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  • बिप्लब कुमार देव को मिली एमपी बीजेपी प्रभारी की जिम्मेदारी, जानिए कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर

    बिप्लब कुमार देव को मिली एमपी बीजेपी प्रभारी की जिम्मेदारी, जानिए कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर

    मध्य प्रदेश : में भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए नए प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारी की नियुक्ति की है। त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा सांसद बिप्लब कुमार देव को मध्य प्रदेश का नया प्रभारी बनाया गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश की नेता और सांसद रेखा वर्मा को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव के साथ प्रदेश में प्रभारी पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी विराम लग गया है।

    बिप्लब कुमार देव का राजनीतिक सफर संगठनात्मक गतिविधियों से शुरू हुआ। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे और बाद में दिल्ली में संगठन के वरिष्ठ नेता के.एन. गोविंदाचार्य के सहायक के तौर पर काम करते हुए राजनीतिक संगठन का अनुभव हासिल किया। वर्ष 2016 में उन्हें त्रिपुरा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली।

    उनके नेतृत्व में बीजेपी ने वर्ष 2018 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। इस चुनाव के बाद राज्य में बीजेपी की सरकार बनी और लंबे समय से सत्ता में रहे वाम दल के शासन का अंत हुआ। 9 मार्च 2018 को बिप्लब कुमार देव ने त्रिपुरा के 10वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। वह वर्ष 2018 से 2022 तक मुख्यमंत्री पद पर रहे।

    वर्ष 2022 में बिप्लब देव ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में संगठन से जुड़ी जिम्मेदारियां दी गईं। वह राज्यसभा के सदस्य भी रहे और हरियाणा बीजेपी के प्रभारी के तौर पर काम किया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने त्रिपुरा पश्चिम सीट से जीत दर्ज की और लोकसभा पहुंचे।

    इसके बाद पार्टी संगठन में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। बिप्लब कुमार देव को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया। अब उन्हें मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य का प्रभारी नियुक्त किया गया है। प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और केंद्रीय नेतृत्व तथा राज्य इकाई के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी उनके पास होगी।

    मध्य प्रदेश में बिप्लब देव के साथ रेखा वर्मा को सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। रेखा वर्मा उत्तर प्रदेश की नेता हैं और धौरहरा लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुकी हैं। पार्टी की राष्ट्रीय टीम में उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई है। अब वह मध्य प्रदेश में प्रभारी के साथ मिलकर संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का काम करेंगी।

    इससे पहले मध्य प्रदेश के प्रभारी की जिम्मेदारी डॉ. महेंद्र सिंह के पास थी। अब उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में वहां संगठन से जुड़े कामों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मध्य प्रदेश में उनके स्थान पर बिप्लब कुमार देव को जिम्मेदारी दी गई है।

    सह प्रभारी के स्तर पर भी बदलाव हुआ है। इससे पहले यह जिम्मेदारी सतीश कुमार उपाध्याय संभाल रहे थे। अब उनकी जगह रेखा वर्मा को मध्य प्रदेश का सह प्रभारी बनाया गया है। इस बदलाव के बाद प्रदेश संगठन में प्रभारी और सह प्रभारी की नई टीम काम करेगी।

    प्रदेश प्रभारी का मुख्य काम पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और राज्य संगठन के बीच तालमेल बनाए रखना होता है। वह प्रदेश अध्यक्ष और अन्य नेताओं के साथ मिलकर संगठनात्मक गतिविधियों, पार्टी कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों से जुड़े मामलों पर काम करते हैं। राज्य संगठन से मिलने वाली जानकारी और फीडबैक को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने में भी प्रभारी की भूमिका होती है। सह प्रभारी संगठनात्मक कार्यों में प्रभारी का सहयोग करते हैं।

  • मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड पर बड़ा फैसला, 14,337 से बढ़कर अब 21,500 रुपये प्रतिमाह

    मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड पर बड़ा फैसला, 14,337 से बढ़कर अब 21,500 रुपये प्रतिमाह


    मध्य प्रदेश: के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों के लिए स्टाइपेंड बढ़ाने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मासिक स्टाइपेंड 14,337 रुपये से बढ़ाकर 21,500 रुपये करने की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। आदेश के अनुसार बढ़ी हुई राशि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। इससे प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे छात्रों को बढ़ा हुआ स्टाइपेंड मिलेगा।

