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  • हड़ताल के बीच धार्मिक रास्ता अपनाया, सतना में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का सुंदरकांड पाठ

    हड़ताल के बीच धार्मिक रास्ता अपनाया, सतना में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का सुंदरकांड पाठ


    मध्य प्रदेश । सतना जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान कर्मचारियों ने विरोध को आध्यात्मिक रूप देते हुए भगवान श्रीराम और बजरंगबली की आराधना के साथ सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया। इसके बाद सद्बुद्धि यज्ञ किया गया, जिसमें कर्मचारियों ने सरकार और प्रशासन को “सद्बुद्धि” देने और लंबित मांगों के शीघ्र समाधान की प्रार्थना की।

    सामूहिक प्रार्थना और बड़ी भागीदारी
    इस कार्यक्रम में जिले भर से बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी शामिल हुए। वातावरण में भक्ति और मांगों को लेकर गंभीरता—दोनों का मिश्रण देखने को मिला। कर्मचारियों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह उनके अधिकार, सम्मानजनक भविष्य और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर है।

    कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
    आंदोलनरत कर्मचारियों ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं:
    नियमितीकरण का लाभ देना
    एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा लागू करना
    हर साल 10% वेतन वृद्धि
    महंगाई भत्ता (DA) देना
    CHO के वेतन में PBI समायोजन
    वेतन विसंगतियों का पुनः परीक्षण
    समान कार्य के लिए समान वेतन
    सेवा सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा

     सरकार से समाधान की उम्मीद
    कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि सरकार सकारात्मक निर्णय लेकर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हजारों परिवारों को राहत देगी।

    आंदोलन का शांतिपूर्ण स्वरूप
    पूरे कार्यक्रम में कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। सुंदरकांड और यज्ञ के माध्यम से उन्होंने समाधान की दिशा में सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की।

  • नहर हादसे के बाद लापता जवान की तलाश तेज, आज एक महिला को डूबने से बचाया गया

    नहर हादसे के बाद लापता जवान की तलाश तेज, आज एक महिला को डूबने से बचाया गया


    रीवा: जिले के सिलपरा डैम में बुधवार सुबह डूबे सेना के जवान गौरव द्विवेदी (28) की तलाश दूसरे दिन भी जारी रही, लेकिन गुरुवार शाम तक उनका कोई सुराग नहीं मिल सका। घटना के बाद से इलाके में चिंता का माहौल बना हुआ है और एसडीईआरएफ की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन में जुटी हुई है।

    जानकारी के अनुसार, बघवार गांव निवासी गौरव द्विवेदी अपने परिवार के साथ डैम घूमने गए थे। इस दौरान नहाते समय उनका संतुलन बिगड़ गया और वे गहरे पानी में चले गए। देखते ही देखते वे पानी में लापता हो गए, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

    SDERF की टीम का लगातार सर्च ऑपरेशन
    घटना की जानकारी मिलते ही बिछिया थाना पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया गया। गोताखोरों की मदद से डैम में लगातार सर्चिंग की जा रही है, लेकिन अब तक जवान का कोई पता नहीं चल पाया है। प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज कर दिया है।

    सर्चिंग के दौरान बड़ा हादसा टला, महिला को बचाया गया
    सर्च ऑपरेशन के दौरान गुरुवार को एक और हादसा होते-होते टल गया। भटलो गांव निवासी पार्वती देवी चिराहुला कॉलोनी से अपने गांव लौट रही थीं, तभी सिलपरा नहर के पास अचानक उन्हें चक्कर आ गया और वे नहर में गिर गईं। तेज बहाव के बीच स्थिति गंभीर हो सकती थी, लेकिन मौके पर मौजूद SDERF टीम ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते बचाव होने से एक बड़ी अनहोनी टल गई।

    अस्पताल में भर्ती, जवान की तलाश जारी
    रेस्क्यू के बाद महिला को प्राथमिक उपचार दिया गया और डायल-112 की मदद से अस्पताल भेजा गया, जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण जारी है। वहीं डूबे हुए जवान की तलाश में टीमें लगातार जुटी हुई हैं। डीएसपी उदित मिश्रा ने बताया कि सर्च ऑपरेशन बिना रुके जारी है और हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि जवान को जल्द से जल्द ढूंढा जा सके।

