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  • मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण मामले की हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा, हजारों अभ्यर्थियों की नजर

    मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण मामले की हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा, हजारों अभ्यर्थियों की नजर

    मध्य प्रदेश: में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC आरक्षण से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। अदालत ने मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस प्रकरण में न्यायालय के अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। फैसले का असर OBC वर्ग के अभ्यर्थियों और आरक्षण से जुड़े विभिन्न मामलों पर पड़ने की संभावना है।

    यह मामला वर्ष 2019 से न्यायिक प्रक्रिया में लंबित बताया जा रहा है। करीब सात साल से चल रहे इस प्रकरण के कारण OBC वर्ग के अभ्यर्थियों के बीच लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सुनवाई पूरी होने के बाद अब सभी पक्षों की निगाहें अदालत के निर्णय पर टिकी हैं।

    मामले की सुनवाई के दौरान OBC आरक्षण से संबंधित पक्षों ने अपनी दलीलें और तर्क न्यायालय के सामने रखे। OBC महासभा की ओर से भी इस प्रकरण को सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्ग के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बताया गया है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से लंबित रहने के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं।

    OBC महासभा के संस्थापक अध्यक्ष विजय कुमार ने कहा कि जबलपुर हाई कोर्ट में लंबित प्रकरण पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा है। उनके अनुसार, OBC वर्ग से जुड़े पक्षकारों और अधिवक्ताओं ने मामले में अपनी बात रखी है। अब न्यायालय के निर्णय का इंतजार है।

    मामले से जुड़े पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि लगभग 80 से 90 हजार OBC वर्ग के बच्चे और अभ्यर्थी इस प्रकरण से प्रभावित हैं। लंबे समय से आरक्षण व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण उनकी शैक्षणिक और रोजगार संबंधी संभावनाओं पर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

    आरक्षण का मुद्दा मध्य प्रदेश में लंबे समय से राजनीतिक, सामाजिक और न्यायिक चर्चा का विषय रहा है। OBC वर्ग के लिए आरक्षण से संबंधित विभिन्न नियुक्तियों और शैक्षणिक अवसरों में स्थिति स्पष्ट होने को लेकर अभ्यर्थियों की नजर न्यायालय के निर्णय पर रहती है। ऐसे में फैसला सुरक्षित होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि आगे की स्थिति न्यायिक निर्णय से स्पष्ट होगी।

    OBC महासभा ने न्यायालय से जल्द फैसला सुनाए जाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि मामले के लंबे समय से लंबित रहने के कारण अभ्यर्थियों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। फैसला आने के बाद आरक्षण से संबंधित कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्थिति साफ हो सकेगी।

    फिलहाल हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा है। अदालत कब तक फैसला सुनाएगी, इसकी निश्चित तारीख की जानकारी सामने नहीं आई है। अंतिम निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि OBC आरक्षण से जुड़े लंबित विवाद पर न्यायालय का रुख क्या रहता है और उसका अभ्यर्थियों पर किस प्रकार प्रभाव पड़ेगा।

    करीब सात वर्षों से चल रहे इस मामले में सुनवाई पूरी होना अपने आप में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब OBC वर्ग के अभ्यर्थियों, संगठनों और संबंधित पक्षों की निगाहें हाई कोर्ट के फैसले पर केंद्रित हैं। निर्णय आने के बाद ही आरक्षण व्यवस्था से जुड़े आगे के कदम और प्रभावित अभ्यर्थियों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी, जनता से सुझाव लेने के लिए जल्द शुरू होगा पोर्टल

    स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी, जनता से सुझाव लेने के लिए जल्द शुरू होगा पोर्टल

    उज्जैन। मध्यप्रदेश के पंचायत और नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। छठे मध्यप्रदेश वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने बताया कि जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा, जिसके माध्यम से आम नागरिक भी स्थानीय निकायों के विकास और वित्तीय मजबूती के लिए अपने सुझाव दे सकेंगे। फिलहाल आयोग संभाग स्तर पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सुझाव जुटा रहा है।

    उज्जैन प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए पवैया ने बताया कि आयोग अब तक छह संभागों का दौरा कर चुका है। पहले चरण में सांसदों, विधायकों, नगरीय निकायों और पंचायतों के प्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से सुझाव लिए जा रहे हैं। सभी नौ संभागों से प्राप्त सुझावों के आधार पर आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसे राज्यपाल को सौंपा जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार स्थानीय निकायों को वित्तीय आवंटन करेगी।