    विभाग की ओर से जारी आदेश में वर्तमान में प्रचलित 14,337 रुपये की राशि को संशोधित कर 21,500 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया है। इस तरह इंटर्न डॉक्टरों के मासिक स्टाइपेंड में 7,163 रुपये की वृद्धि हुई है। सितंबर में सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच सहमति बनने के बाद अब विभागीय स्तर पर इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर दी गई है।

    स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से अपनी मांग उठा रहे थे। सितंबर में यह मामला आंदोलन तक पहुंच गया था। भोपाल में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच स्थिति तनावपूर्ण हुई और वाटर कैनन के इस्तेमाल की घटना भी सामने आई। इसके बाद डॉक्टरों की मांग और प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम को लेकर सरकार की ओर से हस्तक्षेप किया गया।

    इंटर्न डॉक्टरों की मांग पर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ प्रतिनिधिमंडल की बातचीत हुई थी। चर्चा के दौरान स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर सहमति बनी और 21,500 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा की गई। इसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ और विभागीय आदेश का इंतजार किया जा रहा था। अब आदेश जारी होने के साथ बढ़े हुए स्टाइपेंड को लागू करने की प्रक्रिया स्पष्ट हो गई है।

    इससे पहले इंटर्न डॉक्टरों को हर महीने 14,337 रुपये स्टाइपेंड मिलता था। आंदोलन के दौरान डॉक्टरों की ओर से इससे काफी अधिक राशि की मांग रखी गई थी। सरकार और डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद 21,500 रुपये की राशि पर सहमति बनी। अब आदेश में इसे 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी किए जाने से अप्रैल से सितंबर तक की अवधि के भुगतान को लेकर भी बढ़ी हुई दर लागू होने का आधार तैयार हो गया है।

    स्टाइपेंड में यह संशोधन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षण ले रहे इंटर्न डॉक्टरों के लिए सीधे आर्थिक लाभ से जुड़ा फैसला है। इंटर्नशिप के दौरान डॉक्टर अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, विभिन्न विभागों में चिकित्सकीय कार्य और प्रशिक्षण से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में स्टाइपेंड में बढ़ोतरी उनके प्रशिक्षण काल के दौरान मिलने वाली मासिक आर्थिक सहायता को बढ़ाएगी।

    सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा स्टाइपेंड था, लेकिन आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई भी चर्चा में रही। प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन और बल प्रयोग के बाद मामला और गंभीर हुआ था। उप मुख्यमंत्री ने इस घटनाक्रम पर कार्रवाई की बात कही थी। इसके बाद स्टाइपेंड बढ़ाने के निर्णय के साथ आंदोलन समाप्त होने का रास्ता साफ हुआ।

    अब लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आदेश के बाद 21,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड की नई दर औपचारिक रूप से लागू हो गई है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने के कारण यह निर्णय केवल आगे की अवधि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आदेश में निर्धारित प्रभावी तारीख के आधार पर भुगतान की गणना की जाएगी।

  • अंत्येष्टि सहायता के 23 फर्जी प्रकरणों में 50.25 लाख का गबन, सेवानिवृत्त अधिकारी की पेंशन न्यूनतम

    अंत्येष्टि सहायता के 23 फर्जी प्रकरणों में 50.25 लाख का गबन, सेवानिवृत्त अधिकारी की पेंशन न्यूनतम

    मध्य प्रदेश: सरकार ने शासकीय धन के गबन और भ्रष्टाचार से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के खिलाफ पेंशन संबंधी कड़ी कार्रवाई की है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े मामले में तत्कालीन पंचायत समन्वय अधिकारी की पेंशन न्यूनतम करते हुए 7,750 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। वहीं, जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत पदस्थ रहीं एक प्राचार्य की देय पेंशन स्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया है।

    पहले मामले में जनपद पंचायत छिन्दवाड़ा में तत्कालीन पंचायत समन्वय अधिकारी के पद पर पदस्थ रहे सुनील कुमार अंधवान के खिलाफ अंत्येष्टि और अनुग्रह सहायता से संबंधित अनियमितताओं की जांच की गई थी। जांच में उनके द्वारा 23 फर्जी प्रकरण तैयार किए जाने और इनके माध्यम से 50.25 लाख रुपये के शासकीय धन के गबन का आरोप सही पाया गया।

