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  • मध्यप्रदेश बना आस्था, पर्यटन और रोज़गार का पावरहाउस: 900 करोड़ से 20 धार्मिक-सांस्कृतिक लोक

    मध्यप्रदेश बना आस्था, पर्यटन और रोज़गार का पावरहाउस: 900 करोड़ से 20 धार्मिक-सांस्कृतिक लोक

    मध्यप्रदेश। प्रधानमंत्री
    श्री नरेन्द्र मोदी के
    ‘विकास भी, विरासत भी‘ के कालजयी मंत्र को ध्येय वाक्य मानकर
    मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक
    पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जिस सांस्कृतिक पुनर्जागरण का शंखनाद
    उज्जैन में
    ‘श्री महाकाल लोक‘ के लोकार्पण के साथ किया था, वह यात्रा अब
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एक विराट जन-अभियान का रूप ले चुकी है।
    प्रदेश की पावन धरा पर लगभग
    900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 20 ‘लोकों‘ का निर्माण किया
    जा रहा है
    , जो आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी गौरवशाली परंपराओं का जीवंत
    साक्ष्य बनेंगे

    धार्मिक एवं
    सांस्कृतिक वैभव की इस अविरल यात्रा में वर्तमान में
    580 करोड़ रुपये से
    अधिक की लागत से
    17 महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक लोक पर तीव्र गति से कार्य
    संचालित है। सागर में
    ‘संत रविदास लोक‘ 101 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है। यह हमारी
    सामाजिक समरसता का प्रतीक है। सीहोर जिले के सलकनपुर में
    ‘देवी लोक‘
    और ओरछा
    में
    ‘श्रीरामराजा
    लोक
    ‘ जैसे
    भव्य प्रकल्प अपनी पूर्णता के करीब हैं। सरकार की संकल्प शक्ति का ही परिणाम है कि
    मंदसौर में
    ‘भगवान पशुपतिनाथ लोक परिसर‘ का कार्य पूर्ण कर उसे जनता को समर्पित किया जा
    चुका है। साथ ही भोपाल में
    ‘वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप लोक‘, जानापाव में ‘भगवान परशुराम
    लोक
    ‘ और
    महेश्वर में
    ‘देवी अहिल्या संग्रहालय‘ जैसे प्रकल्पों ने पूर्ण होकर प्रदेश के
    सांस्कृतिक मानचित्र को और अधिक समृद्ध किया है।

    जन-आस्था का
    सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने
    315 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से भविष्य में 3 नए लोक और 2 अन्य लोक के
    द्वितीय चरण को भी मूर्त रूप दिया जायेगा।
    ‘श्री महाकाल लोक‘
    की
    भव्यता को प्रेरणा मानकर अब ओंकारेश्वर में
    ‘ममलेश्वर लोक‘
    का
    निर्माण
    , बैतूल
    में ताप्ती उद्गम स्थल में
    ‘ताप्ती लोक‘ और मैहर में ‘माँ शारदा लोक‘
    का
    निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। महेश्वर में
    110 करोड़ रुपये की
    लागत से बनने वाला
    ‘देवी अहिल्या लोक‘ और अमरकंटक में ‘माँ नर्मदा लोक‘
    के
    द्वितीय चरण का निर्माण सनातन संस्कृति के प्रति अटूट श्रद्धा का परिचायक है।

    मुख्यमंत्री डॉ.
    यादव ने कहा कि प्रदेश में निर्मित हो रहे धार्मिक और सांस्कृतिक
    ‘लोक‘ केवल पत्थर और
    ईंटों के निर्माण मात्र नहीं हैं
    , अपितु ये मध्यप्रदेश के विकास के नए ‘ग्रोथ इंजन‘
    सिद्ध
    होंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी के
    ‘वोकल फॉर लोकल‘ के विज़न को
    आत्मसात करते हुए ये स्थल पर्यटन के वैश्विक केंद्रों के रूप में उभरेंगे
    , जिससे स्थानीय
    स्तर पर रोज़गार के अभूतपूर्व अवसर सृजित होंगे। हस्त शिल्पियों से लेकर सेवा
    क्षेत्र तक
    , इन लोकों का विकास हर वर्ग के लिए आर्थिक समृद्धि का नया द्वार
    खोलेगा। आस्था का यह महायज्ञ जहाँ एक ओर हमारी जड़ों को सींच रहा है
    , वहीं दूसरी ओर
    प्रदेश को आधुनिकता और आत्मनिर्भरता के पथ पर तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