    उन्होंने बताया कि अब तक कई उपयोगी सुझाव मिले हैं। इनमें प्रत्येक पंचायत और नगरीय निकाय में सोलर एनर्जी प्लांट स्थापित करने का सुझाव विशेष रूप से प्रभावी माना गया है। उनका कहना है कि वर्तमान में स्थानीय निकायों की बड़ी राशि स्ट्रीट लाइट और नल-जल योजनाओं के बिजली बिल पर खर्च होती है। यदि निकाय स्वयं बिजली उत्पादन करें तो न केवल उनका खर्च कम होगा, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी अर्जित कर सकेंगे। उन्होंने इंदौर नगर निगम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सोलर ऊर्जा और कचरे से बायोगैस बनाकर आय बढ़ाने की दिशा में सफल प्रयास किए जा रहे हैं।

    केंद्रीय वित्त आयोग की अनुदान राशि में कटौती के सवाल पर पवैया ने स्पष्ट किया कि फंड में कमी नहीं की गई है। बल्कि पहले की तुलना में अधिक राशि उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि अब अनुदान प्राप्त करने के लिए निकायों के कार्यों की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

    उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सुझाव लेने के बाद पंचायत और जनपद स्तर पर भी संवाद किया जाएगा। इसके बाद आम नागरिकों के सुझाव प्राप्त करने के लिए पोर्टल शुरू किया जाएगा। साथ ही आर्थिक विशेषज्ञों से भी परामर्श लिया जाएगा, ताकि स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने और विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाली प्रभावी सिफारिशें तैयार की जा सकें।

    बैठक के दौरान कई अन्य सुझाव भी सामने आए। नागदा-खाचरौद विधायक डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान ने ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के दौरान आवश्यक कच्चे कार्यों, जैसे मुरम और चूरी डालने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा। वहीं कांग्रेस विधायक दिनेश जैन बोस और महेश परमार ने भी आयोग के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

  • प्रमोशन में आरक्षण पर नई बहस, सरकार के डेटा को कोर्ट में चुनौती दे सकता है सामान्‍य वर्ग

    प्रमोशन में आरक्षण पर नई बहस, सरकार के डेटा को कोर्ट में चुनौती दे सकता है सामान्‍य वर्ग

    जबलपुर। मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण का मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। फिलहाल हाईकोर्ट की विशेष खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले की स्थिति साफ होने के बाद ही आगे सुनवाई होगी। अदालत ने सरकार और सभी पक्षों को शीर्ष अदालत में शीघ्र सुनवाई का आग्रह करने की सलाह दी है।

    हालांकि न्यायिक प्रक्रिया फिलहाल रुकी हुई है, लेकिन दोनों पक्ष अपनी कानूनी तैयारियों में जुटे हैं। जानकारी के अनुसार, अगली सुनवाई में सरकार द्वारा प्रस्तुत क्वांटिफिएबल डेटा सबसे बड़ा विवाद का विषय बन सकता है।

    सरकार के आंकड़ों पर उठेंगे सवाल
    सामान्य वर्ग की ओर से अदालत में यह तर्क रखा जाएगा कि कई सरकारी विभागों में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का प्रतिनिधित्व पहले से पर्याप्त है। ऐसे में पदोन्नति में आरक्षण जारी रखने का आधार क्या है, इस पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, सामान्य वर्ग विभिन्न विभागों के आंकड़ों के जरिए यह साबित करने की तैयारी में है कि जहां पर्याप्त प्रतिनिधित्व मौजूद है, वहां भी आरक्षण का लाभ जारी रखा गया।

    X और Y फैक्टर पर रहेगा फोकस
    मामले में सबसे अहम मुद्दा सरकार द्वारा तय किए गए X और Y फैक्टर हैं, जिनके आधार पर प्रमोशन में आरक्षण का प्रतिशत निर्धारित किया गया है।

    SC वर्ग के लिए: कुल पद × (16 × X) ÷ 100
    ST वर्ग के लिए: कुल पद × (20 × Y) ÷ 100

    यदि X या Y का मान 1 रखा जाता है तो पूरा आरक्षण लागू होता है, जबकि कम मान होने पर आरक्षण का प्रतिशत भी घट जाता है। सामान्य वर्ग का आरोप है कि कई विभागों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व होने के बावजूद X और Y का मान कम नहीं किया गया, जिससे आरक्षण का प्रतिशत अधिक बना रहा।