    प्रकरण में कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार ने सुनील कुमार अंधवान को दंडित किया है। उनकी पेंशन राशि को न्यूनतम स्तर पर निर्धारित करते हुए अब 7,750 रुपये कर दिया गया है। अंधवान 30 जून 2025 को शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी मामले में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उनके खिलाफ पेंशन नियमों के तहत कार्रवाई की गई।

    अंत्येष्टि और अनुग्रह सहायता जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराने से जुड़ी सरकारी व्यवस्था है। ऐसे मामलों में फर्जी प्रकरण तैयार कर शासकीय राशि का इस्तेमाल किए जाने को गंभीर वित्तीय अनियमितता माना गया है। इसी आधार पर सेवानिवृत्त अधिकारी की पेंशन पर दंडात्मक कार्रवाई की गई।

    दूसरे मामले में जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत झाबुआ जिले के पेटलावद तहसील स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झकनावदा में प्राचार्य और प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी के पद पर रहीं शकुंतला शंखवार की देय पेंशन स्थायी रूप से रोक दी गई है।

    शकुंतला शंखवार के खिलाफ लोकायुक्त विशेष पुलिस स्थापना इंदौर से जुड़े एक आपराधिक प्रकरण में विशेष न्यायालय झाबुआ ने 4 दिसंबर 2025 को फैसला सुनाया था। न्यायालय ने उन्हें अलग-अलग मामलों में चार-चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही उन पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया था।

    न्यायालय से सजा मिलने के बाद राज्य सरकार ने पेंशन संबंधी प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की। इसके परिणामस्वरूप उनकी देय पेंशन को स्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया।

    दोनों मामलों में सरकार की कार्रवाई से स्पष्ट है कि शासकीय सेवा के दौरान वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सेवानिवृत्ति के बाद भी पेंशन संबंधी प्रावधानों के तहत दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। एक मामले में सरकारी धन के गबन से जुड़े आरोप सही पाए जाने के बाद पेंशन न्यूनतम की गई, जबकि दूसरे मामले में न्यायालय से दोषसिद्धि के बाद पेंशन स्थायी रूप से रोक दी गई।

  • बिजली संकट से जूझता एमपी अब सरप्लस राज्य, 32 हजार मेगावॉट क्षमता के बीच ग्रीन एनर्जी पर बड़ा जोर

    बिजली संकट से जूझता एमपी अब सरप्लस राज्य, 32 हजार मेगावॉट क्षमता के बीच ग्रीन एनर्जी पर बड़ा जोर

    मध्यप्रदेश: अब बिजली के मामले में सरप्लस राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी लगातार नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य प्रदेशवासियों को सस्ती दरों पर पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 सितंबर को भोपाल में आयोजित नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण की किफायती विद्युत खरीद विषयक कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित किया और एसोसिएशन की पुस्तक का विमोचन भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में बिजली हर क्षेत्र की अनिवार्य जरूरत बन चुकी है। राज्य सरकार बढ़ती खपत को ध्यान में रखते हुए बिजली उत्पादन, वितरण और संधारण की क्षमता पर लगातार काम कर रही है। नई तकनीक के साथ बिजली उत्पादन की नई इकाइयां भी शुरू की गई हैं।

    उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने बिजली संकट और लंबे समय तक पावर कट का दौर देखा है, लेकिन अब स्थिति काफी बदल गई है। प्रदेश नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रहा है और अपने ही पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, मध्यप्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता राज्य गठन से लेकर वर्ष 2002-03 तक लगभग 5 हजार मेगावॉट थी। वर्तमान में यह क्षमता बढ़कर करीब 32 हजार मेगावॉट हो चुकी है। इसमें लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी ग्रीन एनर्जी की है।

    नीमच-मंदसौर क्षेत्र में 2 हजार मेगावॉट क्षमता की परियोजना का भी उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी परियोजनाओं को सामान्य तौर पर पूरा होने में चार से छह वर्ष तक लग सकते हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में इसे करीब दो से ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    प्रदेश में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ सौर, पवन और पंप स्टोरेज के माध्यम से बिजली उत्पादन पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पानी से ही नहीं, बल्कि पानी के ऊपर भी बिजली उत्पादन की दिशा में काम हो रहा है।

    ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के मुरैना में स्थापित सोलर इलेक्ट्रिसिटी स्टोरेज परियोजना से करीब 2.70 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली उपलब्ध होने की बात कही गई। सरकार का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं को तेज गति से लागू करने के कारण उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि हुई है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में लगभग 42 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश चौबीसों घंटे अक्षय ऊर्जा उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बिजली कंपनियों को अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ घाटा कम करने पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

    कार्यशाला में ऊर्जा भंडारण और किफायती विद्युत खरीद से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि कार्यशाला में होने वाला मंथन बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली और भविष्य की ऊर्जा योजनाओं के लिए उपयोगी साबित होगा।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि कार्यशाला से विद्युत वितरण कंपनियों को अधिक सक्षम और मजबूत बनाने के लिए उपयोगी निष्कर्ष सामने आएंगे। सरकार का जोर बिजली की बढ़ती जरूरत के साथ उत्पादन और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने पर है।

  • कुणाल चौधरी ने छात्रों, किसानों और आम जनता के मुद्दों पर सरकार से मांगी जवाबदेही

    कुणाल चौधरी ने छात्रों, किसानों और आम जनता के मुद्दों पर सरकार से मांगी जवाबदेही

    मध्यप्रदेश: कांग्रेस के सचिव कुणाल चौधरी ने इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल हुए छात्र-छात्राओं का आभार जताते हुए युवाओं और किसानों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए राहुल गांधी का भी आभार व्यक्त किया। चौधरी ने कहा कि युवाओं ने अपने भविष्य और अधिकारों से जुड़े सवाल मजबूती से सामने रखे हैं।

    उन्होंने कहा कि इंदौर की अर्थव्यवस्था में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन प्रदेश में पढ़े-लिखे युवा रोजगार, भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और वेतन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनका कहना था कि परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी का सीधा असर मेहनत करने वाले विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है।

    चौधरी ने पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही तय करने के लिए बोर्ड बनाने और प्रभावित अभ्यर्थियों को मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि युवाओं को बार-बार परीक्षा शुल्क भरकर परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती है, लेकिन व्यवस्था की गलती सामने आने पर उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।

    उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने पर कार्रवाई का सामना करने के बजाय उनकी समस्याओं का नीतिगत समाधान मिलना चाहिए। रोजगार और वेतन से जुड़े मामलों में सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

    चौधरी ने भागीरथपुरा मामले और छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने जिम्मेदारी तय करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। साथ ही ड्रग से जुड़े मामलों में पूरे नेटवर्क की जांच करने तथा किसी अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर जवाबदेही तय करने की बात कही।

    सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि केवल छोटे आरोपियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। प्रशासनिक लापरवाही या सरकारी तंत्र की विफलता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और राजनीतिक स्तर पर भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने सरकारी धन के नुकसान की स्थिति में जिम्मेदार लोगों से उसकी वसूली की मांग की।

    भोपाल के 90 डिग्री ब्रिज से जुड़े मुद्दे पर भी चौधरी ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने कहा कि राजधानी से जुड़े महत्वपूर्ण अधोसंरचना संबंधी सवालों पर जनता को समयबद्ध जानकारी मिलनी चाहिए।

    किसानों के मुद्दे पर उन्होंने सोयाबीन की फसल में मौसम और बीमारी से हुए नुकसान का उल्लेख किया। चौधरी ने पीले मोजेक सहित फसल खराब होने की शिकायतों के बीच तत्काल सर्वे और प्रभावित किसानों को राहत देने की मांग की।

    उन्होंने एक बीघा में 12 क्विंटल सोयाबीन उत्पादन के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति खेतों में जाकर देखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई किसान कम उत्पादन और फसल खराब होने की शिकायत कर रहे हैं।

    सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर चौधरी ने कहा कि सरकार ने 5,700 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की बात कही है, लेकिन किसानों को इससे कम कीमत पर उपज बेचने की स्थिति क्यों बन रही है। उन्होंने भावांतर योजना के पंजीयन, भुगतान और वास्तविक लाभ को लेकर भी स्पष्टता की मांग की।

    उन्होंने कहा कि सोयाबीन की कटाई शुरू होने से पहले प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे होना जरूरी है। फसल कट जाने के बाद सर्वे होने पर वास्तविक नुकसान का आकलन मुश्किल हो सकता है। चौधरी ने उचित एमएसपी, समय पर सर्वे, फसल नुकसान का मुआवजा और सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ सुनिश्चित करने की मांग की।

