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  • 'कहानी का जनक और मालिक मैं ही हूं'; परेश रावल के आरोपों पर बोले फिल्म निर्माता अमित राय, पटकथा में बदलाव के दावों को नकारा

    'कहानी का जनक और मालिक मैं ही हूं'; परेश रावल के आरोपों पर बोले फिल्म निर्माता अमित राय, पटकथा में बदलाव के दावों को नकारा

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की बेहद सफल और सामाजिक विषय पर आधारित फिल्म ‘ओह माय गॉड 2’ (ओएमजी 2) को लेकर अभिनेता परेश रावल के हालिया बयान के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दिग्गज अभिनेता परेश रावल ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि इस फिल्म का मूल विचार और अवधारणा उनकी थी, लेकिन अभिनेता अक्षय कुमार के इस परियोजना से जुड़ने के बाद पटकथा में व्यापक बदलाव किए गए और उन्हें इसका उचित श्रेय नहीं दिया गया। अब इस पूरे विवाद पर पहली बार फिल्म के लेखक और निर्देशक अमित राय ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और फिल्म की मौलिकता को लेकर अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया है।

    अमित राय ने एक विशेष साक्षात्कार में वरिष्ठ अभिनेता परेश रावल के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए कहा कि वह एक महान कलाकार हैं और उनके द्वारा लिए गए नाम कद में काफी बड़े हैं, इसलिए वह उन पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि, फिल्म के लेखन और उसके स्वामित्व के कानूनी पक्ष पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फिल्म का विचार पूरी तरह से उनके अपने मस्तिष्क की उपज है। इस कहानी के सृजनकर्ता, लेखक और विधिक रूप से मालिक वही हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह भावनात्मक और रचनात्मक दोनों ही स्तरों पर इस फिल्म की पटकथा के वास्तविक जनक हैं।

    क्रेडिट न दिए जाने के आरोपों का तार्किक जवाब देते हुए निर्देशक ने कहा कि यदि इस प्रकार के दावे किए जा रहे हैं, तो संबंधित पक्षों को फिल्म के आधिकारिक क्रेडिट रोल को पुनः खोलकर ध्यान से देखना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि फिल्म के शुरुआती और मुख्य क्रेडिट्स में परेश रावल की पत्नी और उनके व्यावसायिक साझीदार का नाम बतौर निर्माता स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है। ऐसे में यह कहना कि उन्हें या उनके परिवार को इस परियोजना से अलग रखा गया या कोई श्रेय नहीं दिया गया, पूरी तरह से अनुचित और तथ्यों से परे है।

    फिल्म उद्योग के भीतर चल रही उन चर्चाओं को भी निर्देशक ने पूरी तरह से नकार दिया जिनमें यह कहा जा रहा था कि सुपरस्टार अक्षय कुमार के फिल्म में शामिल होने के बाद इसकी मूल कहानी और पटकथा की संरचना में बड़े बदलाव किए गए थे। अमित राय ने कहा कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री उनके इस स्वभाव से भली-भांति परिचित है कि वह अपनी लिखी हुई चार पंक्तियों को भी किसी के दबाव में आकर नहीं बदलते हैं। अपनी कलात्मक दृढ़ता को रेखांकित करने के लिए उन्होंने संगीतकार आर.डी. बर्मन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार एक सच्चा संगीतकार अपनी बनाई धुनों से कोई समझौता नहीं करता, उसी प्रकार वह भी अपनी कहानी के मूल स्वरूप की रक्षा करते हैं।

    उन्होंने अपने लंबे संघर्ष का हवाला देते हुए कहा कि यदि वह परिस्थितियों के अनुसार अपनी पटकथाओं और विचारों को बदलने वाले लचीले व्यक्ति होते, तो उन्हें फिल्म उद्योग में काम पाने के लिए 14 वर्षों तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। इस स्पष्टीकरण के साथ निर्देशक ने यह साफ कर दिया है कि ‘ओएमजी 2’ पूरी तरह से उनकी मौलिक सिनेमाई अभिव्यक्ति है, जिसमें व्यावसायिक सफलताओं के लिए कोई कृत्रिम बदलाव नहीं किए गए थे। इस बयान के बाद फिल्म के वैधानिक और रचनात्मक अधिकारों को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर पूर्ण विराम लग गया है।

  • दीपिका पादुकोण मैटरनिटी लीव से पहले नाइट शिफ्ट में भी कर रहीं काम…

    दीपिका पादुकोण मैटरनिटी लीव से पहले नाइट शिफ्ट में भी कर रहीं काम…


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा जगत की शीर्ष अभिनेत्रियों में शुमार दीपिका पादुकोण इन दिनों अपनी आगामी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘राका’ के फिल्मांकन में पूरी गंभीरता के साथ व्यस्त हैं। वर्तमान में सात महीने की गर्भवती होने के बावजूद वह अपनी मैटरनिटी लीव पर जाने से पहले फिल्म के महत्वपूर्ण हिस्सों की शूटिंग को समय पर संपन्न करने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं। फिल्म निर्माण से जुड़े सूत्रों के अनुसार, वह न केवल देर रात के शेड्यूल में सक्रियता से भाग ले रही हैं, बल्कि फिल्म की आवश्यकता के अनुसार कठिन एक्शन दृश्यों को भी स्वयं फिल्मा रही हैं। शारीरिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण इस समय में उनका यह व्यावसायिक समर्पण मनोरंजन जगत में व्यापक स्तर पर प्रशंसा बटोर रहा है।