    प्रक्रिया पर भी उठेंगे सवाल
    याचिकाकर्ताओं का कहना है कि X और Y तय करने के लिए कोई स्पष्ट और समान मानक नहीं अपनाया गया। समान परिस्थितियों वाले विभागों में अलग-अलग मान निर्धारित किए गए, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

    प्रशासनिक दक्षता भी बनेगी मुद्दा

    अगली सुनवाई में प्रशासनिक दक्षता का मुद्दा भी प्रमुख रहेगा। सामान्य वर्ग का पक्ष है कि केवल एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) के आधार पर दक्षता का आकलन पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उनका तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद-335 के अनुरूप कार्यक्षमता का व्यापक मूल्यांकन होना चाहिए।

    पांच साल तक एक ही फॉर्मूले पर आपत्ति

    सरकार द्वारा X और Y फैक्टर को पांच वर्ष तक लागू रखने के प्रावधान पर भी सवाल उठाए जाएंगे। सामान्य वर्ग का कहना है कि प्रतिनिधित्व की स्थिति समय के साथ बदलती रहती है, इसलिए पुराने आंकड़ों के आधार पर लंबे समय तक एक ही व्यवस्था लागू रखना उचित नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
    फिलहाल पूरे मामले की दिशा सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर निर्भर है। हाईकोर्ट ने भी संकेत दिया है कि शीर्ष अदालत की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। हालांकि, माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में सरकार के डेटा, X-Y फैक्टर और प्रशासनिक दक्षता जैसे मुद्दों पर विस्तृत और अहम बहस देखने को मिल सकती है, जिसका असर हजारों सरकारी कर्मचारियों पर पड़ सकता है।

  • एमपी में बस यात्रा हुई महंगी, परिवहन विभाग ने नई किराया दरें लागू कीं, जानिए किस श्रेणी की बस में कितना लगेगा किराया

    एमपी में बस यात्रा हुई महंगी, परिवहन विभाग ने नई किराया दरें लागू कीं, जानिए किस श्रेणी की बस में कितना लगेगा किराया


    मध्य प्रदेश।  में बस यात्रियों को अब सफर के लिए पहले की तुलना में अधिक किराया चुकाना होगा। राज्य के परिवहन विभाग ने मंजिली बसों के लिए नया अधिकतम यात्री किराया निर्धारित करते हुए संशोधित दरों की अधिसूचना जारी कर दी है। नए नियमों के अनुसार सामान्य बसों में अब अधिकतम मूल किराया 2 रुपये प्रति यात्री प्रति किलोमीटर होगा, जबकि न्यूनतम टिकट मूल्य 10 रुपये तय किया गया है। इस निर्णय के बाद प्रदेशभर में बस यात्रा की लागत बढ़ जाएगी और इसका सीधा असर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा।

    परिवहन विभाग के अनुसार किराया संशोधन विभिन्न श्रेणियों की बस सेवाओं को ध्यान में रखकर किया गया है। सामान्य बसों के अलावा डीलक्स, स्लीपर, वातानुकूलित और सुपर लग्जरी बसों के लिए भी अलग-अलग अधिकतम किराया निर्धारित किया गया है। सरकार का कहना है कि संशोधित दरों का उद्देश्य परिवहन व्यवस्था को संतुलित बनाए रखना और बढ़ती परिचालन लागत के अनुरूप किराया संरचना तैयार करना है।

    नई व्यवस्था के तहत रात्रिकालीन सामान्य बस सेवा के लिए सामान्य किराए की तुलना में 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लिया जा सकेगा। वहीं नॉन-एसी डीलक्स बसों में अधिकतम 25 प्रतिशत, स्लीपर बसों में 40 प्रतिशत, एसी डीलक्स बसों में 50 प्रतिशत तथा सुपर लग्जरी एसी कोच में 75 प्रतिशत तक अधिक किराया लिया जा सकेगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि डीलक्स, स्लीपर और लग्जरी बसों पर अलग से नाइट चार्ज लागू नहीं होगा। इसी प्रकार एक्सप्रेस बस सेवाओं के लिए भी अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    राज्य में बस किराया बढ़ाने का निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब निजी बस संचालकों ने बढ़ती लागत और परिचालन संबंधी चुनौतियों का हवाला देते हुए किराया संशोधन की मांग की थी। बस ऑपरेटरों की ओर से हड़ताल की चेतावनी दिए जाने के बाद सरकार ने किराया ढांचे की समीक्षा की और संशोधित दरों को मंजूरी दी। इसके बाद परिवहन विभाग ने नई दरों का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल, रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और अन्य परिचालन खर्चों में लगातार वृद्धि के कारण परिवहन क्षेत्र पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। ऐसे में किराया संशोधन को परिवहन सेवाओं के संचालन से जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरी ओर यात्रियों का मानना है कि बढ़े हुए किराए से दैनिक यात्रा का खर्च और बढ़ेगा, विशेषकर उन लोगों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ेगा जो नियमित रूप से बसों से आवागमन करते हैं।