  • रेत खनन पर NGT का बड़ा प्रहार: 9 मंजूरियां अवैध घोषित; कहा बिना सिया के मूल्यांकन के खनन हुआ तो होगी सख्त कार्रवाई

    रेत खनन पर NGT का बड़ा प्रहार: 9 मंजूरियां अवैध घोषित; कहा बिना सिया के मूल्यांकन के खनन हुआ तो होगी सख्त कार्रवाई


    भोपाल। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण NGT की सेंट्रल जोन बेंच ने मध्य प्रदेश में रेत खनन को लेकर चल रही मनमानी पर कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने सीधे तौर पर रेत खनन से जुड़ी 9 मंजूरियों को अवैध करार देते हुए उन्हें शून्य घोषित कर दिया है। न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि ये मंजूरियां स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी के अनिवार्य मूल्यांकन के बिना ही सीधे प्रमुख सचिव के अनुमोदन से जारी कर दी गई थीं, जो पर्यावरण नियमों का खुला उल्लंघन है।

    क्या था पूरा विवाद?

    मामले की जड़ साल 2025 के उस घटनाक्रम में है जब मार्च से मई के बीच सिया की कोई बैठक आयोजित नहीं हो सकी थी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, तत्कालीन अध्यक्ष एस.एन.एस. चौहान लगातार बैठक बुलाने के लिए मेंबर सेक्रेटरी को पत्र लिखते रहे, लेकिन प्रशासनिक खींचतान और अधिकारियों की अनुपलब्धता के कारण प्रक्रिया ठप रही। इसी दौरान, पर्यावरण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव के अनुमोदन पर प्रभारी मेंबर सेक्रेटरी ने 23 मई को 237 डीम्ड मंजूरियां आनन-फानन में जारी कर दीं। यह मामला पहले सुप्रीम कोर्ट पहुँचा और अब एनजीटी ने प्रक्रियागत खामियों को देखते हुए इन मंजूरियों को रद्द कर दिया है।

    NGT की सख्त टिप्पणी: सिया की स्वीकृति अनिवार्य
    एनजीटी ने अपने आदेश में साफ कहा है कि किसी भी खदान में खनन कार्य शुरू करने से पहले सिया की तकनीकी और पर्यावरणीय स्वीकृति अनिवार्य है। बिना सूक्ष्म परीक्षण और जांच के किसी भी परियोजना को अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायाधिकरण ने इन सभी विवादित मामलों को दोबारा विचार करने के लिए सिया के पास वापस भेज दिया है। जब तक सिया इन पर नए सिरे से मूल्यांकन कर मंजूरी नहीं देती, तब तक इन खदानों में किसी भी प्रकार का खनन कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

    समझें क्या है सिया और इसकी भूमिका?
    सिया यानी स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी एक ऐसी संवैधानिक संस्था है जो प्रदेश स्तर पर विकास परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन करती है। भारत सरकार के नियमों के मुताबिक, बड़ी परियोजनाओं के लिए केंद्रीय स्तर पर मंजूरी ली जाती है, जबकि राज्य स्तरीय परियोजनाओं जैसे रेत खनन के लिए सिया को शक्तियां दी गई हैं। इसकी प्रक्रिया में विशेषज्ञों द्वारा स्थल निरीक्षण और डेटा का परीक्षण शामिल होता है, जिसे बाईपास करना कानूनन अपराध है।एनजीटी के इस फैसले से मध्य प्रदेश के खनन क्षेत्र में हड़कंप मच गया है, क्योंकि अब उन सभी ठेकेदारों को अपनी खदानें बंद करनी होंगी जिनकी मंजूरियां इस विवादित प्रक्रिया के तहत जारी हुई थीं।

  • MP में 30 से ज्यादा जिलों में कोहरे की चादर, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र सबसे प्रभावित..

    MP में 30 से ज्यादा जिलों में कोहरे की चादर, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र सबसे प्रभावित..

