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  • छिंदवाड़ा सड़क दुर्घटना में 10 की मौत, मंत्री राकेश सिंह ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया

    छिंदवाड़ा सड़क दुर्घटना में 10 की मौत, मंत्री राकेश सिंह ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया


    छिंदवाड़ा । मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में बीते गुरुवार रात हुई बस-पिकअप टक्कर के बाद प्रदेश के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह देर रात जिला अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल लिया। मंत्री ने चिकित्सकों से घायलों के उपचार की विस्तृत जानकारी ली और सुनिश्चित किया कि सभी को बेहतर और समय पर चिकित्सा सुविधा मिले।

    इस हादसे में कुल 10 लोगों की मौत हुई थी जिनमें 6 पुरुष 3 महिलाएं और 1 बच्चा शामिल हैं। सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज जारी है। दो गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए नागपुर रेफर किया गया है।

    मंत्री राकेश सिंह ने मृतकों के परिवारों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिवारों को प्रत्येक को चार-चार लाख रुपए और गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को एक-एक लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हर तरह से पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।

    इस दौरान जबलपुर से डॉक्टरों की विशेष टीम भी अस्पताल पहुँची और उन्होंने सभी घायलों का परीक्षण किया। मंत्री ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए ताकि उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहे। घटना स्थल छिंदवाड़ा से नागपुर रोड पर था जहां बस और पिकअप में जोरदार टक्कर हुई। यह हादसा न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि पूरे जिले के लिए सदमे की स्थिति पैदा कर गया।

    प्रभारी मंत्री राकेश सिंह की रातभर की पहल ने न केवल घायलों को बेहतर इलाज सुनिश्चित किया बल्कि प्रशासनिक तंत्र को भी सक्रिय किया। इसके अलावा यह कदम पीड़ित परिवारों के लिए सरकार की तत्परता और संवेदनशीलता का संदेश भी है। यह हादसा सड़क सुरक्षा की गंभीरता और समय पर प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता को उजागर करता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं में मृतकों और घायलों को तत्काल मदद मिल सके।

  • 5 मौतें और भीड़ का बेरहम चेहरा ग्वालियर हादसे में मदद से ज्यादा मोबाइल उठा

    5 मौतें और भीड़ का बेरहम चेहरा ग्वालियर हादसे में मदद से ज्यादा मोबाइल उठा


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने न सिर्फ सड़क सुरक्षा बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। थाठीपुर थाना क्षेत्र के परशुराम चौराहे के पास हुए भीषण सड़क हादसे में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भयावह था कि टक्कर के बाद घटनास्थल पर चीख पुकार मच गई लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि वहां मौजूद लोगों का व्यवहार इंसानियत को शर्मसार करने वाला था।

    जानकारी के मुताबिक एक तेज रफ्तार बोलेरो कार ने ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी। ऑटो में चालक सहित कुल नौ लोग सवार थे जो शीतला माता के दर्शन कर वापस लौट रहे थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ऑटो के परखच्चे उड़ गए और पांच लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मृतकों में तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं चार अन्य घायल जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं और उनका इलाज अस्पताल में जारी है।

    हादसे के बाद जो दृश्य सामने आया उसने सभी को झकझोर कर रख दिया। जहां एक तरफ घायल लोग दर्द से तड़प रहे थे वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग उनकी मदद करने के बजाय मोबाइल फोन निकालकर वीडियो बनाने और सेल्फी लेने में जुट गए। वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक युवक लाशों के पास खड़ा होकर सेल्फी ले रहा है मानो वह किसी सामान्य घटना का हिस्सा हो। आसपास खड़े कुछ लोग इस हरकत पर नाराजगी जताते हुए यह कहते भी सुनाई दे रहे हैं कि क्या किसी में हिम्मत नहीं है कि घायलों को अस्पताल पहुंचाया जाए।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मौके पर मौजूद कुछ लोग लगातार चिल्लाते रहे कि घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया जाए लेकिन भीड़ में से बहुत कम लोगों ने आगे आकर मदद की। यह स्थिति न सिर्फ दुखद बल्कि चिंताजनक भी है क्योंकि ऐसे समय में हर सेकंड कीमती होता है और समय पर मदद मिल जाए तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

    इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं जहां इंसान की जान से ज्यादा अहमियत वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट को दी जा रही है। कई यूजर्स ने इसे मानवता का पतन बताया है और ऐसी मानसिकता पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। साथ ही घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था की जा रही है।

    यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि समाज के लिए एक आईना भी है जो दिखाता है कि तकनीक के इस दौर में हम संवेदनाओं से कितनी दूर होते जा रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि ऐसे हादसों के समय लोग तमाशबीन बनने के बजाय जिम्मेदार नागरिक बनें और जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं क्योंकि कई बार एक छोटा सा कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है।

  • प्रदेश में पेट्रोल पंपों पर पैनिक खरीद की कोई आवश्यकता नहीं, स्टॉक पूरा उपलब्ध : मंत्री

    प्रदेश में पेट्रोल पंपों पर पैनिक खरीद की कोई आवश्यकता नहीं, स्टॉक पूरा उपलब्ध : मंत्री


    भोपाल। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बुधवार को स्पष्ट किया कि प्रदेश के पेट्रोल पंपों में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पूरी तरह निर्बाध है और किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि 24 मार्च 2026 को कुछ जिलों में अफवाह के कारण आम जनता के बीच पेट्रोल की पैनिक खरीद और पेट्रोल पंपों पर लंबी लाईनों की स्थिति बन गई थी लेकिन वास्तविकता यह है कि स्टॉक पर्याप्त मात्रा में मौजूद है।

    मंत्री राजपूत ने कहा कि डिपो से पेट्रोल पंपों को नियमित आपूर्ति की जा रही है और किसी भी तरह की अफवाह से भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घबराहट में न तो अतिरिक्त खरीदारी करें और न ही पेट्रोल या डीजल का संग्रह करें। उनका कहना था कि अफवाहें आम जनता को भ्रमित करने का साधन बन सकती हैं जबकि वास्तविक स्थिति पूरी तरह सामान्य और नियंत्रण में है।

    ऑयल कंपनियों की ओर से भी पुष्टि की गई है कि वर्तमान में प्रदेश के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है। राज्य स्तर से नियंत्रण कक्ष और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं ताकि किसी भी आपूर्ति या स्टॉक से संबंधित समस्या का त्वरित समाधान किया जा सके।

    खाद्य मंत्री ने यह भी बताया कि पेट्रोल पंपों पर लगातार निगरानी की जा रही है और सभी पंप नियमित रूप से डिपो से सामग्री प्राप्त कर रहे हैं। जनता को सलाह दी गई कि अफवाहों के आधार पर कोई भी निर्णय न लें और पेट्रोल पंपों पर अनुचित भीड़ या झुंझलाहट पैदा न करें।

    प्रदेश सरकार की यह स्पष्टता उन लोगों के लिए राहत की खबर है जिन्होंने अफवाहों के कारण पेट्रोल खरीद में असमंजस का सामना किया। मंत्री राजपूत ने कहा कि आम जनता की सुरक्षा और सुविधा के लिए आपूर्ति प्रणाली पूरी तरह सक्षम और नियंत्रण में है। उन्होंने अपील की कि लोग सामान्य स्थिति बनाए रखें और केवल जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदें।

    इस प्रकार खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग की निरंतर निगरानी और ऑयल कंपनियों के त्वरित वितरण तंत्र ने सुनिश्चित किया है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी न हो और सामान्य जीवन प्रभावित न हो।

  • मंडला में जनपद CEO के खिलाफ सरपंचों का प्रदर्शन, 42 जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर से की शिकायत; 7 दिन में कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी

    मंडला में जनपद CEO के खिलाफ सरपंचों का प्रदर्शन, 42 जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर से की शिकायत; 7 दिन में कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी


    मंडला। मध्यप्रदेश के मंडला जिले में बीजाडांडी जनपद पंचायत क्षेत्र के सरपंचों और जनप्रतिनिधियों ने जनपद पंचायत CEO के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जनपद सीईओ बसंती दुबे को पद से हटाने की मांग को लेकर 42 सरपंचों जनपद अध्यक्ष और सदस्यों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

    प्रदर्शन कर रहे जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। सरपंचों ने सीईओ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हर कार्य में कमीशन की मांग की जाती है और काम समय पर नहीं किए जाते जिससे पंचायतों का कामकाज प्रभावित हो रहा है।

    शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जनपद स्तर पर जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा की जा रही है और अधिकारियों द्वारा मनमानी तरीके से कार्य किया जा रहा है। सरपंचों का कहना है कि प्रशासनिक सहयोग के बजाय उन्हें अनावश्यक दबाव का सामना करना पड़ रहा है जिससे विकास कार्य बाधित हो रहे हैं।

    जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पंचायतों में कोई भी काम सुचारू रूप से नहीं चल पा रहा है और स्थानीय स्तर पर समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इससे पहले भी निवास जनपद क्षेत्र में इसी तरह के आरोपों को लेकर एक अन्य सीईओ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा चुका है जिससे यह मुद्दा और गंभीर हो गया है।

    इस मामले में जनपद सीईओ की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं शिकायतकर्ताओं में राजेंद्र पुटा मदन सिंह और पुष्पा मरकाम शामिल हैं जिन्होंने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पूरे मामले में जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि तय समय सीमा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो जिले में बड़ा जनआंदोलन देखने को मिल सकता है।

  • दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देने पर जोर, भोपाल में हुई क्षेत्रीय बैठक में जागरूकता अभियान की जरूरत बताई गई

    दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देने पर जोर, भोपाल में हुई क्षेत्रीय बैठक में जागरूकता अभियान की जरूरत बताई गई


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित क्षेत्रीय परामर्श बैठक में दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण और पुनर्वास को लेकर गंभीर मंथन हुआ। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को संस्थाओं से निकालकर परिवार का स्नेह दिलाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाना बेहद जरूरी है।

    मंत्री भूरिया ने कहा कि समाज की सकारात्मक सोच और संवेदनशीलता से ही इन बच्चों को सुरक्षित और बेहतर भविष्य मिल सकता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिव्यांग शब्द के उपयोग से समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया गया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में गैर संस्थागत पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के माध्यम से स्पॉन्सरशिप और आफ्टर केयर जैसी सुविधाएं देकर बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

    बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव जी. वी. रश्मि ने कहा कि भारतीय समाज में संस्कारों का महत्व होने के बावजूद दिव्यांग बच्चों को गोद लेने में सामाजिक रूढ़ियां बाधा बनती हैं। उन्होंने जोर दिया कि समाज की संवेदनशीलता ही इन बच्चों का भविष्य बदल सकती है।

    वहीं केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण की उप निदेशक ऋचा ओझा ने बताया कि देशभर में ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले देश में दत्तक ग्रहण का प्रतिशत अभी भी काफी कम है और इसे बढ़ाने के लिए नीति सुधार और जागरूकता जरूरी है।

    मंत्री भूरिया ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2024 25 में देश में 4 155 बच्चों को गोद लिया गया जिनमें केवल 7 प्रतिशत दिव्यांग बच्चे थे। इनमें से अधिकांश को विदेशी दंपत्तियों ने अपनाया जो देश में जागरूकता की कमी को दर्शाता है।

    उन्होंने सुझाव दिया कि सफल दिव्यांग व्यक्तियों को ब्रांड एम्बेसडर बनाकर समाज में सकारात्मक संदेश फैलाया जा सकता है। साथ ही ऐसे बच्चों को गोद लेने वाले परिवारों के लिए चिकित्सा फिजियोथेरेपी शिक्षा सहायता और बीमा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