    परिवहन विभाग ने कहा है कि नई किराया दरें निर्धारित नियमों के अनुसार लागू होंगी और बस संचालकों को इन्हीं अधिकतम दरों का पालन करना होगा। विभाग समय-समय पर किराया व्यवस्था की समीक्षा भी करता रहेगा ताकि यात्रियों और परिवहन संचालकों दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके। आने वाले दिनों में नई दरों का प्रभाव प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन और यात्रियों के खर्च पर साफ दिखाई देने की संभावना है।

  • सियासी घटनाओं से गरमाया MP, संसद में तीखे तेवर, नर्स का अनोखा विरोध और शाह-वीडी बैठक सुर्खियों में

    सियासी घटनाओं से गरमाया MP, संसद में तीखे तेवर, नर्स का अनोखा विरोध और शाह-वीडी बैठक सुर्खियों में


    भोपाल। मध्य प्रदेश में राजनीति और प्रशासन से जुड़ी कई घटनाएं शनिवार को चर्चा का केंद्र बनी रहीं। एक ओर संसद में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए उसके विरोध प्रदर्शन को सड़क छाप राजनीति करार दिया तो दूसरी ओर भाजपा सांसद विष्णु दत्त शर्मा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। इसी बीच अनूपपुर जिले से सामने आया एक वीडियो सरकारी व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत बयां करता नजर आया जिसमें एक नर्स मोबाइल नेटवर्क की तलाश में पेड़ पर चढ़कर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की कोशिश करती दिखाई दी।

    राज्यसभा में उस समय माहौल गरमा गया जब विपक्ष ने जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। सभापति की ओर से अनुमति नहीं मिलने पर विपक्षी सदस्य नारेबाजी करने लगे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सदन में लोकतंत्र की मर्यादा को तार तार किया जा रहा है और विपक्ष केवल अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और ऐसे व्यवहार को कभी स्वीकार नहीं करेगी। हालांकि विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा और सदन में नारेबाजी होती रही।

    इधर दिल्ली में भाजपा सांसद विष्णु दत्त शर्मा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या पार्टी उन्हें कोई नई जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से हटने के बाद फिलहाल वे सांसद के रूप में सक्रिय हैं लेकिन अमित शाह से मुलाकात को लेकर राजनीतिक विश्लेषक अलग अलग अर्थ निकाल रहे हैं। हालांकि भाजपा की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

    राजनीति के साथ साथ प्रशासनिक व्यवस्था की एक तस्वीर अनूपपुर जिले से सामने आई जिसने सभी का ध्यान खींचा। पुष्पराजगढ़ के गन्नागोडा स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एक नर्स ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए पेड़ पर चढ़ गई। स्वास्थ्य केंद्र में मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने के कारण उसे मजबूरी में यह तरीका अपनाना पड़ा। वायरल वीडियो में नर्स यह कहते हुए दिखाई दे रही है कि जब तक ऑनलाइन अटेंडेंस नहीं लग जाएगी तब तक वह नीचे नहीं उतरेगी। यह घटना ग्रामीण इलाकों में डिजिटल व्यवस्था और नेटवर्क की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े करती है।

    उधर दतिया उपचुनाव को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज बनी हुई है। मतदान संपन्न होने के बाद अब राजनीतिक दल अपने अपने दावे कर रहे हैं। इसी बीच यह चर्चा भी सामने आई कि मतदान से पहले एक होटल में हुई रणनीतिक बैठक में विरोधी दल के साथ कुछ ऐसे लोग भी मौजूद थे जिन्हें राजनीतिक तौर पर दूसरे खेमे के करीबी माना जाता है। बताया जा रहा है कि बैठक को पूरी तरह गोपनीय रखने के लिए होटल के सीसीटीवी कैमरे तक बंद करा दिए गए थे। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन चुनावी नतीजों से पहले इस तरह की चर्चाओं ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।

