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  • सतना टाइगर शिकार केस में बड़ा मोड़, फरार मुख्य आरोपी की मौत; वन विभाग की जांच को बड़ा झटका

    सतना टाइगर शिकार केस में बड़ा मोड़, फरार मुख्य आरोपी की मौत; वन विभाग की जांच को बड़ा झटका


    सतना । मध्य प्रदेश के सतना जिले में सामने आए चर्चित बाघ शिकार मामले की जांच को बड़ा झटका लगा है। करंट लगाकर बाघ का शिकार करने और उसके नाखून तथा केनाइन निकालने के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी मुन्ना कोल की गिरफ्तारी से पहले ही मौत हो गई। वन विभाग को उम्मीद थी कि उसकी गिरफ्तारी के बाद बाघ के लापता 14 नाखूनों और अन्य वन्यजीव अंगों की बरामदगी हो सकेगी लेकिन उसकी मौत के साथ ही जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी टूट गई है। अब वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती गायब नाखूनों का पता लगाना और यह जानना है कि आखिर उन्हें कहां और किसके पास पहुंचाया गया।

    जानकारी के अनुसार मझगवां वन परिक्षेत्र में करीब ढाई महीने पहले शिकारियों ने जंगल में बिजली का करंट बिछाकर बाघ का शिकार किया था। बाघ की मौत के बाद आरोपियों ने उसके शव से नाखून और केनाइन निकाल लिए तथा सबूत मिटाने के उद्देश्य से शव को गड्ढा खोदकर जंगल में दफना दिया। इस सनसनीखेज घटना की भनक वन विभाग को लगभग दो महीने बाद लगी। इसके बाद तीन जुलाई को मुखबिर की सूचना पर विभाग ने जेसीबी की मदद से शव बाहर निकलवाया। जांच में पुष्टि हुई कि बाघ की मौत करंट लगने से हुई थी।

    पूरे मामले की जांच के दौरान वन विभाग ने 11 आरोपियों की पहचान की थी। इनमें से 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया जबकि मुख्य आरोपी मुन्ना कोल लगातार फरार था। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने बार-बार यही बताया कि बाघ के नाखूनों और उनके ठिकाने की पूरी जानकारी केवल मुन्ना कोल के पास थी। ऐसे में विभाग उसकी गिरफ्तारी को इस मामले की सबसे अहम कड़ी मान रहा था।

    जांच में यह भी सामने आया कि बाघ की मौत के बाद मुन्ना कोल ने उसके चारों पैर काटकर अलग-अलग स्थानों पर जमीन में दबा दिए थे। वहीं गिरोह के अन्य दो आरोपी सत्यम और शुभम ने बाघ के केनाइन निकाल लिए थे। बाद में जब अन्य साथियों ने नाखून मांगे तो मुन्ना ने दावा किया कि जमीन में दबे पैर किसी जंगली जानवर ने खोदकर निकाल लिए जिसके कारण केवल चार नाखून ही बरामद हो सके। इसी वजह से अब तक बाघ के 14 नाखूनों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार घटना उजागर होने के बाद से मुन्ना कोल गंभीर बीमारी से जूझ रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अलग-अलग स्थानों पर इलाज कराता रहा। विभाग उसकी तलाश में जुटा था लेकिन 18 जुलाई को उसकी मौत हो गई। इससे अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण सिरा समाप्त हो गया है और वन्यजीव तस्करी के संभावित नेटवर्क तक पहुंचना भी कठिन हो गया है।

    मझगवां रेंजर रंजन सिंह परिहार ने मुख्य आरोपी की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि अन्य आरोपियों ने भी पूछताछ में नाखूनों की जानकारी केवल मुन्ना कोल के पास होने की बात कही थी। वन विभाग अब उपलब्ध साक्ष्यों और गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ा रहा है। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गायब नाखून कहीं वन्यजीव तस्करों के नेटवर्क तक तो नहीं पहुंचा दिए गए।

  • छत का कांच तोड़कर घर में घुसे बदमाश, सराफा कारोबारी के यहां लाखों की चोरी; पुलिस जांच में जुटी

    छत का कांच तोड़कर घर में घुसे बदमाश, सराफा कारोबारी के यहां लाखों की चोरी; पुलिस जांच में जुटी