    बैठक में उत्तर प्रदेश उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए। इस दौरान दत्तक ग्रहण की वर्तमान स्थिति कानूनी प्रक्रियाओं की चुनौतियों और बेहतर समन्वय के उपायों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में बालिका गृह भोपाल और जवाहर बाल भवन के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दत्तक ग्रहण के महत्व का संदेश भी दिया।

  • मध्यप्रदेश में गेहूँ खरीदी 1 अप्रैल से शुरू, 19 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन; बोनस के साथ समर्थन मूल्य ₹2625 प्रति क्विंटल

    मध्यप्रदेश में गेहूँ खरीदी 1 अप्रैल से शुरू, 19 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन; बोनस के साथ समर्थन मूल्य ₹2625 प्रति क्विंटल


    भोपाल। मध्यप्रदेश के मध्य प्रदेश में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी का कार्यक्रम जल्द शुरू होने जा रहा है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि इंदौर उज्जैन भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में गेहूँ खरीदी 1 अप्रैल से होगी जबकि शेष संभागों में यह 7 अप्रैल से शुरू होगी। खरीदी शासकीय कार्य दिवसों में सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक की जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि इस वर्ष गेहूँ खरीदी पर किसानों को 40 रुपये अतिरिक्त बोनस भी मिलेगा। इसके साथ प्रदेश में गेहूँ की दर 2625 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है।

    इस रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन हेतु कुल 19,04,651 किसानों ने पंजीयन कराया है जो पिछले वर्ष 15,44,000 से अधिक है। जिलेवार पंजीयन की बात करें तो इंदौर में 71,713 उज्जैन में 1,23,281 भोपाल में 37,129 और नर्मदापुर में 71,831 किसानों ने पंजीयन कराया है। अन्य जिलों में भी हजारों किसानों ने अपना पंजीयन कराया है जिससे इस वर्ष खरीदी की तैयारी मजबूत दिखाई दे रही है।

    मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित समय और केंद्रों पर पहुंचकर अपने गेहूँ का पंजीयन और विक्रय सुनिश्चित करें। राज्य सरकार ने किसानों को समर्थन मूल्य और बोनस का लाभ सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए हैं। इस कार्यक्रम से मध्यप्रदेश में गेहूँ उत्पादन करने वाले किसानों को अच्छा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है और खरीदी के साथ ही रबी विपणन वर्ष का संचालन सुचारू रूप से होगा।

  • नर्मदापुरम में शर्मनाक स्वास्थ्य व्यवस्था: एंबुलेंस नहीं चली, ग्रामीणों ने खुद धक्का दिया, घायल की मौत

    नर्मदापुरम में शर्मनाक स्वास्थ्य व्यवस्था: एंबुलेंस नहीं चली, ग्रामीणों ने खुद धक्का दिया, घायल की मौत


    नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले के माखननगर में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता उजागर हुई है। सोमवार रात माखननगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गंभीर रूप से घायल राजेश मालवीय को रेफर करते समय इमरजेंसी एंबुलेंस स्टार्ट नहीं हुई। ग्रामीणों ने आक्रोश में आकर खुद गाड़ी को धक्का दिया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और घायल ने दम तोड़ दिया।

    जानकारी के अनुसार ग्राम माना के पास दो बाइकों की आमने सामने भिड़ंत हुई जिसमें राजेश मालवीय और एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। तत्काल 108 एंबुलेंस को कॉल किया गया लेकिन गाड़ी मौके पर नहीं पहुंची। परिजन निजी वाहन से घायलों को लगभग 10 किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए।

    सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों ने घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें नर्मदापुरम जिला अस्पताल रेफर किया। जब परिजनों ने एंबुलेंस से ले जाने को कहा तो अस्पताल स्टाफ ने गाड़ी खराब होने का बहाना दिया। इसके बाद ग्रामीण भड़क गए और अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया। तनाव बढ़ते देख पुलिस मौके पर पहुंची।