    मीडिया रिपोर्ट्स और सेट से जुड़े क्रू सदस्यों के अनुसार, दीपिका पादुकोण बिना किसी अतिरिक्त विश्राम के लगातार काम कर रही हैं ताकि परियोजना अपने निर्धारित समय पर पूरी हो सके। हाल ही में उद्योग जगत में उनकी आठ घंटे की कार्य अवधि की मांग को लेकर काफी चर्चाएं और विवाद सामने आए थे, किंतु वर्तमान में उनका यह कठोर परिश्रम उन सभी कयासों को खारिज करता है। सेट पर मौजूद तकनीकी और प्रशासनिक दल के सदस्यों का कहना है कि इस स्थिति में भी दीपिका को पूरी ऊर्जा के साथ परफॉर्म करते देखना वहां उपस्थित प्रत्येक कर्मचारी और सह-कलाकार के लिए अत्यंत प्रेरणादायक साबित हो रहा है। इसके साथ ही वह अपनी डेढ़ वर्षीय बेटी दुआ की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी पूरी सहजता से निर्वहन कर रही हैं।

    उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व फिल्म उद्योग में काम के घंटों को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई थी, जब मीडिया में यह अपुष्ट खबरें आईं कि आठ घंटे की शिफ्ट की मांग के कारण दीपिका पादुकोण को संदीप रेड्डी वांगा की आगामी फिल्म ‘स्पिरिट’ और नाग अश्विन की ‘कल्कि 2’ जैसी बड़ी परियोजनाओं से अलग कर दिया गया था। उस समय फिल्म निर्माताओं के एक वर्ग ने इस मांग पर असंतोष व्यक्त किया था, जबकि दूसरे वर्ग ने कलाकारों के स्वास्थ्य और अधिकारों के पक्ष में इसका पुरजोर समर्थन किया था। हालांकि, वर्तमान फिल्म के सेट पर उनका देर रात तक काम करना यह स्पष्ट करता है कि वह काम की गुणवत्ता और अपनी प्रतिबद्धता से कोई समझौता नहीं कर रही हैं।

    यदि फिल्म ‘राका’ की बात करें, तो इसका निर्देशन भारतीय सिनेमा के सफल निर्देशकों में गिने जाने वाले एटली कर रहे हैं। यह एक उच्च बजट वाली साइंस-फिक्शन थ्रिलर फिल्म होगी, जिसमें दर्शकों को आधुनिक तकनीक और अभूतपूर्व एक्शन दृश्यों का संयोजन देखने को मिलेगा। इस फिल्म के माध्यम से पहली बार तेलुगु सुपरस्टार अल्लू अर्जुन और दीपिका पादुकोण की जोड़ी बड़े पर्दे पर एक साथ मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाली है। इन दोनों शीर्ष कलाकारों के अतिरिक्त फिल्म की मुख्य स्टारकास्ट में रश्मिका मंदाना, जाह्नवी कपूर और मृणाल ठाकुर जैसी लोकप्रिय अभिनेत्रियां भी महत्वपूर्ण किरदारों में दिखाई देंगी।

    प्रशासनिक और वितरण सूत्रों के अनुसार, इस भव्य सिनेमाई परियोजना को अगले वर्ष तक देश भर के सिनेमाघरों में बड़े स्तर पर प्रदर्शित करने की योजना बनाई गई है। ‘राका’ के अतिरिक्त दीपिका पादुकोण इस वर्ष शाहरुख खान के अभिनय से सजी फिल्म ‘किंग’ में भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई देने वाली हैं, जो इसी साल के अंत तक बड़े पर्दे पर दस्तक दे सकती है। मातृत्व के इस पड़ाव पर भी एक के बाद एक बड़ी व्यावसायिक फिल्मों की शूटिंग को सफलतापूर्वक पूरा करना दीपिका पादुकोण की मजबूत ब्रांड वैल्यू और पेशेवर दृष्टिकोण को प्रमाणित करता है।

  • शानदार तेजी के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 965 अंक उछला तो निफ्टी 24,334 के पार; बैंकिंग और आईटी शेयरों ने दिखाई दमदार मजबूती

    शानदार तेजी के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 965 अंक उछला तो निफ्टी 24,334 के पार; बैंकिंग और आईटी शेयरों ने दिखाई दमदार मजबूती

    नई दिल्ली ।सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को बड़ी राहत दी। वैश्विक स्तर पर मिले-जुले संकेतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद घरेलू बाजार में खरीदारी का मजबूत माहौल देखने को मिला। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 964.58 अंकों की बढ़त के साथ 78,151.45 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 261.55 अंक चढ़कर 24,334.30 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त ने बाजार में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाया।

    कारोबार की शुरुआत भी सकारात्मक रही। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से ऊपर खुला और दिनभर खरीदारी के दम पर लगातार मजबूत बना रहा। कारोबार के दौरान यह 78,282.55 के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी ने भी शुरुआती बढ़त को बरकरार रखते हुए दिन के दौरान 24,367.30 का इंट्रा-डे हाई बनाया। बाजार बंद होने तक प्रमुख सूचकांक अपने ऊंचे स्तरों के करीब बने रहे, जिससे पूरे कारोबारी सत्र में सकारात्मक रुझान देखने को मिला।