    सतना । मध्य प्रदेश के सतना शहर में चोरों ने एक सराफा कारोबारी के सूने मकान को निशाना बनाकर करीब 50 लाख रुपए की बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम दिया। परिवार के कुछ घंटों के लिए बाहर जाते ही बदमाश घर में घुस गए और सोने-चांदी के जेवरों के साथ नकदी भी समेटकर फरार हो गए। घटना का पता तब चला जब परिवार रात में वापस लौटा। घर के अंदर का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। कमरों का सामान बिखरा पड़ा था और अलमारियों के ताले टूटे हुए थे। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।

    यह वारदात सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के राज होम्स गली स्थित आस्था कुटी में रहने वाले 31 वर्षीय विपुल जैन के घर हुई। विपुल जैन का परिवार शहर के पावर हाउस चौक पर एचबी ज्वेलर्स के नाम से सराफा कारोबार संचालित करता है। रविवार दोपहर करीब तीन बजे पूरा परिवार उचेहरा के इचौल घूमने के लिए घर से निकला था। रात करीब साढ़े नौ बजे जब वे वापस लौटे तो मुख्य कमरों का सामान अस्त-व्यस्त मिला और अलमारियां खुली हुई थीं।

    विपुल जैन ने बताया कि सबसे पहले उनकी मां के कमरे की अलमारी खुली मिली। उसमें रखे सोने-चांदी के आभूषण और नकदी गायब थे। इसके बाद अपने और बड़े भाई के कमरों की जांच की गई तो वहां भी अलमारियों के ताले टूटे मिले और कीमती जेवर तथा नकदी चोरी हो चुकी थी। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार चोर करीब 50 लाख रुपए मूल्य का सामान लेकर फरार हुए हैं।

    मौके की जांच में सामने आया कि बदमाश छत के रास्ते घर में दाखिल हुए थे। घर की छत पर बने दरवाजे का कांच तोड़कर उन्होंने अंदर प्रवेश किया और फिर एक-एक कमरे की अलमारियां खंगाल डालीं। इससे साफ है कि चोरों ने पूरी वारदात सुनियोजित तरीके से अंजाम दी और उन्हें यह जानकारी थी कि घर में उस समय कोई मौजूद नहीं है।

    घटना की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जा सके।

    शहर में हुई इस बड़ी चोरी ने स्थानीय व्यापारियों और आम लोगों में चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। फिलहाल पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

  • एक घंटे की बारिश में डूबा बैकुंठपुर, दर्जनों दुकानों में घुसा पानी; नगर परिषद की तैयारियों की खुली पोल

    एक घंटे की बारिश में डूबा बैकुंठपुर, दर्जनों दुकानों में घुसा पानी; नगर परिषद की तैयारियों की खुली पोल


    रीवा । रीवा जिले के बैकुंठपुर नगर में सोमवार सुबह हुई करीब एक घंटे की तेज बारिश ने नगर परिषद की तैयारियों की हकीकत सामने ला दी। बारिश का दौर ज्यादा लंबा नहीं चला लेकिन इतनी ही देर में नगर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। सबसे अधिक प्रभावित वार्ड क्रमांक 10 रहा जहां केपी तिहारी के पास स्थित करीब एक दर्जन दुकानों में बारिश का पानी घुस गया। दुकानों में पानी भरने से व्यापारियों को अपना सामान सुरक्षित रखने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी जबकि कई स्थानों पर बारिश रुकने के बाद भी पानी लंबे समय तक जमा रहा।

    बारिश का सबसे ज्यादा असर ज्वेलर्स बर्तन जनरल स्टोर और रेडीमेड कपड़ों की दुकानों पर देखने को मिला। दुकानदारों ने जल्दबाजी में सामान ऊंची जगहों पर रखा ताकि नुकसान कम हो सके। अचानक हुए जलभराव के कारण ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित हुई और कारोबार पर असर पड़ा। स्थानीय लोगों को सड़क पर जमा पानी के बीच आवाजाही करने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बैकुंठपुर में जलभराव की समस्या कोई नई बात नहीं है। हर वर्ष मानसून के दौरान यही हालात बनते हैं लेकिन इसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। लोगों का आरोप है कि नगर परिषद नियमित रूप से नालियों की सफाई नहीं कराती जिसके कारण उनमें कचरा जमा रहता है और बारिश का पानी आसानी से नहीं निकल पाता। परिणामस्वरूप सड़कें तालाब में बदल जाती हैं और पानी दुकानों तथा घरों तक पहुंच जाता है।