    भारी दबाव के बाद एंबुलेंस में घायलों को रखा गया लेकिन वाहन स्टार्ट नहीं हुआ। अंततः ग्रामीणों ने खुद गाड़ी को धक्का दिया जिससे एंबुलेंस रवाना हो सकी। इस देरी के दौरान राजेश मालवीय की मौत हो गई।

    हैरानी की बात यह है कि यह एंबुलेंस विधायक निधि से दान की गई थी। 108 एंबुलेंस के जिला प्रबंधक ने स्पष्ट किया कि वाहन उनके विभाग का नहीं है और इसकी देखरेख बीएमओ BMO माखननगर की जिम्मेदारी है।  स्थानीय लोगों का आरोप है कि एंबुलेंस में अक्सर डीजल नहीं होता या बैटरी खराब रहती है।इस घटना ने प्रशासन की लापरवाही उजागर कर दी है और एक परिवार का चिराग बुझा दिया। गंभीर घायल को समय पर उचित इलाज नहीं मिलना स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर कमियों को सामने लाता है।

  • इंदौर में फिर सुर्खियों में शिलोम जेम्स, मारपीट मकी का नया केस दर्ज; टी-20 जीत के जश्न में हुआ विवाद

    इंदौर में फिर सुर्खियों में शिलोम जेम्स, मारपीट मकी का नया केस दर्ज; टी-20 जीत के जश्न में हुआ विवाद


    इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर में बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड से जुड़ा आरोपी एक बार फिर विवादों में आ गया है। साक्ष्य छुपाने के मामले में पहले से आरोपी शिलोम जेम्स के खिलाफ अब मारपीट और धमकाने का एक और मामला दर्ज किया गया है। लसूड़िया थाना पुलिस ने जांच के बाद शिलोम जेम्स और उसके साथी विकास के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

    पुलिस के अनुसार 8 मार्च को आईसीसी टी20 विश्व कप के फाइनल मुकाबले में भारत की जीत के बाद कॉलोनी में जश्न का माहौल था। इसी दौरान पटाखे फोड़ने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। देखते ही देखते कहासुनी ने झगड़े का रूप ले लिया और मामला मारपीट तक पहुंच गया। आरोप है कि शिलोम जेम्स और उसके साथी ने पड़ोसियों के साथ न केवल मारपीट की बल्कि उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।

    इस घटना ने इसलिए भी ज्यादा ध्यान खींचा है क्योंकि शिलोम जेम्स पहले से ही राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी रह चुका है। जांच के दौरान सामने आया था कि उसने मुख्य आरोपियों की मदद की थी और साक्ष्य मिटाने की कोशिश की थी। इस मामले में उसकी भूमिका को लेकर पहले ही पुलिस कार्रवाई कर चुकी है।

    अब ताजा मामले के सामने आने के बाद पुलिस शिलोम जेम्स के आपराधिक रिकॉर्ड को खंगालने में जुट गई है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि गंभीर अपराधों में नाम आने के बावजूद आरोपी किस तरह खुलेआम विवादों में शामिल हो रहे हैं।

    लसूड़िया थाना पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और दोनों आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल थे। कुल मिलाकर एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों ने शिलोम जेम्स की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और पुलिस अब उसके खिलाफ हर पहलू से जांच कर रही है।

  • भोपाल में नकली डेयरी उत्पादों का बड़ा खुलासा, मिल्क मैजिक ब्रांड से जुड़े किशन मोदी गिरफ्तार, 20 करोड़ से ज्यादा की मनी लॉन्ड्रिंग का मामला

    भोपाल में नकली डेयरी उत्पादों का बड़ा खुलासा, मिल्क मैजिक ब्रांड से जुड़े किशन मोदी गिरफ्तार, 20 करोड़ से ज्यादा की मनी लॉन्ड्रिंग का मामला


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मिलावटी डेयरी उत्पादों के बड़े कारोबार का खुलासा हुआ है। जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के संचालक किशन मोदी को प्रवर्तन निदेशालय ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई PMLA 2002 के तहत की गई है।

