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  • MP: शिवपुरी के करैरा में कुएं में मिले मां-बेटे का शव…. महिला ने मासूम को दुपट्टे से बांध रखा था

    MP: शिवपुरी के करैरा में कुएं में मिले मां-बेटे का शव…. महिला ने मासूम को दुपट्टे से बांध रखा था


    शिवपुरी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शिवपुरी जिले (Shivpuri district) के करैरा (Karera) में पुलिस लाइन के नीचे बने ‘पीपल वाले कुएं’ में एक महिला और उसके बेटे का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. घटना की सूचना मिलते ही करैरा थाना प्रभारी (टीआई) विनोद छाबई पुलिस टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे. पुलिस ने नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों की मदद से दोनों शवों को कुएं से बाहर निकाला और पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।

    मृतका की पहचान शिवानी विश्वकर्मा पत्नी भूपेंद्र विश्वकर्मा निवासी करैरा के रूप में हुई है. दिल दहला देने वाली बात यह सामने आई है कि महिला ने अपने 7 साल के मासूम बेटे को अपने दुपट्टे से बांधकर कुएं में छलांग लगाई थी.


    पति से विवाद के बाद दिल्ली से आई थी मायके

    परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, शिवानी का अपने पति भूपेंद्र से विवाद चल रहा था. इसी अनबन के कारण वह करीब एक से डेढ़ महीने पहले दिल्ली से अपने 7 वर्षीय बेटे को लेकर करैरा स्थित अपने मायके आई हुई थी।


    ‘वोट चोरी नहीं हो रहे, जनता ने चोरों को वोट देना बंद कर दिया…
    ‘
    मंगलवार को महिला और उसका बेटा अचानक घर से लापता हो गए थे. परिजनों ने उस वक्त ज्यादा खोजबीन नहीं की, क्योंकि उन्हें लगा कि शिवानी अपने पति से बात करके वापस दिल्ली लौट गई होगी. लेकिन बुधवार को जब कुएं में दोनों के शव मिलने की खबर फैली, तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

    पूरे मामले पर करैरा टीआई विनोद छाबई ने बताया, ”पुलिस लाइन के नीचे स्थित कुएं में महिला और उसके बच्चे का शव बरामद किया गया है. प्रथम दृष्टया यह मामला पारिवारिक विवाद के चलते आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है. पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है. मौत के सटीक कारणों और समय का वास्तविक खुलासा पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

  • कोलकाता में पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन से जुड़े 15 ठिकानों पर ED की छापेमारी, दुर्गा पूजा प्रीव्यू शो के नाम पर करोड़ों जुटाने का आरोप

    कोलकाता में पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन से जुड़े 15 ठिकानों पर ED की छापेमारी, दुर्गा पूजा प्रीव्यू शो के नाम पर करोड़ों जुटाने का आरोप


    नई दिल्ली : कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय ने कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए MassArt सोसाइटी से जुड़े 15 ठिकानों पर छापेमारी की है। इनमें पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता इंद्रनील सेन से जुड़े परिसर भी शामिल हैं। यह कार्रवाई दुर्गा पूजा के प्रीव्यू शो के नाम पर कथित तौर पर बाजार से करोड़ों रुपये जुटाने और उस धनराशि से जुड़ी गतिविधियों की जांच के तहत की जा रही है। जांच का संबंध MassArt सोसाइटी की गतिविधियों और प्रीव्यू शो के नाम पर लोगों से जुटाई गई रकम से बताया जा रहा है।

    दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच सामने आए इस मामले में आरोप है कि MassArt सोसाइटी ने दुर्गा पूजा के प्रीव्यू शो आयोजित करने के नाम पर आम लोगों से बड़ी रकम जुटाई। इसके लिए पूजा पास बेचने की बात भी सामने आई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि संस्था के नाम पर जुटाई गई इस रकम का इस्तेमाल उससे जुड़े लोगों ने निजी फायदे के लिए किया। मामले में कई लोगों और संस्थाओं को जांच के दायरे में रखा गया है। एजेंसी की ओर से की जा रही तलाशी के दौरान दस्तावेजों और अन्य संदिग्ध रिकॉर्ड की जांच की जा रही है, ताकि धनराशि जुटाने और उसके इस्तेमाल से संबंधित जानकारी सामने आ सके।

    मंगलवार तड़के शुरू हुई कार्रवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय की टीमें पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन और उनके करीबियों से जुड़े परिसरों पर पहुंचीं। इनमें हाइलैंड पार्क और हिंदुस्तान पार्क स्थित उनके ठिकाने भी शामिल हैं। इसके अलावा उनके रिश्तेदारों और अन्य संबंधित स्थानों पर भी तलाशी अभियान चलाया गया। दी गई जानकारी के अनुसार, कोलकाता में इंद्रनील सेन के घर समेत कुल 10 जगहों पर ED की टीमें तलाशी कर रही थीं। तलाशी के दौरान उनके घर से कुछ सबूत मिलने की बात भी सामने आई है। कार्रवाई का उद्देश्य मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच करना है।

    जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू MassArt सोसाइटी की पहचान और उसके नाम पर धन जुटाने से जुड़ा है। एजेंसी को जानकारी मिली है कि संस्था को लोगों के सामने यूनेस्को से मान्यता प्राप्त या उससे जुड़ी संस्था के रूप में प्रस्तुत किया गया था। इसी आधार पर विभिन्न गतिविधियों के लिए धन जुटाए जाने की बात कही गई है। जांच एजेंसी अब इस पूरे मामले में संस्था की गतिविधियों, प्रीव्यू शो के नाम पर जुटाई गई रकम और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। कार्रवाई के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज और रिकॉर्ड इस जांच का हिस्सा हैं।

  • MP की बड़ी उपलब्धि…. यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल हुए चार और नए ऐतिहासिक स्थल

    MP की बड़ी उपलब्धि…. यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल हुए चार और नए ऐतिहासिक स्थल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत (Rich Historical and Cultural Heritage) को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक और ऐतिहासिक सफलता मिली है. प्रदेश के चार ऐतिहासिक स्थलों को UNESCO की Tentative List में शामिल किया गया है. इनमें धार की बाघ गुफाओं के भित्ति चित्र, सीहोर की गिन्नौरगढ़ किला, मुरैना के बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह और विदिशा की उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं।

    UNESCO के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक इन चारों स्थलों को 8 जुलाई 2026 को भारत की ओर से Tentative List के लिए प्रस्तुत किया गया. भारत की Tentative List में फिलहाल 78 स्थल दर्ज हैं. हालांकि, Tentative List में शामिल होना अभी UNESCO की World Heritage List में शामिल होने के बराबर नहीं है. यह किसी स्थल के संभावित विश्व धरोहर नामांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती चरण है।


    चारों धरोहरों में क्या है खास?

    मध्य प्रदेश के इन चारों स्थलों की खासियत अलग-अलग है. कहीं हजारों साल पुरानी कला और धार्मिक परंपराओं के प्रमाण मिलते हैं तो कहीं मध्यकालीन मंदिर वास्तुकला और गोंड शासन की स्थापत्य विरासत दिखाई देती है.


    1. बाघ गुफाएं: पत्थरों पर दर्ज बौद्ध कला की कहानी

    धार जिले में बाघ नदी के किनारे विंध्य क्षेत्र की पहाड़ियों में स्थित बाघ गुफाएं नौ रॉक-कट बौद्ध गुफाओं का समूह हैं. UNESCO के अनुसार इनका विकास लगभग चौथी से छठी शताब्दी ईस्वी के बीच हुआ. इन गुफाओं की सबसे बड़ी पहचान यहां मौजूद भित्ति चित्र हैं. खासतौर पर गुफा संख्या-4, जिसे रंग महल के नाम से जाना जाता है, अपने म्यूरल्स के लिए प्रसिद्ध है.

    इन चित्रों में तत्कालीन जीवन, धार्मिक विषयों, संगीत, नृत्य और सामाजिक गतिविधियों की झलक मिलती है. UNESCO के रिकॉर्ड के अनुसार यहां बड़ी संख्या में प्राचीन अभिलेख भी मिले हैं, जो गुप्तकालीन राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों से इसके संबंध की ओर संकेत करते हैं.


    2. गिन्नौरगढ़ किला: गोंड विरासत की मजबूत पहचान

    सीहोर जिले में रातापानी क्षेत्र के वन परिदृश्य के बीच स्थित गिन्नौरगढ़ किला मध्य प्रदेश की गोंड विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है. यह किला केवल सैन्य सुरक्षा के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसके आसपास की प्राकृतिक भौगोलिक संरचना और जल प्रबंधन व्यवस्था भी इसे खास बनाती है. किले की संरचना और आसपास के ऐतिहासिक अवशेष मध्य भारत में गोंड शासन की राजनीतिक व्यवस्था, वास्तुकला और जल प्रबंधन की परंपराओं को समझने में महत्वपूर्ण माने जाते हैं. UNESCO की Tentative List में गिन्नौरगढ़ किले की प्रविष्टि भी 8 जुलाई 2026 की है।