    बाजार की तेजी में सबसे बड़ी भूमिका बैंकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों ने निभाई। निजी बैंकों में मजबूत खरीदारी के कारण निफ्टी प्राइवेट बैंक सूचकांक सबसे अधिक बढ़त दर्ज करने वाला सेक्टर रहा। इसके अलावा आईटी, बैंकिंग, रियल्टी और ऑटो सेक्टर में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बड़े शेयरों ने प्रमुख सूचकांकों को मजबूती प्रदान की। निफ्टी 50 में टेक महिंद्रा, टीसीएस, कोटक महिंद्रा बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर प्रमुख बढ़त दर्ज करने वालों में शामिल रहे।

    हालांकि बाजार का रुख पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा। फार्मा, हेल्थकेयर, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में कुछ दबाव देखने को मिला। इसी तरह मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित कमजोरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर इन वर्गों पर देखने को मिला, लेकिन बड़े शेयरों में मजबूत खरीदारी ने पूरे बाजार को सकारात्मक दिशा दी।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कई कारोबारी सत्रों से सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद बाजार ने महत्वपूर्ण तकनीकी ब्रेकआउट दिया है। इसे निवेशकों के बढ़ते भरोसे और मजबूत बाजार धारणा का संकेत माना जा रहा है। तकनीकी संकेतकों के अनुसार निफ्टी अभी भी अपने प्रमुख मूविंग एवरेज के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि आरएसआई में भी सकारात्मक संकेत दिखाई दिए हैं। इससे निकट भविष्य में बाजार की मजबूती बरकरार रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है तो निफ्टी आने वाले कारोबारी सत्रों में 24,800 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। वहीं 24,200 का स्तर निकट अवधि के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर से नीचे जाता है तो कुछ समय के लिए सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है। फिलहाल घरेलू आर्थिक संकेतकों, कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी, क्योंकि यही कारक आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पहली तिमाही शानदार, 13 प्रतिशत बढ़ा शुद्ध मुनाफा; एनपीए में सुधार से वित्तीय स्थिति और मजबूत

    सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पहली तिमाही शानदार, 13 प्रतिशत बढ़ा शुद्ध मुनाफा; एनपीए में सुधार से वित्तीय स्थिति और मजबूत


    नई दिल्ली ।
    सार्वजनिक क्षेत्र के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। अप्रैल से जून 2026 के दौरान बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 13.3 प्रतिशत बढ़कर 1,324 करोड़ रुपये पहुंच गया। बैंक की ब्याज आय में बढ़ोतरी और प्रावधानों में कमी ने लाभप्रदता को मजबूती दी, जबकि परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला। हालांकि परिचालन लाभ में हल्की गिरावट दर्ज की गई है।

    बैंक द्वारा जारी वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में शुद्ध मुनाफा 1,169 करोड़ रुपये था, जो इस बार बढ़कर 1,324 करोड़ रुपये हो गया। यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और वित्तीय संस्थान अपनी आय बढ़ाने के साथ जोखिम नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं।

    तिमाही के दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम यानी ब्याज से प्राप्त आय और ब्याज पर किए गए खर्च के बीच का अंतर भी मजबूत रहा। यह सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़कर 3,914 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 3,383 करोड़ रुपये था। विशेषज्ञों के अनुसार, नेट इंटरेस्ट इनकम में बढ़ोतरी बैंक की मुख्य बैंकिंग गतिविधियों की मजबूती को दर्शाती है।

    हालांकि बैंक के परिचालन लाभ में मामूली दबाव दिखाई दिया। पहली तिमाही में ऑपरेटिंग प्रॉफिट 5.1 प्रतिशत घटकर 2,186 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 2,304 करोड़ रुपये था। इसके बावजूद शुद्ध लाभ में वृद्धि इस बात का संकेत है कि बैंक ने खर्चों और जोखिम प्रबंधन पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखा।

    बैंक ने इस तिमाही में प्रावधानों में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की। अप्रैल-जून अवधि में प्रोविजन घटकर 401.6 करोड़ रुपये रह गया, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 521.1 करोड़ रुपये था। पिछली तिमाही की तुलना में भी इसमें कमी दर्ज की गई है। प्रावधानों में गिरावट से बैंक की लाभप्रदता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

    परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर भी बैंक का प्रदर्शन बेहतर रहा। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (जीएनपीए) अनुपात घटकर 2.60 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछली तिमाही में 2.67 प्रतिशत था। वहीं नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनएनपीए) अनुपात 0.49 प्रतिशत पर स्थिर बना रहा। यह संकेत देता है कि बैंक खराब ऋणों पर नियंत्रण बनाए रखने में सफल रहा है।

    बैंक ने तिमाही परिणामों के साथ किसी लाभांश की घोषणा नहीं की। वहीं शेयर बाजार में कारोबारी सत्र के दौरान बैंक का शेयर मामूली गिरावट के साथ 31.70 रुपये पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की नजर आने वाली तिमाहियों में बैंक की आय वृद्धि, ऋण विस्तार और परिसंपत्ति गुणवत्ता के प्रदर्शन पर बनी रहेगी।

    सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो लगभग स्थिर बना हुआ है, जबकि जमा राशि जुटाने की लागत में भी सुधार दर्ज किया गया है। इससे बैंक की परिचालन दक्षता और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का संकेत मिलता है। बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच पहली तिमाही के ये परिणाम सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की वित्तीय मजबूती और स्थिर प्रदर्शन की दिशा में सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

  • आईपीओ से पहले एनएसई पर उठे वैल्यूएशन के सवाल, ब्रोकरेज ने दी बिकवाली की सलाह; घटते ट्रेडिंग वॉल्यूम और मार्केट शेयर को बताया सबसे बड़ी चिंता

