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  • शाजापुर बस हादसा: आग लगने से मासूम की मौत, सुरक्षा पर उठे सवाल

    शाजापुर बस हादसा: आग लगने से मासूम की मौत, सुरक्षा पर उठे सवाल

    शाजापुर (उज्जैन)। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में शुक्रवार रात नेशनल हाईवे पर एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। इंदौर से ग्वालियर जा रही इंटरसिटी AC बस (MP-07 ZL 9090) में अचानक शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि बस कुछ ही मिनटों में आग के गोले में बदल गई और यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।

    4 साल का मासूम जिंदा जला, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
    इस दर्दनाक हादसे में शिवपुरी निवासी अभिषेक जैन का 4 वर्षीय बेटा अनय बस के अंदर ही फंस गया और आग में जिंदा जल गया। परिजन और यात्रियों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। प्रशासन को मासूम का शव निकालने में करीब 2 घंटे लग गए।

     चेतावनी के बावजूद लापरवाही, यात्रियों ने सुनाई आपबीती
    यात्रियों के मुताबिक, सफर के दौरान बस में वायरिंग जलने की बदबू आ रही थी। कई लोगों ने इसकी शिकायत ड्राइवर से की, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया। रात करीब 12 बजे बस जब हाईवे पर एक ढाबे के पास रुकी, तभी कुछ ही मिनटों बाद आग लग गई और अफरा-तफरी मच गई।

    न इमरजेंसी गेट, न फायर सिस्टम-बचाव में बड़ी दिक्कत
    हादसे के समय बस में 50 से अधिक यात्री सवार थे। बताया गया कि बस में न तो इमरजेंसी एग्जिट ठीक से काम कर रहा था और न ही अग्निशमन यंत्र मौजूद था। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि लोगों को खिड़कियां और शीशे तोड़कर बाहर निकलना पड़ा।

    फायर ब्रिगेड पर भी सवाल, देर से पहुंची मदद
    स्थानीय लोगों के अनुसार, फायर ब्रिगेड करीब आधे घंटे बाद पहुंची और शुरुआती गाड़ी में पानी तक नहीं था। बाद में 5 दमकल गाड़ियों ने आग पर काबू पाया।

    पिता ने बचाई कई जानें, पर बेटा नहीं बच सका
    दुखद घटना के बीच पिता अभिषेक जैन ने कई यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की और मिले लाखों के जेवर पुलिस को सौंपे। लेकिन अपने बेटे को नहीं बचा सके।

    शाजापुर का यह हादसा बस सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी जांच और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक मासूम की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।

  • सड़कों पर घूमते कुत्तों ने किया हमला, नगर पालिका पर उठे सवाल

    सड़कों पर घूमते कुत्तों ने किया हमला, नगर पालिका पर उठे सवाल

    विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा शहर में आवारा कुत्तों के आतंक की एक और घटना सामने आई है। जतरापुरा इलाके में सड़क से पैदल गुजर रही एक बुजुर्ग महिला पर तीन आवारा कुत्तों ने अचानक हमला कर दिया और उन्हें घेर लिया। कुत्तों ने महिला के पैर पर काट लिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। दर्द से कराहती महिला की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह कुत्तों को भगाकर उनकी जान बचाई।

    घायल महिला अस्पताल में भर्ती, स्थानीय लोगों में आक्रोश
    घटना के बाद महिला को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमला इतना अचानक था कि महिला को संभलने का मौका भी नहीं मिला। इस घटना से इलाके में दहशत और आक्रोश दोनों का माहौल बन गया है।

     नगर पालिका पर लापरवाही के आरोप, बढ़ रहा गुस्सा
    स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और पहले भी कई शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन नगर पालिका की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। निवासियों ने आरोप लगाया कि कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई नियमित अभियान नहीं चलाया जा रहा, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।

    आंदोलन की चेतावनी, लोग हुए एकजुट
    घटना के बाद लोगों में भारी नाराजगी है। स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आवारा कुत्तों पर नियंत्रण और पकड़ने की कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। परिजनों में भी चिंता है क्योंकि अब बच्चे और बुजुर्ग घर से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं।