    3. बटेश्वर-पदावली-ककरामठ: एक जगह तीन ऐतिहासिक मंदिर समूह

    मुरैना जिले के चंबल क्षेत्र में स्थित बटेश्वर, पदावली और ककरामठ मंदिर समूह को एक संयुक्त विरासत स्थल के रूप में Tentative List में शामिल किया गया है. UNESCO के मुताबिक ये मंदिर मुख्य रूप से 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच विकसित हुए और मध्य भारत में प्रारंभिक मध्यकालीन नागर मंदिर वास्तुकला के विकास को दर्शाते हैं। बटेश्वर अपने बड़े मंदिर समूह के लिए जाना जाता है, जबकि पदावली की नक्काशी और ककरामठ की स्थापत्य विशेषताएं इस पूरे क्षेत्र की मंदिर निर्माण परंपरा को समझने में मदद करती हैं।

    UNESCO के अनुसार इन तीनों स्थलों को एक साथ देखने पर चंबल घाटी में विकसित क्षेत्रीय मंदिर स्थापत्य और कलात्मक परंपरा की तस्वीर सामने आती है.


    4. उदयगिरि गुफाएं: गुप्तकाल की धार्मिक और राजनीतिक विरासत

    विदिशा के पास स्थित उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन भारत की धार्मिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रमाणों में शामिल हैं. यहां चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाएं, मूर्तियां और अभिलेख प्राचीन धार्मिक परंपराओं के साथ तत्कालीन राजसत्ता के संबंध को भी सामने रखते हैं. उदयगिरि की सबसे चर्चित प्रतिमाओं में विशाल वराह प्रतिमा शामिल है. यह वैष्णव परंपरा और गुप्तकालीन राजकीय विचारधारा के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. UNESCO की एक अलग 2025 की Tentative List प्रविष्टि में उदयगिरि की गुफा संख्या-1 को उत्तर भारत के गुप्तकालीन मंदिरों की एक Serial Nomination का हिस्सा भी बनाया गया है।


    मध्य प्रदेश में अब 19 Tentative List entries?

    मध्य प्रदेश की ये चार नई प्रविष्टियां राज्य की विरासत को UNESCO के मंच पर और विस्तार देती हैं. UNESCO के आधिकारिक रिकॉर्ड में राज्य से जुड़ी कई अन्य प्रविष्टियां भी दर्ज हैं, जिनमें ग्वालियर किला, भोजेश्वर महादेव मंदिर, ओरछा का ऐतिहासिक समूह, धामनार का ऐतिहासिक समूह, खूनी भंडारा और रामनगर के गोंड स्मारक जैसी धरोहरें शामिल हैं। प्रदेश की विरासत सूची में प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों तरह के स्थल शामिल हैं. भेड़ाघाट-लामेताघाट और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भी UNESCO की Tentative List में दर्ज हैं।


    Tentative List में शामिल होने का क्या मतलब है?

    किसी स्थल का UNESCO की Tentative List में शामिल होना यह बताता है कि संबंधित देश उसे भविष्य में World Heritage List के लिए नामांकित करने पर विचार कर रहा है. इसके बाद नामांकन, मूल्यांकन और UNESCO की निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत आगे की कार्रवाई होती है. इसलिए इन चारों स्थलों का Tentative List में आना विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा मिलना नहीं, बल्कि उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    मध्य प्रदेश की विरासत को मिलेगा नया मंच
    बाघ की भित्ति चित्रकारी से लेकर गिन्नौरगढ़ की गोंड स्थापत्य विरासत, चंबल के मंदिर समूह और उदयगिरि की गुप्तकालीन गुफाओं तक इन चार स्थलों की विशेषताएं मध्य प्रदेश के इतिहास की अलग-अलग परतों को सामने लाती हैं। UNESCO की आधिकारिक सूची में चारों स्थलों का शामिल होना प्रदेश की पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

  • MP: निधि तिवारी केस में नया मोड….2 बच्चों के इंजीनियर पिता से कैसे बढ़ी नजदीकी…मां ने किए कई खुलासे

    MP: निधि तिवारी केस में नया मोड….2 बच्चों के इंजीनियर पिता से कैसे बढ़ी नजदीकी…मां ने किए कई खुलासे


    सिंगरौली।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सिंगरौली (Singrauli) के मोरवा थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर (Social Media Influencer) निधि तिवारी (Nidhi Tiwari) की मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है. निधि की मौत के बाद अब उसकी मां हेमलता तिवारी (Hemlata Tiwari) ने बेटी की जिंदगी से जुड़े कई ऐसे दावे किए हैं, जिन्होंने इस पूरे मामले में नए सवाल खड़े कर दिए हैं. मां के मुताबिक निधि परिवार की सबसे बड़ी बेटी थी और घर की जिम्मेदारियां संभालने के साथ बैढ़न में एक आलीशान मकान भी बनवा रही थी. इसी दौरान उसकी नजदीकी एक शादीशुदा इंजीनियर से बढ़ी, जो दो बच्चों का पिता था।