    चौधरी ने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा पर भी आरोप लगाए और कहा कि नेताओं को विवाद और विभाजन के बजाय युवाओं, किसानों, रोजगार, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जवाबदेही और कार्रवाई चाहती है।

  • तेजा दशमी पर वीर तेजाजी की गाथा याद, राजस्थान और मध्यप्रदेश में पूजा-अर्चना से लेकर भजन-कीर्तन तक हुए आयोजन

    तेजा दशमी पर वीर तेजाजी की गाथा याद, राजस्थान और मध्यप्रदेश में पूजा-अर्चना से लेकर भजन-कीर्तन तक हुए आयोजन

    नई दिल्ली । भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला तेजा दशमी पर्व राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित कई क्षेत्रों में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज की स्मृति से जुड़ा है और ग्रामीण लोकसंस्कृति में इसका विशेष महत्व माना जाता है। तेजा दशमी के अवसर पर लोग वीर तेजाजी के जीवन, उनके साहस, त्याग और वचन निभाने की परंपरा को याद करते हैं।

    लोक परंपराओं में वीर तेजाजी को सत्य, साहस और वचनबद्धता के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता है। उनकी गाथा में दिए गए वचन को हर परिस्थिति में निभाने की भावना को विशेष स्थान प्राप्त है। यही कारण है कि तेजा दशमी केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा अवसर नहीं, बल्कि लोक जीवन में नैतिक मूल्यों और संकल्प की परंपरा को याद करने का दिन भी माना जाता है।

    राजस्थान के साथ मध्यप्रदेश के ग्रामीण अंचलों में भी तेजा दशमी को लेकर विशेष उत्साह दिखाई देता है। इस अवसर पर तेजाजी से जुड़े मंदिरों और थानों में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और जागरण के आयोजन होते हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में मेले भी लगाए जाते हैं। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार और श्रद्धालु शामिल होकर लोकदेवता के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।

    तेजाजी की लोकगाथा में गौ-रक्षा का प्रसंग भी महत्वपूर्ण माना जाता है। लोकमान्यता में उन्हें गौ-रक्षा के लिए साहस और त्याग का परिचय देने वाले लोकदेवता के रूप में याद किया जाता है। इसी वजह से ग्रामीण समाज में तेजाजी की पूजा और उनसे जुड़ी परंपराओं का भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व लंबे समय से बना हुआ है।

    तेजा दशमी के आयोजन स्थानीय लोक संस्कृति को भी जीवंत बनाए रखने का माध्यम बनते हैं। पूजा-पाठ के साथ होने वाले भजन, कीर्तन, जागरण और मेलों में पारंपरिक आस्था और सामुदायिक सहभागिता दिखाई देती है। पर्व के माध्यम से नई पीढ़ी को भी वीर तेजाजी की लोकगाथा और उनसे जुड़ी मान्यताओं से परिचित कराने का अवसर मिलता है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने वीर तेजाजी महाराज के प्रति श्रद्धा और आस्था से जुड़े इस पर्व को सुख, शांति और खुशहाली से जोड़ते हुए सभी परिवारों के लिए मंगलकामना की। मुख्यमंत्री ने कामना की कि लोकदेवता के प्रति लोगों की श्रद्धा के इस पर्व से प्रदेशवासियों के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की वृद्धि हो।

    तेजा दशमी के मौके पर ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सहभागिता का वातावरण भी देखने को मिलता है। अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कार्यक्रम लोकपरंपराओं को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं। वीर तेजाजी की स्मृति से जुड़ा यह पर्व साहस, सत्य, त्याग और अपने वचन के प्रति प्रतिबद्ध रहने की भावना को रेखांकित करता है।

    राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित जिन क्षेत्रों में तेजाजी की लोकआस्था गहरी है, वहां तेजा दशमी का दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और सामुदायिक आयोजनों के बीच लोग लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं और परिवार तथा समाज के सुख-शांति और खुशहाली की कामना करते हैं।

  • MP में युवाओं के रोजगार पर सरकार का बड़ा फोकस, IT पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस से बढ़ेंगे शिक्षा और कौशल के अवसर