    भोपाल। मध्य प्रदेश का आधा से अधिक हिस्सा कोहरे की चपेट में है। गुरुवार सुबह भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और 30 से अधिक जिलों में मध्यम से घना कोहरा छाया हुआ है। मौसम विभाग ने इस दौरान गाड़ी चलाते समय विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

    बुधवार को दिन में ठंडी हवाओं के चलते अधिकतर शहरों का अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में कोहरे के कारण विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम हो सकती है, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है। मौसम विभाग ने कहा है कि सुबह के समय अनिवार्य होने पर ही सफर करें और गाड़ी चलाते समय फॉग लाइट का इस्तेमाल करते हुए धीमी गति अपनाएं। शुक्रवार को भी कोहरे का अलर्ट जारी है।

    किस जिलों में कोहरा छाया
    मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार सुबह भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, सागर, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, रतलाम, नीमच, मंदसौर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर जिलों में कोहरे का प्रभाव है।

    अगले दो दिन का मौसम

    6 फरवरी: ग्वालियर, भिंड, दतिया, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर में घना कोहरा रहेगा। भोपाल, गुना, अशोकनगर, इंदौर, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, विदिशा, सीहोर, रायसेन सहित कई जिलों में हल्के से मध्यम कोहरे का असर रहेगा।

    7 फरवरी: अधिकांश जिलों में हल्के से मध्यम कोहरे का अनुमान है। इस दिन बारिश की संभावना नहीं है।

    इस मौसम के पीछे की वजह
    उत्तर भारत में सक्रिय वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम के कारण प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए रहे। पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी से ठंडी हवाएं मैदानी इलाकों में पहुंच रही हैं। पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 8 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होने वाला है, जिसका असर प्रदेश में नजर आएगा। 10 फरवरी से मावठे गिरने की संभावना है।

  • सिस्टम से हारा सरपंच: नरसिंहपुर में पंचायत भवन के अंदर खुद को किया कैद, आत्मदाह की दी चेतावनी।

    सिस्टम से हारा सरपंच: नरसिंहपुर में पंचायत भवन के अंदर खुद को किया कैद, आत्मदाह की दी चेतावनी।


    नरसिंहपुर/ मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने लोकतंत्र के जमीनी स्तर पंचायती राज और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के चीचली जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली सीरेगांव ग्राम पंचायत के सरपंच महेंद्र कुशवाहा ने व्यवस्था से हारकर एक आत्मघाती कदम उठाने का ऐलान किया है। मंगलवार की रात से ही सरपंच ने खुद को पंचायत भवन के एक कमरे में कैद कर लिया है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नहीं सुना गया, तो वे वहीं आत्मदाह कर लेंगे।

    क्या है पूरा मामला?
    सीरेगांव के सरपंच महेंद्र कुशवाहा का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से वे अपनी पंचायत में विकास कार्य कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, ग्राम पंचायत में निर्माण कार्यों और अन्य विकास परियोजनाओं में लगातार बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। सरपंच का कहना है कि उन्होंने ग्राम स्तर की समस्याओं के निराकरण के लिए कई बार जनपद पंचायत से लेकर जिला कलेक्टर तक का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने दर्जनों बार लिखित आवेदन दिए, जनसुनवाई में अपनी बात रखी, लेकिन हर बार उन्हें केवल ‘आश्वासन’ का झुनझुना थमा दिया गया।

    सरपंच का दर्द यह है कि एक चुना हुआ जनप्रतिनिधि होने के बावजूद वे अपने क्षेत्र की जनता की सेवा नहीं कर पा रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।

    वीडियो संदेश और ‘अंतिम फैसला’
    पंचायत भवन में खुद को कैद करने के बाद सरपंच महेंद्र कुशवाहा ने एक वीडियो जारी किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सरपंच काफी भावुक और व्यथित नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं पिछले दो साल से प्रशासन से निवेदन कर रहा हूं कि मुझे काम करने दिया जाए और विकास कार्यों में सहयोग किया जाए, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। पिछले मंगलवार की जनसुनवाई में भी मैंने गुहार लगाई थी, पर मुझे सिर्फ प्रताड़ना मिली।”

    सरपंच ने वीडियो में स्पष्ट रूप से कहा कि यह उनका ‘अंतिम फैसला’ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं हुआ, तो वे पंचायत भवन के भीतर ही खुद को आग लगा लेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यदि उन्हें कुछ भी होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और स्थानीय प्रशासन की होगी।