    होटल में हुई थी सोनू से मुलाकात

    हेमलता तिवारी के मुताबिक निधि मोरवा के जीएस ग्रैंड होटल में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी. इसी होटल में एनसीएल से जुड़े आउटसोर्सिंग काम के सिलसिले में आने वाला सोनू सिंह अक्सर ठहरता था. सोनू पंजाब का रहने वाला बताया जा रहा है और इंजीनियर के पद पर काम करता था।

    मां का दावा है कि होटल में काम करने के दौरान दोनों की जान-पहचान हुई और धीरे-धीरे यह दोस्ती कथित तौर पर रिश्ते में बदल गई. परिवार को बाद में पता चला कि सोनू शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं. इसके बाद परिवार ने निधि को उससे दूरी बनाने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन मां के मुताबिक दोनों का संपर्क बना रहा।


    ‘हर वक्त रखता था नजर’

    निधि की मां ने सोनू पर बेटी की लगातार निगरानी करने का भी आरोप लगाया है. उनका कहना है कि निधि के कान में अक्सर ब्लूटूथ लगा रहता था और वह सोनू के संपर्क में रहती थी. मां के मुताबिक, सोनू यह जानना चाहता था कि निधि कहां है और उसके आसपास कौन है. घर में कोई रिश्तेदार आने पर भी निधि से सवाल किए जाते थे।

    हेमलता तिवारी का दावा है कि इस वजह से निधि काफी समय तक ऑनलाइन रहती थी और ब्लूटूथ के जरिए सोनू से संपर्क में बनी रहती थी. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.


    परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही थी निधि

    मां के मुताबिक निधि घर की सबसे बड़ी बेटी थी और परिवार की जिम्मेदारियों में उसका बड़ा योगदान था. पिता अशोक तिवारी एक कंपनी में नौकरी करते थे, लेकिन बाद में ट्रांसफर के बाद परिवार से अलग हो गए. हेमलता का कहना है कि इसके बाद उन्होंने ही बच्चों का पालन-पोषण किया।

    निधि बैढ़न में अपने लिए एक आलीशान घर बनवा रही थी. मां के मुताबिक, वह घर और परिवार के भविष्य को लेकर लगातार मेहनत कर रही थी, लेकिन निजी जिंदगी में चल रही उथल-पुथल के कारण तनाव में भी रहती थी।


    घटना वाले दिन क्या हुआ था?

    हेमलता तिवारी के मुताबिक, घटना वाले दिन निधि ने नीचे पूजा-पाठ किया और इसके बाद ऊपर अपने कमरे में चली गई. उस समय भी उसके कान में ब्लूटूथ लगा हुआ था. इसके बाद सोनू सिंह का फोन आया। कुछ देर बाद जब परिवार के लोगों ने कमरे का दरवाजा खटखटाया तो अंदर से कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद दरवाजा तोड़ा गया. परिवार के मुताबिक, निधि कमरे में पंखे से दुपट्टे के सहारे लटकी हुई मिली।

    निधि की मौत के बाद उसकी मां के इन दावों ने सोनू सिंह के साथ उसके रिश्ते, निधि की मानसिक स्थिति और घटना से पहले की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब इन दावों की सच्चाई और निधि की मौत की असल वजह पुलिस जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों से स्पष्ट होगी.

  • MP: खंडवा में पटवारी का बड़ा कारनामा…. अपने और पत्नी के नाम करा लीं गांव की 51 जमीनें!

    MP: खंडवा में पटवारी का बड़ा कारनामा…. अपने और पत्नी के नाम करा लीं गांव की 51 जमीनें!


    खंडवा।
    17 सितंबर से मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में ‘स्वामित्व भू-अधिकार निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ (‘Swamitva Land Rights Execution and Registration Scheme-2026’) लागू हुई है, जिसका मकसद ग्रामीण आबादी को निशुल्क रजिस्ट्री और भू-अधिकार दिलाना है. मध्य प्रदेश के खंडवा जिले (Khandwa district) से जो खबर आई है, उसने प्रशासनिक तंत्र की नीयत और निष्ठा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस पटवारी के कंधों पर ग्रामीणों की जमीन का रिकॉर्ड सहेजने की जिम्मेदारी थी, उसी ने पद का बेजा इस्तेमाल करते हुए सरकारी चबूतरों, सार्वजनिक बावड़ियों और गरीबों के मकानों के पट्टे अपने और अपनी पत्नी के नाम लिखवा लिए. एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 51 पट्टे।

    यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के ग्राम कोलगांव का है. सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्वामित्व योजना’ के तहत गांव में कुल 935 आवासीय पट्टे जारी किए जाने थे. ग्रामीणों को आस थी कि बरसों से जिस जमीन पर वे रह रहे हैं, उसका मालिकाना हक उन्हें मिलेगा. लेकिन योजना के क्रियान्वयन से पहले ही तत्कालीन पटवारी राजेश मंडलोई ने सरकारी रिकॉर्ड में गड़बड़ी की।

    पटवारी राजेश मंडलोई ने गांव के रिकॉर्ड में हेरफेर कर अपने नाम 48 और अपनी पत्नी मनीषा मंडलोई के नाम 3 पट्टे दर्ज करा लिए. यानी गांव के कुल पट्टों में से 51 पट्टे अकेले पटवारी के परिवार के नाम दर्ज हो गए।

    डॉगी बनकर प्रदर्शन करने वाले दीपक राठौर बोले…
    इस पूरे मामले का पर्दाफाश तब हुआ, जब ग्रामीण शुभम तोमर ने इसकी शिकायत की और कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ने दस्तावेजों के साथ पूरे मामले को सामने रखा. ग्रामीणों के मुताबिक, दो-तीन साल पहले पटवारी राजेश मंडलोई सर्वे के नाम पर रिकॉर्ड दुरुस्त करने आए थे. लेकिन उन्होंने चुपके से सार्वजनिक और निजी संपत्तियों पर अपना नाम चढ़ा दिया।

    जिला कांग्रेस अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह ने आरोप लगाया कि शुभम तोमर के घर के पीछे स्थित सार्वजनिक बावड़ी, जिससे पूरा गांव पानी पीता है, उसे पटवारी ने अपने नाम कर लिया. हद तो तब हो गई, जब गांव के बस स्टैंड पर बना RCC का सार्वजनिक चबूतरा और ग्रामीण बलिराम का मकान यानी खसरा नंबर 530 भी पटवारी के रिकॉर्ड में दर्ज पाया गया. जिला कांग्रेस अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह ने जब इस मामले की शिकायत कलेक्टर से की तो उन्होंने भी इसे देखकर गंभीरता से लिया।

    शासन ने ‘स्वामित्व योजना’ के तहत पटवारियों को जमीन की रजिस्ट्री करने के अधिकार दिए हैं. कोलगांव पंचायत में पूर्व पटवारी ने 51 पट्टे अपने और अपने परिवार के नाम करा लिए हैं. यह योजना शुरू होने के पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है. यह सिर्फ एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश में भी कई मामले हो सकते हैं. तत्काल इसकी जांच कमेटी बनाकर जांच की जाए, इससे और भी कई मामले उजागर हो सकते हैं. इससे वाजिब लोग अपने हक से वंचित हो रहे हैं. दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

    मामला उजागर होते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्तमान पटवारी राकेश पटेल को मौके पर भेजकर स्थलीय जांच कराई गई. ग्रामीणों की मौजूदगी में जब खसरों का मिलान हुआ, तो गड़बड़ी की पुष्टि हुई।

    जांच रिपोर्ट सामने आते ही खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने सख्त रुख अपनाया और आरोपी पटवारी राजेश मंडलोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. इसके साथ ही कोलगांव के सभी 935 खसरों और पट्टों की दोबारा जांच कर रिकॉर्ड को तुरंत दुरुस्त करने के आदेश दिए गए हैं।

  • MP में फिर OBC आरक्षण की गूंज… राहुल गांधी ने CM मोहन यादव को पत्र लिखकर की ये मांग

    MP में फिर OBC आरक्षण की गूंज… राहुल गांधी ने CM मोहन यादव को पत्र लिखकर की ये मांग


    नई दिल्ली।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में एक बार फिर ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) का मुद्दा गर्मा गया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) को चिट्ठी लिखकर राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और इसके तहत रुकी हुई नियुक्तियों का रास्ता साफ करने की मांग की है।

    22 सितंबर को लिखी चिट्ठी राहुल गांधी ने कहा कि शनिवार को इंदौर में हुए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश के कई छात्रों ने शिक्षा, रोजगार और अपने भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दे उनके सामने रखे थे. इनमें OBC आरक्षण से जुड़ी नियुक्तियों के रुके होने का मुद्दा प्रमुख था।

    राहुल गांधी ने चिट्ठी में कहा कि छात्रों ने बताया कि नियुक्तियों में लंबे समय से हो रही देरी के कारण वे अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं. इन युवाओं ने परीक्षाएं पास कर ली हैं और चयन प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन ’87:13′ फॉर्मूले के कारण OBC आरक्षण से जुड़े 13 प्रतिशत पदों को होल्ड पर रखा गया है. इसके चलते चयनित अभ्यर्थी 2022 से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

