Tag: Madhya Pradesh

  • एमपी में ब्यारमा नदी से 33 गांवों तक पानी पहुंचेगा, मुख्यमंत्री ने 600 करोड़ की धुनय धाम परियोजना की दी मंजूरी

    एमपी में ब्यारमा नदी से 33 गांवों तक पानी पहुंचेगा, मुख्यमंत्री ने 600 करोड़ की धुनय धाम परियोजना की दी मंजूरी


    दमोह । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को दमोह जिले के नोहटा में ‘नोहलेश्वर महोत्सव 2026’ और किसान सम्मेलन में पहुंचे। उन्होंने जिले के विकास के लिए कई बड़े ऐलान किए और करोड़ों रुपए की परियोजनाओं की आधारशिला रखी।

    ब्यारमा नदी से 33 गांवों तक पहुंचेगा पानी

    सीएम ने घोषणा की कि दमोह के 33 गांवों के किसानों के लिए ब्यारमा नदी से पानी पहुंचाने हेतु 600 करोड़ रुपए की धुनय धाम सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना से हजारों किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा और क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

    मानस भवन अब ‘गीता भवन’ बनेगा


    मुख्यमंत्री ने दमोह के मानस भवन को गीता भवन के रूप में विकसित करने की भी घोषणा की। इसके कायाकल्प और निर्माण कार्यों के लिए 2 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है। सरकार की योजना है कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में ऐसे गीता भवन बनाए जाएं, जो सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र होंगे।
    नोहलेश्वर महोत्सव में सांस्कृतिक रंग
    नोहटा में मुख्यमंत्री का स्वागत जल संसाधन मंत्री धर्मेंद्र सिंह और पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने किया। सम्मेलन में हजारों किसान और ग्रामीण मौजूद थे। मुख्यमंत्री के संबोधन से पहले मशहूर गायिका शहनाज अख्तर ने भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया।

    पर्यटन और अन्य घोषणाएं

    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने दमोह के राजनगर, सीतानगर और सत्धरू डैम में पर्यटन विकास के लिए भी मंजूरी दी। उन्होंने लाडली बहनों को 1500 रुपए देने की योजना का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर तीखे आरोप लगाए। सीएम ने कहा कि कांग्रेस सरकार के पास पैसे नहीं होने का बहाना बनाती है और साधु-संतों पर गोलियां चलाने जैसे आरोपों को भी उन्होंने विपक्ष पर लगाए।

    बता दें कि‍ नोहटा से मुख्यमंत्री छतरपुर के लिए रवाना होंगे, जहां वे बागेश्वर धाम में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम और कन्या विवाह महोत्सव में भाग लेंगे। यह दौरा दमोह और आसपास के ग्रामीण इलाकों में विकास और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।

  • जनगणना 2027 से तय होगी विकास की नई दिशा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    जनगणना 2027 से तय होगी विकास की नई दिशा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


    भोपाल । भोपाल में आयोजित जनगणना 2027 के प्रथम चरण के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तय करने का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं, संसाधनों का वितरण और नीतिगत निर्णय जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होते हैं, इसलिए यह अभियान प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर राष्ट्र के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला कार्य है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला देश है और ऐसे में जनगणना का महत्व राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल जनगणना कराने के ऐतिहासिक निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक के उपयोग से आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। सम्मेलन में मुख्य सचिव अनुराग जैन, रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जनगणना के दौरान गांवों, मजरों टोलों और यहां तक कि बेचिराग गांवों का भी समुचित आंकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जैसी आधारभूत संरचनाओं की योजना जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनती है। इसलिए कलेक्टर और कमिश्नर समय सीमा में इस कार्य को पूर्ण करें और इसे उच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि जनगणना प्रशासन की दक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता की परीक्षा है। मैदानी अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की सफलता के केंद्र में हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, दलहन तिलहन उत्पादन वृद्धि और नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने के प्रयासों पर बल दिया। साथ ही खनिज, पंजीयन और आबकारी से जुड़े राजस्व लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना प्रशासनिक दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में हैं। इस बार तकनीक और जीआईएस प्रणाली के उपयोग से आंकड़े शीघ्र उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 1 लाख 27 हजार मजरे टोले हैं, जिनका सटीक विवरण भविष्य की योजना निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत रखने और आमजन में जनगणना के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

    जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना संवैधानिक दायित्व होने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार स्तंभ है। विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। इस बार पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी और नागरिकों को स्व गणना का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिससे वे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने की सराहना की।

    जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी। प्रथम चरण में 1 मई से 30 मई 2027 तक मकान सूचीकरण किया जाएगा, जिसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएं और परिसंपत्तियों का विवरण एकत्रित होगा। द्वितीय चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और प्रजननता से संबंधित जानकारी संकलित की जाएगी।

     भोपाल में आयोजित जनगणना 2027 के प्रथम चरण के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तय करने का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं, संसाधनों का वितरण और नीतिगत निर्णय जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होते हैं, इसलिए यह अभियान प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर राष्ट्र के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला कार्य है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला देश है और ऐसे में जनगणना का महत्व राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल जनगणना कराने के ऐतिहासिक निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक के उपयोग से आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। सम्मेलन में मुख्य सचिव अनुराग जैन, रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जनगणना के दौरान गांवों, मजरों टोलों और यहां तक कि बेचिराग गांवों का भी समुचित आंकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जैसी आधारभूत संरचनाओं की योजना जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनती है। इसलिए कलेक्टर और कमिश्नर समय सीमा में इस कार्य को पूर्ण करें और इसे उच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि जनगणना प्रशासन की दक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता की परीक्षा है। मैदानी अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की सफलता के केंद्र में हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, दलहन तिलहन उत्पादन वृद्धि और नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने के प्रयासों पर बल दिया। साथ ही खनिज, पंजीयन और आबकारी से जुड़े राजस्व लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना प्रशासनिक दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में हैं। इस बार तकनीक और जीआईएस प्रणाली के उपयोग से आंकड़े शीघ्र उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 1 लाख 27 हजार मजरे टोले हैं, जिनका सटीक विवरण भविष्य की योजना निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत रखने और आमजन में जनगणना के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

    जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना संवैधानिक दायित्व होने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार स्तंभ है। विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। इस बार पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी और नागरिकों को स्व गणना का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिससे वे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने की सराहना की।

    जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी। प्रथम चरण में 1 मई से 30 मई 2027 तक मकान सूचीकरण किया जाएगा, जिसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएं और परिसंपत्तियों का विवरण एकत्रित होगा। द्वितीय चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और प्रजननता से संबंधित जानकारी संकलित की जाएगी।

  • नागदा और शाहपुर में दर्दनाक सड़क हादसे, बुजुर्ग और युवक की मौत

    नागदा और शाहपुर में दर्दनाक सड़क हादसे, बुजुर्ग और युवक की मौत

    नागदा /मध्यप्रदेश के नागदा और बैतूल जिले से सड़क हादसों की दुखद खबरें सामने आई हैं, जिन्होंने एक बार फिर रफ्तार के खतरों को उजागर किया है। नागदा में हुई पहली घटना में देर रात एक बुजुर्ग बाइक सवार की जान चली गई। घटना नागदा के 17 नंबर हाईवे स्टेट पर हुई, जब तेज़ रफ्तार ट्रक ने बुजुर्ग की बाइक को टक्कर मार दी। बुजुर्ग घर लौट रहे थे और अचानक हुए इस हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और आरोपी ट्रक चालक की तलाश शुरू कर दी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और मंडी थाना क्षेत्र में मामला दर्ज किया गया।

    इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों और आम आदमी पार्टी के नेता चेतन परमार ने सड़क पर प्रदर्शन करते हुए हाईवे पर स्पीड ब्रेकर और डिवाइडर बनाने की मांग की। लोगों ने चक्का जाम किया, जिसे पुलिस ने समझा-बुझाकर लगभग डेढ़ घंटे बाद खोलवाया। लोग सड़क सुरक्षा के लिए प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