    MP में युवाओं के रोजगार पर सरकार का बड़ा फोकस, IT पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस से बढ़ेंगे शिक्षा और कौशल के अवसर

    मध्यप्रदेश: में युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ाने को लेकर सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की बात कही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में युवाओं को बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिनसे शिक्षा, तकनीक, कौशल और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।

    मुख्यमंत्री के मुताबिक IT पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस के माध्यम से युवाओं को केवल शिक्षा प्राप्त करने तक सीमित अवसर नहीं मिलेंगे, बल्कि उन्हें रोजगार और कौशल विकास से जुड़े नए विकल्प भी उपलब्ध होंगे। तकनीकी क्षेत्र के विस्तार के साथ युवाओं को बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में तकनीक, नवाचार और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक आधार तैयार किया जा रहा है। IT क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों का उद्देश्य रोजगारपरक प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना और युवाओं को आधुनिक तकनीकी अवसरों से जोड़ना है। इससे शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को नए क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने इंदौर और भोपाल के विकास को लेकर भी सरकार की योजना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों शहरों को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस दिशा में सुनियोजित शहरी विकास, बेहतर सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    इंदौर और भोपाल को बड़े शहरी और आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित करने का असर रोजगार के अवसरों पर भी पड़ सकता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन शहरों में नई तकनीक, नवाचार और उद्योगों को बढ़ावा मिलने से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही प्रदेश के समग्र विकास को भी गति मिलेगी।

    प्रदेश में तकनीकी और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ IT क्षेत्र को भी महत्व दिया जा रहा है। तकनीकी बुनियादी ढांचे और रोजगारपरक कौशल को बढ़ाने से युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इससे कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़े अवसरों के विस्तार की संभावना बढ़ेगी।

    सरकार का जोर विकास को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति को गति देने पर भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में विकास और प्रगति के लिए सरकार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इसी क्रम में उद्योग, तकनीक, शिक्षा और कौशल विकास को रोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में प्रगति के लिए काम कर रही है। साथ ही आगामी सिंहस्थ की तैयारियों को भी गति दी जा रही है और उससे जुड़े आवश्यक विकास कार्यों को तेजी से किए जाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    इन पहलों के जरिए सरकार का लक्ष्य युवाओं को शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। IT पार्क, इंजीनियरिंग कैंपस, औद्योगिक गतिविधियों और मेट्रोपॉलिटन शहरों के विकास को रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़कर आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

  • MP में 17 से 20 सितंबर तक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम, नितिन नवीन, राहुल गांधी, मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले रहेंगे मौजूद

    MP में 17 से 20 सितंबर तक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम, नितिन नवीन, राहुल गांधी, मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले रहेंगे मौजूद

     मध्यप्रदेश । अगले चार दिन मध्यप्रदेश की राजनीति और सामाजिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद अहम रहने वाले हैं। 17 से 20 सितंबर के बीच प्रदेश में देश के कई बड़े चेहरे नजर आएंगे। एक तरफ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का दौरा होगा, तो दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी युवाओं के बीच पहुंचेंगे। इसी दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले भी प्रदेश में मौजूद रहेंगे। ऐसे में इन चार दिनों के दौरान मध्यप्रदेश का राजनीतिक और सामाजिक माहौल काफी सक्रिय रहने वाला है और इन सभी कार्यक्रमों पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।

    17 सितंबर को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन मध्यप्रदेश के दौरे पर पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर उनका मंदसौर, इंदौर और उज्जैन में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने का कार्यक्रम है। बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। नितिन नवीन मध्यप्रदेश में इससे जुड़े आयोजनों में हिस्सा लेंगे।

    नितिन नवीन मंदसौर में SVAMITVA योजना से जुड़े कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति और आवासीय जमीन से जुड़े अधिकारों का रिकॉर्ड तैयार कर लोगों को दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं। उनके दौरे में गांधी सागर अभयारण्य भी महत्वपूर्ण रहेगा। यहां चीता पुनर्वास योजना के तहत कार्यक्रम होना है। कूनो के बाद गांधी सागर को भी चीतों के लिए विकसित किया जा रहा है।

    17 और 18 सितंबर को RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत उज्जैन में रहेंगे। उज्जैन पहुंचने के बाद वे संघ के स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे। इसके अलावा वे मध्यप्रदेश की पहली ‘युवा धर्म संसद’ में युवाओं से संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम में स्वामी अवधेशानंद गिरि, गीतकार मनोज मुंतशिर और IIM इंदौर के निदेशक हिमांशु राय समेत कई प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी रहेगी।