    आईपीओ से पहले एनएसई पर उठे वैल्यूएशन के सवाल, ब्रोकरेज ने दी बिकवाली की सलाह; घटते ट्रेडिंग वॉल्यूम और मार्केट शेयर को बताया सबसे बड़ी चिंता

    नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के प्रस्तावित आईपीओ से पहले बाजार में इसकी वैल्यूएशन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। एक प्रमुख ब्रोकरेज फर्म ने एनएसई की कवरेज शुरू करते हुए निवेशकों को बिकवाली की सलाह दी है। आमतौर पर किसी कंपनी के आईपीओ से पहले इस तरह की राय कम ही देखने को मिलती है, इसलिए यह रिपोर्ट निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के बीच विशेष चर्चा का विषय बन गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक्सचेंज के ट्रेडिंग वॉल्यूम में लगातार आ रही गिरावट और बाजार हिस्सेदारी में कमी भविष्य की ग्रोथ पर दबाव डाल सकती है।

    ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि एनएसई की मौजूदा अनलिस्टेड मार्केट वैल्यू उसके वित्तीय प्रदर्शन की तुलना में अधिक दिखाई देती है। इसी आधार पर कंपनी के लिए 1,550 रुपये का लक्ष्य मूल्य निर्धारित किया गया है, जो अनलिस्टेड बाजार में प्रचलित करीब 2,085 रुपये के मूल्य से लगभग 26 प्रतिशत कम है। फर्म का कहना है कि मौजूदा स्तर पर निवेशकों को भविष्य में अपेक्षित रिटर्न सीमित मिल सकता है।

    रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में एनएसई के परिचालन प्रदर्शन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। कंपनी की कुल परिचालन आय में वर्ष-दर-वर्ष गिरावट दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि कारोबार की रफ्तार पहले की तुलना में कुछ धीमी हुई है। विशेष रूप से इक्विटी डेरिवेटिव्स से जुड़े कारोबार में ट्रेडिंग वॉल्यूम कम होने का असर कंपनी की कमाई पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इससे एक्सचेंज के बाजार हिस्से पर भी दबाव बढ़ा है।

    एनएसई की आय का सबसे बड़ा स्रोत ट्रांजैक्शन चार्जेज माना जाता है। उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, इस मद से प्राप्त होने वाली आय में भी पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा क्लियरिंग और सेटलमेंट सेवाओं से होने वाली कमाई में भी गिरावट देखने को मिली है। इन दोनों प्रमुख आय स्रोतों में कमी आने से कंपनी के कुल राजस्व पर प्रभाव पड़ा है, जिसे बाजार विशेषज्ञ भविष्य की चुनौती के रूप में देख रहे हैं।

    वित्तीय वर्ष 2026 के दौरान कंपनी की कुल परिचालन आय पिछले वित्त वर्ष की तुलना में तीन प्रतिशत से अधिक कम रही। वहीं ट्रांजैक्शन चार्जेज से प्राप्त आय में लगभग चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ट्रेडिंग गतिविधियों में तेजी नहीं आती और बाजार हिस्सेदारी में सुधार नहीं होता, तो भविष्य में कंपनी के लिए उच्च वैल्यूएशन को बनाए रखना आसान नहीं होगा।

    हालांकि एनएसई भारतीय पूंजी बाजार का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण एक्सचेंज बना हुआ है तथा निवेशकों के बीच उसकी मजबूत पहचान है, लेकिन किसी भी कंपनी की दीर्घकालिक वैल्यू उसके वित्तीय प्रदर्शन और कारोबार की वृद्धि पर निर्भर करती है। इसी कारण विशेषज्ञ निवेशकों को आईपीओ से पहले कंपनी के वित्तीय आंकड़ों, आय के स्रोतों, भविष्य की विकास संभावनाओं और वैल्यूएशन का संतुलित आकलन करने की सलाह दे रहे हैं।

    आने वाले समय में एनएसई का आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार की सबसे चर्चित सार्वजनिक पेशकशों में शामिल हो सकता है। ऐसे में निवेशकों की नजर कंपनी के आगामी वित्तीय प्रदर्शन, नियामकीय प्रक्रियाओं और बाजार की प्रतिक्रिया पर बनी रहेगी। यदि कंपनी अपने कारोबार की गति बढ़ाने और आय के प्रमुख स्रोतों को मजबूत करने में सफल रहती है, तो भविष्य में निवेशकों का भरोसा और अधिक मजबूत हो सकता है। फिलहाल ब्रोकरेज की इस रिपोर्ट ने एनएसई के आईपीओ से पहले वैल्यूएशन और ग्रोथ को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

  • दूसरी प्रेग्नेंसी के बीच डोसा डेट पर दिखे दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह, सादगी भरे अंदाज ने जीता फैंस का दिल

    दूसरी प्रेग्नेंसी के बीच डोसा डेट पर दिखे दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह, सादगी भरे अंदाज ने जीता फैंस का दिल

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता रणवीर सिंह और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण इन दिनों अपनी निजी जिंदगी के खूबसूरत दौर का आनंद ले रहे हैं। दोनों जल्द ही अपने दूसरे बच्चे का स्वागत करने वाले हैं और इसी बीच मुंबई में उनकी एक सादगी भरी आउटिंग ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया। हाल ही में दोनों को शहर के एक लोकप्रिय रेस्टोरेंट में साथ देखा गया, जहां वे डोसा खाने पहुंचे थे। इस दौरान उनका सहज अंदाज और एक-दूसरे के साथ बिताया गया समय प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