    विदिशा की यह घटना शहरी इलाकों में आवारा पशुओं के बढ़ते खतरे को उजागर करती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।

  • बेतवा नदी में अफरा-तफरी: होमगार्ड जवान ने कूदकर बचाई जान

    बेतवा नदी में अफरा-तफरी: होमगार्ड जवान ने कूदकर बचाई जान

    विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में शनिचरी अमावस्या के मौके पर बेतवा नदी घाट पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। स्नान के दौरान पानी के तेज बहाव और फिसलन के कारण दो लोग गहरे पानी में डूबने लगे। घटना के बाद घाट पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल बन गया।

    पार्षद भी बचाने उतरे, लेकिन खुद फंस ग
    जानकारी के अनुसार, शमशाबाद कृषि उपज मंडी में कार्यरत सचिन धाकड़ नदी में स्नान कर रहे थे, तभी उनका पैर फिसल गया और वे गहरे पानी में चले गए। उन्हें तैरना नहीं आता था, जिससे वे घबराकर मदद के लिए चिल्लाने लगे।इसी दौरान शमशाबाद नगर परिषद के पार्षद दीपक मेहर ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन संतुलन बिगड़ने से वे भी पानी में फंस गए और दोनों डूबने लगे।

    होमगार्ड जवान बना फरिश्ता, लगाई छलांग और बचाई जान
    घाट पर तैनात होमगार्ड जवान कपिल परासर ने स्थिति बिगड़ते देख बिना देर किए नदी में छलांग लगा दी। उन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उनकी तत्परता और साहस की वहां मौजूद लोगों ने जमकर सराहना की।

    परिवार के लिए बड़ा सदमा टल
    घटना के बाद सचिन धाकड़ ने बताया कि उनकी एक छोटी बेटी है और वे केवल किनारे पर स्नान कर रहे थे, लेकिन अचानक पैर फिसलने से यह हादसा हो गया। समय रहते बचाव होने से दोनों की जान बच गई, जिससे परिवारों ने राहत की सांस ली।

    विदिशा की यह घटना एक बार फिर नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता की जरूरत को उजागर करती है। होमगार्ड जवान की बहादुरी से दो जिंदगियां बच गईं।

  • कपड़े बेचने आया युवक निकला चोर, नकदी लेकर हुआ फरार

    कपड़े बेचने आया युवक निकला चोर, नकदी लेकर हुआ फरार

    सतना। मध्य प्रदेश के सतना शहर में दिनदहाड़े चोरी की एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के भैंसा खाना इलाके स्थित रामपुर ट्रांसपोर्ट एजेंसी में एक फेरीवाले ने कपड़े बेचने के बहाने 20 हजार रुपये चुरा लिए और मौके से फरार हो गया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और व्यापारी वर्ग में दहशत फैल गई।

    कपड़े दिखाने के बहाने बनाई चाल, मौका देखते ही उड़ाई नकदी
    जानकारी के अनुसार, ट्रांसपोर्ट एजेंसी के संचालक नरेंद्र द्विवेदी शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे अपनी गद्दी पर बैठे थे। तभी एक अज्ञात फेरीवाला कपड़े बेचने के लिए वहां पहुंचा और उन्हें अलग-अलग कपड़े दिखाने लगा। कपड़े देखने में व्यस्त हुए संचालक का ध्यान भटकाकर फेरीवाले ने बड़ी सफाई से मेज पर रखे 20 हजार रुपये पार कर दिए और बिना किसी को शक हुए वहां से निकल गया।

    कुछ देर बाद खुला राज, पैसे गायब देखकर उड़े होश
    घटना का पता तब चला जब फेरीवाले के जाने के बाद नरेंद्र द्विवेदी ने अपने रुपये देखे। पैसे गायब देखकर उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत आसपास पूछताछ शुरू की, लेकिन आरोपी का कोई सुराग नहीं मिला।