    मोहन भागवत उज्जैन में आयोजित बड़े दीप प्रज्वलन कार्यक्रम का भी हिस्सा बनेंगे। उनके दौरे को लेकर संघ के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण किया है। पुलिस और प्रशासन भी सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारियों में जुटा है।

    19 सितंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी इंदौर पहुंचेंगे। यहां ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए वे युवाओं और Gen Z से संवाद करेंगे। कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था, युवाओं के सामने मौजूद चुनौतियों और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा होने की बात कही गई है। राहुल गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेस संगठन की तैयारियां तेज हो गई हैं।

    चार दिनों के इस सिलसिले का अंतिम बड़ा कार्यक्रम 20 सितंबर को भोपाल में होगा। RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले लाल परेड मैदान में आयोजित ‘शाखा संगम’ कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों के शामिल होने की तैयारी है। इनमें 30 हजार से ज्यादा Gen-Z स्वयंसेवक शामिल होंगे, जबकि कुल उपस्थिति करीब 50 हजार बताई जा रही है।

    संघ के अनुसार भोपाल विभाग के पांच जिलों और छह नगरों की करीब 800 शाखाओं से जुड़े स्वयंसेवक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों की ओर से शारीरिक अभ्यास और दंड प्रदर्शन भी किया जाएगा। दत्तात्रेय होसबाले अपने संबोधन में समाज के सामने मौजूद चुनौतियों, भविष्य के लक्ष्यों और इतिहास से मिलने वाली सीख पर बात करेंगे।

  • MP News: सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से की मुलाकात, निवेश और विकास परियोजनाओं पर हुई चर्चा

    MP News: सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से की मुलाकात, निवेश और विकास परियोजनाओं पर हुई चर्चा

    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्य एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया और केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात की। इन बैठकों में मध्यप्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों के साथ राज्य में निवेश और विकास परियोजनाओं को गति देने पर चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के बीच हुई मुलाकात में मध्यप्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। बातचीत के दौरान युवाओं के कौशल विकास और राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करने से जुड़े विषय प्रमुख रहे।

    मुख्यमंत्री ने युवाओं के कौशल विकास से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर केंद्रीय मंत्री के साथ चर्चा की। इसके साथ ही रोजगार के नए अवसरों के सृजन को लेकर भी विचार साझा किए गए। मुलाकात में मध्यप्रदेश के विकास को आगे बढ़ाने से जुड़े विषयों पर सार्थक बातचीत हुई।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से उनके नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित आवास पर मुलाकात की। इस दौरान मध्यप्रदेश में वस्त्र एवं टेक्सटाइल उद्योग में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

    बैठक में मध्यप्रदेश की वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। राज्य में इस क्षेत्र से जुड़ी निवेश संभावनाओं और रोजगार सृजन के अवसरों पर भी चर्चा की गई।

    मुख्यमंत्री और केंद्रीय वस्त्र मंत्री के बीच बातचीत में मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में और अधिक सशक्त बनाने से जुड़े विषयों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान राज्य की मौजूदा वस्त्र एवं परिधान क्षमता को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने और निवेश की संभावनाओं को गति देने पर विचार हुआ।

    चर्चा का एक प्रमुख पक्ष वस्त्र क्षेत्र के माध्यम से रोजगार के अवसरों से भी जुड़ा रहा। मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल और परिधान उद्योग की संभावनाओं को देखते हुए निवेश और रोजगार सृजन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई इन मुलाकातों में राज्य के विकास से जुड़े अलग-अलग विषय सामने रहे। एक ओर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्य एवं खेल मंत्री के साथ युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के नए अवसरों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, वहीं केंद्रीय वस्त्र मंत्री के साथ टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश और रोजगार की संभावनाओं पर बातचीत हुई।

    वस्त्र क्षेत्र को लेकर हुई चर्चा में मध्यप्रदेश की क्षमता को और मजबूत करने तथा राज्य को देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित करने से जुड़े विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श किया गया। निवेश की संभावनाओं और रोजगार सृजन के पहलुओं को भी बातचीत में शामिल किया गया।

