्कर्म के आरोप


    हरदा । मध्य प्रदेश के हरदा जिले में एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है जिसमें एक यातायात थाने में पदस्थ एएसआई पर अपनी ही घर में काम करने वाली महिला के साथ दुष्कर्म करने और उसे धमकाने का आरोप लगा है। यह मामला उस समय सामने आया जब पीड़िता ने स्थानीय सिविल लाइन थाने में एएसआई के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता का आरोप है कि वह पिछले दो सालों से एएसआई के घर पर घरेलू कामकाजी झाड़ू-पोछा का काम कर रही थी और इस दौरान आरोपी ने उसे नौकरी और पगार बढ़ाने का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए।

    शोषण का आरोप

    पीड़िता के अनुसार एएसआई सुरेंद्र मालवीय ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और जब उसने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उसे जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया और जान से मारने की धमकी दी। इस मामले ने पूरे हरदा जिले में गहरी चिंता और आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। यह घटना दिखाती है कि जब कानून के रखवाले खुद मर्यादा लांघने लगें तो आम जनता से न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

    पुलिस कार्रवाई

    पुलिस ने पीड़िता की शिकायतa पर तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी एएसआई के खिलाफ भारतीय दंड संहिता IPC और अनुसूचित जाति-जनजाति एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। हरदा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ASP अमित कुमार मिश्रा ने इस घटना की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि अपराध क्रमांक 410/25 के तहत धारा 69 गलत तरीके से संबंध बनाना 351 धमकाना बीएनएस और SC-ST एक्ट की धारा 3(2)(v) 3(2)(V-A) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    आरोपी एएसआई का बयान

    इस मामले में पुलिस के द्वारा कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन आरोपों को लेकर एएसआई सुरेंद्र मालवीय की स्थिति पर अब तक कोई सफाई सामने नहीं आई है। ऐसे मामलों में आमतौर पर आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ता है। इस मामले में भी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पुलिस पूरी तरह से तत्पर दिखाई दे रही है।

    शोषण और असुरक्षा का माहौल

    यह मामला सिर्फ एक महिला के साथ हुए शारीरिक शोषण का नहीं है बल्कि इसने समाज में महिलाओं की असुरक्षा और उनके शोषण की समस्याओं को उजागर किया है। जब एक सरकारी कर्मचारी जो लोगों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने का जिम्मेदार होता है खुद ऐसी घटनाओं का हिस्सा बने तो यह समाज में भय और असुरक्षा की भावना को और बढ़ावा देता है।

    समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी

    इस मामले ने प्रशासन और समाज के लिए गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या ऐसे मामलों में सख्त और प्रभावी कार्रवाई हो रही है? क्या महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर समाज और प्रशासन का दायित्व पूरा हो रहा है? इस घटना के बाद महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा और शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाने की आवश्यकता और बढ़ गई है। मध्य प्रदेश के हरदा जिले का यह मामला एक गंभीर सामाजिक और कानूनी मुद्दे की ओर इशारा करता है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है लेकिन यह सिर्फ एक शुरूआत है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।

  • महाकाल मंदिर विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला तकिया मस्जिद की याचिका खारिज

    उज्जैन । सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर के विस्तार महाकाल लोक फेज-2के लिए तकिया मस्जिद की भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता मोहम्मद तैय्यब भूमि का मालिक नहीं है बल्कि केवल उपासक भक्तहै इसलिए उसे भूमि अधिग्रहण पर सवाल उठाने का कानूनी अधिकार नहीं है। यह फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया।

    याचिका में यह दावा किया गया था कि 1985 से यह भूमि मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्ति है और अधिग्रहण के समय उचित मुआवजा पुनर्वास और सामाजिक प्रभाव आकलन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि महाकाल मंदिर के विस्तार के लिए भूमि का अधिग्रहण सार्वजनिक उद्देश्य के अंतर्गत नहीं आता और इससे संविधान के अनुच्छेद 14 25 26 और 300-A का उल्लंघन होता है।

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में पहले से वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध थे और याचिकाकर्ता केवल मुआवजे की आपत्ति ही उठा सकता था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह भूमि अधिग्रहण की वैधता पर विचार नहीं करेगा क्योंकि याचिकाकर्ता भूमि का मालिक नहीं है।