    वार्डवासियों का कहना है कि स्वच्छता और नालियों की सफाई के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर दिखाई नहीं देता। उनका कहना है कि अभी मानसून की शुरुआत ही हुई है और यदि समय रहते जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। लगातार होने वाली बारिश से लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ दैनिक जीवन में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

    स्थानीय निवासी केपी तिहारी ने बताया कि महज एक घंटे की बारिश में ही उनकी सहित आसपास की कई दुकानों में पानी भर गया। उन्होंने कहा कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर परिषद से शिकायत की जा चुकी है लेकिन नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण हर वर्ष यही स्थिति बन जाती है। वहीं निवासी राजेश गुप्ता ने बताया कि वार्ड की कई नालियां लंबे समय से जाम हैं जिससे पानी की निकासी बाधित होती है और बारिश का पानी सीधे घरों तथा दुकानों में पहुंच जाता है।

    दूसरी ओर नगर परिषद का कहना है कि तेज बारिश के कारण कुछ स्थानों पर अस्थायी जलभराव हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक जहां भी नालियों में रुकावट की सूचना मिली है वहां सफाई दल भेजकर तत्काल सफाई कराई जा रही है। परिषद का दावा है कि पूरे बारिश के मौसम में जल निकासी व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता अनुसार सफाई अभियान चलाया जाएगा। हालांकि स्थानीय लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि हर मानसून में उन्हें इसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

  • विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में धार्मिक आयोजनों की शुरुआत, 6 सितंबर को होगा भव्य छप्पन भोग महोत्सव

    विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में धार्मिक आयोजनों की शुरुआत, 6 सितंबर को होगा भव्य छप्पन भोग महोत्सव


    मंदसौर । मंदसौर स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान पशुपतिनाथ महादेव मंदिर में सावन माह को लेकर धार्मिक उत्साह चरम पर पहुंचने लगा है। भगवान पशुपतिनाथ की पारंपरिक राजसी शाही सवारी इस वर्ष 24 अगस्त को सावन के अंतिम सोमवार के अवसर पर पूरे श्रद्धा और भव्यता के साथ निकाली जाएगी। इस ऐतिहासिक आयोजन की तैयारियां काली आरती मंडल और मंदिर समिति ने शुरू कर दी हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। शहर के प्रमुख मार्ग भगवान पशुपतिनाथ के जयघोष और भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान होंगे।

    भगवान पशुपतिनाथ की शाही सवारी केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि मंदसौर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी प्रतीक मानी जाती है। वर्ष 1996 से लगातार चली आ रही इस परंपरा का श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व है। सावन के अंतिम सोमवार को भगवान का राजसी स्वरूप सुसज्जित रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करता है। रास्ते भर श्रद्धालु पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत करते हैं और विभिन्न सामाजिक तथा धार्मिक संस्थाएं जगह-जगह मंच बनाकर आरती और स्वागत कार्यक्रम आयोजित करती हैं।

    आयोजन समिति के अनुसार सावन माह के दौरान प्रतिदिन सुबह 6 बजे से 8 बजे तक भगवान पशुपतिनाथ का विधि-विधान से रुद्राभिषेक और विशेष अभिषेक किया जाएगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन अनुष्ठानों में शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। मंदिर परिसर में पूरे सावन माह तक भक्ति और आस्था का विशेष वातावरण बना रहेगा।

    शाही सवारी से एक दिन पहले 23 अगस्त को भव्य वाहन रैली निकाली जाएगी। इस रैली के माध्यम से श्रद्धालुओं को शाही सवारी में शामिल होने का आमंत्रण दिया जाएगा और पूरे शहर में धार्मिक उत्सव का माहौल तैयार किया जाएगा। इसके बाद 24 अगस्त को भगवान पशुपतिनाथ की राजसी शाही सवारी निर्धारित मार्गों से होकर निकलेगी। सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए प्रशासन भी व्यापक तैयारियां करेगा ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    सावन माह के धार्मिक आयोजनों का समापन भी विशेष तरीके से किया जाएगा। 6 सितंबर को भगवान पशुपतिनाथ को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित कर भव्य छप्पन भोग महोत्सव आयोजित होगा। इस अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ प्रसादी वितरण भी किया जाएगा। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर छप्पन भोग का प्रसाद ग्रहण करेंगे।