    मुख्यमंत्री की इन बैठकों का उद्देश्य मध्यप्रदेश के विकास से जुड़े विषयों को आगे बढ़ाने और राज्य में निवेश तथा विकास परियोजनाओं को गति देने से संबंधित पहलुओं पर चर्चा करना रहा। केंद्रीय मंत्रियों के साथ मुलाकात में युवाओं, रोजगार, कौशल विकास और टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई।

    इस दौरान देश के समावेशी विकास को गति देने और मध्यप्रदेश के वस्त्र क्षेत्र की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के दिल्ली प्रवास में हुई इन बैठकों में राज्य में निवेश और रोजगार की संभावनाओं को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से सामने रहे।

  • मध्य प्रदेश में बैंक कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल, तीन दिन प्रभावित रहेगा कामकाज; नकदी, चेक क्लीयरेंस और लोन सेवाएं

    मध्य प्रदेश में बैंक कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल, तीन दिन प्रभावित रहेगा कामकाज; नकदी, चेक क्लीयरेंस और लोन सेवाएं


    मध्य प्रदेश : बैंक कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुई प्रदेशव्यापी हड़ताल का असर मध्य प्रदेश में बैंकिंग सेवाओं पर पड़ा है। जबलपुर समेत प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बैंक कर्मचारियों के आंदोलन के कारण सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ है। हड़ताल के चलते शुक्रवार से रविवार तक लगातार तीन दिन बैंकिंग सेवाओं पर असर रहेगा।

    इस दौरान नकदी से जुड़े लेन-देन, चेक क्लीयरेंस, लोन से संबंधित कार्य और अन्य बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। बैंक कर्मचारियों के संगठनों ने लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर हड़ताल का आह्वान किया है। कर्मचारियों का कहना है कि इन मांगों पर अपेक्षित स्तर पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

    बैंक कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में सप्ताह में पांच दिन कामकाज लागू करना शामिल है। कर्मचारी चाहते हैं कि शनिवार और रविवार को अवकाश रखते हुए पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू की जाए। इसके अलावा पेंशन के अपडेट और उसमें जरूरी सुधार की मांग भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल है।

    कर्मचारियों की एक अन्य मांग महंगाई भत्ते यानी DA की समान गणना से जुड़ी है। इसके साथ ही पुरानी पेंशन योजना यानी OPS का विकल्प दिए जाने की मांग भी उठाई गई है। कर्मचारियों का कहना है कि इन मुद्दों पर लंबे समय से उनकी ओर से मांग रखी जा रही है।

    हड़ताल के दौरान बैंक कर्मचारी शिवांगी राय खरे ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके अनुसार, लगातार मांगों पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

    बैंक कर्मचारी संजय खरे ने भी सरकार और बैंक प्रबंधन से कर्मचारियों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। उनका कहना है कि कर्मचारियों की ओर से उठाई जा रही मांगों पर जल्द समाधान किया जाना चाहिए।

    तीन दिनों तक बैंकिंग कामकाज प्रभावित रहने के कारण बैंक ग्राहकों को अपनी जरूरतों के लिए एटीएम और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। हालांकि, हड़ताल का मुख्य असर बैंक शाखाओं में होने वाले नियमित कामकाज पर पड़ रहा है।

    जबलपुर सहित प्रदेश में बैंक कर्मचारियों के आंदोलन के कारण शाखाओं में होने वाले कई जरूरी काम प्रभावित होने की स्थिति है। नकदी लेन-देन, चेक क्लीयरेंस और लोन से जुड़े कामों के साथ अन्य बैंकिंग गतिविधियों पर भी हड़ताल का असर पड़ रहा है।

    बैंक कर्मचारियों का यह आंदोलन उनकी लंबित मांगों को लेकर है। कर्मचारी संगठनों की ओर से पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था, पेंशन अपडेट, महंगाई भत्ते की समान गणना और पुरानी पेंशन योजना का विकल्प दिए जाने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए हैं।

    शुक्रवार से शुरू हुआ यह तीन दिवसीय बैंक बंदी का दौर रविवार तक जारी रहेगा। लगातार तीन दिन बैंक शाखाओं में नियमित कामकाज प्रभावित होने से बैंक ग्राहकों को अपने जरूरी कामों की योजना उसी के अनुसार बनानी होगी। कर्मचारियों ने सरकार और प्रबंधन से उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला लेने की मांग की है।