    रीवा का सिलपरा डैम हादसा एक तरफ दुखद स्थिति पैदा कर रहा है, वहीं रेस्क्यू टीम की तत्परता ने एक और जान बचाकर बड़ी अनहोनी को टाल दिया है। फिलहाल पूरे इलाके की नजरें जवान की तलाश पर टिकी हैं।

  • अस्पताल में अंधेरा और गर्मी का कहर, जबलपुर में बिजली कटौती से मरीजों की हालत बिगड़ी

    अस्पताल में अंधेरा और गर्मी का कहर, जबलपुर में बिजली कटौती से मरीजों की हालत बिगड़ी


    मध्य प्रदेश । जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कुछ ही पलों में पूरे अस्पताल परिसर, वार्डों और गलियारों में अंधेरा छा गया, जिससे मरीजों और उनके परिजनों के बीच अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजली जाते ही गर्मी और उमस बढ़ गई, जिससे कई मरीज बेचैन हो गए। जनरल वार्ड में भर्ती कुछ मरीजों और उनके परिजनों को बाहर निकलते भी देखा गया। हालांकि, यह स्थिति करीब 15 से 20 मिनट तक बनी रही, जिसके बाद बिजली आपूर्ति सामान्य हो गई।

    गर्मी और अंधेरे से परेशान हुए मरीज, परिजनों में चिंता
    अस्पताल में सैकड़ों मरीज भर्ती हैं, जिनमें कई गंभीर स्थिति वाले मरीज भी शामिल हैं जो जीवन रक्षक उपकरणों पर निर्भर थे। अचानक बिजली गुल होने से परिजनों में चिंता बढ़ गई कि कहीं इलाज प्रभावित न हो जाए। कुछ लोगों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि इतने बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बिजली कटौती जैसी स्थिति में तुरंत और सुचारू बैकअप सिस्टम का प्रभावी होना जरूरी है, ताकि मरीजों को परेशानी न हो।

    बिजली विभाग ने मांगी रिपोर्ट, अस्पताल प्रशासन का दावा- जनरेटर तुरंत चालू हुए
    इस घटना को लेकर मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (एमपीईबी) के अधिकारियों ने भी जानकारी ली है। अधीक्षण यंत्री संजय अरोरा ने कहा कि उन्हें इस घटना की विस्तृत जानकारी नहीं मिली है, लेकिन संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अस्पताल के बड़े जनरेटर सिस्टम के बावजूद स्थिति कैसे प्रभावित हुई।

    वहीं मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने बिजली गुल होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि शहर में उस समय बिजली आपूर्ति प्रभावित थी। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में बैकअप के लिए सात बड़े जनरेटर लगे हुए हैं, जिनमें पर्याप्त डीजल भी उपलब्ध था। जैसे ही बिजली गई, जनरेटर सिस्टम स्वतः सक्रिय हो गया।

    डीन के अनुसार, अस्पताल में किसी भी मरीज को गंभीर परेशानी नहीं हुई और न ही किसी को वार्ड से बाहर निकलना पड़ा। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक चिकित्सा सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहीं।

    प्रशासनिक दावे बनाम हकीकत, जांच की मांग उठी
    इस घटना के बाद अस्पताल की आपातकालीन बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर बिजली विभाग इसकी जानकारी जुटा रहा है, वहीं अस्पताल प्रशासन अपने सिस्टम को पूरी तरह कार्यशील बता रहा है। अब देखना होगा कि जांच में वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।

  • सांदीपनि लोक बनेगा नया धार्मिक केंद्र, सिंहस्थ से पहले उज्जैन में 139 करोड़ की मेगा परियोजना का ऐलान

    सांदीपनि लोक बनेगा नया धार्मिक केंद्र, सिंहस्थ से पहले उज्जैन में 139 करोड़ की मेगा परियोजना का ऐलान