    दूसरी दर्दनाक घटना बैतूल जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुई। यहां गुरुवार की रात अधूरी पुलिया पर तूफान जीप और यात्री बस के बीच भीषण टक्कर हुई। चिचोली से पचमढ़ी जा रहे श्रद्धालुओं से भरी जीप को बस ने टक्कर मारी, और हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इसी बीच मरीज लेने आई तेज़ रफ्तार हाईवे पेट्रोलिंग एम्बुलेंस ने घटनास्थल पर खड़े श्रद्धालुओं को टक्कर मार दी। इस हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई।

    इस पूरे हादसे में दो एम्बुलेंस कर्मियों समेत कुल छह लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन और स्थानीय लोगों का कहना है कि रफ्तार और सड़क सुरक्षा पर गंभीर कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि ऐसे हादसों से आम जनता की जान बचाई जा सके।

    ये घटनाएं मध्यप्रदेश में सड़क सुरक्षा की अनदेखी को उजागर करती हैं। तेज़ रफ्तार वाहन, अधूरी पुलिया, और सुरक्षित इंतजामों की कमी ने न केवल परिवारों को अपूरणीय क्षति पहुंचाई बल्कि आम लोगों में भय और असुरक्षा की भावना भी पैदा कर दी है। हादसे के बाद लोगों की मांग है कि सड़कों पर स्पीड ब्रेकर और डिवाइडर की व्यवस्था की जाए, और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

    मध्यप्रदेश के नागदा और शाहपुर की ये घटनाएं सबको सचेत करती हैं कि सड़क पर रफ्तार को नियंत्रित करना अब जीवन बचाने का सबसे बड़ा उपाय है। सुरक्षा की अनदेखी महंगी पड़ रही है, और प्रशासन एवं जनता दोनों को मिलकर कदम उठाने होंगे।

  • दतिया में नाबालिग की शादी पर प्रशासन का शिकंजा: बारात का पीछा कर किया रेस्क्यू, टेंट-डीजे-हलवाई पर भी FIR

    दतिया में नाबालिग की शादी पर प्रशासन का शिकंजा: बारात का पीछा कर किया रेस्क्यू, टेंट-डीजे-हलवाई पर भी FIR


    दतिया । मध्य प्रदेश के दतिया जिले में बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन ने सख्ती का परिचय दिया है। ग्राम खटोला में एक नाबालिग बालिका का विवाह संपन्न होने और विदाई की तैयारी की गुप्त सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया। त्वरित कार्रवाई करते हुए न केवल बालिका को रेस्क्यू किया गया बल्कि विवाह में सहयोग करने वाले टेंट हाउस डीजे और हलवाई संचालकों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    जानकारी के अनुसार जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद उपाध्याय को सूचना मिली थी कि गांव में नाबालिग लड़की की शादी कर दी गई है और विदाई की रस्म पूरी की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी जनपद पंचायत दतिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनीत त्रिपाठी और थाना उनाव की पुलिस टीम संयुक्त रूप से मौके पर पहुंची। हालांकि तब तक विदाई हो चुकी थी और बारात रवाना हो चुकी थी।

    प्रशासनिक टीम ने बिना समय गंवाए विदाई के काफिले का पीछा किया। रास्ते में घेराबंदी कर लौटती बारात को रोका गया और दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में बालिका की उम्र कानूनी विवाह आयु से कम पाई गई। इसके बाद बालिका को तत्काल रेस्क्यू कर थाना उनाव लाया गया जहां आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू की गई।

    कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस बार कार्रवाई का दायरा केवल परिजनों तक सीमित नहीं रखा गया बल्कि विवाह आयोजन में सहयोग देने वाले सभी पक्षों को भी जिम्मेदार माना गया है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत विवाह में भोजन बनाने वाले हलवाई पंडाल लगाने वाले टेंट संचालक और डीजे मालिक के खिलाफ भी विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

    कलेक्टर ने जिले के सभी टेंट हाउस संचालकों हलवाइयों डीजे ऑपरेटरों और पंडितों को सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने निर्देशित किया है कि भविष्य में किसी भी शादी की बुकिंग लेने से पहले वर-वधू के आयु संबंधी प्रमाण पत्र जैसे जन्म प्रमाण पत्र या अंकसूची का सत्यापन अनिवार्य रूप से करें। यदि किसी आयोजन में नाबालिग की शादी पाई गई तो सेवा प्रदाताओं को भी कानूनी कार्रवाई और जेल का सामना करना पड़ेगा।