    रेस्टोरेंट से बाहर निकलते समय दोनों को कैमरों में कैद किया गया, जिसके बाद उनका वीडियो और तस्वीरें तेजी से सोशल मीडिया पर साझा होने लगीं। हालांकि, इस दौरान उनकी सुरक्षा टीम लगातार लोगों से वीडियो रिकॉर्डिंग और अत्यधिक भीड़ से बचने की अपील करती नजर आई। दोनों कलाकारों ने अपनी इस आउटिंग को पूरी तरह निजी रखने का प्रयास किया और बिना किसी औपचारिकता के सामान्य तरीके से समय बिताया।

    इस मौके पर दीपिका और रणवीर का पहनावा भी काफी साधारण रहा। रणवीर सिंह ब्लैक टी-शर्ट और ट्राउजर में दिखाई दिए, जबकि दीपिका पादुकोण ने आरामदायक को-ऑर्ड सेट पहन रखा था। दोनों ने चेहरे पर मास्क भी लगाया हुआ था, जिससे उनकी आउटिंग अपेक्षाकृत लो-प्रोफाइल बनी रही। प्रशंसकों ने उनके इस सहज और सादगी भरे अंदाज की सराहना की और सोशल मीडिया पर दोनों की तस्वीरों पर शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

    यह पहली बार नहीं है जब यह स्टार कपल इसी रेस्टोरेंट में नजर आया हो। इससे पहले भी दोनों यहां एक विशेष अवसर पर साथ पहुंचे थे। यही वजह है कि इस रेस्टोरेंट से उनका एक विशेष जुड़ाव माना जाता है। इस बार भी दोनों ने भीड़भाड़ और सार्वजनिक आकर्षण से दूर सामान्य तरीके से अपना समय बिताने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौजूदगी की जानकारी मिलते ही वहां लोगों की नजरें उन पर टिक गईं।

    दीपिका और रणवीर ने इसी वर्ष अपने दूसरे बच्चे के आने की खुशखबरी साझा की थी। इसके बाद से दोनों सार्वजनिक कार्यक्रमों में सीमित रूप से नजर आ रहे हैं और अधिकतर समय परिवार के साथ बिता रहे हैं। वर्ष 2018 में विवाह बंधन में बंधे इस दंपति ने सितंबर 2024 में अपनी पहली संतान, बेटी दुआ का स्वागत किया था। अब परिवार में एक नए सदस्य के आगमन की तैयारियां चल रही हैं, जिसे लेकर उनके प्रशंसकों में भी उत्साह बना हुआ है।

    फिल्मी करियर की बात करें तो दोनों कलाकार अपने-अपने आगामी प्रोजेक्ट्स में भी व्यस्त हैं। दीपिका पादुकोण आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स में दिखाई देंगी, जबकि रणवीर सिंह भी अपनी नई फिल्मों की तैयारियों में जुटे हैं। निजी जीवन और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते हुए दोनों लगातार अपने प्रशंसकों से जुड़े हुए हैं। उनकी हालिया आउटिंग ने एक बार फिर यह दिखाया कि लोकप्रियता के बावजूद वे निजी जीवन के छोटे-छोटे पलों को सादगी के साथ जीना पसंद करते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो के बीच प्रशंसक इस दंपति को शुभकामनाएं देते हुए उनके परिवार में आने वाली नई खुशियों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

  • कार के अंदर तक कैमरा पहुंचने पर नाराज हुईं मौनी रॉय, पैपराजी से बोलीं- 'कितनी बार कहूं, बंद करो'

    कार के अंदर तक कैमरा पहुंचने पर नाराज हुईं मौनी रॉय, पैपराजी से बोलीं- 'कितनी बार कहूं, बंद करो'


    नई दिल्ली ।
    अभिनेत्री मौनी रॉय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें वह पैपराजी की लगातार रिकॉर्डिंग से असहज नजर आ रही हैं। मुंबई में दोस्तों के साथ डिनर के बाद जब वह अपनी कार में बैठीं तो फोटोग्राफर्स लगातार कार की खिड़की से उनकी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करते रहे। इस दौरान मौनी ने कई बार कैमरा बंद करने का इशारा करते हुए रिकॉर्डिंग रोकने की अपील की। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और निजी जीवन की गोपनीयता को लेकर एक नई बहस भी छेड़ रहा है।

    घटना मंगलवार रात की बताई जा रही है, जब मौनी रॉय अपने दोस्तों के साथ डिनर के लिए एक रेस्टोरेंट पहुंची थीं। बाहर निकलने के बाद उन्होंने सामान्य तरीके से पैपराजी के लिए तस्वीरें खिंचवाईं। इसके बाद जैसे ही वह अपनी कार में बैठीं, कुछ फोटोग्राफर्स कार के शीशे से लगातार वीडियो रिकॉर्ड करने लगे। इस दौरान मौनी ने हाथ और उंगली के इशारे से कई बार ‘बंद करो’ कहते हुए रिकॉर्डिंग रोकने का अनुरोध किया। उनके चेहरे पर नाराजगी और असहजता साफ दिखाई दे रही थी।