    पुलिस ने दर्ज किया मामला, CCTV से हो रही पहचान
    पीड़ित ने देर रात सिटी कोतवाली थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और ट्रांसपोर्ट एजेंसी में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान करने और उसकी तलाश करने की कोशिश की जा रही है।

    सतना की यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि छोटी सी लापरवाही भी बड़ी चोरी का कारण बन सकती है। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है और जल्द गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है।

  • सतना वेयरहाउस मामला: सर्वेयर की रिपोर्ट के बाद भी गेहूं रखने का आरोप

    सतना वेयरहाउस मामला: सर्वेयर की रिपोर्ट के बाद भी गेहूं रखने का आरोप

    सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले में सरकारी गेहूं खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। सेवा सहकारी समिति सिजहटा द्वारा करीब 800 बोरी सड़ा और गुणवत्ताहीन गेहूं जबला बाबा वेयरहाउस में भंडारण के लिए भेजा गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सर्वेयरों ने इस पूरे गेहूं को अमानक बताते हुए पहले ही रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसे वेयरहाउस में उतार लिया गया।

    सर्वेयर ने किया था रिजेक्ट, फिर भी रात में हुआ भंडारण
    जानकारी के अनुसार, आरबी एसोसिएट के सर्वेयरों ने जांच के दौरान पाया कि गेहूं में भारी नमी थी और अधिकांश अनाज सड़कर गुच्छों में बदल चुका था। इसे पूरी तरह अनुपयोगी मानते हुए पूरी खेप को फेल कर दिया गया और भंडारण से इनकार कर दिया गया। इसके बाद पंचनामा तैयार कर उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई थी।

    रात 8 बजे की ‘चाल’: गैरमौजूदगी में उतारा गया सड़ा अनाज
    सर्वेयरों की अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए शुक्रवार रात करीब 8 बजे पूरी सड़ी हुई खेप को वेयरहाउस के अंदर उतार दिया गया। सरकारी दर के अनुसार 2625 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से इस 800 बोरी गेहूं की कीमत करीब 10 लाख रुपए से अधिक आंकी जा रही है।

    सीईओ बोले  मुझे जानकारी नहीं, होगी जांच
    मामले पर रामपुर बघेलान सहकारिता सीईओ मनोज गोनकर ने अनभिज्ञता जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह खराब गेहूं के भंडारण की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी संभावना जताई कि बारिश के कारण अनाज खराब हुआ हो सकता है और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।

    सिस्टम पर सवाल, जांच की मांग तेज
    इस घटना ने समर्थन मूल्य खरीदी प्रणाली और वेयरहाउस प्रबंधन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।

  • जबलपुर में डिजिटल न्याय पर मंथन, CJI और कानून मंत्री समेत कई दिग्गज पहुंचे

    जबलपुर में डिजिटल न्याय पर मंथन, CJI और कानून मंत्री समेत कई दिग्गज पहुंचे


    जबलपुर। मध्य प्रदेश का जबलपुर शुक्रवार को देश की न्याय व्यवस्था के डिजिटल भविष्य का केंद्र बन गया, जहां ‘फ्रेगमेंटेशन टू फ्यूजन: एम्पॉवरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन’ विषय पर उच्चस्तरीय सेमिनार आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में देश की न्यायपालिका, सरकार और कानून व्यवस्था से जुड़े शीर्ष प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इसे बेहद अहम बना दिया। कार्यक्रम में भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल शामिल हुए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के कई वरिष्ठ जजों और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने भी भाग लिया।

    सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की मौजूदगी, हाईकोर्ट के न्यायाधीश भी शामिल
    सेमिनार में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा, सतीश चंद्र शर्मा, पीबी वराले, एन. कोटेश्वर सिंह, आर. महादेवन, मनमोहन और आलोक आराधे सहित कई न्यायाधीश उपस्थित रहे। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा सहित सभी न्यायाधीशों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह उपस्थिति इस बात का संकेत है कि देश की न्याय व्यवस्था में तकनीक आधारित बदलाव को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है।