    प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से जिले में स्पष्ट संदेश गया है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। अधिकारियों ने आमजन से भी अपील की है कि ऐसी किसी भी सूचना को तत्काल प्रशासन तक पहुंचाएं ताकि समय रहते बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

  • भोपाल छात्रा दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग केस: SIT गठित, आरोपियों के नेटवर्क और अन्य पीड़िताओं की भी होगी जांच

    भोपाल छात्रा दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग केस: SIT गठित, आरोपियों के नेटवर्क और अन्य पीड़िताओं की भी होगी जांच


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नाबालिग स्कूली छात्रा के साथ दुष्कर्म ब्लैकमेलिंग और कथित रूप से धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के गंभीर मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए टीटी नगर एसीपी अंकिता खातरकर के नेतृत्व में चार सदस्यीय विशेष जांच दल SIT का गठन किया गया है। टीम में महिला थाना प्रभारी और कोहेफिजा थाना प्रभारी को भी शामिल किया गया है।

    पुलिस के अनुसार आरोप है कि छात्रा के साथ चलती कार में दुष्कर्म किया गया और घटना का वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया गया। इसी आधार पर उस पर दबाव बनाया गया। SIT यह भी जांच करेगी कि पीड़िता आरोपियों के संपर्क में कैसे आई और क्या इस तरह की वारदात में अन्य युवतियां भी शिकार बनी हैं। जांच के दायरे में आरोपी माज की भूमिका वीडियो बनाने की साजिश और उसे साझा करने के पहलुओं को भी शामिल किया गया है।

    प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि वारदात के दौरान मुख्य आरोपी औसाफ और छात्रा कार के भीतर थे जबकि माज ने कथित रूप से बाहर से कांच के जरिए वीडियो बनाया। पुलिस का कहना है कि यह सब पूर्व नियोजित प्रतीत होता है। माज पर आरोप है कि उसने वीडियो अपने कुछ रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ भी साझा किए। अब SIT यह पता लगाने में जुटी है कि इस वीडियो का दुरुपयोग किस हद तक हुआ और किन-किन लोगों तक यह सामग्री पहुंची।

    मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी औसाफ और माज को गिरफ्तार कर लिया है। अब तक करीब 70 लाख रुपये कीमत की चार लग्जरी थार गाड़ियां जब्त की जा चुकी हैं जिनका उपयोग कथित तौर पर वारदात में किया गया। आरोपी माज की चौथी थार गाड़ी भी हाल ही में जब्त की गई है। अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है और उनके संभावित नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।

    SIT पीड़िता से दोबारा विस्तृत बयान दर्ज करेगी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों मोबाइल फोन वीडियो क्लिप चैट रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाएगी तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    यह मामला सामने आने के बाद शहर में व्यापक चर्चा है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी को इस प्रकरण से जुड़ी कोई जानकारी हो तो वह आगे आकर जांच में सहयोग करे। फिलहाल पूरी जांच SIT के निगरानी में जारी है और आने वाले दिनों में कई अहम खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

  • नर्मदापुरम में साइबर ठगों का जाल: एक दिन में 7 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को फर्जी कॉल, सेवा समाप्ति की धमकी देकर मांगा OTP

    नर्मदापुरम में साइबर ठगों का जाल: एक दिन में 7 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को फर्जी कॉल, सेवा समाप्ति की धमकी देकर मांगा OTP


    नर्मदापुरम । मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक ही दिन में सात आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को फर्जी कॉल कर ठगों ने निशाना बनाया। खुद को विभाग का वरिष्ठ अधिकारी बताकर कॉल करने वाले ने सेवा समाप्ति की धमकी दी और पोषण ट्रैकर चालू न होने का हवाला देते हुए पासवर्ड और ओटीपी की मांग की। एक कार्यकर्ता द्वारा ओटीपी साझा करते ही उसका व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया।