    प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंप
    जैसे ही सरपंच के कैद होने और आत्मदाह की चेतावनी की खबर फैली, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह का चरम कदम उठाना जिले की कानून-व्यवस्था और छवि के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और तहसील स्तर के अधिकारी मौके पर पहुंचे और सरपंच को समझाने-बुझाने का दौर शुरू हुआ।यह घटना केवल एक सरपंच की नाराजगी भर नहीं है, बल्कि यह उस नौकरशाही की तस्वीर पेश करती है जहाँ एक जनप्रतिनिधि को अपनी आवाज सुनाने के लिए मौत को गले लगाने जैसी धमकी देनी पड़ती है। सीरेगांव की जनता अब इस उम्मीद में है कि शासन उनकी पंचायत की समस्याओं पर ध्यान देगा और सरपंच को न्याय मिलेगा, ताकि गांव में विकास के पहिये फिर से घूम सकें। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन सरपंच को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिशों में जुटा है।

  • मप्र में जहरीले कफ सीरप से 25वीं मौत, 4 महीने कोमा में रहने के बाद जिंदगी की जंग हार गया एक और बच्चा

    मप्र में जहरीले कफ सीरप से 25वीं मौत, 4 महीने कोमा में रहने के बाद जिंदगी की जंग हार गया एक और बच्चा

    toxic cough syrup

    भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छिंदवाड़ा जिले (Chhindwara district) के परासिया क्षेत्र में हुए जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप कांड (Toxic Coldrif Cough Syrup Scandal) के शिकार एक और बच्चे की मौत हो गई। बैतूल जिले के चार वर्षीय हर्ष यदुवंशी की रविवार रात करीब नागपुर एम्स में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वह पिछले चार महीने से आईसीयू में भर्ती था और एम्स नागपुर में कोमा में जिंदगी की जंग लड़ रहा था। इस मौत के बाद प्रदेश में जहरीले कफ सीरप के सेवन से मरने वाले बच्चों की संख्या 25 हो गई है।

    जानकारी के अनुसार, बैतूल जिले के टीकाबर्री निवासी गोकुल यदुवंशी के पुत्र हर्ष को सर्दी खांसी की शिकायत पर एक अक्टूबर 2025 को छिंदवाड़ा जिले के परासिया में एसएस ठाकुर को दिखाया था। ठाकुर की क्लीनिक पर हर्ष को कोल्ड्रिफ सीरप दिया गया था। उसको पीने के बाद हर्ष की हालत बिगड़ गई। बच्चे को गंभीर हालत में परिजन ने नागपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। बाद में जब छिंदवाड़ा और बैतूल में कई बच्चों की मौत हो गई तो प्रशासन हरकत में आया। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर हर्ष को भी निजी अस्पताल से निकालकर नागपुर एम्स में भर्ती कराया गया। तबसे वह एम्स में ही भर्ती था।

    डॉक्टरों ने हर्ष की स्थिति शुरुआत से ही नाजुक बताई थी, लेकिन वे धीरे-धीरे रिकवरी होने की बात कह रहे थे। बच्चे के दादा देवा यदुवंशी ने बताया कि उसे भर्ती कराने के बाद से होश नहीं आया। डॉक्टर रोज कहते थे कि अब थोड़ा बेहतर है, लेकिन कल रात वह हमें छोड़ गया।

    हर्ष के पिता गोकुल पेशे से किसान हैं। उनके दो बेटे हैं, जिनमें हर्ष बड़ा था। बच्चे के इलाज के लिए परिवार के सदस्य पिछले चार महीनों से नागपुर में ही डेरा जमाए हुए थे। एम्स में हर्ष का इलाज तो मुफ्त हुआ, लेकिन परिजनों के नागपुर में रहने और खाने-पीने पर इन चार महीनों में लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। आमला एसडीएम शैलेंद्र बड़ोनिया ने बच्चे की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से बीमार हुए बच्चों में बैतूल जिले का हर्ष भी शामिल था, जिसे गंभीर हालत में नागपुर एम्स रेफर किया गया था।