    मंदिर समिति का कहना है कि सभी धार्मिक आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराए जाएंगे। श्रद्धालुओं से भी अपील की गई है कि वे अनुशासन बनाए रखते हुए आयोजनों में शामिल हों और धार्मिक गरिमा का पालन करें। सावन के इस पावन अवसर पर भगवान पशुपतिनाथ की नगरी एक बार फिर शिवभक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर होने जा रही है।

  • शुजालपुर स्टेशन पर यात्री पर चाकू से हमला कर लूट, सात दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली

    शुजालपुर स्टेशन पर यात्री पर चाकू से हमला कर लूट, सात दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली


    शुजालपुर । मध्य प्रदेश के शुजालपुर रेलवे स्टेशन पर हुई लूट और चाकूबाजी की घटना ने रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वारदात को हुए सात दिन बीत चुके हैं लेकिन रेलवे पुलिस अब तक आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है। घायल यात्री का अस्पताल में उपचार जारी है जबकि पुलिस आरोपियों की तलाश का दावा कर रही है।

    जानकारी के अनुसार घटना 13 जुलाई की रात करीब तीन बजे की है। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के नगरिया निवासी केशव सविता गोरखपुर उज्जैन ट्रेन के जनरल कोच में सफर कर रहे थे। ट्रेन जब शुजालपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो पर रुकी तो वे चने खरीदने के लिए नीचे उतरे। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे दो अज्ञात बदमाशों ने उन पर हमला कर दिया।

    बदमाशों ने केशव पर चाकू से वार किया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हमला करने के बाद दोनों आरोपी उनका पर्स और बैग लेकर मौके से फरार हो गए। अचानक हुई इस वारदात से स्टेशन पर अफरा तफरी का माहौल बन गया। घायल यात्री को तत्काल सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज जारी है।

    घटना की सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची और आसपास के इलाके में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान बदमाशों द्वारा फेंका गया पर्स और आधार कार्ड बरामद कर लिया गया जिसे बाद में पीड़ित को लौटा दिया गया। हालांकि बैग और अन्य सामान के साथ फरार हुए आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

    घटना के सात दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से यात्रियों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यात्रियों का कहना है कि देर रात स्टेशन पर पर्याप्त सुरक्षा बल की मौजूदगी नहीं होने का फायदा असामाजिक तत्व उठा रहे हैं।

    इधर स्टेशन पर एक और समस्या भी सामने आई है। यात्रियों ने शिकायत की है कि कुछ किन्नर जबरन पैसे मांगते हैं और कई बार ऑनलाइन भुगतान करने का दबाव भी बनाते हैं। इस संबंध में काजी एस रहमान ने शिकायत पुस्तिका में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्टेशन परिसर में ऐसी गतिविधियों पर भी सख्ती से रोक लगाई जानी चाहिए ताकि यात्रियों को सुरक्षित माहौल मिल सके।

    रेलवे पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। वहीं यह घटना एक बार फिर रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत की ओर इशारा कर रही है।

  • मध्य प्रदेश में डीजल की कीमतें स्थिर, 18 जुलाई को भी नहीं बदले ईंधन के दाम; जिलों में टैक्स के अनुसार दिखा मूल्य अंतर

    मध्य प्रदेश में डीजल की कीमतें स्थिर, 18 जुलाई को भी नहीं बदले ईंधन के दाम; जिलों में टैक्स के अनुसार दिखा मूल्य अंतर


    मध्य प्रदेश:  में 18 जुलाई 2026 को डीजल की कीमतों में कोई बदलाव दर्ज नहीं किया गया है। राज्य में डीजल का औसत खुदरा मूल्य लगभग 100.50 रुपये प्रति लीटर बना हुआ है। एक दिन पहले यानी 17 जुलाई को भी कीमतें इसी स्तर पर थीं। लगातार स्थिर बने हुए ईंधन दामों से वाहन चालकों, परिवहन क्षेत्र और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को फिलहाल राहत मिली हुई है। हालांकि राज्य के विभिन्न जिलों में स्थानीय करों और परिवहन लागत के कारण प्रति लीटर कीमतों में अंतर बना हुआ है।

    मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों और जिलों की बात करें तो राजधानी भोपाल में डीजल 99.33 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है, जबकि इंदौर में इसकी कीमत 100.09 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। जबलपुर में डीजल 99.69 रुपये, ग्वालियर में 99.59 रुपये और उज्जैन में 100.11 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बना हुआ है। वहीं रीवा, अनूपपुर, मंडला, धार, छतरपुर, शाहडोल, उमरिया और सतना जैसे कई जिलों में डीजल का मूल्य 101 रुपये प्रति लीटर से अधिक है। दूसरी ओर अशोकनगर, भोपाल, ग्वालियर और सीहोर जैसे कुछ जिलों में कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर से नीचे बनी हुई हैं।