    मध्य प्रदेश । Ujjain एक बार फिर बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा में है। यहां स्थित Sandipani Ashram को अब भव्य ‘सांदीपनि लोक’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 139 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे सिंहस्थ कुंभ से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना ‘श्रीकृष्ण पाथेय योजना’ के तहत तैयार की जा रही है, जिसका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली को आधुनिक और भव्य स्वरूप देना है।

    108 फीट ऊंची श्रीकृष्ण प्रतिमा बनेगी मुख्य आकर्षण
    इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण होगी भगवान श्रीकृष्ण की 108 फीट ऊंची प्रतिमा। इसे प्रदेश की सबसे ऊंची श्रीकृष्ण प्रतिमा बताया जा रहा है। इस प्रतिमा का डिजाइन तकनीकी परीक्षण और विंड टनल स्टडी के बाद तैयार किया जाएगा, ताकि इसकी संरचना पूरी तरह सुरक्षित और टिकाऊ हो।

    महर्षि सांदीपनि और गुरुकुल परंपरा का भव्य प्रदर्शन
    परियोजना के तहत आश्रम परिसर में महर्षि सांदीपनि की प्रतिमा, गुरुकुल परंपरा से जुड़े थीम आधारित क्षेत्र, मंदिर परिसर और जल फाउंटेन विकसित किए जाएंगे। यह वही ऐतिहासिक स्थान है, जहां मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने बलराम और सुदामा के साथ शिक्षा प्राप्त की थी।

    डिजिटल अनुभव से जुड़ेगा इतिहास और आस्था
    सांदीपनि लोक को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए AR/VR आधारित अनुभव, डिजिटल प्रदर्शनी और मल्टी-लैंग्वेज ऑडियो-विजुअल सिस्टम उपलब्ध होगा। पर्यटक हेडफोन या VR डिवाइस के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, 64 कलाओं और गुरुकुल परंपरा को इंटरैक्टिव तरीके से समझ सकेंगे।

    लाइट एंड साउंड शो से जीवंत होगी श्रीकृष्ण कथा
    परिसर में इमर्सिव लाइट एंड साउंड शो भी विकसित किया जाएगा, जिसमें श्रीकृष्ण की जीवनगाथा और उज्जैन से उनका ऐतिहासिक संबंध दर्शाया जाएगा।

    सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर तैयारी
    यह पूरी योजना आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है, जिससे Ujjain को एक वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। महाकाल लोक के बाद अब सांदीपनि लोक को भी उसी स्तर का बड़ा आध्यात्मिक और पर्यटन प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

    महाकाल लोक के बाद बढ़ा धार्मिक पर्यटन
    महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है। अब प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिला है।

    सांदीपनि लोक परियोजना न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगी, बल्कि यह उज्जैन को आधुनिक तकनीक से जोड़कर एक वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है।

  • क्लीनचिट के बदले 3 लाख की डील! लोकायुक्त के भीतर भ्रष्टाचार का कथित नेटवर्क उजागर

    क्लीनचिट के बदले 3 लाख की डील! लोकायुक्त के भीतर भ्रष्टाचार का कथित नेटवर्क उजागर


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली लोकायुक्त संस्था खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। एक कथित स्टिंग ऑपरेशन में लोकायुक्त के अधिकारियों और कर्मचारियों पर जांच प्रभावित करने, क्लीनचिट दिलाने और मामलों को कमजोर करने के बदले लाखों रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप लगाए गए हैं। इस खुलासे ने प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण जांच एजेंसियों में से एक की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है।

    रिपोर्ट के अनुसार, लोकायुक्त कार्यालय के एक टेक्नीशियन ने कथित तौर पर दावा किया कि डीएसपी स्तर के अधिकारियों के माध्यम से जांच में राहत दिलाई जा सकती है। आरोप है कि एक मामले में क्लीनचिट दिलाने के लिए 3 लाख रुपये और अन्य स्तरों पर अलग-अलग रकम की मांग की गई। स्टिंग में शामिल बातचीत में एक महिला डीएसपी द्वारा कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया कि “चोरी सब करते हैं, जो पकड़ाया वही चोर होता है”, जिसके बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया।