    इससे पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी महाकाल लोक फेज-2 परियोजना से जुड़ी मुआवजे को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता न तो भू-स्वामी हैं और न ही टाइटल होल्डर इसलिए वे केवल मुआवजे के संदर्भ में सवाल उठा सकते हैं। इस फैसले से महाकाल लोक फेज-2 परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को कानूनी मंजूरी मिल गई है। यह परियोजना महाकाल मंदिर परिसर के विस्तार और सार्वजनिक स्थलों के पुनर्विकास का हिस्सा है जिसे बड़ी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्वता प्राप्त है।

  • ग्वालियर में अपात्र लोगों को पुलिस सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब..

    ग्वालियर में अपात्र लोगों को पुलिस सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब..


    ग्वालियर/मध्यप्रदेश के ग्वालियर में अपात्र और निजी व्यक्तियों को दी जा रही पुलिस सुरक्षा का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट के संज्ञान में आया है। इस मुद्दे को गंभीर जनहित से जुड़ा मानते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि पुलिस बल का इस तरह दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है।यह मामला याचिकाकर्ता नवल किशोर शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका के माध्यम से उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के बावजूद निजी व्यक्तियों को दी जा रही पुलिस सुरक्षा की कोई प्रभावी समीक्षा नहीं की गई। इसके कारण आज भी कई ऐसे लोग पुलिस सुरक्षा का लाभ उठा रहे हैं, जो इसके पात्र नहीं हैं।

    याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डीपी सिंह ने अदालत को बताया कि ग्वालियर में पुलिस बल की पहले से ही भारी कमी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी निजी व्यक्तियों की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं। इससे न केवल आम जनता की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकारी खजाने पर भी लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।वकील ने अदालत के सामने उदाहरण पेश करते हुए बताया कि विनय सिंह नामक व्यक्ति को दी गई पुलिस सुरक्षा के दौरान ही उनके खिलाफ वसूली सहित पांच आपराधिक मामले दर्ज हुए। यह साफ तौर पर पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब सुरक्षा पाने वाले ही अपराधों में लिप्त हों, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है।

    हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि पूर्व आदेश के बाद सूचना के अधिकार RTI के तहत जो जानकारी सामने आई, वह और भी चिंताजनक है। RTI से खुलासा हुआ कि 19 व्यक्तियों की सुरक्षा में 33 पुलिसकर्मी तैनात थे, जबकि इनमें से अधिकांश व्यक्ति सुरक्षा के पात्र ही नहीं थे। यह स्थिति तब है जब शहर में आम नागरिकों को पर्याप्त पुलिस सहायता नहीं मिल पा रही है।इससे पहले भी हाईकोर्ट इस तरह के मामलों में सख्त रुख अपना चुका है। दिलीप शर्मा और संजय शर्मा को दी गई पुलिस सुरक्षा के मामले में कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए दोनों भाइयों से सुरक्षा पर हुए खर्च की वसूली के आदेश दिए थे। उस समय कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी तुच्छ या अपात्र व्यक्ति को सरकारी खर्च पर पुलिस सुरक्षा नहीं दी जा सकती।

    न्यायालय ने अपने पुराने आदेशों में यह भी कहा था कि पुलिस सुरक्षा देने के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और ठोस नियम बनाए जाने चाहिए। कोर्ट का मानना है कि सुरक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था का इस्तेमाल केवल वास्तविक और प्रमाणित खतरे वाले मामलों में ही होना चाहिए, न कि प्रभाव या रसूख के आधार पर।हाईकोर्ट ने यह सुझाव भी दिया था कि जिन मामलों में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा या निजी कारणों से खतरे की आशंका हो, और संबंधित परिवार के पास लाइसेंसी हथियार उपलब्ध हों, वहां निजी सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था एक बेहतर विकल्प हो सकती है। कोर्ट के अनुसार, निजी सुरक्षा गार्ड कई बार पुलिसकर्मियों की तुलना में ज्यादा सजग और प्रभावी साबित हो सकते हैं, जबकि पुलिस बल को कानून-व्यवस्था के मूल कामों में लगाया जाना चाहिए।