    संसद की तल्ख बहस हो या संगठन की गतिविधियां अथवा सरकारी व्यवस्था की चुनौतियां मध्य प्रदेश से जुड़ी ये घटनाएं फिलहाल राजनीति और प्रशासन दोनों की दिशा पर सवाल भी खड़े कर रही हैं और चर्चा भी बटोर रही हैं। अब सबकी नजर आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी नतीजों पर टिकी हुई है।

  • जुलाई की झमाझम भी नहीं भर सकी कमी, मध्य प्रदेश के 42 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश

    जुलाई की झमाझम भी नहीं भर सकी कमी, मध्य प्रदेश के 42 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून ने जुलाई के आखिरी दिन राहत जरूर दी लेकिन तस्वीर पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। पूरे महीने के दौरान दो लंबे ब्रेक आने के बावजूद जुलाई का बारिश कोटा पूरा हो गया। इसके बावजूद जून में कमजोर मानसून का असर अब भी प्रदेश पर दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि अब तक पूरे प्रदेश में सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है और 55 में से 42 जिले अभी भी औसत से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। मौसम विभाग का मानना है कि अगस्त के दौरान अच्छी बारिश होने पर यह कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। फिलहाल अगले चार दिनों तक प्रदेश में कहीं भी व्यापक स्तर पर भारी बारिश की संभावना नहीं जताई गई है।

    बीते दो दिनों में सक्रिय रहे तीन मजबूत मौसम प्रणालियों के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। सबसे ज्यादा असर पश्चिमी मध्य प्रदेश में देखने को मिला। खरगोन जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान करीब 2.2 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। झिरनिया में सबसे ज्यादा 3.8 इंच वर्षा हुई जबकि गोगांवा में 3.5 इंच कसरावद में 3.1 इंच महेश्वर में 2.6 इंच और सेगांव में करीब 1.9 इंच बारिश दर्ज की गई। भीकनगांव सनावद बड़वाह और खरगोन शहर में भी अच्छी बारिश हुई जिससे नदियों और जलप्रपातों का जलस्तर बढ़ गया। लगातार दो दिन हुई तेज बारिश के कारण प्रसिद्ध कुंदा जलप्रपात उफान पर पहुंच गया और सुरक्षा को देखते हुए सिरवेल महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही पर रोक लगा दी गई।

    रतलाम जिले में भी शनिवार सुबह से रुक रुककर बारिश जारी रही। जिले में अब तक 13 इंच से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है जिससे शहर का हनुमान ताल पूरी तरह भर गया और जुलाई महीने का वर्षा लक्ष्य भी पूरा हो गया। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अब तक लगभग 9 इंच कम बारिश हुई है। पिछले साल इसी अवधि तक जिले में करीब 22 इंच पानी गिर चुका था जबकि इस बार आंकड़ा 13 इंच के आसपास ही है।

    भोपाल मंदसौर सहित कई जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश का दौर बना रहा। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल सक्रिय मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ रही हैं इसलिए अगले चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना कम रहेगी। हालांकि यदि बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में नया सिस्टम विकसित होता है तो मौसम अचानक बदल सकता है और कुछ इलाकों में फिर से भारी वर्षा देखने को मिल सकती है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 15.4 इंच यानी 390.3 मिलीमीटर बारिश हुई है जबकि सामान्य स्थिति में इस समय तक 17.6 इंच वर्षा होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में करीब 2.3 इंच यानी 13 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में वर्षा की कमी 15 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 11 प्रतिशत दर्ज की गई है।

    स्थिति यह है कि अनूपपुर बालाघाट छतरपुर जबलपुर सागर सतना भोपाल ग्वालियर उज्जैन विदिशा रतलाम मंदसौर रायसेन शिवपुरी सहित कुल 42 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। वहीं मऊगंज उमरिया शहडोल खंडवा बड़वानी खरगोन इंदौर देवास राजगढ़ सीहोर सहित 13 जिलों में औसत से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगस्त का महीना प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। यदि मानसून सक्रिय बना रहा और लगातार अच्छे सिस्टम बनते रहे तो न केवल बारिश की मौजूदा कमी पूरी हो सकती है बल्कि खरीफ फसलों को भी बड़ा फायदा मिलेगा। फिलहाल किसानों और आम लोगों की निगाहें अगस्त की बारिश पर टिकी हुई हैं।