    कथित बातचीत के दौरान अधिकारियों ने जांच प्रक्रिया, नोटिस, वॉयस सैंपल और दस्तावेजों को लेकर भी चर्चा की। आरोप है कि जांच से जुड़ी गोपनीय जानकारी और ट्रांसक्रिप्ट तक उपलब्ध कराने की पेशकश की गई। इतना ही नहीं, कथित तौर पर पैसे नहीं मिलने पर संबंधित पक्ष पर दबाव बनाने और जांच प्रभावित करने जैसी बातें भी सामने आईं।

    मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि लोकायुक्त द्वारा प्रस्तुत खात्मा रिपोर्टों को लेकर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से अप्रैल के बीच विशेष अदालत ने लोकायुक्त की ओर से पेश की गई कई खात्मा रिपोर्टों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने जांच में कमियां, अधूरे साक्ष्य और आवश्यक गवाहों के बयान दर्ज न किए जाने जैसी खामियों की ओर संकेत किया।

    आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में ट्रैप कार्रवाई की संख्या बढ़ी है, लेकिन दोषसिद्धि के मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। इससे जांच की गुणवत्ता और अभियोजन की प्रभावशीलता पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भ्रष्टाचार की जांच करने वाली संस्था पर ही ऐसे आरोप लगते हैं, तो आम नागरिकों का भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है।

    हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों या लोकायुक्त संगठन की ओर से अंतिम और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने और सक्षम एजेंसियों द्वारा तथ्यों की पुष्टि होने तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। फिलहाल यह मामला प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

  • सूखाराजापुर में आग का कहर, ग्रामीणों की कोशिश के बावजूद नहीं बच सकीं भैंसें

    सूखाराजापुर में आग का कहर, ग्रामीणों की कोशिश के बावजूद नहीं बच सकीं भैंसें


    मध्य प्रदेश । Shivpuri जिले के रन्नौद थाना क्षेत्र स्थित ग्राम सूखाराजापुर में रविवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया, जब एक पशुशाला (खड़ेरा) में अचानक भीषण आग लग गई। इस घटना ने पूरे गांव को दहला दिया और पशुपालक परिवार को भारी नुकसान झेलना पड़ा।

    जानकारी के अनुसार, पूर्व सरपंच पुष्पेन्द्र सिंह लोधी अपने घर पर मौजूद थे, तभी उन्हें पशुशाला से तेज धुआं उठता दिखाई दिया। जब वे मौके पर पहुंचे तो देखा कि आग तेजी से फैल चुकी थी और अंदर बंधे पशु जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।

    घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों को बुलाया गया और सभी ने मिलकर आग बुझाने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक दो भैंसों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। वहीं चार गायें गंभीर रूप से झुलस गईं, जिनकी हालत नाजुक बनी हुई है और उनका इलाज जारी है।

    Shivpuri में इस हादसे के बाद पशुपालक परिवार को करीब 2 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है। घटना के बाद गांव में शोक और चिंता का माहौल है, क्योंकि पशु ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा होते हैं।

    फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने मामले में आगजनी का प्रकरण दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। सहायक उप निरीक्षक को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आग किसी तकनीकी कारण से लगी या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।

    ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर आग पर काबू नहीं पाया जाता, तो नुकसान और भी बड़ा हो सकता था। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में पशु सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था की जरूरत को उजागर कर दिया है।