    राहुल गांधी ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का सर्वसम्मति से समर्थन किया था, इसके बावजूद यह मामला अब तक नहीं सुलझ पाया है. उन्होंने कहा कि नियुक्तियों में हो रही देरी के कारण अभ्यर्थियों को OBC आरक्षण लागू कराने और नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग को लेकर बार-बार सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।

    राहुल गांधी ने अपना पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा किया. उन्होंने लिखा कि इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान OBC वर्ग के छात्रों ने बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के तहत 13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां वर्षों से रुकी हुई हैं. राहुल ने कहा कि छात्र बेहद परेशान हैं और चार साल से अधिक समय से इंतजार कर रहे इन युवाओं का कीमती समय अब और बर्बाद नहीं होना चाहिए।

    उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से छात्रों की मांग सुनने की अपील करते हुए कहा कि सभी दलों की सर्वसम्मति से पारित 27 प्रतिशत OBC आरक्षण को लागू किया जाए और सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दी जाएं।

  • MP: उज्जैन पहुंचे संत बम-बम भोला, खड़े हनुमान जी के दर्शन किए, प्रतिमा को नहीं हटाने की मांग की

    MP: उज्जैन पहुंचे संत बम-बम भोला, खड़े हनुमान जी के दर्शन किए, प्रतिमा को नहीं हटाने की मांग की


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) स्थित खड़े हनुमान मंदिर (Khade Hanuman Temple) इन दिनों आस्था और चर्चा का केंद्र बना हुआ है। प्रतिमा को लेकर चल रही प्रक्रिया के बीच मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में साधु-संतों की मौजूदगी भी लगातार देखी जा रही है। इसी क्रम में संत ‘बम-बम भोला’ (Saint ‘Bam-Bam Bhola’) खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ किया और भगवान हनुमान के दर्शन किए।


    बोले- धर्म की तुलना विज्ञान से न करें
    दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में संत ‘बम-बम भोला’ ने कहा कि धर्म और विज्ञान की तुलना नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में AI और ड्रोन जैसी तकनीकें आ चुकी हैं, लेकिन उनके अनुसार धर्म और सनातन परंपरा को विकास की बहस से अलग समझना चाहिए। उन्होंने खड़े हनुमान की प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग की और कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े स्थानों को लेकर संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए।


    मंदिर के आसपास कथित अतिक्रमण का मुद्दा उठाया

    संत ने मंदिर के सामने मस्जिद की ओर से कथित अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए इसे हटाने की मांग भी उठाई। उन्होंने मुस्लिम समाज से भाईचारे का परिचय देते हुए इस कथित अतिक्रमण को हटाने की अपील की। यह आरोप संत के बयान के रूप में सामने आया है। ऐसे दावे की प्रशासनिक पुष्टि या अतिक्रमण की कानूनी स्थिति को स्वतंत्र रूप से स्थापित करने वाली जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।


    मंदिर में बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

    खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रही चर्चा के बीच यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। रिपोर्टों के मुताबिक देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग मंदिर पहुंच रहे हैं और हनुमान चालीसा, सुंदरकांड तथा धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं।

    खड़े हनुमान की प्रतिमा को सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया से जोड़कर विवाद सामने आया था। प्रशासन ने बाद में कहा कि प्रतिमा को लेकर विशेषज्ञों की जांच और संत समाज व स्थानीय प्रतिनिधियों से सहमति के बाद ही आगे फैसला लिया जाएगा। फिलहाल खड़े हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़, संतों की मौजूदगी और प्रतिमा को लेकर जारी चर्चा ने इसे उज्जैन के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में ला दिया है।

  • MP: सागर जहरीली शराब कांड के एक और आरोपी मनीष लोधी का शार्ट एनकाउंटर, पुलिस ने किया गिरफ्तार…

    MP: सागर जहरीली शराब कांड के एक और आरोपी मनीष लोधी का शार्ट एनकाउंटर, पुलिस ने किया गिरफ्तार…


    सागर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर जिले (Sagar district) के बंडा में हुए जहरीली शराब कांड (Spurious liquor) में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है. इस मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल मनीष लोधी (Manish Lodhi) उर्फ यशवंत ठाकुर को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है. मनीष लोधी पर 30 हजार रुपये का इनाम रखा गया था. उसके साथ आशीष साहू नाम के एक अन्य आरोपी को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है. यह पूरी घटना मालथौन थाना क्षेत्र के नोनिया सेसई रोड घाटी पर हुई, जहां पुलिस और आरोपियों के बीच सीधी मुठभेड़ हुई।