    जानकारी के अनुसार, 10 फरवरी की शाम जिले की सात आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं प्रमिला शर्मा, ममता मंसूरिया, सावित्री सेन, सरिता, वैष्णवी माधव सहित वार्ड क्रमांक 5, केंद्र क्रमांक 11 की कार्यकर्ता को मोबाइल नंबर 9798929881 से कॉल आया। कॉल करने वाले ने सख्त लहजे में कहा कि उनका पोषण ट्रैकर बंद है और यदि तुरंत जानकारी अपडेट नहीं की गई तो उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी। घबराहट में एक कार्यकर्ता ने मांगी गई ओटीपी साझा कर दी, जिसके तुरंत बाद उसका व्हाट्सएप अकाउंट लॉगआउट हो गया।

    अकाउंट हैक होने के बाद संबंधित कार्यकर्ता के व्हाट्सएप से जुड़े विभिन्न ग्रुपों में एसबीआई बैंक के योनो ऐप की कथित फाइल का लिंक भेजा गया। आशंका है कि इस लिंक के माध्यम से अन्य लोगों के मोबाइल में भी मैलवेयर इंस्टॉल कराने की कोशिश की गई। समय रहते अन्य कार्यकर्ताओं ने लिंक पर क्लिक नहीं किया, जिससे बड़ी साइबर ठगी टल गई।

    घटना के बाद सभी प्रभावित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एसपी कार्यालय पहुंचीं और साइबर सेल में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने मामले की गंभीर जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस विभाग हरकत में आया और संबंधित नंबर की जांच शुरू कर दी गई है।

    एडिशनल एसपी अभिषेक राजन ने स्पष्ट किया कि कोई भी विभागीय अधिकारी फोन पर कभी भी ओटीपी या पासवर्ड नहीं मांगता। उन्होंने कहा कि यदि किसी को इस प्रकार की कॉल प्राप्त होती है तो तुरंत नंबर ब्लॉक करें और नजदीकी साइबर सेल या पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही उन्होंने सभी शासकीय कर्मचारियों को सतर्क रहने और किसी भी अनजान लिंक, विशेषकर जिनमें APK लिखा हो, उसे डाउनलोड या क्लिक न करने की सलाह दी है।

    यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर ठग अब सरकारी कर्मचारियों को भी निशाना बना रहे हैं और पद तथा सेवा समाप्ति की धमकी का सहारा लेकर डर का माहौल बनाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की गोपनीय जानकारी, ओटीपी या पासवर्ड किसी से साझा न करें और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।

  • मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक बदलाव: अब अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियां भी माता-पिता की पेंशन की पात्र

    मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक बदलाव: अब अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियां भी माता-पिता की पेंशन की पात्र




    नई दिल्ली।
    मध्य प्रदेश सरकार ने परिवार पेंशन के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव किया है। अब राज्य में अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियां भी माता-पिता की पारिवारिक पेंशन की पात्र सूची में शामिल होंगी। यह बड़ा फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।

    कैबिनेट ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 2026 और सिविल सेवा नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी। नए नियमों के तहत अब परिवार पेंशन से जुड़े मामलों का निपटारा सरल और समयबद्ध होगा। इसके अलावा, NPS के तहत ग्रेच्युटी भुगतान, स्वेच्छिक सेवानिवृति, केंद्र और राज्य सरकार की पूर्व सेवा का संयोजन, निलंबन अवधि में अंशदान और देरी की स्थिति में जिम्मेदारी, तथा सेवानिवृत्ति या त्यागपत्र के बाद ग्रेच्युटी की पात्रता और भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे।

    इस ऐतिहासिक बदलाव से राज्य की हजारों बेटियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। अब पेंशन का लाभ माता-पिता पर आश्रित महिलाओं तक भी पहुंच सकेगा। सरकार ने बताया कि परिवार पेंशन के लिए आवेदन करना अब और भी आसान होगा। इच्छुक बेटियों को संबंधित विभाग या कोषालय कार्यालय में आवेदन करना होगा। आवश्यक दस्तावेज़ों में पहचान पत्र, तलाक या विधवा प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी कागजात शामिल होंगे।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों के प्रकाशन के बाद विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। यह कदम विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए राहत साबित होगा, जो तलाक या विधवा होने के बाद अपने माता-पिता पर निर्भर हैं और जिनके पास स्थायी आय का साधन नहीं है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और समानता को बढ़ावा देगा और राज्य की बेटियों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे और इसके लागू होने के तुरंत बाद बेटियां पारिवारिक पेंशन का लाभ प्राप्त कर सकेंगी।