  • सागर और सिवनी एयरक्रैश की जांच रिपोर्ट आई सामने, 48 घंटे में हुए दोनों हादसों की वजहों से उठा पर्दा

    सागर और सिवनी एयरक्रैश की जांच रिपोर्ट आई सामने, 48 घंटे में हुए दोनों हादसों की वजहों से उठा पर्दा


    भोपाल। पिछले वर्ष दिसंबर में मध्य प्रदेश में महज 48 घंटे के भीतर हुए दो ट्रेनी विमान हादसों की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार दोनों दुर्घटनाएं अलग-अलग तकनीकी कारणों से हुईं। एक हादसा सिवनी में इंजन की शक्ति कम होने के कारण हुआ, जबकि दूसरा सागर के ढाना एयरस्ट्रिप पर गो-अराउंड प्रक्रिया के दौरान विमान के अनियंत्रित होने से हुआ। राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाओं में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और प्रशिक्षु पायलट तथा प्रशिक्षक सुरक्षित बच गए।

    रिपोर्ट के मुताबिक पहला हादसा 8 दिसंबर को सिवनी जिले के सुकतारा एयरफील्ड के पास हुआ था। रेडबर्ड एविएशन अकादमी का टेकनम पी-मेंटर प्रशिक्षण विमान लैंडिंग की तैयारी कर रहा था, तभी अचानक इंजन के आरपीएम में गिरावट दर्ज की गई। प्रशिक्षक के निर्देश पर थ्रॉटल बढ़ाने के बावजूद इंजन से अपेक्षित शक्ति नहीं मिली। स्थिति को देखते हुए प्रशिक्षक ने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर खेत में आपातकालीन लैंडिंग कराने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान विमान बिजली के तारों से टकरा गया और दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

    इसके ठीक दो दिन बाद 10 दिसंबर को सागर के ढाना एयरस्ट्रिप पर चाइम्स एविएशन अकादमी का सेसना-172एस प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार विमान लैंडिंग के दूसरे प्रयास में निर्धारित टचडाउन क्षेत्र से आगे तक हवा में तैरता रहा। जब रनवे समाप्त होने की स्थिति बनी तो एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने पायलट को गो-अराउंड करने का निर्देश दिया। जैसे ही ट्रेनी पायलट ने थ्रॉटल बढ़ाया, विमान अचानक तेजी से ऊपर उठा और बाईं ओर झुकते हुए नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद वह रनवे से बाहर कच्चे क्षेत्र में गिर गया।

    AAIB की शुरुआती जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि दोनों विमानों के रखरखाव में कोई गंभीर कमी नहीं मिली। उड़ान से पहले दोनों विमानों की नियमित तकनीकी जांच पूरी की गई थी और किसी प्रकार की खराबी दर्ज नहीं थी। दोनों प्रशिक्षु पायलटों और प्रशिक्षकों का ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण भी सामान्य पाया गया, जिससे किसी प्रकार के नशे या स्वास्थ्य संबंधी समस्या की आशंका से इनकार किया गया है।

    हालांकि जांच एजेंसी ने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए विस्तृत तकनीकी विश्लेषण जारी रखा है। दोनों विमानों के डिजिटल डिस्प्ले से प्राप्त मेमोरी कार्ड, इंजन कंट्रोल यूनिट, सीसीटीवी फुटेज और ईंधन के नमूनों को विशेषज्ञ प्रयोगशालाओं में भेजा गया है। इनकी रिपोर्ट आने के बाद दुर्घटनाओं के अंतिम कारणों की पुष्टि की जाएगी।

    चूंकि दोनों विमान विदेशी निर्माताओं के थे, इसलिए अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के तहत अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) और जर्मनी की बुंडेसस्टेले फ्यूर फ्लुगउनफालउनटर्सुखुंग (BFU) को भी जांच की जानकारी भेजी गई है। जरूरत पड़ने पर इन एजेंसियों से तकनीकी सहयोग भी लिया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण उड़ानों में छोटी तकनीकी गड़बड़ी या प्रक्रिया संबंधी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में इन दोनों मामलों की अंतिम जांच रिपोर्ट देश की फ्लाइंग ट्रेनिंग अकादमियों के लिए महत्वपूर्ण सबक साबित हो सकती है। इससे भविष्य में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने तथा प्रशिक्षण प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर MP में सियासी हलचल, भोपाल में विहिप और बजरंग दल का प्रदर्शन आज