    पुलिस के मुताबिक जब टीम आरोपियों को पकड़ने पहुंची तो दोनों तरफ से गोलीबारी की नौबत आ गई. इस दौरान मनीष लोधी के पैर में गोली लगी और वह घायल हो गया. वहीं पुलिस से बचकर भागने की कोशिश में उसका साथी आशीष साहू भी घायल हो गया. मुठभेड़ के बाद पुलिस ने मौके की तलाशी ली, जिसमें दो देशी कट्टे, पांच खाली राउंड और एक बेसबॉल डंडा बरामद किया गया है. दोनों घायल आरोपियों को इलाज के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया है।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बंडा जहरीली शराब मामले में यह पुलिस की तीसरी मुठभेड़ है. इससे पहले भी इस मामले से जुड़े आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस कई बार मुठभेड़ कर चुकी है. मनीष लोधी को इस पूरे कांड का मुख्य किरदार माना जा रहा है, इसी वजह से पुलिस उसे पकड़ने के लिए लगातार कोशिश कर रही थी. अब गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे पूछताछ करेगी ताकि पूरे मामले की तह तक पहुंचा जा सके।

    पुलिस अभी भी अवैध शराब के इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और हर आरोपी की क्या भूमिका रही है. आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. लोगों में इस मामले को लेकर काफी गुस्सा और चर्चा बनी हुई है, क्योंकि जहरीली शराब से कई लोगों की जान को खतरा हुआ था।

  • MP: CM मोहन यादव की बड़ी घोषणा- नीमच में बनेगा नया एयरपोर्ट…. स्टेडियम की भी सौगात

    MP: CM मोहन यादव की बड़ी घोषणा- नीमच में बनेगा नया एयरपोर्ट…. स्टेडियम की भी सौगात


    नीमच।
    राजस्थान (Rajasthan) की सीमा से सटे मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नीमच (Neemuch) को जल्द ही नए एयरपोर्ट (New Airport) और खेल स्टेडियम की बड़ी सौगात मिलने जा रही है. नीमच के पास ही पड़ोसी राज्य राजस्थान के चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, झालावाड़ और कोटा जैसे प्रमुख जिले स्थित हैं; ऐसे में नीमच में नए एयरपोर्ट के शुरू होने से न केवल मध्य प्रदेश के मालवा अंचल, बल्कि राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों के साथ भी कनेक्टिविटी और व्यापार को जबरदस्त रफ्तार मिलेगी।

    रविवार को नीमच के अग्रोहा भवन में आयोजित ‘सेवा से संकल्प अभियान’ के अभिनंदन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने यह घोषणाएं कीं. उन्होंने क्षेत्र के विकास, नागरिकों के उद्यमशीलता और हाल ही में कूनो के बाद नीमच-मंदसौर सीमा पर स्थित गांधी सागर अभ्यारण्य में शुरू हुए चीता प्रोजेक्ट को जिले की बड़ी उपलब्धि बताया।


    राजस्थान से सटे इलाकों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा नया एयरपोर्ट

    राजस्थान के कोटा, झालावाड़, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिलों से सीधा जुड़े होने के कारण नीमच में हवाई सेवाओं का विस्तार पूरे क्षेत्र के लिए व्यापारिक और पर्यटन की दृष्टि से गेम-चेंजर माना जा रहा है।


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    मुख्यमंत्री ने कहा कि एयरपोर्ट बनने से नीमच का सीधा जुड़ाव देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों से होगा. इसके अलावा, जिले में बहुउद्देशीय खेल स्टेडियम बनने से स्थानीय खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे.


    गांधी सागर में ‘मादा चीता’ की रिहाई से बढ़ेगा पर्यटन

    प्रोजेक्ट चीता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि नीमच जिले के खिमला क्षेत्र में मादा चीता ‘राधा’ को रिलीज किया गया है. उन्होंने कहा कि कूनो के बाद गांधी सागर को चीतों का ‘सेकंड होम’ बनाने से क्षेत्र में वाइल्डलाइफ टूरिज्म और इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय नागरिकों के लिए आजीविका के नए रास्ते खुलेंगे।

    इस अवसर पर स्थानीय विधायक दिलीप सिंह परिहार ने 2 लाख से अधिक दीप प्रज्ज्वलित कर ‘सेवा से संकल्प अभियान’ का शुभारंभ करने पर खुशी जताई और गांधी सागर बांध से किसानों को मिल रहे सिंचाई के लाभ के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया।

  • MP: नलखेड़ा के मां बगलामुखी मंदिर में रात 8 बजे के बाद हवन पर बैन… 8 मौतों के बाद बड़ा फैसला

    MP: नलखेड़ा के मां बगलामुखी मंदिर में रात 8 बजे के बाद हवन पर बैन… 8 मौतों के बाद बड़ा फैसला