  • शिवपुरी में पुरानी रंजिश पर खूनी संघर्ष, कई लोग घायल

    शिवपुरी में पुरानी रंजिश पर खूनी संघर्ष, कई लोग घायल


    शिवपुरी  मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के बैराड़ थाना क्षेत्र के खद्द गांव में पुरानी रंजिश को लेकर दो पक्षों के बीच जमकर खूनी संघर्ष हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि गड़ासी, लाठी-डंडों और बंदूक तक का इस्तेमाल किया गया। घटना में दोनों पक्षों के 6 से 7 लोग घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
    पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर क्रॉस एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के मुताबिक, दोनों परिवारों के बीच पिछले करीब आठ महीने से विवाद चला आ रहा था। बताया जा रहा है कि पहले एक पक्ष का युवक दूसरे पक्ष की बहू को अपने साथ ले गया था। बाद में पुलिस ने महिला को बरामद कर परिजनों को सौंप दिया था। तभी से दोनों परिवारों के बीच तनाव बना हुआ था और आए दिन विवाद की स्थिति बन रही थी।

    शनिवार सुबह यह रंजिश फिर हिंसक झड़प में बदल गई। खद्द गांव निवासी बृजमोहन यादव अपने भाई सियाराम यादव के साथ खेत पर पानी की मोटर चालू करने पहुंचे थे। इसी दौरान गांव के ऐवरन यादव, वीरू यादव, सिंधिया यादव और मेघसिंह यादव वहां आ गए। आरोप है कि ऐवरन यादव बंदूक लेकर पहुंचा था और आते ही पुरानी दुश्मनी को लेकर गाली-गलौज शुरू कर दी।

    विवाद बढ़ने पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। शोर सुनकर परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंच गए। इसी दौरान गड़ासी और लाठी-डंडों से हमला कर दिया गया। हमले में सियाराम यादव के सिर में गंभीर चोट आई, जबकि सेवा यादव के हाथ, रामहेत यादव के माथे और हाथ, लोकेन्द्र यादव के कंधे और पैर तथा राजेन्द्र यादव के सिर में चोटें आईं। बीच-बचाव करने पहुंचे बृजमोहन यादव भी घायल हो गए।

    घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों की निगरानी में सभी का इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलते ही बैराड़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया।

    पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मारपीट और हमला करने के आरोप लगाए हैं। इसी आधार पर क्रॉस केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि घटना के दौरान बंदूक का इस्तेमाल हुआ था या नहीं।

    गांव में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस सतर्क है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

  • कीमती सामान नहीं मिला तो जूते चुराकर भागे चोर, CCTV में कैद

    कीमती सामान नहीं मिला तो जूते चुराकर भागे चोर, CCTV में कैद


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले के इंदार थाना क्षेत्र के खतौरा गांव में चोरी की एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहां शनिवार देर रात 7 से 8 बदमाश चोरी की नीयत से एक घर में घुसे, लेकिन जब उन्हें कोई कीमती सामान नहीं मिला तो वे घर से दो जोड़ी जूते चुराकर फरार हो गए। पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है, जिसके आधार पर पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुटी है।

    जानकारी के अनुसार, खतौरा गांव निवासी मोहर सिंह कुशवाह के घर में शनिवार रात करीब 3:38 बजे बदमाश बाउंड्री फांदकर अंदर दाखिल हुए। सीसीटीवी फुटेज में कई संदिग्ध घर के आसपास घूमते और छत पर चढ़ने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि बदमाश करीब 10 मिनट तक घर के अंदर और बाहर मंडराते रहे। कुछ आरोपियों के पास हथियार होने की भी आशंका जताई गई है।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब सुबह करीब 4 बजे मोहर सिंह कुशवाह की नींद खुली। उन्होंने घर में लगे एलसीडी स्क्रीन पर देखा कि कुछ सीसीटीवी कैमरों के एंगल बदले हुए हैं। शक होने पर जब रिकॉर्डिंग चेक की गई तो घर में कई बदमाश घूमते नजर आए।

    परिवार के अनुसार, चोरों ने घर में काफी तलाश की, लेकिन उन्हें कोई नकदी या कीमती सामान हाथ नहीं लगा। आखिर में बदमाश किरायेदारों के दो जोड़ी जूते उठाकर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और लोग रात की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में रात के समय संदिग्ध गतिविधियां बढ़ रही हैं और पुलिस गश्त को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच शुरू कर दी है। यह घटना भले ही सुनने में अजीब लगे, लेकिन इससे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि अगर बदमाश हथियार लेकर घरों में घुस रहे हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