    ताजा सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि अब तक पूर्व आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया और अपात्र लोगों को दी जा रही सुरक्षा पर क्या कार्रवाई की गई है। नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है।यह मामला न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे प्रदेश में पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और जवाबदेही से जुड़ा एक अहम उदाहरण बनता जा रहा है। आने वाले समय में राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और कोर्ट का अगला रुख इस व्यवस्था की दिशा तय करेगा।

  • MP में अस्थायी पद होंगे स्थायी, मोहन कैबिनेट ने सेवा भर्ती नियमों में बदलाव को दी मंजूरी

    MP में अस्थायी पद होंगे स्थायी, मोहन कैबिनेट ने सेवा भर्ती नियमों में बदलाव को दी मंजूरी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने विभिन्न परियोजनाओं के डूब प्रभावितों के लिए राहतों का ऐलान करते हुए राज्य की कर्मचारी व्यवस्था में बड़ा सुधार करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक (Cabinet meeting) में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में स्वीकृत स्थाई और अस्थाई पदों में भेदभाव को समाप्त करने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने के लिए सेवा भर्ती नियम में जरूरी प्रावधान करने पर भी मुहर लगाई है।

    कैबिनेट ने अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना के डूब प्रभावितों के लिए 1,782 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को मंजूरी दी। डूब प्रभावितों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में प्रावधान किए गए 1656 करोड़ रुपये के अतिरिक्त 1,782 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज स्वीकृत किया गया। सिंचाई और जलविद्युत की परियोजनाएं अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों में चल रही हैं।

    अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना 5,512 करोड़ रुपये की है। इससे 71 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी और 125 मेगावाट बिजली पैदा होगी। इन तीनों परियोजनाओं से कुल 13,873 परिवार प्रभावित होंगे, जिन्हें विशेष पैकेज के तहत प्रति परिवार 12.50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। एससी और एसटी के 50 हजार परिवारों को अतिरिक्त राशि दी जाएगी।

    कैबिनेट ने 2025-26 के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में विभाग स्तर पर 10 लाख या उससे अधिक के कार्यों पर मुहर लगाई है। इसके तहत 693 करोड़ 76 लाख रुपये के लगभग 3810 काम होंगे। भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के मेंटिनेंस के लिए भी 2025-26 के दौरान 90 करोड़ 67 लाख रुपये के बजट को मंजूरी दी गई है।

    कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को साल 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक जारी रखने के लिए 905 करोड़ 25 लाख रुपये को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में स्वीकृत स्थायी और अस्थायी पदों के विभेदीकरण को खत्म करने की मंजूरी दी। इस दिशा में स्वीकृत अस्थायी पदों को स्थायी पदों में बदलने के लिए सेवा भर्ती नियम में जरूरी प्रावधान करने को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने वन विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए 48 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