    वीडियो में मौनी ब्लैक स्लीवलेस आउटफिट में नजर आ रही हैं। वह शांत रहने की कोशिश करती दिखीं, लेकिन लगातार कैमरा उनकी ओर किए जाने के कारण उन्होंने स्पष्ट रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की। कुछ ही देर बाद उनकी कार वहां से रवाना हो गई। सोशल मीडिया पर यह वीडियो सामने आने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोगों ने निजी जीवन और व्यक्तिगत सीमा का सम्मान किए जाने की बात कही, जबकि कुछ ने इसे सेलिब्रिटी और पैपराजी के बीच सामान्य स्थिति बताया।

    उस शाम मौनी रॉय अपनी करीबी दोस्त अनुषा दांडेकर और अभिनेता अर्जुन बिजलानी के साथ डिनर पर गई थीं। रेस्टोरेंट के बाहर तीनों ने एक-दूसरे से मुलाकात की और कुछ समय साथ बिताया। डिनर के बाद बाहर निकलते समय भी फोटोग्राफर्स ने उनकी तस्वीरें लीं, लेकिन कार में बैठने के बाद भी रिकॉर्डिंग जारी रहने से अभिनेत्री असहज महसूस करती दिखाई दीं।

    हाल के दिनों में मौनी रॉय अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी चर्चा में रही हैं। उनके व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी खबरों ने भी सोशल मीडिया पर काफी ध्यान आकर्षित किया था। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर उनकी हर गतिविधि पर पैपराजी और सोशल मीडिया की नजर बनी रहती है। हालांकि, इस ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सार्वजनिक हस्तियों की निजी सीमाओं का सम्मान किस हद तक किया जाना चाहिए।

    मौनी रॉय ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की थी और कई लोकप्रिय धारावाहिकों के जरिए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। बाद में उन्होंने फिल्मों का रुख किया और कई चर्चित परियोजनाओं में अभिनय किया। आज वह टेलीविजन और फिल्म दोनों माध्यमों की प्रमुख अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। उनका यह वायरल वीडियो फिलहाल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और पैपराजी संस्कृति तथा निजता के अधिकार को लेकर लोगों के बीच विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

  • ‘हेरा फेरी 3’ के सस्पेंस के बीच ‘भागम भाग 2’ की तैयारी, निर्देशक राज शांडिल्य और परेश रावल ने सोशल मीडिया पर दिए बड़े संकेत

    ‘हेरा फेरी 3’ के सस्पेंस के बीच ‘भागम भाग 2’ की तैयारी, निर्देशक राज शांडिल्य और परेश रावल ने सोशल मीडिया पर दिए बड़े संकेत

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में कल्ट क्लासिक का दर्जा हासिल कर चुकी अभिनेता अक्षय कुमार और परेश रावल की प्रसिद्ध कॉमेडी फिल्म ‘भागम भाग’ के सीक्वल को लेकर मनोरंजन उद्योग में हलचल तेज हो गई है। ‘हेरा फेरी 3’ के निर्माण को लेकर चल रहे विवादों और अनिश्चितताओं के बीच, प्रसिद्ध निर्देशक राज शांडिल्य ने इस सुपरहिट कॉमेडी फ्रेंचाइजी के दूसरे भाग का निर्माण करने का एक बड़ा परोक्ष संकेत दिया है। इस घोषणा के बाद से ही सिनेमा प्रेमियों और प्रशंसकों के बीच भारी उत्सुकता देखी जा रही है, जो लंबे समय से इस प्रसिद्ध जोड़ी को दोबारा पर्दे पर देखने का इंतजार कर रहे हैं।

    इस नए घटनाक्रम की शुरुआत उस समय हुई जब निर्देशक राज शांडिल्य ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक अत्यंत उत्सुकता बढ़ाने वाला संदेश साझा किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि प्रशंसकों को बस थोड़ा और इंतजार करने की आवश्यकता है, क्योंकि जल्द ही सारे ‘सिग्नल’ खुलने वाले हैं। उल्लेखनीय है कि ‘सिग्नल’ शब्द का प्रयोग वर्ष 2006 में आई मूल फिल्म ‘भागम भाग’ के एक अत्यंत लोकप्रिय और सुपरहिट गीत के संदर्भ में किया गया था। इस मूल गीत को प्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम चक्रवर्ती ने तैयार किया था, जिसे रेमो फर्नांडीस और सुजैन डी’मेलो ने अपनी आवाज दी थी।

    इस पूरे मामले में प्रशंसकों की उत्सुकता और सिनेमाई गलियारों में चर्चा तब और अधिक बढ़ गई, जब फिल्म के मुख्य अभिनेता परेश रावल ने स्वयं इस पोस्ट पर अपनी त्वरित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने निर्देशक राज शांडिल्य के संदेश को रीपोस्ट करते हुए सकारात्मक लहजे में सहमति जताई। इस बात की पूरी संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस बहुप्रतीक्षित सीक्वल में अक्षय कुमार मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। हालांकि, मूल फिल्म में उनके साथ सह-अभिनेता के रूप में धमाल मचाने वाले प्रसिद्ध अभिनेता गोविंदा इस नए प्रोजेक्ट का हिस्सा होंगे या नहीं, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो प्रसिद्ध निर्देशक प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी मूल फिल्म ‘भागम भाग’ ने अपने बेहतरीन स्क्रीनप्ले और हास्य दृश्यों के दम पर दर्शकों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ी है। इस फिल्म की मुख्य कहानी एक ड्रामा थिएटर ग्रुप के तीन कलाकारों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक नाटक के मंचन के सिलसिले में लंदन की यात्रा पर जाते हैं। वहां की यात्रा के दौरान वे अनजाने में एक बेहद पेचीदा और हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में फंस जाते हैं, जिसके बाद फिल्म में पैदा होने वाली परिस्थितियां दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर देती हैं।