  • सनघटा डैम में कार्रवाई: बालाजी क्रेशर सील, भारी मात्रा में गिट्टी जब्त

    सनघटा डैम में कार्रवाई: बालाजी क्रेशर सील, भारी मात्रा में गिट्टी जब्त


    नई दिल्ली। शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र में निर्माणाधीन सनघटा डैम परियोजना में गुणवत्ता को लेकर सामने आई लापरवाही पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर अर्पित वर्मा के औचक निरीक्षण के बाद खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बालाजी क्रेशर को सील कर दिया। मौके से करीब 4 हजार घनमीटर गिट्टी के साथ एक पोकलेन और एक हाइड्रा मशीन भी जब्त की गई है।

    दरअसल, शनिवार को कलेक्टर अर्पित वर्मा ने सनघटा डैम, निर्माणाधीन पंप स्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन के कार्यों का अचानक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान निर्माण सामग्री की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई। कई जगहों पर सामग्री की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए, जिस पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

    कलेक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके निर्देश के बाद खनिज विभाग की टीम हरकत में आई और खनिज निरीक्षक सोनू श्रीवास के नेतृत्व में मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू की गई।

    खनिज विभाग ने गिट्टी निर्माण के लिए संचालित बालाजी क्रेशर को सील कर दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अगली अनुमति तक क्रेशर बंद रहेगा। इसके अलावा मौके पर मौजूद लगभग 4000 घनमीटर गिट्टी को जब्त किया गया। कार्रवाई के दौरान एक पोकलेन मशीन और एक हाइड्रा मशीन भी जब्त की गई, जिनका उपयोग निर्माण कार्यों में किया जा रहा था।

    प्रशासन की इस कार्रवाई से निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि जिले में चल रही अन्य परियोजनाओं की भी गुणवत्ता जांच की जाएगी और जहां भी अनियमितता मिलेगी वहां सख्त कार्रवाई होगी।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं। अब प्रशासन की सख्ती से उम्मीद जगी है कि विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।

    यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि अब सरकारी परियोजनाओं में लापरवाही और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल पर प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

  • रीवा सड़क हादसा: नाले में गिरी कार, स्थानीय लोगों ने की रेस्क्यू

    रीवा सड़क हादसा: नाले में गिरी कार, स्थानीय लोगों ने की रेस्क्यू


    रीवा  रीवा शहर के करहिया स्थित अग्रवाल पेट्रोल पंप के पास रविवार को एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। एक तेज रफ्तार ट्रक की लापरवाही के चलते एक कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने नाले में जा गिरी। अचानक हुए इस हादसे से कार में सवार लोगों के बीच चीख-पुकार मच गई और कुछ देर के लिए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार मोड़ से गुजर रही थी, तभी सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने अचानक कट मार दिया। ट्रक के अचानक सामने आने से कार चालक घबरा गया और वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। नियंत्रण बिगड़ते ही कार सड़क से नीचे उतरकर सीधे नाले में जा घुसी।

    हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोग मदद के लिए दौड़ पड़े। स्थानीय लोगों ने बिना देर किए कार में फंसे सवारों को बाहर निकाला और प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई। राहत की बात यह रही कि इस दुर्घटना में किसी की जान नहीं गई, हालांकि सभी को हल्की चोटें आई हैं।

    जानकारी के मुताबिक, कार में सवार लोग सतना निवासी बताए जा रहे हैं, जो किसी काम से परौहा टोला बोदा बाग की ओर जा रहे थे। दुर्घटना के बाद मौके पर काफी देर तक भीड़ जमा रही और स्थानीय लोगों ने सड़क पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार पर नाराजगी जताई।

    लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर अक्सर ट्रक और अन्य भारी वाहन तेज गति से चलते हैं और मोड़ पर अचानक कट मार देते हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे संवेदनशील मोड़ों पर स्पीड कंट्रोल और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। फिलहाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन से भी इस घटना की जांच और सड़क सुरक्षा उपायों को लेकर कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।