  • मुरैना का रहस्यमयी ककनमठ मंदिर भूतों द्वारा बना 1000 साल पुराना शिव मंदिर

    मुरैना का रहस्यमयी ककनमठ मंदिर भूतों द्वारा बना 1000 साल पुराना शिव मंदिर


    मुरैना । मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित ककनमठ मंदिर जो कि भगवान शिव को समर्पित है अपनी रहस्यमयी और ऐतिहासिक स्थिति के कारण एक विशेष स्थान रखता है। यह मंदिर ना सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है बल्कि एक दिलचस्प किंवदंती के कारण भी चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मंदिर 1000 साल पुराना माना जाता है और इसके निर्माण से जुड़ी रहस्यमयी कहानी इसे और भी दिलचस्प बना देती है।
    भूतों द्वारा मंदिर का निर्माण
    ककनमठ मंदिर को ‘भूतों का मंदिर’ भी कहा जाता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि इस मंदिर का निर्माण एक रात में भूतों ने किया था। किंवदंती के अनुसार जब भूत इस मंदिर का निर्माण करने के अंतिम चरण में थे तभी एक गांव की महिला ने हाथ से चलने वाली चक्की चला दी जिससे भूतों का काम अधूरा रह गया। इस घटना के बाद भूत मंदिर छोड़कर भाग गए और मंदिर का निर्माण कभी पूरा नहीं हो सका। यही कारण है कि आज भी यह मंदिर अधूरा और खंडहर में बदला हुआ दिखाई देता है।
    अद्भुत वास्तुकला
    ककनमठ मंदिर की वास्तुकला अत्यंत अद्भुत है। मंदिर के निर्माण में न तो सीमेंट का उपयोग किया गया है और न ही चूने का बल्कि एक के ऊपर एक विशाल पत्थर रखे गए हैं जो बिना किसी जोड़ के एक साथ जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद यह मंदिर पिछले एक हजार सालों से प्राकृतिक आपदाओं आंधी-तूफान और भूकंप जैसी घटनाओं का सामना करने के बावजूद अपनी जगह पर खड़ा है। यह मंदिर 115 फीट ऊंचा है और इसकी संरचना देखते ही बनती है।
    खंडित मूर्तियां और इतिहास
    ककनमठ मंदिर में कई हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां पाई जाती हैं लेकिन इनमें से अधिकांश खंडित अवस्था में हैं। इतिहासकारों का मानना है कि ये मूर्तियां विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा तोड़ी गईं थीं। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में इस मंदिर से संबंधित कई अवशेष भी पाए गए हैं। आज भी पुरातत्वविदों द्वारा किए गए उत्खनन में नई-नई जानकारी और अवशेष मिलते रहते हैं।
    मौसम की मार और मंदिर की अवस्था
    मंदिर की खंडहर स्थिति का मुख्य कारण इसका समय के साथ खराब होना है। पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. अशोक शर्मा के अनुसार मंदिर की खंडित अवस्था का कारण यहां की कठोर जलवायु और मौसम की मार है। हालांकि इस मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व आज भी बरकरार है।
    किवदंतियां और भविष्यवाणी
    किवदंतियों के अनुसार जब नाई जाति के नौ काने दूल्हे जिनकी एक आंख फूटी हो एक साथ इस मंदिर में पहुंचेंगे तो यह मंदिर पूरी तरह से ढह जाएगा। यह एक दिलचस्प और रहस्यमयी मान्यता है जो इस मंदिर के आसपास की लोककथाओं को और भी आकर्षक बनाती है। कैसे पहुंचे ककनमठ मंदिर मुरैना शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर सिहोनिया गांव में स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए आपको निजी वाहन या किराए पर वाहन लेना होगा क्योंकि इस मार्ग पर कोई सार्वजनिक परिवहन नहीं चलता है। जब आप इस मंदिर के पास पहुंचेंगे तो आपको 3 किलोमीटर दूर से ही इसका गुंबद दिखाई देगा।

    ककनमठ मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारतीय इतिहास और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। भूतों से जुड़ी कहानियां मंदिर की अद्भुत वास्तुकला और इसके रहस्यमयी इतिहास ने इसे एक दिलचस्प स्थल बना दिया है जो पर्यटकों को आकर्षित करता है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जन्मदिन की शुभकामनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जन्मदिन की शुभकामनाएं




    मध्यप्रदेश / भोपाल के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को उनके जन्मदिन के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने शुभकामना संदेश में श्री शर्मा के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु जीवन और जनसेवा के प्रति उनकी निरंतर सक्रियता की कामना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का नेतृत्व न केवल राजस्थान के विकास को नई दिशा दे रहा है, बल्कि सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में भी राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

    डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश में कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में राजस्थान में विकास की गति तेज हुई है और आमजन के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए अनेक प्रभावी योजनाएं लागू की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि श्री शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में राजस्थान आने वाले समय में आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से और अधिक सशक्त राज्य के रूप में उभरेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि श्री भजनलाल शर्मा की कार्यशैली ऊर्जा, पारदर्शिता और समर्पण का प्रतीक है। वे जनसेवा को अपना प्रमुख उद्देश्य मानते हुए निरंतर जनता से संवाद बनाए रखते हैं, जिससे शासन और प्रशासन के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी स्थापित हो रही है। यह जनभागीदारी ही किसी भी राज्य के समग्र विकास की नींव होती है।

    अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाबा खाटू श्याम जी से प्रार्थना करते हुए कहा कि राजस्थान निरंतर विकास, सुशासन और जनकल्याण के पथ पर अग्रसर रहे। उन्होंने कामना की कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सदैव असीम ऊर्जा और सामर्थ्य प्राप्त हो, जिससे वे जनसेवा के अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ करते रहें।मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह शुभकामनाएं दोनों राज्यों के बीच सौहार्द, सहयोग और सकारात्मक राजनीतिक संवाद को भी दर्शाती हैं, जो संघीय व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है।