    गौरतलब है कि पिछले वर्ष सितंबर-अक्टूबर महीने में जहरीले कफ सीरप कोल्ड्रिफ का सेवन करने वाले बच्चों की किडनी खराब होने की जानकारी सामने आई थी। लगातार मौतों के बाद कफ सीरप बनाने वाली तमिलनाडु की कंपनी और कफ सीरप लिखने वाले चिकित्सकों और दवा दुकानदारों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी। अब हर्ष की मौत के साथ ही यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सोमवार को पोस्टमार्टम कराने के बाद स्वजन शव लेकर गांव पहुंचे और देर शाम उसका अंतिम संस्कार किया गया।

  • श्रद्धा, आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम है बोरेश्वर महादेव मंदिर, रात में दर्शन को आते हैं नंदी महाराज

    श्रद्धा, आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम है बोरेश्वर महादेव मंदिर, रात में दर्शन को आते हैं नंदी महाराज


    नई दिल्ली। उज्जैन और काशी को बाबा महाकाल की धरती के रूप में पूजा जाता है जहां हर मंदिर से कोई न कोई धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व जुड़ा हुआ है। उज्जैन की पावन भूमि पर बाबा महाकाल के अलावा भगवान शिव का एक और अद्भुत और रहस्यमयी स्वरूप विराजमान है जिसे बोरेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि यहां केवल दर्शन मात्र से ही 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का फल प्राप्त हो जाता है।

    उज्जैन जिले के दंगवाड़ा गांव में स्थित बोरेश्वर महादेव मंदिर अन्य शिव मंदिरों से बिल्कुल अलग है। जहां अधिकांश मंदिरों में भगवान शिव शिवलिंग के रूप में पूजे जाते हैं वहीं यहां शिवलिंग बोर के आकार की आकृति में स्थापित है। यह शिवलिंग बेलनाकार लंबा और गोल दिखाई देता है और जमीन के ऊपर नहीं बल्कि नीचे की ओर धंसा हुआ है।

    यह मंदिर अत्यंत प्राचीन माना जाता है और इसकी ऐतिहासिक जड़ें ताम्र पाषाण काल से लेकर गुप्त काल तक फैली हुई बताई जाती हैं। मंदिर के गर्भगृह में विराजमान भगवान बोरेश्वर महादेव स्वयंभू हैं। मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता इसकी जलाधारी है जिसमें कितना भी जल अर्पित किया जाए उसका स्तर कभी न बढ़ता है और न ही घटता है। यह रहस्य आज तक वैज्ञानिकों के लिए भी एक पहेली बना हुआ है।

    स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंगों का समावेश है। यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कहा जाता है कि मंदिर में रात के समय चमत्कार होते हैं। भक्तों का विश्वास है कि रात्रि में नंदी महाराज स्वयं भगवान के दर्शन के लिए मंदिर आते हैं और उस दौरान मंदिर की घंटियां अपने आप बजने लगती हैं।मंदिर के समीप से चंबल नदी भी गुजरती है जो शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं बल्कि आधी परिक्रमा करती है। इसे भगवान शिव के सोमसूत्र के नियम का पालन माना जाता है जो इस स्थान को और भी रहस्यमयी बनाता है।

    महाशिवरात्रि के अवसर पर बोरेश्वर महादेव मंदिर में विशेष शृंगार किया जाता है और बाबा की भव्य सवारी नगर भ्रमण के लिए निकलती है जो वापस मंदिर में आकर संपन्न होती है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव स्वयं नगर में भ्रमण कर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। सावन मास में भी प्रत्येक सोमवार को बाबा की सवारी निकलती है जिसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं।

  • शीर्षक: उज्जैन: ट्रेन में बच्ची से छेड़छाड़, विरोध करने पर मारपीट; स्टेशन पर भड़का सांप्रदायिक तनाव

    शीर्षक: उज्जैन: ट्रेन में बच्ची से छेड़छाड़, विरोध करने पर मारपीट; स्टेशन पर भड़का सांप्रदायिक तनाव


    उज्जैन ।मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा रेलवे स्टेशन पर रविवार देर रात एक गंभीर घटना ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया गुजरात के दाहोद जिले से अस्थि विसर्जन के लिए ट्रेन से उज्जैन आ रहे एक परिवार की बच्ची के साथ ट्रेन में कुछ युवकों ने छेड़छाड़ का प्रयास किया जब परिवार ने विरोध किया तो युवकों ने जमकर मारपीट शुरू कर दी