    व्यावसायिक स्तर पर इस फिल्म के दूसरे भाग यानी ‘भागम भाग 2’ को धरातल पर उतारने से पहले कुछ बेहद पेचीदा कानूनी और व्यावसायिक अड़चनों का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2026 के मार्च महीने में जब राज शांडिल्य को आधिकारिक तौर पर इस फिल्म के निर्देशन की कमान सौंपी गई, तब एक बड़ा अनुबंधात्मक विवाद सामने आया। राज शांडिल्य ने पूर्व में प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस के साथ तीन फिल्मों का एक विशेष अनुबंध साइन किया था, जबकि यह नई फिल्म उस बैनर के अंतर्गत नहीं बन रही थी।

    इस कारण निर्माता कंपनी की ओर से उन पर अनुबंध के उल्लंघन और अग्रिम राशि न लौटाने के आरोप लगाए गए थे, क्योंकि उन्होंने अन्य प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी प्राप्त नहीं किया था। हालांकि, फिल्म जगत के लिए राहत की बात यह रही कि मई 2026 में दोनों पक्षों ने आपसी बातचीत के माध्यम से इस पूरे कानूनी विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया। दोनों फिल्मकारों ने सोशल मीडिया पर एक साथ तस्वीरें साझा कर इस विवाद के समाप्त होने की पुष्टि की थी, जिसके बाद अब इस कल्ट कॉमेडी फिल्म के निर्माण का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो गया है।

  • महाराष्ट्र में नए सियासी उलटफेर के संकेत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस संग एनसीपी के दोनों धड़ों की गोपनीय बैठक से गरमाया राजनीतिक माहौल

    महाराष्ट्र में नए सियासी उलटफेर के संकेत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस संग एनसीपी के दोनों धड़ों की गोपनीय बैठक से गरमाया राजनीतिक माहौल

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़े सियासी फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं, जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आधिकारिक आवास पर मंगलवार देर रात राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं की ताबड़तोड़ बैठकें हुईं। इन गोपनीय मुलाकातों के बाद से ही कयासों का बाजार बेहद गर्म है और विपक्षी खेमे में भारी बेचैनी देखी जा रही है। सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी गठबंधन को बड़ा झटका देकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के पाले में जाने की तैयारी कर रही है।

    प्राप्त विवरण के अनुसार, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पहले दक्षिण मुंबई स्थित शरद पवार के आवास ‘सिल्वर ओक’ पर जाकर उनसे बेहद लंबी मंत्रणा की। इसके तुरंत बाद वे देर शाम सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करने पहुंचे। इस दौरान राजनीतिक तापमान तब और बढ़ गया जब सत्ताधारी एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल भी अलग से मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। हालांकि बैठक में शामिल किसी भी नेता या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस चर्चा के मुख्य एजेंडे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन दोनों ही गुटों के सूत्रों ने इस बात को स्वीकार किया है कि पर्दे के पीछे किसी बड़े राजनीतिक समझौते की पटकथा लिखी जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जुलाई 2023 में पार्टी के विभाजन के बाद यह पहली बार है जब शरद पवार की पार्टी सबसे बड़े रणनीतिक संकट का सामना कर रही है। अंदरूनी सूत्रों की मानें तो शरद पवार गुट के कुल 10 विधायकों में से कम से कम आधे से अधिक विधायक भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में शामिल होने के प्रबल पक्ष में हैं। लंबे समय तक विपक्षी खेमे में रहने के कारण इन विधायकों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए आवश्यक विकास निधि जुटाने और प्रशासनिक मंजूरियां हासिल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, जिससे उनके जमीनी राजनीतिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे थे।

    पार्टी के प्रांतीय नेतृत्व ने हाल ही में अपने विधायकों की इस गंभीर भावना और चिंताओं से शीर्ष आलाकमान को विस्तार से अवगत कराया था। यद्यपि शरद पवार ने इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक अपनी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही पार्टी के अगले कदम को लेकर कोई सार्वजनिक घोषणा की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि वे अपने विधायकों के भारी दबाव के कारण इस नए विकल्प पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इस साल की शुरुआत में मुंबई महानगरपालिका चुनावों के बाद से ही दोनों धड़ों के एक होने या शरद गुट के कांग्रेस में विलय की खबरें आती रही हैं, लेकिन कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के कड़े विरोध के कारण अब बाजी पूरी तरह एनडीए की ओर मुड़ती हुई दिखाई दे रही है।

    संख्या बल के रणनीतिक गणित को देखें तो विधानसभा में शरद पवार गुट के पास वर्तमान में 10 विधायक और लोकसभा में 8 सांसद मौजूद हैं। हालांकि यह महाराष्ट्र के प्रमुख राजनीतिक दलों में संख्या के हिसाब से छोटा समूह प्रतीत हो सकता है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा नीत एनडीए के लिए इसकी उपयोगिता बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। केंद्र सरकार आगामी संसद सत्रों में सीमांकन विधेयक जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कानूनों को पारित कराने की योजना बना रही है, जिसके लिए उसे उच्च सदन और निम्न सदन दोनों में अतिरिक्त मतों की आवश्यकता है। ऐसे समय में एनडीए के शीर्ष रणनीतिकार शरद पवार गुट से मिलने वाले किसी भी संभावित वैधानिक समर्थन का खुले दिल से स्वागत करने के लिए तैयार दिख रहे हैं।