  • CM डॉ. मोहन ने वंदे मातरम प्रोटोकॉल का किया स्वागत, कहा यह हमारी एकता का प्रतीक, MP में भी होगा लागू

    CM डॉ. मोहन ने वंदे मातरम प्रोटोकॉल का किया स्वागत, कहा यह हमारी एकता का प्रतीक, MP में भी होगा लागू


    भोपाल। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के लिए जारी नए प्रोटोकॉल का मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुले दिल से स्वागत किया है। नए निर्देशों में वंदे मातरम के सभी छह छंदों को पूर्ण सम्मान के साथ गाने और राष्ट्रगान जन गण मन से पहले बजाने का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे देशभक्ति और एकता का प्रतीक बताया है और कहा कि यह निर्णय राष्ट्रीय भावना को मजबूत करेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा आज जब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हमारे राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम के लिए नए प्रोटोकॉल जारी किए हैं जिसमें सभी छह छंदों को पूर्ण सम्मान के साथ गाने और राष्ट्रीय गान से पहले बजाने का प्रावधान है तो मेरा हृदय गर्व से भर उठता है। यह न केवल बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर रचना को सच्ची श्रद्धांजलि है बल्कि हमारी मातृभूमि के प्रति उस अनंत प्रेम और बलिदान की याद दिलाता है जिसने स्वतंत्रता संग्राम के योद्धाओं को प्रेरित किया।

    उन्होंने आगे कहा वन्दे मातरम हमारे दिल की धड़कन है हमारे रक्त की पुकार है यह वह गीत है जो हमें याद दिलाता है कि भारत माता की सेवा में हमारा जीवन समर्पित है। यह राष्ट्रगीत हमारी एकता का प्रतीक है। आइए हम सब मिलकर इस पवित्र गीत के माध्यम से राष्ट्र की सेवा का संकल्प लें जय हिंद जय भारत वन्दे मातरम!

    मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश में इस निर्णय का त्वरित और पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा। नए दिशा-निर्देशों के तहत सरकारी कार्यक्रमों स्कूलों और अन्य औपचारिक आयोजनों में वंदे मातरम के पूरे छह छंद अनिवार्य होंगे और सभी को खड़े होकर सम्मान देना होगा।

  • महाकाल का महापर्व 15 फरवरी को 44 घंटे तक नॉनस्टॉप दर्शन और दोपहर 12 बजे अद्भुत भस्म आरती का दिव्य आयोजन

    महाकाल का महापर्व 15 फरवरी को 44 घंटे तक नॉनस्टॉप दर्शन और दोपहर 12 बजे अद्भुत भस्म आरती का दिव्य आयोजन


    उज्जैन का विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था के महासागर में डूबने जा रहा है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 रविवार को मनाया जाएगा और इसे लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए महाकाल मंदिर के पट लगातार 44 घंटे तक खुले रहेंगे ताकि देश और विदेश से आने वाले लाखों भक्त बिना किसी बाधा के बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें।

    6 फरवरी से ही महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि के साथ भगवान शिव के विवाहोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। यह आयोजन 16 फरवरी 2026 तक चलेगा। पूरे मंदिर परिसर को भव्य और आकर्षक सजावट से सजाया जा रहा है। फूलों की विशेष साज सज्जा के साथ महादेव का दिव्य श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    महाशिवरात्रि के दिन 15 फरवरी को सुबह 6 बजे से दर्शन प्रारंभ होंगे और 16 फरवरी की सुबह तक बिना किसी विश्राम के जारी रहेंगे। इन 44 घंटों के दौरान मंदिर नॉनस्टॉप खुला रहेगा। श्रद्धालु दिन और रात किसी भी समय बाबा महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन भक्तों के लिए की गई है जो दूर दराज से उज्जैन पहुंचते हैं और महाशिवरात्रि पर महाकाल के साक्षात दर्शन की अभिलाषा रखते हैं।

    महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। इस दिन चारों प्रहर महादेव की पूजा की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं और रात्रि जागरण कर शिव नाम का स्मरण करते हैं। उज्जैन नगरी इस अवसर पर पूरी तरह शिवमय हो जाती है। हर ओर हर हर महादेव के जयघोष गूंजते हैं और वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो जाता है।

    इस पर्व का सबसे विशेष और आकर्षक आयोजन 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे होने वाली भस्म आरती होगी। महाकालेश्वर मंदिर में दोपहर की भस्म आरती साल में केवल एक बार महाशिवरात्रि पर ही आयोजित की जाती है। यह अद्भुत और दुर्लभ दृश्य देखने के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल को फलों फूलों और सप्तधान्य से निर्मित भव्य सेहरा बांधा जाता है। यह श्रृंगार अपने आप में अद्वितीय होता है और श्रद्धालुओं के लिए दिव्य अनुभूति का क्षण बन जाता है।

    महाशिवरात्रि और शिव नवरात्रि का यह भव्य समापन 16 फरवरी को भस्म आरती के साथ होगा। उज्जैन का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत खास है। महाकाल की नगरी में इस दौरान उमड़ने वाली आस्था यह दर्शाती है कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा आज भी उतनी ही प्रगाढ़ है जितनी सदियों पहले थी। महाकाल के दरबार में इस महापर्व पर शामिल होना हर शिवभक्त के लिए सौभाग्य की बात मानी जाती है और इस वर्ष 44 घंटे के निरंतर दर्शन ने इस उत्सव को और भी ऐतिहासिक बना दिया है।

  • महिला और सिटी मजिस्ट्रेट में तीखी बहस एक घंटे के विवाद के बाद हटा अतिक्रमण

    महिला और सिटी मजिस्ट्रेट में तीखी बहस एक घंटे के विवाद के बाद हटा अतिक्रमण


    खंडवा /मध्यप्रदेश के खंडवा शहर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान जमकर हंगामा हुआ। रविंद्र नगर गेट के पास नगर निगम की टीम जब अतिक्रमण हटाने पहुंची तो वहां रह रही एक महिला ने कार्रवाई का खुलकर विरोध किया। मामला इतना बढ़ गया कि महिला और सिटी मजिस्ट्रेट के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    नगर निगम का अमला अतिक्रमण हटाने के लिए जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंचा था। इस दौरान कार्यपालन यंत्री राधेश्याम उपाध्याय और सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर सिंह भी मौजूद थे। जैसे ही जेसीबी ने घर के आगे बने ओटले को तोड़ना शुरू किया, वहां खड़ी महिला अचानक मशीन के सामने आ गई और कार्रवाई रोकने की कोशिश करने लगी।

    महिला ने अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह वर्षों से वहां रह रही है और साफ-सफाई भी करती है। विरोध करते हुए महिला ने कहा कि तुम तोड़कर दिखाओ, यहां जितने लोग हैं सबको न फंसा दिया तो फिर बोलना। इस दौरान महिला ने सिटी मजिस्ट्रेट को धमकी भरे लहजे में कहा कि वह उनके खिलाफ उल्टा केस दर्ज करा देगी और पहले उसे गिरफ्तार किया जाए।

    बहस के दौरान महिला ने आसपास के मकानों की ओर इशारा करते हुए सवाल उठाया कि आगे बढ़े हुए ओटले क्यों नहीं हटाए जा रहे हैं। इस पर सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह सरकारी जमीन पर किया गया अतिक्रमण है और इसे हटाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जेसीबी लगाकर कार्रवाई पूरी की जाए।

    करीब एक घंटे तक चले इस विवाद के बाद आखिरकार नगर निगम ने अतिक्रमण हटा दिया। हालांकि कार्रवाई के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। मौके पर मौजूद लोगों की भीड़ जमा हो गई और बहस का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है।

    नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह अतिक्रमण लंबे समय से किया गया था और पहले भी नोटिस दिए जा चुके थे। प्रशासन का साफ कहना है कि शहर में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।