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर MP में सियासी हलचल, भोपाल में विहिप और बजरंग दल का प्रदर्शन आज


    मध्य प्रदेश। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर संसद के मानसून सत्र के दौरान हुए राजनीतिक विवाद की गूंज अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंच गई है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने शनिवार को इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि संसद परिसर में विपक्षी सांसदों द्वारा साधु वेश धारण कर किया गया सांकेतिक प्रदर्शन भगवान श्रीराम, संत समाज और करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था का अपमान है। इसी के विरोध में भोपाल में बड़ा मार्च निकाला जाएगा।

    विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के अनुसार प्रदर्शन दोपहर में व्यापम चौराहे से शुरू होगा और कांग्रेस कार्यालय तक जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, साधु-संत और सनातन धर्म से जुड़े लोग शामिल होंगे। प्रदर्शन के बाद संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा जा सकता है। आयोजकों का कहना है कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य धार्मिक भावनाओं के सम्मान और आस्था से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराना है।

    पूरा विवाद संसद के मानसून सत्र के दौरान उस समय शुरू हुआ जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र और साधु वेश में संसद परिसर पहुंचे। उनके साथ विपक्ष के कुछ अन्य सांसद भी मौजूद थे। विपक्षी नेताओं ने राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे के उपयोग को लेकर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    हालांकि इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे धार्मिक परंपराओं और संत समाज का अपमान बताया। संगठनों का कहना है कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर साधु वेश धारण कर इस तरह का प्रदर्शन करना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। उनका आरोप है कि इस प्रकार के प्रदर्शन से धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग किया गया है।

    दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि उनका विरोध किसी धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं था, बल्कि राम मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर था। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि सार्वजनिक दान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और इसी मुद्दे को उठाने के लिए सांकेतिक प्रदर्शन किया गया।

    भोपाल में होने वाले विरोध प्रदर्शन को लेकर प्रशासन भी सतर्क है। मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाने की संभावना है। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद को देखते हुए पुलिस और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

    विश्व हिंदू परिषद ने सभी सनातन धर्मावलंबियों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है। ऐसे में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा। भोपाल में होने वाला यह प्रदर्शन अब प्रदेश की राजनीति और सामाजिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।

  • मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटे, अब भोपाल में ₹2743 और इंदौर में ₹2846 में मिलेगा सिलेंडर

    मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटे, अब भोपाल में ₹2743 और इंदौर में ₹2846 में मिलेगा सिलेंडर


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। एक अगस्त से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के नए दाम लागू हो गए हैं। प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 190 से 194 रुपए तक की कमी की गई है। कीमतों में आई इस गिरावट से व्यापारियों की संचालन लागत कम होने की उम्मीद है और आने वाले समय में ग्राहकों को भी खाने-पीने की सेवाओं में राहत मिल सकती है।

    नई दरों के अनुसार राजधानी भोपाल में अब 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 2743 रुपए में उपलब्ध होगा। वहीं इंदौर में इसकी कीमत घटकर 2846 रुपए रह गई है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भी नई दरें लागू कर दी गई हैं। सबसे महंगा कमर्शियल सिलेंडर रीवा में 2991.50 रुपए का मिलेगा। इसके अलावा सिंगरौली और नरसिंहपुर में इसकी कीमत 2989.50 रुपए तथा सतना में 2989 रुपए निर्धारित की गई है। दूसरी ओर शाजापुर प्रदेश का सबसे सस्ता शहर बन गया है, जहां यह सिलेंडर 2749.50 रुपए में मिलेगा।

    होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ने से उनकी लागत काफी बढ़ गई थी। गैस महंगी होने के कारण कई प्रतिष्ठानों को अपने मेन्यू की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ी थी। अब गैस सस्ती होने से कारोबारियों को राहत मिलेगी और यदि कीमतें स्थिर रहीं तो आने वाले समय में ग्राहकों को भी इसका फायदा मिल सकता है।