    राज्य में जिलावार कीमतों का यह अंतर मुख्य रूप से स्थानीय वैट, परिवहन व्यय और अन्य करों के कारण देखने को मिलता है। इसी वजह से एक ही राज्य के भीतर अलग-अलग स्थानों पर उपभोक्ताओं को डीजल के लिए अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ती है। ईंधन कंपनियां प्रत्येक जिले के कर ढांचे और वितरण लागत के आधार पर खुदरा मूल्य तय करती हैं।

    देश में ईंधन की कीमतें डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग प्रणाली के तहत निर्धारित की जाती हैं। इस व्यवस्था के अनुसार पेट्रोल और डीजल के दामों की समीक्षा प्रतिदिन की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर नई दरें रोज सुबह 6 बजे लागू होती हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार, विनिमय दर या अन्य आर्थिक संकेतकों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता तो कीमतें कई दिनों तक स्थिर भी रह सकती हैं।

    डीजल की कीमत तय करने में कई महत्वपूर्ण आर्थिक कारकों की भूमिका होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, रुपये और अमेरिकी डॉलर के बीच विनिमय दर, वैश्विक मांग और आपूर्ति की स्थिति, शिपिंग लागत तथा कर संरचना जैसे तत्व अंतिम खुदरा मूल्य को प्रभावित करते हैं। इन सभी कारकों में बदलाव होने पर ईंधन की कीमतों में वृद्धि या कमी देखने को मिल सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल केवल निजी वाहनों के लिए ही नहीं बल्कि माल परिवहन, कृषि, निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में इसकी कीमतों में स्थिरता का सीधा असर परिवहन लागत और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर पड़ता है। लंबे समय तक कीमतें स्थिर रहने से व्यापारिक गतिविधियों की लागत नियंत्रित रहती है और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं बढ़ता।

    फिलहाल मध्य प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि जुलाई महीने में डीजल की कीमतों में कोई उल्लेखनीय बदलाव दर्ज नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार नई कीमतें तय होंगी, जिनकी घोषणा प्रतिदिन सुबह की जाएगी। वाहन चालकों और व्यवसायों के लिए सलाह है कि ईंधन भरवाने से पहले अपने जिले की ताजा कीमत की जानकारी अवश्य प्राप्त करें, क्योंकि स्थानीय करों के कारण अलग-अलग शहरों में दरों में अंतर बना रह सकता है।

  • मध्य प्रदेश के कई शहरों की तैयारी पर उठे सवाल, अर्बन चैलेंज फंड में उज्जैन-इंदौर को बढ़त, छिंदवाड़ा और कटनी को करना होगा इंतजार

    मध्य प्रदेश के कई शहरों की तैयारी पर उठे सवाल, अर्बन चैलेंज फंड में उज्जैन-इंदौर को बढ़त, छिंदवाड़ा और कटनी को करना होगा इंतजार


    मध्य प्रदेश:
    भारत सरकार के अर्बन चैलेंज फंड के पहले चरण में मध्य प्रदेश के लिए 2753.10 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। यह स्वीकृति राज्य के कई शहरों में जल प्रदाय, सीवरेज नेटवर्क, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और धार्मिक पर्यटन से जुड़े विकास कार्यों को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि इस प्रक्रिया में कुछ प्रमुख नगर निगम आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी नहीं कर सके, जिसके कारण उन्हें पहले चरण का लाभ नहीं मिल पाया।

    पहले चरण में सबसे बड़ा झटका छिंदवाड़ा, कटनी और ग्वालियर नगर निगमों को लगा। इन शहरों की परियोजनाएं समय पर निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रस्तुत नहीं हो सकीं, जिससे इन्हें अब अगले चरण की प्रक्रिया का इंतजार करना होगा। अधिकारियों के अनुसार परियोजनाओं की तकनीकी और वित्तीय तैयारी में कमी के कारण प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति तक नहीं पहुंच पाए।