    पीड़ित परिवार के अनुसार महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और युवकों को बुरी तरह पीटा गया पूरी बोगी में हंगामा मच गया घटना की जानकारी जैसे ही नागदा में स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों को लगी बड़ी संख्या में लोग रेलवे स्टेशन पर जमा हो गए वहीं मुस्लिम समाज के लोग भी बड़ी तादाद में स्टेशन पहुंचे जिससे टकराव की स्थिति बन गई

    स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया सूत्रों के अनुसार मुस्लिम युवकों ने खाचरोद से अपने साथियों को बुला लिया और करीब 50-60 युवक ट्रेन में चढ़कर मारपीट में शामिल हो गए देर रात तक जिले भर से पुलिस बल नागदा पहुंचा और स्थिति को नियंत्रण में रखापीड़ित परिवार ने नागदा जीआरपी थाने में शिकायत दर्ज कराई इसके बाद पुलिस ने सुरक्षा के बीच परिवार को निजी वाहन से उज्जैन पहुंचाया परिवार इतना डर गया कि स्टेशन पर कई सदस्य रोने लगे पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश कर रही है

    इस घटना ने इलाके में तनाव का माहौल बना दिया हालांकि फिलहाल पुलिस ने स्थिति नियंत्रण में रखी हुई है और दोनों समुदायों को शांत रहने की अपील की है स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सकेइस घटना ने एक बार फिर ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के महत्व को उजागर किया है प्रशासन और पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और दोषियों को पकड़ने के प्रयास में जुटी हुई है

  • MP में बदला मौसम, कोहरे और ठंडी हवाओं ने बढ़ाई ठिठुरन, 27-28 जनवरी को बारिश का अलर्ट

    MP में बदला मौसम, कोहरे और ठंडी हवाओं ने बढ़ाई ठिठुरन, 27-28 जनवरी को बारिश का अलर्ट



    भोपाल।  मध्य प्रदेश में मौसम ने फिर से बदलती मार दिखाई है। रविवार की सुबह प्रदेश के कई हिस्सों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे ठंड और बढ़ गई और आम जीवन प्रभावित हुआ। सड़कों पर कम दृश्यता के कारण लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ीं।

    मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि प्रदेश के लगभग आधे हिस्से में 27 और 28 जनवरी को बारिश और गरज-चमक के आसार हैं।

    विभाग के अनुसार, 26 जनवरी से उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय वेस्टर्न डिस्टरबेंस काफी मजबूत है, जिसका असर मध्य प्रदेश पर भी पड़ेगा। ग्वालियर-चंबल संभाग में पहले से ही बादल, हल्की बारिश और कोहरे का दौर जारी है।

    विभाग ने बताया कि उत्तर भारत में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन, एक लो प्रेशर एरिया और ट्रफ लाइन सक्रिय हैं। इन मौसम प्रणालियों की वजह से पिछले 24 घंटों में ग्वालियर-चंबल के कई जिलों में बारिश दर्ज की गई।

    शनिवार को भी प्रदेश में मौसम ठंडा बना रहा। छतरपुर, रतलाम समेत 10 से अधिक जिलों में तेज हवाओं ने ठंडक बढ़ाई। भोपाल में दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रही। वहीं, शनिवार देर शाम नरसिंहपुर के सालीचौका क्षेत्र में 20-25 मिनट तक तेज बारिश हुई।

    मौसम विभाग ने 27 जनवरी को भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, विदिशा, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर और रतलाम तथा 28 जनवरी को जबलपुर, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल, उमरिया, कटनी, दमोह, सागर, नरसिंहपुर, विदिशा और रायसेन में बारिश की संभावना जताई है।

    शनिवार की रात मंदसौर प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 7.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। राजगढ़ में 7.4, नीमच के मरुखेड़ा में 7.9, कल्याणपुर में 8.2, पचमढ़ी में 8.2 और कटनी के करौंदी में 9.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। बड़े शहरों में भोपाल 12.5, इंदौर 12.2, ग्वालियर 13.3, उज्जैन 12.8 और जबलपुर 15.3 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रहे।