    यह राजनीतिक उथल-पुथल सिर्फ शरद पवार खेमे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अजित पवार गुट के भीतर भी भारी अंतर्विरोध और मंथन का दौर जारी है। इस साल जनवरी के अंत में एक दुखद विमान हादसे में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद से राज्य की राजनीति का पूरा परिदृश्य बदल चुका है। उनके निधन के बाद से दोनों गुटों के दोबारा एक होने की सुगबुगाहट तो तेज हुई थी, लेकिन नेतृत्व को लेकर बात नहीं बन सकी। अब सुनेत्रा पवार के नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर ही कानूनी आपत्तियां उठाई जा रही हैं, जिसने संगठन के आंतरिक असंतोष को उजागर कर दिया है। इन सभी बदलते हालातों के बीच दिल्ली से लेकर मुंबई तक की राजनीतिक नजरें अब शरद पवार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।

  • वैश्विक अस्थिरता और सप्लाई चेन संकट का असर, भारत में प्रीमियम हाउसिंग की कीमतों में 28% तक उछाल; महानगरों में मजबूत बनी मांग

    वैश्विक अस्थिरता और सप्लाई चेन संकट का असर, भारत में प्रीमियम हाउसिंग की कीमतों में 28% तक उछाल; महानगरों में मजबूत बनी मांग


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावट और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत का प्रीमियम आवास बाजार मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2026 की पहली छमाही में देश के प्रमुख शहरों में प्रीमियम आवासों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। ताजा बाजार विश्लेषण के अनुसार कई प्रमुख शहरों में प्रीमियम संपत्तियों के मूल्य में सालाना आधार पर 28 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च आय वर्ग के खरीदार अब बेहतर गुणवत्ता, विश्वसनीय डेवलपर और रणनीतिक लोकेशन वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार मुंबई, नोएडा, गुरुग्राम, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे प्रमुख रियल एस्टेट बाजारों में प्रीमियम आवासों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। निर्माणाधीन प्रीमियम परियोजनाओं की कीमतों में मुंबई में लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि नोएडा में यह बढ़ोतरी 4 से 28 प्रतिशत के बीच रही। गुरुग्राम में करीब 2 प्रतिशत और बेंगलुरु में 3 से 11 प्रतिशत तक की वार्षिक वृद्धि देखी गई। यह संकेत देता है कि विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों और बेहतर कनेक्टिविटी वाले कॉरिडोर में निवेशकों तथा खरीदारों का भरोसा कायम है।

    तैयार प्रीमियम आवासों के बाजार में भी तेजी बनी हुई है। दिल्ली में लग्जरी फ्लोर और तैयार प्रीमियम घरों की औसत कीमतों में 10 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। बेंगलुरु में यह वृद्धि 8 से 10 प्रतिशत और मुंबई में 2 से 7 प्रतिशत के बीच रही। विशेषज्ञों का मानना है कि तैयार संपत्तियों की बढ़ती मांग उन खरीदारों से आ रही है जो तुरंत रहने योग्य, आधुनिक सुविधाओं से युक्त और उच्च गुणवत्ता वाले घरों की तलाश में हैं।

    रियल एस्टेट क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बाजार अब केवल तेज कीमत वृद्धि पर आधारित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक मूल्य सृजन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रीमियम परियोजनाओं में बेहतर निर्माण गुणवत्ता, आधुनिक डिजाइन, ऊर्जा दक्षता, हरित सुविधाएं और वेलनेस आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे पहलुओं को अधिक महत्व दिया जा रहा है। यही कारण है कि उच्च आय वर्ग के खरीदार अब केवल संपत्ति खरीदने के बजाय दीर्घकालिक निवेश और बेहतर जीवनशैली को ध्यान में रखकर निर्णय ले रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान का असर निर्माण सामग्री की लागत पर भी पड़ा है। कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और लॉजिस्टिक लागत बढ़ने से परियोजनाओं की कुल लागत प्रभावित हुई है, जिसका असर प्रीमियम आवासों की कीमतों में भी दिखाई दिया। इसके बावजूद मांग में कमी नहीं आई है, क्योंकि बेहतर आय, मजबूत निवेश क्षमता और गुणवत्तापूर्ण आवासों की बढ़ती आवश्यकता इस वर्ग के बाजार को समर्थन दे रही है।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि खरीदार अब पहले की तुलना में अधिक जागरूक हो चुके हैं। वे परियोजना की लोकेशन, डेवलपर की विश्वसनीयता, निर्माण गुणवत्ता, भविष्य की संभावनाओं और उपलब्ध सुविधाओं का गहन मूल्यांकन करने के बाद ही निवेश का निर्णय ले रहे हैं। इस बदलते रुझान ने डेवलपर्स को भी गुणवत्ता और पारदर्शिता पर अधिक ध्यान देने के लिए प्रेरित किया है।

    रियल एस्टेट बाजार के मौजूदा संकेत बताते हैं कि भारत के प्रीमियम आवास क्षेत्र में आने वाले समय में भी स्थिर मांग बनी रह सकती है। बेहतर शहरी बुनियादी ढांचे, नई कनेक्टिविटी परियोजनाओं, बढ़ती आय और गुणवत्तापूर्ण आवासों की प्राथमिकता के कारण यह वर्ग निवेशकों और खरीदारों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो प्रीमियम हाउसिंग बाजार आने वाले वर्षों में भी संतुलित और मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकता है।