    छिंदवाड़ा नगर निगम ने लगभग 67 करोड़ रुपये की जल प्रदाय परियोजना तैयार की थी, लेकिन इसके लिए आवश्यक वित्तीय व्यवस्था और ऋण संबंधी दस्तावेज स्पष्ट नहीं होने के कारण प्रस्ताव अधूरा माना गया। इसी प्रकार कटनी नगर निगम ने लगभग 600 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्यों की योजना बनाई थी, लेकिन समय पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं होने से परियोजना पहले चरण में शामिल नहीं हो सकी।

    ग्वालियर नगर निगम की स्थिति भी इससे अलग नहीं रही। यहां जल प्रदाय और सीवरेज से जुड़े 1500 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य प्रस्तावित थे, लेकिन विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन समय पर तैयार नहीं हो पाया। इसके कारण इतने बड़े निवेश वाली योजना भी फिलहाल अगले चरण के लिए स्थगित कर दी गई। राजधानी भोपाल को भी पहले चरण में परियोजना के तहत राशि नहीं मिल सकी।

    इसके विपरीत इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और रीवा जैसे शहरों की परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इंदौर में जल प्रदाय व्यवस्था और वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए 907 करोड़ रुपये तथा सीवर नेटवर्क उन्नयन और ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 306 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। जबलपुर में जल प्रदाय विस्तार के लिए 64 करोड़ और सीवरेज परियोजना के लिए 250 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। रीवा को जल प्रदाय व्यवस्था के लिए 99 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है।

    धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उज्जैन को इस चरण में सबसे बड़ी मंजूरी मिली है। यहां 11 प्रमुख मंदिर परिसरों के समग्र विकास और कॉरिडोर निर्माण के लिए 1124 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और शहरी अधोसंरचना को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण निवेश माना जा रहा है।

    अर्बन चैलेंज फंड के तहत केंद्र सरकार परियोजना लागत का 25 प्रतिशत, यानी लगभग 688.28 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी। शेष राशि में 50 प्रतिशत संबंधित नगरीय निकायों को बॉण्ड, ऋण या अन्य वित्तीय साधनों के माध्यम से जुटानी होगी, जबकि निजी निवेश को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। राज्य का कुल हिस्सा लगभग 5000 करोड़ रुपये रहेगा और इसके माध्यम से अगले पांच वर्षों में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये की शहरी विकास परियोजनाएं पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    इस पूरी प्रक्रिया ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल योजनाएं तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय पर वित्तीय, तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियां पूरी करना भी उतना ही आवश्यक है। जिन नगर निगमों की परियोजनाएं पहले चरण से बाहर रह गई हैं, उनके लिए अगले चरण से पहले सभी औपचारिकताएं पूरी करना बड़ी चुनौती होगी। यदि ऐसा किया जाता है तो भविष्य में इन शहरों को भी आधुनिक शहरी सुविधाओं और आधारभूत विकास का लाभ मिल सकेगा।

  • जनकल्याण और बुनियादी ढांचे पर सरकार का बड़ा निवेश, 8,445 करोड़ रुपये शहरी विकास के लिए स्वीकृत, मूंग उपार्जन और सिंचाई परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी

    जनकल्याण और बुनियादी ढांचे पर सरकार का बड़ा निवेश, 8,445 करोड़ रुपये शहरी विकास के लिए स्वीकृत, मूंग उपार्जन और सिंचाई परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी

    मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जनकल्याण योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से 10 हजार 800 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में शहरी अधोसंरचना, सिंचाई, कृषि, महिला एवं बाल विकास तथा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से प्रदेश के विकास कार्यों को नई दिशा मिलेगी और विभिन्न वर्गों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।

    बैठक में सबसे बड़ी स्वीकृति नगरीय क्षेत्रों के अधोसंरचना विकास के लिए दी गई। राज्य सरकार ने आगामी पांच वर्षों के लिए 8 हजार 445 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। यह धनराशि नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, पेयजल, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य आधारभूत विकास परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी। साथ ही स्थानीय निकायों द्वारा विकास कार्यों के लिए लिए गए ऋणों के पुनर्भुगतान में भी इसका उपयोग किया जाएगा, जिससे शहरी विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी।

    मंत्रिपरिषद ने किसानों के हित में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया। रबी वर्ष 2023-24 के दौरान लक्ष्य से अधिक खरीदी गई मूंग के भुगतान के लिए 1,587 करोड़ रुपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध कराने को मंजूरी दी गई। इस निर्णय के तहत विभिन्न बैंकों से ली गई साख सीमा के शेष दायित्वों के लिए सरकारी गारंटी प्रदान की जाएगी। सरकार का उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना और उपार्जन प्रक्रिया को वित्तीय रूप से सुचारु बनाए रखना है।

    सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजगढ़ जिले की कुण्डलिया वृहद सिंचाई परियोजना के संचालन को वर्ष 2031 तक जारी रखने के लिए 245 करोड़ 45 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के माध्यम से राजगढ़ और आगर-मालवा जिलों के लगभग 1 लाख 39 हजार 600 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के जरिए सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। सरकार का मानना है कि इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

    बैठक में महिला एवं बाल विकास से जुड़ा भी अहम निर्णय लिया गया। टेक-होम राशन के उत्पादन और वितरण की व्यवस्था को राज्य आजीविका फोरम से वापस लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपने का निर्णय लिया गया है। अंतरिम व्यवस्था के तहत स्व-सहायता समूहों के माध्यम से पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही भविष्य में केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्थायी व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे पोषण योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

    मंत्रिपरिषद ने वाणिज्यिक कर विभाग की स्थापना योजनाओं के संचालन के लिए भी 521 करोड़ 4 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। यह राशि आगामी पांच वर्षों तक मुख्यालय, जिला और परिक्षेत्रीय कार्यालयों के संचालन, कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, कार्यालय व्यय, व्यावसायिक सेवाओं तथा आवश्यक संसाधनों के रखरखाव पर खर्च की जाएगी। सरकार का मानना है कि इन निर्णयों से प्रशासनिक व्यवस्था और सेवा वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी।

    राज्य सरकार का कहना है कि शहरी विकास, कृषि, सिंचाई, पोषण और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े इन फैसलों का उद्देश्य प्रदेश के समग्र विकास को नई गति देना है। विभिन्न विभागों को मिली वित्तीय स्वीकृतियों के माध्यम से विकास परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, किसानों के हितों की सुरक्षा, शहरी सुविधाओं के विस्तार और जनकल्याण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है।

  • मध्य प्रदेश के 41 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को बड़ी सौगात, राज्य सरकार इस वर्ष बांटेगी 139 करोड़ रुपये का बोनस, वन विभाग ने शुरू की तैयारियां

    मध्य प्रदेश के 41 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को बड़ी सौगात, राज्य सरकार इस वर्ष बांटेगी 139 करोड़ रुपये का बोनस, वन विभाग ने शुरू की तैयारियां

    मध्य प्रदेश सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए इस वर्ष बड़ी आर्थिक राहत का ऐलान करते हुए 139 करोड़ रुपये के बोनस वितरण की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य के लगभग 41 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को इस योजना का लाभ मिलेगा। वन विभाग के अंतर्गत कार्यरत राज्य लघु वनोपज संघ ने बोनस वितरण की पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली है और इस संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी मुख्य सचिव अनुराग जैन के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। सरकार का उद्देश्य वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की आय बढ़ाना और उन्हें समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

    राज्य में तेंदूपत्ता संग्रहण लाखों ग्रामीण और वनवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। हर वर्ष संग्रहण सीजन के दौरान बड़ी संख्या में लोग इस कार्य से जुड़ते हैं और इससे होने वाली आय उनके परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बोनस वितरण की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि पात्र संग्राहकों तक राशि शीघ्र पहुंचाई जा सके।

    वन विभाग की योजना के अनुसार वर्ष 2026-27 के लिए 17.72 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभिन्न वन मंडलों में आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर प्रबंधन और संगठित व्यवस्था के माध्यम से संग्रहण कार्य को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाएगा, जिससे संग्राहकों को भी अधिक लाभ मिल सके।

    सरकार ने संग्रहण वर्ष 2026 के दौरान तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले 41 लाख संग्राहकों को कुल 708 करोड़ रुपये संग्रहण पारिश्रमिक के रूप में देने की व्यवस्था की है। इसके अतिरिक्त संग्रहण वर्ष 2024 के लाभांश का 75 प्रतिशत हिस्सा, जो 139 करोड़ रुपये है, इस वर्ष बोनस के रूप में वितरित किया जाएगा। इससे लाखों परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बोनस वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पात्र हितग्राहियों की जानकारी का सत्यापन, भुगतान से जुड़ी औपचारिकताओं का समय पर निष्पादन और सभी आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां तेजी से पूरी की जा रही हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बोनस राशि बिना किसी अनावश्यक विलंब के लाभार्थियों तक पहुंच सके।