    सर्द हवाओं और कोहरे की वजह से ग्वालियर-चंबल संभाग में दिन के तापमान में तेज गिरावट देखी गई। दतिया सबसे ठंडा रहा, जहां अधिकतम तापमान केवल 18.6 डिग्री था। खजुराहो में तापमान 21.4 डिग्री दर्ज हुआ, जबकि गुना 18.7, टीकमगढ़ 19, श्योपुर 19.4, ग्वालियर-धार 20, उज्जैन 21.5, रतलाम 21.2, इंदौर 22, नौगांव 22.5 और भोपाल 23.1 डिग्री सेल्सियस पर था। मौसम विभाग ने रविवार को भी दिन के तापमान में गिरावट की संभावना जताई है।

  • जहाँ देवी का मंदिर है, वहाँ इबादत कैसे स्वीकार होगी? भोजशाला विवाद पर विधायक रामेश्वर शर्मा का बड़ा बयान

    जहाँ देवी का मंदिर है, वहाँ इबादत कैसे स्वीकार होगी? भोजशाला विवाद पर विधायक रामेश्वर शर्मा का बड़ा बयान


    भोपाल । मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद में अब सियासी बयानबाजी ने तूल पकड़ लिया है। बसंत पंचमी के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूजा और नमाज दोनों की अनुमति दिए जाने के बाद, भाजपा के प्रखर विधायक रामेश्वर शर्मा ने एक बड़ा और तीखा बयान जारी किया है। उन्होंने सीधे तौर पर मुस्लिम समुदाय से सद्भावना की अपील करते हुए सवाल उठाया है कि जिस स्थान पर देवी का अधिष्ठान है, वहाँ की गई इबादत का क्या अर्थ है।

    विधायक रामेश्वर शर्मा ने अपने संबोधन में तर्क दिया कि इबादत और आस्था के बीच एक स्पष्ट समझ होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मुसलमानों को स्वयं यह समझना चाहिए कि जहाँ मां वाग्देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, वहाँ आपकी इबादत कैसे स्वीकार हो सकती है? हमारे सनातनी समाज की यह मांग सदियों से रही है कि जहाँ विद्या की देवी माँ सरस्वती विराजमान हैं, उस पवित्र स्थल पर केवल पूजन और अर्चना ही होनी चाहिए।’ शर्मा ने आगे जोड़ा कि स्वयं मुस्लिम समाज के मान्यताओं में भी यह उल्लेख मिलता है कि मंदिर परिसर के भीतर की गई इबादत जायज नहीं होती, ऐसे में इस मुद्दे को राजनीति से प्रेरित करने के बजाय समझदारी से सुलझाना चाहिए।

    ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए विधायक ने याद दिलाया कि भोजशाला का निर्माण महान राजा भोज ने माँ सरस्वती की आराधना और ज्ञान के केंद्र के रूप में किया था। उन्होंने कहा कि यह विद्या की देवी का मंदिर है और इसे अनावश्यक विवादों में नहीं घसीटना चाहिए। ‘माँ जगत जननी की निरंतर पूजा-अर्चना हमारा अधिकार है। हम इसके लिए लोकतंत्र की चौखट पर भी जाएंगे और सर्वोच्च न्यायालय से भी बार-बार प्रार्थना करेंगे कि यहाँ केवल सनातन परंपरा का निर्वहन हो,’ उन्होंने स्पष्ट किया।

    रामेश्वर शर्मा का यह बयान ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब धार प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बसंत पंचमी पर हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग समय और स्थान नियत किए हैं। जहाँ एक ओर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पूजा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर विधायक की इस अपील ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सबको मिलकर माँ सरस्वती की आरती-पूजा होने देनी चाहिए ताकि धार्मिक सौहार्द बना रहे और इतिहास के साथ न्याय हो सके।

  • मध्य प्रदेश: 10 दिन में 11 लाख वोटर्स को हटाने की साजिश? कांग्रेस का बड़ा आरोप, EC के दरवाज़े पर PCC चीफ

    मध्य प्रदेश: 10 दिन में 11 लाख वोटर्स को हटाने की साजिश? कांग्रेस का बड़ा आरोप, EC के दरवाज़े पर PCC चीफ