    जांच में सामने आया है कि आरोपी कंपनी मिल्क मैजिक ब्रांड के तहत मिलावटी डेयरी उत्पादों का निर्माण और निर्यात कर रही थी। आरोप है कि असली मिल्क फैट की जगह पाम ऑयल और अन्य हानिकारक रसायनों का उपयोग कर नकली डेयरी प्रोडक्ट्स तैयार किए जा रहे थे। इतना ही नहीं इन उत्पादों को असली और गुणवत्तापूर्ण दिखाने के लिए फर्जी लैब परीक्षण रिपोर्ट का सहारा लिया गया।

    ED के अनुसार इन मिलावटी उत्पादों का निर्यात कई विदेशी देशों में किया गया जिनमें बहराइन हांगकांग सिंगापुर ओमान कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं। इस अवैध कारोबार के जरिए कंपनी ने करीब 20.59 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित की जिसे एजेंसी ने अपराध की आय माना है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए ED ने 14 मार्च 2026 को आरोपी किशन मोदी को गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय भोपाल के समक्ष पेश किया। न्यायालय ने आगे की पूछताछ और जांच के लिए उन्हें 18 मार्च 2026 तक ED की रिमांड पर भेज दिया है। इस दौरान एजेंसी आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क सहयोगियों और वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटा रही है।

    प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कंपनी लंबे समय से फर्जी दस्तावेजों के सहारे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने उत्पाद भेज रही थी। इससे न केवल उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ हुआ बल्कि देश की खाद्य निर्यात साख पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों पर लगाम लगाई जा सके। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है।

  • जबलपुर में नाले से मिला बम का खोल, खमरिया ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से जुड़ाव की आशंका, इलाके में सनसनी

    जबलपुर में नाले से मिला बम का खोल, खमरिया ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से जुड़ाव की आशंका, इलाके में सनसनी


    जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में उस समय हड़कंप मच गया जब नाले की सफाई के दौरान एक घातक बम का खोल कवर बरामद हुआ। यह बम कवर ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया में निर्मित होने की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस बम स्क्वॉड और संबंधित एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं और पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी गई।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार स्थानीय स्तर पर चल रहे सफाई अभियान के दौरान मजदूरों को नाले में संदिग्ध धातु वस्तु दिखाई दी। करीब से देखने पर वह बम का खोल निकला जिसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची टीम ने सतर्कता बरतते हुए बम के खोल को अपने कब्जे में ले लिया और उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाकर जांच प्रक्रिया शुरू की।

    इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन ने ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया प्रबंधन को पत्र लिखकर बम के खोल के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है। प्रारंभिक तौर पर यह माना जा रहा है कि यह खोल भारतीय सेना के उपयोग में आने वाले गोला-बारूद का हिस्सा हो सकता है हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    इस घटना ने दो साल पहले हुए एक भीषण हादसे की यादें भी ताजा कर दी हैं। इसी क्षेत्र में स्थित एक स्क्रैप गोदाम में विस्फोट हुआ था जिसमें भारी नुकसान हुआ था। उस मामले में अवैध रूप से गोला-बारूद से जुड़े सामान के भंडारण और कारोबार की आशंका सामने आई थी। अब ताजा बरामदगी के बाद उसी कड़ी को फिर से जोड़ा जा रहा है।

    सूत्रों के मुताबिक इस बम के खोल का संबंध इलाके के हिस्ट्रीशीटर शमीम कबाड़ी से भी हो सकता है। हालांकि पुलिस ने अभी इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है लेकिन सभी संभावित एंगल से जांच की जा रही है।

    गौरतलब है कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया में भारतीय सेना के लिए अत्यंत संवेदनशील और खतरनाक गोला-बारूद तैयार किया जाता है। ऐसे में फैक्ट्री से जुड़े किसी भी सामग्री का बाहर मिलना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    फिलहाल पुलिस और बम निरोधक दस्ता पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रहा है। आसपास के क्षेत्रों में भी तलाशी अभियान चलाया जा सकता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और इस तरह की सामग्री तो नहीं फेंकी गई है।