    डिजिटल न्याय प्रणाली पर केंद्रित रहा सेमिनार
    इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका में तकनीक के उपयोग को बढ़ाना और सभी न्यायिक प्रक्रियाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना रहा। इसमें ई-कोर्ट सिस्टम, डेटा इंटीग्रेशन, केस मैनेजमेंट और यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस प्लेटफॉर्म जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल न्याय प्रणाली को तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी।

    सुरक्षा के कड़े इंतजाम, सीमित काफिला चर्चा में
    कार्यक्रम को देखते हुए जबलपुर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला भी सादगीपूर्ण रहा, जिसमें केवल छह वाहन शामिल थे। प्रशासन ने पूरे आयोजन को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष तैयारी की थी।

    भविष्य की न्याय व्यवस्था की दिशा तय करने की कोशिश
    यह सेमिनार केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत की न्याय प्रणाली के भविष्य को डिजिटल रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे देश में न्यायिक प्रक्रियाओं की गति और पारदर्शिता दोनों में सुधार संभव है।

    जबलपुर का यह आयोजन न्यायपालिका और तकनीक के संगम का प्रतीक बनकर उभरा है। शीर्ष न्यायाधीशों और सरकार की एक साथ मौजूदगी ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में भारत की न्याय व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल रूपांतरण की ओर बढ़ सकती है।

  • ग्वालियर में जमीन विवाद पर फायरिंग, युवक को गोली मारकर बदमाश फरार

    ग्वालियर में जमीन विवाद पर फायरिंग, युवक को गोली मारकर बदमाश फरार


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया जब थाटीपुर थाना क्षेत्र के पीएमटी चौराहे पर एक युवक को बदमाशों ने घेरकर बेरहमी से पीट दिया और फिर उस पर गोलियां चला दीं। इस सनसनीखेज वारदात से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग दहशत में आ गए। घायल युवक की पहचान रामवीर गुर्जर के रूप में हुई है, जिसे स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

    बाइक सवार बदमाशों ने पहले पीटा, फिर की फायरिंग
    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रामवीर पीएमटी चौराहे के पास सड़क किनारे खड़ा था, तभी आधा दर्जन से अधिक बाइक सवार बदमाश वहां पहुंचे। उन्होंने पहले उसे घेरकर लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा और फिर अचानक फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों के छर्रे लगने से युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि मारपीट में उसके सिर में भी गहरी चोट आई है। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।

    जमीन विवाद से जुड़ा है मामला, पुरानी रंजिश की आशंका
    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह हमला जमीन विवाद से जुड़ा हो सकता है। बताया जा रहा है कि रामवीर गुर्जर का अपने पड़ोसी पिंटू उर्फ उदय गुर्जर से प्लॉट को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। करीब दो सप्ताह पहले भी दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और तनाव की स्थिति बनी थी। पुलिस को शक है कि पुरानी रंजिश के चलते इस वारदात को अंजाम दिया गया।

    CCTV फुटेज से खुल सकते हैं राज
    घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, जिसमें हमले की पूरी घटना कैद हुई है। फुटेज में साफ दिख रहा है कि कुछ लोग दौड़ते हुए आते हैं और सड़क किनारे खड़े युवक पर हमला कर देते हैं। इसके बाद मारपीट और फायरिंग की पुष्टि होती है।

    पुलिस की कार्रवाई, आरोपियों की तलाश तेज
    थाटीपुर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान की जा रही है और उन्हें जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। घायल युवक का इलाज जारी है और डॉक्टर उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

    ग्वालियर में दिनदहाड़े हुई यह वारदात एक बार फिर शहर की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। जमीन विवाद ने हिंसक रूप लेकर आम लोगों में दहशत फैला दी है। अब देखना होगा कि पुलिस कितनी जल्दी आरोपियों तक पहुंचती है।

  • इंदौर हादसा: प्लास्टिक दाना बनाने वाली फैक्ट्री में लगी आग, इलाके में अफरा-तफरी

    इंदौर हादसा: प्लास्टिक दाना बनाने वाली फैक्ट्री में लगी आग, इलाके में अफरा-तफरी

    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में शनिवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब धार रोड स्थित प्लास्टिक दाना बनाने वाली फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि फैक्ट्री से उठता काला धुआं कई किलोमीटर दूर से साफ दिखाई देने लगा।

    आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 7 दमकल गाड़ियों के साथ-साथ पोकलेन मशीन और फायर फाइटिंग रोबोट भी मंगाया गया है।

    4 घंटे से लगातार जंग, 35 टैंकर पानी का इस्तेमाल
    फायर ब्रिगेड की टीमें पिछले 4 घंटे से लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही हैं। अब तक लगभग 35 टैंकर पानी का उपयोग किया जा चुका है, लेकिन आग पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। अधिकारियों के अनुसार फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक दाना मौजूद होने के कारण आग तेजी से फैलती गई और स्थिति गंभीर हो गई। टीन शेड हटाकर और मलबा साफ कर आग बुझाने का प्रयास किया जा रहा है।

    आसपास का इलाका खाली, प्रशासन अलर्ट पर
    आग की भयावहता को देखते हुए एहतियातन आसपास के क्षेत्र को खाली करा दिया गया है ताकि किसी भी तरह की जनहानि से बचा जा सके। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सांवेर रोड स्थित एक अन्य फैक्ट्री में भी आग लगने की सूचना मिलने से प्रशासन और सतर्क हो गया है।

     पानी की कमी बनी बड़ी चुनौती
    RRCAT के डिप्टी फायर ऑफिसर अजय कुमार ने बताया कि इलाके में पानी के पर्याप्त स्रोत न होने से आग बुझाने में दिक्कत आ रही है। दूर-दूर से टैंकर बुलाकर दमकल वाहनों को बार-बार भरा जा रहा है, जिससे राहत कार्य धीमा पड़ रहा है। नगर निगम कमिश्नर भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

     आग लगने का कारण: शॉर्ट सर्किट की आशंका
    फैक्ट्री संचालक के अनुसार प्रारंभिक जांच में डीपी (डिस्ट्रीब्यूशन पैनल) में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का कारण माना जा रहा है। प्लास्टिक सामग्री होने के कारण आग तेजी से फैली और पूरी यूनिट को अपनी चपेट में ले लिया। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आग के वास्तविक कारणों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

     राहत की बात: कोई हताहत नहीं
    अच्छी बात यह है कि घटना के समय फैक्ट्री में मजदूर मौजूद नहीं थे, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है। फैक्ट्री में आमतौर पर 30 से 35 लोग दिन और रात की शिफ्ट में काम करते हैं।

    इंदौर की यह भीषण आग एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा और बिजली व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। हालांकि राहत की बात यह है कि बड़ा हादसा टल गया, लेकिन फैक्ट्री को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • देवास ब्लास्ट केस में चौंकाने वाली बातें सामने आईं, सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी वजह

    देवास ब्लास्ट केस में चौंकाने वाली बातें सामने आईं, सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी वजह


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के देवास जिले में टोंककलां स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट को लेकर श्रम विभाग की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में हादसे की दो बड़ी संभावित वजहों का खुलासा हुआ है, साथ ही फैक्ट्री प्रबंधन की गंभीर लापरवाहियां भी उजागर हुई हैं।

    श्रम मंत्री प्रह्लाद पटेल ने बताया कि तकनीकी जांच के अनुसार हादसे के पीछे मैग्नीशियम पाउडर की केमिकल रिएक्शन मुख्य कारण हो सकती है। आशंका है कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान मैग्नीशियम पानी के संपर्क में आ गया, जिससे जोरदार विस्फोट हुआ। दूसरी संभावना यह जताई गई है कि बारूद की हैंडलिंग के दौरान स्टैटिक चार्ज बना और उससे ‘सेल्फ इग्निशन’ यानी स्वतः आग लग गई।

    गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे हुए इस विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया था। धमाके के बाद फैक्ट्री से लगातार पटाखे फूटने की आवाजें आती रहीं और कई मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे में अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