    राज्य सरकार का मानना है कि तेंदूपत्ता संग्रहण केवल वन उपज से जुड़ी गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार भी है। इसलिए इस क्षेत्र में कार्यरत संग्राहकों को नियमित पारिश्रमिक और लाभांश उपलब्ध कराना उनकी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। सरकार भविष्य में भी लघु वनोपज आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने, वनवासी परिवारों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसरों का विस्तार करने के लिए विभिन्न योजनाओं पर कार्य करती रहेगी। बोनस वितरण की इस पहल से प्रदेश के लाखों तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा और वन आधारित आजीविका को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषित किए कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और हजारों रोजगार देने वाली परियोजनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषित किए कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और हजारों रोजगार देने वाली परियोजनाएं

    मध्य प्रदेश ने तकनीकी और डिजिटल उद्योगों के क्षेत्र में अपनी विकास रणनीति को नई गति देते हुए एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। राज्य सरकार ने सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और आईटी अवसंरचना के विस्तार को प्राथमिकता देते हुए निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने का भरोसा जताया। कॉन्क्लेव में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे राज्य में 34 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 51 प्रमुख गतिविधियों का आयोजन किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार भविष्य की तकनीकों को अपनाने और उद्योगों के लिए आधुनिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर लगातार काम कर रही है। इसी दिशा में प्रदेश में सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा, जो कौशल विकास, अनुसंधान, उद्योगों के साथ सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही एवीजीसी-एक्सआर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना भी की जाएगी, जिससे एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहन मिलेगा।

    राज्य सरकार ने आईटी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए कई नई परियोजनाओं की भी घोषणा की है। भोपाल आईटी पार्क में नया आईटी टॉवर विकसित किया जाएगा, जहां जीसीसी, आईटी और डिजिटल सेवा कंपनियों के लिए आधुनिक प्लग-एंड-प्ले कार्यालय उपलब्ध होंगे। भोपाल के कोलार क्षेत्र में भी इसी सुविधा से युक्त नया आईटी पार्क बनाया जाएगा, ताकि नई तकनीकी कंपनियां कम समय में अपना संचालन शुरू कर सकें। वहीं इंदौर के सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में लगभग तीन लाख वर्ग फीट निर्मित क्षेत्र वाला अत्याधुनिक आईटी पार्क विकसित किया जाएगा, जहां विश्वस्तरीय डिजिटल और आईटी कंपनियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार के सहयोग से मंथन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और ग्लोबल स्किल्स पार्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित किए जाएंगे। इन संस्थानों के माध्यम से नवाचार, अनुसंधान, उद्योग-अकादमिक सहयोग और आधुनिक तकनीकी कौशल को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश साइंस सिटी, डीप टेक पार्क, डेटा सेंटर और एआई आधारित परियोजनाओं के माध्यम से नई तकनीकों को तेजी से अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    सरकार के अनुसार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के बाद तकनीकी क्षेत्र में 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश पर काम शुरू हो चुका है। वहीं पिछले दो टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव के माध्यम से राज्य को 46 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आठ देशों की दस प्रमुख कंपनियों की 28 हजार 200 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं वर्तमान में ग्राउंडब्रेकिंग चरण में हैं। इनमें एआई-रेडी डेटा सेंटर, फूड प्रोसेसिंग, फार्मास्यूटिकल्स और स्पेशियलिटी फिल्म्स जैसे क्षेत्रों की परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें स्पेन की कंपनी द्वारा भोपाल में बड़े एआई-रेडी डेटा सेंटर की स्थापना भी प्रस्तावित है।

    कॉन्क्लेव के दौरान आठ कंपनियों को भूमि आवंटन के आशय-पत्र भी सौंपे गए। इन परियोजनाओं में 203.58 करोड़ रुपये का निवेश और 1,242 नए रोजगार सृजित होने का अनुमान है। यह निवेश इंदौर के सिंहासा आईटी पार्क और भोपाल के बड़वई आईटी पार्क में आईटी, आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, आईटी अवसंरचना और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करेगा। कार्यक्रम के दौरान गूगल प्ले के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल क्षमता विकास के क्षेत्र में सहयोग को लेकर समझौता भी किया गया। राज्य सरकार का मानना है कि इन पहलों से मध्य प्रदेश तकनीकी निवेश, नवाचार और डिजिटल उद्योगों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।