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, काटने और सुधार की प्रक्रिया 23 जनवरी को खत्म हो रही है। इसी बीच कांग्रेस ने बीजेपी पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की सुनियोजित साजिश का आरोप लगाया है।कांग्रेस का दावा है कि सिर्फ 10 दिनों में लगभग 11 लाख वोटरों के नाम काटने के लिए बीजेपी ने बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) को बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 उपलब्ध कराए हैं।

    कांग्रेस का मुख्य आरोप: “प्रिंटेड फॉर्म-7” से वोटर हटाए जा रहे हैं
    कांग्रेस का कहना है कि जिन फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाए जा रहे हैं, वे प्री-प्रिंटेड (पहले से भरे हुए) हैं।

    इन फॉर्मों में विधानसभा क्रमांक,विधानसभा का नाम,हटाने वाले मतदाता का नाम और विवरण पहले से दर्ज है।
    लेकिन आवेदक का नाम और हस्ताक्षर कहीं नहीं है।कांग्रेस इसे चुनाव आयोग की प्रक्रिया का उल्लंघन और लोकतंत्र पर हमला करार दे रही है।

    जीतू पटवारी ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, बीजेपी चुनाव हारने के डर से मैदान में नहीं, वोटर लिस्ट में खेल रही है।
    बिना आवेदक के नाम और हस्ताक्षर वाले प्री-प्रिंटेड फॉर्म-7 लोकतंत्र की हत्या का प्रमाण हैं।
    SC, ST, अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग के मताधिकार को छीनने की यह सोची-समझी साजिश है।”उन्होंने चेतावनी दी कि अगर चुनाव आयोग ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो कांग्रेस सड़कों से लेकर अदालत तक यह मुद्दा ले जाएगी।हम एक भी मतदाता का नाम गलत तरीके से कटने नहीं देंगे।

    कांग्रेस की मांग: EC तुरंत कार्रवाई करे
    कांग्रेस ने चुनाव आयोग से निम्नलिखित कार्रवाई की मांग की है
    सभी प्री-प्रिंटेड फॉर्म-7 की तुरंत जांच
    बिना वैध आवेदन और हस्ताक्षर वाले फॉर्मों को निरस्त
    दोषी अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों पर कड़ी कार्रवाई
    कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि संविधान और मताधिकार की रक्षा का मामला है।

    एक व्यक्ति ने 25-25 आपत्तियां”कांग्रेस का नया आरोप
    पटवारी ने कहा कि नियमों के अनुसार एक व्यक्ति केवल एक ही आपत्ति दर्ज करा सकता है, लेकिन बीजेपी कार्यकर्ताओं ने एक ही व्यक्ति द्वारा 25-25 आपत्तियां दर्ज कराई हैं।उन्होंने कहा कि इसके प्रमाण चुनाव आयोग को सौंप दिए गए हैं।

    BLO को चेतावनी: अनियमितता मिली तो FIR
    पटवारी ने BLOs को चेतावनी दी कि, यदि किसी भी बूथ पर अनियमितता पाई गई, तो संबंधित BLO के खिलाफ FIR दर्ज कराई जाएगी।
    उन्होंने कहा कि कुछ BLO ईमानदारी से काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ भाजपा नेताओं के दबाव में काम कर रहे हैं, जिससे उनकी सर्विस रिकॉर्ड (CR) खराब हो सकती है।

    फर्जी आपत्तियों का आरोप
    पटवारी ने आरोप लगाया कि कई मतदाताओं को जानकारी तक नहीं है, और उनके नाम से ऑनलाइन फर्जी आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं।

    यह खासकर अल्पसंख्यक और आदिवासी क्षेत्रों में हो रहा है।उन्होंने कहा:वोट चोरी करके चुनाव जीतने की कोशिश की जा रही है।

    मंत्री विश्वास सारंग पर भी सवाल
    पटवारी ने कहा कि मंत्री विश्वास सारंग पिछले चुनाव हार चुके थे।
    उनकी सीट और दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों से करीब एक-एक लाख वोट कम हुए हैं, जहाँ जीत-हार का अंतर अक्सर इतना ही रहता है।उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मांग की कि इन गड़बड़ियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया पर भारी आरोप लगाए हैं और इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है।अब सवाल यह है कि चुनाव आयोग इस मामले में कब और क्या कार्रवाई करता है, क्योंकि 23 जनवरी तक समय बहुत कम है।