    जांच रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि फैक्ट्री का निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ था, लेकिन वहां पटाखा निर्माण शुरू कर दिया गया था। यानी जिस समय सुरक्षा व्यवस्था और ढांचे की टेस्टिंग होनी चाहिए थी, उस समय बारूद और विस्फोटक सामग्री के बीच मजदूरों से काम कराया जा रहा था।

    रिपोर्ट के अनुसार, फैक्ट्री प्रबंधन के पास जिला कलेक्टर द्वारा जारी विस्फोटक लाइसेंस तो था, लेकिन फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी पंजीकरण और अन्य वैधानिक मंजूरियां नहीं ली गई थीं। बिना सुरक्षा मानकों और पर्याप्त इंतजामों के इस खतरनाक यूनिट का संचालन किया जा रहा था।

    श्रम विभाग ने फैक्ट्री में कई गंभीर खामियां पाई हैं, जिनमें अग्निशमन व्यवस्था का अभाव, इमरजेंसी प्लान तैयार न करना, श्रमिकों की हाजिरी और रिकॉर्ड न रखना, तथा मजदूरों को केमिकल सुरक्षा संबंधी जानकारी न देना शामिल है।

    इन सभी मामलों में फैक्ट्री प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। कई धाराओं के तहत 2 साल से लेकर 7 साल तक की सजा और लाखों रुपए के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी हादसे को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि घायलों के इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी और हादसे के जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।

  • देवास फैक्ट्री विस्फोट: साथियों ने कहा- बिलिंग रूम में आखिरी बार दिखे थे दोनों मजदूर

    देवास फैक्ट्री विस्फोट: साथियों ने कहा- बिलिंग रूम में आखिरी बार दिखे थे दोनों मजदूर


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के देवास जिले में टोंककलां स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। हादसे में अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, वहीं अब दो और मजदूरों के लापता होने की खबर सामने आने से परिजनों और साथी मजदूरों की चिंता बढ़ गई है।

    घायल मजदूरों का कहना है कि ब्लास्ट के बाद से उनके साथी राजू और बाबुल का कोई पता नहीं चल पाया है। दोनों बिहार के अरहरिया जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं और कुछ महीने पहले ही रोज़गार की तलाश में देवास आए थे।

    देवास जिला अस्पताल में भर्ती घायल मजदूर शशि कुमार ने बताया कि हादसे से पहले उनकी दोनों साथियों से खाना खाते समय बातचीत हुई थी। इसके बाद वे आखिरी बार फैक्ट्री के बिलिंग रूम के पास दिखाई दिए। धमाके के बाद से दोनों न तो अस्पतालों में मिले और न ही किसी से संपर्क हो पाया।

    साथी मजदूरों को आशंका है कि कहीं दोनों भी हादसे का शिकार तो नहीं हो गए। मजदूर लगातार प्रशासन से घटना स्थल पर जाकर तलाश करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अस्पतालों, आसपास के इलाकों और रिश्तेदारों से संपर्क कर लिया, लेकिन दोनों का कोई सुराग नहीं मिला।

    इस दर्दनाक हादसे में अब तक जिन मजदूरों की मौत हुई है, उनमें बिहार के सुमित, धीरज, अमर और गुड्डू शामिल हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी सनी की भी जान गई है। मृतकों के शव देर रात परिजनों को सौंप दिए गए।

    वहीं हादसे में घायल कई मजदूरों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। देवास जिला अस्पताल में 11 लोग भर्ती हैं, जबकि गंभीर घायलों को निजी अस्पतालों में रेफर किया गया है।

    प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री पूरी तरह तैयार होने से पहले ही वहां पटाखा निर्माण शुरू कर दिया गया था। श्रम विभाग की रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि मैग्नीशियम पाउडर के पानी के संपर्क में आने या स्टैटिक चार्ज बनने से विस्फोट हुआ होगा।

    रिपोर्ट में सुरक्षा नियमों की भारी अनदेखी, फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी लाइसेंस का अभाव, अग्निशमन व्यवस्था में कमी और इमरजेंसी प्लान न होने जैसी गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। इन मामलों में फैक्ट्री प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।