    कैटरिंग व्यवसाय पर भी गैस की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पड़ा था। कारोबारियों के अनुसार लगभग 500 लोगों के भोजन वाले एक आयोजन की लागत में 45 से 50 हजार रुपए तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो गई थी। इसके चलते कई कैटरर्स ने प्रति प्लेट चार्ज बढ़ा दिए थे। अब कमर्शियल एलपीजी सस्ती होने के बाद आयोजन की लागत में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    व्यापारियों का कहना है कि कुछ महीने पहले ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा था। इसका असर घरेलू बाजार में भी दिखाई दिया और कई शहरों में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3300 रुपए से अधिक तक पहुंच गई थी। जबकि इससे पहले यही सिलेंडर लगभग 1800 से 2000 रुपए के बीच उपलब्ध था। अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में कुछ राहत मिलने के बाद कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।

    इस बीच घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए गैस कंपनियों ने महत्वपूर्ण सूचना भी जारी की है। कंपनियां उपभोक्ताओं को एसएमएस भेजकर आधार आधारित बायोमेट्रिक ई-केवाईसी कराने की अपील कर रही हैं। निर्धारित समय सीमा तक ई-केवाईसी पूरी नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू दर पर एलपीजी सिलेंडर मिलने में दिक्कत आ सकती है। इसलिए गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं से समय रहते यह प्रक्रिया पूरी करने की अपील कर रही हैं।

    कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आई यह कमी फिलहाल होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग उद्योग के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है। यदि आने वाले महीनों में कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका लाभ कारोबारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है।

  • बैतूल हादसे के बाद बढ़ी चिंता, तीन मानसूनी सिस्टम सक्रिय; मध्य प्रदेश के 12 जिलों में रेड अलर्ट जैसे हालात

    बैतूल हादसे के बाद बढ़ी चिंता, तीन मानसूनी सिस्टम सक्रिय; मध्य प्रदेश के 12 जिलों में रेड अलर्ट जैसे हालात


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। प्रदेश में एक साथ तीन मजबूत मौसम प्रणालियों के प्रभाव से अगले 48 घंटे तक भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने खास तौर पर मालवा और निमाड़ क्षेत्र के साथ इंदौर और उज्जैन संभाग के कई जिलों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदी नाले उफान पर हैं और कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित होने लगा है।

    मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को रतलाम झाबुआ अलीराजपुर और धार जिलों में अति भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा नीमच आगर मालवा उज्जैन देवास बड़वानी खरगोन बुरहानपुर और छिंदवाड़ा में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान है। राजधानी भोपाल सहित इंदौर जबलपुर ग्वालियर रायसेन सीहोर विदिशा नर्मदापुरम बैतूल हरदा शाजापुर मंदसौर खंडवा शिवपुरी गुना दतिया मुरैना भिंड सागर रीवा सतना सीधी शहडोल और अन्य जिलों में भी रुक रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई गई है।

    गुरुवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हुई। भोपाल उज्जैन रतलाम हरदा और खरगोन सहित कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे दर्दनाक घटना बैतूल जिले में हुई जहां मूसलाधार बारिश के दौरान रेलवे की बाउंड्री वॉल पास की झोपड़ी पर गिर गई। इस हादसे में 27 वर्षीय मजदूर राहुल उइके की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना ने लगातार हो रही बारिश के बीच कमजोर निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    बारिश के बढ़ते दबाव को देखते हुए बैतूल के सारणी स्थित सतपुड़ा बांध के सात गेट इस मानसून में पहली बार खोल दिए गए हैं ताकि अतिरिक्त पानी की निकासी की जा सके। प्रशासन ने निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और नदी नालों के पास नहीं जाने की सलाह दी है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 14 दशमलव 7 इंच वर्षा दर्ज की गई है जबकि इस समय तक 17 दशमलव 2 इंच बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अभी भी लगभग 15 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। हालांकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से यह अंतर आने वाले दिनों में कम होने की संभावना है।

    प्रदेश के 47 जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इनमें उज्जैन रतलाम धार झाबुआ बैतूल हरदा छिंदवाड़ा जबलपुर सागर रीवा सतना ग्वालियर शिवपुरी और विदिशा जैसे जिले शामिल हैं। दूसरी ओर भोपाल इंदौर देवास सीहोर राजगढ़ भिंड मंदसौर और बुरहानपुर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक वर्षा हो चुकी है। देवास में सामान्य से लगभग 29 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई मानसून का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है और इसी दौरान प्रदेश में कुल वर्षा का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होता है। यदि अगले दो दिनों तक मौसम विभाग का अनुमान सही साबित होता है तो वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।