    आगर मालवा।
    आगर-मालवा जिले (Agar-Malwa district) के नलखेड़ा (Nalkheda) स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां बगलामुखी मंदिर (Siddha Peeth Maa Baglamukhi Temple) के पास हुए दर्दनाक हादसे के बाद मंदिर में रात 8 बजे बाद हवन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. शासन की ओर से जारी पत्र के अनुसार, अब मंदिर में हवन रात 8 बजे से पहले ही किए जा सकेंगे।

    शनिवार को तेज बारिश के दौरान मंदिर के पास बरसाती नाले में अचानक पानी का बहाव बढ़ गया था. इसी दौरान श्रद्धालुओं से भरी एक कार तेज बहाव में बह गई. हादसे में कार सवार 8 लोगों की मौत हो गई थी. मृतकों में 7 लोग ओडिशा के रहने वाले थे, जबकि कार चालक आगर-मालवा जिले के बड़ोद का निवासी था. मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल थे।

    हादसे के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे. इसी के बाद अब रात 8 बजे के बाद हवन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया है।

    जानकारी के मुताबिक, ओडिशा के सात श्रद्धालु उज्जैन दर्शन के लिए आए थे. इसके बाद उन्होंने कार किराए पर ली और मां बगलामुखी मंदिर में दर्शन के लिए नलखेड़ा पहुंचे थे. शुक्रवार रात तेज बारिश के दौरान मंदिर के पास स्थित बरसाती नाले में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया।

    बताया गया कि कार पुलिया के पास तेज बहाव की चपेट में आ गई और करीब 100 मीटर दूर तक बह गई. नलखेड़ा में उस दौरान पिछले 24 घंटे में करीब 3.7 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

    हादसे का पता शनिवार सुबह चला, जब स्थानीय लोगों ने नाले में पलटी हुई कार देखी. सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची. SDRF की मदद से कार को नाले से बाहर निकाला गया और उसमें सवार सभी 8 लोगों के शव बरामद किए गए. शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया. बाद में प्रशासन ने शवों को एंबुलेंस के जरिए उनके गृह क्षेत्र ओडिशा भिजवाया।


    मृतकों के गले में लिपटी थी लाल चुनरी

    पुलिस के मुताबिक, जब शवों को कार से बाहर निकाला गया तो सभी के गले में माता के आशीर्वाद वाली लाल चुनरी लिपटी हुई थी. बताया गया कि श्रद्धालु रात में हवन-पूजन करने के बाद लौट रहे थे।

    मृतकों की पहचान चालक अरुण पिता ब्रदीलाल गोयल निवासी सुदवास, बड़ोद, राधारानी बेहरा (33), ज्ञानेंद्र कुमार बेहरा (41), रितारानी पत्नी ज्ञानेंद्र बेहरा (38), कृष्णा राजवीर पिता शिवप्रसाद (13), शिवप्रसाद बेहरा, वी साई स्वस्तिक पिता ज्ञानेंद्र (10) और शाहीरा स्वयं प्रभा पिता शिवप्रसाद (6) के रूप में हुई है. सभी सात श्रद्धालु ओडिशा के भुवनेश्वर के रहने वाले थे।


    CCTV में एक और व्यक्ति भी बहता दिखा

    पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में हादसे की वजह तेज बारिश और नाले में अचानक बढ़ा पानी सामने आया है. मंदिर और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

    CCTV फुटेज में हादसे से पहले करीब 11 बजे एक व्यक्ति पैदल तेज बहाव वाले रास्ते को पार करता दिखाई दिया. बताया गया कि वह भी नाले के बहाव में बह गया. फिलहाल उसका कोई पता नहीं चल पाया है।


    हादसे के बाद उठे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

    हादसे के बाद नलखेड़ा में लोगों में आक्रोश भी देखने को मिला. बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंचे और अंबेडकर चौराहे पर चक्काजाम किया. दुकानों को भी बंद कराया गया।

    स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए गए कि शुक्रवार रात करीब 9 बजे से 12 बजे तक तेज बारिश के दौरान जब मंदिर मार्ग का नाला उफान पर था, तब वहां सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए. आरोप है कि नाले के दोनों ओर बेरिकेडिंग नहीं थी और सुरक्षा जवान भी मौजूद नहीं थे।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर तेज बहाव के दौरान रास्ते को बेरिकेडिंग लगाकर बंद कर दिया जाता या सुरक्षा जवान तैनात रहते तो हादसे को रोका जा सकता था. हालांकि, हादसे की जिम्मेदारी और कारणों को लेकर पुलिस-प्रशासन की जांच जारी है।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए 2-2 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की. ओडिशा के मुख्यमंत्री ने भी घटना पर शोक जताया।